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डोनाल्ड ट्रंप को आई समझ, भारत के बिना नहीं चलेगा काम, जयशंकर ने स्पष्ट किया, दोनों हाथ में लड्डू

नई दिल्ली  क्रिटिकल या रेयर अर्थ मिनरल्‍स एक स्‍ट्रैटजिक मैटेरियल है. ग्रीन एनर्जी से लेकर इलेक्ट्रिक व्‍हीकल और फाइटर जेट से लेकर स्‍मार्टफो तक में इसका उपयोग होता है. इसके बिना इन सभी का उत्‍पादन संभव नहीं है. पिछले साल अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के टैरिफ वॉर के जवाब में चीन ने रेयर अर्थ मिनरल्‍स के निर्यात पर नकेल कस दी थी. बीजिंग के इस कदम से भारत से लेकर यूरोप और अमेरिका तक की ऑटो इंडस्‍ट्री से लेकर अन्‍य उद्योग धंधों पर बुरा असर पड़ा था. बता दें कि चीन ग्‍लोबल लेवल पर 90 फीसद से भी ज्‍यादा क्रिटिकल मिनरल्‍स का निर्यात करता है. इस सेक्‍टर में पड़ोसी देश का एकाधिकार है. अब अमेरिका ने चीन के इस वर्चस्‍व को तोड़ने की दिशा में मजबूत और सार्थक पहल की है. विदेश मंत्री मार्को रुबियो के आह्वान पर वॉशिंगटन में 55 देशों के विदेश मंत्री जुटे. रेयल अर्थ मिनरल्‍स की सप्‍लाई को बाधाओं से दूर रखने के लिए 50 देशों का ब्‍लॉक बनाने का प्रस्‍ताव रखा गया है. इसमें भारत की भूमिका अहम होने वाली है. भारत की तरफ से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस बैठक में शिरकत की. रेयर अर्थ मिनरल्‍स पर ग्‍लोबल पहल भारत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. भारत में क्रिटिकल मिनरल्‍स का भंडार है. इस ब्‍लॉक में शामिल होने से घरेलू स्‍तर पर रेयर अर्थ मिनरल्‍स की माइनिंग से लेकर उसकी प्रोसेसिंग तक में टेक्‍नोलॉजिकल सहयोग मिलेगा. दूसरी तरफ, चीन पर निर्भरता भी कम होगी, जिससे डोमेस्टिक इंडस्‍ट्री को महत्‍वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा. इससे भविष्‍य में भारत को रणनीतिक बढ़त भी हासिल होगी. बता दें कि वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार के बजट में रेयर अर्थ मिनरल्‍स कॉरिडोर बनाने का उल्‍लेख किया है. दरअसल, भारत ने अमेरिका में आयोजित पहले क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल के दौरान नई पहल फोरम ऑन रिसोर्स जियोस्ट्रैटेजिक एंगेजमेंट (FORGE) को समर्थन देने की घोषणा की है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि यह मंच वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों की सप्‍लाई चेन को सुरक्षित, विविध और भरोसेमंद बनाने की दिशा में अहम कदम है. जयशंकर तीन दिवसीय दौरे पर वाशिंगटन पहुंचे हैं, जहां उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो द्वारा आयोजित इस मंत्रीस्तरीय बैठक में हिस्सा लिया. इस सम्मेलन में 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. जयशंकर ने इसे परिणाम देने वाला बताया. उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा कि भारत नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन, रेयर अर्थ कॉरिडोर्स और जिम्मेदार व्यापार जैसी पहलों के जरिए सप्‍लाई चेन को मजबूत करने पर काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि FORGE इनिशिएटिव अमेरिका-नेतृत्व वाले मिनरल सिक्योरिटी पार्टनरशिप की उत्तराधिकारी है और इसका उद्देश्य दुर्लभ खनिजों के प्रोडक्‍शन और प्रोसेसिंग में विविधता लाना है. ग्‍लोबल कॉन्‍फ्रेंस का क्‍या है लक्ष्‍य? वॉशिंगटन सम्मेलन का मुख्य लक्ष्य लिथियम, कोबाल्ट और निकल जैसे रेयर अर्थ मिनरल्‍स की आपूर्ति में चीन पर निर्भरता कम करना है. यूरोपीय संघ सहित कई देशों की भागीदारी को वैश्विक आपूर्ति कूटनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है. दौरे के दौरान जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो और ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट से द्विपक्षीय बैठकें भी कीं. इन बैठकों में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी, व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, परमाणु सहयोग और तकनीक जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. दोनों पक्षों ने क्वाड के माध्यम से सहयोग बढ़ाने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई. जयशंकर ने कहा कि यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में उपयोगी साबित हुआ है. अमेरिका ने चीन के प्रभुत्व वाले महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) सप्‍लाई नेटवर्क को चुनौती देने के लिए सहयोगी देशों के साथ एक विशेष व्यापार ब्लॉक बनाने का प्रस्ताव रखा है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बुधवार 4 फरवरी 2026 को वाशिंगटन में आयोजित मंत्रिस्तरीय बैठक में इस पहल की घोषणा करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहन, डिफेंस सिस्‍टम समेत अन्‍य निर्माण के लिए आवश्यक खनिजों की आपूर्ति को सुरक्षित और स्थिर बनाना है. भारत सहित 55 देशों की भागीदारी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बताया कि इस बैठक में भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य सहित कुल 55 देशों ने हिस्सा लिया. इन देशों के पास माइनिंग या प्रोसेसिंग (रिफाइनिंग) से जुड़ी क्षमताएं हैं और वे ग्‍लोबल सप्‍लाई चेन में विविधता लाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. रुबियो ने कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों का उत्पादन कुछ ही देशों में अत्यधिक केंद्रित है और यह स्थिति अब भू-राजनीतिक दबाव का साधन बन चुकी है. उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका अब इस क्षेत्र में सहयोगी देशों के साथ मिलकर रणनीतिक समाधान अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. बैठक के दौरान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने मैक्सिको के साथ द्विपक्षीय योजना और यूरोपीय संघ व जापान के साथ त्रिपक्षीय समझौते की घोषणा की, ताकि सप्‍लाई चेन को मजबूत किया जा सके. इसके अलावा अमेरिका, यूरोपीय संघ और जापान ने जी-7 और मिनरल्स सिक्योरिटी पार्टनरशिप जैसे मंचों पर भी सहयोग बढ़ाने का संकेत दिया.

