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युद्ध के बीच ईरान ने अमेरिका के वार्निंग सिस्टम को तबाह किया, अमेरिका को क्यों हुआ बड़ा नुकसान?

वाशिंगटन ईरान पर अमेरिका और इजरायली हमलों के बाद युद्ध ने भयावह मोड़ के लिया है। जहां एक तरफ ईरान ने खाड़ी देशों पर लगातार हमले जारी रखे हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने हिंद महासागर में एक ईरानी पोत को डुबो दिया है, जिसमें 80 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। इस बीच अब यह खबर सामने आई है कि ईरान ने अमेरिका को एक गहरा जख्म दे दिया है। जानकारी के मुताबिक ईरान के हमले में कतर में मौजूद अमेरिका की एक अहम मिसाइल चेतावनी प्रणाली को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई है। इसे इस क्षेत्र में अमेरिका का आंख भी कहा जाता था। जानकारी के मुताबिक करीब 1.1 अरब डॉलर की लागत वाला यह रडार सिस्टम अमेरिकी सेना के मिसाइल रक्षा नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा था। हमले से क्षेत्र में तैनात मिसाइल रक्षा तंत्र को बड़ा झटका लगा है और इससे संभावित मिसाइल हमलों का समय रहते पता लगाने की क्षमता कमजोर हो सकती है। सैटेलाइट तस्वीरों में खुलासा अमेरिकी सैन्य ढांचे को हुए नुकसान की पुष्टि सैटेलाइट तस्वीरों से भी हुई है। प्लैनेट लैब्स द्वारा जारी सैटेलाइट इमेज में अमेरिकी स्पेस फोर्स के AN/FPS-132 (ब्लॉक 5) बैलिस्टिक मिसाइल अर्ली वार्निंग रडार सिस्टम के आसपास क्षति और आग बुझाने की गतिविधियां दिखाई दी हैं। यह रडार सिस्टम मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना द्वारा संचालित सबसे बड़ा मिसाइल चेतावनी रडार माना जाता है। ईरान ने कैसे फोड़ी आंख? ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इसे सटीक मिसाइल हमला बताया है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला संभवत: कम लागत वाले हमलावर ड्रोन से किया गया होगा, जो शायद शाहेद प्रकार का था। रिपोर्ट्स के अनुसार मिसाइलों और ड्रोन के एक साथ बड़े हमले के दौरान यह ड्रोन रक्षा तंत्र को भेदने में सफल रहा। क्यों है बड़ा नुकसान? इस रडार सिस्टम को अमेरिकी रक्षा कंपनी रेथियॉन ने अपग्रेडेड अर्ली वार्निंग रडार (UEWR) कार्यक्रम के तहत बनाया था। यह प्रणाली 5000 किलोमीटर तक की दूरी पर बैलिस्टिक मिसाइलों और अन्य हवाई खतरों को ट्रैक करने में सक्षम है और पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में मिसाइल लॉन्च का शुरुआती अलर्ट देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कतर में इसकी लोकेशन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां से यह रडार ईरान, इराक, सीरिया, तुर्किये, मध्य एशिया के कुछ हिस्सों और हिंद महासागर तक की निगरानी कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस हमले का असर सिर्फ एक सैन्य ठिकाने को नुकसान तक सीमित नहीं है। अमेरिका के पूर्व सैन्य अधिकारी और पेंटागन के पूर्व सलाहकार कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि इस हमले में अमेरिका की “आंखें” निशाना बनी हैं। उनके अनुसार यह सिस्टम अमेरिकी मिसाइल रक्षा तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण था। भू-राजनीति विशेषज्ञ ब्रायन एलन ने कहा कि इस हमले के रणनीतिक असर भी हो सकते हैं। बदलने में लग जाएगा समय सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका के पास सैटेलाइट और अन्य रडार सहित वैश्विक सेंसर नेटवर्क मौजूद है, लेकिन AN/FPS-132 जैसे बड़े और स्थायी रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचने से क्षेत्रीय निगरानी में अंतर आ सकता है। ऐसे बड़े रडार सिस्टम को जल्दी बदलना या दोबारा स्थापित करना आसान नहीं होता, इसलिए इससे कुछ समय के लिए मिसाइल निगरानी और ट्रैकिंग क्षमता कमजोर हो सकती है। यह स्थिति इसलिए भी अहम है क्योंकि इस क्षेत्र में अमेरिका के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने और दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े प्रमुख समुद्री मार्ग मौजूद हैं।

US लंबे युद्ध में फंसा, ईरान जंग पर बड़ा बयान: ‘पूरी ताकत लगी, लेकिन हर हमला नहीं रोका जा सकता’

वाशिंगटन ईरान के साथ जारी युद्ध के पांचवें दिन अमेरिका ने साफ किया है कि उसने मध्य पूर्व में तैनात अपने सैनिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए कोई कमी नहीं छोड़ी है। अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने पेंटागन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने के लिए हर संसाधन और हर क्षमता का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि हर ड्रोन या मिसाइल हमले को पूरी तरह रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमला शुरू करने से पहले अधिकतम सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, लेकिन 100 प्रतिशत सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जा सकती। इसी बीच पेंटागन ने जानकारी दी कि अब तक इस संघर्ष में छह अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान में मरने वालों की संख्या 1,000 के पार पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने पहले ही संकेत दिया था कि यह जंग लंबी चल सकती है और आगे भी अमेरिकी सैनिक हताहत हो सकते हैं। अमेरिका बोला- ईरान उसे थका नहीं सकता है हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका इस सैन्य अभियान में निर्णायक बढ़त बनाए हुए है और ईरान के हवाई क्षेत्र पर तेजी से नियंत्रण स्थापित कर रहा है। उनका कहना था कि अमेरिका जितना समय जरूरी होगा, उतना समय लेगा और ईरान उसे थका नहीं सकता। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका “निर्णायक, तबाही मचाने वाले और बिना किसी रियायत के” आगे बढ़ रहा है। साथ ही उन्होंने बताया कि और लड़ाकू विमान और बमवर्षक जल्द ही इस क्षेत्र में पहुंचेंगे। जंग के पांचवें दिन एक अहम सैन्य कार्रवाई भी हुई। मंगलवार रात एक अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो दागकर ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को डुबो दिया। हेगसेथ ने कहा कि यह जहाज अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में खुद को सुरक्षित समझ रहा था, लेकिन उसे निशाना बना लिया गया। यह जहाज ईरान के नए युद्धपोतों में से एक था। श्रीलंका ने बताया कि उसके दक्षिणी तट के पास जहाज से संकट संदेश मिलने के बाद उसकी नौसेना और वायुसेना ने 180 में से 32 लोगों को बचा लिया। हेगसेथ के मुताबिक, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब किसी दुश्मन के जहाज को इस तरह अमेरिकी पनडुब्बी ने डुबोया है। उसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने कहा कि जंग की शुरुआत के मुकाबले अब ईरान कम मिसाइलें दाग रहा है। उन्होंने बताया कि अमेरिका के लगातार हमलों से ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर हो गई है। जंग कितने समय तक चलेगी, इस पर हेगसेथ ने कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी। उन्होंने कहा कि यह चार हफ्ते भी चल सकती है, छह या आठ हफ्ते भी, और हालात के मुताबिक इससे कम या ज्यादा समय भी लग सकता है। उनके मुताबिक, युद्ध की रफ्तार और दिशा अमेरिका तय कर रहा है और दुश्मन असंतुलित स्थिति में है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में अमेरिका ने उन्नत हथियारों का इस्तेमाल किया और अब ईरानी आसमान पर नियंत्रण स्थापित करने के बाद ग्रैविटी बम का इस्तेमाल करने की योजना है। साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास पर्याप्त गोला-बारूद और संसाधन मौजूद हैं। एक इजरायली सैन्य अधिकारी के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के शीर्ष अधिकारियों ने करीब तीन हफ्ते पहले हमलों की योजना बनानी शुरू कर दी थी। इस संघर्ष में अब तक ईरान में 1,000 से ज्यादा और लेबनान में दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है और हजारों यात्री अलग-अलग देशों में फंसे हुए हैं। सितंबर तक चल सकता है युद्ध ‘पॉलिटिको’ की रिपोर्ट में आंतरिक दस्तावेजों के हवाले से लिखा है कि यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अमेरिकी रक्षा विभाग से फ्लोरिडा स्थित अपने मुख्यालय में और अधिक सैन्य खुफिया कर्मचारियों को भेजने का आग्रह किया है। इसका उद्देश्य आने वाले महीनों में ईरान के खिलाफ अभियानों को सुचारू रूप से चलाना है। इस अतिरिक्त कर्मचारियों की मांग से पता चलता है कि अमेरिका एक लंबे अभियान की योजना बना रहा है, जो सितंबर तक खिंच सकता है। यह स्थिति राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उन पिछली टिप्पणियों के बिल्कुल उलट है, जिनमें उन्होंने युद्ध शुरू होने के तुरंत बाद कहा था कि यह अभियान लगभग चार सप्ताह या उससे भी कम समय में पूरा हो सकता है। एक अमेरिकी अधिकारी ने पॉलिटिको को बताया कि रक्षा अधिकारी इस क्षेत्र में अतिरिक्त वायु रक्षा प्रणालियां तैनात करने की तैयारी कर रहे हैं। इनमें विशेष रूप से छोटी और कम खर्चीली ‘एंटी-ड्रोन तकनीक’ शामिल हैं, जिन्हें पेंटागन ने हाल के वर्षों में विकसित किया है। ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ अमेरिका और इजरायल द्वारा संयुक्त रूप से शुरू किया गया यह युद्ध 28 फरवरी को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के नाम से शुरू हुआ था। इस अभियान के पहले ही दिन ईरान की राजधानी तेहरान में एक बड़े हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई उनके आवास पर मारे गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने इस युद्ध के व्यापक परिणामों का पूरी तरह से अनुमान नहीं लगाया था। नतीजतन, अमेरिकी विदेश विभाग ने पूरे मध्य पूर्व से अपने राजनयिक कर्मचारियों को सुरक्षित निकालने के लिए अतिरिक्त संसाधन लगाने शुरू कर दिए हैं। निकासी प्रक्रिया का सीधा नियंत्रण अब विदेश विभाग के वरिष्ठ नेतृत्व के हाथों में है। इस अभियान के दौरान अब तक छह अमेरिकी सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में और भी अमेरिकी सैनिक हताहत हो सकते हैं। पड़ोसी देशों पर खतरा इस संघर्ष का असर अब फारस की खाड़ी के अन्य देशों पर भी पड़ने लगा है। ईरानी ड्रोन और मिसाइलें संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, कुवैत और अन्य पड़ोसी देशों के हवाई क्षेत्र की ओर उड़ती देखी गई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया भर में तेल निर्यात के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, वहां से जहाजों की आवाजाही काफी हद तक रुक गई है। ड्रोन हमलों के बढ़ते खतरे के कारण व्यापारिक … Read more

