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हत्याकांड के आरोपी ने सेंट्रल जेल में किया सुसाइड,टॉवेल से फंदा बनाकर लगाई फांसी

ग्वालियर  बहुचर्चित चिराग शिवहरे हत्याकांड के आरोपी शिवम जादौन ने जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह अपने भाई और पिता के साथ चिराग शिवहरे हत्याकांड में विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में बंद था। बीती रात बंद पड़ी डबल स्टोरी बैरक के पीछे शिवम ने अपनी साफी को फाड़ कर फांसी लगा ली। सुबह जब शिवम जादौन अपनी बैरक में नहीं मिला। तब उसकी खोजबीन शुरू हुई। इसके बाद जेल के प्रहरी को शिवम जादौन आखंड क्षेत्र में फांसी पर लटका मिला। जेल अधीक्षक ने इस मामले में ड्यूटी पर तैनात प्रहरी को निलंबित कर दिया है। उल्लेखनीय है कि डबरा के रहने वाले चिराग शिवहरे का जुलाई 2023 में जिंदा जलाकर कत्ल कर दिया गया था। उसका जला हुआ शरीर कलेक्ट्रेट के सामने वाले जंगल में मिला था। इस मामले में युवती सहित शिवम और उसके भाई और पिता को भी नामजद किया गया था। युवती की जमानत हो चुकी है। दो दिन पहले ही शिवम जादौन की जमानत कोर्ट से खारिज हुई थी। डिप्रेशन के कारण उठाया कदम पता चला है कि उसका चिराग शिवहरे कत्ल को लेकर अपना ही भाई से विवाद था। वह अपने भाई से इस कत्ल को लेकर नाराज था। संभावना जताई जा रही है कि अवसाद के कारण शिवम ने आत्महत्या की होगी। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर शिवम जादौन की लाश को पोस्टमार्टम के लिए जयारोग्य अस्पताल के लिए भेज दिया है। भाई के किए की सजा काट रहा हूं बताया जा रहा है कि मृतक इन सब के लिए भाई को जिम्मेदार मानता था। जब भी कोई उससे जेल में मिलने जाता था। तो वह बहुत दुखी होता था, ओर कहता था कि भाई के किए कि सजा भुगत वो रहा है। वहीं जमानत पर छूटी भाई की प्रेमिका के मिलने आने पर भी दोनों को इस कांड के लिए दोषी मानता था। और कहता भी था कि सब तुम्हारी वजह से हो रहा है।

अंबेडकर जयंती पर 10 कैदियों को मिला खास तोहफा, बंदियों के खिल उठे चेहरे

इंदौर मध्यप्रदेश की सेंट्रल जेल से भीमराव अंबेडकर बाबा साहब की जयंती पर मध्यप्रदेश की सेंट्रल जेलों से अच्छे चाल चलन के चलते कैदियों को रिहा किया गया है। इंदौर की सेंट्रल जेल से भी ऐसे दस कैदियों को रिहा किया गया जो कि उम्र कैद की सजा काट रहे थे, जिसमें एक महिला कैदी भी शामिल है। भीमराव अंबेडकर बाबा साहब की जन्म दिवस के मौके पर इंदौर की सेंट्रल जेल से ऐसे दस कैदी जिसमें एक महिला भी शामिल है को अच्छे चाल चलन के चलते रिहा किया है। किसी ने जमीनी विवाद के चलते अपने ही भाई की हत्या कर डाली तो किसी ने मामूली विवाद में ही अपनों का खून बहा दिया था। वहीं एक कैदी ऐसा भी है जिसने जेल में रहकर 64 हजार की राशि भी कमाई है। जेल से छूटे कैदी बुरहानपुर के रहने वाले दशरथ ने बताया कि हत्या करने के बाद से ही पछतावा हो रहा है। अब बाहर जाकर जेल से मिली हुई राशि से खेती बाड़ी कर जीवन गुजरेंगे।

जेल के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए जेलर ने अपराधियों के साथ खिंचवाई फोटो

