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गाजा पर इजरायल का कदम, ट्रंप की मीटिंग में पाकिस्तान समेत 8 मुस्लिम देश रहेंगे मौजूद

गाजा  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चौंकाने वाले फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने गाजा के मसले पर बोर्ड ऑफ पीस का गठन किया है और इसकी पहली मीटिंग 19 फरवरी को होने वाली है। अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि इस बैठक में चर्चा होगी कि कैसे गाजा में विकास के काम दोबारा शुरू किए जाएं और वहां जंग समाप्त हो। इस बोर्ड में इजरायल भी सदस्य है, लेकिन उसे ही इसमें झटका भी लगता दिख रहा है। मामला यह है कि वह पाकिस्तान को कभी भी तवज्जो नहीं देना चाहता, लेकिन इस बोर्ड में डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ भी शामिल होंगे। यही नहीं तुर्की भी इसमें शामिल रहेगा, जो फिलिस्तीन के मसले पर खुलकर इजरायल का विरोधी रहा है। ऐसी स्थिति में यदि गाजा के भविष्य को लेकर बन रहे किसी प्लान में यदि शहबाज शरीफ शामिल होंगे तो यह इजरायल के लिए चिंता की बात होगी। वह पहले भी कह चुका है कि हम पाकिस्तान को शामिल नहीं करना चाहते। फिर भी उसकी एंट्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए चिंता की बात है। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ 18 फरवरी को ही वॉशिंगटन पहुंच जाएंगे और 19 को होने वाले समिट में हिस्सा लेंगे। यह आयोजन यूएस इंस्टिट्यूट ऑफ पीस में होना है। इस बैठक में चर्चा होगी कि कैसे गाजा में जंग के बाद पुनर्निर्माण शुरू किया जाए। इस बैठक में कई देशों के नेता और कुछ अंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट और हस्तियां भी इसमें रहेंगी। इस मीटिंग में पाकिस्तान और तुर्की समेत कुल 8 मुसलमान देश शामिल होंगे। इनमें सऊदी अरब, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, कतर और यूएई हैं। दरअसल इजरायल की चिंता यह है कि मीटिंग में शामिल सभी मुसलमान देश एकजुट होकर कोई स्टैंड ले सकते हैं। खासतौर पर सीजफायर के उल्लंघन को लेकर इजरायल पर कठिन शर्तें थोपे जाने का खतरा है। इसके अलावा कुछ गारंटी भी उससे ली जा सकती है। मुसलमान देशों का कहना है कि गाजा में पुनर्निर्माण और शांति तभी संभव है, जब इजरायल के ऐक्शन पर कुछ लगाम लग सके। 22 देशों को अमेरिका की ओर से मिला था न्योता अमेरिका की ओर से कुल 22 देशों को बोर्ड ऑफ पीस का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया गया है। इनमें से ज्यादातर ने सहमति जताई है, लेकिन फ्रांस जैसे उसके मित्र देश ही दूरी बना रहे हैं। इसके अलावा भारत ने भी फिलहाल देखो और इंतजार करो की नीति अपना ली है। अब तक भारत की ओर से इसमें हिस्सा लेने की पुष्टि नहीं की गई है। माना जा रहा है कि भारत नहीं चाहता कि वह ऐसे किसी प्रयास में आगे दिखे, जिसे भविष्य में संयुक्त राष्ट्र संघ के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।

गाजा में इजरायल का एयरस्ट्राइक, 3-मंजिला इमारत तबाह, खौफनाक तस्वीर हुई वायरल

गाजा सीजफायर लागू होने के बावजूद इजरायली सेना ने पूर्वी गाजा सिटी के जैतून इलाके में एक रिहायशी क्षेत्र को निशाना बनाते हुए एयरस्ट्राइक की. रिपोर्ट के मुताबिक हमला असकुला जंक्शन के पास स्थित तीन मंजिला इमारत पर किया गया. हमले के बाद इलाके में आग की लपटें और घना धुआं उठता देखा गया, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई. यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका प्रशासन ने जनवरी में घोषणा की थी कि युद्धविराम समझौते का दूसरा चरण शुरू हो चुका है. इस चरण में गाजा से इजरायली सेना की अतिरिक्त वापसी और पुनर्निर्माण कार्यों की शुरुआत शामिल है. संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि गाजा के पुनर्निर्माण पर करीब 70 अरब डॉलर का खर्च आ सकता है. अक्टूबर 2023 में शुरू हुई इजरायली सैन्य कार्रवाई एक साल से अधिक समय तक चली थी. इस अभियान में गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार करीब 72 हजार फिलिस्तीनी मारे गए और 1.71 लाख से अधिक घायल हुए. इसके अलावा गाजा के लगभग 90 प्रतिशत बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा या वह नष्ट हो गया.   युद्धविराम लागू होने के बाद भी हालात पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं. गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इस अवधि में इजरायली कार्रवाइयों में 574 लोगों की मौत हुई और 1,518 अन्य घायल हुए हैं. इन आंकड़ों के सामने आने के बाद समझौते के पालन और क्षेत्र में स्थिरता को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं.   फिलहाल क्षेत्र में तनाव बना हुआ है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर स्थिति पर टिकी है. आगे की घटनाओं और प्रतिक्रियाओं का इंतजार किया जा रहा है, जबकि युद्धविराम के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.

इजरायल का कड़ा जवाब: हमास और इस्लामिक जिहाद के टॉप कमांडर्स ढेर, गाजा में स्थिति गंभीर

गाजा   अक्टूबर 2025 में हुए सीजफायर (युद्धविराम) के बाद इजरायल ने अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है. इजरायली सेना (IDF) ने दावा किया है कि उन्होंने बुधवार को एक बड़े ऑपरेशन में ‘फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद’ (PIJ) के टॉप कमांडर अली राजियाना को मार गिराया है. इजरायल के मुताबिक, यह सीजफायर के बाद की सबसे बड़ी कामयाबी है. कौन था अली राजियाना?   द यरूशलेम पोस्ट के अनुसार, इजरायली सेना और उनकी खुफिया एजेंसी ‘शिन बेट’ के मुताबिक, अली राजियाना ‘नार्दर्न गाजा ब्रिगेड’ का चीफ था. वह न सिर्फ इस्लामिक जिहाद की मिलिट्री काउंसिल का हिस्सा था, बल्कि हमास के साथ मिलकर इजरायली सैनिकों पर हमलों की प्लानिंग भी करता था. सेना ने बताया कि युद्ध के दौरान बंधकों को कैद में रखने में भी इसकी बड़ी भूमिका थी और सीजफायर के बाद यह अपनी ब्रिगेड को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहा था. नोआ मार्सियानो के हत्यारे का भी अंत बुधवार को ही इजरायल ने एक और बड़ी जानकारी दी. उन्होंने मुहम्मद इसाम हसन अल-हबील को भी मार गिराया है. इजरायल का कहना है कि इसी शख्स ने इजरायली सैनिक नोआ मार्सियानो की हत्या की थी, जिसे 7 अक्टूबर 2023 को बंधक बनाया गया था. सेना का कहना है कि इससे नोआ के परिवार को इंसाफ मिला है. हमलों में 23 लोगों की जान गई एक तरफ इजरायल इसे आतंकियों के खिलाफ एक्शन बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार इन हमलों में 23 फिलिस्तीनियों की मौत हो गई है. इनमें 7 बच्चे भी शामिल हैं. दक्षिण गाजा के खान यूनिस में एक मेडिकल वर्कर भी मारा गया, जो घायलों की मदद करने पहुंचा था. वहीं उत्तरी गाजा में एक 5 महीने के बच्चे की मौत की खबर भी सामने आई है. क्या सीजफायर का उल्लंघन हो रहा है? इजरायल का कहना है कि उन्होंने ये हमले इसलिए किए क्योंकि चरमपंथियों ने इजरायली सैनिकों पर गोलीबारी की थी, जिसमें एक सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गया था. इसे सीजफायर का उल्लंघन बताते हुए इजरायल ने जवाबी कार्रवाई की. दूसरी ओर, हमास ने कहा कि इजरायल की ये हरकतें शांति की कोशिशों को खत्म कर रही हैं. हमास ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इजरायल पर दबाव बनाने की मांग की है. राफा बॉर्डर को लेकर सस्पेंस सीजफायर समझौते के तहत गाजा और मिस्र के बीच ‘राफा बॉर्डर’ को खोला गया था ताकि बीमार मरीजों को इलाज के लिए बाहर भेजा जा सके. हालांकि, इजरायल ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए मरीजों के जाने पर अस्थायी रोक लगा दी थी. मिस्र के सूत्रों का कहना है कि अब मामला सुलझ गया है और काम फिर से शुरू हो गया है. अब तक का नुकसान  सीजफायर के बाद: इजरायली हमलों में अब तक लगभग 560 लोगों की मौत हुई है (गाजा अधिकारियों के अनुसार), जबकि 4 इजरायली सैनिक मारे गए हैं. युद्ध की शुरुआत से: अक्टूबर 2023 से अब तक 71,000 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं. इजरायल में नुकसान: 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले में करीब 1,200 इजरायली मारे गए थे. जनवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर के दूसरे फेज का एलान किया था, जिसमें गाजा के पुनर्निर्माण पर बात होनी थी. लेकिन इजरायली सेना की वापसी और हमास के हथियारों को छोड़ने जैसे बड़े मुद्दों पर अब भी पेंच फंसा हुआ है.

लेबनान में इजरायल ने हिज्बुल्लाह के ‘मास्टरमाइंड इंजीनियर’ अली दाऊद अमिच को किया ढेर

तेल अवीव इजरायली सेना (IDF) ने दावा किया है कि उसने रविवार, 1 फरवरी को हिज्बुल्लाह के आतंकवादी अली दाऊद अमिच पर हमला कर उसे मार गिराया है। इजरायल के लिए अली दाऊद अमिच को रास्ते से हटाना एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। बताया गया है कि दाऊद हिज्बुल्लाह के इंजीनियरिंग विभाग में एक शाखा के प्रमुख के तौर पर काम कर रहा था। इजरायली सेना के मुताबिक, यह आतंकी दक्षिणी लेबनान के अल-द्विर क्षेत्र में हिज्बुल्लाह के लिए सैन्य बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने की कोशिश कर रहा था और इजरायली बलों के खिलाफ आतंकी साजिशों को बढ़ावा दे रहा था। सोशल मीडिया पर IDF का बयान इजरायली सुरक्षा बलों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा, “एलिमिनेट कर दिया गया: अली दाऊद अमिच, जो हिज्बुल्लाह के इंजीनियरिंग विभाग में ब्रांच हेड के रूप में काम करता था। अली दक्षिणी लेबनान के अल-द्विर इलाके में हिज्बुल्लाह के आतंकी बुनियादी ढांचे को फिर से स्थापित करने और IDF सैनिकों के खिलाफ आतंकी हमलों को आगे बढ़ाने के प्रयासों में शामिल था। यह इजरायल और लेबनान के बीच हुई अंडरस्टैंडिंग का उल्लंघन है।” सीजफायर समझौते का जिक्र गौरतलब है कि पिछले साल 2025 में अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर समझौता हुआ था। इसके बाद से इजरायल को उम्मीद है कि लेबनानी सेना हिज्बुल्लाह को निरस्त्र करेगी। दरअसल, दोनों देशों के बीच हुए सीजफायर समझौते में यह शर्त शामिल थी कि हिज्बुल्लाह को निरस्त्र किया जाएगा। लेबनानी सेना ने सभी नॉन-स्टेट समूहों को हथियारों से मुक्त करने के अपने कई चरणों वाले प्लान के पहले हिस्से को पूरा करने के लिए 2025 के अंत तक की डेडलाइन खुद तय की थी। संघर्ष विराम के बावजूद जारी हमले 27 नवंबर 2024 को संघर्ष विराम लागू होने के बावजूद, इजरायली सेना हिज्बुल्लाह से खतरे का हवाला देते हुए लेबनान में हमले जारी रखे हुए है। इसके साथ ही इजरायल ने लेबनान सीमा पर पांच प्रमुख स्थानों पर अपनी स्थिति भी बनाए रखी है।

इजरायल का करारा पलटवार, ईरान पर कर दिया बड़ा हमला, 400 से अधिक मरे

तेहरान  ईरान और इजराइल के बीच चौथे दिन भी लड़ाई जारी है। इजराइल ने रविवार रात ईरान के विदेश मंत्रालय पर हमला किया। इसमें 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इससे एक दिन पहले इजराइली सेना ने ईरानी रक्षा मंत्रालय पर भी हमला किया था। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इजराइली हमलों में अब तक 224 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 1,277 से ज्यादा घायल हुए हैं। वहीं, अमेरिका में स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स ग्रुप ने ईरान में 406 लोगों के मारे जाने का दावा किया है। ईरान ने भी इजराइल पर पलटवार किया है। ईरान ने सोमवार सुबह सेंट्रल इजराइल में 4 बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। इसमें 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 67 घायल हुए। अब तक इजराइल में ईरानी हमलों में 20 लोग मारे गए हैं, जबकि 450 से ज्यादा घायल हुए हैं। ईरान पर इजरायली हमले के 72 घंटे हो चुके हैं. इस हमले में अब 406 ईरानियों की मौत हो चुकी है, जबकि 654 लोग घायल हैं. वहीं ईरानी हमले में अबतक 16 इजरायलियों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोग घायल हैं. पिछले 72 घंटों में इजरायल ने ईरान के हर मुमकिन इंफ्रास्ट्रक्चर और टारगेट पर हमला किया है. हालांकि तेहरान का कहना है कि इजरायली हमले में अबतक 224 मौतें हुई हैं. इनमें ज्यादातार नागरिक हैं. इजरायल ने दावा किया है कि पिछले 24 घंटे में उसने अपने देश से तेहरान के बीच ‘एयर कॉरिडोर’ बना लिया है. यानी कि इजरायली दावे के मुताबिक अब इजरायल की वायु सेना अपने देश से तेहरान तक बिना बाधा के उड़ान भर सकती है और हमले कर सकती है. इस बीच इजरायल ने ईरान पर सबसे ज्यादा दूरी से हमला किया है. इजरायल की वायु सेना ने पूर्वी ईरान के मशहद हवाई अड्डे पर एक ईरानी ईंधन भरने वाले विमान पर हमला किया, जो इजराइल से लगभग 2,300 किलोमीटर दूर है. हमले के बाद ये विमान आग की लपटों में आ गया और तबाह हो गया. यह ऑपरेशन राइजिंग लॉयन की शुरुआत के बाद से किया गया सबसे लंबी दूरी का हमला है. इजरायल सैनिक अड्डों को निशाना बनाने के बाद अब मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहा है. इजरायल ने तेहरान में मौजूद जमीन से हवा में मार करने वाले मिसाइल लॉन्चर को ही उड़ा दिया है. IDF  ने इस हमले का वीडियो जारी किया है.  आइए बताते हैं कि इजरायल ने पिछले 72 घंटों में ईरान के किन-किन ठिकानों को निशाना बनाया है.  परमाणु ठिकाने: जंग की शुरुआत के साथ ही इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर हमला किया था. इजरायली हमले का पहला टारगेट थे नंताज परमाणु साइट. इजरायल का दावा है कि उसके हमले में नंताज में यूरेनियम संवर्धन की मशीनरी को भारी नुकसान पहुंचा है. इजरायल ने इस्फहान और फोर्डो में भी परमाणु साइट पर हमला किया है. यहां पर हुए नुकसान की जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है. हालांकि  सैन्य ठिकाने: इजरायल ने न्यूक्लियर साइट के अलावा ईरान के मिलिट्री साइट पर भी हमला किया है और इसे जबर्दस्त नुकसान पहुंचाया है. तेहरान और अन्य शहरों में सैन्य ठिकानों पर हमले हुए हैं. जिसमें मिसाइल उत्पादन सुविधाएं शामिल हैं. दक्षिणी ईरान में एक रिफाइनरी में भारी विस्फोट हुआ है. तबरेज और करमानशाह में दो मिसाइल बेस पूरी तरह तबाह हो गए हैं.  इजरायली हमले में राजधानी तेहरान में भारी नुकसान की खबर है. कई रिहायशी इलाकों और सरकारी इमारतों को भारी नुकसान हुआ है. मेहराबाद एयरपोर्ट प्रभावित हुआ है.  ईरान ने तेहरान एयरपोर्ट को बंद कर दिया है.  13-15 जून 2025 को इजरायली हमलों में ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और परमाणु वैज्ञानिकों की मौत की पुष्टि अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों ने की है.  टॉप मिलिट्री लीडरशिप साफ इनमें आर्मी चीफ मेजर जनरल मोहम्मद बघेरी, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर-इन-चीफ मेजर जनरल हुसैन सलामी, IRGC के खातम-अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर्स के प्रमुख मेजर जनरल गुलाम अली रशीद, IRGC की एयरोस्पेस फोर्स के कमांडर जनरल अमीर अली हाजीज़ादेह, ईरानी सशस्त्र बलों के डिप्टी इंटेलिजेंस चीफ जनरल गुलामरेज़ा मेहराबी, ईरानी सशस्त्र बलों के डिप्टी कमांडर ऑफ ऑपरेशंस जनरल मेहदी रब्बानी मारे गए हैं.  वहीं प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में पुष्टि की है कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के खुफिया प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद काज़मी और उनके डिप्टी जनरल हसन मोहाकिक तेहरान पर इजरायली हवाई हमले में मारे गए हैं. इसके अलावा सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली शमखानी भी मारे गए हैं. इजरायली हमले में ईरान का टॉप मिलिट्री लीडरशिप खत्म हो गया है. न्यूक्लियर साइंटिस्ट का एक जेनेरेशन ही खत्म इसके अलावा इजरायल ने ईरान के कई परमाणु वैज्ञानिकों को भी मार डाला है. इनमें भौतिक विज्ञानी मोहम्मद मेहदी तेहरांची, ईरान की परमाणु ऊर्जा संगठन के पूर्व प्रमुख फेरेयदौन अब्बासी-दवानी,  शाहिद बेहेश्ती विश्वविद्यालय में परमाणु इंजीनियरिंग के प्रमुख अब्दुलहामिद मिनोचेहर, शाहिद बेहेश्ती विश्वविद्यालय में परमाणु इंजीनियरिंग के प्रोफेसर अहमदरेज़ा जोलफगारी, अमीरहोसैन फकी, परमाणु वैज्ञानिक अली बकाई करीमी, परमाणु वैज्ञानिक मंसूर असगरी, परमाणु वैज्ञानिक सईद बोरजी शामिल है.  इतने बड़े पैमाने पर परमाणु वैज्ञानिकों को मारकर इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को भारी नुकसान पहुंचाया है.  इजरायल को नुकसान इजरायली हमले के जवाब में ईरान ने  100-200 बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे. जिनमें से कुछ ने आयरन डोम रक्षा प्रणाली को भेद दिया. इससे तेल अवीव में कई इमारतें और वाहन नष्ट हो गए. ईरानी हमले में तेल अवीव में तबाही की भयानक तस्वीरें सामने आई है. ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों में अबतक इजरायल में 16 लोगों की मौत हुई है. ईरान ने मुख्य रूप से तेल अवीव, रमात गान, बैट यम और रेहोवोट में हमला किया है.  तेहरान टाइम्स के अनुसार सोमवार की सुबह-सुबह ईरान ने इजरायल के कब्जे वाले इलाकों को निशाना बनाकर मिसाइलों की दूसरी खेप दागी, जो संघर्ष की शुरुआत के बाद से दसवीं बमबारी थी.  तेहरान टाइम्स का दावा है इससे पहले आधी रात को ईरान ने नेगेव रेगिस्तान और किरयात गत के साथ-साथ हाइफ़ा के अन्य क्षेत्रों में रणनीतिक स्थलों को निशाना बनाया, जिससे सैन्य और आर्थिक बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा.  हाइफा में ईरानी मिसाइल गिरने … Read more

