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ममता सरकार को SC से तगड़ा झटका, कर्मचारियों को 31 मार्च तक DA देने का आदेश

कलकत्ता पश्चिम बंगाल के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए आज का दिन ऐतिहासिक राहत लेकर आया है। सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने ममता बनर्जी सरकार को कड़ा निर्देश देते हुए 31 मार्च 2026 तक महंगाई भत्ते (DA) के कुल बकाया का 25 प्रतिशत भुगतान करने का आदेश दिया है। यह आदेश उस दिन आया है जब बंगाल विधानसभा में लेखानुदान पेश किया जाना है। इससे राजनीतिक गलियारों में भी हलचल बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित DA बकाया का एक-चौथाई हिस्सा 31 मार्च तक चुकाया जाए। शेष 75 प्रतिशत बकाया राशि के भुगतान का तरीका और समय सीमा तय करने के लिए अदालत ने एक उच्च स्तरीय चार सदस्यीय समिति बनाने का आदेश दिया है। आपको बता दें कि पिछले साल 16 मई को कोर्ट ने तीन महीने के भीतर यह भुगतान करने को कहा था, लेकिन राज्य सरकार ने फंड की कमी का हवाला देकर 6 महीने की मोहलत मांगी थी। कोर्ट ने बार-बार मिल रही तारीखों पर कड़ा रुख अपनाते हुए अब अंतिम समय सीमा तय कर दी है। DA खैरात नहीं, अधिकार है: शुभेंदु अधिकारी विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों की जीत बताया। उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी आज गलत साबित हुई हैं। सालों तक उन्होंने दावा किया कि DA कोई अधिकार नहीं है, बल्कि एक दान है। आज शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि यह कर्मचारियों का हक है। राज्य सरकार ने कर्मचारियों को उनके हक से वंचित करने के लिए नामी वकीलों पर करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन अंततः न्याय की जीत हुई।” केंद्र और राज्य के बीच बढ़ता अंतर पश्चिम बंगाल में DA को लेकर विवाद काफी गहरा है। वर्तमान स्थिति यह है कि 1 अप्रैल 2025 से बंगाल के कर्मचारियों का DA मूल वेतन का 18 प्रतिशत तय किया गया था। वहीं, केंद्र सरकार के कर्मचारियों को मिलने वाले DA और राज्य सरकार के कर्मचारियों के बीच अब भी करीब 37 से 40 प्रतिशत का बड़ा अंतर बना हुआ है। आपको बता दें कि केंद्रीय कर्मचारियों को 55 प्रतिशत डीए मिलता है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, इसलिए राज्य सरकार ने वर्तमान में केवल लेखानुदान पेश करने का निर्णय लिया है। पूर्ण बजट नई सरकार के गठन के बाद आएगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश ने ममता सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ा दिया है, क्योंकि 25% बकाया चुकाने के लिए राज्य को हजारों करोड़ रुपये का प्रावधान करना होगा।

पश्चिम बंगाल में महिलाओं को मिलेगा ₹500 का लाभ, गिग वर्कर्स के लिए भी ऐलान, ममता सरकार ने खोला खजाना

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 4.06 लाख करोड़ रुपये का अंतरिम बजट पेश किया. इस बजट में सबसे बड़ा ऐलान ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना को लेकर हुआ है. राज्य की 2.42 करोड़ महिलाओं के लिए मासिक सहायता राशि में 500 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. यह बढ़ी हुई राशि फरवरी 2026 से ही लागू हो जाएगी. इस कदम को आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. क्या है बंगाल बजट की अन्य बड़ी घोषणाएं? पश्चिम बंगाल बजट में केवल महिलाओं ही नहीं, बल्कि अन्य वर्गों पर भी फोकस किया गया है. गिग वर्कर्स यानी जोमैटो और स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म पर काम करने वालों को अब ‘स्वास्थ्य साथी’ जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलेगा. इसके अलावा आंगनवाड़ी वर्कर्स और सहायिकाओं के मानदेय में अप्रैल 2026 से 1000 रुपये की वृद्धि की जाएगी. बेरोजगारी दूर करने के लिए युवाओं को 1500 रुपये प्रति माह का भत्ता देने की नई योजना भी शुरू होगी. ‘लक्ष्मी भंडार’ के बदले समीकरण लक्ष्मी भंडार योजना ममता बनर्जी की सबसे सफल योजनाओं में से एक मानी जाती है. वर्तमान में इसमें सामान्य वर्ग को 1000 और एससी-एसटी वर्ग को 1200 रुपये मिलते हैं. अब 500 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी के बाद यह राशि और बढ़ जाएगी. जानकारों का मानना है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महिलाओं के भारी मतदान ने एनडीए की जीत तय की थी. इसी पैटर्न को देखते हुए बंगाल में भी तृणमूल कांग्रेस अपनी पकड़ मजबूत कर रही है. महिलाओं को लुभाने की मची होड़ आजकल राजनीति में महिलाएं नई ‘किंगमेकर’ बनकर उभरी हैं. पश्चिम बंगाल ही नहीं, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी यही ट्रेंड दिख रहा है. महाराष्ट्र में बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति सरकार ने ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’ के तहत 2.5 करोड़ महिलाओं को दिसंबर और जनवरी की किस्त एक साथ देने का फैसला किया है. तमिलनाडु की डीएमके सरकार ने भी ‘कलैग्नार मगलिर उरीमई थिट्टम’ योजना का दायरा बढ़ा दिया है. सभी पार्टियां जानती हैं कि महिलाओं का वोट जीत की गारंटी है.

