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कूनो नेशनल पार्क के खुले गेट, माला पहनाकर किया पर्यटकों का स्वागत; चीतों के दीदार को उमड़े लोग

Kuno National Park opens gates, welcomes tourists with garlands; people flock to see leopards श्योपुर। नए पर्यटन सीजन में बुधवार को पर्यटकों के लिए फिर से कूनो नेशनल पार्क के गेट खोल दिए गए। नए सीजन में टिकटोली, अहेरा और पीपलबावड़ी प्रवेश गेटों पर पहले नारियल फोड़ा गया, उसके बाद पर्यटकों को माला पहनाकर और तिलक लगाकर स्वागत भी किया गया। नए पर्यटन सीजन 2025-26 के पहले दिन कूनो के टिकटोली प्रवेश द्वार से 2 गाडिय़ों से आठ पर्यटक पहुंचे। जिनका स्वागत किया गया। इसके बाद इन पर्यटकों ने कूनो में भ्रमण किया और कई वन्यजीवों के साथ ही प्राकृतिक सौंदर्य को निहारा। पार्क के पीपलबावड़ी और अहेरा गेट भी खोले गए हैं। यही वजह है कि तीनों गेटों पर फूलों से सजावट की गई और भारतीय परंपरानुसार नारियल फोडक़र और रंगोली सजाकर नए सीजन का श्रीगणेश किया गया। चीता प्रोजेक्ट ने दी कूनो को नई दिशावर्ष 1981 में वन्यजीव अभयारण्य के रूप में स्थापित कूनो को वर्ष 2018 में नेशनल पार्क का दर्जा मिला। हालांकि 27 सालों तक एशियाई सिंहों की राह निहारते रहे कूनो नेशनल पार्क को अब चीता प्रोजेक्ट ने नई दिशा दी है। यही वजह है कि 1 जुलाई से 30 सितंबर तक के तीन माह के वर्षाकालीन समय में पर्यटकों के लिए बंद रहा कूनो एक नई उम्मीद के साथ नए सीजन में फिर खुल गया है और उम्मीद है कि अब इस सीजन में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। बुधवार, 1 अक्टूबर से कूनो नेशनल पार्क में आने वाले पर्यटक टिकटोली, अहेरा और पीपलवाड़ी गेट् से प्रवेश ले सकेंगे और खुले जंगल में आजादी की दौड़ लगाने वाले चीतों को निहार सकेंगे। बता दें कि कूनो के खुले जंगल में चीतो को पर्यटकों के दीदार के लिए काफी समय पहले आजादी की रफ्तार भरने के लिए छोड़ा गया था। वहीं कूनो के खुले जंगल में कुछ मादा चीता अपने चीता शावकों के साथ घूम रही हैं। मादा चीता भारतीय जमीन पर पैदा हुए भारतीय पीढ़ी के चीता शावकों को शिकार करने के साथ साथ जीवन जीने के गुर सीखा रही हैं तो कुछ चीते कूनों से निकल कर अभी भी वीरपुर, विजयपुर और मुरैना जिले की सीमाओं में घूम रहे हैं। कूनो नेशनल पार्क के तीन चीते मंदसौर के गांधी सागर अभयारण्य मे शिफ्ट किए जाने के बाद अब पार्क मे चीतों और शावकों को मिलाकर 24 चीते मौजूद हैं, जिनमें से 16 चीते कूनो के खुले जंगल में आजाद घूम रहे हैं तो वहीं 8 चीते और शावक कूनो के बाड़े मे बंद हैं। माना जा रहा है कि चीता स्टेयरिंग कमेटी की बैठक के बाद एक बार फिर कमेटी कुछ चीतों को खुले जंगल मे छोड़ने के लिए कूनो पार्क प्रबंधन को हरी झंडी दे सकती है, ताकि पर्यटक जंगल सफारी के दौरान चीतों को आसानी से निहार सकेंगे।

कूनो में बारिश से बढ़ी चीतों की मुश्किलें, पानी भरे गड्ढों-दलदली जमीन में फंसने का मंडरा रहा खतरा

Rain in Kuno has increased the difficulties of cheetahs, there is a danger of them getting trapped in water filled pits and marshy land ग्वालियर। कूनो नेशनल पार्क में लगातार हो रही भारी वर्षा ने एक बार फिर चीतों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि मादा चीता ‘आशा’ और उसके तीन शावक रविवार को पार्क की सीमा पार कर बागचा क्षेत्र की ओर निकल गए। इस समय जंगल में चारों ओर जलभराव और दलदल जैसी स्थिति है, जिससे ट्रैकिंग में भारी बाधा आ रही है। जंगल के बाहर पहुंचना जोखिम भरापार्क की सीमा पार कर चुके चीतों के सामने नहर में डूबने और गड्ढों में फंसने का खतरा बना हुआ है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल चीता ‘पवन’ की मौत पानी से भरे एक गड्ढे में गिरने से हो चुकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए, वन विभाग की टीम विशेष सतर्कता बरत रही है, लेकिन वर्षा और रास्तों के बाधित होने के कारण ट्रैकिंग बेहद मुश्किल हो गई है। गार्ड्स और ट्रैकर्स की सीमाएंहालांकि सभी चीतों के गले में कालर आइडी लगे हुए हैं, फिर भी ट्रैकिंग टीमें बारिश के चलते मौके पर जल्दी नहीं पहुंच पा रहीं। पानी से भरे रास्तों और कीचड़ के कारण न तो गाड़ियों से पहुँचना संभव है और न ही पैदल ट्रैकिंग आसान रह गई है। इसी कारण, ट्रैकर्स और वनरक्षकों ने एक प्रस्ताव प्रबंधन के सामने रखा है कि मानसून खत्म होने तक चीतों को सुरक्षित बाड़ों में रखा जाए। संक्रमण से बचाव के उपायकूनो डीएफओ थिरूकुरल आर ने बताया कि सभी चीतों को संक्रमण से बचाने के लिए एंटी एक्टो परजीवी दवा दी जा चुकी है। साथ ही लगातार निगरानी जारी है। कूनो नेशनल पार्क में इस समय कुल 26 चीते हैं, जिनमें 9 वयस्क (6 मादा, 3 नर) और 17 भारत में जन्मे शावक शामिल हैं। इनमें से 16 चीते अब खुले जंगल में विचरण कर रहे हैं। शावकों के लिए स्थिति ज्यादा संवेदनशीलमादा चीतों के साथ मौजूद शावकों के लिए बारिश के मौसम में खुले जंगल में रहना और भी खतरनाक है। पानी भरे गड्ढों और दलदली जमीन में उनके फिसलने या फंसने का खतरा लगातार बना हुआ है। ट्रैकिंग रूट्स में पानी भरने से निगरानी टीमों की गतिविधि सीमित हो गई है, जो किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता में बाधा बन सकती है।

