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महाकुंभ में श्रद्धालुओं की संख्या ने तोड़े रिकॉर्ड, 65 करोड़ भक्त पहुंचे, 8 लाख श्रद्धालुओं को मिला आयुष का लाभ

प्रयागराज महाकुंभ में इस बार श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए केंद्र सरकार की ओर से कई व्यवस्थाएं की गई। इसी के तहत लाखों श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करते हुए, आयुष मंत्रालय ने आठ लाख से अधिक तीर्थयात्रियों को व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कीं, जिससे महाकुंभ मेले के दौरान उनकी पवित्र यात्रा सुरक्षित और स्वस्थ रही। 20 आयुष ओपीडी स्थापित करने से लेकर मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयों की तैनाती तक, 90 से अधिक डॉक्टर और 150 स्वास्थ्यकर्मी पूरे भव्य आध्यात्मिक आयोजन के दौरान निरंतर चिकित्सा देखभाल प्रदान करने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। इन समर्पित प्रयासों ने सुनिश्चित किया कि भक्त, कल्पवासी और संत बिना किसी स्वास्थ्य संबंधी चिंता के पवित्र उत्सव में भाग ले सकें, खासकर पवित्र महाशिवरात्रि स्नान के दौरान। आठ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने ली सेवाएं प्रयागराज महाकुंभ में आयुष के नोडल अधिकारी डॉ. अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि मंत्रालय ने आठ लाख से अधिक श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को सफलतापूर्वक पूरा किया है, जो पारंपरिक भारतीय चिकित्सा में बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। श्रद्धालुओं को मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (एमडीएनआईवाई) द्वारा आयोजित चिकित्सीय योग सत्रों से भी लाभ मिला, जिससे शारीरिक और मानसिक कल्याण को बढ़ावा मिला। अखाड़ों के साधुओं के लिए समर्पित स्वास्थ्य जांच स्वास्थ्य सेवा तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सेक्टर-2, सेक्टर-21 और सेक्टर 24 में तीन आयुष कन्वेंशन हॉल स्थापित किए गए, जहां प्रतिदिन योग और स्वास्थ्य सत्रों के माध्यम से तीर्थयात्रियों को निवारक स्वास्थ्य सेवा, रोग प्रबंधन और समग्र जीवन शैली के बारे में शिक्षित किया गया। जूना, आनंद, निरंजनी और वैष्णव अखाड़ों जैसे प्रमुख अखाड़ों में समर्पित स्वास्थ्य जांच के साथ श्रद्धेय साधुओं और संतों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। मोबाइल आयुष स्वास्थ्य इकाइयां इसके अतिरिक्त, मोबाइल आयुष स्वास्थ्य इकाइयों ने पूरे मेला क्षेत्र में दवाइयां वितरित कीं, जबकि विभिन्न टीमों ने विभिन्न आयुष सुविधाओं पर छतरियों से कार्य करते हुए कल्पवासियों को आवश्यक स्वास्थ्य जांच उपलब्ध कराई। श्रद्धालुओं को आम बीमारियों से बचाने के लिए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) ने एक विशेष पहल की शुरुआत की, जिसके तहत 10,000 आयुष रक्षा किट वितरित की गईं, जिनमें आवश्यक आयुर्वेदिक दवाएँ और स्वास्थ्य उत्पाद शामिल थे। इस पहल के साथ ही एक सप्ताह तक चलने वाला स्वास्थ्य शिविर भी लगाया गया, जिसमें 15,000 तीर्थयात्रियों को लाभ मिला, जिससे निवारक और समग्र स्वास्थ्य सेवा के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को बल मिला। श्रद्धालुओं को 25,000 से अधिक औषधीय पौधे किए वितरित इस आयोजन में हरित स्पर्श जोड़ते हुए, राष्ट्रीय औषधीय पौध बोर्ड (एनएमपीबी) ने श्रद्धालुओं को 25,000 से अधिक औषधीय पौधे वितरित किए – जिनमें तुलसी, अश्वगंधा, शतावरी, नीम, आंवला और करी पत्ता शामिल हैं – जिससे प्राकृतिक उपचार को बढ़ावा मिला और दैनिक जीवन में औषधीय पौधों के महत्व पर बल मिला। महाकुंभ मेला सिर्फ़ आध्यात्मिक जागृति के लिए न होकर; यह उन लाखों लोगों की भलाई के लिए भी है जो इस पवित्र यात्रा पर निकलते हैं। आयुष मंत्रालय इस भव्य आयोजन में पारंपरिक स्वास्थ्य सेवा को एकीकृत करने के अपने प्रयासों के लिए प्रतिबद्ध रहा, जिससे समग्र स्वास्थ्य आध्यात्मिक अनुभव का एक अभिन्न अंग बन गया। महाशिवरात्रि के दिन 81 लाख श्रद्धालु पहुंचे संगम सरकारी आंकड़ों के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन (जो महाकुंभ का आखिरी दिन था), रात 2 बजे तक 11.66 लाख श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया। अगले दो घंटों में ये संख्या बढ़कर 25.64 लाख और सुबह 6 बजे तक 41.11 लाख हो गई। सुबह 10 बजे तक कुल 81.09 लाख श्रद्धालु संगम में स्नान कर चुके थे। महाकुंभ का यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि यह यूपी की अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ा आर्थिक ड्राइवर साबित हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में कहा था कि महाकुंभ यूपी की अर्थव्यवस्था को 3 लाख करोड़ रुपए का फायदा पहुंचाएगा। महाकुंभ 2025 की चौंकाने वाली संख्या महाकुंभ में 65 करोड़ श्रद्धालु जुटे हैं, जो किसी भी अन्य धार्मिक आयोजन की तुलना में सर्वाधिक हैं। महाशिवरात्रि का दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह दिन भगवान शिव और देवी पार्वती के दिव्य मिलन की याद में मनाया जाता है। महाकुंभ के दौरान प्रमुख स्नान दिनों पर जैसे माघी संक्रांति (14 जनवरी) को 3.5 करोड़, मकर संक्रांति और पौष पूर्णिमा पर क्रमशः 2 करोड़ और 1.7 करोड़ श्रद्धालुओं का आगमन हुआ। यूपी सरकार ने अनुमान जताया था कि 45 दिनों में 45 करोड़ श्रद्धालु आएंगे, जो आंकड़ा महाकुंभ ने दो सप्ताह पहले ही पार कर दिया। 3 लाख करोड़ रुपए की राजस्व प्राप्ति महाकुंभ के आयोजन में सरकार ने 7,500 करोड़ रुपए खर्च किए, जबकि मुख्यमंत्री योगी ने 3 लाख करोड़ रुपए के राजस्व की उम्मीद जताई है। उनके अनुसार, अगर एक श्रद्धालु 8,000 रुपए खर्च करता है, तो कुल खर्च 3.2 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने भी इस आंकड़े को समर्थन दिया और बताया कि इस आयोजन से होटल, भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य व्यापारिक गतिविधियों में 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक की आय हो सकती है। सुरक्षा और प्रबंधन महाकुंभ में सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद सख्त थी। यूपी पुलिस के अनुसार, 50,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी और 2,700 ए.आई. कैमरों का उपयोग किया गया था। इसके अलावा, 113 अंडरवाटर ड्रोन भी पानी की निगरानी के लिए लगाए गए थे। कुंभ में विशाल तंबू और श्रमिकों की मेहनत इस बार के कुंभ मेले में लगभग 68 लाख लकड़ी की पोल का इस्तेमाल किया गया, जिनकी लंबाई कुल मिलाकर 20,726 किलोमीटर से अधिक थी। इसके अलावा, 100 किलोमीटर के कपड़े और 250 टन CGI शीट्स का उपयोग किया गया। इन संरचनाओं को तैयार करने के लिए 3,000 श्रमिकों ने तीन शिफ्टों में काम किया।  