विदिशा  मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के विदिशा (Vidisha) में जेल के अंदर का एक वीडियो (Video From Inside the Prison) सोशल मीडिया (Social Media) पर वायरल (Viral) हो रहा है। जिसने सुरक्षा व्यवस्था (Security System) पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि जेल के अंदर इफ्तार पार्टी (Iftar Party) के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग किया जा रहा है और इसी दौरान जेलर के साथ अपराधियों की फोटो भी खिंचवाई गई है। जेल के नियमों की धज्जियां उड़ाने वाला ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इफ्तार पार्टी के दौरान वहां जमकर वीडियो बनाई गई और फिर वह वायरल हो गई। जेल प्रशासन की मिलीभगत के चलते जेल की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा उल्लंघन हुआ है। जेल की चार दीवारी के अंदर मोबाइल फोन या कैमरा ले जाना सख्त मना है। ऐसे में अब सवाल उठता है कि जेल के अंदर मोबाइल फोन कैसे पहुंचा? वायरल वीडियो ने जेल की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो वायरल होते ही जेल प्रशासन जवाब देने से भाग रहा है। मामले को लेकर विदिशा कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने मामले की जांच की बात कही है। वहीं जेल में हुई इस तरह की सुरक्षा में चूक से हर कोई हैरान है, क्योंकि जेल के अंदर रिकॉर्डिंग करना कानून का उल्लंघन है। इसके लिए गंभीर दंड का प्रावधान है। आपराधिक संहिता की धारा 183 (भाग VI) गुप्त रिकॉर्डिंग को प्रतिबंधित करती है। अवैध रिकॉर्डिंग करने वालों को पांच साल तक की जेल की सजा हो सकती है।

राजधानी भोपाल की सेट्रंल जेल में कैदियों की ईद पर मायूस, जेल में मुलाकात पर रोक, कांग्रेस विधायक ने उठाए सवाल

भोपाल  भोपाल सेंट्रल जेल में इस बार ईद पर मुस्लिम कैदियों को अपने परिवार वालों से खुलकर मिलने का मौका नहीं मिलेगा। जेल प्रशासन ने जेल में चल रहे निर्माण कार्य को इसका कारण बताया है। इस फैसले से कैदियों और उनके परिवार वाले नाराज हैं। हर साल राखी, ईद और दीपावली जैसे त्योहारों पर कैदियों को अपने परिवार वालों से खुलकर मिलने दिया जाता था। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है और जेल डीजी को पत्र लिखा है। वहीं, भाजपा नेता अजय सिंह यादव ने जेल प्रशासन के फैसले को सही ठहराया है। उनका कहना है कि जेल में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। भाजपा नेता अजय सिंह यादव ने इस बारे में कहा कि भोपाल सेंट्रल जेल में कई गंभीर अपराधी बंद हैं। कैदियों की सुरक्षा के लिए और गंभीर कैदी स्थिति का फायदा उठाकर भाग न जाएं, इसके लिए जेल प्रबंधन ने यह नियम बनाया है।कांग्रेस पार्टी का रवैया गैरजिम्मेदाराना है और वह बेकार की राजनीति करती है। जब जेल में स्थिति सामान्य हो जाएगी तो पहले की तरह विशेष मुलाकात का प्रावधान होगा। 3500 से ज्यादा कैदी मौजूद सेंट्रल जेल में अभी 3500 से ज्यादा कैदी हैं। जेल के अधीक्षक राकेश भांगरे ने बताया कि जेल में निर्माण कार्य चल रहा है। इसलिए इस बार ईद पर खुली मुलाकात नहीं हो पाएगी। हालांकि, सामान्य मुलाकात की व्यवस्था जारी रहेगी। कांग्रेस विधायक की नाराजगी इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने जेल डीजी को पत्र लिखा है। उन्होंने लिखा है कि पिछले 40-45 सालों से त्योहारों पर खुली मुलाकात की परंपरा रही है। इस दौरान कभी कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। यह व्यवस्था न केवल मुस्लिम परिवारों, बल्कि दूसरे धर्मों के लोगों को भी अपने रिश्तेदारों से मिलने का मौका देती है। जेल डीजी को लिखा मुस्लिम विधायक ने लेटर इस फैसले के खिलाफ भोपाल मध्य से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने जेल डीजी को पत्र लिखकर आपत्ति जताई है. अपने पत्र में उन्होंने लिखा, “पिछले 40-45 वर्षों से त्योहारों पर खुली मुलाकात की परंपरा रही है और इस दौरान कभी कोई अप्रिय घटना नहीं हुई. यह व्यवस्था न केवल मुस्लिम परिवारों, बल्कि बहुसंख्यक समुदाय के परिजनों को भी अपने रिश्तेदारों से मिलने का अवसर देती है. जेल प्रबंधन के इस फैसले से बंदियों और उनके परिवारों में रोष है. मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि सहानुभूतिपूर्वक विचार कर ईद पर खुली मुलाकात की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.” यह पहली बार है जब जेल प्रशासन ने निर्माण कार्य का हवाला देकर त्योहार पर खुली मुलाकात को प्रतिबंधित किया है. इस निर्णय ने शहर में चर्चा का माहौल पैदा कर दिया है और लोग इस परंपरा को बनाए रखने की मांग कर रहे हैं. अब सबकी नजरें डीजीपी के जवाब और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं.

