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काटजू अस्पताल में शुरू हुआ हाईटेक प्रिवेंटिव गायनेकोलॉजी सेंटर, मेनोपॉज और इन्फर्टिलिटी का इलाज एक ही जगह

भोपाल भोपाल के शासकीय कैलाश नाथ काटजू अस्पताल में महिलाओं के लिए एक बड़ी और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधा शुरू होने जा रही है। यहां “स्टेट ऑफ द आर्ट सेंटर फॉर प्रिवेंटिव गायनेकोलॉजी एंड इन्फर्टिलिटी” स्थापित किया जा रहा है।  करीब तीन करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक और हाईटेक मशीनें अस्पताल में पहुंच चुकी हैं और उनके इंस्टालेशन का काम लगभग पूरा हो गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस सेंटर को नवरात्र के दौरान शुरू किए जाने की तैयारी है। इस सेंटर के शुरू होने से मेनोपॉज, निसंतानता, पीसीओएस, मोटापा, अनियमित मासिक धर्म और सर्वाइकल कैंसर जैसी महिलाओं से जुड़ी कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज एक ही स्थान पर उपलब्ध होगा। अभी तक इन बीमारियों के इलाज के लिए महिलाओं को अलग-अलग अस्पतालों और विशेषज्ञों के पास जाना पड़ता था, लेकिन अब जांच से लेकर उपचार तक की सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिल सकेंगी। किशोरियों से महिलाओं तक 100 से अधिक रोगों का इलाज इस नए सेंटर में किशोरियों से लेकर वयस्क महिलाओं तक की स्वास्थ्य समस्याओं के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। यहां महिलाओं से जुड़े 100 से अधिक रोगों की जांच और इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, सेंटर के लिए ग्राउंड फ्लोर और ऊपरी मंजिलों में स्थान तय कर दिया गया है। यहां प्रजनन स्वास्थ्य से लेकर गर्भाशय कैंसर तक की बीमारियों के इलाज की व्यवस्था होगी। मेनोपॉज और हार्मोनल समस्याओं के लिए विशेष सुविधा काटजू अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ और सेंटर की स्टेट नोडल अधिकारी डॉ. रचना दुबे के अनुसार महिलाओं में आमतौर पर 45 से 50 वर्ष की उम्र के बीच मेनोपॉज की स्थिति शुरू होती है। इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजेन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है, जिससे हड्डियों से जुड़ी समस्याएं, हार्मोनल असंतुलन और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं सामने आती हैं। नए सेंटर में इन सभी समस्याओं के लिए विशेष परामर्श, जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इन्फर्टिलिटी और गर्भधारण से जुड़ी समस्याओं का इलाज इस सेंटर में बांझपन यानी इन्फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याओं के इलाज पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। यहां पीसीओएस, फाइब्रॉइड, हार्मोनल असंतुलन और अन्य स्त्री रोगों की जांच आधुनिक तकनीकों के माध्यम से की जाएगी। गर्भधारण में आ रही समस्याओं को दूर करने के लिए आईयूआई जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जाएगा। सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की समय पर पहचान बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस सेंटर में वीआईए तकनीक के माध्यम से कैंसर की शुरुआती जांच की जाएगी। इस तकनीक की मदद से गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का प्रारंभिक चरण में ही पता लगाया जा सकेगा, जिससे समय रहते इलाज संभव हो सकेगा और महिलाओं की जान बचाई जा सकेगी। आधुनिक मशीनों से होगा इलाज केगेल चेयर- पेल्विक फ्लोर मांसपेशियों को मजबूत करने वाली मशीन है। जिन महिलाओं को बच्चेदानी या पेल्विक मांसपेशियों के ढीले होने की समस्या होती है, उनमें बिना सर्जरी के उपचार संभव हो सकेगा। कोलपोस्कोप- मशीन के जरिए गर्भाशय ग्रीवा, योनि और संबंधित अंगों की गहन जांच की जाएगी। लेजर मशीन- इसके माध्यम से सिस्ट, मेनोपॉज से जुड़ी समस्याएं और यूरीन लीक जैसी बीमारियों का इलाज आसान हो जाएगा। रोगों की रोकथाम पर रहेगा विशेष फोकस विशेषज्ञों के अनुसार, यह सेंटर केवल इलाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महिलाओं में रोगों की रोकथाम और शुरुआती पहचान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। खराब जीवनशैली और बदलती जीवनशैली के कारण महिलाओं में कई स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसकी शुरुआत अक्सर पीसीओएस जैसी बीमारी से होती है। किशोरियों में बढ़ रही पीसीओएस की समस्या विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान समय में हर चार में से एक किशोरी में पीसीओएस के लक्षण देखने को मिल रहे हैं। वहीं अस्पतालों में आने वाली महिलाओं में भी लगभग आधी महिलाएं इसी समस्या से प्रभावित होती हैं। ऐसे में इस सेंटर के माध्यम से समय पर जांच और उपचार की सुविधा मिलने से महिलाओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। शिक्षा कार्यक्रम भी चलेंगे सेंटर की इंचार्ज डॉ. रचना दुबे के अनुसार इस सेंटर की तैयारी पिछले कई महीनों से की जा रही है और उम्मीद है कि यह क्लीनिक जल्द ही शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि यहां केवल जांच और इलाज ही नहीं होगा, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता और शिक्षा कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे।  