कूनों नेशनल पार्क में आए नन्हें मेहमान, चीता निर्वा ने दिया 5 शावकों को जन्म, सीएम डॉ मोहन यादव ने दी बधाई

  ग्वालियर मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से एक बार फिर खुशखबरी आई है। मादा चीता निर्वा ने पांच नन्हें शावकों को जन्म दिया है। जिसके बाद कूनो में अब चीतों की संख्या बढ़कर 29 हो गई है। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से एक बार फिर खुशखबरी आई है। मादा चीता निर्वा ने पांच नन्हें शावकों को जन्म दिया है। जिसके बाद कूनो में अब चीतों की संख्या बढ़कर 29 हो गई है। सीएम डॉ मोहन यादव ने इसकी जानकारी दी है। मुख्यमंत्री ने नन्हें शावकों की तस्वीर भी शेयर की है। सीएम ने शेयर की खुशखबरी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक्स पर इस खुशखबरी को साझा किया। उन्होंने कूनो नेशनल पार्क की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह भारत के जैव विविधता संरक्षण प्रयासों की सफलता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रकृति संरक्षण की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।मध्य प्रदेश के मुखिया CM डॉक्टर मोहन यादव ने भी देशवासियों के साथ यह खुशी साझा की. उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल ‘X’ पर वीडियो पोस्ट करते हुए प्रदेश की जनता को बधाई दी और साथ ही लिखा कि “कूनो में नए मेहमानों का स्वागत है…अत्यंत प्रसन्नता है कि कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों का कुनबा निरंतर बढ़ रहा है. हाल ही में 5 वर्षीय नीरवा ने 5 शावकों को जन्म दिया है. इन नन्हे शावकों का आगमन चीता प्रोजेक्ट की सफलता और भारत की समृद्ध जैव-विविधता का प्रतीक है. प्रधानमंत्री नरेंद्री मोदी के मार्गदर्शन में वन्यजीव संरक्षण के लिए बनाया गया अनुकूल वातावरण आज समृद्ध हो रहा है. कूनो नेशनल पार्क की पूरी टीम, वन्यजीव विशेषज्ञों और संरक्षण में जुटे हर कर्मठ साथी को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई.” निर्वा दूसरी बार मां बनी चीता निर्वा ने इससे पहले 25 नवंबर 2024 को दो शावकों को जन्म दिया था, उनके शव क्षत विक्षत हालत में मिले थे। निर्वा अब दूसरी बार मां बनी है। कूनो में इससे पहले ज्वाला 5, आशा 3, गामिनी 4 और वीरा चीता दो 2 शावकों को जन्म दे चुकी है। दो चीते गांधी सागर अभयारण्य भेजे गए इसमें से एक शावक मुखी दो साल की तो कई शावक सवा साल तक के हो चुके हैं। कूनो में चीतों की संख्या 12 थी, जिनमें से दो चीते प्रभाष और पावक गांधी सागर अभयारण्य भेज दिए गए हैं। सात साल की हो चुकी निर्वा चीता दक्षिण अफ्रीका के मेपस रिजर्व से लाई गई थी। भारत में सबसे ज्यादा शावकों की मां बनी नीरवा बता दें कि, भारत की धरती पर जन्में जीवित शावकों की संख्या अब 19 हो चुकी है. हालांकि मादा चीता नीरवा इससे पहले 22 नवंबर 2024 को भी मां बन चुकी है उसने तब 4 शावकों को जन्म दिया था. लेकिन 5 दिन बाद उसके 2 शावकों के शव मिले थे. अब 5 और चीता शावक के जन्म के साथ कूनो में नीरवा के 7 चीता शावक जीवित हैं. 17 सितंबर, 2022 को भारत आए थे चीते 17 सितंबर, 2022 को अफ्रीका के नामीबिया से 8 चीते भारत आए थे. उन्हें मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा गया था. फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते कुनो लाए गए. इन पांच शावकों के जन्म से पहले, पार्क में 24 चीते थे, जिनमें 14 भारत में जन्मे शावक थे. इनमें से दो चीतो को अब गांधी सागर अभ्यारण्य में स्थानांतरित कर दिया गया है. कूनो नेशनल पार्क में चीता परियोजना के तहत अफ्रीकी देशों से लाए गए चीतों के प्राकृतिक वातावरण में सफल प्रजनन को वन विभाग और विशेषज्ञों की कड़ी मेहनत का परिणाम बताया जा रहा है. हाल ही में कूनो से 2 चीते मंदसौर के गांधीसागर अभ्यारण्य में शिफ्ट किए गए थे, जिससे पार्क में चीतों की संख्या 24 रह गई थी. लेकिन अब नीरवा के पांच शावकों के आगमन से यह आंकड़ा फिर से 29 पर पहुंच गया है. भारत में कुल चीतों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है.

