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ईशा योग केंद्र में महाशिवरात्रि की धूम, तमन्ना भाटिया और सारा अर्जुन ने भक्ति में डूबकर किया जमकर डांस

कोयंबटूर, तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित ईशा योग केंद्र में महाशिवरात्रि 2026 का भव्य आयोजन किया गया, जहाँ बॉलीवुड और साउथ फिल्म इंडस्ट्री की कई दिग्गज अभिनेत्रियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। तमन्ना भाटिया, सारा अर्जुन, श्रीनिधि शेट्टी और मौनी रॉय जैसे सितारों ने सद्गुरु के सानिध्य में ध्यान और पूजा-अर्चना की। समारोह के दौरान जब भक्ति संगीत गूंजा, तो ये अभिनेत्रियां खुद को रोक नहीं पाईं और झूमकर नाचने लगीं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इन वीडियो में सितारों का ऐसा आध्यात्मिक अवतार देख उनके फैंस उन पर खूब प्यार लुटा रहे हैं। समारोह में अपने अनुभव साझा करते हुए तमन्ना भाटिया ने कहा कि वे इस पूरी रात जागने और ध्यान लगाने के लिए बेहद उत्साहित थीं। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस ऊर्जावान माहौल में जितना हो सके उतना नृत्य किया। वहीं, ‘धुरंधर’ अभिनेत्री सारा अर्जुन और ‘KGF’ फेम श्रीनिधि शेट्टी ने भी मंच के पास जमकर ठुमके लगाए। मौनी रॉय ने इस अनुभव को बेहद भावुक बताया और कहा कि महादेव की भक्ति में बिताई यह रात उनके लिए जीवन के सबसे खास पलों में से एक है। इन सितारों के साथ हजारों श्रद्धालु पूरी रात शिव की आराधना में मगन रहे। इस समारोह की भव्यता केवल फिल्मी सितारों तक सीमित नहीं थी, बल्कि कई दिग्गज राजनेताओं ने भी इसमें हिस्सा लिया। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन सहित कई नेताओं ने विशेष पूजा-अर्चना में शिरकत की। ईशा योग केंद्र की यह महाशिवरात्रि अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों, आधी रात के ध्यान और वैश्विक संगीत के मिश्रण के कारण दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी रही। प्रशासनिक और सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच लाखों लोगों ने इस उत्सव का डिजिटल माध्यमों से भी सीधा आनंद लिया।  

मानसरोवर और भरोहिया स्थित पितेश्वरनाथ शिव मंदिर में दर्शन-पूजन कर किया दुग्धाभिषेक-जलाभिषेक

मुख्यमंत्री ने रुद्राभिषेक-जलाभिषेक कर की प्रदेशवासियों के सुखमय जीवन की प्रार्थना महाशिवरात्रि पर गोरखनाथ मंदिर के शक्तिपीठ में सीएम योगी ने किया देवाधिदेव महादेव का रुद्राभिषेक मानसरोवर और भरोहिया स्थित पितेश्वरनाथ शिव मंदिर में दर्शन-पूजन कर किया दुग्धाभिषेक-जलाभिषेक गोरखपुर  देवाधिदेव महादेव भोले शंकर की उपासना के पावन पर्व महाशिवरात्रि पर मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने सुबह गोरखनाथ मंदिर के शक्तिपीठ में भगवान शिव का रुद्राभिषेक कर प्रदेशवासियों के आरोग्यमय, सुखमय, समृद्धमय व शांतिमय जीवन की मंगलकामना की। मुख्यमंत्री ने अंधियारी बाग स्थित प्राचीन मानसरोवर मंदिर और भरोहिया के पितेश्वरनाथ शिव मंदिर में भी दर्शन, पूजन व दुग्धाभिषेक-जलाभिषेक किया और चराचर जगत के कल्याण की प्रार्थना की।   रविवार सुबह जनता दर्शन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर परिसर में मठ के प्रथम तल पर स्थित शक्ति मंदिर में भगवान भोले शंकर का दुग्ध, दही, घी, मधु और शर्करा से पंच स्नान कराया। इसके बाद विधि विधान से रुद्राभिषेक किया। मठ के पुरोहित एवं वेदपाठी ब्राह्मणों ने शुक्ल यजुर्वेद संहिता के रुद्राष्टाध्यायी के महामंत्रों द्वारा रुद्राभिषेक का अनुष्ठान पूर्ण कराया। रुद्राभिषेक के बाद मुख्यमंत्री ने महादेव भगवान शिव से चराचर जगत के मंगल की प्रार्थना की।  गोरक्षपीठ में रुद्राभिषेक करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अंधियारी बाग के प्राचीन मानसरोवर मंदिर भी गए। यहां उन्होंने भोलेनाथ का दर्शन पूजन किया। भगवान शिव को पूजन सामग्री अर्पित कर, पंचस्नान कराकर दूध और जल से उनका अभिषेक किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुए पूजन, अभिषेक का अनुष्ठान हवन और आरती के साथ पूर्ण हुआ। इस अवसर पर सांसद रविकिशन शुक्ल, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास आदि भी उपस्थित रहे।  इसी क्रम में महाशिवरात्रि पर सीएम योगी रविवार दोपहर बाद भरोहिया स्थित पितेश्वरनाथ शिव मंदिर पहुंचे। यहां बाबा पितेश्वरनाथ का दर्शन, पूजन व विधि विधान से जलाभिषेक कर संपूर्ण मानव जाति के कल्याण, सुख-समृद्धि एवं शांति की प्रार्थना की। पांडवकालीन मान्यता वाले पितेश्वरनाथ मंदिर का गोरक्षपीठ से गहरा नाता है। गोरक्षपीठाधीश्वर हर महाशिवरात्रि यहां जलाभिषेक करने आते हैं। जलाभिषेक करने के बाद मुख्यमंत्री ने भरोहिया में शिव मंदिर के सामने स्थित गुरु गोरखनाथ विद्यापीठ के परिसर में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और लोगों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना। बच्चों से बातचीत कर उन्हें आशीर्वाद दिया। स्थानीय खिलाड़ियों के साथ फोटो खिंचवाई और उनका उत्साहवर्धन किया। भरोहिया में मुख्यमंत्री के आगमन पर विधायक फतेह बहादुर सिंह, भरोहिया के ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि संजय सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे।

