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MP में प्रशासनिक कार्रवाई की शुरुआत, 2 दर्जन SP के ट्रांसफर, ये रहे प्रमुख नाम

भोपाल  मध्य प्रदेश में IPS अफसरों की ट्रांसफर को लेकर हलचल तेज है। होली, रंगपंचमी बीत चुके हैं और ईद आने वाली है और साथ ही हिंदू नववर्ष भी शुरु होने वाला है। अब प्रशासनिक स्ट्राइक की बारी है। एमपी में आईपीएस अफसरों की तबादला सूची लगभग तैयार हो चुकी है। मध्यप्रदेश में पुलिस विभाग में बड़े स्तर पर तबादलों की तैयारी है। सूत्रों के अनुसार करीब 20 जिलों में एसपी बदले जा सकते हैं और जल्द ही तबादला सूची जारी होने की संभावना है। प्रस्तावित सूची में करीब 20 जिलों में नए एसपी की पदस्थापना हो सकती है। जिन जिलों में बदलाव की संभावना है। इनकी सूची नीचे है… इन जिलों के एसपी बदले जा सकते हैं शाजापुर से यशपाल सिंह राजपूत, शिवपुरी से अमन सिंह राठौर,डिंडौरी से वाहिनी सिंह, मंडला से  रजत सकलेचा, छतरपुर से अगम जैन, बुरहानपुर से देवेंद्र कुमार पाटीदार, निवाड़ी से राय सिंह नरवरिया, नीमच से अंकित जायसवाल, दमोह से श्रुतकीर्ति सोमवंशी, सिवनी से सुनील कुमार मेहता, आगर मालवा से विनोद कुमार सिंह, ग्वालियर से धर्मवीर सिंह, उज्जैन से प्रदीप शर्मा, जबलपुर से संपत उपाध्याय के नाम शामिल हैं। कहा जा रहा है कि  गृह विभाग इसा दिशा में तैयारी कर चुका है और कभी भी आदेश जारी हो सकते हैं। तबादला सूची में सबसे ज्यादा फायदा 2020 बैच के पांच आईपीएस अफसरों को होगा, जिन्हें जिलों में एसपी पद की कमान सौंपी जाएगी। क्योंकि अब तक 2019 बैच के आईपीएस भी जिलों में एसपी पद पर आ चुके हैं। इसके अलावा कोर्ट के आदेश से प्रमोटी आईपीएस बने अधिकारी भी जिले के एसपी बन सकते हैं।

एमपी के 40 IAS अधिकारी पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में तैनात, आयोग ने भेजे ऑब्जर्वर

भोपाल  देश के विभिन्न राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों के लिए मध्य प्रदेश कैडर के 40 भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों को चुनावी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन अधिकारियों को चुनाव आयोग द्वारा अलग-अलग राज्यों में प्रेक्षक (ऑब्जर्वर) के रूप में तैनात किया गया है। इससे प्रदेश सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों के कामकाज पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भारत निर्वाचन आयोग ने प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के कई वरिष्ठ और अनुभवी आईएएस अधिकारियों को चुनावी प्रक्रिया की निगरानी के लिए तैनात किया गया है। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी चुनावी व्यवस्थाओं की समीक्षा करना, निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करना और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर नजर रखना होगी।  जिन राज्यों में इन अधिकारियों को प्रेक्षक बनाया गया है, उनमें पश्चिम बंगाल, तमिलनाडू, केरला, पुडुचेंरी और आसाम शामिल हैं। इन राज्यों में चुनावी प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक निगरानी को मजबूत करने के लिए अनुभवी अधिकारियों की तैनाती की गई है। मध्य प्रदेश से जिन अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी गई है, उनमें प्रमुख रूप से प्रमुख सचिव संदीप यादव, जॉन किंग्सले, श्रीमन शुक्ला, स्वतंत्र कुमार सिंह, शिल्पा गुप्ता, सिबी चक्रवर्ती, अजय कटसेरिया, निधि निवेदिता, रोहित सिंह और अनुराग वर्मा के नाम शामिल हैं। इसके अलावा राहुल फटिंग हरिदास, दीपक आर्य, हरहिका सिंह, आशीष भार्गव, अभिजीत अग्रवाल, दिलीप कुमार, वंदना वैद्य, सपना निगम, केवीएस चौधरी, मनीष सिंह, प्रबल सिपाहा, सौरव सुमन, अवि प्रसाद, सतेंद्र सिंह और बुद्धेश वैद्य सहित अन्य अधिकारी भी चुनाव ड्यूटी पर भेजे गए हैं। सूत्रों के अनुसार सूची जारी होने के बाद कुछ अधिकारियों ने अपनी चुनावी ड्यूटी निरस्त कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी। हालांकि अंतिम निर्णय चुनाव आयोग के स्तर पर ही लिया जाएगा। वहीं, यह भी चर्चा है कि इनमें कई अधिकारी राज्य सरकार के महत्वपूर्ण विभागों में कार्यरत हैं। ऐसे में उनके चुनावी ड्यूटी पर जाने से विभागीय कामकाज की गति कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकती है।   

IAS मनु के पास सबसे ज्यादा संपत्ति, मुख्य सचिव से 4 गुना अधिक; MP के 12 कलेक्टरों के पास अपना घर नहीं