अमेरिका का बड़ा शक्ति प्रदर्शन: ईरान वॉर के बीच Doomsday मिसाइल टेस्ट, हिरोशिमा से भी ज्यादा विनाश का दावा; स्पेन झुका

न्यूयॉर्क/ तेहरान मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच मंगलवार रात अमेरिका ने कैलिफोर्निया तट पर एक डूम्सडे बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया. न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सांता बारबरा के पास वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से रात 11 बजे ‘मिनटमैन III बैलिस्टिक मिसाइल’ लॉन्च की गई, जो हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से 20 गुना ज्यादा ताकतवर परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है।  यूएस स्पेस फोर्स के मुताबिक, जीटी 254 के रूप में जाना जाने वाला निहत्था रॉकेट, पश्चिम-मध्य प्रशांत महासागर में मार्शल द्वीप के पास अपने टार्गेट पर जाकर गिरा. फोर्स ग्लोबल स्ट्राइक कमांड के मुताबिक, मिसाइल को ‘प्रभावशीलता, तत्परता और सटीकता को सत्यापित करने’ के लिए दागा गया था।  576वें फ्लाइट टेस्ट स्क्वाड्रन के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल कैरी व्रे ने एक प्रेस रिलीज में कहा, “इससे हमें मिसाइल सिस्टम के अलग-अलग घटकों के प्रदर्शन का आकलन करने की अनुमति मिली।  जंग की ज़द में पूरा मिडिल ईस्ट पिछले दिनों अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया, जिसमें देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की तेहरान में मौत हो गई. इसके बाद पूरा मिडिल ईस्ट जंग की चपेट में आ गया है।   खामेनेई की मौत के बाद ईरान की तरफ से लगातार इजरायल और मिडिल ईस्ट में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी हैं. उधर हिज्बुल्लाह के एक्टिव होने के बाद इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरुत में हमलों की झड़ी लगा दी है।  राष्ट्रपति ट्रंप ने बाद में ईरान पर हमले तेज करने की कसम खाई और चेतावनी देते हुए कहा कि बड़ा हमला होने वाला है.  धमकी और स्पेन आ गया लाइन पर! मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक नया विवाद सामने आया है. इस बार मामला केवल ईरान, इज़राइल और अमेरिका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यूरोप का प्रमुख देश स्पेन भी इसमें खिंच आया. महज दो दिनों के भीतर स्पेन की सरकार के बयान और रुख में जो बदलाव दिखाई दिया, उसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में आर्थिक दबाव की ताकत को फिर से सामने ला दिया।  पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने ईरान पर अमेरिका और इज़राइल की सैन्य कार्रवाई की आलोचना की. उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में बढ़ता युद्ध दुनिया के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. सांचेज़ के अनुसार, इस तरह की लड़ाई लाखों लोगों की ज़िंदगी को खतरे में डाल सकती है. उन्होंने टेलीविजन पर अपने संबोधन में कहा कि स्पेन ऐसी किसी कार्रवाई का हिस्सा नहीं बनेगा जो दुनिया के लिए नुकसानदेह हो और उसके अपने मूल्यों के खिलाफ जाती हो. उनका कहना था कि केवल किसी देश के दबाव या डर से स्पेन अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करेगा. लेकिन स्पेन का यह रुख ज्यादा देर तक बिना प्रतिक्रिया के नहीं रहा।  ट्रंप की कड़ी चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुरंत सख्त प्रतिक्रिया दी. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर स्पेन अपने यहां मौजूद संयुक्त सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान पर हमलों के लिए अमेरिका को नहीं करने देता, तो अमेरिका स्पेन के साथ व्यापारिक संबंध खत्म कर सकता है. ट्रंप के इस बयान को यूरोप में गंभीरता से लिया गया. वजह यह है कि ट्रंप पहले भी कई बार टैरिफ और व्यापारिक प्रतिबंधों की धमकी देकर दूसरे देशों पर दबाव बनाते रहे हैं. स्पेन ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के लिए अपने ठिकानों का इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया था. यही फैसला ट्रंप को नागवार गुजरा।  सैन्य अड्डों पर शुरू हुआ विवाद स्पेन के दक्षिण में दो अहम सैन्य अड्डे हैं रोता नौसैनिक अड्डा और मोरॉन वायुसेना अड्डा.इनका इस्तेमाल अमेरिका और स्पेन दोनों करते हैं, लेकिन इन पर नियंत्रण स्पेन का ही है. ट्रंप ने इन अड्डों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर अमेरिका चाहे तो उनका इस्तेमाल कर सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि हम वहां जाकर उनका उपयोग कर सकते हैं, कोई हमें रोक नहीं सकता।  स्पेन का साफ संदेश: युद्ध नहीं ट्रंप की धमकी के बावजूद सांचेज़ ने शुरुआत में अपना रुख बरकरार रखा. उन्होंने कहा कि स्पेन की नीति बहुत स्पष्ट है युद्ध नहीं.उनका कहना था कि अगर ईरान पर हमले बढ़ते हैं तो मध्य पूर्व एक बार फिर लंबे और महंगे युद्ध में फंस सकता है, जैसा पहले इराक और अफगानिस्तान में हुआ था.इन युद्धों ने कई सालों तक क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित किया था और भारी मानवीय व आर्थिक नुकसान हुआ था।  यूरोपीय संघ के नियमों के मुताबिक व्यापार से जुड़े फैसले सामूहिक रूप से किए जाते हैं. इसलिए अगर अमेरिका स्पेन पर व्यापारिक कार्रवाई करता है तो उसका असर पूरे यूरोप पर पड़ सकता है. यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता ओलोफ गिल ने कहा कि यूरोपीय संघ अपने सदस्य देशों के साथ खड़ा है और जरूरत पड़ने पर अपने आर्थिक हितों की रक्षा करेगा।  ऐसे होता है दोनों के बीच व्यापार  आंकड़ों के अनुसार अमेरिका और स्पेन के बीच व्यापार काफी महत्वपूर्ण है, लेकिन इतना बड़ा भी नहीं कि तुरंत आर्थिक संकट पैदा हो जाए. स्पेन के केंद्रीय बैंक बैंक ऑफ स्पेन के मुताबिक अमेरिका के साथ स्पेन का कुल व्यापार उसके सकल घरेलू उत्पाद का करीब 4.4 प्रतिशत है.स्पेन से अमेरिका को होने वाला निर्यात करीब 16 अरब यूरो का है.इस हिसाब से अमेरिका स्पेन का छठा सबसे बड़ा निर्यात बाजार है. फिर भी विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका की चेतावनी का असर केवल आर्थिक नहीं बल्कि राजनीतिक भी होता है।  ट्रंप के बयान के बाद स्पेन के उद्योग और व्यापार जगत में चिंता बढ़ गई. वहां के प्रमुख कारोबारी संगठन सीईओई, सीईपीवाईएमई और एटीए ने कहा कि अमेरिका स्पेन का एक अहम आर्थिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को प्रभावित नहीं होना चाहिए. व्यापारिक संगठनों ने उम्मीद जताई कि दोनों देश बातचीत के जरिए इस विवाद को सुलझा लेंगे।  सरकार की तरफ से संयम बरतने का संदेश स्पेन के मंत्री कार्लोस कुएर्पो ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि ट्रंप की टिप्पणियों के अलावा अमेरिका की तरफ से कोई नया कदम नहीं उठाया गया है. उन्होंने लोगों से घबराने के बजाय शांत रहने की अपील की।  स्पेन और ट्रंप प्रशासन के बीच यह पहला विवाद नहीं है. पिछले साल स्पेन ने नाटो के उस प्रस्ताव … Read more

Aramco रिफाइनरी पर ईरान ने किया ड्रोन अटैक, PM मोदी ने शांति और स्थिरता के लिए की अपील