कोलकाता को ठप करने 50 जगहों पर 2000 लोगों को इकट्ठा करके ट्रैफिक जाम की है हमारी योजना : मंत्री सिद्दीकुल्ला चौधरी

कोलकाता तृणमूल कांग्रेस और मुस्लिम संगठन पश्चिम बंगाल में वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इसी क्रम में टीएमसी नेता और मंत्री सिद्दीकुल्ला चौधरी ने कोलकाता के रामलीला मैदान में जमीयत-ए-उलेमा हिंद की पश्चिम बंगाल यूनिट द्वारा आयोजित एक विशाल रैली को संबोधित किया. वक्फ कानून में संशोधन को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए ममता बनर्जी सरकार के मंत्री ने कोलकाता में बड़े पैमाने पर ट्रैफिक जाम करने की धमकी दी. सभा को संबोधित करते हुए सिद्दीकुल्ला चौधरी ने कहा कि अगर वह चाहें तो चक्का जाम करके कोलकाता को ठप कर सकते हैं. उन्होंने कहा, ‘अगर हम कोलकाता को ठप करना चाहें तो आसानी से 50 जगहों पर 2000 लोगों को इकट्ठा करके ट्रैफिक जाम करवा सकते हैं. अभी तक हमने ऐसा नहीं किया है, लेकिन लेकिन हम ऐसा करने की योजना बना रहे हैं. हमारी रणनीति जिलों से शुरू करने की है और फिर कोलकाता में 50 जगहों पर 10-10 हजार लोगों को तैनात करेंगे. उन्हें कुछ नहीं करना होगा, वे आएंगे, बैठेंगे और मुरमुरे, गुड़ और मिठाई खाएंगे.’ सिद्दीकुल्ला चौधरी के इस बयान का यह वीडियो भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने X पर शेयर किया है. पूर्वी बर्धमान के मंगलकोट निर्वाचन क्षेत्र से विधायक सिद्दीकुल्ला ने आरएसएस और भाजपा पर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी सरकार के तहत मुसलमान खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं. अपने भाषण में सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने आगे कहा कि उन्हें सीएम का फोन आया था जिसमें उन्होंने आश्वासन दिया था कि वक्फ संशोधन अधिनियम पश्चिम बंगाल में लागू नहीं किया जाएगा. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से आग्रह किया कि वे तब तक आंदोलन जारी रखें जब तक केंद्र इसे वापस नहीं ले लेता. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से हिंसा से दूर रहने को कहा. सिद्दीकुल्लाह चौधरी पिछले कई दिनों से राज्य में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं. उन्होंने कहा है कि इस कानून के खिलाफ एक करोड़ लोगों के हस्ताक्षर वाला पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा जाएगा. राज्य के लाइब्रेरी मंत्री होने के अलावा सिद्दीकुल्लाह जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं.  

AAP की हार से बढ़ गई ममता की टेंशन, बोली 2026 में बंगाल में खेला होगा और जोरदार होगा

