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ईरान युद्ध से LPG आपूर्ति पर दबाव, सरकार ने बताया—घबराने की जरूरत नहीं

नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को लगभग तीन हफ्ते हो चुके हैं। इस संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया है। सबसे बड़े ऊर्जा आयातकों में से एक भारत भी इससे अछूता नहीं है। केंद्र सरकार लगभग प्रतिदिन ही लोगों को शांत रहने की अपील कर रही है, लेकिन जनता के बीच में डर बना हुआ है। आज भी पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से बताया गया कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की वजह से एलपीजी की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, हालांकि फिलहाल देश में संतोषजनक मात्रा में एलपीजी मौजूद है। किसी भी डिस्ट्रीब्यूटर के यहां कोई कमी सामने नहीं आई है। इसके अलावा देश में क्रूड ऑयल के भी पर्याप्त भंडार मौजूद हैं। साथ ही पेट्रोल पंपों, घरेलू पीएनजी और गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी की सप्लाई भी लगातार जारी है। देश की जनता से शांति की अपील करते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने इस संकट के बीच सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को विस्तार बताया। उन्होंने कहा, “कच्चे तेल की स्थिति और रिफाइनरी संचालन सामान्य है। पेट्रोल पंपों पर भी कहीं भी सूखा (ड्राई-आउट) नहीं देखा गया है। घरेलू पीएनजी और सीएनजी की भी पर्याप्त सप्लाई बनी हुई है।” उन्होंने कहा, “हम पिछले कुछ दिनों से व्यापारिक एलपीजी उभोक्ताओं से अपील कर रहे हैं कि जहां तक संभव हो, एलपीजी से सीएनजी की ओर शिफ्ट करें, सरकार इस दिशा में कंपनियों को भी प्रोत्साहन दे रही है।” पीएनजी पर शिफ्ट हो रहे उपभोक्ता: सरकार एलपीजी संकट के बीच में सरकार ने पीएनजी की ओर उपोभोक्ताओं को शिफ्ट करने के काम में तेजी लाई है। इस प्रक्रिया को आसान भी बनाया गया है। सुजाता शर्मा ने बताया, “भारत सरकार ने सभी राज्य सरकारों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त वाणिज्यिक पीएनजी देने का वादा किया है, यह प्रक्रिया पीएनजी नेटवर्क को मजबूत और विस्तार देने में मदद करेगी। हमारे इन संयुक्त प्रयासों से पिछले दो हफ्तों में लगभग 1,25,000 नए घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक कनेक्शन जारी किए गए हैं। पिछले तीन दिनों में 5,600 से अधिक एलपीजी उपभोक्ता पीएनजी में भी शिफ्ट हुए हैं।” पश्चिम एशिया में जारी युद्ध चिंता का विषय: सरकार मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने पश्चिम एशिया में तेल रिफाइनरियों और क्रूड ऑयल भंडारों पर होते हमलों को लेकर भी अपनी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “चल रहे युद्ध के कारण एलपीजी की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। हालांकि, कहीं भी कोई कमी नहीं है। ऑनलाइन बुकिंग भी बढ़कर 94 फीसदी हो गई है। इसके अलावा 83 फीसदी रिफिल डिलीवरी ‘डिलीवरी ऑथेंटिकेट’ कोड के माध्यम से की जा रही है। घबराहट में की जाने वाली बुकिंग (पैनिक बुकिंग) में कमी आ रही है। लगभग 17 राज्य सरकारों ने वाणिज्यिक एलपीजी के लिए आवंटन आदेश जारी किए हैं। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति आवंटित की जा चुकी है।” पेट्रोलियम मंत्रालय के अलावा एमईए ने भी इस संकट को लेकर अपना पक्ष रखा। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की वजह से केवल भारत ही नहीं लगभग सभी देशों में ऊर्जा का संकट है। उन्होंने बताया कि कतर, से भारत की लभगभ 40 फीसदी से ज्यादा एलपीजी आती है, ऐसे में जब उनकी रिफाइनरियों पर हमला होता है और होर्मुज बंद रहता है, तो भारत में भी इसका असर देखने को मिलता है। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार लगातार इसका विकल्प खोजने का प्रयास कर रही है।  

