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महाराष्ट्र में कैसे बने महाबली, महायुति की तिकड़ी ने किया कमाल, जाने 5 प्वाइंट

महाराष्ट्र महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों ने सियासी पंडितों को चौंका दिया है। खबर लिखे जाने तक महायुति गठबंधन 220 सीटों पर आगे है। बीजेपी, शिंदे गुट और अजित पवार की एनसीपी की इस तिकड़ी ने ध्रुवीकरण, मराठा आंदोलन और विपक्ष के तमाम आरोपों को किनारे करते हुए अपनी पकड़ मजबूत रखी। आइए, जानते हैं कि आखिर वो कौन से फैक्टर थे, जिन्होंने महायुति को एक बार फिर सत्ता के करीब ला दिया। लड़की बहिन योजना ने किया कमाल एकनाथ शिंदे सरकार की लड़की बहिन योजना ने सीधे जनता के दिलों में जगह बना ली। इस योजना के तहत महिलाओं को हर महीने खातों में पैसे मिलना शुरू हुआ, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग की महिलाओं ने महायुति को जमकर वोट दिया। देवेंद्र फडणवीस का प्रचार अभियान बीजेपी ने इस बार अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपेक्षाकृत कम सभाओं के बजाय, डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस को प्रचार की कमान दी गई। स्थानीय नेताओं और मुद्दों पर फोकस ने महायुति को जनता के करीब लाने में मदद की। फडणवीस की जमीनी पकड़ और नेतृत्व ने गठबंधन को मजबूती दी। RSS और भाजपा ने तैयार की पिच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भी इस बार बीजेपी के लिए जोर-शोर से काम किया। संघ के कार्यकर्ता घर-घर जाकर महायुति के समर्थन में प्रचार करते दिखे। उन्होंने लव जिहाद, भूमि जिहाद और धर्मांतरण जैसे मुद्दों को जनता तक पहुंचाया, जिससे महायुति को खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में जबरदस्त समर्थन मिला।   पवार बनाम पवार का मिला फायदा महाराष्ट्र के कद्दावर नेता शरद पवार से अलग होकर अजित पवार महायुति में साथ आए। बीजेपी और शिंदे की शिवसेना के साथ एनसीपी के साथ आने से ऐसे कई चेहरे भी महायुति का हिस्सा रहे जो पहले कांग्रेस या एमवीए की विचारधारा के करीब थे। वहीं पार्टी की छवि के तौर भी अजित पवार ने शरद पवार गुट से अपनी अलग पहचान बनाई। महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों के रुझानों पर भी गौर करें तो अजित पवार अपने चाचा की पार्टी से कहीं आगे निकलते नजर आ रहे हैं। शिंदे के चेहरे से मिला मराठा वोट एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनाकर बीजेपी ने मराठा वोट बैंक को साधने का ऐसा दांव चला, जिसे विपक्ष भेद नहीं पाया। शिंदे मराठा प्राइड के प्रतीक बनकर उभरे और उनका चेहरा जनता के बीच खूब लोकप्रिय हुआ। इससे न केवल शिंदे गुट को बल्कि महायुति को भी भारी समर्थन मिला। जरांगे पाटिल के मराठा आंदोलन का असर विपक्ष को जितना होने की उम्मीद थी, उतना नहीं हुआ क्योंकि शिंदे के चलते मराठा वोट बीजेपी के साथ बने रहे।

छह महीने के अंदर राहुल गांधी के सारे दांव महाराष्ट्र में फेल, जिसने चढ़ाया था उसी ने फर्श पर ला पटका

