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परवरिश: मोबाइल की लत बच्चों के भविष्य पर भारी, जानें इससे छुटकारा पाने के उपाय

Parenting: Mobile addiction is harmful for children’s future, know the ways to get rid of it सूर्य प्रताप सिंह सिसोदिया (हेल्थ डेस्क) क्या आपका बच्चा मोबाइल के बिना रह सकता है?आज यह सवाल हर माता-पिता के मन में गूंज रहा है। तकनीक के इस दौर में मोबाइल बच्चों की जिंदगी का ऐसा हिस्सा बन चुका है, मानो उनका एक नया अंग हो। चाहे भोजन हो, पढ़ाई या आराम का समय हर क्षण मोबाइल उनके साथ है। यह डिजिटल डिवाइस केवल उनके शरीर को ही नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक विकास को भी गहराई से प्रभावित कर रहा है। बच्चों पर मोबाइल का असर: सिर्फ आंखें नहीं, पूरी सोच पर असर धैर्य में गिरावट:स्क्रीन पर मिलने वाला त्वरित मनोरंजन बच्चों को अधीर बना रहा है। किसी भी असफलता या देरी पर वे गुस्से में आ जाते हैं। माता-पिता या शिक्षकों की मामूली बात भी उन्हें आहत कर देती है। एकाग्रता में कमी:लगातार आने वाले नोटिफिकेशन्स और ऑनलाइन एक्टिविटी बच्चों की एकाग्रता को कमजोर कर रही है। वे लंबे समय तक किसी एक काम पर ध्यान नहीं दे पाते। संवादहीनता और सामाजिक दूरी:मोबाइल की लत बच्चों को परिवार और दोस्तों से दूर कर रही है। अब वे भावनाओं को शब्दों में नहीं, इमोजी में बयां करते हैं। इसका असर उनके आत्मविश्वास, भाषा कौशल और सामाजिकता पर पड़ रहा है। ऑनलाइन गेमिंग और मानसिक स्वास्थ्य:गेमिंग ऐप्स बच्चों के लिए एक नशे की तरह बन चुके हैं। लेवल पार करने का जुनून, पैसे हारने का डर और त्वरित सफलता की उम्मीद उन्हें तनाव, एंग्ज़ायटी और यहां तक कि आत्महत्या जैसे खतरनाक कदम तक ले जा रही है। नींद और शारीरिक समस्याएं:देर रात तक स्क्रीन देखने से मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर बिगड़ता है, जिससे नींद की गुणवत्ता घटती है। इससे चिड़चिड़ापन, मोटापा और आंखों की समस्याएं जैसे डिजिटल आई स्ट्रेन और दृष्टि दोष उत्पन्न होते हैं। अभिभावकों की भूमिका: शुरुआत घर से ही होती हैआमतौर पर मोबाइल की लत के बीज माता-पिता ही बोते हैं—कभी बच्चे को चुप कराने के लिए, तो कभी उसे व्यस्त रखने के लिए। एक साल के बच्चे को मोबाइल पर राइम्स दिखाना आज सामान्य बात हो गई है। फिर जब वही बच्चा 12-13 साल में मोबाइल मांगता है, तो माता-पिता उसे रोक नहीं पाते। समाधान: स्क्रीन से दूरी, जीवन से जुड़ाव स्क्रीन टाइम तय करें:परिवार में मोबाइल उपयोग का एक साझा नियम बनाएं। बच्चे को 15 साल की उम्र तक अपना व्यक्तिगत मोबाइल न दें। मैदानी खेल और आउटडोर एक्टिविटी:हर दिन कम से कम दो घंटे बच्चों को फिजिकल एक्टिविटी में व्यस्त रखें। फैमिली आउटिंग में मोबाइल ले जाना प्रतिबंधित करें। बातचीत और समय:बच्चों से बात करें, उनकी समस्याएं समझें। जब वो आपकी बात सुनते हैं, तो आप भी उनकी दुनिया से जुड़ पाते हैं। तकनीक से नहीं, रिश्तों से जुड़ाव बढ़ाएं:उन्हें यादें लिखने के लिए प्रेरित करें, न कि इंस्टाग्राम पर पोस्ट करने के लिए। मोबाइल कोई बुरा उपकरण नहीं है, लेकिन उसके गलत इस्तेमाल ने बच्चों को मानसिक, शारीरिक और सामाजिक रूप से नुकसान पहुंचाया है। माता-पिता यदि आज सतर्क नहीं हुए, तो कल बहुत देर हो जाएगी। सही परवरिश तकनीक से नहीं, समय और समझ से होती है। Tag: Parenting, Screen Addiction, Children Mental Health, Digital Detox

