LATEST NEWS

सुपरजेट की जगह Su-57? भारत में आने वाला दुनिया का सबसे चर्चित फाइटर जेट, तैयारियों की खबर

नई दिल्ली हाल ही में HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) और रूस की UAC (यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन) के बीच SJ-100 (सुखोई सुपरजेट 100) विमानों के भारत में उत्पादन को लेकर हुए समझौते ने रक्षा गलियारों में हलचल तेज कर दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या नागरिक विमानों के बाद अब ‘खतरनाक’ सुखोई Su-57 लड़ाकू विमान भारतीय वायु सेना (IAF) के बेड़े का हिस्सा बनेंगे? SJ-100 समझौता: एक नया मोड़ भारत और रूस के बीच नागरिक विमानन के क्षेत्र में हुआ यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’ की दिशा में एक बड़ा कदम है। SJ-100 एक क्षेत्रीय जेट है, और इसके स्थानीय उत्पादन से भारत में एयरोस्पेस ईकोसिस्टम मजबूत होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भविष्य के सैन्य समझौतों के लिए एक ‘टेस्ट केस’ साबित हो सकती है। क्या बोले रूसी अधिकारी? खुद रूसी एरोस्पेस कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने यह दावा किया कि भारत और रूस पांचवीं पीढ़ी के सुखोई एसयू-57ई लड़ाकू विमान के भारत में संयुक्त उत्पादन की संभावना तलाशने के लिए तकनीकी पहलुओं पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि, भारत की ओर से अधिकारी के दावे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। रूस के यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (यूएसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) वादिम बदेखा ने हैदराबाद के बेगमपेट हवाई अड्डे पर विंग्स इंडिया एयर शो से इतर रूसी संवाददाताओं से कहा- हम इस कॉन्ट्रैक्ट पर तकनीकी बातचीत के उन्नत चरण में हैं। हमारे अनुभव को देखते हुए, ऐसे कॉन्ट्रैक्ट होने वाले हैं जो कई दशकों तक हमारे सहयोग की दिशा तय करेंगे हैं।’ रूस ने इस प्रदर्शनी के दौरान अपने नवीनतम क्षेत्रीय परिवहन विमान – इल्यूशिन आईएल-114-300 और सुखोई एसजे-100 – को प्रदर्शित किया था। बदेखा ने दावा किया कि दोनों पक्ष वर्तमान में भारत में एसयू-30 विमानों के उत्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली सुविधाओं में एसयू-57 लड़ाकू विमानों के लाइसेंस प्राप्त उत्पादन और इसके लिए भारतीय उद्योग और भारतीय प्रणालियों के अधिकतम उपयोग पर भी चर्चा कर रहे हैं। Su-57 ‘Felon’: रूस का सबसे घातक योद्धा Su-57 रूस का पहला 5वीं पीढ़ी का सटील्थ लड़ाकू विमान है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इसे खास बनाती हैं। जैसे- स्टेल्थ तकनीक: यह रडार की नजरों से बचने में सक्षम है। सुपरक्रूज: बिना आफ्टरबर्नर के ध्वनि की गति से तेज उड़ने की क्षमता। हथियार: इसके इंटरनल वेपन बे में आधुनिक मिसाइलें छिपी होती हैं, जो इसके स्टेल्थ को बरकरार रखती हैं। भारत और Su-57 का इतिहास (FGFA प्रोग्राम) आपको याद होगा कि भारत पहले रूस के साथ FGFA (Fifth Generation Fighter Aircraft) प्रोग्राम का हिस्सा था, जो Su-57 पर ही आधारित था। लेकिन 2018 में भारत इस प्रोजेक्ट से पीछे हट गया था। इसके मुख्य कारण थे:     इंजन की तकनीक में कमी।     स्टेल्थ फीचर्स पर असंतोष।     लागत और तकनीक हस्तांतरण (ToT) के मुद्दे। क्या अब पासा पलट रहा है? SJ-100 समझौते के बाद Su-57 की चर्चा फिर से शुरू होने के तीन मुख्य कारण हैं-     नया इंजन (AL-51F1)- रूस ने अब Su-57 के लिए नया ‘स्टेज 2’ इंजन विकसित कर लिया है, जो भारत की पुरानी शिकायतों को दूर कर सकता है।     युद्ध का अनुभव- यूक्रेन युद्ध में रूस ने Su-57 का सीमित उपयोग किया है, जिससे इसकी परिचालन क्षमता के वास्तविक आंकड़े सामने आए हैं।     चीन की चुनौती- चीन के पास J-20 जैसे 5वीं पीढ़ी के विमानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भारतीय वायुसेना को जल्द ही एक सटील्थ फाइटर की जरूरत है। चुनौतियां और ‘आत्मनिर्भर भारत’ भले ही रूस भारत को Su-57 ऑफर कर रहा हो, लेकिन भारत के सामने कुछ कठिन विकल्प हैं। दरअसल भारत अपना स्वदेशी 5वीं पीढ़ी का विमान AMCA विकसित कर रहा है। Su-57 खरीदने से इस स्वदेशी प्रोजेक्ट के बजट और प्राथमिकता पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, रूस से बड़े रक्षा सौदे करने पर अमेरिका के CAATSA प्रतिबंधों का खतरा हमेशा बना रहता है। भारत अब केवल ‘खरीदने’ में नहीं, बल्कि ‘भारत में बनाने’ और ‘पूर्ण तकनीक’ प्राप्त करने में रुचि रखता है। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के मुताबिक इससे पहले, सरकारी हथियार निर्यातक कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के सीईओ अलेक्जेंडर मिखीव ने घोषणा की थी कि कंपनी नई दिल्ली को नवीनतम पांचवीं पीढ़ी के एसयू-57ई लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के साथ-साथ भारत में उनके उत्पादन और स्वदेशी एएमसीए स्टील्थ लड़ाकू विमान के विकास में सहायता की पेशकश कर रही है। कुल मिलाकर SJ-100 समझौता यह दर्शाता है कि भारत और रूस के बीच औद्योगिक संबंध अभी भी गहरे हैं। यदि रूस Su-57 के लिए पूर्ण तकनीक हस्तांतरण (ToT) और स्वदेशी AMCA में सहयोग का प्रस्ताव देता है, तो ‘Felon’ भारत के आकाश की सुरक्षा करते हुए दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, अभी वायु सेना का मुख्य ध्यान राफेल के अगले बैच और स्वदेशी विमानों पर है।