नई दिल्ली महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के ताजा नतीजों और रुझानों के मुताबिक दोपहर 12.20 बजे तक भाजपा की अगुवाई वाली सत्ताधारी महायुति 288 सदस्यों वाली विधानसभा में 218 सीटें जीतती दिख रही है, जबकि विपक्षी महाविकास अघाड़ी सिर्फ 56 सीटों पर सिमटता दिख रहा है। इन चुनावी रुझानों ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में नेता विपक्ष राहुल गांधी और उनकी टीम का वह नैरेटिव काम नहीं आया, जिसके बूते छह महीने पहले लोकसभा चुनावों में इंडिया गठबंधन ने 48 में से 30 सीटें जीत ली थीं। यानी छह महीने के अंदर राहुल गांधी के सारे दांव महाराष्ट्र में फेल हो गए। दरअसल, राहुल गांधी अपनी सभी चुनावी सभाओं में संविधान का हवाला देते रहे हैं। वह आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से आगे बढ़ाने की भी बात करते रहे और जातिगत जनगणना की भी वकालत करते दिखे। वह यह भी दलील देते रहे कि जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी होनी चाहिए, इसलिए जाति जनगणना करवाकर आरक्षण की सीमा को 50 फीसदी की सीमा से आगे किया जाना चाहिए। जाहिर सी बात है कि वह इस कार्ड के सहारे दलित, आदिवासी, ओबीसी वर्ग को लुभाने की कोशिश करते रहे हैं। महाराष्ट्र का सामाजिक ताना-बाना महाराष्ट्र में दलितों की आबादी करीब 12 फीसदी है, जबकि ओबीसी आबादी 38 फीसदी है। आदिवासी समुदाय की बात करें तो वह अकेले 9 फीसदी और मराठा समुदाय 28 फीसदी है। संविधान बचाने और आरक्षण की सीमा को 50 फीसदी की दीवार तोड़कर ज्यादा करने की बात कहकर राहुल इन वर्गों को लुभाने की कोशिश करते रहे हैं। उन्होंने महाराष्ट्र की चुनावी जनसभा में बार-बार कहा, “संविधान समानता, एक व्यक्ति-एक वोट, सभी के लिए और हर धर्म, जाति, राज्य तथा भाषा के लिए सम्मान की बात करता है। संविधान में सावित्रीबाई फुले और महात्‍मा गांधी की आवाज है। मगर बीजेपी और संघ संविधान पर हमला कर रहे हैं। उनका हमला देश की आवाज पर हमला है।” अप्रैल-मई में हुए लोकसभा चुनावों के दौरान जब वह अपने हाथों में संविधान की प्रति लेकर चुनावी सभाओं में यह कहते दिखे कि भाजपा 400 सीटें जीतकर संविधान बदलना चाहती है और दलितों-पिछड़ों का आरक्षण खत्म करना चाहती है तो लोगों ने उनकी बातों को गंभीरता से लिया और लोकसभा चुनावों में उनके इंडिया अलायंस को पूरा समर्थन दिया लेकिन जब वह फिर से वही बातें महाराष्ट्र चुनावों में भी करने लगे तो राज्य के लोगों ने उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया। यानी जिन लोगों की वजह से 48 में से 30 सीटें इंडिया गठबंधन ने जीती थीं, उन्हीं लोगों ने इस बार मुंह फेर लिया। मौजूदा चुनाव में घट गए वोट परसेंट चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार अभी तक के प्राप्त रुझानों के मुताबिक कांग्रेस को 10.58 फीसदी वोट मिले हैं, जबकि सहयोगी शरद पवार की एनसीपी को 11.58 फीसदी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना को 10.67 फीसदी यानी कुल 32.83 फीसदी वोट मिले हैं। वहीं भाजपा को 25.08 फीसदी, अजित पवार की एनसीपी को 10.95 फीसदी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 12.70 फीसदी वोट यानी कुल 48.73 फीसदी वोट मिले हैं। लौकसभा चुनावों में किस दल को कितना परसेंट वोट छह महीने पहले लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को 16.92 फीसदी वोट मिले थे जबकि सहयोगी शरद पवार की एनसीपी को 10.27 फीसदी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना को 16.52 फीसदी यानी MVA को कुल 43.71 फीसदी वोट मिले थे। उधर, भाजपा को 26.18 फीसदी, अजित पवार की एनसीपी को 3.60 फीसदी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 12.95 फीसदी कुल 43 फीसदी वोट मिले थे। साफ है कि जिन समुदाय ने लोकसभा चुनाव के दौरान इंडिया अलायंस को अर्श पर चढ़ाया था, उसी ने छह महीने के अंदर फर्श पर पटक दिया है।

