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मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का आलेख

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Article by former Chief Minister of Madhya Pradesh Kamal Nath कमलनाथमध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार का एक साल का कार्यकाल 13 दिसंबर को पूरा हो गया। अब बीजेपी इस एक साल को स्वर्णिम कार्यकाल बताकर अपनी पीठ थपथपा रही है। लेकिन मोहन सरकार ने गरीबों, किसानों, युवाओं, महिलाओं, दलितों और सभी वर्गों के लोगों के लिए क्‍या किया है यह विचारणीय है। महिला सुरक्षा, दलित और आदिवासी सुरक्षा के मामले में मध्यप्रदेश का रिकॉर्ड और भी खराब हो गया है। स्वास्थ्य शिक्षा का हाल यह है कि मध्यप्रदेश की पहचान व्यापमं और नर्सिंग जैसे घोटालों से होने लगी है। समाज की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था, हर पहलू पर इतनी नाकामी क्यों हासिल हो रही है? इससे बढ़कर चिंता की बात यह है कि मध्य प्रदेश सरकार इन सारे विषयों पर एकदम चुप है। क्या जनता के विकास के ये सबसे महत्वपूर्ण पैरामीटर सरकार की प्राथमिकता से बाहर हो गए हैं? ऐसा लगता है कि मध्य प्रदेश की सरकार ने जमीनी सच्चाई से पूरी तरह पीठ फेर ली है और प्रदेश को उसके हाल पर छोड़ कर, खुद सिर्फ झूठी ब्रांडिंग से अपनी पीठ थपथपाने में व्यस्त हो गई है। हकीकत से मुंह फेर कर मोहन सरकार झूठे प्रचार-प्रसार में मस्‍त है। जबकि चुनावों के पहले बीजेपी ने बड़े-बड़े वादे कर जनता को गुमराह करने का काम किया। आज प्रदेश की जनता खुद सरकार से सवाल करना चाहती है कि वादों का क्‍या हुआ? सरकार कर्ज पर कर्ज लेकर अपनी गाड़ी को चला रही है। और सपने ऐसे दिखाए जा रहे हैं कि प्रदेश ने विकास के कई सोपान गढ़ लिए हैं। दलितों पर अत्‍याचार पिछले एक साल में प्रदेश में दलितों पर काफी अत्‍याचार हुए हैं। वह चाहे शिवपुरी की घटना हो या सागर की घटना हो। सारे प्रदेश में दलितों पर हो रहे अत्‍याचारों से यही लगता है कि यह साल दलित अत्‍याचार पर केन्द्रित रहा है। शिवपुरी के इंदरगढ़ में एक दलित युवक की लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। मध्यप्रदेश के सागर जिले के ग्राम बरोदिया नोनागिर में दलित युवती द्वारा छेड़छाड़ की शिकायत से गुस्साए गुंडों ने युवती के भाई की पिछले वर्ष अगस्त माह में हत्या कर दी थी। हत्या में बीजेपी नेताओं पर आरोप लगे। पीड़ित परिवार समझौते के लिये तैयार नहीं हुआ तो दो दिन पूर्व पीड़िता के चाचा की भी हत्या कर दी गई। मंदसौर जिले के एक गांव में एक महिला का पीछा करने के आरोप में दलित व्यक्ति को चेहरा काला करके, गले में जूतों की माला डालकर घुमाया गया। यह दोनों घटनाएं तो सिर्फ ऐसी थी जो सुर्खियों में ज्‍यादा रहीं लेकिन‍ ऐसी न जाने हजारों घटनाएं हैं जो रोज दलितों से साथ घटती रहीं। दुर्भाग्य की बात है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस तरह के विषयों पर कुछ भी कहने से बचते रहे और दलितों की सुरक्षा सुनिश्चित कराने में पूरी तरह नाकाम रहे। कर्ज के भरोसे सरकार मध्य प्रदेश में कर्ज दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। ऐसा कोई महीना नहीं बीतता है जब सरकार कर्ज न ले रही हो। सरकार पिछले 11 महीनों में 40 हजार 500 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। राज्य यादव सरकार के एक साल पूरे होने के साथ कर्ज का आंकड़ा 52.5 हजार करोड़ तक पहुंचने वाला है। दिसंबर 2023 से अब तक सरकार ने 47.5 हजार करोड़ का कर्ज लिया है। साल 2024 के अंत तक राज्य पर कुल कर्ज 4 लाख करोड़ से अधिक हो जाएगा। पिछले 6 माह में हर महीने 05-05 हजार करोड़ का कर्ज लिया जा रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में अब तक 30 हजार करोड़ का कर्ज लिया जा चुका है। 31 मार्च 2025 तक मप्र सरकार का कर्ज 4.21 लाख करोड़ पहुंचेगा। मौजूदा वित्त वर्ष में सरकार अपनी जरूरतों के लिए लगभग 25 हजार करोड़ का अतिरिक्त कर्ज लेगी। पिछले साढ़े चार साल में मप्र सरकार पर कर्ज का बोझ सबसे तेजी से बढ़ा है। मार्च 2020 की स्थिति में सरकार पर लगभग 2.01 लाख करोड़ का ही कर्ज था, लेकिन पिछले साढ़े चार साल में यह दोगुना हो गया है। वादे पूरे करने में नाकाम मोहन सरकार सरकार अपने कार्यकाल का एक साल पूरा होने का जश्न मना रही है। लेकिन‍ अपने वादों को भूल गई है। चुनावों के समय जो वादे किये थे उन पर ध्‍यान ही नहीं है। लाडली बहनों को 3,000 रुपये की राशि देने का वादा, किसानों को उपज का दाम मिलना, युवाओं को रोजगार देने का वादा, महिलाओं को सुरक्षा देने का वादा, भ्रष्‍टाचार मुक्‍त प्रदेश बनाने का वादा ऐसे तमाम वादे थे जो एक साल में शुरू ही नहीं हुए हैं। किसान परेशान, जश्‍न में सरकार मध्य प्रदेश में खाद की कमी के कारण किसानों की आय पर भी काफी असर पड़ा है। किसानों ने खाद की कमी के कारण अपनी फसल ही नहीं बोई। किसानों को ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पहले साल के कार्यकाल में ऐसे मामले हैं जहां मोहन यादव की सरकार बैकफुट पर नजर आई। राज्य में कानून व्यवस्था को लेकर सवाल 13 दिसंबर 2023 को मोहन यादव राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। मोहन यादव के पहले कार्यकाल में मध्य प्रदेश में क्राइम के कई ऐसे मामले आए जिसके राज्य सरकार की किरकिरी हुई। वैसे तो प्रदेश को शांति का टापू कहा जाता है लेकिन प्रदेश में दिनोंदिन बढ़ रहे अपराधों ने मध्‍यप्रदेश को बदनाम किया है। अपराधों के आंकड़ों में लगातार इजाफा हो रहा है। क्‍या महिलाएं क्‍या बच्चियां, कोई सुरक्षित नहीं है। साइबर क्राइम भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। नौकरियों की घोषणा पर भर्ती नहीं राज्य के युवाओं को साधने के लिए मोहन यादव की सरकार ने एक लाख पदों पर भर्ती की घोषणा की थी। दिसंबर महीने से भर्ती शुरू होनी थी लेकिन कई विभाग ऐसे हैं जो यह रिपोर्ट तक नहीं दे पाए हैं कि उनके विभाग में कितने पद खाली हैं। बीते एक साल से भर्ती नहीं होने पर युवाओं में ओवरएज होने का डर है। नर्सिंग घोटाला से धूमिल हुई छवि राज्य में नर्सिंग घोटाले के बाद प्रदेश सरकार की छवि धूमिल हुई है। राज्य में कॉलेजों की संख्या कम की गई है। नर्सिंग घोटाले … Read more

कमलनाथ पहुंचे बागेश्वर धाम हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त किया और पंडित धीरेन्द्र शास्त्री से मुलाकात कि

Kamalnath reached Bageshwar Dham, received blessings of Hanuman ji and met Pandit Dhirendra Shastri.

Kamalnath reached Bageshwar Dham, received blessings of Hanuman ji and met Pandit Dhirendra Shastri.

धीरन शाह को कांग्रेस ने उम्मीदवार तय किया, आखिर कौन है इनवाती जिसके ऊपर पार्टी ने भरोसा जताया है

अमरवाड़ा मध्य प्रदेश की राजनीति की बात करें तो इस समय सबकी निगाहें अमरवाड़ा में होने वाले उपचुनाव पर टिकी हुई हैं. जहां से बीजेपी ने कमलेश शाह को अपना उम्मीदवार बनाया है. गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने भी अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी और अब आखिरकार कांग्रेस ने भी अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी है. धीरन शाह इनवाती को कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार तय किया है. लेकिन आखिर कौन है धीरन शाह इनवाती जिसके ऊपर कांग्रेस ने भरोसा जताया है.आइये जानते हैं. लोकसभा चुनाव में छिंदवाड़ा लोकसभा सीट बीजेपी के हाथ चली गई. जिसके बाद आई बारी अमरवाड़ा में होने वाले उपचुनाव की आपको बता दें कि अमरवाड़ा में होने वाले उपचुनाव जहां कांग्रेस वहीं कमलनाथ के लिए भी साख का विषय बन गए हैं. यहां से आपको बता दें कि युवा चेहरे धीरेंद्र शाह इबनाती को कांग्रेस ने चुनावी मैदान में उतारा है. आपको बता दें धीरेंद्र शाह इबनाती आंचल कुंड दरबार के सेवादार सुखराम दादा की बेटे हैं. सेल्समैन की नौकरी छोड़ लड़ रहे विधायकी का चुनाव धीरन शाह इनवाती एक फ्रेश युवा चेहरा हैं. जो बटका खापा सोसाइटी में सेल्समैन के पद पर कार्य कर रहे थे. बताया जा रहा है कि उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए अपनी नौकरी से भी इस्तीफा दे दिया है. वहीं कांग्रेस ने धीरन शाह इनवाती के नाम पर मोहर लगा दी है. माना यह भी जा रहा है कि धीरन शाह इनवाती और किसी की नहीं बल्कि कमलनाथ की ही पसंद है. इसको लेकर कमलनाथ और नकुलनाथ दोनों ने ही अपने सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक पोस्ट साझा की है. और साथ ही साथ इस घोषणा के बारे में बताया कि कांग्रेस ने धीरन शाह इनवाती को अपना प्रत्याशी बनाया है. कमलनाथ की पसंद पर लगी मुहर आपको बता दें कि कमलनाथ लगातार अमरवाड़ा से गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ गठबंधन के प्रयास कर रहे थे. लेकिन वह बात नहीं बनी लेकिन फिलहाल यह माना जा रहा है. कि, एक बार फिर मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने कमलनाथ की पसंद पर ही मोहर लगाई है. धीरन शाह इनवाती कमलनाथ खेमे से आते हैं. कमलनाथ के करीबी बताए जा रहे हैं. ऐसे में कहीं ना कहीं विधानसभा और लोकसभा की हार के बावजूद भी कांग्रेस का पूरा भरोसा कमलनाथ के ऊपर कायम दिखाई पड़ता है. फिलहाल देखने वाली बात होगी कि धीरन शाह इनवाती जो कि युवा चेहरा हैं. यह जो एक्सपेरिमेंट कांग्रेस ने अमरवाड़ा में किया है. वह कांग्रेस के लिए कितना कामगार साबित होता है. कितनी कड़ी टक्कर कांग्रेस जो है वह बीजेपी और साथ ही साथ गुणवान गणतंत्र पार्टी को यहां से देते हुए दिखाई देती है.

मध्य प्रदेश में 9 जिलों से होकर गुजरेगी भारत जोड़ो न्याय यात्रा

Bharat Jodo Nyay Yatra will pass through 9 districts in Madhya Pradesh मध्य प्रदेश में 9 जिलों से होकर गुजरेगी भारत जोड़ो न्याय यात्रा, सात दिन में 698 KM कवर करेंगे राहुल गांधीकांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा की भारत जोड़ो यात्रा ने देशभर में जो संदेश दिया, हम उसे इस यात्रा की मदद से आगे बढ़ाएंगे। राहुल जी इस यात्रा के दौरान सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय पर अपने विचार जनता के सामने रखेंगे। नई दिल्ली/भोपाल। कांग्रेस नेता राहुल गांधी आगामी 14 जनवरी से भारत जोड़ो न्याय यात्रा शुरू करने वाले हैं। कांग्रेस पार्टी इस यात्रा की तैयारियों में जुटी हुई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस संबंध में आज पार्टी के महासचिवों प्रदेश अध्यक्षों, प्रदेश प्रभारियों और सीएलपी नेताओं की बैठक बुलाई थी। बैठक के बाद कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख जयराम रमेश ने बताया कि मध्य प्रदेश में 698 किलोमीटर की यात्रा होगी। राज्य में यात्रा 7 दिन तक रहेगी और 9 जिले कवर होंगे। यात्रा ग्वालियर जिले से प्रदेश में प्रवेश करेगी और गुना, उज्जैन होते हुए राजस्थान में एंटर करेगी। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने जानकारी देते हुए बताया कि 14 जनवरी से शुरू होने वाली भारत न्याय यात्रा का नाम बदलकर भारत जोड़ो न्याय यात्रा होगा। जयराम रमेश ने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा ने देशभर में जो संदेश दिया, हम उसे इस यात्रा की मदद से आगे बढ़ाएंगे। राहुल जी इस यात्रा के दौरान सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय पर अपने विचार जनता के सामने रखेंगे।जयराम रमेश ने कहा कि राहुल गांधी जी के नेतृत्व में कन्याकुमारी से कश्मीर तक 4000 किमी. लंबी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ निकाली गई थी। ‘भारत जोड़ो यात्रा’ ने पूरे देश का माहौल बदल दिया था और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भर दी थी। ये यात्रा पार्टी और देश के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई। जयराम रमेश ने बताया कि कांग्रेस मुख्यालय में तीन घंटे तक चली बैठक में 2024 के चुनावों की तैयारी को लेकर भी सुझाव आए हैं और उस पर भी बातचीत हुई। बैठक के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने कहा कि आप लोग पार्टी के आंख-कान हैं। अब हमारे पास सिर्फ तीन महीने हैं, इसमें रात दिन एक करके हमें एक टीम की तरह पार्टी के लिए जी जान से जुटे रहना है। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी नेताओं को आपसी मतभेद मीडिया में उठाने से बचने की सलाह दी। बता दें कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी 14 जनवरी से भारत न्याय यात्रा शुरू करेंगे। यह यात्रा मणिपुर से शुरू होकर 20 मार्च को मुंबई में खत्म होगी।लोकसभा चुनाव से ठीक पहले होने वाली यह यात्रा 14 राज्य और 85 जिलों को कवर करेगी, जिसमें राहुल गांधी पैदल और बस से 6 हजार 200 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय करेंगे। भारत न्याय यात्रा मणिपुर से शुरू होकर नगालैंड, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात से होते हुए महाराष्ट्र में समाप्त होगी। इसी यात्रा की तैयारियों को लेकर कांग्रेस ने आज बैठक बुलाई थी।

धान उपार्जन में लापरवाही एक और अफसर पर पड़ी भारी: जबलपुर के प्रभारी फूड कंट्रोलर के बाद अब प्रबंधक व जिला विपणन अधिकारी भी सस्पेंड

Negligence in paddy procurement fell heavily on another officer: After the food controller in-charge of Jabalpur, now the manager and district marketing officer are also suspended. सहाकारिता उपायुक्त डॉ. अखिलेश निगम पिक्चर से ही गायब हैं जबकि उपार्जन समिति में वे जिम्मेदार पद पर हैं। उदित नारायण भोपाल ! राज्य शासन ने जिला विपणन अधिकारी और मंडल प्रबंधक जबलपुर रोहित सिंह बघेल को भी सस्पेंड कर दिया है। यह कार्यवाही मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ के प्रबंध संचालक आलोक कुमार सिंह ने की है। प्रबंध संचालक द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि विपणन वर्ष 2023-24 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए जारी नीति के अनुसार धान उपार्जन का कार्य नहीं कराया गया है। अधिकारी की लापरवाही के चलते शासन के समक्ष संघ की छवि धूमिल हुई है। इसलिए बघेल को जिम्मेदार मानते हुए उन्हें सस्पेंड किया गया है। निलंबन अवधि में बघेल का मुख्यालय विपणन संघ भोपाल तय किया गया है। मंगलवार को प्रभारी फूड कंट्रोलर हुए थे सस्पेंड इससे पहले मंगलवार को खाद्य, नागरिक और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने जबलपुर में पदस्थ प्रभारी जिला आपूर्ति नियंत्रक कमलेश टांडेकर को धान उपार्जन केंद्रों के मामले में गंभीर लापरवाही पर सस्पेंड किया था। निलंबन अवधि में टांडेकर का मुख्यालय खाद्य विभाग संचालनालय भोपाल तय किया है। आदेश में कहा था कि जबलपुर जिले में कुल 121 केंद्रों के विरुद्ध 85 उपार्जन केंद्र स्थापित किए हैं। बाकी 36 उपार्जन केंद्र महिला स्व सहायता समूहों को देने का प्रस्ताव 21 दिसंबर को भेजा गया जो काफी देरी से भेजा गया। इन उपार्जन केंद्रों के तय न होने से किसानों भेजा गया। इन उपार्जन केंद्रों के तय न होने से किसानों को उपज बेचने में परेशानी हुई है। साथ ही महिला स्व सहायता समूह उपार्जन केंद्र के लिए तय गोदामों का सत्यापन प्रक्रिया का पालन किए बगैर किया गया। सहकारी सेवा समितियों को दो-दो उपार्जन केंद्रों की जिम्मेदारी दिए जाने के विपरीत उपार्जन नीति का पालन नहीं करते हुए 27 सहकारी समितियों को केवल एक-एक उपार्जन केंद्र का जिम्मा सौंपा है। इसलिए जिले में आवश्यक उपार्जन केंद्र स्थापित नहीं किए जा सके। इसे व्यापक लापरवाही मानते हुए विभाग ने टांडेकर को सस्पेंड कर दिया है। राज्य शासन ने जबलपुर के फूड कंट्रोलर को सस्पेंड कर दिया है। मोहन यादव कैबिनेट के गठन के बाद शासकीय काम में लापरवाही के मामले में की गई यह पहली कार्रवाई है। खाद्य, नागरिक और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने जबलपुर में पदस्थ प्रभारी जिला आपूर्ति नियंत्रक कमलेश टांडेकर को धान उपार्जन केंद्रों के मामले में गंभीर लापरवाही पर सस्पेंड किया है। निलंबन अवधि में टांडेकर का मुख्यालय खाद्य विभाग संचालनालय भोपाल तय किया है।विभाग के अनुसार खरीफ सीजन में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी करने के लिए जारी की गई नीति के मुताबिक ई-उपार्जन पोर्टल पर रजिस्टर्ड किसानों से एक दिसंबर 2023 तक उपार्जन कार्य कराया जाना था। इसके लिए सहकारी समितियों के साथ एनआरएलएम में रजिस्टर्ड महिला स्व सहायता समूहों को भी उपार्जन केंद्र के संचालन का काम देने के निर्देश 29 नवंबर को जारी किए गए थे। इसमें जिला उपार्जन समिति के माध्यम से महिला स्व सहायता समूहों को उपार्जन केंद्र की अनुमति का प्रस्ताव खाद्य संचालनालय को भेजा जाना था। जबलपुर जिले में कुल 121 केंद्रों के विरुद्ध 85 उपार्जन केंद्र स्थापित किए गए हैं। बाकी 36 उपार्जन केंद्र महिला स्व सहायता समूहों को देने का प्रस्ताव 21 दिसंबर को भेजा गया जो काफी देरी से भेजा गया। इन उपार्जन केंद्रों के तय न होने से किसानों को उपज बेचने में परेशानी हुई है। साथ ही महिला स्व सहायता समूह उपार्जन केंद्र के लिए तय गोदामों का सत्यापन प्रक्रिया का पालन किए बगैर किया गया। इस संबंध में न तो प्रभारी फूड कंट्रोलर द्वारा संचालनालय को जानकारी दी गई और न ही स्थानीय स्तर पर जनहित का काम किया गया। सहकारी सेवा समितियों को दो-दो उपार्जन केंद्रों की जिम्मेदारी दिए जाने के विपरीत उपार्जन नीति का पालन नहीं करते हुए 27 सहकारी समितियों को केवल एक-एक उपार्जन केंद्र का जिम्मा सौंपा है। इसलिए जिले में आवश्यक उपार्जन केंद्र स्थापित नहीं किए जा सके। इसे व्यापक लापरवाही मानते हुए विभाग ने टांडेकर को सस्पेंड कर दिया है। आजीविका समिति की जाँच कराने की माँग कांग्रेस सहकारिता प्रकोष्ठ के अध्यक्ष शित्रकुमार चौबे ने जिले में कुछ आजीविका समितियों का फर्जी तरह से कार्य करने का आरोप लगाया है। इनका कहना है कि पंजीयन के 6 माह के अंदर समितियों के निर्वाचन के प्रस्ताव चले जाने चाहिए मगर पिछले 2 साल से किसी भी एक समिति का चुनाव प्रस्ताव कार्यालय उपायुक्त सहकारिता से नहीं गया है। नियम तो यह भी है कि यदि निर्वाचन नहीं होता है तो तत्काल विभाग को किसी शासकीय कर्मचारी को प्रशासक बना देना चाहिए, मगर कार्यालय के स्तर पर इस तरह की भी कार्रवाई नहीं हो रही है। इन्हें क्यों छोड़ा गया धान खरीदी की जाँच का जिम्मा तमाम एसडीएम को दिया गया था, खाद्य विभाग के अधिकारी भी इसमें शामिल थे, वहीं वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन और मार्कफेड के अधिकारियों का कहीं जिक्र तक नहीं किया जा रहा है। डिप्टी कलेक्टर, अपर कलेक्टर और सीईओ जिला पंचायत भी खरीदी केन्द्र की जाँच के लिए जिम्मेदार हैं लेकिन 1 दिसम्बर से अभी तक केवल लोकायुक्त ने ईमानदारी से कार्य किया और रिश्वत लेते कम्प्यूटर ऑपरेटर को पकड़ा, बाकी किसी ने भी किसी केन्द्र में कोई जाँच नहीं की। सहाकारिता उपायुक्त डॉ. अखिलेश निगम पिक्चर से ही गायब हैं जबकि उपार्जन समिति में वे जिम्मेदार पद पर हैं। रातों-रात गायब हुई धान जानकारों का कहना है कि जैसे ही वेयरहाउस संचालकों को यह पता चला कि जाँच दल आ रहा है तत्काल ही बिना अनुमति खरीदी करने वाले वेयरहाउसों से धान को गायब करवाया गया। यहाँ तक की कई वेयरहाउसों में जाँच दल पहुँच भी गया था लेकिन एप्रोच लगाकर जाँच दल को रोका गया और उनकी मौजूदगी में ही धान गायब करवाई गई। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि सरकारी बारदानों यानी बोरों में बिना अनुमति खरीदी हुई, यह कैसे हुआ कोई बताने तैयार नहीं। रातभर बाहर किया धान, फिर भी अंदर रखा मिला 30 हजार क्विंटल प्रमुख सचिव … Read more

राहुल गांधी करेंगे ‘भारत न्याय यात्रा’, मणिपुर से 14 जनवरी से होगी शुरुआत, 6200 KM का होगा पूरा सफर

Rahul Gandhi will undertake the ‘Bharat Nyay Yatra’ starting from January 14th, beginning from Manipur. The entire journey will cover a distance of 6200 kilometers. राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा पहले ही पूरी कर चुके हैं. इस यात्रा में उन्होंने कन्याकुमारी से कश्मीर तक का सफर तय किया था.नई दिल्ली ! कांग्रेस नेता राहुल गांधी ‘भारत न्याय यात्रा’ करने वाले हैं. पिछले साल सितंबर से लेकर इस साल 14 जनवरी तक भारत जोड़ो यात्रा करने के बाद अब राहुल इस नई यात्रा को करने जा रहे हैं. ‘भारत न्याय यात्रा’ लोगों को सामाजिक और आर्थिक न्याय दिलाने के लिए की जा रही है. भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत कन्याकुमारी से हुई थी, जो कश्मीर में जाकर खत्म हुई थी. राहुल ने इस यात्रा में दक्षिण से उत्तर का सफर किया था. वहीं, भारत न्याय यात्रा की शुरुआत पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर से होगी, जो पश्चिम में महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में जाकर खत्म होगी. इस तरह राहुल भारत न्याय यात्रा में पूर्व से पश्चिम की ओर सफर करने वाले हैं. पूरी यात्रा में 6200 किमी सफर तय किया जाएगा. ज्यादातर यात्रा बस के जरिए ही कवर की जाएगी, मगर कहीं-कहीं पैदल भी सफर किया जाएगा. भारत न्याय यात्रा को भारत जोड़ो यात्रा का दूसरा संस्कृरण बताया गया है, जिसकी शुरुआत 14 जनवरी से होगी. यात्रा में क्या होने वाला है खास? कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे 14 जनवरी को मणिपुर में भारत न्याय यात्रा को झंडा दिखाएंगे. इस तरह यात्रा की आधिकारिक तौर पर शुरुआत हो जाएगी. ये यात्रा 20 मार्च को जाकर मुंबई में खत्म होगी. भारत न्याय यात्रा 14 राज्यों के 85 जिलों से होकर गुजरेगी. मणिपुर, नागालैंड, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीगढ़, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र से भारत न्याय यात्रा गुजरने वाली है. कैसे आया भारत यात्रा का विचार? कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बुधवार (27 दिसंबर) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत न्याय यात्रा को लेकर जानकारी दी. उन्होंने कहा, ’21 दिसंबर को कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने सर्वसम्मति से अपना मत रखा कि राहुल गांधी को पूर्व से पश्चिम की ओर एक यात्रा करनी चाहिए. राहुल गांधी भी सीडब्ल्यूसी की इस इच्छा को पूरा करने के लिए तैयार हो गए.’ उन्होंने कहा, ‘ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी ने फैसला किया है कि 14 जनवरी से 20 मार्च तक मणिपुर से लेकर मुंबई तक भारत न्याय यात्रा की जाएगी. इस यात्रा में राहुल गांधी युवाओं, महिलाओं और हाशिए पर पड़े लोगों से मुलाकात करने वाले हैं. बस यात्रा के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा जाएगा. यात्रा में कुछ छोटे हिस्से को रुक-रुक कर पैदल भी कवर किया जाएगा.’ भारत जोड़ो यात्रा क्या थी? राहुल गांधी ने सितंबर 2022 में भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत की थी, जो जनवरी 2023 में जाकर खत्म हुई. राहुल गांधी की यात्रा की शुरुआत 7 सितंबर को कन्याकुमारी से हुई. इस यात्रा के जरिए उन्होंने 4500 किलोमीटर से ज्यादा का सफर पैदल ही तय किया. इस यात्रा का मकसद भारत को एकजुट और देश को मजबूत करना था. कांग्रेस की इस यात्रा से उसका संगठन काफी मजबूत हुआ था. भारत जोड़ो यात्रा 30 जनवरी, 2023 को कश्मीर में जाकर खत्म हुई. भारत जोड़ो यात्रा के जरिए 12 राज्यों और 2 केंद्रशासित प्रदेशों के 75 जिलों को कवर किया गया था. ये यात्रा जिस-जिस राज्य से होकर गुजरी, उस-उस राज्य में कांग्रेस नेताओं ने इसमें हिस्सा लिया. कई प्रमुख हस्तियों को भी भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होते हुए देखा गया था.

गांधी परिवार के करीबी दो पूर्व सीएम का भविष्य लिखना बांकी.

Writing the future of two former Chief Ministers close to the Gandhi family remains pending. – अब क्या करेंगे कमलनाथ और दिग्विजय, दोनों ने राजनैतिक विरासत की कुर्सी पर बेटों को किया शिफ्ट जेवी विधायक और नकुल सांसद- जय-वीरू की जोड़ी को हाईकमान ने दिया रेस्ट, दिग्विजय फिर भी सक्रिय और कमलनाथ 5 जनवरी के बाद लौटेंगे भोपाल। मध्य प्रदेश में पीढ़ी परिवर्तन का दौर भाजपा से लेकर कांग्रेस तक में चल रहा है। पुराने दिग्गजों को किनारे कर सेंकड और थर्ड लीडरशिप को फ्रंट पर खड़ा कर दिया है। पिछले कुछ सालों में देखें तो भाजपा ने यह प्रयोग पहले ही किया है। तीन राज्यों में करारी हार के बाद अब कांग्रेस ने भी प्लानिंग की है। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी ने एक झटके में कमलनाथ और दिग्विजय सिंह जैसे दिग्गज नेताओं को साइडलाइन कर दिया है। हैरत की बात है कि दोनों ही नेता गांधी परिवार के करीबियों में शुमार रहे हैं। इंदिरा गांधी ने तो कमलनाथ को तीसरा बेटा माना था। वहीं दिग्विजय सिंह के संबंध भी उनके पिता के चलते कांग्रेस में शुरुआत से ही बेहतर रहे हैं। विधानसभा के चुनाव में दोनों से जय-वीरू की भूमिका निभाई। परिणाम के बाद हाईकमान ने घर ही बैठा दिया। अब राहुल गांधी की यूथ ब्रिगेड के हाथों में प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंप दी है। इसके बाद सवाल यह है कि दिग्विजय सिंह और कमलनाथ का क्या होगा। यह लोकसभा के चुनाव में स्पष्ट हो जाएगा। इससे पहले दिग्विजय सिंह ने अपने बेटे जयवर्धन सिंह को राघौगढ़ से विधायक बनवाया। हालांकि जेवी कमलनाथ सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। वहीं साल 2019 के लोकसभा चुनाव में कमलनाथ ने अपनी सीट से राजनैतिक विरासत की जमीन पर बेटे नकुलनाथ को सांसद की कुर्सी पर बैठा दिया। खास बात है कि कांग्रेस प्रदेश की सभी सीटों पर हार गई। सिर्फ छिंदवाड़ा से ही कांग्रेस को सफलता मिली। पार्टी सूत्रों का कहना है कि 10 से 15 साल में पार्टी ने क्षत्रपों की दूसरी पीढ़ी तैयार ही नहीं की। इसका विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। बिना राय और सलाह कर दी जीतू की नियुक्तिपार्टी सूत्रों का कहना है कि पार्टी अब कमलनाथ को कोई पद देने के मूड में नहीं है। इसके संकेत इससे भी मिल रहे हैं कि बगैर उनकी राय लिए सीधे नियुक्तियां कर दी गईं। ऐसे में आगे उनको कोई जिम्मेदारी मिलने की संभावना नहीं दिख रही है। वहीं, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह भी राज्यसभा में तो बने रहेंगे, पर उनको भी कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। हालांकि, वे नए युवाओं को मार्गदर्शन देते रहेंगे। वहीं कमलनाथ अभी विदेश के दौरे पर हैं। जानकारी है कि वो 5 जनवरी को भारत लौट सकते हैं।पिछली जीत से नहीं लिया सबक – 2018 में कांग्रेस में पूर्व सीएम कमलनाथ, दिग्विजय सिंह के साथ युवा के रूप में ज्योतिरादित्य सिंधिया थे। राजस्थान में अशोक गहलोत के साथ सचिन पायलट थे। इस वरिष्ठ और युवा नेता के समन्वय से कांग्रेस को बड़ी जीत मिली थी। इस बार मध्य प्रदेश में कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की जय और वीरू की जोड़ी मुख्य रोल में थी। इन दोनों के ही बीच द्वंद्व जैसे कई बार स्थितियां देखी गई। युवा को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव, जीतू पटवारी जैसे नेताओं को साइड लाइन करके रखा गया। इस बार का चुनाव व्यक्ति विशेष केंद्रित हो गया था, जिसका कांग्रेस को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। मार्गदर्शक के रूप में अनुभव का लाभ ले सकते हैं – विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्व सीएम कमलनाथ और दिग्विजय सिंह पुरानी पीढ़ी के नेता हैं। भाजपा से लड़ने के लिए कांग्रेस को पीढ़ी परिवर्तन की जरूरत थी। यह राहुल गांधी ने पहल की तो यह देर से उठाया सही कदम है। वरिष्ठों के अनुभव का लाभ पार्टी मार्गदर्शक के रूप में ले सकती है। वरिष्ठ पदों पर बैठाने से नई पीढ़ी का युवा पार्टी से जुड़ नहीं पाता। इसका ही प्रदेश में कांग्रेस को नुकसान हुआ है। कमलनाथ के पास विकल्प है कि वह बेटे को लोकसभा चुनाव लड़ाएं या खुद लड़ें। हालांकि, शीर्ष नेतृत्व के ऊपर निर्भर करेगा कि वे इस पर सहमत होते हैं या नहीं? वहीं पीसीसी एमपी अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहना है िक कमलनाथ और दिग्विजय सिंह सहित सभी वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन से लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 51 प्रतिशत वोट शेयर को प्राप्त करेगी।

कमलनाथ पर भारी जीतू पटवारी, उमंग को स्वभाव, व्यवहार बदलने की चुनौती.

