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राहुल के आरोपों पर रिजिजू ने ली चुटकी, बोले— हम थक गए, उनकी चुप्पी नहीं टूटी

नई दिल्ली लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा बोलने की अनुमति न मिलने को लेकर लिखे गए पत्र के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। इस मामले पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि संसद नियमों से चलती है, किसी की मनमर्जी से नहीं।   संसद के मौजूदा बजट सत्र के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि सदन में महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलते समय उन्हें रोका जा रहा है या पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा है। राहुल गांधी का तर्क है कि विपक्ष के नेता के नाते उन्हें अपनी बात रखने का लोकतांत्रिक अधिकार है, जिसे दबाया जा रहा है। किरेन रिजिजू का पलटवार राहुल गांधी के आरोपों पर जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार ने उनके पत्र का उत्तर दे दिया है। रिजिजू ने राहुल गांधी के रवैये पर सवाल उठाते हुए करारा तंज कसा। संसद के बाहर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा- ‘हम लोग भी रुक-रुक के थक गए हैं। वो बोलते ही नहीं हैं। वे नियम से बाहर बोलते हैं। हम लोगों ने दो दिन इंतजार किया। बाकी लोगों को भी तो बोलने का मौका मिलना चाहिए न। वे (राहुल गांधी) अपनी मर्जी से थोड़ी न बोलेंगे…ये भारत की संसद है। यहां नियम से बोलना पड़ता है।’ केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा- कांग्रेस पार्टी ‘थेथरोलॉजी’ का जमात हो गया है। राहुल गांधी और उनके लोग झूठ और गलत जानकारी फैलाते हैं। वे लोकतंत्र को शर्मसार करते हैं। वे संसद को कांग्रेस पार्टी का ऑफिस समझते हैं। वे संसद के खिलाफ बोलते हैं और कभी भी सकारात्मक नहीं सोचते। राहुल गांधी के नेतृत्व में, वे एक साज़िश के तहत देश के खिलाफ काम करते हैं… राहुल गांधी झूठ बोलते हैं।   प्रियंका का रिएक्शन, सांसदों का प्रदर्शन इससे पहले जब कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा से पूछा गया कि क्या विपक्ष आज संसद में PM को बोलने देगा तो उन्होंने कहा- देखते हैं क्या होता है।’ इस बीच कांग्रेस सांसदों ने ‘PM समझौता कर चुके हैं’ वाला पोस्टर लेकर संसद की सीढ़ियों पर विरोध प्रदर्शन किया। कल, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर मीडिया से बात करते हुए यही आरोप लगाया था। लोकसभा सांसद गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, बी. मणिक्कम टैगोर, डॉ. प्रशांत यादवराव पाडोले, चमाला किरण कुमार रेड्डी और एस. वेंकटेशन को कल सदन में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा चीन का मुद्दा उठाने के दौरान सदन के नियमों का उल्लंघन करने के लिए संसद के बाकी सत्र के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। सस्पेंड किए गए लोकसभा सांसद गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, बी. मणिक्कम टैगोर, डॉ. प्रशांत यादवराव पाडोले, चमाला किरण कुमार रेड्डी और एस. वेंकटेशन ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। राहुल गांधी का बड़ा आरोप इससे पहले राहुल गांधी ने अपने पत्र में सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सोमवार को जिस तथ्य को प्रमाणित करने के बहाने उन्हें बोलने से रोका गया है उसकी प्रमाणिकता के संदर्भ में उन्होंने सदन के पटल पर दस्तावेज पेश कर दिया है। उन्होंने लिखा- आपने जिस दस्तावेज को प्रमाणित करने का निर्देश दिया था आज मैंने अपनी बातचीत को पुनः शुरू करते हुए उस को प्रमाणित कर दिया। सदन की लंबी परंपरा में पूर्ववर्ती अध्यक्षों के ऐसे मामलों में समय समय पर दिए गए निर्णय भी शामिल हैं। सदन में किसी दस्तावेज का उल्लेख करने वाला सदस्य प्रस्तुत तथ्यों को प्रमाणित करने के लिए बाध्य होता है और इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद अध्यक्ष उस सदस्य को दस्तावेज का उद्धरण देने या उसका उल्लेख करने की अनुमति देते हैं। इसके बाद उस दस्तावेज पर प्रतिक्रिया देने का काम सरकार का हो जाता है और अध्यक्ष की भूमिका समाप्त हो जाती है। राहुल गांधी ने आगे लिखा- आज मुझे लोकसभा में बोलने से रोका जाना न केवल इस परंपरा का उल्लंघन है, बल्कि यह एक गंभीर चिंता भी पैदा करता है कि विपक्ष के नेता के रूप में राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मामलों पर मुझे जानबूझकर बोलने से रोका जा रहा है। यह दोहराना उचित होगा कि राष्ट्रीय सुरक्षा राष्ट्रपति के अभिभाषण का एक प्रमुख हिस्सा थी, जिस पर संसद में चर्चा आवश्यक है।  

कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने इस मामले को लेकर संसद में अपनी बात रखी, कहा-कांग्रेस पार्टी को माफी मांगनी चाहिए

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के सांसद प्रताप सारंगी और मुकेश राजपूत गुरुवार को संसद भवन की सीढ़ियों से गिर कर चोटिल हो गए। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर धक्का देने का आरोप लगाया। दोनों को आरएमएल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने इस मामले को लेकर संसद में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी माफी मांगनी चाहिए। राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, “इस तरह से कोई हाथ नहीं उठा सकता। माननीय अध्यक्ष जी, जिस तरह से राहुल गांधी ने दो सांसदों पर हमला किया, उससे हमारे सदस्यों में बहुत आक्रोश है। यदि हम भी वैसा ही व्यवहार करें और अपने हाथ भी वैसे ही उठाएं, तो स्थिति क्या होगी? हमारे पास संख्याबल है और हम डरपोक नहीं है। अगर हमारे लोग भी राहुल गांधी जैसे हाथ उठाने लगेंगे तो लोकतंत्र कैसे चलेगा। कांग्रेस पार्टी को सिर्फ संसद से नहीं पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए।” धक्का कांड को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह संसदीय इतिहास का काला दिन है। मर्यादा तार-तार हो गई है। लोकतंत्र कलंकित हुआ है। राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी की गुंडागर्दी जैसा कोई दूसरा उदाहरण इससे बड़ा नहीं हो सकता। भारत के संसदीय इतिहास में ऐसा आचरण कभी नहीं देखा गया।अगर वे हरियाणा और महाराष्ट्र हार गए तो वे अपनी हताशा संसद में क्यों व्यक्त कर रहे हैं? लोकतंत्र में आचरण को समझने के लिए राहुल गांधी और कांग्रेस के लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए एक कार्यशाला बुलाई जानी चाहिए। मैं इस घटना से दुखी हूं। शिवराज सिंह ने आगे कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के भाषण से कांग्रेस बेनकाब हो गई है। वे इससे इतने निराश हैं कि अब गुंडागर्दी पर उतर आए हैं। हम इस गुंडागर्दी की निंदा करते हैं। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रल्हाद जोशी ने आरएमएल अस्पताल में भाजपा सांसद प्रताप चंद्र सारंगी और मुकेश राजपूत से मुलाकात की। दोनों सांसदों को यहां भर्ती कराया गया है।

संसद परिसर विवाद मामले में किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी और राहुल गांधी के व्यवहार को लेकर सवाल उठाए

