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इजरायली हमलों से काँपा तेहरान, हर ओर अफरा-तफरी और लंबी कतारें, जानिए जमीनी हालात

इजरायली सेना ने ईरानी आर्मी के नए चीफ ऑफ स्टाफ अली शादमानी को भी मारने का किया दावा  मोसाद का खौफ … ईरानी सेना के कमांडरों को स्मार्ट फोन नहीं रखने का ऑर्डर इजरायली हमलों से काँपा तेहरान, हर ओर अफरा-तफरी और लंबी कतारें, जानिए जमीनी हालात  तेहरान/तेल अवीव इजरायली रक्षा बलों (आईडीएफ) ने मंगलवार को ईरान के सशस्त्र बलों के नवनियुक्त चीफ ऑफ स्टाफ और वरिष्ठ सैन्य कमांडरों में से एक अली शादमानी को भी मार गिराने का दावा किया है. इजरायली सुरक्षा बल ने दावा किया कि उसने पांच दिनों में दूसरी बार ईरान के युद्धकालीन चीफ ऑफ स्टाफ को ढेर कर दिया है. शादमानी ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के सबसे करीबी सैन्य सलाहकार थे. IDF ने शादमानी की मौत के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इजरायली एयरफोर्स (IAF) द्वारा सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात तेहरान के सेंट्रल इलाके में किए गए हमलों में शादमानी मारा गया है. यह हमला IDF की खुफिया शाखा द्वारा प्राप्त सटीक जानकारी के आधार पर किया गया था. IDF के अनुसार, शादमानी ईरान की सशस्त्र सेनाओं के इमरजेंसी कमांड और खातम अल-अनबिया मुख्यालय के कमांडर थे जो इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और ईरानी सेना दोनों का नेतृत्व करते थे. वह इजरायल के खिलाफ ईरान की युद्ध प्लान को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे. 13 जून को इजरायली सुरक्षा बलों को ऑपरेशन राइजिंग लायन के शुरुआती हमले में पूर्ववर्ती मेजर जनरल गोलाम अली रशिद की मौत के बाद उन्हें ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्ति गया गया था. शादमानी का उन्मूलन ईरान की सैन्य कमान संरचना के लिए एक और गंभीर झटका है जो पहले से ही इजरायली हमलों से कमजोर हो चुकी है. इजरायल वॉर रूम ने ईरानी आर्मी ऑफ चीफ स्टाफ के मौत के बारे में जानकारी देते हुए एक्स पर लिखा, तेहरान में रात भर चले हमले में, इजरायली लड़ाकू विमानों ने अली शादमानी को मार गिराया है जो ईरान के सशस्त्र बलों की इमरजेंसी कमान के प्रमुख और शासन में सबसे वरिष्ठ सैन्य व्यक्ति थे. मारे गए ईरानी सैन्य अधिकारी इजरायली सैन्य कार्रवाई में अब तक ईरान के कई वरिष्ठ कमांडर मारे गए हैं, जिसमें मोहम्मद हसन बाकरी, सालेम अली रशीद, अली शाहमानी, मोहम्मद अली रजा तबातबाई, इस्माइल काउथारी, अली शद्राकी, हसन सुलैमी, दाऊद बकरी और दाऊद शिहायान शामिल है. आपको बता दें कि ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष 13 जून से शुरू हुआ, जब इजरायल ने ऑपरेशन राइजिंग लायन के तहत ईरान की राजधानी तेहरान समेत नतांज और फोर्डो जैसे सैन्य और परमाणु ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए. इसके जवाब में ईरान ने 13 जून की आधी रात को ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस के तहत इजरायल के तेल अवीव, हाइफा और कई अन्य शहरों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. इस हमले में इजरायल में एक व्यक्ति की मौत और कई लोग घायल हुए, जबकि ईरान में सैन्य कमांडरों और परमाणु वैज्ञानिकों समेत कई लोगों के मारे जाने की खबर है. मोसाद का खौफ … ईरानी सेना के कमांडरों को स्मार्ट फोन नहीं रखने का ऑर्डर ईरान में एक के बाद एक सीनियर मोस्ट सैन्य कमांडर मारे जा रहे हैं. इस वजह से वहां अधिकारियों को अपने पास स्मार्ट फोन नहीं रखने को कहा गया है. वहीं मोसाद का दावा है कि उनके असेट्स इतने मजबूती से ईरान में जड़ जमा चुके हैं कि लाख कोशिश के बाद भी कोई उनकी पहुंच से नहीं बच सकता. इजरायल डिफेंस फोर्स ( IDF) ने मंगलवार को ईरानी खतम अल-अनबिया मुख्यालय के कमांडर मेजर जनरल अली शादेमानी को मार गिराया. उन्होंने शुक्रवार को हुए इजरायली स्ट्राइक में मारे पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ गुलाम अली राशिद की जगह ली थी.  ईरान के नए चीफ ऑफ स्टाफ भी मारे गए यरुशलम टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अली शादेमानी वर्तमान में ईरान के चीफ  ऑफर स्टाफ और सबसे वरिष्ठ सैन्य कमांडर थे. आईडीएफ ने उन्हें ईरानी सर्वोच्च नेता अली खामेनेई का सबसे करीबी व्यक्ति बताया है.  सैन्य अधिकारियों को मोबाइल फोन नहीं रखने के निर्देश ईरान में एक के बाद एक मारे जा रहे वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के मारे जाने के बाद ईरान ने  शीर्ष अधिकारियों को अपने पास सेलफोन या स्मार्ट फोन नहीं रखने का निर्देश दिया है. ताकि वे इस डर से बच सकें कि कहीं इज़राइल उन्हें ट्रैक न कर ले. ईरान में मोसाद के मजबूत असेट्स का फैला है जाल वहीं इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि मोसाद और आईडीएफ  पिछले शुक्रवार को युद्ध शुरू करने से पहले से शीर्ष ईरानी कमांडरों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अन्य दूसरे तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं. आईडीएफ और मोसाद के पास शीर्ष ईरानी कमांडरों को मारना जारी रखने के लिए पर्याप्त खुफिया असेट्स और स्ट्रेटजी हैं, चाहे वे कहीं भी छिपे हों और खुद को कैसे छिपाने की कोशिश करते हों. नए सैन्य कमांडरों की भी जा रही जान ईरान के नए खतम अल-अनबिया मुख्यालय कमांडर नियुक्त किए जाने से पहले, शादेमानी, जो अयातुल्ला अली खामेनेई के करीबी थे, सभी आपातकालीन राष्ट्रीय रक्षा अभियानों के उप प्रमुख और सैन्य अभियानों के प्रमुख थे. इजरायली हमलों से काँपा तेहरान, हर ओर अफरा-तफरी और लंबी कतारें, जानिए जमीनी हालात  इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने अब आम नागरिकों की जिंदगी को हिला कर रख दिया है. तेहरान में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं. इस बीच इस बीच ट्रंप ने अपने पोस्ट में तेहरान के लोगों को तुरंत शहर खाली करने की सलाह दी है. बीबीसी न्यूज के मुताबिक, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में ईरान की राजधानी तेहरान से भारी संख्या में लोगों के पलायन की तस्वीरें सामने आई हैं.पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें लगी हैं और प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी हुई है. राजधानी छोड़कर लोग उत्तर दिशा की ओर, खासतौर पर कैस्पियन सागर की तरफ जाने वाले रास्तों पर निकल रहे हैं, जिससे वहां वाहनों की भारी भीड़ देखी जा रही है. हालात अफरा-तफरी के हैं.  ‘तेहरान तुरंत खाली करें’ सोमवार को इज़रायली सेना ने तेहरान के नागरिकों को तत्काल शहर खाली करने की चेतावनी जारी की. सेना ने कहाथा कि आने वाले घंटों में इजरायली … Read more