जान से मारने की धमकी देकर दरिंदे भाई ने कई बार किया बहन से रेप, अदालत ने 20 साल जेल की सजा और 1000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई

भोपाल  राजधानी भोपाल के एक विशेष न्यायालय ने नाबालिग बच्ची के साथ गलत काम करने वाले उसके सगे भाई को 20 साल की जेल और एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। मामला साल 2023 का है। पीड़िता ने 10 जून 2023 को अपने अब्बू के साथ निशातपुरा थाने में लिखित आवेदन दिया था। आवेदन में उसने बताया था कि जब उसके अब्बू उसकी अम्मी और उसकी बहनों को छोड़ कर चले गये तो अम्मी ने उसे व उसकी बहनों को नित्य सेवा सदन सोसाइट में डाल दिया था। इस दौरान सोसाइटी में रहते हुए होस्टल वार्डन से उसका विवाद हो गया था। इस विवाद के बाद नाबालिग को उसके उसके सगे भाई के साथ भेज दिया। इसके बाद इस आरोपी सगे भाई ने नाबालिग को दादी के घर छोड़ दिया। इसके बाद 8 जून 2023 भाई नाबालिग से मिलने आया और दादी के घर पर न रहते हुए उसके साथ जबरदस्ती गंदा काम किया। उसने यह भी कहा कि उसने किसी को बताया तो अच्छा नहीं होगा। दादी को बताई सारी बात इसके बाद वह कई दिनों तक नाबालिग को डराकर गलत काम करता रहा। कई दिनों बाद पीड़ित नाबालिग ने यह बात अपनी दादी को बताई। इसके बाद यह पूरा मामला पुलिस के पास पहुंचा। इस मामले में शासन की ओर से दिव्या शुक्ला और ज्योति कुजूर ने पैरवी की। विशेष न्यायालय ने 15 वर्षीय नाबालिग के साथ गलत काम करने वाले उसके सगे भाई को 20 साल कारावास की सजा सुनाई साथ ही उसपर जुर्माना भी लगाया है।

नाडे़ से रेपिस्ट पिता ने जेल में लगाई फांसी, बेटी के साथ रेप करने के जुर्म में 2 दिन पहले हुई थी सजा

