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जुलूस में मशालों को रखते समय भड़की आग, 50 से ज्यादा लोग झुलसे, दो चीजों ने किया आग में ‘घी’ का काम

Fire broke out while placing torches in the procession, more than 50 people got burnt, two things worked like ‘ghee’ in the fire  मशाल जुलूस के दौरान आग भड़कने से 50 से ज्यादा लोग झुलस गए। घटना गुरुवार देर रात की है। घायल लोगों को जिला अस्पताल लाया गया। आतंकवाद के खिलाफ मशाल मार्च का आयोजन था। आग के कारण भगदड़ मच गई और 12 लोगों को भर्ती करना पड़ा। खंडवा । शहर में गुरुवार देर रात एक मशाल जुलूस के दौरान आग लगने से 50 से ज़्यादा लोग झुलस गए। यह हादसा घंटाघर चौक पर मशाल जुलूस के समापन के दौरान हुआ। कुछ मशालें उल्टी हो जाने से आग भड़क गई और आसपास खड़े लोग इसकी चपेट में आ गए। इस जुलूस आतंकवाद के खिलाफ किया था। भाजपा नेता इस कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। दरअसल, घंटाघर चौक पर देर रात जुलूस के समापन के वक्त मशालें रखते समय कुछ मशालें उल्टी हो गईं, जिससे आग तेजी से फैल गई। इस आग ने 50 से अधिक लोगों को झुलस दिया। इसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि मशालों में लकड़ी का बुरादा और कपूर का चूरा था, जिससे आग और तेज़ी से फैली। 30 लोग पहुंचे अस्पताल ज़्यादातर लोगों के चेहरे और हाथ झुलसे हैं। घायलों को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया। लगभग 30 लोगों को अस्पताल लाया गया, जिनमें से 12 को भर्ती कर लिया गया जबकि बाकियों को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल पहुंच गए और घायलों का हाल जाना।

कलेक्टर जनसुनवाई में संयुक्त किसान संगठन ने बीमा राशि की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा, सरकार को दी चक्काजाम की चेतावनी

In the collector’s public hearing, the United Farmers Organization submitted a memorandum regarding the demand for insurance amount, warned the government of traffic jams. खंडवा। कलेक्टर जनसुनवाई में संयुक्त किसान संगठन ने बीमा राशि की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा है। किसानों का कहना था कि खरीब सीजन 2024 में फसलों को नुकसान हुआ और उत्पादन भी कम आया है। बीमा कंपनी सेटेलाइट सर्वे के द्वारा फसलों की नुकसानी गणना कर रही है, जबकि सेटेलाइट से नुकसान और उत्पादन की गणना संभव नहीं है। इसलिए सेटेलाइट सर्वे बंद कर पटवारी को भेजकर फसलों का सर्वे कराया जाए। किसानों ने सरकार को चेतावनी भी दी है कि अगर उनकी मांगे पूरी नहीं होने पर फल, सब्जी और दूध जैसी चीज रोककर शहर की सड़कों पर ट्रैक्टर उतार कर चक्काजाम करेंगे। संयुक्त किसान संघ ने कहा कि खरीब सीजन 2024 में लगातार बरसात के कारण सोयाबीन, कपास, मक्का और प्याज फसल को नुक्सान हुआ है। लगभग 60% से ज्यादा नुकसान और उत्पादन भी कम आया है। पटवारी हल्का अनुसार क्राप कटिंग प्लांट में आमदनी 20 से 30 पैसे हो रही है। जिसे जिले के किसानों को कृषि की लागत भी नहीं निकल पा रही है। सरकार को चाहिए कि बीमा कंपनी से राशि दिलाई जाए। फसलों के औसतन उत्पादन का सही आंकलन पटवारी हल्का से ही सम्भव है। साल 2023 और 2024 दोनों सीजन की फसलों को बारिश से नुकसान हुआ था, किसानों को उसकी भी क्षतिपूर्ति दी जाए।

जंगलों में अतिक्रमण रोकने पर वन माफिया का कहर, वन अमले पर जानलेवा हमला फिर भी पुलिस ने नहीं किया मामला दर्ज