अमेरिका और इजरायल के दृष्टिकोण में अब दरार, क्षेत्रीय संतुलन खतरे में

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में वैश्विक मंच पर ‘शांति पुरुष’ बनने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा था। लेकिन उनके इस मिशन को उनके करीबी सहयोगी इजरायल और उससे पहले रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने तगड़ा झटका दिया है। इजरायल ने ट्रंप की सलाह को नजरअंदाज कर ईरान पर सैन्य हमला किया, जबकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्धविराम प्रस्ताव को ठुकराकर ट्रंप की कूटनीतिक कोशिशों को चुनौती दी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से इजरायल से ईरान पर हमला न करने की अपील की थी। ट्रंप ने कहा था कि उनका लक्ष्य “शांति स्थापित करना” है। लेकिन इसी अपील के कुछ घंटों बाद, ट्रंप के करीबी दोस्त इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भीषण हमले की घोषणा कर दी। यह हमला ट्रंप के उस उद्देश्य को एक और झटका है, जिसमें वह खुद को “शांति पुरुष” बता रहे थे। इससे पहले, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी ट्रंप की यूक्रेन में युद्धविराम की अपील को खारिज कर दिया था। इसके साथ ही, इजरायल ने गाजा पट्टी में भी एक और बड़ा सैन्य अभियान जारी रखा है। यहां भी ट्रंप प्रशासन की देखरेख में हुआ संघर्षविराम अब टूट चुका है। ओमान में बातचीत से पहले हमला ट्रंप के मित्र और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ यूक्रेन-रूस, इजरायल-गाजा और इजरायल-ईरान इन तीनों संकटों में मध्यस्थता कर रहे हैं। वह रविवार को ओमान में ईरानी अधिकारियों से मुलाकात करने वाले थे। ऐसे में इजरायल का हमला न केवल चौंकाने वाला प्रतीत हो रहा है, बल्कि अमेरिकी कूटनीति को भी कमजोर करता है। हालांकि ट्रंप ने बाद में खुद को इजरायल से पूरी तरह अलग नहीं किया। कुछ सूत्रों ने कहा कि अमेरिका के सार्वजनिक बयानों का उद्देश्य ईरान को चौंकाना था। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान ने उनकी शर्तें मानने से इनकार कर दिया और हमला 60-दिवसीय अल्टीमेटम के एक दिन बाद हुआ, हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इसके बावजूद विटकॉफ की बातचीत क्यों तय थी। ट्रंप बोले: “मैं नहीं चाहता कि वो हमला करें” इजरायली हमले से पहले ट्रंप ने कहा था, “मैं नहीं चाहता कि वो अंदर जाएं, क्योंकि इससे सब कुछ बिगड़ जाएगा।” लेकिन नेतन्याहू ईरान की सरकार को इजरायल के लिए अस्तित्वगत खतरा बताते हैं और पहले भी ईरान के हवाई रक्षा तंत्र पर हमले कर चुके हैं। अमेरिका-इजरायल के रुख में दरार पूर्व पेंटागन अधिकारी और वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट की वरिष्ठ फेलो डैना स्ट्रौल ने कहा, “हम स्पष्ट रूप से देख रहे हैं कि अमेरिका और इजरायल के दृष्टिकोण में अब एक मोड़ आ गया है।” उन्होंने कहा कि ये हमले ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कुछ समय के लिए बाधित करेंगे, लेकिन सवाल यह है कि अमेरिका और इजरायल अब एक साथ मिलकर आगे क्या करेंगे। स्ट्रौल ने यह भी कहा कि ट्रंप और इजरायल के बीच पहले से ही मतभेद उभर रहे थे, खासकर जब ट्रंप ने सीरिया पर लगे प्रतिबंध हटा दिए थे और पूर्व इस्लामी लड़ाका अहमद अल-शराआ को सत्ता में आने के बाद स्वीकार कर लिया। क्षेत्रीय संतुलन खतरे में पिछले महीने कतर में ट्रंप ने कहा था कि उन्हें लगता है कि ईरान के साथ समझौता जल्द होगा और “परमाणु धूल” का खतरा नहीं रहेगा। लेकिन अब इजरायल की सैन्य कार्रवाई ने हालात पलट दिए हैं। सीटो संस्थान के रक्षा नीति निदेशक जस्टिन लोगन ने कहा कि इजरायली हमला अमेरिका की कूटनीतिक कोशिशों को “नष्ट कर देगा” और ट्रंप को अमेरिका की सैन्य भागीदारी से अलग रहना चाहिए। उन्होंने कहा, “इजरायल को अपनी विदेश नीति चुनने का अधिकार है, लेकिन उसे उसकी कीमत भी खुद चुकानी चाहिए।” पुतिन का यूक्रेन युद्धविराम पर इनकार दूसरी ओर, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी ट्रंप की शांति पहल को करारा जवाब दिया था। ट्रंप ने यूक्रेन-रूस युद्ध को खत्म करने के लिए 30 दिन के युद्धविराम का प्रस्ताव रखा था। इसके लिए उन्होंने पुतिन के साथ कई दौर की बातचीत की, जिसमें घिरे हुए यूक्रेनी सैनिकों की सुरक्षा का मुद्दा भी शामिल था। हालांकि, पुतिन ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। रूसी सरकारी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, पुतिन ने कहा कि वह यूक्रेन के साथ सीधी बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन उनकी शर्तें वही रहेंगी, जिनमें यूक्रेन को रूस के कब्जे वाले क्षेत्रों को छोड़ना होगा। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने साफ कहा कि रूस किसी दबाव में नहीं आएगा। भारत ने भी किया था खारिज डोनाल्ड ट्रंप की ‘शांति पुरुष’ बनने की कोशिशों को भारत-पाकिस्तान तनाव को लेकर उनके हालिया विवादित दावों ने भी झटका दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की पेशकश की थी और दोनों देशों ने इसे स्वीकार किया था। हालांकि, भारत ने तुरंत इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि कश्मीर एक द्विपक्षीय मुद्दा है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की कोई गुंजाइश नहीं है। ट्रंप ने यहां तक दावा किया कि उन्होंने व्यापार का हवाला देकर भारत-पाकिस्तान की लड़ाई रुकवा दी। भारत ने इस दावे को भी खारिज किया है। ट्रंप की कूटनीति पर सवाल ट्रंप ने अपने चुनावी अभियान में बार-बार दावा किया था कि वह वैश्विक युद्धों को खत्म कर शांति स्थापित करेंगे। लेकिन इजरायल और रूस के ताजा कदमों ने उनकी इस छवि को धक्का पहुंचाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की ‘शांति पुरुष’ की छवि तब तक अधूरी रहेगी, जब तक उनके सहयोगी उनकी सलाह को गंभीरता से नहीं लेंगे। ट्रंप और पुतिन की शख्सियत में समानता है, लेकिन पुतिन अपनी रणनीति पर अडिग हैं। इजरायल भी अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है, जिससे ट्रंप की कूटनीति कमजोर पड़ रही है। अमेरिकी राजनीति में विभाजन ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसद इजरायल के साथ खुलकर खड़े हैं। सीनेटर टॉम कॉटन ने कहा, “अमेरिका को इजरायल का पूरा समर्थन करना चाहिए और अगर ईरान अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाता है तो उसकी सरकार को गिरा देना चाहिए।” वहीं ट्रंप के डेमोक्रेट प्रतिद्वंद्वियों ने इजरायली हमले की आलोचना की है। सीनेट सशस्त्र बल समिति के शीर्ष डेमोक्रेट जैक रीड ने कहा, “ईरान पर इजरायल का … Read more

ईरान के इस्फहान परमाणु ठिकाने पर इजरायली हमलों का कोई असर नहीं: IAEA

तेल अवीव इजरायल ने शुक्रवार की सुबह ईरान पर एक साथ कई हवाई हमले किए. दोनों देशों के बीच काफी समय से तनातनी चल रही है. इजरायल को ऐसी खुफिया जानकारी मिली थी, जिसमें  ईरान में परमाणु बम बनाने के संकेत मिले थे.  कई चेतावनियों के बाद आज तड़के इजरायल ने ईरान के परमाणु साइट पर हमला बोल दिया. ये हमले इतने सटीक थे कि सिर्फ ईरान स्थित परमाणु प्लांट, वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और परमाणु वैज्ञानिकों के ठिकाने ही तबाह हुए.  इजरायल के आईडीएफ ने ये स्पष्ट कर दिया है कि उनकी खुफिया एजेंसी (मोसाद) से मिली सटीक जानकारी के बाद ही ये हमला हुआ है और सिर्फ उन जगहों पर ही प्रहार किया गया, जहां उनका परमाणु कार्यक्रमऔर इजरायल विरोधी सैन्य गतिविधियां चल रही थी. जब बात इजरायल की खुफिया एजेंसी की आती है तो हर किसी के जेहन में मोसाद का नाम कौंध जाता है.  अपने कारनामों के लिए जाना जाता है मोसाद मोसाद इजरायल की खुफिया एजेंसी है और ये दुनिया की सबसे खतरनाक और तेज-तर्रार एजेंसी मानी जाती है. इसके काम करने का तरीका इतना सटीक होता है कि दुश्मन इसके नाम से ही खौफ खाते हैं. चाहे वो हमास के छुपे हुए शीर्ष कमांडर को खोजकर मौत के घाट उतारना हो, या फिर ईरान के अतिसुरक्षित परमाणु कार्यक्रम की डिटेल उड़ानी हो. हर काम में मोसाद के तेज-तर्रार एजेंट सफाई से अंजाम देते हैं.  अब आईडीएफ ने ऑपरेशन राइजिंग लॉयन के तहत जब ईरान के नतांज परमाणु स्थल पर हमला किया, इसके पहले सारा होमवर्क मोसाद का था. क्योंकि ईरान पर हमले के बाद आईडीएफ ने इसकी पुष्टि भी की. यरुशल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल सैन्य अधिकारियों ने बताया कि खुफिया एजेंसियों से जानकारी मिली थी कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम में काफी तेजी आई है. पता चला है कि ईरानी शासन परमाणु हथियार बनाने का प्रयास कर रही है.  इजरायल ने आपातकाल घोषित कर दिया एक रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल के 200 से अधिक लड़ाकू विमानों ने पहले ही ईरान के कुछ ठिकानों को तबाह कर दिया है. बदले में अगर कुछ ड्रोन या मिसाइलें इजरायल के हवाई रक्षा तंत्र को भेदने में कामयाब होती हैं तो तेल अवीव और यरुशलम जैसे शहरों में सीमित नुकसान होगा. इजरायल ने आपातकाल घोषित कर दिया है और नागरिकों को बम शेल्टरों में भेजा गया है. असली युद्ध का खतरा अब बढ़ गया लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि असली युद्ध का खतरा अब बढ़ गया है क्योंकि दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है. ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने कहा है कि इजरायल को इस हमले की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. यह संघर्ष अब पूरे मिडिल ईस्ट में फैल सकता है जिसमें ईरान समर्थित समूह हिजबुल्लाह, हमास और हूती विद्रोही शामिल हो सकते हैं. कमजोर होने के बाद भी हिजबुल्लाह लेबनान से और हूती यमन से इजरायल पर हमले तेज कर सकते हैं. इजरायल इसके लिए पूरी तरह से तैयार बैठा अगर ईरान अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करता है तो इजरायल इसके लिए पूरी तरह से तैयार बैठा. इस युद्ध में वैश्विक शक्तियों के शामिल होने की भी आशंका है जो इस युद्ध को और भी खतरनाक बना सकता है. अमेरिका पहले से ही क्लियर है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना सकता है. वह इस बात को लेकर भी क्लियर है कि वह इजरायल की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और उसकी सेना क्षेत्र में तैनात है.  अमेरिका यही चाहता है? दूसरी तरफ रूस और चीन जैसे देश ईरान के साथ अपने रणनीतिक संबंधों के कारण उसका समर्थन कर सकते हैं. अगर ये देश प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से युद्ध में शामिल होते हैं तो यह एक बड़े युद्ध की आहट बन सकता है. तेल की आपूर्ति पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा. एक्सपर्ट्स का एक पॉइंट यह भी है कि ईरान का अगर किसी ने खुलकर साथ नहीं दिया तो वह कमजोर होगा. अमेरिका यही चाहता है. इसके बाद ईरान की स्थिति भी मिडिल ईस्ट के बाकी मुस्लिम देशों की तरह हो जाएगी. अब देखना होगा कि दोनों में से क्या स्थिति बनेगी.  ईरान के सारे परमाणु ठिकाने की दी सूचना  आईडीएफ के अनुसार मोसाद ने ही वो खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई थी, जिसमें  हजारों किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम के उत्पादन के प्रयास के साथ-साथ अंडरग्राउंड फैसिलिटी में  एटॉमिक फिजन की कोशिश करने के ठोस सबूत थे. यही वजह है कि आईडीएफ ने कहा कि ईरान के पास इतना यूरेनियम है कि वह कुछ ही दिनों में 15 परमाणु हथियार बना सकता है. मोसाद ने किया सफाई से काम  मोसाद ने अपना काम इतनी सफाई से किया और ईरान के गुप्त परमाणु और सैन्य ठिकाने की समय रहते जानकारी अपनी सेना तक पहुंचाई. यरुशलम टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आईडीएफ ने भी कहा कि इजरायल के पास ऑपरेशन “राइजिंग लायन” के तहत हवाई हमले करने के अलावा “कोई विकल्प नहीं बचा है. क्योंकि हमें खुफिया एजेंसी से जो जानकारी मिली है, उससे ये संकेत मिलता है कि ईरानी शासन उस बिंदु पर पहुंच रहा है जहां से वापसी संभव नहीं है.   राइजिंग लॉयन के पीछे मोसाद का होमवर्क मोसाद ने ही इजरायली सेना को ईरान के परमाणु साइट और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के अड्डे की जानकारी दी थी. इसके बाद ही राइजिंग लॉयन ऑपरेशन के तहत आईडीएफ ने ऐसा सटीक हमला किया कि सिर्फ टारगेट को ही नुकसान पहुंचा है. मोसाद से मिली जानकारी के बाद ही आईडीएफ ने अपने लक्ष्य निर्धारित किए थे. इस बारे में इजरायल की सेना ने भी बताया कि उन्होंने सिर्फ ईरानी कमांडर, बेस और परमाणु स्थल को टारगेट बनाया था. हालांकि, मुख्य लक्ष्य परमाणु स्थल ही हैं. मोसाद की सूचना पर ही आईडीएफ ने किया सटीक हमला मोसाद की मदद से ही आईडीएफ ने ईरान पर हमले से उस पर साइबर अटैक किया और उनके एयर डिफेंस सिस्टम को जाम कर दिया. इसके बाद सुबह ऑपरेशन राइजिंग लायन के एक-एक कर इजरायल ने ईरान के परमाणु साइट और अलग-अलग जगहों पर सैन्य महत्व के बिल्डिंग्स को निशाना बनाया. इन हमलों में नतांज का परमाणु साइट तबाह हो गया. रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कमांडर हुसैन सलामी और आईआरजीसी के मेजर जनरल गुलाम … Read more

इधर जंग के बीच इजराइल ने कर ली बंपर कमाई, मुस्लिम देशों ने खूब दिए ऑर्डर, ये कैसा दोगलापन ?

