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चंद्र ग्रहण आज: भारत में 6:20 के बाद होगा दृश्य, 25 मिनट तक रहेगा असर

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साल के पहले चंद्र ग्रहण के लगने में अब ज्यादा समय शेष नहीं रह गया है. आज दोपहर को 03 बजकर 20 मिनट पर इस चंद्र ग्रहण की शुरुआत हो जाएगी. इस ग्रहण की समाप्ति शाम को 06 बजकर 46 मिनट पर हो जाएगी. ये ग्रहण 03 घंटे 26 मिनट तक रहेगा. चूंकि ये ग्रहण भारत में नजर आने वाला है, इसलिए इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया है. इस ग्रहण का सूतक काल आज सुबह 06 बजकर 20 मिनट पर ही लग गया है. देशभर में ग्रहण के सूतक काल के विशेष नियमों का पालन किया जा रहा है. मंदिरों के कपाट बंद हैं. घरों में पूजा-पाठ समेत तमाम धार्मिक कार्य और खानपान बंद है. भारत में जब चंद्रोदय होगा तो चांद को ग्रहण लगा हुआ होगा. भारत में यह चंद्र ग्रहण ग्रस्तोदित रूप में नजर आने वाला है. भारत में 20 से 25 मिनट ही रहेगा ग्रहण का प्रभाव शाम 4 बजकर 34 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 33 मिनट तक पूर्ण चंद्र ग्रहण रहेगा. भारत में ये ग्रहण करीब 20 से 25 मिनट ही नजर ही नजर आने वाला है. भारत में आज शाम को 06 बजकर 20 मिनट के बाद ग्रहण लगा चांद दिखने लगेगा. चंद्रोदय होते ही भारत के कई हिस्सों में चंद्र ग्रहण दिखाई देगा. इसके बाद 06 बजकर 46 मिनट पर ये चंद्र ग्रहण खत्म हो जाएगा. दिल्ली समेत इन बडे़े शहरों में ग्रहण के दिखने का समय     दिल्ली-एनसीआर: यहां चंद्र ग्रहण शाम 06 बजकर 26 मिनट पर दिखेगा.     प्रयागराग: यहां चंद्र ग्रहण शाम 06 बजकर 08 मिनट पर दिखेगा.     कानपुर:यहां चंद्र ग्रहण शाम 06 बजकर 14 मिनट पर दिखेगा.     वाराणसी: यहां चंद्र ग्रहण शाम 06 बदकर 04 मिनट पर दिखेगा.     पटना: यहां चंद्र ग्रहण शाम को 05 बजकर 55 मिनट पर दिखेगा.     रांची: यहां चंद्र ग्रहण शाम को 05 बजकर 55 मिनट पर दिखेगा.     कोलकाता: यहां चंद्र ग्रहण शाम को 05 बजकर 43 मिनट पर दिखेगा.     भुवनेश्वर:यहां चंद्र ग्रहण 05 बजकर 54 मिनट पर दिखेगा.     गुवाहाटी:यहां चंद्र ग्रहण शाम 05 बजकर 27 मिनट पर दिखेगा.     चेन्नई: यहां चंद्र ग्रहण शाम को 06 बजकर 21 मिनट पर दिखेगा.     बेंगलुरु: यहां चंद्र ग्रहण शाम 06 बजकर 32 मिनट पर दिखेगा.     हैदराबाद:यहां चंद्र ग्रहण शाम 06 बजकर 26 मिनट पर दिखेगा.     ईटानगर:यहां चंद्र ग्रहण शाम 05 बजकर 07 मिनट पर दिखेगा. इस सभी स्थानों पर ग्रहण शाम को 06 बजकर 46 मिनट पर समाप्त हो जाएगा. ग्रहण के बाद क्या करें? शाम को ग्रहण के समाप्त होने के बाद सबसे पहले पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें. खुद स्नान करें और फिर ताजा भोजन बनाकर ग्रहण करें.