मतदान के दौरान शरद पवार की पार्टी के नेता माधव जाधव पर हमला हुआ, वोटिंग स्थल पर तोड़फोड़

महाराष्ट्र परली विधानसभा क्षेत्र में चुनावी माहौल के बीच हिंसा भड़क गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, परली के बैंक कॉलोनी क्षेत्र में शरद पवार की पार्टी के नेता माधव जाधव पर हमला हुआ। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद जाधव के समर्थकों द्वारा गहटनंदूर के एक मतदान केंद्र पर तोड़फोड़ की गई। गौरतलब है कि इस विधानसभा क्षेत्र से अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी से मंत्री धनंजय मुंडे भी चुनावी दौड़ में हैं। मतदान अधिकारियों ने बताया कि चंद बदमाशों ने घाटनंदूर मतदान केंद्र में घुस गए, फर्नीचर को नुकसान पहुंचाया और ईवीएम को फर्श पर फेंक दिया। बीड कलेक्टर अविनाश पाठक ने पुष्टि की कि मतदान फिर से शुरू करने के लिए अलग ईवीएम स्थापित किए गए थे, जबकि यह आश्वासन दिया गया था कि पहले डाले गए वोट गिनती के प्रयोजनों के लिए नियंत्रण इकाइयों में सुरक्षित रहेंगे। परली से एनसीपी (शरद पवार) उम्मीदवार राजेसाहेब देशमुख ने धर्मपुरी मतदान केंद्र पर बंद सीसीटीवी कैमरे के बारे में चिंता जताई। एक वीडियो में देशमुख को खराब कैमरे के बारे में मतदान कर्मचारियों से बात करते हुए दिखाया गया है। बाद में उन्होंने आरोप लगाया कि अल्पसंख्यक समुदायों को मतदान में बाधा का सामना करना पड़ा और दावा किया कि अनधिकृत व्यक्ति ईवीएम का संचालन कर रहे थे। परली में इस बार अजित पवार गुट और शरद पवार गुट के बीच सीधी टक्कर है। अजित पवार गुट से मंत्री धनंजय मुंडे चुनावी मैदान में हैं, जबकि शरद पवार गुट से राजासाहेब देशमुख मुकाबले में हैं। धनंजय मुंडे ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव आयोग से तत्काल कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि “दहशत और गुंडागर्दी के जरिए परली की बदनामी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”

पुणे की तीन सीटों पर शरद पवार ने दांव चल दिया है, जिससे अजित पवार को चौकाया, तोड़े तीन सीटों पर 3 नेता