तेल अवीव  इजरायल के सैन्य निर्यात ने नया रिकॉर्ड बनाया है। यह रिकॉर्ड तब बना है, जब इजरायल एक साथ कई मोर्चों पर युद्ध लड़ रहा है। नई रिपोर्ट के अनुसार, इजराइल ने 2024 में पहले से कहीं अधिक हथियार अन्य देशों को बेचे हैं। वर्तमान में इजरायल गाजा में युद्ध लड़ रहा है। वहीं, सीरिया, लेबनान, ईरान और यमन में हवाई हमले और स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन चला रहा है। इजरायल पर गाजा में युद्ध समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बढ़ रहा है। इसके बावजूद यह देश झुकने को तैयार नहीं है और दुश्मनों से जमकर लोहा ले रहा है। इजरायल का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर यूरेशियन टाइम्स ने बताया कि इजरायल के रक्षा मंत्रालय के नए आंकड़ों के अनुसार, 2024 में इजरायल का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 14.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। इसने 2023 में 13 बिलियन अमेरिकी डॉलर के पिछले उच्च स्तर को तोड़ दिया। इजरायल ने हथियारों की बिक्री में साल-दर-साल 13% की अच्छी वृद्धि दर्ज की, जिससे यह स्पष्ट रूप से स्थापित हुआ कि इसके रक्षा निर्यात, गाजा में चल रहे युद्ध और मानवाधिकारों के हनन और यहां तक कि नरसंहार के आरोपों के कारण वैश्विक स्तर पर इसकी बढ़ती आलोचना और अलगाव से अछूते हैं। लगातार चौथे साल बढ़ा इजरायल का निर्यात इजरायल के रक्षा मंत्रालय ने कहा, “यह अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा है और लगातार चौथा वर्ष है जब इजरायल के रक्षा निर्यात के लिए एक नया रिकॉर्ड बनाया गया है।” अपने सबसे लंबे युद्ध के दौरान इजरायल की बढ़ती हथियारों की बिक्री रूस के बिल्कुल विपरीत है, जहां यूक्रेन में युद्ध के दौरान रक्षा निर्यात बिखर गया है। डेटा से पता चलता है कि इजरायल ने कुछ पूर्व रूसी हथियार निर्यात बाजारों में विस्तार किया हो सकता है। रूस के बाजार को इजरायल ने कब्जाया स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने गणना की कि 2019 से 2023 की अवधि में रूसी हथियारों के निर्यात में पिछले पांच साल की अवधि की तुलना में आधे से भी कम कमी आई है। अन्य अनुमानों ने और भी भयावह तस्वीर पेश की है। जेम्सटाउन फाउंडेशन के अनुसार, यूक्रेन के लिए पुनर्निर्देशित संसाधनों, प्रतिबंधों, मुद्रास्फीति और वित्तपोषण संबंधी मुद्दों के कारण 2021 से 2024 तक रूस के हथियारों के निर्यात में 92 प्रतिशत की गिरावट आई है। चूंकि रूस भारत से लेकर अरब देशों तक एशिया में अपने विरासत रक्षा निर्यात बाजारों को खो रहा है, इसलिए इज़राइल ने इस कमी को पूरा करने के लिए कदम बढ़ाया है। इजरायली हथियारों के लिए बाजार आंकड़ों के अनुसार, यूरोप इजरायली हथियारों के निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है, जो इजरायल के रक्षा निर्यात का 54% हिस्सा है। 2023 में, यूरोप में इजरायली हथियारों के निर्यात 35% था। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 2024 में यूरोपीय देशों ने लगभग 8 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के इजरायली सैन्य उत्पाद खरीदे, जबकि 2023 में यह 4.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। इसका प्रमुख कारण रूस-यूक्रेन युद्ध है, क्योंकि यूरोप अपने रक्षा खर्च को बढ़ा रहा है और अपने घटते सैन्य भंडार को फिर से भरने की कोशिश कर रहा है। जर्मनी हुआ इजरायी हथियारों का दीवाना एरो 3 एयर डिफेंस सिस्टम के लिए जर्मनी के साथ इजरायल के ऐतिहासिक सौदे ने इन हथियारों की बिक्री में एक बड़ा हिस्सा दिया। इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने एरो 3 मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए जर्मनी के साथ 3.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर का समझौता किया, जो इजरायल के इतिहास में सबसे बड़ा रक्षा सौदा है। विशेष रूप से, यूरोप को इजरायली हथियारों की बिक्री में वृद्धि हुई है, इस तथ्य के बावजूद कि कई यूरोपीय देश गाजा में इजरायल के अभियान की खुलेआम आलोचना कर रहे हैं, जो अब अपने 20वें महीने में है। पिछले साल कई प्रमुख यूरोपीय रक्षा प्रदर्शनियों से इजरायली फर्मों को बाहर रखा गया था। इसके अलावा, कुछ देशों ने पहले से हस्ताक्षरित रक्षा अनुबंधों को भी रोक दिया है। 14.8 बिलियन डॉलर तक बेचे हथियार ‘यूरेशियन टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी नए आंकड़ों के अनुसार साल 2024 में इजरायल का रक्षा निर्यात 14.8 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था. इसने साल 2023 के 13 बिलियन यूएम डॉलर के रिकॉर्ड को तोड़ा है. बता दें कि इजरायल के हथियार बिक्री में साल दर साल 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. इजरायल के रक्षा मंत्रालय ने इसको लेकर कहा,’ यह अब तक का सबसे ज्यादा आंकड़ा है और लगातार चौथा साल है जब इजरायल के रक्षा निर्यात के लिए एक नया रिकॉर्ड बनाया गया है.’ रूस को पछाड़ा ‘स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट’ (SIPRI) के आंकड़ों के मुताबिक रूसी हथियारों के निर्यात में साल 2019-2023 के बीच पिछले 5 साल की अवधि के मुकाबले काफी कमी आई है. ‘जेम्सटाउन फाउंडेशन’ के मुताबिक साल 2021-2024 तक रूस के हथियारों के निर्यात में 92 प्रतिशत की कमी आई है. आंकड़ों के मुताबिक इजरायली हथियार के लिए यूरोप सबसे बड़ा मार्केट है. इसका मुख्य कारण रूस-यूक्रेन युद्ध है, जिसमें यूरोप रक्षा खर्च बढ़ाते हुए सैन्य भंडार को भर रहा है.   यहां इजरायली हथियारों की धूम बता दें कि जर्मनी, मिडिल ईस्ट और भारत इजरायली हथियारों का बड़ा मार्केट बन रहा है. इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने जर्मनी के साथ एरो 3 एयर डिफेंस सिस्टम के लिए 3.8 बिलियन डॉलर की डील की है. इजरायल की हिस्ट्री में यह सबसे बड़ा डिफेंस डील है. एशिया में इजरायली हथियारों के लिए भारत बड़ा मार्केट है. ‘SIPRI’के मुताबिक साल 2020-2024 में यूक्रेन के बाद भारत दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा हथियार खरीदता है. मिडिल ईस्ट में भी इजरायली हथियारों की धूम मची है. बहरीन, मोरक्को, UAE और सूडान को इजरायल ने 1.8 बिलियन डॉलर का हथियार बेचा है.  स्पेन ने इजरायल को दिया झटका इस सप्ताह की शुरुआत में, स्पेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने इजरायल की सरकारी स्वामित्व वाली राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम की एक सहायक कंपनी द्वारा निर्मित एंटी-टैंक मिसाइलों के लिए 325 मिलियन अमेरिकी डॉलर के सौदे को रद्द कर दिया है, जो “इजरायली तकनीक के क्रमिक वियोग” का हिस्सा है। इससे पहले, स्पेन ने एल्बिट सिस्टम के साथ 6.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर के गोला-बारूद सौदे को भी रद्द कर … Read more

फिलिस्तीन में अब तक इजरायल के हमलों से 50 हजार लोग मारे जा चुके, कई शीर्ष कमांडर भी शामिल

 गाजा इजरायल और हमास के बीच करीब 6 सप्ताह तक सीजफायर चला। इस दौरान इजरायल ने फिलिस्तीन के सैकड़ों कैदियों को रिहा किया तो करीब 150 बंधकों को हमास ने भी छोड़ा। इन लोगों को हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को किए भीषण हमले में अगवा कर लिया था। इसके बाद से ही वे बंधक थे। अब भी करीब 60 बंधकों के हमास के पास ही होने की खबरें हैं। लेकिन सीजफायर आगे बढ़ाने पर कोई बात नहीं बनी तो इजरायल ने फिर से हमले तेज कर दिए हैं। बीते 3 से 4 दिनों में ही इजरायल ने गाजा में ताबड़तोड़ हमले किए हैं, जिनमें 500 लोगों की मौत हुई है। इसके अलावा रविवार को ही उसने गाजा पर फिर से कई हवाई हमले किए, जिसमें 51 लोग मारे गए। इन हमलों में इजरायल का एक शीर्ष कमांडर भी मारा गया है। अब तक मिली जानकारी के अनुसार इजरायल के हमलों में रविवार को 51 लोग मरे, जिनमें से एक इजरायल के राजनीतिक विंग का सदस्य इस्माइल बरहूम भी शामिल है। वह खान यूनिस शहर के नासिर अस्पताल में इलाज करा रहा था। इसी दौरान इजरायल ने हमला किया, जिसमें वह मारा गया। इसके अलावा लेबनान में भी इजरायल ने हमले किए हैं, जिनमें 8 लोग मारे गए हैं। हालांकि लेबनान में सक्रिय उग्रवादी संगठन हिजबुल्लाह ने इजरायल के हमले की बात से इनकार किया है। दरअसल करीब डेढ़ साल तक अकेले हमास से लड़ने के बाद 4 महीनों से इजरायल ने हिजबुल्लाह को भी निशाने पर लेना शुरू किया है। फिलहाल इजरायल की ओर से गाजा में और सैनिक भेजने की तैयारी की जा रही है। बेंजामिन नेतन्याहू सरकार में इसे लेकर सहमति बन गई है और आने वाले कुछ दिनों इजरायली सैनिकों की बड़ी संख्या गाजा में डेरा डाल सकती है। सीजफायर के दौरान इजरायल ने अपने सैनिकों की संख्या को कम कर लिया था। गाजा की हेल्थ मिनिस्ट्री का कहना है कि फिलिस्तीन में अब तक इजरायल के हमलों से कुल 50 हजार लोग मारे जा चुके हैं। यही नहीं एक्सपर्ट्स का कहना है कि आंकड़ा इससे ज्यादा का ही है क्योंकि बहुत सारे शवों की तो गिनती तक नहीं हो सकी है। ईरान के तीन हथियार- हूती, हिजबुल्लाह और हमास वहीं मध्य पूर्व में अमेरिका की सक्रियता भी लगातार बढ़ी हुई है। उसने यमन में सक्रिय विद्रोही संगठन हूती पर फिर से हमले किए हैं। दरअसल हूती विद्रोही संगठन लगातार यमन की खाड़ी में जहाजों को टारगेट कर रहा था। ऐसा करने के पीछे उसकी कोशिश थी कि जंग रोकने के लिए इजरायल पर दबाव बनेगा। लेकिन अब अमेरिका ने ही मोर्चा संभाल लिया है। हूती, हिजबुल्लाह और हमास का ईरान समर्थित संगठन माना जाता है। ये तीनों ही इजरायल के कट्टर दुश्मन हैं और मध्य पूर्व में ईरान के एजेंडे को मजबूत करते हैं।

इजरायल ने गाजा पट्टी में एक बार फिर हवाई हमले शुरू कर दिए, अब आरपार की लड़ाई का ऐलान

तेल अवीव  इजरायल ने गाजा पट्टी में एक बार फिर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। इजरायली सेना ने मंगलवार को एक के बाद एक हमले किए। इससे गाजा में कम से कम 400 से ज्‍यादा लोगों की मौत हुई है। इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्‍याहू ने कहा कि हमास के खिलाफ हमले जारी रहेंगे। ये हमले तब हुए हैं, जब गाजा में जनवरी में शुरू हुए युद्धविराम का पहला फेज खत्म हो गया है। युद्धविराम पर दोनों पक्षों की सहमति ना बन पाने के बाद इजरायल गाजा में बम बरसा रहा है। हालांकि गाजा को नियंत्रित करने वाला फिलिस्तीनी गुट हमास ने इजरायल के हमले और बेंजामिन नेतन्‍याहू की धमकी के बावजूद अपना रुख नहीं बदला है। इजरायली वेबसाइट यरुशलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, हमास के अपने रुख में कोई नरमी नहीं है, वह बंधक और युद्धविराम समझौते के लिए अपनी शर्तों पर अड़ा है। एक अधिकारी ने द यरूशलम पोस्ट को बताया कि हमास फिलहाल अपना रुख बदलने के मूड में नहीं दिख रहा है। इससे इजरायल का रुख और सख्त हो सकता है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रक्षा मंत्री काट्ज और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों के साथ गाजा मुद्दे पर बुधवार को तीन घंटे तक मीटिंग की है। इस बैठक में हमास और गाजा पर हमले तेज करने का फैसला लिया गया है। ‘जमीनी बल भी गाजा में जाएंगे’ इजरायली अधिकारी ने कहा है कि उनके जमीनी बलों की नेटजारिम कॉरिडोर में एंट्री सिर्फ शुरुआत है। आने वाले समय में इजरायल का रिएक्शन और ज्यादा कड़ा हो सकता है। इजरायल ने गाजा में हमास के शासन को खत्म करने पर जोर दिया है। इजरायल के मिनिस्टर मिकी जोहर लिकुड ने कहा कि हमने हमास के प्रति अपना रवैया ज्यादा सख्त करने का फैसला किया है। जोहर ने कहा, ‘इजरायल चाहता है कि बंधकों की वापसी हो और हमास को निशस्त्र कर दिया जाए। मेरा मानना है कि गाजा पट्टी पर पूरी तरह इजरायल का नियंत्रण हो। अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कैबिनेट लड़ाई जारी रखने के पक्ष में हैं।’ मिनिस्टर ओरिट स्ट्रोक ने कहा कि इजरायल का अंतिम लक्ष्य हमास को खत्म करना है। ये युद्ध से ही होगा, इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं है। ओरिट स्ट्रोक ने आगे कहा कि इजरायली सेना ने हालिया हवाई हमलों में हमास के नागरिक नेतृत्व को भी निशाना बनाया है। यह बात 7 अक्टूबर, 2023 को ही तय हो गई थी लेकिन इसे पूरी तरह से लागू नहीं किया गया था।अब हम उस लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस पर हम पीछे नहीं हटेंगे।

इजरायल ने उत्तरी गाजा पट्टी खाली करने के आदेश दिया, हमास के ‘The End’ का प्लान!

 गाजा इजरायल की सेना ने सीजफायर को ठेंगा दिखाकर हमास पर आक्रामक रुख अख्तियार किया है. इजरायल के गाजा पर अब तक के भयावह हमले में 300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है. लेकिन इजरायल का गुस्सा शांत नहीं हो रहा. उसने हमास के खात्मे का प्लान बना लिया है. इजरायल ने उत्तरी गाजा पट्टी खाली करने के आदेश दे दिए हैं. इजरायल की मंशा हमास को जड़ से उखाड़ फेंकने की है. 19 जनवरी को इजराइल-हमास में शुरू हुए सीजफायर के बाद इजराइल का गाजा में यह सबसे बड़ा हमला है. इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने यह हमले इसलिए कराए क्योंकि सीजफायर पर हो रही बातचीत आगे नहीं बढ़ रही थी. वहीं, हमास ने इजरायल के इन हमलों को सीजफायर का उल्लंघन बताते हुए कहा कि इजरायल ने बिना किसी उकसावे के हमले किए हैं. इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने हमास पर दबाव बनाने के लिए गाजा से मिस्र जाने वाले राफा क्रॉसिंग को बंद रखने के निर्देश दिए हैं. इसका मकसद मरीजों तक इलाज की पहुंच रोकना है. इससे पहले इजराइल ने गाजा में राहत सामग्री, तेल और दूसरी चीजें लेकर जाने वाली गाड़ियों का रास्ता रोक दिया था. मालूम हो कि इजरायल और हमास युद्धविराम समझौते का पहला चरण एक मार्च को खत्म हो गया था. इसके बाद से इजरायल की ओर से गाजा पर हमले जारी है. इजरायली सेना आईडीएफ का कहना है कि यह हमला हमास के आतंकियों को निशाना बनाने के लिए किया गया था. सीजफायर का पहला चरण एक मार्च को खत्म हो गया है. पहले चरण में हमास ने 33 बंधक छोड़े हैं. वहीं इजराइल ने दो हजार से फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा किया है. इजराइल और हमास में बीच सीजफायर के दूसरे फेज पर अभी तक बातचीत शुरू नहीं हो पाई है. इस फेज में लगभग 60 बंधकों को रिहा किया जाना था.  