इजरायल और ईरान में भारतीय दूतावासों ने जारी की एडवाइजरी, सतर्क रहने और दूतावास के संपर्क में रहने की दी सलाह

तेहरान   ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बाद दोनों देशों में फंसे भारतीयों को वापस स्वदेश लाने के लिए अभियान तेज हो गया है। सबसे पहले ईरान से सभी भारतीय छात्रों को सुरक्षित लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भारत ने सोमवार (16 जून) से ईरान में फंसे अपने नागरिकों को निकालना शुरू किया। कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, करीब 100 भारतीयों का पहला जत्था ईरान से निकाल लिया गया है। बताया जा रहा है कि वे आर्मेनिया सीमा पर पहुंच गए हैं। सोमवार को केंद्र ने कहा कि तेहरान में भारतीय दूतावास लगातार सुरक्षा स्थिति की निगरानी कर रहा है। ईरान में भारतीय छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनसे संपर्क कर रहा है। साथ ही कुछ मामलों में उन्हें सुरक्षित स्थानों पर भी पहुंचाया जा रहा है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि ईरान का हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण भारतीय छात्रों को आर्मेनिया के रास्ते निकाला जा रहा है। आर्मेनिया से उनको जॉर्जिया और फिर पश्चिम एशिया के रास्ते भारत लाया जा सकता है। 110 छात्रों का पहला दल आर्मेनिया सीमा पर पहुंच चुका है। बताया जा रहा है कि तीन यूनिवर्सिटी के छात्रों को फिलहाल सुरक्षित जगह पहुंचाया गया है। अन्य छात्रों को भी शिफ्ट किया जा रहा है। ईरान में करीब डेढ़ हजार कश्मीरियों समेत 10,000 भारतीय छात्र हैं। अधिकतर छात्र मेडिकल की पढ़ाई के लिए ईरान गए हैं। भारतीय दूतावास ने जारी की एडवाइजरी इस बीच, ईरान में भारत के दूतावास की एक ताजा एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि जो भी भारतीय या भारतीय मूल के लोग अपने संसाधनों के जरिए तेहरान से बाहर निकल सकते हैं वो शहर के बाहर सुरक्षित ठिकानों पर चले जाएं। ईरान में भारतीय दूतावास ने कहा, “सभी भारतीय नागरिक और पीआईओ (भारतीय मूल के व्यक्ति) जो अपने संसाधनों का उपयोग करके तेहरान से बाहर जा सकते हैं, उन्हें शहर के बाहर सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी जाती है।” भारतीय छात्रों को लेकर सरकार अलर्ट विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, “तेहरान में भारतीय दूतावास लगातार सुरक्षा स्थिति पर नजर रखे हुए है और ईरान में भारतीय छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनसे संपर्क कर रहा है।” बयान में कहा गया है, “कुछ मामलों में छात्रों को दूतावास की मदद से ईरान में ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। अन्य व्यवहार्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। और जानकारी बाद में दी जाएगी।” इस बयान के अनुसार, दूतावास समुदाय के नेताओं से भी सतत संपर्क बनाए हुए है। इजरायल और ईरान में भारतीय दूतावासों ने स्थिति को ध्यान में रखते हुए अपने X हैंडल पर एडवाइजरी जारी किए हैं। ईरान में भारतीय दूतावास की ओर से X पर एक पोस्ट में कहा गया है, “ईरान में मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए, परामर्श के तहत यहां रह रहे सभी भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों से अनुरोध है कि वे सतर्क रहें, किसी भी तरह की अनावश्यक गतिविधियों से बचें, दूतावास के सोशल मीडिया अकाउंट पर दी जा रही सूचना को ध्यान में रखें। स्थानीय अधिकारियों द्वारा बताए गए सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करें।”