भोपाल   प्रदेश में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) मनु श्रीवास्तव एमपी में तैनात एसीएस स्तर के अफसरों में सबसे अमीर आइएएस हैं। उनके पास 19.50 करोड़ की अचल संपत्ति है। जबकि स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा एसीएस अशोक बर्णवाल पगार के अलावा अपनी संपत्तियों से सबसे अधिक कमाने वाले अफसर हैं। बर्णवाल के पास 7.50 करोड़ की संपत्ति है। इससे उन्हें हर साल 23.68 लाख रुपए आय हो रही है।  MP में 391 IAS अधिकारियों में अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव सबसे अमीर हैं। उनके पास 19 करोड़ 50 लाख रुपए की संपत्ति है, जबकि मुख्य सचिव अनुराग जैन के पास 4 करोड़ 15 लाख रुपए की संपत्ति है। इस तरह मनु श्रीवास्तव की संपत्ति अनुराग जैन से लगभग 4.7 गुना अधिक है। इसके अलावा प्रदेश के 55 जिलों के कलेक्टरों में से 12 जिलों के कलेक्टरों के पास न तो अपना घर है और न ही खेती की जमीन है। इन अधिकारियों ने अपनी अचल संपत्ति निल बताई है। वहीं 17 कलेक्टर ऐसे भी हैं, जिनके पास मकान और दुकान के साथ-साथ खेती की जमीन भी है। कलेक्टरों में किशोर कन्याल सबसे अमीर जिला कलेक्टरों में गुना कलेक्टर किशोर कन्याल सबसे अधिक संपत्ति वाले अधिकारी हैं। उनके पास करीब 3 करोड़ 18 लाख रुपए की संपत्ति है। उनके पास दो मकान, एक प्लॉट और कृषि भूमि है, जो भोपाल, उत्तर प्रदेश और नोएडा में स्थित है। विवेक अग्रवाल के पास सबसे अधिक जमीन केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी विवेक अग्रवाल के पास सबसे अधिक जमीन है। उनके पास भटिंडा, गंगानगर, सिरसा, मुक्तसर, पंचकुला, मुल्लानपुर, इंदौर और भोपाल में मिलाकर करीब 65 एकड़ किसान जमीन है। इसके अलावा इंदौर के अपर कलेक्टर नवजीवन पवार के पास सबसे अधिक 20 अलग-अलग प्रॉपर्टी दर्ज हैं। 16 साल में 4.5 लाख का प्लॉट घटकर 1 लाख का हुआ इन सबके बीच नर्मदापुरम कलेक्टर सोनिया मीणा का मामला अलग नजर आता है। वर्ष 2010 में उन्होंने 4.5 लाख रुपए में एक प्लॉट खरीदा था। आमतौर पर समय के साथ प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ती है, लेकिन इस मामले में उल्टा हुआ। 4 लाख 50 हजार रुपए का वह प्लॉट अब घटकर केवल 1 लाख रुपए का रह गया है। यानी करीब 16 साल में उस प्लॉट की कीमत लगभग 4.5 गुना कम हो गई है। मुख्य सचिव अनुराग जैन के पास कुल 4.14 करोड़ की संपत्ति मध्य प्रदेश के प्रशासनिक मुखिया यानी प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन के पास कुल 4.14 करोड़ कीमत की अचल संपत्ति है. हालांकि उनके पास 3 राज्यों में संपत्ति है. इसमें भोपाल के प्रेमपुरा नगर में भूखंड, उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में 79 लाख कीमत का एक अंडरकंस्ट्रक्शन फ्लैट, जयपुर में एक फ्लैट और शिवाजी नगर भोपाल में 2 करोड़ 72 लाख कीमत का एक मकान है। अलका उपाध्याय के पास करोड़ों की संपत्ति,नहीं दर्शाई कीमत राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में सेक्रेटरी और मध्य प्रदेश कैडर की 1990 बैच की आईएएस अलका उपाध्याय के पास दिल्ली, गुडगांव और भोपाल में मकान, भूखंड हैं. गुडगांव में 2930 स्क्वायर फीट का फ्लैट, दिल्ली में 3244 स्क्वायर फीट पर निर्मित मकान, भोपाल में करीब 1 हजार स्क्वायर मीटर का प्लॉट है. इसके अलावा नर्मदापुरम जिले में 2 हेक्टेयर कृषि भूमि है, जो उन्हें अपने पिता से मिली है. उन्होंने प्रॉपर्टी की मौजूदा कीमत नहीं बताई है।  अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा भी करोड़पति 1990 बैच के आईएएस अधिकारी और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण में अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा के पास भोपाल के मिंडोरी में 163.4 एकड़ कृषि भूमि है. इसकी कीमत उन्होंने 48 लाख रुपए बताई है. गुजरात के अहमदाबाद में 50 लाख रुपए कीमत का एक ऑफिस, मिंडोरी में 0.25 एकड़ भूमि इसकी कीमत 27 लाख रुपए दिखाई गई है. भोपाल के सेमरी बजाफ्त में 0.580 हेक्टेयर भूमि कीमत 28.92 लाख और मिडोरी में 0.25 एकड़ कृषि भूमि है. इसकी कीमत 20 लाख दिखाई गई है।  अशोक वर्णवाल के पास 7 करोड़ 50 लाख की संपत्ति वर्ष 1990 बैच के अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल के पास कुल अचल संपत्ति 7 करोड़ 50 लाख है. भोपाल के बिसनखेड़ी में 0.202 हेक्टेयर कृषि भूमि, झारखंड के डुमरी में 1200 स्क्वायर फीट का दो मंजिला मकान, बिसनखेड़ी में 0.202 हेक्टेयर कृषि भूमि और बावड़िया कला में फ्लैट भी है. इसके अलावा बावड़िया कला भोपाल में 2 फ्लैट हैं. इनकी कीमत 4.50 करोड़ रुपए है।  मनोज गोविल के पास 2 करोड़ 64 लाख की अचल संपत्ति 1991 बैच के आईएएस अधिकारी दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ मनोज गोविल ने कुल अचल संपत्ति 2 करोड़ 64 लाख दशाई है. भोपाल के तुलसी नगर में उनका एक फ्लैट, गुडगांव, हरियाणा में एक फ्लैट है।  अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव के पास 20 करोड़ की अचल संपत्ति 1991 बैच के नवकरर्णीय ऊर्जा में अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव का प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में पुस्तैनी 699.86 स्क्वायर मीटर का मकान है, इसकी कीमत 16 करोड़ रुपए है. इसके अलावा गौतम बुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश में 3.50 करोड़ रुपए कीमत का एक प्लॉट है।  आशीष श्रीवास्तव भी करोड़पति, नहीं दर्शाई संपत्ति की कीमत 1992 बैच के आईएएस और दिल्ली में केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ आशीष श्रीवास्तव के पास भोपाल के गौंदरमऊ में 240 स्क्वायर मीटर प्लॉट और हरियाणा गुरूग्राम में 2 फ्लैट हैं. इसकी खरीद के समय कीमत 66 लाख रुपए दर्शाई गई है. अपर मुख्य सचिव कैलाश चंद्र गुप्ता के पास करोड़ों की संपत्ति 1992 बैच के आईएएस अपर मुख्य सचिव कैलाश चंद्र गुप्ता के पास जाटखेड़ी, भोपाल में 3858 स्क्वायर फीट पर निर्मित मकान, कटारा, भोपाल में 0.1़6 हेक्टेयर कृषि भूमि, गौहरगंज रायसेन में 220 स्क्वायर मीटर का प्लॉट, इंदौर में 6877 स्क्वायर फीट का प्लॉट और अरेरा कॉलोनी, भोपाल में 588 स्क्वायर मीटर पर मकान है, जिसकी खरीद के समय कीमत 3.95 करोड़ रुपए थी।  वीएल कांताराव के पास भोपाल, तमिलनाडु में करोड़ों की संपत्ति 1992 बैच के आईएएस और केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में पदस्थ वीएल कांताराव का कटारा हिल्स, भोपाल में 0.75 एकड़ भूमि और कांजीपुरम, तमिलनाडु में 2500 स्क्वायर फीट का प्लॉट है।  अनिरूद्ध मुखर्जी के पास 8 करोड़ 45 लाख की संपत्ति 1993 बैच … Read more