इजराइल के ताजा हवाई हमलों में कम से कम 200 लोगों की हुई मौत, फिलिस्तीनी अधिकारियों ने दी जानकारी

 गाजा जराइल ने मंगलवार सुबह गाजा पट्टी क्षेत्र में हमास के ठिकानों को निशाना बनाते हुए सिलसिलेवार हवाई हमले किए। फिलिस्तीनी अधिकारियों ने हमले में कम से कम 200 से अधिक लोगों की मौत की जानकारी दी है। कहा जा रहा है जनवरी में युद्धविराम के प्रभावी होने के बाद से यह गाजा में अब तक का सबसे भीषणतम हमला है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि युद्धविराम को बढ़ाने के लिए वार्ता में कोई खास प्रगति नहीं होने के कारण उन्होंने हमले का आदेश दिया। नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा, ‘‘इजराइल अब सैन्य ताकत बढ़ाकर हमास के खिलाफ कार्रवाई करेगा।’’ फिर से संघर्ष जारी होने की आशंका रातभर हुए हमलों ने शांति का दौर खत्म कर दिया है और 17 माह से जारी संघर्ष के फिर से शुरू होने की आशंका को बढ़ा दिया है जिसमें 48,000 से ज्यादा फलस्तीनी मारे गए थे और गाजा तबाह हो गया। हमास द्वारा बंधक बनाकर रखे गए लगभग 24 इजराइली नागरिकों के भविष्य के बारे में इजराइल के हमलों के कारण संशय की स्थिति पैदा हो गई है जिनके बारे में माना जाता है कि वे अब भी जीवित हैं। हमास ने एक बयान में इजराइल की ओर से किए गए हमलों की निंदा की और कहा कि इन हमलों ने बंधकों के भविष्य को खतरे में डाल दिया है। ‘बेगुनाह लोगों के खिलाफ…’ हमास के एक अधिकारी ताहिर नुनू ने इजरायली हमलों की आलोचना की है. उन्होंने कहा, “अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का मोरल टेस्ट हो रहा है, या तो वह कब्जे वाली सेना द्वारा किए गए अपराधों की वापसी की अनुमति दे या फिर गाजा में बेगुनाह लोगों के खिलाफ आक्रामकता और जंग को खथ्म करने की प्रतिबद्धता को लागू करे.” गाजा में तमाम जगहों पर विस्फोटों की आवाजें सुनी जा सकती थीं और मिडिल गाजा के अल-अक्सा हॉस्पिटल में एम्बुलेंस पहुंच रही थीं.” युद्ध विराम को लेकर क्या हुआ था? जंग को रोकने के लिए युद्ध विराम पर सहमति बनने के दो महीने बाद ताजे हमले  हुए हैं. छह हफ्ते में हमास ने करीब 2,000 फिलिस्तीनी कैदियों के बदले में करीब तीन दर्जन बंधकों को रिहा किया. लेकिन दो हफ्ते पहले युद्ध विराम का पहला चरण खत्म होने के बाद से, दोनों पक्ष करीब 60 बचे बंधकों को रिहा करने और युद्ध को पूरी तरह से खत्म करने के मकसद से दूसरे चरण के साथ आगे बढ़ने के तरीके पर सहमत नहीं हो पाए हैं. नेतन्याहू ने बार-बार जंग को फिर से शुरू करने की धमकी दी है और इस महीने की शुरुआत में हमास पर दबाव बनाने के लिए घेरे हुए क्षेत्र में सभी खाद्य और सहायता डिलीवरी को रोक दिया.   हमास ने कही ये बात वहीं, एक इजराइली अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि इजराइल हमास के उग्रवादियों, इसके नेताओं और बुनियादी ढांचों पर हमला कर रहा है तथा हवाई हमलों से परे अभियान को और बढ़ाने की योजना बना रहा है। इस बीच हमास ने चेतावनी दी है कि मंगलवार की सुबह इजरायल के नए हवाई हमलों ने उनके बीच हुए सीजफायर को तोड़ दिया है। उसने साथ ही धमकी भरे अंदाज में यह भी कहा कि इजरायल की इस हरकत ने बंधकों के भाग्य को खतरे में डाल दिया है। वहीं, इजरायल ने कहा कि उसने सीजफायर को बढ़ाने के लिए चल रही बातचीत में कोई प्रगति न देखते हुए गाजा पट्टी में हवाई हमले किए हैं।

गाजा को इजरायल ने अंधेरे में डुबोया, पूरी तरह से रोक दी बिजली सप्लाई, हमास से सीजफायर पर रखी शर्त

यरुशलम  इजराइल का कहना है कि वह गाजा को बिजली की आपूर्ति बंद कर रहा है। इसका पूरा असर अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन इस क्षेत्र के वाटर ट्रीटमेंट प्लांटों को पीने के पानी के उत्पादन के लिए बिजली मिलती है। रविवार को यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब एक सप्ताह पहले इजराइल ने 20 लाख से अधिक लोगों को क्षेत्र में सभी प्रकार की वस्तुओं की आपूर्ति बंद कर दी थी। इसने हमास पर दबाव बनाने की कोशिश की है कि वह अपने संघर्ष विराम के पहले चरण को आगे बढ़ाए। यह चरण पिछले सप्ताहांत समाप्त हो गया। जनरेटर और सौलर पैनल के भरोसे गाजा हमास ने युद्ध विराम के अधिक कठिन दूसरे चरण पर वार्ता शुरू करने पर जोर दिया है। युद्ध के कारण गाजा काफी हद तक तबाह हो चुका है और वहां बिजली आपूर्ति के लिए जनरेटर और सौर पैनलों का उपयोग किया जाता है। इजरायली ऊर्जा मंत्री ने आदेश पर हस्ताक्षर किए रविवार को ऊर्जा मंत्री एली कोहेन ने घोषणा की कि इजरायल गाजा को “तुरंत” बिजली की आपूर्ति बंद कर देगा। उन्होंने कहा, “हम अपने बंधकों को घर वापस लाने और युद्ध के बाद हमास को गाजा में न रहने देने के लिए अपने पास मौजूद हर उपकरण को सक्रिय करेंगे।” कोहेन ने घोषणा के तुरंत बाद गाजा में बिजली के प्रवाह को रोकने के आदेश पर हस्ताक्षर किए। हमास पर दबाव बना रहा है इजरायल शुक्रवार को, वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया कि हमास पर दबाव बनाने के लिए इजरायल की चरण-दर-चरण योजना गाजा में माल और आपूर्ति के प्रवेश को रोकने से शुरू होगी, जिसके अगले चरण में बिजली और पानी को बंद करना होगा। जुलाई में, इजरायल ने गाजा में एक जल सुविधा को इजरायल के इलेक्ट्रिक ग्रिड से जोड़ा ताकि गाजा के लोगों को प्रति दिन 20,000 लीटर तक की दर से मध्यम से लंबी अवधि के आधार पर पानी उपलब्ध कराया जा सके, एक नीति जिसने इजरायल की वैश्विक वैधता को बनाए रखने का काम किया

इस्राइल ने 34 बंधकों की रिहाई को किया खारिज, ‘हमास ने अभी तक नामों की सूची नहीं दी’

तेल अवीव। इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने उन खबरों का खंडन किया है, जिनमें दावा किया गया था कि हमास ने रविवार को संभावित युद्धविराम समझौते के तहत रिहा किए जाने वाले बंधकों की सूची भेजी है। प्रधानमंत्री कार्यालय का यह बयान यूके स्थित एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें कहा गया है कि हमास ने 34 बंधकों की सूची को मंजूरी दे दी है, जिन्हें वह युद्धविराम समझौते के बदले में रिहा करेगा। रिपोर्ट के अनुसार, हमास ने कहा है कि यह सौदा गाजा से हटने और स्थायी युद्धविराम लागू करने के लिए इस्राइल की सहमति पर निर्भर है। नेतन्याहू के कार्यालय ने एक बयान में कहा, ‘जो दावा किया गया था, उसके विपरीत, हमास ने इस क्षण तक बंधकों के नामों की सूची नहीं भेजी है।’ वर्तमान में, पीएम नेतन्याहू मध्य पूर्व में कई मोर्चों पर इस्राइल रक्षा बलों (आईडीएफ) का नेतृत्व कर रहे हैं। यह बयान नेतन्याहू की प्रोस्टेट सर्जरी के बाद बृहस्पतिवार को अस्पताल से छुट्टी मिलने के कुछ दिनों बाद आया है। उनके कार्यालय के अनुसार, सर्जरी के बाद नेतन्याहू अच्छी स्थिति में थे और पूरी तरह से होश में थे। इस बीच, आईडीएफ ने घोषणा की है कि उसने दक्षिणी गाजा में इस्राइल द्वारा नामित मानवीय क्षेत्र में एक कमांड सेंटर पर हमास के गुर्गों के खिलाफ ड्रोन हमला किया है। इस्राइली सेना के अनुसार, खान यूनिस क्षेत्र में स्थित इस परिसर का इस्तेमाल हमास के कार्यकर्ताओं द्वारा गाजा में सैनिकों और इस्राइल के खिलाफ हमलों की योजना बनाने के लिए किया जाता था। देइर अल-बलाह क्षेत्र में आईडीएफ ने एक अलग हमला किया आईडीएफ ने कहा कि मानवीय क्षेत्र के देइर अल-बलाह क्षेत्र में एक अलग हमला किया गया, जिसमें फलस्तीनी इस्लामिक जिहाद के एक कार्यकर्ता को निशाना बनाया गया, जिसने इस क्षेत्र से पहले भी हमले किए थे। इस्राइली मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, आईडीएफ ने कहा कि उसने दोनों हमलों में नागरिकों को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए उपाय किए। सैनिकों ने मार गिराया साद सईद जकी दहनोन आईडीएफ ने कहा कि उत्तरी गाजा के जबालिया में हाल ही में किए गए अभियानों के दौरान सैनिकों ने फलस्तीनी इस्लामिक जिहाद कंपनी कमांडर और उत्तरी गाजा में आतंकी समूह के रॉकेट डिवीजन के उप प्रमुख साद सईद जकी दहनोन को मार गिराया। उसने सात अक्तूबर 2023 के हमले में भाग लिया था। दहनोन ने इस्राइल में की थी घुसपैठ आईडीएफ ने कहा कि दहनोन ने इस्राइल में घुसपैठ की थी। वह बेत लाहिया क्षेत्र में सैनिकों के खिलाफ कई हमलों में भी शामिल था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आईडीएफ ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें दहनोन और अन्य आतंकवादी खुद को कंबल में ढके हुए हैं। साथ ही बरसात के मौसम की आड़ में सैनिकों के पास जाने की कोशिश करते हुए दिखाई दे रहे हैं। दूसरे ऑपरेटिव को पूछताछ के लिए इस्राइल लाया गया आईडीएफ ने कहा कि दहनोन मारा गया है, जबकि दूसरे ऑपरेटिव ने सैनिकों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। आईडीएफ के अनुसार, दूसरे ऑपरेटिव के पास एक विस्फोटक उपकरण था और उसे आगे की पूछताछ के लिए इस्राइल लाया गया।

‘हम हिजबुल्ला के खिलाफ हैं, लेबनान के नहीं’, इस्राइल ने लेबनानी झंडा जलाने पर की सैनिकों की आलोचना

यरुशलम. बीते एक साल से ज्यादा समय से इस्राइल और हमास के बीच जंग जारी हैं। वहीं, इस युद्ध की लपटें लेबनान और ईरान तक पहुंच चुकी हैं। इस बीच, इस्राइली सेना ने शनिवार को सैनिकों के एक समूह पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि समूह ने दक्षिणी लेबनान में लेबनानी झंडा जलाया, जहां वे ईरान समर्थित समूह हिजबुल्ला से लड़ रहे हैं। दरअसल, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद सेना ने इसकी आलोचनी की। वीडियो में इस्राइल की वर्दी पहने करीब आधा दर्जन लोग धार्मिक नारा लगाते और नाचते हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि उनमें से एक लाइटर से झंडे में आग लगा रहा है। हमारी जंग आंतकवादी हिजबुल्ला के खिलाफ: अद्रेई सेना के प्रवक्ता अविचय अद्रेई ने कहा, ‘हम दक्षिणी लेबनान में कुछ सैनिकों द्वारा लेबनानी झंडे को जलाने के कृत्य को आदेशों का उल्लंघन, रक्षा बलों के मूल्यों के साथ असंगत तथा लेबनान में हमारी सैन्य गतिविधियों के लक्ष्यों के साथ गलत संरेखण के रूप में देखते हैं। हमारी जंग आंतकवादी हिजबुल्ला के खिलाफ है, जो पंथ, विचारधारा या पहचान में कभी भी सही मायने में लेबनानी नहीं रहा है।’ प्रतिबंध का कोई उल्लेख नहीं सोशल मीडिया पर दी गई प्रतिक्रिया में सैनिकों के खिलाफ किसी भी संभावित प्रतिबंध का उल्लेख नहीं किया गया था। हालांकि, एक वीडियो को जारी किया गया था, जिसमें कथित तौर पर हिजबुल्ला के एक आतंकवादी ने लेबनान के झंडे को फाड़कर उसकी जगह समूह का बैनर लगा दिया था। “”#هام منذ بدء الحرب على حزب الله، قلناها بوضوح: حربنا ليست ضد الشعب اللبناني، بل ضد من ينتهك أرض لبنان، ويحرق سيادته، ويدنس رموزه.     حربنا ضد حزب الله الإرهابي، الذي لم يكن يومًا لبنانيًا لا في العقيدة، ولا الفكر، ولا الهوية. ومن هنا، نعتبر قيام بعض الجنود على حرق العلم اللبناني في… pic.twitter.com/A1KtAcyOcn— افيخاي ادرعي”” – (@AvichayAdraee) November 9, 2024

इजरायल ने हमास के एक और कमंडर को मारा, इजरायली हमलों में गाजा में 25, लेबनान में 13 लोग मारे गए

बेरूत मिडिल ईस्ट में हमास और हिजबुल्लाह के खात्मे की कसम खाने के बाद इजरायल कई मोर्चे पर जंग लड़ रहा है। इस बीच शुक्रवार को गाजा और लेबनान पर इजरायल का कहर एक साथ टूटा। ताजा हमलों में दोनों जगहों पर दर्जनों नागरिकों की मौत हो गई है। इजरायल ने लेबनान के उत्तरपूर्वी गांवों को निशाना बनाया जिनमें कम से कम 52 लोग मारे गए। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इस हमले में कई लोग घायल भी हुए हैं। वहीं उत्तरी गाजा में लोगों के घरों को निशाना बना कर किए गए हमलों में 84 लोगों के मारे जाने की खबर है। गाजा के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक शुक्रवार को गाजा में मारे गए लोगों में 50 से अधिक बच्चे शामिल हैं। इन हमलों में जबालिया शरणार्थी शिविर में कई लोग मारे गए हैं। इस बीच लेबनान में इजरायल ने कई बिल्डिंगों को निशाना बनाया जिसके बाद कई लोग देश छोड़कर भागने को मजबूर हो रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 2023 में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद से लेबनान में 2,897 से अधिक लोग मारे गए हैं और 13,150 घायल हुए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि मरने वालों में एक चौथाई महिलाएं और बच्चे थे। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों का अनुमान है कि लेबनान पर इजरायल के आक्रमण के बाद 1.4 मिलियन लोग विस्थापित हो चुके हैं। हमास का एक और वरिष्ठ अधिकारी ढेर इजरायली सेना ने शुक्रवार को कहा कि उसने खान यूनिस में हवाई हमले में हमास के वरिष्ठ अधिकारी इज अल-दीन कसाब को मार डाला। फिलिस्तीनी समूह ने एक बयान में कसाब की मौत पर शोक व्यक्त किया, और कहा कि वह एन्क्लेव में उनकी कार पर एक इजरायली हमले में अयमान आयश नामक शख्स हमास के एक अन्य अधिकारी के साथ मारा गया था। हमास के सूत्रों ने रॉयटर को बताया कि कसाब गाजा में एक स्थानीय समूह का अधिकारी था, लेकिन उसके निर्णय लेने वाले राजनीतिक कार्यालय का सदस्य नहीं था। वहीं इजरायल ने कहा है कि उसने हमास के बुनियादी ढांचे और नुसेरात शरणार्थी शिविर के पास सक्रिय एक आतंकवादी को निशाना बनाया है। एक अलग घोषणा में इजरायली सेना ने कहा कि गाजा के दक्षिणी शहर खान यूनिस में एक वाहन पर हवाई हमले में हमास के राजनीतिक ब्यूरो के एक बड़े नेता इज़ अल-दीन कसाब और उनके सहायक अयमान अयेश की मौत हो गई। हमास ने अपने नेता की मौत की पुष्टि की है। गौरतलब है कि अयमान अयेश हमास के आखिरी बचे हुए बड़े नेताओं में से एक था।