नई दिल्ली संसद परिसर में हाल ही में हुए विवाद ने राजनीति को गरमा दिया है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनके दो सांसदों, प्रताप चंद्र सारंगी और मुकेश राजपूत, को धक्का दिया। इस घटना के बाद भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी को निशाने पर लिया, जबकि कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से नकारा। इस बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी और राहुल गांधी के व्यवहार को लेकर सवाल उठाए। क्या हुआ था घटनाक्रम? बीजेपी सांसदों का कहना है कि राहुल गांधी ने उनके दो सांसदों को शारीरिक रूप से धक्का दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रताप सारंगी और मुकेश राजपूत को धक्का देने के बाद भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी की आलोचना की और कहा कि अगर भाजपा सांसद भी इस तरह की शारीरिक ताकत का इस्तेमाल करते, तो स्थिति और बिगड़ सकती थी। भाजपा नेताओं का आरोप था कि राहुल गांधी ने संसद में एक अस्वीकार्य व्यवहार का प्रदर्शन किया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का बयान इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, “संसद कोई कुश्ती का अखाड़ा नहीं है, जहां शारीरिक ताकत दिखाई जाए। राहुल गांधी ने दो सांसदों को धक्का दिया, क्या आपने (राहुल गांधी) कराटे और कंफू सीखा है ताकि आप दूसरे सांसदों को मार सकें?” उन्होंने कहा कि यह संसद की मर्यादा के खिलाफ है, और सवाल उठाया कि राहुल गांधी को कौन से कानून ने यह अधिकार दिया कि वे किसी सांसद को धक्का देकर चोट पहुंचाएं। रिजिजू ने यह भी कहा कि अगर सभी सांसद अपनी ताकत दिखाकर संसद में मारपीट करने लगेंगे, तो संसद की कार्यवाही कैसे चलेगी? उन्होंने राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि वे लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं और उन्हें अपने आचरण के प्रति जिम्मेदार रहना चाहिए। कांग्रेस और इंडिया गठबंधन का विरोध प्रदर्शन रिजिजू ने यह भी बताया कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के सदस्य संसद में लगातार प्रदर्शन करते हैं, जबकि एनडीए के सांसदों का यह विरोध प्रदर्शन एक विशेष कारण से था। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन इसलिए हुआ क्योंकि कांग्रेस पार्टी ने बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का अपमान किया है। केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने झूठ फैलाया और गृह मंत्री अमित शाह के वीडियो को तोड़-मरोड़कर दिखाया, जिससे गलत संदेश गया। बीजेपी सांसदों का संयम केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि भाजपा सांसदों ने पूरी घटना के दौरान संयम दिखाया है। उन्होंने कहा, “हमने कभी शारीरिक हिंसा का सहारा नहीं लिया। हम हमेशा अपनी बात को शांति से रखते हैं।” रिजिजू ने यह भी कहा कि भाजपा-एनडीए के सांसद धक्का-मुक्की या किसी प्रकार की हिंसा में शामिल नहीं होते हैं, बल्कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपने विचार व्यक्त करते हैं। कांग्रेस का जवाब कांग्रेस ने भाजपा द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह से नकारा और इसे भाजपा की राजनीति का हिस्सा बताया। कांग्रेस ने कहा कि भाजपा हमेशा ऐसे मुद्दों को उठाकर असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश करती है। कांग्रेस का कहना था कि राहुल गांधी ने कभी किसी सांसद को जानबूझकर धक्का नहीं दिया और यह आरोप पूरी तरह से झूठे हैं।

किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर तमाशा करने का आरोप लगाया, कहा- ये लोग सदन की कार्यवाही नहीं चलने दे रहे

नई दिल्ली संसद में अडानी, जॉर्ज सोरोस से सोनिय गांधी के लिंक जैसे मुद्दों पर जोरदार हंगामा जारी है। राहुल गांधी ने तो सोमवार को नरेंद्र मोदी और गौतम अडानी के मुखौटा लाए दो सांसदों का मॉक इंटरव्यू भी लिया था। लेकिन अंदर लोकसभा और राज्यसभा में हंगामा जारी रहा और दोनों सदनों को कई बार स्थगित करना पड़ा। इस बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर तमाशा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ये लोग सदन की कार्यवाही नहीं चलने दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आखिर कांग्रेस टीशर्ट पहनकर तमाशा क्यों करती है। इस बीच मंगलवार को एक बार संसद की कार्य़वाही शुरू होते ही स्थगित हो गई। किरेन रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी को समझाने की जरूरत है। हमारे पास बिल पास कराने के लिए जरूरी संख्या है। कांग्रेस को सदन की गरिमा का ख्याल रखना चाहिए और चर्चा में हिस्सा लेना चाहिए। वहीं अडानी के मसले पर कांग्रेस के प्रदर्शन पर भी मंत्री ने सवाल उठाया। किरेन रिजिजू ने कहा कि अमेरिकी अदालत के मामले को लेकर यहां तमाशा करने से क्या फायदा होगा। राज्यसभा में तो सभी दलों के सांसद चाहते हैं कि सदन चले। हमसे सपा, कांग्रेस, टीएमसी समेत कई दलों के सांसद मिले हैं और बोले कि सदन चलना चाहिए। इस पर मैंने कहा कि राहुल गांधी को समझाओ। उन्हें आम लोगों से तो कोई लेना-देना नहीं है। उनका अपना स्टाइल है और तमाशा करते रहते हैं। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि मैं एक बात साफ कर दूं कि जनता के हित के लिए जो भी बिल लाने होंगे, हम लेकर आएंगे। लेकिन हम चाहते हैं कि बिलों पर चर्चा हो। इसलिए एकतरफा पास नहीं करना चाहते। चर्चा होने से संसद की गरिमा बढ़ेगी। इस बीच कांग्रेस की नई सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि हम तो चर्चा चाहते हैं। सरकार ही सदन में परेशानी खड़ी कर रही है और संसद नहीं चलने दे रही। बता दें कि राज्यसभा में भी सोमवार को हंगामा हुआ और खरगे ने तो सीधे स्पीकर जगदीप धनखड़ पर ही सवाल उठा दिया और कहा कि आप तय करके आए हैं कि विपक्ष को बोलने ही नहीं दिया जाएगा। ऐसा करके आप लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं। आपने मंत्री को बोलने दिया, पर हमें मौका नहीं मिला।