Jitu Patwari scores a significant win over Kamal Nath, challenging Umang to change his nature and behavior. वक्त बदला लेकिन कांग्रेस नहीं बदली. कभी युवा पीढ़ी को दरकिनार कर बुजुर्ग नेतृत्व को कमांड देने वाले कांग्रेस हाईकमान ने अब पीढ़ी परिवर्तन के नाम पर एकतरफा बिना सोचविचार के वरिष्ठ नेताओं को किनारे करते हुए युवा नेतृत्व के हाथ में पार्टी दे दी. कभी युवा नेताओं पर कमलनाथ भारी पड़ रहे थे और अब कमलनाथ पर जीतू पटवारी भारी साबित हो गए हैं. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को अपना स्वभाव, संगत और व्यवहार बदलना होगा. नेता-प्रतिपक्ष के स्टॉफ में ऐसे तत्व शामिल हो जाते है, जो सरकार से अप्रत्यक्ष रूप से उपकृत होते है. यही विपक्ष की रणनीति को लीक करते आ रहे है. ऐसे घुसपैठियों को रोक पाना, उमंग के लिए बड़ी चुनौती है. मध्यप्रदेश में कांग्रेस हारी तो कमलनाथ का कांग्रेस में भविष्य डूब गया. लेकिन जीतू पटवारी अपना विधानसभा चुनाव हार कर भी कांग्रेस अध्यक्ष पद जीत गए. कांग्रेस हाकमान पहले भी वही था, आज भी वही है. पहले का निर्णय भी इसका था और आज का निर्णय भी उसी का है. दोनों निर्णय का लक्ष्य तो बदलाव का था लेकिन अप्रोच अहंकारी थी. जब निर्णय का अप्रोच अहंकार से भरा होगा तो फिर इंप्लीमेंटेशन में तो यही एटीट्यूड ही दिखाई पड़ेगा. मध्यप्रदेश में कांग्रेस की पराजय अहंकार, तानाशाही और कार्यकर्ताओं को दरकिनार करने के कारण हुई है. कांग्रेस पार्टी नेतृत्व में कितना भी बदलाव कर ले लेकिन जब तक संगठन की कार्यपद्धति में सामूहिकता का ईमानदारी से पालन नहीं होगा तब तक पार्टी के भविष्य पर सवाल खड़े होते रहेंगे. जीतू पटवारी और उमंग सिंगार को संगठन और विधायक दल की कमान सौंपी गई है. इन दोनों नेताओं को संगठन और वरिष्ठ नेताओं की कार्य प्रणाली से समस्या थी. मध्यप्रदेश में कमलनाथ के जाने के बाद कांग्रेस उनकी कार्यप्रणाली की समस्या से तो निजात पा सकती है लेकिन कांग्रेस के संगठन का डीएनए बदलाव के इस निर्णय में भी दिखाई पड़ रहा है. कई वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा की गई है जिन चेहरों पर भरोसा जताया गया है, उन पर कई तरह के सवाल उछलते रहे हैं. मसलन, जीतू पटवारी के बड़बोलापन से कई बार कांग्रेस की किरी- किरी हो चुकी है. अब उन्हें अपनी जुबा पर लगाम लगानी होगी. वहीं कांग्रेस में कुंडली मारकर बैठे पदाधिकारियों को हटाने की बड़ी चुनौती होगी. वैसे बदलाव हमेशा अच्छा होता है. नया नेतृत्व हमेशा स्वागतयोग्य होता है. जब भी कोई निर्णय होता है तब उसका विश्लेषण इस आधार पर होता है कि निर्णय के पीछे हाईकमान ने किस सोच और चिंतन के आधार पर निष्कर्ष निकाले हैं. यह दोनों नेता ऊर्जावान हैं, सक्रिय हैं. कांग्रेस के सामने युवा ऊर्जावान और सक्रिय नेताओं के असफल होने का सबसे बड़ा उदाहरण राहुल गांधी स्वयं हैं. उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया. कांग्रेस लगातार राजनीतिक चुनौतियों में असफल होती ही दिखाई पड़ी. अब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष संभवत सबसे बुजुर्ग नेता हैं. *बदलाव के पीछे गांधी परिवार* मध्यप्रदेश में नेतृत्व बदलाव का जो फैसला हुआ है उसमें गांधी परिवार का रोल साफ देखा जा रहा है. मध्यप्रदेश में राजनीतिक क्षेत्र में यह स्पष्ट धारणा लंबे समय से बनी हुई है कि यह दोनों युवा नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के करीबी रहे हैं. चुनाव में पराजय के कारण भले ही कमलनाथ को अपमानजनक परिस्थितियों में विदा किया गया हो लेकिन राज्य के राजनीतिक हालातों को कमलनाथविहीन करने में दोनों नेताओं को लंबा वक्त लगेगा. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को लेकर भी ऐसी ही राजनीतिक चर्चाएं हैं कि उन्हें भी मुख्य भूमिका से विश्राम दिया गया है. सियासत में हमेशा वही चेहरे सफल होते हैं जिन पर कोई विवाद नहीं होते हैं. हाईकमान द्वारा नामित नेतृत्व का पार्टी और विधायक दल में बहुमत का समर्थन शायद तौला नहीं गया है. हाईकमान द्वारा निर्णय को थोपा गया है. कमलनाथ के अध्यक्ष के कार्यकाल में पार्टी का परफॉर्मेंस जिस स्तर पर पहुंच गया है, उसके पीछे भी निर्णय को एकतरफा लेने और थोपने की प्रवृत्ति काम कर रही थी. ऐसी प्रवृत्ति संगठन के लिए लाभप्रद नहीं होती है. *जमीन पर साबित करने की बड़ी चुनौती*  नए नेतृत्व को राहुल गांधी और कांग्रेस हाईकमान का भले ही संपूर्ण समर्थन हो लेकिन दोनों नेताओं को जमीन पर अपना नेतृत्व साबित करना होगा. जिस तरह तेज और डिजिटल पॉलिटिक्स बढ़ती जा रही है उसमें केडर मैनेजमेंट के साथ ही पार्टी के लिए फंड मैनेजमेंट भी महत्वपूर्ण पक्ष होता है. कमलनाथ के साथ यह भी माना जा रहा था कि उनका बीजेपी सरकार और नेतृत्व के साथ मिला-जुला राजनीतिक गणित चल रहा था. विपक्षी दल के सामने सबसे बड़ी समस्या यही रहती है कि जनहित के मुद्दों पर जमीन पर संघर्ष किया जाए. अक्सर ऐसा देखा गया है कि विपक्षी राजनीति सरकार के साथ एडजस्टमेंट करके आगे बढ़ने लगती है. ऐसी परिस्थितियां दूरगामी रूप से पार्टी के लिए हानिकारक साबित होती हैं. *क्या कमलनाथ-दिग्विजय के बिना कांग्रेस का उड़ान सम्भव* मध्यप्रदेश में कांग्रेस आलाकमान ने कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को भले ही अलग-थलग करने के संदेश और संकेत स्पष्ट कर दिए हों लेकिन वास्तविक रूप से जमीन पर ऐसा करना फिलहाल संभव नहीं दिखाई पड़ रहा है. इन दोनों नेताओं की जड़ें मध्यप्रदेश की राजनीति में दूर-दूर तक फैली हुई हैं. उनको अलग-थलग करके पार्टी बहुत लंबी दूरी तय नहीं कर पाएगी. इन दोनों नेताओं की जड़ों का इस्तेमाल कर कांग्रेस अपनी नई शाखाओं को मज़बूत कर सकती है. कांग्रेस के नए नेतृत्व को बीजेपी के मजबूत संगठन और नेतृत्व का मुकाबला करना है. बिना वरिष्ठ नेताओं के समन्वय और सहयोग के हो-हल्ला और मीडिया अटेंशन भले पाया जा सके लेकिन पार्टी की जड़ों को मजबूत करना संभव नहीं होगा. राज्य के नए नेतृत्व को पांच साल तक संघर्ष की स्थिति में रहना होगा. इसके लिए जनता के मुद्दों को चिन्हित करना, उसके लिए सतत संघर्ष करना होगा. अब सियासत सुविधा से आगे निकलकर संघर्ष की चौखट पर पहुंच गई है. जो पार्टी और नेता केवल सुविधा को राजनीति का लक्ष्य बनाएंगे उनको तो भविष्य में निराश होना निश्चित है.

खुदाई में मिला अंग्रेजों से लूटा टंट्या मामा का गड़ा हुआ खजाना

खंडवा! एमपी के खंडवा जिले में अंग्रेजों के जमाने का खजाना मिला है। यहां के खिडगांव में पुराने मकान के मलबे में सोने चांदी के सिक्के मिले। स्कूल के बच्चे यहां खेलने आए तो उनकी नजर सिक्कों पर पड़ी। बच्चों को सिक्के मिलने की खबर गांव में फैली तो यहां लोगों की भीड़ लग गई। गांव वालों ने यहां कई गड्ढे खोद डाले और इनमें से कई लोगों को सोने-चांदी के सिक्के मिले। दस दिन पुरानी इस घटना के बारे में अब एक नई बात सामने आई है। अंग्रेजों के इन सिक्कों को यहां के जननायक क्रांतिकारी नेता टंट्या भील का खजाना बताया जा रहा है। क्षेत्र में उन्हें प्यार से टंट्या मामा भी कहा जाता है। गांव में एक पुराने मकान की जगह नया मकान बनाया जा रहा है। इसके लिए खुदाई की गई और मलबे को पास की नदी के किनारे डाल दिया गया।10 दिसंबर को यहां स्कूल के बच्चे खेलने आए तो उन्हें यहां ब्रिटिश कालीन सिक्के मिले। बच्चों को सोने-चांदी के सिक्के मिलते ही यहां लोगों की भीड़ लग गई और पूरा गांव सिक्कों की खोज में लग गया। बाद में पुलिस ने कुछ लोगों से ये पुराने सिक्के बरामद किए।अंग्रेजों के इन सिक्कों को अब जानकार लोग टंट्या भील का खजाना बता रहे हैं। इतिहासकारों, विशेषज्ञों के मुताबिक टंट्या भील अंग्रेजों से लूट करते और सारा सामान इलाके में बांट देते थे। उस जमाने में टंट्या द्वारा दिए गए सिक्कों को सुरक्षित रखने के लिए लोग उन्हें जमीन में गड़ा देते थे। गड़ा हुआ यही खजाना खिडगांव में लोगों को मिला है। इससे पहले भी इलाके में कई बार लोगों को जमीन में गड़े सोने चांदी के सिक्कों का खजाना मिल चुका है। खंडवा और पास के जिलों में कई जगहों पर ऐसी घटनाएं हुईं। तीन साल पहले खंडवा के ही पुनासा में खुदाई में करीब तीन सौ सिक्के मिले थे। सात साल पहले खरगोन के भगवानपुरा में भी सिक्के प्राप्त हुए थे। यहां के टांडा बरुड गांव में भी सोने चांदी के सिक्के खुदाई में मिले थे। इन सभी जगहों पर मिले सिक्कों को जननायक टंट्या भील का अंग्रेजों से लूटा गया खजाना ही कहा गया था। कौन थे टंट्या भीलटंट्या भील अंग्रेजी हुकूमत का विरोध करते हुए आदिवासियों के हितों के लिए काम करते थे। वे अंग्रेजों का धन लूटते और उसे गरीबों में बांट देते। लूटे गए सोने चांदी के सिक्कों और जेवरात देकर उन्होंने कई कन्याओं की शादी कराई। उन्होंने सन 1878 में बुरहानपुर का सरकारी खजाना लूटा था। उस जमाने में लोग धन संपत्ति को जमीन में गड़ा देते थे। मालवा निमाड़ इलाके में यही गड़ा हुआ खजाना जब तब खुदाई में मिल जाता है।1889 में जब टंट्या भील को गिरफ़्तार किया गया तब कई विदेशी अखबारों में भी इसका जिक्र किया गया। अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार न्यूयार्क टाइम्स में टंट्या भील को भारत के राबिन हुड की उपाधि दी गई थी।

आज MP कांग्रेस अध्यक्ष का पदभार ग्रहण करेंगे ,जीतू पटवारी.

Jitu Patwari will assume the position of the Congress President in Madhya Pradesh. उज्जैन में महाकाल दर्शन के बाद आएंगे भोपाल; रोड शो कर पहुंचेंगे। कांग्रेस दफ्तर भोपाल! मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में जीतू पटवारी मंगलवार को कार्यभार संभालने जा रहे हैं। वे रोड शो के साथ भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचेंगे। इसके पहले वे सुबह उज्जैन में भगवान महाकाल के दर्शन करेंगे। कमलनाथ ने पटवारी को नई पारी के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से जीतू पटवारी के पदभार ग्रहण कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की। जीतू पटवारी मंगलवार शाम करीब 4 बजे प्रदेश कांग्रेस कार्यालय (PCC) पहुंचकर पदभार ग्रहण करेंगे। इस कार्यक्रम के लिए पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी समेत तमाम सीनियर लीडर्स को आमंत्रित किया गया है। ऐसा रहेगा जीतू पटवारी के इंदौर से भोपाल आने का प्रोग्राम बैरागढ़ से शुरू होगा रोड शो जीतू पटवारी बैरागढ़ से रैली के रूप में इमामी गेट, बुधवारा, लिली टॉकीज चौराहा, रोशनपुरा और लिंक रोड होते हुए प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पहुंचेंगे, जहां वरिष्ठ नेताओं एवं कांग्रेसजनों की उपस्थिति में पदभार ग्रहण करेंगे। स्वागत रैली में मप्र विधानसभा में नवनियुक्त नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे भी मौजूद रहेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दी बधाई जीतू पटवारी के पदभार ग्रहण के पहले पूर्व सीएम कमलनाथ ने X पर लिखा- मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के नवनियुक्त अध्यक्ष जीतू पटवारी कल (मंगलवार) अपराह्न 3:00 बजे प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पदभार ग्रहण करेंगे। मैं जीतू पटवारी को नई पारी के लिए पुनः शुभकामनाएं देता हूं। कांग्रेस के सभी कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों से अपील करता हूं कि भोपाल पहुंचकर पदभार ग्रहण कार्यक्रम में अवश्य शामिल हों। कांग्रेस को मजबूती प्रदान करें।

विधायक मोहन राठौड़ ने भारत संकल्प विकसित यात्रा को हरी झंडी दिखाई.

Legislator Mohan Rathore showed support for the Bharat Sankalp Vikasit Yatra by displaying the green flag. ग्वालियर! नगर निगम के बाल भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल रूप से भारत संकल्प विकसित यात्रा को हरी झंडी दिखाई गई। विकसित भारत संकल्प यात्रा का चार राज्यों में शुभारंभ किया गया है। स्थानीय बाल भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में जिला प्रशासन के अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए। विकसित भारत संकल्प यात्रा में विशेष रथ शहरी और ग्रामीण हर वार्ड और ग्राम पंचायत को कवर करेंगे। शहरी क्षेत्र में 46 कैंप लगाए जाएंगे। ये कैंप दस जनवरी तक संपन्न हो जाएंगे। जबकि 263 ग्राम पंचायत में भी यह कैंप 19 जनवरी तक पूरे कर लिए जाएंगे। हर रोज करीब दो से तीन वार्ड और ग्राम पंचायतों में यह रथ जाएंगे। इसके साथ ही वहां पर जन समस्या निवारण शिविर भी लगाए जाएंगे। विकसित भारत संकल्प यात्रा का प्रमुख मकसद केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का फीडबैक लेने के साथ ही इन योजनाओं से वंचित लोगों को इसका लाभ दिलाना भी है।

जीतू पटवारी बने MP कांग्रेस अध्यक्ष.

Jeetu Patwai is appointed as the President of Madhya Pradesh Congress Committee. उमंग सिंघार नेता प्रतिपक्ष, हेमंत कटारे को उप नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव में हार के बाद प्रदेश कांग्रेस संगठन में बड़ा बदलाव किया गया है। जीतू पटवारी को प्रदेश कांग्रेस का नया अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं उमंग सिंघार को नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हेमंत कटारे उप नेता प्रतिपक्ष बनाए गए हैं। उमंग सिंघार धार जिले के गंधवानी से विधायक हैं। उन्हें नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

मप्र के विपक्ष का नेता दिल्ली में तय करेगा पार्टी सुप्रीमो, रिपोर्ट भेजी.

The opposition leader of Madhya Pradesh will decide the party supremo in Delhi, as per the sent report. उदित नारायण भोपाल। मध्यप्रदेश में कांग्रेस विधायक दल की पहली बैठक भोपाल स्थित प्रदेश कार्यालय में गुरुवार को हुई। चुरहट विधायक अजय सिंह ने कहा कि बैठक में एक लाइन का प्रस्ताव पारित हुआ है कि नेता प्रतिपक्ष का फैसला दिल्ली हाईकमान करेगा। करीब 40 मिनट की बैठक में दिग्विजय सिंह ने लोकसभा चुनाव के बारे में विधायकों को सक्रिय होने के लिए कहा। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला और स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने विधायकों से वन टू वन चर्चा की। सुरजेवाला ने कहा कि आर्ब्जवर भंवर जीतेंद्र सिंह ने बैठक में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ शामिल नहीं हुए।कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने बताया कि कमलनाथ का कार्यक्रम छिंदवाड़ा जिले में पहले से तय है। पार्टी के प्रदेश प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला, स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष भंवर जितेंद्र सिंह, पूर्व उट दिग्विजय सिंह बैठक में पहुंचे। दिग्विजय सिंह ने मीडिया के सवालों पर बस इतना कहा कि कैबिनेट का गठन हो गया क्या। भाजपा के ओबीजी मुख्यमंत्री बनाने के साथ ही सामान्य और अनुसूचित जाति वर्ग से एक-एक डिप्टी सीएम बनाए हैं। ऐसे में कांग्रेस में आदिवासी विधायक को नेता प्रतिपक्ष पद देने पर विचार हो रहा है। हालांकि, कांग्रेस में ओबीसी चेहरे के तौर पर विजयपुर विधायक रामनिवास रावत और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व सतना विधायक सिद्धार्थ कुशवाह के नाम भी चर्चा में हैं। वहीं, संसदीय मामलों में अनुभवी नेताओं के तौर पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल भैया, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष और अमरपाटन से विधायक राजेंद्र कुमार सिंह को लेकर भी अंदरखाने विचार हो रहा है। भाजपा को विधायक याद दिलाएंगे संकल्पबैठक के बाद रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि हाईकमान का संदेश विधायकों को दिया गया है। उन्हें लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए कहा गया है। साथ ही विपक्ष में बैठने वाले विधायक जनता के प्रहरी के तौर पर काम करेंगे। सदन के भीतर जनता के मुद्दों को उठाने की जिम्मेदारी निभाएंगे। जनता के लिए सरकार का समर्थन भी करेंगे। इसके अलावा भाजपा को विधायक संकल्प पत्र को पूरा करने के लिए भी आगाह करते रखेंगे। आदिवासी नेताओं में इनके नाम शामिल

आखिरी सांस तक आपके साथ खड़ा रहूंगा.

I will stand by you until my last breath. कमलनाथ ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के इस्तीफे को लेकर किया खुलासा छिंदवाड़ा। भले ही प्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं बन पाई है, लेकिन पूर्व सीएम कमलनाथ अपने गढ़ छिंदवाड़ा में अपना किला बचाने में कामयाब रहे। लगभग 43 सालों से कमलनाथ छिंदवाड़ा की पहचान बनकर राजनीति में छाए हुए हैं। ऐसे में इस बार भी विधानसभा चुनाव में छिंदवाड़ा की सातों सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली है। कमलनाथ अब छिंदवाड़ा दौरे पर हैं और वे हर विधानसभा क्षेत्र में जाकर आभार सभा कर रहे हैं। पांढुर्णा और सौंसर में बुधवार को कमलनाथ ने आभार सभा में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने पांढुर्णा में कहा कि वे आखिरी सांस तक छिंदवाड़ा की जनता के बीच रहेंगे, वह रिटायरमेंट नहीं ले रहे है। नहीं लेगें रिटायरमेंट कमलनाथ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उनकों लेकर राजनीतिक गलियारो में यही चर्चा चल रही थी कि विधानसभा चुनाव में मिली हार के कारण उन्हें पीसीसी चीफ पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है। हालांकि आला कमान ने नाथ को दोबारा लोकसभा चुनाव तक की जवाबदारी दी है। ऐसे में कमलनाथ ने अपने गढ़ छिंदवाड़ा से आज इसको लेकर एक बड़ा बयान देकर यह साफ कर दिया है कि वे आने वाले समय में भी पूरी सक्रियता के साथ जनता के बीच रहेंगे और रिटायरमेंट नहीं लेंगे।आखिरी सांस तक जनता के साथ उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपनी आखिरी सांस तक जनता के साथ खड़े है। वह रिटायरमेंट नहीं ले रहे है। उन्होंने कहा कि छिंदवाड़ा की जनता का प्यार उन्हे पिछले 43 सालों से मिलता आ रहा है। आगे भी यह प्यार और स्नेह उन्हे मिलता रहेगा। उन्होंने कहा कि जिले के विकास के लिए वह कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। लोकसभा चुनाव का फूंका बिगुल कमलनाथ ने छिंदवाड़ा में मिली बंपर जीत के बाद अब लोकसभा चुनाव की तैयारियों का बिगुल फूंक दिया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से छिंदवाड़ा की जनता ने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का साथ दिया है। इसी तरह से लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस को यही प्यार और विश्वास लोकसभा चुनाव में भी मिलेगा। इस दौरान उनके साथ उनके बेटे नकुलनाथ भी मौजूद थे।

पहला आदेश पर्यावरण के हित में ,सीएम मोहन.

The first order in the interest of the environment, CM Mohan. भोपाल। म.प्र. में धार्मिक स्थल एवं अन्य स्थानों पर म.प्र. कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के प्रावधानों तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय, माननीय उच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर जारी दिशा निर्देशों के अनुक्रम में राज्य शासन द्वारा निर्णय लिया गया है कि किसी भी प्रकार के धार्मिक स्थल अथवा अन्य स्थान में निर्धारित मापदण्ड के अनुरूपही ध्वनि विस्तारक यंत्रों (लाउडस्पीकर / डी.जे.) आदि का उपयोग किया जा सकेगा। ■ धार्मिक स्थल एवं अन्य स्थानों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों (लाउडस्पीकर / डी.जे.) को अवैधानिक रूप से और निर्धारित मापदंड से अधिक आवाज में बजाने पर लगेगा प्रतिबंध। ■ म.प्र. कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के प्रावधानों, माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय द्वारा जारी दिशा- निर्देशों के अनुक्रम में लिया गया निर्णय। ■ धर्म गुरुओं से संवाद और समन्वय के आधार लाउडस्पीकरों को हटाने का प्रयास किया जाएगा और ऐसे धार्मिक स्थलों की सूची बनाई जाएगी जहां उक्त नियमों/निर्देशों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। ■ ध्वनि प्रदूषण तथा लाउडस्पीकर आदि के अवैधानिक उपयोग की जांच के लिये सभी जिलों में उड़नदस्तों के गठन का निर्णय लिया गया है।• जिला स्तर पर साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी एवं इस संबध में 31 दिसंबर 2023 तक पालन प्रतिवेदन गृह विभाग को उपलब्ध कराना होगा। ■ ध्वनि प्रदूषण के मामलों की सतत निगरानी के लिए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अपराध अनुसंधान विभाग पुलिस मुख्यालय को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

भाजपा से ज्यादा कांग्रेस ने बनाए प्रकोष्ठ, बांटे 500 से अधिक पद.

Congress has formed more committees than BJP, distributing more than 500 positions. भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस के 40 से अधिक प्रकोष्ठ और बांटे गए 500 से अधिक पद भी विधानसभा चुनाव में कोई कमाल नहीं दिखा पाए। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने नए प्रकोष्ठों की झड़ी लगा दी थी कांग्रेस ने अपने पार्टी संविधान से अलग हटकर करीब 40 से अधिक प्रकोष्ठ बनाये हैं। चुनाव से पहले संगठन में नियुक्ति रेवड़ी की तरह बांटी गई। इतना ही नहीं इनमें अध्यक्ष, संयोजक और कार्यकारी अध्यक्ष जैसे पदों पर थोकबंद नियुक्तियां भी की गई थीं। लेकिन ये सभी प्रकोष्ठ चुनाव में कोई खास कमाल नहीं दिखा पाए। खास बात है कि प्रकोष्ठ बनाने में कांग्रेस ने तो भाजपा को भी पीछे कर दिया। वहीं चुनाव से पहले कांग्रेस ने सचिव, महासचिव और उपाध्यक्ष जैसे 500 से अधिक पदाधिकारी भी बनाए थे लेकिन वे भी चुनाव में पूरी तरह से बेअसर साबित हुए। कांग्रेस ने हर वर्ग को साधने के लिए प्रकोष्ठ का सहारा लिया था। इसके लिए पार्टी ने पुजारी से लेकर मेकेनिक जेसे प्रकोष्ठ का गठन किया था। इसके साथ ही आउटसोर्स, शिक्षक, केश शिल्पी, डॉक्टर, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, सद्भावना कोमी एकता और परिवहन जेसे कई अन्य प्रकोष्ठ भी बनाए गए थे। कांग्रेस कार्यालय में लगातार अलग-अलग प्रकोष्ठ और विभागों के सम्मेलन भी किए थे। प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ खुद इन्हें संबोधित करते थे। 105 महासचिव, उपाध्यक्षों की संख्या 50

अशोक स‍िंह बने चेयरमैन ,प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन सम‍ित‍ि का पुनर्गठन.

Ashok Singh has been appointed as the Chairman, overseeing the restructuring of the Pradesh Congress Discipline Committee. आठ सदस्‍यीय सम‍ित‍ि में वर‍िष्‍ठ लोगों को स्‍थान द‍िया गया। मप्र कांग्रेस के अध्‍यक्ष कमल नाथ के न‍िर्देशानुसार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्‍यक्ष अशोक सिंह की अध्‍यक्षता में प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन सम‍ित‍ि का पुनर्गठन क‍िया गया है। प्रदेश कांग्रेस के उपाध्‍यक्ष अशोक सिंह को चेयरमैन बनाया गया है। इसके अलावा पूर्व मंत्री सज्‍जन सिंह वर्मा, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, पूर्व मंत्री हर्ष यादव, पूर्व मंत्री सईद अहमद, पूर्व सांसद गजेंद्र स‍िंह राजूखेड़ी, पूर्व विधायक नेहा स‍िंह व पूर्व व‍िधायक प्रताप लोधी को सदस्‍य बनाया गया है।

मध्यप्रदेश विधानसभा में 20 साल बाद भगवा रंग बिखेरेंगी, कांग्रेस विधायक रामसिया भारती.