हेल्थ टिप्स – क्या ज्यादा फायदेमंद? आलू या शकरकंद, एक्सपर्ट से जानें बेनिफिट्स, ज्यादा खाने के नुकसान, किसे नहीं खाना चाहिए

Which is more beneficial? Potato or sweet potato

Which is more beneficial? Potato or sweet potato हर भारतीय रसोई में आलू और शकरकंद की खास जगह है। ये दोनों ही फूड हमारी थाली में अहम स्थान रखते हैं। इन दोनों में कई सारी समानताएं हैं, जो उन्हें एक जैसा बनाती हैं। अंग्रेजी भाषा में दोनों के नाम भी मिलते-जुलते हैं। आलू को ‘पोटैटो’ और शकरकंद को ‘स्वीट पोटैटो’ के नाम से जाना जाता है।आलू को सब्जियों का राजा कहा जाता है और हर भारतीय रसोई में हमेशा इसकी मौजूदगी होती है। वहीं शकरकंद अपने मीठे स्वाद और न्यूट्रिएंट्स की वजह से अलग पहचान रखता है।शकरकंद को कई डिश में मिठास के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सर्दी के मौसम में शकरकंद खूब खाया जाता है। हालांकि, जब बात सेहत की आती है, तो यह सवाल उठता है कि इन दोनों में से क्या अधिक फायदेमंद है? ऐसे में आज हम सेहतनामा में जानेंगे कि- आलू और शकरकंद में क्या ज्यादा सेहतमंद है?इन दोनों के क्या फायदे और नुकसान हैं? आलू के फायदे आलू के कई सारे चाहने वाले हैं। लोग इसे अलग-अलग रूपों में पसंद करते हैं। हालांकि इसके स्वाद के साथ हेल्थ बेनिफिट्स की वजह से भी इसे पसंद किया जाता है। विटामिन C: एक मध्यम आकार का यानी तकरीबन 115 ग्राम का एक आलू खाने से विटामिन C की दैनिक जरूरत की 11% पूरा हो जाता है।विटामिन C कोलेजन बनाने में मदद करता है। यह आयरन के अवशोषण में सहायक होता है। इसके अलावा आलू में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट भी होता है।विटामिन B6: आलू में विटामिन B6 भी होता है, जो हमारी दैनिक आवश्यकता का 25% पूरा करता है। विटामिन B6 रेड ब्लड सेल्स के उत्पादन में मददगार है।यह ऊर्जा के रूपांतरण और ब्रेन के न्यूरोट्रांसमीटर के निर्माण में मदद करता है, जो मूड और नींद को नियंत्रित करते हैं। फाइबर: आलू में फाइबर भी पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है।पोटेशियम: इसमें पोटेशियम होता है, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है। यह नर्वस सिस्टम और मांसपेशियों के कार्य में मदद करता है। स्टार्च: आलू में एक प्रकार का कार्बोहाइड्रेट होता है, जिसे स्टार्च कहा जाता है। यह छोटी आंत में नहीं टूटता, बल्कि सीधे बड़ी आंत में जाता है। यह आंतों के स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। हालांकि, पेट की समस्या हो तो आलू खाने से बचना चाहिए। शकरकंद के फायदे शकरकंद अपने लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स और फाइबर के कारण डायबिटीज कंट्रोल करने और वजन घटाने में मददगार है। शकरकंद फाइबर, विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होता है। इसके छिलके में पाया जाने वाला फाइबर प्रीबायोटिक गुणों से भरपूर होता है, जो गुड बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देता है और आंतों की हेल्थ को बेहतर बनाता है। विटामिन A: नारंगी शकरकंद में बीटा-कैरोटीन और प्रोविटामिन A की भरपूर मात्रा होती है, जो आंतों में जाकर विटामिन A में बदल जाता है। एक मध्यम आकार का शकरकंद (114 ग्राम) खाने से रोज की विटामिन A