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अंतरधार्मिक विवाह मामले में सुरक्षा कड़ी, पुलिस ने सभा पर लगाई पाबंदी

मेरठ  मेरठ में बकायदा कार्ड छपवाकर मुस्लिम युवक से शादी का ऐलान करने वाली हिंदू लड़की का मामला बहुत ज्यादा गरमा गया है। हिंदूवादी नेताओं ने शादी नहीं होने देने का ऐलान किया तो पुलिस एक्टिव हुई। रार बढ़ने पर फिलहाल आज यानी 13 फरवरी को होनी वाली शादी टल गई है। रिसोर्ट मालिक ने बुकिंग भी कैंसिल कर दी है। युवती के चाचा ने मुस्लिम युवक के खिलाफ धर्मांतरण और लव जेहाद का आरोप लगा मुकदमा गंगानगर थाने में दर्ज कराया है, जिसकी जांच शुरू कर दी गई है। वहीं, हिंदू संगठनों ने शादी वाले रिसोर्ट के बाहर हिंदू महापंचायत का ऐलान किया है। पुलिस इसे भी रोकने में जुट गई है। हिंदूवादी नेताओं को हाउस अरेस्ट किया गया है। क्या है पूरा मामला गंगानगर निवासी युवती की 13 फरवरी को पैराडाइज व्यू रिसोर्ट में शादी होनी थी। शादी के जो कार्ड युवती पक्ष ने छपवाए, उन पर दूल्हे का नाम साहिल था, जबकि युवक का असली नाम शाहवेज बताया गया। हिंदू संगठनों और अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही ने इसे लेकर हंगामा किया। मामला तूल पकड़ा तो पुलिस ने युवती के चाचा की तहरीर पर शाहवेज के खिलाफ धर्मांतरण का मुकदमा गंगानगर थाने में दर्ज किया। अभी शाहवेज की गिरफ्तारी नहीं की गई है। शादी टल गई है। अब सोशल मीडिया पर पैराडाइव व्यू रिसोर्ट के बाहर शुक्रवार दोपहर हिंदू महापंचायत का ऐलान किया गया है। लव जेहाद और धर्मांतरण के मुद्दे पर महापंचायत बुलाई है। कई संगठनों समेत हिंदू रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी समेत कई संगठन के पदाधिकारियों ने महापंचायत में शामिल होने का ऐलान कर दिया है। इसके बाद पुलिस-प्रशासन अलर्ट हो गया है। पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने साफ किया है महापंचायत की अनुमति नहीं है, आयोजन नहीं होने दिया जाएगा। गंगानगर समेत सर्किल के बाकी थानों से फोर्स और पुलिस लाइन से अतिरिक्त फोर्स को शुक्रवार दोपहर गंगानगर में तैनात किया जा रहा है। धर्मांतरण का मुकदमा दर्ज कराने वाले युवती के चाचा को धमकी भी मिल चुकी है। एसएसपी अविनाश पांडेय के अनुसार पुलिस कानून व्यवस्था बनाए रखने का काम कर रही है। इस मामले में पहले से मुकदमा दर्ज है और जांच शुरू कर दी गई है। नियमानुसार कार्रवाई कराई जा रही है। मंडप एसोसिएशन महामंत्री बोले, कोई बुकिंग नहीं मेरठ मंडप एसोसिएशन महामंत्री विपुल सिंघल ने बताया 13 फरवरी को गंगानगर मवाना रोड स्थित पैराडाइज व्यू रिसोर्ट में आकांक्षा और शाहवेज की शादी का कार्यक्रम निरस्त कर दिया गया है। रिसोर्ट मालिक सतीश मंगा ने बताया है कुछ संगठन द्वारा 13 अप्रैल को रिसोर्ट पर कथित हिंदू पंचायत को लेकर मैसेज वायरल किया जा रहा है। इस तरह के आयोजन के लिए रिसोर्ट पर न तो बुकिंग है और न ही ऐसी कोई पंचायत रिसोर्ट में होने दी जाएगी। न तो विवादित विवाह समारोह आयोजित होगा और न पंचायत के लिए कोई व्यवस्था की है। युवती ने पुलिस को दर्ज कराए बयान युवती ने मीडिया को बताया गंगानगर थाने में दर्ज मुकदमे को लेकर बयान दर्ज कराए हैं। 13 फरवरी को होनी वाली शादी को फिलहाल निरस्त कर दिया है। शाहवेज से बात नहीं हो पा रही है। पुलिस से मदद मांगी, लेकिन पुलिस ने मदद करने से इंकार कर दिया। कानून व्यवस्था का हवाला दिया। स्पेशल मैरिज एक्ट में एडीएम कार्यालय पर नवंबर में आवेदन किया था। इसके बाद ही शादी की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन रजिस्ट्रेशन नहीं किया गया। युवती ने कहा कि वह बौद्ध धर्म को मानती है और हिंदू धर्म से कोई वास्ता नहीं है। पुलिस जिसे खोज रही, वो सोशल मीडिया पर एक्टिव अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही ने बताया वह पंचायत को लेकर सोशल मीडिया पर लाइव थे। इसी दौरान वांटेड शाहवेज सोशल मीडिया पर आया और कमेंट किया। लिखा सिरोही जी, मेरा पीछा छोड़ दो, मेरी शादी हो जाने दो। सचिन सिरोही ने सवाल उठाया जिसके खिलाफ धर्मांतरण में मुकदमा है, वह सोशल मीडिया चला रहा है, लेकिन पुलिस पकड़ नहीं रही। युवती के बौद्ध धर्म वाले बयान पर कहा कि युवती ने अपने घर पर पांच दिन पहले माता की चौकी और पूजा का कार्यक्रम रखा था, जिसकी वीडियो भी है। यदि युवती बौद्ध धर्म अपना चुकी है तो ये पूजा क्यों हुई? बौद्ध धर्म अपनाने के साक्ष्य दें।