After 20 years, the saffron color will adorn the Madhya Pradesh Legislative Assembly, Congress MLA Ramsiya Bharti to lead. उमा की मलहरा सीट से जीतीं कांग्रेस की रामसिया; भगवा पहने विपक्ष में दिखेंगी भोपाल! मध्यप्रदेश विधानसभा में 20 साल बाद भगवा कपड़े पहने एक और साध्वी नजर आने वाली हैं। फर्क इतना है कि इस बार ये साध्वी भाजपा से नहीं बल्कि कांग्रेस से हैं। हम बात कर रहे हैं, छतरपुर जिले की मलहरा विधानसभा सीट से जीत दर्ज करने वाली कांग्रेस की रामसिया भारती की। रामसिया भारती ने भाजपा प्रत्याशी प्रद्युम्न सिंह लोधी को मात दी है। 2003 में उमा भारती इसी सीट से चुनाव जीतकर मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री बनी थीं। खास बात यह है कि रामसिया भारती ने अपना पूरा चुनाव भाजपा की स्टाइल में ही लड़ा। भाजपा के हिंदुत्व का जवाब अपने तरीके से दिया। उमा भारती की ही तरह रामसिया भारती ने भागवत कथाओं से अपनी सियासी जमीन मजबूत की और आस्था की डोर को थामे मतदाताओं तक पहुंचीं। चुनावी भाषण भी प्रवचन के अंदाज में दिया। उमा की तरह टीकमगढ़ जन्मभूमि, छतरपुर को बनाया कर्मभूमि माथे पर लाल तिलक के साथ भगवा वस्त्र पहने, रामचरितमानस और भागवत कथा में पारंगत रामसिया भारती की कहानी भी कम रोचक नहीं है। उमा भारती की तरह रामसिया भारती भी टीकमगढ़ की रहने वाली हैं। दोनों ने ही राजनीति की शुरूआत छतरपुर जिले की मलहरा विधानसभा सीट से की। दूसरी समानता यह है कि दोनों ने ही बचपन से प्रवचन देना शुरू कर दिया था। इतनी समानता होने के बाद रामसिया भारती ने कांग्रेस की बजाए बीजेपी को क्यों नहीं चुना? इस सवाल का जवाब देते हुए वे कहती हैं- दादाजी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। पिता भी लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े रहे। फिर मेरी राह कैसे जुदा हो सकती थी? रामसिया ने कहा- कांग्रेस का आइडिया ऑफ नेशन, बीजेपी के हिंदुत्व से कहीं ज्यादा बेहतर है। भाजपा को उसके ही प्रचार की शैली में दी मात चुनाव प्रचार के दौरान रामसिया भारती भाजपा के आक्रामक हिंदुत्व का जवाब, उसकी ही शैली में देती नजर आईं। भारती अपने भाषण की शुरूआत भारत माता की जय, भगवान श्री राम की जय, हनुमान जी महाराज की जय जैसे नारे लगाकर करतीं और अंत में केवल ‘कांग्रेस पार्टी जिंदाबाद’ कहती थीं। वे अपनी रैलियों की शुरुआत भगवान राम के नाम और महाकाव्य रामचरितमानस के छंदों से करतीं, फिर हनुमान और कांग्रेस पार्टी के नेताओं की ओर बढ़ती थीं।रामसिया भारती ने विपक्षी भाजपा नेताओं की तुलना राक्षस पात्रों से करते हुए मतदाताओं को लुभाने का हर हथकंडा अपनाया। वे भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहती थीं कि बीजेपी धर्म, राम, गाय के नाम पर वोट मांगती हैं लेकिन भारतीयों के बीच वैमनस्य पैदा करती है। यह हिंदू धर्म के खिलाफ है और मैं इसे बदलने के लिए यहां आई हूं। उन्होंने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान बेरोजगारी, विकास और दलबदल का मुद्दा उठाया। ये भी कहा, ‘मैं यहां विश्वासघात का बदला लेने आई हूं।’ रामसिया भारती के राजनीतिक कौशल का ही कमाल था कि मतदान से एक दिन पहले बसपा प्रत्याशी लखन अहिरवार ने अपना समर्थन उन्हें दे दिया। इसी का नतीजा रहा कि भाजपा की तमाम कोशिशों के बावजूद रामसिया भारती ये चुनाव जीतने में सफल रहीं। मध्यप्रदेश की राजनीति में रामसिया भारती तीसरी साध्वी 12वीं पास 36 वर्षीय रामसिया भारती मध्यप्रदेश की राजनीति की तीसरी साध्वी हैं। प्रदेश की राजनीति में 20 साल पहले उमा भारती के रूप में साध्वी की एंट्री हुई थी। 2003 में उमा भारती इस सीट से चुनाव जीत गई थीं लेकिन 2008 के चुनाव में मलहरा की जनता ने उन्हें हरा दिया। दरअसल, उमा ने भाजपा छोड़कर भारतीय जनशक्ति पार्टी बना ली थी और वे इसी पार्टी से चुनाव लड़ी थीं। उमा भारती की बीजेपी में वापसी हुई मगर वे उत्तर प्रदेश में सक्रिय रहीं। मध्यप्रदेश की सियासत में दूसरी साध्वी के तौर पर प्रज्ञा ठाकुर की एंट्री हुई। मालेगांव बम ब्लास्ट मामले में आरोपी बनाई गईं प्रज्ञा ठाकुर को भाजपा ने भोपाल से लोकसभा का टिकट दिया। उन्होंने पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह को मात दी। अब रामसिया भारती के तौर पर तीसरी साध्वी राजनीति में आई हैं।

मध्यप्रदेश: चुनावी हार-जीत से जुड़े अजब-गजब कारनामे

भोपाल ! किसी ने चेहरा काला किया तो कोई दंडवत कर पहुंचा मंदिर; कोई सिर मुंडवाकर बोला-संकल्प पूरा हुआ ,किसी ने सिर मुंडवा लिया तो किसी ने चेहरे पर कालिख पोत ली , किसी ने शर्त के एक लाख रुपए जीतकर गोशाला में दान कर दिए, कोई 300 किलोमीटर बाइक से ही भोपाल के लिए निकल पड़ा, कुछ महिलाएं तो बिना चप्पल-जूते के 70 किलोमीटर दूर शनि मंदिर दर्शन करने गईं। दृश्य – 1 ग्वालियरः नेता का मुंह काला न हो, इसलिए अपना ही कर लिया दतिया के भांडेर से कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने चुनाव से पहले दावा किया था, ‘प्रदेश में भाजपा को 60 सीटें भी नहीं मिलेंगी। ऐसा हुआ तो मैं अपना मुंह काला करा लूंगा।’ भाजपा ने दो तिहाई बहुमत हासिल कर लिया। नतीजों के बाद इसका वीडियो फिर चर्चा में आ गया। इसके बाद बरैया को घेरने की कोशिशें भी शुरू हो गईं। ऐसे में ग्वालियर ग्रामीण किसान कांग्रेस के महामंत्री योगेश दंडोतिया बरैया के समर्थन में उतर आए। दंडोतिया ने बुधवार को ग्वालियर में बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। मीडिया के सामने ही उन्होंने जेब से स्याही निकाली और अपने चेहरे पर पोत ली। उन्होंने कहा, ‘फूल सिंह बरैया को मुंह काला नहीं करने दूंगा। इसके लिए मैंने अपना मुंह काला किया है।’ यह भी बता दें कि बरैया भी गुरुवार को भोपाल पहुंचकर अपना वचन पूरा करने के लिए मुंह काला करेंगे। दृश्य – 2 रतलामः यह विधायक तो बाइक से भोपाल के लिए निकल पड़े बात रतलाम जिले की सैलाना विधानसभा सीट की है। यहां से चुनाव जीतकर भारत आदिवासी पार्टी के कमलेश डोडियार विधायक बने हैं। चुनाव जीतने के तीन दिन बाद बुधवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट की। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सीएम शिवराज सिंह चौहान और पुलिस को टैग किया। लिखा, ‘मैं कमलेश डोडियार, विधायक बनने के बाद बाइक से शपथ ग्रहण के पूर्व होने वाली कागजी कार्रवाई पूरी करने भोपाल के लिए निकल चुका हूं। मेरी सुरक्षा के इंतजाम किए जाएं ताकि कोई अनहोनी न हो।’ उन्होंने फेसबुक लाइव के जरिए मदद भी मांगी। कहा- ‘मैं चुनाव में जुगाड़ के सहारे चला हूं। मैं मजदूर वर्ग से आता हूं और काफी गरीब हूं। भोपाल जाने के लिए मैंने दोस्तों को फोन किया था, लेकिन सहायता न मिल पाने पर बाइक से ही भोपाल निकल गया हूं। यदि कोई शुभचिंतक मेरी मदद कर सकते हों तो फोर व्हीलर उपलब्ध करा दें, जिससे मैं समय पर विधानसभा पहुंचकर कागजी कार्रवाई पूरी कर सकूं। मैं किसी से डरता नहीं हूं, जो भी मेरी हत्या करने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा, वो बर्बाद हो जाएगा।’ सैलाना से भोपाल करीब 330 किलोमीटर है। डोडियार बाइक से भोपाल पहुंच भी गए हैं। उन्होंने 12 हजार रुपए उधार लेकर चुनाव लड़ा था। इसे चुकाने के लिए नोतरा (आदिवासी समाज में आर्थिक मदद की प्रथा) का सहारा लिया। दृश्य – 3 भिंड: नेता प्रतिपक्ष की हार पर 10 साल बाद कराया मुंडन भिंड जिले के लहार विधानसभा क्षेत्र में रहते हैं मुन्ना विश्वकर्मा। 62 साल के मुन्ना पिछले 10 साल से साधु वेश में ही थे। दाढ़ी बढ़ी हुई, सिर के बाल भी बढ़ा लिए। वे अलग-अलग मंदिरों में समय बिताते रहे। बुधवार को उन्होंने अचानक नाई की दुकान पर पहुंचकर बाल कटवाए। शेविंग भी बनवा ली। लोगों ने पूछा तो असलियत सामने आई। पता चला – कांग्रेस लीडर व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह के चुनाव हारने की खुशी में उन्होंने ऐसा किया है। दरअसल, 10 साल पहले लहार बस स्टैंड के पास बने मुन्नालाल के मकान को नगर पालिका ने अतिक्रमण बताकर तोड़ दिया था। मुन्नालाल ने तत्कालीन विधायक डॉ. गोविंद सिंह पर बेवजह परेशान करने का आरोप लगाया था। उन्होंने संकल्प लिया था- ‘जब तक डॉ. गोविंद सिंह विधायक रहेंगे, तब तक बाल नहीं कटवाऊंगा। दाढ़ी भी नहीं बनवाऊंगा।’ दृश्य – 4 श्योपुर: कीचड़ वाली सड़क पर दंडवत कर पहुंचे मंदिर श्योपुर में मातासूला गांव के रहने वाले किसान रामराज मीणा बुधवार को एक किलोमीटर दूर स्थित हनुमान मंदिर तक दंडवत करते पहुंचे। लोगों ने जब कारण पूछा तो सुनकर हैरान रह गए। मीणा ने बताया कि श्योपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक बाबूलाल जंडेल की जीत के लिए क्षेत्रपाल बाबा के मंदिर में मन्नत मांगी थी। अब इसे पूरा कर रहे हैं। बड़ी बात ये कि सड़क पर कीचड़ के बाद भी वे कहीं रुके नहीं। रामराज मीणा अब गांव से करीब 15 किलोमीटर दूर मानपुर इलाके के क्षेत्रपाल बाबा के मंदिर तक दंडवत परिक्रमा लगाएंगे। इस मौके पर मंदिर में कार्यक्रम भी किया जाएगा। दृश्य -5 सीधी: अपने नेता की जीत की खुशी में 5 साल बाद मुंडन बात 2018 विधानसभा चुनाव की है। सीधी जिले की चुरहट विधानसभा सीट से कांग्रेस नेता अजय सिंह राहुल चुनाव हार गए थे। इसके बाद उनके समर्थक संजय सिंह ने संकल्प लिया- ‘जब तक अजय सिंह राहुल चुनाव जीतकर विधानसभा नहीं पहुंच जाते, बाल नहीं कटवाऊंगा। दाढ़ी भी नहीं बनवाऊंगा।’ आखिरकार 2023 में संजय सिंह के संकल्प की जीत हुई। अजय सिंह राहुल चुनाव जीत गए। इसके बाद बुधवार को वे अपने नेता अजय सिंह राहुल के घर पहुंचे। संजय ने उनके सामने ही मुंडन करवाया और दाढ़ी भी बनवाई। दृश्य – 6 छिंदवाड़ा: शर्त जीतने पर मिले एक लाख रुपए गोशाला में दान किए 21 नवंबर की बात है। छिंदवाड़ा में व्यापारी राम मोहन साहू और कमलनाथ समर्थक प्रकाश साहू के बीच शर्त लगी कि अगर भाजपा प्रत्याशी बंटी विवेक साहू चुनाव जीतते हैं तो राम मोहन 10 लाख रुपए देंगे। अगर कमलनाथ जीतते हैं तो प्रकाश साहू एक लाख रुपए देंगे। शर्त की वजह से दोनों प्रदेशभर में चर्चा में भी रहे। दोनों ने ही अपने-अपने कैंडिडेट की जीत का दावा किया। नतीजे आए तो कमलनाथ ने जीत दर्ज की। आखिरकार, शर्त के मुताबिक मंगलवार को प्रकाश साहू ने राममोहन को एक लाख रुपए दिए। हालांकि, राम मोहन ने यह राशि गोशाला के लिए नगर निगम को दान कर दी।

तेलंगाना के नए मुख्यमंत्री होंगे रेवंत रेड्डी, 7 दिसंबर को लेंगे शपथ कांग्रेस आलाकमान ने लगाई नाम पर मुहर.

The new Chief Minister of Telangana will be Revanth Reddy, who will take the oath on December 7. The Congress high command has stamped approval on the name तेलंगाना । कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बैठक में बताया कि रेवंत रेड्डी तेलंगाना के नए मुख्यमंत्री होंगे. वह अनुभवी हैं, उन्होंने सभी के साथ काम किया है और वह पहले ही तेलंगाना के लोगों को वादा कर चुके हैं कि वह उनके लिए काम करेंगे.तेलंगाना के अगले मुख्यमंत्री के लिए कांग्रेस के रेवंत रेड्डी के नाम पर मुहर लग गई है. वह राज्य के नए मुख्यमंत्री होंगे और सात दिसंबर को पद की शपथ लेंगे. कांग्रेस ने मंगलवार शाम को इसका आधिकारिक ऐलान कर दिया. कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बैठक में बताया कि रेवंत रेड्डी तेलंगाना के नए मुख्यमंत्री होंगे. वह अनुभवी हैं, उन्होंने सभी के साथ काम किया है और वह पहले ही तेलंगाना के लोगों को वादा कर चुके हैं कि उनके लिए काम करेंगे. उन्होंने बताया कि रेवंत रेड्डी सात दिसंबर को पथ की शपथ लेंगे.तेलंगाना विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 64 सीटें जीतकर बीआरएस को सत्ता से बाहर कर दिया था. बीआरएस को 39 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था जबकि बीजेपी को यहां आठ ही सीटें मिली थीं. तेलंगाना में जीत का सबसे ज्यादा श्रेय रेवंत रेड्डी को मिल रहा है. यही वजह है कि सीएम पद के लिए सबसे ज्यादा चर्चा रेवंत रेड्डी की है. रेवंत रेड्डी तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं. रेड्डी तेलंगाना में कांग्रेस के उन तीन लोकसभा सांसदों में शामिल हैं, जिन्होंने 2019 में जीत हासिल की थी. इस चुनाव में भी रेवंत तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के सामने कामारेड्डी विधानसभा सीट से चुनाव लड़े, हालांकि, बीजेपी उम्मीदवार ने दोनों को मात दे दी.

कमलनाथ के नेतृत्व में ऐतिहासिक हार ने ,कांग्रेस को उप्र की तरह रसातल में धकेल दिया

भोपाल। मप्र में कांग्रेस नेता जमीनी नब्ज से बेखबर कैबिनेट बना रहे थे. पीसीसी पर बधाई के होर्डिग लगा रहे थे. नकुलनाथ चुनावी अभियान में 7 दिसंबर को उनके पिता कमलनाथ के मुख्यमंत्री की शपथ समारोह के लिए निमंत्रण बांट रहे थे। कांग्रेस नेताओं में इतनी गलतफहमी कैसे आई, इस पर शोध की जरूरत है। कमलनाथ ने मध्यप्रदेश की कांग्रेस को यूपी के रास्ते पर डाल दिया है. यह ढलान उत्तर भारत में कांग्रेस के रहे-सहे वजूद को भी रसातल पर पहुंचा देगा। बुढ़ापे में CM की कुर्सी से प्यार कमलनाथ और कांग्रेस को ही ले डूबा। अगर किसी युवा को नेतृत्व का मौका दिया गया होता तो इतनी शर्मनाक हार शायद नहीं होती। कमलनाथ के इर्द-गिर्द सलाहकारों और दिग्विजय सिंह और सुरेश पचौरी जैसे चूके हुए नेताओं की प्रवीणता का ऐसा जाल बन गया था कि कमलनाथ को सच्चाई दिखाई ही नहीं पड़ रही थी। सपनों का महल ऐसा बना लिया गया था कि ‘जय जय कमलनाथ’ के अलावा कांग्रेसी विचारधारा के लोग भी नाशुक्रे लगने लगे थे। कमलनाथ की छिंदवाड़ा से जो राजनीति शुरू हुई थी, वह राजनीति छिंदवाड़ा से ही खत्म होती दिखाई पड़ रही है। अभी भी वक्त है। उम्र के आखिरी पड़ाव पर अगर सच्चाई स्वीकार कर ली जाएगी तो जिंदगी का आखिरी दौर सुकून से बीत सकेगा अन्यथा चाटुकारों और सलाहकारों की गलतफहमी तो सब कुछ समाप्त ही कर देती है। कांग्रेस की हार ने यह भी साबित कर दिया है कि 2018 में कांग्रेस को जो भी बहुमत मिला था उसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया का योगदान था। पार्टी की नहीं, कमलनाथ -दिग्विजय की हार बीजेपी के 18 साल की सरकार के बाद भी कांग्रेस की पराजय नहीं बल्कि कमलनाथ- दिग्विजय सिंह जोड़ी की ही हार है. मध्यप्रदेश को लेकर दो दिन पहले जब एग्जिट पोल आए थे, तब सबसे ज्यादा विवाद कांग्रेस द्वारा पैदा किया गया था। एग्जिट पोल वाली एजेंसी और उनके मालिकों को ऐसा साबित कर दिया गया था कि जैसे उन्होंने सरकार से पैसा लेकर एग्जिट पोल बीजेपी के पक्ष में दिखाया है। सोशल मीडिया में तो यहां तक लिखा गया कि एग्जिट पोल में बीजेपी की प्रचंड जीत दिखाने वाली एजेंसियों को सरकार के जनसंपर्क विभाग द्वारा करोड़ों रुपए की मदद दी गई है। विभाग के नाम पर चैनल की एक सूची भी सोशल मीडिया पर वायरल की गई। कांग्रेस और कांग्रेस समर्थित मीडिया से जुड़े लोग इस हद तक एक तरफा निर्णय सुना रहे थे कि जनसंपर्क के कुशल अधिकारियों की कार्य पद्धति को भी सवालों में खड़ा कर दिया था।

मप्र में कांग्रेस की हार के जिम्मेदार कमलनाथ, तीन राज्यों में हार के बाद बोले संजय राउत.

In Madhya Pradesh, Kamal Nath spoke after the losses in three states, said Sanjay Raut. कांग्रेस को इस पर आत्म मंथन करना चाहिए चुनाव से पहले महिलाओं को सीधे लाभ देने वाली योजनाओं से बीजेपी को फायदा हुआ मुंबई। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस की हार हो चुकी है। सिर्फ तेलंगाना ही ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है। कांग्रेस की हार पर विभिन्न नेताओं और राजनीतिक पंडितों के बयान सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में शिवसेना नेता और सांसद संजय राउत का भी बयान सामने आया है। हार पर कांग्रेस को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए संजय राउत ने मध्य प्रदेश में कांग्रेस की हार का जिम्मेदार कमलनाथ को बताया है। उन्होंने आगे कहा कि तेलंगाना में एआईएमआईएम फैक्टर और केसीआर काम नहीं आए। जहां तक राजस्थान की बात है, ये पारंपरिक चलन है। वहां हर 5 साल के बाद सरकार बदल जाती है। छत्तीसगढ़ की हार को लेकर संजय राउत ने कहा कि कांग्रेस को इस बात पर आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। मध्यप्रदेश में बीजेपी की जीत का श्रेय संजय राउत ने शिवराज सिंह चौहान को दिया है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले महिलाओं को सीधे लाभ देने वाली योजनाओं से बीजेपी को बहुत फायदा हुआ। कांग्रेस ने चुनाव में क्षेत्रीय पार्टियों को किया नजर अंदाज सं‌‌जय राउत ने इस चुनाव में क्षेत्रीय पार्टियों की भूमिका पर कहा कि अगर कांग्रेस इंडिया अलायंस के साथियों को साथ लेकर लड़ती तो स्थिति कुछ बेहतर होती। सिर्फ राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जैसे लोगों के प्रचार करने से कुछ नहीं होगा। क्षेत्रीय पार्टियों को नजरअंदाज कर आप देश में राजनीति नहीं कर पाएंगे। पनौती शब्द को लेकर संजय राउत ने कहा कि अगर पनौती शब्द राहुल गांधी पर उल्टा पड़ा होता तो तेलंगाना में ऐसा कुछ क्यों नहीं हुआ। भाजपा का हश्र टीम इंडिया की तरह ही होगा संजय राउत ने बताया कि 6 दिसंबर को इंडिया एलायंस की बैठक बुलाई गई है। जहां कई बातों पर चर्चा की जाएगी। इंडिया एलायंस मजबूत है। जिस तरह से वर्ल्ड कप के दौरान टीम इंडिया ने लगातार 10 मुकाबले जीते लेकिन फाइनल में मुकाबला टीम इंडिया हार गई वैसा ही हश्र 2024 के चुनाव में भाजपा का होगा।

लाड़ली बहनों ने कर दी शिवराज भइया की राह आसान।

भाजपा का 150 प्लस का दावा सच साबित होता हुआ नजर आ रहा है।कांग्रेस पार्टी और कमलनाथ के वादों पर जनता ने नहीं किया भरोसा। उदित नारायण भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की मतगणना जैसे जैसे आगे बढ़ रही है। वैसे ही प्रदेश के चुनाव परिणामों की तस्वीर साफ होती जा रही है। हालांकि अभी पूरी तरह किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी लेकिन अभी तक की मतगढना के दौरान मिल रहे रुझानों ने भाजपा नेताओं के 150 से अधिक सीटों पर चुनाव जीतने के दावे को सच कर दिया है और मध्य प्रदेश की जनता ने स्पष्ट कर दिया है की मध्य प्रदेश की आम जनता भाजपा के साथ है। इसके साथ ही सीएम शिवराज सिंह चौहान की लाड़ली बहनों ने भी अपने भाई की जीत के लिए मतदान में हिस्सा लिया और चुनाव परिणाम को भाजपा के पक्ष में लाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। मतदान के समय से लेकर बीती रात तक सभी राजनेतिक पार्टियों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के अपनी अपनी पार्टी की जीत और सरकार बनाने को लेकर बड़े बड़े दावे किए जा रहे थे। इस चुनाव प्रक्रिया के दौरान नेता अपने समर्थकों का मन समझने में ही मात खा रहे थे, तो जनता का मन पढ़ना तो वैसे भी आसान नहीं था और इसी का परिणाम है कि सभी के दावे रखे रह गए। जनता ने यह साफ कर दिया है कि किसी के भी कहने से कुछ नहीं होता जो कुछ होता है वह आम जनता की इच्छा से होता है और जनता ने भाजपा को अपना मत रूपी आशीर्वाद और समर्थन देकर इस बात को स्पष्ट कर दिया है। अभी तक की मतगणना में यह तो साफ हो गया है कि मध्य प्रदेश में फिर से भाजपा सरकार बनाने के लिए तैयार है बस अब देखना यह है की कुल कितनी सीटें स्पष्ट बहुमत के साथ भाजपा के खाते में आती हैं, वहीं दूसरी बात यह भी ध्यान देने योग्य है की मध्य प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के दिग्गज नेता जो चुनाव मैदान में उतरे थे उनमें से किसे जनता का आशीर्वाद मिलेगा और कौन क्लीन बोल्ड होगा। हम आपको याद दिला दें की सहारा समाचार ने मतदान के पूर्व ही स्पष्ट रूप से दावा किया था कि इस बार के चुनाव में दोनों ही दलों के द्वारा मैदान में उतारे गए दिग्गज नेताओं को लेने के देने पड़ेंगे। साथ ही कई परंपरागत सीटों पर चौंकाने वाले ऐसे परिणाम सामने आएंगे जिनका किसी ने भी अनुमान नहीं लगाया होगा। दूसरे दावे के अनुसार मध्य प्रदेश में फिर से भाजपा की सरकार बनने के चांस 65% और कांग्रेस पार्टी के सत्ता में आने के चांस 35% हैं। सहारा समाचार के यह दोनों ही दावे सत्य होते नजर आ रहे हैं। चुनाव परिणाम की तस्वीर साफ हो चुकी है परिणाम भी सामने आने लगे हैं। कुछ सीटों पर हार जीत भी डीक्लियर हो चुकी है। कुछ देर की बात है बहुत जल्द पूर्ण चुनाव परिणाम सामने आ जायेंगे।

मध्य प्रदेश के एग्जिट पोल पर बरसे कमलनाथ…झूठ फैला रहे एग्जिट पोल.

Kamal Nath lashes out at the exit polls in Madhya Pradesh, claiming that false information is being spread. एग्जिट पोल एजेंसियां चुनाव अधिकारियों पर दबाव बनाना चाहती TV भाजपा मध्य प्रदेश में चुनाव हारेगी *उदित नारायण* भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता कमलनाथ ने शुक्रवार को भाजपा की जीत की भविष्यवाणी करने वाली एजेंसियों के एग्जिट पोल के नतीजों पर सवाल उठाया। कमलनाथ ने कहा कि एग्जिट पोल एजेंसियां झूठा माहौल बना रही हैं। भाजपा मध्य प्रदेश में चुनाव हारेगी। उन्होंने कहा कि कुछ एग्जिट पोल एजेंसियां चुनाव अधिकारियों पर दबाव बनाना चाहती हैं। अपने एक्स हैंडल पर एक वीडियो में उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को 3 दिसंबर को निष्पक्ष मतगणना सुनिश्चित करनी चाहिए। तीन दिसंबर को भाजपा की सािजश सफल नहीं होगीकमलनाथ ने कहा कि सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरना चाहिए। भारतीय जनता पार्टी चुनाव हार गई है। कुछ एग्जिट पोल जानबूझकर बनाए गए हैं, ताकि कांग्रेस कार्यकर्ता निराश हो जाएं और गलत माहौल बनाकर अधिकारियों पर दबाव बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि यह साजिश सफल नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सभी कांग्रेस पदाधिकारियों को मतगणना के दिन के लिए तैयार रहना चाहिए। हम सभी जीतने के लिए तैयार हैं और सभी एकजुट हैं। यदि आपको (पार्टी कार्यकर्ताओं को) कोई समस्या महसूस होती है तो कृपया सीधे मुझसे बात करें या तीन दिसंबर को प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) कार्यालय को सूचित करें। कांग्रेस पार्टी सत्ता में आने वाली है। क्या कहते हैं एग्जिट पोल?बता दें, कई एग्जिट पोल में बीजेपी की जीत की भविष्यवाणी की गई है। दैनिक भास्कर ने बीजेपी को 95-115 सीटें और कांग्रेस को 105-120 सीटें मिलने का अनुमान लगाया है। इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया ने बीजेपी को 140-162 सीटें और कांग्रेस को 70-89 सीटें दीं। टुडेज़ चाणक्य ने कहा कि बीजेपी को 151 सीटें मिलेंगी और कांग्रेस को 74 सीटें मिलेंगी, जन की बात एग्जिट पोल ने भविष्यवाणी की थी कि बीजेपी को 100-123 सीटें मिलेंगी और कांग्रेस को 102-125 सीटें मिलेंगी, रिपब्लिक टीवी-मैट्रिज ने बीजेपी को 118-130 सीटें दी हैं और कांग्रेस 97-107 सीटें दी हैं। अन्य एग्जिट पोल ने भी इसी तरह के नतीजों की भविष्यवाणी की है। इस बीच, सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बीजेपी राज्य में सत्ता बरकरार रखेगी। नतीजे ती दिसंबर को घोषित किए जाएंगे।

कमलनाथ ने कार्यकर्ताओं व प्रदेश की जनता से की अपील.

Kamal Nath appealed to the party workers and the people of the state. कांग्रेस के सभी कार्यकर्ता पूरी ताकत से मैदान में आ जाएं। भाजपा चुनाव हार चुकी है। कुछ एग्जिट पोल जानबूझकर इसलिए बनाए गए हैं कि कांग्रेस कार्यकर्ता निराश हों और झूठा माहौल दिखाकर अधिकारियों पर दबाव बनाया जाए।यह षड्यंत्र कामयाब होने वाला नहीं है। कांग्रेस के सभी पदाधिकारी, जिला अध्यक्ष, जिला प्रभारी, मोर्चासंगठनों के प्रमुख और प्रकोष्ठ के पदाधिकारी अपने-अपने काम में जुट जाएं और निष्पक्ष मतगणना कराएं।हम सब जीत के लिए तैयार हैं। हम सब एकजुट हैं। आपको कोई भी समस्या लगती है तो आप सीधे मुझसे बातकरें। 3 दिसंबर को कांग्रेस पार्टी की सरकार बन रही है।

अधिकतर चैनल्स जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं.

Most channels are far away from ground reality. आइए आपको उन सीटों की जानकारी देते है जहाँ मुकाबला त्रिकोणीय है या चतुष्कोणीय है,यह सीटें कोई नहीं बता सकता कि कौन जीतेगा,जहाँ प्रत्याशी की हार जीत तीसरे चौथे प्रत्याशी को मिले वोट पर निर्भर होगी,कई जगह यह गैर भाजपा गैर कांग्रेस उम्मीदवार जीतने की ताकत भी रखते हैं । *उदित नारायण* भोपाल।पहले हम बसपा की Top performing सीट्स से शुरुआत करते हैं 1-दिमनी2-मुरैना3-रेगांव4-नागौद5-सतना6-गुढ़7-सिमरिया8-राजनगर9-पथरिया10-गोहद11-लहार12-भिंड13-बारासिवनी-अजाबशास्त्री(लोधी)14-सेंवढ़ा-दामोदर यादव-भीम आर्मी आदिवासी बहुल सीटे जो GGP के असर की हैं15-परसवाड़ा-कंकर मुंजारे16-बिछिया-कमलेश टेकाम17-जबेरा-विनोद राय18-शाहपुरा-अमानसिंह पोर्ते19-मानपुर-राधेश्याम काकोड़िया20-अमरवाड़ा-देव रावेन भलावी21-लखनादौन-सन्तर भलावी22-सिवनी-रंजीत वासनिकऐसी सीटें जहाँ जयस से जुड़े युवकों ने अच्छी चुनोती देकर मुकाबला त्रिकोणीय बनाया है23-सैलाना-कमलेश्वर डोडियार24-महू-प्रदीप मावी25-रतलाम ग्रामीण-डॉ अभय ओहरी26-पेटलावद- इंजीवालूसिंह गामड़27-नेपानगर-बिल्लोरसिंह जमरा28-भगवानपुरा-मोहन किराड़े29-मनावर-लालसिंह बर्मन(आप/जयस)30-सरदारपुर-राजेन्द्र गामड़आप पार्टी जिन सीटो पर प्रभावी है31-सिंगरौली-रानी अग्रवाल32-बंडा सुधीर यादव33-चाचौड़ा-ममता मीणाइसके अलावा कुछ निर्दलीय है जिन्होंने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाया है34-कटंगी-केसर बिसेन/प्रशांत मेश्राम35-भीकनगांव-मोहन पटेल36-पानसेमल-रमेश चौहान37-जोबट-माधोसिंह डाबर/रिंकुबाला डाबर(जयस)38-बुरहानपुर से हर्ष चौहान/AIMIM उम्मीदबार नफीस मंशा खान39-होशंगाबाद-चौरे40-सिवनी मालवा-ओम रघुवंशी/सुनील गौरहीरा अलावा के नेशनल जयस ने भी 4 प्रत्याशी उतारे है41-भैंसदेही-संदीप धुर्वे42-घोड़ाडोंगरी-स्मिता राजा धुर्वे43-टिमरनी-रमेश मर्सकोले44-बड़वाणी-संदीप नरगावे45-राजपुर सुनील सोलंकीइसके अलावा लगभग 2/3सीटों पर समाजवादी पार्टी प्रत्याशी निर्णायक वोट लाएंगे46-निवाड़ी-मीरा दीपक यादव47-टीकमगढ़ से सपा प्रत्याशी48-बहोरीबंद से शंकर महतो

30 साल से जीतते आ रहे केपी सिंह की शिवपुरी में परीक्षा, क्या रहेगा रिजल्ट.