चंद्र ग्रहण का प्रभाव: 3 मार्च को सिंह राशि में ग्रहण, कर्क-कन्या-मीन रहें Alert

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साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लगने जा रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार ग्रहण के समय चंद्रमा सिंह राशि में गोचर करेंगे। यह ग्रहण भारत समेत पूर्वी एशिया, दक्षिण-पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत महासागर के कई हिस्सों में दिखाई देगा। वैदिक ज्योतिष के अनुसार चंद्र ग्रहण का प्रभाव मानसिक स्थिति, आर्थिक निर्णय और स्वास्थ्य पर पड़ता है। खासतौर पर कर्क, कन्या और मीन राशि के जातकों को इस दौरान अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता हो सकती है। आइए जानते हैं इन राशियों पर संभावित प्रभाव और बचाव के उपाय। कर्क राशि: धन और स्वास्थ्य पर ध्यान जरूरी कर्क राशि के स्वामी स्वयं चंद्रमा हैं, इसलिए चंद्र ग्रहण का प्रभाव इस राशि पर अधिक माना जाता है। ग्रहण आपके धन भाव में प्रभाव डाल सकता है, जिससे आर्थिक मामलों में अस्थिरता आ सकती है। बड़े निवेश या महत्वपूर्ण वित्तीय निर्णय कुछ समय के लिए टालना बेहतर रहेगा। वाणी पर संयम रखें, सामाजिक या पारिवारिक विवाद से बचें। आंख, गला या पेट से जुड़ी समस्याएं परेशान कर सकती हैं। उपाय: चंद्र मंत्र “ॐ सोमाय नमः” का जप करें और सोमवार को सफेद वस्त्र या चावल का दान करें। कन्या राशि: खर्च बढ़ने की आशंका कन्या राशि के लिए यह ग्रहण द्वादश भाव (हानि भाव) में प्रभाव डालेगा। इस कारण संचित धन खर्च हो सकता है। परिवार के किसी सदस्य की सेहत पर खर्च बढ़ सकता है। कार्यक्षेत्र में सतर्क रहें और ऑफिस राजनीति से दूरी बनाए रखें। नौकरी की तलाश कर रहे जातकों को अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। उपाय: भगवान शिव की पूजा करें और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें। शिवलिंग पर जल अर्पित करना शुभ रहेगा। मीन राशि: शत्रु पक्ष से सावधान मीन राशि के लिए ग्रहण छठे भाव में प्रभाव डालेगा, जो शत्रु और ऋण का भाव माना जाता है। विरोधी सक्रिय हो सकते हैं, इसलिए कार्यों में सावधानी रखें। ऑनलाइन लेन-देन में सतर्क रहें, धोखाधड़ी की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। अनावश्यक खर्च और गलत संगति से बचें। उपाय: नियमित रूप से शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और गरीबों को दान करें। ग्रहण काल में क्या करें और क्या न करें? क्या करें: मंत्र जाप, ध्यान और दान-पुण्य करें। ग्रहण के बाद स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें। जरूरतमंदों को अन्न या वस्त्र दान दें। क्या न करें: ग्रहण काल में भोजन पकाने या खाने से बचें (धार्मिक मान्यता अनुसार)। बड़े आर्थिक फैसले टालें। नकारात्मक विचारों से दूर रहें। चंद्र ग्रहण को ज्योतिष में संवेदनशील समय माना जाता है। हालांकि इसका प्रभाव व्यक्तिगत कुंडली पर निर्भर करता है, फिर भी कर्क, कन्या और मीन राशि के जातकों को 3 मार्च 2026 के आसपास विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उचित उपाय अपनाकर संभावित नकारात्मक प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

होली 2026 पर लगेगा चंद्र ग्रहण: भारत में समय, सूतक काल की स्थिति और किन राशियों पर पड़ेगा प्रभाव