भोपाल में 6 प्राइवेट हॉस्पिटल पर खतरा, 1 अप्रैल से बंद होने का अलर्ट, सीएमएचओ ने नोटिस भेजा

भोपाल   राजधानी में लाइसेंस और पंजीयन का नवीनीकरण नहीं कराने वाले आधा दर्जन निजी अस्पतालों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है. मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय ने ऐसे 6 अस्पतालों को नोटिस जारी कर स्पष्ट किया है कि 31 मार्च 2026 के बाद बिना नवीनीकरण के उनका संचालन नहीं किया जा सकेगा. वहीं तय समय में आवेदन नहीं करने पर अब इन अस्पतालों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है. अस्पतालों के संचालन के लिए यह नियम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय भोपाल द्वारा शहर के 6 निजी अस्पतालों को लाइसेंस नवीनीकरण का आवेदन नहीं करने पर नोटिस जारी किया गया है. इन अस्पतालों ने निर्धारित समय सीमा के अंदर अपने अस्पताल के लाइसेंस और पंजीयन के नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया था. मध्यप्रदेश उपचारगृह व रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं (पंजीयन व अनुज्ञापन) अधिनियम 1973 व नियम 1997 (संशोधित 2021) के तहत निजी स्वास्थ्य संस्थानों का पंजीयन अनिवार्य है. इस अधिनियम की धारा 3 के अनुसार बिना पंजीयन के किसी भी निजी स्वास्थ्य संस्था का संचालन नहीं किया जा सकता. इन अस्पतालों को जारी किया गया नोटिस सीएमएचओ कार्यालय के अनुसार लालघाटी चौराहा स्थित जहरा अस्पताल, मोतिया तालाब रोड स्थित सरदार पटेल अस्पताल, कैपिटल पेट्रोल पंप के पास राय हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, बीडीए कॉलोनी गोदरमऊ गांधीनगर स्थित हेल्थ केयर हॉस्पिटल, दानिश कुंज कोलार रोड स्थित भगवती गौतम अस्पताल व सोनागिरी पिपलानी पेट्रोल पंप के पास स्थित सचिन ममता अस्पताल को नोटिस जारी किया गया है. ढाई महीने का समय देने के बाद भी नहीं कराया रिन्यू सीएमएचओ कार्यालय से अस्पताल संचालन के लिए पंजीयन और लाइसेंस लेना अनिवार्य होता है, जो हर तीन वर्ष के लिए जारी किया जाता है. इस वर्ष निजी अस्पतालों और क्लिनिकों को एनएचएस पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने के लिए करीब ढाई महीने का समय दिया गया था, लेकिन इन छह अस्पतालों ने निर्धारित अवधि में नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया. 31 मार्च के बाद होगी कार्रवाई मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. मनीष शर्मा ने बताया, ” नर्सिंग होम एक्ट के प्रावधानों के तहत रिन्यूअल आवेदन जमा नहीं करने पर इन अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया है. यदि 31 मार्च के बाद भी ये अस्पताल संचालित पाए गए तो उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.” डॉ. शर्मा ने बताया कि इसके साथ अन्या अस्पतालों का अनियमितताओं की भी जांच की जा रही है. यदि कोई कमी सामने आती है, तो ऐसे अस्पतालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.