जयशंकर अमेरिका दौरे पर, स्वच्छ ऊर्जा और सुरक्षा को बनाएंगे प्राथमिकता

नई दिल्ली   भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर आज से तीन दिन की अमेरिका यात्रा पर रवाना हो रहे हैं। यह यात्रा 2 से 4 फरवरी तक चलेगी। इस दौरान वह अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा आयोजित क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल बैठक में भाग लेंगे। यह जानकारी भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने दी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक में क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बदलाव, और रणनीतिक सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, रक्षा और नई तकनीकों के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं। अमेरिका यात्रा के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में भारत-अमेरिका संबंधों, व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है। हाल ही में विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर से नई दिल्ली में मुलाकात की थी। इस बैठक में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई थी। जयशंकर ने उम्मीद जताई थी कि सर्जियो गोर भारत-अमेरिका रिश्तों को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे।  इसके अलावा, 25 जनवरी को जयशंकर ने अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की थी, जिसमें माइक रोजर्स, एडम स्मिथ और जिमी पैट्रोनिस शामिल थे। इस बैठक में भारत-अमेरिका संबंध, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिति और यूक्रेन युद्ध जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी।इससे पहले, 13 जनवरी को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और एस. जयशंकर के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। इस बातचीत में नागरिक परमाणु ऊर्जा, व्यापार वार्ता, क्रिटिकल मिनरल्स, और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा जैसे विषयों पर सहयोग की समीक्षा की गई थी। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस बातचीत को सकारात्मक बताया था और कहा था कि दोनों देशों ने व्यापार वार्ता, क्रिटिकल मिनरल्स और आने वाले महीनों में संभावित उच्चस्तरीय बैठक को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा की है। जयशंकर की यह अमेरिका यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है।

नेतन्याहू भारत आ रहे, दिल्ली में अरब देशों के साथ बैठक तय; जयशंकर का मिडिल ईस्ट गेम चर्चा में