की जरूरत का 122% मिल जाता है। यह सेल्स के विकास, इम्यून सिस्टम, प्रजनन और आंखों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी होता है। पॉलीफेनोल्स: शकरकंद में पॉलीफेनोल्स एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं, जो सूजन को कम करने, कोलेस्ट्रॉल के स्तर को सुधारने और ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। बैंगनी शकरकंद में पाया जाने वाला एंथोसाइनिन सूजन को कम करने और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में सहायक होता है। विटामिन C और विटामिन B6: शकरकंद विटामिन C और विटामिन B6 का भी अच्छा स्रोत है। इसमें भी आलू की तरह प्रतिरोधी स्टार्च पाया जाता है, जो आंतों के स्वास्थ्य को सुधारने, ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद करता है। साथ ही इससे पेट भरे होने का एहसास होता है, जो वजन घटाने में मददगार हो सकता है।तो, क्या आपने यह सोच लिया है कि आपकी हेल्थ के लिए क्या बेहतर है– आलू या शकरकंद? आइए ग्राफिक के जरिए दोनों में पाए जाने वाले न्यूट्रिएंट्स और डेली वैल्यू के बीच के अंतर को समझते हैं। क्या आलू और शकरकंद का कुछ नुकसान भी है? आलू और शकरकंद दोनों ही हेल्थ के लिए फायदेमंद हैं, लेकिन अधिक मात्रा में खाने से कई नुकसान हो सकते हैं। साथ ही एलर्जी की समस्याओं से जूझ रहे व्यक्तियों को शकरकंद खाने से बचना चाहिए।शकरकंद में विटामिन A की अधिकता होती है। इससे शरीर में पॉइजनिंग हो सकती है। वहीं अधिक मात्रा में आलू खाने से कई सारी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। आइए इसे ग्राफिक के जरिए जानते हैं। आपके लिए कौन सा बेहतर? आलू और शकरकंद दोनों ही हेल्थ के लिए फायदेमंद होते हैं। इनमें कार्बोहाइड्रेट्स, फाइबर, विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सिडेंट्स की भरपूर मात्रा पाई जाती है। शकरकंद में विटामिन A की मात्रा ज्यादा होती है, जो आंखों की सेहत और इम्यून फंक्शन के लिए बेहद जरूरी है।अपनी हेल्थ को ध्यान में रखते हुए जरूरत के अनुसार, आलू और शकरकंद दोनों को हम अपनी डाइट में संतुलित मात्रा में शामिल कर सकते हैं। अगर इनके साथ प्रोटीन रिच फूड, कई सारी हरी सब्जियां और हेल्दी फैट्स हो, तो ये हमारी सेहत के लिए अधिक फायदेमंद साबित होते हैं। किसे आलू या शकरकंद नहीं खाना चाहिए क्रॉनिक डायबिटीज के मरीजों को आलू खाने से बचना चाहिए। इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है।आलू में स्टार्च की अधिक मात्रा होती है। ऐसे में गैस्ट्रिक या एसिडिटी की समस्या से जूझ रहे लोगों को आलू से परहेज करना चाहिए।आलू में एक ऐसा केमिकल होता है, जो एनेस्थीसिया के असर को कम कर सकता है। साथ ही सर्जरी से रिकवरी में देरी का कारण बन सकता है। इसलिए किसी सर्जरी के बाद इसे खाने से बचना चाहिए।आलू में ऑक्सलिक एसिड पाया जाता है, जो ब्लैडर सर्जरी के बाद दर्द पैदा कर सकता है। इसलिए ब्लैडर सर्जरी से पहले आलू नहीं खाना चाहिए।क्रॉनिक डायबिटीज हो तो शकरकंद नहीं खाना चाहिए। इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है।लिवर की बीमारी से जूझ लोगों को भी शकरकंद नहीं खाना चाहिए। शकरकंद में पोटैशियम बहुत ज्यादा होता है, जो लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है।