महाशिवरात्रि पर आध्यात्मिक एकता का संदेश विश्व पटल पर हुआ प्रसारित

ज्योतिर्लिंग, शक्तिपीठ और सिद्धपीठों से प्रसाद अर्पण की परंपरा हुई प्रारंभ ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को साकार करने की दिशा में बड़ा कदम वाराणसी,  महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास, वाराणसी द्वारा एक अद्वितीय और अभिनव आध्यात्मिक पहल का शुभारंभ किया गया है। इस पहल के अंतर्गत भगवान श्री विश्वेश्वर महादेव के श्रीचरणों में देश-विदेश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों, सिद्धपीठों, शक्तिपीठों और प्राचीन तीर्थस्थलों से पावन प्रसाद, पूजित वस्त्र, रज, पवित्र जल तथा श्रद्धा उपहार अर्पित किए जाने की परंपरा प्रारंभ की गई है। इस आध्यात्मिक समन्वय का उद्देश्य संपूर्ण सनातन समाज को एक सूत्र में पिरोते हुए वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को मूर्त रूप प्रदान करना और वैश्विक आध्यात्मिक एकात्मता को सुदृढ़ करना है। 62 मंदिरों से अब तक पहुंची पावन भेंट इस क्रम में, शनिवार तक श्री काशी विश्वनाथ धाम में देश-विदेश के कुल 62 मंदिरों से पावन भेंट और प्रसाद प्राप्त हो चुके हैं। इन मंदिरों में तमिलनाडु से भक्त मंडली, श्री रत्नगिरिस्वरर मंदिर चेन्नई, श्री अनंता पद्मनाभा स्वामी मंदिर चेन्नई, तेन सबनायाकर मंदिर कोविलूर, अरुल्मिगु वामनपुरफेश्वरर तिरुमणिकुझी, अरुल्मिगु द्रौपथी अम्मन मंदिर, अरुल्मिगु रीना विमोशनर तिरुकांडीश्वरम्, अरुल्मिगु तिरु सनगरी काली अम्मन वझापेट, अरुल्मिगु भूलोगा नाथर नेल्लिकुप्पम, अरुल्मिगु भूमिनाथ ईश्वरर वैटिपक्कम, श्री मदुरै वीरन मंदिर, अरुल्मिगु कुमारा गुरु परमस्वामी एस कुमारापुरम, अरुल्मिगु वेधा अरुल्पुरीश्वर कंदरकोट्टई, अरुल्मिगु सबनायगर कीरापालयम, अरुल्मिगु काशी विश्वनाथर गेडिलम नदी, सीयूओ, अरुल्मिगु विरुथा गिरिश्वरर तिरुकांडीश्वरम्, अरुल्मिगु अमृत लिंगेश्वर पेरिया, अरुल्मिगु मार्गबंधु तिरुकांडीश्वरम्, अरुल्मिगु नादन पाथेश्वरर तिरुकांडीश्वरम्, अरुल्मिगु सिंगारणाथर कोंगरायनूर शामिल हैं। श्री कृष्ण जन्मस्थान, श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड समेत कई मंदिरों से आए उपहार इसी प्रकार, मथुरा से श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान, जम्मू कश्मीर से श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड जम्मू, मलेसिया से श्री महा मरिअम्मन मंदिर, अरुल्मिगु श्री राजाकलियम्मन ग्लास मंदिर, श्री कंदस्वामी कोविल, श्री वीरा मुनिस्वरर मंदिर, श्री नगराथर शिवन मंदिर, अरुल्मिगु बालथंडायुथपानी मंदिर, श्री कुंज बिहार मंदिर भी इस आध्यात्मिक अभियान में सहभागी बने हैं। काशी के प्रमुख मंदिरों से भी सहभागिता वाराणसी से सप्तमात्रिका सिद्धपीठ श्री बड़ी शीतलाधाम शीतलाघाट, काशी त्रिलोचन महादेव मंदिर, सिद्ध पीठ बड़ी काली जी मंदिर कालिका गली, श्री बड़ा गणेश मंदिर लोहटिया, श्री केदारेश्वर मंदिर केदार घाट, श्री ओम कालेश्वर मंदिर कोयला बाजार, श्री कालभैरव मंदिर भैरोनाथ, विन्ध्यवासिनी, दशाश्वमेध, तुलजा देवी, दशाश्धमध्येश्वर, जमेश्वर, प्राचीन रुद्रसरोवर, श्री श्रीयन्त्रराज, श्री दक्षिणी आदि शीतला बुढ़ीय माई, कपिलधारा पंचकोशी, शूलटंकेश्वर, प्रयागघाट, रामेश्वर पंचकोशी, महिषासुर मां मंदिर, लोलार्क कुंड, बैजनाथ मंदिर बैजनत्था, श्री चन्द्रेश्वर मंदिर केदारघाट, श्री लोलार्क कुंड मंदिर भदैनी, श्री अन्नपूर्णा मंदिर विश्वनाथ गली, श्री महालक्ष्मी मंदिर लक्सा, श्री बटुक भैरव मंदिर कमच्छा, श्री कामख्या मंदिर कमच्छा, अन्य प्रमुख मंदिर काशी और विशालाक्षी मंदिर काशी से भी पावन भेंट प्राप्त हुई है। देश-विदेश के अन्य तीर्थस्थलों की सहभागिता उत्तराखंड से श्री केदारनाथ, मुंबई से लाल बाग के राजा और श्री सिद्धिविनायक मंदिर, गुजरात से द्वारकाधीश मंदिर, श्रीलंका से श्री ऐश्वर्या लक्ष्मी मंदिर कोलंबो तथा राजस्थान से नाथद्वारा मंदिर उदयपुर से भी पावन प्रसाद और भेंट काशी विश्वनाथ धाम पहुंच चुकी है। पवित्र सामग्री में जल, रज, वस्त्र और पुष्प शामिल इन भेंटों में विभिन्न तीर्थस्थलों का पवित्र जल, मंदिरों में पूजित पुष्पमालाएं, रज, चंदन, वस्त्र तथा अन्य पूजनीय सामग्री सम्मिलित है। यह संपूर्ण प्रक्रिया सनातन परंपरा की आध्यात्मिक एकता का सजीव प्रतीक बनकर सामने आई है। कूरियर और प्रतिनिधियों के माध्यम से जारी है क्रम इसके अतिरिक्त, अनेक मंदिरों से प्रसाद कूरियर माध्यम से प्रेषित किया जा रहा है, जबकि कुछ प्रतिष्ठित मंदिरों के प्रतिनिधि स्वयं पावन भेंट लेकर धाम में पधारने वाले हैं। इस प्रकार, यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान न होकर संपूर्ण राष्ट्र और विश्व के विविध तीर्थों के मध्य भावनात्मक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक सेतु के रूप में स्थापित हो रहा है। आध्यात्मिक एकात्मता का वैश्विक संदेश मंदिर न्यास की यह अभिनव पहल सनातन संस्कृति में निहित पारिवारिक समरसता, आध्यात्मिक बंधुत्व और सांस्कृतिक अखंडता के संदेश को व्यापक रूप से प्रसारित कर रही है। महाशिवरात्रि के दिव्य अवसर पर प्रारंभ की गई यह परंपरा न केवल काशी की आध्यात्मिक गरिमा को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करती है, बल्कि समस्त सनातन आस्थाओं को एकात्म भाव से जोड़ते हुए धार्मिक सद्भाव और आध्यात्मिक समन्वय के नए अध्याय का उद्घाटन कर रही है। निश्चय ही, यह पहल राष्ट्र और विश्व के विविध तीर्थस्थलों को एक आध्यात्मिक सूत्र में संगठित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी कदम सिद्ध हो रही है।

