LATEST NEWS

इस बार उज्जैन सिंहस्थ 2028 कुछ हटकर होगा, सिंहस्थ की जमीन पर हाईटेक और स्थायी कुंभ नगरी बसाने की योजना

उज्जैन  सिंहस्थ क्षेत्र को आधुनिक स्वरूप देने की बड़ी योजना पर काम शुरू हो गया है. सिंहस्थ की भूमि पर स्थायी कुंभ नगरी बसाने की तैयारी है. इसमें हाईटेक अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी. इस प्रोजेक्ट के तहत उज्जैन विकास प्राधिकरण (UDA) लैंड पूलिंग स्कीम के तहत लगभग 2378 हेक्टेयर क्षेत्र में कुंभ नगरी विकसित करेगी. इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य सिंहस्थ 2028 के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है. स्थायी संरचनाओं के साथ आधुनिक सुविधाएं अब तक सिंहस्थ मेले के दौरान अस्थायी निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते थे, जो सिंहस्थ के पूरा होते ही हटा दिए जाते थे. लेकिन इस बार स्थायी सड़कें, बिजली, सीवरेज सिस्टम, जल आपूर्ति और अन्य नागरिक सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा. इस हाईटेक धार्मिक नगरी की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं. देश में पहली बार स्थायी कुंभ नगरी उज्जैन में     इंटरकनेक्टेड सड़कों का नेटवर्क : 60 से 200 फीट चौड़ी सड़कें बनाई जाएंगी, जो मेला क्षेत्र को सुव्यवस्थित तरीके से जोड़ेंगी.     स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट : भीड़ नियंत्रण के लिए सड़कों को इस तरह डिज़ाइन किया जाएगा कि सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ को सुगमता से डायवर्ट किया जा सके.     अत्याधुनिक सीवरेज और जल निकासी प्रणाली : अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम और वॉटर मैनेजमेंट से सफाई बनी रहेगी.     भव्य प्रवेश द्वार : धार्मिक महत्व को दर्शाने वाले शानदार प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे.     हरे-भरे सार्वजनिक स्थल : पार्क, वॉकिंग पाथवे, ओपन जिम, और प्लांटेशन का विशेष ध्यान रखा जाएगा. उज्जैन के लोगो के साथ ही किसानों को लाभ मिलने का दावा सरकार का दावा है कि यह योजना सिर्फ सिंहस्थ के लिए नहीं, बल्कि उज्जैन के किसानों और स्थानीय लोगों के दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखकर बनाई गई है.     लैंड पूलिंग स्कीम के तहत 50% भूमि किसानों के पास ही रहेगी, जिससे उन्हें अपनी जमीन पर बेहतर सुविधाएं मिलेंगी.     25% भूमि सड़क निर्माण में जाएगी, जिसमें बिजली, पानी, और सीवरेज जैसी सुविधाएं भी शामिल होंगी.     5% भूमि हरित क्षेत्र, उद्यान, और सार्वजनिक पार्कों के लिए आरक्षित होगी.     5% भूमि पर अस्पताल, स्कूल, पुलिस स्टेशन, और अन्य नागरिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी. स्थायी कुंभ नगरी पर खर्च होंगे 2 हजार करोड़ रुपए इस परियोजना पर करीब 2000 करोड़ रुपए खर्च करने का लक्ष्य है. पहली बार सिंहस्थ क्षेत्र में स्थायी विकास होगा, जिससे हर 12 साल में बार-बार अस्थायी निर्माण की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे भविष्य में खर्च भी कम होगा और उज्जैन को एक सुनियोजित धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी के रूप में पहचान मिलेगी. उज्जैन विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप सोनी का कहना है “मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दूरदृष्टि यह है कि उज्जैन को धार्मिक पर्यटन के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित किया जाए. इसके तहत सिंहस्थ 2028 के लिए तैयार होने वाली यह कुम्भ नगरी न केवल श्रद्धालुओं के लिए सहूलियत लाएगी, बल्कि स्थानीय किसानों, व्यापारियों और निवासियों के लिए भी वरदान साबित होगी.” 1806 किसानों की जमीन होगी लैंड पूलिंग स्थायी कुंभ सिटी तैयार करने उज्जैन विकास प्राधिकरण 1806 किसानों की करीब 5000 सर्वे वाली जमीन की लैंड पूलिंग करेगा। ऐसा पहली बार होगा जब सिंहस्थ भूमि पर स्थायी सड़कें, बिजली के पोल और अन्य निर्माण कार्य किए जाएंगे। यहां 60 से 200 फीट तक की सड़कें बनेगी। ये सभी इंटर कनेक्ट रहेंगी। इसका फायदा यह होगा कि श्रद्धालु सुगमता से कुंभ में आ-जा सकेंगे। प्रशासन भी भीड़ बढ़ने पर क्राउड को समय रहते शिफ्ट कर सकेगा। दरअसल, अब तक सिंहस्थ भूमि पर स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं थी। जिससे मंगलनाथ क्षेत्र और शिप्रा नदी से मुरलीपुरा तक के आसपास की सिंहस्थ भूमि पर विकास नहीं हो पाया था। लेकिन, उज्जैन विकास प्राधिकरण की इस योजना से यह पूरा क्षेत्र स्थायी तौर पर विकसित हो सकेगा।

भारत की सनातन संस्कृति से अभिभूत विदेशी नागरिकों ने परिवार के साथ महाकुंभ पहुंचकर गंगा स्नान किया