हिंदूवादी संगठनों का विरोध: जबलपुर मंदिर में पेशाब करने वाला आरोपी गिरफ्तार

 जबलपुर शहर के गढ़ा थाना अंतर्गत छोटी बजरिया क्षेत्र में सोमवार रात एक धार्मिक स्थल पर की गई आपत्तिजनक हरकत के बाद सांप्रदायिक तनाव की स्थिति निर्मित हो गई। 1963 से स्थापित एक प्राचीन बरगद के पेड़ के नीचे स्थित पूजनीय स्थल पर एक संप्रदाय विशेष के युवक द्वारा की गई अमर्यादित क्रिया ने स्थानीय लोगों और हिंदूवादी संगठनों को आक्रोशित कर दिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है, हालांकि क्षेत्र में एहतियातन पुलिस बल तैनात किया गया है। यह है घटनाक्रम जानकारी के अनुसार, गढ़ा छोटी बजरिया में एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे दशकों पुराना धार्मिक स्थल है, जहां स्थानीय नागरिक नियमित रूप से श्रद्धापूर्वक पूजन-पाठ करते हैं। सोमवार की रात काजी मोहल्ला, गढ़ा निवासी मोहम्मद रिजवान उर्फ रिज्जू वहां पहुंचा और धार्मिक स्थल पर लघुशंका कर दी। इस घृणित कृत्य पर पास ही खड़े स्थानीय निवासी मोहित तिवारी की नजर पड़ गई। मोहित द्वारा आपत्ति जताने और शोर मचाने पर आरोपित रिजवान मौके से भाग निकला।     दरअसल, घटना 9 फरवरी की रात करीब 9:30 बजे गढ़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत छोटी बजरिया स्थित एक शिव मंदिर की है. यहां मुजावर मोहल्ला के रहने बाले एक मुस्लिम युवक रिजवान ने शिवलिंग पर पेशाब कर दिया था. लोगों ने जब उसे ऐसा करते देखा, तो पीटने लगे. इसकी सूचना हिंदूवादी संगठनों को भी मिली. वो भी वहां पहुंचे. साथ ही पुलिस को भी इसकी सूचना दी गई. इससे पहले की पुलिस वहां पहुंची आरोपी मौके से फरार हो गया. पुलिस ने लिया ये एक्शन पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान रिजवान खान उर्फ रिज्जु उर्फ भूरा के रूप में हुई. गढ़ा थाना पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196B, 298 और 299 के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है. थाना प्रभारी प्रसन्न शर्मा ने बताया कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसे संवेदनशील मामले में पुलिस सख्त कार्रवाई कर रही है. साथ ही आरोपी के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की भी तैयारी की जा रही है, ताकि भविष्य में शांति व्यवस्था भंग न हो. शिवलिंग का शुद्धिकरण घटना के बाद विभिन्न हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता मंदिर पहुंचे और विधि-विधान के साथ शिवलिंग का शुद्धिकरण किया. हनुमान चालीसा और शिव स्तोत्र का पाठ किया गया तथा गंगा और नर्मदा जल से जलाभिषेक कर मंदिर परिसर को पुनः पवित्र किया गया. इस दौरान बड़ी संख्या में हिंदूवादी संगठनों के लोग और श्रद्धालु मौजूद रहे. वहीं सुरक्षा में भी भारी पुलिस बल मौके पर तैनात रहा. इसके अलावा पुलिस की पेट्रोलिंग लगातार की जा रही है और अतिरिक्त फोर्स को भी तैनात किया गया है. मुस्लिम समुदाय ने की निंदा इधर मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने भी इस घटना की निंदा की है. समुदाय के लोगों ने पुलिस को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट किया कि आरोपी का समाज से कोई संबंध नहीं है और उसके कृत्य का वे समर्थन नहीं करते. ज्ञापन में आरोपी को समाज से बहिष्कृत करने की बात कही गई है. साथ ही ये भी मांग की गई कि कानून के तहत उसके खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार की हरकत करने का साहस न करे. मंदिरों में पुलिस गश्त बढ़ाई महाशिवरात्रि पर्व को देखते हुए प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है. मंदिरों और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है. वहीं पूरे मामले में जबलपुर पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने आम नागरिकों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है. उन्होंने चेतावनी दी है कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव फैलाने या माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ हालात पर नजर बनाए हुए है. थाने का घेराव कर प्रदर्शन सूचना जंगल की आग की तरह फैल गई, जिसके बाद बड़ी संख्या में हिंदूवादी संगठनों के पदाधिकारी, सदस्य और क्षेत्रीय नागरिक गढ़ा थाने पहुँच गए। आक्रोशित भीड़ ने थाने का घेराव कर जमकर नारेबाजी की और आरोपित को तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर करीब डेढ़ घंटे तक प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाने की ऐसी कोशिशें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। तनाव के बाद पुलिस ने मोहित तिवारी की शिकायत पर आरोपी मोहम्मद रिजवान उर्फ रिज्जू के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उसे देर रात ही गिरफ्तार कर लिया।