 कोलकाता अगले साल होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि 2026 में बंगाल में फिर से खेला होगा और ज़ोरदार होगा. ममता बनर्जी कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रही थीं. दरअसल 2021 में हुए पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव (Assembly Election) के दौरान ममता बनर्जी ने ही ‘खेला होबे’ का नारा दिया था. उसके बाद से ही ये नारा देशभर में चर्चित हो गया था. बीजेपी (BJP) के आक्रामक कैंपेन के बावजूद ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी (TMC) ने पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल की थी. बीजेपी पर निशाना टीएमसी के चुनावी प्रबंधन का काम देख रही आईपैक कंपनी का जिक्र करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, ‘यह प्रशांत किशोर की आईपैक नहीं है, उनकी नई पार्टी है. आप सभी को आईपैक को समझना होगा और सहयोग करना होगा, वे नई टीम हैं. भाजपा के पास 50 एजेंसियां ​​हैं, हम एक रख सकते हैं.’ ममता बनर्जी ने कहा, ‘भाजपा ने एक कंपनी भेजी है जिसमें प्रतिभाशाली लोग हैं. वे डेटा ऑपरेटर के पास जा रहे हैं. पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में हरियाणा, राजस्थान के लोगों के नाम डाल रहे हैं. यह ऑनलाइन किया जा रहा है. भाजपा नहीं चाहती कि बंगाल में उसकी संस्कृति बरकरार रहे.’ ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को चेतावनी देते हुए कहा कि हम महाराष्ट्र नहीं हैं, हम चुनाव आयोग के सामने धरना दे सकते हैं. चुनाव आयोग पर हमला करते हुए उन्होंने कहा, ‘इसी तरह उन्होंने महाराष्ट्र और दिल्ली को हराया, लेकिन हमने उनकी चाल पकड़ ली है. अगर मैं 26 दिनों तक धरने पर बैठ सकती हूं, तो मैं चुनाव आयोग के सामने भी धरने पर बैठ सकती हूं ताकि उसकी विश्वनीयता वापस पहले जैसी हो जाए.’. भाजपा पर हमला, संगठन में बदलाव के संकेत टीएमसी का यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब भाजपा केंद्रीय एजेंसियों के जरिए तृणमूल को घेरने की कोशिश कर रही है। हालांकि, टीएमसी का दावा है कि जनता का भरोसा अब भी पार्टी के साथ है। सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी पार्टी संगठन को पुनर्गठित करने का संदेश दे सकती हैं। लंबे समय से पार्टी के अंदर कॉर्पोरेट मानसिकता के खिलाफ नाराजगी रही है, जिसे दूर करने के लिए ममता बनर्जी चुनावी रणनीति के लिए बाहरी एजेंसियों पर कम और पार्टी कार्यकर्ताओं पर अधिक भरोसा करना चाहती हैं। जनसंपर्क अभियान पर रहेगा जोर पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि टीएमसी नेतृत्व का मुख्य फोकस जमीनी कार्यकर्ताओं को अधिक प्रभावी बनाना होगा। ममता बनर्जी पहले ही इस बात पर जोर दे चुकी हैं कि राज्य सरकार की योजनाओं और सेवाओं का लाभ सही तरीके से जनता तक पहुंचे। राज्यभर में डिजिटल प्रसारण की व्यवस्था सम्मेलन में जिलों से आए नेताओं की मौजूदगी रहेगी, जबकि जो नेता सभा में शामिल नहीं हो पाएंगे, उनके लिए पूरी बैठक ऑनलाइन प्रसारित की जाएगी। पार्टी चाहती है कि ममता बनर्जी और महासचिव अभिषेक बनर्जी का संदेश जमीनी स्तर तक पहुंचे। टीएमसी का मिशन 2026 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल एक बार फिर अपनी रणनीति को धार देने में जुट गई है। यह सम्मेलन पार्टी के लिए आगामी चुनावों की दिशा तय करने वाला अहम पड़ाव साबित हो सकता है।

पश्चिमी बांग्लादेश में विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी रद्द, ईद पर 2 दिनों की लीव; भड़की भाजपा

कोलकाता कोलकाता नगर निगम ने एक आदेश जारी कर विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी रद्द कर दी और ईद की एक दिन की छुट्टी बढ़ाकर दो दिन कर दी. निगर निगम के इस आदेश पर जमकर बवाल हुआ. कोलकाता नगर निगम का ये आदेश हिंदी मीडियम स्कूलों के लिए था. बवाल इतना बढ़ा कि कोलकाता नगर निगम (KMC) ने इस आदेश को रद्द कर दिया. इसके बाद कोलकाता नगर निगम ने इस आदेश को जारी करने वाले शिक्षा विभाग के अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. कोलकाता नगर निगम ने कहा है कि ये अनजाने में हुई टाइपिंग मिस्टेक (Typographical mistakes) थी. 25 फरवरी को जारी इस नोटिस पर केएमसी के शिक्षा विभाग के मुख्य प्रबंधक के नाम से हस्ताक्षर किए गए हैं. बता दें कि विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी 17 सितंबर को दी जाती है. कोलकाता नगर निगम की ओर से जारी आदेश में साफ साफ लिखा गया था कि 17 सितंबर 2025 को विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी नहीं रहेगी क्योंकि इस छुट्टी के बदले ईद उल फितर की छुट्टी बढ़ा दी गई है. इस आदेश के अनुसार राज्य में ईद उल फितर की छुट्टी 31 मार्च 2025 और 1 अप्रैल 2025 को घोषित की गई थी. KMC का पुराना आदेश. छुट्टियों में बदलाव के पहले के ज्ञापन की आलोचना करते हुए विपक्षी भाजपा ने आरोप लगाया कि यह राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस द्वारा राजनीतिक लाभ के लिए तुष्टिकरण का एक उदाहरण है. मीडिया को दिए गए नोट में म्यूनिसिपल कमीश्नर ने कहा कि ये आदेश सक्षम प्राधिकारी की सहमति लिए बिना जारी किए गए थे. कोलकाता नगर निगम अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इस चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई कर रहा है. विवाद के बाद रद्द किया गया आदेश कोलकाता नगर निगम का कहना है कि चूंकि ये आदेश बिना परमिशन के जारी किए गए थे. इसलिए इस आदेश को रद्द कर दिया गया है. कोलकाता नगर निगम ने कहा है कि अब छुट्टियों की नई लिस्ट जारी की जाएगी. मीडिया नोट में कहा गया है, “राज्य सरकार की छुट्टियों की सूची को मौजूदा मानदंडों के अनुसार बनाए रखते हुए एक संशोधित और सटीक आदेश आने वाले समय में जारी करेगी.” बीजेपी का कहना है कि जब उन्होंने इस मुद्दे को उठाया तभी KMC को इस आदेश को रद्द करने के लिए बाध्य होना पड़ा. बंगाल बीजेपी के महासचिव जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने पत्रकारों को कहा कि, “यह विश्वास करने योग्य नहीं है कि नगर निगम अधिकारी विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी रोकने और ईद-उल-फितर की छुट्टी बढ़ाने के निर्णय से अनभिज्ञ थे.” उन्होंने कहा कि इस वर्ष की शुरुआत में कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के बाद दक्षिण कोलकाता के एक कॉलेज में पुलिस सुरक्षा के साथ सरस्वती पूजा आयोजित की गई थी. कोलकाता मेयर फिरहाद हकीम पर हमला बता दें कि TMC नेता फिरहाद हकीम कोलकाता नगर निगम के मेयर हैं. बीजेपी इस मामले को इसलिए भी उठा रही है. जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने कहा कि हम जानना चाहते हैं कि शिक्षा विभाग के चीफ मैनेजर को ऐसा आदेश जारी करने के लिए किससे हुकुम मिला, क्योंकि बंगाल का कोई भी अधिकारी अपने दम पर ऐसा आदेश नहीं जारी कर सकता है. उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कोलकाता नगर निगम का प्रशासन फिरहाद हकीम के हाथों में है. बीजेपी नेता अमित मालवीय ने कहा कि ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी और आधुनिक सुहरावर्दी फिरहाद हकीम ने कोलकाता नगर निगम के स्कूलों में विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर मिलने वाली छुट्टी को खत्म करने का आदेश दिया है – जो हिंदुओं, विशेष रूप से प्रमुख ओबीसी के लिए बहुत महत्व का अवसर है – और इसकी जगह इसे ईद-उल-फितर के लिए आवंटित कर दिया है, जिससे छुट्टी एक दिन से बढ़कर दो दिन हो गई है. महाकुंभ को ‘मत्युकुंभ’ कहने पर विवाद इससे पहले पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भी महाकुंभ को ‘मृत्युकुंभ’ कहकर एक विवाद पैदा कर दिया था. ‘मृत्युकुंभ’ से जुड़ा ये विवाद तब शुरू हुआ जब उन्होंने 18 फरवरी 2025 को पश्चिम बंगाल विधानसभा में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ मेले को ‘मृत्युकुंभ’ कहकर संबोधित किया था. ममता ने आरोप लगाया था कि आयोजन में वीआईपी लोगों को विशेष सुविधाएं दी जा रही हैं, जबकि गरीब और सामान्य श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. उन्होंने कहा कि महाकुंभ अब अपनी मूल भावना खो चुका है और ‘मृत्युकुंभ’ में बदल गया है.  