ईरान युद्ध के बीच अमेरिका ने मिडल ईस्ट में 2500 नौसैनिक और युद्धपोत तैनात करने का लिया फैसला

दुबई अमेरिकी सेना ने मिडिल ईस्ट में 2,500 मरीन (नौसैनिक) और एक बख्तरबंद नौसैनिक युद्धपोत भेजने का आदेश दिया है. ईरान के खिलाफ युद्ध के बाद इस इलाके में अमेरिकी सेना की यह बड़ी तैनाती है। इस घोषणा के कुछ घंटों बाद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी फोर्स ने ईरान के खार्ग द्वीप पर सैन्य ढांचे को ‘खत्म’ कर दिया है और चेतावनी दी कि अगला निशाना द्वीप का तेल इंफ्रास्ट्रक्चर हो सकता है. खार्ग द्वीप तेल सप्लाई का मुख्य टर्मिनल है जो ईरान के तेल एक्सपोर्ट को हैंडल करता है. एक दिन पहले, ईरानी संसद के स्पीकर ने चेतावनी दी थी कि इस तरह के हमले से बदले की कार्रवाई का एक नया स्तर शुरू होगा। फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि युद्ध तब खत्म होगा “जब मैं इसे अपनी हड्डियों में महसूस करूंगा.” वह विरोधियों द्वारा इस्लामिक सरकार को गिराने की संभावना को लेकर भी अधिक सावधान थे। ट्रंप ने ईरान के अर्धसैनिक बल बसीज का हवाला देते हुए कहा, “इसलिए मुझे सचमुच लगता है कि जिन लोगों के पास हथियार नहीं हैं, उनके लिए यह एक बड़ी बाधा है.” बसीज बल ने हाल के देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों को कुचलने में केंद्रीय भूमिका निभाई है। मरीन और युद्धपोत अमेरिकी सेना में शामिल होंगे अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट और एम्फीबियस असॉल्ट शिप USS त्रिपोली को मिडिल ईस्ट जाने का ऑर्डर दिया गया है. उन्होंने नाम न बताने की शर्त पर संवेदनशील सैन्य योजनाएं पर बात करने के लिए एसोसिएटेड प्रेस से बात की। मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट्स जल-थलीय लैंडिंग कर सकती हैं, लेकिन वे दूतावास की सुरक्षा बढ़ाने, आम लोगों को निकालने और आपदा राहत में भी विशेषज्ञता प्राप्त करती हैं. बड़ी सैन्य तैनाती का मतलब यह नहीं है कि कोई ग्राउंड ऑपरेशन जल्द ही होने वाला है या होगा. नए मरीन की तैनाती के बारे में सबसे पहले द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रिपोर्ट किया था। अमेरिकी सेना द्वारा जारी तस्वीर के मुताबिक, 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट, साथ ही यूएसएस त्रिपोली और मरीन को ले जाने वाले दूसरे एम्फीबियस असॉल्ट शिप जापान में हैं और कई दिनों से पैसिफिक ओशन में हैं. त्रिपोली को कमर्शियल सैटेलाइट ने ताइवान के पास अकेले चलते हुए देखा, इसे ईरान के जलक्षेत्र तक पहुंचने में एक हफ्ते से ज्यादा समय लग सकता है। इस हफ्ते की शुरुआत में, अमेरिकी नेवी के 12 जहाज थे, जिनमें एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन और आठ डिस्ट्रॉयर शामिल थे, जो अरब सागर में काम कर रहे थे. अगर त्रिपोली इस बेड़े में शामिल हो जाता है, तो यह इस इलाके में लिंकन के बाद दूसरा सबसे बड़ा जहाज होगा। हालांकि मिडिल ईस्ट में जमीन पर मौजूद यूएस सर्विस मेंबर्स की कुल संख्या साफ नहीं है, लेकिन कतर में स्थित अल-उदीद एयर बेस, जो इस इलाके के सबसे बड़े एयर बेस में से एक है, में आम तौर पर लगभग 8,000 अमेरिकी सैनिक रहते हैं।

Iran War: होर्मुज से पार पाने के लिए नौसेना से संवाद जरूरी, ईरान ने स्पष्ट किया रुख

