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जीसीएफ में बनी लाइट फील्ड गन की गूंज फिर सीमा पर सुनाई पड़ेगी, 19 किमी की दूरी तक गोला दागने की क्षमता

जबलपुर  आयुध क्षेत्र की प्रमुख फैक्ट्रियों में शुमार गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) में बनी लाइट फील्ड गन (एलएफजी) की गूंज फिर सीमा पर सुनाई पड़ेगी। गन का तय समय पर उत्पादन के बाद परीक्षण लांग प्रूफ रेंज में होगा। भारतीय सेना ने करीब एक दशक बाद एलएफजी को लेकर अपनी रुचि दिखाई है। जिसके बाद 18 गन का उत्पादन जीसीएफ करने जा रहा है। महत्वपूर्ण है कि पूर्व में जीसीएफ में बनने वाली लाइट फील्ड गन का उत्पादन नया आर्डर नहीं मिलने के कारण लगभग बंद कर दिया गया था। आखिरी लाइट फील्ड गन फैक्ट्री ने 2014-15 में बनाई थी। 17 से 19 किमी की दूरी तक गोला दागने वाली यह गन कभी फैक्ट्री का मुख्य उत्पादों में शामिल है। एलएफजी के साथ ही साथ निर्माणी ने सारंग और धनुष तोप पर भी फोकस किया है। लेकिन भार में हल्की एलएफजी को सेना की हरी झंडी मिली तो जीसीएफ के पास तीन अलग तरह के गन बनाने पर तेजी से कार्य शुरू हुआ और इस वित्त वर्ष के शेष माहों में लक्ष्य तक पहुंचने दक्ष टीम जुट गई। यह गन 17 से 19 किमी की दूरी तक गोला दागने में सक्षम प्रति मिनट चार राउंड फायर किए जा सकते हैं इस बैरल फायरिंग पोर्ट पर 360 डिग्री घूम सकता है इसकी क्षमता 100 राउंड की है करगिल युद्ध में भी इस गन का इस्तेमाल एडवांस वैपन एंड इक्विपमेंट कंपनी की एक इकाई जीसीएफ की 105 एमएम की इस गन की अहमियत इसलिए भी है, क्योंकि यह हल्के वजन की होती है। इसे हेलीकाप्टर के माध्यम से सुदूर सीमाई क्षेत्र, दुर्गम स्थानों में आसानी से पहुंचाया जा सकता है। करगिल युद्ध में भी इस गन का इस्तेमाल हुआ था। सामान्य तौर पर वह सालाना 50 गन का उत्पादन करती रही है। वजन घटाकर बनाया गया लाइट फील्ड गन पहले यह गन मार्क-1 व मार्क-2 नाम से विकसित हुई, बाद में इसे एलएफजी नाम दिया गया। वजन में कम होने की वजह से इसका परिवहन आसान होता रहा है। इसकी मारक क्षमता 17 से 19 किलोमीटर तक है। पहले इसे इंडियन फील्ड गन भी कहा जाता था। लेकिन इसका वजन अधिक होने के कारण इस्तेमाल करना थोड़ा कठिन था। इसे घटाने पर शोध हुआ। इसकी टेल यानी पीछे के हिस्से को मॉडिफाई किया गया। इसी पर गन मूव करती थी। उसमें लोहे के वजनदार टुकड़ों की जगह पाइप लगाया गया। ऐसे में यह हल्की हो गई और इस तरह बाद में इसका नाम लाइट फील्ड गन हो गया। एक साल में 72 गन बनाने का रिकार्ड माना जा रहा है कि रक्षा उत्पादन समय पर पूरा हुआ तो बढ़कर टारगेट मिलने की संभावना प्रबल होगी। अत: निर्माण का पूरा फोकस एलएफजी को आकार देने पर है। बता दें कि जीसीएफ के नाम एक साल में 72 गन बनाने का रिकार्ड है। इस संबंध में जीसीएफ के कार्यकारी निदेशक राजीव गुप्ता ने बताया कि अपनी खूबियों के कारण लाइट फील्ड गन की उपयोगिता महत्वपूर्ण है। अभी हम 18 गन पर कार्य कर रहे हैं और दक्ष टीम की मदद से मांग को ध्यान में तय समय पर उत्पादन पूरा हो सकेगा।