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दुबई दुबई में स्थित दुनिया के सबसे बड़े ऑयल टैंक ‘अरामको’ पर ईरान ने अटैक किया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको ने ड्रोन हमलों के बाद सोमवार को अपनी रास तनुरा तेल रिफाइनरी बंद कर दी. रिपोर्ट के मुताबिक, बंद होने की खबरों से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 9.32% बढ़ गई हैं. यह जगह सऊदी की सबसे बड़ी और सबसे स्ट्रेटेजिक एनर्जी साइट्स में से एक है. हमले के बाद इसके प्रोसेसिंग कॉम्प्लेक्स में आग लग गई. अधिकारियों का कहना है कि आग पर काबू पा लिया गया है और किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस घटना ने इलाके में ज़रूरी एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर चिंता पैदा कर दी है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारी के ने बताया कि अरामको की रास तनुरा रिफाइनरी को एहतियात के तौर पर बंद कर दिया गया है. अधिकारी ने कहा कि स्थिति कंट्रोल में है. ईरान युद्ध के बीच PM मोदी का बड़ा बयान पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण युद्ध और ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की ऐतिहासिक मुलाकात भारत की कूटनीति के लिए एक नया अध्याय साबित हो सकती है. नई दिल्ली में हुई इस बैठक में दोनों देशों ने न केवल द्विपक्षीय संबंधों को ‘नेक्स्ट लेवल पार्टनरशिप’  पर ले जाने का संकल्प लिया, बल्कि वैश्विक शांति के लिए एक मजबूत संदेश भी साझा किया. प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति भारत के लिए गहरी चिंता का विषय है. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत हमेशा से ही शांति और स्थिरता का पक्षधर रहा है और सभी विवादों का समाधान ‘डायलॉग और डिप्लोमेसी’ (संवाद और कूटनीति) के माध्यम से होना चाहिए.  पीएम मोदी ने कहा कि क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में सभी संबंधित देशों के साथ मिलकर काम जारी रहेगा. उन्होंने दोहराया कि “हमने हमेशा शांति और स्थिरता की अपील की है.” आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरपंथ को लेकर भी दोनों नेताओं के बीच गंभीर चर्चा हुई. इस दौरान दोनों नेताओं ने आतंकवाद और कट्टरपंथ को पूरी मानवता के लिए एक साझा खतरा बताते हुए इसके खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया. रक्षा क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत और कनाडा ने ‘इंडिया-कनाडा डिफेंस डायलॉग’ की स्थापना का निर्णय लिया है.  इसके माध्यम से दोनों देश डिफेंस इंडस्ट्री, मिलिट्री एक्सचेंज और मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस (समुद्री सुरक्षा जागरूकता) को बढ़ावा देंगे. पीएम मोदी ने इस क्षेत्र में रह रहे लाखों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि भारत उनकी सलामती के लिए सभी देशों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा. ईरान जंग का ख़तरनाक दौर… दुनिया भर में, ईरान जंग के बढ़ने के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में चार साल में सबसे ज़्यादा उछाल आया है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट के ज़रिए व्यापार करीब रुक गया है. यह एक ऐसा पानी का रास्ता है, जो रोज़ाना दुनिया का करीब पांचवें हिस्से का कच्चा तेल ले जाता है. हालांकि, ईरान ने ऑफिशियली चैनल बंद नहीं किया है, लेकिन जहाज़ मालिकों ने लड़ाई के बीच खुद ही रोक लगा दी है. ईरान युद्ध ग्लोबल ऑयल मार्केट के लिए एक खतरनाक नया दौर है. US और इज़रायल ने शनिवार को ईरान में कई जगहों पर मिसाइलें दागीं और लोकल लोगों से इस्लामिक शासन को उखाड़ फेंकने की अपील की. ईरान के सुप्रीम लीडर, अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने के बाद तेहरान ने इज़रायल के साथ-साथ सऊदी अरब, कतर, यूनाइटेड अरब अमीरात, कुवैत और बहरीन जैसे देशों में US बेस और दूसरे ठिकानों पर हमलों की झड़ी लगा दी. 

ईरान का कड़ा संदेश: ट्रंप को दिया सीधा जवाब, मुसलमान देशों पर हमले को गलती मानते हुए, 6 देशों के खिलाफ विरोध

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तेहरान  ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के बाद ईरान ने अपना इरादा बता दिया है। डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से यह दावा किए जाने के बाद कि ईरान का नेतृत्व अब अमेरिका संग बातचीत के लिए तैयार है, ईरान ने साफ किया है कि अब बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं बची है। इसके साथ ही ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप को सीधा संदेश भेज दिया है। ईरान के सिक्योरिटी चीफ अली लारीजानी ने ट्रंप के बयानों को सिरे से खारिज कर दिया। सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में अली लारीजानी ने कहा कि तेहरान अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं करेगा। यह बयान उन रिपोर्ट्स के जवाब में था जिसमें यह कहा जा रहा था कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत फिर से शुरू करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी रविवार को इस तरह का एक बयान दिया था। डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया था कि वह ईरान के नए नेतृत्व से बातचीत के लिए तैयार हैं। उन्होंने ‘द अटलांटिक’ मैग्जीन के साथ एक इंटरव्यू में कहा था, “वे बात करना चाहते हैं, मैंने बातचीत के लिए सहमति दे दी है, इसलिए मैं उनसे बात करूंगा।” ईरान पर हमले जारी इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद भी अमेरिका-इजरायल ने रविवार को ईरान में कई जगहों पर जोरदार हमले किए हैं। ईरानी नेताओं के मुताबिक, इन हमलों की शुरुआत से अब तक खामेनेई और अन्य वरिष्ठ नेताओं के अलावा 200 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। अमेरिका और इजरायल ने ईरान के महत्वपूर्ण सैन्य, राजनीतिक और खुफिया ठिकानों को भी निशाना बनाया है। इससे प्रतीत होता है कि जंग व्यापक होती जा रही है और यह लंबे समय तक चल सकती है, जो पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता ला सकती है। ईरान ने अमेरिकी सैन्य अड्डों पर बोला हमला वहीं ईरान ने बदले का संकल्प लेते हुए जवाबी कार्रवाई में इजरायल और अरब देशों पर सैंकड़ों मिसाइलें दागी हैं। इजरायल की बचाव सेवाओं के मुताबिक यरुशलम और मध्य शहर बेत शेमेश के एक प्रार्थना स्थल (सिनागॉग) समेत कई जगहों पर हमले हुए। बेत शेमेश में नौ लोगों की मौत हो गई है और 28 लोग घायल हुए। इसके साथ ही इजरायल में मृतकों की कुल संख्या 11 हो गई। वहीं खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर ईरान लगातार मिसाइलें दाग रहा है। ईरान ने मुसलमान देशों पर हमला करके गलती इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर हमला किया तो उसने जवाबी कार्रवाई के तहत उन 6 पड़ोसी देशों पर हमला बोल दिया, जो सीधे तौर पर इस जंग में शामिल नहीं थे। अब इन सभी देशों ने ईरान के खिलाफ बयान जारी किया है। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात ने तो ईरान के राजदूत को तलब कर नाराजगी जताई है। ऐसी स्थिति में यह सवाल अब उठ रहा है कि क्या ईरान ने पड़ोस के मुसलमान देशों पर हमला करके गलती की। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि गल्फ कॉपरेशन काउंसिल के वाले इन 6 देशों ने अब ईरान के खिलाफ साझा बयान जारी किया है। यही नहीं इन देशों का कहना है कि हमारे पास अधिकार है कि हम भी ईरान के इन आक्रामक हमलों का जवाब दे सकें। इस संबंध में इन देशों ने एक ऑनलाइन मीटिंग भी की है, जिसमें ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच छिड़ी जंग से उपजे हालातों पर चर्चा की गई। इसके अलावा यह बात भी हुई कि ईरान ने हम पर हमला करके गलती की है। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, बहरीन, ओमान, कतर और कुवैत को ईरानी हमलों का सामना करना पड़ा है। इन सभी देशों के विदेश मंत्रियों ने चर्चा की और क्षेत्र में स्थिरता कायम करने के उपायों पर भी बात की। खाड़ी देश बोले- संभल जाओ, वरना हम भी कदम उठाएंगे खाड़ी के इन सभी देशों ने कहा कि हम अपनी सुरक्षा और स्थिरता के लिए कदम उठाने को स्वतंत्र हैं। UAE ने तो ईरान के राजदूत रजा अमेरी को तलब किया और उनसे विरोध जताया है। यूएई ने कहा कि ईरान ने हमारे ऊपर हमला करके सही नहीं किया है। UAE ने कहा कि हमारे ऊपर हमला संयुक्त राष्ट्र के नियमों का उल्लंघन है। इसके अलावा हमारी संप्रभुता को चैलेंज किया गया है और राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में डाली गई है। ऐसी स्थिति को हम स्वीकार नहीं कर सकते हैं। हमारे पास भी ईरान के हमलों पर जवाब देने का अधिकार है। डोनाल्ड ट्रंप ने की UAE के नेता से बात, शियाओं में गम और गुस्सा इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से बात भी की है। उन्होंने UAE के लीडर को फोन किया और ईरान के हमलों को लेकर चर्चा की। दोनों ने इस मसले पर भी बात की कि आखिर आने वाले दिन कैसे हो सकते हैं। बता दें कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई भी इन हमलों में मारे गए हैं। उनके मारे जाने से दुनिया भर के शिया मुसलमानों में गम और गुस्सा है। भारत में भी श्रीनगर, लखनऊ, दिल्ली समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। खाड़ी देशों में धमाके कई खाड़ी देशों में ईरानी हमलों के बाद धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं। यूएई की सरकारी मीडिया के मुताबिक राजधानी अबू धाबी पर ईरानी हमलों की चपेट में आने से 2 लोगों की मौत हो गई और हवाई हमलों से निकले मलबे के कारण शहर के मुख्य बंदरगाह और प्रतिष्ठित बुर्ज अल अरब होटल में आग लग गई। ईरानी कार्रवाई का दायरा ओमान तक फैल गया है, जो पश्चिम के साथ ईरान का लंबे समय से वार्ताकार रहा है और इससे पहले इस संघर्ष में शामिल नहीं हुआ था। इसके अलावा सऊदी अरब ने अपनी राजधानी रियाद और पूर्वी क्षेत्र पर ईरान के हमलों की निंदा करते हुए कहा कि उसने इन हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया है। सऊदी अरब ने स्पष्ट किया कि उसने अपने हवाई क्षेत्र या भूभाग का इस्तेमाल ईरान को निशाना बनाने के लिए नहीं होने दिया। वहीं जॉर्डन ने कहा कि उसने 49 ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों का सामना किया। कुवैत, बहरीन और कतर … Read more