महाकुम्भनगर  बसंत पंचमी पर महाकुम्भ में भारत के हर राज्य और हर जाति लोगों ने एक साथ संगम में अमृत स्नान किया। इसके साथ दुनिया भर के कई देशों के श्रद्धालु भी पहुंचे और जय श्री राम, हर हर गंगे, बम बम भोले के उद्घोष के साथ भारतीय जनमानस के साथ घुल मिल गए। अमृत स्नान पर महाकुम्भ नगर में एकता का महाकुम्भ नजर आया। यहां भारत की सनातन संस्कृति से अभिभूत विदेशी नागरिकों ने परिवार के साथ पहुंचकर गंगा स्नान किया। जय श्री राम, हर हर गंगे का नारा लगाकर लोग उत्साह से लबरेज नजर आए। आस्था का संगम महाकुम्भ के इस ऐतिहासिक मौके पर संगम का तट भारतीय और विदेशी श्रद्धालुओं से पूरी तरह से भर गया। आस्था का ऐसा संगम हुआ कि संगम की रेत तक नजर नहीं आ रही थी। हर जगह सिर्फ मुंड ही मुंड नजर आ रहे थे। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, केरल, आंध्र प्रदेश समेत हर राज्य, हर जाति के लोग और अन्य देशों से आए विदेशी नागरिकों ने संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया। अमेरिकी, इजरायली, फ्रांसीसी समेत कई अन्य देशों के नागरिक गंगा स्नान करते हुए भारत की सनातन संस्कृति से अभिभूत हुए। वे भी बम बम भोले के नारे लगाते हुए उत्साह से झूमते नजर आए। महाकुम्भ से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी भारत की ब्रांडिग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में दिव्य और भव्य महाकुम्भ का अलौकिक आयोजन किया गया है। भारत की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक शक्ति महाकुम्भ के इस बार के अद्भुत आयोजन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भी ज्यादा बढ़ा दी है। महाकुम्भ में दुनिया भर के कई देशों के नागरिकों ने भाग लिया और भारत की संस्कृति को अनुभव किया। विदेशी श्रद्धालु भारत की सनातन संस्कृति से गहरे प्रभावित हुए और परिवार के साथ गंगा में स्नान किया। संगम के तट पर जय श्री राम और हर हर गंगे के उद्घोष से माहौल बना और श्रद्धालु श्रद्धा से गंगा में डुबकी लगाते रहे। हर वर्ग, संप्रदाय के लिए समानता का भाव प्रयागराज का महाकुम्भ विश्व का सबसे बड़ा मानवीय और आध्यात्मिक सम्मेलन है। यूनेस्को ने महाकुम्भ को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत घोषित किया है। सीएम योगी का मानना है कि महाकुम्भ भारत की सांस्कृतिक विविधता में समायी हुई एकता और समता के मूल्यों का सबसे बड़ा प्रतीक है। यहां सब एक समान हैं। करोड़ों लोग बिना किसी भेदभाव के एक साथ त्रिवेणी संगम में डुबकी लगा रहे हैं। श्रद्धालु, समस्त साधु, संन्यासियों का आशीर्वाद ले रहे हैं, मंदिरों में दर्शन कर अन्नक्षेत्र में एक ही पंगत में बैठ कर भण्डारों में खाना खा रहे हैं। महाकुम्भ भारत की सांस्कृतिक विविधता में समायी हुई एकता और समता के मूल्यों का सबसे बड़ा प्रदर्शन स्थल है, जिसे दुनिया भर से आये पर्यटक देखकर आश्चर्यचकित हैं। कैसे अलग-अलग भाषायी, रहन-सहन, रीति-रिवाज को मानने वाले एकता के सूत्र में बंधे संगम में स्नान करने चले आते हैं। साधु-संन्यासियों के अखाड़े हों या तीर्थराज के मंदिर और घाट, बिना रोक टोक श्रद्धालु दर्शन,पूजन करने जा रहे हैं। संगम क्षेत्र में चल रहे अनेक अन्न भण्डार सभी भक्तों, श्रद्धालुओं के लिए दिनरात खुले हैं जहां सभी लोग एक साथ पंगत में बैठ कर भोजन ग्रहण कर रहे हैं। महाकुम्भ मेले में भारत कि विविधता इस तरह समरस हो जाती है कि उनमें किसी तरह का भेद कर पाना संभव नहीं है। अनवरत जारी है सनातन संस्कृति की परंपरा महाकुम्भ में सनातन परंपरा को मनाने वाले शैव, शाक्त, वैष्णव, उदासीन, नाथ, कबीरपंथी, रैदासी से लेकर भारशिव, अघोरी, कपालिक सभी पंथ और संप्रदायों के साधु,संत एक साथ मिलकर अपने-अपने रीति-रिवाजों से पूजन-अर्चन और गंगा स्नान कर रहे हैं। संगम तट पर लाखों की संख्या में कल्पवास करने वाले श्रद्धालु देश के कोने-कोने से आए हैं। अलग-अलग जाति, वर्ग, भाषा को बोलने वाले साथ मिलकर महाकुम्भ की परंपराओं का पालन कर रहे हैं। महाकुम्भ में अमीर, गरीब, व्यापारी, अधिकारी सभी तरह के भेदभाव भुलाकर एक साथ एक भाव में संगम में डुबकी लगा रहे हैं। महाकुम्भ और मां गंगा, नर, नारी, किन्नर, शहरी, ग्रामीण, गुजराती, राजस्थानी, कश्मीरी, मलयाली किसी में भेद नहीं करती। अनादि काल से सनातन संस्कृति की समता,एकता कि ये परंपरा प्रयागराज में संगम तट पर महाकुम्भ में अनवरत चलती आ रही है।

Prayagraj DM ने बसंत पंचमी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के मद्देनजर सरकारी दफ्तरों में छुट्टी की घोषित