चीतों को मिल गया नया घर, कूनो जंगल के बाद गांधी सागर में शिफ्ट होंगे , गांधी सागर अभ्यारण में सारी तैयारी पूरी

भोपाल चीतों का दूसरा घर मंदसौर जिले का गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य(Gandhi Sagar Sanctuary) होगा। यहां दक्षिण अफ्रीका से चीते लाने में देरी के बीच अब कूनो नेशनल पार्क(Kuno National Park) से ही आज 20 अप्रेल को 2 चीते भेजेंगे। केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव व सीएम डॉ. मोहन यादव ने सीएम निवास पर हुई चीता प्रोजेक्ट की समीक्षा बैठक में इसे हरी झंडी दी। 18 फरवरी 2023 को जो 12 चीते दक्षिण अफ्रीका से लाए गए, उनमें से पावक और प्रभाष को गांधी सागर में छोड़ा जाएगा। 5 साल के पावक और साढ़े पांच साल के प्रभाष को खेमला वन क्षेत्र में बने 15.04 वर्ग किमी बाडे़ में छोड़ा जाएगा। दोनों भाई हैं, अभी बाडे़ में हैं। देश के अंदर चीतों की इस पहली शिफ्टिंग की शुरुआत शनिवार रात से होगी, रविवार अपराह्न तीन बजे खत्म होगी। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और सीएम डॉ. मोहन यादव अपराह्न 3 बजे दोनों को गांधीसागर में छोड़ेंगे। सीएम बोले- कूनो में रोड टू एयर कनेक्टिविटी सीएम डॉ. यादव (CM Mohan Yadav) ने कहा, ग्वालियर से कूनो तक पक्की सड़क बनेगी। टेंट सिटी बनेगी। युवाओं-महिलाओं को वन्य पर्यटन से जोड़ेंगे, चीता मित्र, महिला स्व-सहायता समूह को टूरिस्ट गाइड बनाएंगे। दीदी कैफे से रोजगार मिलेगा। 10 किंग कोबरा लाने पर विचार हो रहा है। सीएम ने चंबल से घड़ियाल व कछुओं को 4 बड़ी नदियों में छोड़ने के निर्देश दिए। गुजरात भी शिफ्ट किए जाएंगे चीते केंद्रीय मंत्री यादव ने कहा कि आज सुबह NTCA की बैठक हुई। बैठक में, NTCA ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक के दौरान लिए गए निर्णय पर एक व्यापक योजना पर चर्चा करने का फैसला किया। भविष्य में गुजरात के बन्नी घास के मैदानों और मध्य प्रदेश के गांधीसागर अभयारण्य में चीतों को पेश करने की कार्य योजना पर भी विचार-विमर्श किया गया। सीएम हाउस में विस्तार से होगी समीक्षा उन्होंने यह भी बताया कि चीता परियोजना से संबंधित एक विस्तृत समीक्षा बैठक मुख्यमंत्री आवास पर होगी। इस बैठक में चीतों को शिफ्ट करने पर बात होगी। देश में हैं 58 टाइगर रिजर्व केंद्रीय मंत्री यादव ने आगे कहा कि अब हमारे देश में 58 टाइगर रिजर्व हैं। 58वें टाइगर रिजर्व का श्रेय मध्य प्रदेश को जाता है। यह वास्तव में एक टाइगर स्टेट है और यहां माधव टाइगर रिजर्व बनाया गया है। उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि मध्य प्रदेश देश में एक विशेष राज्य है, जो वन, इको-टूरिज्म और सांस्कृतिक विरासत पर ध्यान केंद्रित करता है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर्यटन, वन और आदिवासी लोगों के विकास के लिए काम कर रहे हैं। गांधी सागर में सारी तैयारी पूरी इस बीच, मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विजय शाह ने कहा कि गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में सभी जरूरी इंतजाम कर लिए गए हैं। विजय शाह उस समय राज्य के वन मंत्री थे जब चीतों को पहली बार लाया गया था। उन्होंने कहा कि लोगों को जल्द ही चीतों को वहां शिफ्ट करने की खुशखबरी मिलेगी। कूनो नेशनल पार्क में चीतों को बसाने के बाद, अब गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य को चुना गया है। यह अभयारण्य चीतों के लिए एक नया घर होगा। सरकार चीतों की सुरक्षा और उनके विकास के लिए पूरी तरह से तैयार है। मई में बोत्सवाना से आएंगे 4 चीते इस शिफ्टिंग के साथ ही दक्षिण अफ्रीका, बोत्सवाना और केन्या से चीते लाने की प्रक्रिया भी जारी रहेगी। अगले एक साल में 8 और चीते मध्यप्रदेश लाए जाएंगे। बैठक में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने बताया, 4 चीते मई 2025 तक बोत्सवाना से लाए जाने हैं। भारत और केन्या के बीच अनुबंध पर सहमति प्रक्रिया चल रही है। इनमें से 4 चीते गांधी सागर अभयारण्य में रखे जाने हैं, बाकी कूनो में ही छोड़े जाएंगे। अपने यहां सबसे ज्यादा सर्वाइवल रेट अफसरों ने बताया, देश में जन्मे चीता शावकों का सर्वाइवल रेट विश्व में सबसे अधिक है। अन्य देशों में जलवायु अनुकूलन के अभाव में आसानी से सर्वाइव नहीं कर पाते। गांधीसागर अनुकूल है, इसलिए यहां चीते छोड़ने का फैसला लिया गया। आइआइएफएम की मदद से ट्रेनिंग केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा, श्योपुर के 80 गांवों के 400 चीता मित्रों को प्रशिक्षित करने के लिए आइआइएफएम भोपाल की मदद लेंगे। सैटेलाइट कॉलर आइडी से निगरानी होगी। चीता सफारी शुरू करने की प्रक्रिया तेज होगी। कूनो (Kuno National Park)और गांधी सागर से जुड़े रिजर्व व दूसरे प्रदेशों के पार्कों के बीच वन्यप्राणी कॉरिडोर के साथ पर्यटन कॉरिडोर बनाएं।

Kuno National Park sheopur: चीतों ने गाय को पकड़ा तो ग्रामीणों ने मारे पत्थर, वन विभाग के मना करने पर भी नहीं माने