प्रयागराज महाकुंभ 2025 मानव इतिहास का सबसे बड़ा आयोजन, इससे पहले ऐसी सहभागिता का प्रमाण नहीं

महाकुम्भनगर  तीर्थराज प्रयागराज की धरती पर बीते 13 जनवरी से आयोजित हो रहे महाकुंभ मेला ने बुधवार को महाशिवरात्रि के अंतिम स्नान पर्व पर 65 करोड़ का आंकड़ा पारकर इतिहास रच दिया। महाशिवरात्रि के अंतिम स्नान पर्व पर सुबह 8 बजे तक ही लाखों लोगों ने स्नान कर इस महारिकॉर्ड को स्थापित कर इस महाकुम्भ को संख्या के लिहाज से इतिहास के पन्नों में दर्ज करा दिया। दावा किया जा रहा है कि कुंभ ही नहीं, दुनिया के किसी भी आयोजन में आज तक एक साथ इतनी बड़ी संख्या में लोग नहीं जुटे हैं, जितने 45 दिनों के अंदर प्रयागराज में बनाए गए एक अस्थायी शहर में जुट गए। यह संख्या कई देशों की आबादी से भी कई गुना अधिक है। अब तक 65 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में सनातन आस्था की पावन डुबकी लगाई है। कई देशों की आबादी से ज्यादा लोग कर गए स्नान 65 करोड़ श्रद्धालुओं के किसी एक स्थान पर जुटने का इतिहास में और कोई उदाहरण नहीं दिखाई देता। सनातन के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था, दृढ़ निश्चय और विश्वास का ही यह फल है कि संगम तट पर इतना विशाल जनसमूह 45 दिनों में एकत्र हो गया। यदि इस संख्या की दुनिया भर के देशों की आबादी से तुलना की जाए तो कई देशों की आबादी इसमें समा जाएगी। उदाहरण के तौर पर अमेरिका की दोगुनी से ज्यादा, पाकिस्तान की ढाई गुना से अधिक और रूस की चार गुनी से ज्यादा आबादी के बराबर श्रद्धालु यहां अब तक आ चुके हैं। यही नहीं, जापान की 5 गुनी आबादी, यूके की 10 गुनी से ज्यादा आबादी और फ्रांस की 15 गुनी से ज्यादा आबादी ने यहां आकर त्रिवेणी संगम में पावन डुबकी लगा ली है। देश की लगभग आधी आबादी ने लगाई डुबकी तीर्थराज प्रयागराज में आयोजित इस महाकुम्भ में संख्या के लिहाज से भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में सनातन धर्म को मानने वाले करोड़ों श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं। यदि देश की कुल जनसंख्या से स्नानार्थियों की तुलना की जाए तो इसके अनुसार भी लगभग 50 प्रतिशत भारत ने त्रिवेणी संगम में डुबकी लगा ली है। वहीं अगर सनातन धर्मावलंबियों की बात करें तो देश के 60 प्रतिशत से ज्यादा और दुनिया के करीब 55 प्रतिशत सनातनी श्रद्धालुओं ने पावन स्नान कर लिया है। 45 दिन तक चले इस आयोजन में श्रद्धा की डुबकी लगाने के लिए दुनिया भर से श्रद्धालु जुटे हैं। 73 देशों के राजनयिकों के साथ भूटान नरेश नामग्याल वांगचुक समेत तमाम देशों के अतिथि यहां अमृत स्नान करने पहुंचे। यही नहीं, मां जानकी के मायके नेपाल के 50 लाख से अधिक लोग अब तक त्रिवेणी के पवित्र जल में स्नान कर महाकुम्भ के साक्षी बन चुके हैं। इसके अलावा इटली, फ्रांस, यूके, पुर्तगाल, अमेरिका, इजराइल, ईरान, मॉरीसस समेत दुनिया के कोने-कोने से श्रद्धालु यहां पहुंचे हैं। सीएम योगी की उम्मीदों के पार पहुंचा श्रद्धालुओं का आंकड़ा मां गंगा, मां यमुना और अदृश्य मां सरस्वती के पवित्र संगम में श्रद्धा और आस्था से ओत-प्रोत साधु-संतों, श्रद्धालुओं, स्नानार्थियों और गृहस्थों का स्नान अब उस शिखर के भी पार पहुंच गया है, जिसकी महाकुम्भ से पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उम्मीद जताई थी। सीएम योगी ने अनुमान जताया था कि इस बार जो भव्य और दिव्य महाकुम्भ का आयोजन हो रहा है, वह स्नानार्थियों की संख्या का नया रिकॉर्ड स्थापित करेगा। उन्होंने शुरुआत में ही 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई थी। हालांकि, श्रद्धालुओं की संख्या सीएम योगी के अनुमान से भी आगे निकल गई। बीती 11 फरवरी को ही 45 करोड़ श्रद्धालुओं का आंकड़ा पार हो गया, जबकि 22 फरवरी को यह संख्या 60 करोड़ से भी ऊपर पहुंच गई। महाशिवरात्रि पर 65 करोड़ की संख्या पारकर इसने नया कीर्तिमान बना दिया।

