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उज्जैन में महाकाल के दर्शन पर 9 भव्य द्वार, सनातन का गौरव होगा प्रदर्शित

उज्जैन  भगवान महाकाल की नगरी ‘उज्जैन’, अपने प्रवेश मार्गों पर भव्य और प्रतीकात्मक पहचान गढ़ने जा रही है। उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) ने शहर के नए प्रमुख मार्गों पर 92.25 करोड़ लाख रुपये से नौ प्रवेश द्वार बनाने जा रहा है। यह परियोजना केवल शहरी सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य उज्जैन की हजारों वर्षों पुरानी सनातन परंपरा, खगोल–कालगणना, सिंहस्थ संस्कृति और राजकीय गौरव को मूर्त रूप देना है। जब कोई श्रद्धालु, पर्यटक या आगंतुक उज्जैन की सीमा में प्रवेश करेगा, तो ये द्वार उसे यह एहसास कराएंगे कि वह किसी साधारण नगर में नहीं, बल्कि काल, धर्म और मोक्ष की राजधानी में कदम रख रहा है। योजना के तहत इंदौर रोड, देवास रोड, आगर रोड, मक्सी रोड, बड़नगर रोड और सिंहस्थ से जुड़े प्रमुख मार्गों सहित विभिन्न दिशाओं से शहर में प्रवेश करने वाले मार्गों पर ये द्वार निर्मित किए जाएंगे। प्रवेश द्वारों के आसपास सड़क चौड़ीकरण, सर्विस रोड, मीडियन, हरित पट्टी और ट्रैफिक सुव्यवस्था का भी समग्र विकास किया जाएगा, ताकि शहर की पहली छवि भव्य, सुव्यवस्थित और गरिमामयी बने। स्थापत्य में दिखेगा काल और संस्कृति का संवाद नौ प्रवेश द्वारों का डिजाइन पारंपरिक भारतीय स्थापत्य और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक का संतुलित समन्वय होगा। निर्माण में बंसी पहाड़पुर के गुलाबी–सफेद पत्थर और जैसलमेर के पीले पत्थर का उपयोग किया जाएगा। द्वारों पर 10 से 50 मिमी तक की गहरी 3-डी नक्काशी की जाएगी, जिसमें पौराणिक प्रसंग, धार्मिक प्रतीक, शेर, हाथी, मानव आकृतियां और सांस्कृतिक चिन्ह उकेरे जाएंगे। रात्रिकालीन दृश्य प्रभाव के लिए आरजीबीडब्ल्यू लाइटिंग, एलईडी डाउनलाइटर और डीएमएक्स कंट्रोलर आधारित प्रकाश व्यवस्था की जाएगी। ऊर्जा संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सभी द्वारों पर सोलर सिस्टम भी लगाए जाएंगे, जिससे ये द्वार रात में भी उज्जैन की भव्य पहचान बनेंगे। यूडीए के अनुसार सभी स्वीकृतियों के बाद 18 महीनों में नौ प्रवेश द्वारों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण पूर्ण होने के बाद संबंधित एजेंसी को पांच वर्षों तक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी दी जाएगी। जानिये, किस द्वार के लिए कितना बजट     अमृत द्वार 9.68 करोड़     पांचजन्य द्वार 12.50 करोड़     गज द्वार 8.51 करोड़     कालगणना द्वार 11.07 करोड़     उज्जैनी द्वार 6.48 करोड़     सिंहस्थ द्वार 6.48 करोड़     त्रिशुल द्वार 10.65 करोड़     विक्रमादित्य द्वार 13.58 करोड़     डमरू द्वार 13.29 करोड़ सदियों पुरानी परंपरा को मिलेगा नया स्वरूप इतिहासकारों के अनुसार उज्जैन में प्रवेश द्वारों की परंपरा वर्षों पुरानी रही है। प्राचीन काल में नगर की सीमाओं पर बने द्वार न केवल सुरक्षा के लिए होते थे, बल्कि नगर की पहचान, सांस्कृतिक गौरव और शक्ति के प्रतीक भी माने जाते थे। यूडीए की यह योजना उसी परंपरा को आधुनिक शहरी जरूरतों के अनुरूप पुनर्जीवित करने का प्रयास है। नामों की साहित्यिक और सांस्कृतिक प्रासंगिकता     अमृत द्वार : समुद्र मंथन से निकले अमृत का प्रतीक, उज्जैन को मोक्ष और अमरत्व की भूमि के रूप में दर्शाता है।     पंचजन्य द्वार : भगवान कृष्ण के शंख ‘पंचजन्य’ से प्रेरित, धर्म और विजय का प्रतीक।     गज द्वार : भारतीय परंपरा में हाथी ऐश्वर्य, शक्ति और मंगल का संकेतक।     कालगणना द्वार : उज्जैन की विश्वविख्यात कालगणना और खगोल परंपरा की पहचान।     उज्जैनी द्वार : नगर की सांस्कृतिक आत्मा और ऐतिहासिक अस्मिता का प्रतीक।     सिंहस्थ द्वार : विश्व प्रसिद्ध सिंहस्थ कुंभ के माध्यम से उज्जैन की वैश्विक धार्मिक पहचान को दर्शाता है।     त्रिशूल द्वार : भगवान महाकाल के त्रिशूल का प्रतीक, सृजन–संरक्षण–संहार का दर्शन।     विक्रमादित्य द्वार : सम्राट विक्रमादित्य के न्याय, शौर्य और उज्जैन की राजकीय परंपरा का प्रतीक।     डमरू द्वार : शिव के डमरू से उद्भूत नाद, सृष्टि और समय चक्र का संकेत। (नोट : इन नौ भव्य प्रवेश द्वारों के साथ उज्जैन न केवल भौतिक रूप से भव्य दिखेगा, बल्कि अपनी हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को भी आधुनिक स्वरूप में सशक्त रूप से प्रस्तुत करेगा।) 

महाकाल में कोटेश्वर भगवान के पूजन से शुरू शिवनवरात्रि पर्व, 10 दिनी महोत्सव के पहले दिन भगवान का श्रृंगार

उज्जैन  विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर शिवनवरात्रि का पर्व शुक्रवार से सुबह से शुरू हुआ। कोटेश्वर महादेव के पूजन के साथ विशेष अनुष्ठान की शुरुआत हुई। गर्भगृह में पुजारी घनश्याम शर्मा के नेतृत्व में 11 ब्राह्मणों ने भगवान महाकाल का पंचामृत पूजन और एकादश-एकादशनी रूद्राभिषेक होगा। इस बार दिन का महाशिवनवरात्रि पर्व महाकाल मंदिर में मनाया जाएगा, मान्यता है कि जिस तरह माता की आराधना के 9 दिनों तक नवरात्री पर्व मनाया जाता है ठीक उसी तरह देश भर में सिर्फ उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में ही महाशिवनवरात्रि पर्व मनाए जाने की परम्परा निभाई जाती है। सुबह कोटेश्वर भगवान का पूजन अर्चन होगा। शाम को भगवान को सर्वप्रथम चंदन का उबटन लगाकर स्नान कराया गया। जलधारी पर हल्दी अर्पित की गई। दोपहर एक बजे भोग आरती के बाद अपराह्न तीन बजे पंचामृत पूजन के पश्चात भगवान का भांग से विशेष श्रृंगार किया जाएगा। भगवान को लाल, गुलाबी और पीले रंग के नए वस्त्र अर्पित कर शृंगारित। मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुंड-माला और छत्र से सजाया जाएगा। ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में 10 दिन तक शिवनवरात्रि महा उत्सव मनाया जायेगा। यह विशेष श्रृंगार 6 फरवरी से 15 फरवरी तक शिवनवरात्रि के सभी नौ दिनों तक चलेगा। प्रतिदिन भक्तों को भगवान महाकाल के दिव्य दर्शन होंगे। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।भगवान महाकाल के मंदिर में उत्सव का प्रारंभ कोटेश्वर महादेव के पूजन से होगा। शिवनवरात्रि पर 9 दिन यह शृंगार     6 फरवरी : चंदन, भांग शृंगार।     7 फरवरी :नवीन वस्त्र।     8 फरवरी : शेषनाग शृंगार।     9 फरवरी : घटाटोप शृंगार।     10 फरवरी : छबीना शृंगार।     11 फरवरी: होलकर शृंगार।     12 फरवरी : मनमहेश शृंगार।     13 फरवरी : उमा महेश शृंगार।     14 फरवरी : शिव तांडव शृंगार।     15 फरवरी: सप्तधान का मुखौटा। महाशिवरात्रि पर्व के लिए दर्शन व्यवस्था तय,10 लाख भक्त आएंगे महाशिवरात्रि महापर्व 2026 (15 फरवरी) पर भगवान महाकाल के दर्शन के लिए उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस अवसर पर सामान्य श्रद्धालुओं को लगभग डेढ़ किलोमीटर और 250 रुपए की शीघ्र दर्शन रसीद या पासधारी श्रद्धालुओं को करीब एक किलोमीटर पैदल चलने के बाद भगवान महाकाल के दर्शन होंगे।

महाकाल के दर्शन पर अलका लांबा, बोलीं—हमारी पहचान नाम से नहीं, काम से है

उज्जैन  अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचीं। उन्होंने श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन कर भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया। अलका लांबा ने महाकाल मंदिर में पहले नंदी हाल और फिर देहरी से भगवान महाकाल के दर्शन किए। इसके बाद उन्होंने नंदी मंडपम में बैठकर ध्यान लगाया। धार्मिक वातावरण के बीच उनका दौरा आध्यात्मिक दिखा, लेकिन बाहर निकलते ही सुर सियासी हो गए। मीडिया से चर्चा में लांबा ने नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और राज्य सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि नाम में “भगवान” जोड़ लेना काफी नहीं, असली पहचान काम से होती है। उनके मुताबिक, आज प्रदेश में कुछ नेताओं के काम समाज को जोड़ने के बजाय तोड़ने वाले नजर आ रहे हैं। उन्होंने भगवान शिव के नीलकंठ स्वरूप का उदाहरण देते हुए कहा कि शिव ने सृष्टि बचाने के लिए विष पिया था, लेकिन आज के कुछ सत्ताधारी समाज में जहर घोलने का काम कर रहे हैं। उनका आरोप था कि इस तरह की भाषा और राजनीति लोगों के बीच नफरत बढ़ा रही है। लांबा ने यात्रा के दौरान देखी एक घटना का जिक्र करते हुए और गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि इंदौर से उज्जैन आते समय उन्होंने एक ऑटो पर ऐसा प्रचार देखा जिसमें एक ऐसे दोषी अपराधी का महिमामंडन किया गया था, जिसे नाबालिग बेटियों से जुड़े जघन्य अपराधों में सजा हो चुकी है। इसे उन्होंने बेहद शर्मनाक बताते हुए कहा कि अपराधियों को हीरो बनाकर पेश करना महिलाओं की सुरक्षा के लिए खतरनाक सोच है। महिला कांग्रेस की नेता ने साफ कहा कि उनकी पार्टी ऐसी मानसिकता के खिलाफ लगातार आवाज उठाएगी और समाज में अपराधियों की छवि चमकाने की कोशिशों का विरोध करेगी। धार्मिक यात्रा के बहाने शुरू हुआ यह दौरा, आखिरकार प्रदेश की सियासत में तीखा संदेश छोड़ गया।  

महाकाल की नगरी उज्जैन में बन रहा महाकाल-संस्कृति वन, लगेंगे 30 हजार पौधे, योग-ध्यान केंद्र होगा तैयार

उज्जैन  PM मोदी की पहल पर गुजरात में स्थापित संस्कृति वन की तर्ज पर उज्जैन में भी एक भव्य महाकाल संस्कृति वन का निर्माण किया जा रहा है। यह वन 12 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला होगा और इसे कोठी रोड पर बनाया जा रहा है। इस वन के निर्माण के साथ पर्यावरण और संस्कृति को एक साथ जोड़ा जाएगा, ताकि आने वाले लोग न केवल प्रकृति से जुड़ सकें, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी समृद्ध हो सकें। संस्कृति वन का निर्माण महाकाल संस्कृति वन को कुल 13 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जा रहा है। इस वन में 30 हजार पौधे लगाए गए हैं, जिनमें औषधीय पौधों का भी समावेश है। यहां नीम, करंज, बरगद, सिंदूर, बेल, पाम, चंदन, बादाम और कदम जैसे पौधे लगाए गए हैं। यह वन केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के भी प्रतीक बनेगा। इस वन में योग केंद्र भी बनाया जाएगा, जहां लोग ध्यान और योग का अभ्यास कर सकेंगे। इसके अलावा, अवंतिका नगरी का इतिहास दर्शाने के लिए राजा विक्रमादित्य की सिंहासन बत्तीसी का भी निर्माण किया जा रहा है। यह वन धार्मिक यात्रा के साथ-साथ सांस्कृतिक पर्यटन का एक अनूठा केंद्र बनेगा। महाकाल संस्कृति वन में कुल 8 ब्लॉक्स होंगे, जिनका नाम कालिदास वन, शांति वन, जैव विविधता वन, नवग्रह वाटिका, सिंदूर वाटिका, रुद्राक्ष वाटिका जैसे आकर्षक नामों से रखा जाएगा। विक्रम टीले और सिंहासन बत्तीसी उज्जैन के महाकाल संस्कृति वन में सम्राट विक्रमादित्य की भव्य सिंहासन बत्तीसी का दर्शन भी होगा। विक्रम टीला भी यहां विशेष रूप से सुसज्जित किया जा रहा है, जहां फूलों से सुसज्जित एक सुंदर दृश्य प्रस्तुत किया जाएगा। यह दृश्य न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी अनूठा होगा। स्थायी कुंभ सिटी का निर्माण उज्जैन सिंहस्थ कुंभ 2028 से पहले उज्जैन में एक स्थायी कुंभ सिटी का निर्माण किया जाएगा। 5,000 करोड़ रुपए की लागत से इस सिटी का निर्माण किया जाएगा, जिसमें इंटरकनेक्टेड चौड़ी सड़के, अंडरग्राउंड लाइटिंग, हॉस्पिटल, स्कूल, खूबसूरत चौराहे और सड़कों के बीच डिवाइडर जैसी सुविधाएं होंगी। यह स्थायी कुंभ सिटी सिंहस्थ कुम्भ के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए एक समृद्ध अनुभव प्रदान करेगी। सिंहस्थ से पहले एलिवेटेड ब्रिज की सौगात सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन को दो एलिवेटेड ब्रिज भी मिलेंगे, जिनकी मंजूरी मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दी है। ये ब्रिज नागपुर की तर्ज पर बनाए जाएंगे और इस सड़क मार्ग को चौड़ा करेंगे, जिससे तीर्थयात्रियों की यात्रा सुगम हो सकेगी। महाकाल संस्कृति वन के अन्य आकर्षण महाकाल संस्कृति वन में सप्त सागरों के आसपास 84 शिवलिंग स्थापित किए जाएंगे, जिनकी परिक्रमा की जा सकेगी। इसके अलावा, यहां फूल घाटी, विद्या वाटिका, कालिदास अरण्य, नक्षत्र वाटिका, और चरक वाटिका जैसे अनेक आकर्षक स्थान होंगे। इसके साथ ही, भगवान श्री कृष्ण की 64 कलाओं का भी यहां दर्शन किया जा सकेगा। भविष्य की योजनाएं और सुविधाएं महाकाल संस्कृति वन में कैफेटेरिया, पार्किंग, व्हीलचेयर और ग्रीन शेड जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। इसके अलावा, वन में शुद्ध ऑक्सीजन की आपूर्ति भी सुनिश्चित की जाएगी। वन विभाग जल्द ही अहमदाबाद जाकर वहां के संस्कृति वन की स्टडी करेगा, ताकि यहां भी उसी मॉडल पर काम किया जा सके। धार्मिक पर्यटन को मिलेगा एक नया रूप  महाकाल संस्कृति वन उज्जैन का एक अद्भुत और अनूठा धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र बनेगा। यह वन न केवल पर्यटकों को धार्मिक अनुभव प्रदान करेगा, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी कार्य करेगा। इस वन के साथ उज्जैन में धार्मिक पर्यटन को एक नया रूप मिलेगा और यह स्थान तीर्थ यात्रियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन जाएगा। उज्जैन का फिर से लौटेगा प्राचीन वैभव, मोहन यादव की इच्छानुसार महाकाल क्षेत्र के सभी गेटों का किया जाएगा जीर्णोद्धार. डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप 2600 साल पुरानी परंपरा का वैभव अब महाकाल की नगरी उज्जैन में लौटने जा रहा है. प्राचीनकाल में बाबा महाकाल की नगरी में प्रवेश द्वार की परंपरा रही है. जिसका जीर्णोद्धार अब मुख्यमंत्री के निर्देशन में प्रशासन कराने जा रहा है. उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि प्राचीन समय में उज्जैन में जिस तरह के प्रवेश द्वारा हुआ करते थे, उसी तरह के द्वार फिर से बनाए जाएंगे. जिससे नगर में आने वाले पर्यटक महाकाल नगरी की प्राचीन परंपरा को जान सकेंगे. आइए जानते हैं ये द्वारा कैसे थे और इसका इतिहास क्या था. क्या कहते हैं इतिहास के जानकार? विक्रम विश्वविद्यालय में पुराविद प्रोफेसर डॉ. रमण सोलंकी बताते हैं कि “प्राचीन भारत में गोपुरम की परंपरा रही है. यह एक प्रकार का विशाकाय द्वार होता है. इसका अर्थ होता है ‘मंदिर का द्वार’. दक्षिण भारत के मंदिरों में ये आज भी मौजूद है. 2600 साल पहले उज्जैन एक राजधानी के रूप में हुआ करता था. यह 16 महाजनपदों में से एक अवंती महाजनपद की राजधानी थी, जिसके पहले राजा चंद प्रद्योत थे. उन्होंने अपने शासन काल में उज्जैन क्षेत्र में परिखाये और गोपुरम निर्माण करवाए, बाद में अशोक मौर्य जब राज्यपाल बनकर आए तो उन्होंने उनका जीर्णोद्धार करवाया.” राजा भोज ने बनवाया था चौबीस खंबा प्रवेश द्वार डॉ रमण सोलंकी आगे बताते हैं कि “सम्राट विक्रमादित्य ने अपने कार्यकाल में इस परंपरा को आगे बढ़ाया. इसके अलावा परमारों के सम्राट राजा भोज ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कई द्वारों का निर्माण कराया. राजा भोज द्वारा बनवाया गया चौबीस खंबा प्रवेश द्वार आज भी मौजूद है. इस पर देवी महामाया और देवी महालया विराजमान हैं. महाकाल के द्वारा का कराया जाएगा जीर्णोद्धार  मुगल शासक अकबर ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए दानी गेट, सती गेट, केडी गेट बनवाए. अब मोहन यादव इन द्वारों के जीर्णोद्धार और निर्माण कराने जा रहे हैं. इससे 2600 साल पुरानी परंपरा का वैभव फिर से लौटेगा. इससे यहां आने वाले श्रद्धालु महाकाल नगरी के इस सुनहरे इतिहास को जान सकेंगे और देख सकेंगे.” करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है महाकाल का दरबार दरअसल, विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकाल का धाम लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का खास केंद्र है. मंदिर का इतिहास हजारों वर्षों पूर्व का बताया जाता है. ज्योतिर्लिंग होना मतलब स्वयंभू … Read more