medication into the body

खंडवा  जिला जेल में को उसे वक्त सनसनी फैल गई जब कैदियों ने जेल में शोर मचाना शुरू किया। उसने बताया कि एक सजायाफ्ता कैदी ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी है। घटना की जानकारी लगते हीं खंडवा जिला जेल की सुपरिटेंडेंट के साथ सीनियर जेलर मौके पर पहुंचे। घटना की जानकारी तत्काल खंडवा जिला प्रशासन को दी गई। सूचना मिलते ही खंडवा सीएसपी अभिनव बारंगे घटनास्थल पर पहुंचे। यहां फोरेंसिक एक्सपर्ट को भी तत्काल मौके पर बुलाया गया। मामले को लेकर जिला प्रशासन ने ज्यूडिशियल जांच के आदेश दिए हैं। चार दिन पहले ही कैदी को सुनाई गई थी सजा मिली जानकारी के अनुसार आरोपी को दोहरे आजीवन कारावास की सजा से कुछ दिन पहले ही दंडित किया गया था। पोक्सो एक्ट के इस मामले में 4 साल से आरोपी के मामले की सुनवाई खंडवा के विशेष न्यायालय में चल रही थी। आरोपी पर अपनी ही बेटी के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा था। जो DNA जांच में सही पाया गया था। हालांकि आरोपी ने जिस तरह से मौत को गले लगाया उससे जेल में हड़कंप मच गया। पत्नी से हुए झगड़े का बदला बेटी से लिया आरोपी को जिस मामले में विशेष न्यायालय ने सजा सुनाई थी वह घटना 6 जुलाई 2021 की है। आरोपी की पत्नी और आरोपी के बीच झगड़े के बाद पत्नी अपनी मायके चली गई थी। जबकि 11 साल की बेटी घर पर ही थी। पत्नी के झगड़े से नाराज आरोपी ने आधी रात को अपनी ही बेटी के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया था। बेटी के शोर मचाने पर उसकी गला दबाकर हत्या करने की भी कोशिश की थी। अस्पताल में कुछ दिनों तक संघर्ष करने के बाद बेटी ने दम तोड़ दिया था। घटना की होगी ज्यूडिशियल जांच खंडवा जिला जेल के जेल सुपरिंटेंडेंट आदित्य चतुर्वेदी ने बताया कि इस मामले की जानकारी खंडवा जिला प्रशासन के साथ जिला कोर्ट को भी दे दी गई है। लिहाजा इस मामले में ज्यूडिशियल जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जांच का आदेश के बाद मंगलवार रात को मृतक के शव को खंडवा जिला अस्पताल सुरक्षा व्यवस्था के बीच भिजवाया गया। बुधवार को मामले में पोस्टमार्टम किया जाएगा।

कोरोना संक्रमण से पैरोल, प्रदेशभर की जेलों से लापता हैं 70 बंदी

रायपुर रायपुर सेंट्रल जेल से सात ऐसे बंदी हैं, जो पैरोल पर छूटने के बाद वापस नहीं लौटे। एक बंदी दिसंबर 2002 से गायब हैं। इनमें अधिकतर बंदी हत्या के प्रकरण में जेल में बंद थे। जेल और पुलिस प्रशासन ने इन बंदियों की कई बार तलाश की, लेकिन अब तक उनका कोई पता नहीं चला। प्रदेशभर में ऐसे बंदियों की संख्या करीब 70 है। अब जेल प्रशासन इन बंदियों की वापसी की राह ताक रहा है। सूचना के अधिकार के तहत रायपुर जेल के वारंट अधिकारी ने सात बंदियों के पेरोल पर छोड़े जाने के बाद से नहीं लौटने की जानकारी दी है। इसके अनुसार हत्या के केस में बंद शिवकुमार उर्फ मुन्ना पांच दिसंबर 2002, गणेश देवांगन 23 जुलाई 2008, संजीत उर्फ सुजीत आठ सितंबर 2010, कृष्ण कुमार 31 अगस्त 2013, राजीव कुमार दो अप्रैल 2020, रूपेंद्र साहू 21 नवंबर 2022 और नरेंद्र श्रीवास 18 जनवरी 2024 से पेरोल पर जेल से छोड़े गए थे। हाई कोर्ट ने दिखाई सख्ती जेल मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले महीने हाई कोर्ट में पैरोल पर गए कैदियों की वापसी न होने के मामले में मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डबल बेंच ने इस मुद्दे पर सख्ती दिखाई थी। मुख्य न्यायाधीश ने डीजीपी जेल से ताजा रिपोर्ट शपथ पत्र के जरिए पेश करने को कहा था। इसके बाद डीजी जेल की ओर से हाई कोर्ट को जानकारी दी गई कि प्रदेश के पांच सेंट्रल जेलों ने 83 कैदी पैरोल से नहीं लौटे थे, जिनमें 10 को गिरफ्तार कर लिया गया और तीन की मृत्यु हो गई थी। अभी भी प्रदेश भर के जेलों से करीब 70 बंदी पैरोल से छूटने के बाद वापस नहीं लौटे हैं। बिलासपुर जेल में भी 22 बंदी नहीं लौटे केंद्रीय जेल बिलासपुर से पैरोल पर गए 22 बंदी लौटे ही नहीं। उनके स्वजन को बार-बार सूचना देने के बाद भी जब बंदी नहीं लौटे, तो जेल प्रबंधन ने संबंधित थानों को फरार बंदियों की जानकारी दी है। प्रबंधन की मानें, तो थानों में उनके फरार होने की एफआईआर दर्ज कराई गई है। सजायाफ्ता बंदियों के वापस जेल नहीं पहुंचने पर जेल प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। बिलासपुर के जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी ने बताया कि न्यायालय के निर्देश पर बंदियों को एक निर्धारित अवधि के बाद पैरोल के बाद वापस जेल लौटना होता है। अधिकांश बंदी लौट भी आते हैं। मगर, 22 बंदी ऐसे हैं जो जेल से बाहर तो निकले, लेकिन वापस लौटकर नहीं आए। कोरोना संक्रमण को देखते हुए दी गई पैरोल कोरोना महामारी के दौरान फैलते संक्रमण को देखते हुए जेल प्रशासन ने अच्छे चाल-चलन वाले बंदियों को पैरोल पर भेजा था। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के दौरान पैरोल की अवधि कई बार बढ़ाई गई थी। नहीं लौटने वालों में इनकी ही संख्या अधिक है। छत्तीसगढ़ में कुल पांच सेंट्रल जेल रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर और अंबिकापुर में हैं। इसके अलावा 12 जिला और 16 उप जेल हैं। केंद्रीय जेलों के अलावा इन जेलों में भी बंदियों को राहत दी गई थी। बंदियों को अंतरिम जमानत पर छोड़ा गया था। इनकी संख्या और वापसी की पुख्ता जानकारी नहीं है। जानकार बताते हैं कि अंतरिम जमानत पर जेल के बाहर गए ज्यादातर बंदियों ने कोर्ट से अपनी जमानत करवा ली है। ऐसे में इन बंदियों की निश्चित संख्या की जानकारी जेल प्रबंधन के पास भी नहीं है।