‘सनातन’ संगम के आखिरी 2 दिन…श्रद्धालु ने पार किया अब 63 करोड़ का आंकड़ा

प्रयागराज महाकुंभ में 63 करोड़ से अधिक लोग स्नान कर चुके हैं। इतनी भीड़ आने के बाद भी शहर की हवा गुणवत्ता के अनुरूप रही। मेला प्रशासन का दावा है कि इस दौरान प्रयागराज की हवा चंडीगढ़ से अच्छी रही। इतनी संख्या में तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ और हजारों वाहनों की आवाजाही के बावजूद वायु गुणवत्ता खराब नहीं हुई है। लगातार 42 दिन से शहर वायु की गुणवत्ता को लेकर ग्रीन जोन में बना हुआ है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पर्यावरण कंसल्टेंट शहीक शिराज के अनुसार महाकुंभ ग्रीन जोन में है। उन्होंने बताया कि 100 के भीतर एयर क्वालिटी इंडेक्स अच्छा माना जाता है। सिर्फ मौनी अमावस्या के दिन एयर क्वालिटी इंडेक्स 106 रहा। अन्य दिनों में यह 100 से काफी नीचे रहा। इस तरह से सिर्फ मौनी अमावस्या के दिन ही वायु की गुणवत्ता कुछ खराब थी। उन्होंने बताया, 13 जनवरी पौष पूर्णिमा को महाकुंभ का एयर क्वालिटी इंडेक्स 67 था। 14 जनवरी मकर संक्रांति को 67, 29 जनवरी मौनी अमावस्या को 106, 03 फरवरी बसंत पंचमी को 65 और 12 फरवरी माघी पूर्णिमा को 52 रहा है। महाकुंभ के आखिरी स्नान पर्व महाशिवरात्रि पर सोमवार को संगम में पुण्य की डुबकी लगाने के लिए भक्ति की लहरें फिर उफनाने लगी हैं। चाहे लाल मार्ग हो या काली मार्ग या फिर त्रिवेणी मार्ग, हर तरफ से आस्था का जन सैलाब संगम में मिलने के लिए उमड़ता रहा। मेला प्रशासन ने रात आठ बजे तक 1.30 करोड़ श्रद्धालुओं के डुबकी लगाने का दावा किया। सोमवार की देर शाम तक रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों से संगम जाने वाले रास्तों पर लंबी कतारें लगी रहीं। निजी वाहनों का रेला उमड़ने से आउटर की पार्किंग में वाहनों को खड़ा करने की जगह तक नहीं बची। मेला प्रशासन ने मंगलवार की शाम तक तीन करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के स्नान करने का अनुमान लगाया है। भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। भीड़ के मद्देनजर मेला प्रशासन ने चुस्त-दुरुस्त इंतजाम किए हैं। पार्किंग के अलावा खाली स्थानों और पटरियों पर बडी संख्या में श्रद्धालुओं ने डेरा जमा लिया है। देर शाम तक मेला प्रशासन की ओर से तैयारियां परखी जाती रहीं। करीब 12 किमी क्षेत्रफल में फैले संगम के 42 घाटों पर स्नानार्थी ही नजर आ रहे हैं। कोई दंड-कमंडल लेकर तो कोई सिर पर गठरी और कंधे पर झोला-बोरा लिए संगम की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। मेले में वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। मेला क्षेत्र के इंट्री प्वाइंटों, संगम व पांटून पुलों पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। पुलिस, पैरामिलिट्री के अलावा होमगाड्स, एनडीआरएफ, सिविल डिफेंस और यूपी एसटीएफ के जवान तैनात कर दिए गए हैं। शहर में 10वें दिन जाम से राहत पर वाराणसी, मिर्जापुर मार्ग पर वाहनों की कतार महाकुंभ के दौरान लगने वाले रोजाना भीषण जाम से शहरवासियों को सोमवार को थोड़ी राहत मिली। आखरी बार ऐसी स्थिति माघी पूर्णिमा स्नान के अगले दिन थी। यानी 10वें दिन श्रद्धालुओं के साथ-साथ शहरी को जाम से छुटकारा मिला है। जबकि, बाहरी नंबर की गाड़ियों को भी प्रवेश दिया गया। वहीं, वाराणसी, मिर्जापुर मार्ग पर वाहन रुक-रुककर चलते रहे। मेले में भीड़ कम होने पर कई जगह बैरिकेडिंग भी हटा दी गई हैं। इससे सुबह नौ बजे से ही शहर की सड़काें पर रोजाना के मुकाबले गाड़ियों का कम लोड दिखा। बालसन, सिविल लाइंस, सोहबतियाबाग, तेलियरगंज, फाफामऊ, लेप्रोसी, जानसेनगंज, सीएमपी, अलोपी बाग समेत अन्य जगहों पर जाम की स्थिति सामान्य रही। आवश्यक उपयोग के वस्तुओं के वाहनों की खुली नो-इंट्री शहर में आने वाले आवश्यक उपयोग के वस्तुओं के वाहनों के लिए 11 बजे से नो-इंट्री हटाई गई है। यातायात प्रभारी अमित कुमार ने बताया कि सिर्फ उन्हीं वाहनों को छूट दी गई है, जिसमें आवश्यक उपयोग के वस्तुएं उपलब्ध हैं। इसके अलावा श्रद्धालुओं के लिए पहले जैसे ही व्यवस्था बनी रहेगी। वाहनों का लोड कम होने पर शहर में प्रवेश दिया जाएगा।     प्रयागराज-वाराणसी मार्ग पर सुबह-शाम जाम लगा रहा। शाम करीब चार बजे से जैन मंदिर से अंदावा तक वाहनों की कतार लगी रही।     चित्रकूट-प्रयागराज मार्ग पर भी पहले के मुकाबले जाम से राहत मिली है। सिर्फ बसों को शंकरगढ़ पार्किंग में रोका गया।     प्रतापगढ़-प्रयागराज मार्ग पर जाम से श्रद्धालुओं को मलाक हरहर के रास्ते स्टील ब्रिज की ओर से जाने दिया गया।     मिर्जापुर-प्रयागराज मार्ग पर दोपहर दो बजे से गाड़ियों की कतार लग गई। यह कतार भीरपुर से ऊंचडीह बस अड्डे तक था।     प्रयागराज-लखनऊ-रायबरेली मार्ग पर जाम से राहत थी। मलाका स्टील ब्रिज और फाफामऊ की ओर से गाड़ियां गुजरीं     कानुपर मार्ग पर वाहन सुलेमसराय नेहरू पार्क तक आए। यहां कुछ गाड़ियां रोकी गईं।  

प्रयागराज संगम में डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या ने तोड़ा रिकॉर्ड, US -रूस की जनसंख्या से ज्यादा लोगों ने लगाई डुबकी!

प्रयागराज प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ 2025 ने इतिहास रच दिया है। 13 जनवरी से शुरू हुए इस विराट समागम में अब तक 50 करोड़ से अधिक श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ प्राप्त कर चुके हैं। महाकुंभ के इस आयोजन का महत्व इस बात से भी समझा जा सकता है कि पूरी दुनिया में केवल भारत और चीन की जनसंख्या ही इस संख्या से अधिक है। वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से महाकुंभ ने अपनी दिव्यता और भव्यता से दुनिया को आकर्षित किया है। सीएम योगी ने पहले ही अनुमान जताया था कि इस बार महाकुंभ में श्रद्धालुओं की संख्या एक नया रिकॉर्ड स्थापित करेगी, जो अब सच साबित हो चुका है। शुरुआत में 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान था, जो 11 फरवरी को ही पूरा हो गया था। 14 फरवरी तक यह संख्या 50 करोड़ को पार कर गई है, और आगामी स्नान पर्वों के साथ यह संख्या 55 से 60 करोड़ तक जा सकती है। यूएस सेंसस ब्यूरो की एक रिपोर्ट के अनुसार, पूरी दुनिया के 200 से अधिक राष्ट्रों में जनसंख्या के दृष्टिकोण से टॉप 10 देशों में क्रमश: भारत (1,41,93,16,933), चीन (1,40,71,81,209), अमेरिका (34,20,34,432), इंडोनेशिया (28,35,87,097), पाकिस्तान (25,70,47,044), नाइजीरिया (24,27,94,751), ब्राजील (22,13,59,387), बांग्लादेश (17,01,83,916), रूस (14,01,34,279) और मैक्सिको (13,17,41,347) शामिल हैं. वहीं महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अब तक की (50 करोड़) हो चुकी है. अमेरिका, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, नाइजीरिया, ब्राजील, बांग्लादेश, रूस और मैक्सिको की जनसंख्या इससे कहीं पीछे है. सीएम योगी ने अनुमान जताया था कि इस बार कुंभ में लोगों की संख्या का नया रिकॉर्ड बनेगा. शुरुआत में ही 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया गया था. उनका यह आकलन बीते 11 फरवरी को ही सच साबित हो गया था. वहीं शुक्रवार 14 फरवरी को यह संख्या 50 करोड़ के ऊपर पहुंच चुकी है. अभी महाकुंभ में 12 दिन और एक महत्वपूर्ण स्नान पर्व शेष हैं. स्नान करने वालों की यह संख्या 55 से 60 करोड़ के ऊपर जा सकती है. विभिन्न स्नान पर्वों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ अब तक के कुल श्रद्धालुओं की संख्या का विश्लेषण करें तो सर्वाधिक 8 करोड़ श्रद्धालुओं ने मौनी अमावस्या पर स्नान किया था, जबकि 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने मकर संक्रांति पर अमृत स्नान किया था. एक फरवरी और 30 जनवरी को 2-2 करोड़ के पार और पौष पूर्णिमा पर 1.7 करोड़ श्रद्धालुओं ने पुण्य डुबकी लगाई थी. इसके अलावा बसंत पंचमी पर 2.57 करोड़ श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाई थी. माघी पूर्णिमा के महत्वपूर्ण स्नान पर्व पर भी दो करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में पावन स्नान किया था. दुनिया के प्रमुख देशों की जनसंख्या से अधिक श्रद्धालु ने लगाई डुबकी यूएस सेंसस ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के टॉप 10 देशों की जनसंख्या में केवल भारत और चीन की जनसंख्या महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या से अधिक है। भारत की जनसंख्या 1.41 अरब और चीन की 1.40 अरब है, जबकि अमेरिका (34.2 करोड़), पाकिस्तान (25.7 करोड़), नाइजीरिया (24.3 करोड़) जैसे देशों की जनसंख्या महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं से काफी कम है। पर्वों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़  महाकुंभ के दौरान विभिन्न स्नान पर्वों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सर्वाधिक 8 करोड़ श्रद्धालुओं ने मौनी अमावस्या पर स्नान किया था, जबकि 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने मकर संक्रांति पर अमृत स्नान किया था। एक फरवरी और 30 जनवरी को 2-2 करोड़ श्रद्धालुओं ने पुण्य डुबकी लगाई थी, वहीं पौष पूर्णिमा पर 1.7 करोड़ श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में स्नान किया था। बसंत पंचमी पर 2.57 करोड़ श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई और माघी पूर्णिमा पर भी दो करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में पावन स्नान किया। आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है श्रद्धालुओं की संख्या महाकुंभ में अभी 12 दिन और एक महत्वपूर्ण स्नान पर्व शेष है, जिसमें और श्रद्धालु संगम में स्नान करने के लिए पहुंच सकते हैं। इस बार के महाकुंभ में श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्षों से कहीं अधिक रही है, जो एक अभूतपूर्व रिकॉर्ड है।  