इजरायल का करारा पलटवार, ईरान पर कर दिया बड़ा हमला, 400 से अधिक मरे

तेहरान  ईरान और इजराइल के बीच चौथे दिन भी लड़ाई जारी है। इजराइल ने रविवार रात ईरान के विदेश मंत्रालय पर हमला किया। इसमें 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इससे एक दिन पहले इजराइली सेना ने ईरानी रक्षा मंत्रालय पर भी हमला किया था। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इजराइली हमलों में अब तक 224 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 1,277 से ज्यादा घायल हुए हैं। वहीं, अमेरिका में स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स ग्रुप ने ईरान में 406 लोगों के मारे जाने का दावा किया है। ईरान ने भी इजराइल पर पलटवार किया है। ईरान ने सोमवार सुबह सेंट्रल इजराइल में 4 बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। इसमें 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 67 घायल हुए। अब तक इजराइल में ईरानी हमलों में 20 लोग मारे गए हैं, जबकि 450 से ज्यादा घायल हुए हैं। ईरान पर इजरायली हमले के 72 घंटे हो चुके हैं. इस हमले में अब 406 ईरानियों की मौत हो चुकी है, जबकि 654 लोग घायल हैं. वहीं ईरानी हमले में अबतक 16 इजरायलियों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोग घायल हैं. पिछले 72 घंटों में इजरायल ने ईरान के हर मुमकिन इंफ्रास्ट्रक्चर और टारगेट पर हमला किया है. हालांकि तेहरान का कहना है कि इजरायली हमले में अबतक 224 मौतें हुई हैं. इनमें ज्यादातार नागरिक हैं. इजरायल ने दावा किया है कि पिछले 24 घंटे में उसने अपने देश से तेहरान के बीच ‘एयर कॉरिडोर’ बना लिया है. यानी कि इजरायली दावे के मुताबिक अब इजरायल की वायु सेना अपने देश से तेहरान तक बिना बाधा के उड़ान भर सकती है और हमले कर सकती है. इस बीच इजरायल ने ईरान पर सबसे ज्यादा दूरी से हमला किया है. इजरायल की वायु सेना ने पूर्वी ईरान के मशहद हवाई अड्डे पर एक ईरानी ईंधन भरने वाले विमान पर हमला किया, जो इजराइल से लगभग 2,300 किलोमीटर दूर है. हमले के बाद ये विमान आग की लपटों में आ गया और तबाह हो गया. यह ऑपरेशन राइजिंग लॉयन की शुरुआत के बाद से किया गया सबसे लंबी दूरी का हमला है. इजरायल सैनिक अड्डों को निशाना बनाने के बाद अब मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहा है. इजरायल ने तेहरान में मौजूद जमीन से हवा में मार करने वाले मिसाइल लॉन्चर को ही उड़ा दिया है. IDF  ने इस हमले का वीडियो जारी किया है.  आइए बताते हैं कि इजरायल ने पिछले 72 घंटों में ईरान के किन-किन ठिकानों को निशाना बनाया है.  परमाणु ठिकाने: जंग की शुरुआत के साथ ही इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर हमला किया था. इजरायली हमले का पहला टारगेट थे नंताज परमाणु साइट. इजरायल का दावा है कि उसके हमले में नंताज में यूरेनियम संवर्धन की मशीनरी को भारी नुकसान पहुंचा है. इजरायल ने इस्फहान और फोर्डो में भी परमाणु साइट पर हमला किया है. यहां पर हुए नुकसान की जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है. हालांकि  सैन्य ठिकाने: इजरायल ने न्यूक्लियर साइट के अलावा ईरान के मिलिट्री साइट पर भी हमला किया है और इसे जबर्दस्त नुकसान पहुंचाया है. तेहरान और अन्य शहरों में सैन्य ठिकानों पर हमले हुए हैं. जिसमें मिसाइल उत्पादन सुविधाएं शामिल हैं. दक्षिणी ईरान में एक रिफाइनरी में भारी विस्फोट हुआ है. तबरेज और करमानशाह में दो मिसाइल बेस पूरी तरह तबाह हो गए हैं.  इजरायली हमले में राजधानी तेहरान में भारी नुकसान की खबर है. कई रिहायशी इलाकों और सरकारी इमारतों को भारी नुकसान हुआ है. मेहराबाद एयरपोर्ट प्रभावित हुआ है.  ईरान ने तेहरान एयरपोर्ट को बंद कर दिया है.  13-15 जून 2025 को इजरायली हमलों में ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और परमाणु वैज्ञानिकों की मौत की पुष्टि अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों ने की है.  टॉप मिलिट्री लीडरशिप साफ इनमें आर्मी चीफ मेजर जनरल मोहम्मद बघेरी, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर-इन-चीफ मेजर जनरल हुसैन सलामी, IRGC के खातम-अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर्स के प्रमुख मेजर जनरल गुलाम अली रशीद, IRGC की एयरोस्पेस फोर्स के कमांडर जनरल अमीर अली हाजीज़ादेह, ईरानी सशस्त्र बलों के डिप्टी इंटेलिजेंस चीफ जनरल गुलामरेज़ा मेहराबी, ईरानी सशस्त्र बलों के डिप्टी कमांडर ऑफ ऑपरेशंस जनरल मेहदी रब्बानी मारे गए हैं.  वहीं प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में पुष्टि की है कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के खुफिया प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद काज़मी और उनके डिप्टी जनरल हसन मोहाकिक तेहरान पर इजरायली हवाई हमले में मारे गए हैं. इसके अलावा सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली शमखानी भी मारे गए हैं. इजरायली हमले में ईरान का टॉप मिलिट्री लीडरशिप खत्म हो गया है. न्यूक्लियर साइंटिस्ट का एक जेनेरेशन ही खत्म इसके अलावा इजरायल ने ईरान के कई परमाणु वैज्ञानिकों को भी मार डाला है. इनमें भौतिक विज्ञानी मोहम्मद मेहदी तेहरांची, ईरान की परमाणु ऊर्जा संगठन के पूर्व प्रमुख फेरेयदौन अब्बासी-दवानी,  शाहिद बेहेश्ती विश्वविद्यालय में परमाणु इंजीनियरिंग के प्रमुख अब्दुलहामिद मिनोचेहर, शाहिद बेहेश्ती विश्वविद्यालय में परमाणु इंजीनियरिंग के प्रोफेसर अहमदरेज़ा जोलफगारी, अमीरहोसैन फकी, परमाणु वैज्ञानिक अली बकाई करीमी, परमाणु वैज्ञानिक मंसूर असगरी, परमाणु वैज्ञानिक सईद बोरजी शामिल है.  इतने बड़े पैमाने पर परमाणु वैज्ञानिकों को मारकर इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को भारी नुकसान पहुंचाया है.  इजरायल को नुकसान इजरायली हमले के जवाब में ईरान ने  100-200 बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे. जिनमें से कुछ ने आयरन डोम रक्षा प्रणाली को भेद दिया. इससे तेल अवीव में कई इमारतें और वाहन नष्ट हो गए. ईरानी हमले में तेल अवीव में तबाही की भयानक तस्वीरें सामने आई है. ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों में अबतक इजरायल में 16 लोगों की मौत हुई है. ईरान ने मुख्य रूप से तेल अवीव, रमात गान, बैट यम और रेहोवोट में हमला किया है.  तेहरान टाइम्स के अनुसार सोमवार की सुबह-सुबह ईरान ने इजरायल के कब्जे वाले इलाकों को निशाना बनाकर मिसाइलों की दूसरी खेप दागी, जो संघर्ष की शुरुआत के बाद से दसवीं बमबारी थी.  तेहरान टाइम्स का दावा है इससे पहले आधी रात को ईरान ने नेगेव रेगिस्तान और किरयात गत के साथ-साथ हाइफ़ा के अन्य क्षेत्रों में रणनीतिक स्थलों को निशाना बनाया, जिससे सैन्य और आर्थिक बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा.  हाइफा में ईरानी मिसाइल गिरने … Read more

ट्रंप की धमकी के बाद बोले ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन, ‘ऐसा हमला करेंगे कि इजरायल को होगा अफसोस’