The examination in Shivpuri, which has been won by K.P. Singh for the past 30 years, what will be the result? Special Correspondent- Sahara Samachaar, Shivpuri भोपाल। शिवपुरी जिले की पांच विधानसभा सीटों के लिए 3 दिसंबर को मतगणना का काम होगा। इसको लेकर सभी आवश्यक तैयारियां जिला प्रशासन के द्वारा पूरी कर ली गई हैं लेकिन इसी बीच शिवपुरी विधानसभा सीट पर सबकी निगाहें लगी हुई हैं क्योंकि यहां से कांग्रेस के नेता और पिछले 30 साल से पिछोर विधानसभा सीट से जीतते हुए आ रहे केपी सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार कांग्रेस ने केपी सिंह को पिछोर की बजाय शिवपुरी से टिकट दिया है। पिछोर विधानसभा सीट से पिछले 30 साल से 6 बार से केपी सिंह विधायक बनते हुए आ रहे हैं लेकिन इस बार उनका टिकट बदला गया और उन्हें शिवपुरी विधानसभा में मैदान में उतारा गया है। शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा ने उनके खिलाफ देवेंद्र जैन को टिकट दिया है क्योंकिभाजपा की वरिष्ठ नेता यशोधरा राजे सिंधिया अपने स्वास्थ्य कारणों के चलते चुनाव नहीं लड़ रही हैं। यशोधरा राजे सिंधिया द्वारा चुनाव नहीं लड़ने के कारण भाजपा ने भी यहां पर टिकट बदलकर उनकी जगह देवेंद्र जैन को मौका दिया है।भाजपा के गढ़ के रूप में जाना जाती है शिवपुरी सीट-शिवपुरी विधानसभा सीट को भाजपा के गढ़ के रूप में जाना जाता है क्योंकि यहां से पिछले चार बार से विधानसभा चुनाव में भाजपा जीतते हुए आ रही हैं। यशोधरा राजे सिंधिया यहां से चार बार विधायक निर्वाचित हो चुकी हैं इसलिए इस सीट को भाजपा का गढ़ कहा जाता है लेकिन इस बार कांग्रेस के केपी सिंह ने यहां से चुनाव मैदान में उतरकर भाजपा को टक्कर दी है।केपी सिंह हार गए तो टूट जाएगा रिकॉर्ड-पिछोर विधानसभा सीट से 6 बार से विधायक बनते हुए आ रहे केपी सिंह इस बार शिवपुरी में अपना भाग्य आजमा रहे हैं अगर वह यहां से चुनाव हार गए तो उनका लगातार चुनाव जीतने का रिकॉर्ड टूट जाएगा। अगर जीतते हैं तो वह इस रिकार्ड को कायम कर पाएंगे और सातवीं बार वह वह निर्वाचित होंगे। वैसे अभी तक जो अनुमान लगाया जा रहा है उसके अनुसार यहां पर भाजपा के देवेंद्र जैन केपी सिंह पर भारी पड़े क्योंकि देवेंद्र जैन यहां पर केपी सिंह की दबंगई छवि को मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ा। इसके अलावा शिवराज सरकार की योजना और लाडली बहना योजना का असर यहां पर देखा जा रहा है। हालांकि 3 दिसंबर को परिणाम सामने आएंगे तब तक सबकी निगाहें इस परिणाम पर ही टिकी हैं।कांग्रेस में टिकट को लेकर चली माथापच्ची-शिवपुरी विधानसभा सीट की टिकट को लेकर कांग्रेस में अंतिम दौर तक माथापच्ची चली। नाम निर्देशन पत्र भरने के अंतिम दौर तक तमाम कयासों के दौर चलते रहे कि यहां से कौन चुनाव लड़ेगा। पहले ऐसा अनुमान लगाया जा रहा था कि भाजपा छोड़कर आए कोलारस विधायक वीरेंद्र रघुवंशी को कांग्रेस टिकट देगी लेकिन उनको टिकट न देकर केपी सिंह को टिकट दिया गया। केपी सिंह को पिछोर की वजह शिवपुरी मैदान में उतारा गया। इसको लेकर कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के बीच कुछ दिनों के लिए बयानबाजी का दौर भी चला लेकिन बाद में मामला साफ हो गया कि उन्हें एक रणनीति के तहत शिवपुरी से उतारा गया है। पिछोर विधानसभा सीट पर भी कांग्रेस में टिकट को लेकर माथापच्ची चली। पूर्व में यहां से केपी सिंह की बजाय कांग्रेस ने शैलेंद्र सिंह को टिकट दिया लेकिन उनका नाम भी बदलकर फिर बाद में अरविंद लोधी को टिकट दिया गया। कांग्रेस की बार-बार टिकट बदला-बदली की रणनीति के कारण भी पार्टी की फजीयत हुई।

एग्जिट पोल भाजपा और कांग्रेस में कांटे की टक्कर.

Exit poll” indicates a tough competition between the BJP and Congress एग्जिट पोल भाजपा और कांग्रेस में कांटे की टक्कर* एमपी विधानसभा चुनाव एग्जिट पोल रिजल्ट, अब आखिरी वक्त का इंतजार उदित नारायण भोपाल-ग्वालियर। एमपी एग्जिट पोल के नतीजे आने लगे हैं। ऐसे में सबकी निगाहें ग्वालियर-चंबल क्षेत्र पर टिकी है। ग्वालियर-चंबल की वजह से ही 2020 में कमलनाथ की सरकार गिर गई थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने समर्थकों के साथ बीजेपी का दामन दाम लिया था। एबीपी और सी वोटर्स के एग्जिट पोल के अनुसार ग्वालियर-चंबल में बीजेपी की स्थिति ठीक नहीं है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ में बीजेपी को बड़ा नुकसान हो रहा है।दरअसल, मध्य प्रदेश में एबीपी और सी-वोटर्स के एग्जिट पोल के अनुसार एमपी में बीजेपी को 88-112 और कांग्रेस को 113-137 सीटें मिल रही हैं। वहीं, अन्य को 02-08 सीटें मिल रही है। बीजेपी को सबसे ज्यादा नुकसान ग्वालियर-चंबल के क्षेत्र में हो रही है। यह ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए असहज करने वाले नतीजे हैं।एबीपी-सी वोटर्स के अनुसार ग्वालियर चंबल की 34 में से बीजेपी को 4-8 और कांग्रेस को 25-29 सीटें मिल रही हैं। अगर यह अनुमान सही साबित हुए तो ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए बड़ा झटका माना जाएगा। ग्वालियर-चंबल की सीटों पर ही उनका प्रदर्शन टिका हुआ है। पार्टी में आगे की स्थिति उनकी तभी मजबूत रहेगी, जब ज्यादा से ज्यादा उनके वफादार चुनाव जीतेंगे।निकाय चुनाव में लग चुका है झटकावहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ में बीजेपी को निकाय चुनाव में झटका लगा चुका है। कई सालों बाद पार्टी ग्वालियर और मुरैना में मेयर चुनाव हार गई थी। ऐसे में इस बार ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने बड़ा चैलेंज है।एक्सिस माय इंडिया में बीजेपी को बढ़तइसके साथ आजतक और एक्सिस माय इंडिया के सर्वे में सिंधिया के गढ़ में कांग्रेस को झटका लग रहा है। इस सर्वे के अनुसार ग्वालियर चंबल की 34 में से 19 सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस को 14 सीटें मिल रही है।एग्जिट पोल के नतीजे कुछ भी बता रहे है यदि कुल मिलाकर देखा जाय तो मध्यप्रदेश में बीएसपी एसपी एवं गोंडवाना पार्टी की कुल मिलाकर 32 सीटो में त्रिकोणीय मुकाबला होने से एवम लाडली बहना योजना का लाभ यदि बीजेपी को मिलता है तो मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार पुनः बनने की संभावना प्रबल है कुल मिलाकर बीजेपी 118 से 122 सीट, कांग्रेस 108 से 110, बीएसपी अन्य की 5 सीटे आने की संभावना दिख रही है। बीएसपी एसपी गोंडवाना के आने ज्यादा फायदा भाजपा को मिल सकता है ।मध्य प्रदेश में इस बार भी भाजपा की सरकार बनती दिख रही है।

महाकौशल के तीन दिग्गज नेताओं दाव पर लगी साख.

Mahakaushal three stalwart leaders of expertise face a challenge. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, केंद्रीय मंत्री प्रहलाद और फग्गन सिंह कुलस्ते मैदान में, तीनों के परिणामों पर पूरे प्रदेश की नजर, भाजपा और कांग्रेस बेचैन, परिणामों को लेकर सियासत में चर्चाओं का बाजार गर्म उदित नारायणभोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा 2023 के परिणामों को लेकर प्रदेश की सियासत में चर्चाओं का बाजार गर्म है। ग्वालियर-चंबल, निमाड़-मालवा, बुंदेलखंड, बिंध्य क्षेत्र और महाकौशल में यूं तो लोग अपने-अपने नेताओं की जीत को लेकर आश्वस्त हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के महाकौशल क्षेत्र की है। क्योंकि यह क्षेत्र उनका गढ़ कहा जाता है। इस क्षेत्र में इस बार कांग्रेस भारी रहेगी या भाजपा, इसको लेकर प्रदेश भर की नजर लगी हैं। कांग्रेस ने पिछले विधानसभा चुनाव में जहां पर जबरदस्त बढ़त ली थी। कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा की सभी 7 सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी। इस बार भाजपा ने अपने दो केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और फगन सिंह को भी इस क्षेत्र से विधानसभा के चुनाव मैदान में उतारा है। इस क्षेत्र में आने वाले आठ जिलों की 38 सीटों पर किसे कितनी सीटें मिलेंगी इस पर पूरे प्रदेश की नजर है। दरअसल, मध्य प्रदेश में सरकार बनाने के लिए इस क्षेत्र को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। कमलनाथ के परिणामों पर सबकी नजरमध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ छिंदवाड़ा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। साल 2018 में वह चुनाव नहीं लड़े थे, लेकिन उनका प्रभाव साफ तौर पर इस जिले में दिखाई दिया था। जिले की सभी सिम कांग्रेस ने जीत ली थी बाद में कमलनाथ के उपचुनाव छिंदवाड़ा सीट से लड़ा और चुनाव जीत गए। इस बार कमलनाथ कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री का चेहरा इसलिए ना सिर्फ उनकी सीट छिंदवाड़ा पर लोगों की नजर है, बल्कि उनके जिले की हर सीट पर प्रदेश भर की नजर गड़ी हुई है। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल और फग्गन सिंह कुलस्ते के चौकाने वाले होंगे परिणामकेंद्रीय मंत्री पहलाद सिंह पटेल नरसिंहपुर से चुनाव लड़ रहे हैं उनके भाई जालम सिंह पटेल इसी क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। केंद्रीय मंत्री और भाजपा प्रदेश के दिग्गज नेताओं में शुमार प्रहलाद सिंह पटेल के चुनाव परिणामों को लेकर कांग्रेस और भाजपा के नेताओं के साथ प्रदेश भर के सभी राजनेताओं की नजर उन पर है। केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते का भाजपा के दलित आदिवासियों नेताओं में बड़ा नाम है। इस बार उन्होंने निवास विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा है। साल 2018 में यह सीट कांग्रेस ने जीती थी। भाजपा ने आदिवासियों के सबसे बड़े नेता माने जाने वाले कुलस्ते को इस सीट से उतर कर मुकाबला रोचक बना दिया है। पूरे प्रदेश पर की नजर इस सीट पर है। महाकौशल में आने वाली आदिवासी बाहुल्य सीटों पर कुलस्ते के चुनावी मैदान में उतरने से कितना असर पड़ेगा। इस पर भी दोनों ही राजनीतिक दलों के लोगों की नज़रें टिकी हुई है।

कांग्रेस की सरकार बनेगी या नहीं, अब चर्चा डिप्टी सीएम बनाने की.

Whether the Congress will form the government or not is now under discussion, focusing on the appointment of the Deputy Chief Minister. कर्नाटक और छत्तीसगढ़ की तर्ज पर एमपी में भी कांग्रेस कर सकती है प्रयोग उदित नारायणभोपाल – मध्य प्रदेश में सरकार आखिर किसकी बनेगी। यह फैसला 3 दिसंबर के बाद ही होगा। इस बीच कांग्रेस के अंदर डिप्टी सीएम बनाए जाने का जिन निकलकर सामने आ गया है। कांग्रेस के अंदर चर्चा है कि छत्तीसगढ़, कर्नाटक के बाद मध्य प्रदेश में भी डिप्टी सीएम बनाए जाने को लेकर कवायद चल रही है। कांग्रेस की शुरूआत से ही अपने कम फीस के तौर पर कमलनाथ को प्रेजेंट किया है। अब डिप्टी सीएम कौन बनेगा या फिर बनाया जाएगा। यह मामला केंद्रीय आलाकमान ही तय करेगा। कांग्रेस के सीनियर लीडर और पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह का कहना है कि मध्य प्रदेश में डिप्टी सीएम बनाए जाने को लेकर फैसला सेंट्रल लीडरशिप करेगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिका अर्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का फैसला होगा। अगर डिप्टी सीएम बनाया जाता है तो कमलनाथ को भी भरोसे में लिया जाएगा। केंद्रीय लीडर से जो भी तय करेगी, वह मध्य प्रदेश में भी होगा। यानी कि केंद्रीय गला कमान की मंजूरी होती है तो कांग्रेस मध्य प्रदेश में भी डिप्टी सीएम बन सकती है। हालांकि अभी इसके लिए लंबा कांग्रेस का इंतजार करना पड़ेगा लेकिन कांग्रेस पूरे भरोसे में है कि सरकार बनने जा रही है।

कर्ज में डूबा मध्यप्रदेश, जो सत्ता में आएगा, करोड़ों का कर्ज मिलेगा विरासत में।

Madhya Pradesh will inherit debts in the millions when it comes to power. मनीष त्रिवेदीभोपाल, मध्यप्रदेश में इस बार तीन दिसंबर को जिसकी भी सरकार बनती है, उसे करोड़ों का कर्ज विरासत में मिलेगा। क्योंकि प्रदेश सरकार पर करोड़ों के कर्ज हैं। ऐसे में यह सवाल लाजमी है कि जिसकी भी सरकार बनती है उसने जो जनता से वादे किए हैं वह कैसे पुरे होंगे? फिलहाल सरकार के ऊपर 3.85 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है. प्रदेश के हर नागरिक पर 47 हजार रुपए का कर्ज है. सरकारी खजाने से साल का 20 हजार करोड़ रुपये तो सिर्फ ब्याज चुकाने में जा रहा है. मध्यप्रदेश शासन का वित्तीय वर्ष 2023-24 का बजट 3.14 लाख करोड़ रुपए का है. इसका तकरीबन 26.2% हिस्सा वेतन, भत्ते और ब्याज की अदायगी में ही चला जाता है. अकेले वेतन-भत्ते को देखें तो वित्तीय वर्ष खत्म होने तक 56 हजार 314 हजार करोड़ रुपये से अधिक इस पर खर्च होंगे. यह बजट का 18.64% होता है. वहीं, पेंशन पर बजट का 18 हजार 636 करोड़ रुपए यानी 6.17% और ब्याज पर 22 हजार 850 करोड़ रुपये यानी 7.56% खर्च होगा. मौजूदा फाइनेंसियल बजट के मुताबिक सरकार की आमदनी 2.25 लाख करोड़ है और खर्च इससे 54 हजार करोड़ है. अब नई सरकार को वर्तमान बजट से अधिक राशि की आवश्यकता होगी. मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव के परिणाम 3 दिसंबर को आने हैं. मतदान के बाद सत्तारूढ़ बीजेपी और विपक्षी कांग्रेस की ओर से सरकार बनाने का दावा किया जा रहा हैं. हालांकि,वोटर का फैसला 3 दिसम्बर को आएगा लेकिन सूबे में सरकार किसी भी पार्टी की बने, उसे विरासत में खाली खजाना मिलेगा. फिलहाल सरकार के ऊपर 3.85 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है. साफ है कि नई सरकार के लिए खस्ताहाल खजाने से अपनी लोक-लुभावन चुनावी घोषणाओं को पूरा करने के लिए बड़ी चुनौती सामने आने वाली है. जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश सरकार सालाना 20 हजार करोड़ रुपए ब्याज देती है. जीएसटी लागू होने के बाद से राज्य के पास नए टैक्स लगाने की गुंजाइश बेहद सीमित रह गई है. ऐसे में सरकार किसी भी बने, उसके लिए अर्थव्यवस्था को गतिमान बनाए रखने के साथ वित्तीय प्रबंधन बड़ी चुनौती होगी. अभी मध्यप्रदेश सरकार पर जितना कर्ज है, उस लिहाज से देखा जाए तो हर नागरिक पर 47 हजार रुपए का कर्ज है. वित्तीय जानकार बताते है कि पिछले 23 सालों में प्रति व्यक्ति कर्ज 42000 बढ़ गया है. साल 2001-02 में प्रदेश पर 23 हजार करोड़ रुपए का कुल कर्ज था. जनसंख्या के हिसाब से प्रतिव्यक्ति बमुश्किल 3,500 हजार रुपए का कर्ज था. दरअसल, 31 मार्च 2023 को खत्म वित्तीय वर्ष में सरकार पर 3.31 लाख करोड़ का कर्ज था, जो 2023-24 के अंत तक 3.85 लाख करोड़ रुपए हो गया.

नातीराजा के खिलाफ हत्या के प्रयास का प्रकरण दर्ज, 12 अन्य कांग्रेस समर्थक भी बनाए गए आरोपी

Case has been registered against an attempted murder of Nati Raja, with 12 other Congress supporters also accused. Udit Narayanभोपाल। छतरपुर जिले के राजनगर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस विधायक विक्रम सिंह नातीराजा के ड्राइवर सलमान की मौत के मामले ने सियासी रंग ले लिया है। इस मामले में पुलिस ने पहले ही भाजपा प्रत्याशी अरविंद पटैरिया सहित 21 लोगों के खिलाफ हत्या एवं हत्या के प्रयास का प्रकरण दर्ज कर लिया था। अब भाजपा के दबाव में नातीराजा सिह एक दर्जँन लोगों के खिलाफ भी धारा 307 के तहत हत्या के प्रयास का प्रकरण दर्ज हो गया।घटना मतदान के पूर्व की रात की थी। जैसे ही मतदान निबटा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह राजनगर पहुंच गए और भाजपा प्रत्याशी अरविंद पटैरिया सहित अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर धरना दे दिया। पुलिस अधीक्षक छतरपुर के आश्वासन के बाद दिग्विजय ने रात पर चला अपना धरना तो समाप्त कर दिया लेकिन यह दांव नातीराजा के लिए उलटा पड़ गया। अगले ही दिन प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा सहित पूरी भाजपा सक्रिय हो गई। पुलिस महानिदेशक और निर्वाचन आयोग को शिकायत कर अरविंद पटैरिया के खिलाफ की गई कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताया गया। भाजपा ने कहा कि सलमान की मौत के लिए नातीराजा ही जवाबदार हैं। नतीजा यह हुआ कि पुलिस ने नातीराजा सहित कांग्रेस के अन्य 12 समर्थकों के खिलाफ भी पुलिस ने हत्या के प्रयास का प्रकरण दर्ज कर लिया। वीडी शर्मा ने आज छतरपुर में भाजपा के तमाम नेताओं के साथ पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर को भी ज्ञापन सौंपा और दाेषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

कांग्रेस और भाजपा के खाका पर जनता तय करेगी पांच साल का भविष्य.

Sahara Samachaar; BJP; Congress; MP;

Fate of Congress and BJP will be determined by the public for the next five years. भाषणों का दौर खत्म, दो दिन का चुनावी गणित करेगा जीत-हार का फैसला, जनता किस पर करे जबभरोसा, दोनों ने खूब किए वादे. उदित नारायण चुनावी विश्लेषणभोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 को लेकर चुनावी भाषणों का दौर चरम पर पहुंचने के बाद आज बुधवार शाम को इस पर ब्रेक लग जाएगा। तूफानी भाषणों से उब चुकी जनता तक अपनी बात रखने के लिए नेता उनके घर पर पहुंच रहे हैं और प्रलोभन देकर अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश में जुटे हैं। मतदाताओं की मान-मनोब्बल तय करेगी कि जनता किसको सत्ता की बागडोर सौंपेगी। दोनों पार्टियों ने पांच साल के भविष्य का खाका भाजपा का संकल्प पत्र और कांग्रेस का वचन पत्र में पहले ही लिख दिया है। अपने-अपने चुनावी एंजेडे के आधार पर दोनों पार्टियां जीत के दावे कर रहीं है। जानकार बताते हैं कि इनकी जीत-हार का दारोमदार बसपा, निर्दलीय और सपा की चाल पर आकर टिक गया है। वैसे इनका प्रभाव ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड महाकौशल,और विंध्य क्षेत्र में देखा जा रहा है। इन्हीं अंचलों की जीत-हार ही दोनों पार्टियों को सत्ता के शिखर पर पहुंचाती है। सिंधिया का भविष्य उज्जवल: संत रामलला सरकाररामलला सरकार के एक साक्षात्कार के अनुसार यदि उनकी भविष्यवाणी को सही माना जाए तो मप्र में भाजपा फिर से वापसी करती दिख रही है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि ज्योतिरादित्य सिंधिया का भविष्य उज्जवल है। साथ ही यह भी कहा कि मप्र में 7 सांसदों में से 3 सांसद चुनाव हार सकते हैं! 2 जीतेंगे एंव 2 का भविष्य अधर में है। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर दिमनी मुरैना और सांसद राकेश सिंह का जबलपुर से चुनाव जीतना कठिन है। मप्र का अगला मुख्यमंत्री कौन!शिवराज सिंह की लोकप्रियता, सहजता एवं लाडली बहनों का स्नेह उन्हें अगले मुख्यमंत्री के रूप में देखा जाए तो अतिसंयोक्ति नहीं होगी! राजनैतिक विष्लेषक बताते हैं कि भाजपा एवं कांग्रेस के बीच में कांटे की टक्कर जरूर है, लेकिन भाजपा का पलडा भारी दिख रहा है। परिणामों का विष्लेषण करें तो महज 2 से 5 सीटों का अंतर ही दिख रहा है। जिसको साधने में भाजपा अभी से अपने समीकरण जुटाने में लग गई है। भाजपाः गरीब छात्रों को मुफ्त में शिक्षा ,रोजगार,गरीबोको को सबकुछ मुफ्तदेर से ही सही, लेकिन भाजपा ने भी अपना चुनावी संकल्प पत्र जारी किया है। जिसमें जनता के लिए काफी लोकलुभावने वादे किए हैं। इसमें प्रमुख रूप से- 5 साल तक गरीबों को मुफ्त राशन। किसानों से 2700 प्रति क्विंटल पर गेहंू और 3100 रूपए प्रति क्विंटल पर धान की खरीदी। उज्जवला और लाडली बहनों को 450 में गैस सिलेंडर। लाडली बहनों को आर्थिक सहायता के साथ पक्का मकान। प्रत्येक परिवार में कम से कम एक सदस्य को रोजगार अथवा स्वरोजगार का अवसर। गरीब परिवार के छात्रों को केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा। जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण के लिए 3 लाख करोड का प्रावधान। कांग्रेसः फिर से कर्जमाफी, बिजली बिल माफ का वादाकांग्रेस पार्टी ने अपने चुनावी वचन पत्र को जनहितैशी बताते हुए जनता से कई वादे किए हैं। 2018 की भांति फिर से किसानों का कर्जमाफी करेंगे। बिजली बिल 100 यूनिट पर 100 रूपए, 200 यूनिट बिजली का बिल हाफ, नारी सम्मान 1500 रूपए प्रति माह, सरकारी स्कूलों में 12वीं तक की शिक्षा मुफ्त मिलेगी। युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने का भी बडा वादा किया है कुल मिलाकर प्रति परिवार 15000 हजार मासिक देने का वादा। कर्ज में डूबा प्रदेश कैसे देगा सबकुछ फ्रीमौजूदा हालात में प्रदेश वित्तीय संकट में फंसा है। ऐसे में जो भी सरकार सत्ता में आएगी तो उसके सामने सबसे बडा संकट बजट का होगा। नेताओं की चुनावी परिकल्पना जैसे वोट की खातिर सबकुछ फ्री देने का वादा कैसे पूरा होगा। यह आने वाली सरकार के सामने सबसे बडी चुनौती होगी। अब देखना होगा कि मप्र में रोजगार देकर प्रदेश को आगे बढाना है या वोट की राजनीति कर सरकार बनाना।

अतिथि शिक्षकों और विद्वानों के भविष्य के लिए सरल और हितकारी नीति तैयार करेंगे – कमलनाथ.

We will formulate a simple and beneficial policy for the future of guest teachers and scholars.” – Kamal Nath Manish Trivedi भोपाल, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने X हैंडल पर मध्यप्रदेश में अतिथि शिक्षकों को रहत भरी खबर पोस्ट की है. कमलनाथ ने अपने ट्वीट लिखा की, में स्कूलों और कॉलेजों की शिक्षा व्यवस्था को सतत् और सुचारू रखने वाले अतिथि शिक्षकों और अतिथि विद्वानों की सेवाओं का सम्मान करते हुए उनका भविष्य सुरक्षित रखने के लिए कांग्रेस वचनबद्ध है।अतिथि शिक्षकों और विद्वानों के भविष्य के लिए सरल और हितकारी नीति तैयार करेंगे ताकि उन्हें नियमित सेवा में स्थान मिल सके और उनकी वर्षों की सेवाओं के साथ न्याय सुनिश्चित हो।

खेल एवं खिलाड़ी प्रकोष्ठ कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री बने देवांशु झारिया।

Jabalpur; Sahara Samachaar; Congress; Devanshu Jhariya;

Devanshu Jharia becomes State General Secretary of Sports and Players Cell Congress. संतोष सिंह तोमर भोपाल। कांग्रेस पार्टी जबलपुर के युवा नेता देवांशू झारिया को मध्यप्रदेश कांग्रेस खेल एवं खिलाड़ी प्रकोष्ठ का प्रदेश महामंत्री बनाया गया है। देवांशु झारिया (देवा) निवासी 10 धनवंतरी नगर जबलपुर की नियुक्ति मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की सहमति से एवं उपाध्यक्ष-प्रभारी समस्त प्रकोष्ठ जे. पी. धनोपिया के अनुमोदन पर खेल एवं खिलाड़ी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष मतीन खान के द्वारा की गई। देवांशू झारिया ने अपनी नियुक्ति पर कांग्रेस पार्टी प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ, उपाध्यक्ष-प्रभारी समस्त प्रकोष्ठ जे.पी. धनोपिया और खेल एवं खिलाड़ी प्रकोष्ठ मतीन खान सहित कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त किया है। नवनियुक्त प्रदेश महामंत्री देवांशू झारिया ने पार्टी को विश्वास दिलाया है कि वह कांग्रेस पार्टी की विचारधारा को जन जन तक पहुंचाने के लिए पूरी लगन एवं ईमानदारी से कार्य करते हुए संगठन को मजबूती प्रदान करेंगे। देवांशू झारिया की नियुक्ति पर कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों एवं इष्टमित्रों द्वारा शुभकामनाएं एवं बधाइयां दीं गईं।

कमलनाथ ने किया संकल्प पत्र पर प्रहार, पूछे शिवराज से 5 सवाल.

Kamal Nath has launched an attack on the manifesto, posing 5 questions to Shivraj. कमलनाथ ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से ये पांच सवाल भी पूछे हैं. मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने BJP के संकल्प पत्र को लेकर कहा “पूरे प्रदेश में बेटियों को 3000 रुपये देने की घोषणा करने के बाद भाजपा ने पलटी मारी है, उनके संकल्प पत्र से यह घोषणा गायब है” उन्होंने आगे कहा “नौजवानों को नौकरी नहीं, बहनों को सम्मान नहीं, किसानों की कर्जमाफी नहीं, कर्मचारियों को पेंशन नहीं, ओबीसी को आरक्षण नहीं, यही है भाजपा का संकल्प है. कांग्रेस के वचन पत्र में जनहितैषी वादे हैं, जबकि भाजपा के संकल्प पत्र में जनता की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश.” कमलनाथ ने कहा कि 18 साल से झूठ की बुनियाद पर खड़े शिवराज जी इन सवालों का जबाव नहीं देंगे. लेकिन मप्र की जनता आगामी 17 नवम्बर को वोट की मशीन पर उंगली दबाकर झूठ की मशीन को नष्ट कर देगी. शिवराज सिंह चौहान ने 4 महीने पहले घोषणा की थी कि प्रदेश में एक लाख सरकारी नौकरियों पर भर्ती की जायेगी. लेकिन आज तक भाजपा ने नहीं बताया कि कितनी नौकरी दी गयी. जनता को यह सच्चाई पता होना चाहिये कि पिछले चार घोषणा पत्र से भाजपा, सरकारी नौकरी देने का वादा करती आयी है लेकिन कभी पूरा नहीं किया. पिछले चार घोषणा पत्र की तरह इस बार भी नौकरी और रोजगार का वादा तो भाजपा करेगी, लेकिन देगी किसी को भी नहीं. कमलनाथ ने कहा “भारतीय जनता पार्टी झूठ बोलो और भाग जाओ और फिर नया झूठ लेके आओ की रणनीति पर चलती है. बीजेपी ने मध्यप्रदेश को महिला अत्याचार में नंबर 1 बना दिया है. मध्यप्रदेश की बहन-बेटियां और माताएं अब बीजेपी के दुःशासन को समाप्त करेंगी.” कमलनाथ ने कहा कि भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में किसानों को वादे नहीं, झांसे दिये हैं. आपको पता होगा कि भाजपा ने कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर को मध्यप्रदेष का प्रभारी बनाया है जो किसानों के खिलाफ काले कानून बनाने और 700 किसानों की शहादत के लिये जिम्मेदार हैं. पूर्व सीएम ने कहा अगर समग्रता में देखें तो 100 यूनिट तक बिजली माफ 200 यूनिट तक बिजली हाफ, स्कूली छात्रों को 500 से 1500 रुपये तक छात्रवृत्ति, ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण, जातिगत जनगणना, गेंहू और धान पर बढ़ा हुआ समर्थन मूल्य, तेंदूपत्ता बोरी की कीमत 4000 रुपये जैसे वादे कांग्रेस पार्टी के वचन की तुलना में सिर्फ झुनझुना हैं. अब जनता भाजपा का बाजा बजा देगी.

मध्य प्रदेश में किसानो के सामने खाद का संकट खड़ा हुआ. किसानों को नहीं मिल रहा खाद.