महाकुंभ क्षेत्र नो व्हीकल जोन घोषित, 15-16 फरवरी का पास रद्द, आने से पहले जरूर पढ़ें ये खबर

प्रयागराज प्रयागराज में इन दिनों दिव्य और भव्य महाकुंभ मेला चल रहा है. इस हफ्ते शनिवार और रविवार को भारी के भीड़ आने का अनुमान जताया जा रहा है, जिसे देखते हुए मेला प्रशासन ने सभी पास को रद्द कर दिया है. पूरे मेला क्षेत्र को नो व्हीकल जोन घोषित कर दिया है. इसी के साथ-साथ प्रशासन ने प्रयागराज संगम रेलवे स्टेशन बंद करने की भी घोषणा की है. मौनी अमावस्या पर हुई भगदड़ से सीख लेते हुए प्रशासन जरूरी सावधानियां बरत रहा हैं. महाकुंभ मेला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मेला क्षेत्र में जाने के लिए जारी पास को रविवार और शनिवार के लिए रद्द कर दिया है. भारी भीड़ की आशंका के चलते 15 और 16 फरवरी को पूरे महाकुंभ मेला क्षेत्र को नो व्हीकल जोन भी घोषित किया गया है. इस दौरान किसी भी वाहन को प्रवेश की अनुमति नहीं होगी. गाड़ियों को नजदीकी पार्किंग में पार्क करने की अनुमति दी जाएगी, लेकिन मेला क्षेत्र में बनी पार्किंग में गाड़ियां पार्क नहीं होगीं. 16 फरवरी तक संगम स्टेशन बंद इस संदर्भ में मेला प्रशासन ने दिशा निर्देश जारी कर दिया. कुंभ मेले में सुगम व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने यह बड़ा फैसला लिया है. वहीं, रेलवे ने भी भारी भीड़ को देखते हुए संगम स्टेशन 16 फरवरी तक बंद करने का ऐलान किया है. भीड़ को देखते हुए प्रयागराज में रेलवे ने जीआरपी और आरपीएफ के जवानों को अलर्ट मोड पर रहने को कहा है. दरअसल, वीकेंड की वजह से महाकुंभ नगर में शुक्रवार की सुबह से काफी संख्या में लोगों की आवाजाही शुरू हो गई है. पुलिस ने कई जगह पार्किंग स्थल बनाए बता दें कि शनिवार और रविवार को छुट्टी के दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ महाकुंभ में पहुंच रही है, इस वजह से कुंभ में भीड़ और जाम की समस्या उत्पन्न हो जाती है. वहीं दूरदराज़ से आने वाले श्रद्धालु भी अपनी गाड़ियां लेकर महाकुंभ में आना चाहते हैं, जिस वजह से श्रद्धालुओं को परेशानी भी हो रही है, पुलिस ने भीड़ को देखते हुए कई जगह पार्किंग स्थल बनाए हैं. जहां उन गाड़ियों को रोका जाता है और उसके बाद श्रद्धालु पैदल या ई-रिक्शा या शटल बसों से ही महाकुंभ में आकर संगम स्नान कर सकते हैं. भीड़ के चलते संगम के आसपास के इलाके भी जाम हो गए हैं. महाकुंभ के लिए स्पेशल ट्रेन महाकुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उत्तर रेलवे 15, 16 और 17 फरवरी को नई दिल्ली और वाराणसी (प्रयागराज के रास्ते) के बीच वंदे भारत स्पेशल ट्रेन नंबर 02252/02251 चलाएगा. उत्तर रेलवे द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि वंदे भारत स्पेशल ट्रेन संख्या 02252 सुबह 5.30 बजे नई दिल्ली से रवाना होगी. वह 12.00 बजे प्रयागराज पहुंचेगी. इसके बाद 14.20 बजे वाराणसी पहुंचेगी. उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय ने कहा कि वापसी के लिए ट्रेन नंबर 02251 वाराणसी से 15:15 बजे चलेगी. ये ट्रेन 17.20 बजे प्रयागराज से रवाना होगी और उसी दिन 23.50 बजे नई दिल्ली पहुंचेगी. वीकेंड पर भारी भीड़ पहुंचने का अनुमान महाकुंभ स्नान के लिए संगम स्टेशन पर पहुंची रही भारी भीड़ को देखते हुए स्टेशन को बंद करने का निर्णय लिया है. यह स्टेशन संगम के सबसे नजदीक है. यहां 16 फरवरी तक सभी तरह की एंट्री और एग्जिट पर रोक लगा दी है. बता दें कि माघ पूर्णिमा से पहले उमड़ी भीड़ के चलते 9 फरवरी को ही प्रयागराज संगम रेलवे स्टेशन 14 फरवरी तक के लिए बंद किया गया था, जिसे बढ़कर अब 16 फरवरी तक कर दिया गया है.  

महाकुम्भ में अब विश्व रिकॉर्ड बनाए जाने की तैयारी शुरू, 15 हजार सफाई कर्मचारी एक साथ 10 किमी में सफाई करेंगे