नई दिल्ली इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अगले हफ्ते भारत दौरे पर आ रहे हैं. इससे पहले भारत के EAM एस जयशंकर ने मिडिल ईस्ट को टारगेट करते हुए डबल मास्टरस्ट्रोक चला है. उन्होंने नेतन्याहू के दौरे से पहले अरब देशों को पहले ही दिल्ली बुलाकर एक बड़ा मैसेज दिया है. जयशंकर की गजब की कूटनीति का नतीजा है कि अरब देशों ने भारत को फिलिस्तीन का ‘मसीहा’ मानना शुरू कर दिया है. आगे जानें जयशंकर के बेहतरीन बैलेंसिंग एक्ट की वजह से जियो पॉलिटिक्स में भारत का कद किस तरह बढ़ रहा है? भारत ने आज यानी 31 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में ‘दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्री बैठक’ (IAFMM) की मेजबानी की है. यह बैठक पूरे 10 साल के लंबे इंतजार के बाद हुई है. इसमें अरब लीग के सभी 22 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए. दिलचस्प बात यह है कि यह बैठक जयशंकर की दिसंबर 2025 की इजरायल यात्रा और प्रधानमंत्री नेतन्याहू की प्रस्तावित भारत यात्रा के ठीक बीच में हो रही है. इस बैठक के दौरान भारतीय EAM का एक ऐसा बेहतरीन बैलेंसिंग एक्ट देखने को मिला, जिसकी वजह से जियो पॉलिटिक्स में भारत का कद और भी बढ़ गया है. फिलिस्तीन का ‘मसीहा’ भारत दिल्ली पहुंची फिलिस्तीनी विदेश मंत्री वारसेन अगाबेकियन शाहीन ने सीधा और भावनात्मक कार्ड खेला है. उन्होंने जयशंकर से मुलाकात के बाद सार्वजनिक तौर पर अपील करते हुए कहा है कि ‘भारत ही वह महान देश है जो इजरायल-फिलिस्तीन जंग को रुकवा सकता है. पीएम मोदी की इजरायल से दोस्ती और अरब देशों से रिश्ते उन्हें दुनिया का सबसे बड़ा ‘मध्यस्थ’ बनाते हैं’. फिलिस्तीन ने भारत से गाजा के पुनर्निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने की मांग की है. इजरायल का जिगरी दोस्त दिसंबर 2025 में जब जयशंकर इजरायल में थे, तो वहां सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) के एक हमले में यहूदियों की मौत पर उन्होंने गहरी संवेदना जताई थी. भारत और इजरायल ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को फिर से दोहराया है. भारत और इजरायल के बीच ड्रोन तकनीक और मिसाइल डिफेंस को लेकर एक गुप्त समझौता भी परवान चढ़ रहा है. जयशंकर का बैलेंसिंग एक्ट एक तरफ भारत इजरायल के साथ अत्याधुनिक हथियारों का सौदा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ 22 अरब देशों को एक साथ मेज पर बिठाकर अपनी ऊर्जा जरूरतों (Energy Security) को सुरक्षित कर रहा है. जयशंकर ने साबित कर दिया है कि भारत अब दुनिया के उन चंद देशों में से है, जो युद्ध के दो धुर विरोधियों से एक साथ हाथ मिला सकते हैं. ‘मिडिल ईस्ट’ का नया पावर सेंटर: भारत     अरब देशों के साथ बैठक की सह-अध्यक्षता UAE कर रहा है. जयशंकर ने साफ कर दिया है कि भारत जियो पॉलिटिक्स का एक बड़ा और अहम प्लेयर है.     भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है. जयशंकर इसे ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज बना रहे हैं, जहाँ अरब देशों का समर्थन भारत के लिए बहुत जरूरी है.     सिल्क रूट को टक्कर: ‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे’ (IMEC) को फिर से जिंदा करने के लिए अरब देशों का साथ लेना इस बैठक का गुप्त एजेंडा है.  