Indian Army में निकलीं भर्तियां, फटाफट करें अप्लाई, सैलरी 1.2 लाख महीना

नई दिल्ली अगर आप देश सेवा करना चाहते हैं तो आपके पास अच्छा मौका है. इंडियन आर्मी ने कई पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है. भारतीय सेना की तरफ से टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स (TGC 142) – जनवरी 2026 के लिए आवेदन मांगे गए हैं. इस भर्ती के लिए कैंडिडेट्स 30 अप्रैल 2025 से ऑनलाइन आवेदन कर सकते है. आवेदन करने की आखिरी तारीख  29 मई 2025 को दोपहर 3:00 बजे तक हैं. इस भर्ती में अप्लाई करने के लिए उम्मीदवारों को इंडियन आर्मी की वेबसाइट joinindianarmy.nic.in पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा. टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स (TGC-142) 2026 के लिए आवेदन शुरू आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को अविवाहित पुरुष होना चाहिए और उनके पास B.E./B.Tech की डिग्री होनी चाहिए, या वे इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के छात्र होने चाहिए. आयु सीमा 20 से 27 वर्ष के बीच रखी गई है (2 जनवरी 1999 से 1 जनवरी 2006 के बीच जन्मे). इस भर्ती में सीधा SSB इंटरव्यू होगा और कोई लिखित परीक्षा नहीं होगी. सफल उम्मीदवारों को भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून में प्रशिक्षण प्राप्त होगा और बाद में उन्हें स्थायी कमीशन मिलेगा. यह अवसर उन इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स के लिए है जो भारतीय सेना का हिस्सा बनकर गर्व से देश की सेवा करना चाहते हैं. देहरादून में होगी ट्रेनिंग टीजीटी-142 के माध्यम से भारतीय सेना में चयन होने पर, उम्मीदवारों को विभिन्न प्रमुख कॉर्प्स में कमीशन मिलेगा. इसमें इंजीनियर्स कॉर्प्स, सिग्नल कॉर्प्स, और इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स जैसी प्रतिष्ठित शाखाएं शामिल हैं. चयनित उम्मीदवारों को भारतीय सेना के एक प्रशिक्षित अधिकारी के रूप में आईएमए देहरादून में 12 महीने का प्रशिक्षण प्राप्त करना होगा. इसके बाद उन्हें लेफ्टिनेंट के पद पर परमानेंट कमीशन मिलेगा, जिससे उन्हें एक स्थायी अधिकारी के रूप में भारतीय सेना में सेवा करने का अवसर मिलेगा. इतनी मिलेगी सैलरी सैलरी और भत्ते की बात करें तो, आईएमए देहरादून में प्रशिक्षण के दौरान उन्हें 56400 रुपये का मासिक स्टाइपेंड मिलेगा, जो उनके जीवन यापन में सहायक होगा. प्रशिक्षण पूरी होने और कमीशन मिलने के बाद, एक लेफ्टिनेंट के तौर पर उनकी वार्षिक सैलरी लगभग 17-18 लाख रुपये तक हो सकती है. इसके अलावा, उन्हें मुफ्त चिकित्सा कवर, होम टाउन यात्रा पर मुफ्त यात्रा सुविधा, CSD कैंटीन का लाभ, और आवास जैसी कई अन्य आकर्षक सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी. ये सभी भत्ते और सुविधाएं एक सेना अधिकारी को उनके कार्यकाल के दौरान पूरी तरह से सक्षम और संतुष्ट रखने के लिए प्रदान की जाती हैं.