प्रयागराज  माघी पूर्णिमा स्नान के साथ अब विश्व रिकॉर्ड बनाए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम भी यहां पहुंच चुकी है। मेला प्रशासन भी इसके लिए कमर कसकर तैयार है। विश्व की अमूर्त धरोहर महाकुंभ में अभी तक 48 करोड़ से अधिक लोग स्नान कर चुके हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा समागम पहले ही बन चुका है। मेला प्रशासन ने अब पहले से घोषित चार विश्व रिकॉर्ड बनाने की योजना पर अमल शुरू कर दिया है। शुक्रवार से इसकी शुरुआत होगी। पहले दिन 14 फरवरी को संगम क्षेत्र में 15 हजार सफाई कर्मचारी एक साथ गंगा तट पर 10 किमी लंबाई में सफाई करेंगे। कुंभ-2019 में 10 हजार सफाई कर्मचारियों ने एक साथ झाड़ू लगाकर रिकॉर्ड बनाया था। अपने ही इस रिकॉर्ड को तोड़कर मील का नया पत्थर गढ़ा जाना है। इसके अगले दिन 15 फरवरी को 300 कर्मचारी नदी में उतरकर सफाई अभियान को रफ्तार देंगे। रिकॉर्ड की शृंखला में ही 16 फरवरी को त्रिवेणी मार्ग पर 1000 ई-रिक्शा चलाने का रिकॉर्ड भी बनेगा। 13 जनवरी से शुरू हुए महाकुंभ में अब तक 48 करोड़ से अधिक श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा चुके हैं. यह अपने आप में सबसे बड़ा रिकॉर्ड है. महाकुंभ 2025 को विश्व की अमूर्त धरोहर घोषित किया गया है. अब यह दुनिया का सबसे बड़ा समागम बन चुका है. अब तक किसी भी धर्म में 31 दिनों में 48 करोड़ श्रद्धालु कहीं नहीं जुटे हैं. यह अपने आप में एक विश्व रिकॉर्ड है. इसी के साथ अगले 4 दिनों में 4 और भी विश्व रिकॉर्ड बनने जा रहे हैं. रिकॉर्ड एक, 15 हजार कर्मी चलाएंगे सफाई अभियान : 14 फरवरी को 15000 कर्मचारी गंगा घाट पर 10 किलोमीटर तक सफाई अभियान चलाएंगे. गंगा घाटों पर कर्मियों की तैनाती की गई है. कुंभ 2019 में भी 10 हजार सफाई कर्मचारियों ने एक साथ झाड़ू लगाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था. अब इस रिकॉर्ड को तोड़कर प्रयागराज मेला विकास प्राधिकरण नया इतिहास रचेगा. रिकॉर्ड दो, नदी की जलधारा में सफाई करेंगे 300 कर्मी : 15 फरवरी को 300 कर्मचारी नदी में उतरकर सफाई अभियान चलाएंगे. यह भी नया कीर्तिमान होगा. नदी की जलधारा में एक साथ सफाई कर्मी सफाई अभियान के लिए उतरेंगे. रिकॉर्ड तीन, त्रिवेणी मार्ग पर चलेंगे 1001 ई-रिक्शा : 16 फरवरी को त्रिवेणी मार्ग पर 1001 ई-रिक्शा चलाकर भी रिकॉर्ड बनाया जाएगा. रिकॉर्ड चार, 10 हजार लोग देंगे अपने हाथों की छाप : मेला अधिकारी विजय किरण आनंद ने बताया कि 17 फरवरी को 10000 लोगों के हाथ के छाप ( हैंड प्रिंट) लेने का भी विश्व रिकॉर्ड बनाया जाएगा. चारों रिकॉर्ड बनाने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं. अगले 4 दिनों में यह सभी रिकॉर्ड बनेंगे. लाखों श्रद्धालु इसके साक्षी बनेंगे. साल 2019 में लगे अर्ध कुंभ में भी कई विश्व रिकॉर्ड बने थे. एक स्थान पर सबसे ज्यादा श्रद्धालुओं को एकत्र करने का विश्व रिकॉर्ड बनाया गया था. इसके अलावा सबसे बड़ा स्वच्छता अभियान और सार्वजनिक स्थान पर सबसे बड़ी चित्रकला प्रतियोगिता को भी गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान मिला था. 2019 में भी गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की 3 सदस्यीय टीम ने संगम नगरी का दौरा किया था. 28 फरवरी से 3 मार्च के बीच 4 दिन तक आयोजित की गई चित्रकला प्रतियोगिता में काफी संख्या में लोग शामिल हुए थे. कुंभ के दौरान 7000 से अधिक विद्यार्थियों ने अपने एक हाथ की छाप लगाई थी. इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान दिया गया था. इससे पहले यह रिकॉर्ड सियोल में 4675 लोगों ने बनाया था.  

महाकुंभ में महा रिकॉर्ड !डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 50 करोड़ पार

प्रयागराज प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ 2025 को लेकर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘ये नया उत्तर प्रदेश है. 25 करोड़ की आबादी है और कल तक 50 करोड़ लोग प्रयागराज में डुबकी लगा चुके हैं.’ इस दौरान मुख्यमंत्री ने समाजवादी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी जमकर निशाना साधा. महाकुंभ में माघ पूर्णिमा का स्नान जारी है। संगम से 15 किमी तक चारों तरफ श्रद्धालुओं की भीड़ है। प्रशासन के मुताबिक, दोपहर 2 बजे तक 1.83 करोड़ लोग स्नान कर चुके हैं। अनुमान है कि आज 2.5 करोड़ श्रद्धालु डुबकी लगाएंगे। श्रद्धालु पर हेलिकॉप्टर से 25 क्विंटल फूल बरसाए गए। काटजू रोड पर मस्जिद के बाहर जुटे नमाजियों ने श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा की। प्रयागराज जाने वाले रास्तों में भीषण जाम के बाद ट्रैफिक प्लान में बदलाव किया गया है। शहर में वाहनों की एंट्री बंद है। मेला क्षेत्र में भी कोई भी वाहन नहीं चलेगा। ऐसे में श्रद्धालुओं को संगम पहुंचने के लिए 8 से 10 किमी तक पैदल चलना पड़ रहा है। प्रशासन पार्किंग से शटल बसें चला रहा है। हालांकि यह बेहद सीमित हैं। संगम पर पैरामिलिट्री फोर्स के जवान तैनात हैं। वहां लोगों को रुकने नहीं दे रहे हैं, ताकि भीड़ न बढ़ पाए। ज्यादातर लोगों को बाकी घाटों पर स्नान के लिए भेजा जा रहा है। भीड़ कंट्रोल के लिए पहली बार मेले में 15 जिलों के डीएम, 20 IAS और 85 PCS अफसर तैनात किए गए हैं। काटजू रोड पर अब्दुल्लाह मस्जिद में उमड़े नमाजियों ने श्रद्धालुओं पर फूल बरसाए। इधर, लखनऊ में सीएम योगी सुबह 4 बजे से मुख्यमंत्री आवास पर बने वॉर रूम से महाकुंभ की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। डीजी प्रशांत कुमार, प्रमुख सचिव (गृह) संजय प्रसाद और कई सीनियर अफसर भी हैं। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, माघ पूर्णिमा स्नान का मुहूर्त शाम 7.22 मिनट तक रहेगा। महाकुंभ मेले से भीड़ जल्दी बाहर निकल जाए, इसलिए लेटे हनुमान मंदिर, अक्षयवट और डिजिटल महाकुंभ सेंटर को बंद कर दिया गया है। आज महाकुंभ में कल्पवास भी खत्म हो जाएगा। संगम स्नान के बाद करीब 10 लाख कल्पवासी घर लौटेंगे। महाकुंभ का आज 31वां दिन है। इससे पहले 4 स्नान पर्व हो चुके हैं। 13 जनवरी से अब तक करीब 46 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं। अब 26 फरवरी को महाशिवरात्रि पर आखिरी स्नान पर्व होगा। माघ पूर्णिमा के स्नान से जुड़े अपडेट्स आज 190 ट्रेनें चलाई गईं, 9.46 लाख लोगों ने यात्रा की रेलवे की ओर से जारी बुलेटिन के मुताबिक, आज 12 फरवरी को दोपहर 3 बजे तक यात्रियों की सुविधा के लिए 190 ट्रेनें चलाई गईं। कुल 9.46 लाख से अधिक यात्रियों ने सफर किया। इससे पहले 11 फरवरी को 343 गाड़ियां चलाई गईं। 14.69 लाख से अधिक यात्रियों ने यात्रा की। मुस्लिमों ने श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा की, खाने-पीने का सामान दिया प्रयागराज में काटजू रोड स्थित अब्दुल्लाह मस्जिद के बाहर जुटे नमाजियों ने माघी पूर्णिमा का स्नान कर लौट रहे श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा की। खाने पीने का सामान देकर श्रद्धालुओं को विदा किया। सोशल एक्टिविस्ट हसीब अहमद की अगुवाई में कई जगहों पर श्रद्धालुओं के लिए खाने-पीने के स्टॉल भी लगाए गए हैं। विदेशी श्रद्धालु ने कहा- गंगा में डुबकी लगाना अविश्वसनीय अनुभव था संगम स्नान के बाद विदेशी श्रद्धालु ने कहा- गंगा में पवित्र डुबकी लगाना एक अविश्वसनीय अनुभव था। यह अद्भुत है और हम यहां जो महसूस कर रहे हैं उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।

प्रयागराज में महाकुंभ मेला 2025 के चलते भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़े, पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें, कई जगह ईंधन खत्म