नई दिल्‍ली होर्मुज स्‍ट्रेट से जहाज लेकर जाने के लिए भारत लगातार ईरान से बातचीत कर रहा है. इस बीच, ईरान के विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान सामने आया है, जिसका कहना है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने के लिए जहाज़ों को ईरान की नौसेना के साथ तालमेल बिठाना होगा। नौसेना के साथ बातचीत करने के बाद ही आप तेल-गैस जहाजों से लेकर जा सकते हैं. इस बयान से साफ है कि ईरान की नौसेना ‘होर्मुज स्‍ट्रेट’ पर नजर बनाए हुए है और उसका पूरा कंट्रोल है. रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने गुरुवार को मेहर समाचार एजेंसी द्वारा जारी एक बयान में कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने के लिए जहाज़ों को ईरान की नौसेना के साथ बातचीत करनी होगी। ऐसे में ईरान का यह संकेत साफ है कि वह इजरायल और अमेरिका सर्पोटिव जहाजों को छोड़कर बाकी देशों की जहाजों को ‘स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से गुजरने की अनुमति दे सकता है, लेकिन हमला करने वाले देशों को अनुमति नहीं देगा. यही बात ईरान के उप विदेश मंत्री ने भी स्‍पष्‍ट किया है। हमला करने वालों को अनुमति नहीं एएफपी के अनुसार, ईरान के उप विदेश मंत्री ने कहा कि कुछ देशों ने जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन के बारे में हमसे बातचीत की है और हमने उनके साथ सहयोग किया है. जहां तक ​​ईरान का सवाल है, हमारा मानना ​​है कि जिन देशों ने आक्रमण में साथ दिया, उन्हें होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन का लाभ नहीं मिलना चाहिए। होर्मुज स्‍ट्रेट को बंद रखेगा ईरान वहीं इस रिपोर्ट में आगे कहा गया कि नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने गुरुवार को अपने पिता की हत्या के बाद पहली बार बयान दिया और अपने एक चुनौती भरे बयान में कहा कि ईरान अपनी लड़ाई जारी रखेगा और अमेरिका-इज़राइल के खिलाफ एक दबाव के तौर पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद रखेगा। खामेनेई का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका बार-बार यह दावा कर रहा है कि ईरान के पास अब कुछ भी नहीं बचा है. ट्रंप का दावा है कि वह जब चाहें, तब युद्ध को समाप्‍त कर सकते हैं. वहीं अमेरिका अभी भी जहाजों को उस रास्‍ते से ले जाने को लेकर कतरा रहा है। 100 डॉलर के पार कच्‍चा तेल  मिडिल ईस्‍ट से तेल की सप्‍लाई बाधित होने के बाद कच्‍चे तेल की कीमतों में उछाल आया है. अभी ब्रेंट क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बना हुआ है. वहीं डब्‍ल्‍यूटीआई कच्‍चा तेल 95 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है. एलएनजी के दाम में भी तेजी देखी जा रही है. वहीं ईरान का कहना है कि कच्‍चे तेल की कीमतों को वह 200 डॉलर प्रति बैरल तक लेकर जाएगा और अभी युद्ध खत्‍म नहीं करेगा।

ईरान के सैन्य दबदबे के बीच इराक, सऊदी और बहरीन में हमलों की लहर, अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला

तेहरान   मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच तनाव और भी गहरा होता जा रहा है. खाड़ी देश के इलाके में ईरान भारी पड़ता दिख रहा है. अमेरिका और इजरायल पर काल बनकर टूट पड़ा है. गुरुवार को ईरान ने पर्शियन गल्फ में दो तेल टैंकरों पर सुसाइड अटैक किया, जिसमें एक अमेरिकी स्वामित्व वाली टैंकर थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने यूएई और कुवैत में तीन स्ट्रेटेजिक टारगेट पर हमला किया. सैटेलाइट इमेज में साफ दिख रहा है कि फुजैराह के तेल जोन, शारजाह के इंडस्ट्रियल एरिया और कुवैत के अल-सलेम बेस पर हमले हुए हैं. दुबई के क्रीक हार्बर जैसे रिहायशी इलाकों में ईरानी ड्रोन हमलों ने पेंटागन की नींद उड़ा दी है. इराक से लेकर सऊदी अरब तक फैले इस बारूदी खेल और तेल टैंकरों पर होते लगातार हमलों ने साबित कर दिया है कि ईरान अब आर-पार की जंग