ममता बनर्जी का बड़ा आरोप- बीएसएफ बांग्लादेश से आतंकवादियों और घुसपैठियों को बंगाल में प्रवेश कराने में मदद कर रहा है

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) बांग्लादेश से आतंकवादियों और घुसपैठियों को बंगाल में प्रवेश कराने में मदद कर रहा है। इसके कारण राज्य में शांति और सुरक्षा की स्थिति बिगड़ रही है। मुख्यमंत्री ने यह टिप्पणी कोलकाता में नबान्न सभागार में राज्य प्रशासनिक समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए की। ममता ने यह भी कहा कि अगर बीएसएफ ने ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देना जारी रखा तो तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेगी। BSF की भूमिका पर खड़े किए सवाल ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बीएसएफ, जो सीमा सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है, वह इस्लामपुर, सीताई, और चोपड़ा जैसे क्षेत्रों से लोगों को भारत में घुसने की अनुमति दे रहा है। मुख्यमंत्री ने इसे केंद्र सरकार की “खाका” बताते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार की संलिप्तता नहीं होती, तो यह स्थिति संभव नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बीएसएफ इस्लामपुर और अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों से घुसपैठियों को प्रवेश करवा रहा है, और यह सब केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत हो रहा है। TMC पर लगाए गए आरोपों से किया इनकार ममता बनर्जी ने टीएमसी पर लगाए गए आरोपों को नकारते हुए कहा कि पार्टी का इन घुसपैठियों से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि टीएमसी जिम्मेदार नहीं है, बल्कि बीएसएफ की जिम्मेदारी है जो सीमा पर सुरक्षा की स्थिति बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है। ममता ने बीएसएफ पर महिलाओं के खिलाफ अत्याचार करने का भी आरोप लगाया और कहा कि यह सब केंद्र सरकार के खाके के तहत हो रहा है। केंद्र सरकार को विरोध पत्र भेजेंगे ममता ने केंद्र सरकार को अपनी चिंताओं से अवगत कराते हुए कहा कि टीएमसी सरकार केंद्र के फैसले का पालन करेगी, लेकिन वे ऐसी किसी भी कार्रवाई का विरोध करेंगी जो राज्य में आतंकवादियों को शांति और सुरक्षा को बाधित करने का मौका दे। ममता ने कहा, “हम केंद्र सरकार को विरोध पत्र भेजेंगे, अगर वे घुसपैठियों को बंगाल में आने देंगे और राज्य की शांति और स्थिरता को बिगाड़ने की अनुमति देंगे।”

ममता को ‘इंडिया’ गठबंधन का नेतृत्व करने का मौका देना चाहिए, कौन संभालेगा INDIA की कमान?, चर्चा के लिए पार्टी तैयार