प्रमोशन में देरी से प्रभावित प्रशासनिक कैडर, एमपी में 68 IAS, 48 IPS और 87 IFS पदों की कमी

भोपाल  मध्यप्रदेश में अखिल भारतीय सेवाओं के प्रमोशन में लगातार हो रही देरी अब प्रशासनिक ढांचे पर सीधा असर डालने लगी है। हालात यह हैं कि राज्य में आईएएस,आईपीएस और आईएफएस कैडर के कुल 203 पद खाली पड़े हैं। इससे प्रशासनिक कामकाज, कानून-व्यवस्था और वन प्रबंधन तीनों क्षेत्रों में दबाव बढ़ गया है। 3 कैडर, 203 पद खाली सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में आईएएस के 68 पद, आईपीएस के 48 पद और आईएफएस के 87 पद रिक्त हैं। इन पदों के खाली रहने से कई जिलों में स्थायी कलेक्टर, एसपी और डीएफओ की नियुक्ति नहीं हो पा रही है। प्रमोटी अफसरों को नहीं मिल पा रहा पूरा मौका प्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा और राज्य वन सेवा से प्रमोट होकर आने वाले अधिकारियों को सीमित अवसर मिल पा रहे हैं। कई अफसर वर्षों से प्रतीक्षा सूची में हैं, लेकिन केंद्र से समय पर स्वीकृति और कैडर रिव्यू नहीं होने से प्रमोशन अटका हुआ है। केंद्र–राज्य समन्वय की कमी सूत्रों के अनुसार, अखिल भारतीय सेवाओं में भर्ती और प्रमोशन की प्रक्रिया केंद्र सरकार से जुड़ी होती है। कैडर स्ट्रेंथ बढ़ाने और रिक्त पद भरने के प्रस्ताव भेजे गए हैं, लेकिन लंबे समय से निर्णय नहीं हो पाया है। इसका सीधा असर राज्य के प्रशासनिक संचालन पर पड़ रहा है। जिले और विभाग अतिरिक्त प्रभार पर कई जिलों में एक ही अधिकारी के पास दो-दो या तीन-तीन जिलों का प्रभार है। वहीं, पुलिस और वन विभाग में भी वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। इससे निर्णय प्रक्रिया धीमी हो रही है और फील्ड लेवल पर निगरानी कमजोर पड़ रही है। आने वाले समय में और बढ़ेगी चुनौती विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही प्रमोशन और नई भर्ती की प्रक्रिया तेज नहीं की गई, तो आगामी वर्षों में रिटायरमेंट के चलते स्थिति और गंभीर हो सकती है। इसका असर विकास कार्यों,कानून-व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण पर साफ दिखाई देगा। प्रमोशन समय पर हों तो सुधार की गुंजाइश इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि संघ लोक सेवा आयोग की भर्ती के अलावा राज्यों में प्रमोशन से भरने वाले पदों के जरिये इस रिक्तता को कम किया जा सकता है लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग, गृह विभाग और वन विभाग के अफसरों की लापरवाही और देरी के चलते तीनों ही कैडर की डीपीसी समय से नहीं हो रही है और इसका असर पद रिक्त होने के रूप में साफ दिख रहा है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा प्रशासनिक अनुभव की टाइम लिमिट को भी जिम्मेदार बताया जा रहा है। प्रशासनिक और नीतिगत कामों पर सीधा असर अधिकारियों का मानना ​​है कि स्वीकृत पदों के न भर पाने से कई दिक्कतें होती हैं। हालांकि पद रिक्त रहने के कई संरचनात्मक कारण भी बताए जा रहे हैं। संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से वार्षिक भर्ती सीमित है, जबकि हर साल सेवानिवृत्ति जारी हैं। राज्य सिविल सेवाओं से आईएएस में अधिकारियों की पदोन्नति में देरी ने भी इस अंतर को और बढ़ा दिया है। इसके अलावा कई राज्यों ने भर्ती में समानुपातिक वृद्धि किए बिना अपने कैडर की संख्या बढ़ा दी है।  