मिडिल ईस्ट की जंग में फ्रांस की एंट्री: 48 घंटे में ईरान को कितनी क्षति हुई? 48 नेता, 40 कमांडर और 9 नेवल शिप का नुकसान

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तेहरान / न्यूयॉर्क अमेरिका और इजरायल के हमलों के दौरान ईरान को 48 घंटे में भारी नुकसान हुआ है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को बताया कि इन हमलों में 48 ईरानी नेता मारे गए हैं. उन्होंने कहा, ‘यह तेजी से आगे बढ़ रहा है. कोई विश्वास नहीं कर सकता कि हमने कितनी सफलता हासिल की है, एक ही हमले में 48 नेता खत्म हो गए.’ ट्रंप ने यह बात फॉक्स न्यूज के साथ इंटरव्यू में कही. वहीं इजरायल की सेना (IDF) ने कहा कि इस हमले में 40 ‘महत्वपूर्ण’ ईरानी सैन्य कमांडर मारे गए हैं, जिनमें ईरान के चीफ ऑफ स्टाफ, अब्दुलरहीम मौसावी भी शामिल हैं. IDF के अनुसार, यह कार्रवाई खामेनेई पर हमले के तुरंत बाद हुई. नौ ईरानी युद्धपोत डूबे ट्रंप ने रविवार को कहा कि अमेरिकी सेनाएं ईरान की नौसेना को बेअसर करने में लगी हैं और अब तक नौ ईरानी युद्धपोत डूब चुके हैं. उन्होंने कहा, ‘वे जल्दी ही समुद्र की तलहटी पर तैरेंगे!’ उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी हमलों ने ईरानी नौसेना मुख्यालय को भी भारी नुकसान पहुंचाया है. तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत ईरानी सैन्य बलों ने जवाब में सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं. अमेरिकी सेना ने पुष्टि की कि इस संघर्ष में अब तक तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और पांच गंभीर रूप से घायल हुए हैं. अमेरिकी सेनाध्यक्षों के अनुसार, ईरान के खिलाफ संयुक्त अमेरिकी-इजरायली ऑपरेशन ने देश के कई प्रमुख सैन्य और राजनीतिक नेताओं को खत्म कर दिया, जिनमें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई भी शामिल थे. USS अब्राहम लिंकन पर हमले का दावा खारिज यह संघर्ष अब पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र में फैल गया है. ईरानी मिसाइलों ने यूएई, कतर, सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन को निशाना बनाया. ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने रविवार को दावा किया कि अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln पर चार बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं, लेकिन अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि मिसाइलें कैरियर के पास तक भी नहीं पहुंच सकीं और कैरियर अभी भी क्षेत्र में संचालन कर रहा है. अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए ईरान पर भीषण हमले किए जो तीसरे दिन भी जारी हैं. इसके जवाब में ईरान ने भी कई देशों में बने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में टकराव बढ़ता जा रहा है.  दूसरी तरफ खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने भी अपने तेवर से बता दिया है कि वो रुकने वाला नहीं है. ईरान की जामकरान मस्जिद पर इंतकाम का लाल झंडा फहराया गया है. ईरान ने जवाबी हमले में ‘करारा’ जवाब देने का दावा करते हुए इजरायल और मिडिल ईस्ट में स्थित कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है. मिडिल ईस्ट के देशों ने अपने एयरस्पेस बंद कर दिए हैं, जबकि कई देशों ने अपने नागरिकों को एडवाइजरी जारी की है, जिसमें गैर-ज़रूरी मूवमेंट से बचने के लिए कहा गया है.  पाकिस्तान में US दूतावास अलर्ट पर अमेरिकी दूतावास इस्लामाबाद ने पाकिस्तान में वर्तमान स्थिति को लेकर चेतावनी जारी की है. दूतावास ने बताया कि लाहौर स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर चल रहे प्रदर्शन और कराची के अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर हिंसक विरोध प्रदर्शन की सूचना मिल रही है. इसके अलावा, इस्लामाबाद में अमेरिकी दूतावास और पेशावर के अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के सामने भी अतिरिक्त प्रदर्शन के आह्वान हो रहे हैं. अमेरिकी सरकार के कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे तब तक अपनी आवाजाही सीमित रखें जब तक अन्य सूचना न दी जाए. सेंसेक्स 2743 अंक टूटा, निफ्टी 519 अंक गिरा ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई है. सेंसेक्स में 2743 अंक यानी 3.38% की भारी गिरावट देखी गई और यह 78,543 अंक पर खुला. वहीं, निफ्टी इंडेक्स में भी 519 अंक या 2.06% का नुकसान हुआ, जो इसे 24,659 अंक पर ले आया. इजरायल के हमलों में कम से कम 10 लोगों की मौत ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. इजरायल के हमलों के चलते बेरूत के दक्षिणी इलाकों में कम से कम 10 लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई है. साइप्रस में ब्रिटिश बेस पर ड्रोन हमला, नुकसान की पुष्टि साइप्रस ने पुष्टि की है कि उसके द्वीप पर स्थित एक ब्रिटिश सैन्य ठिकाने को ड्रोन हमले का निशाना बनाया गया था. इस हमले से ठिकाने को गंभीर नुकसान पहुंचा है, हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं आई है. यह घटना क्षेत्रीय सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता के संदर्भ में चिंता का विषय बनी हुई है.  ईरानी सुप्रीम लीडर की हत्या के विरोध में डोडा-किश्तवाड़ में बंद का आह्वान डोडा और किश्तवार जिलों में शिया और अन्य मुस्लिम धार्मिक संगठनों ने आज बंद का आह्वान किया है. यह बंद ईरान के सुप्रीम नेता की हत्या के विरोध में आयोजित किया गया है. जम्मू डिवीजन के ये दोनों जिले धार्मिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र हैं, जहां इस तरह के घटनाक्रम का गहरा असर पड़ता है.

ईरान की कसम और मिसाइल अटैक से हड़कंप, ट्रंप का सख्त संदेश- ऐसा जवाब मिलेगा जो दुनिया ने नहीं देखा

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ईरान ईरान ने अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद व्यापक सैन्य कार्रवाई का दावा किया है। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ प्रतिशोध के तौर पर की जा रही है। ईरानी मीडिया और सैन्य सूत्रों के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में इजरायल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए गए हैं। UAE और कतर में धमाकों की खबर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर, जिन्हें अमेरिका का करीबी सहयोगी माना जाता है, वहां हमलों की सूचना सामने आई है। दुबई और कतर की राजधानी दोहा में कई जोरदार धमाकों की आवाज सुनाई देने की खबरें हैं। हालांकि इन हमलों से हुए नुकसान और हताहतों को लेकर स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।   IRGC का दावा: मिसाइल और ड्रोन से हमला ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस’ के पांचवें चरण के तहत कार्रवाई का दावा किया है। जेबेल अली एंकरेज पर अमेरिकी जहाज के लिए गोला-बारूद ले जा रहे एक पोत को ड्रोन से निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। कुवैत के अब्दुल्ला मुबारक क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक अड्डे पर 4 बैलिस्टिक मिसाइल और 12 ड्रोन से हमला किए जाने की बात भी सामने आ रही है। हमलों में बुनियादी ढांचे के नष्ट होने और अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इन दावों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दुबई एयरपोर्ट और प्रमुख स्थलों पर हमला ईरान ने दुनिया के व्यस्ततम हवाई अड्डों में शामिल दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा को निशाना बनाने का दावा किया है। साथ ही दुबई के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पाम जुमेराह और लक्जरी होटल बुर्ज अल अरब पर भी पहले हमले किए जाने की बात कही गई है। अमेरिका राष्ट्रपति ने फिर दी चेतावनी अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हमला किया गया तो अमेरिका, ऐसा जवाब देगा जो पहले कभी नहीं देखा गया। ट्रंप के अनुसार, अगर ईरान ने हमारी रेड लाइन पार की, तो उसे इसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ेगा। ईरान ने सार्वजनिक रूप से बदला लेने की कसम खाई वहीं, खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने सार्वजनिक रूप से बदला लेने की कसम खाई है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अमेरिका के समर्पण तक कार्रवाई जारी रहेगी। हालांकि, इन घटनाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ गया है और क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।