नई दिल्ली शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने मंगलवार को संकेत दिया कि उनकी पार्टी इस बात पर चर्चा करने के लिए तैयार है कि क्या कांग्रेस के बाहर किसी को विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ का नेतृत्व करना चाहिए। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि गठबंधन के सभी घटक दल इस मुद्दे पर चर्चा करने को तैयार हैं। राउत राष्ट्रीय जनता दल (राजग) प्रमुख लालू प्रसाद की इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दे रहे थे कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को ‘इंडिया’ गठबंधन का नेतृत्व करने का मौका देना चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे वर्तमान में विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलेपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (INDIA) के अध्यक्ष हैं। दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में राज्यसभा सदस्य राउत ने कहा कि खरगे और राहुल गांधी सहित कांग्रेस नेतृत्व के साथ उनकी पार्टी के बहुत अच्छे संबंध हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है और ‘INDIA’ गठबंधन सहयोगियों में उसके सांसदों की संख्या सबसे अधिक है। राउत ने कहा, ‘फिर भी, अगर ‘INDIA’ गठबंधन को दोबारा मजबूत करना है, तो हर कोई नेतृत्व (संबंधित मुद्दों) पर चर्चा करना चाहता है, (ऐसा नेतृत्व) जो गठबंधन को समय दे सकता है….(चाहे वह) ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे, लालू प्रसाद, शरद पवार या अखिलेश यादव हो सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि यहां तक ​​कि बीजद प्रमुख नवीन पटनायक भी ‘INDIA’ में शामिल हो सकते हैं, जिनकी पार्टी गठबंधन का हिस्सा नहीं है। शिवसेना (UBT) नेता ने कहा, ‘हम इस मुद्दे पर एक-दूसरे से बात कर रहे हैं।’ इस सप्ताह की शुरुआत में, बनर्जी ने भाजपा विरोधी गठबंधन की कमान संभालने की अपनी मंशा व्यक्त की थी। लालू प्रसाद यादव ने किया ममता बनर्जी का समर्थन राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद ने तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो का समर्थन करते हुए मंगलवार को कहा कि उन्हें भाजपा विरोधी इस गठबंधन का नेतृत्व करने दिया जाना चाहिए। लालू ने कहा, ‘ममता बनर्जी को ‘इंडिया’ गठबंधन का नेतृत्व करने दिया जाना चाहिए।’ जब पत्रकारों ने ममता के दावों पर कांग्रेस की आपत्ति के बारे में पूछा, तो लालू ने कहा, ‘कांग्रेस के विरोध से कोई फर्क नहीं पड़ेगा…उन्हें ‘इंडिया’ गठबंधन का नेतृत्व करने दिया जाना चाहिए।’

कांग्रेस का स्ट्राइक रेट 10 तो दीदी का 70…’, INDIA ब्लॉक के नेतृत्व पर बोले TMC सांसद