पाकिस्तान अवैध रूप से कश्मीर के हिस्से पर कब्जा जमाकर बैठा है, वह हिस्सा वापस आ जाए तो कश्मीर की समस्या पूरी तरह से सुलझ जाएगी:जयशंकर

नई दिल्ली लंदन में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के कश्मीर को लेकर दिए गए बयान पर पाकिस्तान तिलमिला उठा है. जयशंकर की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (Pok) पर दिए गए बयान पर पड़ोसी मुल्क ने अब बयान जारी किया है. पाकिस्तान ने पीओके को लेकर जयशंकर के बयान को आधारहीन बताया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शफकत अली खान ने कहा कि कश्मीर को लेकर आधारहीन दावे करने के बजाए भारत को जम्मू कश्मीर के उस बड़े हिस्से को छोड़ देना चाहिए, जिस पर वर 77 साल से कब्जा करके बैठा है. शफकत ने कहा कि हम लंदन के चैथम हाउस में कश्मीर को लेकर दिए गए जयशंकर के बयान को खारिज करते हैं. उन्होंने कहा कि पीओके का मामला विवादित है और जयशंकर गलत तरीके से इसे लेकर बयानबाजी कर रहे हैं. भारत ने सेना के दम पर स्टेटस बदलने की कोशिश की है लेकिन इससे वास्तविकता नहीं बदलेगी. सेना के दम पर उठाए गए कदम से कश्मीर के लोगों की मुश्किलें हल नहीं होंगी. क्या है पूरा मामला? लंदन के चैथम हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान के एक पत्रकार ने जयशंकर से सवाल पूछते हुए कहा था कि भारत ने कश्मीर पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है जिस वजह से वे प्रोटेस्ट कर रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुनिया में शांति लाने की बात करते हैं तो क्या नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ अपनी दोस्ती का इस्तेमाल कर कश्मीर मुद्दे को सुलझा सकते हैं? इस पर जयशंकर ने जवाब दिया था कि हमने कश्मीर समस्या काफी हद तक सुलझा ली है. इस दिशा में जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाना पहला कदम था. इसके बाद कश्मीर में विकास और आर्थिक गतिविधि बढ़ाने के साथ-साथ सामाजिक न्याय को बहाल करना दूसरा कदम था. अच्छे मतदान प्रतिशत के साथ वोटिंग कराना तीसरा कदम था. पाकिस्तान द्वारा कश्मीर के चुराए गए हिस्से की वापसी चौथा कदम होगा. पाकिस्तान अवैध रूप से कश्मीर के जिस हिस्से पर कब्जा जमाकर बैठा है, वह हिस्सा वापस आ जाए तो कश्मीर की समस्या पूरी तरह से सुलझ जाएगी. पाकिस्तान अवैध रूप से कश्मीर के जिस हिस्से पर कब्जा जमाकर बैठा है, वह हिस्सा वापस आ जाए तो कश्मीर की समस्या पूरी तरह से सुलझ जाएगी. जयशंकर ने क्या-क्या कहा था? लंदन के चैथम हाउस थिंक टैंक में आयोजित कार्यक्रम मे जयशंकर ने कहा था कि पाकिस्तान ने भारत से जो हिस्सा (POK) चुराया है, अब उसकी वापसी का इंतजार है. उस हिस्से के भारत में शामिल होते ही जम्मू-कश्मीर में पूरी तरह से शांति स्थापित हो जाएगी. उन्होंने घाटी में शांति का फॉर्मूला बताते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में शांति बहाल करने की पूरी प्रक्रिया तीन चरणों में अपनाई गई. इसके अलावा जयशंकर ने अमेरिका की पॉलिसी पर बात करते हुए कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी प्रशासन बहुध्रुवीयता (multipolarity) की तरफ बढ़ रहा है, जो भारत के हितों के लिए अच्छा है. दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते की जरूरत पर सहमत हुए हैं.  

‘पीएम मोदी ने देश को ‘चलता है’ से ‘होगा कैसे नहीं’ की सोच में बदला’, प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन में विदेश मंत्री जयशंकर शामिल