बाबा महाकाल के दर्शन करने के बाद केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन मांगी देश में खुशहाली का आशीर्वाद

उज्जैन  केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह शुक्रवार को उज्जैन प्रवास के दौरान विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर भगवान के दर्शन करने पहुंचे। यहां उन्होंने चांदी द्वार से बाबा महाकाल का पूजन अर्चन किया और नंदी हॉल मे ध्यान भी लगाया। महाकालेश्वर मंदिर के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने बताया कि केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह बाबा महाकाल के दर्शन के दौरान भक्ति में लीन नजर आए। उन्होंने चांदी द्वारा से बाबा महाकाल का पूजन अर्चन किया। नंदी हॉल में पहुंचकर ध्यान लगाया। फिर नंदी जी का पूजन अर्चन कर उनके कानों में अपनी मनोकामना भी कही। इस दौरान श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सहायक प्रशासक प्रतीक द्विवेदी द्वारा उनका सम्मान किया गया। बाबा महाकाल के दर्शन करने के बाद राजीव रंजन सिंह ने मीडिया से कहा कि यहां की दर्शन व्यवस्था काफी अच्छी है। मुझे यहां पर आकर पॉजिटिव एनर्जी का अहसास हुआ और मेरा जीवन धन्य हो गया। ललन सिंह के नाम से पहचाने जाते हैं राजीव रंजन सिंह राजीव रंजन सिंह को ललन सिंह के नाम से जाना जाता है। वे एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं, जो 2024 से पंचायती राज के 11वें मंत्री और मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी के तीसरे मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। वे जनता दल (यूनाइटेड) से 17वीं लोकसभा में मुंगेर का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद भी हैं। वे 31 जुलाई 2021 से 29 दिसंबर 2023 तक जेडीयू (जनता दल यूनाइटेड) के राष्ट्रीय पार्टी अध्यक्ष थे। वे जेडी(यू) की बिहार इकाई के पूर्व अध्यक्ष भी थे। मई 2014 के लोकसभा चुनावों में हार के बाद जून 2014 में उन्हें बिहार विधान परिषद के सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया। वे भारत की 15वीं लोकसभा के सदस्य थे और बिहार के मुंगेर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे। उन्होंने भारत की 14वीं लोकसभा में बेगूसराय निर्वाचन क्षेत्र का भी प्रतिनिधित्व किया। ललन सिंह मुंगेर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से 2024 का लोकसभा चुनाव जीते। 

उज्जैन में प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई , जब आंख खुली तो बुलडोजर अपनी कार्रवाई में लग चुका था

उज्जैन  श्री महाकालेश्वर मंदिर से सटे इलााके में बुधवार को फिर बुलडोजर गरजा. थाना महाकाल क्षेत्र अंतर्गत आने वाली बेगमबाग कॉलोनी में अवैध निर्माण को हटाया गया. यहां पर 23 मई को भी बुलडोजर की कार्रवाई हुई थी. इस दौरान 3 प्रॉपर्टी ध्वस्त करने के बाद 4 और अवैध निर्माण ध्वस्त किए गए. इस दौरान शांति बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल भी तैनात रहा. प्रशासन ने कुल 28 प्रॉपर्टी चिह्नित की गौरतलब है कि बेगमबाग कॉलोनी श्री महाकाल मंदिर से 500 मीटर के दायरे में आती है. महाकालेश्वर मंदिर जाने के लिए यहीं से मुख्य रास्ता भी है. यहां ब्रिज का निर्माण, सड़क चौड़ीकरण व अन्य कार्य किए जाने हैं. इस क्षेत्र में उज्जैन विकास प्राधिकरण ने कुल 28 मकान-दुकान चिह्नित किए हैं. इन प्रॉपर्टी के मालिकों ने नियम-शर्तों का उल्लंघन किया है, जिन्हें ध्वस्त किया जाना है. सभी 28 प्रॉपर्टी संचालकों ने न्यायालय से स्टे लिया है, जिसकी समय सीमा खत्म होती जा रही. अब तक कुल 7 प्रॉपर्टी ध्वस्त की जा चुकी हैं. प्रशासन का कहना है कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी. महाकाल क्षेत्र में सुबह से गरजा बुलडोजर  उज्जैन विकास प्राधिकरण सीईओ संदीप सोनी ने बताया “श्री महाकाल मंदिर क्षेत्र में बेगमबाग मोहल्ला है, जहां 1998 में विकास प्राधिकरण ने जमीन दुकानें लीज पर दी थीं. सर्वे में पाया गया कि लीज रिन्यू नहीं करवाई गई. दुकानों के साथ ही इस एरिया को रहवासी भी बना लिया. नोटिस दिए पर जवाब नहीं मिला तो अब ध्वस्तीकरण के लिए 7 दिन में खाली करने के नोटिस जारी किए गए थे. अब कार्रवाई की जा रही है.” IPS राहुल देशमुख ने बताया “शांति बनाए रखने के लिए 250 से अधिक पुलिस बल तैनात है. कार्रवाई शांतिपूर्वक जारी है.” 

श्रावण मास में रूद्रसागर पर बनाया गया नया पुल भीड़ नियंत्रण के लिए रूट डायवर्ट का मुख्य विकल्प होगा

उज्जैन ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में श्रावण मास में भक्तों को सम्राट अशोक सेतु के रास्ते मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा। रूद्रसागर पर बनाया गया नया पुल भीड़ नियंत्रण के लिए रूट डायवर्ट का मुख्य विकल्प होगा। मंदिर प्रशासन द्वारा बनाए जा रहे दर्शन प्लान में इस विषय पर प्रमुखता से विचार किया जा रहा है। महाकाल मंदिर के रूद्रसागर पर उज्जैन स्मार्ट सिटी कंपनी द्वारा 200 मीटर लंबा व 9 मीटर चौड़ा अत्याधुनिक पुल का निर्माण किया है। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने पुल का उद्घाटन कर इसे सम्राट अशोक सेतु नाम दिया है। हालांकि वर्तमान दर्शन व्यवस्था पूर्व निर्धारित मार्गों से सुचारू रूप से संचालित होने के कारण फिलहाल इस पुल का उपयोग नहीं किया जा रहा है। श्रावण मास में भीड़ नियंत्रण के लिए रूट डायवर्ट करने में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। चलित भस्म आरती व्यवस्था श्रावण मास में चलित भस्म आरती व्यवस्था में सम्राट अशोक सेतु मुख्य भूमिका निभा सकता है। क्योंकि श्रावण मास में सामान्य दिनों में रात 3 बजे तथा प्रत्येक रविवार को रात 2.30 बजे मंदिर के पट खुलेंगे, पश्चात भस्म आरती होगी। रात्रि के समय श्रद्धालु चारधाम पार्किंग से शक्तिपथ के रास्ते इस पुल से सीधे मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे। यह रास्ता वर्तमान मार्ग से करीब डेढ़ किलो मीटर छोटा भी है। इससे होकर दर्शनार्थी शीघ्र मंदिर में दर्शन कर बाहर निकल सकते हैं। अभी इस मार्ग से मिल रहा मंदिर में प्रवेश वर्तमान में सामान्य दर्शनार्थियों को चारधाम मंदिर पार्किंग से शक्तिपथ के रास्ते श्री महाकाल महालोक के नंदी द्वार से मंदिर में प्रवेश दिया जा रहा है। यहां से श्रद्धालु महालोक में भ्रमण करते हुए श्री मानसरोवर फैसिलिटी सेंटर से टनल के रास्ते मंदिर परिसर में होते हुए गणेश व कार्तिकेय मंडपम् से भगवान महाकाल के दर्शन कर पा रहे हैं। साढ़े 22 करोड़ की लागत से बना नया पुल सम्राट अशोक सेतु के निर्माण पर स्मार्ट सिटी कंपनी ने करीब साढ़े 22 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस पुल का मध्य भाग काफी चौड़ा है। यहां खड़े होकर श्रद्धालु रूद्रसागर का मनोरम दृश्य देख सकते हैं। पुल पर आकर्षक लाइट लगाई गई है। रात्रि के समय इस पुल से गुजरना एक अलग ही आनंददायक अनुभव रहेगा। डायवर्ट रूट के रूप में होगा उपयोग     सम्राट अशोक सेतु महाकाल मंदिर में प्रवेश का नया मार्ग है। यह वर्तमान मार्ग से छोटा रास्ता है, भीड़ नियंत्रण के लिए रूट डायर्वट में इसका उपयोग होगा। श्रावण के दर्शन प्लान में इस पर विचार चल रहा है। – एसएन सोनी, उप प्रशासक महाकाल मंदिर  

राजा चंद्र प्रद्योत ने उज्जैन में महाकाल मंदिर पहुंच मार्गों पर भव्य द्वार को पुनर्जीवित किया जा रहा

उज्जैन  भगवान महाकाल के दर्शन करने आने वाले भक्त अब भव्य द्वारों से होकर मंदिर पहुंचेंगे। प्रबंध समिति ने महाकाल मंदिर की ओर जाने वाले सभी मार्गों पर विशाल द्वार बनवाने का निर्णय लिया है। मंदिर के आसपास भव्य द्वार बनाने की परंपरा 2600 साल पुरानी है। अलग-अलग कालखंड में राजा-महाराजा मंदिर के पहुंच मार्गों पर द्वार बनवाते रहे हैं। आज भी चौबीस खंभा व महाकाल द्वार इसके प्रमाण हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुसार मंदिर समिति इतिहास का पुनर्लेखन भी करा रही है। अशोक मौर्य ने कराया था द्वारों का जीर्णोद्धार धर्मधानी उज्जैन में दुर्ग व द्वार की परंपरा छठी शताब्दी ईसा पूर्व से चली आ रही है। पुराविद डॉ. रमण सोलंकी ने बताया कि राजा चंद्र प्रद्योत ने महाकाल मंदिर पहुंच मार्गों पर भव्य द्वार बनवाए थे। जब अशोक मौर्य उज्जैन आए तो उन्होंने द्वारों का जीर्णोद्धार कराया। इसके बाद सम्राट विक्रमादित्य ने इनका संरक्षण किया। राजा भोज के शासन में भी यह परंपरा जीवित रही और उन्होंने चौबीस खंभा द्वार बनवाया। पुराने समय में इसी द्वार से भक्त महाकाल दर्शन के लिए मंदिर में प्रवेश किया करते थे। आज भी यह द्वार नगरीय सभ्यता के गौरवशाली इतिहास की गाथा सुना रहा है। भव्य और मनोरम महाकाल द्वार महाकाल मंदिर के उत्तर में महाकाल द्वार स्थित है। रामघाट पर शिप्रा स्नान के बाद श्रद्धालु इसी द्वार से मंदिर में प्रवेश करते थे। इस द्वार का निर्माण मध्यकाल में हुआ है। द्वार के दोनों ओर भगवान गणेश की मूर्ति विराजित है। सुरक्षा के लिए देवी-देवताओं की प्रतिष्ठा राजा महाराजा नगर की सुरक्षा के लिए द्वारा का निर्माण कराते थे। यह द्वार आक्रांताओं के आक्रमण से नगर को सुरक्षित रखते थे। व्याधियों से रक्षा के लिए भी इन द्वारों का विशेष महत्व था। नगर प्रवेश द्वारों पर देवी-देवताओं की स्थापना की जाती थी। चौबीस खंभा, महाकाल द्वार, सती गेट सहित नगर में मौजूद द्वारों पर देवी-देवता विराजित हैं। अनादिकाल से समय-समय पर इनका पूजन किया जाता है। आज भी नगर की सुख-समृद्धि के लिए चौबीस खंबा स्थित माता महामाया व महालया की शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर नगर पूजा की जाती है। प्रबंध समिति की बैठक में निर्णय कलेक्टर रोशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में आठ मई को आयोजित मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में महाकाल मंदिर पहुंच मार्गों पर द्वार बनाने का निर्णय लिया गया है। समिति उज्जैन विकास प्राधिकरण के माध्यम से इन द्वारों का निर्माण कराएगी। योजना में यह खास     बड़ा गणेश, हरसिद्धि, शक्ति पथ पर होगा विशाल द्वारों का निर्माण।     नीलकंठ, नंदी, धनुष तथा शहनाई द्वार पर धातु के कलात्मक द्वार बनेंगे।  

महाकाल मंदिर में भस्मआरती में बैठने वालों की संख्या कम की जाएगी, चलित भस्मआरती के जरिए श्रद्धालुओं को दर्शन कराए जाएंगे

उज्जैन महाकाल मंदिर में भस्मआरती में बैठने वालों की संख्या कम की जाएगी। चलित भस्मआरती के जरिए श्रद्धालुओं को दर्शन कराए जाएंगे। गुरुवार को मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर और समिति अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह ने की। अभी भस्मआरती में 1700 श्रद्धालु शामिल होते हैं। मंदिर में दान किए गए सोने-चांदी के आभूषणों का मूल्यांकन अब मंदिर में ही होगा। इसके लिए मशीन और ऑपरेटर लगाए जाएंगे। दान में मिली ई-कार्ट के लिए चार्जिंग स्टेशन और पार्किंग स्थल बनाए जाएंगे। मंदिर की सभी सुविधाओं की जानकारी अब रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और मंदिर गेटों पर मिलेगी। महाराजवाड़ा और महाकाल परिसर को जोड़ने के लिए रिटेनिंग वॉल बनेगी। हर प्रवेश द्वार पर सुरक्षा गेट लगाए जाएंगे। उज्जैन में गीता भवन की स्थापना को समिति ने मंजूरी दी।  

साउथ एक्टर यश आज महाकालेश्वर के मंदिर पहुंचे, बाबा महाकाल के न सिर्फ दर्शन-पूजन किए

उज्जैन  मध्य प्रदेश में स्थित महाकाल की नगरी उज्जैन में सोमवार तड़के बाबा के भक्तों में उस समय उत्साह और भी बढ़ गया, जब उनके बीच साउथ की सुपरहिट फिल्म केजीएफ फेम रॉकी भाई उर्फ अभिनेता यश भी बाबा के दर्शन-पूजन करते नजर आए। जी हां, साउथ एक्टर यश आज उज्जैन स्थित महाकालेश्वर के मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने बाबा महाकाल के न सिर्फ दर्शन-पूजन किए, बल्कि भस्म आरती में भी शामिल हुए। वहीं, मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने महाकाल के दरबार में आने का अनुभव भी साझा किया। उन्होंने कहा- यहां आना अविश्वसनीय रहा।  भस्म आरती में शामिल होने के बाद यश ने चांदी द्वार से बाबा महाकाल के दर्शन-पूजन किए, साथ ही माथा टेका। पूजन आकाश पुजारी ने संपन्न कराया। मंदिर के नंदी हॉल में बैठकर अभिनेता शिव साधना करते नजर आए। चांदी द्वार से उन्होंने माथा टेककर बाबा का आशीर्वाद लिया। दर्शन के बाद पुजारी ने अभिनेता को प्रसाद स्वरूप लाल रंग का महाकाल नाम का छपा पटका भेंट किया। बोले- दर्शन करने का अनुभव अविश्वसनीय रहा वहीं, मीडिया से चर्चा के दौरान सुपरस्टार यश ने कहा, महाकाल का दर्शन करके बहुत अच्छा लगा। यहां दर्शन करने का अनुभव अविश्वसनीय रहा। मैं यहां की व्यवस्थाएं देखकर बेहद खुश हूं। सभी श्रद्धालुओं को देखकर बहुत अच्छा लगा।

महाकाल मंदिर में नियुक्ति से पहले पुलिस वेरिफेक्शन आवश्यक

उज्जैन  मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थापित महाकालेश्वर मंदिर देश ही नहीं विदेशों में भी फेमस है. महाकाल मंदिर में हर दिन बड़ी हस्तियों से लेकर आम श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है. वहीं महाकाल मंदिर के दर्शन और प्रसाद को लेकर भी नए-नए नियम आते रहते हैं. इसी तरह खबर है कि ठगी से बचने के लिए महाकालेश्वर मंदिर में अब कोई भी नई नियुक्ति बिना पुलिस वेरिफिकेशन के नहीं हो सकेगी. नियुक्ति से पहले चेक होगा पुलिस रिकॉर्ड एसपी प्रदीप शर्मा ने इस संबंध में महाकाल मंदिर के प्रशासक को एक आधिकारिक पत्र भेजा है. पत्र में कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति की नियुक्ति से पहले उसका पुलिस रिकॉर्ड अनिवार्य रूप से जांचा जाएगा. यह कदम हाल ही में सामने आए ठगी और अवैध वसूली के मामलों के बाद उठाया गया है. एसपी प्रदीप शर्मा ने कहा कि “ठगी को देखते हुए पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य किया गया है.” मंदिर में ठगी के मामलों के बाद लिया फैसला कुछ समय पहले दर्शन और भस्म आरती के नाम पर श्रद्धालुओं से धोखाधड़ी के मामलों में 14 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई थी. इन आरोपियों में मंदिर के कर्मचारी भी शामिल थे. वहीं भस्म आरती बुकिंग और दर्शन के नाम पर भी फर्जीवाड़ा सामने आया था. जिसमें मंदिर की आउटसोर्स कंपनी के कर्मचारियों की संलिप्तता पाई गई. इन मामलों में शामिल कर्मचारियों को हाल ही में 90 दिनों बाद जमानत मिली है. मंदिर प्रशासन को सतर्क रहने की अपील इन घटनाओं को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने मंदिर समिति को सतर्क रहने की सलाह दी है. अब हर नई नियुक्ति से पहले पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को अनिवार्य कर दिया गया है, क्योंकि लगातार देखने में आ रहा था कि महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं के साथ ठगी हो रही थी. इसी के साथ अब महाकालेश्वर मंदिर में नई भर्ती होने से पहले पुलिस सत्यापन करना जरूरी होगा. इसको लेकर उज्जैन एसपी ने पत्र लिखकर महाकाल प्रबंधन समिति को कहा है.