पाकिस्तान ने LoC पर किया सीजफायर उल्लंघन, Indian army ने भी दिया मुंहतोड़ जवाब

अखनूर पाकिस्तानी सैनिकों ने बुधवार को जम्मू और कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) पर भारतीय पोस्टों पर बिना उकसावे के फायरिंग की। इसके बाद भारतीय सेना ने उन्हें उचित जवाब दिया। सुरक्षा अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी है। भारतीय सैनिकों की फायरिंग में पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ है। इससे पहले जम्मू जिले के अखनूर सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास संदिग्ध आतंकवादियों द्वारा एक आईईडी विस्फोट में भारतीय सेना के दो जवान शहीद हो गए थे। गलती से सुरंग पर चढ़ने से एक अधिकारी भी घायल इसी बीच भारतीय अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को इंडियन आर्मी के एक जूनियर कमीशंड अधिकारी (जेसीओ) को भी मामूली चोटें आईं। वे शाम को गलती से सुरंग पर चढ़ गए थे। जेसीओ आतंकवादी घुसपैठ रोकने वाले गश्ती दल का हिस्सा थे। घायल अधिकारी का हॉस्पिटल में इलाज जारी है। भारतीय और पाकिस्तानी सेना के बीच संघर्ष विराम समझौते को 25 फरवरी, 2021 को फिर से लागू करने के बाद से नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम उल्लंघन बहुत दुर्लभ हो गया था। अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तानी सैनिकों ने नियंत्रण रेखा के तर्कुंडी क्षेत्र में एक अग्रिम पोस्ट पर बिना उकसावे के फायरिंग की। भारतीय सेना ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और परिणामस्वरूप दुश्मन बलों में भारी नुकसान हुआ। इस बीच अधिकारियों ने बताया कि भारतीय सेना के एक जूनियर कमीशन अधिकारी (JCO) को इस शाम उसी क्षेत्र में एक लैंडमाइन पर कदम रखते हुए मामूली चोटें आईं। घायल अधिकारी को सेना के अस्पताल में भेजा गया। अधिकारियों ने यह भी कहा कि नियंत्रण रेखा पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है क्योंकि पिछले सप्ताह सीमा पार से शत्रुतापूर्ण गतिविधियां बढ़ी हैं। यह इस साल का पहला संघर्ष विराम उल्लंघन था और पांच दिनों में सीमा पार चोथी घटना थी। सोमवार को, एक सैनिक को राजौरी जिले के नॉशेरा सेक्टर में कालाल क्षेत्र में एक अग्रिम पोस्ट की निगरानी करते हुए सीमा पार से गोली लगने के कारण चोट आई। 8 फरवरी को राजौरी के केरी सेक्टर में भारतीय सेना की एक गश्ती पार्टी पर आतंकवादियों ने गोलीबारी की थी। आतंकवादी भारतीय सीमा में घुसने के अवसर का इंतजार कर रहे थे। 4 और 5 फरवरी की रात कृष्णा घाटी सेक्टर में लैंडमाइन विस्फोट से आतंकवादियों को नुकसान हुआ था। वे भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश कर रहे थे। 10 फरवरी को जम्मू स्थित व्हाइट नाइट कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC), लेफ्टिनेंट जनरल नवीन सचदेवा ने राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा का जायजा लिया। भारतीय सेना ने बताया, “GOC व्हाइट नाइट कोर, GOC एस ऑफ स्पेड्स और GOC क्रॉस्ड स्वोर्ड डिवीज़न के साथ राजौरी सेक्टर के अग्रिम क्षेत्रों का दौरा कर वर्तमान सुरक्षा स्थिति और पाकिस्तानी गतिविधियों का ऑपरेशनल अपडेट लिया।” भारत-पाकिस्तान के बीच 2021 में युद्धविराम का समझौता रिन्यू हुआ था भारत और पाकिस्तान ने 25 फरवरी, 2021 को युद्धविराम समझौते को रिन्यू किया था। दोनों देशों ने घोषणा की कि वे जम्मू-कश्मीर और अन्य क्षेत्रों में नियंत्रण रेखा (LoC) पर युद्धविराम पर सभी समझौतों का सख्ती से पालन करेंगे। तब इस्लामाबाद और नई दिल्ली में जारी एक संयुक्त बयान