When the leopards caught the cow, the villagers threw stones at it, they did not listen even after the forest department’s warning Kuno National Park sheopur श्योपुर ! Kuno National Park sheopur से बाहर निकले पांच चीतों पर ग्रामीणों ने लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला कर दिया। घटना का वीडियो भी सामने आया है। हालांकि, मौके पर मौजूद वन विभाग की रेस्क्यू टीम ग्रामीणों से चीतों से दूर रहने की बात कहती रही, लेकिन वे नहीं माने, घटना सोमवार की है। दरअसल, एक महीने पहले खुले जंगल में छोड़ी गई मादा चीता ज्वाला और उसके चार शावक शनिवार शाम को पहली बार पार्क की सीमा से बाहर आ गए थे। चीते रविवार दोपहर बाद फिर कूनो के जंगल की ओर लौट गए थे। रविवार रात को ये चीते वीरपुर तहसील के ग्राम श्यामपुर के पास देखे गए। वे निर्माणाधीन श्योपुर-ग्वालियर ब्रॉडगेज रेल ट्रैक से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर थे। सोमवार सुबह ये पांचों चीते कूनो सायफन के पास से होते हुए कूनो नदी में पहुंचे। Kuno National Park sheopur वे निर्माणाधीन रेलवे पुल के नीचे काफी देर तक बैठे रहे। इस दौरान कूनो सायफन से गुजरने वाले राहगीरों की भीड़ चीतों को देखने के लिए जमा हो गई। मादा चीता और शावक एक-एक कर रास्ता पार कर रहे थे, तभी उन्होंने गाय पर झपट्टा मारा। मादा चीता और शावकों को भगाने के लिए ग्रामीण लाठी लेकर दौड़े और पत्थर मारना शुरू कर दिए। चीता ज्वाला काफी देर तक गाय का गला पकड़े रही। जैसे ही उसे पत्थर लगा, उसने गाय को छोड़ दिया और शावकों के साथ भाग निकली। घटना के बाद करीब 10 बजे चीता दल, कूनो पुल क्षेत्र से निकलकर वीरपुर के तिललिडेररा क्षेत्र पहुंचा है। Read more: डुकरसता बीट के जंगल में भीषण आग, वन विभाग की मशीनें खराब, कर्मचारियों ने गीली टहनियों से बुझाई ज्वाला और उसके शावकों को 21 फरवरी को खजूरी क्षेत्र के जंगल में छोड़ा गया था। एक महीने तक वे पार्क की सीमा में ही रहे। चीतों के बाहर निकलने पर क्षेत्र के चीता मित्र और उनकी टीम ने आसपास के लोगों को जागरुक किया। उन्होंने बताया कि चीते लोगों पर हमला नहीं करते हैं। उन्होंने लोगों से चीतों को न भगाने और उनकी सुरक्षा का ध्यान रखने की अपील की।

चीतों की निगरानी के लिए वन विभाग की टीम लगातार काम कर रही, वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर लोगों को चीतों से दूर रहने के लिए कहा

ग्वालियर  कूनो नेशनल पार्क के जंगल की सीमा से निकलकर श्योपुर की विजयपुर तहसील के भैरोपुरा गांव में मादा चीता ज्वाला व चार शावकों का ग्रामीणों से आमना-सामना हो गया। यहां एक बछड़े पर मादा चीता ज्वाला ने हमला कर दिया, तो शावकों ने भी घेराबंदी शुरू कर दी। बछ़ड़े पर हमला होते देख उसके मालिक व ग्रामीणों ने चीतों पर पत्थर मारना शुरू कर दिया। लाठी से भी भगाने का प्रयास किया। पास खड़ी कूनो की टीम ने ग्रामीणों को समझाया कि बछड़े का मुआवजा मिल जाता है, चीतों पर हमला न किया जाए। इस पर बछड़े के मालिक ने कहा कि हमारे सामने हमारे मवेशियों को मरता हुआ नहीं देख सकते हैं, ऐसा होगा तो हम तो हमला करेंगे। पार्क की सीमा से बाहर आ गए थे बता दें कि एक महीने पहले खुले जंगल में छोड़ी गई मादा चीता ज्वाला और उसके 4 शावक शनिवार शाम को पहली बार पार्क की सीमा से बाहर आ गए थे। ये चीते रविवार को दोपहर बाद फिर कूनो के जंगल की ओर लौट गए थे। सामने बछड़ा आ गया था रविवार रात को ये चीते वीरपुर तहसील के ग्राम भैरोपुरा के पास देखे गए। वे निर्माणाधीन श्योपुर-ग्वालियर ब्राडगेज रेल ट्रैक से करीब 1 किलोमीटर की दूरी पर थे। सोमवार सुबह मादा चीता ज्वाला के सामने बछड़ा आ गया, तो उसने शिकार की नीयत से हमला कर दिया। लेकिन ग्रामीणों के पत्थर मारने से चीते पीछे हट गए। लाठी डंडे लेकर चिल्लाते हुए ग्रामीणों को देख चीते डर गए। मादा चीता काफी देर तक बछड़े का गला पकड़े रही, लेकिन फिर छोड़ दिया। 15 लोगों का दल कर रहा ज्वाला व शावकों की निगरानी मादा चीता ज्वाला व शावकों की निगरानी में 15 लोगों का दल निगरानी कर रहा है, जब सोमवार सुबह यह घटना हुई तो एक दल पीछे रह गया था और एक वहीं चीतों के आसपास ही मौजूद था। ग्रामीणों से दल ने बात की और समझाने का प्रयास किया कि आगे से ऐसा न करें।

कूनो नेशनल पार्क में बाड़े से खुले जंगल में छोड़ी गई मादा चीता और उसके 4 शावक बीती शाम को पार्क की सीमा से बाहर निकल गए