Farmers in Madhya Pradesh are facing a crisis as they are unable to obtain fertilizers. मध्यप्रदेश में अफसरों की लापरवाही प्रदेश के कई जिलों में किसानों पर भारी पड़ रही है. उनके सामने खाद का संकट खड़ा हो गया है. किसान परेशान रहे हैं उन्हें खाद नहीं मिल रही है.NDTV की एक रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश में 9 अक्तूबर को आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू हुई थी. जिसके बाद किसी भी सरकारी सामान पर किसी भी राजनीतिक दल या नेता की तस्वीरें या प्रतीकों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. किसानों को मिलने वाला खाद भी आ गया. शिकायत मिलने पर चुनाव आयोग ने रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय (Ministry of Chemicals and Fertilizers) को बोरों से पीएम नरेन्द्र मोदी की तस्वीर हटाने का आदेश दिया है. किसानों की मुश्किल, रबी के मौसम में बुआई का समय निकल रहा है. बुआई में देरी के डर से चिंतित किसान बढ़ी हुई कीमतों पर उर्वरक की बोरियां खरीद रहे हैं.भोपाल के पास ईंटखेड़ी गांव के किसान हरि सिंह सैनी अपनी 12 एकड़ जमीन के लिए फॉस्फेट आधारित उर्वरक डीएपी के केवल 15 बोरियां खरीदने में कामयाब रहे हैं. कुछ ऐसा ही हाल भोपाल के निपानिया जाट गांव का है. यहां एक किसान को एक बोरी डीएपी और दो बोरी यूरिया दी जा रही है.नये पैकेजिंग के साथ उर्वरक उपलब्ध होने के बावजूद,किसान बढ़ती कीमतों की शिकायत करते हैं. यहीं के किसान लोकेंद्र जाट का कहना है कि यूरिया का एक बैग जो पहले 50 किलोग्राम का होता था, अब उसे 45 किलोग्राम के बैग में पैक किया जाता है, जबकि कीमत वही रहती है. उन्होंने कहा, “डीएपी की एक बोरी की कीमत पहले 1,200 रुपये थी, लेकिन अब इसकी कीमत 1,365 रुपये है। दानेदार उर्वरक की कीमत भी 310 रुपये से बढ़कर 468 रुपये हो गई है. इससे पैदावार पर असर पड़ेगा. लेकिन कुछ जगहों पर नए पैकेजिंग में यूरिया के बैग आए हैं, लेकिन वहां भी इसकी भारी कमी है. रीवा और देवास जैसे जिलों में नई बोरियां आ गई हैं लेकिन वहां किसान पांच-छह घंटे से अधिक समय तक कतारों में इंतजार करने की शिकायत कर रहे हैं. यहां किसानों को कुछ बैग उर्वरक प्राप्त करने के लिए दो से तीन चक्कर लगाने पड़ते हैं. तहसीलदार रमेश मसारे ने एनडीटीवी को बताया कि लंबी कतारें अन्य जिलों के किसानों द्वारा उर्वरक खरीदने के लिए वहां आने के कारण होती हैं, लेकिन कमी की किसी भी खबर से इनकार किया। हालांकि ये भी कह गये कि कतारों की वजह आचार संहिता और पुरानी पैकेजिंग है. इस बीच बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने राज्य में अपना चुनाव अभियान तेज कर दिया है, यह मुद्दा पार्टी नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों के भाषणों में भी उठ रहा है. खुद केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने दावा कर रही हैं कि राज्य में उर्वरक की कोई कमी नहीं है और वितरण केंद्रों के बाहर आसानी से खाद मिल रही है. दूसरी ओर, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने एमपी में एक रैली को संबोधित करते हुए बीजेपी पर ‘किसानों को धोखा देने और उनके लिए कुछ नहीं करने’ का आरोप लगाया.दूसरे कांग्रेस दिग्गज मसलन- कमलनाथ और दिग्विजय भी हर चुनावी मंच से खाद की कमी का मुद्दा उठा रहे हैं. अधिकारियों के अनुसार राज्य में लगभग 6.42 लाख मीट्रिक टन यूरिया आया, 2.86 लाख मीट्रिक टन बेचा गया है और 3.56 लाख मीट्रिक टन बचा हुआ है। कुल 4.31 लाख मीट्रिक टन डीएपी में से 2.03 लाख मीट्रिक टन का वितरण किया जा चुका है.

मध्य प्रदेश बीजेपी ने खोला अपना संकल्प पत्र का पिटारा, प्रत्येक परिवार को रोजगार, 2700 गेहू खरीदेंगे, जानिए बड़े ऐलान.

JP Nadda; Shivraj Singh; VD Sharma; Sahara Samachaar; BJP;

BJP in Madhya Pradesh has unveiled its manifesto, pledging employment for every family, the purchase of 2700 quintals of wheat, and other major announcements. Manish Trivediभोपाल: मध्य प्रदेश में 17 नवंबर को विधानसभा चुनाव हैं. विधानसभा चुनाव के बीच बीजेपी ने आज अपना घोषणा पत्र (संकल्प पत्र) जारी किया. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, सीएम शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा समेत अन्य नेताओं ने चुनावी घोषणा पत्र जारी किया है. नड्डा ने कहा, गेहूं का एमएसपी 2700 रुपये और चावल का एमएसपी 3100 रुपये की जाएगी. 6 एक्सप्रेसवे बनाएंगे. रीवा, सिंगरोली और शहडोल में एयरपोर्ट बनाएंगे. संकल्प में कहा गया है कि लाडली बहनों को आर्थिक सहायता के साथ पक्का मकान दिया जाएगा. प्रत्येक परिवार में कम से कम एक रोजगार अथवा स्वरोजगार का अवसर दिया जाएगा. इसके अलावा, 15 लाख ग्रामीण महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण के जरिए लखपति बनाएंगे. इससे पहले सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा, कांग्रेस बोलती है कि नरक चतुर्दशी को मैनिफेस्टो क्यों ला रहे हो? मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि इसी दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर राक्षण का वध किया था. ‘संकल्प पत्र में के अहम् बिंदु’ हर ST ब्लॉक में एकलव्य विद्यालय बनाया जाएगा. हर ST ब्लॉक में मेडिकल कॉलेज खोला जाएगा. गेहूं की खरीद 2,700 रुपये प्रति क्विंटल और धान की खरीद 3,100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से होगी. जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण के लिए 3 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. तेंदूपत्ता के लिए 4,000 हजार रुपये प्रति मानक बोरा दिया जाएगा. 1 करोड़ 30 लाख बहनों को आर्थिक सहायता के साथ साथ घर की सुविधा भी दी जाएगी. गांव की बहनों को लखपति बनाने के लिए स्पेशल ट्रेनिंग और स्किल डेवलपमेंट का काम शुरू किया जाएगा. लाडली लक्ष्मियों को जन्म से 21 वर्ष तक कुल 2 लाख रुपए दिए जाएंगे. गरीब परिवार की छात्राओं को केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा दी जाएगी. उज्ज्वला और लाडली बहनों को 450 रुपए में गैस सिलेंडर मिलेगा. सरकारी स्कूलों में मिड्डे मील के साथ पौष्टिक नाश्ता दिया जाएगा. IIT- AIIMS की तर्ज पर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलोजी और मध्य प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस खोले जाएंगे. 13 सांस्कृतिक लोको को भव्य निर्माण होगा. 6 नए एक्सप्रेसवे बनाए जाएंगे. विंध्य एक्सप्रेसवे, नर्मदा, अटल प्रगति, मालवा निमाड़, बुंदेलखंड और मध्य भारत विकास पथ का निर्माण होगा. 80 रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण के साथ वंदे मेट्रो, वंदे भारत स्लीपर ट्रेन और रीवा, सिंगरौली और शहडोल में हवाई अड्डे बनाए जाएंगे. नड्डा ने आगे कहा, राजनीतिक दल पहले लोगों को आकर्षित करते हैं और फिर भूल जाते हैं. वादे करते हैं, भूल जाते हैं और जनता को गुमराह करते हैं. भाजपा एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसने घोषणापत्र को अक्षरश: लागू किया है. उन्होंने कहा, पिछले 20 में मध्य प्रदेश की तस्वीर बदल गई है. बीजेपी के लिए संकल्प पत्र महत्वपूर्ण है. हम अपने संकल्पों को पूरा करते हैं. हमने वादों को जमीन पर उतारा है. हम जो वादा करते हैं, उसे पूरा करके दिखाते हैं. पहले मुझे भोपाल से जबलपुर पहुंचने में घंटों लग जाते थे लेकिन अब सड़क की स्थिति अच्छी है. हमने मध्य प्रदेश में सिंचाई बढ़ाई है. मध्य प्रदेश हिंदी में चिकित्सा शिक्षा शुरू करने वाले पहला प्रदेश बन गया है. नड्डा का कहना था कि 2003 में मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास की दर 0.61% थी, जो आज भाजपा सरकार के 20 साल के कार्यकाल में बढ़कर 24% हो चुकी है. 2003 में यहां 4,231 हेक्टेयर जमीन की ही सिंचाई हो पाती थी, जो आज बढ़कर 16,284 हेक्टेयर हो चुकी है. प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा, पिछले 20 साल से जनता ने जिस भरोसे से हमारा साथ दिया है, उसको आगे भी साकार करने की जिम्मेदारी इस संकल्प पत्र में निहित है. भाजपा संकल्प पत्र पूरे प्रदेश की सहभागिता, पर्याप्त शोध, सर्वकल्याणकारी सोच के साथ तैयार किया गया है. हमने प्रदेश में 21 दिन तक पांच जन आशीर्वाद यात्राएं निकालीं थीं. एक हजार से ज्यादा स्थानों पर लोगों ने बीजेपी को आशीर्वाद दिया है. मध्य प्रदेश के मन में मोदी हैं. 1500 से ज्यादा स्थानों पर जनआकांक्षा पेटी रखी गई थीं. वहां आमजन मानस से प्रदेश के भविष्य की रणनीति पर सुझाव मांगे थे. सभी सुझाव एकत्रित किए जाने के बाद संकल्प पत्र को तैयार किया गया है. सात लाख से ज्यादा सुझाव आए थे. प्रबुद्ध सम्मेलन में 50 हजार से ज्यादा प्रबुद्ध जनों के परामर्श के साथ संकल्प पत्र को मूर्तरूप दिया गया. एमपी के मन में मोदी अभियान के तहत लोगों की जन आकांक्षाओं का संकलन किया गया.

शिकायत करने पर बरही क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता के उल्लघन पर कार्यवाही.

Action will be taken for violating the Model Code of Conduct in the Barahi region upon filing a complaint. Manish Trivedi कटनी । भारतीय जनता पार्टी के द्वारा बरही कस्बा में आमसभा के दौरान आदर्श आचार संहिताका उल्लघन के संबंध में शिकायतकर्ता संजय बिलौहा द्वारा सी. विजिल एप पर शिकायत की गयी कि कार्यक्रमके दौरान शासकीय खम्भों भवन पर भारतीय जनता पार्टी के झण्डे एवं झण्डे की लरी रोड के एक छोर सेदूसरे छोर तक लगाकर आदर्श आचार संहिता का उल्लघन किया गया हैं जिसकी जाँच विधान सभा 92विजयराघवगढ के एफ. एस. टी. प्रभारी के द्वारा की गयी शिकायत सही पाये जाने पर मौके पर लगे झण्डे झण्डेकी लरिया एवं बिजली के खम्भों पर लगे लाऊड स्पीकर जप्त किया जाकर शिकायत थाना बरही में किये जानेपर टेंट संचालक खालिद टेंट कटनी के विरूद्ध थाना बरही में धारा 188 भा.द.वि.का अपराध पंजीबद्ध कियाजाकर अग्रिम कार्यवाही की जा रही हैं। उक्त कार्यवाही में एफ. एस. टी. टीम बरही प्रभारी विधान सभा 92 एवं उनके स्टाफ की विशेष भूमिका रही.

कांग्रेस के दो नेता अपने बेटों को सेट करने के लिए पूरे मध्य प्रदेश को अपसेट करने में लगे हैं:- पीएम नरेंद्र मोदी

Two Congress leaders are trying to upset the entire Madhya Pradesh to set up their sons:- PM Narendra Modi पीएम मोदी ने सतना, छतरपुर में चुनावी रैली, सभाओं को किया संबोधित। जनता से भाजपा के लिए मांगा आशीर्वाद, कांग्रेस पर जमकर कसे तंज। संतोष सिंह तोमर भोपाल। मध्य प्रदेश में 240 विधानसभा सीटों पर 17 नवंबर को होने वाले चुनाव में जीत के लिए सभी राजनीतिक दल हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। प्रदेश में चुनावी प्रचार तेजी से चल रहा है। इसी कड़ी में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तय कार्यक्रम के मुताबिक सबसे पहले सतना पहुंचे, जहां उन्होंने जनता को संबोधित किया। अब इसके बाद पीएम मोदी छतरपुर पहुंचे और भाजपा प्रत्याशियों के लिए समर्थन जुटाने हेतु विशाल जनसभा को संबोधित किया। जिसके बाद प्रधानमंत्री नीमच के लिए रवाना हो गए। सतना में पीएम मोदी ने जनता को विकास की गारंटी दी, साथ ही एमपी कांग्रेस चीफ कमलनाथ और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह पर जमकर निशाना साधा। वहीं छतरपुर में रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कांग्रेस देश को पीछे ले जाने में माहिर हैं। कांग्रेस वाले हर उस काम का विरोध करते हैं, जिससे देश आगे बढ़ने वाला होता है।        बता दें कि बीते बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुना, मुरैना और दमोह में रैलियों को संबोधित किया था। इस दौरान पीएम मोदी ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा था। वहीं सीएम नितिश कुमार के बयान पर भी कड़ा प्रहार किया था। पीएम मोदी ने हजारों की संख्या में आई भीड़ से कई वादों को पूरा करने की गारंटी भी दी थी। विधानसभा चुनावों के लिए पीएम मोदी इन दिनों ताबड़तोड़ रैली करने में जुटे हुए हैं। भाजपा का प्रचार करने सतना पहुंचे प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा का प्रचार करने गुरुवार को सबसे पहले सतना पहुंचे। जहां चुनावी सभा के मंच पर प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी, सतना जिले के सात विधानसभा क्षेत्र के भाजपा प्रत्याशी एवं कार्यक्रम के प्रभारी तथा महापौर योगेश ताम्रकार उपस्थित रहे। मंच पर मां शारदा की जय जयकार के साथ संबोधन शुरू किया। कांग्रेस के दोनों नेता बेटों को सेट करने में लगे हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सतना में रैली के दौरान कमलनाथ और दिग्विजय सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने आपके सामने 2 ऐसे नेता खड़े किए हैं, जो कई दशकों से मध्य प्रदेश कांग्रेस को चला रहे हैं। आजकल ये दोनों एक दूसरे के कपड़े फाड़ रहे हैं। यही नेता मध्य प्रदेश को दशकों तक अभाव में रखने के लिए जिम्मेदार हैं। ये आपके बेहतर भविष्य का भरोसा नहीं दे सकते। इनका तो अभी बस एक ही एजेंडा है कि 3 दिसंबर को भाजपा से हारने के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस पर किसका बेटा कब्जा करेगा! अपने बेटों को सेट करने के लिए वो पूरे मध्य प्रदेश को अपसेट करने में लगे हैं। कांग्रेस आएगी तो तबाही लाएगी प्रधानमंत्री ने कहा, आपको एक सीख याद रखनी है, अगर गलती से भी कांग्रेस आ गई तो फिर आपको सरकार से मिलने वाली सारी मदद बंद कर देगी। 10 साल में भाजपा सरकार ने 33 लाख करोड़ रुपये सीधे गरीबों के बैंक खातों में भेजे हैं और इसमें से एक रुपया भी इधर का उधर नहीं हो पाया। कांग्रेस किस तरह गरीबों का हक छीनती है उसका जीता-जागता प्रमाण है फर्जी लाभार्थी घोटाला। जितनी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की आबादी मिलकर है, उतने फर्जी लाभार्थी कांग्रेस ने देश भर में कागजों में पैदा कर दिए थे। गरीबों का घर हो, मुफ्त राशन हो, मुफ्त इलाज हो आज इन पर भाजपा सरकार लाखों करोड़ रुपये खर्च कर रही है अर्थात देश का पैसा गरीबों के काम आ रहा है। आपका वोट दिल्ली में मुझे मजबूत करेगा प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा- मुझे जो गालियां पड़ रही हैं उसका कारण ये है की भाजपा सरकार ने काली कमाई की दुकानों काे बंद करवा दिया है। कांग्रेस के पास युवाओं के विकास का कोई प्‍लान नहीं है। आप मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा को जब अपना वोट देंगे तब आपका एक एक वोट दिल्‍ली में मुझे मजबूत करेगा। इस बार मध्‍य प्रदेश का चुनाव बढ़ा ही दिलचस्‍प है। प्रदेश भर की विशाल जनसभाओं में मेरे परिवारजनों का इतनी बड़ी संख्या में आकर आशीर्वाद देना 3 दिसंबर को आने वाले नतीजों का अभी से ऐलान कर रहा है। सतना में बंदूक की नाली से संगीत निकलता है:- मोदी उद्बोधन के लिए आमंत्रित किए जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने मंच पर उपस्थित ज्योति चौधरी का नाम पुकारते हुए संगीत सुनने का आग्रह कर उनको बंदूक की नाल से उठने वाले संगीत को प्रस्तुत करने का अवसर दिया। ज्योति चौधरी जिसने जी 20 सम्मेलन में नल तरंग से सभी को मंत्रमुग्ध किया था, पीएम ने मंच से नाम पुकार कर संगीत सुनने का आग्रह किया। वैष्णो जन तो तेने कहिए, जे पीर पराई जाने । पीएम मोदी की सभा मे मैहर की ज्योति चौधरी ने संगीत कार्यक्रम प्रस्‍तुत किया। छतरपुर में जनता से मांगा आशीर्वाद प्रधानमंत्री मोदी सतना के कायक्रम के बाद छतरपुर पहुंचे। जहां उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत सभा स्थल पर मौजूद क्षेत्र के लोगों से उनका आशीर्वाद मांगने के साथ की। उन्होंने कहा कि छतरपुर की जनता का उत्साह देखकर लग रहा है, कि मध्यप्रदेश में भाजपा जीत का नया रिकॉर्ड बनाने जा रही है। जी 20 शिखर सम्मेलन का किया जिक्र विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने पिछले दिनों हुए जी-20 शिखर सम्मेलन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आपने देखा कि जी 20 का कितना बड़ा सम्मेलन दिल्ली में हुआ। जी 20 की एक बहुत बड़ी बैठक यहां खजुराहो में भी संपन्न हुई थी। इस कार्यक्रम को आपकी वजह से ही सफलता मिली और पूरी दुनिया में जब आपका गुणगान सुनने को मिलता है, तो मेरा सीना गर्व से भर जाता है। छतरपुर की मिट्टी को किया प्रणाम पीएम मोदी ने छतरपुर की मिट्टी को प्रणाम करते हुए कहा कि हम वो लोग हैं, जो भारत की माटी का ये चंदन माथे पर लगाकर गर्व से भर जाते हैं। फौलाद से भरी हुई बुंदेलखंड की मिट्टी में भी हमें यही प्रेरणा, यही शिक्षा, यही … Read more

केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे के करोड़ों रुपए के लेनदेन वाले वायरल वीडियो पर बबाल।

Ruckus over viral video of Union Minister Narendra Singh Tomar’s son’s transaction worth crores of rupees. कमलनाथ ने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और उनके बेटे के खिलाफ खोला मोर्चा।केंद्र सरकार की मंशा पर भी उठाए सवाल, चुनाव आयोग से कार्यवाही की मांग। संतोष सिंह तोमर भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ ने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे देवेंद्र प्रताप सिंह तोमर (रामू) के करोड़ों रुपए के लेनदेन की बातचीत वाले वायरल वीडियो पर अभी तक कोई जांच शुरू न होने पर सवाल उठाया है। उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग से मांग की है कि इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरी हकीकत जनता के सामने रखें। जबकि इस मामले में केंद्रीय मंत्री और दिमनी विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे देवेंद्र प्रताप सिंह तोमर (रामू) ने मुरैना में इस मामले को लेकर एफआईआर दर्ज कराई है। यहां बताते चले कि नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे देवेंद्र तोमर के वायरल वीडियो पर मध्य प्रदेश की राजनीति जमकर गरमाई हुई है। कांग्रेस इसे लेकर बीजेपी पर जमकर हमलावर हो गई है। पार्टी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष जयराम रमेश और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया के बाद अब पीसीसी चीफ कमलनाथ ने भी केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाएं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा है,”पूरा देश कल से केंद्रीय मंत्री और विधानसभा चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी नरेंद्र तोमर के बेटे का एक वायरल वीडियो देख रहा है, जिसमें वह वीडियो कॉल पर सैकड़ो करोड़ के आर्थिक लेनदेन की बातचीत कर रहे हैं। इस संबंध में कल रात ही निर्वाचन आयोग से शिकायत भी दर्ज कर दी गई थी, लेकिन अब तक किसी भी जांच एजेंसी द्वारा ना तो जांच शुरू हुई है और ना ही जिस सरकार में तोमर मंत्री हैं, उसके शीर्ष नेतृत्व ने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त की है। यह वीडियो उस राज्य में सामने आया है जहां की सरकार पर 50% कमीशन राज चलाने का आरोप है।” कमलनाथ ने आगे लिखा,”चुनाव के बीच आए इस तरह के संदिग्ध वीडियो की जांच ना होना स्वस्थ और निष्पक्ष लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए खतरा है। मैं निर्वाचन आयोग से मांग करता हूं कि इस विषय में त्वरित कार्रवाई करें और दूध का दूध और पानी का पानी जनता के सामने रखें।” वायरल वीडियो में करोड़ों के लेनदेन की बात विधानसभा चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर रविवार को एक वायरल वीडियो ने मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में हंगामा खड़ा कर दिया। वीडियो केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे देवेंद्र प्रताप सिंह तोमर (रामू ) का बताया जा रहा है। इस वीडियो में देवेंद्र प्रताप सिंह लखनऊ के एक बिचौलिये के जरिए माइनिंग कारोबारियों से करोड़ों रुपए लेने के लिए मल्टीपल बैंक अकाउंट के इंतजाम की बात करते दिखाई और सुनाई दे रहे हैं। बिचौलिया उनसे हर ट्रांजेक्शन के लिए अलग-अलग 4 से 5 बैंक खातों की डिटेल मांग रहा है और वक्त भी पूछ रहा है। मुरैना में दर्ज कराई एफआईआर सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे देवेंद्र सिंह तोमर ने एमपी के मुरैना को एक लिखित आवेदन देकर वायरल वीडियो फर्जी होने और राजनेतिक द्वेष भावना के चलते छबि खराब करने का षडयंत्र बताया। उन्होंने वीडियो को तत्काल सोशल प्लेटफॉर्म से हटवाने और वीडियो वायरल करने वालों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की है। इस पर जिले के सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज कर पुलिस मामले की जांच कर रही है। केंद्रीय मंत्री तोमर को बदनाम करने की कोशिश केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने भोपाल में कहा कि नरेंद्र सिंह तोमर चार दशक से साफ-सुथरी राजनीति के लिए देश भर में सम्मान के साथ जाने जाते हैं। उनके बेटे को ढाल बनाकर कांग्रेस अब ओछी राजनीति करना चाहती है, लेकिन उससे कोई फायदा नहीं होगा। जिस वीडियो को कांग्रेस दिखा रही उसमें नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे का सिर्फ वीडियो दिख रहा, दूसरा कौन व्यक्ति है, वह नजर नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र सिंह तोमर ने खुद शिकायत कर जांच की मांग की है और प्रशासन से आग्रह किया है कि जब तक सत्यता सामने नहीं आ जाती तब तक इस वीडियो को डीलिट किया जाए। मैं और हमारी भारतीय जनता पार्टी  कांग्रेस की इस ओछी हरकत की घोर निंदा करती है।

प्रदेश की 62 सीटों पर कांग्रेस और भाजपा में कांटे की टक्कर.

Congress; BJP; Kamalnath; Sahara Samachaar;

Congress and BJP are in a tough competition on 62 seats in the state उदित नारायणभोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। Un प्रदेश में इस बार चुनावी बिसात पर किसकी होगी जीत और कौन रहेगा खाली हाथ.?, यह सवाल प्रदेश ही नहीं देश भर के जेहन में हैं। प्रदेश की 230 सीटों पर हो रहे चुनाव में भाजपा अभी कांग्रेस की तुलना में ज्यादा मजबूत नजर आ रही है। दोनों की मजबूत सीटों की बात की जाए तो भाजपा में यह संख्या 98 है। वहीं, कांग्रेस 70 सीटों पर बढ़त बनाए दिख रही है। दोनों में अभी 28 सीटों का अंतर है। बड़ी बात यह है कि फिलहाल 62 सीटें ऐसी हैं जहां भाजपा और कांग्रेस दोनों ही कांटे के मुकाबले में है। निश्चित रूप ये इन्ही सीटों पर जीत और हार से ही सत्ता का निर्धारण होगा।कुल सीट- 230भाजपा- 98कांग्रेस- 70कांटे की टक्कर वाली सीट- 62 कांटे की लड़ाई वाली इन सीटों पर दोनों ही दलों के बागी प्रत्याशियों के साथ बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी भी निर्णायक भूमिका में हैं। बसपा और सपा तो इनमें से कुछ सीटों पर सिर्फ खेल बिगाडने की नहीं बल्कि जीतने की भी स्थिति में आ सकती हैं। हालांकि, दोनों दलों के बागी जीतने की स्थिति में न होकर सिर्फ पार्टी को नुकसान पहुंचाते दिखाई दे रहे हैं। हमारी टीम के आंकड़ों के अनुसार, भाजपा की इन सीटों पर जीत दर्ज करने की स्थिति में हैइंदौर 1, इंदौर 2, इंदौर 4, महू, सांवेर, उज्जैन दक्षिण, पंधाना, बागली, रतलाम शहर, जावरा, आलोट, मंदसौर, मल्हारगढ, सुवासरा, गरोठ, मनासा, सुसनेर, खंडवा, हरसूद, मन्धाता, नेपानगर, खरगोन, पानसैमल, राजपुर, जोबट, पेटलावद, धरमपुरी, देवास, मनावर, सतना, नागौद, रामपुर बाघेलान, रीवा, सिरमौर, मनगंवा, पुष्पराजगढ, धौहनी, जैतपुर, देवसर, मानपुर, अनूपपुर, सागर, खुरई, नरियावली, रहली, जतारा, एक ओर भाजपा जहां सत्ता में वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। वहीं, कांग्रेस भी मैदानी मोर्चें पर सब कुछ दांव पर लगाए है। कुल मिलाकर सियासी दल ही नहीं सियासी पंडित भी यह मानकर चल रहे हैं कि इस बार प्रदेश में लड़ाई कांटे की है। बीजेपी की बढ़त वाली सीटेमलहरा, महाराजपुर, दमोह, पथरिया, हटा, पन्ना, गुनौर, पवई, ग्वालियर ग्रामीण, ग्वालियर, बमौरी, पिछोर, करैरा, दतिया, भांडेर, सेवढा, भिंड, मेहगांव, सुमावली, दिमनी, अंबाह, विजयराघवगढ बहोरीबंद शाहपुर देवास बालाघाट लांजी परसवाडा वारासिवनी कटंगी बरघाट गोटेगांव जबलपुर कैंट बरगी, पाटन नरसिंहपुर नरेला हुजूर, गोविंदपुरा बैरसिया सिलवानी सांची कुरवाई सिरोंज शमसाबाद सारंगपुर बुधनी सोहागपुर पिपरिया सिवनी मालवा बैतूल भैंसदेही आमला।वहीं, इन सीटों पर जनता जर्नादन कांग्रेस का हाथ मजबूत करती नजर आ रही है- कांग्रेस की जीत की संभावना वाली सीटराउ, देपालपुर, तराना, नागदा खाचरौद, सैलाना, नीमच शाजापुर, कालापीपल, भगवानपुरा, कसरावद, भीकनगांव, बडवानी, सेंधवा, झाबुआ, थांदला, कुक्षी, गंधवानी, सोनकच्छ, रैगांव, अमरपाटन, मउगंज, चुरहट, सिंगरौली, चितरंगी, ब्यौहारी, बांधवगढ, कोतमा, बंडा, टीकमगढ़, पृथ्वीपुर, खरगापुर, चंदली, राजनगर, जबेरा, ग्वालियर पूर्व, भितरवार, चाचौड़ा, राघौगढ़, मुंगावली, चंदेरी, पोहरी, विजयपुर, अटेर, लहार, जौरा, डबरा, बड़वारा, डिंडोरी, बिछिया, मंडला, बैहर, सिवनी, केवलारी, तेंदुखेडा, गाडरवाडा, छिंदवाडा, पांर्ढुना, परासिया, सौंसर, जबलपुर पूर्व, जबलपुर पश्चिम, पनागर,लखनादौन, उदयपुरा, राजगढ, खिलचीपुर, ब्यावरा, आष्टा, मुलताई, घोडाडोंगरी। इन सीटों पर फाइटइंदौर- 3, इंदौर -5, उज्जैन उत्तर, बडनगर, घट्टिया, महिदपुर, रतलाम ग्रामीण, जावद, शुजालपुर, आगर, खातेगांव, बुरहानपुर, महेश्वर, बड़वाह, राजपुर, अलीराजपुर, धार, बदनावर, हाटपिपल्या, चित्रकूट, मैहरसेमरिया, त्योंथर, देवतालाब, गुढ़, सीधी, सिंहावल, देवरी, बीना, सुरखी, निवाडी, छतरपुर, बिजावर, ग्वालियर दक्षिण, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, कोलारस, गोहद, मुरैना, सबलगढ, श्योपुर, बड़वारा, चौरई, जबलपुर उत्तर, सिहोरा, अमरवाडा, भोपाल उत्तर, भोपाल दक्षिण पश्चिम, भोपाल मध्य, भोजपुर, विदिशा, गंजबासौदा, नरसिंहगढ, सीहोर, इछावर, होशंगाबाद, हरदा, टिमरनी।

BJP को लगा बड़ा झटका, पूर्व विधायक ने थामा कांग्रेस का हाथ.

Congress; BJP; Kamalnath; Sahara Samachaar;

BJP suffered a major setback as a former legislator joined the Congress party. मनीष त्रिवेदी – सहरा समाचारमुरैना। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में सभी दलों में नेताओं का पार्टी छोड़ने का क्रम लगातार चला आ रहा है। चुनावो में अब ज्यादा दिन नहीं रह गए है. चम्बल क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी को एक और झटका लगा, मुरैना जिले की अंबाह विधानसभा से पूर्व विधायक व भाजपा के प्रदेश कार्य समिति सदस्य कमलेश सुमन ने शनिवार को अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। इसी बीच श्री सुमन ने भोपाल में पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के सामने कांग्रेस की सदस्यता ले ली है। इस्तीफे के बाद अंबाह विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी कमलेश जाटव की मुश्किलें बढ़ती है या घटती है, या आगे क्या समीकरण बनते है. यह तो वक़्त ही बताएगा.

कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री बनाए गए प्रकाश पांडे.

