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कब है होली? 3 या 4 मार्च, पंडितों से जानें इस बार होली की सही तिथि

इंदौर      इस साल होली के पर्व को लेकर लोगों में काफी ज्यादा असमंजस की स्थिति बनी हो गई है. इसके पीछे का मुख्य कारण है 3 मार्च 2026 को लगने वाला चंद्र ग्रहण. गणनाओं के मुताबिक, 2 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा है, जबकि रंगों का पर्व होली 4 मार्च को मनाया जाएगा. तो आइए देश के प्रसिद्ध पंडितों से जानते हैं कि होली की सही तिथि या डेट क्या रहने वाली है.  ज्योतिषाचार्य पंडित दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार, भारतीय ज्योतिष और निर्णय सिंधु ग्रंथ के आधार पर फाल्गुन शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 2 मार्च 2026 को पड़ रही है. शास्त्रों के मुताबिक, इस दिन भद्रा समाप्त होने के बाद या भद्रा के पूंछ काल में होलिका दहन करना ही शास्त्र सम्मत माना जा रहा है. उन्होंने बताया कि 2 मार्च की रात 12 बजकर 50 मिनट से 2 बजकर 2 मिनट के बीच होलिका दहन का श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा. अगले दिन 3 मार्च 2026 को फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के दिन साल का पहला चंद्रग्रहण लगेगा. ग्रहण होने के कारण अगले दिन चैत्र कृष्ण पक्ष प्रतिपदा यानी 4 मार्च 2026 को पूरे भारत में होली मनाई जाएगी.  3 मार्च को ये रहेगी चंद्रग्रहण की टाइमिंग  दरअसल गणनाओं के मुताबिक, 3 मार्च 2026 फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को चंद्रमा का उदय शाम 5 बजकर 59 मिनट पर होगा, जबकि ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर होगी. ग्रहण का (मध्यकाल) मध्यान्ह समय शाम 5 बजकर 4 मिनट पर होगा और ग्रहण का मोक्ष काल शाम 6 बजकर 47 मिनट रहेगा. पूरे भारत में चंद्रोदय के समय यानी 3 मार्च की शाम 05 बजकर 59 के बाद ही सभी स्थानों में चंद्रग्रहण देखा जा सकेगा. केवल ग्रहण का मोक्ष काल ही दिखाई देगा, जबकि ग्रहण का प्रारंभ और मध्य काल भारत में कहीं भी दिखाई नहीं होगा, क्योंकि चंद्रोदय से पहले ही ग्रहण का आरंभ हो जाएगा.  सनातन धर्म के अनुसार, सूर्य ग्रहण में 12 घंटे पूर्व और चंद्र ग्रहण में 9 घंटे पूर्व सूतक काल मान्य होता है. इस गणना के अनुसार, 3 मार्च को सुबह 6 बजकर 20 मिनट से सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा. कहां कहां दिखाई देगा चंद्रग्रहण?  3 मार्च को लगने जा रहा यह चंद्रग्रहण भारत के अलावा पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका में भी दिखाई देगा. ऐसे में पूरे भारत में होली का पर्व 4 मार्च 2026 को ही मनाया जाना उचित रहेगा. होलिका दहन 2 मार्च 2026 को भद्रा पूंछ काल में, रात 12 बजकर 50 मिनट के बाद करना ही शास्त्र सम्मत माना जा रहा है.  होली की तिथि को लेकर पंडित वेद प्रकाश मिश्रा ने भी दिया अपना मत ज्योतिषाचार्य पंडित वेद प्रकाश मिश्रा ने बताया कि शास्त्रीय परंपरा के अनुसार, होलिका दहन रात में और रंगोत्सव अगले दिन प्रातः काल मनाया जाता है. लेकिन 3 मार्च को चंद्रग्रहण और सूतक काल होने के कारण उस दिन रंगोत्सव करना उचित नहीं है. इसी कारण होली का पर्व 4 मार्च 2026 को मनाया जाएगा. दरअसल, हृषीकेश पंचाङ्ग के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 मार्च को शाम 5 बजकर 18 मिनट पर होगी, जो 3 मार्च को शाम 4 बजकर 33 मिनट तक रहेगी. इस प्रकार 2 मार्च को निशाव्यापिनी पूर्णिमा प्राप्त हो रही है. हालांकि, 2 मार्च को शाम 5 बजकर 18 मिनट से भद्रा लग रही है, इसलिए भद्रा के मुख काल को त्यागकर, भद्रा पूंछ काल में रात 12 बजकर 50 मिनट से रात 2 बजकर 02 मिनट तक होलिका दहन करना शास्त्र सम्मत माना जा रहा है.  आगे पंडित वेद प्रकाश मिश्रा ने बताया कि, प्रचलित मान्यता के अनुसार, होलिका दहन के अगले दिन अर्थात् 3 मार्च को होली का पर्व मनाया जाना चाहिए. लेकिन इस दिन शाम को ग्रस्तोदित चंद्रग्रहण है, जो शाम 5 बजकर 59 मिनट से शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. ग्रहण समाप्त होने के बाद 3 मार्च को चौसठ्ठी देवी की यात्रा और पूजन किया जाएगा.  यानी, सभी मतों और पंडितों के मुताबिक, 4 मार्च को ही होली मनाना ज्यादा शुभ माना जा रहा है.