में इसका ऐलान किया गया था। भारत और पाकिस्तान ने शुरुआत में 2003 में युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन पाकिस्तान समझौते का उल्लंघन करता आया है। पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान के सीजफायर उल्लंघन की अन्य घटनाएं… 14 फरवरी 2024: 20 मिनट तक भारत-पाक के बीच गोलीबारी हुई, कोई घायल नहीं 14 फरवरी की शाम 5.50 बजे जम्मू के मकवाल में BSF चौकी पर पाकिस्तानी रेंजर्स ने गोलीबारी की। BSF ने भी इस गोलीबारी का जवाब दिया। BSF के अधिकारियों के मुताबिक, दोनों ओर से करीब 20 मिनट तक गोलियां चलीं। हालांकि, गोलीबारी में BSF का कोई भी जवान घायल नहीं हुआ है। 8 नवंबर 2023: सांबा के रामगढ़ सेक्टर में बॉर्डर पर गोलीबारी, BSF जवान शहीद 8 नवंबर 2023 को जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में पाकिस्तानी रेंजर्स ने नयनपुर पोस्ट पर फायरिंग की थी। BSF जवानों ने भी जवाबी फायरिंग की। गोलीबारी में BSF जवान लाल फर्न किमा घायल हुए थे। इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया था। यह गोलीबारी रात 12:20 बजे हुई थी। 26 अक्टूबर 2023: पाकिस्तान ने मोर्टार दागे, एक BSF जवान और महिला घायल जम्मू के अरनिया और सुचेतगढ़ सेक्टर में पाकिस्तान ने 26 अक्टूबर को सीज फायर का उल्लंघन किया। इंटरनेशनल बॉर्डर पर रात 8 बजे पाकिस्तानी रेंजर्स ने अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। इसमें BSF का एक जवान और एक महिला घायल हो गई। 17 अक्टूबर 2023: 2021 के शांति समझौते के बाद पहली बार पाकिस्तान ने सीजफायर तोड़ा भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर 17 अक्टूबर को पाकिस्तानी रेंजर्स ने फायरिंग की थी। इसमें दो BSF जवान घायल हुए थे। घटना इंटरनेशनल बॉर्डर पर सुबह 8:15 बजे हुई थी। BSF ने बताया था कि जवान बिजली के खंभे में चढ़कर लाइट ठीक कर रहे थे, तभी गोली लगी। 2020 में रिकॉर्ड सीजफायर उल्लंघन पाकिस्तान ने 2020 में रिकॉर्ड 4100 से ज्यादा बार सीजफायर तोड़ा था। इस दौरान नवम्बर में 128 बार, जबकि अक्टूबर में 394 बार सीजफायर तोड़ा। 2020 में सीजफायर उल्लंघन में जम्मू-कश्मीर के 21 लोगों की मौत हुई, जबकि 70 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। 2019 में 3233 बार सीजफायर तोड़ा गया। 2015 में 405 बार और उससे पहले 2014 में 583 बार सीजफायर तोड़ा गया।

भारतीय सेना ने शुरू किया 40 दिवसीय ड्राइविंग कोर्स, पुंछ में महिलाएं होंगी सशक्त

पुंछ भारतीय सेना की राष्ट्रीय राइफल्स ने 25 सीमावर्ती गांवों की महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए 40 दिवसीय ड्राइविंग कोर्स शुरू किया है। भारत-पाकिस्तान एलओसी के पास पुंछ के मेंढर में कोर्स शुरू कराया गया है। यह 40 दिवसीय ड्राइविंग कोर्स क्षेत्र के 25 सीमावर्ती गांवों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाएं दोपहिया और चार पहिया वाहन चलाने में सक्षम होंगी। सीमावर्ती इलाकों में महिलाओं के लिए वाहन चलाने का प्रशिक्षण न केवल उनकी आजीविका के लिए बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में भी उपयोगी साबित होगा। सेना द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में महिलाओं को इस कोर्स की जानकारी दी गई, ताकि वे इसका पूरा लाभ उठा सकें। इस पहल का महिलाओं ने खुले दिल से स्वागत किया और भारतीय सेना का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सेना की इस सकारात्मक मुहिम से वे न केवल आत्मनिर्भर बनेंगी बल्कि अपने परिवारों और समाज के लिए भी योगदान दे पाएंगी। एक प्रतिभागी