आयुष्मान योजना में बदलाव: BPL कार्डधारकों को भी देना होगा जेब से खर्च, मुफ्त सेवा बंद

भोपाल   एमपी के भोपाल शहर में जयप्रकाश जिला अस्पताल में नि:शुल्क एमआरआइ जांच अचानक बंद हो गई है। पीपीपी मॉडल पर संचालित एमआरआइ केंद्र ने ओपीडी के मरीजों की मुफ्त जांच से इनकार कर दिया। आयुष्मान भारत और बीपीएल कार्डधारकों को अब इस जरूरी जांच के लिए कम से कम 1500 रुपए और जरूरत के अनुसार 3000 से 6000 रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं। पिछले दिनों तक जेपी अस्पताल में ओपीडी के आयुष्मान और बीपीएल कार्डधारकों को मुफ्त एमआरआइ जांच की सुविधा मिल रही थी। लेकिन सरकार द्वारा करीब 50 लाख रुपए से अधिक का भुगतान लंबित रहने पर एजेंसी ने हाथ खड़े कर दिए। बीते दिनों सात-आठ मरीजों की जांच से साफ इनकार कर दिया गया। इससे इलाज की रफ्तार थम गई और मरीजों की परेशानी बढ़ गई। अन्य जिलों में भी संकट, सेवाएं ठप भुगतान अटकने के कारण इंदौर और ग्वालियर के सरकारी अस्पतालों में भी आयुष्मान और बीपीएल कार्डधारकों की एमआरआइ सेवाएं प्रभावित हुई हैं। जिन मरीजों को तत्काल जांच की जरूरत है, उन्हें निजी खर्च पर जांच करानी पड़ रही है। तीनों जिलों में निजी एजेंसियों का दो करोड़ रुपए से अधिक भुगतान बकाया बताया जा रहा है। जल्द बजट जारी नहीं हुआ, तो सेवाएं भी ठप होने की आशंका है। सेंटर संचालक एजेंसी का कहना है कि पिछले एक साल से भुगतान नहीं मिला है। मशीनों की ईएमआइ, रखरखाव और स्टाफ का वेतन देना संभव नहीं हो पा रहा। कई बार शासन स्तर पर पत्राचार किया गया, लेकिन समाधान नहीं निकला। मजबूरी में मुफ्त सेवाएं बंद करनी पड़ीं। रतन सिंह, ऑपरेशन हेड, कृष्णा डायग्नॉस्टिक सेंटर प्रशासन का आश्वासन सीएमएचओ कार्यालय का कहना है कि बकाया भुगतान का मामला संज्ञान में है। भुगतान राज्य स्तर से होता है, इसलिए समय लग रहा है। संबंधित विभाग और आयुष्मान सेल से समन्वय कर जल्द बजट जारी कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि मरीजों को राहत मिल सके। डॉ. मनीष शर्मा, सीएमएचओ, भोपाल