पंडित प्रदीप मिश्रा के संदेश के बाद सीहोर में होली का उत्साह देखने को मिला, श्रद्धालुओं का ठंडाई, आलू बड़े से स्वागत किया

सीहोर  हर साल की तरह इस साल भी होली के दूसरे दिन देश भर में प्रसिद्ध पांच दिवसीय महादेव की होली की धूम सीहोर में देखने को मिली। हजारों की संख्या में देश के कोने-कोने से आए आस्थावन श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ अबीर-गुलाल उड़ाते नजर आए। इस मौके पर चल समारोह में अघोरी भी शामिल हुए। इस दौरान आदिवासी नृत्य व झांकियां आकर्षण का केंद्र रही। चल समारोह का जगह-जगह स्वागत कर स्वलपाहार कराया गया। पंडित प्रदीप मिश्रा के संदेश के बाद होली का उत्साह देखने को मिला है और शहर के महादेव मंदिरों में जमकर होली खेली गई। चमत्कालेश्वर महादेव मंदिर से हुई शुरुआत शनिवार की सुबह कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा शहर के छावनी स्थित चमत्कालेश्वर महादेव मंदिर से शहर में महादेव की होली की शुरुआत की। इसके पश्चात वह शहर के विभिन्न मंदिर में पहुंचे। विठ्लेश सेवा समिति नगर इकाई के द्वारा महादेव की होली के लिए शहर के अनेक स्थानों पर मंच बनाया गया। श्रद्धालुओं के लिए ठंडाई का इंतजाम के अलावा एक क्विंटल गुलाब के फूलों की पंखडी, अबीर और गुलाल का इंतजाम किया गया था, जो हुलियारों पर जमकर बरसाए गए। अघोरी भी हुए शामिल शामिल, झाबुआ के कलाकारों ने दी प्रस्तुति शनिवार की सुबह नौ बजे शहर के छावनी स्थित नगर पालिका के पास चमत्कालेश्वर महादेव पहुंचे और अन्य शिव मंदिरों के पश्चात प्राचीन मनकामेश्वर महादेव मंदिर तहसील चौराहे पहुंचे। डोल-नगाड़ों और डीजे की धुनों के मध्य महादेव की होली में गुलाल और अबीर उड़ाने के लिए मशीन के अलावा, दिल्ली, छत्तीसगढ़ और जबलपुर से अघोरी भी इसमें शामिल होने पहुंचे थे। इसके अलावा झांकियां और झाबुआ के कलाकारों अपनी प्रस्तुति दी, वहीं संतरे, केले आदि से स्वागत किया गया। शहर के अलग-अलग इलाकों में श्रद्धालुओं का ठंडाई, आलू बड़े, पोहे और अन्य नाश्ते से स्वागत किया गया।