जेल से रिहा हुए शख्स ने कहा- वह अब अपने परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताएंगे और बागवानी करेंगे

कोलकाता पश्चिम बंगाल के मालदा में एक शख्स अपनी सजा काटकर 36 साल बाद रिहा हुआ है। 36 साल जेल में बिताने के बाद रिहा हुए 104 वर्षीय शख्स ने कहा है उसे यकीन था कि वह कभी जेल से निकल पाएंगे। शख्स ने कहा है कि वह अब अपने परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताएंगे और बागवानी करेंगे। रसिकत मंडल नाम के इस शख्स को 1988 में जमीन से जुड़े विवाद के मामले में अपने भाई की हत्या के आरोप में न्यायिक हिरासत की सजा सुनाई गई थी। मंडल के बेटे ने बताया कि उनके पिता को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रिहा किया गया है। बेटे ने कहा, “कुछ सालों के बाद हर कैदी को जेल से रिहा होने का अधिकार है बशर्ते उसने कारावास के दौरान कोई अनुचित कार्य न किया हो। खुशी है कि सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार उसकी रिहाई का रास्ता साफ कर दिया।” 36 साल की अवधि के दौरान बीच में रसकित करीब एक साल के लिए जमानत पर रिहा हुए थे। हालांकि जमानत अवधि खत्म होने के बाद वह फिर से जेल चले गए। उन्होंने कई बार सेशंस कोर्ट और हाईकोर्ट में अपनी रिहाई के लिए याचिका दायर की थी लेकिन उसकी अर्जी को खारिज कर दिया गया था। मालदा जिले के मानिकचक के रहने वाले मंडल ने मंगलवार को मालदा सुधार गृह के गेट से बाहर निकलते हुए मीडिया से कहा कि अब वह पूरा समय पौधों की देखभाल करने में लगाएंगे। अपनी उम्र के हिसाब से काफी चुस्त-दुरुस्त दिख रहे मंडल ने कहा, “मुझे याद नहीं कि मैंने कितने साल जेल में बिताए। ऐसा लग रहा था कि यह कभी खत्म ही नहीं होगा। मुझे यह भी याद नहीं कि मुझे यहां कब लाया गया था।” उन्होंने कहा, “अब मैं बाहर आ गया हूं और अब भी मुझ में जुनून है। अपने आंगन के छोटे से बगीचे में पौधों की देखभाल कर सकता हूं। मुझे अपने परिवार और नाती-नातिनों की याद आती थी। मैं उनके साथ रहना चाहता हूं।” उनकी उम्र के बारे में पूछे जाने पर मंडल ने कहा कि उनकी उम्र 108 साल है लेकिन उनके साथ आए उनके बेटे ने बताया कि वह 104 साल के हैं। सुधार गृह के अधिकारियों ने पुष्टि की कि रिकॉर्ड में उनकी उम्र 104 साल है। सुधार गृह विभाग के अधिकारियों ने कहा कि यह राज्य की जेलों में बंद सौ साल से अधिक उम्र के कैदियों के बहुत कम मामलों में से एक है।