ज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के शीश पर कलशों की गलंतिका बांधी, ज्येष्ठ पूर्णिमा तक चलेगी परंपरा

 उज्जैन  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से भगवान महाकाल के शीश मिट्टी के कलशों से शीतल जलधारा प्रवाहित करने की शुरुआत हो गई है। सुबह 6 बजे पुजारियों ने पवित्र नदियों का आवाह्न कर भगवान के शीश 11 मिट्टी के कलशों की गलंतिका बांधी। प्रसिद्ध मंगलनाथ मंदिर में भी भगवान मंगलनाथ को वैशाख की भीषण गर्मी में ठंडक प्रदान करने के लिए गलंतिका बांधने की शुरुआत हो गई है। पं.महेश पुजारी ने बताया महाकाल मंदिर की पूजन परंपरा में वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से ज्येष्ठ पूर्णिमा तक पूरे दो माह तेज गर्मी रहने की मान्यता है। इन 60 दिनों में भगवान महाकाल को ठंडक प्रदान करने के लिए भगवान के शीश मिट्टी से बनी मटकियों से जलधारा प्रवाहित करने की परंपरा है। दो माह तक प्रतिदिन सुबह 6 से शाम 4 बजे तक गलंतिका बांधी जाती है। रविवार को इसकी शुरुआत हुई। पुजारियों ने गंगा, यमुना, कांवेरी, नर्मदा, शिप्रा आदि नदियों का आवाह्न कर उन्हीं के नाम से 11 कलश की गलंतिका बांधी। पंचामृत पूजन के बाद बांधी गलंतिका मंगल ग्रह की जन्म स्थली कहे जाने वाले प्रसिद्ध मंगलनाथ मंदिर में रविवार को गलंतिका बांधी गईं। सुबह गादीपति महंत जितेंद्र भारती द्वारा भगवान का पंचामृत अभिषेक पूजन कर भात अर्पण किया गया। इसके बाद भगवान के शीश गलंतिका बांधी गई। महंत भारती ने बताया भगवान मंगलनाथ अंगारकाय अर्थात अंगारे के समान कांति वाले देव हैं। इनकी प्रकृति उष्ण मानी जाती है। इसलिए जल, पंचामृत तथा भात अर्पण करने से वे प्रसन्न होते हैं। गर्मी में भगवान को शीतल सुगंधित द्रव्य, शीतल पुष्प आदि अर्पण करने का भी महत्व है।

महाकाल के शिखर पर अब लहराएगा ब्रह्मध्वज, मप्र के प्रमुख मंदिरों-संस्थानों पर भी लगाएंगे ध्वज, नीम जल से होगा बाबा का अभिषेक

उज्जैन  हिंदू नववर्ष गुड़ी पड़वा पर श्री महाकालेश्वर मंदिर में एक विशेष धार्मिक आयोजन होने जा रहा है। इस साल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर मंदिर के मुख्य शिखर पर सूर्य चिन्ह वाला केसरिया ब्रह्म ध्वज फहराया जाएगा। यह ध्वज प्रदेशभर के प्रमुख मंदिरों और संस्थाओं में भी लगाया जाएगा। साथ ही मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना, भोग आरती और पंचांग पूजन की प्रक्रिया भी होगी।  मंदिर के शिखर पर फहराया जाएगा ब्रह्म ध्वज हिंदू नववर्ष गुड़ी पड़वा पर श्री महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर ध्वज बदलने की परंपरा का पालन किया जाता है। इस बार मंदिर के शिखर पर ब्रह्म ध्वज को फहराया जाएगा, जो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से प्रदान किया गया है। पिछले दिनों भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव व मंत्रिपरिषद ने ब्रह्म ध्वज व विक्रम संवत पुस्तिका का लोकार्पण किया है। इसके बाद से यह ध्वज श्री महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर स्थापित करने की योजना बनाई गई थी। साथ ही सम्राट विक्रमादित्य शोधपीठ ने इस ध्वज को प्रदेश के प्रमुख मंदिरों और शासकीय व अशासकीय संस्थानों में भी लगाने की पहल की है। श्री महाकालेश्वर मंदिर के साथ-साथ इस ध्वज को प्रदेशभर के प्रमुख स्थानों पर फहराया जाएगा। 65 वर्षों तक ध्वज को पूजा स्थान पर रखा था सम्राट विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्री राम तिवारी ने इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विक्रम संवत ज्ञान, संस्कृति, विज्ञान और अनुसंधान का महापर्व है। इस दिन ब्रह्म ध्वज का फहराया जाना एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कड़ी को जोड़ता है। उन्होंने बताया कि इस ध्वज को पं. सूर्यनारायण व्यास परिवार से प्रेरणा लेकर तैयार किया गया, जिन्होंने 65 वर्षों तक इस ध्वज को सुरक्षित पूजा स्थान पर रखा था। गुड़ी पड़वा पर विशेष पूजा और अभिषेक 30 मार्च को गुड़ी पड़वा के दिन श्री महाकालेश्वर मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन किया जाएगा। महाराष्ट्रीयन पंचांग के अनुसार, भगवान महाकाल का नीम मिश्रित जल से अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद, मंदिर में नई ध्वज का फहराया जाएगा। इस अवसर पर विशेष भोग आरती का आयोजन किया जाएगा, जिसमें श्री खंड और पूरणपोली का भोग भगवान को अर्पित किया जाएगा। इसके साथ ही, मंदिर के नैवेद्य कक्ष में गुड़ी आरोहण की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी। गुड़ी पड़वा पर इस बार मंदिर में पंचांग पूजन भी किया जाएगा, जिससे यह दिन और भी विशेष हो जाएगा।

महाकाल की शरण में केएल राहुल, आईपीएल में सफलता के लिए आशीर्वाद लिया

उज्जैन  देश के प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास और इंडियन क्रिकेटर केएल राहुल सोमवार को उज्जैन पहुंचे. कुमार विश्वास व केएल राहुल ने यहां महाकालेश्वर मंदिर पुहंच बाबा महाकाल के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया. वहीं डॉ. कुमार विश्वास ने नंदी हॉल में बैठक भगवान महाकाल का ध्यान लगाया. हमारी पीढ़ियों पर महाकाल की कृपा : कुमार विश्वास सोमवार को उज्जैन पहुंचे डॉ. कुमार विश्वास ने तकरीबन 15 मिनट तक महाकाल का ध्यान लगाया और पूजा अर्चना की. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के बाद डॉ. विश्वास ने कहा, ” मैं उनसे क्या मांगू वो तो सबका मन जानते हैं. बाबा महाकाल की कृपा हमारे परिवार पर पीढ़ियों-शताब्दियों से बनी हुई है. जब भी अवसर मिलता है, मैं यहां आकर बाबा के चरणों में शीश नवाता हूं. बच्चे भी प्रवास पर हैं और जैसे ही वापस लौटेंगे वे भी बाबा की शरण में माथा टेकने आएंगे.” इंदौर में अपने-अपने राम गौरतलब है कि डॉ. कुमार विश्वास इन दिनों इंदौर प्रवास पर हैं. वे यहां इंदौर के गुजराती इनोवेटिव कॉलेज में ”अपने-अपने राम’ कार्यक्रम में राम कथा सुना रहे हैं. रविवार को कार्यक्रम के पहले दिन के समापन के बाद डॉ. विश्वास महाकाल के दर्शन करने के लिए रवाना हुए. परिवार के साथ पहुंचे थे केएल राहुल वहीं क्रिकेटर केएल राहुल ने भी परिवार के साथ भगवान महाकाल के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया. बता दें कि क्रिकेटर केएल राहुल कई बार बड़ी क्रिकेट सीरीज से पहले और बाद में महाकाल के दर्शन करने पहुंचते हैं. चैंपियंस ट्रॉफी के बाद केएल राहुल फिर यहां पहुंचे.  बाबा महाकाल के दर्शन कर मांगी सफलता की कामना महाकालेश्वर मंदिर के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि केएल राहुल विशेष रूप से बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आए थे। उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर अपने मस्तक पर तिलक लगाया और गले में आंकड़े की माला पहनी। पूजन के बाद वे नंदी हॉल पहुंचे और नंदी महाराज के कानों में अपनी मनोकामना कही। बाबा महाकाल के अनन्य भक्त हैं केएल राहुल बताया जाता है कि केएल राहुल बाबा महाकाल के अनन्य भक्त हैं और समय मिलने पर उज्जैन आकर महाकाल के दर्शन करते हैं। इससे पहले भी वे अपनी पत्नी, अभिनेत्री आथिया शेट्टी के साथ बाबा महाकाल के दरबार में हाजिरी लगा चुके हैं। आईपीएल में नई टीम से खेलेंगे केएल राहुल जल्द ही शुरू होने वाले इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के लिए केएल राहुल पूरी तरह तैयार हैं। इस सीजन में वे दिल्ली कैपिटल्स टीम की ओर से खेलते नजर आएंगे। बाबा महाकाल के दर्शन के दौरान उन्होंने अपनी टीम की शानदार परफॉर्मेंस के लिए प्रार्थना की।  

महाकालेश्वर मंदिर में काम करने वाले सैकड़ों आउटसोर्स कर्मचारी हर महीने वेतन के लिए तरस रहे

उज्जैन मध्य प्रदेश के महाकालेश्वर मंदिर में काम करने वाले सैकड़ों आउटसोर्स कर्मचारी हर महीने वेतन के लिए तरस रहे हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि रक्षाबंधन, दशहरा, दीपावली और अब होली जैसे बड़े त्योहार भी उनके लिए मुश्किल भरे साबित हो रहे हैं। समय पर वेतन न मिलने से उनकी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना कठिन हो गया है, लेकिन मंदिर प्रशासन इस पर ध्यान देने के बजाय चुप्पी साधे बैठा है। हर महीने देरी से मिल रहा वेतन मंदिर में सफाई, सुरक्षा, तकनीकी और अन्य सेवाओं में लगे करीब 1500 कर्मचारी क्रिस्टल और केएसएस जैसी आउटसोर्स कंपनियों के माध्यम से नियुक्त किए गए हैं। अनुबंध के अनुसार, उन्हें हर महीने की 5 तारीख तक वेतन मिल जाना चाहिए, लेकिन हकीकत यह है कि वेतन कभी 15 तारीख के बाद तो कभी 25 तारीख तक टल जाता है। त्योहारों पर अधूरी रह जाती हैं जरूरतें समय पर वेतन न मिलने की वजह से त्योहारों पर कर्मचारियों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। न तो वे घर की जरूरतें पूरी कर पाते हैं और न ही परिवार के साथ त्योहार मना पाते हैं। इस साल भी रक्षाबंधन से लेकर होली तक उनकी आर्थिक परेशानियां कम नहीं हुईं, जिससे उनकी खुशियां फीकी पड़ गईं। प्रशासनिक उदासीनता से बढ़ी समस्या मंदिर प्रशासन इस पूरे मामले पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। कर्मचारियों से ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की उम्मीद की जाती है, लेकिन उनके वेतन को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही। वेतन में देरी की वजह से कई बार कर्मचारियों पर दर्शनार्थियों से अवैध वसूली के आरोप भी लगे हैं, जिन पर कार्रवाई भी हुई है। नियंत्रण की कमी, बढ़ता असंतोष मंदिर समिति के वरिष्ठ अधिकारियों को इस समस्या की पूरी जानकारी है, लेकिन आउटसोर्स कंपनियों पर उनका कोई प्रभाव नहीं दिख रहा। कर्मचारी भी मजबूरी में शोषण सहने को मजबूर हैं, क्योंकि नौकरी छोड़ने का जोखिम नहीं उठा सकते। अगर समय पर वेतन नहीं मिला, तो आने वाले दिनों में असंतोष और बढ़ सकता है, जिससे मंदिर की कार्यप्रणाली भी प्रभावित हो सकती है।

14 मार्च धुलेंडी पर भस्म आरती में हर्बल गुलाल से होली खेलेंगे राजा

उज्जैन  विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में 13 मार्च को राजसी वैभव के साथ होली उत्सव मनेगा। भगवान महाकाल की संध्या आरती के बाद प्रदोषकाल में होलिका का पूजन उपरांत दहन किया जाएगा। 14 मार्च को धुलेंडी पर तड़के 4 बजे भस्म आरती में पुजारी भगवान महाकाल के साथ हर्बल गुलाल से होली खेलेंगे। उत्सव को लेकर तैयारी शुरू हो गई है। ज्योतिर्लिंग की पूजन परंपरा में होली उत्सव का विशेष महत्व है। देशभर से सैकड़ों भक्त राजा की रंगरंगीली होली देखने मंदिर पहुंचते हैं। इस बार यह उत्सव 13 मार्च को पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। मंदिर परिसर में श्री ओंकरेश्वर मंदिर के सामने पुजारी, पुरोहित परिवार द्वारा होलिका का निर्माण किया जाएगा। शाम 7.30 बजे भगवान महाकाल की संध्या आरती के बाद पुजारी वैदिक मंत्रोच्चार के साथ होलिका का पूजन करेंगे। पश्चात होलिका का दहन होगा। मंदिर समिति उपलब्ध कराएगी हर्बल गुलाल परंपरा अनुसार 14 मार्च को होली उत्सव मनाया जाएगा। तड़के 4 बजे भस्म आरती में पुजारी भगवान महाकाल को हर्बल गुलाल अर्पित करेंगे। मंदिर समिति पुजारियों को प्राकृतिक उत्पादों से तैयार हर्बल गुलाल उपलब्ध कराएगी। बताया जाता है, मंदिर समिति होली उत्सव के लिए एक थाल भरकर गुलाल उपलब्ध कराती है। वैसे भी ज्योतिर्लिंग क्षरण मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी ने भगवान को समिति मात्रा में पूजन सामग्री अर्पित करने का सुझाव दिया है। ज्योतिष का मत : 13 मार्च को होली मनाना शास्त्र सम्मत ज्योतिष व धर्मशास्त्र के जानकार 13 मार्च को होली मनाना शास्त्र सम्मत बता रहे हैं। ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला ने बताया 13 मार्च को सुबह 10 बजकर 20 मिनट तक चतुर्दशी तिथि रहेगी। इसके बाद पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र व सिंह राशि के चंद्रमा की साक्षी में पूर्णिमा तिथि लगेगी, जो प्रदोष काल में पूर्ण रूप से विद्यमान रहेगी। धर्मशास्त्र में होलिका का पूजन प्रदोषकाल में बताया गया है। इसलिए शुभयोग व नक्षत्र में 13 मार्च को प्रदोषकाल में होलिका का पूजन करना श्रेष्ठ है। इस दिन पाताल वासनी भद्रा भी रहेगी, इसलिए होलिका का दहन अवश्य रात 11.30 बजे के बाद करना चाहिए। सामान्यत: होलिका का दहन अगले दिन सुबह 5 बजे ब्रह्म मुहूर्त में किया जाता है। ऐसे में 13 व 14 मार्च की तारीख होली तथा धुलेंडी मनाने के लिए शास्त्र सम्मत है। सिंहपुरी में पांच हजार कंडों से बनेगी हर्बल होली पुराने शहर सिंहपुरी में गाय के गोबर से बनाए गए पांच हजार कंडों से होली बनाई जाएगी। आयोजन समिति का दावा है कि यह विश्व की सबसे बड़ी हर्बल होली है। इसमें सिर्फ गाय के गोबर से बने कंडों का उपयोग होता है। लकड़ी का उपयोग नहीं किया जाता है। होली के मध्य में डांडा के रूप में ध्वज लगाया जाता है। इस बार यह आयोजन 13 मार्च को होगा। शाम को प्रदोष काल में चार वेद के ब्राह्मण चतुर्वेद पारायण से होलिका का पूजन करेंगे। रात्रि जागरण के उपरांत अगले दिन सुबह 5 बजे ब्रह्म मुहूर्त में होलिका का दहन किया जाएगा।

बाबा महाकाल की वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. पनगढ़िया ने की सपत्नीक पूजा-अर्चना

उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन में 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया ने सपत्नीक बाबा महाकाल का पंचामृत से अभिषेक कर पूजा-अर्चना की। उनके साथ वित्त आयोग के सचिव कुमार विवेक ने भी बाबा महाकाल की पूजा कर अभिषेक किया। महाकालेश्वर प्रबन्धन समिति की ओर से संभाग आयुक्त संजय गुप्ता और कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने शॉल और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मान किया। इसके बाद डॉ. पनगढ़िया ने सपत्नीक शक्ति पीठ माता हर सिद्धि मन्दिर मे माता रानी माँ हर सिद्धि की पूजा की और महाकाल लोक का अवलोकन किया।  

मंत्री प्रवेश वर्मा ने किए महाकाल के दर्शन, पूजा-पाठ के साथ-साथ संकल्प भी लिया

उज्जैन दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को चुनाव में हराने वाले दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा गुरुवार को भगवान महाकाल की शरण में पहुंचे. उन्होंने परिवार के साथ भगवान महाकाल की विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना की.  दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा गुरुवार को रविवार के साथ उज्जैन पहुंचे. धार्मिक यात्रा पर उज्जैन पहुंचे प्रवेश वर्मा ने सीधे महाकालेश्वर मंदिर पहुंचकर विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना की. पंडित राजेश शर्मा और आकाश शर्मा ने पूजा अर्चना संपन्न कराई. उल्लेखनीय है कि प्रवेश शर्मा दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहब सिंह वर्मा के पुत्र हैं और वे इस बार मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल थे लेकिन एन वक्त पर वे दौड़ में पीछे रह गए. पंडित राजेश शर्मा ने बताया कि दिल्ली के मंत्री प्रवेश शर्मा ने भगवान महाकाल की आराधना करने के साथ-साथ संकल्प भी लिया है. महाकालेश्वर मंदिर समिति के उप प्रशासक एस एल सोनी की ओर से बताया गया कि दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा का पूजा अर्चना के बाद मंदिर समिति की ओर से सम्मान भी किया गया. मंदिर समिति की परंपरा है कि जो भी वीआईपी मंदिर पहुंचते हैं उनका समिति की ओर से अभिनंदन किया जाता है. पहले भी भगवान महाकाल के दरबार में आ चुके हैं वर्मा दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा पहले भी भगवान महाकाल के दरबार में आ चुके हैं. वे धार्मिक यात्रा के दौरान मीडिया के सवालों से भी बचते रहे. हालांकि उन्होंने इतना जरूर कहा कि भगवान महाकाल के दर्शन की अभिलाषा थी जो कि आज पूरी हो गई है.