होली विशेष : श्रीकृष्ण और पूतना की पौराणिक कथा

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार वर्ष के अंतिम माह फाल्गुन माह पूर्णिमा को होलिका दहन होता है। होली की पौराणिक कथा चार घटनाओं से जुड़ी हुई है। पहली होलिका और भक्त प्रहलाद, दूसरी कामदेव और शिव, तीसरी राजा पृथु और राक्षसी ढुंढी और चौथी श्रीकृष्ण और पूतना। आओ इस बार जानते हैं श्रीकृष्ण और पूतना की पौराणिक और प्रामाणिक कथा। वसुदेव का विवाह कंस की बहन देवकी से हुआ। कंस जब देवकी और वसुदेव को रथ पर बैठाकर उनके घर छोड़ने जा रहा था तो रास्ते में आकाशवाणी द्वारा उसे पता चला कि वसुदेव और देवकी का आठवां पुत्र उसकी मृत्यु का कारण बनेगा। बस फिर क्या था कंस ने दोनों को मथुरा के कारागार में डाल दिया। देवकी के छ: पुत्रों को कंस ने मार दिया था और सातवें पुत्र जो कि शेष नाग के अवतार बलराम थे। उनके अंश को योगमाया ने जन्म से पूर्व ही वसुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया था। फिर श्रीकृष्ण का अवतार आठवें पुत्र के रूप में हुआ। उसी समय वसुदेव ने रात में ही श्रीकृष्ण को गोकुल में नंद और यशोदा के यहां पहुंचा दिया और उनकी नवजात कन्या (योगमाया) को अपने साथ ले आए। परन्तु कंस उस कन्या का वध नहीं कर सका और फिर से आकाशवाणी हुई कि तुझे मारने वाला तो गोकुल मैं पहुंच गया है। इसी कारण कंस ने उस दिन गोकुल में जन्में सभी बच्चों को मारने के आदेश दे दिया। परंतु कोई भी श्रीकृष्‍ण के पास तक नहीं पहुंच सका। तब बालकृष्ण की हत्या करने का काम राक्षसी पूतना को सौंपा गया। उल्लेखनीय है कि पूर्व जन्म में पूतना राजा बलि की पुत्री रत्नबाला थी। वह राजकन्या थी। राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांगने के लिए भगवान वामन आए तो उनका रूप सौन्दर्य देखकर उस राजकन्या को हुआ कि ‘मेरी सगाई हो गई है। काश, मुझे ऐसा ही बेटा हो तो मैं गले लगाऊं और उसको अपना खूब दूध पिलाऊं।’ परंतु जब नन्हा मुन्ना वामन विराट हो गया और उसने बलि राजा का सर्वस्व छीन लिया तो वह क्रोधित हो गई “मैं इसको दूध पिलाऊं? नहीं इसको तो मैं जहर पिलाऊं, जहर!’… भगवान ने उसकी मंशा जान ली और कहा तथास्तु। बाद में वही राजकन्या पूतना बनी। पूतना सुंदर नारी का रूप बनाकर बालकृष्ण को विष का स्तनपान कराने गई लेकिन बालकृष्ण के द्वार उसका स्तनपान करने से उसको भयंकर पीड़ा उत्पन्न हुई और वह बालकृष्ण को अपने स्तन से छुड़ाने लगी परंतु यह संभव नहीं हो पाया। कराहते हुए उसने अपना असली रूप धारण किया और चीखती हुई श्रीकृष्ण को लेकर आकाश में पहुंच गई। यह दृश्य देखकर माता यशोदा और माता रोहिणी सहित नगर के सभी लोग घबरा गए और उसके पीछे दौड़े। पूतना कराहते हुए चीखती रहती है। अंतत: वह भूमि पर गिरकर मर जाती है। दूध पीने के बाद बालकृष्ण उसकी छाती पर बैठ जाते हैं। सभी लोग वहां पहुंचते हैं। यशोदा और रोहिणी कहती हैं कोई बचाओ मेरे लल्ला को। तब एक ग्रामीण पूतना की छाती पर चढ़कर जैसे-तैसे लल्ला को नीचे उतार लाता है। यशोदा लल्ला को गले लगा लेती है। बाद में नंद आते हैं तो उनको इस घटना का पता चलता है। फिर एक बूढ़ी महिला कहती है कि ऐसी राक्षसी के हाथों बच जाना तो कोई दैवीय चमत्कार है। ऋषि शांडिल्य से कहकर पूजा और दान करवाओ और उत्सव मनाओ। जिस दिन राक्षसी पूतना का वध हुआ था उस दिन फाल्गुन पूर्णिमा थी। अत: बुराई का अंत हुआ और इस खुशी में समूचे नंदगांववासियो ने खूब जमकर रंग खेला, नृत्य किया और जमकर उत्सव मनाया। तभी से होली में रंग और भंग का समावेश होने लगा।

महू के संवेदनशील इलाकों में पुलिस तैनात रहेगी, 2 हजार का फोर्स और 175 पुलिस पेट्रोलिंग मोबाइल्स तैनात होंगी