मीनाक्षी बक्शी का कहना है कि मैं भारतीय सेना द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को देखकर बहुत खुश हूं, एलओसी के किनारे रहने वाली महिलाओं के लिए यह एक अच्छी पहल है। इससे उन्हें अपने सशक्तिकरण को समझने में मदद मिलेगी और हर क्षेत्र में वो आगे बढ़ेगी। सेना ने जो ड्राइविंग कोर्स लागू किया है, वह महिलाओं को भाग लेने और अपने कौशल को बढ़ाने में सक्षम बनाएगा। मेरा मानना है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर होना चाहिए। एलओसी के किनारे रहने वाली महिलाओं के लिए हमारी सेना जो यह पहल शुरू की है, उसके लिए मैं उन्हें धन्यवाद देती हूं। वहीं जेबा अंजुम ने कहा कि मैं सेना का धन्यवाद करना चाहूंगी कि उन्होंने ऑपरेशन सद्भाव के तहत जो ये मिशन शुरू किया है। एलओसी के पास रहने वाली महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए ड्राइविंग कोर्स शुरू किया है। यहां हम लोग बिना पैसे से ड्राइविंग कोर्स करेंगे। भारत की सेना की यह अच्छी पहल है। मैं उन्हें धन्यवाद देती हूं। भारतीय सेना का यह कदम सीमावर्ती क्षेत्रों में महिलाओं को सशक्त बनाने और उनकी सामाजिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक अनुकरणीय प्रयास है।  

लेबनान में तैनात भारतीय शांति सैनिकों की यूएन चीफ ने की तारीफ, बोले- मैं शुक्रगुजार हूं

संयुक्त राष्ट्र संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने लेबनान में शांति स्थापना अभियान में सेना भेजने वाले भारत और अन्य देशों की सराहना की। उन्होंने कहा, ‘लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (यूएनआईएफआईएल) के शांति सैनिक अपनी जगह पर बने हुए हैं। हालांकि इजरायल ने इन्हें कहीं और ट्रांसफर करने की मांग की है लेकिन संयुक्त राष्ट्र का ध्वज वहां लहरा रहा है।” यूएन चीफ ने मध्य पूर्व की स्थिति पर सुरक्षा परिषद की एक आपातकालीन बैठक में यह बात कही। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा, “मैं, संयुक्त राष्ट्र शांति सेना – यूएनआईएफआईएल – के मिलिट्री और सिविलियन मेंबर्स तथा सैन्य योगदान देने वाले देशों के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता दोहराता हूं।” लगभग 900 भारतीय सैनिक यूएनआईएफआईएल के साथ हैं, जो इजरायल और लेबनान को अलग करने वाली ‘ब्लू लाइन’ पर तैनात है। वे (शांति सैनिक), लेबनान में घुस आई इजरायली सेना और लेबनानी आतंकी ग्रुप हिजबुल्लाह के बीच, तैनात हैं। गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने अपनी दैनिक ब्रीफिंग में कहा कि जमीन पर मौजूद यूएनआईएफआईएल अधिकारियों ने बताया कि गोलीबारी जारी है और पहले से ज्यादा हो रही है। उन्होंने कहा, “वे अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही साथ अपनी जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।” दुजारिक ने बताया कि इजरायली सेना ने यूएनआईएफआईएल को ब्लू लाइन के पास कई जगहों से हटने के लिए कहा था लेकिन इसने ऑपरेशनल और राजनीतिक दोनों ही नजरिए से, रुकने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा, “हम वहीं जमे रहेंगे, साथ ही साथ हम अपने रुख और शांति सैनिकों की सुरक्षा का हर घंटे के आधार पर आकलन करेंगे।” इस हफ्ते इजरायल ने दक्षिणी लेबनान पर जमीनी हमला शुरू कर दिया। यहूदी राष्ट्र ने बुधवार लेबनान में अपने आठ सैनिकों की मौत की पुष्टि की। इस बीच लेबनानी अधिकारियों का कहना है कि बेरूत पर बुधवार रात को हुए भारी इजरायली हवाई हमलों में कम से कम छह लोग मारे गए। इससे पहले इजरायल और हमास के समर्थक ईरान ने मंगलवार रात इजरायल पर बड़ा मिसाइल