ईरान ने US बेस को भी बनाया निशाना, खामेनेई की मौत के बाद इजरायल पर मिसाइल अटैक

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तेहरान. ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। ईरान ने अपना नया कमांडर इन चीफ नियुक्त किया है। ईरान ने खामेनेई की मौत के बगाद 40 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। वहीं इजरायल और अमेरिका के इस हमले की निंदा संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने भी की है। वहीं ईरान ने नए सुप्रीम लीडर का भी ऐलान किया है। हमलों के बाद भड़के हुए ईरान ने भी पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी एयरबेसों को निशाना बनाया। ये हमले ऐसे समय में हुए जब हाल के हफ्तों में तनाव काफी बढ़ गया है। अमेरिकी युद्धपोत क्षेत्र में तैनात किए जा चुके थे और डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए एक समझौता चाहते थे। यह उस समय हो रहा है जब देश के भीतर भी हालात चुनौतीपूर्ण हैं और राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है। ईरान के हमलों की वजह से कतर, सऊदी अरब, ईराक और अन्य देशों में भी उसका विरोध हो रहा है। वहीं खबर के मुताबिक यूएई में ईरान के हमले में एक शख्स की मौत भी हो गई है। IRGC ने ब्रिगेडियर जनरल अहमद वहीदी को नया कमांडर इन चीफ चुन लिया है। ऐसे में युद्ध अभी लंबा खिंचने की संभावना नजर आ रही है। खामेनेई के मारे जाने पर प्रदर्शन की आग भारत तक पहुंच गई है। भारत में कश्मीर, यूपी और कई अन्य जगहों पर शिया मुसलमान सड़कों पर उतर रहे हैं। यूएन ने की हमले की निंदा संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुतारेस ने ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हवाई हमलों की शनिवार को निंदा की और ”क्षेत्र और पूरी दुनिया को संकट से निकालने” के लिए तत्काल फिर से बातचीत शुरू करने का आह्वान किया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने आपातकालीन बैठक में कहा कि स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, ”वरना व्यापक संघर्ष होने की आशंका है जिसके नागरिकों और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से गंभीर परिणाम हो सकते हैं।” यहां पढ़ें ईरान-इजरायल युद्ध का पूरा मामला… कैसे चुना जाएगा ईरान का सुप्रीम लीडर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत ने देश के भविष्य को लेकर बेहद महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, मौलवियों की एक समिति को उनके स्थान पर नए नेता के चयन का काम सौंपा गया है। ईरान के संविधान के तहत 88 सदस्यीय समिति ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ (विशेषज्ञों की सभा) नये सर्वोच्च नेता का चयन करेगी। इस निकाय में केवल शिया धर्मगुरु शामिल होते हैं, जिन्हें हर आठ वर्ष में जनमत के आधार पर चुना जाता है। कानून के अनुसार, ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ को जल्द से जल्द नये सर्वोच्च नेता का चयन करना होगा। यदि चयन में देरी होता है तो एक नेतृत्व परिषद कार्यभार संभाल सकती है, जिसमें राष्ट्रपति, न्यायपालिका प्रमुख और ‘गार्जियन काउंसिल’ का एक वरिष्ठ सदस्य शामिल होता है।

मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव! खामेनेई बोले- जंगी बेड़े को समंदर में ही खत्म कर देंगे

  तेहारन अमेरिका और ईरान के बीच लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है. अब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि उनके पास ऐसे हथियार हैं जो अमेरिकी जंगी बेड़ा तो तबाह कर सकते हैं. वहीं, ईरान के इस बयान से सप्ष्ट हो गया है कि वो भी युद्ध की तैयारी कर रहा है और अगर अमेरिका ने हमला किया तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा. दरअसल, अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी अचानक बढ़ते हुए पिछले 24 घंटे में 50 से अधिक लड़ाकू विमानों की तैनाती की. डिपेंडेंट फ़्लाइट-ट्रैकिंग डेटा और मिलिट्री एविएशन मॉनिटर्स के अनुसार, एफ-22, एफ-35 और एफ-16 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान मध्य पूर्व की ओर बढ़ते देखे गए हैं. इनके साथ कई हवाई ईंधन भरने वाले टैंकर भी भेजे गए हैं, जिससे संकेत मिलता है कि अमेरिकी सेना लंबे वक्त तक सैन्य अभियान चलाने की तैयारी कर रही है. इससे पहले ट्रंप ने ऐलान किया था कि उन्होंने अमेरिकी सेना के कई उन्नत युद्धपोतों को मिडिल ईस्ट भेज दिया है. खामेनेई की अमेरिका को चेतावनी ट्रंप के इसी बयान पर पलटवार करते हुए खामेनेई ने सोशल मीडिया हैंडल पर एक तस्वीर पोस्ट की है, जिसमें अमेरिका के सबसे बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर USS Gerald R. Ford को पानी के नीचे डूबा हुआ दिखाया गया है. साथ में एक कब्र का प्रतीक चिह्न लगा हुआ है. ‘युद्धपोत से ज्यादा खतरनाक होता है हथियार’ खामेनेई ने अपनी पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति के बयानों पर तंज कसते हुए लिखा कि अमेरिकी राष्ट्रपति लगातार कहते हैं कि उन्होंने ईरान की ओर एक युद्धपोत भेजा है. बेशक, युद्धपोत एक खतरनाक सैन्य हार्डवेयर है, लेकिन उस युद्धपोत से भी अधिक खतरनाक वह हथियार है जो उस जहाज को समुद्र में डुबो सकता है. खामनेई का ये बयान ईरान की रक्षा क्षमताओं और उसकी जवाबी कार्रवाई की तैयारी को दिखा रहा है. वहीं, तेहरान और वॉशिंगटन के बीच बढ़ते तनाव के बीच इस तरह की बयानबाजी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने इशारों में अपनी एंटी-शिप मिसाइल प्रणालियों की ताकत का जिक्र किया है. अमेरिकी नौसैनिक संपत्तियों की तैनाती को ईरान एक बड़ी चुनौती के रूप में देख रहा है, जिसके जवाब में उसने अब सार्वजनिक रूप से युद्धपोतों को नष्ट करने का डर दिखाया है. फिलहाल दोनों ओर से तनाव चरम पर है. ईरान नहीं मान रहा, बन सकती हैं जंग की वजह तेहरान परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका-ईरान के बीच जिनेवा में हुई अप्रत्यक्ष वार्ताओं कुछ समझौतों पर सहमति बनी है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं. इस वार्ता पर टिप्पणी करते हुए अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहमति बनी है, पर राष्ट्रपति द्वारा तय की गई कुछ रेड लाइन्स को ईरान स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है. दरअसल, जिनेवा में वार्ता के बाद ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने राज्य टेलीविजन को दिए बयान में कहा, ‘अंततः हम कुछ मार्गदर्शक सिद्धांतों पर व्यापक सहमति बनाने में सफल रहे, जिनके आधार पर हम आगे बढ़ेंगे और संभावित समझौते पर काम शुरू करेंगे.’ उन्होंने वार्ता को पिछले दौर से अधिक रचनात्मक बताया और कहा कि दोनों पक्ष अब ड्राफ्ट तैयार करेंगे, जिन्हें आदान-प्रदान करने के बाद तीसरे दौर की तारीख तय की जाएगी. विदेश मंत्री अराघची ने स्वीकार किया कि ट्रंप के करीबियों और दूतों के साथ बातचीत में मतभेदों को दूर करने में अभी समय लगेगा. ‘रेड लाइन्स’ अराघची के इस बयान के बाद अमेरिका उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि कुछ मामलों में वार्ता अच्छी रही, उन्होंने बाद में मिलने पर सहमति जताई है. लेकिन अन्य मामलों में स्पष्ट था कि राष्ट्रपति ने कुछ रेड लाइन्स तय की हैं, जिन्हें ईरानी अभी स्वीकार करने और उन पर काम करने को तैयार नहीं हैं. वेंस ने बताया, ‘अमेरिका चाहता है कि ईरान न केवल परमाणु कार्यक्रम बल्कि अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों को समर्थन देना भी बंद करे.’ जिनेवा में दूसरे दौर की वार्ता आपको बता दें कि ओमान की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच मंगलवार को तेहरान परमाणु कार्यक्रम को लेकर जिनेवा में दूसरे दौर की वार्ता हुई, इस वार्ता को ईरानी विदेश मंत्री ने सकारात्म बताया और कहा कि कई मुद्दों पर सहमति बनी है और आगे की बैठक को लेकर भी बातचीत हुई है. हालांकि, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहमति बनी है, पर राष्ट्रपति द्वारा तय की गई कुछ रेड लाइन्स को ईरान स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है. ‘राष्ट्रपति के पास खुले हैं विल्कप’ उन्होंने जोर दिया कि अमेरिका कूटनीति से समाधान चाहता है, लेकिन ट्रंप के पास सभी विकल्प खुले हैं. वेंस ने कहा, ‘राष्ट्रपति ने कहा है कि हम बातचीत और कूटनीतिक वार्ता से इसे सुलझाना चाहते हैं, लेकिन राष्ट्रपति के पास सभी विकल्प टेबल पर हैं.’ उन्होंने आगे कहा कि कूटनीति कब समाप्त होगी, ये फैसला ट्रंप का होगा. ‘हम इसे जारी रखेंगे, लेकिन राष्ट्रपति ये कहने का अधिकार रखते हैं कि कूटनीति अपनी प्राकृतिक सीमा पर पहुंच गई है. हम उम्मीद करते हैं कि ऐसा नहीं होगा, लेकिन अगर हुआ तो ये राष्ट्रपति का फैसला होगा.’ खामेनेई की चुनौती उधर, वार्ता के दौरान ही ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका को सीधी चुनौती दी. उन्होंने कहा कि ईरान के पास क्षेत्र में तैनात अमेरिकी युद्धपोतों को डुबाने की क्षमता है. इसके तुरंत बाद ईरानी मीडिया ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लाइव-फायर ड्रिल के लिए कुछ घंटों के लिए बंद कर दिया गया था. ये कदम ऐसे वक्त में उठाया गया, जब अमेरिका ने क्षेत्र में दो विमानवाहक पोत तैनात किए हैं, जिनमें ‘USS अब्राहम लिंकन’ ईरानी तट से महज 700 किलोमीटर की दूरी पर है. प्रतिबंधों से राहत चाता है ईरान वहीं, ईरान लंबे वक्त से अमेरिका द्वारा लगाए गए व्यापक प्रतिबंधों से राहत चाहता है, जिसमें अन्य देशों द्वारा ईरानी तेल खरीद पर प्रतिबंध शामिल है. तेहरान ने जोर दिया है कि वार्ता केवल परमाणु मुद्दे तक सीमित रहे, जबकि अमेरिका बैलिस्टिक … Read more