Chirag Paswan Ujjain के Mahakaleshwar ज्योतिर्लिंग मंदिर में ‘भस्म आरती’ में हुए शामिल

 उज्जैन उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने पूरे परिवार और सहयोगियों के साथ भस्म आरती में शामिल हुए. महाकाल के दरबार में दर्शन करने के बाद चिराग ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि श्री महाकाल ने उन्हें बहुत कुछ दिया है. उन्होंने कहा, ‘एक समय ऐसा था जब शायद मुझसे सब कुछ छिन गया था, लेकिन बाबा का आशीर्वाद रहा कि आज मैं यहां तक पहुंचा हूं’. परिवार संग पहुंचे महाकाल मंदिर : चिराग पासवान इस दौरान अपने पूरे परिवार के साथ मंदिर पहुंचे. उन्होंने बताया कि उनके साथ उनकी मां, बहन, जीजा, भांजे-भांजियां, करीबी सहयोगी और रिश्तेदार भी उपस्थित थे. महाकाल के समक्ष शीश झुकाते हुए उन्होंने भगवान शिव को धन्यवाद दिया और उनका आशीर्वाद लिया. महाकाल के आशीर्वाद से संकल्प : भस्म आरती के बाद चिराग पासवान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे एक विशेष संकल्प लेकर जा रहे हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर कहा,’प्रधानमंत्री जी ने देश को एक विकसित राष्ट्र बनाने का जो संकल्प लिया है, उसे पूरा करने के लिए हम सभी प्रयासरत हैं. बाबा महाकाल के आशीर्वाद से हम इस संकल्प को साकार करेंगे’. महाकाल मंदिर में चिराग पासवान के भक्तिभाव में नजर आए. श्रद्धालुओं के साथ उन्होंने भी मंत्रोच्चारण के बीच पूजा-अर्चना की. महाकाल के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त करते हुए चिराग ने भगवान शिव का आभार जताया और देश की प्रगति के लिए उनका आशीर्वाद मांगा.

शहनाज अख्तर ने किए बाबा महाकाल के दर्शन, दान किये 2 लाख 1 हजार रुपए

 उज्जैन  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में प्रसिद्ध गायिका शहनाज अख्तर ने भगवान महाकाल के दर्शन किए। उन्होंने मंदिर प्रबंध समिति को दो लाख एक हजार रुपये की राशि भेंट की। मंदिर प्रबंध समिति की ओर से गायिका का सम्मान किया गया। दर्शन के उपरांत मीडिया से चर्चा करते हुए शहनाज ने कहा कि वें और उनका परिवार बीते पांच सालों से लगातार भगवान महाकाल के दर्शन करने मंदिर आते हैं। इस दरबार ने उन्हें क्या कुछ नहीं दिया, आज वें जो भी हैं भगवान महाकाल की कृपा से हैं। शहनाज अख्तर का भगवान महाकाल पर गाया गया भजन ‘तकदीर मुझे ले चल महाकाल की बस्ती में’ काफी प्रसिद्ध हुआ है। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने किए महाकाल दर्शन इसी तरह, मध्य प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने भगवान महाकाल के दर्शन किए। उन्होंने नंदी मंडपम से भगवान महाकाल को शीश नवाया। मंदिर समिति की ओर से उप प्रशासक डिप्टी कलेक्टर सिम्मी यादव ने शाल व भगवान महाकाल की लड्डू प्रसादी भेंट कर सम्मानित किया। बता दें नीरज मंडलोई पूर्व में उज्जैन कलेक्टर रह चुके हैं। रविवार को वे लोक निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा बैठक लेने उज्जैन आए थे। महाकालेश्वर ध्वज चल समारोह निकलेगा रंगपंचमी पर 19 मार्च को श्री महाकालेश्वर ध्वज चल समारोह निकाला जाएगा। मंदिर के पुजारी, पुरोहित परिवार द्वारा आयोजन को लेकर भव्य तैयारी की जा रही है। बताया जाता है इस बार भी कार्यक्रम में लोक संस्कृति के रंग नजर आएंगे। सिंहपुरी, कार्तिकचौक व भागसीपुरा से भी गेर चल समारोह निकलेंगे। गेर शौर्य का प्रतीक है, इसमें ब्राह्मण समाजजन ध्वज, निशान के साथ शौर्य का प्रदर्शन करने हुए निकलते हैं। बैंड, बाजे, अखाड़े तथा धार्मिक पृष्ठभूमि पर बनाई गई विद्युत रोशनी से जगमग झांकियां भी आकर्षण का केंद्र रहती हैं।

महाशिवरात्रि पर महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं के जनसैलाब में कमी, कड़ी सुरक्षा और खास इंतजाम, 4.52 लाख भक्त ही पहुंचे

उज्जैन महाशिवरात्रि पर महाकाल मंदिर में शिव भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। मंदिर प्रबंध समिति द्वारा कम समय में दर्शन हो, इसलिए चाक-चौबंद व्यवस्थाए की गईं। प्रातः चलित भस्मार्ती में लगभग 20 हजार दर्शनार्थियों ने दर्शन किए। बुधवार रात 10 बजे तक भक्तों का आंकड़ा 4 लाख से अधिक हो गया था। देर रात तक दर्शनार्थियों के आने का सिलसिला जारी था। महाकालेश्वर मंदिर के दर्शन हेतु पट गुरुवार 27 फरवरी की शयन आरती तक खुले रहेंगे।महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि पर इस बार श्रद्धालुओं की संख्या का आंकड़ा 4.52 लाख ही रहा, जो कि पिछले साल की तुलना में 2.83 लाख कम है। दो सालों की बात करें तो हर बार महाशिवरात्रि जैसे बड़े पर्व पर श्रद्धालुओं की संख्या घटती जा रही है। रंगोली से अर्धनारीश्वर स्वरूप बनाया श्री महाकालेश्वर मंदिर में इंदौर के केशव शर्मा और ग्रुप द्वारा मंदिर प्रांगण के शिखर दर्शन पर रंगोली से श्री महाकालेश्वर भगवान अर्धनारीश्वर स्वरूप बनाया गया। इसका मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अवलोकन किया व उनके कार्य की सराहना की। गर्म मीठे दूध का भोग लगाया बुधवार शाम को बाबा महाकाल को होलकर व सिंधिया स्टेट की ओर से पूजन व सायं पंचामृत पूजन के बाद भगवान श्री महाकालेश्वर को नित्य संध्या आरती के समय गर्म मीठे दूध का भोग लगाया गया। रात्रि में कोटितीर्थ कुंड के तट पर विराजित श्री कोटेश्वर महादेव का पूजन, सप्तधान्य अर्पण, पुष्प मुकुट श्रृंगार (सेहरा) के उपरांत आरती की गई। भीड़ की कमी के लिए ये दो बड़े तर्क माने जा रहे 1. उत्तरप्रदेश में आयोजित कुंभ में महाशिवरात्रि पर्व पर अंतिम स्नान पर्व के चलते भीड़ वहां के लिए भी डायवर्ट हुई, जिसका असर यहां रहा। 2. सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में महाशिवरात्रि पर ही रुद्राक्ष महोत्सव का आयोजन रखा, यहां भी लाखों की तादाद में श्रद्धालु जाना बताए, इसके चलते भी उज्जैन कम श्रद्धालु पहुंचे। (जैसा कि मंदिर के आईटी सेल प्रभारी गिरीश तिवारी ने तर्क दिया।) वाहन पार्किंग भी कई जगह खाली ट्रैफिक पुलिस को हर बार 10 से ज्यादा पार्किंग स्थान पर इंतजाम करना होते हैं और वह भी कम पड़ जाते हैं। इस बार अधिकांश पार्किंग खाली रही। सिर्फ हरिफाटक व कर्कराज पार्किंग भरी लेकिन वे भी पूरी तरह से फुल नहीं हो पा रही थी। कर्कराज पार्किंग की क्षमता 800 से 900 वाहनों की है लेकिन यहां 500 से 600 वाहन के लगभग ही भरते रहे। ट्रैफिक डीएसपी दिलीपसिंह परिहार ने बताया कि ये सही है कि कई पार्किंग खाली रही। ये दो कारण भी कम श्रद्धालु आने के 1. दर्शन के लिए नृसिंह घाट मार्ग से लंबे जिगजैग का सफर तय करना पड़ा है। करीब दो से ढाई किलोमीटर श्रद्धालु भीड़ में चलने से परेशान हो जाते हैं, खासकर महिलाएं व बच्चे। भीड़ कम हाेने के बावजूद भी बेवजह होल्डअप में लाेगाें काे लंबा चक्कर लगवाया। 2. वीआईपी से कई बार आपाधापी मची। आम लोगों को ज्यादा दिक्कत हुई। वे जद्दोजहद के बाद भगवान की झलक पाने पहुंचते हैं तो कर्मचारी धकेल देते हैं। वीआईपी के लिए गर्भगृह की देहरी से दर्शन महाशिवरात्रि पर गर्भगृह की देहरी से वीआईपी के दर्शन कराए जा रहे थे। आम जनता धक्के खा रही थी। वीआईपी के साथ 10-12 लोग गर्भगृह की देहरी के सामने खड़े हो रहे थे। इससे बैरिकेड्स से दर्शन करने वालों को दर्शन में परेशानी आ रही थी। इससे श्रद्धालुओं ने गुस्सा जाहिर किया। वीआईपी के अलावा पंडे-पुजारी भी खड़े हो रहे, इससे श्रद्धालुओं को महाकाल की एक झलक पाना मुश्किल रहा । शाम को एक वीआईपी करीब पांच मिनट तक गर्भगृह की देहरी पर भीड़ के साथ खड़े रहे। नंदी हॉल प्रभारी ने उन्हें हटाया। रात भर चलेगा महाभिषेक होगा पूजन अर्चन रात्रि 11 बजे से संपूर्ण रात्रि को श्री महाकालेश्वर का महाभिषेक व पूजन चलेगा। अभिषेक उपरांत भगवान को नवीन वस्त्र धारण कराए जाकर सप्तधान्य का मुखारविंद धारण कराया जाएगा। इसके बाद सप्तधान्य अर्पित किया जाएगा, जिसमें चावल, खडा मूंग, तिल, मसूर, गेहूं, जव, साल, खड़ा उडद सम्मिलित रहेंगे। श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारियों द्वारा भगवान श्री महाकालेश्वर का श्रृंगार कर पुष्प मुकुट (सेहरा) बांधा जाएगा। भगवान श्री महाकालेश्वर को चंद्र मुकुट, छत्र, त्रिपुंड व अन्य आभूषणों से श्रृंगारित किया जाएगा। भगवान पर न्योछावर नेग स्वरूप चांदी का सिक्का व बिल्वपत्र अर्पित की जाएगी। श्री महाकालेश्वर भगवान की सेहरा आरती की जाएगी व भगवान को विभिन्न मिष्ठान्न, फल, पञ्च मेवा आदि का भोग अर्पित किए जाएंगे। लगभग प्रात 6 बजे सेहरा आरती होगी। शिव धारण करेंगे सवा मन का पुष्प मुकुट श्री महाकालेश्वर मंदिर में वर्ष में एक ही बार भगवान महाकाल को सवा मन का पुष्प मुकुट धारण कराया जाता है और साथ ही महाशिवरात्रि पर्व पर लगातार भगवान शिव के दर्शन दर्शनार्थियों के लिए 44 घंटे गर्भगृह के पट खुले रहते हैं। महाशिवरात्रि पर एक ऐसा अवसर आता है जिस पर श्री महाकालेश्वर भगवान के पट मंगल नहीं होते हैं। इस पर्व पर भगवान महाकाल सवा मन का फूलों से सजा मुकुट (सेहरा) धारण करते हैं। कल 12 बजे भस्मार्ती, 44 घंटे बाद बंद होंगे पट सेहरा दर्शन के उपरांत वर्ष में एक बार दिन में 12 बजे होने वाली भस्मार्ती होगी। भस्मार्ती के बाद भोग आरती होगी व शिवनवरात्रि का पारणा किया जाएगा। 27 फरवरी को सायं पूजन, सायं आरती व शयन आरती के बाद भगवान श्री महाकालेश्वर जी के पट मंगल होंगे।

मुख्यमंत्री महाकाल स्टेडियम का 15 फरवरी को लोकार्पण करेंगे, नए पुल के बीच में 19 मीटर चौड़ी जगह बनाई गई

उज्जैन बाबा महाकाल के भक्तों के लिए बड़ी खुशखबरी है. 15 फरवरी से महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए एक और नया प्रवेश द्वार खुलने जा रहा है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रुद्रसागर पर बनाए नए ब्रिज का लोकार्पण करेंगे. इसका निर्माण 25 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है. इस ब्रिज के खुलने से श्रद्धालु शक्ति पथ से सीधे महाकाल मंदिर तक पहुंच सकेंगे, जिससे चारधाम मंदिर से आने वाले दर्शनार्थियों की दूरी करीब डेढ़ किलोमीटर कम हो जाएगी. रुद्रसागर पर बना 200 मीटर लंबा ब्रिज उज्जैन स्मार्ट सिटी कंपनी ने मई 2022 में इस ब्रिज का निर्माण कार्य शुरू किया था. यह ब्रिज 200 मीटर लंबा और 7 मीटर चौड़ा है, जबकि मध्य में 19 मीटर चौड़ी जगह छोड़ी गई है. पहले इस ब्रिज को 2023 के अंत तक पूरा करने की योजना थी, लेकिन निर्माण में करीब डेढ़ साल की देरी हुई. अब यह पूरी तरह तैयार है और जल्द ही श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएगा. ब्रिज से मिलेगा लाइट एंड साउंड शो का आनंद इस नए ब्रिज पर खड़े होकर भक्त जल्द ही शुरू होने वाले लेजर लाइट एंड साउंड शो का आनंद ले सकेंगे. 500 से अधिक श्रद्धालु एक साथ खड़े होकर भगवान शिव के प्राकट्य और उज्जयिनी की गौरवशाली गाथा को देख और सुन सकेंगे. वर्तमान में महाकाल मंदिर पहुंचने के लिए छह रास्ते हैं. इस ब्रिज के खुलने के साथ ही श्रद्धालुओं को सातवां मार्ग मिल जाएगा, जिससे भीड़ नियंत्रण में भी सहायता मिलेगी. मुख्यमंत्री नगर निगम द्वारा दशहरा मैदान पर 4 करोड़ 43 लाख रुपये से बनाए राजाभाऊ महाकाल स्टेडियम, मोती नगर में चार करोड़ 33 लाख के श्रीकृष्ण आश्रय सभा मंडप और त्रिवेणी शनि मंदिर के समीप बनाए हाल का लोकार्पण भी करेंगे। महाशिवरात्रि पर ब्रिज रहेगा बंद लोकार्पण के बाद यह मार्ग भक्तों के लिए खोल दिया जाएगा, हालांकि 27 फरवरी को महाशिवरात्रि के अवसर पर इसे बंद रखा जाएगा. कलेक्टर नीरज कुमार सिंह के अनुसार महाशिवरात्रि पर भीड़ के कारण इस ब्रिज को बंद रखा जाएगा. लोकार्पण के बाद शुरू हो जाएगी आवाजाही इसके पहले मुख्यमंत्री सरपंचों से चर्चा करेंगे। कार्यक्रम की तैयारी में बुधवार को प्रशासनिक अमला लगा नजर आया। कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने बताया कि लोकार्पण के बाद पैदल पुल से आवाजाही शुरू हो जाएगी। मंदिर पहुंचने का नौवां रास्ता तैयार श्रद्धालु, शक्ति पथ पर पिनाकी द्वार से आगे माधवगंज स्कूल के सामने रुद्रसागर पर बनाए पुल के रास्ते महाकाल महालोक में मानसरोवर भवन के सामने पहुंचकर महाकाल मंदिर में प्रवेश कर पाएंगे। पुल बनने से मंदिर पहुंच के लिए नौवां रास्ता तैयार हो गया है। पुल 200 मीटर लंबा और छह मीटर चौड़ा है। पुल के मध्य 19 मीटर चौड़ी जगह है, जहां कुछ देर खड़े रहकर श्रद्धालु रुद्रसागर और आसपास की खूबसूरती निहार सकेंगे। यहीं से महाकाल मंदिर के शिखर के दर्शन भी कर सकेंगे।

उज्जैन महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि की तैयारी शुरू, 10 दिन तक मनमोहक रूपों में दर्शन देंगे बाबा

उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में 17 फरवरी से महाशिवरात्रि महोत्सव की भव्य शुरुआत होगी. ये आयोजन पूरे 10 दिन तक चलेगा. इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आएंगे. श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और इन्हें सुविधाएं देने के लिए महाकालेश्वर मंदिर समिति ने दर्शन व्यवस्था को और सरल-सुविधाजनक बनाने की रणनीति बनाई है. मंदिर समिति का कहना है कि भक्तों को आसानी से भगवान महाकाल के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हो सके, इसकी तैयारियां की जा रही हैं. श्रद्धालुओं की कहां और कैसे एंट्री व एग्जिट महाकालेश्वर मंदिर प्रशासन ने इस बार दो प्रमुख बदलाव किए हैं. सभी प्रवेश द्वारों जैसे त्रिवेणी संग्रहालय, नीलकंठ द्वार और अवंतिका द्वार पर संकेतक लगाए जाएंगे, जिससे श्रद्धालुओं को सटीक मार्गदर्शन मिल सके. इसके अलावा टनल (सुरंग मार्ग) का पूर्ण क्षमता से उपयोग किया जाएगा, जिससे दर्शन प्रक्रिया में गति आएगी. सामान्य श्रद्धालु चारधाम पार्किंग से प्रवेश करेंगे और शक्ति पथ, त्रिवेणी संग्रहालय, नंदी द्वार, महाकाल लोक, मानसरोवर भवन, फेसिलिटी सेंटर-1 और टनल मार्ग से होते हुए गणेश मंडपम् पहुंचकर दर्शन कर सकेंगे. दर्शन के बाद श्रद्धालु आपातकालीन निर्गम द्वार से होते हुए हरसिद्धि मंदिर के पास से चारधाम मंदिर लौट सकेंगे. वीआईपी और मीडिया प्रवेश की ऐसी रहेगी व्यवस्था वीआईपी, वीवीआईपी और मीडिया के लिए नीलकंठ द्वार से प्रवेश की व्यवस्था की गई है. इनके वाहन विशेष पार्किंग क्षेत्र में रखे जाएंगे, जहां से वे महाकाल लोक, कंट्रोल रूम, शंख द्वार, निर्माल्य द्वार होते हुए सभा मंडपम् पहुंचेंगे. दर्शन के बाद इसी मार्ग से वापसी होगी. अवंतिका द्वार (गेट नंबर 1) से बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को निःशुल्क दर्शन की सुविधा मिलेगी. महाकाल लोक और हरसिद्धि मंदिर तिराहे पर प्रसाद वितरण केंद्र इसके अलावा महाकाल लोक और हरसिद्धि मंदिर तिराहे पर प्रसाद वितरण केंद्र स्थापित किए जाएंगे. नीलकंठ द्वार पर आपातकालीन एंबुलेंस तैनात रहेंगी. इसके साथ ही भील समाज धर्मशाला, कलोता समाज धर्मशाला, हरिफाटक ब्रिज के नीचे हाट बाजार और मेघदूत पार्किंग स्थल पर वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की गई है. श्रद्धालुओं को बस के माध्यम से मंदिर तक पहुंचाया जाएगा. दर्शन मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर अस्थायी पूछताछ केंद्र स्थापित किए जाएंगे. सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कंट्रोल रूम से सीसीटीवी के माध्यम से निरीक्षण किया जाएगा. भीड़ बढ़ने पर दो अलग दर्शन मार्ग तैयार श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने पर दो अलग दर्शन मार्ग खोले जाएंगे. पहला फेसिलिटी सेंटर-1 से मंदिर परिसर के निर्गम रैंप और नवीन टनल तक और दूसरा, फेसिलिटी सेंटर-1 से सीधे कार्तिकेय मंडपम् तक. महाकाल मंदिर सहायक प्रशासक मूलचंद्र जूनवाल ने बताया “मंदिर समिति और प्रशासन पूरी तरह से तैयार है. श्रद्धालुओं इस पावन पर्व पर भगवान महाकाल के दर्शन का लाभ बिना किसी कठिनाई के हो सकें, इस प्रकार की व्यवस्था बनाई गई है.”