हमला किया। इजरायल के चैनल 13 टीवी समाचार ने बताया कि ईरान की तरफ से कम से कम 200 जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें दागी गईं, जिससे पूरे देश में सायरन बजने लगे और लाखों लोग शेलटर्स की ओर भागे। ‘सैनिक अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं’ गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा है कि जमीन पर मौजूद यूएनआईएफआईएल अधिकारियों ने बताया कि गोलीबारी जारी है और पहले से ज्यादा हो रही है। इस सबके बीच वे अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए साथ अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। दुजारिक ने बताया कि इजरायली सेना ने यूएनआईएफआईएल को ब्लू लाइन के पास कई जगहों से हटने के लिए कहा था लेकिन ऑपरेशनल और राजनीतिक नजरिए से इसे नहीं माना गयाा। उन्होंने कहा, ‘हम वहीं जमे रहेंगे और अपने रुख और शांति सैनिकों की सुरक्षा का हर घंटे के आधार पर आकलन करेंगे।’ लेबनान में इजरायल का जमीनी हमला इजरायल ने इस हफ्ते दक्षिणी लेबनान पर जमीनी हमला शुरू किया है। इजरायल ने बुधवार लेबनान में अपने आठ सैनिकों की मौत की भी पुष्टि की। लेबनानी अधिकारियों का कहना है कि बेरूत पर बुधवार रात को हुए भारी इजरायली हवाई हमलों में कम से कम छह लोग मारे गए। इससे पहले इजरायल और हमास के समर्थक ईरान ने मंगलवार रात इजरायल पर बड़ा मिसाइल हमला किया। इजरायल के चैनल 13 टीवी समाचार ने बताया कि ईरान की तरफ से कम से कम 200 जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें दागी गईं। इससे पूरे देश में सायरन बजने लगे और लाखों लोग शेलटर्स की ओर भागे।    

Indian Army ने 56 साल बाद ढूंढ निकाले Plane Crash में शहीद हुए जवानों के शव

शिमला/लाहौल स्पीति ये कहानी उन चार फौजियों की है, जिनके शवों के अवशेष 56 साल बाद मिले हैं। ये सभी फौजी हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति में एक विमान हादसे में शहीद हो गए थे। 29 सितंबर 2024 को चन्द्रभागा-13 ढाका ग्लेशियर में सैनिकों के शवों के अवशेष बरामद हुए हैं। इन फौजियों में मलखान सिंह, सहारनपुर, नारायण सिंह पौड़ी-गढवाल और मुंशी राम, रेवाड़ी और थॉमस चैरियन केरल के तौर पर हुई है। सेना की रेस्क्यू टीम ने इन्हें निकाला है और अब काजा के लोसर हेलिपेड से इन अवशेषों को चंडीगढ़ भेजा गया। 1968 में हुआ था हादसा मामला 7 फरवरी 1968 का है। जब चंडीगढ़ से लेह के लिए भारतीय वायुसेना का एएन-12 जा रहा था। इसमें क्रू-मेम्बर के साथ कुल 102 सैनिकों सवार थे। इस दौरान रोहतांग दर्रे के करीब विमान का संपर्क टूटा और फिर यह विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस विमान के खोज के लिए वर्ष 2004, 2007, 2013, 2019 विशेष अभियान चलाया गया है। डोगरा स्काउट्स ने कई अभियान चलाए और 2005, 2006, 2013 और 2019 में सर्च ऑपरेशन पांच शव बरामद किए थे। 2003 में मिले थे विमान के पार्टस 2003 में सबसे पहले मनाली के पर्वतारोही संस्थान के ट्रैकर्स ने विमान को खोजा था। 56 साल के बाद 29 सितंबर 2024 को चन्द्रभागा-13 ढाका ग्लेशियर में सैनिकों के शव बरामद हुए। भारतीय सेना के विशेष टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद शवों को लोसर लाया गया। मनाली के एक ट्रैकर का कहना है कि साल 2023 में जब उन्होंने भी ढाका ग्लेशियर ट्रैक किया था तो यहां पर विमान का मलबा और कुछ फौजियों के अवेशष देखे थे और फोटो और वीडियो शेयर किए थे। उसने बताया कि यहां पहुंचने के लिए 2 दिन का वक्त लगता है। गर्मियों में बर्फ पिघलने के बाद यहां पर ट्रैकिंग करने वह गए थे। यहां पर पहुंचना आसान नहीं है, आम लोग यहां पर नहीं जाते हैं।  