हिंदू देवी-देवताओं को न मानने, ब्रह्मा, विष्णु, महेश, राम, कृष्ण और अन्य हिंदू देवी-देवताओं को ईश्वर न मानने की शपथ दिलाई गई

ग्वालियर  ग्वालियर में एक बौद्ध धर्म सम्मेलन में विवाद हो गया। सम्मेलन में लोगों को हिंदू देवी-देवताओं को न मानने की शपथ दिलाई गई। यह सम्मेलन भितरवार के धाखड़ खिरिया में हुआ। इसमें ‘मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश को ईश्वर नहीं मानूंगा’ जैसी शपथ दिलाई गई। तीन दिवसीय सम्मेलन का हुआ था आयोजन 96 गांव जाटव समाज सुधार समिति ने 6 से 8 जून तक इस तीन दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया था। इस घटना के बाद विवाद शुरू हो गया है। लोगों का कहना है कि इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। वहीं, आयोजकों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी धर्म का अनादर करना नहीं था। पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ कही गई बात दरअसल, सम्मेलन में लोगों को शपथ दिलाई गई कि वे हिंदू देवी-देवताओं को नहीं मानेंगे और उनकी पूजा नहीं करेंगे। इस तीन दिवसीय सम्मेलन में बौद्ध धर्म के उपदेशक भदंत शाक्यपुत्र सागर महाथेरो ने लोगों को शपथ दिलाई। सागर महाथेरो द बुद्ध भूमि धम्मदूत संघ भोपाल के अध्यक्ष हैं। इन बातों की दिलाई शपथ शपथ में लोगों से कहा गया कि मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश को कभी ईश्वर नहीं मानूंगा, न मैं इनकी पूजा करूंगा। मैं राम और कृष्ण को ईश्वर नहीं मानूंगा और उनकी पूजा कभी नहीं करूंगा। मैं गौरी, गणपति आदि हिंदू धर्म के किसी भी देवी-देवताओं को नहीं मानूंगा और पूजा नहीं करूंगा। भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार नहीं शपथ में यह भी कहा गया कि मैं ईश्वर ने अवतार लिया है, इस पर विश्वास नहीं करूंगा। मैं ऐसा कभी नहीं मानूंगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार हैं। ऐसे प्रचार को मैं पागलपन और झूठा प्रचार मानता हूं। मैं कभी श्राद्ध नहीं करूंगा और ना ही पिंडदान करूंगा। मैं बौद्ध धर्म के विरुद्ध कोई भी कार्य नहीं करूंगा। मैं कोई भी क्रिया कर्म ब्राह्मणों के हाथ से नहीं कराऊंगा। सम्मेलन में शामिल होने निमंत्रण दिया गया  भितरवार की 96 गांव जाटव सुधार समिति का समाज में काफी वर्चस्व है, जिसमें हजारों लोग विश्वास रखते हैं। समिति समाज के कई अहम मुद्दों और फैसलों में अपना दखल रखती है। समिति ने तीन दिवसीय विशाल बौद्ध धम्म महासम्मेलन का आयोजन करना तय किया। अध्यक्ष रूपेंद्र वर्मा, उपाध्यक्ष रूपेश बौद्ध, सचिव कुलदीप मौर्य सहित पदाधिकारियों ने 4 महीने तक इसकी तैयारी की। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भी समाज के लोगों को यहां आने का निमंत्रण दिया गया। बताया जा रहा है कि डबरा, ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, भोपाल, झांसी के अलावा राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई जिलों से लोग आए थे। 6 जून को जब कार्यक्रम की शुरुआत हुई तो 5 से 7000 लोग थे। दूसरे दिन 12000 लोग शामिल हुए। तीसरे और आखिरी दिन 25000 लोग महासम्मेलन में शामिल हुए। सैकड़ों लोगों ने ली शपथ इस बौद्ध धम्म महासम्मेलन में सैकड़ों लोगों ने शपथ ली। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद लोगों ने इस पर आपत्ति जताई। सम्मेलन के आयोजकों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी भी धर्म का अनादर करना नहीं था। 96 गांव जाटव सुधार समिति के अध्यक्ष रूपेंद्र वर्मा ने कहा कि इस आयोजन का मकसद समाज में फैली बुराइयों को दूर करना था। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर यह खबर गलत है कि डेढ़ लाख लोगों ने धर्म परिवर्तन किया है। इस मामले पर एसडीओपी जितेंद्र नगाइच ने मीडिया से कहा कि उन्हें अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। पुराने धर्म को त्यागकर बौद्ध धर्म अपनाने को कहा  भदंत शाक्यपुत्र सागर महाथेरो (अध्यक्ष द बुद्ध भूमि धम्मदूत संघ भोपाल) ने लोगों को शपथ दिलाई। इसमें कहा गया कि वे ब्रह्मा-विष्णु-महेश को ईश्वर नहीं मानेंगे। न ही उनकी पूजा करेंगे। यह भी कहा गया कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार नहीं हैं। शपथ में ब्राह्मणों से कोई काम नहीं कराने और पुराने धर्म को त्यागकर बौद्ध धर्म अपनाने की बात कही गई। इस मामले में भदंत शाक्यपुत्र सागर महाथेरो से उनकी प्रतिक्रिया लेने के लिए संपर्क किया, लेकिन बात नहीं हो सकी। फेसबुक पोस्ट से हुई विवाद की शुरुआत विवाद की शुरुआत फेसबुक के उस पोस्ट से हुई, जब दीपक बौद्ध नामक युवक ने अपने पेज पर लिखा कि 25000 दलित परिवारों ने छोड़ा हिंदू धर्म। हिंदुओं के देवी-देवताओं को ना पूजने का निर्णय लिया है। बताया जा रहा है कि ग्वालियर हाईकोर्ट में हिंदू धर्म के वकील लोग बाबा साहब की मूर्ति का विरोध कर रहे हैं तो हम इनके देवताओं को क्यों पूजेंगे। इसके साथ ही युवक ने भदंत शाक्यपुत्र सागर महाथेरो के शपथ दिलाए जाने का वीडियो शेयर किया। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों के कमेंट्स आने लगे। बाबा साहब की 22 प्रतिज्ञाओं को दोहराया गया आयोजन समिति के रूपेंद्र वर्मा का कहना है कि कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में व्याप्त कुरीतियों और अंधविश्वास को दूर करना था। यहां बाबा साहब की 22 प्रतिज्ञाओं को दोहराया गया था। किसी भी धर्म का अनादर करना उद्देश्य नहीं था। सोशल मीडिया पर इस बात को धर्मांतरण के रूप में पेश करना पूरी तरह गलत है।  