दिन-रात के तापमान में बड़ा अंतर बना मुसीबत, इंदौर में मरीजों की संख्या में उछाल

इंदौर मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर अब लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। दिन में तेज धूप और गर्मी बढ़ी जबकि रात में ठंडक के कारण शरीर का संतुलन बिगड़ रहा है। इसका सीधा असर वायरल फीवर के रूप में सामने आ रहा है। एमवाय अस्पताल में ही एक दिन में करीब एक हजार मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। शहर के शासकीय और निजी अस्पतालों में बुखार, सर्दी-खांसी, गले में खराश और बदन दर्द की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि इस समय मौसम का उतार-चढ़ाव संक्रमण के लिए अनुकूल माहौल बना रहा है। दिन में पसीना और रात में ठंडी हवा चलने से लोग जल्दी बीमार पड़ रहे हैं। खासतौर पर वे लोग ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जो देर रात तक बाहर रहते हैं या ठंड-गर्मी के बीच लापरवाही बरतते हैं।   शादियों का सीजन भी बढ़ा रहा खतरा इन दिनों शादी समारोह का सीजन चल रहा है। देर रात तक कार्यक्रमों में शामिल होना, ठंडी चीजें खाना, नींद पूरी न होना और भीड़भाड़ में समय बिताने से भी वायरल संक्रमण फैलने की बड़ी वजह सामने आई है। डाक्टरों के अनुसार कई लोग हल्का बुखार या सर्दी होने के बाद भी इसे नजरअंदाज कर रहे हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो रही है। संक्रमण परिवार के अन्य लोगों तक भी फैल रहा है। गंभीर बीमारियों वाले मरीजों के लिए ज्यादा जोखिम शुगर, बीपी, कैंसर, ह्दय रोग, लिवर, अस्थमा, गर्भवती महिलाओं और किडनी से संबंधित बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए यह मौसम ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। वायरल फीवर होने पर इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों की रिकवरी धीमी हो जाती है। कई बार उनकी स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती तक कराना पड़ रहा है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण संक्रमण का असर ज्यादा समय तक बना रहता है। बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा असर डॉक्टरों के अनुसार छोटे बच्चों और बुजुर्गों में भी वायरल फीवर के मामले बढ़ रहे हैं। तापमान में अचानक बदलाव से उनकी इम्युनिटी जल्दी प्रभावित होती है, जिससे बुखार और खांसी लंबे समय तक बनी रहती है। ऐसे में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। बचाव ही सबसे बड़ा इलाज इस मौसम में हल्के गर्म कपड़े साथ रखना, ठंडी चीजों से परहेज करना और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सावधानी बरतना जरूरी है। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, फल-सब्जियां और भरपूर नींद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं।

अब इलाज के लिए नहीं करनी पड़ेगी लंबी यात्रा, 184 करोड़ से होंगे अस्पतालों का नवीनीकरण

ग्वालियर स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक, सुदृढ़ और मरीज-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने लगभग 184 करोड़ रुपए के प्रस्ताव को मंजूरी के लिए भोपाल भेज दिया है। यह प्रस्ताव वर्ष 2026-27 के एन्युअल प्लान के अंतर्गत तैयार किया गया है, जिसके लागू होने से शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के मरीजों को उन्नत सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बाहर के शहरों दिल्ली-मुबंई की यात्रा काफी हद तक कम हो जाएगी। डिजिटल क्रांति से बढ़ेगी पारदर्शिता और दक्षता प्रस्ताव में डिजिटल गवर्नेंस को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। जिला अस्पताल सहित प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों में अत्याधुनिक कंम्प्यूटर लैब स्थापित की जाएंगी। मरीजों का पंजीकरण, इलाज का रिकॉर्ड, रिपोर्टिंग और रेफरल सिस्टम पूरी तरह डिजिटल हो जाएगा। इससे समय की बचत के साथ पारदर्शिता बढ़ेगी।   डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को तकनीक- आधारित प्रशिक्षण भी मिलेगा। सीएमएचओ कार्यालय में 20 कंम्प्यूटरों वाली विशेष कंम्प्यूटर लैब बनाई जाएगी, जहां स्वास्थ्य कार्यक्रमों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग और डेटा एंट्री होगी। जननी सुरक्षा योजना और प्रसूता सहायता जैसी योजनाओं के भुगतान में गति और पारदर्शिता आएगी। बुनियादी ढांचे का मजबूत उन्नयन प्रस्ताव में अस्पतालों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर है। आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, वार्डों का विस्तार, साफ-सफाई व्यवस्था में सुधार और मरीजों की अन्य सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी। डॉ. सचिन श्रीवास्तव, सीएमएचओ, ग्वालियर ने बताया कि यह प्रस्ताव स्वास्थ्य सेवाओं के समग्र सुधार के लिए तैयार किया गया है। स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू हो जाएगा, जिससे जिले की स्वास्थ्य तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।   नए एनआरसी केंद्र स्थापित होंगे जिले में कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए विशेष फोकस किया गया है। भितरवार और बरई में दो नए पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) स्थापित करने का प्रस्ताव शामिल है। इन केंद्रों में कुपोषित बच्चों को विशेषज्ञ देखरेख, पोषण आहार और उचित इलाज मिलेगा। यह पहल ग्रामीण एवं पिछड़े इलाकों के लिए विशेष रूप से लाभदायक साबित होगी।