Forest mafia wreaked havoc on forest encroachment, deadly attack on forest staff but police did not register a case मध्य प्रदेश में जंगलों में अतिक्रमण करने वाले वन माफिया के हौसले अब इतने बुलंद हो चुके हैं कि वे उन्हें रोकने की कोशिश करने वाले वन अमले पर भी हमला करने से बाज नहीं आ रहे हैं। प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र से वन अमले पर इसी तरह से कई प्राण घातक हमले करने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला निमाड़ के ही खंडवा जिले के गुड़ी वन परीक्षेत्र का है, जहां जंगल में किये जा रहे अतिक्रमण की जानकारी मिलते ही वन अमला हरकत में आया और उसे रोकने पहुंचा था। इस दौरान जंगल की जमीन पर जुताई कर रहा एक ट्रैक्टर चालक वन अमले को देख, उसका कल्टीवेटर जंगल में ही छोड़कर फरार हो गया। वहीं जब वन अमला उस कल्टीवेटर को जब्त कर वापस लौट रहा था। इस बीच करीब 30 से 35 महिलाओं के झुंड ने वन अमले पर लाठी, पत्थरों और डंडों से हमला कर दिया और उन्हें वहां से भाग जानें, नहीं तो जान से मार देने की धमकियां देने लगा। यही नहीं, कुछ महिलाओं ने तो वन अमले के साथ झूमा झटकी कर वन कर्मचारियों की वर्दी तक फाड़ दी। हालांकि इसकी नामजद शिकायत पिपलोद थाना में शुक्रवार को करने के बावजूद भी पुलिस ने इसपर कोई एक्शन नहीं लिया। निमाड़ के जंगलों में लगातार अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है और यहां की बेशकीमती वन संपदा का अतिक्रमणकारी जमकर दोहन कर प्रकृति के साथ ही शासन को आर्थिक नुकसान भी पहुंचा रहे हैं। इन वन माफियाओं के खिलाफ पुलिस की पुख्ता कार्रवाई नहीं होने के चलते अब इस तरह की घटनाओं में लगातार इजाफा होते जा रहा है। ऐसा ही मामला गुडी वन परिक्षेत्र में बीते गुरुवार को सामने आया, जब सभी दीपावली पर्व की खुशियां मना रहे थे, तब जिले के गुड़ी रेंज के रेंजर नरेंद्र सिंह और उनकी टीम सूचना मिलने पर अतिक्रमण रोकने बीट भिलाईखेड़ा के कक्ष क्रमांक 749 में नवाड की भूमि पर पहुंची थी। यहां टीम को देख मौके से जुताई कर रहा ट्रैक्टर चालक उसका कल्टीवेटर निकालकर भाग गया। टीम ने मौके से कल्टीवेटर को जब्त कर इस मामले में वन अपराध का प्रकरण दर्ज किया। वन अमले पर इस तरह हुआ हमला बताया गया कि जब्ती कार्रवाई के बाद जब वन अमला दो दलों में वापस लौट रहा था। इस बीच दोपहर करीब 2 बजे सरपंच टांडे की लगभग 30-35 महिलाओं ने पीछे रह गए वन स्टॉफ के परिक्षेत्र सहायक सरमेश्वर के शांतिलाल चौहान, परिक्षेत्र सहायक कोठा के पंजावराव पंडाग्रे, परिक्षेत्र सहायक आराखेडा के कैलाश लोवंशी सहित वन रक्षकों जितेन्द्र पगारे, मनोज तंवर और भरत भूषण मिश्र एवं सुरक्षा श्रमिक गनिया को घेर लिया। यही नहीं, इन महिलाओं के झुंड ने इस वन अमले के साथ मारपीट की एवं धमकी देते हुए कहने लगी कि यहां से भाग जाओ नहीं तो जान से मार देंगे। इस दौरान महिलाओं के हाथों में दराती, पत्थर एवं लाठी डंडे भी थे। महिलाओं ने वन स्टाफ को डंडे से पीटा और वर्दी तक फाड़ दी। इस हमले में जितेन्द्र पगारे वन रक्षक की पीठ पर डंडे से पिटाई के निशान थे, तो वहीं मनोज तंवर के गले मे नाखून के निशान थे, जिसके फोटोग्राफ भी लिए गये। वन अमले ने की थी नामजद शिकायत वहीं इस पूरे मामले में गुड़ी रेंजर नरेंद्र पटेल ने बताया कि अतिक्रमणकारियों को रोकने पहुंचे वन अमले के साथ 31 अक्तूबर को हुई इस घटना की जानकारी एक शिकायत पत्र के जरिए उसी दिन संबंधित पिपलोद थाना पर दी गई थी। इसके बाद अगले दिन वन अमला एक बार फिर से हमला करने वाली महिलाओं की पहचान करने उस जगह पहुंचा था, जहां से कुछ महिलाओं के नाम मालूम चलने पर 1 तारीख को थाने पर उन महिलाओं के नाम बताते हुए इसकी लिखित शिकायत की गई थी। साथ ही पीड़ित स्टाफ के चोट के निशान एवं फटी वर्दी भी थाना प्रभारी पिपलोद को दिखाई गयी थी। जांच के बाद ही हो सकेगा मामला दर्ज इधर पिपलोद थाना प्रभारी एसएन पांडे का कहना है कि वन अमले के साथ महिलाओं के द्वारा मारपीट करने और वर्दी फाड़ने जैसी शिकायत को लेकर उन्हें आवेदन तो मिला है, जोकि अभी जांच में है। इसलिए अब तक इस मामले में किसी तरह की एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। हालांकि जब उनसे पूछा गया कि शासकीय कर्मचारियों के साथ हुई मारपीट को लेकर तीन दिन बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं करने का क्या कारण रहा? तब उन्होंने बताया कि अभी जांच जारी है, जिसके बाद ही मामला दर्ज हो पाएगा। वहीं इसको लेकर खंडवा डीएसपी अनिल चौहान ने बताया कि जानकारी मिली है कि फॉरेस्ट टीम पर हमला करने को लेकर शिकायत की गई है। इस मामले में पिपलोद थाने के द्वारा जांच की जा रही है।