Congress; Prakash Pandey; Khujraho; Sahara Samachaar;

Prakash Pandey has been appointed as the Pradesh Mahamantri (State General Secretary) of the Congress. जीतेंद रिछारिया भारतीय जनता पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए खजुराहो क्षेत्र के दिग्गज नेता प्रकाश पांडे को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का महामंत्री बनाया गया है। संगठन प्रभारी व उपाध्यक्ष राजीव सिंह के हस्ताक्षर से जारी पत्र में प्रकाश पांडे को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का महामंत्री नियुक्त करने का ऐलान किया गया है। प्रकाश पांडे को कांग्रेस का प्रदेश महामंत्री बनाए जाने से राजनगर विधानसभा में कांग्रेस की स्थिति और मजबूत हो गई है। खजुराहो में तीन दिन पहले देश के गृहमंत्री अमित शाह चिंतन शिविर किया था। इसके बावजूद लगातार वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का भारतीय जनता पार्टी पार्टी से मोहभंग हो रहा है। अब यहां के वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी नेता प्रकाश पांडेय ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। कुछ समय पहले किसानों के मुद्दों को लेकर प्रकाश पांडेय पर शासकीय कार्य में बाधा डालने को लेकर मुकदमा दर्ज हुआ था। लेकिन प्रकाश पांडेय का कहना था कि भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं ने उन पर फर्जी मुकदमा दर्ज करवाया था।मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव सिर पर हैं। प्रकाश पांडेय राजनगर विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी के वर्तमान प्रत्याशी अरविंद पटेरिया को बाहरी प्रत्याशी बताते हुए उनका पुरजोर विरोध भी कर रहे हैं। इतना ही नहीं वह यहां खजुराहो से वर्तमान सांसद और प्रदेश भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष VD शर्मा को बाहरी प्रत्याशी बता रहे हैं। प्रकाश पांडेय ने कई गंभीर आरोप लगाते हुए भारतीय जनता पार्टी के सभी दायित्वों/पदों से इस्तीफा दे दिया है। इसके उन्होंने बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस भी की है।

कुर्सी देखकर चमकने लगती हैं कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की आंखें : ज्योतिरादित्य सिंधिया.

Jyotraditya Scindia; Minister; BJP; Sahara Samachaar;

Jyotiraditya Scindia says, “The chairs seem to shine in Kamal Nath and Digvijaya Singh’s eyes.” केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने मैहर, सुरखी, सांची और बदनावर में जनसभा को किया संबोधित उदित नारायणभोपाल। मप्र में सवा साल तक रही कांगेस की कमलनाथ सरकार ने सेवा भाव की जगह सत्ता का भाव पाल लिया था। जब कांग्रेस की सरकार आई तो बड़े भाई और छोटे भाई ने मिलकर वल्लभ भवन को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया । प्रदेश में उद्योग नहीं लाए, ट्रांसफर-पोस्टिंग का उद्योग शुरू करके भ्रष्टाचार का खेल खेला। कमलनाथ के पास अपने मंत्रियों से मिलने का समय नहीं होता था, वह बोलते थे ‘चलो, चलो, समय नहीं है’, तो वह जनता की क्या सोचते। कांग्रेस झूठ और लूट की पार्टी है, इस पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता। जब भी दिग्विजय जी और कमलनाथ को कुर्सी दिखती है उनकी आँखें चमकने लगती है। यह बात केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को मैहर, सुरखी, सांची और बदनावर में जनसभा को संबोधित करते हुए कही। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जनसभा में कहा कि आजादी के बाद 55 वर्ष हमने कांग्रेस की सरकार देखी। उस कांग्रेस ने 2003 तक आपके और मेरे मध्यप्रदेश को बीमारू राज्य बना कर छोड़ दिया था। कांग्रेस के बीमारू मध्यप्रदेश को भाजपा सरकार ने बदला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के एक पूर्व मुख्यमंत्री दूसरे पूर्व मुख्यमंत्री को कहते हैं कि गाली खाने के लिए तुम्हें पावर ऑफ अटॉर्नी दे दी है। टिकट वितरण के मामले में कहते हैं कि जाओ पूर्व मुख्यमंत्री के कपड़े फाड़ो। कांग्रेस के एक महासचिव ने कहा कि ये जोड़ी जय-वीरू की जोड़ी है। मैं नहीं कह रहा, कांग्रेस महासचिव खुद कहते हैं कि ये चोर हैं। क्या ऐसे लोगों को आप सत्ता देंगे? ये किसी भी तरह सत्ता पाना चाहते हैं।

एमपी में कांग्रेस का महाजनसंपर्क अभियान आज से, लांच किया मिशन 150 प्लस।

Congress; Kamalnath; Priyanka Gandhi; Rahul Gandhi; Sahara Samachaar;

Congress’s Mahajansampark campaign in MP from today, Mission 150 Plus launched. मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने लांच किया मिशन 150 प्लस राष्ट्रीय अध्यक्ष ख़ड़गे, राहुल-प्रियंका की होंगी 15 दिन में 18 पब्लिक मीटिंग। राज्य सभा सांसद दिग्विजय सिंह से ज्यादा पीसीसी चीफ कमलनाथ के दौरे, सुरजेवाला को 30 सीटों पर रैली की जिम्मेदारी। भोपाल और जबलपुर पश्चिम में राहुल गांधी करेंगे पदयात्रा, महाजनसंपर्क के दौरान 230 विधानसभाओं को कवर करेगी कांग्रेस। उदित नारायणभोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस आज शुक्रवार यानी 3 नवंबर से महा जनसंपर्क अभियान शुरू करने जा रही है। अगले 15 दिनों में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की 18 सभाएं होंगी। पीसीसी चीफ कमलनाथ 70 रैलियों में शामिल होंगे। कांग्रेस ने एमपी में जीत के लिए मिशन 150 प्लस को लांच किया है। भोपाल और जबलपुर पश्चिम में राहुल गांधी पदयात्रा भी करेंगे। मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने मिशन 150+ किया लांच प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हमारा लक्ष्य 150+ सीटें जीतने का है। महा जनसंपर्क के दौरान 230 विधानसभाओं को कवर किया जाएगा। इस दौरान सभाएं, रैलियां और पदयात्रा करेंगे। दिग्विजय सिंह 60 रैलियों को संबोधित करेंगे। मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला 30 रैलियों में शामिल होंगे। 11 और 12 नवंबर को दिवाली के कारण कार्यक्रम नहीं होंगे। जानकारों का कहना है कि नेताओं का दौरे के लिए बकायदा दिल्ली में बैठक हुई थी। इस बैठक में नेताओं के प्रभाव को लेकर प्रचार की रणनीति बनाई गई है। इसके अलावा वरिष्ठ नेता अरुण यादव, सुरेश पचौरी, जीतू पटवारी, कमलेश्वर पटेल, अजय सिंह राहुल, कांतिलाल भूरिया, उमंग सिंगार, ओंकार मारकम, विजयलक्ष्मी साधो, सज्जन वर्मा भी विधान सभा क्षेत्रों में जनसंपर्क और रैली करेंगे। यह व्यापक महाजनसंपर्क अभियान प्रदेश की सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में पहुंचेगा। नेताओं के होंगे खास सीटों पर प्रोग्राम चुनावी समर में आज से शुरू हो रहे महाजनसंपर्क अभियान के तहत कांग्रेस पार्टी के बड़े नेताओं मल्लिकार्जुन खड़गे ,राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, रणदीप सिंह सुरजेवाला को मध्य प्रदेश की तमाम खास सीटों पर प्रोग्राम करने की जिम्मेदारी दी गई है। जिसके अनुसार 4 नवम्बर,2023: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लीकार्जुन खरगे कटंगी और शाहपुरा, 5 नवम्बर,2023: महासचिव प्रियंका गांधी कुक्षी और इंदौर-5 जबकि 7 नवम्बर,2023: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लीकार्जुन खरगे उज्जैन और ग्वालियर पूर्व, 8 नवम्बर 2023: महासचिव प्रियंका गांधी सांवेर और खातेगाँव, 9 नवम्बर,2023: महासचिव प्रियंका गांधी रीवा, 9 नवम्बर,2023: पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी नई सराय, अशोक नगर, चंदेरी, जबलपुर ईस्ट, जबलपुर वेस्ट में पदयात्रा, 10 नवम्बर 2023: पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सतना, 13 नवम्बर,2023: पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी टिमरनी, उदयपुरा और इकबाल नगर, भोपाल पदयात्रा। 14 नवम्बर,2023: पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी विदिशा, राजनगर, खजुराहो, 15 नवम्बर,2023: महासचिव प्रियंका गांधी दतिया, 15 नवम्बर,2023: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लीकार्जुन खरगे आमला (बेतूल) में पब्लिक मीटिंग एवं रोड शो और जनसभाएं करेंगे।

आटे को लीटर में तोलने वाले कांग्रेसी, जमीनी वास्तविकता से परिचित नहीं : शिवराज सिंह चौहान

Shivraj Singh; Kamalnath; Digvijay Singh; Sahara Samachaar;

Those who measure flour by the liter are not familiar with ground realities,” said Shivraj Singh Chouhan, criticizing the Congress. बोले मुख्यमंत्री : गुटों में बटी कांग्रेस- दिग्गी गुट, कमलनाथ गुट, भगवान जाने कितने गुटChief Minister said: Congress is divided into groups – Diggi Group, Kamal Nath Group, God knows how many other groups Udit Narayanभोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को अपने गृह ग्राम जैत में हनुमान मंदिर, कुल देवी-देवता,नर्मदा मैया और सलकनपुर में माता विजयासन की पूजा-अर्चना कर बुधनी विधानसभा से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम लिए बिना तंज कसते हुए कहा कि, आप ही देखिए उनमें और हम में अंतर क्या है। वो लोग आटे को लीटर में तोलते हैं। धान का खेत काटने पहुँच जाते हैं लेकिन यह पता ही नहीं है कि धान जमीन के नीचे होती है या जमीन के उपर। जमीनी वास्तविकता से परिचित नहीं हैं। हमनें तो बक्खर हांके हैं और ढुली टांग कर उराई भी की है। उन्होंने कहा कि, कांग्रेस के मित्र बहुत परेशान रहते हैं। कहते हैं कहां से आ गया ढे़ड मुट्ठी का। एक बार तो मेरा श्राध्द ही कर दिया। तो मैंने कहा राख के ढेर से भी उठकर खड़ा हो जाऊंगा। अभी तो बहुत काम करना है। यहां का हर नागरिक शिवराज है,मैं तो केवल वोट डालने आऊंगा : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, मैं अपनी जन्मभूमि, कर्मभूमि, मातृभूमि, पुण्यभूमि और वो माटी जिसके आशीर्वाद से प्रदेश की जनता की सेवा कर इतना काम कर पाया हूं, वहां प्रणाम करने आया हूँ। अपने ग्रामवासियों की शुभकामनाएं और बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर आज मैंने नामांकन फ़ॉर्म भरा है। इसके बाद यहां का चुनाव यहां की जनता लड़ेगी, यहां का हर नागरिक शिवराज है,मैं तो केवल वोट डालने आऊंगा। लोगों ने कब्जा करके कांग्रेस को निष्प्राण बना दिया : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर हमला बोलते हुए कहा कि, एक दिल के टुकड़े हजार हुए कोई इधर गिरा कोई उधर गिरा। सपा, आप, कांग्रेस और कांग्रेस में भी दिग्गी गुट, सेठ कमलनाथ गुट, अरुण यादव और अजय सिंह गुट और न जाने कितने गुट हैं ये तो भगवान ही जाने। उन्होंने कहा कि, मल्लिकार्जुन खड़गे तो नाममात्र के अध्यक्ष हैं। असल में तो भैया-बहन फसल काटते हैं। मध्यप्रदेश में भी कमलनाथ और दिग्विजय सिंह ने पूरी पार्टी पर कब्जा जमा कर रखा है और आगे की संभावनाएं भी कांग्रेसियों की समाप्त कर दी हैं। उनके आगे की पीढ़ी भी तैयार है और वो टिकट भी बाँट देती है। इन लोगों ने कब्जा करके कांग्रेस को निष्प्राण बना दिया है।कांग्रेस में कुछ नेता जेल में और कुछ नेता बेल पर हैं : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि, कांग्रेस जनता का भल नहीं कर सकती। अब नेताओं की पहचान भी छुपा रहें हैं। उन्होंने कहा कि, कांग्रेस के एक नेता कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को जय-वीरू कहकर बुला रहें हैं, लेकिन जय और वीरू तो जेल से छूट कर आए थे। उन्होंने कहा कि, कुछ नेता जेल में हैं और कुछ कांग्रेस के नेता बेल पर हैं। कांग्रेस के जमाने में नेताओं को कभी जेल नहीं होती थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कह दिया कि, ना खाउंगा ना खाने दूंगा। इसके बाद सभी कांग्रेसी घबराए हुए हैं। अब जमाना बदल गया है। नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं गड़बड़ की तो नेता भी जेल जाएगा।

‘भाजपा में इन दिनों गुटबाजी हावी, इसे ढकने कांग्रेस नेताओं के बीच झूठी खबरों का कर रही प्रचार-प्रसार

Digvijay Singh; Kamalnath; MP Elections; Sahara Samachaar;

These days, there is factionalism prevalent in the BJP, which Congress leaders are promoting as false news among themselves,” said Digvijaya Singh. कांग्रेस के प्रत्येक नेता दृढ़ निश्चय वाले हैं, यूनाइटेड हैं औऱ वो बीजेपी को हराने के लिए कर रहे हैं काम Udit Narayan भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 को लेकर राज्य में हलचल बढ़ी हुई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के साथ किसी तरह की मतभेद की बातों से इनकार किया है। इसके साथ ही दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा है कि ऐसी बातें बीजेपी फैला रही है। दिग्विजय सिंह ने अपने बयान में कहा कि कई अखबारों ने यह दावा किया है कि नाराजगी की वजह से वो झाबुआ और खातेगांव नहीं गए। दिग्विजय सिंह ने कहा, ‘बीजेपी में इन दिनों गुटबाजी काफी बढ़ी हुई है। इसे ढकने के लिए बीजेपी, कांग्रेस नेताओं के बीच झूठी खबरों का प्रचार-प्रसार कर रही है। खासकर मेरे और कमलनाथ के बीच। कांग्रेस के प्रत्येक नेता दृढ़ निश्चय वाले हैं, यूनाइटेड हैं औऱ वो बीजेपी को हराने के लिए काम कर रहे हैं।’राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने आगे कहा कि झाबुआ और खातेगांव का दौरा उन्होंने इसलिए रद्द किया क्योंकि कांग्रेस महासचिव उनसे संगठन और चुनाव को लेकर कुछ अहम चर्चा करना चाहते थे। कांग्रेस में कोई गुटबाजी नहीं है। हालांकि, बीजेपी सचिव रजनीश अग्रवाल ने कहा कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के बीच खुलेआम मतभेद है। इस सबूत है उनके बीच में हुई बातचीत का वीडियो। अग्रवाल ने कहा कि हाल के विवाद से यह साफ है कि कमलनाथ और समर्थक चुनावी कैंपेन से दिग्विजय सिंह को दूर रखना चाहते हैं और उन्हें साइडलाइन करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में टिकट बंटवारे के बाद जब पार्टी नेताओं की नाराजगी सामने आने लगी तब कमलनाथ ने खुलेआम दिग्विजय के कपड़े फाड़ने के बारे में कहा था। इसके बाद दिग्विजय सिंह ने टिकट बंटवारे के लिए कमलनाथ को जिम्मेदार बताते हुए कहा था कि इलेक्ट्रॉल फॉर्म पर कमलनाथ ने हस्ताक्षर किए थे जो कि राज्य में पार्टी के चीफ हैं। बीजेपी नेता ने आगे कहा कि दोनों नेताओं के बीच बढ़ी दूरियों को बताने के लिए इससे बड़ी बात क्या हो सकती है। सुरजेवाला के इस बयान प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने कहा उनके बयान से यह साबित होता है कि दिग्विजय सिंह औऱ कमलनाथ जय और वीरू के उस छलिया कैरेक्टर जैसे हैं जो जेल से भाग गए थे। इससे पहले इसी महीने कमलनाथ का एक वीडियो सामने आया था उसमें उन्होंने शिवपुरी में किसी पार्टी नेता को टिकट नहीं दिए जाने पर पार्टी के लोगों से कहा था कि वो दिग्विजय सिंह के कपड़े फाड़े।

मैं अच्छा हिंदू, राम मंदिर निर्माण के लिए दिए ₹1.11 लाख दान दिया : दिग्विजय सिंह

I am a devout Hindu, donated ₹1.11 lakh for the construction of the Ram Temple,” said Digvijaya Singh पीएम मोदी को चेक भेजा, लेकिन उन्होंने वापस भेज दिया, फिर मैंने…स्वयं जमा किए कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने रविवार को कहा कि उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए ₹1.11 लाख का दान दिया क्योंकि वह एक ‘अच्छे हिंदू’ हैं। Udit Narayan भोपाल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने रविवार को कहा कि उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए ₹1.11 लाख का दान दिया क्योंकि वह एक ‘अच्छे हिंदू’ हैं। चुनावी राज्य मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं सनातन धर्म का पालन करता हूं। मैं एक अच्छा हिंदू हूं। दिग्विजय सिंह का यह बयान ऐसे वक्त में सामने आया है जब अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की तारीख तय हो गई है। बता दें कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को होगी जिसमें प्रधानमंत्री मोदी के मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। ऐसे में जब चुनावी राज्य मध्य प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू है और कानूनी लिहाज से चुनाव में धर्म का इस्तेमाल प्रतिबंधित है, सूबे में राम मंदिर का मुद्दा भी गर्म है। राम हमारे इष्टदेव हैं… चुनाव में धर्म का उपयोग करना प्रतिबंधितमध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि मैं सनातन धर्म का पालन करने वाला व्यक्ति हूं और एक अच्छा हिंदू हूं। राम हमारे इष्टदेव हैं, हम सनातन धर्म का पालन करते हैं लेकिन चुनाव में धर्म का उपयोग करना प्रतिबंधित है… राम मंदिर के निर्माण के लिए शिवराज सिंह चौहान ने 1 लाख रुपए का दान दिया और मैंने 1 लाख 11 हजार रुपए का दान दिया। दिग्विजय सिंह ने कहा कि मैंने अपने योगदान का चेक प्रधानमंत्री मोदी को भेजा कि जाकर जमा करवा दीजिए… मैंने वह चेक ट्रस्ट को सौंपने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को भेजा। उन्होंने इसे वापस भेज दिया और मुझसे इसे स्वयं जमा करने के लिए कहा। मैंने इसे जमा कर दिया। हाल ही में मध्य प्रदेश में राममंदिर के निर्माण का श्रेय लेने वाले होर्डिंग नजर आए थे। इस पर कांग्रेस की ओर से आपत्ति जताई गई थी। वहीं भाजपा ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा था कि कांग्रेस राममंदिर निर्माण को लेकर दुखी है। वहीं कांग्रेस ने उस पर भगवान राम की भक्ति से भटकने का आरोप लगाया था। कांग्रेस की इंदौर इकाई ने निर्वाचन आयोग से शिकायत की थी कि भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान अयोध्या में राममंदिर और उज्जैन में महाकाल लोक का प्रदर्शन करके धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल किया। यह आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है। वहीं भाजपा नेताओं ने कांग्रेस की शिकायत को एक्स पर साझा करते हुए उस पर राम विरोधी होने का आरोप लगाया। मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने शनिवार को कहा था कि कांग्रेस का मूल चरित्र भगवान श्रीराम, हिंदुत्व और सनातन धर्म के खिलाफ रहा है। कांग्रेस राम मंदिर के होर्डिंग के खिलाफ निर्वाचन आयोग से शिकायत कर रही है, जो दुनिया की आस्था का केंद्र है। कांग्रेस के नेता कह रहे हैं कि ऐसे होर्डिंग हटाए जाने चाहिए। कांग्रेस को दुख है कि राम मंदिर के होर्डिंग्स क्यों लगाए गए हैं… कांग्रेस को राम मंदिर बनने से दुख है।

25 चुनाव प्रत्याशियों के साथ विंध्य से नारायण त्रिपाठी ने खोला चुनावी मोर्चा।

Narayan Tripathi from Vindhya opened an electoral front with 25 election candidates. विंध्य क्षेत्र में ब्राह्मण समाज का बड़ा चेहरा माने जाते हैं। नारायण त्रिपाठी। 5 से 7 विधानसभा सीटों पर जीत के आसार, और भी कई सीटें होंगी प्रभावित। उदित नारायण सतना। विंध्य की राजनीति में एक नया मोड़ सामने आया है, जहां भाजपा से इस्तीफा दे चुके विधायक नारायण त्रिपाठी ने भाजपा और कांग्रेस दोनों को ही झटका देते हुए विंध्य जनता पार्टी का गठन कर दिया। विधायक नारायण त्रिपाठी ने अब अपने पत्ते खोलते हुए विंध्य जनता पार्टी के 25 प्रत्याशियों की पहली सूची भी जारी कर दी है। नवगठित मैहर जिले की सीट से खुद नारायण त्रिपाठी चुनाव लड़ेंगे। इस सीट को नारायण त्रिपाठी का मजबूत गढ़ माना जाता है। इसके साथ ही आज शाम तक विंध्य जनता पार्टी चुनाव प्रत्याशियों की दूसरी लिस्ट भी जारी कर सकती है। जानकारी मिली है की पार्टी नेतृत्व द्वारा दूसरी लिस्ट में करीब 15 प्रत्याशियों के नामों पर सहमति बन चुकी है। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रदेश की सभी 230 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। हम आपको बता दें कि नारायण त्रिपाठी ने विंध्य के अलावा मध्य भारत और महाकौशल में भी अपने प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं। भारतीय जनता पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने के बाद तरह तरह के कयास नारायण त्रिपाठी के लिए लगाए जा रहे थे, लेकिन इन सभी पर विराम लगाते हुए नारायण ने अब अपनी विंध्य जनता पार्टी से चुनाव मैदान पर उतरने का आगाज कर दिया है, जिसका चुनाव चिन्ह गन्ना और किसान है। विंध्य में मुकाबला हुआ त्रिकोणीय। यहां ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि विंध्य में कुल 30 विधानसभा सीट हैं। साल 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इन 30 में से 24 सीटों पर जीत दर्ज की थी। विधायक नारायण त्रिपाठी ब्राह्मण समाज का बड़ा चेहरा माने जाते हैं और विंध्य क्षेत्र की अधिकांश सीटों पर हार जीत का निर्णय ब्राह्मण मतदाता करते हैं। विधायक नारायण त्रिपाठी की यहां की राजनीति में तगड़ी पकड़ है। राजनीति के जानकारों के हिसाब से विंध्य क्षेत्र का चुनाव परिणाम इस बार बहुत ही चौंकाने वाला रहेगा। नारायण त्रिपाठी की पार्टी के चुनाव मैदान में उतरने से अब यहां मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। जिसके चलते यहां कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टी के समीकरण गड़बड़ा रहे हैं और क्षेत्र की करीबन पांच से सात सीटों पर नारायण त्रिपाठी की पार्टी की जीत सुनिश्चित दिखाई दे रही है। जिसे रोक पाना अब दोनों ही पार्टियों के लिए असंभव नजर आ रहा है। जिसके चलते भाजपा और कांग्रेस दोनों ही खेमों में खलबली मची हुई है। इस चुनाव में विंध्य क्षेत्र से तीनों पार्टियों में से किसका पलड़ा भारी रहेगा यह तो चुनाव परिणाम ही बताएगा। मैहर विधानसभा में बजा चुनावी बिगुल। मध्य प्रदेश के मैहर विधानसभा क्षेत्र के विधायक नारायण त्रिपाठी ने अपने पत्ते खोलते हुए आगामी 2023 के चुनाव में अपनी विंध्य जनता पार्टी से चुनाव मैदान पर उतरने का आगाज कर दिया है। यदि हम बात करें मैहर विधानसभा क्षेत्र की तो यह विधानसभा क्षेत्र नारायण त्रिपाठी का गढ़ माना जाता है, जहां नारायण त्रिपाठी अलग-अलग दलों से चार बार विधायक चुने जा चुके हैं। अभी तक नारायण त्रिपाठी समाजवादी पार्टी, कांग्रेस पार्टी और भारतीय जनता पार्टी से मैहर विधानसभा क्षेत्र के विधायक चुने जा चुके हैं, लेकिन आगामी 2023 के चुनाव को लेकर नारायण त्रिपाठी ने भारतीय जनता पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था, ऐसे में कयास लगाए जा रहे थे कि नारायण त्रिपाठी कांग्रेस पार्टी का दामन थाम कर एक बार फिर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे, लेकिन सभी पार्टियों को दरकिनार करते हुए नारायण त्रिपाठी ने अब अपने द्वारा गठन की गई विंध्य जनता पार्टी से मैहर विधानसभा क्षेत्र के चुनावी मैदान पर ताल ठोक कर सभी कयासों पर विराम लगा दिया है। वीजेपी की सूची ने बढ़ाई भाजपा-कांग्रेस की धड़कनें। नारायण त्रिपाठी ने विंध्य जनता पार्टी के उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करते हुए चुनावी बिगुल बजा दिया है। पहली सूची में नारायण त्रिपाठी ने सतना जिले की 7 विधानसभा में से 4 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित किए हैं, जिसमें मैहर से खुद नारायण त्रिपाठी, सतना विधानसभा से हरिओम गुप्ता, रैगांव विधानसभा क्षेत्र से आरती वर्मा और अमरपाटन विधानसभा क्षेत्र से शशि सतेंद्र शर्मा उम्मीदवार घोषित किए हैं। फिलहाल नारायण त्रिपाठी ने विंध्य जनता पार्टी की सूची जारी करने के बाद भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी दोनों की ही धड़कने बढ़ा दी हैं। वीजेपी ने 25 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी की। विंध्य जनता पार्टी द्वारा जारी पहली चुनाव प्रत्याशी लिस्ट में रैगांव से आरती वर्मा, सतना से हरिओम गुप्ता, अमरपाटन     से शशि सत्येंद्र शर्मा, सेमरिया से हासिफ मोहम्मद अली, त्यौथर से कमांडो अरुण गौतम, देवतालाब से कुंजबिहारी तिवारी, गगुढ़ से शिवमोहन शर्मा, चुरहट से अरुण द्विवेदी और सीधी से वाल्मिीक तिवारी को प्रत्याशी घोषित किया है। जबकि सिंहावल से आशीष मिश्रा, चितरंगी से रामकृष्ण कोल, सिंगरौली से कुंदन पांडेय, ब्यौहारी से लेखन सिंह, जयसिंह नगर से फूलमती सिंह, जैतपुर से हीरालाल पनिका और अनूपपुर से प्यारेलाल पनिका को टिकट दिया है। इसके साथ ही पुष्पराजगढ़ से अमृतलाल सोनवानी, बांधवगढ़ से धूप सिंह, मानपुर से राजकुमार बैगा, शहपुरा से मदन सिंह परस्ते, डिंडौरी से सितार मरकाम, भोपाल दक्षिण पश्चिम से मनीष पांडेय, अंबेडकर नगर से वैघनाथ मिश्रा और बड़ामलहरा से दिनेश यादव को चुनाव प्रत्याशी घोषित कर मैदान में उतारा है। विंध्य प्रदेश की मांग करते रहे हैं नारायण त्रिपाठी। नारायण त्रिपाठी हमेशा विंध्य प्रदेश की मांग को लेकर मीडिया के सुर्खियों में रहते हैं और वे भाजपा सरकार में रहकर भी विंध्य प्रदेश की मांग को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करते थे। वर्ष 2018 के चुनाव में नारायण त्रिपाठी ने भारतीय जनता पार्टी से चुनाव में जीत दर्ज की थी, जहां उनके सामने उनके प्रतिद्वंदी श्रीकांत चतुर्वेदी चुनाव मैदान में थे। श्रीकांत चतुर्वेदी को मात देते हुए नारायण त्रिपाठी ने जीत दर्ज की थी। मैहर विधानसभा चुनाव 2023। मैहर विधानसभा सीट पर अगले महीने चुनाव होना है। कांग्रेस ने जहां इस सीट से धर्मेश घई को अपना उम्मीदवार बनाया … Read more

कांग्रेस में कई चक्कियां चल रही हैं और आपस में ही एक-दूसरे को पीस रही हैं।- शिवराज सिंह चौहान.