इजराइल के हवाई हमले से दहला लेबनान, 16 मारे गए, हिजबुल्लाह ने भी दागे रॉकेट

इजरायल मानवीय मिशनों को गाजा तक पहुंचने की अनुमति दे:डब्ल्यूएचओ लेबनान में इजरायली हवाई हमलों में दो हजार से ज्यादा लोगों की मौत :स्वास्थ्य मंत्रालय इजराइल के हवाई हमले से दहला लेबनान, 16 मारे गए, हिजबुल्लाह ने भी दागे रॉकेट जिनेवा/ बेरूत विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इजरायल से आग्रह किया है कि वह उत्तरी गाजा तक मानवीय मिशनों को महत्वपूर्ण खाद्य और चिकित्सा आपूर्ति पहुंचाने की अनुमति दें, जो वहां जारी हिंसा के कारण पहुंच नहीं पा रही हैं। डब्ल्यूएचओ और उसके सहयोगियों ने  पोलियो टीकाकरण अभियान का दूसरा दौर शुरू किया, जिसका लक्ष्य पाँच लाख से ज़्यादा बच्चों को पोलियो से बचाना है।डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने  ‘एक्स’ पर लिखा, “दो दिनों के टीकाकरण के बाद मध्य गाजा में पोलियो वैक्सीन की दूसरी खुराक पाने वाले बच्चों की कुल संख्या 156,943 हो गयी है।” उन्होंने कहा कि फिलहाल, जारी हिंसा से करीब 90 प्रतिशत बच्चों को टीका लगाने के अभियान के लक्ष्य को खतरा है। प्रमुख ने बताया कि पोलियो के टीकों के अलावा, बच्चों को उनकी प्रतिरक्षा को मजबूत करने के लिए विटामिन ए की खुराक दी जा रही है। उन्होंने बताया कि अक्टूबर में उत्तरी गाजा में संयुक्त राष्ट्र के 54 निर्धारित मिशनों में से केवल एक ही सफलतापूर्वक पूरा हुआ है, अन्य संघर्ष के कारण रद्द कर दिए गए हैं या बाधित हैं। लेबनान में इजरायली हवाई हमलों में दो हजार से ज्यादा लोगों की मौत : स्वास्थ्य मंत्रालय  लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इजरायली हवाई हमलों के कारण उनके देश में 2,367 लोग मारे गए हैं वहीं 11,088 घायल हो गए हैं। ये आंकड़ा 8 अक्टूबर 2023 से अब तक का है।  मंत्रालय ने बताया कि 15 अक्टूबर को लेबनान के अलग-अलग इलाकों में हुए इजरायली हवाई हमलों में मृतकों की संख्या 17 और घायलों की संख्या 182 हो गई। समाचार एजेंसी शिन्हुआ की मानें तो, दक्षिण में तीन लोग मारे गए और 92 लोग घायल हो गए। नबातियेह प्रांत में नौ लोग मारे गए और 49 घायल हो गए। वहीं, बेका घाटी में पांच लोग मारे गए और 26 लोग घायल हो गए। इसके अलावा, बालबेक हरमेल प्रांत में 15 लोग घायल हो गए। 23 सितम्बर से इजरायली सेना हिजबुल्लाह के साथ बढ़ते तनाव के बीच लेबनान पर ताबड़तोड़ हवाई हमला कर रही है। 8 अक्टूबर 2023 के बाद से इजरायली सेना की ओर से लेबनानी-इजरायली सीमा पर गोलीबारी की जा रही है। जबकि, गाजा पट्टी में हमास और इजरायल के बीच युद्ध जारी है। यह हवाई अभियान पिछले वर्ष हमास के इजरायली हमले के बाद बढ़े हैं। गाजा पट्टी पर इजरायली हमले में 42,400 से अधिक लोग मारे हए। मृतकों में ज्यादातर महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। दुनिया के बड़े देशों और संगठनों ने मध्य पूर्व के बिगड़ते हालात को लेकर कई चेतावनी जारी की। तमाम कोशिशों के बीच भी शांति वार्ता पर बात नहीं बन पाई। इस बीच इजरायल की ओर से गाजा और लेबनान पर हवाई हमले जारी रहे। हालात ने गंभीर मोड़ तब और ले लिया जब इजरायल ने 1 अक्टूबर को दक्षिण लेबनान में प्रवेश कर जमीनी कार्रवाई शुरू की। इजराइल के हवाई हमले से दहला लेबनान, 16 मारे गए, हिजबुल्लाह ने भी दागे रॉकेट गाजा में हमास के आतंकवादियों का सामना कर रहे इजराइल को अब ईरान समर्थिक आतंकवादी समूह हिजबुल्लाह से जूझना पड़ रहा है। इजराइली सुरक्षाबल लेबनान में छुपे हिजब्बुलाह आतंकियों को चुन-चुनकर ढेर कर रहा है। इजराइली सुरक्षाबलों (आईडीएफ) के ताजा हमले में 16 लोग मारे गए हैं। आईडीएफ ने दावा किया है कि दक्षिण लेबनान में उसके हमले में दर्जनों आतंकवादियों को मौत की नींद सुला दिया गया। लेबनान के समाचार पत्र द नेशनल न्यूज की खबर में स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से कहा गया है कि  दक्षिण लेबनान के शहर नबातिह में एक नगरपालिका भवन पर हुए इजराइली हवाई हमलों की शृंखला में कम से कम 16 लोग मारे गए और 52 घायल हो गए। मृतकों में नबातिह का मेयर अहमद काहिल भी शामिल है। इस हमले पर लेबनान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री नजीब मिकाती ने कहा कि अहमद काहिल स्थानीय संकट समिति की बैठक में थे। उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा अगर दुनिया इजराइल को आक्रमण करने से नहीं रोक सकती तो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सामने युद्धविराम की गुहार लगाने का कोई मतलब नहीं। इजराइल ने  सुबह नबातीह और आसपास के इलाकों पर करीब 12 स्थानों पर हमले किए। संयुक्त राष्ट्र के विशेष समन्वयक जीनिन हेनिस-प्लास्चार्ट ने कहा कि इजराइल ने पूरे लेबनान में नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है। उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन है। उल्लेखनीय है कि कार्यवाहक प्रधानमंत्री नजीब मिकाती ने मंगलवार को कहा था कि अमेरिकी अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया है कि इजराइल अब बेरूत पर हमले कम करेगा। द टाइम्स ऑफ इजराइल ने आईडीएफ के हवाले से कहा है कि कुछ समय पहले उत्तरी इइराइल में लेबनान से दो रॉकेट दागे गए। इनमे से वायुसेना ने एक रॉकेट को मार गिराया। दूसरा रॉकेट खुले क्षेत्र में गिरा। इस हमले में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। उधर, इराक में इस्लामिक प्रतिरोध ने दावा किया है कि उसने इलियट पर ड्रोन हमला किया है। इस बीच अमेरिकी सेना ने कहा है कि हूथी हथियार भंडारण केंद्र पर हमले में बी-2 बमवर्षक विमानों का इस्तेमाल किया गया। आईडीएफ के एक्स हैंडल पर कहा गया है कि दक्षिणी लेबनान में  उसके सैनिकों ने जमीन और आसमान से हमले कर दर्जनों हिजबुल्लाह आतंकियों का सफाया किया। नागरिक क्षेत्र में छुपाकर रखे गए हथियारों के जखीरा (कोर्नेट मिसाइलों, एटी-3 सैगर मिसाइलों, गोले और 100 मोर्टार) को भी नष्ट कर दिया गया। एक जगह एंटी टैंक मिसाइल दागने के बाद आतंकवादी भाग गए। बेरूत टाइम्स के अनुसार, हिजबुल्लाह के उप महासचिव नईम कासेम ने फिर दोहराया है कि मौजूदा लड़ाई का समाधान युद्धविराम है। हमास के समर्थन में शुरू किया हमला अब युद्ध में बदल गया है। हिजबुल्लाह ने इजराइल पर आक्रमण के लिए नई रणनीति और नया समीकरण तय किया है। अगर इजराइली अधिकारी युद्धविराम नहीं चाहते, तो हिजबुल्लाह आखिरी दम तक लड़ेगा। कासेम ने लेबनान के विस्थापितों से वादा किया कि उनकी … Read more

हिजबुल्ला के पीछे हाथ धोकर पड़ा इजरायल, एक और कमांडर को किया हलाक

बेरुत मीडिल ईस्ट में लगातार जंग के बीच दिन-ब-दिन हालात बदतर होते जा रहे हैं. इस बीच आईडीएफ ने दावा किया है कि उन्होंने हमास के उत्तरी गाजा यूएवी कमांडर महमूद अल-मबौह को मार गिराया है. उसने इजरायल के सुरक्षा बलों और लोगों पर ड्रोन हमले का निर्देश दिया था. आईडीएफ के मुताबिक उन्होंने जबालिया और राफा में ड्रोन हमले किए, जिसमें 50 से अधिक हमास आतंकवादी मारे गए. शरणार्थी शिविरों पर बमबारी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक फिलिस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि गाजा के आठ ऐतिहासिक शरणार्थी शिविरों में से सबसे बड़े जबालिया के अल-फलूजा के पास इजरायली गोलीबारी में कम से कम 17 लोग मारे गए. स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि इसके अलावा दक्षिण गाजा में पूर्वी खान यूनिस के बानी सुहैला शिविर में 10 अन्य लोग मारे गए. जबालिया को अब इजरायल बना रहा निशाना इससे पहले मंगलवार को एक इजरायली हवाई हमले में गाजा शहर के सबरा में तीन घर तबाह हो गए. रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय नागरिक आपातकालीन सेवा ने कहा कि उन्होंने घटनास्थल से दो शव बरामद किए हैं, जबकि 12 अन्य लोगों की तलाश जारी है, जिनके बारे में माना जाता है कि वे उस समय घरों में मौजूद थे. इजरायल की सेना बीते 10 दिनों से जबालिया को निशाना बना रही है ओर उत्तरी क्षेत्र में लौट रही है. मिडिल ईस्ट इजरायल इस समय कई मोर्चों पर लड़ाई लड़ रहा है. इजराइल ने पूर्वी लेबनान में एयरस्ट्राइक तेज कर दिया है. मंगवार (15 अक्टूबर 2024) को बेका घाटी में कई हवाई हमले हुए, जिनमें बालबेक शहर के पास आवासीय क्षेत्रों को निशाना बनाया गया. इजरायली सेना ने एक बयान में कहा कि ऊपरी गैलिली में सायरन बजने के बाद लेबनान से इजरायल में प्रवेश करने वाले दो ड्रोन की पहचान की गई है, हालांकि इसमें किसी के हताहत होने की खबर नहीं है.

इजरायली रक्षा मंत्री ने कहा, “IDF सैनिक हिजबुल्लाह की संपत्तियों को जमीन के ऊपर और नीचे दोनों जगह नष्ट कर रहे हैं

यरूशलम इजरायल का कहना है कि वह मिलिट्री ऑपरेशन खत्म होने के बाद हिजबुल्लाह को दक्षिणी लेबनानी सीमा क्षेत्र पर दोबारा कब्जा नहीं करने देगा। इजरायल के रक्षा मंत्री योआव गैलेंट ने कहा कि इजरायल ‘हिजबुल्लाह के बुनियादी ढांचे वाले (दक्षिणी लेबनानी) गांवों की पूरी पहली पंक्ति’ को अपना ‘मिलिट्री टारेगट’ मानता है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, गैलेंट ने कहा कि हिजबुल्लाह आतंकवादियों ने इन गांवों में कई भूमिगत सुरंगों और हथियारों के गोदाम का निर्माण किया है। इजरायली रक्षा मंत्री ने कहा, “आईडीएफ सैनिक वर्तमान में इन (हिजबुल्लाह) संपत्तियों को जमीन के ऊपर और नीचे दोनों जगह नष्ट कर रहे हैं।” उन्होंने चल रहे छापों को ‘शक्तिशाली और प्रभावी’ बताया। गैलेंट ने कहा कि आईडीएफ सैनिकों के वापस चले जाने के बाद भी हम हिजबुल्लाह आतंकवादियों को इन क्षेत्रों में वापस नहीं आने देंगे। इजरायल-लेबनान सीमा पर  भी लड़ाई जारी रही। इजरायली सेना ने दावा किया कि उसने लेबनान में हिजबुल्लाह के लगभग 200 ठिकानों पर हमला किया, जिसमें रॉकेट लांचर, एंटी-टैंक मिसाइल पोजिशन और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। सेना ने यह भी बताया कि हिजबुल्लाह लड़ाकों के साथ लड़ाई में 28 सैनिक घायल हुए हैं। आईडीएफ ने दक्षिणी लेबनान के 21 से अधिक गांवों के निवासियों से अवली नदी के उत्तर के इलाके को खाली करने का अल्टीमेटम दिया। इजरायली सैन्य प्रवक्ता अविचाय एड्राई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘अपनी सुरक्षा के लिए, आपको तुरंत अपने घर छोड़ देने चाहिए। बिना देरी किए खाली कर दें। हिजबुल्लाह के तत्व, सुविधाएं या हथियार क्षेत्र में हैं, जो आपकी जान को जोखिम में डाल रहे हैं।” वहीं हिजबुल्लाह की तरफ से इजरायली ठिकानों पर हमले जारी हैं। इजरायली अधिकारियों के अनुसार, हिजबुल्लाह ने रविवार शाम तक उत्तरी इजरायल में कम से कम 90 रॉकेट दागे। हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजरायल के बिन्यामीना में गोलानी ब्रिगेड के ट्रेनिंग बेस पर ड्रोन अटैक की जिम्मेदारी ली। यह हमला इजरायल में एक दुर्लभ घटना है, जिसके दौरान एक ड्रोन इजरायल की वायु रक्षा प्रणाली को भेद गया और भारी नुकसान पहुंचाया। हमलें में कम से कम चार इजरायली सैनिक मारे गए और दर्जनों अन्य घायल हो गए। इजरायल ने अक्टूबर की शुरुआत से लेबनान में ‘सीमित’ जमीनी अभियान शुरू किया, जिसमें दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर हवाई हमले भी तेज कर दिए हैं, जो हिजबुल्लाह का गढ़ है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने  बताया कि 8 अक्टूबर, 2023 से लेबनान पर इजरायली हवाई हमलों में मरने वालों की संख्या 2,306 तक पहुंच गई है, जबकि कुल 10,698 लोग घायल हुए हैं।    

इजरायल के हमले से मरने वालों में महिलाएं और बच्चे ज्यादा, नॉर्थ गाजा में 400,000 फिलिस्तीनी फंसे हुए

गाजा पिछले एक साल से ज्यादा वक्त से फिलिस्तीन में इजरायल का हमला जारी है, जिसमें हजारों नागरिकों की मौत हो चुकी है. इजरायल के हमले से मरने वालों में महिलाएं और बच्चे ज्यादा हैं. Al Jazeera की रिपोर्ट के मुताबिक, नॉर्थ गाजा में करीब 400,000 फिलिस्तीनी फंसे हुए हैं और इजराइली सेना के निकासी आदेश जारी करने के बावजूद किसी को भी इलाके को छोड़ने की अनुमति नहीं दे रही है. ऐसे में कहानी एक ऐसी फिलिस्तीनी महिला और उसके परिवार की, जिसको जंग के पिछले एक साल में 14 बार विस्थापित होने को मजबूर होना पड़ा. पीड़ित महिला सबरीन ने Al Jazeera से बात करते हुए कहा, “जंग से पहले मैं एक शानदार जिंदगी गुजार रही थी. एक ऐसी जिंदगी, जिसमें इज्जत थी. अल्लाह के शुक्र से हम खुशहाल थे. मेरे पति एक मछुआरे थे, हमें और कुछ नहीं चाहिए था. मेरी पोती खुश थी, वह अपने स्कूल जाती थी लेकिन जंग ने सब ठप कर दिया.” ‘जिंदा रहने की कोशिश में भटकने को मजबूर…’ इजरायल के पहले हमले में सबरीन को गाजा शहर में बना अपना घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ा. उन्होंने पहले भी अपने परिवार के साथ नॉर्थ गाजा में शरण ली थी लेकिन आगे साउथ की तरफ जाने के बाद उन्हें जिंदा रहने की कोशिश में बार-बार साउथ और फिर सेंट्रल गाजा को पार करना पड़ा. फिलिस्तीनी नागरिक सबरीन आगे कहती हैं, “मैं आपको विस्थापन के बारे में बताती हूं. आप पर अत्याचार किया जाता है, यह बहुत महंगा है, हम लोगों से लोन लेते हैं ताकि हम एक जगह से निकल कर दूसरी जगह जा सकें. विस्थापन की शुरुआत से लेकर अब तक चुकाने के लिए बहुत सारे लेन हैं और मेरे नाम पर भी कुछ नहीं बचा है. यह इस हद तक पहुंच गया है कि मुझे अपनी बेटी और अपनी नातिन का गोल्ड बेचना पड़ा है. अब जो बचा है, वह है मेरी नातिन का कंगन, उसकी अंगूठी और झुमके हैं.” जब सीजफायर होने की खबर आई, तो उन्होंने घर जाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर नॉर्थ की ओर लौटने की कोशिश की. ‘हम छोटी लड़कियों के लिए डरे हुए थे…’ सबरीन अपना दर्दनाक एक्सपीरिएंस शेयर करते हुए कहती हैं, “मैंने बच्चे और लड़कियों, अपनी मां और बेटी, बहन और अपनी भतीजी को लिया और हम चल पड़े. हम सेना की चौकियों के पास दो सड़कों पर पहुंचे. मैंने कोई सैनिक नहीं देखा लेकिन फिर सैनिक आ गए, लगभग तीस सैनिक हमें रुकने के लिए कह रहे थे. उन्होंने हमसे पूछा कि हम पहले क्यों नहीं आए, हमसे पहले कुछ लोग अंदर आ गए. मैं दो घंटे बाद वापस लौटी, फिर स्नाइपर्स ने मुझ पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं. लाइव गोला बारूद. हम अपने छोटे बच्चों, छोटी लड़कियों के लिए डरे हुए थे, लेकिन मैं अपने चारों ओर गोलीबारी के बावजूद भी चल रहे थेय एक युवक आया और मुझे खींचकर ले गया.” अन्य लोगों की तरह, सबरीन ने भी गाजा में इजरायल के नरसंहार की वजह से अपने कई रिश्तेदारों को खो दिया है और बार-बार विस्थापन के कारण उन्हें शोक मनाने भी वक्त सही से नहीं मिल सका है. ’23 लाख नगारिक हुए विस्थापित’ सबरीन कहता हैं, “हमारे रिश्तेदारों में से बहुत से शहीद हुए हैं. मेरी बहन का पति, उसका बेटा भी, मेरे चाचा के बेटे और चाची के बेटे सहित कई लोग. हमला होने के बाद हमें अपने बच्चों के साथ निकलना पड़ा. हमने शहीदों को दफना दिया और हम साउथ की तरफ गए.” गाजा के करीब 23 लाख नागरिक कम से कम एक बार जरूर विस्थापित हुए हैं. सबरीन की तरह कई लोगों को इजरायली हमलों की वजह से कई बार विस्थापित होना पड़ा है. गाजा का ज्यादातर इलाका इजरायली सेना के विस्थापन आदेशों का सामना कर रहा है, लोगों का कहना है कि उनके पास भागने के लिए जगह नहीं बची है. सबरीन दर्द बयां करते हुए कहती हैं, “हम उम्मीद करते हैं कि गाजा फिर से पहले की तरह हो जाए. फिर से बनाया जाए, फिर से सुकून और सुरक्षित महसूस करें, दूसरे अरब देशों की तरह. हमारे बच्चे दूसरे देशों के बच्चों की तरह शानदार जिंदगी गुजार सकें. हमें सुरक्षित रहने का अधिकार है, हमें अपने घर लौटने का अधिकार है.  

हाइफ़ा पर हिज़्बुल्लाह का ‘सबसे बड़ा’ रॉकेट हमला, इजरायल की कमजोर नस बनी !