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साल 2026 की होली कई मायनों में खास मानी जा रही है। इस बार रंगों के पर्व के साथ एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना भी जुड़ रही है। दरअसल, 2 मार्च को होलिका दहन, 3 मार्च को साल का पहला चंद्र ग्रहण और 4 मार्च को रंगों की होली मनाई जाएगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में लगने जा रहा है, जिसका असर देश-दुनिया के साथ-साथ सभी 12 राशियों पर भी पड़ सकता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक ग्रहण के समय सूतक काल लागू हो जाता है। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-पाठ जैसे कार्यों से परहेज किया जाता है। ऐसे में लोगों के मन में कई सवाल हैं कि होलिका दहन का सही समय क्या है, चंद्र ग्रहण कब लगेगा और इसका ज्योतिषीय प्रभाव किन राशियों पर अधिक पड़ सकता है। 2 मार्च को होगा होलिका दहन- पंचांग के अनुसार इस वर्ष 2 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन शाम के समय होलिका पूजन के बाद अग्नि प्रज्ज्वलित की जाती है और लोग परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। होलिका दहन के बाद अगले दिन फाल्गुन पूर्णिमा का महत्व होता है। कई लोग इस दिन स्नान-दान भी करते हैं। 3 मार्च को लगेगा साल का पहला चंद्र ग्रहण- ज्योतिषीय गणना के अनुसार 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण लगेगा। बताया जा रहा है कि यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में घटित होगा। सिंह राशि का स्वामी सूर्य है, जबकि पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी शुक्र ग्रह माना जाता है।ज्योतिषियों के मुताबिक इस ग्रहण का प्रभाव प्रशासन, मौसम और आर्थिक गतिविधियों पर भी देखने को मिल सकता है। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना है, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है। चंद्र ग्रहण और सूतक काल का समय धार्मिक मान्यता के अनुसार चंद्र ग्रहण से करीब 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। सूतक काल शुरू: 3 मार्च सुबह करीब 6:20 बजे चंद्र ग्रहण शुरू: दोपहर लगभग 3:20 बजे ग्रहण का मध्य काल: शाम करीब 5 बजे ग्रहण समाप्त: शाम लगभग 6:45 बजे ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करने और दान देने की परंपरा भी कई जगहों पर देखी जाती है। भारत में चंद्र ग्रहण का समय- 3 मार्च 2026 का चंद्र ग्रहण भारत में पूरी तरह दिखाई नहीं देगा। क्योंकि ग्रहण का अधिकतर हिस्सा उस समय पड़ेगा जब भारत में चंद्रमा अभी उगा ही नहीं होगा। इसलिए भारत में लोग इसका सिर्फ आखिरी चरण (अंतिम हिस्सा) ही देख पाएंगे। भारत में ज्यादातर जगहों पर चंद्रमा लगभग 6:10–6:20 बजे के आसपास उगता है। इसलिए ग्रहण का केवल अंतिम हिस्सा सूर्यास्त के बाद कुछ समय के लिए देखा जा सकता है, खासकर पूर्वी भारत और उत्तर-पूर्वी राज्यों में देखने की संभावना ज्यादा रहेगी। 4 मार्च को खेली जाएगी रंगों की होली होलिका दहन और पूर्णिमा के बाद 4 मार्च को रंगों की होली खेली जाएगी। इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर त्योहार की खुशियां मनाते हैं। घरों में पकवान बनाए जाते हैं और लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। इन राशियों के लिए शुभ संकेत- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्र ग्रहण का असर सभी राशियों पर अलग-अलग तरीके से पड़ सकता है। वृषभ, मिथुन, तुला और धनु राशि के जातकों के लिए यह समय अपेक्षाकृत अच्छा माना जा रहा है। इन राशियों के लोगों को करियर और आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। इन राशियों को बरतनी होगी सावधानी- सिंह, कर्क, कन्या और वृश्चिक राशि के लोगों को थोड़ा सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। इन राशियों के जातकों को स्वास्थ्य, खर्च और मानसिक तनाव से जुड़े मामलों में सावधानी बरतने की जरूरत हो सकती है। क्या करें और क्या न करें- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान कुछ नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है। क्या करें-     ग्रहण के समय मंत्र जाप और ध्यान करना शुभ माना जाता है।     ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करें।     जरूरतमंद लोगों को दान दें। क्या न करें     सूतक काल में मंदिरों में पूजा-अर्चना से बचें।     ग्रहण के दौरान भोजन करने से परहेज करें।     गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। ग्रहण के बाद दान का महत्व ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहण समाप्त होने के बाद चावल, चीनी, कपूर और सफेद वस्त्र का दान करना शुभ माना जाता है। इससे ग्रहण से जुड़े दोष कम होने की मान्यता भी बताई जाती है।  