भुवनेश्वर/नई दिल्ली। 18वां प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन बुधवार को ओडिशा के भुवनेश्वर में शुरू हो गया। तीन दिवसीय इस सम्मेलन के दौरान देश और विदेश से पांच हजार से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल होंगे। प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन की शुरुआत युवा प्रवासी भारतीय दिवस कार्यक्रम से हुई। सम्मेलन का उद्घाटन ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और युवा और खेल मामलों के मंत्री मनसुख मंडाविया ने किया। इस दौरान 18वें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश को ‘चलता है’ से ‘होगा कैसे नहीं’ वाली सोच में बदल दिया है। विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत के विकास में युवा पीढ़ी की अहम भूमिका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के युवा पीढ़ी पर प्रभाव को समझाते हुए विदेश मंत्री ने बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु का उदाहरण दिया। विदेश मंत्री ने कहा कि ‘एक बार पीवी सिंधु ने बताया था कि पीएम मोदी युवाओं के लिए आदर्श क्यों हैं। उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी ने देश को ‘चलता है’ वाले रवैये से ‘बदल सकता है’ और फिर ‘होगा कैसे नहीं’ वाली सोच में बदल दिया है।’ विदेश मंत्री ने कहा कि ‘एआई, इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक, स्टार्टअप्स और खेलों से लेकर वैश्विक बदलाव में युवा पीढ़ी बड़े बदलाव ला रही है। खुद का विकास करना बेहद जटिल है, लेकिन जब हमें ये विश्वास है कि कुछ भी असंभव नहीं है तो इस सोच के चलते ये आसान हो गया है।’ विदेश मंत्री ने प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन के दौरान भारतीय डायस्पोरा के सदस्यों से भारतीय पर्यटन को बढ़ावा देने और प्रवासी भारतीयों की युवा पीढ़ी से नियमित अंतराल पर भारत आने की अपील की, ताकि उनका भारत से जुड़ाव हो सके। प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन 8-10 जनवरी तक भुवनेश्वर में आयोजित किया जा रहा है। गुरुवार को पीएम मोदी करेंगे शिरकत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शुक्रवार को समापन सत्र की अध्यक्षता करेंगी। राष्ट्रपति मुर्मू विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धियों हासिल करने वाले प्रवासी भारतीय समुदाय के सदस्यों को प्रवासी भारतीय सम्मान से सम्मानित भी करेंगी। त्रिनिदाद और टोबैगो की राष्ट्रपति क्रिस्टीन कार्ला कंगालू प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन की मुख्य अतिथि हैं। वह सम्मेलन को वर्चुअली संबोधित करेंगी। इस सम्मेलन की थीम ‘विकसित भारत में प्रवासी भारतीयों का योगदान’ है। ओडिशा पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद मुख्य सचिव मनोज आहूजा ने कहा कि ओडिशा सरकार 50 देशों के प्रवासी भारतीयों के सामने राज्य की समृद्ध संस्कृति और विरासत को प्रदर्शित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। उन्होंने कहा, ‘सम्मेलन का प्रत्येक प्रतिनिधि ओडिशा पर्यटन के राजदूत की भूमिका निभाएगा और हमें उम्मीद है कि राज्य की समृद्ध संस्कृति और विरासत विभिन्न देशों से पर्यटकों को आकर्षित करेगी।’

जयशंकर ने स्पष्ट किया कि रूस से तेल खरीदना भारत के लिए कोई सस्ता सौदा नहीं है, बोले- आपके पास है बेहतर डील तो बताएं

नई दिल्ली रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद पश्चिमी देशों ने रूस का बहिष्कार किया, लेकिन भारत ने अपनी दोस्ती बरकरार रखी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में रूस की यात्रा की। साथ ही भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा। इसको लेकर जब विदेश मंत्री एस जयशंकर से सवाल पूछे गए तो उन्होंने करारा जवाब दिया। जयशंकर ने भारत के रूस से तेल खरीदने के फैसले का जोरदार बचाव किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विश्व के पास भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कोई बेहतर विकल्प है। यह बयान उन्होंने 22वें दोहा फोरम के पैनल “नए युग में संघर्ष समाधान” पर चर्चा के दौरान दिया। जयशंकर ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के तीन साल बाद दुनिया यह महसूस करने लगी है कि इस समस्या को केवल वार्ता के माध्यम से सुलझाया जा सकता है। रूस से तेल खरीदने पर भारत का रुख जयशंकर ने स्पष्ट किया कि रूस से तेल खरीदना भारत के लिए कोई सस्ता सौदा नहीं है, बल्कि यह देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की एक आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “मैं तेल खरीदता हूं। यह सच है। यह सस्ता नहीं है। क्या आपके पास बेहतर डील है?” भारत ने हाल के वर्षों में रूस से कच्चे तेल के आयात में उल्लेखनीय वृद्धि की है। रूस अब भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है, जो भारत के कुल तेल आयात का 35 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रखता है। रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भारत की भूमिका जयशंकर ने कहा कि भारत का हमेशा मानना रहा है कि यह युद्ध युद्धभूमि पर नहीं सुलझ सकता है। उन्होंने कहा कि अंततः दोनों पक्षों को वार्ता की मेज पर लौटना होगा और भारत इसे संभव बनाने के लिए हर प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा, “हम मास्को जाते हैं तो राष्ट्रपति पुतिन से बात करते हैं। जब कीव जाते हैं तो राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की से मिलते हैं। हम दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति के सूत्र तलाशने की कोशिश करते हैं।”हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत कोई शांति योजना पेश नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा, “हम मध्यस्थता नहीं कर रहे। हम बातचीत कर रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि दोनों पक्षों को पूरी पारदर्शिता से जानकारी दी जाए।” यूक्रेन और भारत के संबंध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल की शुरुआत में कीव का दौरा किया और राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की से मुलाकात की। पीएम मोदी ने भारत के शांति के पक्ष में रहने की प्रतिबद्धता दोहराई। दूसरी ओर ज़ेलेंस्की ने भारत से यूक्रेन का समर्थन करने और संतुलनकारी रवैया न अपनाने की अपील की। दोहा फोरम में जयशंकर ने संकेत दिया कि वैश्विक राजनीति में यथार्थवाद की ओर रुख हो रहा है। उन्होंने कहा, “वार्ता की आवश्यकता को स्वीकार करना युद्ध जारी रखने की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण हो रहा है।”