IAF ने पाकिस्तान पर चार बड़े हवाई हमले किए थे, जिसके बाद पाकिस्तान अमेरिका से सीजफायर की गुहार लगाने लगा

नई दिल्ली  भारत के ऑपरेशन सिंदूर के खिलाफ पाकिस्तान ने 10 मई को ऑपरेशन बनयान अल-मरसूस चलाया। लेकिन यह ऑपरेशन सिर्फ आठ घंटे ही चला। सूत्रों के मुताबिक 10 मई की रात भारतीय वायुसेना (IAF) ने पाकिस्तान पर चार बड़े हवाई हमले किए थे। इंडियन एयरफोर्स ने पाकिस्तान के एयर बेस, हवाई जहाज और एयर डिफेंस सिस्टम को तबाह कर दिया जिसके बाद पाकिस्तान अमेरिका से सीजफायर की गुहार लगाने लगा। इंडियन एयरफोर्स ने पाकिस्तान को झुकने पर मजबूर किया भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान पर सटीक निशाना लगाने वाली मिसाइलें दागीं। रफाल विमानों से SCALP मिसाइलें दागी गईं। SU-30 MKI विमानों से ब्रह्मोस मिसाइलें दागी गईं। इन मिसाइलों ने चकलाल में स्थित नूर खान एयरबेस पर हमला किया। यह पाकिस्तान के उत्तरी एयर कमांड-कंट्रोल नेटवर्क का हिस्सा था। पहले हमले में ही यह तबाह हो गया। आखिरी हमला जैकोबाबाद और भोलारी एयर बेस पर किया गया। लेकिन तब तक पाकिस्तान हार मान चुका था, वह अमेरिका से युद्ध रोकने के लिए कह रहा था। पाकिस्तान ने 10 मई को सुबह 1:00 बजे ऑपरेशन बनयान अल-मरसूस शुरू किया था। उसने कहा कि वह अगले 48 घंटों में भारत के एयर बेस को तबाह कर देगा। लेकिन भारत ने पाकिस्तान पर जोरदार हमला किया। उसने हवा से सतह पर मार करने वाली कई मिसाइलें इस्तेमाल कीं। यह ऑपरेशन सुबह 9:30 बजे ही खत्म हो गया। S-400 ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 11 बार काम किया भारत का S-400 एयर डिफेंस सिस्टम आदमपुर में है। इसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 11 बार काम किया। इसने पाकिस्तान के SAAB-2000 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम को मार गिराया। यह सिस्टम पाकिस्तान के अंदर 315 किलोमीटर दूर था। S-400 एक ऐसा सिस्टम है जो हवा में आने वाले खतरों को भांप लेता है और उन्हें मार गिराता है। IAF के पास इस बात के सबूत हैं कि उसकी मिसाइलों ने एक C-130J विमान, एक JF-17 और दो F-16 लड़ाकू विमानों को भी मार गिराया। IAF ने SCALP और ब्रह्मोस मिसाइलों को एक साथ इस्तेमाल किया ताकि निशाना चूक न जाए। 7 मई को भारत ने नौ आतंकी कैंपों पर हमला किया था। सात कैंपों को अलग-अलग तरह के गोला-बारूद से निशाना बनाया गया। सेना, वायुसेना और नौसेना ने मिलकर यह हमला किया था। मुरिदके और बहावलपुर में मौजूद आतंकी ठिकानों पर SCALP और ब्रह्मोस मिसाइलों से हमला किया गया। ये मिसाइलें सटीक निशाना लगाती हैं। सूत्रों के अनुसार, 10 मई को भारत ने लाहौर में चीन में बने LY-80 एयर डिफेंस सिस्टम को HARPY कामिकेज़ ड्रोन से मार गिराया। इसके अलावा, कराची के मलीर में HQ-9 (S-300 का चीनी वर्जन) को भी एक भारतीय मिसाइल ने तबाह कर दिया। पाकिस्तान के DGMO ने युद्धविराम की गुहार लगाई भारतीय नौसेना 10 मई की सुबह कराची नौसेना बंदरगाह पर हमला करने के लिए तैयार थी। उसका जहाजी बेड़ा मकरान तट से 260 मील दूर था। लेकिन पाकिस्तान के DGMO ने फोन करके कहा कि अगर भारत ने ब्रह्मोस मिसाइलों से बंदरगाह पर हमला किया तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा। पाकिस्तान की धमकी से भारतीय सेना और सरकार डरे नहीं। लेकिन 10 मई की दोपहर तक पाकिस्तान के DGMO ने युद्धविराम की गुहार लगाई।

भारतीय वायुसेना के विमान पर हवा में उड़ान के दौरान साइबर अटैक, जानें क्या है पूरा मामला