 प्रयागराज बसंत पंचमी के अवसर पर स्नान के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के मद्देनजर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रयागराज के जिला मजिस्ट्रेट ने आज (सोमवार) को जिले के सरकारी कार्यालयों में स्थानीय अवकाश घोषित किया है। जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के एक आदेश के अनुसार, इसमें कहा गया है कि लाखों श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों की निरंतर आमद के कारण मुख्य स्नान के दिनों में प्रयागराज जिले की सीमा के भीतर सभी सरकारी कार्यालयों में छुट्टी घोषित करना आवश्यक हो गया है। महाकुंभ के दौरान त्रिवेणी संगम पर पवित्र स्नान के लिए देश-विदेश से लोग उमड़ रहे हैं। आदेश में कहा गया है कि सूचित किया जाता है कि 3 फरवरी को बसंत पंचमी के मुख्य स्नान पर्व के अवसर पर श्रद्धालुओं एवं स्नानार्थियों की भारी भीड़ एवं यातायात प्रतिबंध के कारण शांति और कानून और व्यवस्था बनाये रखने हेतु जनपद प्रयागराज में सरकारी कार्यालयों में स्थानीय अवकाश घोषित किया गया है। इससे पहले, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) राजेश द्विवेदी ने रविवार को आश्वासन दिया कि पवित्र आयोजन की सुचारू कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए त्रिस्तरीय प्रणाली लागू की जा रही है। समाचार एजेंसी से बात करते हुए द्विवेदी ने कहा, “यहां एक त्रिस्तरीय प्रणाली काम कर रही है। सभी वरिष्ठ अधिकारी समन्वय कर रहे हैं ताकि इस तरह की कोई घटना न हो और चीजें सुचारू रूप से चलें।” उन्होंने कहा, ” हम भीड़ की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।” शनिवार तक 330 मिलियन (33 करोड़) से अधिक श्रद्धालुओं ने महाकुंभ में पवित्र स्नान किया है, जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन बनाता है। उसी दिन 200 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय भक्तों ने प्रयागराज में प्रार्थना और भजन कीर्तन में भाग लिया और कार्यक्रम की आध्यात्मिक ऊर्जा और असाधारण संगठन के लिए अपनी सराहना व्यक्त की। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस आयोजन के लिए विस्तृत व्यवस्था की है, जिसकी भक्तों ने प्रशंसा की है। कई लोगों ने तीर्थयात्रियों के लिए एक सहज और सुरक्षित अनुभव सुनिश्चित करने में सरकार के प्रयासों की सराहना की है।  

महाकुंभ में भगदड़ के बाद सरकार अलर्ट… दो सीनियर IAS अफसरों को किया तैनात

प्रयागराज हाल ही में महाकुंभ में मची भगदड़ के बाद यूपी सरकार ने भीड़ नियंत्रण और सुचारू व्यवस्था के लिए दो सीनियर आईएएस अधिकारियों की तैनाती की है. दोनों आईएएस अफसरों ने साल 2019 के अर्धकुंभ में जिम्मेदारी संभाली थी. सरकार ने आगामी बसंत पंचमी (अमृत स्नान) के सफल आयोजन को लेकर इन अधिकारियों को नियुक्त किया है. 3 फरवरी को होने वाले इस प्रमुख स्नान पर भारी भीड़ जुटने की संभावना है. महाकुंभ मेला में भगदड़ के एक दिन बाद गुरुवार को भारी भीड़ पहुंची. करीब दो करोड़ लोगों ने संगम स्नान किया. कुंभ में अब तक करीब 30 करोड़ लोग स्नान कर चुके हैं. वहीं डीजीपी प्रशांत कुमार और मुख्य सचिव मनोज सिंह भी घटनास्थल पर पहुंचे और हादसे की वजहों को जाना. न्यायिक आयोग की टीम भी यहां पहुंची. सरकार ने मौनी अमावस्या पर हादसे से सबक लेते हुए अमृत स्नान के दिन VIP मूवमेंट पर रोक लगा दी है. बाहरी वाहन भी कुंभ मेला क्षेत्र में नहीं आ पाएंगे. एजेंसी के अनुसार, सरकार ने सीनियर IAS अधिकारी अशीष गोयल और भानु चंद्र गोस्वामी को प्रयागराज भेजा है, जो अर्धकुंभ 2019 के दौरान प्रशासनिक टीम का हिस्सा थे. ये दोनों अधिकारी क्राउड मैनेजमेंट और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय के साथ महाकुंभ की जिम्मेदारी संभालेंगे. इनकी नियुक्ति मेले के मुख्य अधिकारी विजय किरण आनंद के साथ की गई है. ये अधिकारी अब महाकुंभ के दौरान सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था देखेंगे. पुलिस महानिरीक्षक केपी सिंह ने कहा कि अमृत स्नान जैसे बड़े आयोजनों का सुचारू संचालन सुनिश्चित होगा. महाकुंभ के दौरान कानून-व्यवस्था की मजबूती के लिए सरकार ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भी तैनाती की है. इसके तहत चार वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और तीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को जिम्मेदारी दी गई है. इनमें देवरिया के वर्तमान एसपी दीपेंद्र नाथ चौधरी, भ्रष्टाचार निरोधक विभाग के लक्ष्मीनिवास मिश्रा, प्रशासनिक अधिकारी राजधारी चौरसिया और कानपुर नगर के डीसीपी श्रवण कुमार सिंह प्रमुख रूप से शामिल हैं. इनके अलावा, तीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षकों को क्राउड मैनेजमेंट और सुरक्षा रणनीति को बेहतर बनाने के लिए विशेष जिम्मेदारी दी गई है. इनमें कानून-व्यवस्था के अतिरिक्त महानिदेशक के स्टाफ अधिकारी विकास चंद्र त्रिपाठी, बस्ती में तैनात ओमप्रकाश सिंह और श्रावस्ती के प्रवीण कुमार यादव प्रमुख हैं. सुरक्षा और व्यवस्था में उठाए गए कदम महाकुंभ में लाखों की संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं, जिसे देखते हुए ये व्यवस्थाएं की जा रही हैं. प्रमुख घाटों और संगम क्षेत्र में भीड़ नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था की जा रही है. भीड़ की आवाजाही को सुव्यवस्थित करने के लिए नए रास्ते बनाए जा रहे हैं. इमरजेंसी रिस्पॉस सिस्टम को मजबूत किया गया है, ताकि किसी भी स्थिति में तत्काल कार्रवाई हो सके. विभिन्न एजेंसियों के बीच सुरक्षा समन्वय मजबूत किया गया है. भीड़ की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है. अत्यधिक भीड़भाड़ से बचने के लिए मजबूत बैरिकेडिंग और एंट्री कंट्रोल के उपाय किए गए हैं. प्रमुख स्थानों पर पुलिस गश्त को बढ़ाया गया है. महाकुंभ 13 जनवरी से 26 फरवरी तक चलेगा. अब तक 30 करोड़ से अधिक श्रद्धालु महाकुंभ में शामिल हो चुके हैं. अनुमान लगाया जा रहा है कि यह संख्या 45 करोड़ तक पहुंच सकती है. बता दें कि बुधवार तड़के संगम नोज क्षेत्र में मची भगदड़ में 30 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी और 60 लोग घायल हुए थे. ये लोग मौनी अमावस्या पर गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदी के संगम में स्नान के लिए पहुंचे थे.  