तेल अवीव हिज्बुल्लाह ने हाइफा की खाड़ी में ताबड़तोड़ करीब 100 रॉकेट दागे. कुछ को इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम ने रोक लिया. लेकिन कुछ गिरे. जिससे दो लोगों की मौत हो गई. 8 जख्मी हो गए. किरयत श्मोना में 20 रॉकेट गिरे. मौत भी यहीं हुई है. ये एक कपल था, जो अपने कुत्ते के साथ घूम रहा था. इन्हें प्रोटेक्टिव बंकर में घुसने का मौका नहीं मिला. इसलिए रॉकेट से निकले शार्पेनल की वजह से मारे गए. हाइफा की खाड़ी के पास वाले इलाके में तीन लोग बुरी तरह से जख्मी हुए हैं. इजरायली फोर्स ने कहा कि हिज्बुल्लाह के रॉकेट खुले इलाके में गिरे हैं. कुछ को हमने रोक दिया. इजरायली पुलिस और बम स्क्वाड किरयत श्मोना में कई घरों की जांच की है. पुलिस ने लोगों को ऐसी जगहों पर जाने को मना किया है, जहां पर रॉकेट गिरे हों. क्योंकि उनमें जिंदा विस्फोटक होने की आशंका है. अगर वो फटे तो नुकसान हो सकता है. आइए जानते हैं हाइफा के बारे में… येरूसल और तेल-अवीव के बाद इजरायल का तीसरा सबसे बड़ा शहर हाइफा है. 2022 के मुताबिक यहां करीब तीन लाख लोग रहते हैं. यहां पर सबसे ज्यादा बहाई समुदाय के लोग रहते हैं. माउंट कारमेल के पठारी ढलानों पर बसे इस शहर का इतिहास 3000 साल पुराना है. कांस्य युग में स्थापित हुए इस शहर सबसे पहले डाई (Dye) बनाने का काम होता था. पूरी दुनिया में यह इसी काम के लिए प्रसिद्ध था. यहां कई साम्राज्य आए और गए. बेबिलोनियन, पर्सियन, इजरायलाइट्स आदि. 1948 की फिलिस्तीन जंग में जब हाइफा में युद्ध हुआ तो यहां की अरब आबादी शहर छोड़कर भाग गई थी. इसके बाद यह शहर इजरायल का हिस्सा बन गया. हाइफा एक बंदरगाह शहर है. खाड़ी का इलाका करीब 63.7 वर्ग किलोमीटर का है. इजरायली रक्षामंत्री ने दी ईरान को चेतावनी इजरायल के रक्षामंत्री योआव गैलेंट ने कहा है कि ईरान ने 1 अक्तूबर को बड़ा हमला किया था. लेकिन उसे जबाव में तगड़ा हमला मिलेगा. उसका हमला आक्रामक था लेकिन सटीक नहीं. हमारा हमला घातक और पिनप्वाइंट एक्यूरेट होगा. सबसे जरूरी बात कि ये हैरान कर देगा. उन्हें पता भी नहीं कि उनके साथ क्या होने वाला है. इस बीच द जेरुसलम पोस्ट ने रिपोर्ट किया है कि इजरायल ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर हमला नहीं करेगी. उसका फोकस मिलिट्री बेस और इंटेलिजेंस साइट्स होंगे.  

हसन खुमैनी ने कहा, ‘यह सोचना गलत है कि अगर इजरायल को अकेला छोड़ देंगे तो वह इजरायल भी हमें अकेला छोड़ देगा

तेहरान  ईरानी क्रांति के नेता रहे ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खुमैनी के पोते ने इजरायल के खिलाफ पूरी ताकत से हमला करने की धमकी दी है। हसन खुमैनी के ने ईरानी चैनल पर एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि इजरायल तब तक पीछे नहीं हटेगा, जब तक उसके खिलाफ ताकत का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। हसन खुमैनी ने फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना के लिए जनमत संग्रह कराने ईरान के सुझाव पर भी बात की औऱ कहा कि यह इजरायल के अंत की ओर जाएगा। हसन खुमैनी ने दावा किया कि जनमत संग्रह में ‘जो सबसे ज्यादा वोट हासिल करेगा, वो जीतेगा। इससे अंततः इजरायल का सफाया हो जाएगा और वे यह जानते हैं।’ पूर्व सुप्रीम लीडर के पोते ने अमेरिका, ब्रिटेन और इजरायल की तरफ से प्रस्तावित दो राज्य समाधान की आलोचन की। हसन ने कहा कि यह दुनिया को ‘इजरायली कब्जे’ की वैधता स्वीकार करने के लिए मजबूर करने की एक चाल मात्र है। इजरायल से दोस्ती को बताया बेकार हसन खुमैनी ने कहा, ‘यह सोचना गलत है कि अगर इजरायल को अकेला छोड़ देंगे तो वह इजरायल भी हमें अकेला छोड़ देगा।’ उन्होंने कहा कि इजरायल से बातचीत और दोस्ती दिखाने से कुछ हासिल नहीं होगा। इसके बजाय ईरान को अपनी ताकत और सैन्य क्षमता दिखाने की जरूरत होगी। मौजूदा वैश्विक स्थिति में इजरायल से निपटने के लिए मजबूत नजरिए की जरूरत है। ईरान का इजरायल पर हमला ईरान ने पिछले सप्ताह इजरायल के ऊपर 200 बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार कर दी थी। यह हमला अप्रैल में किए गए हमले से ज्यादा घातक था। इस बार के हमले में कई ईरानी मिसाइलें इजरायली क्षेत्र में गिरी थीं। इजरायली एयरबेस भी इस हमले में निशाना बना था। ईरान ने इसे लेबनान में हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह की हत्या के बदले में की गई कार्रवाई बताया था। बीते शुक्रवार को ईरान के सुप्रीम लीडर ने ग्रैड मस्जिद से संबोधन दिया था, जिसमें इजरायल को मिटाने की धमकी दी थी। हसन नसरल्लाह को इजरायल ने पिछले महीने के आखिर में दक्षिणी बेरूत के दहियाह में एक हवाई हमले में मार दिया था। इजरायली एयरस्ट्राइक ने हिजबुल्लाह के भूमिगत मुख्यालय को निशाना बनाया था, जब नसरल्लाह वहां अपने सीनियर कमांडरों के साथ बैठक कर रहा था। बीते कुछ दिनों में इजरायल ने ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के लगभग सभी शीर्ष नेताओं को मार दिया है।

इजरायली सेना ने गाजा को खंडहर में बदल दिया, अब 42000 मौतें, इजरायल कई मोर्चों पर एक साथ लड़ रहा है युद्ध

तेल अवीव इजरायल ने 7 अक्टूबर, 2023 को हुए हमास के बर्बर हमले की पहली बरसी पर 10 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है. हमास ने पिछले साल 7 अक्टूबर के दिन इजरायल में अचानक धावा बोल दिया था. उसके लड़ाकों ने आसमान, जमीन और समुद्र के रास्ते इजरायल में घुसकर कत्लेआम मचाया था. इस हमले में 1200 से अधिक इजरायली नागरिकों की मौत हुई थी और हमास ने 250 से के करीब लोगों को बंधक बना लिया था, जिसमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल थीं. हमास ने अपने इस हमले को ऑपरेशन अल-अक्सा फ्लड (Operation Al-Aqsa Flood) नाम दिया था. इजरायल ने इस बर्बरता का बदला लेने और हमास का अस्तित्व मिटाने की कसम खाई थी. उसने गाजा में ऑपरेशन आयरन स्वॉर्डस (Operation Iron Swords) चलाया. उसकी सेना ने गाजा को खंडहर में बदल दिया. पिछले एक साल के अंदर गाजा में इजरायली कार्रवाई में करीब 41000 मौतें हुई हैं, लाखों लोग गाजा से विस्थापित हुए हैं. इजरायल अब तक इस्माइल हानिया और मोहम्मद डेफ समेत हमास के कई शीर्ष नेताओं को ढेर कर चुका है. यह 2008 के बाद से फिलिस्तीन-इजरायल संघर्ष का पांचवां युद्ध है, और 1973 में योम किप्पुर युद्ध के बाद इस क्षेत्र में सबसे बड़ा सैन्य अभियान है. हमार ने 7 अक्टूबर के हमले को बताया ‘Glorious’ गाजा पट्टी पर 2007 से हमास का शासन है और 7 अक्टूबर, 2023 के हमले के बाद इजरायल की बदले की कार्रवाई में यहां बड़े पैमाने पर विनाश हुआ है. गाजा में बुनियादी ढांचे मलबे में तब्दील हो चुके हैं. एक वर्ष बीत जाने के बाद भी, गाजा युद्ध अनसुलझा है और पूरे क्षेत्र में युद्ध की संभावना अधिक बनती जा रही है. अपने कई शीर्ष नेताओं और कमांडरों के मारे जाने के हमास सक्रिय है. कतर स्थित हमास के सदस्य खलील अल-हया ने एक वीडियो संदेश जारी करके 7 अक्टूबर, 2023 के हमले को ‘महान कार्य’ बताया है. अल-हया ने 7 अक्टूबर के हमले की बरसी पर जारी अपने संदेश में कहा, ‘पूरा फिलिस्तीन, विशेष रूप से गाजा और हमारे फिलिस्तीनी नागरिक दुश्मन के खिलाफ अपने प्रतिरोध के साथ एक नया इतिहास लिख रहे हैं.’ इजरायल कई मोर्चों पर एक साथ लड़ रहा है युद्ध हमास द्वारा 7 अक्टूबर, 2024 को किए गए हमले की पहली बरसी आने तक इजरायल कई मोर्चों पर युद्ध लड़ रहा है. अब उसका फोकस गाजा से लेबनान में शिफ्ट हो गया है. लेबनान के अलग-अलग हिस्सों में हिज्बुल्लाह को निशाना बनाते हुए इजरायली सेना की जमीनी कार्रवाई और वायुसेना के हवाई हमले जारी हैं. गाजा में 41,000 से अधिक मौतों के बावजूद ऐसा लगता है कि यह हिंसा कभी खत्म नहीं होने वाली. इजरायली रक्षा बलों ने 5 अक्टूबर, 2024 को गाजा शहर के बगल में स्थित जबालिया में हमास लड़ाकों को खत्म करने के इरादे से एक और अभियान शुरू किया. इजरायल ने कहा कि हमास जबालिया में फिर सिर उठाने की कोशिश कर रहा था. अब भी 101 बंधकों के बारे में नहीं चल सका पता यह संभव है कि इजरायल के खिलाफ उसके दुश्मनों द्वारा एक और आतंकवादी हमला या सैन्य अभियान इलाके में संघर्ष की स्थिति को और भी भयावह बना सकता है. हमास ने 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल पर हमले के दौरान जिन 250 लोगों को बंधक बनाया था, उनमें से 101 बंधकों का अब भी पता नहीं चल सका है. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन में इन बंधकों का जिक्र किया था. उन्होंने यह प्रतिबद्धता जाहिर की थी कि इजरायल आखिरी बंधक का पता लगाए बिना चैन से नहीं बैठेगा. गाजा में इजरायल का उद्देश्य हमास की सैन्य क्षमताओं और शासन को नष्ट करना और बंधकों को छुड़ाना है. अपने युद्ध को अंजाम तक पहुंचा पाएगा इजरायल? लेबनान के खिलाफ मोर्चा खोलने के पीछे इजरायल का लक्ष्य अपने उन 60,000 से अधिक नागरिकों को सीमा के पास अपने घरों में लौटने के लिए सुरक्षित महसूस कराना है, जिन्हें ​हिज्बुल्लाह के रॉकेट हमलों की जद में आने का डर सताता है. पिछले एक साल में इजरायल अपने दुश्मनों पर नकेल कसने में कामयाब रहा है, लेकिन अपने युद्धों को अंजाम तक पहुंचाने में सफल नहीं रहा है. इजरायली सैन्य अधिकारी भी यह स्वीकार करते हैं कि हमास और हिज्बुल्लाह के शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने और उनकी सैन्य क्षमताओं को कुंद करने के बावजूद, ये दोनों मिलिशिया समूह फिलिस्तीन और लेबनान में एक ताकत बने रहेंगे. इस संघर्ष में ईरान की एंट्री से स्थिति और बिगड़ सकती है. इन सब तथ्यों को ध्यान में रखते हुए यही समझ में आता है कि इजरायल को निकट भविष्य में भी युद्धों और संघर्षों के लिए तैयार रहना होगा.  

गाजा की मस्जिद पर की इजरायल ने Air Strike, 18 लोगों की मौत; युद्ध की पहली वर्षगांठ मनाने जुटे थे लोग

गाजा. गाजा पर इजरायल के हमले आज भी जारी हैं। रविवार को सुबह-सुबह एक मस्जिद पर हुई भीषण बमबारी में 18 से अधिक लोगों के मारे जाने की खबर है। फिलिस्तीनी समाचार एजेंसी वफा ने इसकी जानकारी दी है। इस हमले में दर्जनों लोग घायल हो गए हैं। इजरायल का दावा है कि यहां हमास का कमांड सेंटर था। आपको बता दें कि बीते साल 7 अक्तूबर से दोनों देशों के बीच युद्ध जारी है। इसकी पहली बरसी से ठीक पहले मध्य गाजा पट्टी के डेर अल-बला में अल-अक्सा अस्पताल के पास मौजूद मस्जिद पर हमला हुआ है। प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि हताहतों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि मस्जिद का इस्तेमाल विस्थापित लोगों को रखने के लिए किया जा रहा था। इजरायली सेना ने एक बयान में कहा कि उसने हमास के आतंकवादियों पर एक सटीक हमला किया है। वे डेर अल बलाह के क्षेत्र में ‘शुहादा अल-अक्सा’ मस्जिद के रूप में काम करने वाली एक संरचना में लगे एक कमांड और कंट्रोल सेंटर के भीतर काम कर रहे थे। इससे पहले हमास की सशस्त्र शाखा अल-कस्साम ब्रिगेड ने वेस्ट बैंक के शहर तुलकरम पर एक इजरायली हमले में अपने एक प्रमुख कमांडर जही यासर अब्द अल-रजेक औफी के साथ सात अन्य लड़ाकों की मौत की पुष्टि की थी। हमास ने शुक्रवार को एक बयान में यह बातें कही। हमास की सशस्त्र शाखा अल-क़स्साम ब्रिगेड ने कहा कि इज़रायल को अपने आपराधिक कृत्यों की कीमत चुकानी होगी। इजरायल रक्षा बलों (आईडीएफ) ने गुरुवार रात घोषणा की कि उसने हमास नेटवर्क के प्रमुख कमांडर औफी को मार गिराया है। आईडीएफ ने एक बयान में कहा कि औफी ने 02 सितंबर को अटेरेट में कार बम विस्फोट की योजना बनाई और उसका नेतृत्व किया था। फिलिस्तीन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक संक्षिप्त बयान में कहा कि गुरुवार को वेस्ट बैंक में तुलकरम शरणार्थी शिविर को निशाना बनाकर किए गए एक इज़रायली हवाई हमले में कम से कम 18 फिलिस्तीनी मारे गए और कई अन्य घायल हो गए थे। आपको बता दें कि इजरायली-फिलिस्तीनी संघर्ष में की शुरुआत में 1200 लोग मारे गए और लगभग 250 लोगों को बंधक बना लिया गया था। वहीं, गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, गाजा पर इजरायल के हमले के बाद 42,000 फिलिस्तीनी मारे गए हैं। इन हमलों ने लगभग 23 लाख लोगों को विस्थापित कर दिया है। फिलिस्तीन के लोग भूख का संकट से जूझ रहे हैं।

इजरायल ने चार दिनों में हिज्बुल्लाह के 2000 से अधिक सैन्य ठिकानों को तबाह किया, 250 हिज़्बुल्लाह लड़ाकों को खत्म

तेलअवीव इजरायल रक्षा बलों (आईडीएफ) ने दावा किया है कि इजरायल पिछले चार दिनों में हिज्बुल्लाह के 2000 से अधिक सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया है और लगभग 250 हिज़्बुल्लाह लड़ाकों को खत्म कर दिया है. आईडीएफ के मुताबिक, मारे गए हिज़्बुल्लाह कमांडरों में पांच बटालियन कमांडर, 10 कंपनी कमांडर और छह प्लाटून कमांडर शामिल थे. आईडीएफ ने आगे कहा कि इजरायली वायु सेना दक्षिणी लेबनान में खुफिया-आधारित अभियानों के दौरान एहतियाती हमले भी कर रही है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखे पोस्ट में आईडीएफ ने लिखा,  “पिछले 4 दिनों में, आईडीएफ ने 2,000 से अधिक सैन्य ठिकानों और 250 हिज़्बुल्लाह आतंकवादियों को खत्म कर दिया है. उनमें से 5 बटालियन कमांडर- 10 कंपनी कमांडर- 6 प्लाटून कमांडर शामिल हैं.” आईडीएफ ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, ‘दक्षिणी लेबनान में 24 घंटे के ऑपरेशन का विवरण: सटीक खुफिया-आधारित छापों के दौरान, IDF सैनिकों को एक आवासीय घर के अंदर रॉकेट लॉन्चर गोला-बारूद, एंटी-टैंक मिसाइल और रॉकेट मिले. इसके अलावा, इमारतों और घरों में दर्जनों हथियार मिले जिनका लक्ष्य इजरायली क्षेत्र था. हथियारों में एंटी-टैंक मिसाइल, फायरआर्म्स, विस्फोटक उपकरण शामिल हैं.’ रान ने दागी थीं मिसाइलें इजरायल रक्षा बलों ने एक अपडेट साझा किया जिसमें कहा गया कि “लगभग 2 महीनों में पहली बार, दक्षिणी इजरायल में सायरन बज रहे हैं.” यह घटनाक्रम ईरान द्वारा मंगलवार को इजरायल के खिलाफ युद्ध में सैकड़ों मिसाइलों को लॉन्च करने के कुछ दिनों बाद हुआ है.ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमले के जवाब में अपने विकल्पों पर विचार कर रहा है. अल जज़ीरा के अनुसार ईरान ने कहा था कि हमास, हिजबुल्लाह और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के शीर्ष नेताओं की हत्या के जवाब में इजरायल पर लगभग 180 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं. देश दो मोर्चों पर युद्ध का सामना कर रहा है  जिसमें देश के उत्तरी हिस्से से ईरान समर्थित हिजबुल्लाह और दक्षिणी सीमा पर हमास हमला कर रहा है. ऐसे हुई थी शुरूआत दशकों पुराने इजरायल-फिलिस्तीनी संघर्ष उस समय खूनी लड़ाई में तब्दील हो गया है जब 7 अक्टूबर, 2023 को  फिलिस्तीनी हमास आतंकवादियों द्वारा इजरायल में घुसकर हमला किया गया. इस हमले में 1,200 लोग मारे गए और जिसमें लगभग 250 को बंधक बना लिया गया. गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, जवाबी कार्रवाई में इजरायल ने गाजा पर हमला कर दिया था जिसमें 41,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए, गाजा की लगभग पूरी आबादी विस्थापित हो गई. इसके बाद भूखमरी का संकट पैदा हो गया तथा इजरायल पर नरसंहार के आरोप लगे.    