श्योपुर  कूनो नेशनल पार्क में एक माह पहले बाड़े से निकालकर खुले जंगल में छोड़ी गई मादा चीता और उसके 4 शावक बीती शनिवार की शाम को पार्क की सीमा से बाहर निकल गए. हालांकि रविवार शाम को फिर से पांचों ने कूनो के जंगल की ओर रुख कर लिया. लेकिन ज्वाला और चारों शावक बीती रात श्यामपुर के पास देखे गए. वहीं, सुबह वीरपुर के नजदीक कूनो नदी में नजर आए. इस दौरान रात और सुबह के वक्त चहलकदमी करते नजर आई चीता फैमली के वीडियो बनाकर लोगों ने सोशल मीडिया पर वायरल भी किए. बीती आधी रात को मादा चीता ज्वाला और उसके ये शावक वीरपुर तहसील के ग्राम श्यामपुर से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर निर्माणधीन श्योपुर-ग्वालियर ब्रॉडगेज ट्रैक से गुजरते नजर आए. इस दौरान यहां से निकल रहे ट्रक चालकों ने इनके वीडियो भी बनाए. वहीं, सुबह ये पांचों चीते निकलकर कूनो सायफन के निकट से निकलते हुए कूनो नदी में दिखे. कूनो नदी में ज्वाला और चारों शावक निर्माणधीन रेलवे पुल के नीचे काफी देर तक बैठे रहे. यही वजह है कि कूनो सायफन से गुजरने वाले राहगीरों की चीतों को देखने के लिए भीड़ भी लग गई. बताया गया है कि इसके बाद ये पांचों कूनो पार्क के जंगल की ओर बढ़ गए. कूनो नेशनल पार्क के डीएफओ आर थिरुकुराल ने आजतक को फोन कॉल पर बताया कि हम चीतों की लोकेशन शेयर नहीं कर सकते हैं. चीते जहां भी हैं, हमारी ट्रैकिंग टीमें उन पर निगरानी बनाए हुए हैं. सभी चीता पूरी तरह फिट हैं और स्वछंद विचरण कर रहे हैं. बता दें कि मादा चीता ज्वाला और उसके 4 शावकों को गत 21 फरवरी को खुले जंगल में खजूरी क्षेत्र में छोड़ा गया था. हालांकि, बीते एक माह से ये कूनो पार्क की सीमा में ही थे, लेकिन अब ये पहली बार पार्क की सीमा से बाहर निकले हैं. वहीं, चीतों के बाहर निकलने पर क्षेत्र के चीता मित्र रवि रावत श्यामपुर और उनकी टीम ने आसपास के लोगों केा जागरूक किया और कहा कि चीतों की सुरक्षा हम सबकी जिमेदारी है. चीता लोगों पर हमला नहीं करता है, लिहाजा इसे भगाएं नहीं और सुरक्षा करें. पता हो कि कूनो नेशनल पार्क में कुल 17 चीते खुले जंगल में आजाद घूम रहे हैं. इनमें 11 शावक शामिल हैं. जबकि पार्क के बाड़े में अभी 9 चीते बंद हैं.

कुनो नेशनल पार्क में गूंजी किलकारी, चीता वीरा ने दो शावकों को दिया जन्म, सीएम यादव ने शेयर की खुशी, दी बधाई

श्योपुर मध्यप्रदेश का कूनो नेशनल पार्क आज फिर नन्हे चीता शावकों की किलकारियों से गूंज उठा। मादा चीता वीरा ने मंगलवार को दो शावकों को जन्म दिया है। इस खुशी को लेकर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, मादा चीता वीरा ने दो नन्हे शावकों को जन्म दिया है। मध्यप्रदेश की धरती पर फिर से चीता शावकों का स्वागत है। सीएम मोहन ने अपने एक्स हैंडल से शावकों की तस्वीरें शेयर की हैं। सीएम डॉक्टर मोहन यादव ने एक्स हैंडल पर लिखा, मुझे यह जानकारी साझा करते हुए अत्यंत आनंद की अनुभूति हो रही है कि मध्यप्रदेश की धरती पर चीतों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। आज मादा चीता वीरा ने दो नन्हे शावकों को जन्म दिया है। मध्यप्रदेश की धरती पर चीता शावकों का स्वागत है और प्रदेशवासियों को इन नन्हे शावकों के आगमन पर हार्दिक बधाई प्रेषित करता हूं।     नन्हें चीतों की किलकारी से फिर गूंजा कूनो.. मध्यप्रदेश की ‘जंगल बुक’ में 2 चीता शावकों की दस्तक…     मुझे यह जानकारी साझा करते हुए अत्यंत आनंद की अनुभूति हो रही है कि मध्यप्रदेश की धरती पर चीतों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। आज मादा चीता वीरा ने 2 नन्हें शावकों को जन्म… pic.twitter.com/fCs01pIOtP — Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) February 4, 2025 सीएम मोहन ने लिखा है कि प्रोजेक्ट से संबंधित सभी अधिकारियों, चिकित्सकों और फील्ड स्टॉफ को ढेर सारी बधाई। प्रदेश में चीतों का कुनबा निरंतर बढ़ने से प्रदेश के पर्यटन को नई उड़ान मिल रही है, जिससे रोजगार के नए द्वार खुल रहे हैं। हम चीतों के साथ ही समस्त वन जीवन के संरक्षण, संवर्धन और पुनर्स्थापना के लिए सदैव तत्पर हैं। दोनों शावक स्वस्थ कूनो प्रबंधन ने बताया कि वीरा द्वारा जन्मे गए दोनों शावक पूरी तरह स्वस्थ्य हैं। इन चीता शावकों के जन्म के बाद कूनो पार्क में कुल 14 शावक हो गए हैं। वहीं 12 वयस्कों समेत अब चीतों की संख्या 24 से बढ़कर 26 हो गई है। वहीं नेशनल पार्क में डाक्टरों की टीम नन्हे शावकों पर नजर बनाए हुए है। इनमें से दो चीता अग्नी और वायु खुले जंगल में घूम रहे हैं। अब इतनी कूनो पार्क में चीतों की संख्या कूनो नेशनल पार्क में दो नए शावकों को आने के बाद अब चीतों की संख्या में भी बढ़ोतरी हो गई है। फिलहाल, कूनो पार्क में चीतों की कुल संख्या 26 हो गई है, जिनमें 12 वयस्क चीता और 14 शावक हैं। चीतों की संख्या बढ़ने से पार्क प्रबंधन ने भी राहत की सांस ली है।   चीतों की वापसी का ऐतिहासिक अभियान बता दें कि सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘प्रोजेक्ट चीता’ की शुरुआत की गई थी। इसके तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से 20 चीतों को कूनो नेशनल पार्क में लाया गया था।भारत में करीब 70 साल पहले चीतों की प्रजाति विलुप्त हो गई थी। लेकिन इस पुनर्वास परियोजना से उनकी संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। कूनो में चीतों का प्राकृतिक वातावरण तैयार किया गया है, ताकि वे सुरक्षित और सहज रूप से जीवन व्यतीत कर सकें। इस परियोजना के तहत अब तक कई चीता शावकों का जन्म हो चुका है, जो इस संरक्षण प्रयास की सफलता को दर्शाता है। सीएम बोले चीतों का कुनबा बढ़ने से प्रदेश के पर्यटन को मिल रही नई उड़ान प्रदेश में चीतों का कुनबा निरंतर बढ़ने से प्रदेश के पर्यटन को नई उड़ान मिल रही है जिससे रोजगार के नये द्वार खुल रहे हैं। हम चीतों के साथ ही समस्त वन्यजीवों के संरक्षण, संवर्धन एवं पुनर्स्थापन हेतु सदैव तत्पर हैं। कूनो में अब 26 चीते बता दें कि इन चीता शावकों के जन्म के बाद जंगल बुक कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) में अब कुल 14 शावक हो गए हैं। वहीं 12 वयस्कों समेत अब एमपी में चीतों की संख्या 24 से बढ़कर 26 हो गई है। कूनो में चीता प्रजनन प्रक्रिया एक नजर में     27 मार्च, 2023 को मादा चीता ज्वाला ने चार शावकों को जन्म दिया।     कूनो में जन्मी मादा लगभग डेढ़ वर्ष का मुखी नामकरण किया गया।     तीन जनवरी 2024 को चीता आशा ने तीन शावकों को जन्म दिया, ये सभी नर हैं।     22 जनवरी 2024 को एक और मादा ज्वाला ने चार शावकों को जन्म दिया।     10 मार्च 2024 को मादा चीता गामिनी ने छह शावकों को जन्म दिया।    