इंदौर  महू में हुए विवाद के बाद होली के त्यौहार पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। इंदौर और महू में 2000 से ज़्यादा पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। संवेदनशील इलाकों में ड्रोन से निगरानी रखी जाएगी और पुलिस लगातार मौजूद रहेगी। यह सब 9 मार्च को भारत-न्यूजीलैंड मैच के बाद हुए विवाद के बाद किया जा रहा है, जिसमें तोड़फोड़, आगजनी और पथराव हुआ था। 9 मार्च को हुई थी हिंसा महू में 9 मार्च को क्रिकेट मैच के बाद हुए विवाद के कारण होली पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। इंदौर और महू में 2000 से ज़्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे। ड्रोन कैमरों से हवाई निगरानी रखी जाएगी। साथ ही, संवेदनशील इलाकों में पुलिस की 24 घंटे तैनाती रहेगी। 9 मार्च को भारत-न्यूजीलैंड क्रिकेट मैच के बाद दो गुटों में झड़प हो गई थी। इस झड़प में गाड़ियों में तोड़फोड़, आगजनी और पथराव हुआ था। पुलिस को स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागने पड़े थे। सेना को भी मदद के लिए बुलाया गया था। महू में 21 जगह हो रहा होलिका दहन एएसपी रूपेश द्विवेदी ने बताया कि महू में 21 जगहों पर होलिका दहन होगा। इसके अलावा कई लोग अपने घरों के बाहर भी होलिका दहन करेंगे। इलाके में ड्रोन से निगरानी, पुलिस की तैनाती और फ्लैग मार्च जैसे कदम उठाए गए हैं। पिछले तीन दिनों से ड्रोन से निगरानी रखी जा रही है और होली के दिन भी यह जारी रहेगी। हर ज़ोन में दो-दो ड्रोन तैनात रहेंगे। तीन से ज़्यादा ड्रोन संवेदनशील इलाकों पर नज़र रखेंगे। घरों की छतों पर होने वाली गतिविधियों पर भी नज़र रखी जाएगी। पुलिस ने किया फ्लैग मार्च इंदौर में भी पुलिस ने  रात संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च निकाला। होलिका दहन की जगहों, संवेदनशील इलाकों और बाजारों में पुलिस तैनात रहेगी। 200 से ज़्यादा पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। जहां विवाद हुआ था, वहां पुलिस की स्थायी चौकी रहेगी। आरएएफ (रैपिड एक्शन फ़ोर्स) की एक टुकड़ी भी तैनात की जाएगी। 90% पुलिस फ़ोर्स फ़ील्ड में रहेगा। इसमें वरिष्ठ अधिकारी से लेकर पुलिसकर्मी तक शामिल होंगे। 10% बल थाने पर रहेगा, जो थाने की व्यवस्था देखेगा। 175 पुलिस पेट्रोलिंग मोबाइल्स भी तैनात रहेंगी। इन्हें अलग-अलग सेक्टर में बांट दिया गया है। ये पेट्रोलिंग गाड़ियां लगातार इलाकों में गश्त करती रहेंगी। 40 स्थायी पॉइंट्स पर पुलिस तैनात रहेगी। ये पॉइंट संवेदनशील जगहों पर बनाए गए हैं। एसडीएम की भी लगी ड्यूटी कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसडीएम की भी ड्यूटी लगाई गई है। वे संबंधित पुलिस अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में रहेंगे। कलेक्टर ने इसके लिए आदेश जारी कर दिए हैं। डॉ. अंबेडकर नगर महू, सांवेर, देपालपुर, हातोद, खुडेल, राउ, कनाडिया, मल्हारगंज, जूनी इंदौर और बिचौली हप्सी में अलग-अलग एसडीएम की ड्यूटी लगाई गई है। अब तक 9 एफआईआर दर्ज महू की घटना के बाद अब तक 9 FIR दर्ज की जा चुकी हैं। एक बस संचालक की शिकायत पर दर्ज FIR में 17 लोगों को नामज़द किया गया है और बाकी आरोपियों को अज्ञात बताया गया है।