मुंबई ऑपरेशन ब्रह्मा म्यांमार को राहत पहुंचा रहा IAF यानी भारतीय वायुसेना का एक विमान साइबर अटैक का शिकार हो गया। खबर है कि यह हमला उस वक्त हुआ, जब विमान राहत सामग्री लेकर म्यांमार जा रहा था। हालांकि, वायुसेना के जांबाजों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा और उन्होंने सूझबूझ से रास्ता निकाला और यात्रा को पूरा किया। अपने सैटेलाइट आधारित जीपीएस सिग्नल में स्पूफिंग के रूप में भारतीय वायुसेना के विमान को साइबर हमलों का सामना करना पड़ा है। अखबार ने सूत्रों क हवाले से बताया है कि म्यांमार के हवाई क्षेत्र में किसने जीपीएस स्पूफिंग की है, इसका पता लगाना मुश्किल साबित हो सकता है। खास बात है कि यहां चीन ने बड़ी रणनीतिक पैठ बना ली है। क्या है जीपीएस स्पूफिंग अखबार से बातचीत में एक सूत्र ने कहा, ‘जीपीएस स्पूफिंग आमतौर पर पायलट को गलत कॉर्डिनेट्स देकर उनकी लोकेशन के बारे में गुमराह करता है। यह ऑपरेशनल इलाकों में आम है। म्यामांर में IAF के पायलट्स ने अपना मिशन पूरा करने के लिए फिर INS यानी इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम का सहारा लिया।’ ऑपरेशन ब्रह्मा भारत ने 28 मार्च को म्यांमार और थाईलैंड में आए भूकंप से हुई तबाही के बाद त्वरित कदम के रूप में अपना राहत मिशन ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ शुरू किया। ऑपरेशन के हिस्से के रूप में भारतीय सेना आपदा में घायल हुए लोगों को तत्काल देखभाल प्रदान करने के लिए 60 बिस्तरों वाला चिकित्सा उपचार केंद्र स्थापित करेगी। यह सुविधा ट्रामा के मामलों, आपातकालीन सर्जरी और आवश्यक चिकित्सा सेवाओं को संभालने में सक्षम होगी, जिससे स्थानीय स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को सहायता मिलेगी, जो आपदा के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई है। भारत 15 टन राहत सामग्री म्यांमार पहुंचा चुका है।

एयरफोर्स के लिए 70 एचटीटी-40 ट्रेनर एयरक्राफ्ट की डील हुई, ट्रेनर एयरक्राफ्ट लीज पर लेने का विचार

नई दिल्ली  इंडियन एयरफोर्स के पास फाइटर एयरक्राफ्ट के साथ ही ट्रेनर एयरक्राफ्ट की भी कमी है। जिसे दूर करने के लिए हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से ट्रेनर एयरक्राफ्ट खरीदने की डील साइन हुई है और ये ट्रेनर एयरक्राफ्ट इस साल सितंबर से मिलने की उम्मीद है। ट्रेनर एयरक्राफ्ट की कमी पूरी करने के लिए एयरफोर्स ट्रेनर एयरक्राफ्ट को लीज पर लेने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। रक्षा मंत्रालय की तरफ से रक्षा मामलों की