टूटी झोपड़ी से IAS तक का सफर, चाय बेचने वाले पिता के बेटे ने रचा इतिहास

जयपुर कहते हैं अगर इरादे मजबूत हों तो हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, रास्ता निकल ही आता है। यह बात सच साबित करते हैं देशल दान चरण, जिन्होंने बेहद साधारण परिवार से निकलकर देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली परीक्षा पास की और आईएएस बनने का सपना पूरा किया। उनकी कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित साधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। छोटे से गांव से शुरू हुआ सफर देशल दान चरण मूल रूप से राजस्थान के सुमलाई गांव से आते हैं। उनका परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर था। उनके पिता कुशल दान चरण एक छोटी सी चाय की दुकान चलाते थे। इसी दुकान की कमाई से दस लोगों का परिवार चलता था। घर की हालत ऐसी थी कि रोजमर्रा के खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाता था। कई बार बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए पिता को कर्ज लेना पड़ता था। लेकिन उन्होंने कभी भी बच्चों को पढ़ाई छोड़कर काम करने के लिए मजबूर नहीं किया। उनका मानना था कि शिक्षा ही वह रास्ता है जो गरीबी से बाहर निकाल सकता है। पिता का विश्वास बना सबसे बड़ी ताकत देशल के पिता हमेशा कहते थे कि हालात चाहे जैसे हों, पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए। घर में पैसों की कमी थी, लेकिन सपनों की नहीं। यही सोच बच्चों के अंदर भी बैठ गई। कम संसाधनों में पढ़ाई करना आसान नहीं था। न अच्छे कोचिंग संस्थान, न सुविधाएं, न पढ़ाई का माहौल। लेकिन देशल ने ध्यान भटकने नहीं दिया। उन्होंने अपनी पढ़ाई पर पूरा फोकस रखा और हर परिस्थिति को चुनौती की तरह लिया। परिवार पर टूटा बड़ा दुख, फिर भी नहीं डगमगाए जब देशल दसवीं कक्षा में थे, तब उनके परिवार पर एक बड़ा दुख आ पड़ा। उनके बड़े भाई, जो नौसेना में थे, एक पनडुब्बी दुर्घटना में शहीद हो गए। इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर दिया। घर का माहौल बदल गया। दुख, जिम्मेदारियां और आर्थिक दबाव सब एक साथ आ गए। लेकिन इसी समय देशल ने ठान लिया कि अब उन्हें अपने परिवार को संभालने के लिए कुछ बड़ा करना है। उन्होंने इस दर्द को कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बना लिया। इंजीनियर बनने का सपना और पहली बड़ी सफलता देशल का सपना इंजीनियर बनने का था। उन्होंने जेईई मेन परीक्षा की तैयारी शुरू की। सीमित साधनों के बावजूद उन्होंने खुद पर भरोसा रखा और पहले ही प्रयास में परीक्षा अच्छे अंकों से पास कर ली। इसके बाद उन्हें भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान जबलपुर में दाखिला मिला। यह उनके जीवन का पहला बड़ा मोड़ था। गांव से निकलकर एक प्रतिष्ठित संस्थान तक पहुंचना उनके संघर्ष का पहला फल था। यहां से बदला सोचने का नजरिया इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान देशल ने महसूस किया कि वह सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि समाज के लिए कुछ बड़ा करना चाहते हैं। यहीं से उनके मन में सिविल सेवा में जाने का विचार आया। उन्होंने तय किया कि अब लक्ष्य होगा देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा में जाना। यह रास्ता आसान नहीं था, क्योंकि संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा को देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षा माना जाता है। यूपीएससी की तैयारी, अनुशासन और धैर्य की परीक्षा यूपीएससी की तैयारी केवल पढ़ाई नहीं, बल्कि धैर्य, मानसिक मजबूती और लगातार मेहनत की मांग करती है। देशल ने बिना किसी शोर-शराबे के, बिना दिखावे के, चुपचाप तैयारी शुरू की। उन्होंने अपनी दिनचर्या सख्त बनाई। समय का पूरा उपयोग किया। कमजोर विषयों पर ज्यादा मेहनत की और लगातार खुद को बेहतर बनाते रहे। उनकी रणनीति साफ थी, कम संसाधन हैं तो मेहनत दोगुनी करनी होगी। संघर्ष से निकली सफलता की कहानी देशल दान चरण ने यह साबित कर दिया कि सफलता किसी बड़े शहर, अमीर परिवार या महंगी कोचिंग की मोहताज नहीं होती। अगर लक्ष्य साफ हो और मेहनत ईमानदार हो, तो एक चाय बेचने वाले का बेटा भी आईएएस बन सकता है। उनकी कहानी सिर्फ परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि उस विश्वास की कहानी है जो एक पिता ने अपने बच्चों की पढ़ाई पर रखा, और उस बेटे की जिसने उस विश्वास को सच कर दिखाया।

गुना कलेक्टर की संवेदनशीलता और मानवीयता ने लोगों का ध्यान खींचा, मिली सरहाना

गुना  मध्य प्रदेश के गुना में कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह एक दिव्यांग को व्हीलचेयर पर सहारा देते नजर आ रहे हैं. इस मानवीय संवेदना से भरे कृत्य ने लोगों का दिल जीत लिया है.  एक हादसे में अपने पैर गंवा चुके दिव्यांग हरवीर रजक अपनी पत्नी के साथ जनसुनवाई में कलेक्टर कन्याल के पास पहुंचे थे. उन्होंने व्हीलचेयर और पेंशन की गुहार लगाई. कलेक्टर ने तत्काल कार्रवाई करते हुए हरवीर को नई व्हीलचेयर, 10 हजार रुपए की आर्थिक सहायता और प्रतिमाह 600 रुपये की दिव्यांग पेंशन स्वीकृत कराई. पेंशन को जनपद पंचायत गुना के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा पेंशन पोर्टल के माध्यम से प्रभावी किया गया. कलेक्टर कन्याल ने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के प्रभारी उपसंचालक अब्दुल गफ्फार को त्वरित निर्देश दिए. इतना ही नहीं, वह इतने भावुक हुए कि खुद हरवीर को व्हीलचेयर पर बैठाकर जनसुनवाई कक्ष से बाहर तक छोड़ने आए. व्हीलचेयर, आर्थिक सहायता और पेंशन मिलने के बाद हरवीर की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. उन्होंने हाथ जोड़कर कलेक्टर को धन्यवाद दिया. हरवीर रजक ने बताया कि हादसे के बाद उनकी जिंदगी मुश्किल हो गई थी, लेकिन कलेक्टर की मदद ने उन्हें नया सहारा दिया. वहीं, कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने कहा, “हरवीर ने आवेदन दिया था कि हादसे में उनके पैर खराब हो गए हैं. शासकीय योजनाओं के तहत उन्हें मदद दी गई है. जरूरतमंद की सेवा करना हमारा कर्तव्य है.” यह घटना इसलिए चर्चा में आई, क्योंकि शाजापुर कलेक्टर रहते हुए आईएएस अफसर किशोर कन्याल ने एक ट्रक ड्राइवर से बहस के दौरान कह दिया था कि ”तुम्हारी औकात क्या है?” इस पूरे वाकए का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था. लेकिन इस बार उनकी संवेदनशीलता और मानवीयता ने लोगों का ध्यान खींचा है.   