हमारे नागरिकों के हितों की रक्षा के हमारे प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है : जयशंकर

नई दिल्ली विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुनिया के विभिन्न देशों से आज अपील किया कि वे भारत की प्रतिभाओं एवं युवा जनशक्ति का अपने यहां विकास के लिए लाभ लें। डॉ जयशंकर ने यहां सुषमा स्वराज भवन में प्रवासी श्रमिकों के कानूनी एवं सुरक्षित प्रवासन के लिए विदेश मंत्रालय के विदेशी रोज़गार प्रभाग द्वारा विकसित पोर्टल ‘ईमाईग्रेट’ के नये संस्करण के अनावरण के मौके पर यह अपील की। इस मौके पर केन्द्रीय श्रम, रोज़गार, खेल एवं युवा मामलों के मंत्री मनसुख मांडविया और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गरीटा भी उपस्थित थे। डॉ जयशंकर ने कहा कि पिछले साल ही सुरक्षित और कानूनी प्रवासन चैनलों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए विदेश मंत्रालय के अभियान के दौरान प्रधानमंत्री ने ‘सुरक्षित जाएं, संरक्षित जाएं’ आदर्श वाक्य के साथ एक स्मारक डाक टिकट जारी किया था। आज का कार्यक्रम उस भावना को दर्शाता है क्योंकि यह जीवन को आसान बनाने और जन केंद्रित शासन को बढ़ाने के लिए मोदी सरकार की प्रतिबद्धता की अभिव्यक्ति है। ई-माइग्रेट पोर्टल का शुभारंभ भारतीय श्रमिकों के लिए एक सुरक्षित, अधिक पारदर्शी और समावेशी गतिशीलता बनाने के हमारे निरंतर प्रयासों का एक प्रमाण है और हमारे नागरिकों के हितों की रक्षा के हमारे प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। विदेश मंत्री ने कहा कि जबकि हम भारत की अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रतिष्ठा में अपने प्रवासी श्रमिकों के अमूल्य योगदान को पहचानते हैं, हमें उन कमजोरियों को भी स्वीकार करना चाहिए जिनका वे विदेशी भूमि पर सामना करते हैं। हमारे मिशनों, विशेष रूप से खाड़ी में मिशनों में समर्पित श्रमिक अताशे हैं जो श्रम और अन्य शिकायतों का निवारण सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने कहा, “मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि संशोधित ई-माइग्रेट पोर्टल में उनके सामने आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए 24 गुणा 7 बहुभाषी हेल्पलाइन नंबर भी हैं, जिनके लिए कभी-कभी तत्काल समाधान की आवश्यकता होती है।” उन्होंने कहा कि यह पाेर्टल एवं मोबाइल ऐप प्रवासी श्रमिकों के लिए अवसरों के द्वार खोल रहा है। भारत सरकार ने उनके लिए रोज़गार के अवसराें के साथ सुरक्षित एवं प्रशिक्षित प्रवासन के सभी उपाय भी मुहैया कराये हैं। विदेश मंत्री ने इस मौके पर मौजूद विदेशी राजनयिकों से अपील की कि वे अपने अपने देशों के विकास की यात्रा में भारत की प्रतिभाओं एवं परिश्रमी युवाओं के कौशल का लाभ उठायें। उन्होंने सभी पक्षकारों से ईमाइग्रेट पोर्टल के उपयोग की भी अपील की। मनसुख मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने भारत के युवाओं को ना केवल देश में बल्कि विश्व भर में रोज़गार के अवसर सुलभ कराने का संकल्प लिया है और उनका कहना है कि भारत सरकार के सभी मंत्रालयों एवं विभागों को समग्रता में सोचना एवं योजना तैयार करना चाहिए। ईमाइग्रेट पोर्टल उसी सोच का परिणाम है जिसमें श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय का नेशनल कैरियर पोर्टल और माई भारत पोर्टल भी जुड़ा है। इससे दुनिया के अन्य देशों को भी भारत की प्रतिभाओं का लाभ उठाने का मौका मिलेगा। ईमाइग्रेट पोर्टल एवं मोबाइल ऐप में डिजीलॉकर, करीब छह लाख कॉमन सर्विस सेंटरों, भाषिणी अनुवाद सेवा, उमंग पोर्टलों को जोड़ा गया है। आर्थिक जांच वांछित (ईसीआर) श्रेणी के 21 देशों और नॉन ईसीआर देशों में काम के लिए इच्छुक कामगार सीधे पंजीकरण करा सकते हैं। विदेशी मिशनों में स्थायी रूप से माइग्रेशन अताशे की नियुक्ति की गयी है जो प्रवासी श्रमिकों की मदद के मुद्दों को देखते हैं।      