 प्रयागराज  प्रयागराज में महाकुंभ मेला 2025 के चलते करोड़ों श्रद्धालु गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए उमड़ रहे हैं। मेरठ से प्रयागराज जाने वाले मार्गों पर जनसैलाब और श्रद्धालुओं की भीड़ से हाईवे गुलजार हो गए हैं। इस धार्मिक आयोजन के कारण लाखों लोगों को रोजगार मिला है। होटल, ढाबे, पेट्रोल पंप से लेकर सड़क किनारे रेहड़ी पटरी वालों तक सभी को इसका आर्थिक लाभ मिल रहा है। महाकुंभ के चलते प्रयागराज और आसपास के सभी होटलों में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिल रही है। मेरठ से प्रयागराज जाने वाले रास्ते पर स्थित ढाबों और रेस्टोरेंट में भी लोगों की भारी संख्या देखी गई। ढाबों में सामान्य दिनों की तुलना में तीन से चार गुना ज्यादा ग्राहक पहुंच रहे हैं, जिससे इन व्यवसायियों की आमदनी में जबरदस्त इजाफा हुआ है। हाईवे और उससे जुड़े मार्गों पर हजारों की संख्या में अस्थायी दुकानें भी लग गई हैं। सड़क किनारे पानी की बोतल, चाय-नाश्ता, खाने-पीने की चीजें बेचने वाले छोटे व्यापारियों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। कई छोटे व्यापारी इसे अपने लिए रोजगार का बेहतरीन अवसर मान रहे हैं। पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी कतारें, कई जगह ईंधन खत्म प्रयागराज जाने वाले मार्गों पर स्थित पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने निजी वाहनों से महाकुंभ में भाग लेने के लिए रवाना हुए हैं, जिसके चलते पेट्रोल और डीजल की खपत कई गुना बढ़ गई है। कई पेट्रोल पंपों पर तो ईंधन खत्म होने की नौबत आ गई, जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। मेरठ निवासी उमेश शर्मा, जो परिवार सहित प्रयागराज जा रहे थे, उन्होंने बताया कि हाईवे पर एक पेट्रोल पंप पर 45 मिनट तक लाइन में लगने के बाद भी उन्हें पेट्रोल नहीं मिल सका। ऑटो, ई-रिक्शा और बोट वालों ने यात्रियों की मजबूरी का उठाया फायदा महाकुंभ में भीड़ बढ़ने के कारण प्रयागराज में स्थानीय परिवहन सेवा महंगी हो गई है। ऑटो और ई-रिक्शा चालकों ने मनमाने किराए वसूले। जहां सामान्य दिनों में 10 से 20 रुपये किराया लिया जाता था, वहीं अब श्रद्धालुओं से 100 से 200 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। सबसे ज्यादा लूट बाइक सवारों ने मचाई। संगम से करीब 2 किलोमीटर पहले ही यातायात बंद कर दिया गया, जिससे श्रद्धालुओं को पैदल चलना पड़ा। इस मौके का फायदा उठाकर कुछ स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं को बाइक से संगम तक छोड़ने के लिए 1000 रुपये प्रति सवारी वसूले। एक बाइक पर दो सवारियों को ले जाकर 2000 रुपये तक की कमाई की जा रही है। संगम तट पर नाविकों ने भी श्रद्धालुओं की मजबूरी का लाभ उठाया। सामान्य दिनों में जो नाव किराया 50-100 रुपये था, वह अब 500 रुपये तक पहुंच गया है। श्रद्धालु इस मनमानी से काफी परेशान नजर आए। पुलिस की तत्परता की सराहना भारी भीड़ के बावजूद प्रयागराज पुलिस और प्रशासन की मुस्तैदी की लोग सराहना कर रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि स्थानीय पुलिस ने इस बार काफी बेहतर व्यवस्था की है। मेरठ के शहर क्षेत्र से सौरभ खाटू और उनके साथ आए लोगों ने बताया कि पुलिस हर जगह गाइड कर रही है और श्रद्धालुओं की मदद कर रही है। जिन लोगों को रास्ते की जानकारी नहीं थी, उन्हें पुलिसकर्मी सही दिशा दिखा रहे हैं। महिलाओं और बच्चों के लिए भी विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। शहर में कई स्थानों से प्रवेश मार्गी पर बड़ी बड़ी निशुल्क पार्किंग की व्यवस्था सुरक्षा कर्मियों की ड्यूटी के साथ की गई है। हालांकि, कुछ जगहों पर भीड़ को नियंत्रित करने में कठिनाई हुई, लेकिन कुल मिलाकर पुलिस व्यवस्था संतोषजनक रही। विपक्ष को बताया सनातन विरोधी महाकुंभ में स्नान करने आए कई श्रद्धालुओं ने विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उनका कहना था कि कुछ नेता लगातार सनातन धर्म को लेकर अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं। श्रद्धालुओं ने कहा कि महाकुंभ केवल हिंदुओं के लिए ही नहीं, बल्कि सभी धर्मों के लोगों के लिए रोजगार और आस्था का बड़ा केंद्र है। कई मुस्लिम दुकानदारों, होटल मालिकों, नाविकों और रेहड़ी-पटरी वालों को भी इसका सीधा लाभ मिला है। मेरठ निवासी रामकिशन ने कहा कि विपक्षी नेता सिर्फ एक विशेष समुदाय को खुश करने के लिए ऐसे बयान देते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि महाकुंभ सभी के लिए लाभकारी साबित हो रहा है।

भारत में इतिहास का सबसे लंबा जाम, 20 Km पैदल चलने का बूता है तो आइए महाकुंभ, 300 किमी रूट पर भारी Traffic

प्रयागराज महाकुंभ मेला अब अपने अंतिम चरण में है, और लाखों की संख्या में श्रद्धालु अपने-अपने वाहनों से पहुंच रहे हैं, जिसके कारण शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। महाकुंभ नगर से लेकर शहर के प्रमुख इलाकों तक लंबी-लंबी गाड़ियों की कतारें लग चुकी हैं, और श्रद्धालुओं को 20 किलोमीटर तक पैदल चलने की स्थिति बन गई है। धूमनगंज, चौफटका, रेलवे स्टेशन सिटी साइड, दारागंज और बक्शी बांध जैसे प्रमुख इलाकों में जाम की स्थिति गंभीर हो गई है। यहाँ तक कि दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों और अधिवक्ताओं को भी अदालतों तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है। इसके बावजूद, संगम की रेती पर चल रहे महाकुंभ में श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हो रहा है। लाखों श्रद्धालु प्रतापगढ़ से होकर प्रयागराज पहुंच रहे हैं, और उनके यात्रा मार्गों पर भी भारी जाम की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, भदोही हाइवे पर कुछ राहत मिली है, वहीं वाराणसी-प्रयागराज NH 19 पर सुबह के समय जाम की स्थिति सामान्य है, लेकिन दोपहर बाद यहां वाहनों का दबाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।   6 घंटे का रास्ता 24 घंटे में हो रहा पूरा मध्य प्रदेश के जबलपुर से लेकर प्रयागराज तक के 350 किमी के रूट पर भारी जाम की स्थिति बन गई है। नेशनल हाईवे-30 पर लाखों वाहन फंसे हुए हैं, और श्रद्धालु रेंगते हुए महाकुंभ पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। जबलपुर से प्रयागराज का रास्ता पहले 5 से 6 घंटे में तय हो जाता था, लेकिन अब यह समय बढ़कर 24 घंटे से ज्यादा हो चुका है। जाम की सबसे खराब स्थिति रीवा के आसपास देखी जा रही है, जहां वाहनों की लंबी कतारें और ट्रैफिक की भारी भीड़ बनी हुई है। प्रशासन द्वारा रास्ते को साफ करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जाम की गंभीरता को देखते हुए श्रद्धालुओं को कई किलोमीटर पैदल चलने की भी स्थिति आ रही है। महाकुंभ के इस अंतिम चरण में श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हो रहा है, लेकिन यातायात की समस्या निश्चित रूप से उनके यात्रा अनुभव को प्रभावित कर रही है। काशी और अयोध्या में भी उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ महाकुंभ के कारण काशी में भी भीड़ का दृश्य देखने को मिल रहा है। काशी आने वाली हर सड़क पर गाड़ियों की लंबी कतारें हैं, और यहां तक कि एक मिनट में 40 नाव घाट से निकल रही हैं। 3 से 9 फरवरी तक, 35 लाख से ज्यादा श्रद्धालु काशी पहुंचे। अयोध्या में भी महाकुंभ के बाद रामलला के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा है। प्रयागराज में 43 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई महाकुंभ के 29वें दिन तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ संगम तट पर उमड़ी। 9 फरवरी तक, कुल 43 करोड़ 57 लाख श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई, जिसमें 10 लाख कल्पवासी और 53 लाख 75 हजार श्रद्धालु शामिल हैं। प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, क्योंकि भीड़ को नियंत्रित करना और श्रद्धालुओं के लिए यातायात व्यवस्था बनाए रखना बेहद कठिन हो रहा है। प्रशासन की ओर से उठाए गए कदम भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने शहर में प्रवेश करने से पहले 10 से 15 किलोमीटर पहले कूलिंग ऑफ एरिया बनाए हैं, ताकि शहर में प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पर नियंत्रण रखा जा सके। प्रशासन की कड़ी मेहनत के बावजूद, श्रद्धालुओं का उत्साह थमा नहीं है, और वे अपने आस्थावान उद्देश्य की ओर बढ़ रहे हैं।  