Shivraj Singh Chouhaan; Digvijay Singh; Kamalnath; Sahara Samachaar;

In Congress, there are many factions and they are grinding each other.” – Shivraj Singh Chouhan. उदित नारायणभोपाल। मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव का चुनावी समर अब तेज हो गया है। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के नेता अब एक-दूसरे पर जबरदस्त हमला बोल रहे हैं। दोनों पार्टियों के नेता जमकर जुबानी हमले बोल रहे हैं। इसी बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पार्टी के नेताओं पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में कई चक्कियां चल रही हैं और आपस में ही एक-दूसरे को पीस रही हैं। शिवराज सिंह ने कहा, “कांग्रेस में इस समय चक्कियां चल रही हैं। कमलनाथ कहते हैं कि मेरी चक्की बहुत बारीक पीसती है लेकिन इस बार दिग्विजय की चक्की ने कमलनाथ को ही पीस दिया। कमलनाथ, दिग्विजय और जयवर्धन के कुर्ते फाड़ने की बात करते थे लेकिन सभी कमलनाथ समर्थकों के टिकट कटवाकर अब दिग्विजय सिंह ने कमलनाथ का कुर्ता फाड़ दिया।” उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह की चक्की ने अब कमलनाथ को पीस दिया है। बता दें कि बीते 17 अक्टूबर को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय भोपाल में चुनावी घोषणा पत्र जारी हो रहा था। इस दौरान हंसी ठिठोली करते हुए कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह से कहा कि आपको गाली खानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि मेरे पास कुछ लोग आये और उन्होंने कहा कि उनका टिकट कट गया है। उनसे मैंने कहा कि आप लोग दिग्विजय और जयवर्धन सिंह के कपडे फाड़ो। इस पर दिग्विजय सिंह ने हल्के-फुल्के अंदाज में कमलनाथ से कहा कि ए फॉर्म और बी फॉर्म में दस्तखत किसके होते हैं, पीसीसी अध्यक्ष के तो कपड़े किसके फटने चाहिए, बताओ? दोनों नेताओं की इस बातचीत का वीडियो जमकर वायरल हुआ था। इस वीडियो को कई बीजेपी नेताओं ने इन दो नेताओं की आपसी कलह बताकर पोस्ट किया था। अब शिवराज सिंह चौहान ने एक बार फिर से इसी वीडियो के आधार पर कांग्रेस पार्टी पर तंज कसा है।

सीएम शिवराज की बिलमाफी पर कांग्रेस का बड़ा खुलासा।

Shivraj Singh Chouhan; Surjewala; Kamalnath; Digvijay Singh; Sahara Samachaar;

Congress’s big revelation on the Chief Minister Shivraj’s Bill forgiveness. सुरजेवाला ने सीएम शिवराज सिंह का किया नया नामकरण “रेडियो गप्पिस्तान” कनेक्शन लोड बिना उपभोक्ता की सहमति और आकलन के किया दोगुना। गरीब बिजली उपभोक्ताओं को धोखा देने का लगाया बड़ा आरोप। सुरजेवाला के आरोपों पर भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल का पलटवार उदित नारायण भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर करारा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान रेडियो गप्पिस्तान है। गरीब बिजली उपभोक्ताओं को उन्होंने धोखा दिया है। उन्होंने साढ़े तीन लाख उपभोक्ताओं का डेटा पेश करते हुए यह आरोप लगाए। रणदीप सुरजेवाला ने गुरुवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को घेरा। रणदीप सुरजेवाला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नौगांव में एक किलोवॉट तक के बिजली कनेक्शन का बिल माफ करने का वादा किया था। बिल माफी तो दूर शिवराज ने उल्टा उनके कनेक्शन का लोड बिना उनकी सहमति और बिना किसी आकलन के ही दो किलोवॉट कर दिया। उपभोक्ता की सहमति के बिना लोड किया दोगुनासुरजेवाला ने आरोप लगाया कि एक किलोवॉट तक के जिन कनेक्शन उपभोक्ताओं के बिल माफ होने थे, उनके बिल माफी से पहले ही उनके कनेक्शन का भार बढ़ाकर दो किलोवॉट कर दिया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे में वह ग्राहक इस बिल माफी के दायरे से बाहर हो गए। सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि यह गरीब जनता के साथ धोखा है। सुरजेवाला ने कहा कि यह आरोप नहीं है। हम इसके तथ्य भी दे रहे हैं। इसके लिए 21 जिलों के 38 डिविजन के उपभोक्ताओं के डाटा का आकलन किया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार का यह कार्य गरीबों के साथ धोखा होने के साथ ही गैरकानूनी भी है। सूरजेवाला ने शिवराज से पूछे पांच सवाल- क्या एक किलोवॉट तक के 20 लाख गरीब उपभोक्ताओं में से एक भी उपभोक्ता की फूटी कौड़ी माफ हुई है। सरकार की घोषणाएं धोखे व झूठ की बुनियाद परक्या एक किलोवॉट तक के उपभोक्ताओं के बिजली बिल स्थगित करने के आदेश जारी करने से पहले षड्यंत्रपूर्वक तरीके से उपभोक्ताओं का बिजली कनेक्शन का भार दो किलोवॉट नहीं कर दिया गया। क्या प्रदेश के लाखों गरीब परिवारों को उनके कनेक्शन के भार को बढ़ाने से पहले सूचित किया गया था या उनकी सहमति ली गई थी या उनके लोड का आकलन किया गया था। क्या ये लाखों गरीब परिवार दो किलोवॉट के कनेक्शन के साथ गरीबी रेखा की परिधि से षडयंत्रपूर्वक तरीके से बाहर कर दिए गए हैं। क्या शिवराज सरकार की सारी घोषणाएं ऐसे ही धोखे और झूठ की बुनियाद पर रखी गई हैं। सुरजेवाला के बयान पर आशीष अग्रवाल का पलटवारकांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला के बयान पर भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने पलटवार करते हुए कहा की “कपड़ा फाड़ कांग्रेस बेचारी, अब फर्जी आंकड़े कर रही है” जारी भोपाल। विधानसभा चुनाव के प्रचार के बीच मप्र की राजनीति में हलचल जारी है। प्रदेश कांग्रेस मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला द्वारा गुरूवार को प्रदेश में बिजली को लेकर भाजपा के खिलाफ बयान जारी किया गया। जिसके बाद भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने पलटवार किया है। आशीष अग्रवाल ने सुरजेवाला को सोशल मीडिया पर जवाब देते हुए कहा है कि कांग्रेस के भ्रामक आकंड़ों से सावधान रहें। क्योंकि रणदीप सुरजेवाला, कमलनाथ और दिग्विजय सिंह से परेशान हो गए हैं। कपड़ा फाड़ कांग्रेस बेचारी अब फर्जी आंकड़े जारी कर रही है। कांग्रेस में टिकट वितरण के बाद कपड़ा फाड़ और पुतला कोई विपक्ष दल नहीं फूंक रहा, बल्कि कांग्रेस के नेता ही फूंक रहे हैं। कांग्रेस में गुट या गिरोह चल रहा है

प्रियंका गांधी का कल दमोह दौरा, अजय टंडन के समर्थन में करेगी जनसभा।

Priyanka Gandhi will tour to Damoh tomorrow and hold a public meeting in support of Ajay Tandon. बुंदेलखंड क्षेत्र में प्रियंका पहला चुनावी दौरा, कल के कार्यक्रम की तैयारियां जोरों पर। प्रियंका की रैली को लेकर बुंदेलखंड क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह। दमोह संवाददाता दमोह। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस युद्धस्तर पर जुटी हुई है। कांग्रेस के तमाम दिग्गज प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में दौरे कर रहे हैं। इसी क्रम में कल 28 अक्टूबर को प्रियंका गांधी दमोह आएंगी। यहां वह कांग्रेस प्रत्याशी अजय टंडन के समर्थन में जनसभा को संबोधित करेंगी। प्रियंका गांधी की इस रैली के पीसीसी चीफ कमलनाथ, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह सहित आसपास के जिलों के भी बड़ी संख्या में नेता, कार्यकर्ता व आमजन हिस्सा लेंगे। तैयारियों में जुटे नेता-नगरी, कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में प्रियंका गांधी का ये पहला चुनावी दौरा है। इससे पहले वह महाकौशल, मालवा, और विंध्य में जनसभाएं कर चुकीं हैं। प्रियंका गांधी के इस दौरे को लेकर कांग्रेस पार्टी विशेष तैयारियां कर रही है। पार्टी नेताओं ने इस रैली में दो लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया है। बता दें कि 2018 के विधानसभा चुनाव कांग्रेस ने दमोह से राहुल लोधी को अपना उम्मीदवार बनाया था। पार्टी के शीर्ष नेता राहुल गांधी खुद राहुल लोधी का प्रचार करने दमोह आए थे। इसके बाद यहां से पार्टी को जीत मिली थी। हालांकि, राहुल लोधी पाला बदलकर बीजेपी में चले गए। इसके बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी अजय टंडन के हाथों उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इतना ही नहीं इस बार भाजपा ने राहुल लोधी को टिकट तक नहीं दिया। भाजपा ने अपने पुराने नेता जयंत मलैया को उम्मीदवार बनाया है। बहरहाल, प्रियंका गांधी की रैली को लेकर बुंदेलखंड क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह है।

विदिशा जिले की ये मंडी ए ग्रेड मंडी में शुमार पर व्यवस्थाओ के नाम पर सिफर.

Vidisha; Ganjbasoda; Wheat Market; Sahara Samachaar;

Ganjbasoda in Vidisha district is considered an “A-grade” market but falls short in terms of facilities. विदिशा विशेष संवाददाता विदिशा, जिले की गंजबासौदा तहसील में स्थित कृषि उपज मंडी में किसान व्यवस्थाओं के अभाव में अपनी उपज बेचने में जद्दो जहद करते हैं. गंजबासौदा मंडी ए ग्रेड की मंडियों में शामिल है, लेकिन आज भी कृषि मंडी व्यवस्थाओं का जाल है. किसान परेशान होकर मंडी व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं और मंडी के सचिव किसानो के आरोपों से अपने आप को पाक साफ़ बता कर मंडी सिस्टम का हवाला दे रहे है. गंजबासोड़ा मंडी का ए ग्रेड की मंडियों में शुमार है पर मंडी में किसानो के लिए भोजन का कोई इंतज़ाम तक नहीं है. मंडी में किसानो को बैठने की व्यवस्था के भी आभाव है. कई माह से कैंटीन बंद है. मंडी में नहीं है भोजन का इंतजाम परिसर में मवेशी घूमते नजर आते हैं. किसानों के अनुसार, वे अपनी फसल बेचने के इंतज़ार की दिनों से कर रहे है तुलाई की ख़ास व्यवस्था के आभाव है. मंडी में सड़को की हालत दयनीय है.

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की आज विशाल रेली, दाखिल करेंगे नामांकन।

Former Chief Minister of Madhya Pradesh Kamal Nath will submit his nomination today for a large rally. संतोष सिंह तोमर भोपाल/छिंदवाड़ा। मध्‍य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और पीसीसी चीफ कमलनाथ आज दोपहर को विशाल रेली निकालकर सैकड़ों समर्थकों के साथ छिंदवाड़ा कलेक्ट्रेट में नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। कमलनाथ अपने राजनैतिक कैरियर में अभी तक दूसरी बार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतरे हैं। इससे पहले उन्होंने साल 2019 में प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनने के बाद छिंदवाड़ा से ही उपचुनाव लड़ा था और बीजेपी के कैंडिडेट विवेक बंटी साहू को करीब 25 हजार वोटों से हराया था। जबकी 2019 के पहले तक कमलनाथ लोकसभा में कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। इस बार फिर कमलनाथ दोबारा छिंदवाड़ा विधानसभा से चुनाव लड़ने जा रहे है। कमलनाथ की नामांकन रैली उनके निवास शिकारपुर से दोपहर 12 बजे शुरू होगी जो छिंदवाड़ा नगर के श्री बड़ी माता मंदिर पहुंचेगी, यहां पर कमलनाथ पूजा अर्चना करेंगे, इसके बाद वे श्याम टॉकीज के प्राचीन राम मंदिर पहुंचेंगे जहां पर पूजा अर्चना कर एक रथ पर सवार होकर कलेक्ट्रेट के लिए निकलेंगे। दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर उनकी रैली शुरू होगी, नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए उनकी रैली 2 बजे छिंदवाड़ा कलेक्टर कार्यालय पहुंचेगी जहां पर वे समर्थकों के साथ नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। मानसरोवर कांपलेक्स में होगी पहली सभा कमलनाथ की नामांकन रैली को लेकर विशेष तैयारियां कांग्रेस के द्वारा की गई हैं। नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद वे अपनी पहली चुनावी आमसभा मानसरोवर कॉम्प्लेक्स में लेंगे, इस दौरान उनके साथ सांसद नकुलनाथ और तमाम कांग्रेस के नेता मौजूद रहेंगे। कमलनाथ की नामांकन रैली में हजारों समर्थकों की भीड़ उमड़ेंगी इसको लेकर विशेष व्यवस्था बनाई जा रही है।

कांग्रेस के गले की फांस बना प्रत्याशियों का बदलाव।

The Congress witnessed a change in candidates like a noose around its neck. चुनाव प्रत्याशी बदलने के बाद भी नहीं थम रहा कांग्रेस पार्टी में घमासान। सुबह बदला टिकट, शाम को बसपा ने बनाया कुलदीप को चुनाव प्रत्याशी। संतोष सिंह तोमर भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव टिकट वितरण में हुई उठा – पटक के बाद फैले विद्रोह को शांत करने के लिए कांग्रेस पार्टी ने बड़ा फैसला लेते हुए चार सीटों पर पहले उतारे गए उम्मीदवारों को बदल कर विद्रोह करने वालें दिग्गज नेताओं को अपना प्रत्याशी बना दिया है, लेकिन अब यह बदलाव भी कांग्रेस पार्टी के गले की फांस बनता दिखाई दे रहा है।  कांग्रेस ने जिन चार सीटों पर उम्मीदवारों को बदला है, उनमें मुरैना जिले की सुमावली, नर्मदापुरम जिले की पिपरिया उज्जैन जिले की बड़नगर और रतलाम जिले की जावरा विधानसभा सीटें शामिल हैं। इस बदलाव में दो विधायकों को फिर से टिकट दिया गया है, जबकि कांग्रेस ने पहले इन विधायकों का टिकट काट दिया था। टिकट बदलने से नाराज सुमावली प्रत्याशी कुलदीप सिंह के समर्थकों द्वारा कांग्रेस नेताओं का पुतला और झंडों की होली जलाकर आक्रोश प्रदर्शित किया और शाम को कुलदीप सिंह ने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ने का ऐलान भी कर दिया। कांग्रेस ने बागी विधायकों के सामने घुटने टेकेआखिरकार कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने अपनी मनमर्जी के आधार पर टिकट बांट तो दिए थे लेकिन जब नाराज नेताओं ने बगावती तेवर दिखाए तो पार्टी ने बागी विधायकों व नेताओं के सामने घुटने टेक दिए। जिन सीटों पर प्रत्याशी बदले हैं उनमें दो विधायकों को फिर से टिकट दिया है। पार्टी ने सुमावली विधानसभा सीट पर विधायक अजब सिंह कुशवाहा को फिर से प्रत्याशी बनाया है, पहले अजब सिंह का टिकट काट दिया गया था। जिसके बाद अजब सिंह ने विरोध करते हुए अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस छोड़कर बहुजन समाज पार्टी का दामन थाम लिया था और बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी में थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें फिर से मौका दे दिया है। इसी तरह से उज्जैन जिले की बड़नगर विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने विधायक मुरली मोरवाल को फिर से प्रत्याशी बनाया है। जबकि चुनाव प्रत्याशियों की दूसरी सूची में कांग्रेस पार्टी ने यहां से राजेंद्र सिंह सोलंकी को मैदान में उतारा था। जिसके बाद से विधायक मुरली मोरवाल और उनके समर्थकों ने पार्टी से बगावत कर दी थी। इतना ही नहीं मुरली मोरवाल ने भी निर्दलीय चुनाव लड़ने की स्पष्ट घोषणा कर दी थी। ऐसे में पार्टी ने टिकट देकर एक तरह से बगावत को रोकने की कोशिश की है।          इसके साथ ही पिपरिया विधानसभा सीट पर भी बदलाव करते हुए कांग्रेस पार्टी ने वीरेंद्र रघुवंशी को चुनाव प्रत्याशी घोषित कर दिया है। जबकि पहले यहां से गुरु चरण खरे को प्रत्याशी घोषित किया गया था और उन्होंने अपने समर्थकों के साथ चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया था। इधर यही हाल जावरा विधानसभा सीट का भी हुआ है। यहां से कांग्रेस नेतृत्व ने पहले हिम्मत श्रीमाल को टिकट देकर चुनावी समर का बिगुल बजा दिया लेकिन यहां भी वही विरोध के स्वर उठने लगे जिनका सामना पार्टी नेतृत्व को अन्य सीटों पर भी करना पड़ रहा था। विरोध के चलते बड़ा नुकसान होने की आशंका को समझते हुए कांग्रेस पार्टी ने यहां भी चुनाव प्रत्याशी बदलने की अधिकृत घोषणा कर दी। अब इस सीट पर वीरेंद्र सिंह सोलंकी को टिकट थमाया गया है और हिम्मत श्रीमाल को चुनावी समर से बाहर कर दिया गया है। सात प्रत्याशी बदले, दो सीटों पर अभी भी फंसा पेंचशीर्ष नेतृत्व की मनमानी के आधार पर हुए टिकट वितरण के बाद उठी बगावत के चलते कांग्रेस को अब तक सात सीटों पर प्रत्याशी बदलने पड़े हैं। पार्टी ने दूसरी सूची में तीन सीटों गोटेगांव, दतिया और पिछोर में प्रत्याशी बदले थे। जबकि अब सुमावली, पिपरिया, बड़नगर और जावरा में प्रत्याशी बदले हैं। मतलब पार्टी ने अब तक सात सीटों पर प्रत्याशी बदले हैं। जबकि पार्टी मंडला जिले की निवास सीट पर प्रत्याशियों की अदला बदली पहले ही कर चुकी है।इतनी सब उठा – पटक करने के बाद भी खास बात यह है कि कांग्रेस की समस्या अभी भी पूरी तरह से दूरी होती नजर नहीं आ रही है। पार्टी ने भले ही सात सीटों पर प्रत्याशी बदल दिए हैं, लेकिन अभी भी आमला और शिवपुरी विधानसभा सीट पर पेंच फंसा हुआ है। डिप्टी कलेक्टर रही निशा बांगरे का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद वह इस सीट से टिकट की मांग कर रही है, जबकि कांग्रेस यहां से मनोज मालवे को मैदान में उतार चुकी है, ऐसे में कांग्रेस यहां भी फंसी नजर आ रही है। क्योंकि निशा बांगरे ने कांग्रेस नेताओं से बातचीत कर पहले ही तय कर लिया था कि वो त्यागपत्र स्वीकार होने के बाद आमला से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ेंगी। जिसके लिए निशा बांगरे ने नौकरी से इस्तीफा देने के बाद राज्य शासन द्वारा स्वीकार ना किए जाने पर सरकार के खिलाफ सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक बड़ी लड़ाई लड़ी है। इधर शिवपुरी में कांग्रेस ने सीनियर विधायक केपी सिंह को टिकट दिया है, जबकि केपी सिंह अपनी परंपरागत पिछोर सीट से ही चुनाव लड़ते रहे हैं। पिछोर सीट पर पहले केपी सिंह के भांजे शैलेन्द्र सिंह को टिकट दिया था लेकिन बाद में रूठों को मनाने के चक्कर यहां भी प्रत्याशी बदल दिया था। अब शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र में भी बाहरी प्रत्याशी को लेकर माहौल गरमाया हुआ है जिससे यहां भी मामला फंसा हुआ है। बगावत पर विराम लगाने के चक्कर में लेने के देने पड़ेकांग्रेस पार्टी ने टिकट बटवारे के बाद नेताओं और विधायकों की नाराजगी और बगावत पर विराम लगाने के लिए पार्टी ने बड़ा फैंसला लेते हुए एक साथ चार विधानसभाओं में पूर्व घोषित प्रत्याशियों को बदल तो दिया लेकिन बगावत पर विराम लगाने का यह फार्मूला कांग्रेस के लिए दौहरा खतरनाक साबित होता हुआ दिखाई दे रहा है। दरअसल जब पार्टी ने इन सीटों पर प्रत्याशियों के नामों की अधिकृत घोषणा कर दी तो घोषित प्रत्याशियों ने अपने अपने क्षेत्रों में चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया था। अब पार्टी ने रूठों को मनाने के चक्कर में टिकट बदलकर उन प्रत्याशियों और उनके समर्थकों … Read more

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ईवीएम पर उठाए सवाल ?

Former Chief Minister Digvijay Singh raised questions about the EVM (Electronic Voting Machine). वोट कहां गया यह जानना हमारा संवैधानिक अधिकार। निष्पक्षता से सॉफ्टवेयर के विषय में जानकारी दे ईसी। उदित नारायण भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस पार्टी से राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह नेएक बार फिर ईवीएम मशीन से वोटिंग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मैं ईवीएम से वोट कराने का विरोध नहीं करता, लेकिन चुनाव आयोग बताए कि जिस मशीन में चिप लगी हो तो वह टेंपर प्रूफ कैसे हो सकती है? ईवीएम में वोट कहां गया ये जानना हमारा संवैधानिक अधिकार है। ईवीएम, वीवीपैट और काउंटिंग यूनिट में जो सॉफ्टवेयर है, चुनाव आयोग को निष्पक्षता से उस सॉफ्टवेयर के विषय में जानकारी देनी चाहिए। इलेक्शन कमिशन हमसे मिलने को तैयार नहीं है। हमने एक सवालों की फेहरिस्त बनाई थी लेकिन आयोग उसका जवाब नहीं दे रहा है। बता दें कि कांग्रेस की ओर से ईवीएम मशीन को लेकर बनाई गई कमेटी को दिग्विजय सिंह लीड कर रहे हैं। दिग्विजय सिंह ईवीएम के संबंध में विपक्षी पार्टियों के नेताओं के साथ कई दौर की बैठकें भी कर चुके हैं। दिग्विजय सिंह की अगुवाई में देश के प्रमुख विपक्षी दलों द्वारा निर्वाचन आयोग से मांग की जा रही है कि वीवीपैट की पर्ची से काउंटिंग की जाए।  देश में लोकतंत्र को बचाए – सुप्रीम कोर्ट:- दिग्विजय सिंह  सोमवार को पूर्व सीएम ने इस संबंध में ट्वीट करते हुए भी लिखा कि चुनाव आयोग से एक ही गुज़ारिश है कि वीवीपैट स्लिप हमें हाथ में दे दो जिसे हम अलग से मतपेटी में डाल दें। मतगणना के पहले किसी भी 10 मतपेटी के वोट गिन लो और काउंटिंग के नतीजों से मेल कर लो। यदि दोनों का नतीजा एक जैसा है तो काउंटिंग के नतीजों से रिजल्ट डिक्लेअर कर दो। इसमें चुनाव आयोग को क्या दिक़्क़त है? सुप्रीम कोर्ट से यही प्रार्थना है इसे गंभीरता से लें देश में लोकतंत्र को बचाइए।

कटनी जिले के चारों विधानसभा क्षेत्र में चुनावी हलचल तेज, उठे बगावत के स्वर.

MP Elections; BJP; Congress; INC; Bhartiya Janta Party; Katni; Vidhaansabha Elections;

Election fervor is running high in all four assembly constituencies of Katni district, with a growing clamor for change.

कांग्रेस की दूसरी लिस्ट आते ही पूरे प्रदेश में विरोध के सुर.

INC; Congress; Gwalior; Malhargarh; Politics;

As soon as the second list of the Congress party comes, there is an uprising across the entire state.

जानिए कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की लिस्ट

इंदौर-3 से कांग्रेस ने पिंटू जोशी (दीपक)को उम्मीदवार बनाया है।इनके पिता स्व.महेश जोशी संजय गांधी के करीबी थे।कमलनाथ और महेश जोशी दोनों युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय महा.थे।दिग्विजय सरकार में भी महेश जोशी रसूख़दार मंत्री थे।इनके चचेरे भाई अश्विन जोशी भी 3 बार इस सीट से विधायक रहे है। निवाड़ी से कांग्रेस ने बड़ा दांव चलते हुए भाजपा नेता अमित राय को उम्मीदवार बनाया है अमित राय की माँ निवाड़ी जिपं की अध्यक्ष है।ऐसा लग रहा था कि कांग्रेस यहां रोशनी यादव पर दांव चल सकती है लेकिन मीरा यादव के सपा से चुनाव लड़ने के बाद कांग्रेस ने रोशनी को टिकट देना उचित नही समझा। कांग्रेस ने ग्वालियर से सुनील शर्मा को उम्मीदवार बनाया था इनका मुकाबला सिंधिया समर्थक मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर से है पिछला उपचुनाव भी ये प्रद्युमन सिंह तोमर के खिलाफ लड़े थे जहां इन्हें काफी मतों से शिकस्त झेलनी पड़ी थी।सुनील क्षेत्र में काफी एक्टिव रहने वाले नेता माने जाते है। खुरई सीट से कांग्रेस पार्टी ने रक्षा राजपूत को अपना उम्मीदवार बनाया है रक्षा पिछले कई वर्षों से खुरई में सक्रिय है उनका मुकाबला प्रदेश के कद्दावर मंत्री भूपेंद्र सिंह से है खुरई भाजपा की बेहद मजबूत सीट मानी जाती है,भूपेंद्र सिंह ने यहां भाजपा की जड़े को गांव-गांव में जमाया है। कांग्रेस पार्टी ने खातेगांव से मप्र की राजनीति के संत कहे जाने वाले स्व कैलाश जोशी के पुत्र दीपक जोशी को अपना उम्मीदवार बनाया है।दीपक जोशी 2003 से लेकर 2018 तक विधायक रह चुके है।पिछला चुनाव वह हार गए थे।वही खातेगांव से भाजपा ने आशीष शर्मा को अपना उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने सीधी से ज्ञान सिंह को उम्मीदवार बनाया है ज्ञान सिंह वर्तमान में सीधी जिला कांग्रेस के अध्यक्ष है।वह अजय सिंह के बेहद करीबी है वहां भाजपा ने रीति पाठक को उम्मीदवार बनाया है वहीं भाजपा के वर्तमान विधायक केदारनाथ टिकट न मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके है। कांग्रेस पार्टी ने मुरैना से दिनेश गुर्जर को अपना उम्मीदवार बनाया है।पार्टी ने यहां से अपने वर्तमान विधायक राकेश मावई की टिकट काट कर दिनेश गुर्जर को उम्मीदवार बनाया है है यह सीट गुर्जर बहुल्य है।फिलहाल दिनेश गुर्जर किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। कांग्रेस पार्टी ने भाजपा की परंपरागत सीट रहली से इंजीनियर ज्योति पटेल को अपना उम्मीदवार बनाया है।ज्योति वर्तमान में जिला पंचायत की सदस्य है कांग्रेस ने यहां ओबीसी कार्ड चला है अब देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा के इस अभेद किले पर ज्योति सेंध लगाने में कामयाब होती है या नहीं! कांग्रेस पार्टी ने भिंड से चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी को अपना उम्मीदवार बनाया है जब से वह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए थे तब से वह नेपथ्य में चल रहे थे कांग्रेस पार्टी ने उन्हें एक नया राजनीतिक जीवन दान दिया है अब देखना होगा वह इस अवसर को किस तरह भुनाते हैं। कांग्रेस पार्टी ने रीवा से इंजी.राजेंद्र शर्मा को अपना उम्मीदवार बनाया है ये वर्तमान में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष हैं उनकी छवि साफ सुथरी है ये अच्छे उद्यमी भी है।वही यह सीट भाजपा की मजबूत सीटों में एक है यहां इनका मुकाबला मंत्री राजेंद्र शुक्ला से है जो मजबूत स्थित में है। कांग्रेस ने मैहर से धर्मेश घई को उम्मीदवार बनाया है धर्मेश घई मैहर नगर पालिका के अध्यक्ष रह चुके है यह पंजाबी समाज से आते हैं जिनकी संख्या मैहर में बहुत कम है।यह सीट ब्राह्मण-कुर्मी बाहुल्य है इसके बाद भी पार्टी ने इनको उम्मीदवार बनाया है।ये अजय सिंह व प्रवीण कक्कड़ के करीबी है। कांग्रेस ने निधि जैन को सागर से विधानसभा का उम्मीदवार बनाया है निधि हाल ही में सागर नगर निगम का चुनाव लड़ी थी जहां उन्हें शिकायत झेलनी पड़ी थी।इनका मुकाबला इनके पति के सगे बड़े भाई शैलेंद्र जैन से होगा जो वर्तमान में सागर के विधायक व भाजपा के उम्मीदवार हैं। देवतलाव से कांग्रेस ने पद्मेश गौतम को उम्मीदवार बनाया है ये वर्तमान विस अध्यक्ष एवं भाजपा उम्मीदवार गिरीश गौतम के सगे भतीजे हैं।इन्होंने हाल ही में हुए पंचायती चुनाव में विस अध्यक्ष के बेटे राहुल गौतम को जिला पंचायत के चुनाव में करारी शिकायत दी थी,यही इनके टिकट पाने का आधार बना। कांग्रेस पार्टी ने सिरमौर की सामान्य सीट से रामगरीब आदिवासी को टिकट देकर बड़ा दांव चला है।रामगरीब आदिवासी कोल समाज के बड़े नेता है।इनका मुकाबला रीवा राजघराने की युवराज दिव्यराज सिह से होगा।कमलनाथ ने राजा के सामने रंक को मैदान में उतार दिया है।ये वही रामगरीब आदिवासी है जो 2008 में में तत्कालीन मंत्री स्व.रमाकांत तिवारी को त्योंथर से चुनाव हरा दिया था।कमलनाथ इनके मुरीद है।कमलनाथ ने बड़े-बड़े धन्ना सेठों की जगह एक गरीब आदिवासी पर दांव चला है विन्ध्य में कोल मतदाता कई विधानसभा में निर्णायक है कमलनाथ का यह दांव चल गया तो भाजपा को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है! कहते है ना जो दौड़ता है उसका भाग्य भी दौड़ता है! इसका प्रत्यक्ष प्रमाण अभय मिश्रा है उन्हें जैसे ही इस बात की जानकारी मिली कि भाजपा ने उनका टिकट काट दिया है फौरन वह कांग्रेस से टिकट पाने के लिए जुट गए,दिल्ली-भोपाल को एक कर डाला और आखिरकार टिकट पाने में सफल हो गए।आज उनकी जीवटता की चर्चा हर जगह हो रही है।अभय एक लड़ाई तो जीत चुके है लेकिन अभी मुख्य लड़ाई जीतना बाकी है चुनाव में उनके सामने भाजपा के मजबूत उम्मीदवार केपी त्रिपाठी होंगे जिनकी क्षेत्र में अच्छी पकड़ देखी जा रही है गांव-गांव उन्होंने कार्यकर्ताओं की फौज तैयार की है।अभय के प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के अंदर भी खूब है अब देखना होगा वह उनसे किस प्रकार निपटते हैं!रीवा जिले की यह सबसे हॉट सीट है सेमरिया में एक बार अभय और एक बार उनकी पत्नी चुनाव लड़ी है दोनों विजयी हुए है KP त्रिपाठी भी एक बार ही चुनाव लड़े हैं वह भी विजय हुए है लेकिन इस बार सेमरिया की जनता असली विजेता का चयन करेगी!

चंबल अंचल में नेताओं के दिख रहे बगावती सुर

मुरैना से पूर्व मंत्री एवं पूर्व विधायक रुस्तम सिंह के सुपुत्र राकेश रुस्तम सिंह ने थामा बसपा का दामन। सुमावली से कांग्रेस विधायक अजब सिंह कुशवाहा बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए हैं।भाजपा ने यहां से गुर्जर प्रत्याशी को मैदान में उतारा है तो कांग्रेस ने यहां इस बार क्षत्रिय प्रत्याशी पर दांव चला है।

MP विधान सभा चुनाव – यादव वोट बैंक तो है, लेकिन क्या अखिलेश यादव उठा सकेंगे फायदा

मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव में कांग्रेस से तालमेल न बन पाने पर समाजवादी पार्टी बेहद खफा है. पार्टी 22 प्रत्याशियों की घोषणा भी कर चुकी है. समाजवादी पार्टी का ज्यादा जोर पिछड़े वर्ग और सीधा कहा जाए तो यादव मतदाताओं पर रहता है. एसपी के अलग लड़ने का राज्य के चुनावों पर कितना असर पड़ेगा. क्या यादव वोट बैंक का फायदा अखिलेश यादव उठा सकेंगे. प्रवेश सिंह, नई दिल्ली. कांग्रेस पार्टी ने मध्य प्रदेश विधान सभा की 230 में से 229 सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं. सिर्फ एक सीट पर प्रत्याशी की घोषणा की जानी है. पार्टी ने उस सीट के लिए अपने उम्मीदवार के नाम के बारे में मन बना रखा है. अब समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव की नाराजगी की चर्चा हो रही है. विपक्षी गठबंधन आईएनडीआईए (इंडिया) में कांग्रेस के साथ शामिल अखिलेश ने इस पर खुल कर अपनी नाराजगी जता भी दी है. समाजवादी पार्टी का दावा था कि कांग्रेस उसे मध्य प्रदेश में कम से कम छह सीटें जरूर देगी. इस दावेदारी के पीछे पार्टी की जो भी दलील रही हो, लेकिन पिछले विधान सभा चुनाव में उसे एक सीट पर जीत भी मिली थी. ये अलग बात है कि चुनाव के बाद हुए तख्तापलट में उस विधायक ने सत्ताधारी बीजेपी का दामन थाम लिया था. समाजवादी पार्टी की दावेदारी खासतौर से विंध्य और बुंदेलखंड इलाके में रहती है. ये इलाके उत्तर प्रदेश से लगे हैं और समाजवादी पार्टी इस सीमावर्ती इलाके के पिछड़े वोट बैंक पर अपनी दावेदारी करता है. हालांकि ऐसी ही दावेदारी बहुजन समाज पार्टी भी करती रही है. उसके भी दो-चार सीटें मिलती रही है. अगर समाजवादी पार्टी की ताकत की बात की जाय तो उसे सबसे ज्यादा आठ सीटें 2003 के विधान सभा चुनाव में मिली थी. हालांकि ये भी ध्यान रखने वाली बात है कि उस समय मुलायम सिंह यादव जमीनी नेता समाजवादी पार्टी के थे. उनके साथ अमर सिंह की ताकत भी थी जो मध्य प्रदेश के क्षत्रिय समुदाय को जोड़ रहे थे. इसके अलावा ये वही दौर था जब कांग्रेस के कई नेता दिग्विजय सिंह से नाराज थे और उन्होंने पार्टी छोड़ी भी थी.