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव अब लगभग आखिरी दौर में है। प्रचार में 5 दिन का ही वक्त बचा है और उससे पहले शरद पवार ने बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेल दिया है। उन्होंने पुणे की दो सीटों पर अजित पवार के सहयोगियों को शामिल कर लिया है तो वहीं एक सीट पर भाजपा के बड़े नेता को अपने पाले में ले आए हैं। इस तरह पुणे की तीन सीटों पर शरद पवार ने दांव चल दिया है, जिन पर अजित पवार और भाजपा खुद को मजबूत मानकर चल रहे थे। अजित पवार के साथी सुनील तटकरे के करीबी और पीएमसी बैंक के पदाधिकारी भी पार्टी में शामिल हो गए हैं। विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण में शरद पवार पश्चिमी महाराष्ट्र पर फोकस कर रहे हैं। इस बार फोकस बैठकों, रोड शो और दूसरे नेताओं को पार्टी में लाने पर है। शरद पवार ने आज पुणे और रायगढ़ में पार्टी में कई नेताओं को एंट्री दिलाई। इससे महायुति को झटके की आशंका है। वड़गांव शेरी निर्वाचन क्षेत्र से पूर्व एनसीपी नगरसेवक रेखा टिंगरे और चंद्रकांत टिंगरे ने एनसीपी-एसपी का दामन थाम लिया है। इनके अलावा दिलीप तुपे और अनिल तुपे भी पार्टी में आए गए हैं। इन लोगों का पुणे की हड़पसर सीट पर असर माना जाता है। इसके अलावा धनकवाड़ी के समीर धनकावड़े की भी पार्टी में एंट्री हुई है। वड़गांव शेरी से रेखा टिंगरे शरद पवार की पार्टी में शामिल हो गई हैं। रेखा टिंगरे 2022 में बीजेपी में शामिल हुई थीं, लेकिन चार महीने पहले ही वह अजित पवार की एनसीपी में शामिल हो गईं थीं। अब चुनाव से पहले उन्होंने एक बार फिर से पालाबदल किया है। वडगांवशेरी में सुनील टिंगरे को हराने के लिए शरद पवार उन्हें साथ लाए हैं। दोनों की प्रतिद्वंद्विता जगजाहिर है क्योंकि एक दौर में रेखा टिंगरे ने सुनील टिंगरे से अदावत के चलते ही एनसीपी छोड़ दी थी। दिलीप तुपे पुणे नगर निगम की स्थायी समिति के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं, इसलिए तुपे का अपने क्षेत्र में काफी दबदबा है। तुपेवाड़ी या तुपेगांव का हड़पसर में बड़ा प्रभाव है। यह निर्वाचन क्षेत्र काफी बड़ा है और तुपे का यहां एक इलाके में अच्छा असर है। इस तरह शरद पवार ने इन नेताओं को साथ लाकर अजित पवार और भाजपा के खेमे में सेंध लगाने की कोशिश की है।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव: 49 सीटों पर उद्धव और एकनाथ शिंदे की सीधी टक्कर, क्या हैं मायने

महाराष्ट्र महाराष्ट्र में इस बार महायुति और महाविकास अघाड़ी के बीच जबरदस्त मुकाबले की उम्मीद है। चुनाव प्रचार में दोनों ही गुटों के नेता एक दूसरे पर जमकर बरस रहे हैं। वहीं इस चुनाव में खास बात यह है कि शिवसेना और एनसीपी में दो धड़े होने के बाद राज्य की राजनीति में पहली बार आपसी मुकाबला हो रहा है। शिवसेना (UBT) और शिंदे की शिवसेना दोनों ही इस चुनाव में अपनी ताकत दिखाने का कोई मौका छोड़ना नहीं चाहते। शिवसेना के दोनों धड़े 49 सीटों पर आमने-सामने हैं। इनमे से 19 सीट मुंबई मेट्रोपोलिटन रीजन में हैं। इनमें से भी 12 सीटें मुंबई शहर में हैं। इसके अलावा आठ सीट मराठवाड़ा और कोंकण क्षेत्र में आती हैं। 6 विदर्भ और चार सीटें उत्तर महाराष्ट्र में हैं। बाकी बची चार सीटें पश्चिमी महाराष्ट्र की हैं। जून 2022 में शिवसेना में फूट पड़ी थी। इसके बाद एकनाथ शिंदे अपने साथी नेताओं के साथ एनडीए में आ गए थे। वह मुख्यमंत्री बन गए। वहीं उद्धव ठाकरे महाविकास अघाड़ी का हिस्सा हैं। वह कांग्रेस और एनसीपी के साथ चुनाव लड़ रहे हैं। उद्धव के लिए लिटमस टेस्ट हैं विधानसभा चुनाव जानकारों का कहना है कि उद्धव सेना के लिए यह चुनाव लिटमस टेस्ट की तरह है। पिता बालासाहेब ठाकरे की विरासत पर दावा ना केवल उद्धव ठाकरे ठोक रहे हैं बल्कि एकनाथ शिंदे का भी कहना है कि उनकी वैचारिक विरासत वही संभाल रहे हैं। एकनाथ शिंदे का कहना है कि कांग्रेस के साथ जाकर उद्धव ठाकरे ने बालासाहेब के साथ धोखा किया है। उन्होंने कहा था कि वह कांग्रेस के साथ कभी नहीं जाएंगे। एकनाथ शिंदे के सामने क्या है चुनौती इस चुनाव में एकनाथ शिंदे के सामने बड़ी चुनौती है। चुनौती केवल महायुती की सरकार बनाने की नहीं बल्कि पार्टी के जनाधार बढ़ाने की भी है। उद्धव ठाकरे को 40 से ज्यादा सीटें हासिल करनी हैं क्योंकि एकनाथ शिंदे के साथ 40 विधायक उनसे अलग हो गए थे। वहीं बीजेपी ने एकनाथ शिंदे से वादा किया है कि गठबंधन की जीत के बाद वह मुख्यमंत्री बनेंगे। ऐसे में दोनों के सामने ही एक बड़ा टारगेट है। लोकसभा चुनाव में दोनों ही सेनाएं 13 लोकसभा सीटों पर आमने-सामने थीं। इसमें शिवेसेना (UBT) ने 7 सीटों पर जीत हासिल की थी। शिंदे सेना को 6 सीटों पर कामयाबी मिली थी। मुंबई मेट्रोपोलिटन रीजन में आने वाली ज्यादातर सीटों पर कड़ी टक्कर की उम्मीद है। इसमें ठाणे की कोपरी पांचपखाड़ी सीट भी शामिल हैं जहां एकनाथ शिंदे का मुकाबला उनके राजनीतिक गुरु आनंद दिघे के भतीजे केदार से होने वाला है। उद्धव सेना ने केदार को यहां से टिकट दिया है। वहीं मुंबई के वर्ली में उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे और राज्यसभा सांसद मिलिंद देवड़ा आमने-सामने हैं।