फिर नन्हें चीतों की किलकारी से गूंजा कूनो, दो शावकों के जन्म पर सीएम मोहन यादव ने दी बधाई

Kuno National Park: कूनो राष्ट्रीय उद्यान में दो शावकों के जन्म पर सीएम मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में चीतों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है. इस परियोजना से जुड़े सभी अधिकारियों, चिकित्सकों और फील्ड स्टाफ को बधाई. चीतों के कुनबे के बढ़ने से प्रदेश के पर्यटन को नई उड़ान मिल रही है. सीएम मोहन यादव ने कहा, ”मुझे यह जानकारी साझा करते हुए अत्यंत आनंद की अनुभूति हो रही है कि मध्यप्रदेश की धरती पर चीतों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है. आज मादा चीता वीरा ने 2 नन्हें शावकों को जन्म दिया है, मध्यप्रदेश की धरती पर चीता शावकों का स्वागत है एवं प्रदेशवासियों को इन नन्हें शावकों के आगमन पर हार्दिक बधाई प्रेषित करता हूं. प्रोजेक्ट से संबंधित सभी अधिकारियों, चिकित्सकों एवं फील्ड स्टाफ को बधाई, जिनके अथक परिश्रम के परिणामस्वरूप आज मध्यप्रदेश को ‘चीतों की धरती’ के नाम से भी जाना जाता है”. सीएम मोहन यादव ने कहा, ”प्रदेश में चीतों का कुनबा निरंतर बढ़ने से प्रदेश के पर्यटन को नई उड़ान मिल रही है जिससे रोजगार के नये द्वार खुल रहे हैं. हम चीतों के साथ ही समस्त वन्यजीवों के संरक्षण, संवर्धन एवं पुनर्स्थापन हेतु सदैव तत्पर हैं”.

कूनो नेशनल पार्क के अंदर घुसे बंदूकधारी शिकारी, चली गोलियां, चीतों को खतरा?

Hunters with guns entered Kuno National Park, bullets were fired, danger to leopards? श्योपुर ! कूनो नेशनल पार्क के मोरावन क्षेत्र में फायरिंग और कुछ शिकारियों के घुसने की खबर सामने आई है. पार्क प्रबंधन के मुताबिक मोरावन क्षेत्र में मंगलवार को गश्ती दल ने फायरिंग की आवाज सुनी थी. इसके बाद तुरंत सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया तो तीन बंदूकधारी नजर आए. हालांकि, पार्क प्रबंधन ने शुक्रवार को घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि तीन बंदूकधारी शिकारी छिपकर भाग निकलने में कामयाब रहे. वहीं डीएफओ ने चीतों के सुरक्षित होने की बात कही है. डीएफओ ने की कूनो में घुसपैठ की पुष्टि इस पूरी घटना को लेकर जब श्योपुर DFO आर थिरुकुरल से बात की गई तो उन्होंने SAHARA SAMACHAAR को बताया, ” दो-तीन दिन पहले एक पॉइंट मिला था कि कुछ शिकारी पार्क के कुछ इलाकों से घुसने का प्रयास कर सकते हैं. इसके आधार पर लगातार कॉम्बिंग टीमों द्वारा गश्त की जा रही थी. इसी दौरान मंगलवार को अचानक वन क्षेत्र में गोली चलने की आवाज सुनाई दी, तो गश्ती दल तुरंत मौके पर पहुंचे लेकिन शिकारियों को इस बात का आभास हो गया और वे मौके से फरार हो गए.” पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी DFO के मुताबिक कूनो नेशनल पार्क के कुछ संवेदनशील पॉइंट हैं, जहां से 2-3 शिकारियों के घुसने की आशंका है. हालांकि, गश्ती दल के सक्रिय होने से संभवत: शिकारी किसी घटना को अंजाम नहीं दे सके. एहतियातन कूनो नेशनल पार्क के प्रबंधन ने पार्क के अंदर गश्त बढ़ा दी है और अन्य संवेदनशील इलाकों पर नजर रखी जा रही है. पार्क में लगे कैमरों की मदद से भी शिकारियों का पता लगाया जा रहा है. खुले में घूम रहे हैं दो चीते गौरतलब है कि कूनो नेशनल पार्क अपने विदेशी चीतों के लिए अक्सर सुर्खियों में रहता है. यहां चीतों को फिर से बसाने के लिए सरकार का एक बड़ा प्रोजेक्ट जारी है. इस प्रोजेक्ट के चलते श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से कई चीते लाए गए थे. इन्हीं में से दो चीते खुले जंगल में घूम रहे हैं. ऐसे में बंदूकधारी शिकारियों का यहां घुसना कई तरह के सवाल पैदा कर रहा है. पहली बार नहीं घुसे शिकारी हालांकि, यह पहली घटना नहीं है जब कूनो नेशनल पार्क में शिकारियों की घुसपैठ की कोशिश हुई हो. पिछले साल 12 जून को भी ऐसे ही तीन शिकारियों को पार्क में गश्ती दल ने पकड़ा था. ऐसी घटनाएं कूनो नेशनल पार्क और खासतौर पर यहां लाए गए विदेशी चीतों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर रही हैं.