मध्य प्रदेश में जेल के नियमों में बड़ा बदलाव 1 जनवरी से बंदियों को अब अच्छा और पौष्टिक खाना मिलेगा

भोपाल  जेल के खाने में बड़ा बदलाव होने वाला है। अब कैदियों को दूध, दही, छाछ तो मिलेगा ही और तो और, सलाद भी मिलेगा। यह नया नियम 1 जनवरी से लागू हो सकता है। मध्य प्रदेश में जेल के नियमों में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। जेल में बंदियों को अब अच्छा और पौष्टिक खाना मिलेगा। इसके लिए नया कानून लाया जा रहा है। इस नए कानून में लगभग एक हजार नए नियम शामिल हैं। इसमें सबसे अहम बदलाव खाने को लेकर है। सलाद के साथ दूध, दही और छाछ अब तक जेल में कैदियों को सिर्फ़ सादा खाना मिलता था, लेकिन अब उन्हें दूध, दही, छाछ और सलाद जैसी पौष्टिक चीजें भी मिलेंगी। यह नियम मध्य प्रदेश को देश का पहला ऐसा राज्य बना देगा जो जेल में बंदियों को इतना पौष्टिक आहार देगा। टीबी के मरीजों को मिलेगा अंडा नए नियमों के मुताबिक, टीबी के मरीजों को अंडा दिया जाएगा। साथ ही, हफ़्ते में एक दिन सभी कैदियों को मिठाई भी मिलेगी। इसके अलावा, कैदी अपनी पसंद का खाना भी बना सकेंगे। मंजूरी मिलते ही लागू होगा नियम यह बदलाव ‘मप्र सुधारात्मक सेवाएं व बंदीगृह अधिनियम’ के तहत किए जा रहे हैं। इस कानून का मकसद जेल में बंदियों को बेहतर सुविधाएं देना है। फ़िलहाल, वित्त विभाग इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है। जेल महानिदेशक जीपी सिंह ने बताया, ‘बंदियों के लिए बेहतर खानपान की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। मंजूरी मिलते ही इसे लागू किया जाएगा। फिलहाल, प्रस्ताव का अध्ययन किया जा रहा है।’ वित्त विभाग कर रहा खर्चे का आंकलन मध्य प्रदेश में अभी 45 हजार कैदी हैं। नए नियमों से इन्हें काफ़ी फ़ायदा होगा। नए कानून में यह भी प्रावधान है कि खतरनाक कैदियों को अलग सेल में रखा जाएगा। नए नियमों से जेल का खर्च बढ़ेगा, इसलिए वित्त विभाग मंजूरी देने से पहले इसका आंकलन कर रहा है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो 1 जनवरी से जेलों में यह नया नियम लागू हो जाएगा। 1884 के कानून से चल रही जेल यह बदलाव इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि अभी जेलों में 1894 का कानून लागू है। यह कानून अंग्रेजों ने बनाया था। इसमें कई नियम ऐसे हैं जो आज के समय में प्रासंगिक नहीं हैं। इसलिए सरकार ने पुराने कानून को बदलकर नया कानून लाने का फ़ैसला किया है। जेल सजा की नहीं, सुधार की जगह सरकार का मानना है कि जेल सज़ा देने की जगह नहीं, बल्कि सुधार करने की जगह होनी चाहिए। नए नियमों से यही उम्मीद है कि कैदियों का जीवन स्तर बेहतर होगा और वे समाज की मुख्यधारा में वापस लौट सकेंगे।