हर हर महादेव के जयकारों से गूंजा पशुपतिनाथ: महाशिवरात्रि पर नेपाल-भारत के श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़

काठमांडू नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर हजारों हिंदू श्रद्धालु श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ पहुंचे। फल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाने वाला यह पर्व शिवभक्ति के सबसे पावन दिनों में गिना जाता है। शिव पुराण के अनुसार, यह वही रात्रि है जब शिव तत्व का प्रकटीकरण हुआ। इसे कालरात्रि, मोहरात्रि, सुखरात्रि और शिवरात्रि इन चार महत्त्वपूर्ण रात्रियों में शामिल किया गया है। मान्यता है कि यह दिन आध्यात्मिक जागरण देता है और दुख-संताप से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। श्रद्धालु उत्सव कटुवाल ने बताया कि गौशाला से पशुपति तक दो–तीन किलोमीटर लंबी कतारें लगी थीं और लोग घंटों धैर्यपूर्वक दर्शन के लिए खड़े रहे। सुबह से ही नदी-तालाबों और मंदिरों में स्नान, पूजा, ध्यान और मंत्रोच्चार का सिलसिला जारी रहा।भक्त शांति भक्त ने कहा कि शिवरात्रि पर पूरा दिन पूजा, ध्यान और जप में बिताया जाता है। वहीं, अनीता सिंह ने बताया कि मंदिर में अनुष्ठान के बाद वे घर जाकर पूजा और उपवास रखेंगी।महाशिवरात्रि, “शिव की रात्रि”, नेपाल और भारत सहित कई देशों में व्यापक श्रद्धा से मनाई जाती है। स्कंद पुराण में भी इस पर्व के महत्व का उल्लेख है। मान्यता है कि इस अवधि में उत्तरी गोलार्ध में तारों की स्थिति आध्यात्मिक ऊर्जा को उन्नत करती है और शिव तत्व सर्वाधिक सक्रिय रहता है।

धर्म और परंपरा का नया अध्याय: महाशिवरात्रि पर भोपाल में किन्नर शंकराचार्य का पट्टाभिषेक

 भोपाल महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर राजधानी भोपाल में आयोजित किन्नर धर्म सम्मेलन में एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया। इस भव्य आयोजन में हिमांगी सखी को देश की पहली किन्नर शंकराचार्य के रूप में घोषित कर उनका पट्टाभिषेक किया गया। पुष्कर पीठ से संभालेंगी कमान किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यह ऐतिहासिक घोषणा की गई। हिमांगी सखी राजस्थान के पुष्कर पीठ को देश की पहली किन्नर शंकराचार्य पीठ के रूप में संभालेंगी। मूल रूप से मुंबई निवासी हिमांगी सखी ‘मां वैष्णो किन्नर अखाड़ा’ की प्रमुख हैं और वे पहली किन्नर भागवत कथा वाचक भी हैं। 60 किन्नरों की हिंदू धर्म में वापसी सम्मेलन के दौरान एक बड़ा दावा किया गया कि विभिन्न कारणों से धर्म परिवर्तन कर चुके 60 किन्नरों की ‘घर वापसी’ कराई गई है। आयोजकों ने बताया कि मुस्लिम धर्म अपना चुके इन किन्नरों ने शुद्धिकरण की प्रक्रिया के बाद पुनः हिंदू धर्म स्वीकार किया है। नए जगद्गुरु और महामंडलेश्वरों की नियुक्ति सम्मेलन में किन्नर समुदाय के धार्मिक नेतृत्व को मजबूती देने के लिए महत्वपूर्ण नियुक्तियां भी की गईं…     घोषित जगद्गुरु: काजल ठाकुर (भोपाल), तनीषा (राजस्थान), संजना (भोपाल), संचिता (महाराष्ट्र)।     घोषित महामंडलेश्वर: सरिता भार्गव, मंजू, पलपल, रानी ठाकुर, सागर। यह सम्मेलन किन्नर समुदाय के भीतर चल रहे गद्दी विवाद और धर्म परिवर्तन के आरोपों के बीच आयोजित किया गया, जिसे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

महादेव मेहरबान: महाशिवरात्रि पर इन 4 राशियों के जीवन में आएगा सुख-समृद्धि का उछाल