ये 5 संकेत हो सकते हैं गंभीर बीमारी का कारण, जानें इसका इलाज

These 5 signs can be the cause of serious illness, know its treatment Skin Disease: सोरायसिस इम्यून सिस्टम खराब होने की वजह से होती है, जो स्किन सेल्स को प्रभावित करता है। इसके कारण त्वचा लाल हो जाती है और अक्सर खुजली, दर्द और सूजन रहती है। सोरायसिस के कई कारण हो सकते हैं। दुनिया भर में लगभग 105 मिलियन लोग सोरायसिस से पीड़ित हैं, जो एक पुरानी ऑटोइम्यून त्वचा की समस्या है। एक्सपर्ट कहते हैं कि सोरायसिस के पीछे का सटीक कारण स्पष्ट नहीं है, लेकिन नेटिक फैक्टर्स, एनवायर्नमेंटल ट्रिगर्स और इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी इसका मुख्य कारण हो सकते हैं। इसके इलाज के लिए सिस्टमिक ट्रीटमेंट , फोटोथेरपी, टोपिकल ट्रीटमेंट और कॉर्टिकोस्टेरॉइड उपलब्ध हैं। आइए जानते हैं कि इसके और क्या-क्या इलाज हो सकते हैं? सोरायसिस के लक्षण सोरायसिस का इलाजरेगेन रेटिवे मेडिसिन- रेगेन रेटिवे मेडिसिन सोरायसिस मरीजों के लिए काफी फायदेमंद होता है। इसमें स्टेम सेल उपचार, प्लेटलेट-रिच प्लाज्मा (पीआरपी) थेरेपी और ऊतक इंजीनियरिंग जैसे इलाज शामिल हैं, जिनका उद्देश्य शरीर को नेचुरली हेल्दी रखना होता है। रेगेन रेटिवे मेडिसिन सोरायसिस के मूल कारण को संबोधित करने की संभावना प्रदान करती है। स्टेम सेल्स- स्टेम सेल सोरायसिस के इलाज में सबसे अच्छा इलाज माना जाता है। वे दागदार या डैमेज स्किन को हेल्दी बनाता हैं। साथ ही सोरायसिस से प्रभावित वाली त्वचा कोशिकाओं के तेजी से होने वाले बदलाव को धीमा करने के लिए इम्युन को बढ़ावा देता है। पीआरपी थेरेपी- पीआरपी थेरेपी भी सोरायसिस के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। ये स्किन से निकालना औक प्लेटलेट्स को कम करने में मदद करता है। ये थेरेपी घाव भरने में तेजी लाती है और सोरायसिस प्रभावित हिस्सों को अधिक प्रभावी ढंग से ठीक करके इसकी की गंभीरता को कम करती है।

मार्केट वाली आइसक्रीम न कर दे बीमार, घर पर इसे बनाना है बेहद आसान

Market ice cream won’t make you sick, it’s very easy to make at home मार्केट में मिलने वाली आइसक्रीम में कई तरह के केमिकल मौजूद होते हैं. ऐसे में आप घर पर आसान तरीके से मैंगो, चॉकलेट और कॉफी आइसक्रीम बना सकते हैं. चलिए जानते हैं इन स्वादिष्ट आइसक्रीम को बनाने की विधि. गर्मियों के मौसम में आइसक्रीम खाना कई लोगों को पसंद होता है. खासकर के बच्चों को, वो रोजाना आइसक्रीम खाने की जिद करते हैं. ऐसे में बाजार में कई तरह के आइसक्रीम उपलब्ध है. लेकिन इसे बनाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में रोजाना इसके सेवन से सेहत को नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए आप बच्चों को बाजार वाली की जगह घर पर आइसक्रीम बनाकर खिला सकते हैं. इसे बनाने के लिए नेचुरल चीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है और इसे घर पर बनाना भी काफी आसान है. कॉफी आइसक्रीमइस स्वादिष्ट आइसक्रीम को बनाने के लिए एक पैन में दूध और चीनी डालकर उसे धीमी आंच पर 10 मिनट तक पकने दें, बीच-बीच में इसमें करछी चलाते हैं. फिर इसे बंद कर ठंडा होने के लिए रख दें. अब दूध और चीनी के इस मिश्रण में कॉफी, व्हीप्ड क्रीम डालें और इसे अच्छे से मिक्स करें. इस मिश्रण को एयरटाइट कंटेनर में डालें और फ्रीजन में कम से कम 4 घंटे के लिए या फिर रात भर के लिए जमने दें फिर चॉकलेट सिरप और ड्राई फ्रूट्स से सजाकर इसे सर्व करें. मैंगो आइसक्रीममैंगो आइसक्रीम बनाने के लिए एक पैन में दूध, कॉन फ्लोर और 1/4 कर शक्कर डालकर इसे मिक्स करें और धीमी आंच पर पकने दें. 10 से 12 मिनट में इस मिश्रण को थोड़ा थिक होने के बाद ठंडा होने के लिए रख दें. अब दूसरे बाउल में 1 कप व्हिपिंग क्रीम को लें और दूध के इस मिश्रण को इसमें मिलाएं और अच्छे से मिक्स करें. अब आधा कम आम की प्यूरी को मिक्चर में मिक्स करने के बाद इसे इस मिश्रण में डाल दें. आप अपने मुताबिक इसमें ऊपर से मैंगो क्यूब भी मिल सकते हैं. अब इस मिश्रण को फ्रीजर में जमने के लिए रख दें. चॉकलेट आइसक्रीमइसे बनाने के लिए एक पैन में दूध, फ्रेश क्रीम और मिल्क पाउडर डालें और इसमें उबाल आने के लिए धीमी आंच पर 10 मिनट तक पकने दें. इसी बीच इसमें चीनी डालकर अच्छे से मिक्स करें. 10 मिनट बाद गैस बंद कर दें और इस मिश्रण को ठंडा होने के लिए रख दें. जब दूध का टेक्सचर क्रीमी हो जाए तब इसमें चोको चिप्स और कोको पाउडर डालकर अच्छे से मिक्स करें. अब इस मिश्रण को ठंडा होने दें. इसे किसी एयरटाइट कंटेनर या कुल्फी के मोल्ड में डालकर फ्रीजर में रखें.