Ratlam में होली के मद्दनेजर शहर काजी की अपील, अगर कोई रंग डाले तो करें ये काम

रतलाम मध्य प्रदेश के रतलाम शहर काजी मौलवी सय्यद अहमद अली ने मुसलमानों से बड़ी अपील की है. उन्होंने एक पत्र जारी कर सभी से कहा है कि इस बार होली और जुम्मा एक ही दिन है. इस बात को ध्यान में रखते हुए अगर होली के दिन किसी हिंदू भाई से गलती से रंग पड़ जाए तो उसका बुरा न मानें. रतलाम शहर काजी मौलवी सय्यद अहमद अली ने अपने पत्र में कहा, “जैसा कि आप सभी जानते हैं मुबारक महीना रमजान का चल रहा है. आने वाली 14 मार्च को जुमा और होली एक ही दिन है. इस बात के मद्देनजर आप मुस्लिम अवाम से खास अपील है कि अगर आप पर गलती से किसी हिंदू भाई से रंग पड़ जाय तो उसका बगैर बुरा मानें मुस्कुराकर अखलाक ए एहसन का मुजाहैरा करते हुए आगे बढ़ जाएं.” उन्होंने पत्र में आगे लिखा है, “अगर जान बूझकर भी आप पर कोई रंग डाल दे तो आप अपनें आका के एक मशहूर वाकये को याद करें. आप जब मदीने की गलियों से गुजरा करते थे तो एक बूढ़ी आप पर गंदा कचरा फेंका करती थी.” कल देश भर में होली खेली जानी है और इस मौके पर उलेमा लोगों से बाहर न निकलने की अपील कर रहे हैं. मध्य प्रदेश के रतलाम की मस्जिदों ने ऐलान किया है कि होली, धुलेडी रंगपचमी के दिन, नमाज़ के बाद मुस्लिम युवा सीधे अपने घरों का रुख करें और सड़कों पर घूमें. रतलाम में शहर-ए-काजी की अपील शहर-ए-काजी ने मुसलमानों से अपील की है कि अगर किसी मुसलमान के गलती से रंग लग जाता है तो झगड़ा न करें और न ही बुरा मानें. मुसकुराते हुए निकल जाएं. बता दें, कल यानी 14 मार्च को होली के साथ-साथ रमजान का जुमा भी है और इस मौके पर उलेमा लोगों से आपसी भाईचारे बनाने और घरों में रहने की अपील कर रहे हैं. पुलिस हुई एक्टिव रतलाम में होली और जुमा के मद्देनजर पुलिस पूरी तरह से एक्टिव है और सोशल मीडिया पर नजर रखी जा रही है. प्रशासन का कहना है कि माहौल बिगाड़ने वालों को बिलकुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. पुलिस के साथ हुई बैठक में इमाम मोहम्मद शबिर हसन ने कहा कि त्यौहार बड़े ही सौहार्द के साथ मने इसके लिए मस्जिदों से ऐलान किया जाएगा कि होली के दौरान तमाम नमाज़ी, खासतौर पर युवा नमाज के बाद अपने घरों का रुख करें. बेवजह सड़कों पर न घूमें. उम्मती होने के  नाते करें ये काम रतलाम शहर काजी मौलवी सय्यद अहमद अली के मुताबिक जब आका का ईमान गंदे कचरे से खराब नहीं हुआ और आपने बुरा नहीं माना तो आप उनके उम्मती होने के नाते सब्र और अखलाक ए एहसन का मुजाहैरा कर  आगे बढ़ जाएं. मौलवी सय्यद अहमद अली ने कहा, “रमजान के महीने में मुबारक का ख्याल करते हुए ज्यादा से ज्यादा नमाज पढ़ें. मस्जिदों को आबाद करें. फितनों और फसद से बचें. रतलाम शहर में शांति और भाईचारे के रिवाज को बनाए रखें. ताकि अमन और शांति प्रभावित न हों”

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय भोपाल ने होली के दौरान स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से बचने के लिए सलाह जारी की

भोपाल  होली एवं रंग पंचमी के अवसर पर चिकित्सालयों में आकस्मिक चिकित्सा व्यवस्था बनाए रखने के लिए सी एम एच ओ कार्यालय भोपाल द्वारा निर्देश जारी किए गए हैं। होलिका दहन, जुलूस एवं चल समारोह में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए आकस्मिक चिकित्सा के साथ 108 एंबुलेंस वाहनों को भी निर्धारित पॉइंट्स पर उपलब्ध रहने के निर्देश जारी किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने सलाह की जारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय भोपाल द्वारा होली के दौरान स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से बचने के लिए सलाह जारी की गई है । जिसमें केमिकल फ्री रंगों के उपयोग , पूरी बांह के कपड़ों को पहनने , रंगों में भीगने से पहले शरीर पर तेल या मॉश्चराइजर के उपयोग, अल्कोहल एवं अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रहने और चिकित्सकीय आपात स्थिति में तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेने हेतु कहा गया है। सतर्कता बरते मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ प्रभाकर तिवारी ने कहा कि होली और रंगपंचमी पर केमिकल वाले रंगों में लेड ऑक्साइड, कॉपर सल्फेट और माइका जैसे केमिकल्स का भी इस्तेमाल होता है। इस तरह के केमिकल्स से बने रंग उन लोगों को खासतौर पर काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं जिनकी त्वचा संवेदनशील होती है। केमिकल वाले रंगों से आंखों को भी बहुत नुकसान हो सकता है। इन रंगों के आंखों में जाने पर जलन या आंखें लाल हो सकती हैं। होली खेलने के दौरान या बाद में त्वचा में जलन, आंखों में धुंधलापन या खुजली हो अथवा सांस लेने में दिक्कत होने पर डॉक्टर से सलाह ली जाए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने होली पर प्रदेशवासियों को दीं बधाई और शुभकामनाएं

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सत्य,अधर्म एवं अत्याचार पर भक्ति की जीत के प्रतीक पर्व होली पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से होली की पवित्र अग्नि में सभी नकारात्मक तत्वों को समर्पित कर जीवन में मंगल और शुभता का वरदान मांगने का आव्हान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि होली पर हम सभी देश और समाज के प्रति अपने अमूल्य योगदान की सिद्धि का संकल्प लें।  