इजरायल ने हिजबुल्लाह के मिसाइल प्रोजेक्ट चीफ महमूद यूसुफ अनीसी को बनाया निशाना

तेल अवीव इजरायल का लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ हवाई और जमीनी कार्रवाई जारी है. इजरायली रक्षा बलों ने हिज्बुल्लाह की मिसाइल प्रोडक्शन यूनिट के चीफ एक्सपर्ट महमूद यूसुफ अनीसी को मार गिराने का दावा किया है. इजरायली सेना ने इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर बेरूत में यह ऑपरेशन चलाया था. आईडीएफ के मुताबिक महमूद यूसुफ अनीसी के पास मैकेनिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में व्यापक अनुभव था. वह हिज्बुल्लाह के वेपन प्रोडक्शन चेन में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति था. इजरायली सेना ने एक बयान में कहा, ‘महमूद यूसुफ अनीसी ने 15 वर्षों से अधिक समय तक हिज्जबुल्लाह के लिए रणनीतिक हथियारों के विकास पर सक्रिय रूप से काम किया. वह टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हिज्जबुल्लाह के प्रमुख विशेषज्ञों में से एक बन गया और अपने अनुभव का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए हथियार निर्माण में करने लगा.’ इस बीच खबर है कि इजरायल ने हसन नसरल्लाह का उत्तराधिकारी माने जा रहे हाशिम सफीद्दीन को भी निशाना बनाया है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इजरायल ने बेरूत में एक हवाई हमले में हिज्बुल्लाह के वरिष्ठ अधिकारी हाशिम सफीद्दीन  को निशाना बनाया, जिसे ईरान समर्थित मिलिशिया समूह का अगला चीफ माना जा रहा है. हालांकि, आईडीएफ या हिज्बुल्लाह की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.  रिपोर्ट के मुताबिक संभवतः सफीद्दीन एक बंकर में हिज्बुल्लाह के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर रहा था, तभी गुरुवार आधी रात को इजरायल ने बेरूत पर भीषण हवाई हमले किए. इजरायल द्वारा नसरल्लाह को मारने के बाद से यह क्षेत्र में सबसे भारी बमबारी में से एक थी. समाचार आउटलेट एक्सियोस ने लेबनानी मीडिया के हवाले से कहा, ताजा इजरायली हमला नसरल्लाह की हत्या से कहीं बड़ा था. हताहतों की संख्या अभी तक ज्ञात नहीं है. हाशिम सफीद्दीन हिज्बुल्लाह के राजनीतिक मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और समूह की जिहाद परिषद का सदस्य है. जिहाद परिषद ही हिज्बुल्लाह के सैन्य अभियानों का प्रबंधन करता है. अमेरिका ने सफीद्दीन को 2017 में आतंकवादी घोषित किया था. हसन नसरल्लाह के ममेरे भाई हाशिम सफीद्दीन को आमतौर पर हिज्बुल्लाह में ‘नंबर दो’ माना जाता है, और उसके ईरानी शासन के साथ भी घनिष्ठ संबंध हैं.  

इजरायली सेना का बड़ा दावा- एक और दुश्मन हुआ ढेर, एयर स्ट्राइक में हमास के प्रमुख रावी मुश्तहा की हुई मौत

यरूशलम इजरायल (Israel) की सेना ने हमास (Hamas) के तीन वरिष्‍ठ नेताओं को मार गिराने का दावा किया है. इजरायल डिफेंस फोर्सेज (Israel Defense Forces) ने गुरुवार को कहा कि तीन महीने पहले एक हमले में गाजा में हमास के तीन सीनियर लीडर मारे गए थे. इनमें हमास सरकार का प्रमुख रावी मुश्‍तहा भी शामिल है. मुश्‍तहा को हमास प्रमुख याह्या सिनवार का करीबी माना जाता है. इजरायल की सेना गाजा में करीब एक साल से हमास के खिलाफ हमले कर रही है. आईडीएफ ने एक्‍स पर पोस्‍ट में कहा कि गाजा पट्टी में हमास सरकार के प्रमुख रावी मुश्तहा और हमास के राजनीतिक ब्यूरो के सुरक्षा विभाग को संभालने वाले समेह अल सिराज और एक कमांडर सामी औदेह की मौत हो गई. इजरायली सेना ने कहा कि तीनों कमांडरों ने उत्तरी गाजा में एक भारी सुरक्षा वाले अंडरग्राउंड कैंपस में शरण ली थी. इस जगह का इस्तेमाल वे अपने कमांड और कंट्रोल सेंटर के रूप में भी करते थे. 3 महीने पहले किया था हमला IDF ने X पर एक पोस्ट में कहा, ‘लगभग 3 महीने पहले गाजा में IDF और ISA के संयुक्त हमले में कई आतंकवादियों को मार गिराया गया, जिसमें गाजा में हमास सरकार के प्रमुख रावी मुश्तहा, हमास के पॉलिटिकल ब्यूरो और हमास की लेबर कमेटी में सिक्योरिटी पोर्टफोलियो रखने वाले समेह अल-सिराज, हमास के सामान्य सुरक्षा तंत्र के कमांडर समी औदेह शामिल हैं. IAF के लड़ाकू विमानों ने उत्तरी गाजा में एक किलेबंद और अंडरग्राउंड कंपाउंड में छिपे आतंकवादियों पर हमला किया और उन्हें मार गिराया.’ आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करता रहेगा इजरायल IDF ने आगे कहा, यह कंपाउंड हमास के कमांड और कंट्रोल सेंटर के रूप में काम करता था और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को लंबे समय तक इसके अंदर रहने में सहूलियत थी. IDF ने कहा कि वह 7 अक्टूबर के नरसंहार के लिए जिम्मेदार सभी आतंकवादियों को खोजना जारी रखेगा और इजरायल को धमकी देने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा. मुश्तहा हमास के एक टॉप नेता याह्या सिनवार का करीबी सहयोगी था, जिसने 7 अक्टूबर को इजरायल पर हुए हमले की साजिश रचने में मदद की थी, जिसमें 100 से अधिक लोग मारे गए थे. पिछले सप्ताह लेबनान के बेरूत में एक हमले में इजरायल ने हिजबुल्लाह प्रमुख हसन नसरल्लाह को भी मार गिराया.

इतिहास में इजरायल और ईरान ने एक साझा दुश्मन से लड़ने के लिए अमेरिका की मदद से हाथ मिलाया था

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने मंगलवार को इजरायल पर 200 से ज्यादा मिसाइलें दागीं है जिनमें हाइपरसोनिक हथियार भी शामिल हैं। अब इजरायल ने भी कसम खाई है कि ईरान इस हमले की कीमत चुकाएगा। हालांकि दोनों देशों के बीच रिश्ते हमेशा से खराब नहीं थे। यह सुनने में भले ही अकल्पनीय लगे लेकिन इजरायल और ईरान ने एक साझा दुश्मन से लड़ने के लिए अमेरिका की मदद से हाथ मिलाया था। 1960 के दशक में इजरायल और ईरान दोनों का एक साझा दुश्मन था इराक। जहां इजरायल अरब देशों के खिलाफ संघर्ष में उलझा हुआ था वहीं शाह के नेतृत्व में ईरान के लिए सुरक्षा और क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं को देखते हुए इराक एक सीधा खतरा था। इसके बाद इस समय की सबसे गुप्त साझेदारी के लिए एक आधार तैयार हुआ। इस साझेदारी में इज़राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद और ईरान की सीक्रेट पुलिस SAVAK शामिल थे। दोनों ने इराकी शासन के खिलाफ कुर्द विद्रोहियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इराक के अरब नेतृत्व की कमजोरी के रूप में देखे जाने वाले ये कुर्द समूह इराकी सरकार को अंदर से कमजोर करने के लिए जरूरी थे। खुफिया गठबंधन कोड-नाम ट्राइडेंट के गठन के बाद इज़राइल और ईरान के बीच के रिश्ते नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए थे जिसमें तुर्की भी शामिल था। 1958 की शुरुआत में ट्राइडेंट की मदद से इन तीन समूहों ने कई खुफिया जानकारियों का आदान-प्रदान किया। जैसे-जैसे संबंध परिपक्व होते गए इज़राइल और ईरान और भी करीब होते गए। शाह की महत्वाकांक्षाएं और इज़राइल का प्रभाव ईरान के शाह मोहम्मद रजा पहलवी न केवल साझा भू-राजनीतिक हितों से प्रेरित थे बल्कि अमेरिका में इज़राइल के प्रभाव से भी प्रेरित थे। शाह ने इजराइल को अमेरिका के साथ संबंधों को सुधारने के लिए एक साधन के रूप में देखा। खासकर कैनेडी प्रशासन द्वारा उनके शासन के बारे में चिंता व्यक्त करने के बाद यह और जरूरी हो गया था। इजराइली-ईरानी संबंध ईरान की पश्चिम के साथ खुद को जोड़ने की रणनीति का हिस्सा बन गए। नतीजतन 1960 के दशक के मध्य तक तेहरान में एक स्थायी इजराइली प्रतिनिधिमंडल की स्थापना हुई जो एक दूतावास के रूप में कार्य करने लगी। हालांकि इस संबंध में भी कुछ जटिलताएं थी। शाह अरब दुनिया में व्यापक इजराइल-विरोधी भावना से अवगत थे। उन्होंने ईरान के इजराइल के साथ संबंधों के सार्वजनिक तौर पर इनकार किया। इराक के खिलाफ मिलकर काम करने में दोनों देशों का फायदा ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति ने देश के राजनीतिक परिदृश्य को काफी हद तक बदल दिया और इसे एक इजराइल विरोधी इस्लामी गणराज्य में बदल दिया। फिर भी अयातुल्ला खोईमेनी के सत्ता में आने के बाद भी नए शासन ने इजराइल के साथ गुप्त सहयोग जारी रखा। जैसे-जैसे ईरान-इराक युद्ध (1980-1988) आगे बढ़ा दोनों देशों ने सद्दाम हुसैन के इराक के खिलाफ़ मिलकर काम करने में ही फायदा देखा। इज़राइल ने भी ईरान की मदद करने में एक अच्छा अवसर देखा। अमेरिका और सोवियत संघ दोनों ने इराकी सेना की आपूर्ति की थी और यह एक जोखिम था। इज़राइल द्वारा ईरान को हथियारों की खेप भेजना, खास कर से प्रधानमंत्री मेनाचेम बेगिन द्वारा 1980 में सैन्य उपकरणों की बिक्री को मंज़ूरी दिए जाने के बाद इराक की ताकत को कमज़ोर करने का एक सोचा-समझा फ़ैसला था। ये गुप्त हथियार सौदे अमेरिकी नीति के बावजूद किए गए जिसमें तेहरान में बंधक बनाए गए अमेरिकी लोगों की रिहाई तक ईरान को सैन्य सहायता देने पर रोक लगाई गई थी। इज़राइली सैन्य सहायता के बदले में, खोईमेनी के शासन ने बड़ी संख्या में ईरानी यहूदियों को इज़राइल या अमेरिका में रहने की अनुमति दी। ऑपरेशन फ्लावर इजरायल-ईरानी साझेदारी पारंपरिक हथियार सौदों से आगे तक पहुंच गई थी। सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक ऑपरेशन फ्लावर था जो एक गुप्त करोड़ों डॉलर की योजना थी जो 1977 में शाह के शासन के दौरान शुरू हुई थी। इस सौदे के तहत ईरान ने 1978 में इजरायल को 260 मिलियन डॉलर का तेल भेजकर एक बड़ा अग्रिम भुगतान किया जैसा कि 1986 की न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था। मिसाइल कार्यक्रम पर काम 1979 में इस्लामिक क्रांति तक जारी रहा जिसके बाद खोमेनेई के शासन ने अचानक सहयोग रोक दिया। अक्टूबर 1980 में जब ईरान ने इराक के खिलाफ युद्ध छेड़ा था तब इजरायल ने गुप्त रूप से ईरान को अमेरिकी निर्मित एफ-4 लड़ाकू विमानों के लिए 250 अतिरिक्त टायर भी दिए थे। दुश्मनी की शुरुआत 1990 के दशक तक इज़राइल और ईरान के बीच सहयोग का युग लगभग समाप्त हो गया था। भू-राजनीतिक कारण जैसे अरब समाजवाद, सोवियत प्रभाव और इराक का खतरा, जो कभी उन्हें एकजुट करते थे गायब हो गए थे जिससे सहयोग के लिए वजहें नहीं बची थी। इसके बाद ईरान ने इजरायल विरोधी विचारधारा को अपनाया। ईरान ने इजरायल के साथ संघर्ष में हिजबुल्लाह और हमास जैसे समूहों का समर्थन किया है। 2000 के दशक की शुरुआत में ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद का चुनाव, नरसंहार से इनकार और इजरायल के खिलाफ आक्रामक बयानबाजी ने तनाव को और बढ़ा दिया। इसके बाद ईरान इस क्षेत्र में इजरायल का सबसे प्रमुख विरोधी बन गया। अब मिडिल ईस्ट के ये दो देश पूरी तरह युद्ध की कगार पर हैं।

रिपोर्ट : इजरायल ईरान के तेल कुओं और परमाणु अड्डों पर अटैक कर सकता है, एयर डिफेंस सिस्टम भी निशाने पर रहेगा

तेल अवीव ईरान की ओर से इजरायल पर मंगलवार को 200 मिसाइलें दागे जाने के बाद माहौल बदल गया है। अब तक हमास, हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच ही चल रही जंग दो महाशक्तियों में संघर्ष में बदलती दिख रही है। इस बीच इजरायल ने ईरान को खत्म ही करने की कसम खाई और बदला लेने की धमकी दी है। अमेरिकी वेबसाइट Axios की रिपोर्ट के अनुसार इसके तहत इजरायल अब ईरान के परमाणु ठिकानों और उसके तेल कुओं पर भी अटैक कर सकता है। इससे ईरान के साथ ही आसपास के देशों के लिए भी खतरे की स्थिति पैदा हो सकती है। यही नहीं तेल के ठिकानों पर अटैक की वजह से दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। एक इजरायली अधिकारी ने कहा कि हम यह देखेंगे कि अब हम अटैक करेंगे तो ईरान क्या करेगा। हम ईरान को ऐसा दर्द देंगे कि वह कभी भुलेगा नहीं। कई इजरायली सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के तेल कुओं पर अटैक हो सकता है। इसके अलावा ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम भी निशाने पर रहेगा। अब तक मिली जानकारी के अनुसार इजरायल की ओर से फाइटर जेट्स से हमला किया जा सकता है। इसके अलावा टारगेट अटैक भी हो सकता है, जिसमें ड्रोन जैसी चीजों का इस्तेमाल हो सकता है। इसी तरीके से इजरायल ने तेहरान के अंदर घुसकर इस्माइल हानियेह को मार गिराया था। यह पहला मौका है, जब इजरायल और ईरान इस तरह से आमने-सामने हैं। इसी साल अप्रैल में भी दोनों के बीच मामूली झड़प हुई थी। लेकिन इस बार जंग तेज होती दिख रही है। यहां तक कि अमेरिका ने अतिरिक्त सैनिक भेजने का ऐलान कर दिया है और इजरायल का समर्थन करते हुए कहा है कि उसे ईरान के हमलों से अपनी रक्षा करने का अधिकार है। अब अनुमान है कि इजरायल बड़ा हमला कर सकता है और इससे पूरे मिडल ईस्ट में ही कोहराम की स्थिति पैदा हो सकती है। बता दें कि अब तक ईरान के अलावा किसी भी अन्य मुस्लिम देश ने इजरायल के खिलाफ खुलकर उतरने का ऐलान नहीं किया है। सऊदी अरब, यूएई जैसे देश तो तटस्थ ही हैं। ऐसी स्थिति में इजरायल और ईरान के बीच बड़ा संघर्ष दुनिया को किस तरफ ले जाएगा, यह देखने वाली बात होगी। इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू तो वीडियो जारी करके कह चुके हैं कि ईरान को हमले की कीमत चुकानी होगी। उन्होंने कहा कि ईरान यह नहीं समझता कि हमारा अपनी रक्षा को लेकर संकल्प है। यह संकल्प दुश्मनों के खात्मे तक बना रहेगा।

तुर्की के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र से कहा- इजरायल को रोका जाए