सनातनियों ने ईद की नमाज के बाद मुस्लिमों पर की पुष्पवर्षा

जयपुर देशभर में ईद-उल-फितर का त्योहार हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है। देश के दूसरे हिस्सों की तरह राजस्थान में भी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुबह ईदगाहों में नमाज पढ़ी गई। राजस्थान के जयपुर में तो बेहद खास नजारा दिखा जहां भगवाधारी हिंदू नमाजियों पर फूल बरसाते नजर आए। यह इसलिए भी खास है क्योंकि ‘सड़क पर नमाज’ को लेकर बहस तेज है और तनाव की आशंका थी। जयपुर में दिल्ली रोड पर स्थित ईदगाह में सोमवार सुबह हजारों की संख्या में मुस्लिम उमड़े। उन्होंने यहां कतारबद्ध होकर दुआ मांगी और नमाज पढ़ी। इस दौरान कुछ भगवाधारी नमाज पढ़ रहे लोगों पर फूल बरसाते दिखे। हिंदू मुस्लिम एकता कमिटी की तरफ से इसका आयोजन किया गया था। भगवा कुर्ता और कंधे पर भगवा गमझा लिए लोग गुलाब के फूलों की पंखुड़ियां नमाजियों पर बरसाते रहे। नमाजियों पर फूल बरसाए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रहा है। लोग इसे भारत में सांप्रदायिक एकता की मिसाल बता रहे हैं। एक्स पर एक यूजर ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, ‘राजस्थान के जयपुर में ईद-उल-फितर के मौके पर नमाज अदा करने वाले मुस्लिम बंधुओं का हिंदू बंधु पुष्प वर्षा करके स्वागत कर रहे हैं… आज के दौर में ये पल बेहद सुकून भरे हैं! आज का यह सबसे सुंदर वीडियो है।’ इससे पहले ईद के चांद के दीदार के बाद रविवार को रमजान का पवित्र महीना खत्म हो गया। इस बार रमजान का महीना 29 दिन का रहा। हालांकि पिछले साल यह महीना 30 दिन का था। इससे पहले 2022 और 2021 में भी यह पवित्र महीना 30-30 दिन का था। इस्लामी कलेंडर के मुताबिक, एक महीने में 29 या 30 दिन होते हैं जो चांद दिखने पर निर्भर करता है। रमजान के महीने में रोजेदार सुबह सूरज निकलने से पहले से लेकर सूरज डूबने तक कुछ नहीं खाते पीते हैं। यह महीना ईद का चांद नजर आने के साथ खत्म होता है।

अखिल भारतीय घर वापसी प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने सक्ती में पांव पखारकर किया 651 धर्मान्तरित परिवारों की पुनः सनातन धर्म में घर वापसी

सक्ती सक्ती में सर्व सनातन हिन्दू समाज के तत्वाधान में विराट हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया l मिशनरियों द्वारा विगत कई वर्षो से सक्ती एवं आसपास के जिलों में धर्म परिवर्तन का विष फैलाया जा रहा है। धर्मान्तरण से चुनाव प्रभावित हो रहा हैं और पूरे क्षेत्र की डेमोग्राफी बदल रही है l यह अत्यंत गंभीर और चिंता का विषय है। इस विराट हिन्दू समागम को बल देने हेतु जामड़ी पाटेश्वर धाम के संत रामबालक दास जी,साध्वी प्रज्ञा जी, मटकू द्वीप के संत राम रूप दास जी, अजय उपाध्याय जी,  विविध संत समाज के प्रमुख, धर्म जागरण के पूर्व  अखिल भारतीय सह प्रमुख राजेंद्र जी, धर्म जागरण प्रांत प्रमुख राज कुमार चंद्रा जी ,बस्तर सांसद महेश कश्यप जी,जांजगीर चाम्पा सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े जी, सक्ती महाराज धर्मेंद्र सिंह जी, धर्मसेना के सुरेंद्र बहादुर सिंह जी,शौर्य प्रताप सिंह जूदेव जी का विशेष सहयोग एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ. विभिन्न समाज के प्रमुख एवं हजारों की संख्या में धर्म प्रेमी भी उपस्थित रहे l अपने उद्बोधन में प्रबल ने कहा ” सनातन संस्कृति को छद्म हिन्दुओं से सबसे बड़ा खतरा हैं। यह गुप्त ईसाइयत (क्रिप्टो क्रिस्चिनीटी ) हमारे हिन्दू समाज रहकर छल पूर्वक धर्म परिवर्तन को बढ़ावा देते हैं और स्लीपर सेल्स की तरह कार्य करते हैं।इनका पर्दाफाश करके इनपर सख्त कारवाई करना अति आवश्यक है।” प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने धर्म सेना के सक्ति जिला अध्यक्ष श्याम चौहान को सम्मानित किया. चौहान जी को पैसा देकर धर्म परिवर्तन के लिए मिशनरी माफिया द्वारा प्रयास किया गया पर वें सनातनी बने रहें. बस्तर के खेम नेताम जी को भी सम्मानित किया गया, खेम जी मिशनरी माफिया के विरुद्ध संघर्ष किया और वें जिसके कारण वें 6 महीने जेल में रहें. दोनों सनातनी योद्धाओ का मंच पर अभिनन्दन किया गया l यह कार्यक्रम संयोजिका श्रीमती अंजू गभेल जी, श्याम कुमार चौहान, रूपेंद्र गभेल एवं धर्म सेना की टीम के अथक प्रयास से सफल हुआ l