होलिका दहन की असमंजस तारीख: भद्रा–ग्रहण के कारण बदला समय, यहां जानें पूरा विवरण

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बुराई पर अच्छाई की जीत का महापर्व होलिका दहन को लेकर इस साल बड़ा कंफ्यूजन बना हुआ है। कुछ लोग कह रहे हैं कि 2 मार्च को होलिका दहन होगा तो कुछ 3 मार्च की तिथि बता रहे हैं। दरअसल, इस बार 3 मार्च को चंद्र ग्रहण लग रहा है जिस वजह से ये असमंजस बना हुआ है। शास्त्रों के अनुसार, फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को यह उत्सव बड़े ही उल्लास के साथ मनाया जाता है। हालांकि, इस वर्ष होलिका दहन पर ‘भद्रा’ का साया रहने के कारण शुभ मुहूर्त को लेकर काफी चर्चा है। भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित माना जाता है, इसलिए ज्योतिषीय गणना के अनुसार भद्रा के पुंछ काल में ही अग्नि प्रज्वलित की जाएगी। आइए जान लेते हैं कि होलिका दहन इस साल आज किया जाएगा या कल और किस समय होगी पूजा… क्यों किया जाता है होलिका दहन? होलिका दहन क्यों किया जाता है वो सभी के लिए जानना बहुत जरूरी है। बता दें कि भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद की रक्षा और अधर्मी होलिका के अंत की यह कथा हमें नकारात्मकता को त्याग कर सकारात्मकता अपनाने का संदेश देती है। हालांकि होलिका दहन को लेकर कई सारी पौराणिक कथाएं प्रचलित है। आइए जानते हैं कि आज रात भद्रा कब तक रहेगी, पूजा का सबसे सटीक शुभ मुहूर्त क्या है और किस विधि से पूजा करने पर आपके परिवार में सुख-समृद्धि आएगी। होलिका दहन 2026: तिथि और पूर्णिमा का समय ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार तिथियों का गणित कुछ इस प्रकार है: पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 2 मार्च 2026, सोमवार शाम 05:55 बजे से। पूर्णिमा तिथि समापन: 3 मार्च 2026, मंगलवार शाम 05:07 बजे तक। विशेष: 2 मार्च को होलिका दहन होगा, 3 मार्च को चंद्र ग्रहण का प्रभाव रहेगा और 4 मार्च को रंगों वाली होली खेली जाएगी। भद्रा का साया: क्यों है इस बार होलिका दहन खास? 2 मार्च को जैसे ही पूर्णिमा तिथि शुरू होगी, वैसे ही भद्रा का प्रारंभ भी शाम 05:55 बजे से हो जाएगा, जो अगले दिन 3 मार्च की सुबह 05:28 बजे तक रहेगी। शास्त्रों में भद्रा मुख में होलिका दहन को ‘अशुभ’ माना गया है। ऐसी स्थिति में जब भद्रा पूरी रात व्याप्त हो, तब भद्रा पुंछ के समय में दहन करना शास्त्र सम्मत और कल्याणकारी होता है। कब किया जाएगा होलिका दहन जानें शुभ मुहूर्त? आज रात भद्रा के पुंछ काल में दहन का सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त निम्नलिखित है: होलिका दहन मुहूर्त: मध्य रात्रि 12:50 बजे से 02:27 बजे तक (2 मार्च की रात)। नोट: इस सीमित समय में ही पूजा और दहन संपन्न करना लाभकारी रहेगा। होलिका पूजन की संपूर्ण विधि और मंत्र पूजा के समय अपना मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखें और नीचे बताई गई विधि अनुसार पूजा करें- जल अर्पण: पूजा स्थल पर दूध और घी मिश्रित जल छिड़कें। सामग्री अर्पण: अक्षत, फूल, रोली, हल्दी, मूंग, गुड़ और गेहूं की सात बालियां अर्पित करें। परिक्रमा: कच्चा सूत लेकर होलिका की 3 या 7 बार परिक्रमा करें और सुख-समृद्धि की कामना करें। सिद्ध मंत्र: पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करें: ओम होलिकायै नम: ओम प्रह्लादाय नम: ओम नृसिंहाय नम: पूजा सामग्री की चेकलिस्ट शुभ फल की प्राप्ति के लिए पूजा में इन चीजों को शामिल करना न भूलें: सूखी लकड़ियां और गोबर के उपले (बड़कुल्ले) की माला। कच्चा सूत, अक्षत, रोली, फूल और हल्दी। गुलाल, बताशा, नारियल, मिठाई और कपूर। एक कलश में शुद्ध जल। धार्मिक महत्व: क्यों जलाई जाती है होली? होलिका दहन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि विश्वास की जीत है। यह कथा भक्त प्रह्लाद की अटूट आस्था और भगवान नरसिंह के अवतार की याद दिलाती है। मान्यता है कि होलिका की पवित्र अग्नि में घर की नकारात्मकता, बीमारियां और बुरी शक्तियां जलकर भस्म हो जाती हैं। सामूहिक रूप से दहन करने से सामाजिक एकता और भाईचारा बढ़ता है।

होली के दिन चंद्र ग्रहण: श्रीनाथजी मंदिर नाथद्वारा में दर्शन समय में बदलाव, पहले जान लें अपडेट