सागर बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में जल्द ही कैंसर अस्प‍ताल की सुविधा शुरू होगी, 6 जिलों के कैंसर मरीजों को मिलेगा लाभ

सागर  बुंदेलखंड का पहला सरकारी कैंसर अस्पताल सागर में खुलेगा. 80 बिस्तरों वाले इस अस्पताल के लिए जमीन चिन्हित कर ली गई है. इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 70 करोड़ का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था. इस पर सहमति भी बन चुकी है. अब सिर्फ नोटिफिकेशन जारी होना बाकी है. कैंसर अस्पताल को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज की यूनिट के रूप में संचालित किया जाएगा. बीएमसी प्रबंधन ने पीडब्ल्यूडी से बिल्डिंग का प्रस्ताव तैयार कराया है. वहीं, डॉक्टर, स्टाफ और मशीनरी के लिए अलग से प्रस्ताव भेजा गया है. जिला अस्पताल के पीछे वाले हिस्से में भवन बनेगा. यह सागर का पहला सरकारी कैंसर अस्पताल होगा. यहां कैंसर के मरीजों को उचित इलाज मिलेगा. बता दें कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बीते 23 दिसंबर को कैंसर अस्पताल की घोषणा की थी. अभी जाते थे मुंबई, नागपुर सागर संभागीय मुख्यालय पर कैंसर अस्पताल शुरू होने से आसपास के 5-6 जिलों के कैंसर मरीजों को इलाज मिल पाएगा. अभी कैंसर के मरीजों को मुंबई, नागपुर, भोपाल और इंदौर जाना पड़ता है. कैंसर मरीजों को लंबे समय तक अस्पताल में रखने की जरूरत होती है, जिससे परिजन आर्थिक तौर पर टूट जाते हैं. 6 जिलों के मरीजों को लाभ बुंदेलखंड अंचल में महिलाओं में ब्रेस्ट और पुरुषों में मुंह का कैंसर सबसे ज्यादा हो रहा है. युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं. बीएमसी और जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि सागर, टीकमगढ़, दमोह, छतरपुर, निवाड़ी और पन्ना जिलों से औसतन 5-6 मरीज कैंसर के पाए जा रहे हैं. प्रथम स्टेज में ही कैंसर की पहचान होने से बड़े जोखिम से बचा जा सकता है. कैंसर अस्पताल बनने से सर्जरी और कीमोथेरेपी की सुविधा मिल सकेगी. शासन को भेजा प्रस्ताव बीएमसी के डीन डॉ. प्रमेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि कैंसर अस्पताल भवन के लिए 70 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था. इसकी तकनीकी स्वीकृति जल्द आएगी. विशेषज्ञ, स्टाफ और मशीनरी के लिए अलग से प्रस्ताव भेजा गया है. उम्मीद है कि सागर में जल्द कैंसर अस्पताल शुरू होगा.  बुंदेलखंड क्षेत्र में कैंसर के मरीजों की निरंतर बढती संख्या, मरीज हित में स्वास्थ्य सुविधाओं में वृद्धि को देखते हुए कैंसर अस्पताल खोला जाना आवश्यक है। बीएमसी में स्वीकृत होगा न्यूरोसर्जन का पद खाद्य मंत्री राजपूत ने मुख्यमंत्री को बताया कि बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में पिछले 15 सालों से न्यू‍रोसर्जन का पद स्वीकृत नहीं है। जिससे हेड इंजरी के मरीजों को इलाज के लिए सागर से बाहर जाना पड़ता है। कई बार रास्ते में इलाज के अभाव में मरीज दम तोड़ देते हैं। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भरोसा दिया है कि जल्द ही मेडिकल कॉलेज सागर में न्यूरोसर्जन का पद स्वीकृत किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि बुंदेलखंड क्षेत्र के सागर संभाग में 6 जिले सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना और निवाड़ी को मिलाकर सागर संभाग की संख्या करीब 79 लाख है। बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय में सागर जिले और आसपास के जिलों के मरीज इलाज के लिए आते हैं। खाद्य मंत्री राजपूत ने कहा कि कैंसर एक गंभीर बीमारी है। जिससे मरीज को उपचार के लिए अन्य महानगरों में जाना पड़ता है और उन्हें कई बार आर्थिक समस्याओं से गुजरना पड़ता है। सागर जिले में कैंसर अस्पताल की सुविधा होने से इन सभी समस्याओं का निदान हो सकेगा। बीएमसी में जल्द कैंसर अस्पताल शुरू कराने का आश्वासन मुख्यमंत्री ने दिया है।