महाकाल मंदिर में लड्डू प्रसाद की कमी के कारण भक्तों को परेशानी, कच्चे माल की कमी के कारण प्रसाद का उत्पादन प्रभावित

 उज्जैन ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में पिछले कुछ दिनों से लड्डू प्रसाद का टोटा बना हुआ है। दिन में कई बार काउंटरों पर प्रसाद उपलब्ध नहीं रहता है। चिंतामन स्थित यूनिट से गाड़ी आने के बाद व्यवस्था सुचारु हो पाती है। बताया जाता है कि कच्चे माल की आपूर्ति नहीं होने से समय पर लड्डू प्रसाद बन नहीं पा रहा है। अब 12 फरवरी को नए टेंडर होने के बाद सप्लाय व्यवस्था सामान्य होगी। महाकाल मंदिर में परिसर तथा महाकाल महालोक के काउंटरों से लड्डू प्रसाद विक्रय किया जाता है। देशभर से महाकाल दर्शन करने आने वाले दर्शनार्थी बड़े ही श्रद्धाभाव से लड्डू प्रसाद खरीदकर अपने साथ घर ले जाते हैं। महाकाल का लड्डू प्रसाद इतना शुद्ध व स्वादिष्ट है कि देशभर में इसकी बड़ी मांग है। काउंटरों पर किल्लत शुरू हालांकि समय-समय पर मंदिर प्रशासन की खामियों के कारण मांग के अनुरूप पूर्ति नहीं हो पाती है। बीते कुछ दिनों से कच्चे माल की कमी के कारण समय पर पर्याप्त मात्रा में लड्डू प्रसाद नहीं बन पा रहा है। इसका असर काउंटरों पर किल्लत के रूप में नजर आता है। काउंटर बंद नहीं करना पड़े इसलिए चिंतामन यूनिट से थोड़ा थोड़ा प्रसाद बनाकर आपूर्ति की जा रही है। टेंडर की ओर ध्यान नहीं दिया बता दें कि मंदिर में बीते एक वर्ष में लगातार प्रशासक बदले जाते रहे। प्रभारी प्रशासक बनकर आए अधिकारियों ने टेंडर की ओर ध्यान नहीं दिया। स्टोर विभाग व लड्डू प्रसाद निर्माण इकाई प्रभारी के बीच में भी तालमेल की कमी टेंडर प्रक्रिया में देरी का कारण मानी जा रही है। काफी मशक्कत के बाद मंगलवार को टेंडर होंगे। इसके बाद जिस फर्म को ठेका मिलेगा वह सप्लाय की शुरुआत करेगा। इसके बाद पर्याप्त मात्रा में प्रसाद बनेगा। अगर यही स्थित रही तो इस बार महाशिवरात्रि पर प्रसाद की कमी सामने आने वाली है। 40 से 50 क्विंटल लड्डू रोज बनता है यूनिट में चिंतामन स्थित लड्डू प्रसाद युनिट में प्रतिदिन 40 से 50 क्विंटल लड्डू प्रसाद रोज बनाया जाता है। काउंटरों से इतना प्रसाद बिक जाता है। लेकिन इन दिनों कच्चामाल उपलब्ध नहीं होने से पर्याप्त मात्रा में लड्डू प्रसाद नहीं बन पा रहा है। टेंडर के बाद व्यवस्था ठीक होगी     समय पर पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल उपलब्ध नहीं होने से पूर्ण क्षमता के साथ लड्डू प्रसाद नहीं बन पा रहा है। 12 फरवरी को टेंडर होने के बाद व्यवस्था ठीक हो जाएगी। महाशिवरात्रि पर किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रहेगी। महापर्व पर भक्तों को पर्याप्त मात्रा में लड्डू प्रसाद मिलेगा। – अशोक लांडगे, प्रभारी लड्डू प्रसाद यूनिट प्रभारी  

17 फरवरी से प्रारंभ हो रहे नौ दिवसीय शिवनवरात्रि पर्व के दौरान भोग आरती का समय सुबह 10:30 बजे से बदलकर दोपहर 1 बजे कर दिया गया

उज्जैन उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिवनवरात्रि के अवसर पर पूजन व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है। 17 फरवरी से प्रारंभ हो रहे नौ दिवसीय शिवनवरात्रि पर्व के दौरान भोग आरती का समय सुबह 10:30 बजे से बदलकर दोपहर 1 बजे कर दिया गया है। यह क्रम नौ दिन रहेगा। महाशिवरात्रि पर्व के दिन रात्रि में महानिशा काल में रात्रि पर्यंत विविध प्रकार से भगवान महाकाल की पूजा होगी। 27 फरवरी को तड़के 4 बजे भगवान को सप्तधान मुखारविंद धारण करवाकर उनके शीश पर सवा मन फल व फूलों से बना मुकुट धारण करवाया जाएगा। इसके बाद सुबह 11 बजे से सेहरा उतारने के बाद वर्ष में एक बार दोपहर में भस्म आरती होगी। वहीं भस्म आरती के बाद दोपहर में ही भगवान को भोग अर्पित कर आरती होगी। इसी दिन मंदिर के पुजारी-पुरोहितों को मंदिर समिति द्वारा पारणा करवाया जाएगा। कोटितीर्थ कुंड व रुद्रयंत्र की सफाई कार्य शुरू होगा महाशिवरात्रि की तैयारियों के तहत कोटितीर्थ कुंड की विशेष सफाई की जाएगी। कुंड से पानी निकालकर काई हटाई जाएगी और नया जल भरा जाएगा। मंदिर के गर्भगृह में स्थित चांदी के रुद्र यंत्र, जलाधारी और दरवाजों की सफाई व पॉलिश की जाएगी। शिखर की रंगाई-पुताई के साथ स्वर्ण शिखरों को भी चमकाया जाएगा। पर्व से पूर्व संपूर्ण मंदिर परिसर की विशेष सफाई की जाएगी। बैठक में श्रद्धालुओं की प्रवेश तथा निर्गम व्यवस्था, भस्मार्ती में श्रद्धालुओं के प्रवेश संबंधी व्यवस्था, पुजारी/पुरोहित/साधु-संतों/मीडिया कर्मियों की प्रवेश व्यवस्था, श्री महाकालेश्वर मंदिर में आगंतुक श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने के उद्देश्य से उज्जैन शहर में चारो ओर से आने वाले मार्गो के चयनित स्थानों पर अस्थाई रूप से वाहन पार्किंग की व्यवस्था, बसो की व्यवस्था, अस्थाई हाॅस्पिटल, पेयजल, सेंट्रलाईज्ड पी.ए. सिस्टम आदि की व्यवस्था की जाना है। आगंतुक श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर समिति द्वारा अस्थाई रूप से मंदिर परिक्षेत्र के चारो ओर चयनित स्थानों पर पूछताछ एवं खोया-पाया केन्द्र स्थापित किए जाऐगें। आगन्तुक श्रद्धालु सरलता से अपने पदवेश व्यवस्थित रूप से रख कर दर्शन उपरांत पुनः सरलता से प्राप्त कर सके, इस हेतु पूर्व वर्षानुसार चिन्हित निर्धारित स्थानों पर अस्थाई जूता स्टेण्ड का संचालन मुख्य कार्यपालन अधिकारी उज्जैन विकास प्राधिकरण उज्जैन के माध्यम से किया जाना हैं। महाशिवरात्रि पर्व 2025 के उपलक्ष्य पर सम्पूर्ण मंदिर आंतरिक एवं एवं बाह्य परिक्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में फ्लेक्स एवं दिशा सूचक बोर्ड की व्यवस्था श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा की जावेगी। महाशिवरात्रि पर्व पर श्रद्धालुओं की अत्यधिक संख्या को दृष्टिगत रखते हुए चयनित स्थानों पर नगर पालिक निगम उज्जैन द्वारा अस्थाई फायर स्टेशन स्थापित किए जाना है।आगन्तुक दर्शनार्थियों को लड्डू प्रसाद उपलब्ध कराने हेतु श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा विभिन्न स्थानों पर लड्डू प्रसाद काउण्टर पहले से अधिक संख्या में स्थापित किये जायेगे। बैठक में दीनदयाल रसोई योजना के संचालन के अंतर्गत उज्जैन शहर में निवासरत गरीब, भिक्षुक, असहाय, निःशक्तजन एवं ऐसे व्यक्ति जो स्वयं भोजन का प्रबंध करने में असमर्थ है, को श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा भगवान श्री महाकालेश्वर जी का निःशुल्क भोग/भोजन प्रसाद उपलब्ध कराए जाने का निर्णय लिया गया, जिसके अंतर्गत नगर पालिक निगम उज्जैन द्वारा शहर के 06 स्थानों पर स्थापित भोजन केन्द्र में 500 व्यक्ति प्रति भोजन केन्द्र पर कुल 3000 व्यक्तियों के लिए भोजन पहुंचाया जाएगा। पूर्व में भी श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा दीन दयाल रसोई योजना के अंतर्गत सेवाएं दी जाती रही है, जिन्हे पुनः प्रारंभ किया गया।  श्री महाकालेश्वर मंदिर में दान एवं भेंट के माध्यम से प्राप्त स्वर्ण एवं रजत सामग्री का त्वरीत मूल्यांकन कर सामग्री पर क्यू.आर. कोडिंग की जावेगी।पं. श्री सूर्यनारायण व्यास अतिथि निवास एवं जे.के. सीमेंट द्वारा नवनिर्मित अतिथि निवास में लाईट चली जाने पर आरक्षित कक्षो में 01 पंखा एवं 01 टयूब लाईट चालु रहे इस हेतु प्रचलित निर्माण कार्यो के अंतर्गत ही डी.जी. सेट (जनरेटर) स्थापित करवाए जाएंगे, साथ ही दोनो अतिथि निवास में 01 पेन्ट्री संचालित करने का निर्णय लिया गया। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा त्रिवेणी संग्रहालय के सम्मुख श्री महाकाल अतिथि निवास का निर्माण कराया गया है, जिसमें वर्तमान में बेसमेंट में पार्किंग एवं ग्राउण्ड फ्लोर पर 09 कक्ष निर्मित है, जो कि वर्तमान परिदृश्य को दृष्टिगत रखते हुए पर्याप्त नहीं है। सिंहस्थ 2028 को दृष्टिगत रखते हुए श्री महाकाल अतिथि निवास के ऊपर 04 फ्लोर (जी+04) का निर्माण कराए जाने पर सहमति व्यक्त की गई। यह निर्माण दानदाता के माध्यम से या मंदिर प्रबंध समिति स्वयं करेगी।  मंदिर समिति के वाहन बोलेरो, टाटा मेजिक लोडिंग वाहन एवं मारूति वेन लगभग 15 से 20 वर्ष पुराने होने के कारण वर्तमान में उपयोग में नहीं लिए जा सकते है, जिन्हे आर.टी.ओ. के माध्यम समिति बनाकर अपलेखित (हटाने) किए जाने का निर्णय लिया गया।

उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने सिंहस्थ 2028 को दृष्टिगत रखते हुए पेशवाई मार्गों का निरीक्षण किया

उज्जैन उज्जैन  कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने सिंहस्थ 2028 को दृष्टिगत रखते हुए पेशवाई मार्गों का निरीक्षण किया। सभी 13 अखाड़ों की पेशवाई के रूटों का निरीक्षण कर कलेक्टर सिंह ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। कलेक्टर सिंह ने सभी मार्गों की गूगल मैप पर मार्किंग के निर्देश दिए। साथ ही मार्गों से अतिक्रमण हटाने और सौंदर्यीकरण के निर्देश भी दिए। कलेक्टर सिंह ने नीलगंगा तालाब के सौंदर्यीकरण और व्यवस्थाओं की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। पेशवाई मार्गों के निरीक्षण के दौरान अग्नि अखाड़े की पेशवाई का मार्ग लाल बाबा के मंदिर से, निरंजनी अखाड़े की पेशवाई का मार्ग राजे धर्मशाला से, जूना अखाड़ा, नया उदासीन, आनंद, आवाहन, अटल, निर्वाणी अखाड़ों का पेशवाई मार्ग नीलगंगा से, उदासीन अखाड़े का मार्ग अलखधाम आश्रम से और निर्मल अखाड़े का मार्ग गुरुद्वारा फ्रीगंज से निर्धारित किया गया है। निरीक्षण के दौरान खाक चौक से अंकपात मार्ग होते हुए निकास चौराहा, इंदौर गेट से कंठाल मार्ग, तेलीवाड़ा चौराहा आदि पेशवाई मार्गों का निरीक्षण किया गया। कलेक्टर सिंह ने श्री महाकाल महालोक में श्री महाकाल अन्न क्षेत्र के प्रथम तल पर संचालित प्रसादी क्षेत्र का भ्रमण कर निरीक्षण किया एवं वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने प्रवचन हॉल, रोपवे के निर्माणाधीन कार्यों का भी निरीक्षण किया। इसके पश्चात, कलेक्टर सिंह ने रुद्रसागर सेतु एवं महाराजवाड़ा हेरिटेज होटल के निर्माण कार्य का निरीक्षण कर इसे शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही, कार्य की गुणवत्ता व मापदंडों के अनुरूप निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

साल के नए दिन को खास बनाने के लिए बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार भी किया गया

उज्जैन  नए साल के पहले दिन उज्जैन में बाबा महाकाल की भस्मारती में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। देश भर से भक्त आये थे। सभी ने नए साल 2025 की शुभकामनाएं मांगीं और महाकालेश्वर से आशीर्वाद लिया। साल के नए दिन को खास बनाने के लिए बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार भी किया गया, जिसे देखकर लोग देखते ही रह गए। महाआरती भी हुई। मान्यता है कि भस्मारती देखने से व्यक्ति विशेष हो जाता है। उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में नए साल का अनोखा जश्न मना। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु आये। सुबह तीन बजे से ही भक्त महाकाल की भक्ति में लीन हो गए। नए साल की पहली सुबह बाबा महाकाल का पंचामृत अभिषेक हुआ। दूध, दही, घी, शक्कर और शहद से बाबा को नहलाया गया। चंदन का लेप लगाया गया। सुगंधित द्रव्य चढ़ाए गए। भांग से श्रृंगार किया गया। पंडितों ने मंत्रोच्चार किए। बाबा को श्वेत वस्त्र पहनाए गए। फिर भस्म रमाई गई। इसके बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ भस्मारती हुई। देखने लायक होता है विशेष श्रृंगार भस्मारती में शामिल होने वाले भक्तों में खासा उत्साह दिखा। किसी ने परिवार की सुख-शांति की कामना की। किसी ने देश की अमन-चैन और समृद्धि के लिए प्रार्थना की। यह मान्यता है कि बाबा महाकाल की भस्मारती के दर्शन मात्र से ही व्यक्ति धन्य हो जाता है, उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। नए साल पर बाबा का विशेष श्रृंगार देखने लायक था। इस श्रृंगार में बाबा और भी दिव्य लग रहे थे। भक्तों ने इस अद्भुत दृश्य को अपने कैमरों में कैद किया। भक्तों की संख्या नियंत्रण के लिए खास व्यवस्था मंदिर प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था की थी। पुलिस बल तैनात था। स्वयंसेवक भी मदद कर रहे थे। श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद और पानी की व्यवस्था भी की गई थी। सब कुछ सुचारू रूप से चला। इस तरह उज्जैन में नए साल की शुरुआत बाबा महाकाल के आशीर्वाद से हुई। हजारों भक्तों ने भस्मारती का लाभ उठाया और नए साल के लिए शुभकामनाएं प्राप्त कीं। यह वाकई एक अविस्मरणीय अनुभव था। भक्तों के चेहरों पर श्रद्धा और भक्ति साफ दिख रही थी। सभी ने नए साल की शुरुआत एक सकारात्मक ऊर्जा के साथ की। शिव को समर्पित विशेष अनुष्ठान है भस्मआरती भस्मारती, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। यह शिव जी को समर्पित है। यह प्रातः काल सूर्योदय से पहले की जाती है। इसमें जली हुई लकड़ी की राख का उपयोग किया जाता है। इस राख को भस्म कहा जाता है। मान्यता है कि भस्म सभी पापों को नष्ट कर देती है। और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में हुई भस्मारती का विशेष महत्व है। यहाँ देश-विदेश से लोग भस्मारती के दर्शन करने आते हैं।

नववर्ष में सिर्फ 45 मिनट में होंगे बाबा महाकाल के दर्शन, प्रशासन ने की पूरी तैयारी