खुदाई में मिला अंग्रेजों से लूटा टंट्या मामा का गड़ा हुआ खजाना

खंडवा! एमपी के खंडवा जिले में अंग्रेजों के जमाने का खजाना मिला है। यहां के खिडगांव में पुराने मकान के मलबे में सोने चांदी के सिक्के मिले। स्कूल के बच्चे यहां खेलने आए तो उनकी नजर सिक्कों पर पड़ी। बच्चों को सिक्के मिलने की खबर गांव में फैली तो यहां लोगों की भीड़ लग गई। गांव वालों ने यहां कई गड्ढे खोद डाले और इनमें से कई लोगों को सोने-चांदी के सिक्के मिले। दस दिन पुरानी इस घटना के बारे में अब एक नई बात सामने आई है। अंग्रेजों के इन सिक्कों को यहां के जननायक क्रांतिकारी नेता टंट्या भील का खजाना बताया जा रहा है। क्षेत्र में उन्हें प्यार से टंट्या मामा भी कहा जाता है। गांव में एक पुराने मकान की जगह नया मकान बनाया जा रहा है। इसके लिए खुदाई की गई और मलबे को पास की नदी के किनारे डाल दिया गया।10 दिसंबर को यहां स्कूल के बच्चे खेलने आए तो उन्हें यहां ब्रिटिश कालीन सिक्के मिले। बच्चों को सोने-चांदी के सिक्के मिलते ही यहां लोगों की भीड़ लग गई और पूरा गांव सिक्कों की खोज में लग गया। बाद में पुलिस ने कुछ लोगों से ये पुराने सिक्के बरामद किए।अंग्रेजों के इन सिक्कों को अब जानकार लोग टंट्या भील का खजाना बता रहे हैं। इतिहासकारों, विशेषज्ञों के मुताबिक टंट्या भील अंग्रेजों से लूट करते और सारा सामान इलाके में बांट देते थे। उस जमाने में टंट्या द्वारा दिए गए सिक्कों को सुरक्षित रखने के लिए लोग उन्हें जमीन में गड़ा देते थे। गड़ा हुआ यही खजाना खिडगांव में लोगों को मिला है। इससे पहले भी इलाके में कई बार लोगों को जमीन में गड़े सोने चांदी के सिक्कों का खजाना मिल चुका है। खंडवा और पास के जिलों में कई जगहों पर ऐसी घटनाएं हुईं। तीन साल पहले खंडवा के ही पुनासा में खुदाई में करीब तीन सौ सिक्के मिले थे। सात साल पहले खरगोन के भगवानपुरा में भी सिक्के प्राप्त हुए थे। यहां के टांडा बरुड गांव में भी सोने चांदी के सिक्के खुदाई में मिले थे। इन सभी जगहों पर मिले सिक्कों को जननायक टंट्या भील का अंग्रेजों से लूटा गया खजाना ही कहा गया था। कौन थे टंट्या भीलटंट्या भील अंग्रेजी हुकूमत का विरोध करते हुए आदिवासियों के हितों के लिए काम करते थे। वे अंग्रेजों का धन लूटते और उसे गरीबों में बांट देते। लूटे गए सोने चांदी के सिक्कों और जेवरात देकर उन्होंने कई कन्याओं की शादी कराई। उन्होंने सन 1878 में बुरहानपुर का सरकारी खजाना लूटा था। उस जमाने में लोग धन संपत्ति को जमीन में गड़ा देते थे। मालवा निमाड़ इलाके में यही गड़ा हुआ खजाना जब तब खुदाई में मिल जाता है।1889 में जब टंट्या भील को गिरफ़्तार किया गया तब कई विदेशी अखबारों में भी इसका जिक्र किया गया। अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार न्यूयार्क टाइम्स में टंट्या भील को भारत के राबिन हुड की उपाधि दी गई थी।

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