महाराष्ट्र के बड़े राजनीतिक घराने में आपसी कलह थोड़ी कम हो सकती, राज के बेटे के लिए उद्धव करने जा रहे बड़ी पहल

नई दिल्ली महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए सभी दलों ने कमर कस ली है। इस बीच महाराष्ट्र के बड़े राजनीतिक घराने में आपसी कलह थोड़ी कम हो सकती है। खबर है कि उद्धव ठाकरे इसकी पहल करने जा रहे हैं और वह चचेरे भाई राज ठाकरे के साथ रिश्ते सुधार सकते हैं। इसके तहत वह राज के बेटे अमित ठाकरे के खिलाफ कैंडिडेट नहीं उतारेंगे। ऐसा हुआ तो ठाकरे परिवार में करीब डेढ़ दशक से छिड़ा गृह युद्ध थोड़ा धीमा पड़ सकता है। जानकारी के अनुसार अमित ठाकरे माहिम विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। वह महाराष्ट्र नवनिर्माण विद्यार्थी सेना के अध्यक्ष हैं। अमित ठाकरे ने बीते दिनों महाराष्ट्र के कई इलाकों का दौरा किया था और पार्टी के संगठन को खड़ा करने का प्रयास किया है। वह चुनाव में भी उतरने जा रहे हैं और उद्धव ठाकरे की शिवसेना उनके खिलाफ कैंडिडेट न उतारने की तैयारी में है। मनसे के नेताओं ने अमित ठाकरे को उतारने की मांग की है और अब आखिरी फैसला राज को ही लेना है। गुरुवार रात को इस संबंध में लंबी मीटिंग हुई। वहीं चर्चा है कि यदि अमित ठाकरे को टिकट मिला तो फिर उद्धव सेना उनके सामने कैंडिडेट नहीं देगी। इसकी वजह यह है कि जब वरली सीट से आदित्य ठाकरे 2019 में वरली सीट से उतरे थे तो उनके खिलाफ मनसे ने भी कैंडिडेट नहीं दिया था। माना जा रहा है कि उद्धव ठाकरे अब उसके बदले में अमित के लिए भी ऐसा ही करने वाले हैं। इस तरह उनकी कोशिश है कि परिवार में छिड़े संघर्ष को कम किया जा सके। इससे काडर के बीच अच्छा संदेश जाएगा। खासतौर पर ऐसे वक्त में जब पार्टी विभाजित हो चुकी है और एक बड़ा खेमा एकनाथ शिंदे के साथ अलग पार्टी के तौर पर सत्ता में है। उद्धव सेना के एक नेता ने कहा कि जब आदित्य ने वरली से चुनाव लड़ा था तो राज काका ने भी कैंडिडेट नहीं दिया था। अब ऐसा ही उद्धव काका करेंगे। दरअसल 2019 के चुनाव में राज ठाकरे ने कहा कि यदि हमारे बच्चे चुनाव लड़ना चाहते हैं तो फिर उन्हें हमें आगे बढ़ने देना चाहिए। यदि आदित्य चुनाव लड़ना चाहते हैं तो फिर इसमें गलत क्या है। शिवसेना कार्यकर्ताओं का कहना है कि उद्धव ठाकरे इसके जरिए इमोशनल रणनीति बना रहे हैं। उन्हें लगता है कि इससे फैमिली की एकता का संदेश जाएगा और कार्यकर्ता एकजुट होंगे। खासतौर पर मुंबई की सीटों पर उद्धव सेना को इससे फायदे की उम्मीद है। यही नहीं चुनाव बाद जरूरत हुई तो मनसे के विधायक साथ भी आ सकते हैं।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव: सियासी सरगर्मियां तेज, धारावी से चुनाव लड़ सकते हैं समीर वानखेड़े