वॉशिंगटन/ तेहरान/ तेल अवीव इजरायल के हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि ‘कुछ भी न बचे’ उससे पहले ईरान जल्द से जल्द परमाणु समझौते के लिए तैयार हो जाए। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान पर बाद में होने वाले इजरायली हमले “और भी क्रूर” होंगे। हाल के हफ्तों में ईरान के साथ एक नए परमाणु समझौते पर बातचीत तेज हो गई है, लेकिन तेहरान का यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार पर जोर देना एक बड़ा मुद्दा साबित हुआ है। शुक्रवार को इजरायल ने ईरान के परमाणु सुविधाओं, बैलिस्टिक मिसाइल फैक्ट्री और एयर डिफेंस सिस्टम पर भीषण हमला किया। इन हमलों में कम छह ईरानी परमाणु वैज्ञानिक मारे गए हैं। इसके बाद ईरान ने इजरायल से बदला लेने का कसम खाई है। ट्रंप बोले- नरसंहार को खत्म करने को अब भी समय शुक्रवार की सुबह ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने लिखा कि ईरानी नेताओं को “पता नहीं था कि क्या होने वाला है। वे सभी अब मर चुके हैं, और यह और भी बदतर हो जाएगा!” ट्रंप ने लिखा, “पहले से ही बहुत सारी मौतें और विनाश हो चुके हैं, लेकिन इस नरसंहार को समाप्त करने के लिए अभी भी समय है, अगले पहले से ही योजनाबद्ध हमले और भी क्रूर हैं।” उन्होंने कहा, “ईरान को एक समझौता करना चाहिए, इससे पहले कि कुछ भी न बचे, और जिसे कभी ईरानी साम्राज्य के रूप में जाना जाता था उसे बचाना चाहिए।” ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर क्या लिखा ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा, “मैंने ईरान को सौदा करने के लिए कई मौके दिए। मैंने उन्हें सबसे कड़े शब्दों में कहा, “बस करो”, लेकिन चाहे उन्होंने कितनी भी कोशिश की हो, चाहे वे कितने भी करीब क्यों न पहुंचे हों, वे इसे पूरा नहीं कर पाए। मैंने उनसे कहा कि यह उनके द्वारा ज्ञात, प्रत्याशित या बताई गई किसी भी चीज से कहीं ज़्यादा बुरा होगा, कि संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया में कहीं भी सबसे अच्छा और सबसे घातक सैन्य उपकरण बनाता है, अब तक, और इजरायल के पास इसका बहुत ज़्यादा हिस्सा है, और आने वाले समय में और भी बहुत कुछ होगा – और वे इसका इस्तेमाल करना जानते हैं।” महायुद्ध की आहट; खामेनेई का करीबी भी इजरायली हमले में घायल इजरायल के हमले में ईरान को बड़ा नुकसान पहुंचा है। ईरान के आर्मी चीफ मोहम्मद घावेरी मारे गए हैं तो वही एलीट फोर्स कही जाने वाली इस्लामिक रिवॉलूशनरी गार्ड के लीडर हुसैन सलामी की भी मौत हो गई है। यही नहीं इस हमले में ईरान के शीर्ष नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के करीबी सलाहकार भी जख्मी हो गए हैं। ईरान के सरकारी टेलीविजन ने ही अपनी रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की है। रिपोर्ट में कहा गया कि शीर्ष नेता के सलाहकार अली शमखानी भी आज के यहूदी अटैक में घायल हुए हैं। इस बीच इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग के महायुद्ध में तब्दील होने की भी आशंका है। एक तरफ इजरायल के जवाब में ईरान ने 100 ड्रोन्स से जवाब देने की कोशिश की है तो वहीं इजरायल का कहना है कि अभी तो यह शुरुआत है। इस बीच मिडल ईस्ट के कई देशों ने अपने एयरस्पेस को बंद कर दिया है। आशंका यह है कि कहीं यात्री विमान ना ईरान और इजरायल के हमले की चपेट में आ जाएं। ईरान और इजरायल के पड़ोसी देशों इराक, लेबनान, सीरिया और जॉर्डन ने अपने एयरस्पेस फिलहाल बंद कर लिए हैं। इसके चलते कई देशों को परेशानी उठानी पड़ रही है। ईरान का एयरस्पेस बंद होने से भारत की ही तमाम उड़ानों को वापस दिल्ली या मुंबई लौटना पड़ा है। इसके अलावा विदेशों से आ रही फ्लाइट्स को डायवर्ट करके लाया जा रहा है। इजरायल ने तो अपने यहां विमानों का संचालन अगली सूचना तक रोक दिया है। ईरान ने तेहरान के अपने मुख्य हवाई अड्डे तक को बंद कर दिया है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच जंग में तेजी आ सकती है। इजरायल का कहना है कि वह अब भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले करेगा। इजरायल ने कहा कि यह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि ईरान के पास परमाणु हथियार हो। यही बात डोनाल्ड ट्रंप ने भी कही है और उन्होंने इजरायल की सुरक्षा के लिए तत्पर रहने की बात कही है। इस तरह नेतन्याहू से लेकर ट्रंप तक के रुख ने महायुद्ध की आशंकाओं को बल प्रदान किया है। गौरतलब है कि इजरायल ने करीब 100 ठिकानों पर ईरान के अंदर अटैक किया है। इस हमले के बाद से ही दुनिया भर में आशंकाओं का दौर तेज है। बाजारों पर भी इस जंग का असर दिख रहा है। कच्चे तेल के दामों में इजाफा हुआ है तो वहीं एयरलाइन कंपनियों के शेयर गिरे हैं। ऐसे में अगले कुछ दिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से अहम रहने वाले हैं। ईरान को दी सीधी चेतावनी ट्रंप ने आगे कहा, “कुछ ईरानी कट्टरपंथियों ने बहादुरी से बात की, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि क्या होने वाला था। वे सभी अब मर चुके हैं, और यह और भी बदतर हो जाएगा! पहले से ही बहुत ज़्यादा मौतें और विनाश हो चुका है, लेकिन इस नरसंहार को समाप्त करने के लिए अभी भी समय है, अगले पहले से ही योजनाबद्ध हमलों के साथ और भी ज़्यादा क्रूर। ईरान को सौदा करना चाहिए, इससे पहले कि कुछ भी न बचे, और जो कभी ईरानी साम्राज्य के रूप में जाना जाता था उसे बचाएं। अब और मौत नहीं, और विनाश नहीं, बस करो, इससे पहले कि यह हो जाए बहुत देर हो चुकी है। भगवान आप सबका भला करे!” ईरान के न्यूक्लियर साइट पर इजरायल ने फिर शुरू किए हमले इजरायल ने एक बार फिर से ईरान पर हमले शुरू कर दिए है. ईरानी मीडिया के अनुसार इजरायल ने अब शिराज और तबरीज शहरों के साथ-साथ नतान्ज न्यूक्लियर साइट पर फिर से हमला शुरू कर दिया है.  हिजबुल्लाह इजरायल पर हमला नहीं करेगा इजरायल पर हमले के लिए हिजबुल्लाह ईरान का साथ नहीं देगा. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक हिजबुल्लाह के एक अधिकारी ने शुक्रवार को कहा … Read more