उज्जैन  नया साल आने में अब कुछ ही समय बचा है। ज्यादातर लोग नए साल की शुरुआत उज्जैन स्थित बाबा महाकाल के दर्शन से करते हैं। ऐसे में 31 दिसंबर और 01 जनवरी को बाबा महाकाल के दरबार में भक्तों की भारी भीड़ जुटने की संभावना है। इसे देखते हुए भगवान महाकाल के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए 31 दिसंबर और एक जनवरी के दिन मंदिर समिति इस बार विशेष तैयारी कर रही है। भक्तों को आसानी से दर्शन कराने के लिए कई व्यवस्थाएं की गई हैं। वहीं, प्रशासन का दावा है कि सुगम दर्शन व्यवस्था से भक्त करीब 45 मिनट में भगवान के दर्शन कर सकेंगे। भक्तों को कर्कराज पार्किंग से शक्तिपथ होते हुए महाकाल लोक से मंदिर में प्रवेश मिलेगा। 31 और एक को शीघ्र दर्शन टिकट व्यवस्था बंद रहेगी। कार्तिक मंडपम में सामान्य श्रद्धालुओं को बड़ी संख्या में प्रवेश कराकर दर्शन करवाए जाएंगे। इन दोनों दिन भस्मार्ती में श्रद्धालुओं की संख्या को आधा कर दिया जाएगा। कहां होगी वाहन पार्क करने की व्यवस्था?     हरिफाटक ब्रीज के नीचे तथा हाटबाजार परिसर     कर्कराज, कलोता व भील समाज धर्मशाला परिसर     कार्तिक मेला ग्राउंड तथा माधव सेवा न्यास परिसर यहां से मिलेगा भक्तों को मंदिर में प्रवेश सामान्य दर्शनार्थी: चारधाम मंदिर के सामने से दर्शन की कतार में लगने के बाद शक्तिपथ के रास्ते श्री महाकाल महालोक, मानसरोवर फैसिलिटी सेंटर, महाकाल टनल-1 से गणेश मंडप में पहुंचेंगे तथा भगवान महाकाल के दर्शन करेंगे। वीआईपी: प्रोटोकाल के तहत आने वाले वीआईपी दर्शनार्थी हरिफाटक ओवर ब्रीज से होकर बेगमबाग के रास्ते नीलकंठ द्वार से मंदिर में प्रवेश करेंगे। यहां वीआइपी पार्किंग की व्यवस्था भी रहेगी। वृद्ध, दिव्यांग: नए साल पर भगवान महाकाल के दर्शन करने आने वाले वृद्ध व दिव्यांग दर्शनार्थियों का प्रवेश मंदिर कार्यालय के सामने अवंतिका से होगा। यहीं व्हील चेयर की सुविधा उपलब्ध रहेगी। दर्शन के बाद भक्त इस रास्ते से जाएंगे बाहर भगवान महाकाल के दर्शन उपरांत भक्त गेट नंबर 10 अथवा निर्माल्य द्वार से मंदिर के बाहर आएंगे। इसके बाद निर्धारित मार्ग से बड़ा गणेश मंदिर के सामने से होते हुए हरसिद्धि चौराहा से पुन: चारधाम मंदिर पहुंचेंगे। भक्तों के लिए फ्री रहेंगी ये सुविधाएं जूता स्टैंड: भील समाज की धर्मशाला, चारधाम मंदिर के सामने, अवंतिका द्वार के समीप निशुल्क जूता स्टैंड की सुविधा उपलब्ध रहेगी। भोजन प्रसादी: श्री महाकाल महालोक के सामने मंदिर समिति के अन्नक्षेत्र में भक्तों को निशुल्क भोजन प्रसादी की सुविधा उपलब्ध रहेगी। पेयजल: करीब ढाई किलो मीटर लंबे मार्ग पर कई स्थानों पर पेयजल के इंतजाम रहेंगे। यहां से प्रसाद खरीद सकेंगे भक्त मंदिर समिति द्वारा चारधाम मंदिर के समीप और पार्किंग में लड्डू प्रसाद काउंटर स्थापित किए जाएंगे। भक्त यहां से लड्डू प्रसाद खरीद सकेंगे। डायवर्सन और पार्किंग व्यवस्था चार पहिया वाहन पार्किंग 1. इंदौर/देवास/मक्सी मार्ग सेः वाहन कर्कराज, भील समाज पार्किंग। वैकल्पिक मन्नत गार्डन, इम्पीरियल होटल के पीछे। 2. बड़नगर/नागदा मार्ग सेः मोहनपुरा ब्रिज से कार्तिक मेला मैदान। 3. आगर मार्ग से मकोडिया आम से कार्तिक मेला मैदान वैकल्पिकः कृषि उपार्जन मैदान। दो पहिया वाहन पार्किंग 1. इंदौर/देवास/मक्सी मार्ग से नरसिंह घाट पार्किंग। 2. बड़नगर /आगर/नागदा मार्ग से हरसिद्धी पाल पार्किंग। वैकल्पिक शंकराचार्य चौराहा गुरुद्वारा पार्किंग। भारी वाहन डायवर्सन 1. इंदौर से नागदा /आगर/मक्सी मार्ग, तपोभूमि-देवास बायपास। 2. मक्सी से इंदौर मार्ग, नरवर बायपास। 3. बड़नगर/नागदा/आगर मार्ग, मोहनपुरा ब्रिज से देवास रोड। वाहन प्रतिबंधित मार्ग (31 दिसंबर शाम 4 बजे से) 1. हरिफाटक टी से महाकाल घाटी चौराहा। 2. जंतर-मंतर से चारधाम पार्किंग। 3. शंकराचार्य चौराहा से नरसिंहघाट। पार्किंग से निकास मार्ग 1. कर्कराज/नरसिंहघाट पार्किंग, भूखी माता मार्ग। 2. इंटरपिटिशन पार्किंग, जयसिंहपुरा से लालपुल। 3. हरिफाटक पार्किंग, वाकणकर ब्रिज। रिजर्व पार्किग इंजीनियरिंग कॉलेज और प्रशांति चौराहा। नोटः नगर निगम द्वारा चारधाम टर्निंग तक बस सेवा उपलब्ध।

महाकाल मंदिर में बड़ा एक्शन, प्रशासक बने एडीएम अनुकूल जैन, गणेश धाकड़ को हटाने का बाद दी जिम्मेदारी

उज्जैन कलेक्टर नीरज सिंह ने पुष्टि की है कि महाकालेश्वर मंदिर समिति के प्रशासक गणेश धाकड़ को उनके पद से हटा दिया गया है. हालांकि, उनके स्थान पर नया प्रशासक कौन होगा, इस पर अभी निर्णय नहीं लिया गया है. वही महाकालेश्वर मंदिर की आय से हेरफेर के मामले में आरोपी बनाए गए दो कर्मचारियों को कोर्ट ने जेल भेज दिया है और पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है. 2 बार मंदिर समिति के प्रशासक रहे हैं धाकड़ महाकाल मंदिर का अगला समिति प्रशासक कौन होगा इसे लेकर संशय है. ये फैसला भोपाल से लिया जाएगा या स्थानीय स्तर पर, इसे लेकर भी चर्चा जारी है। इस पर कलेक्टर नीरज सिंह का कहना है कि जल्द ही मामले में स्पष्टता आएगी. गौरतलब है कि गणेश धाकड़ को 14 अगस्त 2024 को महाकाल मंदिर समिति का प्रशासक नियुक्त किया गया था. यह उनका दूसरा कार्यकाल था। इससे पहले वे 2021 से 2022 तक करीब एक वर्ष तक इसी पद पर रह चुके थे. धाकड़ ने कहा, मुझे कोई जानकारी नहीं वहीं महाकाल मंदिर समिति के प्रशासक पद से हटाए जाने के सवाल पर गणेश धाकड़ ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उन्हें अब तक स्थानांतरण से जुड़ी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है. वहीं इस घटनाक्रम को लेकर मंदिर से जुड़े अधिकारी और स्थानीय लोगों में चर्चा का बाजार गर्म है. पूर्व मे भी मिला था प्रभार बताया जाता है कि एडीएम अनुकूल जैन एडीएम का पद संभालने के साथ ही जिला प्रोटोकॉल की व्यवस्थाओं के संबंध में महाकालेश्वर मंदिर से जुड़े रहते हैं। पूर्व में भी 13 अगस्त को उन्हें एक दिन के लिए महाकालेश्वर मंदिर का प्रशासक बनाया गया था, जिसके बाद गणेश धाकड़ को मंदिर का प्रशासक बना दिया गया था।   अवैध वसूली करने वाले रिमांड पर महाकालेश्वर मंदिर में अवैध वसूली करने वाले राजकुमार, अभिषेक भार्गव, रितेश शर्मा, राजेंद्र सिसोदिया को पुलिस ने एक दिन के रिमांड पर लिया है. महाकाल थाना पुलिस के मुताबिक अभी तक इस मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें दो लोग निजी सुरक्षा एजेंसी के कर्मचारी है.

कलेक्टर ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ दर्शन व्यवस्था का मुआयना कर आवश्यक निर्देश दिए

उज्जैन वर्ष 2024 की समाप्ति एवं अंग्रेजी नववर्ष 2025 के अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर में दूरदराज से आने वाले दर्शनार्थियों की संख्या में वृद्धि होने के कारण उन्हें दर्शन की सुव्यवस्थित व्यवस्था कर सुगमतापूर्वक दर्शन कराने के लिए तैयारियां की जा रही है। कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने शुक्रवार 27 दिसंबर को प्रात: प्रशासनिक अधिकारियों के साथ व्यवस्थाओं का मुआयना कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। कलेक्टर ने लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री को निर्देश दिए कि शीघ्रता से बेरिकेडिंग की व्यवस्था की जाए।       कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने सर्वप्रथम कर्कराज पार्किंग स्थल का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारी को निर्देश दिए कि पार्किंग स्थल पर समतलीकरण, साफ-सफाई, चलित शौचालय, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल व्यवस्था आदि व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके बाद कलोता समाज एवं भील समाज की धर्मशाला पर पार्किंग व्यवस्था का अवलोकन किया। उक्त स्थलों पर भी सुव्यवस्थित व्यवस्था करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने प्रशासनिक अमले के साथ कर्कराज पार्किंग स्थल से पैदल मार्ग का मुआयना करते हुए गंगा गार्डन से गोंड बस्ती, चारधाम पार्किंग, शक्तिपथ, महाकाल महालोक, मानसरोवर होते हुए भगवान महाकाल मंदिर की रैलिंग तक की व्यवस्थाओं का जायजा लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। कलेक्टर ने दर्शनार्थियों की सुलभ दर्शन व्यवस्था के दौरान दर्शनार्थियों के लिए जगह-जगह पेयजल की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। शक्तिपथ के साईड रोड़ तरफ कहीं कहीं अतिक्रमण है उसे हटाने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। शक्तिपथ की साफ-सफाई, प्रकाश आदि की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।       कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने महाकाल मंदिर के निर्गम की ओर बने नवीन शौचालय को प्रारंभ कराए जाए और आस-पास की गंदगी को साफ कराने के निर्देश दिए। तत्पश्चात कलेक्टर ने पैदल चलकर हरसिद्धी होते हुए रामघाट की व्यवस्था का मुआयना किया और संबंधित अधिकारियों को बेरिकेडिंग और महिलाओं के लिए स्नान करने के बाद कपड़े बदलने के लिए चेंजिंग रूम बनाए जाए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर नीरज कुमार सिंह के अलावा जिला पंचायत सीईओ श्रीमती जयति सिंह, एडीएम अनुकूल जैन, नगर निगम आयुक्त आशीष पाठक, एसडीएम एलएन गर्ग, स्मार्ट सीईओ संदीप शिवा, विकास प्राधिकरण सीईओ संदीप सोनी, सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल, मंदिर समिति सदस्य राजेन्द्र शर्मा तथा संबंधित विभाग के अधिकारीगण आदि उपस्थित थे।    

महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 2023 की तुलना में हुई कम

उज्जैन उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग परिसर के विस्तार का कार्य तेजी से जारी है। यह परिसर पहले 25 हजार वर्गफीट में फैला हुआ था, लेकिन अब इसका क्षेत्रफल बढ़ाकर 78 हजार वर्गफीट कर दिया गया है। महाकाल महालोक के निर्माण और जीर्णोद्धार कार्यों पर बड़े पैमाने पर धनराशि खर्च की जा रही है। पहले चरण में 351.55 करोड़ रुपए, लोकार्पण से पहले के कार्यों पर 44.32 करोड़ रुपए, और दूसरे चरण में 755.82 करोड़ रुपए का खर्च किया गया है। इस तरह कुल 1 हजार151 करोड़ रुपए की लागत से यह परियोजना आकार ले रही है। हालांकि पिछले साल की तुलना में इस बार कम श्रद्धालु बाबा के दरबार में आए। श्रद्धालुओं की संख्या में कमी     महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 2023 की तुलना में 2024 के आखिरी पांच महीनों (अगस्त से दिसंबर) में कुछ कम हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, 1 अगस्त से 31 दिसंबर 2023 तक मंदिर में 3 करोड़ 91 लाख 94 हजार 796 श्रद्धालु पहुंचे थे। वहीं, 2024 में 1 अगस्त से 22 दिसंबर तक यह संख्या घटकर 3 करोड़ 09 लाख 49 हजार 193 पर आ गई।       हालांकि, मंदिर प्रशासन का कहना है कि दिसंबर के आखिरी 9 दिनों में करीब 25 लाख श्रद्धालु आने की संभावना है। मंदिर प्रशासक गणेशकुमार धाकड़ के अनुसार, श्रद्धालुओं के लिए नवीनतम तकनीक और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे उनके दर्शन का अनुभव बेहतर हो।   2023 में श्रद्धालुओं की संख्या अधिक क्यों रही?     अधिकमास का प्रभाव: वर्ष 2023 में श्रावण माह में अधिकमास होने के कारण सावन 59 दिनों का था। इस दौरान 10 शाही सवारियां निकाली गईं, जिससे श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हुई।       महालोक का आकर्षण: महाकाल महालोक के पहले चरण का कार्य पूरा होने के बाद श्रद्धालु न केवल ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने आए, बल्कि महालोक के भव्य नजारों का आनंद लेने भी पहुंचे।       भस्म आरती में बदलाव: भस्म आरती को ऑनलाइन, ऑफलाइन और चलित स्वरूप में संचालित किया गया, जिससे ज्यादा श्रद्धालु आकर्षित हुए। इस व्यवस्था को पहले केवल 2016 के सिंहस्थ मेले में लागू किया गया था।   2024 में आधुनिक तकनीकों का उपयोग श्रद्धालुओं के अनुभव को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए 2024 में आरएफआईडी (रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) बैंड का उपयोग शुरू किया गया। यह व्यवस्था भस्म आरती में प्रवेश के लिए पारदर्शिता सुनिश्चित करती है और बिना अनुमति वाले लोगों को परिसर में आने से रोकती है। मंदिर प्रशासन का दावा है कि अब केवल उन्हीं भक्तों को प्रवेश मिल रहा है, जिन्होंने पहले से अनुमति प्राप्त की है।   भविष्य की योजनाएं और प्रशासन की तैयारी मंदिर प्रबंधन श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लगातार नई योजनाओं पर काम कर रहा है। दर्शन के दौरान भीड़ प्रबंधन से लेकर हाई-टेक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा, महालोक के दूसरे चरण का कार्य भी प्राथमिकता पर है।

नए साल पर महाकाल भस्म आरती की ऑनलाइन बंद, बदली दर्शन व्यवस्था

उज्जैन बाबा महाकाल के भक्तों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। 2024 के आखिरी और नए साल 2025 के शुरुआती दिनों में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए महाकालेश्वर मंदिर समिति ने बड़ा फैसला लिया है। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन को सुगम बनाने के लिए समिति ने नई व्यवस्था लागू की है। समिति अध्यक्ष व कलेक्टर नीरजकुमार सिंह ने निर्धारित किया है कि 31 दिसंबर और 1 जनवरी को ऑनलाइन-ऑफलाइन भस्मआरती बुकिंग बंद रहेगी। दोनों दिन चलित भस्मआरती का विकल्प रखा है। सुबह 4.15 बजे से श्रद्धालु कार्तिकेय मंडपम् से आरती का लाभ ले सकेंगे। 45 मिनट में दर्शन होने का दावा श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति का दावा है कि नई व्यवस्था के मुताबिक, 40 से 45 मिनट में श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन कर पाएंगे। मंदिर प्रबंध समिति ने महाशिवरात्रि पर आए दर्शनार्थियों को देखते हुए दिसंबर के आखिरी दिनों और नए साल के पहले सप्ताह में 10 से 15 लाख दर्शनार्थी आने की उम्मीद जताई है। कालभैरव मंदिर में प्रवेश बंद इधर उज्जैन के श्री कालभैरव मंदिर में 25 दिसंबर से 5 जनवरी तक गर्भगृह में प्रवेश पूर्ण रूप से बंद रहेगा। मंदिरों में ड्यूटीरत कर्मियों को बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के साथ अच्छा व्यवहार करने की सीख दी गई है। कलेक्टर ने 29 दिसंबर से 5 जनवरी तक श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिफ्टवार ड्यूटी लगाई जाने के निर्देश दिए हैं। कहां से होगी एंट्री, कैसे आएंगे बाहर सामान्य दर्शनार्थियों के लिए व्यवस्था सामान्य श्रद्धालु चारधाम मंदिर पार्किंग से प्रवेश करेंगे। यहां से संग्रहालय के पास नंदी द्वार भवन, फेसेलिटी सेंटर 1 टनल, शक्ति पथ, त्रिवेणी, श्री महाकाल, मानसरोवर, नवीन टनल 1, और गणेश मंडपम् होते हुए श्री महाकालेश्वर के दर्शन करेंगे। दर्शन के बाद आपातकालीन निर्गम द्वार से बाहर निकलकर बड़ा गणेश मंदिर के पास हरसिद्धि मंदिर तिराहे पहुंचेंगे और अंत में चारधाम मंदिर पर वापस आकर अपने गंतव्य की ओर रवाना होंगे। जब श्रद्धालुओं की संख्या बढ़े यदि दर्शनार्थियों की संख्या अधिक हो जाती है, तो फेसेलिटी सेंटर 1 से मंदिर परिसर के निर्गम रैंप, गणेश मंडपम् और नवीन टनल के दोनों ओर से दर्शन की व्यवस्था की जाएगी। भीड़ और अधिक होने पर श्रद्धालुओं को सीधे फेसेलिटी सेंटर 1 से कार्तिकेय मंडपम् में प्रवेश दिलाया जाएगा। दर्शन के बाद द्वार नंबर 10 या निर्माल्य द्वार से बाहर निकलने की व्यवस्था रहेगी। वीआईपी दर्शनार्थियों के लिए व्यवस्था विशेष श्रेणी के दर्शनार्थी नीलकंठ द्वार से प्रवेश करेंगे। यहां से त्रिनेत्र (महाकाल लोक कंट्रोल रूम के सामने) होते हुए शंख द्वार, कोटितीर्थ कुंड और सभा मंडपम् के जरिए मंदिर में प्रवेश किया जाएगा। दर्शन के बाद, सभा मंडपम् से कोटितीर्थ कुंड, शंख द्वार, त्रिनेत्र और नीलकंठ द्वार के माध्यम से बाहर जाने का मार्ग तय होगा।