ईरान-अमेरिका वार्ता: खामनेई के फैसले पर निर्भर होगा वक्त और स्थान, अमेरिका को नहीं मिली कोई राहत

मस्कट: मिडिल ईस्ट में जंग और बातचीत एक बार फिर आमने-सामने खड़ी नजर आ रही है. अमेरिका और ईरान के बीच महीनों की तल्खी, धमकियों और सैन्य तनाव के बाद आखिरकार ओमान में बातचीत हुई. यह वही दौर है, जब बीते साल अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर सैन्य हमले किए थे और पूरा इलाका युद्ध के मुहाने पर पहुंच गया था. खाड़ी देश ओमान की राजधानी मस्कट में शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता हुई. दोनों देश आमने-सामने नहीं बैठे, बल्कि ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी संदेशवाहक की भूमिका में रहे. यही मॉडल पहले भी ईरान-अमेरिका बातचीत में अपनाया जाता रहा है. हालांकि इस बातचीत के ठीक बाद अमेरिका ने नए प्रतिबंध ठोंक दिए. बातचीत को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसके बाद दोनों पक्ष आगे और बातचीत करने पर सहमत हुए हैं. इसे फिलहाल एक ‘सकारात्मक लेकिन सतर्क शुरुआत’ माना जा रहा है. कौन-कौन था बातचीत में शामिल? ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हुए, जबकि अमेरिका की तरफ से विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर मौजूद रहे. ओमान की सरकारी तस्वीरों में अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर की मौजूदगी भी दिखी, जिसने इस बातचीत के सैन्य महत्व को और बढ़ा दिया. बातचीत से पहले धमकी दी गईं बातचीत से ठीक पहले माहौल बेहद गर्म था. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुली चेतावनी दे चुके थे कि अगर ईरान ने परमाणु समझौते पर दस्तखत नहीं किए या प्रदर्शनकारियों पर हिंसा की, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है. वहीं ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की ओर से भी सख्त तेवर दिखाए गए थे. अराघची ने बातचीत से पहले साफ कहा कि ईरान ‘खुली आंखों से कूटनीति’ में उतरा है और उसे पिछले साल की घटनाएं अच्छे से याद हैं. अपनी शर्तों पर बातचीत कर रहा ईरान ईरान ने ओमान के जरिए अमेरिका को एक शुरुआती प्रस्ताव सौंपा, जिसे मौजूदा हालात संभालने की कोशिश बताया गया. अमेरिका की प्रतिक्रिया इस प्रस्ताव पर अगली बातचीत में ईरान को दी जानी है. ईरान ने साफ कर दिया कि वह सिर्फ अपने परमाणु कार्यक्रम पर बात करना चाहता है. बैलिस्टिक मिसाइल, क्षेत्रीय संगठन और घरेलू विरोध जैसे मुद्दे उसके लिए बातचीत के एजेंडे में नहीं हैं. इसके उलट अमेरिका चाहता है कि मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और मानवाधिकार जैसे मुद्दे भी शामिल हों. हालांकि ईरान किसी भी कीमत पर झुक नहीं रहा है. अमेरिका ने ईरान पर लगाए नए प्रतिबंध दिलचस्प बात यह रही कि बातचीत खत्म होते ही अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगा दिए. ईरानी तेल ढोने वाले 14 जहाजों और कई कंपनियों को निशाना बनाया गया. अमेरिका का आरोप है कि ईरान तेल से कमाए पैसे का इस्तेमाल दुनिया भर में अस्थिरता फैलाने और अपने ही नागरिकों पर दमन के लिए करता है. वहीं व्हाइट हाउस ने जानकारी दी कि डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी शासन के खिलाफ एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए हैं, जिसमें उन देशों पर टैरिफ लगाने की बात कही गई है जो ईरान से सामान या सेवाएं खरीदना जारी रखते हैं.

दशकों बाद इरान में महिलाओं को बाइक चलाने का अधिकार, नया क़ानून मंज़ूर

तेहरान   ईरान की सरकार ने महिलाओं के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए उन्हें कानूनी रूप से मोटरसाइकिल चलाने की अनुमति दे दी है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, ईरान के मंत्रिमंडल ने इस ऐतिहासिक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिससे अब महिलाओं को भी दोपहिया वाहन चलाने के लिए आधिकारिक लाइसेंस जारी किए जा सकेंगे। दशकों पुरानी कानूनी अस्पष्टता का अंत ईरान में अब तक महिलाओं के मोटरसाइकिल चलाने पर कोई सीधा कानूनी प्रतिबंध नहीं था, लेकिन प्रशासन उन्हें लाइसेंस देने से इनकार कर देता था। इस अस्पष्टता के कारण महिलाएं सड़क पर वाहन नहीं चला पाती थीं। उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने मंगलवार को यातायात संहिता (Traffic Code) को स्पष्ट करने वाले प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर इस वर्षों पुराने गतिरोध को समाप्त कर दिया है। घायल होने पर महिलाओं को ही माना जाता था दोषी लाइसेंस न होने के कारण ईरानी महिलाओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था। यदि सड़क हादसे में कोई महिला घायल होती थी, तो लाइसेंस के अभाव में उसे ही जिम्मेदार मान लिया जाता था। नए कानून के लागू होने से महिलाओं को कानूनी सुरक्षा मिलेगी और दुर्घटनाओं की स्थिति में उन्हें न्याय मिल सकेगा। ट्रैफिक पुलिस के लिए अनिवार्य निर्देश ईरानी समाचार एजेंसी इलना (ILNA) के अनुसार, सरकार ने यातायात पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं…     महिला आवेदकों को व्यावहारिक (Practical) प्रशिक्षण देना होगा।     पुलिस की सीधी देखरेख में ड्राइविंग परीक्षा आयोजित करनी होगी।     योग्य महिलाओं को अनिवार्य रूप से मोटरसाइकिल चालक लाइसेंस जारी करना होगा।  

अमेरिका और इजरायल बोले- हमारा हाथ नहीं, ईरान में धमाकों में 5 की मौत और कई घायल

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तेहरान. कई महीनों से प्रदर्शन से परेशान ईरान को एक बार फिर झटका लगा है। दक्षिणी ईरान के समुद्र किनारे वाले शहर बंदर अब्बास में शनिवार को जोरदार धमाका हुआ है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक यह धमाका गैस के रिसाव की वजह से हुआ। इसके अलावा इराक सीमा के पास स्थित अहवाज शहर में भी गैस के रिसाव से एक धमाका हुआ। दोनों धमाकों में कुल मिलाकर पांच लोगों की मौत हो गई है, जबकि 14 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। कुछ रिपोर्ट्स में सात धमाकों की जानकारी सामने आई है। इनके मुताबिक राजधानी तेहरान, बंदर अब्बास, तबरीज, कोम, अहवाज, नंताज और परंद में धमाके हुए हैं। ईरान सरकार की तरफ से इनकी पुष्टि नहीं की गई है। ईरान के अग्निशमन विभाग के प्रमुख मोहम्मद अमीन लियाकत ने बंदर अब्बास में हुए धमाके पर ईरान की मीडिया एजेंसी मेहर को दिए अपने बयान में कहा, “शुरुआती जांच के हिसाब से पता चला है कि यह धमाका गैस की वजह से हुआ है। अगले कुछ घंटों में मेरे सहयोगी और अधिक जानकारी देंगे।” इस घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं। इनमें मलबे में तब्दील इमारतों के सामने टूटी हुई गाड़ियां खड़ी हुई नजर आ रही हैं, जो कि इमारत के मलबे की वजह से क्षतिग्रस्त हुई हैं। रॉयटर्स ने इमारतों, पेड़ों और सड़क के लेआउट का विश्लेषण कर स्थान की पुष्टि की, जो सैटेलाइट और फाइल इमेजरी से मेल खाता है। हालांकि, स्वतंत्र रूप से यह सत्यापित नहीं की जा सकती कि वीडियो किस तारीख का है। ईरान में धमाकों की खबर सामने आने के बाद सबसे बड़ा शक अमेरिका और इजरायल की तरफ ही गया। हालांकि सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी और इजरायली अधिकाियों ने यह साफ किया है कि इन धमाकों के पीछे उनका कोई हाथ नहीं है।