ईरान के इस्फहान परमाणु ठिकाने पर इजरायली हमलों का कोई असर नहीं: IAEA

तेल अवीव इजरायल ने शुक्रवार की सुबह ईरान पर एक साथ कई हवाई हमले किए. दोनों देशों के बीच काफी समय से तनातनी चल रही है. इजरायल को ऐसी खुफिया जानकारी मिली थी, जिसमें  ईरान में परमाणु बम बनाने के संकेत मिले थे.  कई चेतावनियों के बाद आज तड़के इजरायल ने ईरान के परमाणु साइट पर हमला बोल दिया. ये हमले इतने सटीक थे कि सिर्फ ईरान स्थित परमाणु प्लांट, वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और परमाणु वैज्ञानिकों के ठिकाने ही तबाह हुए.  इजरायल के आईडीएफ ने ये स्पष्ट कर दिया है कि उनकी खुफिया एजेंसी (मोसाद) से मिली सटीक जानकारी के बाद ही ये हमला हुआ है और सिर्फ उन जगहों पर ही प्रहार किया गया, जहां उनका परमाणु कार्यक्रमऔर इजरायल विरोधी सैन्य गतिविधियां चल रही थी. जब बात इजरायल की खुफिया एजेंसी की आती है तो हर किसी के जेहन में मोसाद का नाम कौंध जाता है.  अपने कारनामों के लिए जाना जाता है मोसाद मोसाद इजरायल की खुफिया एजेंसी है और ये दुनिया की सबसे खतरनाक और तेज-तर्रार एजेंसी मानी जाती है. इसके काम करने का तरीका इतना सटीक होता है कि दुश्मन इसके नाम से ही खौफ खाते हैं. चाहे वो हमास के छुपे हुए शीर्ष कमांडर को खोजकर मौत के घाट उतारना हो, या फिर ईरान के अतिसुरक्षित परमाणु कार्यक्रम की डिटेल उड़ानी हो. हर काम में मोसाद के तेज-तर्रार एजेंट सफाई से अंजाम देते हैं.  अब आईडीएफ ने ऑपरेशन राइजिंग लॉयन के तहत जब ईरान के नतांज परमाणु स्थल पर हमला किया, इसके पहले सारा होमवर्क मोसाद का था. क्योंकि ईरान पर हमले के बाद आईडीएफ ने इसकी पुष्टि भी की. यरुशल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल सैन्य अधिकारियों ने बताया कि खुफिया एजेंसियों से जानकारी मिली थी कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम में काफी तेजी आई है. पता चला है कि ईरानी शासन परमाणु हथियार बनाने का प्रयास कर रही है.  इजरायल ने आपातकाल घोषित कर दिया एक रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल के 200 से अधिक लड़ाकू विमानों ने पहले ही ईरान के कुछ ठिकानों को तबाह कर दिया है. बदले में अगर कुछ ड्रोन या मिसाइलें इजरायल के हवाई रक्षा तंत्र को भेदने में कामयाब होती हैं तो तेल अवीव और यरुशलम जैसे शहरों में सीमित नुकसान होगा. इजरायल ने आपातकाल घोषित कर दिया है और नागरिकों को बम शेल्टरों में भेजा गया है. असली युद्ध का खतरा अब बढ़ गया लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि असली युद्ध का खतरा अब बढ़ गया है क्योंकि दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है. ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने कहा है कि इजरायल को इस हमले की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. यह संघर्ष अब पूरे मिडिल ईस्ट में फैल सकता है जिसमें ईरान समर्थित समूह हिजबुल्लाह, हमास और हूती विद्रोही शामिल हो सकते हैं. कमजोर होने के बाद भी हिजबुल्लाह लेबनान से और हूती यमन से इजरायल पर हमले तेज कर सकते हैं. इजरायल इसके लिए पूरी तरह से तैयार बैठा अगर ईरान अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करता है तो इजरायल इसके लिए पूरी तरह से तैयार बैठा. इस युद्ध में वैश्विक शक्तियों के शामिल होने की भी आशंका है जो इस युद्ध को और भी खतरनाक बना सकता है. अमेरिका पहले से ही क्लियर है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना सकता है. वह इस बात को लेकर भी क्लियर है कि वह इजरायल की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और उसकी सेना क्षेत्र में तैनात है.  अमेरिका यही चाहता है? दूसरी तरफ रूस और चीन जैसे देश ईरान के साथ अपने रणनीतिक संबंधों के कारण उसका समर्थन कर सकते हैं. अगर ये देश प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से युद्ध में शामिल होते हैं तो यह एक बड़े युद्ध की आहट बन सकता है. तेल की आपूर्ति पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा. एक्सपर्ट्स का एक पॉइंट यह भी है कि ईरान का अगर किसी ने खुलकर साथ नहीं दिया तो वह कमजोर होगा. अमेरिका यही चाहता है. इसके बाद ईरान की स्थिति भी मिडिल ईस्ट के बाकी मुस्लिम देशों की तरह हो जाएगी. अब देखना होगा कि दोनों में से क्या स्थिति बनेगी.  ईरान के सारे परमाणु ठिकाने की दी सूचना  आईडीएफ के अनुसार मोसाद ने ही वो खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई थी, जिसमें  हजारों किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम के उत्पादन के प्रयास के साथ-साथ अंडरग्राउंड फैसिलिटी में  एटॉमिक फिजन की कोशिश करने के ठोस सबूत थे. यही वजह है कि आईडीएफ ने कहा कि ईरान के पास इतना यूरेनियम है कि वह कुछ ही दिनों में 15 परमाणु हथियार बना सकता है. मोसाद ने किया सफाई से काम  मोसाद ने अपना काम इतनी सफाई से किया और ईरान के गुप्त परमाणु और सैन्य ठिकाने की समय रहते जानकारी अपनी सेना तक पहुंचाई. यरुशलम टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आईडीएफ ने भी कहा कि इजरायल के पास ऑपरेशन “राइजिंग लायन” के तहत हवाई हमले करने के अलावा “कोई विकल्प नहीं बचा है. क्योंकि हमें खुफिया एजेंसी से जो जानकारी मिली है, उससे ये संकेत मिलता है कि ईरानी शासन उस बिंदु पर पहुंच रहा है जहां से वापसी संभव नहीं है.   राइजिंग लॉयन के पीछे मोसाद का होमवर्क मोसाद ने ही इजरायली सेना को ईरान के परमाणु साइट और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के अड्डे की जानकारी दी थी. इसके बाद ही राइजिंग लॉयन ऑपरेशन के तहत आईडीएफ ने ऐसा सटीक हमला किया कि सिर्फ टारगेट को ही नुकसान पहुंचा है. मोसाद से मिली जानकारी के बाद ही आईडीएफ ने अपने लक्ष्य निर्धारित किए थे. इस बारे में इजरायल की सेना ने भी बताया कि उन्होंने सिर्फ ईरानी कमांडर, बेस और परमाणु स्थल को टारगेट बनाया था. हालांकि, मुख्य लक्ष्य परमाणु स्थल ही हैं. मोसाद की सूचना पर ही आईडीएफ ने किया सटीक हमला मोसाद की मदद से ही आईडीएफ ने ईरान पर हमले से उस पर साइबर अटैक किया और उनके एयर डिफेंस सिस्टम को जाम कर दिया. इसके बाद सुबह ऑपरेशन राइजिंग लायन के एक-एक कर इजरायल ने ईरान के परमाणु साइट और अलग-अलग जगहों पर सैन्य महत्व के बिल्डिंग्स को निशाना बनाया. इन हमलों में नतांज का परमाणु साइट तबाह हो गया. रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कमांडर हुसैन सलामी और आईआरजीसी के मेजर जनरल गुलाम … Read more

ईरान में महिला ने नग्न होकर पुलिस के सामने हंगामा किया, हिजाब बैन के विरोध में

तेहरान इस्लामिक देश ईरान ने वैसे तो पिछले साल दिसंबर में ही सख्त हिजाब कानून को लागू करने पर रोक लगी दी है लेकिन अभी भी वहां हिजाब बैन के खिलाफ महिलाएं हल्ला बोल रही हैं। इसी तरह के एक वाकए में ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद में एक महिला ने सार्वजनिक तौर पर विरोध-प्रदर्शन करते हुए पहले अपने सभी कपड़े उतार दिए फिर नग्न होकर पुलिस वाहन के बोनट पर खड़ी होकर हंगामा करने लगीं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में महिला सशस्त्र बलों के अधिकारियों पर चिल्लाती हुई दिखाई दे रही है। ईरानी पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता मसीह अलीनेजाद ने महिला की इस करतूत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया है। वीडियो में दिख रहा है कि हंगामा करने वाली महिला पुलिस की गाड़ी पर चढ़कर विंडशील्ड की ओर बढ़ते हुए और अपने दोनों पैरों को फैलाकर बैठ रही है। महिला की हालत देखकर वहां मौजूद एक सशस्त्र पुरुष अधिकारी मामले में दखल देने में हिचकिचाता हुआ दिखाई दे रहा है। वीडियो के अंत में महिला ने अपने हाथ ऊपर उठा लिए और विरोध में चिल्लाने लगीं। महिला इस्लामी गणराज्य में महिलाओं के लिए सख्त प्रावधानों का विरोध कर रही थी। वह शरीर को पूरी तरह से ढकने से इनकार भी करती दिखी। हालांकि, हंगामा बढ़ने पर उस महिला के पति ने कहा कि फिलहाल उसका इलाज चल रहा है और उसकी हालत ठीक नहीं है। बता दें कि दिसंबर में, ईरानी सांसद ने विवादास्पद ‘पवित्रता और हिजाब’ कानून पारित किया था, जिसमें उन महिलाओं और लड़कियों पर कठोर दंड का प्रावधान किया गया था जो अपने बाल, हाथ या पैर का प्रदर्शन करती हैं। हालांकि, महिलाओं के व्यापक विरोध के बाद ईरानी सरकार झुक गई थी और इस कानून को लागू करने पर रोक लगा दी थी। तब ईरानी सरकार ने कहा था कि इसमें सुधार की जरूरत है। एमनेस्टी इंटरनेशनल समेत कई वैश्विक संगठनों ने ईरान के इस कानून की निंदा की थी और इसे दमनकारी और दमघोंटू व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश कहा था। प्रस्तावित कानून में भारी जुर्माना और बार-बार अपराध करने वालों के लिए 15 साल तक की कैद का भी प्रावधान किया गया था।