Holi Eyes Care Tips : होली खेलते समय आंखो को रंगो से बचाना हैं? तो अपनाएं ये नुस्खे

होली का त्योहार खुशियों और रंगों का प्रतीक होता है, और इस दिन सभी लोग जमकर होली खेलते हैं। हालांकि, इस रंगीन उत्सव के दौरान अपनी सेहत का भी ध्यान रखना जरूरी है, खासकर आंखों की सुरक्षा। केमिकल युक्त रंगों का इस्तेमाल न केवल हमारी त्वचा पर असर डालता है, बल्कि यह आंखों के लिए भी खतरनाक हो सकता है। इसलिए, होली के दौरान कुछ खास उपायों का पालन करना चाहिए, ताकि आपकी आंखें सुरक्षित रहें। आंखों को साफ पानी से धोए होली के दौरान अगर आंखों के आस-पास रंग लग जाए, तो इसे तुरंत पानी से धो लेना चाहिए। इसके अलावा, गुलाब जल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, क्योंकि यह आंखों से रंग और गंदगी हटाने में मदद करता है। गुलाब जल की ताजगी और शीतलता आपकी आंखों को आराम पहुंचाती है और जलन को कम करती है। सनग्लासेस पहनें, आंखों को सुरक्षित रखें केमिकल युक्त रंगों से बचने के लिए होली के दिन सनग्लासेस का इस्तेमाल बेहद जरूरी है। ये आपकी आंखों को रंगों से होने वाले नुकसान से बचाते हैं और केमिकल्स के प्रभाव को कम करते हैं। अगर आप संपर्क लेंस (कंटेक्ट लेंस) पहनते हैं, तो कोशिश करें कि डेली डिस्पोजेबल लेंस का उपयोग करें, क्योंकि इससे आंखों में संक्रमण का खतरा कम होता है। आंखों के साथ क्या न करें: इन बातों का रखें ध्यान     आंखों को बार-बार न रगड़ें: होली खेलते समय अगर आपकी आंखों में रंग लग जाए तो इसे बार-बार रगड़ने से बचें। हाथों पर लगे रंगों के कारण आंखों में जलन और संक्रमण हो सकता है। अगर आंखों में जलन या खुजली हो, तो आई टिश्यू वाइप्स का इस्तेमाल करें या साफ पानी से आंखों को धोएं।     आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल न करें: अगर होली के दौरान आपकी आंखों में कोई परेशानी हो, तो बिना डॉक्टर की सलाह के आई ड्रॉप्स का उपयोग न करें। स्टेरॉयड वाली आई ड्रॉप्स से बचें, क्योंकि ये तुरंत राहत देती हैं, लेकिन लंबे समय में आंखों की समस्या पैदा कर सकती हैं।

खुदरा कारोबारियों का संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने कहा- होली में 60 हजार करोड़ का होगा कारोबार