राज्य सेवा के 21 अधिकारी बनेंगे IAS-IPS, एसएएस के 16 और एसपीएस के 5 अफसरों को मिलेगा मौका

भोपाल  मध्य प्रदेश राज्य सेवा के 16 अफसर आईएएस और 5 आईपीएस बनेंगे। दरअसल, अगले महीने यूपीएससी में डिपार्टमेंट प्रमोशन कमेटी की बैठक होना लगभग तय है। जिसमें इन अफसरों को आईएएस और आईपीएस कैडर में प्रमोशन दिया जाएगा। स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (SAS) और स्टेट पुलिस सर्विस (SPS) के 21 अफसरों को अखिल भारतीय सेवा में प्रमोशन मिलेगा। इनमें 16 एसएएस को IAS में प्रमोशन मिलेगा। वहीं 5 एसपीएस अफसर IPS बनेंगे। अगले महीने यूपीएससी में डिपार्टमेंट प्रमोशन कमेटी (DPC) की बैठक होना लगभग तय है। बैठक में इन अफसरों को आईएएस और आईपीएस कैडर में प्रमोशन दिया जाएगा। आईपीएस के लिए 1997-98 बैच के अफसरों के नाम शामिल किए जा सकते हैं। आईएएस के लिए वरिष्ठता सूची के आधार पर 2006-2007 बैच के अफसर आईएएस बनेंगे। कुल 21 पदों के मुकाबले तीन गुना नाम भेजे जाने हैं। यूपीएससी को देर से प्रस्ताव भेजे जाने के कारण 2023 में आठ पदों के लिए डीपीसी नहीं हो पाई थी। सामान्य प्रशासन विभाग ने डीपीसी के लिए प्रस्ताव तैयार कर मुख्य सचिव के अनुमोदन के लिए भेजा था। इसलिए इस साल 2023 और 2024 के 8-8 यानी 16 पदों के लिए डीपीसी होगी। राज्य सरकार मध्य प्रदेश कैडर के अफसरों के नाम तय कर यूपीएससी को भेजती है। इसके बाद खाली पदों के आधार पर नामों की सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा। केंद्र सरकार के कार्मिक विभाग से अधिसूचना जारी करेगी।

एक बार फिर यूपी में जिम्मेदार अधिकारियों का तबादला, आईएएस शशांक चौधरी को बड़ी जिम्मेदारी मिली

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में तबादलों का सिलसिला जारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आईएएस से लेकर आईपीएस अधिकारियों को बड़ी-बड़ी जिम्मेदारी सौंप रहे हैं। इसी क्रम में एक बार फिर यूपी में जिम्मेदार अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है। मिल रही जानकारी के मुताबिक, गुरुवार को तीन आईएएस अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है। आईएएस देवयानी को बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी गई है। तबादलों के क्रम में आईएएस शशांक चौधरी को बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी गई है। आईएएस शशांक चौधरी को इन्वेस्ट यूपी का अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी बनाया गया है। आईएएस शशांक मौजूदा समय में मथुरा में नगर आयुक्त के पद पर तैनात थे। इसी तरह आईएएस जग प्रवेश का भी तबादला कर दिया गया है। आईएएस जग प्रवेश को मथुरा जिले का नगर आयुक्त नियुक्त किया गया है। आईएएस जग प्रवेश मौजूदा समय में बरेली जिले में मुख्य विकास अधिकारी के पद पर तैनात थे। इसके अलावा महिला आईएएस देवयानी को बरेली जिले का मुख्य विकास अधिकारी बनाया गया है। आईएएस देवयानी अभी तक झांसी जिले में संयुक्त मजिस्ट्रेट के पद की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। बता दें कि यूपी की योगी सरकार में भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है। साथ ही ईमानदार और सरकार की मंशा के अनुरूप काम करने वाले अधिकारियों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। पिछले समय में भी यूपी में आईएएस और आईपीएस अधिकारियों का तबादला किया जा चुका है।

हेडक्वार्टर लौट रहे सैनिक ट्रेन में टाॅयलेट के पास या अन्य भीड़भाड़ वाली जगह खड़े देखें तो सम्मानपूर्वक अपनी रिजर्व सीट पर बिठाएं-IAS अनुराग चौधरी

भोपाल  पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक की सफलता के बाद हर कोई भारतीय सेना के शौर्य का सलाम कर रहा है। सैनिकों का गुणगान कर रहा है। ऐसे माहौल में एमपी के एक आइएएस ने देशवासियों से बड़ी अपील की है। उन्होंने लोगों से हेडक्वार्टर जा रहे सैनिकों का सफर आसान बनाने का आग्रह किया है। सेना ने सभी सैनिकों की छुट्टी निरस्त कर दी है। उन्हें हर हाल में अपने हेडक्वार्टर लौटने के लिए कहा गया है। ऐसे सैनिकों के लिए एमपी के आइएएस IAS अफसर अनुराग चौधरी ने बड़ी बात कही है। उन्होंने ट्रेन या बस से जा रहे सैनिकों का सम्मान करने और उनका सफर सुविधाजनक बनाने का प्रयास करने का आग्रह किया है। अनुराग चौधरी ने बाकायदा सोशल मीडिया पर यह अपील की प्रदेश के अपर सचिव अनुराग चौधरी ने बाकायदा सोशल मीडिया पर यह अपील की। उन्होंने अपने फेसबुक पर लिखा- वर्तमान स्थिति को देखते हुये छुट्टियों पर आए सैनिक बिना रिजर्वेशन ट्रेन से अपने बटालियन हेडक्वार्टर लौट रहे हैं। उनको ट्रेन में टाॅयलेट के पास या अन्य भीड़भाड़ वाली जगह खड़े देखें तो सम्मानपूर्वक अपनी रिजर्व सीट पर बिठाएं। वह हमारे राष्ट्र रक्षक हैं। यदि सैनिक रोड से जाते दिखें तो उनको अपने वाहन से अगले मुकाम तक पहुंचाएं।