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर अमेरिकी सरकार इस मामले में बांग्लादेश सरकार से बातचीत करेगी : मार्गेट मक्लाउड

 इंदौर  अमेरिकी विदेश मंत्रालय की हिंदी-उर्दू विभाग प्रवक्ता और लंदन इंटरनेशनल इंडिया हब की डिप्टी डायरेक्टर मार्गेट मक्लाउड का कहना है कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार की घटनाओं को लेकर विश्वभर में प्रत्येक मंच पर बांग्लादेश सरकार को घेरा जाने लगा है। अमेरिका की सरकार भी चिंतित है और इस मामले में बांग्लादेश सरकार के रवैये से नाखुश भी है। जल्द ही अमेरिकी सरकार इस मामले में बांग्लादेश सरकार से बातचीत करेगी। यह बात गुरुवार को मार्गेट ने इंदौर प्रेस क्लब में पत्रकारों से संवाद में कही। मार्गेट यूएस काउंसिल जनरल मुंबई के प्रवक्ता ग्रेग पारडो और मीडिया टीम के सदस्य अब्दुल बहाव शेख के साथ इंदौर के दौरे पर पहुंची थीं। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार को लेकर जो खबरें सामने आ रही हैं, वे काफी चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भी अमेरिका का नजरिया साफ है। अमेरिका की सरकार यूक्रेन के लोगों की हर संभव सहायता करेगी, क्योंकि यूक्रेन के खिलाफ रूस की जंग पूरी तरह संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांत के विरुद्ध है। इजरायल और फलस्तीन विवाद पर भी मार्गेट ने कहा कि अमेरिका ने शुरू से फलस्तीन के प्रति मानवीयता की भावना रखी है। अमेरिका और इजरायल के बीच लगातार बातचीत हो रही है। अमेरिका बार्डर खोलने पर जोर देने लगा है, क्योंकि सर्दी का मौसम शुरू होने वाला है। इन दिनों फलस्तीन के लोगों को जरूरत की वस्तुएं पहुंचानी जरूरी है।  

‘ अगर हिंदू जाति में बंटेंगे तो बांग्लादेश जैसा कटेंगे’, वाराणसी में BJP युवा मोर्चा ने लगाए पोस्टर तो मचा हंगामा

वाराणसी  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया बयान “बंटेंगे तो कटेंगे” पर लगातार प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। वाराणसी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के मुख्य द्वार के बाहर भारतीय जनता युवा मोर्चा ने एक विशाल बैनर लगाया है। इस बैनर पर लिखा है, “हिंदू जाति में बटेंगे तो बांग्लादेश जैसा कटेंगे… फैसला आपका।” बैनर लगाने वाले ने अपनी तस्वीर और नाम भी इसमें शामिल किया है। विवेक सिंह भाजपा युवा मोर्चा के वाराणसी महानगर अध्यक्ष हैं, उन्होंने इस बैनर के माध्यम से यह संदेश दिया है कि अगर हिंदू लोग जातियों में बंटते हैं, तो इसका परिणाम देश के लिए गंभीर हो सकता है। विवेक सिंह ने बैनर के माध्यम से कहा कि हमें एकजुट रहना होगा, अन्यथा हम अपने ही देश में बांग्लादेश जैसे हालात का सामना कर सकते हैं। विवेक सिंह ने कहा कि इस बैनर के माध्यम से वह यह संदेश देना चाहते हैं कि एकजुटता में ही शक्ति है। उनका मानना है कि अगर हिंदू समाज जातियों में विभाजित होता है, तो यह देश के लिए नुकसानदायक साबित होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए कहा, “हमें सभी हिंदुओं को एकजुट करना चाहिए, ताकि हम किसी भी प्रकार की विभाजनकारी राजनीति से बच सकें।” इस बैनर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ विवेक सिंह की तस्वीर भी लगाई गई है। बता दें कि योगी आदित्यनाथ के “बंटेंगे तो कटेंगे” वाले बयान के बाद से इस मुद्दे पर सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनावी राज्यों और उत्तर प्रदेश में होने वाले उपचुनावों के मद्देनजर इस नारे के विभिन्न वर्जन दिखाई और सुनाई दे रहे हैं। भाजपा के इस बैनर ने न केवल स्थानीय राजनीति को प्रभावित किया है, बल्कि यह मुद्दा देश भर में चर्चा का विषय बन गया है। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के 9 सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं। वहीं, महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसको लेकर सियासी हलचल बढ़ चुकी है। सत्ता पक्ष और विपक्ष की ओर से जमकर पोस्टर वार किए जा रहे हैं।    