नई दिल्ली इंडिया गठबंधन में क्या सबकुछ ठीक नहीं चल रहा? यह सवाल इसलिए भी क्योंकि I.N.D.I.A गठबंधन में शामिल कई दल एक के बाद एक राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल खड़े कर रहे हैं। राहुल गांधी पर कोई सीधे सवाल खड़े कर रहा है तो कोई ममता बनर्जी को बेहतर बता कर नेता विपक्ष पर सवाल उठा रहा। संसद के शीतकालीन सत्र के बीच ही राहुल गांधी के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। टीएमसी की ओर से कही गई बात और ममता बनर्जी की हां के बाद कई नेताओं को लगने लगा है कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की जिद ठीक नहीं है। इंडिया गठबंधन में शामिल दलों के नेताओं के बयान पर यदि गौर किया जाए तो ऐसा लगता है कि उनमें भी कहीं न कहीं बेचैनी है। जिनके साथ आने की सबसे अधिक हुई चर्चा, अब वही हुए दूर! लोकसभा चुनाव में सबसे अधिक चर्चा यूपी में कांग्रेस और सपा के साथ आने की हुई। राहुल गांधी और अखिलेश यादव कई मौकों पर साथ आए और नतीजों में इसका असर भी देखने को मिला। लोकसभा नतीजों के बाद सबसे अधिक चर्चा यूपी की हुई। कांग्रेस और सपा दोनों यूपी के मतदाताओं का आभार करते नहीं थक रहे थे। लेकिन अब ये बात पुरानी हो चुकी है। सपा और कांग्रेस के बीच दूरिया बढ़ती हुई नजर आ रही है। महाराष्ट्र में सपा ने महाविकास अघाड़ी से अलग होने का ऐलान कर दिया लेकिन इससे पहले संभल और लोकसभा में सीटिंग अरेंजमेंट पर भी मनमुटाव साफ-साफ देखने को मिला। सपा के एक नेता आईपी सिंह ने राहुल गांधी की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि इन्होंने जिद कर ली है कि ये नहीं सुधरेंगे। सपा सांसद रामगोपाल यादव ने राहुल गांधी पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी I.N.D.I.A. गठबंधन के नेता नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई भी कह सकता है, राजनीति में कोई साधु-संत तो बनकर आता नहीं है। सब पद पाना चाहते हैं। चाहे लोकसभा का चुनाव हो या विधानसभा का कांग्रेस कहीं अच्छा परफॉर्म कर नहीं पाई। मौका मिला तो नेतृत्व करने को तैयार- ममता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इंडिया गठबंधन के कामकाज पर असंतोष व्यक्त किया है साथ ही मौका मिलने पर इसकी कमान संभालने के संकेत भी दिए। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ने कहा कि वह बंगाल की मुख्यमंत्री के रूप में अपनी भूमिका जारी रखते हुए विपक्षी मोर्चे के नेतृत्व के साथ दोहरी जिम्मेदारी संभालने में सक्षम होंगी। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि मैंने इंडिया गठबंधन का गठन किया था, अब इसे ठीक से चलाना मोर्चे का नेतृत्व करने वालों पर निर्भर है। अगर वे यह नहीं कर सकते, तो मैं क्या कर सकती हूं? मैं बस यही कहूंगी कि सभी को साथ लेकर चलने की जरूरत है। यह पूछे जाने पर कि एक मजबूत भाजपा विरोधी ताकत के रूप में अपनी साख को देखते हुए वह गठबंधन का प्रभार क्यों नहीं ले रही हैं, बनर्जी ने कहा, यदि अवसर दिया गया तो मैं इसका सुचारू संचालन सुनिश्चित करूंगी। ममता बनर्जी की यह टिप्पणी उनकी पार्टी के सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के अन्य सहयोगियों से अपने अहंकार को अलग रखने और ममता बनर्जी को विपक्षी गठबंधन के नेता के रूप में मान्यता देने का आह्वान किए जाने के कुछ दिन बाद आई। इन दलों ने भी कांग्रेस पर उठा दिए सवाल विपक्षी गठबंधन के भीतर हाल के घटनाक्रम पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव डी राजा ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे गठबंधन के अध्यक्ष हैं और उन्हें मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि कांग्रेस को अपने सहयोगियों के प्रति अधिक उदार होना चाहिए और कुछ गंभीर आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। राजा ने कहा, कांग्रेस को गंभीरता से आत्मचिंतन करना होगा और इस बात पर विचार करना होगा कि विधानसभा चुनावों में सीटों का बंटवारा ठीक से क्यों नहीं किया गया, जहां उसे बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने बूते चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है और कांग्रेस से दूरी भी बना ली है। उद्धव ठाकरे की पार्टी भी सामना के जरिए कांग्रेस पर निशाना साध रही है। पार्टी ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में इस बात पर जोर दिया कि आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल को इंडिया गठबंधन का हिस्सा बने रहने के लिए मनाने की जरूरत है। संपादकीय में कहा गया, कि ममता बनर्जी कांग्रेस से दूरी रखकर राजनीति करने की कोशिश कर रही हैं। अब केजरीवाल भी उसी राह पर जा रहे हैं। इस संबंध में कांग्रेस को आत्मनिरीक्षण करने और (विपक्ष की) एकजुटता के लिए कदम उठाने की जरूरत है।

उपचुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी पार्टी बीजेपी ने पहले ही अपने प्रत्याशियों के नाम की घोषणा कर दी

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल की 6 विधानसभा सीटों पर 13 नवंबर को उपचुनाव होने जा रहे हैं। इस उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हो गई हैं। सभी प्रमुख दल अपने-अपने उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देने और प्रचार-प्रसार में जुट गए हैं। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और विपक्षी पार्टी बीजेपी ने पहले ही अपने प्रत्याशियों के नाम की घोषणा कर दी है। राजनीतिक दलों के बीच की प्रतिस्पर्धा और मतदाता जुटाने के लिए उनकी रणनीतियों का खुलासा अब आने वाले चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। TMC ने घोषित किए उम्मीदवार सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपने प्रत्याशियों के नाम का ऐलान कर दिया है। टीएमसी ने निम्नलिखित प्रत्याशियों को टिकट दिया है:     मेदिनीपुर: सुजॉय हाजरा     नैहाटी: सनत देय     सिताई: संगीता रॉय     तालडांगरा: फालगुनी सिंहबाबू     हाड़वा: रबिउल इस्लाम     मदारीहाट: जय प्रकाश टोप्पो उपचुनाव के कारण इन सीटों पर उपचुनाव होने का कारण विभिन्न विधायक चुनावी प्रक्रिया के दौरान सांसद बन गए हैं, जिससे ये सीटें खाली हुई हैं:     मेदिनीपुर: TMC की विधायक जून मालिया 2021 में विधायक बनीं थीं और अब लोकसभा चुनाव 2024 में सांसद बनीं, इसलिए यह सीट खाली हुई है।     मदारीहाट: बीजेपी के मनोज तिग्गा 2021 में विधायक बने थे और लोकसभा चुनाव में अलीपुदुआर से सांसद बने।     हाड़वा: तृणमूल कांग्रेस के हाजी नुरु इस्लाम विधायक थे, जो हाल ही में 2024 लोकसभा चुनाव में बरीशहाट से सांसद बने, लेकिन उनका निधन हो गया।     नैहाटी: तृणमूल कांग्रेस के पार्थ भौमिक ने 2024 में बैरकपुर से लोकसभा चुनाव लड़ा और सांसद बने, जिसके बाद यह सीट खाली हुई।     सिताई: टीएमसी के जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया विधायक थे, जो इस बार कूचबिहार से सांसद बने, जिससे यह सीट भी खाली हुई।     तालडांगरा: टीएमसी के अरूप चक्रवर्ती 2021 में विधायक बने थे और 2024 लोकसभा चुनाव में बांकुड़ा से सांसद बने, जिसके कारण यह सीट खाली हुई। इन उपचुनावों में उम्मीदवारों के चयन के साथ-साथ चुनावी रणनीतियों की तैयारी भी जोरों पर है। दोनों प्रमुख पार्टियाँ अपनी-अपनी ताकत को आजमाने के लिए तैयार हैं।  