शावकों के शव क्षत-विक्षत कैसे हुए, 36 घंटे बाद भी फारेस्ट नहीं ढूंढ पा रहें है जवाब

How did the bodies of the cubs get mutilated, the forest is not able to find the answer even after 36 hours उदित नारायणभोपाल। कूनो नेशनल पार्क से जन्मे दोनों शावकों की मौत पर प्रबंधन पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि शावकों के शव क्षत-विक्षत कैसे हुए..? क्या बाड़े में कोई और वन्य प्राणी पहुंचे थे या फिर मां स्वयं ही अपने शावकों पर हमला करके उन्हें मौत के घाट उतार दिया..? मौत के चार दिन बाद भी वन विभाग द्वारा अधिकृत जवाब नहीं आया है। सबसे बड़ा सवाल लिया है कि प्रधानमंत्री की ड्रीम प्रोजेक्ट में इतनी बड़ी लापरवाही के लिए कौन अफसर जवाबदेह है।श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में चीतों के वंश वृद्धि की कड़ी में 22 नवंबर को चीता निर्वा ने शावकों को जन्म दिया था। जन्म के 2 दिन बाद यानि 25 को दोनों शावकों की मौत हो गई। डीएफओ कुनो के अधिकृत प्रेस नोट में दोनों मृत शावकों के शव को क्षति-विक्षिप्त बताया। अर्थात शावकों की मौत किन जानवरों के हमले से हुई? इस सवाल का उत्तर खोजा जा रहा है। हालांकि सीसीएफ उत्तम कुमार शर्मा ने आशंका व्यक्त की है कि निर्वा पहली बार मां बनी है, इसलिए वहीं हमले कर सकती है। बिल्ली प्रजाति के एनिमल का यह स्वभाव भी होता है। इसके बावजूद भी आखिरकार कुनो पार्क के प्रबंधन पर सवाल उठना लाजमी है। 24 घंटे की मॉनिटरिंग कैसे की जा रही थी? सभी चीता को कॉलर आईडी से मीनिंग हो रही है तो फिर निर्वा के मूवमेंट पर नजर क्यों नहीं रखी गई..? यदि निर्वाह पर नजर रखी जाती तो उसके हमले से शावकों को बचाया जा सकता था।

Kuno National Park: कूनो में दिखेगी नन्हें शावकों की उछल-कूद, चीता ‘नीर्वा’ ने 4 को दिया जन्म

Kuno National Park: Little cubs will be seen jumping in Kuno, Cheetah ‘Nirva’ gives birth to 4 कूनो नेशनल पार्क से एक बार फिर से खुशखबरी आई है. यहां एक मादा चीता ने फिर से शावकों को जन्म दिया है. मध्य प्रदेश के वन विभाग ने सोशल मीडिया पोस्ट पर ये जानकारी दी है. बताया जा रहा है कि 4 शावकों ने जन्म लिया है हालांकि आधिकारिक तौर पर नंबरों की पुष्टि नहीं की गई है. नामीबिया और साउथ अफ्रीका से लाए गए चीतों का परिवार धीरे-धीरे कूनो पार्क में बढ़ रहा है. वन विभाग ने अपने अधिकारिक एक्स अकाउंट पर पोस्ट किया है कि ‘कूनो से गुड न्यूज आई है, मादा चीता नीर्वा ने श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में शाकों को जन्म दिया है.’ पिछले महीने मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने इस बात की ओर इशारा किया था कि मादा चीता नीर्वा गर्भवती है और जल्द ही शावकों को जन्म दे सकती है. सीएम मोहन यादव के इस इशारे के बाद से ही लोग कूनों खुशखबरी आने का इंतजार कर रहे थे. प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अमीस श्रीवास्तम ने कहा है कि वह शावकों की संख्या पर फिलहाल कोई भी कमेंट नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें पार्क की ओर से अभी शावकों के बारे में कोई कन्फर्मेसन नहीं है. कूनो नेशनल पार्क में इससे पहले कुल 17 शावक जन्म ले चुके हैं जिनमें से 12 शावक सर्वाइव कर पाए हैं. अब नीरवा के शावकों के जन्म लेने के बाद कुनबा और बढ़ गया है. जल्द ही शावकों के बारे में पार्क से ज्यादा जानकारी जारी की जाएगी. 2022 में शुरू हुआ चीता प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से आए 8 चीतों को छोड़ा था. इसके बाद साउथ अफ्रीका से 12 चीतों को लाया गया था और पार्क में छोड़ा गया था. हालांकि अलग-अलग कारणों के चलते कई चीतों की मौत हो गई है. हालांकि कूनों से समय-समय पर नन्हें शावकों के जन्म की खुशखबरी भी सामने आती रही हैं. कूनों में फिलहाल चीतों की संख्या करीब 24 है.

Kuno National Park: फिर कूनो के जंगल में दहाड़ेंगे चीते, बाड़े से जंगल में छोड़ने की तैयारी शुरू

Kuno National Park: Leopards will roar again in the Kuno forest, preparations begin to release them from the enclosure into the forest. श्योपुर। मध्य प्रदेश में चीतों की धरती कूनो नेशनल पार्क में अब चीते खुलकर जिएंगे। उन्हें बड़े बाड़े से खुले जंगल में छोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। बताया जा रहा है की अब चीते खुले जंगल में ही रहेंगे। जिससे पर्यटक को आसानी से उनके दीदार हो सकेंगे।एक बार फिर चातों को खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। बारिश का सीजन खत्म हो चुका है और हल्की ठंड का सिलसिला भी शुरू हो गया है। जानकारी के अनुसार अनुसार चीते अलग-अलग चरणों में बाड़े से छोड़े जाएंगे। फिलहाल अभी तारीख तय नहीं हुई है। पर अधिकारियों का कहना है की जल्द ही चातों को बड़े बाड़े से खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। बतादें कि, कूनो नेशनल पार्क में 12 वयस्क और 12 चीता शावक हैं। अभी ये सभी को बड़े बाड़े में रखा गया है। वहीं वापस जंगल में आने के बाद पर्यटकों को उनके दीदार हो सकेगा।

इंटरनेशनल टूरिज्म सर्किट के साथ 2000 करोड़ की अर्थव्यवस्था का केंद्र बनेगा Kuno, केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव का दावा