हर वर्ष फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ था। महाशिवरात्रि के अवसर पर देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और कई स्थानों पर धूमधाम से शिव बारात भी निकाली जाती है। वर्ष 2026 में यह पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा भाव से शिव-शक्ति की पूजा करने पर अविवाहित कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है, जबकि विवाहित दंपतियों को सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मिलता है। ज्योतिषीय दृष्टि से कुछ राशियों के लिए यह दिन विशेष फलदायी माना गया है। कहा जाता है कि इन राशियों पर भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है। आइए जानते हैं यह कौन सी राशियां हैं। वृषभ राशि वृषभ राशि के जातकों के लिए महाशिवरात्रि शुभ संकेत लेकर आ सकती है। इस दौरान आर्थिक लाभ के योग बन सकते हैं, जिससे वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। मानसिक तनाव में कमी आएगी और परिवार में सुख-शांति का वातावरण रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा का भगवान शिव से गहरा संबंध है, और वृषभ राशि पर चंद्रमा का विशेष प्रभाव माना जाता है। कर्क राशि कर्क राशि वालों के लिए भी यह पर्व सकारात्मक परिणाम दे सकता है। करियर में उन्नति के अवसर मिल सकते हैं और व्यापार से जुड़े लोगों को अच्छा लाभ हो सकता है। आय में बढ़ोतरी के संकेत हैं। यदि पहले से कोई निवेश किया हुआ है, तो उससे भी लाभ मिलने की संभावना बन सकती है। जीवन में खुशियों का आगमन होगा। मकर राशि मकर राशि के जातकों को महाशिवरात्रि के आसपास धन लाभ के योग दिखाई दे सकते हैं। लंबे समय से चली आ रही परेशानियों से राहत मिलने के संकेत हैं। किसी शुभ समाचार से मन प्रसन्न हो सकता है। ज्योतिष में शनि देव को मकर राशि का स्वामी माना जाता है और धार्मिक मान्यता के अनुसार शनि देव भगवान शिव के बड़े भक्त हैं। कुंभ राशि कुंभ राशि वालों के लिए यह पर्व आर्थिक और पेशेवर जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। करियर में सफलता मिलने के योग हैं और आय में वृद्धि संभव है। पुराने निवेश से भी फायदा हो सकता है। साथ ही मानसिक शांति और पारिवारिक सुख-समृद्धि बनी रहने के संकेत हैं।

महाशिवरात्रि 2026: 300 वर्षों बाद शुभ-राजयोग का संयोग, जानें संपूर्ण साधना विधि

सनातन धर्म में महाशिवरात्रि का एक विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ की आराधना करते हैं और उन्हें प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं. इस बार महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी को रखा जाएगा. यह एक मात्र पर्व नहीं है बल्कि ये हमें याद दिलाता है कि घोर अंधकार की रात में शिव दर्शन प्रकाश के रूप में प्रकट होता है. ऐसा माना जाता है कि इस रात शिव लिंगम के रूप में समस्त सृष्टि में विराजमान होते हैं. शिव का अर्थ विनाश नहीं है. इसका अर्थ है अहंकार का नाश, अज्ञान का निवारण. मौन में ध्यान, जागृति में ज्ञान, घृणा से मुक्ति. महाशिवरात्रि का शुभ समय 15 से 16 फरवरी तक है. आइए इस दिन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियों पर एक नजर डालते हैं. यह महाशिवरात्रि खास क्यों है? इस वर्ष शिवरात्रि में दिव्य और ज्योतिषीय शक्तियों का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है. ऐसा माना जाता है कि यह शुभ योगों का ऐसा संयोजन है जो लगभग 300 सालों में एक बार ही होता है. ये विशेष राज योग और शुभ योग इस पर्व को और भी अधिक शुभ बनाते हैं. 11 शुभ योगों की विशेषताएं     शिव योग- शिव के लिए सबसे शुभ योग, सुबह 5.45 बजे से पूरे दिन चलता है.     सर्वार्थ सिद्धि योग- सुबह 6.43 बजे से 9.37 बजे तक सभी कार्यों में सफलता.     प्रीति योग- प्रेम और मित्रता की शक्ति, सुबह 11.19 बजे से 11.23 बजे तक.     आयुष्मान योग- दीर्घायु, दोपहर 12.17 बजे से रात 1.54 बजे तक.     सौभाग्य योग- शाम 5.07 बजे से शाम 5.53 बजे तक.     शोभना योग- सौंदर्य, विकास, शाम 7.47 बजे से रात 8.34 बजे तक.     सत्य योग- साधना में सफलता, रात 8.54 बजे से रात 10.02 बजे तक.     शुक्ल योग- शुद्ध विचार, रात 10.42 बजे से रात 11.58 बजे तक.     ध्रुव योग- स्थिरता, सुबह 2.57 बजे से अगली सुबह 5.53 बजे तक. महाशिवरात्रि पर पांच दुर्लभ राजयोग     बुद्धादित्य राज योग -बुद्धि, आदर और सम्मान की एक अद्भुत अवस्था.     लक्ष्मी-नारायण योग- आर्थिक शक्ति, धन और सफलता     शुक्रदित्य योग- सुख, कला और सौंदर्य     साशा राज योग कुछ लाभ, स्थिरता     चतुर्ग्राही योग- एक दुर्लभ स्थिति जिसमें सूर्य, बुध, शुक्र और राहु एक साथ आते हैं. इन पांच राज योगों के लाभ आम दिनों में शायद ही देखने को मिलते हैं. ये दुर्लभ योग धन, समृद्धि, विलासिता और व्यापार में भारी लाभ लाते हैं. महाशिवरात्रि पर आराधना का समय अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक. शाम की पूजा का समय: राहु काल के बाद से शाम 7:28 बजे तक. निशीत काल (पूजा का सबसे शुभ समय): दोपहर 12:09 बजे से रात 1:00 बजे तक. राहु काल: 15 फरवरी, शाम 4:47 से 6:11 बजे तक. ज्योतिष के अनुसार, इस समय पूजा-अर्चना शुरू नहीं करनी चाहिए.