प्रयागराज महाकुंभ में मंत्री जयशंकर के साथ 116 देशों के राजनयिक संगम में आज लगाएंगे डुबकी

प्रयागराज संपूर्ण दुनिया के आकर्षण का केंद्र बना प्रयागराज महाकुंभ नित नए कीर्तिमान रच रहा है। विश्व के 116 देशों के राजनयिक कल महाकुंभनगर आ रहे हैं। सभी राजनयिक प्रयागराज के बमरौली एयरपोर्ट पर उतरेंगे। वहां से हेलीकाप्टर से अरैल पहुंचेंगे। राजनयिकों के साथ विदेशमंत्री एस.जयशंकर पहुंच रहे हैं।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सभी का प्रयागराज में स्वागत करेंगे। सभी राजनयिक अरैल पहुंचने पर सबसे पहले अपने देश का झंडा फहरायेंगे। इसके बाद संगम में डुबकी लगाने पहुंचेंगे ।यह वैश्विक आयोजन मां गंगा के तट पर होगा। इस समागम में धुर विरोधी रूस और यूक्रेन के राजदूत भी शामिल होंगे। इसके अलावा अमेरिका, बांग्लादेश, जापान, जर्मनी, हंगरी, बेलारूस, कजाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, मलेशिया, जिम्बाम्बे, कम्बोडिया, इटली, नेपाल, थाईलैंड, स्वीडन व स्विटजरलैंड समेत 116 देशों के राजनयिक अमृतकाल के साक्षी बनेंगे।मेला अधिकारी विजय किरन आनंद के अनुसार, इस संबंध में सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। राजनयिक संगम में डुबकी लगाने के बाद अक्षयवट और लेटे हुए हनुमान जी का दर्शन करेंगे। इसके बाद डिजिटल अनुभूति केंद्र में प्रयागराज के महात्म्य के संबंध में जानकारी लेंगे। इस बार 116 देशों के राजनायिक आ रहे हैं। वे आज शनिवार को सुबह अरैल पहुंचेंगे। अरैल स्थित टेंट सिटी में उनका परंपरागत तरीके से स्वागत किया जाएगा। इसी क्रम में राजनायिक झंडे को सलामी देंगे। इसके बाद उन्हें क्रूज से वीआईपी घाट लाया जाएगा। संगम पर उनके स्नान की भी व्यवस्था रहेगी। इसके लिए जेटी तैयार की जा रही है। वे अक्षयवट, हनुमान मंदिर में दर्शन करेंगे और संतों से भी मिलेंंगे। विदेशी डेलीगेट्स कला कुंभ, डिजिटल अनुभूति केंद्र समेत अन्य प्रदर्शनियों का अवलोकन करेंगे। शाम को सांस्कृतिक आयोजन में भी शामिल होंगे। इसके बाद वे वाराणसी के लिए रवाना होंगे। मेले में वाटर एटीएम दे रहा है फ्री आरओ पानी यूपी जल निगम ने मेला क्षेत्र में 200 वाटर एटीएम लगाए हैं। इनके माध्यम से श्रद्धालुओं को फ्री आरओ पानी मिल रहा है। प्रतिदिन 12 से 15 हजार लीटर पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। अधिशासी अभियंता ने बताया कि मेला प्रशासन ने पहले इसके लिए एक रुपये का शुल्क लगाया था, पर अब यह पूरी तरह मुफ्त है। वाटर एटीएम पर ऑपरेटर बैठते हैं, जो श्रद्धालुओं के कहने पर बटन दबाकर शुद्ध जल उपलब्ध करा रहे हैं। इनकी सेंसर के माध्यम से निगरानी भी होती है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति को डेढ़ करोड़ ने किए हस्ताक्षर श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति और मंदिर के भव्य निर्माण को लेकर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास की ओर से मेले में चल रहे अभियान में डेढ़ करोड़ लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं। एक फरवरी को सेक्टर-16 स्थित जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी राजेश्वर माऊली के पंडाल में महासंवाद होगा। इसमें आगे के आंदोलन की आधारशिला रखी जाएगी। अध्यक्ष एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की मूल जन्मस्थली (वर्तमान में शाही ईदगाह मस्जिद) को मुक्त कराने के लिए अभियान की शुरुआत जन्मभूमि के मुख्य द्वार से की गई थी। इसमें अब तक डेढ़ करोड़ लोगों ने हस्ताक्षर कर आंदोलन को समर्थन दिया है। साधु-महात्मा, महामंडलेश्वर, जगद्गुरु और शंकराचार्य महासंवाद में शामिल होंगे।  

कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन ने गंगा में चलने वाली सभी मोटर बोट पर रेट लिस्ट लगाने का फैसला किया

वाराणसी महाकुंभ को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। आस्था की संगम नगरी प्रयागराज में 13 जनवरी को लगने जा रहे महाकुंभ को लेकर एक पूरा महाकुंभ नगर बसा दिया गया है। प्रयागराज में विभिन्न अखाड़ों का छावनी प्रवेश भी शुरू हो चुका है। भव्य और दिव्य पेशवाई ने आमजन को मुग्ध किया है तो वहीं वाराणसी में भी कुंभ का व्यापक असर देखा जा रहा है। महाकुंभ की तैयारियों के लिए केवल प्रयागराज ही नहीं, बल्कि वाराणसी में भी लगातार अधिकारियों की बैठक हो रही है। पूरे कुंभ के दौरान वाराणसी में 10 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने गंगा में चलने वाली सभी मोटर बोट पर रेट लिस्ट लगाने का फैसला किया है जो नाव चलाने वालों के साथ पर्यटकों के लिए भी बहुत फायदे का सौदा साबित होने जा रहा है। किसी भी तीर्थ पर विशेष अवसर के समय जुटने वाली बड़ी भीड़ स्थानीय साधन और संसाधनों की मांग बहुत बढ़ा देती है। ऐसे में श्रद्धालुओं की ओर से भी कई बार यह शिकायत आती है कि उनसे किसी सेवा और चीज के बदले बहुत अधिक चार्ज कर लिया गया। उनको ठगी का शिकार होने का भय रहता है। वहीं, मांग में वृद्धि के कारण स्थानीय दुकानदारों या सेवा प्रदाताओं को शिकायत होती है कि उनको ग्राहकों से उचित रकम नहीं मिल पा रही है। ऐसे में सरकार का ये फैसला सभी पक्षों के लिए सही है। इस बारे में बात करते हुए स्थानीय निवासी गौरव द्विवेदी ने आईएएनएस को बताया, “काशी के घाटों पर अब नाव पर रेट लिस्ट चिपकेगी। यह सरकार की तरफ से बहुत अच्छी पहल है। क्योंकि अभी यह सीजन चल रहा है और बनारस में अगर देखा जाए तो कुछ दिनों से पर्यटन एकाएक बढ़ रहा है। यदि कोई ऐसा पर्यटक बनारस आता है जिसकी कोई जान-पहचान नहीं होती है तो सबसे बड़ी शिकायत यही सामने आती है कि नाव वालों ने ओवरचार्ज कर दिया। ऐसे में यह सरकार की बड़ी अच्छी पहल है।” उन्होंने आगे कहा कि रेट लिस्ट के हिसाब से पेमेंट तय हो जाएगा। पर्यटकों की सुविधाओं को अगर देखा जाए तो ये बहुत अच्छी चीज है। साथ ही इसमें नाव वालों का भी पक्ष देखते हुए दाम को मार्केट रेट से थोड़ा सा ऊपर रखा गया है। क्योंकि सीजन के समय में बहुत पर्यटक आते हैं जिससे डिमांड बढ़ते ही रेट काफी ज्यादा हो जाते हैं। ऐसे में नाव वालों को भी इस रेट लिस्ट से शिकायत नहीं होगी। सरकार ने काफी अच्छे से रेट तय किए हैं और देखा जाए तो टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है।

144 साल बाद पड़ रहा महाकुंभ देश के लिए मंगलकारी, ग्रह नक्षत्रों के विशिष्ट संयोग…..