के मूड में है, जिससे पूरी दुनिया पर महायुद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट का खतरा मंडराने लगा है. ईरान ने गुरुवार को इराक के क्षेत्रीय जल क्षेत्र (Territorial Waters) में दो विदेशी तेल टैंकरों ड्रोन हमला किया. इस भीषण हमले में चालक दल के एक सदस्य की मौत हो गई है, जबकि इराकी अधिकारियों ने अब तक 38 लोगों को सुरक्षित बचा लिया है. ईरान ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया है कि उसके अंडरवॉटर ड्रोन ने टैंकरों को उड़ा दिया, जिसे इराक ने अपनी संप्रभुता का सीधा उल्लंघन करार दिया है. दुबई के इन इलाके पर हमला दुबई मीडिया ऑफिस ने बताया कि अधिकारियों ने कन्फर्म किया है कि आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है और बिल्डिंग में रहने वाले सभी लोग सुरक्षित हैं. दुबई क्रीक हार्बर के पास एक बिल्डिंग पर ड्रोन गिरने की घटना हुई थी. सिविल डिफेंस टीमों ने ड्रोन के बिल्डिंग से टकराने के बाद लगी छोटी सी आग पर तुरंत काबू पा लिया. अधिकारियों ने कन्फर्म किया कि किसी के घायल होने की खबर नहीं है. अमेरिका के तीन ठिकानों पर ईरान का हमला ईरान ने तेहरान के तेल ठिकानों पर हुए हालिया अमेरिका-इजरायल हमले का करारा जवाब देते हुए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत में तीन रणनीतिक ठिकानों पर भीषण हमला किया है. सैटेलाइट तस्वीरों ने पुष्टि की है कि यूएई के फुजैराह तेल क्षेत्र और शारजाह के औद्योगिक इलाके को निशाना बनाया गया है. इसके अलावा, कुवैत स्थित ‘अल-सालेम’ सैन्य अड्डे पर अमेरिकी लॉजिस्टिक्स सेंटर्स पर भी सीधे प्रहार हुए हैं. ईरान का यह प्रतिशोध न केवल खाड़ी देशों में युद्ध की आग भड़का रहा है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन गया है. तेल टैंकरों पर हमले के बाद इराक का बयान इराकी पोर्ट्स कंपनी के महानिदेशक फरहान अल-फर्तूसी ने बताया कि हमला उस समय हुआ जब माल्टीज़ ध्वज वाला जेफिरोस (Zefyros) और मार्शल द्वीप समूह के ध्वज वाला सेफसी विष्णु (Safesea Vishnu) इराक के खोर अल-जुबैर बंदरगाह के पास साइडलोडिंग क्षेत्र में लंगर डाले हुए थे. चश्मदीदों और सैटेलाइट फुटेज में दोनों टैंकरों को आग की लपटों में घिरा देखा गया. आग इतनी भीषण थी कि तेल रिसाव के कारण समुद्र की सतह पर भी लपटें फैल गईं, जिससे बड़े पर्यावरणीय संकट का खतरा पैदा हो गया है. इराक ने दी ईरान को चेतावनी ईरानी के सरकारी न्यूज एजेंसी ने बताया कि उनकी सेना ने अंडरवॉटर ड्रोन के जरिए इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है. दूसरी ओर, इराक के संयुक्त अभियान कमान के लेफ्टिनेंट जनरल साद मान ने इसे इराकी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है. सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि धमाके के लिए विस्फोटकों से लदी एक ईरानी नाव का भी इस्तेमाल किया गया होगा. हमले के तुरंत बाद, इराक ने एहतियात के तौर पर अपने तेल बंदरगाहों का संचालन रोक दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान आने की आशंका है. ऑयल टैंकर का अमेरिका-ग्रीक कनेक्शन ईरान के हमले का शिकार हुए जहाजों में से एक सेफसी विष्णु का मालिकाना हक अमेरिका की कंपनी सेफसी ट्रांसपोर्ट इंक के पास है. वहीं, दूसरी जहाज जेफिरोस ग्रीस की एक कंपनी का है. चूंकि एक जहाज अमेरिकी कंपनी का है, इसलिए इस घटना में वाशिंगटन के सीधे हस्तक्षेप की संभावना बढ़ गई है. इराक के तेल मंत्रालय ने इसे तनाव बढ़ाने वाला एक चिंताजनक संकेतक बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए वैश्विक समुदाय से संयम और सुरक्षा की अपील की है. खतरनाक जंग की आहट? इराकी मीडिया सेल ने इसे सोची-समझी तोड़फोड़ करार दिया है. वर्तमान में लापता चालक दल के सदस्यों की तलाश के लिए बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन जारी है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान और इराक के बीच यह समुद्री टकराव और बढ़ा, तो फारस की खाड़ी में वैश्विक व्यापार पूरी तरह ठप हो सकता है. इराक ने साफ कर दिया है कि वह इस हमले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखता है.  