संदेशखाली यौन उत्पीड़न मामले में SC ने बंगाल सरकार को झटका दिया, सीबीआई जांच पर रोक की मांग वाली अर्जी भी खारिज

नई दिल्ली संदेशखाली में महिलाओं के यौन उत्पीड़न और जमीनों के कब्जे के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को झटका दिया है। अदालत ने सीबीआई जांच पर रोक की मांग वाली बंगाल सरकार की अर्जी को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही ममता सरकार पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि आखिर किसी को बचाने की जरूरत क्या है। अदालत ने पूछा, ‘आखिर सरकार क्यों किसी को बचाना चाह रही है?’ अदालत ने इस मामले में बंगाल सरकार की यह कहते हुए भी खिंचाई की कि इस केस में टीएमसी का एक नेता शामिल है। इसके बाद भी आपने कुछ नहीं किया। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा, ‘ये सभी मामले संदेशखाली से जुड़ी हैं। आपने आरोपी को गिरफ्तार करने समेत कोई भी ऐक्शन नहीं लिया।’ इसके अलावा अदालत ने 10 अप्रैल को दिए हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उच्च न्यायालय ने जो बातें कहीं, उसमें कुछ गलत नहीं था। इसके अलावा केस को लेकर अदालत की टिप्पणी से जांच पर कोई असर नहीं दिखेगा। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में ममता सरकार का पक्ष रखा। सिंघवी ने अदालत में कहा कि हाई कोर्ट यह कह सकता था कि ईडी के अफसरों पर हमले के मामले में सीबीआई जांच करे। लेकिन उसकी ओर से राशन घोटाला भी सीबीआई को सौंप देना गलत है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने राशन घोटाले की जांच कराई। इसके अलावा यौन उत्पीड़न और जमीन कब्जाने के मसले पर भी जांच की गई। इस मामले में कुल 42 चार्जशीट दाखिल की गई थी। इसके बाद भी आखिर क्यों केस सीबीआई को ट्रांसफर किया गया। उच्च न्यायालय ने इसकी कोई वजह भी नहीं बताई थी। आपको किसी को बचाने में क्यों दिलचस्पी है? SC का तीखा सवाल   इस पर बेंच ने कहा, ‘आखिर सरकार क्यों कुछ लोगों को बचाने में दिलचस्पी ले रही है।’ इसके अलावा अदालत ने यह भी पूछा कि आखिर मामले में शामिल लोगों को कब अरेस्ट किया गया था। अदालत ने यह जानकारी 29 अप्रैल को ही मांगी थी, जब आखिरी सुनवाई हुई थी। तब भी कोर्ट ने पूछा था कि आखिर ममता बनर्जी सरकार शाहजहां शेख को क्यों बचाना चाहती है, जो टीएमसी का नेता है और दबंग है। इस पर बंगाल सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने कहा कि राज्य सरकार के खिलाफ ऐसी टिप्पणियां गलत हैं क्योंकि उसने सभी संभव कदम उठाए हैं।  

ममता के राज्य में नहीं थम रही भाजपा महिला कार्यकर्ताओं को निर्वस्त्र करने और पीटने की घटना

कोलकाता पश्चिम बंगाल में महिला नेता के खिलाफ एक और हिंसा की शर्मनाक घटना सामने आई है। बुधवार को पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के जगतदल में एक भाजपा महिला कार्यकर्ता को कथित तौर पर निर्वस्त्र कर धारदार हथियार से हमला किया गया। इस दौरान वह सिर में चोट लगने के कारण बुरी तरह घायल हो गई। घायल अवस्था में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसने मीडिया को इस घटना के बारे में विस्तार से बताया है। भाजपा की महिला नेता ने बताया कि जब वह पानी लेने गई थी, तब तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उस पर हमला किया। भाजपा नेता ने तृणमूल पर 4 जून को लोकसभा चुनाव में रिजल्ट सामने आने के बाद क्षेत्र में उपद्रव मचाने और भाजपा कार्यकर्ताओं को धमकाने का आरोप लगाया। बैरकपुर के तृणमूल नेता सोमनाथ श्याम ने कहा कि यह घटना राजनीतिक नहीं थी। टीएमसी नेता ने कहा, “यह मामला ईएसआई स्लम क्षेत्र का है। मुस्लिम महिलाओं के बीच पानी को लेकर विवाद शुरू हुआ। इसका किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं है। आपको बता दें कि हाल ही में पश्चिम बंगाल के कूचबिहार में चुनाव के बाद हुई हिंसा की घटना के लिए विपक्ष के द्वारा सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को दोषी ठहराया गया था। अल्पसंख्यक समुदाय की एक महिला को भाजपा से लगाव रखने के कारण कूचबिहार के माथाभांगा क्षेत्र में कथित तौर पर निर्वस्त्र कर बेरहमी से पीटा गया था। इसके बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने कूचबिहार का दौरा किया और महिला से मुलाकात की थी। बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने भी उनसे मुलाकात की थी। बंगाल पुलिस ने उनका बयान दर्ज कर लिया है। इस बीच उत्तरी दिनाजपुर जिले के चोपड़ा में कंगारू कोर्ट में एक जोड़े को कोड़े मारने के मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।    