Jabalpur Jail : सेंट्रल जेल से फरार हुए कैदी, अधिकारी और कर्मचारियों ने आधा किलोमीटर तक पीछा कर पकड़ा

जबलपुर जबलपुर मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर पाटन उप जेल से शुक्रवार की सुबह दो कैदी फरार हो गए। जानकारी लगते ही जेल विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों ने दोनों कैदियों को आधा किलोमीटर तक पीछा कर पकड़ लिया। जेल के पीछे की 15 फीट ऊंची दीवार को पार करते समय दोनों कैदियों के पैर और कमर में चोट लग गई थी। दोनों कैदी खेत में लंगड़ाते हुए भाग रहे थे। सूचना मिलते ही जेलर हेमेन्द्र बागरी मौके पर पहुंचे और दोनों कैदियों को आधा किलोमीटर दूर ग्राम वनवार से पकड़ लिया। पीछा करने के दौरान जेलर के पैर में भी चोट आई है। जानकारी के मुताबिक पाटन, कटरा निवासी शेख शहादत और कटंगी, कूड़न मोहल्ला का रहने वाला कृष्णा यादव दोनों ही विचाराधीन कैदी हैं। दोनों करीब पांच माह से पाटन उप जेल में बंद है। शेख शहादत रेप का आरोपी है। जबकि कृष्णा अवैध शराब बेचने के मामले में बंद है। जेलर के मुताबिक घटना की जानकारी जेल मुख्यालय भोपाल, केन्द्रीय जेल जबलपुर और कोर्ट की दी गई है। जेल के अंदर चल रहा है काम पाटन उप जेल में इस समय पुताई और साफ-सफाई का काम भी चल रहा है। जिसके चलते बाहर से मिस्त्री और मजदूर भी रोजाना आ रहे है। आशंका जताई जा रही है कि संभवत: दोनों ही कैदियों ने इसी दौरान किसी बाहरी व्यक्ति के साथ मिलकर जेल से भागने का प्लान बनाया होगा। फिलहाल दोनों कैदियों का जेल में इलाज करवाया जा रहा है। इधर घटना की जानकारी मिलते ही जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर भी पाटन उप जेल पहुंचे हैं।  

उज्जैन : कुख्यात कैदी इंदौर के अस्पताल से फरार, वजह जानकर दंग रह जाएंगे आप

इंदौर / उज्जैन उज्जैन की भैरवगढ़ जेल में बंद एक कैदी को तबीयत खराब होने पर पिछले दिनों इंदौर के संयोगितागंज थाना क्षेत्र स्थित सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां से मौका मिलते ही कैदी फरार हो गया। मामले में पुलिस आरोपी को तलाश कर रही है। संयोगितागंज थाना टीआई सतीश पटेल के मुताबिक इरफान लाला पिता सरवन खान (31) निवासी खुदीराम बोस मार्ग उज्जैन भादंवि की धारा 262 के तहत उज्जैन जेल में बंद है। अपहरण के आरोपी इरफान लाला को तबीयत खराब होने पर 4 अक्टूबर को सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तब से वह अस्पताल में ही वार्ड 201 में भर्ती था। देर रात को मौका पाकर वह हथकड़ी निकालकर पुलिस अभिरक्षा से भाग निकला। मामले मे पुलिस दो टीमें लगाकर आरोपी की सरगर्मी से तलाश कर रही है। आरोपी को मुंह के कैंसर की बीमारी थी। इलाज के लिए उसे भर्ती किया गया था। इंदौरी बदमाश ने उज्जैन मे की रंगदारी खाराकुंआ थाना क्षेत्र स्थित बड़ा सराफा बाजार में इंदौर के एक बदामश ने दुकानदार के साथ रंगदारी की। बदमाश ने शराब पीने के लिए दुकानदार से रुपए मां,गे नहीं देने पर दुकान का सामान उठाकर ले जाने लगा। पुलिस ने बदमाश के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर मामला जांच में लिया है। पुलिस ने बताया अभिषेक पिता रणछोड़ दास गुप्ता उम्र 35 वर्ष की कॉस्मेटिक सामान विक्रय की दुकान बड़ा सराफा में स्थित है। सुबह उसकी दुकान पर इंदौर के बिजासन टेकरी के समीप का रहने वाला दिनेश पिता मुन्नालाल पहुंचा और शराब पीने के लिए रुपए की मांग की। अभिषेक ने रुपए देने से इंकार किया तो दिनेश सामान उठाकर जाने लगा। उसे पकड़ा तो जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने दिनेश के खिलाफ केस दर्ज कर मामला जांच में लिया है।