हिंदुओं का बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस सरकार के खिलाफ फूटा गुस्सा , सड़कों पर उतरे हजारों, उठाई ये मांग

ढाका बांग्लादेश में लगातार हो रहे हमलों और उत्पीड़न के विरोध में एक बार फिर बड़ी संख्या में हिंदू सड़क पर उतरे। इस दौरान हिंदुओं ने बड़ी रैली निकाली। करीब 30 हजार से अधिक हिंदुओं ने चटगांव में एक चौराहे पर अधिकारों की मांग को लेकर नारेबाजी की। इस दौरान हिंदुओं ने कहा कि अंतरिम सरकार उनको सुरक्षा मुहैया नहीं करा पा रही है। बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद ने कहा कि चार अगस्त से हिंदुओं पर 2000 से अधिक हमले हुए हैं। हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों का कहना है कि अंतरिम सरकार ने उन्हें पर्याप्त रूप से सुरक्षा नहीं दी है। हसीना के सत्ता से हटने के बाद से कट्टरपंथी इस्लामवादी तेजी से प्रभावशाली होते जा रहे हैं। वहीं अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस का कहना है कि हमलों के आंकड़े को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा है। बता दें कि देश की लगभग 17 करोड़ आबादी में हिंदू लगभग 8 प्रतिशत हैं, जबकि मुस्लिम लगभग 91% हैं। इससे पहले 26 अक्तूबर को  अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अधिकारों की मांग को लेकर सनातन जागरण मंच ने चटगांव में एक विशाल रैली का आयोजन किया था। आठ प्रमुख मांगों को लेकर हिंदू अल्पसंख्यकों ने आवाज बुलंद की थी। कार्यकर्ताओं ने कहा कि जब तक बांग्लादेश की सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं करेगी, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। हिंदुओं पर 2000 से अधिक हमले देश के प्रभावशाली अल्पसंख्यक समूह ‘बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई यूनिटी काउंसिल’ ने कहा है कि चार अगस्त के बाद से हिंदुओं पर 2,000 से अधिक हमले हुए हैं। हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों का कहना है कि अंतरिम सरकार ने उनकी पर्याप्त सुरक्षा नहीं की है और हसीना के जाने के बाद कट्टरपंथी इस्लामवादी तेजी से प्रभावशाली होते जा रहे हैं। बांग्लादेश में क्या हुआ? नौकरियों में विवादास्पद कोटा प्रणाली को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया गया था, जो बाद में हिंसा में बदल गया। बढ़ती हिंसा को देखते हुए पांच अगस्त को हसीना ने इस्तीफा दे दिया था और भारत चली गई थीं। हसीना के नेतृत्व वाली सरकार को अंतरिम सरकार द्वारा प्रतिस्थापित किया गया और 84 वर्षीय नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को इसका मुख्य सलाहकार नामित किया गया। हालांकि, अंतरिम सरकार बनने के बाद भी अल्पसंख्यकों के घरों और धर्मस्थलों को निशाना बनाया गया।   बांग्लादेश में हजारों हिंदू सड़कों पर उतरे हैं ढाका: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के हजारों सदस्यों ने शनिवार को रैली निकालकर अंतरिम सरकार से सिलसिलेवार हमलों व उत्पीड़न से सुरक्षा देने और इस समुदाय के नेताओं के खिलाफ दर्ज राजद्रोह के मामलों को रद्द करने की मांग की। लगभग 30,000 हिंदुओं ने दक्षिण-पूर्वी शहर चटगांव के एक प्रमुख चौराहे पर रैली करते हुए नारे लगाए। देश में अन्य जगहों पर भी विरोध प्रदर्शन होने की सूचना मिली। हिंदू समूहों का कहना है कि अगस्त की शुरुआत में प्रधानमंत्री शेख हसीना की धर्मनिरपेक्ष सरकार के बेदखल होने और हसीना के देश छोड़कर चले जाने के बाद हिंदुओं के खिलाफ हजारों हमले हुए हैं। हसीना की सरकार के पतन के बाद नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन किया गया था। छात्रों का आंदोलन हिंसक होने के बाद शेख हसीना देश छोड़कर चली गई थीं। बांग्लदेश की आबादी लगभग 17 करोड़ है, जिनमें हिंदुओं की आबादी करीब आठ प्रतिशत है जबकि 91 प्रतिशत आबादी मुसलमान है। हिंदुओं पर 2000 से अधिक हमले देश के प्रभावशाली अल्पसंख्यक समूह ‘बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई यूनिटी काउंसिल’ ने कहा है कि चार अगस्त के बाद से हिंदुओं पर 2,000 से अधिक हमले हुए हैं। हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों का कहना है कि अंतरिम सरकार ने उनकी पर्याप्त सुरक्षा नहीं की है और हसीना के जाने के बाद कट्टरपंथी इस्लामवादी तेजी से प्रभावशाली होते जा रहे हैं। हिंदू नेताओं पर देशद्रोह का केस शहर में 25 अक्टूबर की रैली को लेकर प्रमुख पुजारी चंदन कुमार धर समेत 19 हिंदू नेताओं के खिलाफ बुधवार को राजद्रोह के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। इसके खिलाफ शुक्रवार को चटगांव में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। दो नेताओं की गिरफ्तारी से हिंदू समुदाय के लोग नाराज हैं।  