किरेन रिजिजू ने एक्स पर पोस्ट कर संसद के शीतकालीन सत्र की तारीखों की आधिकारिक तौर पर जानकारी दी

नई दिल्ली संसद का शीतकालीन सत्र इस बार 25 नवंबर से शुरू होने जा रहा है। इस सत्र के 20 दिसंबर तक चलने की संभावना है। संविधान दिवस की 75वीं वर्षगांठ पर 26 नवंबर, 2024 को संविधान सदन (संसद के पुराने भवन) के सेंट्रल हॉल में एक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाएगा। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को एक्स पर पोस्ट कर, संसद के शीतकालीन सत्र की तारीखों की आधिकारिक तौर पर जानकारी दी। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर बताया, “भारत सरकार की सिफारिश पर, माननीय राष्ट्रपति ने 25 नवंबर से 20 दिसंबर, 2024 तक शीतकालीन सत्र, 2024 के लिए संसद के दोनों सदनों को बुलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है (संसदीय कार्य के एजेंडे और आवश्यकता के अनुसार)।” किरेन रिजिजू ने संविधान दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की जानकारी देते हुए आगे बताया, “26 नवंबर, 2024 (संविधान दिवस) को संविधान को अपनाने की 75वीं वर्षगांठ पर संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में कार्यक्रम मनाया जाएगा।” बताया जा रहा है कि संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान मोदी सरकार अपने दो महत्वपूर्ण एजेंडे ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ और ‘वक्फ (संशोधन) विधेयक- 2024’ को संसद से पारित करवाने का प्रयास कर सकती है। इन दोनों ही विधेयकों पर कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल लगातार ऐतराज जाहिर कर रहे हैं। ऐसे में संसद के शीतकालीन सत्र का भी हंगामेदार रहना तय माना जा रहा है। संसद सत्र पर महाराष्ट्र और झारखंड के विधानसभा चुनाव के नतीजों का भी असर पड़ना तय माना जा रहा है। दोनों राज्यों में नतीजों की घोषणा 23 नवंबर को होगी और संसद का शीतकालीन सत्र 25 नवंबर से शुरू होने जा रहा है। ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि अगर भाजपा इन दोनों राज्यों में सरकार बनाने में कामयाब हो जाती है तो संसद में विपक्षी दलों के तीखे विरोध के बावजूद वह अपने एजेंडे को लागू करने के लिए आक्रामक अंदाज में आगे बढ़ेगी।

किरेन रिजिजू ने कहा- कांग्रेस संविधान की दुश्मन है, हम उन्हें सबक सिखाएंगे

पुणे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार को कांग्रेस को संविधान का दुश्मन बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भाजपा कांग्रेस को सबक सिखाएगी क्योंकि “इन्होंने संविधान के सिद्धांतों को अपने पैरों तले कुचला है”। केंद्रीय मंत्री ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “आज की तारीख में कांग्रेस और इसके लोग संविधान को अपने हाथों में पकड़कर ढोंग कर रहे हैं कि वे संविधान के रक्षक हैं। लेकिन इन लोगों से बड़ा संविधान का दुश्मन कोई और नहीं है। वे हमेशा से ही संविधान के सिद्धांतों को कुचलते आए हैं। इन लोगों ने हमेशा से ही अपनी कार्यशैली से यह साबित कर दिखाया है कि इन्हें जनता के हितों से कोई लेना-देना नहीं है।” उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने हमेशा देश के लोकतंत्र की हत्या की है। मैं तो इस बात को खुले तौर पर कह सकता हूं, क्योंकि मैं तो कानून मंत्री भी रह चुका हूं। यह सब कुछ हमारी आंखों के सामने हुआ है। कांग्रेस ने इमरजेंसी लागू किया, हम लोगों ने देखा है यह सब। तो लोकतंत्र की हत्या किसने की है, यह तो सब जानते हैं। नेहरू जी ने क्या नहीं किया। आज की तारीख में ये लोग किस मुंह से संविधान और बाबा साहेब अंबेडकर का नाम ले रहे हैं।” किरेन रिजिजू ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय से होने के बाद भी उन्हें कानून मंत्री बनाया गया। इसके लिए वह खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं। उन्हें इस बात की खुशी है कि “जिस कुर्सी पर बाबा साहेब अंबेडकर बैठे थे, उसी कुर्सी पर मुझे भी बैठने का मौका मिला”। उन्होंने आगे कहा, “मेरा एक ही उद्देश्य है कि जो गलत अवधारणा स्थापित की जा रही है, उसे खत्म किया जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सबका साथ सबका विकास के सिद्धांत के आधार पर काम कर रहे हैं। हम भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में प्रतिबद्ध हैं। इसके अलावा, हमने महाराष्ट्र के प्रत्येक जिले में संविधान भवन बनाने का फैसला किया है। इस दिशा में हम महाराष्ट्र के सीएम से बात करके आगे की रूपरेखा निर्धारित करने में लगे हैं। इस रूपरेखा को जमीन पर उतारने के लिए सरकार की तरफ से आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाएगी।”