युद्ध का 12वां दिन: 140 अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद ईरान ने हॉर्मुज की रणनीति मजबूत की

तेहरान ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध बुधवार को 12वें दिन में प्रवेश कर गया. रात भर पूरे पश्चिम एशिया में हवाई हमले के सायरन, मिसाइल लॉन्च और नए हमलों की खबरें सामने आईं. इजरायल और अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले जारी रखे, जबकि ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सहयोगी देशों को निशाना बनाया. हालांकि अब इन हमलों से ज्यादा बड़ा मुद्दा स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज बना हुआ है, जिसने बंद होने से पूरी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है।  ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कहा कि उसने अपने सैन्य अभियान की 35वीं लहर शुरू कर दी है. इसमें मध्य-पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायल के मध्य हिस्सों को निशाना बनाया गया. वहीं इजरायली सेना ने दावा किया कि उसने तेहरान में ईरानी सरकार से जुड़े कई ठिकानों पर एक और बड़ा हमला किया है. उधर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का ईरान के लोगों को सीधा संदेश यह आपके लिए जीवन में एक बार मिलने वाला ऐसा अवसर है जिससे आप अयातुल्लाहशासन को हटाकर अपनी स्वतंत्रता प्राप्त कर सकते हैं. अयातुल्ला अब इस दुनिया में नहीं हैं और मैं जानता हूं कि आप नहीं चाहते कि उनकी जगह कोई दूसरा तानाशाह आ जाए।  स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज पर बढ़ा तनाव, बड़ी मुसीबत अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के 16 नौसैनिक जहाजों को नष्ट कर दिया, जिनमें बारूदी सुरंग बिछाने वाले जहाज भी शामिल थे. हॉर्मुज दुनिया का सबसे अहम समुद्री मार्ग माना जाता है क्योंकि यहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई गुजरती है. रिपोर्टों के मुताबिक ईरान इस जलमार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहा था. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि उसके बलों ने इस अहम तेल मार्ग के पास इन जहाजों को निशाना बनाया।  1300 से ज्यादा की हो चुकी है मौत संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक अमेरिका और इजराइल के हमलों में 1300 से ज्यादा नागरिकों की मौत हो चुकी है. रिपोर्टों के अनुसार 28 फरवरी को दक्षिणी ईरान के एक प्राथमिक स्कूल पर हुए हमले में मिले मिसाइल के अवशेष अमेरिकी टॉमहॉक क्रूज मिसाइल के हो सकते हैं. वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने बताया कि ईरान के हमलों में लगभग 140 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें से 8 की हालत गंभीर बताई जा रही है।  बढ़ रहा है संघर्ष का दायरा     इस युद्ध का असर पूरे पश्चिम एशिया में दिखाई दे रहा है. लेबनान की राजधानी बेरूत के दहिया इलाके में इजरायल ने हवाई हमले किए, जो ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह का गढ़ माना जाता है. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार मंगलवार को हुए हमलों में कम से कम 95 लोगों की मौत हुई. वहीं हिज्बुल्लाह ने उसी दिन इजरायल पर 30 हमले करने का दावा किया।      