सेहत को दुरुस्त बनाते हैं ये फूड आइटम्स, उम्र बढ़ाने के लिए आज ही करें इन्हें डाइट में शामिल

These food items improve your health, include them in your diet today to increase your lifespan. सेहतमंद रहने के लिए लोग कई उपाय अपनाते हैं। अपने खानपान से लेकर रहन-सहन तक सभी का हमारी सेहत पर गहरा असर पड़ता है। इन दिनों लोगों की लाइफस्टाइल में काफी बदलाव होने लगा है जिससे कई समस्याएं आसानी से हमें अपना शिकार बनाने लगी हैं। ऐसे में कुछ फूड्स को डाइट (Healthy Foods) में शामिल कर आप हेल्दी रहने के साथ ही अपनी उम्र भी बढ़ा सकते हैं। हम क्या खाते हैं इसका सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ता है। यही वजह है कि सेहतमंद रहने के लिए सही खानपान बेहद जरूरी होता है। हेल्दी खाना जहां हमें हेल्दी बनाते हैं, तो वहीं जंक और प्रोसेस्ड फूड्स हमारे शरीर को बीमारियों का घर बना देते हैं। इन दिनों लोगों के बीच अनहेल्दी फूड्स का चलन काफी बढ़ गया है, जिसकी वजह से लोग आजकल कई समस्याओं का शिकार होते जा रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि हेल्दी रहने के लिए उन फूड्स को डाइट में शामिल करें, जो आपको हेल्दी बनाकर आपकी उम्र लंबी बना सके। आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कुछ ऐसे फूड्स, जो आपको स्वस्थ रखने के साथ ही आपकी उम्र भी बढ़ाएंगे। अनारइसमें मौजूद फाइटोकेमिकल इसे एक अच्छा एंटी-कैंसर एजेंट बनाते हैं। साथ ही ये दिल की सेहत के लिए भी बहुत जरूरी है और ब्रेन को हेल्दी रखने में भी मदद करता है। सीड्सकैल्शियम, विटामिन ई, जिंक, ट्रेस मिनरल से भरपूर सीड्स सेहत के लिए हर मायने में लाभकारी होता है। फ्लैक्स सीड्स, चिया सीड्स, सफेद तिल आदि में मौजूद फाइटोएस्ट्रोजन ब्रेस्ट कैंसर से बचाव करते हैं। बीन्सयह ब्लड शुगर कंट्रोल करने के साथ भूख कम करते हैं और कोलोन कैंसर से बचाव करते हैं। बेरीजये ब्रेन के लिए बहुत ही बेहतरीन फूड ऑप्शन है। इसमें एंटी कैंसर गुण भी होते हैं। यह एजिंग के साथ होने वाली बीमरियों से बचा कर लंबी आयु जीने में मदद करता है। लहसुन-प्याजइनमें मौजूद ऑर्गेनोसल्फर कंपाउंड कार्सिनोजेन को डिटॉक्सिफाई करते हैं और इस तरह ये एक बहुत अच्छे एंटी कैंसर एजेंट साबित होते हैं। ये कार्डियोवैस्कुलर और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने का काम करते हैं और साथ ही ये एंटी-डायबिटीक भी होते हैं। इस तरह स्वस्थ लंबी आयु के लिए लहसुन और प्याज बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं। नट्सनट्स कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फूड हैं, जो पूरे खाने की प्लेट का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम करने में मदद करते हैं क्योंकि इसे खाने से देर तक पेट भरा रहता है, जिससे वजन कम होने में मदद मिलती है और यह दिल की बीमारियों से भी बचाता है। ओटमीलसंतुलित मात्रा में फैट्स, कार्बोहाइड्रेट, प्लांट प्रोटीन, आयरन और विटामिन बी से भरपूर ओटमील हर तरीके से एक पौष्टिक आहार है, जिसे हर उम्र के लोग बेहिचक खा सकते हैं। 6 महीने के बच्चे से लेकर 60 साल के लोगों तक के लिए ये एक सुपाच्य और पौष्टिक आहार है। एवोकाडोपोटैशियम से भरपूर और नमक में कम एवोकाडो ब्लड प्रेशर कम करने के साथ स्ट्रोक के खतरे से भी बचाता है। इसमें केले से भी अधिक पोटैशियम पाया जाता है। नींबूइसे किसी भी रूप में लेने से इसकी हाई एसिडिटी ब्लड ग्लूकोज संतुलित रखने में मदद करती है, जिससे डायबिटीज से बचा जा सकता है।