Kuno will become the center of economy worth Rs 2000 crore with international tourism circuit, claims Union Forest Minister Bhupendra Yadav. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निवेदन पर केंद्रीय वन मंत्री ने कहा की मध्यप्रदेश एलीफेंट प्रोजेक्ट भी चलाया जाएगा और हाथियों से बचाव के लिए स्थानीय लोगों को गजमित्र बनाया जायेगा. मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क और मंदसौर के गांधीसागर में चल रहे प्रोजेक्ट चीता की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव  की मौजूदगी में केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि मध्य प्रदेश के साथ नए प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे. कूनो को केंद्रीय इको टूरिज्म का केंद्र बनाया जाएगा. वहीं, प्रदेश में प्रोजेक्ट टाइगर की तरह अब प्रोजेक्ट एलिफेंट शुरू किया जाएगा. श्योपुर प्रवास के दौरान सेसईपुरा स्थित जंगल रिसॉर्ट में मुख्यमंत्री यादव के आग्रह पर केंद्रीय मंत्री ने प्रोजेक्ट एलिफेंट को अमली जामा पहना जाने की जानकारी दी. मुख्यमंत्री ने वन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश को इको टूरिज्म का हब बनाने की कार्य योजना बनाई जाए. इसे रोजगार और अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए करीब 2 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जाए. इसी तरह गांधी सागर अभयारण्य में भी ऐसी गतिविधियां संचालित की जाएंगी. मध्य प्रदेश के CM यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश को इको टूरिज्म का बनाने के लिए कार्ययोजना बनाई जाएगी. इससे रोजगारोन्मुख अर्थव्यवस्था संचालित करने में सहयोग मिलेगा. भविष्य में कूनो में ही लगभग 2 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा. श्योपुर के सेसईपुरा के जंगल रिसोर्ट में चीता पुनर्स्थापन की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉक्टर यादव ने कहा, अर्थ-व्यवस्था आधारित गतिविधियों से लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध होगा और वन्य जीवों के साथ जंगल का भी संरक्षण होगा.मुख्यमंत्री ने कहा कि जंगल आधारित अर्थव्यवस्था को संचालित करने के लिए केंद्रीय मंत्री यादव के निर्देशानुसार काम किया जाएगा. इसके लिए अलग से राज्य स्तर पर सेल बनाई जाएगी और अपने प्रोजेक्ट बनाकर संबंधित क्षेत्र के इको टूरिज्म वाली जगहों पर लोगों को रोजगार से जोड़ने इसके लिए डेवलपमेंट और अन्य गतिविधियों को संचालित करने के लिए प्रशिक्षित करेगी. श्योपुर कूनो से इसका शुभारंभ होगा. मध्यप्रदेश एलीफेंट प्रोजेक्ट मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निवेदन पर केंद्रीय वन मंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश एलीफेंट प्रोजेक्ट भी चलाया जाएगा और हाथियों से बचाव के लिए स्थानीय लोगों को शिक्षित किया जाएगा. स्थानीय लोगों को गजमित्र बनाया जाएगा. प्रोजेक्ट एलिफेंट के अंतर्गत केंद्रीय दल मध्य प्रदेश आएगा, जो असम और केरल के राज्यों के अनुभवों के साथ यहां के हाथियों के झुंड की व्यवहारों का अध्ययन करेगा और उसके संबंध में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को देगा. इससे हाथियों के संरक्षण पर काम किया जा सके.केंद्रीय वन, पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश इको टूरिज्म का केंद्र बिंदु है. जंगलों, अभयारण्य, टाइगर रिजर्व क्षेत्र अन्य जगहों पर की तुलना में सबसे ज्यादा क्षेत्र मध्यप्रदेश में पाए जाते हैं.समीक्षा बैठक के दौरान केन्द्रीय मंत्री ने कहा चीता पुनर्स्थापना वन्य क्षेत्र के जुड़ाव से एक सर्किट बनता है. कूनो को इको टूरिज्म का हब बनाया जाएगा और केंद्रीय इको टूरिज्म केंद्र की स्थापना भी की जाएगी. मध्य प्रदेश देश में सबसे अनूठा केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश देश में सबसे अनूठा है और कूनों का क्षेत्र अपने आप में सबसे अलग है. चीता पुनर्स्थापना केंद्र शुरू किया गया है और दुनिया में यह सबसे बड़ी सफलता का क्षेत्र भी है क्योंकि यहां पर चीता को पुनर्स्थापित करने में हमने सफलता पाई है. वर्तमान में 21 चीता हैं और यह एक बड़ी संभावनाओं का क्षेत्र है देश में कुल 10 वन्य क्षेत्र को इस संबंध में चिन्हित किया गया था.

मादा चीता कूनो पार्क से बाहर निकली, वीरपुर तहसील में मिल रही है लोकेशन

Female cheetah came out of Kuno Park location is found in Veerpur tehsil श्योपुर ! अफ्रीका से आई मादा चीता वीरा कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकल गई है। वीरा के वीरपुर तहसील में होने की लोकेशन मिली है। वन भिाग की टीम लगातार वीरा को सर्च कर रही है।अफ्रीका से आई मादा चीता वीरा कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकल गई है। वीरा के वीरपुर तहसील में होने की लोकेशन मिली है। वन भिाग की टीम लगातार वीरा को सर्च कर रही है। बताया यह भी जाता है कि मादा चीता वीरपुर पुलिस थाने के पास भी कोंनदे नाले में देखी गई है। वन विभाग लगातार मादा चीता को ट्रेक कर रहा है। जानकारी के मुतमाबिक मादा चीता वीरा दो दिनों से कूनो नेशनल पार्क से बाहर है। उसकी लोकेशन वीरपुर तहसील के पास रिहायसी बस्ती के पास देखी जा रही है। बताया जाता है कि सोमवार को वीरपुर पुलिस थाने की बाउंड्रीवाल के पास कोनदे नाले के पास देखी गई। इसके बाद वीरा चक सीताराम गांव के पास श्यारदा पचांयत की सरपंच के घर के पीछे देखी गई है। जिसे देखने के लिए सरपंच के घर लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई। वन विभाग का अमला भी चीते की लोकेशन को ट्रेस करते हुए वीरपुर के आसपास घूम रहा है।

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