शिमला मस्जिद मामले में संजौली की दुकानों पर लगाए गए ‘सनातनी सब्जी वाला’ बोर्ड, देवभूमि संघर्ष समिति लगा रही पोस्टर

शिमला हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली इलाके में देवभूमि संघर्ष समिति ने एक नया अभियान शुरू कर दिया है. यहां देवभूमि संघर्ष समिति की ओर से हिंदू दुकानदारों की सब्जी की दुकान के बाहर एक बोर्ड लगाया जा रहा है. इस बोर्ड में ‘सनातन सब्जी वाला’ लिखा गया है. इसका उद्देश्य यह है कि स्थानीय लोग हिंदू दुकानदारों से खरीदारी करें और बाहरी लोगों का बॉयकॉट किया जाए. देवभूमि संघर्ष समिति के राज्य सह संयोजक विजय शर्मा ने कहा कि समिति की ओर से यह अभियान शुरू किया गया है. इस अभियान का उद्देश्य संजौली इलाके में हिंदू सब्जीवालों को बढ़ावा देना है. उन्होंने कहा कि वे लोगों से यह भी अपील कर रहे हैं कि बाहरी लोगों से वह खरीददारी न करें और स्थानीय दुकानदारों को आगे बढ़ाएं, ताकि उनका रोजगार चल सके. विजय शर्मा ने कहा, “हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली इलाके में रोहिंग्या जैसे लोगों का आना शुरू हो गया है. यह लोग यहां पर व्यापार कर रहे हैं. इस बीच देवभूमि संघर्ष समिति ने स्थानीय दुकानदारों को आगे बढ़ने का बीड़ा उठाया है.” नेम प्लेट को लेकर पहले मच चुका बवाल हिमाचल में इससे पहले भी दुकानों में नेम प्लेट लगाने को लेकर विवाद हो चुका है। शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बयान पर पूरे देश में बवाल मचा था। दरअसल, पिछले महीने विक्रमादित्य सिंह ने कहा था कि सभी दुकानों में उत्तर प्रदेश की तर्ज पर नेम प्लेट लगानी होगी। इस बयान के बाद देशभर में कांग्रेस बेक फुट पर आ गई थी, क्योंकि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने जब कावड़ यात्रा के दौरान नेम प्लेट लगाना अनिवार्य किया था, उस दौरान देशभर में कांग्रेस ने विरोध किया था। विक्रमादित्य के इस बयान के बाद कांग्रेस सरकार ने भी मंत्री के बयान से किनारा कर दिया था और मंत्री का निजी बयान बताया था। बहुदलीय कमेटी स्ट्रीट वेंडर पॉलिसी के लिए रूल्स तैयार कर रही हिमाचल विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने उद्योग मंत्री हर्ष वर्धन चौहान की अध्यक्षता में रेहड़ी फड़ी वालों की समस्या के समाधान के लिए उद्योग मंत्री की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर रखी है। यह कमेटी स्ट्रीट वेंडर पॉलिसी के लिए रूल्स तैयार कर रही है। नेम प्लेट वाले मामले पर हो चुका है विवाद हिमाचल प्रदेश देवभूमि संघर्ष समिति के इस अभियान के बाद अब संजौली में सब्जी बेच रहे दुकानदारों का धर्म प्रदर्शित होगा. इससे पहले हिमाचल प्रदेश में शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह के नेम प्लेट वाले बयान को लेकर भी खासा विवाद हो चुका है. विक्रमादित्य सिंह ने उत्तर प्रदेश के तर्ज पर हिमाचल प्रदेश के रेहड़ी-फड़ी वालों के नाम प्रदर्शित करने की बात कही थी. हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्ट किया था कि इस पूरे मामले का उत्तर प्रदेश और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मॉडल से कोई लेना-देना नहीं है. विधानसभा अध्यक्ष ने की कमेटी गठित हिमाचल प्रदेश में स्ट्रीट वेंडर पॉलिसी के लिए विधानसभा अध्यक्ष की ओर से जो कमेटी गठित की गई है, वहीं इस संबंध में फैसला लेगी. गौरतलब है कि कि हिमाचल प्रदेश में स्ट्रीट वेंडर एक्ट के तहत जो भी व्यक्ति वेंडिंग करता है, उसे नगर निगम की ओर से लाइसेंस दिया जाता है. इस लाइसेंस में पहले से ही व्यक्ति की पहचान से जुड़ी जानकारी होती है. इस लाइसेंस को दुकान में लगाना पहले से ही अनिवार्य है.