महाकुंभ में होगा स्पेशल कलर कोड, वीआईपी, साधु-संतों से श्रद्धालुओं को मिलेगी सुरक्षा

प्रयागराज प्रयागराज के महाकुंभ में श्रद्धालुओं की सुविधा, अच्छी व्यवस्था के अलावा सुरक्षा के लिए छह रंग के ई-पास जारी किए जा रहे हैं. पुलिस से लेकर अखाड़े और वीआईपी तक के लिए अलग-अलग रंग के ई-पास जारी किए जा रहे हैं. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश के बाद श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं. साथ ही, कैटेगरी के आधार पर कोटा निर्धारित किया जा रहा है. देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न होने पाए, इस लिहाज से विभागीय स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए जा रहे हैं. यूपीडेस्को के जरिए ई-पास प्रणाली लागू करने की व्यवस्था वाहन ई-पास के लिए उत्तर प्रदेश की नोडल आईटी संस्था यूपीडेस्को के जरिए से ई-पास प्रणाली लागू करने की व्यवस्था की गई है. व्यवस्था के सुचारु संचालन के लिए कई विभागों के नोडल अधिकारी, मेला पुलिस, सभी संस्थाओं के वाहन पास के आवदेनों का सत्यापन निर्धारित कोटा के आधार पर करेंगे. ये कागजात हैं जरूरी आवेदन प्रक्रिया के अंतर्गत प्रत्येक वाहन पास के लिए आवेदक का व्यक्तिगत विवरण, कलर्ड पासपोर्ट फोटो, आधार कार्ड, पैन कार्ड और वाहन का रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र और ड्राइविंग लाइसेंस की छाया प्रति लेनी होगी. यूपीडेस्को की ओर से अनुबंधित कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधि की ओर से अस्थायी मेला पुलिस स्थल पर अनुमोदित ई-पास को प्रिंट कर मेला पुलिस कार्यालय से ही उपलब्ध कराया जाएगा. किस तरह जारी होंगे अलग-अलग ई-पास उच्च न्यायालय, वीआईपी, विदेशी राजदूत, विदेशी नागरिक और अप्रवासीय भारतीयों के साथ केंद्र, राज्य के विभाग के लिए सफेद रंग का ई-पास जारी किया जा रहा है. अखाड़ों और संस्थाओं को केसरिया रंग का ई-पास प्रदान किया जा रहा है. वहीं, कार्यदायी संस्थाओं, वेंडर, फूड कोर्ट और मिल्क बूथ के लिए पीले रंग का ई-पास जारी किया जा रहा है. मीडिया को आसमानी, पुलिस बल को नीला और आपातकालीन और आवश्यक सेवाओं के लिए लाल रंग का ई-पास प्रदान किया जा रहा है. सभी सेक्टर में वाहन पार्किंग की व्यवस्था महाकुंभ के अवसर पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अफसरों को स्पष्ट निर्देश है कि देश दुनिया के कोने-कोने से आने वाले एक भी श्रद्धालु को किसी प्रकार की असुविधा न हो पाए. इसी के मद्देनजर मेला प्राधिकरण की ओर से सभी सेक्टर में वाहन पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है. निकटतम पार्किंग तक पहुंचाने के लिए सभी विभागों, कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के वाहनों के ई-पास जारी किए जाने हैं. वाहनों के पास के लिए कैटेगरी के आधार पर कोटा निर्धारित किया गया है, जिसके अनुरूप वाहन पास के अनुमोदन के लिए प्रत्येक विभाग के स्तर से नोडल अधिकारी नामित किया जा रहा है. उनकी संस्तुति के आधार पर ही वाहन पास के लिए जरूरी सभी विवरण ऑनलाइन भरकर सबमिट किए जा रहे हैं.  

महाकुंभ के लिए बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार किया गया, श्रद्धालुओं के लिए तैयार प्रयागराज

महाकुंभ नगर कभी संकरी और खस्ताहाल सड़कों के लिए पहचाने जाने वाले प्रयागराज का आज कायाकल्प हो चुका है। पहले कुंभ 2019 और अब महाकुंभ 2025 को देखते हुए योगी सरकार ने यहां की सूरत ही बदल दी है। 2019 कुंभ के दृष्टिगत जो विकास कार्य हुए, उसे 2025 महाकुम्भ में और विस्तार देते हुए स्थाई कार्यों पर जोर दिया गया है। सनातन आस्था के सबसे बड़े समागम महाकुंभ के लिए बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार किया गया है। आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को आवागमन में किसी तरह की परेशानी न हो, इसको देखते हुए इस बार 200 सड़कों का निर्माण और विकास किया गया है। इन सड़कों को 3 लाख पौधों और एक लाख हॉर्टिकल्चर सैंपलिंग से सजाया गया है। कुल मिलाकर महाकुंभ के दौरान जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आएंगे तो यहां की सड़कों और उनके सौंदर्यीकरण की मनमोहक छवि के साथ यादगार अनुभव लेकर वापस जाएंगे। प्रयागराज में महाकुंभ के महा आयोजन को देखते हुए कुल 200 ऐसी सड़कें हैं, जिनका उन्नयन किया गया है। इसमें नई सड़कों का भी निर्माण हुआ है, जबकि सड़कों का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण भी किया गया है। सड़कों के निर्माण और विकास में तीनों विभागों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसमें सबसे ज्यादा काम प्रयागराज नगर निगम की ओर से किया गया है, जिसने कुल 78 सड़कों का नव निर्माण, चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण करने में सफलता प्राप्त की है। इसके बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने 74 और प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) ने कुल 48 सड़कों का विकास किया है। इसके साथ ही सड़कों का सौंदर्यीकरण भी किया गया है। खासतौर पर विभिन्न तरह के पौधों को यहां सजाया गया है, जबकि हॉर्टिकल्चर सैंपलिंग्स भी की गई है। इन 200 सड़कों पर कुल मिलाकर तीन लाख पौधों को रोपित किया गया है, जबकि एक लाख हॉर्टिकल्चर सैंपलिंग्स को प्लांट किया गया है। इन्हीं सड़कों के माध्यम से श्रद्धालुओं का संगम तक आवागमन सुगम हो सकेगा और उन्हें दिव्य आनंद की अनुभूति प्राप्त होगी। इन सड़कों का निर्माण तीनों विभागों के लिए कतई आसान नहीं रहा है। इसके लिए इन्हें कई तरह की चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है। उदाहरण के तौर पर निर्माण के दौरान कई ऐसे स्थल थे, जहां पर एंक्रोचमेंट था जिन्हें हटाया गया है। श्रद्धालुओं के साथ ही प्रयागराज वासियों की सुविधा के लिए निर्मित इन सड़कों के विकास के लिए कुल मिलाकर 4426 एंक्रोचमेंट को ध्वस्त किया गया है। इसी तरह, कई स्थलों पर निर्माण को लेकर कोर्ट केस का भी सामना करना पड़ा है। कुल मिलाकर 82 कोर्ट केसेस को रिजॉल्व किया गया है। वहीं, निर्माण के दौरान 4893 इलेक्ट्रिक पोल्स को भी यहां से शिफ्ट करने में सफलता प्राप्त हुई है। इतना ही नहीं, सड़कों के निर्माण के साथ-साथ 170 किमी. लंबी अंडरग्राउंड केबलिंग भी की गई है।  