किरेन रिजिजू ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा- राहुल गांधी जैसे इंसान का नेता प्रतिपक्ष होना देश के लिए एक ‘श्राप’

नागपुर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने शुक्रवार को कहा कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बनना देश के लिए ‘श्राप’ है। उन्होंने नागपुर में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “राहुल गांधी जैसे इंसान का नेता प्रतिपक्ष होना देश के लिए एक ‘श्राप’ है। जिस व्यक्ति ने न तो संविधान को पढ़ा है, और न ही संविधान की मूल भावनाओं को समझता है, जिसके पूरे परिवार ने बाबा साहब अंबेडकर का अपमान किया है, उसके मुंह से संविधान शब्द का निकलना भी अपमान है। मैं यह मानता हूं कि ऐसे इंसान का संविधान की किताब पर हाथ रखना भी उचित नहीं है। यह तो हमारे देश की बदकिस्मती है कि ऐसा आदमी नेता प्रतिपक्ष बन गया है और मुझे उनसे सरोकार रखना पड़ता है।” उन्होंने आगे कहा, “मेरे अपने एससी/एसटी समुदाय के लोग, बौद्ध समाज के लोग राहुल गांधी को रिसीव करने जाते हैं तो उनकी जयकार करते हैं। धिक्कार है। शर्म आनी चाहिए। मैं मानता हूं कि ऐसा नहीं होना चाहिए। मैं देश में पहला बौद्ध कैबिनेट मंत्री हूं। इतना समय इंतजार करना पड़ा। जब मोदी प्रधानमंत्री बने तो हमें सत्ता संचालन में हिस्सेदार बनने का मौका मिला। कांग्रेस को 70 साल तक सत्ता में रहते हुए केंद्रीय कैबिनेट मंत्री बनाने के लिए कोई बौद्ध नजर नहीं आया।” केंद्र सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रिजिजू ने बताया कि वक्फ संशोधन विधेयक को सरकार ने संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजा है। समिति दौरा कर रही है। हमने जब जेपीसी बनाया तो उसमें एक प्रावधान किया था कि अगले शीतकालीन सत्र में इस विधेयक को पेश किया जाएगा। हम सिफारिशों का अध्ययन करेंगे कि क्या परिवर्तन किया जा सकता है। हम विधेयक को पारित कराने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि वक्फ विधेयक को लेकर जेपीसी में चर्चा हो रही है। अगर सरकार इस विधेयक को पहले ही पास कराना चाहती, तो उसके पास लोकसभा और राज्यसभा में पर्याप्त बहुमत है। इस विधेयक को जेपीसी के पास भेजने का मतलब है कि समिति के सभी 31 सदस्य विधेयक को गहराई से समझें और अपनी राय प्रस्तुत करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विधेयक किरेन रिजिजू ने पेश किया था। इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का उचित ढंग से प्रबंधन करना है। सरकार की कोशिश है कि इस विधेयक के जरिये आम मुसलमानों, खासकर महिलाओं और बच्चों के लिए शिक्षा तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार किया जा सके।

किरेन रिजिजू ने कहा- कांग्रेस ने सदन नहीं चलने देने की नई परंपरा शुरू की है और इस परंपरा को चलने नहीं दिया जा सकता