काशी में भव्य उत्सव: बाबा विश्वनाथ दूल्हा बनेंगे, शिव विवाह की रस्मों ने जगाया उत्साह

काशी  महाशिवरात्रि से पहले काशी में शिव विवाह की पावन रस्मों का शुभारंभ शुक्रवार को बाबा विश्वनाथ की सगुन हल्दी के साथ होगा। सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार बाबा को विवाह से पूर्व हल्दी अर्पित की जाएगी और उन्हें दूल्हा रूप में सजाया जाएगा। बांसफाटक से निकलेगी हल्दी की पारंपरिक यात्रा बांसफाटक स्थित श्रीमहंत लिंगिया महाराज (शिव प्रसाद पांडेय) के आवास, श्रीयंत्र पीठम “श्री धर्म निवास” से हल्दी की पारंपरिक यात्रा टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत आवास के लिए रवाना होगी। यहां बाबा की पंचबदन चल प्रतिमा पर विधि-विधान से हल्दी अर्पित की जाएगी। बड़ी शीतला माता मंदिर के उपमहंत अवशेष पांडेय (कल्लू महाराज) ने बताया कि काशी की लोकपरंपरा में शिव विवाह से पूर्व सगुन की हल्दी चढ़ाने की विशेष मान्यता है। इस वर्ष विशेष रूप से नासिक से मंगाई गई हल्दी बाबा को अर्पित की जाएगी। सारंगनाथ से आएंगे ससुरालीजन शिव विवाह की इस रस्म में बाबा के ‘ससुराल’ सारंगनाथ मंदिर से भी ससुरालीजन शामिल होंगे। सामूहिक रुद्राभिषेक पीठ के पदाधिकारियों के अनुसार, सारंगनाथ से हल्दी लेकर श्रद्धालु बांसफाटक पहुंचेंगे और वहां से शोभायात्रा के साथ टेढ़ीनीम महंत आवास जाएंगे। डमरू, शंखनाद और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के बीच बाबा को सगुन की हल्दी अर्पित की जाएगी। विशेष पूजन और भव्य श्रृंगार हल्दी चढ़ाने से पहले महंत परिवार की संरक्षिका मोहिनी देवी के सानिध्य में 11 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा पंचबदन प्रतिमा का विशेष पूजन कराया जाएगा। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा का पारंपरिक और भव्य श्रृंगार होगा। दूल्हे के रूप में सजे श्रीविश्वनाथ की झलक पाने को भक्त उत्साहित हैं। नृत्यांजलि और स्वरांजलि से भक्तिमय माहौल हल्दी अनुष्ठान के उपरांत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी। नृत्यांजलि और स्वरांजलि के माध्यम से शिव भक्ति का रस बिखरेगा और पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठेगा। काशी में शिव विवाह की इन रस्मों के साथ महाशिवरात्रि महापर्व की तैयारियां भी चरम पर पहुंच गई हैं। श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन आस्था, परंपरा और उत्सव का अद्भुत संगम बनकर सामने आएगा।

महाशिवरात्रि 2026: भद्रा में शिव पूजन संभव या वर्जित? जानिए पूरी धार्मिक व्याख्या

इस बार महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। महाशिवरात्रि पर भक्त शिवजी का अभिषेक और रुद्राभिषेक करते हैं। फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि मनायी जाएगी। इस बार महाशिवरात्रि पर भद्रा लग रही है। ऐसे में भद्रा में शिवजी की पूजा होती है या नहीं भक्त इसको लेकर लोग कंफ्यूज रहते हैं।यहां हम आपको बताएंगे कि भद्रा में शिवजी की पूजा का क्या नियम है और इस दिन भद्रा किस समय लग रही है। चतुर्वेदी ने कहा कि सूर्य, बुध, शुक्र, राहु चार ग्रहों की युति में महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भद्रा कब रहेगी? इस बार महाशिवरात्रि पर भद्रा लग रही है। ऐसे में भद्रा में शिवजी की पूजा होती है या नहीं भक्त इसको लेकर लोग कंफ्यूज रहते हैं।यहां हम आपको बताएंगे कि भद्रा में शिवजी की पूजा का क्या नियम है और इस दिन भद्रा किस समय लग रही है। इस साल 15 फरवरी को सायं 05:04 बजे से प्रारंभ होकर 16 फरवरी सोमवार शाम 05 बजकर 34 मिनट तक चतुर्दशी रहेगी। इस साल 15 फरवरी को संपूर्ण रात्रि निशीथ व्यापिनी चतुर्दशी तिथि रहने के कारण 15 फरवरी को ही महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा। आपको बता दें कि भद्रा में शिवपूजन पर कोई रोक नहीं है। शिवपूजा करने के लिए पाताल लोक भद्रा बाधक नहीं होता है। इस साल शिवरात्रि पर भद्रा 15 फरवरी को सायं 05.04 बजे से अगले दिन प्रातः 5.23 तक भद्रा योग रहेगा। ज्योतिषियों के अनुसार इस बार भद्रा पाताल लोक में होने के कारण उसका पृथ्वी पर असर नहीं पड़ेगा। चतुर्दशी तिथि की रात्रि क्यों है खास इसलिए सभी लोग आराम से महाशिवरात्रि पर्व पर शंकर जी का रुद्राभिषेक, पूजन अर्चन एवं रात्रि जागरण कर सकते हैं। ऐसा कहा जाता है कि शिव पूजा से आपको सुख समृद्धि ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। नाकोटिरुद्र संहिता एवं ईशान संहिता के अनुसार फाल्गुन कृष्ण पक्ष त्रयोदशी के उपरांत चतुर्दशी तिथि को रात्रि में महादेव शिवलिंग के रूप में अवतरित हुए थे, जिसमें करोड़ों सूर्य के समान तेज बताया गया है। भोलेनाथ का इन चीजों से करें अभिषेक भोलेनाथ के पूजन में दूध,दही, घी, शहद, शर्करा से पंचामृत अभिषेक करें और संभव हो सके तो गंगाजल से स्नान कराएं, फिर चंदन, रोली,अक्षत, बेलपत्र, धतूरा नाना प्रकार के सुगंधित पुष्प अर्पित करें। धूप-दीप कर फल व मिष्ठान का भोग लगाएं अंत में कपूर से आरती करें व पुष्पांजलि करें। ऐसा कहा जाता है कि शिवरात्रि पर्व पर व्रत रखने से मन शुद्ध होता है।