MP कैडर के 53 IAS अफसरों को एक महीने की ट्रेनिंग के लिए मसूरी बुलाया, नए अफसरों की एंट्री सीएमओ

भोपाल  मध्यप्रदेश कैडर के 53 आईएएस अफसरों को करीब एक महीने की ट्रेनिंग के लिए मसूरी बुलाया गया है। इन अफसरों को जून से जुलाई तक मिड करियर ट्रेनिंग के लिए लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी मसूरी जाना होगा। खास बात यह है कि सूची में शामिल दो अफसर मुख्यमंत्री के सचिव सीबी चक्रवर्ती एम और डॉ. इलैया राजा टी हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय में दो पद खाली हो जाएगा तो इसके बदले में नए अफसर आमद दे सकते हैं। चार जिलों के कलेक्टर भी शामिल इसके अलावा 4 जिलों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत चार जिलों के कलेक्टर भी शामिल हैं। यह सभी 53 अफसर सचिव, अपर सचिव स्तर के हैं। हालांकि कई अफसरों ने अपनी ट्रेनिंग रद्द करवाने के लिए जुगाड़ लगाना शुरू कर दिया है। आपको बता दें कि वर्किंग एफिशिएंसी में सुधार के लिए यह ट्रेनिंग आवश्यक होती है। इन अधिकारियों को 16 जून से 11 जुलाई तक होने वाले एमसीटीपी के चौथे चरण की ट्रेनिंग के लिए सूचित किया गया है। इन अफसरों के नाम शामिल लोकेश कुमार जाटव, धनंजय सिंह भदोरिया, स्वतंत्र कुमार सिंह, शशांक मिश्रा, स्वाति मीणा नायक, आईरिन सिंथिया जेपी, विकास नरवाल, भरत यादव, सीबी चक्रवर्ती, वी. किरण गोपाल, नंदकुमारम, शिल्पा गुप्ता, सूफिया फारूकी वली, अजय गुप्ता, अविनाश लवानिया, प्रियंका दास, अभिषेक सिंह, प्रीति मैथिल, ईलैया राजा टी., तेजस्वी नायक, अमित तोमर, श्रीकांत बनोठ, मुजीर्बुर रहमान, अनय द्विवेदी, तन्वी सुंदरियाल बहुगुणा, तरुण राठी, गणेश शंकर मिश्रा, अभिजीत अग्रवाल, कर्मवीर शर्मा, कौशलेंद्र विक्रम सिंह, अनुराग चौधरी, भास्कर लक्षकार, आशीष सिंह, शण्मुगा प्रिय मिश्रा, वीरेंद्र कुमार, दिनेश जैन, गिरीश शर्मा, शिवराज सिंह वर्मा, उमाशंकर भार्गव, प्रीति जैन, उषा परमार, सरिता बाला, ओम प्रजापति, चंद्र मौली शुक्ला, मनोज पुष्य, वीएस चौधरी कोलसानी, रुचिका चौहान, सौरव कुमार सुमन, विजय कुमार जे., हरजिंदर सिंह, नेहा मराव्या, बी. विजय दत्ता, अनुगृह पी और मोहित बुंदस।

प्रदेश के गैर प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को आइईएस बनने का मौका अब नहीं दिया जाएगा

भोपाल  भोपाल। प्रदेश के गैर प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को आइईएस बनने का मौका अब नहीं दिया जाएगा। लगातार नौवें साल इनके नाम संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक के लिए प्रस्तावित नहीं करने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वर्ष 2024 के लिए जिन आठ पदों के लिए नाम भेजने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया है, वे सभी राज्य प्रशासनिक सेवा के हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 के आठ और 2024 के आठ पदों के लिए एक साथ विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक मई-जून में हो सकती है।     आईएएस संवर्ग में पदोन्नति के लिए नियमानुसार गैर प्रशासनिक सेवा के लिए 15 प्रतिशत तक पद रखे जा सकते हैं। यह राज्य के ऊपर रहता है कि वह इन्हें पद देना चाहता है या नहीं।     2016 में तत्कालीन मुख्य सचिव एंटोनी डिसा के समय चार पद गैर प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को दिए गए थे। इसके बाद से इस संवर्ग को अवसर नहीं मिला।     ऐसा नहीं है कि इसमें अधिकारी पात्रता नहीं रखते हैं लेकिन सरकार राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की पर्याप्त उपलब्धता को आधार बनाकर अवसर नहीं दे रही है।     जबकि, इसके लिए कई बार मुख्यमंत्री से लेकर मुख्य सचिव को ज्ञापन दिए जा चुके हैं। इस बार भी जो प्रस्ताव भारत सरकार और संघ लोक सेवा आयोग को भेजा जा रहा है, उसमें भी केवल राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के नाम रहेंगे।     आठ पदों के लिए 24 अधिकारियों के नाम संघ लोक सेवा आयोग को भेजे जाएंगे। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने कमिश्नरों से रिपोर्ट बुलवाई है।     इसके साथ ही जांच एजेंसियों से भी पूछा गया है कि जो नाम प्रस्तावित किए जा रहे हैं, उनके विरुद्ध जांच तो नहीं चल रही है। संघ लोक सेवा आयोग में विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक मई-जून में हो सकती है।  

मोहन सरकार ने उज्जैन, अशोक नगर, हरदा और विदिशा के कलेक्टरों का तबादला किया, 9 तेजर्रार आईएएस अफसरों का एक झटके में ट्रांसफर हुआ.