कारागार में रामलीला मंचन के दौरान हुई यह घटना, दो खूंखार कैदी फरार

हरिद्वार  उत्तराखंड के हरिद्वार से ऐसा मामला सामने आया है, जिससे पुलिस और प्रशासन महकमे में हड़कंप मच गया है। हर साल की तरह इस बार भी रोशनाबाद जेल में रामलीला का मंचन चल रहा था। इसी दौरान शुक्रवार को वानर का किरदार निभा रहे दो कैदी मौका देखकर फरार हो गए। रामलीला और जेल में हो रहे निर्माण कार्य का फायदा उठाकर दोनों भाग निकले। यह घटना बीती रात की है। रामलीला मंचन के दौरान हरिद्वार जेल से दो खूंखार कैदी फरार हो गए। मंचन के दौरान इधर माता सीता की खोज हो रही थी, उधर दो वानर रूपी कैदी दीवार फांद कर भाग निकले। सभी लोग रामलीला मंचन के दृश्यों में सराबोर थे और किसी को भी घटना का पता नहीं लग सका। जेल से फरार हुए आरोपियों की पहचान रुड़की निवासी पंकज और यूपी के गोंडा निवासी राजकुमार के तौर पर की गई है। ये दोनों सीढ़ी लगाकर दीवार लांघ गए। फरार हुए दोनों कैदी जघन्य अपराधों के दोषी है। घटना के बाद हड़कंप मच गया। आरोपियों की तलाश जारी है। पंकज हत्या के मामले में आजीवन कारावास काट रहा था। वहीं राजकुमार अपहरण के मामले में विचाराधीन कैदी है। कैदियों की फरारी के बाद जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उधर पुलिस अधिकारियों का कहना कि आरोपियों की तलाश की जा रही है।

रेप का आरोपित अतुल जेल की उसी तरह की अंडा सेल में रहेगा, जिसमें सिमी आतंकी भी कैद हैं

 भोपाल शाहजहांनाबाद थाना क्षेत्र में स्थित वाजपेयी नगर मल्टी में पांच वर्ष की मासूम बच्ची से दुष्कर्म और हत्या मामले में मुख्य आरोपित अतुल भालसे की पुलिस रिमांड सोमवार को समाप्त हो गई। पुलिस ने उसे जिला न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। आरोपित को भारी सुरक्षा के साथ जेल ले जाया गया। सीआईएसएफ के जवान उसे भोपाल सेंट्रल जेल लेकर पहुंचे। पुलिस को आरोपित की तीन दिन की रिमांड मिली थी। सूत्रों के मुताबिक आरोपित अतुल जेल की उसी तरह की अंडा सेल में रहेगा, जिसमें सिमी आतंकी भी कैद हैं। अंडा सेल जेल के अ और ब खंड के बीच बनी है, जहां जेल प्रशासन अक्सर गंभीर अपराध के मामलों में आरोपितों को बंद रखता है। इन्हें आम कैदियो से अलग रखा जाता है। आरोपित के मोबाइल से भी मिले बच्चियों के फोटो पुलिस की छानबीन के दौरान आरोपित अतुल के मोबाइल में बच्चियों के फोटो मिले हैं। जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि वह अपनी सह-आरोपित बहन चंचल के साथ संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त है। इससे पहले चंचल के मोबाइल से भी बच्चियों के फोटो के वाट्सएप पर लेन-देन की पुष्टि पुलिस कर चुकी है। रिमांड अवधि के दौरान आरोपित के घर से पुलिस घटना से संबंधित सभी सामान की जब्ती कर चुकी है।

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