300 साल बाद बन रहा शुभ योग, महाशिवरात्रि पर तीन राशियों को मिलेगा अमीरी का लाभ

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 15 फरवरी 2026 को मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि को एक बड़ी खगोलिय घटना होने वाली है. इस पावन दिन पर ग्रहों की एक ऐसी दुर्लभ स्थिति बन रही है जो पिछले 300 सालों में नहीं देखी गई. इस दिन एक साथ 4 बड़े राजयोग और 12 शुभ योगों का अद्भुत मिलन हो रहा है. कुंभ राशि में सूर्य, बुध, शुक्र और राहु की मौजूदगी से ‘चतुर्ग्रही योग’ बनेगा, जो ब्रह्मांड की सकारात्मक ऊर्जा को कई गुना बढ़ा देगा. इसका सबसे शुभ प्रभाव मेष, सिंह और मकर राशि के जातकों पर पड़ेगा. एक साथ सक्रिय होंगे 12 शुभ और 4 राजयोग इस महाशिवरात्रि की सबसे बड़ी खासियत यहां बनने वाले योगों की लंबी लिस्ट है. इस दिन प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, साध्य, शिव, शुक्ल, शोभन, सर्वार्थसिद्धि, चंद्रमंगल, त्रिग्रही, राज और ध्रुव जैसे 12 शुभ योग एक साथ सक्रिय रहेंगे. इन योगों के साथ-साथ सूर्य, बुध और शुक्र की युति से बुधादित्य, लक्ष्मी नारायण और शुक्रादित्य जैसे 4 बड़े राजयोग भी बन रहे हैं. ये सभी योग आपस में जुड़कर एक ऐसी शक्ति पैदा करेंगे जो सीधे तौर पर व्यक्ति की बुद्धि, सुख-सुविधाओं और समाज में उसकी प्रतिष्ठा को बढ़ाने का काम करेगी. मेष राशि: करियर में सुनहरी तरक्की ग्रहों के इस महासंयोग का सबसे पहला और बड़ा असर मेष राशि के जातकों के जीवन में दिखाई देगा. इन जातकों के लिए करियर के मोर्चे पर एक नया और शानदार समय शुरू होने वाला है, जहां नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या किसी बड़ी जिम्मेदारी का तोहफा मिल सकता है. जो लोग अपना खुद का काम या बिजनेस कर रहे हैं, उन्हें इस दौरान धन लाभ के ऐसे अवसर मिलेंगे जो उनकी आर्थिक स्थिति को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और स्थिर बना देंगे.  सिंह राशि: मान-सम्मान और पद की प्राप्ति इसी क्रम में सिंह राशि के जातकों के लिए भी यह महाशिवरात्रि खुशियों की सौगात लेकर आएगी.  चूंकि इस राशि का स्वामी सूर्य स्वयं राजयोग का हिस्सा है, इसलिए समाज और कार्यक्षेत्र में आपका रुतबा पहले से काफी बढ़ जाएगा.  आपके जो काम सरकारी दफ्तरों या कानूनी कागजों की वजह से लंबे समय से अटके हुए थे, वे अब महादेव की कृपा से बिना किसी रुकावट के पूरे होने लगेंगे, जिससे आपके आत्मविश्वास में भी जबरदस्त बढ़ोतरी होगी.  मकर राशि: संपत्ति और पारिवारिक सुख अंत में, इस शिव कृपा का सीधा लाभ मकर राशि के जातकों को मिलेगा, जिनके लिए यह समय नई संपत्ति या निवेश के लिहाज से सबसे उत्तम रहेगा. यदि आप नया घर खरीदने या जमीन-जायदाद में पैसा लगाने की सोच रहे हैं, तो इन शुभ योगों के प्रभाव से आपको बड़ा मुनाफा होने के प्रबल संकेत हैं.  इसके साथ ही, परिवार में लंबे समय से चला आ रहा कोई तनाव दूर होगा. घर के सभी सदस्यों के बीच प्रेम और तालमेल बढ़ेगा, जिससे मानसिक शांति प्राप्त होगी.

महाशिवरात्रि 2026: उज्जैन महाकाल में श्रद्धालुओं का मेला, पुलिस ने सुरक्षा कड़े की

उज्जैन मध्यप्रदेश के उज्जैन में महाशिवरात्रि पर दर्शन व्यवस्था को लेकर बुधवार को पुलिस ओर प्रशासनिक अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई. पर्व पर 24 घंटे मंदिर खुला रहने ओर करीब 10 लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देख अधिकारियों ने दर्शन की रणनीति तय की. वहीं दर्शनार्थियों के आने वाले मार्ग ओर पार्किंग व्यवस्था का भी निरीक्षण किया. महाशिवरात्रि के अवसर पर विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में इस बार 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। अनुमानित भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा एवं व्यवस्थाओं के व्यापक इंतजाम किए हैं। पुलिस कंट्रोल रूम में एडीजी राकेश गुप्ता ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में डीआईजी नवनीत भसीन, एसपी प्रदीप शर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। मंदिर की सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था, चिकित्सा सुविधाओं तथा वीवीआईपी मूवमेंट की विस्तृत कार्ययोजना पर चर्चा की गई। महाशिवरात्रि पर सुरक्षा के लिए 6 एएसपी, 18 डीएसपी, 38 थाना प्रभारी, 50 एसआई, 85 एएसआई सहित कुल 1500 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की जा रही है। मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, जिनका कंट्रोल रूम मंदिर परिसर में ही बनाया गया है। ड्रोन कैमरों से भी लगातार निगरानी रखी जाएगी। भीड़ प्रबंधन के लिए इस बार एक नई पहल की गई है। नगर एवं ग्राम रक्षा समिति के सदस्यों के साथ जिम में कसरत करने वाले युवा, आर्मी भर्ती की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी तथा कॉलेज छात्रों को वालंटियर के रूप में लगाया जाएगा। प्रशासन ने श्रद्धालुओं को 40 मिनट के भीतर दर्शन कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। महाकाल नगरी पूरी तरह तैयार है, अब इंतजार है श्रद्धालुओं की आस्था के सैलाब का। 24 घंटे खुला रहेगा बाबा का दरबार इस संबंध में कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि नववर्ष के पहले दिन करीब 8 लाख दर्शनार्थी महाकाल मंदिर पहुंचे थे. 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर यह संख्या 10 लाख पहुंच सकती है. पर्व पर तड़के होने वाली भस्म आरती आधा घंटा पूर्व होगी और मंदिर 24 घंटे खुला रहेगा. इसलिए दर्शन व्यवस्था के साथ पार्किंग ओर दर्शनार्थियों के मार्ग का निरीक्षण किया जा रहा है. यह दिए निर्देश महाशिवरात्रि पर दर्शन हेतु आने वाले श्रद्धालुओं की अत्यधिक संख्या को दृष्टिगत रखते हुए कमिश्नर सिंह ने अधिकारियों के साथ मंदिर परिसर, महाकाल महालोक के आंतरिक एवं बाह्य क्षेत्रों का भ्रमण व निरीक्षण किया. उन्होंने दर्शन मार्ग,श्रद्धालुओं की आवाजाही,पार्किंग, जूता स्‍टेण्‍ड, पेयज , लड्डू प्रसाद, प्राथमिक चिकित्सा, सुरक्षा व्यवस्था, मूलभूत सुविधा और भीड़ प्रबंधन का अवलोकन कर अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए. साथ ही मंदिर परिसर एवं महाकाल लोक में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लेकर निर्माण एजेंसियों को कार्य समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने हेतु आवश्यक निर्देश दिए. 