चिलचिलाती गर्मी में शरीर को फायदा पहुंचाएगा लौकी का रायता, जानें इसे बनाने का तरीका

Bottle gourd raita will benefit the body in the scorching heat, know how to make it अप्रैल का महीना चल रहा है और भीषण गर्मी से अभी से लोगों की हालत खराब होने लगी है। कई शहरों में तो तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से पार चला गया है, जिस वजह से लोगों ने बाहर निकलना तक बंद कर दिया है। इस मौसम में लोगों को अपने खाने का खासा ध्यान रखना पड़ता है। अगर आप भी ऐसी डिश की तलाश कर रहे हैं, जो स्वाद और सेहत दोनों के लिए फायदेमंद हो तो लौकी का रायता एक बेहतर विकल्प है। लौकी गर्मी के मौसम में शरीर को काफी लाभ पहुंचाती है। इसमें कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को हाइड्रेट रखते हैं। इसके साथ ही लौकी मे पाए जाने वाले विटामिन-सी, फाइबर, पोटेशियम और अन्य तत्व शरीर के लिए लाभदायक हैं। वहीं दही शरीर को ठंडक प्रदान करता है। ऐसे में अगर आप लौकी का रायता बनाकर खाएंगे, तो आपको इसका लाभ देखने को जरूर मिलेगा। लौकी का रायता बनाने का सामान विधि लौकी का रायता बनाना काफी आसान है। इसके लिए सबसे पहले लौकी का छिलका उतारकर उसे चार टुकड़ों में काटकर कद्दूकस कर लें। कद्दूकस करने के बाद लौकी को एक पैन में पानी डालकर उबाल लें। इसे आपको 5-8 मिनट तक उबालना है। जब लौकी गल जाए तो इसे छलनी से छानकर एक थाली में फैला दें।जब तक ये ठंडी हो रही है, तब तक एक भगोने में दही लेकर उसे सही से फेंट लें। अब आपको रायते के तड़के की तैयारी करनी है। तड़का लगाने के लिए सबसे पहले एक पैन में तेल डालकर इसे गर्म करें। तेल गर्म हो जाने के बाद इसमें हींग-जीरे का तड़का लगाएं। तड़का बन जाने के बाद इसे फेंटी हुई दही में डालें। तड़का लगाने के बाद दही को सही से मिक्स करें। आखिर में इसमें उबली हुई लौकी, बारीक कटी धनिया पत्ती, हरी मिर्च स्वादानुसार नमक और थोड़ा सा काला नमक डालें। रायता तैयार होने के बाद इसे फ्रिज में रख दें। अब ठंडे रायते को खाने के साथ परोसें।