इजरायली हमलों से काँपा तेहरान, हर ओर अफरा-तफरी और लंबी कतारें, जानिए जमीनी हालात

इजरायली सेना ने ईरानी आर्मी के नए चीफ ऑफ स्टाफ अली शादमानी को भी मारने का किया दावा  मोसाद का खौफ … ईरानी सेना के कमांडरों को स्मार्ट फोन नहीं रखने का ऑर्डर इजरायली हमलों से काँपा तेहरान, हर ओर अफरा-तफरी और लंबी कतारें, जानिए जमीनी हालात  तेहरान/तेल अवीव इजरायली रक्षा बलों (आईडीएफ) ने मंगलवार को ईरान के सशस्त्र बलों के नवनियुक्त चीफ ऑफ स्टाफ और वरिष्ठ सैन्य कमांडरों में से एक अली शादमानी को भी मार गिराने का दावा किया है. इजरायली सुरक्षा बल ने दावा किया कि उसने पांच दिनों में दूसरी बार ईरान के युद्धकालीन चीफ ऑफ स्टाफ को ढेर कर दिया है. शादमानी ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के सबसे करीबी सैन्य सलाहकार थे. IDF ने शादमानी की मौत के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इजरायली एयरफोर्स (IAF) द्वारा सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात तेहरान के सेंट्रल इलाके में किए गए हमलों में शादमानी मारा गया है. यह हमला IDF की खुफिया शाखा द्वारा प्राप्त सटीक जानकारी के आधार पर किया गया था. IDF के अनुसार, शादमानी ईरान की सशस्त्र सेनाओं के इमरजेंसी कमांड और खातम अल-अनबिया मुख्यालय के कमांडर थे जो इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और ईरानी सेना दोनों का नेतृत्व करते थे. वह इजरायल के खिलाफ ईरान की युद्ध प्लान को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे. 13 जून को इजरायली सुरक्षा बलों को ऑपरेशन राइजिंग लायन के शुरुआती हमले में पूर्ववर्ती मेजर जनरल गोलाम अली रशिद की मौत के बाद उन्हें ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्ति गया गया था. शादमानी का उन्मूलन ईरान की सैन्य कमान संरचना के लिए एक और गंभीर झटका है जो पहले से ही इजरायली हमलों से कमजोर हो चुकी है. इजरायल वॉर रूम ने ईरानी आर्मी ऑफ चीफ स्टाफ के मौत के बारे में जानकारी देते हुए एक्स पर लिखा, तेहरान में रात भर चले हमले में, इजरायली लड़ाकू विमानों ने अली शादमानी को मार गिराया है जो ईरान के सशस्त्र बलों की इमरजेंसी कमान के प्रमुख और शासन में सबसे वरिष्ठ सैन्य व्यक्ति थे. मारे गए ईरानी सैन्य अधिकारी इजरायली सैन्य कार्रवाई में अब तक ईरान के कई वरिष्ठ कमांडर मारे गए हैं, जिसमें मोहम्मद हसन बाकरी, सालेम अली रशीद, अली शाहमानी, मोहम्मद अली रजा तबातबाई, इस्माइल काउथारी, अली शद्राकी, हसन सुलैमी, दाऊद बकरी और दाऊद शिहायान शामिल है. आपको बता दें कि ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष 13 जून से शुरू हुआ, जब इजरायल ने ऑपरेशन राइजिंग लायन के तहत ईरान की राजधानी तेहरान समेत नतांज और फोर्डो जैसे सैन्य और परमाणु ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए. इसके जवाब में ईरान ने 13 जून की आधी रात को ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस के तहत इजरायल के तेल अवीव, हाइफा और कई अन्य शहरों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. इस हमले में इजरायल में एक व्यक्ति की मौत और कई लोग घायल हुए, जबकि ईरान में सैन्य कमांडरों और परमाणु वैज्ञानिकों समेत कई लोगों के मारे जाने की खबर है. मोसाद का खौफ … ईरानी सेना के कमांडरों को स्मार्ट फोन नहीं रखने का ऑर्डर ईरान में एक के बाद एक सीनियर मोस्ट सैन्य कमांडर मारे जा रहे हैं. इस वजह से वहां अधिकारियों को अपने पास स्मार्ट फोन नहीं रखने को कहा गया है. वहीं मोसाद का दावा है कि उनके असेट्स इतने मजबूती से ईरान में जड़ जमा चुके हैं कि लाख कोशिश के बाद भी कोई उनकी पहुंच से नहीं बच सकता. इजरायल डिफेंस फोर्स ( IDF) ने मंगलवार को ईरानी खतम अल-अनबिया मुख्यालय के कमांडर मेजर जनरल अली शादेमानी को मार गिराया. उन्होंने शुक्रवार को हुए इजरायली स्ट्राइक में मारे पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ गुलाम अली राशिद की जगह ली थी.  ईरान के नए चीफ ऑफ स्टाफ भी मारे गए यरुशलम टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अली शादेमानी वर्तमान में ईरान के चीफ  ऑफर स्टाफ और सबसे वरिष्ठ सैन्य कमांडर थे. आईडीएफ ने उन्हें ईरानी सर्वोच्च नेता अली खामेनेई का सबसे करीबी व्यक्ति बताया है.  सैन्य अधिकारियों को मोबाइल फोन नहीं रखने के निर्देश ईरान में एक के बाद एक मारे जा रहे वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के मारे जाने के बाद ईरान ने  शीर्ष अधिकारियों को अपने पास सेलफोन या स्मार्ट फोन नहीं रखने का निर्देश दिया है. ताकि वे इस डर से बच सकें कि कहीं इज़राइल उन्हें ट्रैक न कर ले. ईरान में मोसाद के मजबूत असेट्स का फैला है जाल वहीं इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि मोसाद और आईडीएफ  पिछले शुक्रवार को युद्ध शुरू करने से पहले से शीर्ष ईरानी कमांडरों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अन्य दूसरे तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं. आईडीएफ और मोसाद के पास शीर्ष ईरानी कमांडरों को मारना जारी रखने के लिए पर्याप्त खुफिया असेट्स और स्ट्रेटजी हैं, चाहे वे कहीं भी छिपे हों और खुद को कैसे छिपाने की कोशिश करते हों. नए सैन्य कमांडरों की भी जा रही जान ईरान के नए खतम अल-अनबिया मुख्यालय कमांडर नियुक्त किए जाने से पहले, शादेमानी, जो अयातुल्ला अली खामेनेई के करीबी थे, सभी आपातकालीन राष्ट्रीय रक्षा अभियानों के उप प्रमुख और सैन्य अभियानों के प्रमुख थे. इजरायली हमलों से काँपा तेहरान, हर ओर अफरा-तफरी और लंबी कतारें, जानिए जमीनी हालात  इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने अब आम नागरिकों की जिंदगी को हिला कर रख दिया है. तेहरान में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं. इस बीच इस बीच ट्रंप ने अपने पोस्ट में तेहरान के लोगों को तुरंत शहर खाली करने की सलाह दी है. बीबीसी न्यूज के मुताबिक, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में ईरान की राजधानी तेहरान से भारी संख्या में लोगों के पलायन की तस्वीरें सामने आई हैं.पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें लगी हैं और प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी हुई है. राजधानी छोड़कर लोग उत्तर दिशा की ओर, खासतौर पर कैस्पियन सागर की तरफ जाने वाले रास्तों पर निकल रहे हैं, जिससे वहां वाहनों की भारी भीड़ देखी जा रही है. हालात अफरा-तफरी के हैं.  ‘तेहरान तुरंत खाली करें’ सोमवार को इज़रायली सेना ने तेहरान के नागरिकों को तत्काल शहर खाली करने की चेतावनी जारी की. सेना ने कहाथा कि आने वाले घंटों में इजरायली … Read more

इजरायल और ईरान में भारतीय दूतावासों ने जारी की एडवाइजरी, सतर्क रहने और दूतावास के संपर्क में रहने की दी सलाह

तेहरान   ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बाद दोनों देशों में फंसे भारतीयों को वापस स्वदेश लाने के लिए अभियान तेज हो गया है। सबसे पहले ईरान से सभी भारतीय छात्रों को सुरक्षित लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भारत ने सोमवार (16 जून) से ईरान में फंसे अपने नागरिकों को निकालना शुरू किया। कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, करीब 100 भारतीयों का पहला जत्था ईरान से निकाल लिया गया है। बताया जा रहा है कि वे आर्मेनिया सीमा पर पहुंच गए हैं। सोमवार को केंद्र ने कहा कि तेहरान में भारतीय दूतावास लगातार सुरक्षा स्थिति की निगरानी कर रहा है। ईरान में भारतीय छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनसे संपर्क कर रहा है। साथ ही कुछ मामलों में उन्हें सुरक्षित स्थानों पर भी पहुंचाया जा रहा है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि ईरान का हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण भारतीय छात्रों को आर्मेनिया के रास्ते निकाला जा रहा है। आर्मेनिया से उनको जॉर्जिया और फिर पश्चिम एशिया के रास्ते भारत लाया जा सकता है। 110 छात्रों का पहला दल आर्मेनिया सीमा पर पहुंच चुका है। बताया जा रहा है कि तीन यूनिवर्सिटी के छात्रों को फिलहाल सुरक्षित जगह पहुंचाया गया है। अन्य छात्रों को भी शिफ्ट किया जा रहा है। ईरान में करीब डेढ़ हजार कश्मीरियों समेत 10,000 भारतीय छात्र हैं। अधिकतर छात्र मेडिकल की पढ़ाई के लिए ईरान गए हैं। भारतीय दूतावास ने जारी की एडवाइजरी इस बीच, ईरान में भारत के दूतावास की एक ताजा एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि जो भी भारतीय या भारतीय मूल के लोग अपने संसाधनों के जरिए तेहरान से बाहर निकल सकते हैं वो शहर के बाहर सुरक्षित ठिकानों पर चले जाएं। ईरान में भारतीय दूतावास ने कहा, “सभी भारतीय नागरिक और पीआईओ (भारतीय मूल के व्यक्ति) जो अपने संसाधनों का उपयोग करके तेहरान से बाहर जा सकते हैं, उन्हें शहर के बाहर सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी जाती है।” भारतीय छात्रों को लेकर सरकार अलर्ट विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, “तेहरान में भारतीय दूतावास लगातार सुरक्षा स्थिति पर नजर रखे हुए है और ईरान में भारतीय छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनसे संपर्क कर रहा है।” बयान में कहा गया है, “कुछ मामलों में छात्रों को दूतावास की मदद से ईरान में ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। अन्य व्यवहार्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। और जानकारी बाद में दी जाएगी।” इस बयान के अनुसार, दूतावास समुदाय के नेताओं से भी सतत संपर्क बनाए हुए है। इजरायल और ईरान में भारतीय दूतावासों ने स्थिति को ध्यान में रखते हुए अपने X हैंडल पर एडवाइजरी जारी किए हैं। ईरान में भारतीय दूतावास की ओर से X पर एक पोस्ट में कहा गया है, “ईरान में मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए, परामर्श के तहत यहां रह रहे सभी भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों से अनुरोध है कि वे सतर्क रहें, किसी भी तरह की अनावश्यक गतिविधियों से बचें, दूतावास के सोशल मीडिया अकाउंट पर दी जा रही सूचना को ध्यान में रखें। स्थानीय अधिकारियों द्वारा बताए गए सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करें।”