महाशिवरात्रि विवाद सुप्रीम कोर्ट में: दरगाह प्रबंधन की गुहार पर SC की अहम टिप्पणी

कर्नाटक सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (12 फरवरी) को कर्नाटक स्थित अलंद लाडले मशाइक दरगाह प्रबंधन की उस अर्जी पर सुनवाई करने से मना कर दिया जिसमें जिसमें दरगाह परिसर में हिंदू महाशिवरात्रि पूजा और दूसरे हिंदू रीति-रिवाजों पर रोक लगाने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी। दरगाह मैनेजमेंट ने भारत के संविधान के आर्टिकल 32 के तहत अर्जी दी थी, जो उन पार्टियों को राहत के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट जाने की इजाज़त देता है जिनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। दरगाह प्रबंधन याचिका में दावा किया था कि दरगाह के धार्मिक स्वरूप को बदलने के लिए हर साल रणनीतिक तरीके से पूजा की अनुमति लेने की कोशिश की जा रही है। प्रबंधन ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप कर दरगाह के मूल धार्मिक चरित्र को बनाए रखने की भी मांग की थी। हालांकि, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एससी शर्मा की पीठ ने कहा कि इस तरह के मामलों में पहले हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए। इससे पहले मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने भी टिप्पणी की थी कि हर मामला सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट लाना उचित नहीं है, क्योंकि इससे यह संदेश जाता है कि हाई कोर्ट प्रभावी नहीं हैं। जब कल चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची के सामने यह मामला आया, तो इस बेंच ने यह भी सवाल उठाया था कि पहले हाई कोर्ट जाने के बजाय आर्टिकल 32 की पिटीशन क्यों फाइल की गई। यह विवाद उस दरगाह से जुड़ा है जो 14वीं सदी के सूफी संत हजरत शेख अलाउद्दीन अंसारी (लाडले मशाइक) और 15वीं सदी के हिंदू संत राघव चैतन्य से संबंधित मानी जाती है। दरगाह परिसर में राघव चैतन्य शिवलिंग नाम से पहचानी जाने वाली एक संरचना भी मौजूद बताई जाती है। ऐतिहासिक रूप से इस स्थल पर हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय पूजा-अर्चना करते रहे हैं, हालांकि 2022 में यहां पूजा अधिकार को लेकर तनाव की स्थिति बनी थी। गौरतलब है कि कर्नाटक हाई कोर्ट ने 2025 में 15 हिंदू श्रद्धालुओं को महाशिवरात्रि पर पूजा की अनुमति दी थी, जो भारी सुरक्षा के बीच सम्पन्न हुई थी। इससे पहले भी कोर्ट के आदेश पर सीमित संख्या में पूजा कराई गई थी। दरगाह प्रबंधन का कहना था कि बार-बार अंतरिम आदेश लेकर धार्मिक स्थल के स्वरूप को बदलने की कोशिश की जा रही है, जो Places of Worship (Special Provisions) Act, 1991 के खिलाफ हो सकता है। इस कानून के तहत 15 अगस्त 1947 को किसी धार्मिक स्थल की जो स्थिति थी, उसे बनाए रखना जरूरी माना गया है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद इस मामले में आगे की कानूनी लड़ाई हाई कोर्ट में होने की संभावना जताई जा रही है। यह मामला धार्मिक अधिकार, ऐतिहासिक दावों और कानून के संतुलन के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

महाशिवरात्रि पर छोटा महादेव भोपाली की गुफा में नहीं मिलेगा श्रद्धालुओं को प्रवेश

बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी विकासखंड में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल छोटा महादेव भोपाली में इस वर्ष भी महाशिवरात्रि पर्व के दौरान श्रद्धालुओं को गुफा दर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए गुफा तक पहुंच पर प्रतिबंध जारी रखने का निर्णय लिया है। शिवलिंग के दर्शन एलईडी स्क्रीन के माध्यम से श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए गुफा में विराजित शिवलिंग के दर्शन एलईडी स्क्रीन के माध्यम से कराए जाएंगे। शाहपुर एसडीएम प्रपंज आर के अनुसार हाल ही में चार विभागों की संयुक्त टीम द्वारा स्थल का निरीक्षण किया गया। स्थिति पूर्व वर्षों की तुलना में और जोखिमपूर्ण हो गई है इंजीनियरों के साथ की गई तकनीकी जांच में यह स्पष्ट हुआ कि क्षेत्र की स्थिति पूर्व वर्षों की तुलना में और अधिक जोखिमपूर्ण हो गई है, जिससे किसी भी प्रकार की अनहोनी की आशंका बनी हुई है। प्रशासन के अनुसार वर्ष 2014 से छोटा महादेव क्षेत्र की पहाड़ियों में दरारें दिखाई देने लगी थीं। बारिश के कारण ये दरारें और चौड़ी हो गई हैं समय-समय पर हुई भारी बारिश के कारण ये दरारें और चौड़ी हो गई हैं। शिवलिंग गुफा के ऊपर स्थित काला बाबा मंदिर और झरना क्षेत्र के बीच दरारों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसके चलते इस पूरे हिस्से को असुरक्षित श्रेणी में रखा गया है।  