खाड़ी देशों में भी हवाई सुरक्षा अलर्ट जारी किए गए. बहरीन ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से उसने 106 मिसाइल और 176 ड्रोन मार गिराए हैं. कतर ने सात मिसाइल हमलों की पुष्टि की जबकि कुवैत ने अपने हवाई क्षेत्र में पांच ड्रोन घुसने की जानकारी दी।      सऊदी अरब ने चार ड्रोन और 7 बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने का दावा किया. वहीं संयुक्त अरब अमीरात ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से उसके खिलाफ 1,475 ड्रोन और 260 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई हैं. इससे साफ है कि यह संघर्ष धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में लेता जा रहा है।  इजरायल ने रात में किया हमला, ईरान ने सुबह-सुबह दिया धुआंधार जवाब मध्य-पूर्व में जारी युद्ध के बीच इजरायल ने तेहरान में हमलों की दूसरी लहर शुरू की. इजरायली सेना ने बताया कि उसने लेबनान की राजधानी बेरूत में भी हवाई हमले किए. बुधवार सुबह ईरान की ओर से ने कहा कि तेहरान के एक रिहायशी इलाके को निशाना बनाया गया. वहीं लेबनान में इजरायली हमले के दौरान रेड क्रॉस की एक एम्बुलेंस पर हमला हुआ, जिसमें एक पैरामेडिक की मौत हो गई. दूसरी ओर ईरान की सेना ने दावा किया कि उसने युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक का सबसे तेज और भारी ऑपरेशन शुरू किया है. सरकारी मीडिया के अनुसार इस हमले में इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया. ईरान की 175 बच्चियों का हत्यारा कौन? ट्रंप की सेक्रेटरी ने क्या कहा व्हाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग के दौरान एक पत्रकार ने सवाल किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के एक स्कूल पर हमले के मामले में क्यों कहा कि ईरान के पास टॉमहॉक मिसाइल हो सकती है, जबकि ये मिसाइलें केवल अमेरिका और उसके तीन सहयोगी देशों के पास हैं. इस पर व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने जवाब दिया कि राष्ट्रपति को अमेरिकी जनता के सामने अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है और इस पर जांच चल रही है. ईरान ने दागीं सऊदी अरब पर बैलिस्टिक मिसाइलें, 7 को मार गिराया गया ईरान के साथ चल रहे युद्ध के 12वें दिन सऊदी अरब ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने देश की ओर दागी गई सात बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराया. सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक ये मिसाइलें देश के विभिन्न इलाकों की ओर बढ़ रही थीं, लेकिन उन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया गया. मंत्रालय ने बताया कि सऊदी सेना लगातार हाई अलर्ट पर है और किसी भी हमले से निपटने के लिए तैयार है. हाल के दिनों में ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते संघर्ष का असर खाड़ी देशों पर भी पड़ रहा है। कई देशों में मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आई हैं.  ईरान ने इजरायल में मचाई है भारी तबाही, दिखा नहीं रहे नेतन्याहू: अरागची ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर आरोप लगाया कि वे दुनिया से सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रहे हैं. अरागची ने दावा किया कि ईरान की शक्तिशाली सेना इजरायल के हमलों का मुंहतोड़ जवाब दे रही है, जिसे नेतन्याहू नहीं चाहते कि लोग देखें. उन्होंने दावा किया कि जमीन पर … Read more

ईरान से टकराव की भारी कीमत: 100 घंटे की लड़ाई में US ने फूंके 31,000 करोड़ रुपये