इजरायल का करारा पलटवार, ईरान पर कर दिया बड़ा हमला, 400 से अधिक मरे

तेहरान  ईरान और इजराइल के बीच चौथे दिन भी लड़ाई जारी है। इजराइल ने रविवार रात ईरान के विदेश मंत्रालय पर हमला किया। इसमें 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इससे एक दिन पहले इजराइली सेना ने ईरानी रक्षा मंत्रालय पर भी हमला किया था। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इजराइली हमलों में अब तक 224 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 1,277 से ज्यादा घायल हुए हैं। वहीं, अमेरिका में स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स ग्रुप ने ईरान में 406 लोगों के मारे जाने का दावा किया है। ईरान ने भी इजराइल पर पलटवार किया है। ईरान ने सोमवार सुबह सेंट्रल इजराइल में 4 बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। इसमें 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 67 घायल हुए। अब तक इजराइल में ईरानी हमलों में 20 लोग मारे गए हैं, जबकि 450 से ज्यादा घायल हुए हैं। ईरान पर इजरायली हमले के 72 घंटे हो चुके हैं. इस हमले में अब 406 ईरानियों की मौत हो चुकी है, जबकि 654 लोग घायल हैं. वहीं ईरानी हमले में अबतक 16 इजरायलियों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोग घायल हैं. पिछले 72 घंटों में इजरायल ने ईरान के हर मुमकिन इंफ्रास्ट्रक्चर और टारगेट पर हमला किया है. हालांकि तेहरान का कहना है कि इजरायली हमले में अबतक 224 मौतें हुई हैं. इनमें ज्यादातार नागरिक हैं. इजरायल ने दावा किया है कि पिछले 24 घंटे में उसने अपने देश से तेहरान के बीच ‘एयर कॉरिडोर’ बना लिया है. यानी कि इजरायली दावे के मुताबिक अब इजरायल की वायु सेना अपने देश से तेहरान तक बिना बाधा के उड़ान भर सकती है और हमले कर सकती है. इस बीच इजरायल ने ईरान पर सबसे ज्यादा दूरी से हमला किया है. इजरायल की वायु सेना ने पूर्वी ईरान के मशहद हवाई अड्डे पर एक ईरानी ईंधन भरने वाले विमान पर हमला किया, जो इजराइल से लगभग 2,300 किलोमीटर दूर है. हमले के बाद ये विमान आग की लपटों में आ गया और तबाह हो गया. यह ऑपरेशन राइजिंग लॉयन की शुरुआत के बाद से किया गया सबसे लंबी दूरी का हमला है. इजरायल सैनिक अड्डों को निशाना बनाने के बाद अब मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहा है. इजरायल ने तेहरान में मौजूद जमीन से हवा में मार करने वाले मिसाइल लॉन्चर को ही उड़ा दिया है. IDF  ने इस हमले का वीडियो जारी किया है.  आइए बताते हैं कि इजरायल ने पिछले 72 घंटों में ईरान के किन-किन ठिकानों को निशाना बनाया है.  परमाणु ठिकाने: जंग की शुरुआत के साथ ही इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर हमला किया था. इजरायली हमले का पहला टारगेट थे नंताज परमाणु साइट. इजरायल का दावा है कि उसके हमले में नंताज में यूरेनियम संवर्धन की मशीनरी को भारी नुकसान पहुंचा है. इजरायल ने इस्फहान और फोर्डो में भी परमाणु साइट पर हमला किया है. यहां पर हुए नुकसान की जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है. हालांकि  सैन्य ठिकाने: इजरायल ने न्यूक्लियर साइट के अलावा ईरान के मिलिट्री साइट पर भी हमला किया है और इसे जबर्दस्त नुकसान पहुंचाया है. तेहरान और अन्य शहरों में सैन्य ठिकानों पर हमले हुए हैं. जिसमें मिसाइल उत्पादन सुविधाएं शामिल हैं. दक्षिणी ईरान में एक रिफाइनरी में भारी विस्फोट हुआ है. तबरेज और करमानशाह में दो मिसाइल बेस पूरी तरह तबाह हो गए हैं.  इजरायली हमले में राजधानी तेहरान में भारी नुकसान की खबर है. कई रिहायशी इलाकों और सरकारी इमारतों को भारी नुकसान हुआ है. मेहराबाद एयरपोर्ट प्रभावित हुआ है.  ईरान ने तेहरान एयरपोर्ट को बंद कर दिया है.  13-15 जून 2025 को इजरायली हमलों में ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और परमाणु वैज्ञानिकों की मौत की पुष्टि अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों ने की है.  टॉप मिलिट्री लीडरशिप साफ इनमें आर्मी चीफ मेजर जनरल मोहम्मद बघेरी, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर-इन-चीफ मेजर जनरल हुसैन सलामी, IRGC के खातम-अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर्स के प्रमुख मेजर जनरल गुलाम अली रशीद, IRGC की एयरोस्पेस फोर्स के कमांडर जनरल अमीर अली हाजीज़ादेह, ईरानी सशस्त्र बलों के डिप्टी इंटेलिजेंस चीफ जनरल गुलामरेज़ा मेहराबी, ईरानी सशस्त्र बलों के डिप्टी कमांडर ऑफ ऑपरेशंस जनरल मेहदी रब्बानी मारे गए हैं.  वहीं प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में पुष्टि की है कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के खुफिया प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद काज़मी और उनके डिप्टी जनरल हसन मोहाकिक तेहरान पर इजरायली हवाई हमले में मारे गए हैं. इसके अलावा सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली शमखानी भी मारे गए हैं. इजरायली हमले में ईरान का टॉप मिलिट्री लीडरशिप खत्म हो गया है. न्यूक्लियर साइंटिस्ट का एक जेनेरेशन ही खत्म इसके अलावा इजरायल ने ईरान के कई परमाणु वैज्ञानिकों को भी मार डाला है. इनमें भौतिक विज्ञानी मोहम्मद मेहदी तेहरांची, ईरान की परमाणु ऊर्जा संगठन के पूर्व प्रमुख फेरेयदौन अब्बासी-दवानी,  शाहिद बेहेश्ती विश्वविद्यालय में परमाणु इंजीनियरिंग के प्रमुख अब्दुलहामिद मिनोचेहर, शाहिद बेहेश्ती विश्वविद्यालय में परमाणु इंजीनियरिंग के प्रोफेसर अहमदरेज़ा जोलफगारी, अमीरहोसैन फकी, परमाणु वैज्ञानिक अली बकाई करीमी, परमाणु वैज्ञानिक मंसूर असगरी, परमाणु वैज्ञानिक सईद बोरजी शामिल है.  इतने बड़े पैमाने पर परमाणु वैज्ञानिकों को मारकर इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को भारी नुकसान पहुंचाया है.  इजरायल को नुकसान इजरायली हमले के जवाब में ईरान ने  100-200 बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे. जिनमें से कुछ ने आयरन डोम रक्षा प्रणाली को भेद दिया. इससे तेल अवीव में कई इमारतें और वाहन नष्ट हो गए. ईरानी हमले में तेल अवीव में तबाही की भयानक तस्वीरें सामने आई है. ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों में अबतक इजरायल में 16 लोगों की मौत हुई है. ईरान ने मुख्य रूप से तेल अवीव, रमात गान, बैट यम और रेहोवोट में हमला किया है.  तेहरान टाइम्स के अनुसार सोमवार की सुबह-सुबह ईरान ने इजरायल के कब्जे वाले इलाकों को निशाना बनाकर मिसाइलों की दूसरी खेप दागी, जो संघर्ष की शुरुआत के बाद से दसवीं बमबारी थी.  तेहरान टाइम्स का दावा है इससे पहले आधी रात को ईरान ने नेगेव रेगिस्तान और किरयात गत के साथ-साथ हाइफ़ा के अन्य क्षेत्रों में रणनीतिक स्थलों को निशाना बनाया, जिससे सैन्य और आर्थिक बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा.  हाइफा में ईरानी मिसाइल गिरने … Read more

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