संसदीय कमेटी को यह जानकारी दी गई है। संसदीय कमिटी ने जब रक्षा मंत्रालय से एयरफोर्स के ट्रेनर एयरक्राफ्ट और सिमुलेटर की संख्या के बारे में पूछा तो रक्षा मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा कि एयरफोर्स के पास जो ट्रेनर एयरक्राफ्ट हैं उनमें बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट, इंटरमीडिएट जेट ट्रेनर और एडवांस्ड जेट ट्रेनर हैं। सभी मॉर्डन एयरक्राफ्ट के सिमुलेटर्स हैं। एयरफोर्स के पास ट्रेनिंग के लिए कुल 14 सिमुलेटर उपलब्ध हैं। बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट लीज पर लेने का विकल्प रक्षा मंत्रालय ने बताया कि वर्तमान में एयरफोर्स के पास ट्रेनर एयरक्राफ्ट की कमी है। इस कमी को पूरा करने के लिए HAL के साथ 70 एचटीटी-40 इंडिजिनियस ट्रेनर एयरक्राफ्ट की डील साइन हुई है। जिसकी डिलवरी इस साल सितंबर से होनी है। जब ये ट्रेनर एयरक्राफ्ट एयरफोर्स में ऑपरेशनलाइज हो जाएंगे उसके बाद 36 अतिरिक्त एचटीटी-40 लिए जाएंगे। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि एयरफोर्स बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट लीज पर लेने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। अभी ट्रेनर एयरक्राफ्ट की संख्या करीब 260 करीब दो साल पहले कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी ने एयरफोर्स के लिए 70 HTT-40 बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट लेने को मंजूरी दी थी। तब कहा गया था कि छह साल में ये सभी 70 ट्रेनर एयरक्राफ्ट एयरफोर्स को मिल जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक एयरफोर्स के पास अभी ट्रेनर एयरक्राफ्ट की संख्या करीब 260 है जबकि स्वीकृत संख्या 388 है। एयरफोर्स के पास ट्रेनर एयरक्राफ्ट के तौर पर 75 एयरक्राफ्ट पीसी-7 मार्क-2 बेसिक ट्रेनर हैं। 86 किरण मार्क-1 और मार्क 1 ए हैं जो इंटमीडिएट जेट ट्रेनर हैं। 99 हॉक मार्क-132 एडवांस्ड जेट ट्रेनर हैं और 42 किरण मार्क टू हैं। प्रोफेशनल मिलिट्री एजुकेशन का पूरा प्रोग्राम एयरफोर्स की तरफ से संसदीय कमेटी को बताया गया कि एयरफोर्स तकनीकी रूप से संवेदनशील सेवा है। इसलिए एयर वॉरियर्स की ट्रेनिंग और स्किल डिवेलपमेंट मानव संसाधन विकास का अहम हिस्सा है। इसके लिए सर्विस से जुड़े कोर्स में प्रोफेशनल मिलिट्री एजुकेशन का पूरा प्रोग्राम है। एयरफोर्स की तरफ से बताया गया कि ट्रेनिंग में सिमुलेटर के इस्तेमाल पर काफी जोर दिया गया है। अब जो अधिकतर सिमुलेटर एयरफोर्स में शामिल किए जा रहे हैं वे स्वदेशी सोर्स से हैं।