महाकुम्भनगर  ज्योतिषाचार्यों की गणना के अनुसार ग्रह नक्षत्रों के विशिष्ट संयोग से इस वर्ष प्रयागराज में 144 वर्ष बाद पड़ने वाले महाकुम्भ का आयोजन होने जा रहा है। महाकुम्भ 2025, 13 जनवरी को पौष पूर्णिमा के स्नान से शुरू हो कर 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के स्नान के साथ पूरा होगा। मेले के लिए तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही हैं। महाकुम्भ का इंतजार न केवल साधु-संन्यासी, कल्पवासी, श्रद्धालु बल्कि प्रयागराजवासी भी बेसब्री से कर रहे हैं। महाकुम्भ में संगम, मेला क्षेत्र और प्रयागराज के दुकानदार पूजा सामग्री, पत्रा-पंचाग, धार्मिक पुस्तकें, रुद्राक्ष और तुलसी की मालाओं को नेपाल, बनारस, मथुरा-वृदांवन से मंगा रहे हैं। महाकुम्भ में आने वाले श्रद्धालु लौटते समय अपने साथ संगम क्षेत्र से धार्मिक पुस्तकें, पूजन सामग्री, रोली-चंदन और मालाएं जरूर ले जाते हैं। नेपाल, उत्तराखण्ड, बनारस, मथुरा-वृंदावन से आ रही रुद्राक्ष और तुलसी की मालाएं महाकुम्भ, सनातन आस्था का महापर्व है। इस अवसर पर सनातन धर्म में आस्था रखने वाले देश के कोने-कोने से प्रयागराज आते हैं और त्रिवेणी संगम में स्नान कर पुण्य के भागी बनते हैं। इस वर्ष महाकुम्भ के अवसर पर 40 से 45 करोड़ श्रद्धालुओं के प्रयागराज में आने का अनुमान है। श्रद्धालुओं के प्रयागराज आने, उनके स्नान और रहने की व्यवस्थाओं का प्रबंध सीएम योगी के दिशानिर्देश पर मेला प्राधिकरण पूरे जोश और उत्साह के साथ कर रहा है। साथ ही प्रयागराजवासी और यहां के दुकानदार,व्यापारी भी महाकुम्भ को लेकर उत्साहित हैं। महाकुम्भ उनके लिए पुण्य और सौभाग्य के साथ व्यापार और रोजगार के अवसर भी लेकर आया है। पूरे शहर में होटल, रेस्टोरेंट, खाने-पीने की दुकानों के साथ पूजा सामग्री, धार्मिक पुस्तकों, माला-फूल की दुकानें भी सजने लगी हैं। थोक व्यापारियों का कहना है कि महाकुम्भ में आने वाले श्रद्धालुओं के अनुमान के मुताबिक दूसरे शहरों से समान मंगाया जा रहा है। रुद्राक्ष की मालाएं उत्तराखण्ड और नेपाल से तो तुलसी की मालाएं मथुरा-वृंदावन से, रोली, चंदन और अन्य पूजन सामग्री बनारस और दिल्ली के पहाड़गंज से मंगाई जा रही हैं। गीता प्रेस में छपी धार्मिक पुस्तकों की सबसे ज्यादा मांग प्रयागराज के दारागंज में धार्मिक पुस्तकों के विक्रेता संजीव तिवारी का कहना है कि सबसे ज्यादा गीता प्रेस, गोरखपुर से छपी धार्मिक पुस्तकों की मांग होती है। अधिकांश श्रद्धालु राम चरित मानस, भागवत् गीता, शिव पुराण और भजन व आरती संग्रह की मांग करते हैं। इसके अलावा पूजा-पाठ का काम करने वाले पुजारी वाराणसी से छपे हुए पत्रा और पंचाग भी खरीद कर ले जाते हैं। इसके अलावा मुरादाबाद और बनारस में बनी पीतल और तांबें की घंटियां, दीपक, मूर्तियां भी मंगाई जा रही है। मेले में कल्पवास करने वाले श्रद्धालु और साधु-संन्यासी पूजा-पाठ के लिए हवन सामग्री, आसन, गंगाजली, दोनें-पत्तल, कलश आदि की मांग करते हैं। जिसे भी बड़ी मात्रा में दुकानदार अपनी दुकानों में मंगा कर स्टोर कर रहे हैं। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने नव वर्ष की मंगलकामना देने के साथ ही नए साल 2025 को महाकुंभ का वर्ष बताया है. उनका कहना है कि इस नए साल में मौके पर सदी का एक बहुत बड़ा आयोजन होने जा रहा है. 144 सालों के बाद ग्रहों का ऐसा नक्षत्र बन रहा है जिसमें त्रिवेणी संगम में गंगा स्नान करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी और इसके साथ ही जाने अनजाने में हुए पापों से भी मुक्ति पाने का अद्भुत संयोग है. इस पुण्य काल मे सनातन धर्म को मानने वाले हर व्यक्ति को गंगा यमुना सरस्वती की पावन त्रिवेणी तट पर आकर आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित करना चाहिए. 1 जनवरी से शुरू हुआ छावनी प्रवेश का सिलसिला : महाकुंभ मेला क्षेत्र में 1 जनवरी से छावनी प्रवेश शोभा यात्रा का सिलसिला शुरू होने जा रहा है. जो 12 जनवरी तक जारी रहेगा. एक जनवरी से लेकर 12 जनवरी तक अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से जुड़े हुए सभी 13 अखाड़ों की छावनी प्रवेश यात्राएं निकलकर कुंभ नगरी में प्रवेश करेंगी. इसके साथ ही जिन अखाड़ों की धर्म ध्वजा की स्थापना अभी नहीं हुई है उनकी धर्म ध्वजा की स्थापना भी महाकुम्भ मेला क्षेत्र में बने शिविरों में कर दी जाएगी. महंत रवींद्र पुरी ने यह भी कहाकि कुंम्भ मेला भले ही 13 जनवरी से शुरू होगा लेकिन 1 जनवरी में इस मेले की भव्यता लगातार बढ़ती जाएगी. क्योंकि जनवरी के इन्हीं शुरुआती 12 दिनों में मेला क्षेत्र में देश भर के साधु संतों का आगमन हो जाएगा. क्योंकि 14 जनवरी को होने वाले पहले शाही स्नान पर्व पर सभी साधु संत महामंडलेश्वर अपने अपने अखाड़े के साथ त्रिवेणी तट पर पहुँचकर संगम में आस्था की डुबकी लगाएंगे. प्रयागवासी करें अतिथियों का स्वागत : इसके साथ ही अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि सनातन धर्म की अतिथि देवो भवः की संस्कृति रही है. इसलिए प्रयागराज में आने वाले सभी श्रद्धालुओं का अतिथि के रूप में स्वागत करने का काम प्रयागराज में रहने वालों को करना चाहिए. कुंभ में आने वाले अतिथियों का स्वागत सत्कार एक मुस्कान के साथ करें. साथ ही शहर में रहने वाले लोगों से यथा संभव श्रद्धालुओं की सेवा और मदद करने की भी अपील उन्होंने प्रयागराज के रहने वाले लोगों से की है.