नई दिल्ली खुदरा कारोबारियों का संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने आज कहा कि इस वर्ष की होली में देश में 60 हजार करोड़ रुपये का कारोबार होने की संभावना है। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एवं चांदनी चौक से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने रविवार को बताया कि इस साल होली के मौके पर देशभर में 60 हजार करोड़ रुपये से अधिक के व्यापार होने की संभावना है, जो पिछले साल की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक है। पिछले वर्ष यही कारोबार लगभग 50 हज़ार करोड़ रुपये का था। श्री खंडेलवाल ने बताया कि कारोबारियों और ग्राहकों ने इस बार भी चीन में बने उत्पादों का बहिष्कार किया, जिससे भारतीय निर्मित हर्बल रंग, गुलाल, पिचकारी, मिठाइयां, ड्राई फ्रूट्स, परिधान, गिफ्ट आइटम और अन्य उत्पादों की बिक्री में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। होली के उत्सव ने छोटे कारोबारियों, खुदरा विक्रेताओं और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उपमक्र (एमएसएमई) क्षेत्र के लिए बड़े आर्थिक अवसर पैदा किए हैं। दिल्ली में ही आठ हजार करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होने की उम्मीद है, जहां बाजारों में रंग, गुलाल, पिचकारी, मिठाइयों और उपहारों की खरीदारी के लिए भीड़ उमड़ रही है। इस बार के होली सीजन में पारंपरिक भारतीय परिधानों जैसे सफेद कुर्ता-पाजामा, सलवार-सूट और “हैप्पी होली” लिखे टी-शर्ट की भी भारी मांग देखी जा रही है। कैट के अनुसार, देशभर में तीन हजार से अधिक होली मिलन समारोहों का आयोजन हो रहा है, जिससे होटल, बैंक्वेट हॉल, फार्महाउस और रेस्टोरेंट सेक्टर को भी लाभ मिल रहा है। बाज़ार में हर्बल रंगों और गुलाल की अधिक मांग है, जबकि केमिकल युक्त रंगों की लोकप्रियता घटी है। खासकर स्पाइडर मैन और छोटा भीम थीम वाली पिचकारी, गुलाल स्प्रे और प्रेशर टैंक पिचकारी बच्चों के बीच खूब पसंद की जा रही है। श्री खंडेलवाल ने कहा कि दिल्ली में 13 मार्च को होली जलाई जाएगी जबकि रंगों का पर्व 14 मार्च को मनाया जाएगा। होली के रंग में बाजार भी रंगे हुए नजर आने लगे हैं। बाजार में रंग बिरंगे गुलाल और पिचकारी के अलावा गुजिया के हार और मेवा से दुकानें सजी हुई है।बाजार में खरीददारी के लिए लोगों की प्रतिदिन बड़ती जा रही है। उन्होंने बताया कि होली पर रिश्तेदारों के यहां फल और मिठाई के साथ में मेवे की माला ले जाने की परंपरा के चलते खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ दुकानों पर लगी रही। इसके चलते बाजार में चहल पहल बनी हुई है। केमिकल युक्त गुलाल एवं रंग की बजाय हर्बल रंग, अबीर और गुलाल की सर्वाधिक मांग बाज़ारों में है वहीं गुब्बारे और पिचकारी की मांग पिछले सालों के मुक़ाबले कुछ ज़्यादा ही है। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री ने बताया कि इस बार बाजार में अलग-अलग तरह की पिचकारी गुब्बारे और अन्य आकर्षक आइटम आए हैं। प्रेशर वाली पिचकारी 100 रुपये से 350 रुपये तक की उपलब्ध है। टैंक के रूप में पिचकारी 100 रुपये से लेकर 400 रुपये तक में उपलब्ध है। इसके अलावा फैंसी पाइप की भी बाजार में धूम मची है। बच्चे स्पाइडर मैन, छोटा भीम आदि को बच्चे खूब पसंद कर रहे है वहीं गुलाल के स्प्रे की माँग बेहद हो रही है।

घर लें आएं ये होली से पहले 5 चीजें, मां लक्ष्मी की बरसेगी कृपा, होगा धन लाभ

 इस साल होलिका दहन 13 मार्च 2025 को है और इसके अगले दिन होली खेली जाएगी. रंगों का ये त्योहार होली परिवार में सुख और अपार प्रेम लेकर आता है. होली पर या होलिक दहन से पहले कई लोग वास्तु अनुसार उपाय करते हैं. मान्यता है इससे रोग, दोष, मानसिक और आर्थिक परेशानी से छुटकारा मिलता है. होली से पहले कुछ चीजों को घर लाने से व्यक्ति की सोई किस्मत जाग उठती है, सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह घर में बढ़ता है, साथ ही धन लक्ष्मी घर में वास करती हैं. होली से पहले घर में लाएं ये चीजें चांदी का सिक्का – होलिका दहन के दिन फाल्गुन पूर्णिमा होती है, इस दिन घर में चांदी का सिक्का, चांदी का हाथी लाना शुभ होता है. चांदी का सिक्का घर लाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है. इस दिन चांदी के सिक्के की पूजा कर इसे लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रख लें मान्यता है इससे घर में बरकत आती है. मां लक्ष्मी घर में वास करती हैं. इस दिन चांदी की बिछिया या पायल भी खरीद सकते हैं. बंदनवार – वास्तुशास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार पर बंदनवार यानी तोरण लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. इसलिए होली पर्व से पहले अपने घर पर मुख्य द्वार पर तोरण लगाएं. इससे से सकारात्मकता ऊर्जा का संचार बढ़ता है. बांस का पौधा – वास्तु में बांस का पौधा यानी बैम्बू ट्री को लकी प्लांट माना जाता है. होली पर आप अपने घर में बैम्बू ट्री भी ला सकते हैं. घर या ऑफिस में बांस का पौधा लगाने से अच्छे भाग्य की शुरुआत होती है एवं सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है. कछुआ – कछुए को भगवत स्वरुप माना जाता है. माना जाता है कि अगर आप होली पर्व पर धातु से बना कछुआ घर में लाते हैं तो इससे मां लक्ष्मी की कृपा घर पर बनी रहती है. लेकिन ध्यान रखें कि कछुए की पीठ पर श्रीयंत्र या कुबेर यंत्र बना होना चाहिए. होलिका की राख – होली से पहले होलिका दहन की पूजा होती है. अगले दिन होली पर होलिका की राख घर लाकर लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखे लें. कहते हैं इससे दरिद्रता दूर होती है.