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने रविवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव के गृह क्षेत्र उज्जैन समेत चार जिलों के कलेक्टरों को बदल दिया. राज्य सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) द्वारा जारी आदेश के अनुसार नौ आईएएस अधिकारियों का तबादला किया गया है. इसमें कहा गया है कि उज्जैन, अशोक नगर, हरदा और विदिशा के जिला कलेक्टरों का तबादला किया गया है. उज्जैन कलेक्टर को हटाया उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह को स्वास्थ्य सेवाएं निदेशक के पद पर स्थानांतरित किया गया है और उनकी जगह विदिशा कलेक्टर रोशन कुमार सिंह को नियुक्त किया गया है. हरदा कलेक्टर आदित्य सिंह, सुभाष कुमार द्विवेदी की जगह अशोक नगर के नए कलेक्टर होंगे, जिन्हें जीएडी का अतिरिक्त सचिव बनाया गया है. सिद्धार्थ जैन हरदा के नए कलेक्टर होंगे, जबकि अंशुल गुप्ता विदिशा जिले के नए कलेक्टर होंगे. बसंत कुर्रे को श्रम विभाग भेजा संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी बसंत कुर्रे को श्रम विभाग में अपर सचिव बनाया गया है. अशोकनगर के कलेक्टर सुभाष कुमार द्विवेदी को उन्हें सामान्य प्रशासन विभाग में भेजा गया है. वहीं इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह को उज्जैन सिंहस्थ मेले का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. देवास के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हिमांशु प्रजापति को कार्यकारी संचालक मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम इंदौर बनाया गया है. शिवांगी जोशी को भोपाल में बड़ी जिम्मेदारी इसके अलावा राजेश कुमार गुप्ता को अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन नीति विश्लेषण संस्थान के संचालक पद से हटाकर मध्यप्रदेश शासन में उप सचिव विभाग संस्कृति विभाग बनाया गया है. 2019 बैच की शिवांगी जोशी को जबलपुर संयुक्त कलेक्टर से हटकर मध्य प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम भोपाल में महाप्रबंधक की जिम्मेदारी सौंपी गई है. वर्तमान में इंदौर की अपर कलेक्टर और 2018 बैच की अधिकारी सुश्री ज्योति शर्मा को मुख्य कार्यपालन अधिकारी देवास बनाया गया है. उज्जैन कलेक्टर का पारिवारिक विवाद आया था सामने बीते दिनों उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह का पारिवारिक विवाद सामने आया था। इस घटनाक्रम की चर्चा सीएम हाउस तक पहुंची थी। हालांकि मामले में किसी पक्ष ने कोई शिकायत नहीं की थी। माना जा रहा है कि इस घटनाक्रम के बाद कलेक्टर नीरज कुमार सिंह को भोपाल भेजा गया है। लगातार दूसरे जनसंपर्क संचालक विदिशा के कलेक्टर शिवराज सिंह चौहान के संसदीय मुख्यालय विदिशा में जनसंपर्क विभाग के संचालक रौशन कुमार सिंह को 8 महीने पहले विदिशा कलेक्टर बनाकर भेजा गया था। रौशन को सीएम मोहन यादव का करीबी माना जाता है। रौशन कुमार सिंह के बाद अब जनसंपर्क विभाग के संचालक अंशुल गुप्ता को विदिशा का कलेक्टर बनाकर भेजा गया है। अंशुल विदिशा के दूसरे ऐसे कलेक्टर होंगे जो जनसंपर्क संचालक के बाद विदिशा के कलेक्टर की कमान संभालेंगे। इन अफसरों के पास ये अतिरिक्त प्रभार     जनजातीय कार्य विभाग के पीएस गुलशन बामरा को अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान भोपाल के सीईओ का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।     इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह को सिंहस्थ मेला उज्जैन के मेला अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।     राज्य योजना आयोग के सदस्य सचिव ऋषि गर्ग को अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान भोपाल के संचालक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। राज्य प्रशासनिक सेवा के दो अफसरों के तबादले     अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान, भोपाल के संचालक राजेश गुप्ता को संस्कृति विभाग में उप सचिव बनाया गया है।     जबलपुर की संयुक्त कलेक्टर को मप्र राज्य इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम का महाप्रबंधक बनाया है।     शिवांगी के पास विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अवर सचिव का भी अतिरिक्त प्रभार रहेगा।

MP में जल्द एक और बड़ी प्रशासनिक सर्जरी, 32 अफसरों को मिलेगी नई जिम्मेदारी, कलेक्टर भी बदलेंगे

भोपाल  मध्यप्रदेश में आने वाले कुछ महीनों में एक बार फिर बड़ी प्रशासनिक सर्जरी होना तय है। इसमें करीब 32 आइएएस को सरकार नई जिम्मेदारी देने की तैयारी में है तो प्रभार में टिके मंत्रालय के कई विभागों को स्वतंत्र अफसर भी मिलेंगे। सरकार ने इस फेरबदल में बीते एक साल के दौरान एसीएस, पीएस, सचिव, संभागायुक्त व कलेक्टरों के कामों को आधार बनाने की योजना रखी है।  इसमें ऐसे अफसर जिनके काम के नतीजे अच्छे रहे हैं और सरकार को केंद्र स्तर पर, 16वें वित्त आयोग की प्रजेंटेशन बैठक में व अन्य स्तरों पर सराहना मिली, उनको बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। वहीं किरकिरी कराने वालों की कुर्सी खिसकना तय है। 12 बड़े विभागों का काम प्रभार सूत्रों की मानें तो सरकार प्रदेश को जल्द ही स्वतंत्र कृषि उत्पादन आयुक्त और कर्मचारी चयन मंडल के अध्यक्ष देने की तैयारी में है। वर्तमान में कृषि उत्पादन आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार वन विभाग के एसीएस अशोक बर्णवाल व कर्मचारी चयन मंडल के अध्यक्ष का अतिरिक्त जिमा सामान्य प्रशासन विभाग के एसीएस संजय दुबे के पास है तो पीडब्ल्यूडी जैसे 12 बड़े विभागों का काम भी प्रभार पर चल रहा है। जिले और संभागों में भी बदलाव संभव प्रदेश के कुछ जिलों के कलेक्टर व संभागों के संभागायुक्त भी बदले जाने हैं। इस बदलाव के कई आधार होंगे। जिनमें जिलों में घटित होने वाली बड़ी घटनाओं को नहीं संभाल पाना, प्रशासनिक चूक के कारण घटना होना, नेताओं की वास्तविक नाराजगी का बार-बार सामने आना, खनिज माफिया व अपराधियों की करतूतें उजागर होना, अलग-अलग स्तर पर कमियों के कारण विपक्ष को मुद्दा मिलना, जैसे बिंदू अहम हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक सरकार ने ऐसे कुछ बिंदुओं के आधार पर रिपोर्ट तैयार की है। सूत्रों के मुताबिक सरकार जल्द इन बड़े पदों व विभागों में पदस्थापना को लेकर काम के आधार पर ग्रेडिंग सिस्टम अपनाएगी।