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को खुली धमकी दी कहा अगर ईरान ने मुझे मारने की कोशिश की तो मैं उस देश को खत्म कर दूंगा

वॉशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी दे दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान ने उन्हे मारने की कोशिश की तो वह देश को खत्म कर देंगे। अमेरिका ने ये भी संकेत दिए है कि अगर ईरान ने परमाणु हथियार से जुड़े परियोजनाओं को बंद नहीं किया तो अमेरिका उसपर और भी प्रतिबंध लगाएगा। ट्रंप ने ईरान पर और भी अधिक दबाव डालने के आदेश पर हस्ताक्षर भी किए। ईरान को ट्रंप की खुली धमकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने अपने सलाहकारों को निर्देश दिया है कि अगर ईरान उनके ऊपर हमला करता है तो उसे तबाह कर दिया जाए। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान ने मुझे मारने की कोशिश की तो मैं उसे खत्म कर दूंगा। उन्होंने कहा कि ईरान के पास ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकता है। हालांकि, ट्रंप ने ईरान के समकक्ष से मुलाकात की इच्छा भी जाहिर की। ट्रंप पर हो चुका है जानलेवा हमला बता दें कि ट्रंप को कई बार ईरान की ओर से धमकी मिल चुकी है। हाल ही में एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप पर जानलेवा हमला भी हुआ था। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना था कि वह नहीं मानते की हत्या का प्रयास ईरान ने किया था। साल 2020 में ट्रंप ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर की एलीट शाखा कुद्स फोर्स का नेतृत्व करने वाले कासिम सुलेमानी की हत्या का आदेश दिया था। इसके बाद से ही ट्रंप की सुरक्षा को लेकर अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी काफी अलर्ट रहती है। आशंका जताई जा रही है कि ट्रंप, ईरान की मुश्किलें बढ़ाने वाले हैं। ईरान आर्थिक संकट से जूझ रहा है। साल 2015 में अमेरिका से जब ईरान का परमाणु समझौता हुआ था, लेकिन 2018 में ट्रंप ने ईरान से परमाणु समझौता तोड़ दिया था। इसके बाद ईरान और अमेरिका के बीच रिश्ते काफी खराब हो गए। ईरान के राष्ट्रपति से मिलने की जताई इच्छा उन्होंने कहा कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकता है, लेकिन साथ ही उम्मीद जताई की तेहरान के साथ समझौता किया जा सकता है। ट्रंप ने ईरान के अपने समकक्ष से मिलने की इच्छा जताई, ताकि तेहरान को यह समझाने की कोशिश की जा सके कि वह परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश छोड़ दे। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन पर तेल-निर्यात प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करने में विफल रहने का आरोप लगाया है। ट्रंप के ऊपर खतरा अमेरिकी अधिकारी वर्षों से ट्रंप और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ ईरानी धमकियों पर नजर रख रहे हैं। ट्रंप ने 2020 में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर की एलीट शाखा कुद्स फोर्स का नेतृत्व करने वाले कासिम सुलेमानी की हत्या का आदेश दिया था। न्याय विभाग ने बीते साल नवम्बर में घोषणा की थी कि राष्ट्रपति चुनाव से पहले ट्रंप को मारने की ईरानी साजिश की नाकाम किया गया है। विभाग ने आरोप लगाया कि ईरानी अधिकारियों ने सितम्बर में 51 वर्षीय फरहाद शकेरी को ट्रंप की निगरानी करने और उनकी हत्या के लिए योजना बनाने का निर्देश दिया गया था।

प्रतिबंधों की मार झेल रहे ईरान ने भारत से अपने रिश्ते सुधारने और सहयोग बढ़ाने की अपील की

नई दिल्ली अमेरिकी प्रतिबंधों की मार झेल रहे ईरान ने भारत से अपने रिश्ते सुधारने और सहयोग बढ़ाने की अपील की है। ईरानी अधिकारियों ने भारत से फिर से कच्चे तेल की खरीद शुरू करने और ईरानी नागरिकों को वीजा देने में राहत देने की मांग की है। ईरान का कहना है कि इन कदमों से दोनों देशों के बीच दोस्ती और आर्थिक रिश्ते और मजबूत होंगे। मगर इसके पीछे क्या ईरान की कोई मंशा है? आइए जानते हैं। ईरान की इस गुहार के पीछे मुख्य वजह अमेरिकी प्रतिबंध हैं, जिनकी वजह से उसकी अर्थव्यवस्था पर काफी दबाव है। 2019 में भारत ने अमेरिकी दबाव में ईरान से कच्चे तेल की खरीद बंद कर दी थी। हालांकि, अब ईरान चाहता है कि भारत एक बार फिर तेल खरीदने के लिए रास्ता निकाले। ईरानी अधिकारी ने साफ कहा कि भारत और ईरान को मिलकर इस मुद्दे का हल ढूंढना होगा। चाबहार बंदरगाह पर भी ईरान की खास नजर है। यह बंदरगाह अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे से बाहर है और भारत ने इसके विकास में काफी निवेश किया है। ईरानी अधिकारी ने कहा कि चाबहार के आसपास पेट्रो-रसायन उद्योगों में सहयोग के लिए भारत ने रुचि दिखाई है। यह बंदरगाह दोनों देशों के लिए व्यापारिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने का एक अहम जरिया हो सकता है। ईरानी अधिकारी ने यह भी कहा कि रूस और ईरान पर लगे प्रतिबंध अलग हैं, और भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा है। ऐसे में ईरान उम्मीद कर रहा है कि भारत उसके लिए भी ऐसा ही कोई रास्ता निकालेगा। ईरान ने यह भी संकेत दिया कि चीन के बढ़ते प्रभाव और वैश्विक राजनीति में बदलाव के चलते अमेरिका का रुख ईरान के प्रति नरम हो सकता है। ऐसे में भारत के लिए यह मौका हो सकता है कि वह ईरान के साथ अपने रिश्तों को फिर से पटरी पर लाए। भारत के लिए ईरान की अहमियत सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है। चाबहार बंदरगाह भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया से जोड़ने का सीधा रास्ता देता है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह भारत के लिए किसी तरह की मुश्किल खड़ी नहीं करना चाहता, बल्कि आपसी सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाना चाहता है। ऐसे में देखना है कि क्या भारत अपने चाबहार वाले दोस्त के साथ कच्चे तेल का सौदा करता है या नहीं।