गत श्रावण मास में 1 करोड़ से अधिक संत-महंत-श्रध्दालुओं ने त्रिनेत्रधारी अवंतिकानाथ भगवान महाकाल के दर्शन किए

उज्जैन उज्जयिनी एक महान धार्मिक सांस्कृतिक, साहित्यिक, पौराणिक एवं ऐतिहासिक सिध्द नगरी है। पृथ्वी के नाभिस्थल पर स्थित होने से कुण्डलिनी शक्ति-जागरण के सुविज्ञ योगियों एवं आध्यात्मविदों के लिए यह सफलदायी महत्ती सिध्द भूमि है। यहां पर प्रत्येक 12वें वर्ष में सिंह राशि में गुरू के स्थित होने पर कुम्भ महापर्व का आयोजन सुदीर्घकाल से होता आ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव प्रदेश के साथ-साथ उज्जैन के विकास में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं और निरंतर विकास के कार्य कर रहे हैं। उज्जयिनी नगरी का विश्व प्रसिध्द बारह ज्योर्तिलिंगों में से एक दक्षिणमुखी भगवान महाकालेश्वर का मंदिर उज्जैन की जीवन शैली का केन्द्र बिन्दू है। अवंतिकानाथ भगवान महाकालेश्वर मंदिर में महाकाल महालोक बनने के बाद से देश-विदेश से श्रध्दालुओं का अधिकाधिक संख्या में आगमन हो रहा है और निरंतर श्रध्दालुओं की संख्या में वृध्दि हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव की मंशानुरूप भगवान महाकालेश्वर की श्रावण-भादौ मास की सवारियों व राजसी सवारी ने सम्पूर्ण भारतवर्ष का ध्यान आकर्षित किया। भगवान महाकालेश्वर का राजसी वैभव व ठाट-बाट देखने देश-विदेश से 1 करोड़ से अधिक श्रध्दालु सिर्फ श्रावण के एक माह में पधारें। मुख्यमंत्री डॉ.यादव के निर्देशानुसार इस वर्ष सवारी में आकर्षण का केन्द्र देश की विभिन्न जनजातिय दलों के कलाकारों द्वारा लोक नृत्यों की आकर्षक प्रस्तुतियां, पुलिस बैंड द्वारा मधुर धुन की सवारी मार्ग में प्रस्तुति, डमरूवादन का विश्व रिकॉर्ड व राजसी सवारी में भगवान महाकालेश्वर की पालकी रामघाट पहुंचने पर हेलीकाप्टर से पुष्पवर्षा रही। श्रावण मास 22 जुलाई 2024 से 19 अगस्त 2024 में 1 करोड़ से अधिक श्रध्दालुओं ने उज्जैन आकर भगवान महाकाल के देव दर्शन कर महाकाल महालोक को निहारा व सवारियों में सम्मिलित हुए। उज्जयिनी में दिन-प्रतिदिन श्रध्दालुओं की संख्या में वृध्दि होने से उज्जैन, मालवा क्षेत्र का प्रमुख पर्यटन, आर्थिक, सामाजिक केन्द्र बनकर उभरा है। व्यापार के क्षेत्र में बढ़ोतरी होने से नागरिकों को बहुआयामी रोजगार प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशानुरूप सम्राट विक्रमादित्य के समय का गौरव अवंतिका नगरी पुन: प्राप्त करें इसके लिए सम्पूर्ण भारतवर्ष के साधु-संत-महंत, विद्वानों, चिन्तकों, विचारकों, साहित्यकारों, अनुसंधानकर्ताओं का केन्द्र उज्जैन विभिन्न आयोजनों, सेमीनार, संगोष्ठी, महोत्सवों से सम्पूर्ण वर्ष रहा। क्षिप्रा नदी के पावन तट रामघाट पर चैत्र नवरात्रि गुडी पड़वा के अवसर पर “शिवज्योति अर्पणम” भव्य कार्यक्रम आयोजित कर दीप दान किया गया। विक्रमोत्सव व अखिल भारतीय कालिदास महोत्सव के अंतर्गत विविध सांस्कृतिक, साहित्यिक, धार्मिक व विज्ञान के कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में देश-विदेश की महान विभूतियां पधारी और उज्जैन निरंतर वर्ष भर साहित्यकारों, विचारकों, चिंतकों और वैज्ञानिकों का केन्द्र बना रहा। 

साल 2024 में अबतक मप्र के अन्य पर्यटन स्थलों में 10 करोड़ 66 लाख पर्यटक पहुंचे

उज्जैन मप्र के प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक और पौराणिक महत्व की दुनियाभर में पहचान है। इसीलिए पर्यटक बड़ी संख्या में मध्यप्रदेश पहुंच रहे हैं। जनवरी से नवंबर तक रिकॉर्ड 6.57 करोड़ पर्यटक उज्जैन आए। मप्र के अन्य पर्यटन स्थलों में 10 करोड़ 66 लाख पर्यटक पहुंचे। सबसे खास बात यह है कि देसी पर्यटकों के टॉप-5 डेस्टिनेशन में उज्जैन, ओंकारेश्वर, इंदौर, भोपाल और मैहर शामिल हैं। इस वर्ष 10 लाख 85 हजार विदेशी पर्यटक भी मप्र पहुंचे। विदेशियों सैलानियों में मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थल खास आकर्षण का केंद्र रहे। टॉप-5 डेस्टिनेशन में खजुराहो, बांधवगढ़, कान्हा, पन्ना और ओरछा हैं। ​देसी पर्यटकों की रुचि धार्मिक क्षेत्रों में अधिक है। ओंकारेश्वर में 21 लाख 29 हजार लोगों ने दर्शन किए। इसी तरह 97 लाख लोग मैहर पहुंचे। हालांकि, इस साल प्रदेश में पर्यटकों की संख्या पिछले साल के मुकाबले घटी है। साल 2023 में प्रदेश में 11.21 करोड़ पर्यटक पहुंचे थे। वहीं, साल 2022 में यह आंकड़ा 3.41 करोड़ का था। पिछले दो साल की ही बात करें तो प्रदेश में 21.87 करोड़ पर्यटक पहुंचे। यह दो साल में पर्यटकों की संख्या का रिकॉर्ड है। धार्मिक स्थलों की ओर रुझान ज्यादा, महाकाल लोक बनने के बाद बदली तस्वीर महाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। अभी फेज-2 के काम चल रहे हैं। महाकाल मंदिर प्रशासक गणेशकुमार धाकड़ ने बताया कि मंदिर में कम समय में दर्शन होते। भस्मआरती में आरएफ बैंड सिस्टम शुरू किया है। ​इससे अवैध रूप से भस्मआरती में शामिल होने वालों पर अंकुश लगा है। श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए दो भक्त निवास बन चुके हैं। तीसरा अभी बन रहा है। महाकाल लोक बनने के बाद सेलीब्रिटी भी बड़ी संख्या में पहुंच रही हैं। उल्लेखनीय है कि उज्जैन पहुँचने वाले पर्यटकों की संख्या पिछले पाँच सालों में दोगुनी हो गई है। कोरोना काल में पर्यटन में तेजी से गिरावट हुई थी, लेकिन वर्ष 2023 में एक बार फिर जबर्दस्त तेजी आई है और 5 करोड़ से भी ज्यादा पर्यटकों के पहुँचने का रिकार्ड उज्जैन ने बनाया है। मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार एक जनवरी 2023 से 31 दिसंबर 2023 तक उज्जैन में 5 करोड़ 28 लाख 41 हजार 802 पर्यटक पहुँचे। इसी के साथ मध्य प्रदेश के टॉप-10 पर्यटन केंद्रों में उज्जैन सबसे आगे रहा हैं। प्रदेश के टॉप 10 शहरों की सूची में पहले नंबर पर उज्जैन और दूसरे नंबर पर मैहर रहा, जबकि भोपाल सबसे आखिरी पायदान पर है। उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालु बड़ी संख्या में बाबा महाकाल के दर्शन और महाकाल लोक के वैभव को देखने पहुँच रहे हैं। यहाँ महाराष्ट्र के शिरडी से तीन गुना, राजस्थान के खाटू श्याम से चार गुना ज्यादा श्रद्धालु महाकालेश्वर के दर्शन करने के लिए आ रहे हैं। मंदिर समिति के मुताबिक ऐसा पहली बार हो रहा है कि गर्मी की शुरुआत के एक माह में 22 अप्रैल से 22 मई में अभी तक करीब 45 लाख से अधिक लोग उज्जैन पहुँच चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा श्रद्धालु दिल्ली, महाराष्ट्र और राजस्थान से आए हैं।

पीएम मोदी की पत्नी जशोदा बेन महाकाल के दर पर, किये महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल के दर्शन

उज्जैन  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की धर्मपत्नी जशोदाबेन इन दिनों निजी कार्यक्रम के तहत धार्मिक नगरी उज्जैन में हैं। शुक्रवार को वे विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचीं, जहां उन्होंने बाबा महाकाल के दर्शन किए और भोग आरती में शामिल हुईं। श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित अर्पित गुरु ने बताया कि जशोदाबेन ने बाबा महाकाल के चांदी द्वार पर माथा टेककर पूजन-अर्चन और जलाभिषेक किया। इसके बाद, उन्होंने नंदी हॉल में जाकर नंदीजी के कानों में अपनी मनोकामनाएं कही और ॐ नमः शिवाय का जाप करते हुए ध्यान लगाया। बाबा महाकाल की अनन्य भक्त जशोदाबेन बाबा महाकाल की अनन्य भक्त मानी जाती हैं और समय-समय पर उज्जैन आकर बाबा महाकाल के दर्शन करती रहती हैं। इससे पहले भी वे कई बार बाबा महाकाल का आशीर्वाद लेने यहां आ चुकी हैं। इस बार उनकी धार्मिक यात्रा में परिवार के कुछ सदस्य भी साथ थे। खजराना गणेश मंदिर में भी दर्शन बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की धर्मपत्नी जशोदाबेन बुधवार रात 11:30 बजे इंदौर पहुंचीं। उन्होंने सबसे पहले खजराना गणेश मंदिर में भगवान के दर्शन किए और सुख-शांति की कामना की। गुरुवार सुबह उन्होंने साउथ तुकोगंज स्थित नाथ मंदिर में माधवनाथ महाराज की पूजा-अर्चना की। जशोदाबेन की महाकाल के प्रति विशेष श्रद्धा जशोदाबेन बाबा महाकाल की अनन्य भक्त मानी जाती हैं और समय-समय पर उज्जैन आकर बाबा महाकाल के दर्शन करती रहती हैं। यह उनकी इस मंदिर में की गई यात्रा कोई नई बात नहीं है क्योंकि वे पहले भी कई बार यहां आ चुकी हैं। इस बार उनकी धार्मिक यात्रा में कुछ पारिवारिक सदस्य भी उनके साथ थे।

भस्म आरती के दौरान श्री महाकालेश्वर मंदिर में अयोध्या की हनुमानगढ़ी से संत मंत्र बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचे

उज्जैन  कालों के काल बाबा महाकाल के दरबार में अगहन कृष्ण पक्ष की सप्तमी पर भस्म आरती के दौरान एक ऐसे संत बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचे, जिन्हें देखकर हर कोई अचंभित रह गया। संत की कद-काठी काफी कम थी, लेकिन इन्होंने अपने मस्तक पर त्रिपुंड और रुद्राक्ष की माला पहन रखी थी। भस्म आरती के बाद उन्होंने चांदी द्वार पर पहुंचकर भगवान का पूजन-अर्चन किया और फिर बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया। जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह भस्म आरती के दौरान श्री महाकालेश्वर मंदिर में अयोध्या की हनुमानगढ़ी से संत मंत्र बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचे थे। देखने में यह संत एकदम साधारण नजर आ रहे थे, लेकिन उनकी कद-काठी के कारण हर कोई इन्हें देखता रह गया। संत की लंबाई करीब 2 फीट थी, जिन्होंने चांदी द्वार से बाबा महाकाल के दर्शन किए। संत के साथ कुछ अन्य लोग भी थे जो पूजन-अर्चन के दौरान उनका सहयोग करते नजर आ रहे थे। संत करीब 2 घंटे नंदी हॉल में बैठकर साधना में लीन रहे और बाबा महाकाल के निराकार से साकार स्वरूप के दर्शन किए।   महानिर्वाणी अखाड़े पहुंचे हनुमानगढ़ी अयोध्या से आए संत मंत्र बाबा महाकाल के दर्शन करने के बाद महानिर्वाणी अखाड़े के गादीपति महंत विनीत गिरी महाराज से मिलने अखाड़े पर पहुंचे थे। महंत विनीत गिरी ने उनका स्वागत किया।  

उज्जैन कलेक्टर ने महाकाल लोक में दुकानदारों को चेतावनी दी कहा यदि दुकान शीघ्र शुरू नहीं की गई तो आवंटन निरस्त हो जाएगा

उज्जैन उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर परिसर में जनवरी महीने से साउंड एंड लाइट शो के माध्यम से श्रद्धालुओं को अद्भुत आनंद की अनुभूति होने वाली है. उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने महाकाल लोक में दुकान लेने वाले दुकानदारों को भी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि यदि दुकान अधिक शीघ्र शुरू नहीं की गई तो आवंटन निरस्त हो जाएगा. कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने  महाकालेश्वर मंदिर के महाकाल लोक और प्रसादम क्षेत्र का निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान जो दुकानें नीलामी के पश्चात आवंटित हुई थीं, उनके प्रारंभ होने की स्थिति का अवलोकन किया गया. जिन दुकानदारों ने अभी तक आवंटन के बाद भी दुकानें शुरू नहीं की गई है, उन्हें शीघ्र अतिशीघ्र दुकान प्रारंभ करने के लिए कहा गया अन्यथा आवंटन को निरस्त करने के निर्देश दिए गए. कलेक्टर द्वारा टूरिज्म बोर्ड के माध्यम से महाकाल लोक में प्रारंभ किए जाने वाले लाइट एंड साउंड शो की प्रगति का अवलोकन किया गया. बताया गया कि जनवरी 2025 तक लाइट एंड साउंड शो के शुरू होने की संभावना है. दुकानदारों को 7 दिन की मिली चेतावनी महाकाल लोक में श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए दुकानें बनाई गई है. इन दुकानों का आवंटन भी हो चुका है, मगर दुकान संचालकों द्वारा दुकान शुरू नहीं की जा रही है. इससे श्रद्धालुओं को काफी दिक्कत हो रही है. उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने 7 दिन में दुकान चालू करने के निर्देश दिए हैं.

महाकाल की भस्म आरती में श्रद्धालुओं का हाईटेक प्रवेश शुरू, अब नहीं हो पाएगा फर्जीवाड़ा

उज्जैन उज्जैन महाकाल मंदिर में नए नियम लागू किए गए है. भगवान महाकाल के दर्शन करने के लिए अब भक्तों को खास तरह की आईडी की जरूरत होगी. इससे पहले भी RFID के जरिए मंदिर में एंट्री (Mahakal Mandir Entry New Rules) दी जाती थी. लेकिन, शुक्रवार से RFID लगाना अनिवार्य कर दिया गया है. भस्म आरती में शामिल होने के लिए भक्तों की एंट्री में सख्ती लाई गई है. अगर आपके पास RFID नहीं होगा, तो आपको भस्म आरती में शामिल होने से मना कर दिया जाएगा. अवैध वसूली रोकने की कोशिश महाकाल बाबा की हर दिन सुबह भस्म आरती दर्शन के लिए देश भर से हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं. सीमित और ऑनलाइन अनुमति नहीं होने के कारण काफी समय से कुछ लोग भस्म आरती के नाम पर अवैध वसूली कर रहे थे. कई बार श्रद्धालुओं के साथ भस्म आरती के नाम पर हजार रुपये की ठगी के मामले भी सामने आए हैं. इसी को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने शुक्रवार से RFID बैंड योजना शुरू कर दी. अब महाकाल, महालोक, मानसरोवर भवन से जनरल और अवंतिका द्वार पर श्रद्धालुओं के मोबाइल नंबर बताने पर रिस्ट बैंड पर QR कोड प्रिंट कर तत्काल श्रद्धालुओं को दिया जाएगा. भस्म आरती काउंटर पर होगी चेकिंग इस संबंध में महाकाल मंदिर प्रशासक गणेश धाकड़ ने बताया कि भस्म आरती में श्रद्धालु को एंट्री के समय कलाई पर RFID बैंड बांधा जाएगा. शुक्रवार सुबह भस्म आरती के दौरान कलेक्टर नीरज सिंह ने इसकी शुरुआत की. सुबह सभी भक्तों की कलाई पर RFID बैंड बांधने के बाद ही प्रवेश दिया गया. अब मंदिर में प्रवेश लेने के बाद सभी भस्म आरती काउंटर पर RFID बैंड चेक होगा. बैंड की चेकिंग से फर्जी और अनधिकृत प्रवेश पर रोक लग सकेगी. सभी भक्तों को भस्म आरती के दौरान इसे पहनना अनिवार्य होगा. ऐसे काम करेगा RFID बैंड     रेडियो-फ्रीक्वेंसी आईडेंटिफिकेशन (RFID बैंड) पूरी तरह चिप प्रोसेस पर काम करता है. इसमें श्रद्धालु की जानकारी फीड की जाती है.     श्रद्धालु ऑनलाइन या ऑफलाइन टिकट परमिशन लेकर मंदिर में प्रवेश करेगा, तब एक काउंटर पर बार कोड स्कैन कर श्रद्धालु को कलाई पर बांधने के लिए बैंड दिया जाएगा.     बैंड में श्रद्धालु की पूरी डिटेल फीड रहेगी. भस्म आरती में प्रवेश से आरती खत्म होने तक RFID बैंड को बांधकर रखना होगा.     आरती खत्म होने के बाद दर्शनार्थियों को निर्धारित काउंटर पर इस बैंड को जमा भी करना होगा.