प्रदेश में IAS अफसरों की पोस्टिंग, पंचायत मंत्री के दामाद श्यामवीर सिंह को BDA की कमान; देखें सूची

भोपाल मध्य प्रदेश में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों के तबादले किए हैं। 7 मार्च को जारी आदेश में भोपाल विकास प्राधिकरण के CEO प्रदीप जैन को हटाकर श्यामवीर सिंह को बीडीए की कमान सौंपी गई है। श्यामवीर सिंह पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल के दामाद हैं। वहीं आईएएस महेंद्र सिंह कवचे को उज्जैन से दतिया अपर कलेक्टर बनाए गए हैं। मप्र सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी तबादला आदेश के अनुसार, बीडीए के सीईओ रहे प्रदीप जैन को मंत्रालय में उप सचिव नियक्त किया गया है। जबकि, 2018 बैच के IAS अधिकारी श्यामवीर सिंह को भोपाल विकास प्राधिकरण का सीईओ बनाया गया है। 2018 बैच की आईएएस रूही खान को उद्योग विभाग में उपसचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।   भोपाल विकास प्राधिकरण में करीब एक साल पहले प्रदीप जैन को सीईओ बनाया गया था। शुक्रवार को जारी आदेश में जैन को बीडीए सीईओ के पद से हटाकर मंत्रालय में उप सचिव के पद पर पदस्थ कर दिया गया है। जैन की पोस्टिंग अभी मंत्रालय में किसी विभाग में नहीं की गई है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के गृह नगर उज्जैन में पदस्थ अपर कलेक्टर महेंद्र सिंह कवचे को स्थानांतरित कर अपर कलेक्टर दतिया बनाया गया है। ये दोनों ही अधिकारी राज्य प्रशासनिक सेवा के हैं। महिला दिवस के पहले रूही को मिला काम केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटीं आईएएस अधिकारी रूही खान को शासन ने उप सचिव एमएसएमई के पद पर पदस्थ किया है। साथ ही उन्हें उप सचिव औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। उन्हें 31 जनवरी को भोपाल में उपस्थिति देने के एक माह से अधिक समय बाद अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के पहले सरकार ने जिम्मेदारी सौंपी है। इसके साथ ही पदस्थापना के लिए प्रतीक्षारत आईएएस अफसर श्याम वीर को भोपाल विकास प्राधिकरण का नया मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। दूसरी ओर 5 दिसम्बर 2024 से पदस्थापना के लिए प्रतीक्षारत आशीष भार्गव को अभी काम मिलना बाकी है। श्यामवीर सिंह नरवरिया का परिचय श्यामवीर सिंह नरवरिया भिंड जिले के गोरमी क्षेत्र के प्रतापपुरा गांव के निवासी हैं। UPSC परीक्षा में 284वीं रैंक हासिल करने के बाद उन्हें लोधी समाज का गौरव माना गया था। श्यामवीर का विवाह मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल की बेटी फलित सिंह पटेल से हुआ है।  

वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की नवीन पदस्थापना

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने एक बार फिर आईएएस अधिकारियों की नवीन पदस्थापना की है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार वरिष्ठ आईएएस अधिकारी जेएन कांसोटिया (1989) को गृह विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के अनुसार जेएन कांसोटिया (1989) महानिदेशक, आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, मध्यप्रदेश भोपाल को अपर मुख्य सचिव गृह विभाग में भेजा गया है। वहीं अनिरूद्ध मुकर्जी (1993), आवासीय आयुक्त, मध्यप्रदेश भवन, नई दिल्ली तथा प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग तथा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश राज्य परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी, भोपाल (अतिरिक्त प्रभार) की नवीन पदस्थापना अध्यक्ष राजस्व मण्डल, मध्यप्रदेश ग्वालियर तथा अपर मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश शासन, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग तथा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश राज्य परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी, भोपाल (अतिरिक्त प्रभार) के पद पर की गई है। सचिन सिन्हा (1995), प्रशासकीय सदस्य, राजस्व मण्डल, मध्यप्रदेश, ग्वालियर तथा अध्यक्ष, राजस्व मण्डल, मध्यप्रदेश, ग्वालियर (अतिरिक्त प्रभार) की नवीन पदस्थापना वि.क.अ. सह-महानिदेशक, आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, मध्यप्रदेश भोपाल में की गई है। इसके अलावा श्रीमती रश्मि अरूण शमी (1994) प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग तथा विशेष आयुक्त (समन्वय), मध्यप्रदश भवन, नई दिल्ली तथा प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन, महिला एवं बाल विकास विभाग (अतिरिक्त प्रभार) को अपने वर्तमान कर्त्तव्यों के साथ-साथ अस्थाई रूप से आगामी आदेश तक आवासीय आयुक्त, मध्यप्रदेश भवन, नई दिल्ली का प्रभार अतिरिक्त रूप से सौंपा गया है।  

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