‘कुम्भ रेल सेवा ऐप’ में यात्रियों के लिए ट्रेन टिकट बुकिंग की सुविधा भी होगी, मिलेगी आवश्यक जानकारी

प्रयागराज  महाकुम्भ 2025 के दौरान श्रद्धालुओं के सुगम और आरामदायक सफर के लिए भारतीय रेलवे ने विशेष प्रबंध किए हैं। रेलवे की ये पहल यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने और समय की बचत करने के उद्देश्य से की गई है। कुम्भ रेल सेवा ऐप महाकुम्भ 2025 के दौरान श्रद्धालुओं का स्मार्ट साथी उत्तर मध्य रेलवे ने महाकुंभ 2025 के दौरान श्रद्धालुओं की यात्रा को आसान और सुरक्षित बनाने के लिए एक नई पहल शुरू की है – ‘कुम्भ रेल सेवा ऐप’। इस ऐप का उद्देश्य महाकुंभ मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को रेलवे से जुड़ी सभी जानकारी एक ही स्थान पर प्रदान करना है। यह ऐप यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल संसाधन होगा, जो उनकी यात्रा को सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाएगा।   यात्रियों को मिलेगी सभी आवश्यक जानकारी ‘कुम्भ रेल सेवा ऐप’ के माध्यम से यात्रियों को महाकुंभ से जुड़ी सारी आवश्यक जानकारी एक ही स्थान पर मिल सकेगी। इसमें ट्रेनों की समय-सारणी, टिकट बुकिंग, स्टेशन से मेला क्षेत्र तक पहुंचने के मार्ग, और रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी शामिल होगी। इसके अलावा, ऐप में महाकुंभ के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की जानकारी भी दी जाएगी, जिससे श्रद्धालु अपनी यात्रा की योजना बेहतर तरीके से बना सकेंगे।   आपातकालीन सेवाएं और सुरक्षा की व्यवस्था महाकुंभ जैसे बड़े आयोजन में सुरक्षा और आपातकालीन सेवाएं अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं। इस ऐप में आपातकालीन संपर्क नंबरों की जानकारी भी उपलब्ध होगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति में यात्री तुरंत सहायता प्राप्त कर सकेंगे। इसके अलावा, आरपीएफ द्वारा रेलवे स्टेशनों और मेला क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर यात्रियों को सभी आवश्यक जानकारी प्रदान की जाएगी, जिससे वे सुरक्षित रूप से अपनी यात्रा पूरी कर सकें।   विशेष सुविधाएं और डिजिटल टिकट बुकिंग ‘कुम्भ रेल सेवा ऐप’ में यात्रियों के लिए ट्रेन टिकट बुकिंग की सुविधा भी होगी, जिससे वे ऐप के माध्यम से सीधे टिकट बुक कर सकेंगे। यह सुविधा यात्रियों के लिए बहुत सहायक होगी, क्योंकि उन्हें अलग से काउंटर या वेबसाइट पर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इसके अलावा, ऐप में रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध विभिन्न सुविधाओं की जानकारी भी दी जाएगी, जैसे वेटिंग रूम, रेस्ट रूम, फूड स्टॉल्स, पीने के पानी की व्यवस्था और सफाई जैसी सुविधाएं।   हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध जानकारी यात्रियों की सुविधा के लिए इस ऐप को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं को भाषा संबंधी कोई परेशानी न हो। इसके माध्यम से वे अपनी यात्रा को बेहतर तरीके से योजना बना सकेंगे और ऐप का पूरा लाभ उठा सकेंगे।   महाकुंभ से जुड़ी तस्वीरें और ऐतिहासिक जानकारी इस ऐप में महाकुंभ से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी और तस्वीरें भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इसमें अतीत के महाकुंभ के फोटो गैलरी, महाकुंभ के इतिहास, आयोजनों और धार्मिक महत्व की जानकारी भी दी जाएगी। इससे श्रद्धालु महाकुंभ के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को बेहतर समझ सकेंगे।   उत्तर मध्य रेलवे का यह प्रयास श्रद्धालुओं की यात्रा को आसान, सुरक्षित और आरामदायक बनाने में मदद करेगा। ‘कुम्भ रेल सेवा ऐप’ महाकुंभ 2025 के आयोजन को एक नया डिजिटल दृष्टिकोण प्रदान करेगा, जिससे यात्रियों को पूरी यात्रा के दौरान आवश्यक जानकारी और सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी।

प्रयागराज महाकुंभ में 13 जनवरी 2025 को प्रथम मुख्य स्नान पर्व के लिए तैयारी

 प्रयागराज प्रयागराज में महाकुंभ 2025 को भव्य दिव्य नव्य बनाने की तैयारी युद्ध स्तर पर शुरू है। 13 जनवरी 2025 प्रथम मुख्य स्नान पर्व की तिथि 10 दिन पहले ही यह संपूर्ण कार्य पूरा करने की कोशिश जारी है। इसके लिए 24 घंटे दिन रात कार्य हो रहा है। लेबर टेक्नीशियन राजगीर कारीगर आदि स्विफ्ट वाइज काम कर रहे हैं। संगम और किला के मध्य स्थित बड़े हनुमान जी मंदिर के कॉरिडोर का निर्माण कार्य भी प्रयागराज विकास प्राधिकरण द्वारा लगातार किया जा रहा है। बड़े हनुमान मंदिर कॉरिडोर को जोधपुर पिंक स्टोन से सजाया संवारा जा रहा है। बता दें कि बड़े हनुमान मंदिर कॉरिडोर निर्माण के लिए 11,589 स्क्वायर मीटर जमीन को चिह्नित किया गया है। इसमें 535 स्क्वायर मीटर में बड़े हनुमान मंदिर का भव्य गर्भगृह और परिक्रमा पथ बन रहा हैं। वहीं कॉरिडोर एरिया के लिए 2184 स्क्वायर मीटर भूमि निर्धारित है। लगभग 40 करोड़ रुपये की लागत से कॉरिडोर का निर्माण कराया जाना था। पैदल परिक्रमा पथ बनेगा हालांकि कम समय की वजह से कुछ कार्यों को आगे बढ़ाया गया है। कॉरिडोर एरिया में पाथवे के अलावा पूजा-प्रसाद, फूलमाला की दुकानें और श्रद्धालुओं के लिए 6,176 स्क्वायर मीटर का खुला क्षेत्र डिवेलप किया जा रहा है। कॉरिडोर रोड के लिए 1,310 स्क्वायर मीटर और पैदल परिक्रमा पथ के लिए 760 स्क्वायर मीटर भूमि प्रस्तावित है। बजरंगबली से जुड़ी आकृतियां कॉरिडोर की दीवारों पर बजरंगबली के जीवन से जुड़ी आकृतियों को उकेरा जाएगा। कॉरिडोर में प्रसाद तैयार करने के लिए आधुनिक किचन का निर्माण होगा। श्रद्धालुओं के लिए पूजा-अर्चना के लिए स्थान और मेडिटेशन सेंटर भी होगा। गर्भगृह में श्रद्धालुओं के आने और जाने के स्थान को भी चौड़ा किया जाएगा। इसके अलावा मंदिर में क्लाक रूम, आरओ वॉटर की सुविधा भी मिलेगी।

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