भारतीय वायुसेना को नए प्लेन की खरीद में लग रहा समय, ट्रेनिंग देने में लगेगा टाइम

नई दिल्ली  वायुसेना के पास फाइटर प्लेन की ताकत ऐतिहासिक रूप से कम हो गई है। स्थिति यह है कि भारत के फाइटर प्लेन की क्षमता साल 1965 से भी कम हो गई है। इस पर एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह का कहना है कि ‘जो कुछ भी हमारे पास है, उसी से लड़ने’ को प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हमारा ध्यान मौजूदा असेट्स के संरक्षण और कर्मियों को उनके सही तरीके से उपयोग करने के लिए ट्रेनिंग देने पर है। फाइटर प्लेन हो रहे रिटायर हालांकि एयरफोर्स के पास 42 स्क्वाड्रन की स्वीकृत क्षमता है। यह संख्या सीमा पर खतरे की स्थिति को देखते हुए विस्तृत विचार-विमर्श के बाद स्वीकृत की गई है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें लगातार कमी आई है। इसकी वजह है कि पुराने सोवियत युग के फाइटर प्लेन रिटायर हो गए हैं और उनकी जगह नए प्लेन को लाने का आदेश नहीं दिया गया है। पिछले 6 साल से नहीं दिख रही प्रोग्रेस अपने वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वायुसेना प्रमुख ने कहा कि स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमानों (एलसीए) का उत्पादन, जो समय से पीछे चल रहा है, को तेज करने की जरूरत है। इसके साथ ही नए मल्टी रोल वाले वाले फाइटर प्लेन विमानों की जरूरत “कल से ही” है, लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। गौरतलब है कि वायुसेना ने 2018 में मेक इन इंडिया योजना के तहत 114 मल्टीरोल फाइटर प्लेन खरीदने की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन पिछले छह साल से कोई प्रोग्रेस नहीं दिख रही है। रातों-रात प्लेन नहीं खरीद सकते वायुसेना प्रमुख ने लड़ाकू विमानों की कमी को स्पष्ट रूप से बताते हुए कहा कि यह कोई थोड़े समय की बात नहीं है कि हम रातों-रात सामान खरीद सकते हैं। इसमें समय लगता है, सिर्फ सेलेक्शन ही नहीं, बल्कि शामिल करने में भी समय लगता है। इसके साथ ही, अगर हम दो या तीन स्क्वाड्रन शामिल भी करते हैं, तो निश्चित रूप से उनका उपयोग करने में सक्षम होने के लिए ट्रेनिंग में समय लगता है। इसलिए हम इस समय जिस चीज पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, वह यह है कि हमारे पास जो कुछ भी है, हम उससे तुरंत लड़ने में सक्षम हों। 1965 के बाद सबसे कम ताकत रिकॉर्ड बताते हैं कि 31 स्क्वाड्रन की मौजूदा ताकत 1965 के बाद से भारत की सबसे कम ताकत है, जब पाकिस्तान के साथ युद्ध लड़ा गया था। 1965 के युद्ध के बाद यह संख्या लगातार बढ़ती गई और 1996 में 41 स्क्वाड्रन तक पहुंच गई। जैसे-जैसे विमान की रूपरेखा बदलती गई, 2013 में यह संख्या घटकर 35 रह गई और तब से लगातार कम होती गई। सर्विस में मौजूद 31 स्क्वाड्रन में से दो स्क्वाड्रन कम से कम उड़ान भर रहे हैं। ये अपने मिग 21 लड़ाकू विमानों को बचा रहे हैं, जिन्होंने पहली बार 1971 के युद्ध में हिस्सा लिया था। ये विमान लंबे समय से अपने लाइफ के अंत तक पहुंच चुके हैं। उनकी रिटायरमेंट को कई सालों के लिए टाला जा रहा है। इसकी वजह है कि वायुसेना एलसीए एमके1ए लड़ाकू विमानों की डिलीवरी का इंतजार कर रही है। अतीत से सबक लेने की जरूरत एलसीए परियोजना से करीब से जुड़े रहे वायुसेना प्रमुख ने चेतावनी दी कि अतीत से सबक लेने की जरूरत है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आगे कोई देरी न हो। उन्होंने यह भी कहा कि जेट विमानों के उत्पादन में प्राइवेट सेक्टर को बड़े पैमाने पर शामिल करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर एलसीए डिलीवरी की समयसीमा पूरी हो जाती है और मल्टी-रोल फाइटर कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर हो जाते हैं, तो वायुसेना ‘बुरी स्थिति में’ नहीं होगी।  