ब्रज की होली में मुसलमानो के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध, BJP विधायक ने किया समर्थन, जानें क्या कहा?

मथुरा /पटना मथुरा के संतों ने होली पर ब्रज में मुस्लिमों की एंट्री बैन करने की मांग का बिहार के भाजपा विधायक हरिभूषण ठाकुर ने भी समर्थन किया है। उन्होंने साधु संतों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि निश्चित रूप से जो हमारी संस्कृति को नहीं मानते हैं, उन्हें ऐसे आयोजनों पर जाने से रोका जाना चाहिए। भाजपा के विधायक हरिभूषण ठाकुर ने कहा कि जिनके मदरसों में पढ़ाया जाता है कि चेहरे पर रंग लग जाने से अल्लाह दंड देगा, उन्हें रंगों के त्योहार में नहीं जाना चाहिए। अल्लाह देता है दंड- बीजेपी विधायक बीजेपी के विधायक हरिभूषण ठाकुर ने कहा कि जिनके मदरसों में पढ़ाया जाता है कि चेहरे पर रंग लग जाने से अल्लाह दंड देगा, उन्हें रंगों के त्योहार में नहीं जाना चाहिए. साधु संतों की मांग का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि जब वे हमारे देवी-देवता को नहीं मानते हैं, हमसे बैर रखते हैं, तो ऐसे किसी भी आयोजन में जहां सनातन संस्कृति का उत्सव हो, वहां मुस्लिम बंधुओं को नहीं जाना चाहिए. उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि उनके भी पूर्वज हिन्दू ही थे. मथुरा में धूमधाम से मनाई जाती है होली गौरतलब है कि मथुरा में होली धूमधाम से मनाई जाती है. इस बीच मथुरा के संतों ने एक सुर में इस समारोह में मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है. मथुरा के संतों का कहना है कि ब्रज की होली देखने देश-दुनिया से लोग मथुरा आते हैं. होली पर ब्रज में मुस्लिमों की एंट्री बैन होनी चाहिए. होली पर मुस्लिमों का क्या काम है? ब्रज में प्रयाग जैसा कानून लागू रहेगा. मुस्लिम होली में नहीं आने चाहिए. बिहार से भी मथुरा के साधु-संतों का समर्थन साधु-संतों की मांग का समर्थन करते हुए भाजपा के विधायक हरिभूषण ठाकुर ने कहा कि जब वे हमारे देवी-देवता को नहीं मानते हैं, हमसे बैर रखते हैं, तो ऐसे किसी भी आयोजन में जहां सनातन संस्कृति का उत्सव हो, वहां मुस्लिम बंधुओं को नहीं जाना चाहिए। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि उनके भी पूर्वज हिन्दू ही थे। ब्रज की होली में मुस्लिमों की एंट्री पर रोक मामला मथुरा में होली धूमधाम से मनाई जाती है। इस बीच मथुरा के संतों ने एक सुर में इस समारोह में मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है। मथुरा के संतों का कहना है कि ब्रज की होली देखने देश-दुनिया से लोग मथुरा आते हैं। होली पर ब्रज में मुस्लिमों की एंट्री बैन होनी चाहिए। होली पर मुस्लिमों का क्या काम है? ब्रज में प्रयाग जैसा कानून लागू रहेगा। मुस्लिम होली में नहीं आने चाहिए। देश-दुनिया से ब्रज की होली में शामिल होते हैं श्रद्धालु ब्रज की होली कई दिन पहले शुरू हो जाती है, उमंग और जोश यहां पर एक अलग ही स्तर पर देखने को मिलता है। यहां पर दूर-दूर से लोग होली खेलने के लिए आते हैं। इसकी शुरुआत राधा की जन्मस्थली बरसाना से होती है। बरसाने की लठमार होली भगवान कृष्ण के काल में उनके द्वारा की जाने वाली लीलाओं का एक हिस्सा माना जाता है। ब्रज में कई दिन पहले से शुरू हो जाती है होली ब्रज की होली कई दिन पहले शुरू हो जाती है, उमंग और जोश यहां पर एक अलग ही स्तर पर देखने को मिलता है. यहां पर दूर-दूर से लोग होली खेलने के लिए आते हैं. इसकी शुरुआत राधा की जन्मस्थली बरसाना से होती है. बरसाने की लठमार होली भगवान कृष्ण के काल में उनके द्वारा की जाने वाली लीलाओं का एक हिस्सा माना जाता है.

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