लाहौल स्पीति की चंद्रभागा रैंज में 56 साल पहले हुए विमान हादसे में अब चार फौजी जवानों के शव बरामद किए गए हैं. भारतीय सेना की टीम ने इन शवों को वहां से निकाला है और स्पीती के काजा के लोसर ले गई है. यहां पर शवों को परिवारों को सौंपा जाएगा. इन चार शवों में हरियाणा के रेवाड़ी के सिपाही मुंशीराम भी शामिल हैं. सभी शवों की पहचान हो गई है. जानकारी के अनुसार, 7 फरवरी 1968 को चंडीगढ़ से लेह के लिए इंडियन एयरफोर्स के एक विमान ने उड़ान भरी थी. इस विमान में 102 लोग सवार थे. लेकिन हिमाचल के रोहतांग दर्रे के पास विमान का संपर्क टूट गया था और फिर आगे बातल के ऊपर चंद्रभागा रैंज में विमान क्रैश हो गया था. विमान में रेवाडी की बावल तहसील के गांव गुर्जर माजरी के सिपाही स्वर्गीय मुन्शीराम भी सवार थे और 56 साल बाद अब उनकी बॉडी के अवेशष बरामद हुए हैं.  रेवाड़ी के डीसी अभिषेक मीणा ने  बताया कि सैन्य अभियान दल ने बर्फ से ढके पहाड़ों से चार शव बरामद किए हैं, उनमें स्वर्गीय मुन्शीराम के अवशेष भी हैं. उनके पार्थिव शरीर को जल्द ही गांव में लाया जाएगा. स्वर्गीय मुन्शीराम के पिता का नाम भज्जूराम, माता का नाम रामप्यारी तथा पत्नी का नाम श्रीमति पार्वती देवी है. स्वर्गीय मुन्शीराम के भाई कैलाशचन्द को इस सम्बन्ध में सेना की ओर से सूचना मिली हैं. लेह के लिए चंडीगढ़ से फौजियों ने भरी थी उड़ान गौरतलब है कि यह विमान हादसा 7 फरवरी, 1968 को हुआ था. चंडीगढ़ से 102 यात्रियों को ले जा रहा भारतीय वायु सेना का एएन-12 विमान खराब मौसम के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग के पर्वतारोहियों ने विमान के मलबे को खोजा था. बाद में सेना, खासकर डोगरा स्काउट्स ने कई अभियान चलाए और 2005, 2006, 2013 और 2019 में सर्च ऑपरेशन पांच शव बरामद किए थे. हालांकि, इस दौरान मनाली के कई ट्रैकर्स ने भी विमान के मलबे को स्पॉट किया था. लाहौस स्पीति के एसपी मयंक चौधरी ने बताया कि कि चंद्रभागा रैंज से चार जवानों के शवों को बरामद किया गया है. इन्हें काजा के लोसर ले जाया गया है और वहां पर मेडिकल टीम के अलावा, पुलिस की टीम भी मौजूद है. पोस्टरमार्टम के बाद परिजनों को ये शव सौंपे जाएंगे. 2003 में हुई हादसे की पुष्टि 2003 में, अधिकारियों ने पुष्टि की कि विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और कुछ शव बरामद किए गए थे. जिसके बाद अरनमुला से स्थानीय पुलिस ने थॉमस चेरियन के बारे में विवरण सत्यापित करने के लिए उनके घर का दौरा किया, जहां उनका परिवार रहता है. भाई थॉमस वर्गीस को समझ नहीं आ रहा था कि वह ऐसे समय क्या करें. हालांकि, उन्होंने दुख और राहत दोनों व्यक्त करते हुए कहा कि, यह उनके लिए दुखद भरा क्षण है लेकिन कब्र में दफनाने के लिए अपने भाई के अवशेषों को प्राप्त करने से कुछ शांति मिली है. तीन शवों की पहचान शैजू मैथ्यू ने बताया- परिवार 56 वर्षों के बाद भी उनकी निरंतर खोज के लिए सरकार और सेना के प्रति आभार व्यक्त करता है. केरल के कई अन्य सैनिक भी AN12 विमान में सवार थे, जिनमें कोट्टायम के केपी पनिकर, केके राजपन और आर्मी सर्विस कोर के एस भास्करन पिल्लई शामिल थे. इन सैनिकों के शव अभी तक नहीं मिले हैं. सितंबर में रोहतांग दर्रे में चार और शव मिले थे, और इनमें से तीन की पहचान हो गई है, जिसमें थॉमस चेरियन का शव भी शामिल है. स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि चौथा शव रन्नी के एक सैनिक पीएस जोसेफ का हो सकता है, जो विमान में भी था.

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