महाकाल :सुरक्षाकर्मी ने भस्म आरती दर्शन के नाम पर की ठगी, केस दर्ज

उज्जैन महाकाल मंदिर में भस्म आरती में प्रवेश दिलाने के नाम पर श्रद्धालुओं के साथ ठगी करने वाले सुरक्षागार्ड के खिलाफ महाकाल थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। मंदिर के सुरक्षाकर्मी पर बेंगलुरु के श्रद्धालु से 16,500 रुपये लेने के आरोप लगे हैं, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। सोमवार तडके भस्म आरती के दौरान मंदिर प्रशासक गणेश धाकड़ ने औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान, मंदिर में सुरक्षा देने वाली क्रिस्टल कंपनी का कर्मचारी लवजीत शंख द्वार से चार श्रद्धालुओं को भस्म आरती में प्रवेश दिलाने के लिए मंदिर परिसर में लाता हुआ दिखाई दिया। चैकिंग के दौरान, श्रद्धालुओं के पास परमिशन नहीं मिली। उन्होंने बताया कि उन्होंने गार्ड को परमिशन के लिए रुपये दिए हैं। इसके बाद कर्मचारी लवजीत को महाकाल चौकी को सौंपकर उसके खिलाफ जांच के लिए लिखा गया। घटना के पांच दिन बाद, आरोपी लवजीत के खिलाफ महाकाल थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है। झांसा देकर श्रद्धालुओं से ऐंठे 16,500 रुपये महाकाल पुलिस ने बताया कि 3 नवंबर को बेंगलुरु, कर्नाटक से महाकाल के दर्शन करने के लिए मरप्पा अपने परिवार के साथ उज्जैन आए थे। तड़के 4 बजे होने वाली भस्म आरती में प्रवेश के लिए मंदिर कर्मचारी से संपर्क किया। इस दौरान एक युवक ने उन्हें भस्म आरती की परमिशन दिलाने का झांसा दिया और दर्शन कराने के नाम पर रुपयों की मांग की। श्रद्धालु युवक के झांसे में आ गए और उन्होंने 16,500 रुपये भस्म आरती दर्शन के नाम पर उसे दे दिए। 

महाकाल की नगरी में 9 नवंबर से स्काईडाइविंग फेस्ट शुरू होने जा रहा, चलेगा- 9 फरवरी 2025 तक

 उज्जैन मध्य प्रदेश टूरिज्म लगातार चौथे स्काईडाइविंग फेस्ट को होस्ट कर रहा है। इस फेस्ट का उद्देश्य पूरे राज्य में एडवेंचरस टूरिज्म को बढ़ावा देना और पर्यटन गतिविधियों का विस्तार करना है। इसमें शामिल होने वालों को महाकाल की नगरी उज्जैन के ऊपर 10,000 फीट से छलांग लगाने का अनुभव करने का अवसर मिलेगा। तीन महीने चलेगा आयोजन सीएम मोहन यादव की इच्छानुसार ही इस फेस्ट का आयोजन किया गया है। यह आयोजन 9 नवंबर से 9 फरवरी तक चलेगा। मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि राज्य को प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने के लिए सीएम मोहन यादव के मार्गदर्शन में कई गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। सेफ्टी का रखा गया है विशेष ध्यान एमपी पर्यटन बोर्ड के प्रबंध निदेशक शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि पिछले संस्करणों की सफलता और पर्यटकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद, चौथा स्काईडाइविंग महोत्सव तीन महीने तक उज्जैन में होगा। रोमांच चाहने वाले लोग सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे के बीच उज्जैन में दताना हवाई पट्टी पर हवाई रोमांच का अनुभव कर सकते हैं। महोत्सव में सभी प्रतिभागियों के लिए उनकी डाइविंग से पहले सेफ्टी ब्रीफिंग और ट्रेनिंग सेशन होंगे। प्रत्येक प्रतिभागी को अत्याधुनिक सुरक्षा गियर से लैस किया जाएगा, जिसमें स्वचालित तैनाती प्रणाली और बैकअप पैराशूट शामिल हैं। स्काई डाइव करते हुए होंगे महाकाल मंदिर के दर्शन इंटरनेशनल और व्यापक अनुभव वाले प्रशिक्षक हर उड़ान से पहले उपकरणों की गहन जांच करेंगे। स्काईडाइविंग का अनुभव करते हुए आसमान से प्राचीन महाकालेश्वर मंदिर और पवित्र शिप्रा नदी के हवाई दृश्य दिखाई देंगे। फेस्टिवल आयोजकों ने दताना हवाई पट्टी पर एक समर्पित लैंडिंग ज़ोन बनाया है, जिसमें ग्राउंड सपोर्ट स्टाफ और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं शामिल हैं। इस विमान का होगा यूज यही नहीं पूरे दिन मौसम की निगरानी भी की जाएगी। आयोजक एक रीवाइज्ड सेसना 182P विमान का उपयोग करेंगे, जिसमें छह व्यक्ति बैठ सकते हैं। एक बार में 02 प्रतिभागी, 02 ट्रेनर के साथ स्‍काई डाइविंग कर सकेंगे। स्काई डाइविंग में उपयोग किए जाने वाला एयरक्राफ्ट नागरिक विमानन निदेशालय से पंजीकृत है। तीन माह में 1000 से अधिक प्रतिभागियों के सम्मिलित होने की संभावना है।

महाकाल :मंदिर का प्रोटोकाल कार्यालय मानसरोवर से बदलकर महाकाल लोक के कंट्रोल रूम भवन में शिफ्ट

उज्जैन महाकाल मंदिर में दीपावली के बाद बढ़ती भीड़ को देखते हुए दर्शन वीआईपी व्यवस्था में फेरबदल किया गया है। मंदिर का प्रोटोकाल कार्यालय मानसरोवर से बदलकर महाकाल लोक के कंट्रोल रूम भवन में शिफ्ट किया गया है। नई व्यवस्था के तहत प्रोटोकाल से दर्शन करने आने वाले वीआईपी दर्शनार्थी को अब प्रोटोकाल कार्यालय तलाशने में आसानी होगी। यहां से उन्हें पेड (250 रुपए प्रति व्यक्ति) और एफओसी (मुफ्त) दर्शन की पर्ची जारी करने की व्यवस्था की गई है। यह पर्ची लेकर दर्शनार्थी प्रोटोकाल कर्मचारी के साथ वीआईपी मार्ग से सूर्यमुखी हनुमान होते हुए सभा मंडप में पहुंचेगे और पर्ची दिखाकर ही नंदी हाल में प्रवेश करेंगे। याद रहे कि प्रोटोकाल पर्ची के माध्यम से दर्शन कराये जाने की व्यवस्था पहले भी थी। लेकिन बीच में सावन माह के बाद दर्शनार्थियों की भीड़ कम होने के कारण व्यवस्था में ढील दे दी गई थी। ऐसे में प्रोटोकाल कर्मचारी या अन्य कर्मचारी अपने साथ दर्शनार्थियों को ले जाकर नंदी हाल से दर्शन करा रहे थे। हाल ही में दीपावली के बाद से मंदिर में दर्शनार्थियों की संख्या तेजी से बढ़ी है, इस कारण दर्शन व्यवस्था में सख्ती बरती गई है। अब प्रोटोकाल के तहत नंदी हाल से उन्हें ही दर्शन कराये जायेंगे, जो प्रोटोकाल कार्यालय से दर्शन पर्ची बनाकर आयेंगे। मंदिर समिति प्रशासक गणेश धाकड़ का कहना है कि मंदिर में बढ़ती भीड़ को देखते हुए यह बदलाव किया है। इससे लोगों को दर्शन में सुविधा होगी। दीपावली के बाद भीड़ बढ़ी दीपावली के बाद से श्री महाकाल मंदिर में दर्शनार्थियों की संख्या तेजी से बढ़ गई है। मंदिर सूत्रों के मुताबिक करीब तीन लाख दर्शनार्थी इन दिनों रोज मंदिर में पहुंच रहे हैं। मंदिर समिति ने बढ़ती भीड़ को देखते हुए कई बदलाव भी किये हैं। जिसके तहत गणेश मण्डपम् में अब करीब चार-पांच लाइन में दर्शनार्थियों को दर्शन कराये जा रहे हैं। यहां पर सुरक्षा गार्ड भी बढ़ाये हैं जो कतारें जल्दी चला रहे हैं। इसके अलावा गेट नंबर चार पर शीघ्र दर्शन काउंटर बढ़ाये गये हैं। बेरिकेटिंग में भी बदलाव किये गये हैं। मंदिर समिति का दावा है कि अधिकतम 30 मिनट में दर्शनार्थियों को दर्शन कराये जा रहे हैं।

रेलवे स्टेशन से महाकाल मंदिर तक ले जाने वाले रोप-वे को उड़ीसा की एक कंपनी बनायेगी

 उज्जैन रेलवे स्टेशन से महाकाल मंदिर तक ले जाने वाला रोप वे उड़ीसा की कंपनी बनायेगी। कंपनी का टेंडर फाइनल हो गया है। माना जा रहा है कि साल 2026 तक यह पूरा हो जायेगा। महाकाल दर्शन के लिए दर्शनार्थी उज्जैन रेलवे स्टेशन से महाकाल मंदिर तक रोप-वे से आ-जा सकेंगे। इसके लिए उड़ीसा की एमएस इंफ्रा इंजीनियर कंस्ट्रक्शन कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट मिला है। कंपनी ने इनिशियल वर्क भी शुरू कर दिया है। उज्जैन रेलवे स्टेशन से नूतन स्कूल-महाकाल मंदिर प्रशासक कार्यालय तक बनने वाला यह रोप-वे 1.76 किलोमीटर लंबा होगा। मोनोकेबल डिटैचेबल गोंडोला (एमडीजी) सिस्टम से ऑपरेट होने वाले रोपवे में रेलवे स्टेशन से महाकाल मंदिर तक 3 स्टेशन बनाए जाएंगे। रोप-वे में होंगे 48 केबिन सूत्रों के मुताबिक रोप-वे में 48 केबिन होंगे। हर 1 केबिन में एक समय में 10 लोग आ-जा सकेंगे। रोप-वे 16 घंटे चालू रहेगा। इस हिसाब से मोटे तौर पर माना जा रहा है कि 16 घंटे में 60 हजार से अधिक श्रद्धालु इसमें आना-जाना कर सकेंगे। रेलवे स्टेशन से आखिरी स्टेशन तक पहुंचने में करीब 6 मिनट का समय लगेगा। रोपवे 2026 तक शुरू हो जाएगा। रोजाना दो से ढाई लाख दर्शनार्थी आते हैं उज्जैन सिहस्थ 2028 को देखते हुए रोप-वे को बेहद अहम माना जा रहा है। श्री महाकाल लोक बनने के बाद से सामान्य दिनों में ही महाकाल के दर्शन करने के लिए रोजाना औसतन दो से ढाई लाख श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।जबकि पर्व-त्योहार और विशेष अवसरों पर ये संख्या बढ़कर 5 लाख से 10.50 लाख तक पहुंच रही है। ऐसे में शहर में भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रोप-वे की प्लानिंग की गई है। इसके लिए केंद्र सरकार के सड़क परिवहन मंत्रालय ने 189 करोड़ रुपए की स्वीकृति दे रखी है। रोप-वे का विकास, संचालन और रखरखाव नेशनल हाईवे-रोपवे प्रोजेक्ट करेगा। 2022 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने की थी घोषणा 2022 में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग, जहाजरानी, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी सडकों के लोकार्पण के लिए उज्जैन पहुंचे थे। तब उन्होंने महाकाल मंदिर आने वाले भक्तों की सुविधा के लिए हवा में टैक्सी चलाने की बात कही थी। बाद में उन्होंने मंच से रोप-वे की सौगात देकर कहा था कि शहर में जल्द ही महाकाल के भक्तों के लिए इसकी शुरूआत करेंगे। इसके बाद सर्वे प्लानिंग, डीपीआर समेत दूसरे जरूरी काम पूरे किए गए। अब टेंडर होने के बाद रोप-वे का काम शुरू हो चुका है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट में इस बात की भी जानकारी दी थी कि रोप-वे स्टेशन में लोगों के लिए फूड जोन, प्रतीक्षालय, शौचालय के साथ बस और कार पार्किंग की फैसिलिटी भी मिलेगी।

महाकाल लोक परिसर में उर्दू की किताब बैग में लेकर घूम रही थी महिला, बैग से निकले कई आधार कार्ड

उज्जैन  महाकाल लोक में तैनात सुरक्षा एजेंसी के कर्मचारियों ने बुधवार सुबह एक संदिग्ध महिला को पकड़ा है। महिला को जब पकड़ने की कोशिश की गई, तब वह भागने का प्रयास करने लगी। सुरक्षा एजेंसी ने उसे महाकाल थाना पुलिस के हवाले कर दिया है। वहीं, महिला की तलाशी ली गई तो उसके झोले से उर्दू में लिखे कुछ दस्तावेज और 5 आधार कार्ड बरामद हुए हैं। आधार कार्ड में अलग-अलग नाम महिला के पास जो आधार कार्ड मिले हैं, उस पर मुस्लिमों के नाम हैं। सभी पर अलग-अलग नाम दर्ज हैं। इसलिए मामला संदिग्ध लग रहा है। एएसपी नितेश भार्गव ने बताया कि सुरक्षा गार्डों ने एक संदिग्ध महिला को पकड़कर महाकाल थाना पुलिस के सुपुर्द किया है। महिला से अभी पूछताछ की जा रही रही है। मंजू परमार बता रही है नाम महाकाल लोक से पकड़ी गई महिला अपना नाम मंजू परमार बता रही है। झोले से जो आधार कार्ड मिला है, उसमें उसका नाम रुखसार लिखा है। वहीं, मंजू परमार के नाम से जो आधार कार्ड मिला है, उससे महिला के चेहरे का मिलान नहीं हो रहा है। बताया जा रहा है कि झोले से कुल पांच आधार कार्ड मिले हैं, सबकी जांच की जा रही है। गौरतलब है कि पिछले दिनों लश्कर ए तैयबा ने बीकानेर हनुमानगढ़ रेलवे स्टेशन प्रभारी को पत्र लिखकर महाकालेश्वर मंदिर को उड़ाने की धमकी दी थी। उसी के बाद से यह चर्चा जोरों पर थी कि यहां कोई संदिग्ध व्यक्ति हमला कर सकता है। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस जवान सतर्क हैं। साथ ही महाकाल मंदिर के निजी सुरक्षा गार्ड भी चारों ओर पैनी नजर रखे हुए हैं।

मंदिर में मोबाईल नंबर के लिए किया परेशान’, महाकाल मंदिर के कर्मचारी पर युवती ने लगाया आरोप

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उज्जैन ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में एक युवती ने मंदिर के कर्मचारी पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। युवती का कहना है कि कर्मचारी तीन माह से मोबाइल नंबर देने के लिए उसपर दबाव बना रहा है। मामले में मंदिर प्रशासन व पुलिस से शिकायत की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार शिवशक्ति नगर निवासी युवती महाकालेश्वर मंदिर में नियमित दर्शनार्थी है। वह प्रतिदिन अपनी मां के साथ भगवान महाकाल के दर्शन करने मंदिर आती है। काले द्वार पर तैनात कर्मचारी पर लगाया आरोप युवती के अनुसार सभा मंडप के समीप स्थित काले द्वार पर तैनात कर्मचारी उससे छेड़छाड़ करता है तथा मोबाइल नंबर देने के लिए दबाव बनाता है। युवती व उनके स्वजन ने कर्मचारी के विरुद्ध 9 जून को मंदिर कार्यालय में लिखित शिकायत की थी। अधिकारी शिकायत पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। अफसरों से मिल रहे संरक्षण से कर्मचारी के हौसले और बुलंद हो गए तथा वह युवती को अधिक परेशान करने लगा। इसके बाद युवती व उसके स्वजन ने महाकाल थाने में शिकायती आवेदन दिया है। महाकाल पुलिस ने युवती का आवेदन प्राप्त होने की पुष्टि की है। प्रमुख स्थानों पर नहीं हो रहा रोटेशन युवती का आरोप है कि विरोध करने पर कर्मचारी ने उसका मंदिर में प्रवेश भी रोक दिया है। बता दें कि महाकाल मंदिर में कर्मचारियों की ड्यूटी रोटेशन के आधार पर लगाई जाती है। गर्भगृह निरीक्षक, नंदी हाल व्यवस्था प्रभारी, भस्म आरती तथा कालागेट आदि प्रमुख स्थानों पर तैनात कर्मचारियों का रोटेशन नहीं हो रहा है। सालों से कर्मचारी एक ही स्थान पर जमे हुए हैं। तीन महीने से छेड़छाड़ कर रहा कर्मचारी युवती का आरोप है कि काला गेट पर तैनात कर्मचारी बीते तीन माह से उसके साथ छेड़छाड़ कर रहा है। यह इस बात को इंगित करता है कि अफसरों का व्यवस्था की ओर ध्यान नहीं है। स्थापना शाखा द्वारा मनमाने तरीके से कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जा रही है।

महाकाल की शरण में केंद्रीय राज्यमंत्री पासवान बाबा, चांदी द्वार से दर्शन कर किया जलाभिषेक

उज्जैन केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री बनने के बाद कमलेश पासवान आज विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे। उन्होंने उन्होंने चांदी द्वार से बाबा महाकाल का पूजन अर्चन और जलाभिषेक कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। केंद्रीय मंत्री श्री पासवान को बाबा महाकाल का पूजन अर्चन करवाने वाले महाकाल मंदिर के पुजारी पंडित महेश गुरु ने बताया कि आज सुबह भोग आरती के बाद केंद्रीय मंत्री पासवान बाबा महाकाल का आशीर्वाद लेने पहुंचे थे।  उन्होंने चांदी द्वार से बाबा महाकाल के दर्शन कर पूजन और अभिषेक किया। जिसके बाद वे नंदी हॉल में बैठकर बाबा महाकाल की भक्ति में लीन दिखाई दिए। उन्होंने नंदी हॉल में कुछ मंत्रों का जाप किया और उसके बाद महाकाल मंदिर परिसर में स्थित अन्य मंदिरों के भी दर्शन किए।

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