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राजसमंद पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय की प्रधानपीठ नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी की हवेली में 3 मार्च 2026, फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को पड़ रहे चंद्र ग्रहण के कारण होली एवं डोल उत्सव के सेवा क्रम में परिवर्तन किया गया है। तिलकायत राकेश महाराज की आज्ञा अनुसार मंगलवार को होने वाले चंद्र ग्रहण को देखते हुए विशेष व्यवस्था की गई है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 3 मार्च को प्रातः 3 बजे शंखनाद होगा और उसी दिन डोल उत्सव का आयोजन किया जाएगा। चंद्र ग्रहण का स्पर्श सायं 3:20 बजे से होगा तथा मोक्ष 6:47 बजे रहेगा। ग्रहण काल 3:20 बजे से 6:48 बजे तक रहेगा। इस कारण डोल उत्सव के बाद ग्रहण क्रम की सेवा ही संपन्न होगी। युवाचार्य विशाल बावा ने बताया कि पुष्टिमार्गीय परंपरा में डोल उत्सव का मुख्य आधार उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र है और सामान्यतः उत्सव इसी नक्षत्र में मनाया जाता है। किंतु शास्त्रीय मर्यादा के अनुसार यदि फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के दिन किसी क्षेत्र में चंद्र ग्रहण दृश्य हो, तो नक्षत्र की अपेक्षा पूर्णिमा तिथि को प्रधानता दी जाती है। जहां ग्रहण दिखाई देता है, वहां डोल उत्सव पूर्णिमा के दिन ही मनाया जाता है। चूंकि प्रधानपीठ श्रीनाथद्वारा में चंद्र ग्रहण दृश्य होगा, इसलिए यहां डोल उत्सव 3 मार्च 2026 को ही आयोजित किया जाएगा। जिन क्षेत्रों में ग्रहण दृश्य नहीं होगा, वहां 4 मार्च 2026 को उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में डोल उत्सव मनाया जाएगा। दर्शन व्यवस्था इस प्रकार रहेगी     प्रातः मंगला, श्रृंगार और ग्वाला दर्शन नहीं खुलेंगे।     डोल के तीसरे-चौथे राजभोग दर्शन लगभग 10:30 बजे होंगे।     उत्थापन, भोग, संध्या आरती और शयन दर्शन नहीं खुलेंगे।     ग्रहण का सूतक लगने के कारण राजभोग का सखड़ी प्रसाद गौशाला भेजा जाएगा।     उत्सव के पश्चात ग्रहण क्रम की सेवा होगी।     ग्रहण से संबंधित प्रमुख समय     ग्रहण का वेध: प्रातः 3:52 बजे     ग्रहण का स्पर्श: सायं 3:20 बजे     मध्य/गौदान: सायं 5:04 बजे     मोक्ष: सायं 6:47 बजे     चंद्रोदय: सायं 6:42 बजे     पर्वकाल: 3 घंटे 27 मिनट     दृश्यपर्व: 4 मिनट 26 सेकंड

साल का पहला चंद्रग्रहण 3 मार्च को, सूतक लगते ही बंद होंगे मंदिरों के कपाट बंद

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देहरादून साल का पहला चंद्रग्रहण तीन मार्च को लगेगा।  फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि पर साल का पहला चंद्रग्रहण पड़ेगा। चंद्रग्रहण की शुरुआत दोपहर 3:20 बजे होगी और इसका समापन शाम 6:47 बजे होगा। तीन मार्च को साल का पहला चंद्रग्रहण लगेगा। ये चंद्रग्रहण सिंह राशि और मघा नक्षत्र में लगने जा रहा है। ऐसे में नौ घंटे पहले ही सूतक काल लग जाएगा। इसे लेकर मंदिरों के कपाट भी बंद रहेंगे। शहर के कई मंदिरों में इसके पोस्टर भी चस्पा कर दिए गए है। आचार्य डॉ. सुशांत राज ने बताया कि फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि पर साल का पहला चंद्रग्रहण पड़ेगा। चंद्रग्रहण की शुरुआत दोपहर 3:20 बजे होगी और इसका समापन शाम 6:47 बजे होगा। ग्रहण 3:27 घंटे तक प्रभावी रहेगा। चूंकि चंद्रग्रहण भारत में दिखेगा तो इसका सूतक काल भी मान्य होगा। ऐसे में मंदिरों के कपाट बंद रहेंंगे तो वहीं मांगलिक कार्य भी वर्जित रहेंगे। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, यह पूर्ण चंद्रग्रहण होगा, जिसमें आसमान में चांद लाल रंग का नजर आएगा। तीन मार्च को सुबह 6:20 बजे से ही सूतक काल शुरू हो जाएगा। इसके बाद चंद्रग्रहण तक सूतक काल रहेगा।

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