विदेश मंत्री जयशंकर पाकिस्तान जाएंगे, इस्लामाबाद में सुरक्षा के लिए तैनात होगी आर्मी

नई दिल्ली पाकिस्तान सरकार ने शुक्रवार को शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन (SCO Summit) के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सेना तैनात करने का फैसला किया है. जिसकी मेजबानी पाकिस्तान 15-16 अक्टूबर को पहली बार कर रहा है. विदेश मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सेना को तैनात करने का फैसला संविधान के अनुच्छेद 245 के तहत लिया गया है. इसके तहत सरकार को शांति बनाए रखने में नागरिक प्रशासन की मदद के लिए सेना की टुकड़ियों को बुलाने का अधिकार है. अधिसूचना ने पुष्टि करते हुए कहा कि सेना इस्लामाबाद में प्रमुख सरकारी भवनों और रेड जोन की सुरक्षा की देखरेख करेगी. जबकि अर्धसैनिक रेंजर्स पहले से ही राजधानी में तैनात हैं. सेना शिखर सम्मेलन के दौरान सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए सुरक्षा का जिम्मा संभालेगी. पाकिस्तानी सरकार ने लिया फैसला पाकिस्तान की सरकार ने इस आयोजन के लिए अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं, जिसमें एससीओ के आठ सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रतिनिधिमंडल शामिल होंगे. इस बीच पाकिस्तानी सरकार ने क्षेत्रीय नेताओं की आगामी बैठक के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक योजना को मंजूरी दी. गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने कहा कि एससीओ शिखर सम्मेलन में सुरक्षा ड्यूटी के लिए पाकिस्तान सेना, रेंजर्स, फ्रंटियर कोर (एफसी) और पंजाब पुलिस के अतिरिक्त कर्मियों को तैनात किया जाएगा. विदेश मंत्री जाएंगे पाकिस्तान सेना की तैनाती की घोषणा ऐसे समय में की गई है जब भारत ने ऐलान किया है कि वह इस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेगा.  भारत ने कहा है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर एससीओ की शासनाध्यक्ष परिषद (एससीओ-सीएचजी) की बैठक में भाग लेने के लिए पाकिस्तान की यात्रा करेंगे. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “विदेश मंत्री 15 और 16 अक्टूबर को इस्लामाबाद में आयोजित होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए हमारे प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे.” हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि जयशंकर किसी पाकिस्तानी नेता से मिलेंगे या नहीं. यह लगभग एक दशक में किसी भारतीय विदेश मंत्री की पहली पाकिस्तान यात्रा होगी. 2001 में स्थापित एससीओ का उद्देश्य क्षेत्र में राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देना है.  

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