महाशिवरात्रि 2026: भद्रा के कारण बदलेगा जलाभिषेक का समय, जानें पूरी जानकारी

हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन शिव-शक्ति का मिलन हुआ था. इस साल महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाने वाली है. महाशिवरात्रि के दिन भक्त भोलेनाथ और माता पार्वती की विशेष पूजा करते हैं. साथ ही व्रत रखते हैं. मान्यता है कि इस दिन भोलेनाथ प्रसन्न मुद्रा में रहते हैं और पूजन व व्रत से प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाएं जल्द पूर्ण करते हैं. महाशिवरात्रि के दिन देश भर के शिव मंदिरों में जलाभिषेक के लिए भक्तों की लंबी कतार देखने को मिलती है. हालांकि, इस साल महाशिवरात्रि पर भद्रा का योग भी बन रहा है. ऐसे में कई लोगों के मन में ये सवाल है कि क्या इसका प्रभाव शिव जी के जलाभिषेक पर भी पड़ेगा? ऐसे में आइए जानते हैं कि महाशिवरात्रि पर भद्रा काल कब से कब तक रहेगा? साथ ही कब जलाभिषेक किया जा सकता है? महाशिवरात्रि 2026 भद्रा काल का समय पंचांग के अनुसार, 15 फरवरी की शाम 05 बजकर 04 मिनट से भद्रा काल शुरू होगा. वहीं भद्रा काल का समापन 16 फरवरी की सुबह 05 बजकर 23 मिनट पर होगा. यानी महाशविरात्रि पर करीब 12 घंटे 19 मिनट तक भद्रा काल रहेगा. हालांकि, चिंता की कोई बात नहीं है. पंडितों और ज्योतिषविदों के अनुसार, महाशिवरात्रि पर भद्रा पाताल लोक में वास करेगी. शास्त्रों में बताया गया है कि भद्रा के पाताल लोक में होने पर उसका प्रभाव धरती पर नहीं पड़ता. इसलिए महाशिवरात्रि के दिन भक्त बिना किसी असमंजस के भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा कर सकते हैं. महाशिवरात्रि 2026 जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त इस साल महाशिवरात्रि के दिन महादेव के जलाभिषेक के लिए कई मुहूर्त हैं. इस दिन पहला मुहूर्त सुबह 08 बजकर 24 मिनट से 09 बजकर 48 मिनट मिनट तक रहेगा. दूसरा मुहूर्त सुबह 09 बजकर 48 मिनट से 11 बजकर 11 मिनट तक रहेगा. तीसरा अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त रहेगा. ये सुबह 11 बजकर 11 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा. शाम को शुभ-उत्तम मुहूर्त 06 बजकर 11 मिनट से 07 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. इन सभी मुहूर्तों में भक्त शिव जी का जलाभिषेक कर सकते हैं.

दांपत्य जीवन भी होगा खुशहाल, मनचाहे पार्टनर के लिए महाशिवरात्रि पर करें खास उपाय

हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व बेहद धूमधाम से मनाया जाता है। हर साल यह पर्व फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान और माता पार्वती की पूजा अर्चना होती है। इस साल महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी 2026 को है। यह पर्व भगवान शिव व माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। भगवान शिव-पार्वती की पूजा मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा भाव से की गई पूजा से भगवान शिव अति शीघ्र प्रसन्न होते हैं और साथ ही भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती है। इस दिन कुछ उपाय करने से मनचाहे पार्टनर की प्राप्ति होती है। क्योंकि मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, इसलिए सनातन धर्म में इस दिन को बहुत ही अच्छा माना गया है। चलिए जानते हैं कि मनचाहा पार्टनर के लिए महाशिवरात्रि के दिन कौन से उपाय करने चाहिए। मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए उपाय 1. महाशिवरात्रि के दिन अगर आप मनचाहा वर चाहती हैं, तो इस दिन पूजा के समय गाय के कच्चे दूध से भगवान शिव का अभिषेक करना शुभ होगा। अभिषेक करते समय इस समय ॐ क्लीं कृष्णाय नमः मंत्र का जप करते रहें। मान्यता है कि इससे प्रेम विवाह करने में सफलता प्राप्त होती है। 2. अगर आप विवाह के बंधन में जल्द से जल्द बंधना चाहती हैं, तो महाशिवरात्रि के दिन स्नान-ध्यान के बाद भगवान शिव का अभिषेक करें। फिर पूरे विधि-विधान से शिव-शक्ति की पूजा आरधना करें। पूजा के समय अविवाहित लड़कियां मां पार्वती को सिंदूर अर्पित करें। 3. इस दिन कच्चे दूध में शहद और काले तिल मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करना बेहद शुभफलदायी माना जाता है। इस उपाय से शादी के योग बनते हैं। 4.महाशिवरात्रि के दिन शुद्ध घी या दही से भगवान शिव का अभिषेक करने से ग्रह दोष से मुक्ति मिलती है। इससे शीघ्र विवाह के योग बनते हैं। 5. वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए महाशिवरात्रि के दिन वर और वधु एक साथ जोड़े में पंचामृत से भगवान शिव का अभिषेक करना शुभ फलदायी माना जाता है। 6. महाशिवरात्रि के दिन शिव-पार्वती का एक साथ पूजन करें। पूजा के दौरान माता पार्वती को सिंदूर, चूड़ियां और बिंदी अर्पित करें। वहीं, शिव जी का पंचामृत से अभिषेक करें। इस उपाय से रिश्तों में संवाद और समझ बढ़ती है। 7. महाशिवरात्रि पर गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक करने से धन संबंधी अड़चनें कम होती हैं। 8 ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए ये अभिषेक करने से मन में भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत बनाता है।

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