वाशिंगटन ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले का आज (शुक्रवार, 6 मार्च को) सातवां दिन है। शुक्रवार को अमेरिका ने स्टेल्थ बॉम्बर और एडवांस्ड वेपन सिस्टम से ईरान पर हमला बोला है। बदले में ईरान भी इजरायल पर और मिडिल-ईस्ट में अमेरिकी सैन्य अड्डों को लगातार निशाना बना रहा है। इस बीच, अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) ने युद्ध के लागत पर एक विश्लेषण में कहा है कि ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) के तहत पहले 100 घंटों में ही अमेरिका को लगभग 3.7 अरब डॉलर (करीब 31,000 करोड़ रुपये) का खर्च उठाना पड़ा है। यह आकलन वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक CSIS के विशेषज्ञों मार्क कैंसियन और क्रिस पार्क द्वारा किए गए विश्लेषण में सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार युद्ध के शुरुआती 100 घंटों में अमेरिका का औसत खर्च लगभग 891 मिलियन डॉलर प्रतिदिन यानी करीब 90 करोड़ डॉलर रोज रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती चरण में सबसे अधिक खर्च महंगे हथियारों, मिसाइलों और बमों के इस्तेमाल पर हुआ है, इसलिए शुरुआती दिनों में लागत सबसे ज्यादा है। हथियारों पर खर्च थिंक टैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि 1.7 अरब डॉलर पेट्रियट जैसे एयर डिफेंस इंटरसेप्टर सिस्टम पर खर्च किए गए हैं, जबकि 1.5 अरब डॉलर मिसाइलों और अन्य आक्रामक हथियारों पर किए गए हैं। इसके अलावा 125 मिलियन डॉलर लड़ाकू विमानों और हवाई अभियानों के परिचालन पर खर्च किए गए हैं। CSIS के मुताबिक कुल खर्च में से केवल लगभग 200 मिलियन डॉलर ही पहले से अमेरिकी रक्षा बजट में शामिल था, जबकि करीब 3.5 अरब डॉलर का खर्च अतिरिक्त है, जिसके लिए अलग से फंड की जरूरत पड़ सकती है। इसका मतलब है कि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी United States Department of Defense (पेंटागन) को जल्द ही युद्ध जारी रखने के लिए अतिरिक्त बजट की मांग करनी पड़ सकती है। 2000 से ज्यादा हथियारों का इस्तेमाल रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि युद्ध के पहले 100 घंटों में अमेरिका ने 2,000 से अधिक प्रकार के हथियार और मिसाइलें इस्तेमाल कीं हैं। इन हथियारों के स्टॉक को दोबारा भरने में ही लगभग 3.1 अरब डॉलर खर्च हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि युद्ध लंबा चला तो यह खर्च और तेजी से बढ़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार यदि युद्ध जारी रहता है तो अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की सरकार को कांग्रेस से अतिरिक्त बजट की मंजूरी लेनी पड़ सकती है लेकिन अमेरिका में महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत और युद्ध के कारण बढ़ती तेल कीमतों के चलते यह मुद्दा राजनीतिक विवाद का कारण भी बन सकता है। मानवीय नुकसान भी भारी थिंक टैंक ने अपने आकलन में कहा है कि युद्ध का मानवीय नुकसान भी तेजी से बढ़ रहा है। ईरान में अमेरिकी और इजरायली हमलों में अब तक 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कई बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। साथ ही क्षेत्र के अन्य देशों में भी हमलों और जवाबी कार्रवाई के कारण कई लोगों की जान गई है। खर्च के अलावा, कुवैत में ‘फ्रेंडली फायर’ की घटना में तीन F-15 लड़ाकू विमानों के नष्ट होने जैसी खबरें भी सामने आई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने संकेत दिया है कि यह सैन्य अभियान अभी कई हफ्तों तक जारी रह सकता है। ऐसे में इसका आर्थिक और राजनीतिक असर अमेरिका सहित पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।  

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