प्रयागराज महाकुंंभ में मौनी अमावस्या पर होगा सबसे बड़ा स्नान, जानें इसका महत्व

प्रयागराज अगले साल 13 जनवरी से प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन होने जा रहा है, जो दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक त्योहार माना जाता है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु और साधु-संत यहां जुटेंगे और आस्था की डुबकी लगाएंगे। महाकुंभ में कुल छह शाही स्नान होंगे, जिनकी शुरुआत 13 जनवरी को पौष पूर्णिमा से होगी। महाकुंभ का सबसे बड़ा स्नान मौनी अमावस्या के दिन होगा, जिसे बेहद खास माना जाता है। मौनी अमावस्या पर शाही स्नान अगले साल 29 जनवरी को होगा। इस दिन का शुभ मुहूर्त सुबह 5:25 बजे से 6:18 बजे तक रहेगा। मौनी अमावस्या का धार्मिक महत्व काफी अधिक है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन तीर्थस्थलों पर स्नान करने से पितरों को मोक्ष मिलता है। साथ ही मौन व्रत रखने और दान-पुण्य करने से विशेष फल प्राप्त होता है। सालभर में 12 अमावस्या होती हैं, लेकिन माघ महीने की अमावस्या को सबसे खास माना गया है, जिसे मौनी अमावस्या कहते हैं। महाकुंभ के साथ मौनी अमावस्या का संयोग धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। हिंदू धर्म में इस दिन दान का भी बड़ा महत्व है। मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर दान करने से व्यक्ति के सभी पापों का प्रायश्चित होता है। पितरों को तर्पण और दान करने से वे प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद प्रदान करते हैं।  

प्रयागराज कुंभ में प्रदेश से भेजेंगे 3.50 लाख थाली-थैले,संघ-विहिप के कार्यकर्त्ता श्रद्धालुओं के थैले से निकालेंगे पॉलीथिन

प्रयागराज/ नीमच प्रयागराज में 13 जनवरी 2025 से 26 फरवरी 2025 तक आयोजित होने वाले महा कुंभ को इस बार ग्रीन महा कुंभ बनाने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुसार महा कुंभ को स्वच्छ महा कुंभ, ग्रीन महा कुंभ बनाने के लिए मेला प्राधिकरण ने मेला क्षेत्र को प्लास्टिक मुक्त रखने के प्रयास शुरू कर दिए हैं वहीं नगर निगम प्रयागराज भी पूरे शहर को प्लास्टिक फ्री रखने को लेकर अभियान चला रहा है, इसमें अब मध्य प्रदेश भी भागीदार बन रहा है। प्रयागराज महा कुंभ को प्लास्टिक मुक्त बनाने के संकल्प के लिए मध्य प्रदेश का नीमच जिला भी सहभागी बन रहा है। जिले में सामाजिक संगठनों ने एक थाली, एक थैला अभियान चलाया। इसके अंतर्गत जिले से 4100 स्टील थाली व 4100 थैला संग्रहित किए। इनकी पूजा-अर्चना कर पैकिंग की गई। अब ट्रांसपोर्ट से प्रयागराज पहुंचाया जा रहा है। अभियान में सभी संगठनों का अमूल्य योगदान रहा है। इन सभी ने दिया अहम् योगदान   नीमच के सीए एसोसिएशन संगठन द्वारा 101, भारत विकास परिषद 251, नीमच सिटी जैन मंदिर समाज 50, जैन स्थानक समाज 50, भारत विकास परिषद विवेकानंद शाखा 89, मुक्तिधाम सर्वसमाज नीमच सिटी (रावण रूंडी), सीताराम जाजू कन्या महाविद्यालय 300, विवेकानंद बाल कल्याण समिति (शिशु मंदिर एसएसवीएम) 200 एवं नगर की व्यवसायी शाखा के स्वयंसेवकों द्वारा 150 थाली और थैले जुटाने में अहम् योगदान दिया है। मालवा प्रांत केंद्र से प्रयागराज पहुंचाया जायेगा 4100 थाली 4100 थैले को राम मंदिर जाजू बिल्डिंग में पुजारी जीवन तिवारी ने विधि-विधान से भगवान की आरती कर इनकी पूजा-अर्चना की। इसके बाद नीमच से मालवा प्रांत के केंद्र इंदौर ट्रांसपोर्ट द्वारा पहुंचाई। मालवा प्रांत केंद्र से सभी को प्रयागराज पहुंचाया जायेगा। कार्यक्रम में कई समाजजन ने सहयोग किया। 40 करोड़ श्रद्धालु सम्मिलित होने का अनुमान कार्यक्रम आयोजकों के अनुसार प्रयागराज में जो महा कुंभ होने जा रहा है इसमें 45 दिनों में अनुमानित 40 करोड़ श्रद्धालु सम्मिलित होने वाले हैं। हम कल्पना करें कि एक तीर्थ यात्री तीन दिन भी वहां रुकता है, तीन दिन में 6 बार भोजन, दो से तीन बार चाय नाश्ता करेगा। ऐसे में 40 करोड़ तीर्थ यात्रियों के भोजन आदि में कितना पॉलिथिन, डिस्पोजल, कागज लग जाएगा। जो कचरा बनकर तीर्थ नगरी प्रयागराज को प्रदूषित कर सकता है। महाकुंभ में 40 हजार टन कचरा उत्सर्जित होने का अनुमान है। शासन-प्रशासन अपने स्तर पर कचरा निस्तारण की व्यवस्था करेगा। इसलिए पर्यावरण को बचाने के लिए ये पहल की जा रही है। अब तक भेजे जा चुके हैं 40 हजार थैले     मध्यभारत प्रांत में शामिल जिले- मुरैना, श्योपुर, ग्वालियर (डबरा), भिंड (लहार), शिवपुरी (पिछोर), गुना (राघौगढ़), अशोकनगर, विदिशा (बासौदा), रायसेन (भोजपुर), रायसेन (बरेली), नर्मदापुरम (पिपरिया), हरदा, बैतूल (मुल्ताई) (जिले के साथ लिखे कस्बे को भी संघ की संरचना में जिला माना गया है।     मध्यभारत प्रांत से करीब 1 लाख 25 हजार थैले और थाली एकत्रित कर प्रयागराज भेजने का लक्ष्य है। अब तक करीब 40 हजार भेजे जा चुके हैं।     महाकौशल प्रांत में शामिल जिले- निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, पन्ना, कटनी, सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, डिंडौरी, अनूपपुर, सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, जबलपुर, नरसिंहपुर।     महाकौशल प्रांत से करीब सवा लाख थैले और थाली भेजने का टारगेट रखा है।     मालवा प्रांत में शामिल जिले- नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, आगर-मालवा, उज्जैन, शाजापुर, देवास, इंदौर, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर। मालवा प्रांत से करीब एक लाख थैले और थाली एकत्रित कर प्रयागराज कुंभ में भेजे जाएंगे। थाली और थैले का आकार     15 इंच लंबाई और 12 इंच चौड़ाई होना चाहिए, थैला कपड़े का ही होना चाहिए। थैले पर प्रायोजक, दानदाता, संस्था का नाम प्रिंट करवा सकते हैं।     थाली स्टील की होनी चाहिए। थाली का साइज लगभग 11 ⅹ 14 इंच चौकोर या गोल जैसी भी उपलब्ध हो, भेज सकते हैं। अब जानिए क्या है हरित कुंभ अभियान हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी ईकाईयों ने 45 दिन तक चलने वाले प्रयागराज महाकुंभ के लिए हरित कुंभ अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य महाकुंभ को पॉलीथिन मुक्त रखना है। इसी के तहत देशभर में संघ से जुड़े संगठन थाली और थैले एकत्रित कर रहे हैं। इन थाली और थैलों को महाकुंभ के दौरान वितरित किया जाएगा। 75 देशों से 40 करोड़ श्रद्धालु आएंगे प्रयागराज महाकुंभ 2025 में 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। 75 देशों से पहुंचने वाले लोगों के लिए यहां टेंट सिटी बनाई जा रही है। जिसमें 2 हजार से अधिक स्विस कॉटेज होंगे। इन कॉटेज में फाइव स्टार जैसी सुविधाएं मिलेंगी। टेंट सिटी 1 जनवरी 2025 से 5 मार्च 2025 तक संचालित होगी। प्रयागराज कुंभ में मकर संक्रांति 14 जनवरी 2025, मौनी अमावस्या 29 जनवरी 2025, बसंत पंचमी 3 फरवरी 2025, माघी पूर्णिमा 12 फरवरी 2025, महाशिवरात्रि 26 फरवरी 2025 को शाही स्नान होंगे। प्रयागराज के बाद 2028 उज्जैन में सिंहस्थ कुम्भ होगा। इससे पहले 2016 में उज्जैन में कुंभ का आयोजन हुआ था। उज्जैन में 2016 में हुए सिंहस्थ कुम्भ में एक महीने के दौरान शहर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 5 करोड़ आंकी गई थी। सिंहस्थ 2016 के प्रतिवेदन की मानें तो सिंहस्थ 2028 में यह आंकड़ा बढ़कर 15 करोड़ होने की संभावना है।