तुलसी, सेहत के लिए बेहद फायदेमंद, कई बीमारियों के लिए औषधि

Tulsi, very beneficial for health, medicine for many diseases भोपाल ! क्या आप जानते हैं कि तुलसी आपके स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक है. चलिए आज हम आपको बताते हैं कि तुलसी की पत्तियां आपके स्वास्थ्य के लिए कितनी लाभदायक हैं. सर्दी के मौसम में ज्यादातर घरों में तुलसी का उपयोग कभी चाय में तो कभी-कभी काढ़े के रूप में किया जाता है. सर्दी में तुलसी का सही विधि से उपयोग किया जाए, तो आप कई बीमारियों से बच सकते हैं !तुलसी के अंदर एंटी-ऑक्सीडेंट, आयरन, कैल्शियम, जिंक प्रॉपर्टी होती है, जो आपको अलग-अलग स्वास्थ्य लाभ पहुंचाती है. एंटी-ऑक्सीडेंट होने की वजह से यह शरीर की इम्युनिटी को बूस्ट करने में मददगार है. सर्दी-जुकाम, सूखी खांसी, बलगम खांसी में भी तुलसी के पत्तों का रस लाभदायक होता है. साइनस की समस्या में लाभदायक तुलसी तुलसी के पत्ते साइनस की समस्या में भी लाभकारी हैं. यदि किसी मरीज को साइनस की दिक्कत है, नाक बंद रहती है या बार-बार छींक आती है, तो तुलसी के पत्तों का रस निकालकर उसकी कुछ बूंदें डायरेक्ट नाक में डालने से नाक का सारा बलगम निकल जाता है और आपको साइनस की समस्या में राहत मिलती है. नाक में डायरेक्ट तुलसी की बूंदें अप्लाई करने से यदि तेज जलन होती है, तो इसे थोड़ा पानी के साथ डाइल्यूट करके भी इस्तेमाल किया जा सकता है. छोटे बच्चों को शहद में मिलाकर दें तुलसी का रस सर्दियों के मौसम में सर्दी-जुकाम, नाक बंद जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं और इन मौसमी बीमारियों का असर सबसे पहले छोटे बच्चों पर दिखाई देता है. यदि आपके भी 5 से 15 साल के बच्चे को सर्दी-जुकाम हो रहा है, तो आप तुलसी के पत्तों का रस निकालकर उसमें थोड़ा शहद मिलाकर थोड़ा-थोड़ा बच्चों को पिलाने से सर्दी-जुकाम की समस्या खत्म हो जाती है.

खीरे के पानी में छुपे हैं अद्भुत गुण, इन 6 बीमारियों में होता है फायदेमंद

Amazing properties are hidden in cucumber water it is beneficial in these 6 diseases रोज सुबह खीरे का पानी पीने से स्किन का ग्लो बना रहता है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है। आजकल अनियमित जीवनशैली और खानपान में लापरवाही के कारण लोग कम उम्र में ही कई बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। ऐसे में यदि आप दिन की शुरुआत ही व्यवस्थित तरीके से कर दें तो आप कई समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। सुबह उठते ही शरीर को डिटॉक्स करने से लिए पानी पीने की सलाह दी जाती है, लेकिन इसके स्थान पर यदि आप खीरे का पानी का सेवन करेंगे तो सेहत को कई बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है। यहां डायटिशियन मीना कोरी खीरे के पानी के फायदों के बारे में विस्तार से जानकारी दे रही है। शरीर में पानी की कमी नहींसुबह यदि आप खीरे का पानी का सेवन करते हैं तो शरीर में पानी की कमी नहीं होती है। सामान्य जल की तुलना में खीरे का पानी सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है। यह पानी सुगंधित होने के साथ-साथ स्वास्थ्यवर्धक भी होता है। यह पानी शरीर की आंतरिक सफाई में अहम भूमिका निभाता है। वजन घटाने में मददगारखीरा एक ऐसी सब्जी है, जिसमें कैलोरी काफी कम होती है। यदि सुबह सुबह खीरे का पानी पीते हैं तो इससे पेट काफी देर तक भरा हुआ रहता है। यह वजन कम करने में मदद करता है। खीरे का पानी एक डिटॉक्स ड्रिंक के रूप में काम करता है, जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। खीरे के पानी में घुलनशील फाइबर भी होता है, जो शरीर का वजन नहीं बढ़ने देता है। कंट्रोल में रहता है ब्लड प्रेशरखीरे के पानी में पोटेशियम भरपूर मात्रा में होता है, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है। खीरे का पानी किडनी में जमा सोडियम की मात्रा को नियंत्रित करता है। खीरे का पानी पीने से हार्ट अटैक का खतरा भी कम होता है।स्किन में बढ़ता है ग्लोरोज सुबह खीरे का पानी पीने से स्किन का ग्लो बना रहता है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है। खीरे के पानी में विटामिन, खनिज और फाइबर जैसे आवश्यक पोषक तत्व भी होते हैं, जो स्किन को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

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