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद सियासी सरगर्मियां तेज हो गई है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि चर्चित आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े जल्द ही शिवसेना में शामिल होने वाले हैं। जानकारी के अनुसार वानखेड़े महायुति के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं। दावा किया जा रहा है कि उन्हें धारावी सीट से टिकट थमाया जा सकता है। धारावी की पहचान एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती के तौर पर होती है। यहां से समीर वानखेड़े की उम्मीदवारी से पार्टी को एक नई दिशा मिलने की संभावना है। उनकी एंट्री से राजनीतिक परिदृश्य में नए समीकरण बनने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। वानखेड़े की छवि एक सख्त अधिकारी के तौर पर है। वानखेड़े ने 2 अक्टूबर, 2021 को मुंबई तट के पास लक्जरी जहाज, कॉर्डेलिया क्रूज पर ड्रग्स का भंडाफोड़ करने के लिए छापेमारी की थी और शाहरुख खान के बेटे आर्यन सहित ग्लैमर जगत के 17 से अधिक लोगों को पकड़ा था। आर्यन खान ने एक महीना जेल में बिताया, और रिहाई के बाद, एक उच्च-स्तरीय एनसीबी जांच ने निष्कर्ष निकाला कि वह निर्दोष था और उसे उस मामले में फंसाया गया था। आपको बताते चलें, महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों के लिए एक चरण में 20 नवंबर को चुनाव होंगे, जबकि 23 नवंबर को वोटों की गिनती होगी। भारत निर्वाचन आयोग के मुताबिक, महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के लिए एक लाख से अधिक मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि ईसीआई दोनों राज्य में समावेशी और सुलभ चुनावों के जरिए सुचारू मतदान अनुभव सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। राजीव कुमार ने बताया था कि महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में 9.63 करोड़ मतदाता मतदान करेंगे, जिनमें 4.97 करोड़ पुरुष वोटर हैं, जबकि 4.66 करोड़ महिला मतदाता शामिल हैं। इसके अलावा 1.85 करोड़ युवा वोटरों की उम्र 20 से 29 साल के बीच है। वहीं, 20.93 लाख वोटर पहली बार मतदान में हिस्सा लेंगे। 12.43 लाख वोटरों की उम्र 85 साल से अधिक है। इसके साथ ही ट्रांसजेंडर मतदाताओं की संख्या भी 6,031 है।  

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