तेल अवीव  तुर्की के राष्ट्रपति तैय्यप एर्दोगन ने गाजा और लेबनान में इजरायल के हमलों को तुरंत रोकने की अपील की है। एर्दोगन ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद अगर गाजा और लेबनान में इजरायल के हमलों को रोकने में कामयाब नहीं हो रही है तो फिर इससे आगे बढ़ते हुए कदम उठाए जाएं। इजरायल नहीं रुक रहा है तो संयुक्त राष्ट्र महासभा को तुरंत 1950 में पारित प्रस्ताव के मुताबिक इजरायल के खिलाफ सेना के इस्तेमाल की सिफारिश करनी चाहिए। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार अंकारा में एक कैबिनेट बैठक के बाद एर्दोगन ने कहा, ‘अगर सुरक्षा परिषद जरूरी इच्छाशक्ति नहीं दिखाती है, तो संयुक्त राष्ट्र महासभा को बल के उपयोग की सिफारिश करने के अधिकार को तेजी से लागू करना चाहिए। एर्दोगन ने कहा कि गाजा में इजरायल ने भारी तबाही मचाई और अब वही लेबनान में शुरू हो गया है। ये सब रुकना बहुत ज्यादा जरूरी है।’ ‘दूसरे मुस्लिम देश भी बनेंगे इजरायल का निशाना’ एर्दोगन ने इस दौरान कहा कि हमारे क्षेत्र में रहने वाले सभी मुस्लिम, यहूदी और ईसाइयों के लिए हम शांति की चाह रखते हैं। हम शांति के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मुस्लिम दुनिया से एकजुट होने का आह्वान करते हैं। एर्दोगन ने कहा कि इजरायल का आक्रामक रवैया बढ़ता जा रहा है, अगर उसे जल्दी नहीं रोका गया तो उसके हमले दूसरे मुस्लिम देशों को भी निशाना बनाएंगे। उत्तर कोरिया के प्रतिनिधि किम सोंग ने भी इजरायल के हमलों की आलोचना की है। सोंग ने न्यूयॉर्क में यूएनजीए के 79वें सत्र में कहा कि यह कल्पना करना भी मुश्किल लगता है कि एक देश (इजरायल) गाजा में भयानक नरसंहार करने के बाद भी किसी भी तरह की निंदा और मंजूरी से अछूता है। ऐसा उसको अमेरिका के संरक्षण की वजह से है। इजरायल ने लेबनान में शुरू किया जमीनी आक्रामण इजरायली रक्षा बलों ने लेबनान में भीषण बमबारी के बाद जमीनी हमला भी शुरू कर दिया है। मंगलवार को आईडीएफ ने कहा कि उसके सैनिकों ने हिजबुल्लाह की साइटों को टारगेट करने के लिए लेबनान की सीमा पार की है। आईडीएफ का कहना है कि उसकी सैनिक दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर लक्षित जमीनी हमले कर रहे हैं। इयरायली सेना ने ऐसे संकेत दिए हैं, जिनसे लगता है कि आने वाले दिनों में हमले बढ़ सकते हैं।

इजरायल ने जने कैसे किया लेबनान पर हमला? आर्मी चीफ ने बताई तैयारी वाली वो बात

तेल अवीव लेबनान के अंदर घुसकर हिजबुल्लाह के टॉप कमांडर सैयद हसन नसरल्लाह को इजरायल की ओर से मार गिराने की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। सबसे ज्यादा हैरानी लोगों को इस तथ्य से हो रही है कि ईरान के ही एक जासूस ने इजरायल के लिए काम किया और नसरल्लाह का पता उसे बता दिया। फ्रांसीसी अखबार ले पैरिसियन की रिपोर्ट के अनुसार करीब डेढ़ घंटे पहले ईरानी दूत ने इजरायल को नसरल्लाह का पता बताया और फिर इजरायल ने उस इमारत को ही नेस्तनाबूद कर दिया, जहां वह अपने कमांडरों के साथ मीटिंग कर रहा था। कहा जा रहा है कि वह बंकर में छिपा था, लेकिन इमारत गिरने की दहशत से ही वह मारा गया। आखिर इजरायल ने कैसे इतनी मजबूत तैयारी की थी कि तेहरान में हमास कमांडर इस्माइल हानियेह को मार गिराया और फिर लेबनान में हिजबुल्लाह के लीडर को मार डाला। यह अहम सवाल है। दरअसल 2006 में जब इजरायल की हिजबुल्लाह से जंग हुई थी तो यह 34 दिनों तक चली थी। इस युद्ध में हिजबुल्लाह के आगे इजरायल की स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। लेकिन यहीं से इजरायल ने सबक सीखा और 2006 के बाद से ही अगली जंग की प्लानिंग शुरू कर दी। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इजरायल ने तब से ही जंग की तैयारी शुरू कर दी थी और खासतौर पर खुफिया मिशन पर उसका जोर था। लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल का सैन्य अभियान जारी है। इजरायल ने हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह को भी मार दिया। इसका खुलासा खुद इजरायली सेना ने किया। इस बीच भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि इजरायल ने लेबनान में कैसे तैयारी के साथ हमला किया। उन्होंने कहा कि जो शेल कंपनी बनाई गई, वो ही इजरायल का मास्टरस्ट्रोक है। ‘इजरायल का मास्टर स्ट्रोक’ आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह के खिलाफ इजरायली सैन्य अभियान पर कहा, ‘जो शेल कंपनी बनाई गई है, वह इजरायल का मास्टरस्ट्रोक है। इसके लिए उसे सालों-साल की तैयारी की जरूरत है। इसका मतलब है कि वे इसके लिए तैयार थे और यही बात मायने रखती है। युद्ध उस तरह से शुरू नहीं होता जिस तरह से आप लड़ना शुरू करते हैं, यह उस दिन से शुरू होता है जिस दिन आप योजना बनाना शुरू करते हैं।’ ‘हमास को खत्म करने पर अड़ गया इजरायल’ आर्मी चीफ ने एक अखबार से बात करते हुए कहा कि इजरायल ने हमास को अपना पहला टारगेट बनाया और उसे जड़ से खत्म करने पर अड़ गया। जनरल द्विवेदी ने विदेश मंत्री एस जयशंकर की एक किताब का हवाला देते हुए इजरायल की रणनीति की तुलना महाभारत के एक प्रसंग से की, जहां अर्जुन, अगर चक्रव्यूह में प्रवेश करते, तो जीवित बच सकते थे और अभिमन्यु भी बच जाता। इसी तरह, इजरायल ने हमास को पहले निपटाने का फैसला किया है। खासतौर पर इजरायल ने यूनिट 8200 को तैनात किया। यह इजरायली सेना की ही एक यूनिट है, जो मोसाद के साथ मिलकर काम करती है। इसके तहत उसने साइबर वारफेयर पर काम किया। इसी एजेंसी की देन थी कि उसने हिजबुल्लाह पर पेजर और वॉकी-टॉकी ब्लास्ट के जरिए हमले कराए। इसी के तहत ईरान की इंटेलिजेंस यूनिट में घुसपैठ की गई और उसके 20 लोगों से सारी सूचना हासिल की गई। ईरान के परमाणु ठिकानों से लेकर हिजबुल्लाह, हमास के लीडर्स तक के बारे में पूरी जानकारी इजरायल को मिल गई। इजरायल के इस इंटेलिजेंस वारफेयर का पहला नतीजा 2008 में आया था। तब मोसाद ने सीआईए के साथ मिलकर हिजबुल्लाह के टॉप लीडर इमाद मुगनियाह को ढेर कर दिया था। इसके बाद 2020 में ईरानी कुद्स फोर्स के नेता कासिम सुलेमानी को अमेरिका ने मार गिराया था। सुलेमानी की लोकेशन की पूरी जानकारी इजरायली एजेंसी ने ही अमेरिका को दी थी, जिसे इराक में मारा गया था। इसी दौरान इजरायल नसरल्लाह को मार गिराने वाला था, लेकिन तब ऐसा नहीं किया। इसकी वजह थी कि इजरायल तब युद्ध नहीं चाहता था। अब इजरायल की वह 18 साल पुरानी तैयारी काम आ रही है। उसने 7 दिनों में हिजबुल्लाह के सात कमांडरों को मार गिराया है। इसके अलावा हमास के लीडर्स को भी उसने ढेर किया है।

सामान्य यहूदियों की तरह सेना में अनिवार्य सेवा देना जरूरी, इजरायल की सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भड़के कट्टर यहूदी

तेल अवीव. इजरायल के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद कट्टरपंथी यहूदी भड़के हुए हैं और वे सड़कों पर उतर आए हैं। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि अब अति रूढ़िवादी यहूदियों को भी सामान्य यहूदियों की तरह सेना में अनिवार्य सेवा देनी होगी। इसके अलावा सरकार की तरफ से मिलने वाली विशेष सुविधाएं उन्हें नहीं दी जाएंगी। अब तक कट्टर यहूदियों के लिए सेना में सेवा देना अनिवार्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि युवा हरेदी पुरुषों को भी सेना में भर्ती किया जाना चाहिए। अब येशिवा में पढ़ने वाले युवा इस फैसले के खिलाफ उतर आए हैं। उनका कहना है कि इससे उनके धार्मिक जीवन पर असर पड़ेगा और वे धर्म का पालन नहीं कर पाएंगे। उनका कहना है कि उनका आध्यात्मिक जीवन और पूजा-पाठ इजरायल की सुरक्षा के लिए जरूरी है। रिपोर्ट की मानें तो युवाओं को इस बात पर ऐतराज है कि अगर उन्हें सेना में जाना पड़ा तो उनको धार्मिक भक्ति के रास्ते से हटना पड़ेगा। ऐसे में उनकी आस्था कमजोर हो जाएगी जो कि देश के लिए भी खतरनाक साबित होगी। उनका कहना है कि इजरायली सेना को भी उनकी कोई जरूरत नहीं है। कट्टर यहूदी मानते हैं कि उनके धर्म को बचाए रखने के लिए जरूरी है कि वे लोग धर्म का पालन करें और अन्य कामों में ज्यादा समय ना गवाएं। इजरायल में अति-रूढ़िवादी लोगों की संख्या 10 लाख से भी ज्यादा है। यानी यह इजरायल की जनसंख्या के 12 फीसदी के करीब है। अति रूढ़िवादी दलों का सत्ता में भी दखल रहता है। लंबे समय से ये दल प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का साथ दे रहे हैं। कट्टर यहूदियों को टैक्स में भी छूट मिलती है। वहीं सामान्य यहूदी सेना में अनिवार्य सेवा भी देते हैं और टैक्स का भी भुगतान करते हैं। पहले भी इजरायल की संसद में एक विधेयक पारित हुआ था जिसके मुताबिक हरेदी युवाओं को आंशिक रूप से सेना में भर्ती किया जाना था। हालांकि यह कानून अब तक लागू नहीं हो पाया। इस कानून का हरेदी नेता विरोध करते हैं। येशिवा छात्रों को मिलती है छूट येशिवा छात्र वे होते हैं जो कि टोरा का अध्ययन करते हैं और यहूदी धर्म के नियमों का कट्टरता से पालन करते हैं। इन्हें सेना में जाने से छूट है। वहीं यह समूह हमेशा से ही बदलाव के खिलाफ रहा है। वहीं कट्टरपंथी यहूदियों का प्रदर्शन कई जगहों पर उग्र हो रहा है। कई  इलाकों में हिंसा और तोड़फोड़ भी हुई है। अब सवाल है कि बेंजामिन नेतन्याहू सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के सपोर्ट में कदम उठाएंगे या फिर राजनीतिक फायदे के लिए कोई और रास्ता निकालेंगे।

बिना शर्त स्थायी युद्ध विराम की करेगा बातचीत, इस्राइल से जंग के बीच हमास का रुख नरम

गाजा. हमास और इस्राइल बीते नौ महीने से जंग लड़ रहे हैं। इस्राइल द्वारा हमास को खत्म करने का संकल्प गाजा पट्टी के लोगों पर भारी पड़ रहा है। गाजा में पैदा हुई मानवीय परिस्थितियों को लेकर देशभर में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस बीच, हमास का रुख कुछ नरम होता दिख रहा है। वह किसी भी समझौते पर पहुंचने से पहले इस्राइल पर लगातार स्थायी युद्धविराम के लिए दबाव डालने की अपनी जिद पर पुनर्विचार करने के लिए तैयार है। गाजा में युद्ध विराम तक पहुंचने के लिए चल रहे प्रयासों में यह बयान एक महत्वपूर्ण पल है। हमास लगातार कई मांगे रखता आ रहा है। हालांकि अब वह बिना किसी शर्त के एक अस्थायी युद्ध विराम पर बातचीत शुरू करने के लिए तैयार है। हमास के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि संशोधित दृष्टिकोण से समझौते के प्रारंभिक चरण के दौरान स्थायी युद्धविराम पर बातचीत जारी रखने की अनुमति मिल जाएगी, जिसके छह सप्ताह तक चलने की उम्मीद है। महत्वपूर्ण बात यह है कि मध्यस्थ अस्थायी युद्धविराम के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करेंगे, गाजा में मानवीय सहायता पहुंचाने में सुविधा प्रदान करेंगे, तथा वार्ता जारी रहने तक इस्राइली सैनिकों की वापसी की निगरानी करेंगे। मसौदे में कहा गया है कि 16वें दिन से पहले, इस समझौते के दूसरे चरण के कार्यान्वयन की शर्तों को अंतिम रूप देने के लिए दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुरू हो जाएगी। पहले चरण के पांचवें सप्ताह के अंत से पहले यह बातचीत पूरी हो जानी चाहिए। कतर में हो रहीं बैठक हमास के रुख में यह बदलाव कतर में इस्राइल और हमास के प्रतिनिधियों के बीच फिर से शुरू हुई वार्ता के बीच आया है। बता दें, इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ओर से व्यापक समझौते पर मध्यस्थता के उद्देश्य से विस्तृत चर्चा करने की अनुमति मिलने के बाद यह बातचीत फिर से शुरू हुई। एक रिपोर्ट के अनुसार, मोसाद के निदेशक डेविड बार्निया ने मध्यस्थों से मिलने तथा युद्ध विराम और बंधकों की रिहाई को शामिल करते हुए संभावित नए समझौते की शर्तों पर चर्चा करने के लिए कतर की यात्रा की। वहीं एक इस्राइली मसौदा प्रस्ताव का विवरण स्थानीय मीडिया में सामने आया है। इसमें एक तय समय सीमा के भीतर बातचीत शुरू करने के प्रावधान शामिल हैं। हालांकि, इस्राइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता की पुष्टि करने से परहेज किया है। हमास और इस्राइल के बीच एक समझौते को सुरक्षित करने के प्रयासों को हाल के महीनों में महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। नेतन्याहू पर इस्राइली बंधकों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए दक्षिणपंथी मंत्रियों और बंधकों के परिवारों सहित विभिन्न क्षेत्रों से दबाव है। यह है मामला हमास ने सात अक्तूबर को इस्राइली शहरों पर पांच हजार से ज्यादा रॉकेट दागकर हमले की शुरुआत की थी। इसके बाद हमास के आतंकियों ने इस्राइल में घुसकर लोगों को मौत के घाट उतारा। इसके जवाब में इस्राइल ने हमास आतंकियों के खिलाफ गाजा में ऑपरेशन शुरू किया था। इस ऑपरेशन में गाजा स्थित हमास के ठिकानों पर जबरदस्त बमबारी की गई है, जिससे अधिकतर गाजा खंडहर में तब्दील हो गया है। अब तक इस्राइल और गाजा में कुल मिलाकर 37000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

गाजा में हर दिन मानवीय सहायता पहुंचाने कुछ देर युद्ध अभियान रोकेगा इस्राइल

गाजा. इस्राइली सेना ने मानवीय सहायता की बढ़ी हुई मांग की डिरीवरी की अनुमति देते हुए गाजा में अपने आक्रमण पर कूटनीतिक तौर पर रोक लगाने की घोषमा की। सेना ने कहा कि राफा क्षेत्र में सुबह के आठ बजे से शाम के सात बजे तक रोक लगाई गई है। अगली सूचना तक हर दिन रोक रहेगी। इस रोक का उद्देश्य सहायता ट्रकों को इस्राइल नियंत्रित केरेम शेलोम क्रॉसिंग के पास पहुंचाना है। दरअसल यह क्षेत्र सहायता पहुंचाने का मुख्य द्वार है। बताया गया कि इस रोक को संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों के साथ समंवित किया जा रहा है। आठ महीने से इस्राइली सेना लगातार गाजा पर हमले कर रहे हैं। इस हमले ने गाजा को मानवीय संकट में डाल दिया। यूएन ने इस दौरान गाजा में भूखमरी और सैकड़ो-हजारों लोगों के अकाल के कगार में होने की रिपोर्ट दी है। अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों ने इस्राइल से संकट को कम करने का आग्रह किया। संयुक्त राष्ट्र मानवतावादी कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, यूएन को छह मई से छह जून तक प्रतिदिन सहायता के तौर पर औसतन 68 ट्रक प्राप्त हुए। यह अप्रैल में प्रतिदिन औसतन 168 से कापी कम था। सहायता समूहों का कहना है कि प्रतिदिन 500 ट्रकों की जरूरत है। गाजा में जैसे-जैसे मानवीय जरूरतें बढ़ने लगी, सहायता का प्रवाह कम होने लगा। करीबन दस लाख फलस्तीनी राफा भाग गए। कई पहले ही भाग गए थे, उनमें से अधिकांश अब टूटे फूटे टेंट और शिविरों में रह रहे हैं। गाजा में सहायता वितरण की देखरेख करने वाली इस्राइली सैन्य संस्था कोगाट का कहना है कि सहायता ट्रकों के प्रवेश पर रोक नहीं है। उन्होंने बताया कि दो मई से 13 जून के बीच 8,600 ट्रकों ने विभिन्न क्रॉसिंग से गाजा में प्रवेश किया। कोगाट के प्रवक्ता शिमोन फ्रीडमैन ने कहा, “यह संयुक्त राष्ट्र की गलती थी कि उसका माल केरेम शालोम के गाजा क्षेत्र में जमा हो गया।” हालांकि, यूएन ने इन आरोपों को नकार दिया। यूएन ने कहा कि इस्राइल और हमास की लड़ाई अक्सर गाजा के अंदर यूएन के ट्रकों के लिए केरेम शालोम तक यात्रा करना  खतरनाक बना देती है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा में कमी के कारण कई बार रास्ते में ही भीड़ ट्रकों को लूट लेते हैं।

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