Indian Air Force के नए प्रमुख बने एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह, संभाला कार्यभार

नई दिल्ली भारतीय वायुसेना के नए प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह का बेहद खास वीडियो सामने आया है। इसमें वायुसेना प्रमुख अपनी मां को सैल्यूट करते हुए और पैर छूकर आशीर्वाद लेते हुए नजर आ रहे हैं। ये खास तस्वीरें उस समय सामने आईं जब वायुसेना प्रमुख बुधवार सुबह राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने देशवासियों के सामने खास मिसाल पेश की। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में अपनी मां पुष्पंत कौर का आशीर्वाद लेते नजर आए। अमर प्रीत सिंह का दिल छू लेने वाला वीडियो इंडियन एयरफोर्स के नए चीफ का पदभार संभालने के बाद अमर प्रीत सिंह ने जिस तरह से अपनी मां का सम्मान किया, वो पल बेहद दिल छू लेने वाला था। वीडियो में नजर आ रहा कि उनकी मां व्हीलचेयर पर बैठी थीं। इसी दौरान वायुसेना प्रमुख एपी सिंह नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचे। यहां उन्होंने शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इसी दौरान उन्होंने अपनी मां को सबसे पहले सैल्यूट किया फिर उनके पैर छुए। उन्हें बेहद प्यार से गले लगाया। पहले किया सैल्यूट फिर मां के छुए पैर मां के प्रति जिस तरह से भारतीय वायु सेना प्रमुख एपी सिंह ने प्यार और सम्मान जताया, वो हर किसी के लिए मिसाल है। एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने सोमवार को वायुसेना चीफ का कार्यभार संभाला है। उन्होंने वीआर चौधरी की जगह ली है। एयर चीफ एपी सिंह को 5 हजार घंटे से ज्यादा समय तक विमान उड़ाने का अनुभव है और वह लड़ाकू विमान के बेहद ट्रेंड पायलट हैं। एयर चीफ मार्शल सिंह अपने पिछले कार्यभार में वायु सेना के उपप्रमुख के रूप में कार्यरत थे। वीआर चौधरी की जगह संभाली वायुसेना प्रमुख की जिम्मेदारी एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी तीन साल तक वायु सेना की कमान संभालने के बाद रिटायर हुए। एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह का जन्म 27 अक्टूबर 1964 को हुआ था। उन्होंने दिसंबर 1984 में भारतीय वायु सेना में लड़ाकू विमान पायलट के तौर पर कमीशन प्राप्त किया। उन्होंने लगभग 40 वर्षों की अपनी लंबी सेवा में विभिन्न कमान, स्टाफ, निर्देशात्मक और विदेशी नियुक्तियों में काम किया। इन पदों की भी थी जिम्मेदारी वह नेशनल फ्लाइट टेस्ट सेंटर में प्रोजेक्ट डायरेक्टर (फ्लाइट टेस्ट) भी थे और उन्हें लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट, तेजस का उड़ान परीक्षण करने का कार्य सौंपा गया था। उन्होंने दक्षिण-पश्चिमी वायु कमान में वायु रक्षा कमांडर और पूर्वी वायु कमान में वरिष्ठ वायु स्टाफ अधिकारी के महत्वपूर्ण स्टाफ नियुक्तियां भी संभाली हैं। वायु मुख्यालय जाने से पहले वह केंद्रीय वायु कमान के वायु अधिकारी कमांडिंग-इन-चीफ भी थे। एयर मार्शल एपी सिंह ने दक्षिण-पश्चिमी वायु कमान में वायु रक्षा कमांडर और पूर्वी वायु कमान में वरिष्ठ वायु स्टाफ अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्य किया है। केंद्रीय वायु कमान के वायु अधिकारी कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में भी उन्होंने उत्कृष्ट सेवा दी। उनकी नेतृत्व क्षमता और तकनीकी विशेषज्ञता के बल पर भारतीय वायुसेना को लगातार मजबूती मिली है।