नई दिल्ली केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने ससंद सत्र के दौरान विपक्ष खासकर कांग्रेस के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस ने सदन नहीं चलने देने की नई परंपरा शुरू की है और इस परंपरा को चलने नहीं दिया जा सकता है। आखिर किसी को जबरदस्ती सदन की कार्यवाही को कैसे रोकने दिया जा सकता है। बुधवार को राज्यसभा के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो जाने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि पहले जब नए सांसद चुनकर सदन में आते थे, उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मुलायम सिंह यादव और प्रणब मुखर्जी जैसे वरिष्ठ नेताओं के भाषण और वाद-विवाद से काफी कुछ सीखने को मिलता था। लेकिन, कांग्रेस तो अब संसद शुरू होने से पहले ही नए सांसदों को हंगामा करना सिखा रही है। राहुल गांधी पर सदन में झूठ बोलने और गुमराह करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि नियम-115 के तहत शिकायत की गई है। इसके तहत या तो राहुल गांधी को अपनी बात को सत्यापित करना पड़ेगा या फिर माफी मांगनी होगी और अगर ये ऐसा नहीं करते हैं तो स्पीकर मामले को विशेषाधिकार कमेटी को भेज सकते हैं। इस पर अंतिम फैसला लोकसभा स्पीकर को ही करना है। हम कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार नियम और प्रक्रियाओं से सदन भी चलाएगी और सरकार भी चलाएगी। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए जा रहे जवाब के दौरान विपक्षी दलों के हंगामे और वॉकआउट की आलोचना करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि आज जब प्रधानमंत्री राज्यसभा में जवाब दे रहे थे तो उस समय भी विपक्ष ने कुछ देर बाद हंगामा करना शुरू कर दिया, 15-20 मिनट हंगामा किया और फिर वॉकआउट करके बाहर चले गए। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने सदन के नियमों की अवहेलना की है और संविधान का मजाक उड़ाया है। केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि कल लोकसभा में भी जैसे ही प्रधानमंत्री ने बोलना शुरू किया, कांग्रेस और उसके साथियों ने वहां जबरदस्त हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष ने पीएम के पूरे भाषण के दौरान डिस्टर्ब किया, पूरे भाषण के दौरान हो-हल्ला करते रहे और ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। कांग्रेस को सोचना होगा कि प्रधानमंत्री पद की गरिमा का ध्यान रखना हम सबकी खासतौर से सांसदों की जिम्मेदारी होती है क्योंकि हम सबने शपथ ली है और नियमों से बंधे हुए हैं। उन्होंने कहा कि सदन की शुरुआत के साथ ही एक प्रोटेम स्पीकर और 5 वरिष्ठ सांसदों के चयन में सरकार ने विपक्ष का भी ध्यान रखा। तीन एनडीए से तय किए गए और तीन विपक्षी दलों की तरफ से, लेकिन विपक्ष के लोगों ने सहयोग नहीं किया, जबकि यह व्यवस्था शपथ ग्रहण के लिए की गई थी। सरकार ने बार-बार अपील की। लेकिन, उसके बावजूद विपक्षी दलों का जो रवैया रहा, वे उसका खंडन करते हैं। कोई आदमी देश और संविधान से बड़ा नहीं है। असदुद्दीन ओवैसी द्वारा लोकसभा में संसद सदस्यता की शपथ लेने के बाद लगाए गए ‘जय फिलिस्तीन’ के नारे पर कार्रवाई के लिए पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि लोकसभा स्पीकर ने कमेटी बना दी है, जो नियमों को तय करेगी ताकि भविष्य में फिर से ऐसा न हो। विपक्ष से बात करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस सत्र से पहले भी वो विपक्षी नेताओं से मिले थे और अगला बजट सत्र शुरू होने से पहले भी राहुल गांधी समेत सभी दलों के फ्लोर लीडर्स से मुलाकात करेंगे। राहुल गांधी विशेष परिवार से आए हैं, इस वजह से उन्हें कोई प्रिविलेज नहीं दिया जा सकता। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के जवाब के दौरान नीट और मणिपुर सहित हर मुद्दे पर समग्रता से जवाब दिया। राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्ष के रवैये पर सवाल खड़ा करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी मंशा पीएम मोदी के भाषण को रोकना था, जो ठीक नहीं था इसलिए चेयरमैन ने सही किया। वहीं, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विपक्षी दलों की एकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकसभा में कल कांग्रेस और कुछ अन्य दल वेल में थे, लेकिन सपा और टीएमसी के सांसद वेल में नहीं थे और ऐसे दृश्य आगे भी देखने को मिलेंगे।

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