कांग्रेस के युवा चेहरों का विकल्प कौन, भाजपा के युवा चेहरे या बुजुर्ग नेतृत्व।

कांग्रेस हो या भाजपा, अमरपाटन, नागौद एवं रैगांव विधानसभा सीटों पर युवाओं के ही दम से जीत सम्भव है।इन सीटों पर भाजपा, कांग्रेस पार्टी की तरह अपने युवा चेहरों को मौका देगी या बुजुर्गों पर फिर से दांव लगाएगी। संतोष सिंह तोमर, भोपाल /सतना।मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर आज देर रात कांग्रेस पार्टी ने शेष बचे 88 विधानसभा क्षेत्रों के लिए चुनाव प्रत्याशियों के नाम की घोषणा करते हुए प्रदेश की सभी 230 सीटों पर अपनी स्थिति साफ कर दी। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की ओर से अभी तक शेष बचे विधानसभा क्षेत्रों के लिए नाम सामने नहीं आ पाए हैं। सभी भाजपा की अगली सूची का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। कांग्रेस का महिला एवं युवा चेहरों पर फोकस। कांग्रेस पार्टी ने इस बार महिला एवं युवा चेहरों पर ज्यादा फोकस कर रखा है। इसीलिए पार्टी ने इस बार अधिकतर युवा चेहरों और महिलाओं को चुनाव मैदान में उतारा है। जिसके पीछे पार्टी की मंशा अगली पीढ़ी को तैयार करने की भी दिखाई दे रही है। इसी क्रम में विंध्य क्षेत्र के सतना जिले में कांग्रेस पार्टी ने नागौद विधानसभा क्षेत्र से यूथ कांग्रेस की प्रदेशउपाध्यक्ष डॉ. रश्मी पटैल को मैदान में उतारा है, जबकि चित्रकूट विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के वर्तमान विधायक एवं युवा नेता नीलांशु चतुर्वेदी को प्रत्याशी बनाया है। इसके साथ ही रेगांव विधानसभा क्षेत्र से 2020 के उपचुनाव में विजयी रहीं वर्तमान विधायक कल्पना वर्मा को पुनः चुनाव प्रत्याशी घोषित किया है। भाजपा को युवा नेतृत्व की दरकार है। भारतीय जनता पार्टी ने अभी तक विंध्य क्षेत्र के सतना जिले की सात में से चार विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित किए है। जबकि तीन मुख्य सीटों पर प्रत्याशियों के नामों की घोषणा होना बांकी है। भाजपा की ओर से अभी तक घोषित चार नामों में से केवल एक रामपुर बाघेलान सीट पर युवा चेहरे के रूप में विक्रम सिंह ( विक्की ) को चुनाव मैदान में उतारा है। युवा नेता विक्रम सिंह की क्षेत्र के युवा वर्ग में बहुत अच्छी पकड़ बताई जाती है। अब बात करते हैं, बांकी बचे उन तीन विधानसभा क्षेत्रों की जहां भाजपा की ओर अभी तक प्रत्याशियों के नाम की घोषणा नहीं हो सकी है। इसमें से अमरपाटन विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां से भाजपा के वर्तमान विधायक व मध्य प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री रामखेलावन पटैल को पार्टी फिर से चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है। मंत्री रामखेलावन का नाम उन पर लगते रहे आरोपों के चलते हमेशा सुर्खियों में रहा है। मंत्री जी पर कभी जातिवादी, अभद्रता तो कभी कार्यकर्ताओं की अनदेखी के आरोपों के चलते क्षेत्रीय लोगों में छवी धूमिल हुई है। जिसका नुकसान इस सीट पर भाजपा को भुगतना पड़ सकता है। जबकि नागौद विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के वर्तमान विधायक व पूर्व मंत्री नागेंद्र सिंह का नाम भाजपा की अगली प्रत्याशी सूची में घोषित हो सकता है। लोगों की मानें तो नागेंद्र सिंह की उम्र करीब 83 वर्ष है, और वृध्दावस्था के चलते विधायक नागेंद्र सिंह अपने क्षेत्र में पहले की तरह सक्रीय नहीं रहते हैं। जिसके कारण क्षेत्र में उनकी पकड़ भी कमजोर हो रही है, जिसका फायदा यहां कांग्रेस उठाती दिख रही है। इसके बाद बात करते हैं बांकी बची रेगांव विधानसभा की जहां से कई युवा महिलाओं व युवा नेताओं ने अपनी दाबेदारी पार्टी नेतृत्व के सामने पेश की है। यहां से प्रतिमा बागरी, रानी बागरी और पुष्पराज बागरी के नाम को पैनल में शामिल किया गया है। युवा चेहरों का विकल्प युवा ही हो सकते हैं। विंध्य क्षेत्र की इन सभी सीटों पर जिस तरह कांग्रेस ने महिला एवं युवा चेहरों पर भरोसा जताया है ठीक उसी तरह भाजपा को भी अब बुजुर्ग और आरोप प्रत्यारोपों से घिरे नेताओं की जगह युवाओं को आगे लाकर अगली पीढ़ी का नेतृत्व तैयार करने की कोशिश करना चाहिए। क्योंकि कांग्रेस के युवा चेहरों का विकल्प भाजपा का युवा नेतृत्व ही बन सकता है। क्योंकि कांग्रेस अपने युवा चेहरों को मैदान में उतारकर चुनांव मैदान में आ गई है। अब भाजपा के अधिकांश कार्यकर्ताओं के साथ ही युवा वर्ग और नव मतदाताओं की नजर केवल अपने युवा चेहरों पर टिकी है,भाजपा भी अगर नए वा युवा चेहरों को अवसर देगी तो परिणाम भाजपा के पक्ष में आने के ज्यादा अवसर होंगे। जिससे आने बाले समय मे भाजपा और अधिक शशक्तता व मजबूती मिलेगी,साथ ही युवाओं में एक नई उम्मीद दिखेगी। युवा चेहरों के दम ही अब नैया पर हो सकती है, क्योंकि लोगों को बुजुर्ग या विवादित छवि वाले नेताओं की अपेक्षा अत्यधिक ऊर्जावान युवा चेहरों पर ज्यादा भरोसा है।

पूर्व मंत्री दीपक जोशी को कांग्रेस प्रत्याशी बनाए जाने के बाद कई कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने छोड़ी पार्टी बीजेपी ने ली चुटकी

पुष्पेंद्र सारदिया, खातेगांव खातेगांव विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस से प्रत्याशी बनाए गए दीपक जोशी को लेकर स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं में आक्रोश स्थानीय उम्मीदवार को टिकट नहीं देने से कई कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने दिए इस्तीफे कांग्रेस से ओबीसी वर्ग का चेहरा लक्ष्मीनारायण बंदावाला ने भी इस्तीफा दिया स्थानीय कार्यकर्ताओं ने अपनी पार्टी पर उपेक्षा के आरोप लगाकर दिए इस्तीफे इस कड़ी में विनोद चावड़ा जो कि जिला महामंत्री है कांग्रेस से उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है साथ ही कांग्रेस से टिकट मांगने वाले लक्ष्मीनारायण अध्यक्ष ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने भी पार्टी का दामन छोड़ दिया है साथ ही एक और बड़े चेहरे मुकेश पटेल ब्लॉक कांग्रेस के पिछड़ा वर्ग अध्यक्ष उन्होंने भी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है खातेगांव से भाजपा विधायक और तीसरी बार प्रत्याशी बनाए गए आशीष शर्मा का बयान – पूर्व मंत्री दीपक जोशी का कांग्रेस से टिकट होने पर बोले विधायक आशीष शर्मा…कांग्रेस का टिकट,कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की आकांक्षाओं पर ही खरा नहीं उतरेगा,बहुत सारे कांग्रेस के स्थानीय दावेदार यहाँ से प्रत्याशी बनने की मांग कर रहे थे।कांग्रेस नेतृत्व ने पूरे प्रदेश में सर्वे के आधार पर नहीं बल्कि नेताओं के चहेतों को टिकट देकर उपकृत किया है।ये क्षेत्र भाजपा का परम्परागत गढ़,इस बार भी प्रचंड बहुमत से भाजपा खातेगांव से जीतेगी।पूर्व मंत्री जोशी का पार्टी में विरोध पर बोले आशीष शर्मा-जब कुठाराघात होता है तो विरोध स्वभाविक। दीपक जोशी बाहरी प्रत्याशी है,यहाँ के स्थानीय नहीं। इसलिए जनता भलीभांति जानती है कि कौन उनके सुख दुःख में काम करता है…जीत को लेकर 100 प्रतिशत आश्वत हूँ।साथ ही कहा-2025 तक क्षेत्र के समस्त गाँव के किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने का काम हम करेंगे।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट की जारी, 88 कैंडिडेट्स के हैं नाम

“The Congress has released the second list of candidates in Madhya Pradesh, with 88 candidates’ names.”

कमलनाथ सरकार में लाखों नर्सिंग छात्र छात्राओं के साथ होगा न्याय फर्जी नर्सिंग कॉलेजों होंगे बंद – रवि परमार

Nursing Students; Fake Nursing Colleges; Ravi Parmar; NSUI; Jabalpur; INC; MP Congress; Kamalnath;

“In the Kamal Nath government, justice will be done with lakhs of nursing students; fake nursing colleges will be shut down – Ravi Parmar.”

बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष कांग्रेस पार्टी में हुए शामिल।

Betul; BSP; MP Congress; Madhya Pradesh;

“The former district president of the BSP has joined the Congress party.” शाहरुख मोटलानी बैतूल, बैतूल जिले के मुलताई से बहुजन समाज पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष अधिवक्ता नामदेव नागले ने कांग्रेस पार्टी का हाथ थाम लिए, जिन्हें महाराष्ट्र सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री वसंत पुरखे ने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता दिलाई। मुलताई विधायक कार्यालय में पूर्व कैबिनेट मंत्री विधायक सुखदेव पांसे की मौजूदगी में महाराष्ट्र के पूर्व कैबिनेट मंत्री वसंत पुरखे द्वारा बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष अधिवक्ता नामदेव नागले,कैलाश पवार,फहीम शाह का फूल मालाओं से स्वागत कर कांग्रेस पार्टी की सदस्यता दिलाई गई। वही उपस्थित सभी कांग्रेसी नेता एवम कार्यकर्ताओं को महाराष्ट्र के पूर्व कैबिनेट मंत्री वसंत पुरखे द्वारा संबोधित किया गया।

टीकमगढ़ में दिग्विजय सिंह के खास एवं कांग्रेस के उम्मीदवार के यहां पुलिस की छापेमारी

गुरुवार सुबह असम पुलिस की चार सदस्यीय टीम पूर्व मंत्री यादवेंद्र सिंह के घर पर जांच करने के लिए पहुंच गई। असम पुलिस किसी फ्राड के मामले में पूर्व मंत्री से पूछताछ करने के लिए आई है। टीकमगढ़. देवेंद्र साहू । गुरुवार सुबह असम पुलिस की चार सदस्यीय टीम पूर्व मंत्री और टीकमगढ़ सीट से कांग्रेस उम्मीदवार यादवेंद्र सिंह के घर पर जांच करने के लिए पहुंच गई। असम पुलिस किसी फ्राड के मामले में पूर्व मंत्री से पूछताछ करने के लिए आई है। हालांकि इससे अधिक जानकारी अभी असम पुलिस की टीम ने नहीं दी है। स्थानीय पुलिस ने पूर्व मंत्री के घर के आसपास कड़े सुरक्षा के बंदोबस्त किए हैं। जिससे कोई अप्रिय स्थति न बने। जानकारी के मुताबिक गुरुवार सुबह असम पुलिस की चार सदस्यीय टीम टीकमगढ़ पहुंची। टीकमगढ़ पहुंचने के साथ ही टीम ने स्थानीय पुलिस को साथ लिया और पूर्व मंत्री यादवेंद्र सिंह बुंदेला के घर पहुंची। टीम पूर्व मंत्री यादवेंद्र सिंह सहित उनके स्वजनों से पूछताछ कर रही है।कोतवाली थाना प्रभारी आनंद राज का कहना है कि पूर्व मंत्री व उनके स्वजनों से पूछताछ असम पुलिस कोर्ट के एक फ्राड के मामले की जांच के आदेश के बाद कर रही है। पुलिस ने यादवेंद्र सिंह के मकान को छावनी में बदल दिया है। जिससे कोई अप्रिय स्थति न बने। देखे पूरी खबर : https://youtu.be/PmJx8FatA6c https://saharasamachaar.com/wp-content/uploads/2023/10/टीकमगढ़-में-दिग्विजय-सिंह-के-खास-एवं-कांग्रेस-के-उम्मीदवार-के-यहां-पुलिस-की-छापेमारी.mp4

अभय मिश्रा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से दिया इस्तीफा, वापस कांग्रेस में हो सकते है शामिल

Abhay Mishra; Resign; BJP; INC; Bhopal; Politics;

Abhay Mishra has resigned from the party’s primary membership and could potentially rejoin the Congress. Manish Trivediभोपाल : कुछ समय पहले भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए रीवा जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष एवं सेमरिया के पूर्व विधायक अभय मिश्रा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से दिया इस्तीफा, अटकलें यह लगायी जा रही है की अभय मिश्रा अपनी वापसी कांग्रेस में कर सकते है.

चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं की सभा में नहीं जुट पा रही भीड़,

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव (Madhya Pradesh Assembly Elections)में प्रचार के दौरान प्रत्याशियों (candidates)को खासी मुसीबत (Trouble)का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीण इलाकों (localities)में राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों (candidates)को सुनने के लिए लोग इकट्ठा नहीं हो पा रहे हैं. सभाओं में खाली कुर्सियां नेताओं के लिए बड़ी मुसीबत बनी हुई हैं. राघोगढ़ के भाजपा प्रत्याशी हीरेंद्र सिंह के एक कार्यकर्ता सम्मेलन में ग्रामीण इकट्ठा नहीं हो पाए. नतीजतन कुर्सियां खाली पड़ी रहीं. धरनावदा में आयोजित अपनी सभा में खाली कुर्सियों को देखकर बीजेपी प्रत्याशी हीरेंद्र सिंह ने मंच से कहा, मैं 100 टंच किसान हूं. पार्टी ने मुझे टिकट दिया इसलिए कुर्ता पजामा पहनकर घूम रहा हूं. फसल कटाई चल रही है, इसलिए लोग खेतीबाड़ी में व्यस्त हैं. युवा वर्ग भी काम पर निकल जाता है इसलिए लोग नहीं आ पाए. मैं किसानों की परेशानी समझता हूं. कार्यकर्ता सम्मेलन में भाजपा प्रत्याशी ने खुद को कट्टर सनातनी बताते हुए कहा कि चुनाव तो हम जीत चुके हैं. विपक्षियों की बौखलाहट दिखाई दे रही है. कांग्रेस के ठेकेदार डराने धमकाने का काम कर रहे हैं. भाजपा में कोई ठेकेदार नहीं है बल्कि संगठन सर्वोपरी है. हीरेन्द्र सिंह ने कांग्रेसी नेता वीरेंद्र रघुवंशी का भी जिक्र किया. कहा कि वीरेंद्र भैया के साथ बहुत बुरा हुआ. पार्टी में वापस लौटेंगे तो मान सम्मान के साथ उनका स्वागत किया जाएगा. हीरेन्द्र सिंह ने दिग्विजय सिंह पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कमलनाथ उनके कपड़े फाड़ने की बात कर रहे हैं. बड़े लोगों की बड़ी बातें होती हैं. बीजेपी प्रत्याशी ने कार्यकर्ताओं को नसीहत देते हुए कहा कि अब बैठकों का दौर खत्म हो चुका है. समय कम है. चुनाव में जुट जाएं. चुनाव बेटी की शादी की तरह होता है. डेढ़ महीने पहले से जुटना पड़ता है . वहीं, राघोगढ़ से कांग्रेस के प्रत्याशी विधायक जयवर्धन सिंह भी विधानसभा क्षेत्र में प्रचार प्रसार करने में जुटे हैं. जयवर्धन ने मंच से बयान देते हुए कहा बीजेपी के राज में किसान बदहाल है. सहकारी बैंकों में करोड़ों के घोटाले हो रहे हैं. 2003 से पहले जब कांग्रेस सरकार थी तो हर पांच साल में कृषि मंडी, सहकारी बैंक और सोसाइटी में चुनाव होते थे. लेकिन अब भाजपा के दलाल इन संस्थाओं में बैठ गए हैं. हाल ही में दिग्विजय सिंह के विधायक पुत्र का वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें वे एक मासूम बच्चे को गोद में लेकर भाषण देते दिखाई दिए थे. बता दें कि मध्य प्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा के आगामी चुनाव के लिए 17 नवंबर को मतदान होगा और मतों की गिनती 3 दिसंबर को होगी.

पूर्व मंत्री इमरती देवी की सिंधिया से मांग, बोलीं-डबरा को जिला बनवा दें, मैं राजनीति छोड़ दूंगी

संतोष सिंह तोमर,ग्‍वालियर । डबरा विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी और पूर्व मंत्री इमरती देवी (Imarti Devi) का एक वीडियो सामने आया है जिसमें उन्होंने डबरा (Dabra) को जिला बनाने की मांग उठाई है। उन्होंने एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के सामने ऐलान कर दिया कि इस बार डबरा को जिला बनवा दीजिए। भले ही आगे मुझे टिकट मत देना, लेकिन डबरा को जिला बनवा दें। मैं अपनी राजनीति खत्म कर दूंगी। पूर्व मंत्री इमरती देवी भाजपा के बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल हुए। मध्य प्रदेश की राजनीति में अपने बयानों में हमेशा में हमेशा चर्चा में रहने वाली पूर्व मंत्री और भाजपा नेता इमरती देवी में आज डबरा तहसील को जिला बनाने की मांग की। बीजेपी के बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से उन्होंने मंच से मांग उठाई कि महाराज डबरा को जिला बनवा दीजिए मुझे अब कोई और काम नहीं चाहिए। यदि मैं मर गई तो डबरा के लोग कहेंगे कि डबरा को जिला ज्योतिरादित्य सिंधिया और इमरती देवी ने बनवाया था। इमरती देवी ने कहा- महाराज इस बार डबरा को जिला बनवा दीजिए भले ही आगे मुझे टिकट देना या ना देना, जिला बनते ही मैं अपनी राजनीति खत्म कर दूंगी। भाजपा ने डबरा विधानसभा से पूर्व मंत्री इमरती देवी को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं कांग्रेस ने मौजूदा विधायक सुरेश राजे को फिर से मैदान में उतारा है। डबरा विधानसभा में समधि और समधन के बीच कड़ी टक्कर मानी जा रही है। पिछले 2020 के उपचुनाव में उनके समधी सुरेश राजे ने इमरती देवी को शिकस्त दी थी।

अस्पताल की व्यवस्था देखकर नाराज हुआ केन्द्रीय दल

आदित्य शर्मा,उज्जैन। तीन दिन पहले चरक तथा जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं जांचने के लिए एनक्यूए अर्थात् नेशनल क्वालिटी असिसमेंट का दो सदस्यीय दल रायसेन से आया था। दल को चरक अस्पताल में तो व्यवस्थाएं ठीक नजर आई, लेकिन जिला अस्पताल में व्यवस्थाओं और मरीजों की हालत देखकर दल के सदस्य नाखुश थे। जिला अस्पताल प्रबंधन से जुड़े सूत्रों ने बताया कि तीन दिन पहले एनक्यूए के दल ने नागपुर से दो डॉक्टर्स की टीम आई थी। टीम दो दिन शहर में रूकी थी। पहले दिन दल द्वारा मातृ शिशु चरक अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं जांची गई थी। इनमें दल ने चरक अस्पताल की सेंट्रल लैब, वार्डों में मरीज के बेड और अन्य सुविधाएं से लेकर स्टॉफ आदि के बारे में विस्तार से जानकारी ली थी। सूत्र बताते है कि यहां की व्यवस्थाओं को एनक्यूए का जांच दल संतुष्ट था, लेकिन अगले दिन जब टीम ने जिला अस्पताल का दौरा किया तो यहां पर करीब हर वार्ड में मरीजों के पलंग पर बिछे हुए गद्दे पुराने और फटे हुए थे। चादर और कंबल भी पलंगों पर पर्याप्त नहीं थे। इसके अलावा वार्डों के दरवाजों में लगे शीशे भी ज्यादातर टूट हुए थे। सूत्रों का कहना है जिला अस्पताल के यह हाल देखकर दल के सदस्य नाराज हुए थे और यहां से नाखुश होकर लौटे हैं। उल्लेखनीय है एनक्यूए दल की रिपोर्ट के आधार पर ही स्वास्थ्य विभाग सरकारी अस्पतालों को लाखों का अनुदान जारी करता है।

नीमच कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किया नरेंद्र नाहटा विरोध एवं पुतला दहन

नीमच; Neemuch; Narendra Nahata; MP Congress; INC;

“Neemuch Congress activists protested against Narendra Nahata and burned an effigy.” Manish Trivedi नीमच, मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। नीमच जिले की मनासा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी नरेंद्र नाहटा की घोषणा के बाद से ही लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहा है। आज हजारों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने अधिकृत उम्मीदवार का विरोध किया और नरेंद्र नाहटा का पुतला दहन किया।दरअसल नरेंद्र नाहटा की उम्र 78 वर्ष है और वो मनासा की राजनीति से काफी दूर है उसी के चलते स्थानीय कार्यकर्ता उनका विरोध कर रहें है।

सीएम शिवराज कर रहे दनादन घोषणाएं, भारत सरकार का बजट भी कम पड़ जायेगा

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भोपाल। मध्य प्रदेश में उपचुनाव के माहौल में घोषणाओं और आरोप-प्रत्यारोपों का सिलसिला भी तेज हो गया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जहां राज्य के अलग-अलग हिस्सों में विकास परियोजनाओं के शिलान्यास और भूमिपूजन कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस इन्हें चुनावी घोषणाएं बता कर खारिज कर रही है। शुक्रवार को पूर्व सीएम कमलनाथ ने तंज कसा कि शिवराज जितनी घोषणाएं कर रहे हैं, उन्हें पूरा करने के लिए भारत सरकार का केंद्रीय बजट भी कम पड़ जाएगा। कमलनाथ ने एक बयान जारी कर कहा कि शुक्रवार को भी शिवराज प्रदेश के सागर, गुना व साँची के दौरे पर थे। वे पिटी हुई पिक्चर से झूठ का ट्रेलर दिखाते रहे, लेकिन जनता इनकी झूठ की पूरी पिक्चर पहले ही देख चुकी है। इसीलिये जनता ने उन्हें घर बैठाया था। अपने भाषणों में वे इतना झूठ बोल रहे हैं और इतनी झूठी घोषणाएं कर रहे हैं कि झूठ भी शर्मा रहा है। शिवराज की यदि रोज की करोड़ों रुपये की घोषणाओं का हिसाब लगाया जाए तो भारत सरकार का बजट भी कम पड़ जाए। कमलनाथ ने बताया कि किसान हर दौरे में अपनी खराब फसलें दिखाकर मुख्यमंत्री को आइना दिखा रहे हैं। इसका मुआवजा उन्हें आज तक नहीं मिला, जबकि शिवराज ने बड़े-बड़े दावे किए थे। प्रदेश की स्थिति यह है कि कर्मचारियों का डीए, एरियर, वेतनवृद्धि से लेकर सब कुछ आर्थिक संकट का हवाला देकर रोका जा चुका है। आज किसान राहत की मांग कर रहा है, युवा रोज़गार मांग रहा है, भोपाल में रोज हर वर्ग अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन आर्थिक संकट का हवाला देकर उन्हें अनसुना किया जा रहा है। दूसरी ओर, शिवराज रोज करोड़ों रुपए की झूठी घोषणाएं कर रहे हैं। कमलनाथ ने कहा है कि बीजेपी के लोग ही शिवराज को घोषणावीर बताते हैं। प्रदेश की जनता रोज उनकी झूठी घोषणाओं को देख रही है। एक तरफ वे अपने भाषणों में बार-बार कह रहे हैं कि प्रदेश का खजाना खाली है तो दूसरी तरफ करोड़ों रुपए की झूठी घोषणाए सिर्फ़ जनता को चुनाव में गुमराह करने के लिए कर रहे हैं। जनता समझती है कि ये सब चुनावी घोषणाएं है जो कभी पूरी नहीं होंगी। जनता उनकी 15 वर्ष की आज तक पूरी नहीं हुई हज़ारों झूठी घोषणाओं की हक़ीक़त भी जानती है। कमलनाथ ने अपनी सरकार का बचाव करते हुए यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार ने किसानों का कर्जा माफ किया। इसे खुद बीजेपी सरकार ने विधानसभा में लिखित रूप में स्वीकार किया, लेकिन इसको लेकर आज भी शिवराज- सिंधिया की जोड़ी झूठ परोस रही है। हमने कभी संबल योजना बंद नहीं की, उल्टा हमने शिवराज सरकार से ज्यादा हितग्राहियों को लाभ दिया। हमने कन्या विवाह योजना की बढ़ी हुई राशि हितग्राहियों को प्रदान की। अतिवृष्टि व बाढ़ में किसानों को तत्काल मुआवजा प्रदान किया। मैंने शिवराज की तरह बाढ़ पर्यटन नहीं किया और खराब फसलों को हाथ में लेकर खेतों में फोटो नहीं खिंचाये। मैंने तो किसानों को वास्तविक मुआवजा व सहायता प्रदान कर राहत प्रदान की लेकिन शिवराज और उनके साथ सिंधिया इन योजनाओं को लेकर झूठ परोस रहे हैं।

कमलनाथ ने शिवराज को नालायक कहा.. शिवराज का जवाब- लायक कौन, जनता तय करेगी

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भोपाल. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के बीच उपचुनाव से पहले तल्ख बयानबाजी शुरू हो गई है। शनिवार को ग्वालियर में कमलनाथ ने शिवराज को नालायक तक कह डाला। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कमलनाथ को आरोपों की कीचड़ ही अच्छी लग रही है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है। कौन लायक है, कौन नालायक, यह तो जनता तय करती है। अब कमलनाथ खुद इस पर विचार करें। 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव के पहले मध्य प्रदेश में सियासी घमासान बढ़ता जा रहा है। इसके पहले शुक्रवार को कमलनाथ ने भोपाल में कहा था- मुझे शर्म आती है, जब मैं दिल्ली जाता हूं और लोग पूछते हैं कि आपके प्रदेश की छवि बिकाऊ वाली बन गई। इस पर शिवराज ने जवाब देते हुए कहा था- ऐसा कहना प्रदेश की 8 करोड़ जनता का अपमान है। कमलनाथ को जनता से माफी मांगनी चाहिए। ग्वालियर दौरे पर थे कमलनाथ कमलनाथ ग्वालियर के दो दिन के दौरे पर पहुंचे थे। आखिरी दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कमलनाथ ने कहा- मैंने अपने कार्यकाल में 26 लाख किसानों के कर्ज माफ किए। अब शिवराज इतने नालायक तो हैं नहीं कि वह समझ न सकें कि ये कैसे किया गया है। हमने दो लाख तक के सभी किसानों के कर्ज माफ करके मदद की। जबकि, शिवराज के 15 साल के कार्यकाल में किसानों को आत्महत्या तक पर मजबूर होना पड़ा। शिवराज का पलटवार कमलनाथ के बयान पर शिवराज ने कहा- जो सभी को एक भाव से देखे, गरीबों का सम्मान करे, किसान के कल्याण की योजना बनाए, वो लायक है या नालायक, यह फैसला जनता को करना है। 15 महीने कमलनाथ की सरकार थी। उन्होंने क्या किया? यह बड़ी लायकी की बात थी कि वल्लभ भवन को दलालों के अड्डा बना दिया। पूरे प्रदेश के विकास को ठप कर दिया? आपको जवाब देना पड़ेगा कि 10 दिन में 2 लाख तक का कर्ज आपने क्यों माफ नहीं किया। कर्ज माफी के झूठे सर्टिफिकेट पकड़ाकर आपने सहकारी बैंकों तक को पूरा पैसा नहीं दिया। क्या यह बैंकों के साथ धोखा नहीं है? आपको जवाब देना पड़ेगा कि किसान सम्मान निधि का पैसा जो प्रधानमंत्री सीधे किसानों को देते हैं आपने उसे क्यों अटकाया? शराब माफिया कौन, रेत माफिया कौन, क्या यह बयान आपको याद नहीं हैं। क्या यह भी भूल गए कमलनाथ कि ग्वालियर-चंबल संभाग से एक मंत्री जो आज नदी बचाने का नाटक कर रहे थे। वो जनता से कह रहे थे कि हमें माफ कर दो, हम रेत का अवैध खनन नहीं रोक पाए। क्या किसानों से झूठ बोलना, बेरोजगारों से छल करना, बेटियों को ठगना लायकी है? कमलनाथ कौन सी लायकी और नालायकी की बात कर रहे हैं? ‘कितने भोले हैं आप कमलनाथ, क्या ये जनता मान लेगी?’ मुझे कोई नालायक कहे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, मैं तो वैसे भी जनता का सेवक हूं। 15 महीनों में 5 मिनट के लिए भी आप ग्वालियर नहीं गए। आज आप कह दो कि मैंने तो किसी और के भरोसे छोड़ दिया था या लायकी है, वह भी तब जब चुनाव में उनका उपयोग करना था। मुख्यमंत्री जब भारत के संविधान की शपथ लेता है तब समान भाव की शपथ लेता है, लेकिन अब आप कह रहे हो कि मैंने तो ग्वालियर छोड़ दिया था। कितने भोले हैं कमलनाथ आप, क्या जनता इस भोलेपन को मान लेगी? ‘चंबल एक्सप्रेसवे को ठंडे बस्ते में क्यों डाला?’ लायक पूर्व मुख्यमंत्री जी बताएं कि जरारोग्य अस्पताल के निर्माण को आपने क्यों रोका? जरारोग्य अस्पताल को बाईपास सर्जरी के पैसे क्यों नहीं दिए गए? आप को बताना पड़ेगा कि ग्वालियर और चंबल से जो हमारी पानी लाने की योजना थी उसे क्यों रोका? चंबल एक्सप्रेस वे के निर्माण को आपने ठंडे बस्ते में क्यों डाला? आपके पास ग्वालियर संभाग और चंबल संभाग के जनप्रतिनिधियों के लिए 1 मिनट का टाइम क्यों नहीं था?

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