भारतीय वायुसेना ने अमेरिका के अलास्का में युद्धाभ्यास रेड फ्लैग 2024 में दिखाया दम

अलास्का. भारतीय वायुसेना के एक दल ने अमेरिका के अलास्का में आयोजित हुए युद्धाभ्यास रेड फ्लैग 2024 में शिरकत की। यह युद्धाभ्यास अमेरिका के अलास्का के इलसन  एयर फोर्स बेस पर आयोजित किया गया। यह युद्धाभ्यास 4 जून से 14 जून तक आयोजित हुआ, जिसमें अमेरिका के साथ ही भारत, सिंगापुर, ब्रिटेन, नीदरलैंड, जर्मनी की वायुसेनाएं शामिल हुईं। रेड फ्लैग 2024 का यह दूसरा संस्करण था। रेड फ्लैग युद्धाभ्यास एक एडवांस कॉम्बैट ट्रेनिंग एक्सरसाइज है। यह युद्धाभ्यास साल में चार बार आयोजित होता है। भारतीय वायुसेना के दल में राफेल फाइटर जेट और एयर क्रू के साथ ही तकनीशियन, इंजीनियर, कंट्रोलर और विषयों के विशेषज्ञ शामिल रहे। युद्धाभ्यास में शामिल होने के लिए आते वक्त राफेल फाइटर जेट को आईएल-78 एयर टू एयर रिफ्यूलर की मदद से हवा में ही ईंधन भरा गया। वहीं दल के सदस्यों को लाने के लिए सी-17 ग्लोबमास्टर विमान का इस्तेमाल किया गया। भारतीय वायुसेना का दल 29 मई को अलास्का स्थित इलसन एयर बेस पहुंच गया था। रेड फ्लैग एक्सरसाइज के दौरान युद्ध जैसे हालात बनाकर अभ्यास किया गया। वांछित वातावरण के लिए बलों का सीमांकन किया गया, जिसमें रेड फोर्स ने डिफेंस किया और ब्लू फोर्स ने आक्रामण किया। इस अभ्यास में रेड फोर्स मुख्य रूप से अमेरिकी वायुसेना की एग्रेसर स्कवॉड्रन द्वारा बनाई गई थी, जिसमें एफ-16 और एफ-15 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान थे।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live