बेरूत पर इजरायली हवाई हमलों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 22 हुई, 117 घायल

 ईरान ने अमेरिकी सहयोगियों हमला का जवाब हमला से देने की धमकी दी बेरूत: इजरायली एयर स्रा सइक में 22 की मौत, हिजबुल्लाह कमांडर बच निकलने में रहा कामयाब बेरूत पर इजरायली हवाई हमलों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 22 हुई, 117 घायल तेहरान/तेल अवीव  ईरान ने गुप्त राजनयिक चैनलों के माध्यम से फारस की खाड़ी और मध्य पूर्व में अमेरिकी सहयोगियों पर हमला करने की धमकी दी है। तेहरान ने कहा कि अगर उनके क्षेत्रों या हवाई क्षेत्रों का उपयोग ईरान पर हमला करने के लिए किया जाता है तो वह इसका जवाब हमला से देगा। यह जानकारी वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अरब अधिकारियों के हवाले से दी। रिपोर्ट में गुरुवार को कहा गया कि तेहरान ने जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और कतर को संबंधित चेतावनी भेजी है। इन देशों ने कथित रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन प्रशासन को सूचित किया है कि वे ईरान के खिलाफ किसी भी आक्रामक कार्रवाई के लिए अमेरिका और इज़रायल को अपने सैन्य संरचना या हवाई क्षेत्र प्रदान नहीं करना चाहते हैं। पिछले सप्ताह, ईरानी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ ने कहा था कि “अमेरिका सहित इज़रायल का समर्थन करने वाले देशों का सीधा हस्तक्षेप और ईरान के खिलाफ उनकी आक्रामकता की स्थिति में, मध्य पूर्व में उनके ठिकानों और हितों को एक साथ एक शक्तिशाली हमले का सामना करना पड़ेगा।” उत्तरी गाजा में तीन सैन्यकर्मियों की मौत : आईडीएफ  इज़रायल रक्षा बल (आईडीएफ) ने  कहा कि उत्तरी गाजा पट्टी में उसके तीन रिजर्व सैनिक मारे गए। आईडीएफ ने सैनिकों के नाम भी प्रकाशित किए, जो कि 5460 प्रशासनिक सहायता इकाई के सदस्य थे। इज़रायली सेना रेडियो ने कहा कि जबालिया क्षेत्र में एक आपूर्ति मार्ग पर एक विस्फोटक उपकरण में विस्फोट होने से तीन सैनिक मारे गए। इस सप्ताह की शुरुआत में, आईडीएफ ने जबालिया क्षेत्र में एक नए आतंकवाद विरोधी अभियान की घोषणा की थी। उल्लेखनीय है कि 07 अक्टूबर, 2023 को मध्य पूर्व में शुरू हुए संघर्ष के बाद से, इज़रायल ने विभिन्न मोर्चों पर 734 सैनिकों को खो दिया है, जिसमें गाजा पट्टी में जमीनी अभियानों में मारे गए लगभग 350 सैनिक भी शामिल हैं। बेरूत पर इजरायली हवाई हमलों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 22 हुई, 117 घायल मध्य बेरूत के घनी आबादी वाले इलाके अल-नुएरी को निशाना बनाकर  शाम किए गए इजरायली हवाई हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है और 117 लोग घायल हुए हैं। लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने नवीनतम अपडेट में यह जानकारी दी। अल जज़ीरा टीवी चैनल के अनुसार, हवाई हमले का लक्ष्य कथित रूप से हिजबुल्लाह के संपर्क और समन्वय इकाई के प्रमुख वाफिक सफा को निशाना बनाना था लेकिन वह हमले में बच गए। यह तीसरी बार है जब इज़रायल ने अल कोला और अल-बचौरा क्षेत्रों पर हमले के बाद लेबनान की राजधानी बेरूत को निशाना बनाया है। इज़रायल ने हाल ही में बेरूत और उसके उपनगरों पर अपने हवाई हमले तेज कर दिए हैं, मुख्य रूप से हिजबुल्लाह के अधिकारियों और सुविधाओं को निशाना बनाया है। इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष एक साल पहले तब शुरू हुआ था जब हिजबुल्लाह ने गाजा युद्ध की शुरुआत में हमास के समर्थन में इजराइल पर रॉकेटों की बौछार की थी। बेरूत: इजरायली एयर स्रा सइक में 22 की मौत, हिजबुल्लाह कमांडर बच निकलने में रहा कामयाब  बेरूत के घनी आबादी वाले क्षेत्र अल-नूइरी को निशाना बनाकर की गई इजरायली एयर स्ट्राइक में मरने वालों की संख्या कम से कम 22 हो गई और 117 लोग घायल हुए हैं। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने नवीनतम अपडेट में यह जानकारी दी ।  एयर स्ट्राइक कथित तौर पर हिजबुल्लाह के संपर्क और कोऑर्डिनेशन यूनिट के प्रमुख वाफिक सफा को निशाना बनाकर की गई। हालांकि सफा हमले में बच गया। सिन्हुआ समाचार एजेंसी ने अल जजीरा टीवी चैनल के हवाले से बताया कि यह तीसरी बार है जब इजरायल ने अल कोला और अल-बचौरा इलाकों पर हमला करने के बाद लेबनान की राजधानी बेरूत को निशाना बनाया। रॉयटर्स की शुक्रवार की एक रिपोर्ट के मुताबिक लेबनान सरकार ने अपने दैनिक अपडेट में कहा कि पिछले साल से लेबनान में जारी इजरायली हमलों में कम से कम 2,169 लोग मारे गए। इनमें से ज्यादातर की मौत 23 सितंबर के बाद हुई, जब इजरायल ने अपने सैन्य अभियान का विस्तार किया। मृतकों की संख्या में नागरिकों और लड़ाकों के बीच अंतर नहीं किया गया। बता दें 23 सितंबर से, इजरायल ने लेबनान में हवाई हमले तेज कर दिए। उसका कहना है कि यह कार्रवाई लेबानानी संगठन हिजबुल्ला के खात्मे के लिए की जा रही है। 27 सितंबर को बेरूत के दक्षिणी उपनगर में एक महत्वपूर्ण हमले में हिजबुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह और उसके कई सहयोगी मारे गए। वहीं इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में जमीनी सैन्य अभियान भी शुरू कर दिया। इजरायली हमलों की वजह से लेबनान में लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। 8 अक्टूबर, 2023 को हिजबुल्लाह ने गाजा में हमास के प्रति एकजुटता जाहिर करते हुए इजरायल पर रॉकेट दागने शुरू किए थे। नवीनतम घटनाक्रम इसी संघर्ष का विस्तार है। पिछले साल 7 अक्टूबर को हमास ने इजरायल पर एक बड़ा हमला किया था जिसमें करीब 1200 लोगों की मौत हुई थी जबकि 250 से ज्यादा लोगों को बंधक बना लिया गया। ऐसा माना जाता है कि 100 से अधिक बंधक अब भी गाजा में है। इस हमले के बाद इजरायल ने हमास के कंट्रोल वाली गाजा पट्टी में सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी। अलजजीरा की शुक्रवार की एक रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर 2023 से अब तक गाजा में इजरायली हमलों में कम से कम 42,065 लोग मारे गए हैं और 97,886 घायल हुए हैं।      