ब्रिटेन में हिंदुओं ने भावी ब्रिटिश सरकार से सीधी डिमांड, हिंदू फॉर डेमोक्रेसी ने बनाया

70 patients sick so far, serious victims sent to district hospital

लंदन फिलहाल चुनावी मौसम चल रहा है. भारत के लोकसभा चुनाव 2024 के बाद यूरोपियन पार्लियामेंट का भी चुनाव हुआ. अब ब्रिटेन की पारी है. जुलाई में होने वाले आम चुनावों से पहले वहां हिंदू मेनिफेस्टो जारी हो चुका. 32-पेज का ये दस्तावेज यूके में बसे हिंदुओं की जरूरतों पर बात करता है, इसलिए इसे हिंदू मेनिफेस्टो भी कहा जा रहा है. क्या है हिंदू फॉर डेमोक्रेसी संगठन ये एक नहीं, बल्कि 15 गुटों का समूह है, जिनमें हिंदू काउंसिल यूके, हिंदू फोरम ऑफ ब्रिटेन, हिंदू मंदिर नेटवर्क यूके, बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था, चिन्मय मिशन, इस्कॉन यूके और नेशनल काउंसिल ऑफ हिंदू टेम्पल्स आते हैं. इसकी वेबसाइट पर हिंदू मेनिफेस्टो का भी जिक्र है. घोषणापत्र में सात मांगें हैं. इनमें ब्रिटेन में हिंदुओं पर बढ़ती हिंसा और गैर-बराबरी को रोकने के साथ-साथ यूके में मंदिरों की सुरक्षा की भी डिमांड की गई. क्यों करनी पड़ी ये मांगें बीते कुछ समय में हिंदुओं के साथ कथित तौर पर हेट क्राइम की घटनाएं बढ़ीं. कई रिपोर्ट्स भी इसपर ठप्पा लगाती हैं. खुद लीडिंग ब्रिटिश थिंक टैंक हेनरी जैक्सन सोसायटी ने पिछले साल दावा किया था कि ब्रिटेन में बसे मुस्लिम स्टूडेंट्स हिंदू धर्म को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां करते और उन्हें कंन्वर्ट होने को कहते हैं. किनपर हुआ सर्वे इसके लिए देश के हजार से ज्यादा स्कूलों का सर्वेक्षण और लगभग इतने ही पेरेंट्स से बात की गई. वहां रहने वाले करीब 50% अभिभावकों ने माना कि मजहब के चलते उनके बच्चों को स्कूल में नफरत झेलनी पड़ी. यहां तक कि कई स्कूलों ने भी अपनी अंदरुनी रिपोर्ट में माना कि उनके कैंपस में बीते 5 सालों में हिंदू-विरोधी सोच बढ़ी है. साल 2023 में ही अमेरिकी रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन नेटवर्क कांटेजियन रिसर्च इंस्टीट्यूट (NCRI) ने दावा किया कि बीते समय में तेजी से एंटी-हिंदू नैरेटिव तैयार हुआ और हिंदुओं पर हमले में थोड़ी-बहुत नहीं, लगभग हजार गुना तेजी आई. खासकर ब्रिटेन और अमेरिका में. कितने हिंदू हैं ब्रिटेन में साल 2021 के सेंसस के अनुसार. यहां 10 लाख से ज्यादा हिंदू आबादी है. साल 2011 में ब्रिटेन की कुल जनसंख्या का डेढ़ फीसदी हिंदुओं का था. अगले 10 सालों में ये बढ़कर 1.7 फीसदी हो गया. वहां ईसाई और मुस्लिम के बाद हिंदू तीसरा सबसे बड़ा धर्म है. क्या है मेनिफेस्टो में – इसमें आने वाली सरकार से 7 मांगें की गई हैं. – हिंदू हेट-क्राइम की घटनाओं को धार्मिक नफरत की तरह पहचानना और ऐसे लोगों को सजा देना. – पूजा स्थलों को सुरक्षा देना और मंदिरों के लिए सरकारी फंडिंग. – हिंदुओं की मान्यताओं-आस्थाओं को आने वाली पीढ़ी तक ले जाने के लिए फेथ स्कूल्स तैयार करवाना. – सरकार और सार्वजनिक स्थलों पर हिंदुओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाना. – पुजारियों से जुड़े वीजा के मामलों को सुलझाना. – सामाजिक सेवाओं में हिंदुओं को शामिल करना. – धार्मिक मान्यताओं को पहचानना और उन्हें प्रोटेक्ट करना. इसमें कई और मांगें भी हैं. जैसे नए सांसद ब्रिटिश हिंदुओं से जुड़े मुद्दों पर कानून लाने से पहले हिंदू संगठनों से बातचीत करें. हिंदू दाह संस्कार की प्रोसेस में प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने की मांग है ताकि मौत के तीन दिन के भीतर दाह संस्कार का काम हो सके. होने लगा मेनिफेस्टो का विरोध बढ़ते हेट-क्राइम की घटनाओं के बीच ब्रिटेन में रहते हिंदू इसलिए भी नाराज हैं क्योंकि सरकार में उनके मुद्दों का रिप्रेजेंटेशन उतनी अच्छी तरह से नहीं हो रहा. यही वजह है कि पहली बार कोई हिंदू मेनिफेस्टो लाया गया. हालांकि आते ही इसपर विवाद भी शुरू हो गया. घोषणापत्र रिलीज होने के साथ ही वहां के कैंपेनिंग संस्थान नेशनल सेकुलर सोसायटी ने दस्तावेजों की आलोचना करते हुए कहा कि आने वाली सरकार को इन्हें सिरे से रिजेक्ट कर देना चाहिए. सोसायटी ने यहां तक कह दिया कि अगर मेनिफेस्टो अमल में आ जाए तो फ्री स्पीच को नुकसान होगा क्योंकि हिंदुओं के खिलाफ कुछ कहा नहीं जा सकेगा.  

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