मध्य प्रदेश सरकार ने हेल्थ सेक्टर में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को बढ़ाने के लिए हेल्थ इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी 2020 में बदलाव

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने हेल्थ सेक्टर में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को बढ़ाने के लिए हेल्थ इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी 2020 में बदलाव कर नए सिरे से लागू करने की बात कही है। इस पॉलिसी के तहत छोटे शहरों में नए मल्टी और सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल खोलने पर 20 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी मिलेगी। यही नहीं इस काम को करने के लिए मोहन सरकार जमीन भी सस्ते दामों पर देगी और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त मदद भी करेगी। इससे दूर-दराज के इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होंगी। भोपाल, इंदौर जैसे बड़े शहर इस पॉलिसी में शामिल नहीं हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कदम मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए एक नई नीति बनाई है। इस नीति का नाम हेल्थ इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी है। इसके तहत अगर कोई निजी कंपनी छोटे शहरों में नए अस्पताल खोलती है, तो सरकार उन्हें अच्छी खासी मदद देगी। इससे लोगों को बेहतर इलाज मिल सकेगा और उन्हें बड़े शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। इस नीति से राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं का विकास होगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इस तरह काम करेगी सब्सिडी यह सब्सिडी अधिकतम 100 बेड वाले मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल और 50 बेड वाले सुपर-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के लिए उपलब्ध होगी। यह बी और सी कैटेगरी के शहरों पर लागू होगी। अगर कोई कंपनी 75 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश करती है, तो उसे सीसीआईपी के तहत और भी छूट मिल सकती है। बी कैटेगरी के जिलों में मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के लिए 15 करोड़ और सी कैटेगरी के लिए 20 करोड़ रुपये की सब्सिडी मिलेगी। सुपर-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के लिए बी कैटेगरी में 12 करोड़ और सी कैटेगरी में 16 करोड़ रुपये की सब्सिडी का प्रावधान है। यह सब्सिडी 7 सालों में बराबर किस्तों में दी जाएगी।

विधानसभा अध्यक्ष के निरीक्षण का असर, राजस्थान-अजमेर के अस्पताल में अब इमरजेंसी वार्ड में ही होगी सोनोग्राफी

जयपुर। विधानसभा अध्यक्ष श्वासुदेव देवनानी द्वारा रविवार को अजमेर के जवाहर लाल नेहरू अस्पताल के औचक निरीक्षण का असर अब सामने आ रहा है। देवनानी की नाराजगी और कार्रवाई के निर्देशों के बाद अस्पताल प्रशासन ने अब इमरजेंसी वार्ड में ही सोनोग्राफी कराने का निर्णय लिया है। इससे परेशानी में अस्पताल आने वाले मरीजों को राहत मिलेगी। गौरतलब है कि विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने गत रविवार को जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया था। इस निरीक्षण में अस्पताल के सोनोग्राफी कक्ष पर ताला लटका देखकर विधानसभा अध्यक्ष ने नाराजगी जताई थी। उन्होंने सोनोग्राफी कक्ष का ताला खुलवाकर मरीजों को राहत दिलवाई थी। उन्होंने अस्पताल को निर्देश दिए थे कि आमजन को राहत प्रदान करने के लिए एक सोनोग्राफी मशीन इमरजेंसी वार्ड में लगाकर प्रशिक्षित स्टॉफ लगाया जाए। उन्होंने अन्य व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश भी दिए थे। देवनानी के निर्देश और उनकी नाराजगी के बाद अस्पताल प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए एक सोनोग्राफी मशीन इमरजेंसी वार्ड में ही लगाने का निर्णय किया है। यह सोनोग्राफी मशीन लगने से अस्पताल में आने वाले मरीजों को बहुत राहत मिलेगी।