अखाड़ों के लिए राजसी स्नान और छावनी प्रवेश नामों की मुख्यमंत्री जल्द ही औपचारिक घोषणा कर सकते हैं

प्रयागराज अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद द्वारा कुंभ मेले में शाही स्नान का नाम परिवर्तित कर राजसी स्नान और पेशवाई का नाम छावनी प्रवेश करने की औपचारिक घोषणा जल्द किए जाने की संभावना है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी ने बताया, ‘हाल ही में प्रयागराज में निरंजनी अखाड़ा में हुई बैठक में नाम परिवर्तन के संबंध में प्रस्ताव पारित किया गया है और इससे मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया है। मुख्यमंत्री जल्द ही इस संबंध में औपचारिक घोषणा कर सकते हैं।’ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पिछले महीने उज्जैन में महाकाल की सवारी को शाही सवारी के स्थान पर राजसी सवारी कहने की घोषणा की थी जिसके बाद अखाड़ा परिषद ने भी उर्दू शब्दों के स्थान पर हिंदी शब्दों के प्रयोग पर बल दिया। पुरी ने देश में विभिन्न स्थानों पर खाने-पीने की चीजों को अपवित्र किए जाने की घटनाओं को देखते हुए आस्था के सबसे बड़े समागम कुंभ मेले में दूसरे धर्म के लोगों द्वारा खान पान की दुकानें लगाने का विरोध किया है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने कहा, “हाल ही में कई घटनाएं सामने आई हैं जिसमें जूस में पेशाब मिलाने, खाने में थूक लगाने जैसी चीजें देखने में आई हैं। कुंभ मेले में सभी सनातनी हिंदू होंगे। ऐसे में यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा कि कोई उन्हें चीजें अपवित्र करके खिलाए।” उन्होंने कहा, “गैर सनातनियों को मेले में खानपान की दुकानें नहीं लगाने दी जाएंगी। इसके लिए अखाड़ा परिषद दीपावली के बाद बैठक कर प्रस्ताव पारित करेगी जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा जाएगा।” पुरी ने बताया कि इसी तरह, अखाड़ा परिषद की इच्छा है कि कुंभ मेले में तैनात होने वाले कर्मचारी और अधिकारी सनातनी हों जिससे मेले की शुचिता बनी रहे। उन्होंने कहा कि इस संबंध में भी प्रस्ताव पारित किया जाएगा। इस बीच, मेले में ऐसे पुलिसकर्मियों को ड्यूटी पर लगाने का निर्णय किया गया है जो मांस मदिरा का सेवन ना करते हों। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (कुंभ मेला) राजेश द्विवेदी ने कहा कि महाकुंभ एक धार्मिक पर्व है और जब पूरे मेला क्षेत्र में ही मांस मदिरा का सेवन और बिक्री निषिद्ध है, तो पुलिसकर्मियों से भी अपेक्षा है कि वे ऐसा नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों की पृष्ठभूमि जांच कर उनकी तैनाती की जाएगी।  

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login