इतिहास में इजरायल और ईरान ने एक साझा दुश्मन से लड़ने के लिए अमेरिका की मदद से हाथ मिलाया था

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने मंगलवार को इजरायल पर 200 से ज्यादा मिसाइलें दागीं है जिनमें हाइपरसोनिक हथियार भी शामिल हैं। अब इजरायल ने भी कसम खाई है कि ईरान इस हमले की कीमत चुकाएगा। हालांकि दोनों देशों के बीच रिश्ते हमेशा से खराब नहीं थे। यह सुनने में भले ही अकल्पनीय लगे लेकिन इजरायल और ईरान ने एक साझा दुश्मन से लड़ने के लिए अमेरिका की मदद से हाथ मिलाया था। 1960 के दशक में इजरायल और ईरान दोनों का एक साझा दुश्मन था इराक। जहां इजरायल अरब देशों के खिलाफ संघर्ष में उलझा हुआ था वहीं शाह के नेतृत्व में ईरान के लिए सुरक्षा और क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं को देखते हुए इराक एक सीधा खतरा था। इसके बाद इस समय की सबसे गुप्त साझेदारी के लिए एक आधार तैयार हुआ। इस साझेदारी में इज़राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद और ईरान की सीक्रेट पुलिस SAVAK शामिल थे। दोनों ने इराकी शासन के खिलाफ कुर्द विद्रोहियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इराक के अरब नेतृत्व की कमजोरी के रूप में देखे जाने वाले ये कुर्द समूह इराकी सरकार को अंदर से कमजोर करने के लिए जरूरी थे। खुफिया गठबंधन कोड-नाम ट्राइडेंट के गठन के बाद इज़राइल और ईरान के बीच के रिश्ते नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए थे जिसमें तुर्की भी शामिल था। 1958 की शुरुआत में ट्राइडेंट की मदद से इन तीन समूहों ने कई खुफिया जानकारियों का आदान-प्रदान किया। जैसे-जैसे संबंध परिपक्व होते गए इज़राइल और ईरान और भी करीब होते गए। शाह की महत्वाकांक्षाएं और इज़राइल का प्रभाव ईरान के शाह मोहम्मद रजा पहलवी न केवल साझा भू-राजनीतिक हितों से प्रेरित थे बल्कि अमेरिका में इज़राइल के प्रभाव से भी प्रेरित थे। शाह ने इजराइल को अमेरिका के साथ संबंधों को सुधारने के लिए एक साधन के रूप में देखा। खासकर कैनेडी प्रशासन द्वारा उनके शासन के बारे में चिंता व्यक्त करने के बाद यह और जरूरी हो गया था। इजराइली-ईरानी संबंध ईरान की पश्चिम के साथ खुद को जोड़ने की रणनीति का हिस्सा बन गए। नतीजतन 1960 के दशक के मध्य तक तेहरान में एक स्थायी इजराइली प्रतिनिधिमंडल की स्थापना हुई जो एक दूतावास के रूप में कार्य करने लगी। हालांकि इस संबंध में भी कुछ जटिलताएं थी। शाह अरब दुनिया में व्यापक इजराइल-विरोधी भावना से अवगत थे। उन्होंने ईरान के इजराइल के साथ संबंधों के सार्वजनिक तौर पर इनकार किया। इराक के खिलाफ मिलकर काम करने में दोनों देशों का फायदा ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति ने देश के राजनीतिक परिदृश्य को काफी हद तक बदल दिया और इसे एक इजराइल विरोधी इस्लामी गणराज्य में बदल दिया। फिर भी अयातुल्ला खोईमेनी के सत्ता में आने के बाद भी नए शासन ने इजराइल के साथ गुप्त सहयोग जारी रखा। जैसे-जैसे ईरान-इराक युद्ध (1980-1988) आगे बढ़ा दोनों देशों ने सद्दाम हुसैन के इराक के खिलाफ़ मिलकर काम करने में ही फायदा देखा। इज़राइल ने भी ईरान की मदद करने में एक अच्छा अवसर देखा। अमेरिका और सोवियत संघ दोनों ने इराकी सेना की आपूर्ति की थी और यह एक जोखिम था। इज़राइल द्वारा ईरान को हथियारों की खेप भेजना, खास कर से प्रधानमंत्री मेनाचेम बेगिन द्वारा 1980 में सैन्य उपकरणों की बिक्री को मंज़ूरी दिए जाने के बाद इराक की ताकत को कमज़ोर करने का एक सोचा-समझा फ़ैसला था। ये गुप्त हथियार सौदे अमेरिकी नीति के बावजूद किए गए जिसमें तेहरान में बंधक बनाए गए अमेरिकी लोगों की रिहाई तक ईरान को सैन्य सहायता देने पर रोक लगाई गई थी। इज़राइली सैन्य सहायता के बदले में, खोईमेनी के शासन ने बड़ी संख्या में ईरानी यहूदियों को इज़राइल या अमेरिका में रहने की अनुमति दी। ऑपरेशन फ्लावर इजरायल-ईरानी साझेदारी पारंपरिक हथियार सौदों से आगे तक पहुंच गई थी। सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक ऑपरेशन फ्लावर था जो एक गुप्त करोड़ों डॉलर की योजना थी जो 1977 में शाह के शासन के दौरान शुरू हुई थी। इस सौदे के तहत ईरान ने 1978 में इजरायल को 260 मिलियन डॉलर का तेल भेजकर एक बड़ा अग्रिम भुगतान किया जैसा कि 1986 की न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था। मिसाइल कार्यक्रम पर काम 1979 में इस्लामिक क्रांति तक जारी रहा जिसके बाद खोमेनेई के शासन ने अचानक सहयोग रोक दिया। अक्टूबर 1980 में जब ईरान ने इराक के खिलाफ युद्ध छेड़ा था तब इजरायल ने गुप्त रूप से ईरान को अमेरिकी निर्मित एफ-4 लड़ाकू विमानों के लिए 250 अतिरिक्त टायर भी दिए थे। दुश्मनी की शुरुआत 1990 के दशक तक इज़राइल और ईरान के बीच सहयोग का युग लगभग समाप्त हो गया था। भू-राजनीतिक कारण जैसे अरब समाजवाद, सोवियत प्रभाव और इराक का खतरा, जो कभी उन्हें एकजुट करते थे गायब हो गए थे जिससे सहयोग के लिए वजहें नहीं बची थी। इसके बाद ईरान ने इजरायल विरोधी विचारधारा को अपनाया। ईरान ने इजरायल के साथ संघर्ष में हिजबुल्लाह और हमास जैसे समूहों का समर्थन किया है। 2000 के दशक की शुरुआत में ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद का चुनाव, नरसंहार से इनकार और इजरायल के खिलाफ आक्रामक बयानबाजी ने तनाव को और बढ़ा दिया। इसके बाद ईरान इस क्षेत्र में इजरायल का सबसे प्रमुख विरोधी बन गया। अब मिडिल ईस्ट के ये दो देश पूरी तरह युद्ध की कगार पर हैं।

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