बाहर से आयी युवती को मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उसे कल भिंड अस्पताल में भर्ती कराया गया

भिंड मध्यप्रदेश के भिंड जिले के अटेर थाना क्षेत्र के काशीपुरा गांव में लगभग 22 साल की एक युवती को ग्रामीणों ने पुलिस की मदद से अस्पताल में भर्ती करवाया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार लड़की कथित तौर पर दिल्ली की रहने वाली है और विक्षिप्त बताई जा रही है। एक युवक उसे अपने साथ लेकर आया था। विवाद होने पर ग्रामीणों ने हस्तक्षेप किया, तो वह डिडी गांव के एक स्थान पर छोड़कर भाग गया। सूत्रों ने कहा कि काशीपुरा गांव निवासी युवक के दिल्ली से एक विक्षिप्त युवती को अपने साथ लेकर आने की सूचना मिली थी। दोनों बस से भिंड पहुंचे। युवक बस से उतरकर लड़की को गांव ले जाने लगा, तो उसने जाने से मना कर दिया। इस बात पर दोनों में विवाद होने लगा। डिडी गांव के पास ग्रामीणों ने दोनों को रोकने की कोशिश की। आखिरकार युवक उसे डिडी गांव के मंदिर पर छोड़कर चला गया। रात्रि में लड़की मंदिर परिसर में रुकी रही। लड़की की मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उसे कल भिंड अस्पताल में भर्ती कराया गया। भिंड देहात थाना पुलिस ने आज यहां बताया युवती को जिला अस्पताल में भर्ती कराके उसकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। युवक की पहचान और उसे खोजने के प्रयास भी किए जा रहे हैं, जो लड़की को कथित तौर पर दिल्ली से लेकर आया था।  

पति की मौत, अस्पताल ने गर्भवती पत्नी से साफ कराया बेड पर लगा खून, झकझोर देगा डिंडौरी का मामला

डिंडोरी मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले से समाज की मानवता शर्मसार करने वाला वीडियो सामने आया है। यहां एक गर्भवती महिला उस अस्पताल के बिस्तर को साफ करती हुई दिख रही है जिस पर कुछ समय पहले उसके पति की गोली लगने से मौत हुई थी। मामला डिंडोरी हत्याकांड से जुड़ा हुआ है। घटना गुरुवार को हुई जब जमीन विवाद में चार लोगों को गोली मार दी गई थी। महिला का पति भी इस घटना में घायल हो गया था और अस्पताल में उसकी मौत हो गई। अस्पताल का दावा है कि महिला ने खुद ही खून साफ करने की बात कही थी ताकि सबूत इकट्ठा कर सके, लेकिन इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद लोगों में आक्रोश है। जानें क्या है पूरा मामला डिंडोरी के लालपुर गांव में गुरुवार को जमीन विवाद में एक ही परिवार के चार लोगों को गोली मार दी गई। मृतकों में पिता और एक बेटा शामिल हैं, जबकि दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में से एक शिवराज की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। शिवराज की पत्नी रोशनी पांच महीने की गर्भवती है। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो वायरल वीडियो में रोशनी एक हाथ में खून से सना कपड़ा पकड़े हुए दिख रही है और दूसरे हाथ से टिशू पेपर से बिस्तर साफ कर रही है। यह घटना गदासराय स्वास्थ्य केंद्र की बताई जा रही है। घटना के वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का स्वास्थ्य विभाग और समाज के प्रति गुस्सा देखा जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन का कहना वहीं अस्पताल के डॉक्टर ने चंद्रशेखर टेकाम ने सफाई देते हुए बताया कि स्टाफ मौजूद था। महिला को बिस्तर साफ करने के लिए नहीं कहा गया था। उन्होंने कहा कि गुरुवार को जमीन विवाद में घायल दो लोग हमारे केंद्र लाए गए थे। जिस व्यक्ति की मौत हुई, उसकी पत्नी ने हमसे कहा कि उसे बिस्तर से खून पोंछने दिया जाए ताकि वह इसका इस्तेमाल सबूत के तौर पर कर सके। उसे बिस्तर साफ करने के लिए नहीं कहा गया था। मुझे महिला या उसके परिवार से कोई शिकायत नहीं मिली है।

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