पश्चिम बंगाल सियासत में तड़का CM बनर्जी पहुंची बीजेपी सांसद अनंत राय महाराज से मिलने

कोलकाता पश्चिम बंगाल की राजनीति में मंगलवार को एक ट्विस्ट देखने को मिला. सूबे की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद से मिलने उनके आवास पहुंच गईं. बीजेपी के राज्यसभा सांसद अनंत राय महाराज ने अपने आवास पर सीएम ममता का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया. ममता बनर्जी और बीजेपी सांसद की मुलाकात को लेकर अधिक जानकारी सामने नहीं आई है लेकिन इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है. अनंत राय महाराज उत्तर बंगाल की राजनीति का बड़ा चेहरा हैं जहां बीजेपी ने पिछले कुछ वर्षों में तेजी से पैर जमाए हैं. अनंत उत्तर बंगाल के कूचबिहार को पृथक ग्रेटर कूच बिहार राज्य बनाने की मांग करने वाले संगठन ग्रेटर कूचबिहार पीपुल्स एसोसिएशन (जीसीपीए) के अध्यक्ष हैं. खुद को ग्रेटर कूचबिहार का महाराज बताने वाले अनंत को बीजेपी ने एक साल पहले ही पश्चिम बंगाल से राज्यसभा भेजा था. अनंत पश्चिम बंगाल से बीजेपी के टिकट पर राज्यसभा पहुंचने वाले पहले नेता भी हैं. अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उनसे आवास पहुंचकर मुलाकात करने के बाद कयास भी लगाए जाने लगे हैं. तर्क दिए जा रहे हैं कि पिछले साल गृह मंत्री अमित शाह ने अनंत के आवास पहुंचकर उनसे मुलाकात की थी और इसके बाद बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया. अब सीएम ममता उनसे मिलने उनके आवास पहुंची हैं तो आगे क्या होगा? नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली पिछली सरकार में राज्यमंत्री रहे निशिथ प्रमाणिक भी अनंत के करीबी माने जाते हैं. निशिथ प्रमाणिक भी उसी राजबंशी समुदाय से आते हैं जिससे अनंत. राजबंशी कितने प्रभावशाली पश्चिम बंगाल में अनुसूचित जाति की कुल आबादी में करीब 18 फीसदी से अधिक राजबंशी समुदाय की भागीदारी है. राजबंशी समुदाय अनुसूचित जाति वर्ग का सबसे बड़ा और प्रभावशाली समुदाय है. राजनीतिक लिहाज से देखें तो उत्तर बंगाल के पांच जिलों के 20 विधानसभा क्षेत्रों में राजबंशी समुदाय के मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं. इन पांच जिलों में कूचबिहार के साथ ही अलीपुरद्वार भी शामिल है जहां 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी अच्छा प्रदर्शन किया था लेकिन 2024 के चुनाव में पार्टी कूचबिहार लोकसभा सीट हार गई.  

पश्चिम बंगाल सरकार राज्य के उद्योगों और विनिर्माण क्षेत्र से संबंधित प्रदर्शनी आयोजित करेगी

कोलकाता  पश्चिम बंगाल सरकार राज्य के उद्योगों और विनिर्माण क्षेत्र से संबंधित प्रदर्शनी आयोजित कर सकती है।एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कोलकाता के पास न्यू टाउन क्षेत्र स्थित ‘विश्व बांग्ला कन्वेंशन सेंटर’ में ‘शोकेस बंगाल’ नाम से 20 सितंबर से छह अक्टूबर तक प्रदर्शनी आयोजित किए जाने की संभावना है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में निर्णय लिया गया। अधिकारी ने बताया, ‘‘राज्य के उद्योगों और विनिर्माण क्षेत्र से संबंधित प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी।’’ उन्होंने कहा कि इसी प्रदर्शनी में ‘बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट’ (बीजीबीएस) के अगले सत्र की तिथि भी घोषित की जा सकती है। राज्य ने पिछले वर्ष नवबंर में ‘बीजीबीएस- 2023’ के सातवें संस्करण का आयोजन किया था, जिसमें कई देशों के नेताओं,प्रमुख हस्तियों तथा गणमान्य लोगों ने भाग लिया था। बीजीबीएस हर दो साल में आयोजित की जाती है। बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट अगले साल  राज्य में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए बंगाल सरकार की ओर से हर वर्ष बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट (बीजीबीएस) का आयोजन किया जाता है, लेकिन इस साल बीजीबीएस का आयोजन नहीं किया जायेगा. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने  राज्य सचिवालय के पास बने नबान्न सभाघर में उद्योगपतियों व औद्योगिक चेंबर के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में यह जानकारी दी. राज्य सचिवालय के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बैठक के दौरान कहा गया है कि करीब तीन महीने तक चले लोकसभा चुनाव का असर बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट की तैयारियाें पर भी पड़ा है. चुनाव की वजह से वाणिज्यिक सम्मेलन की तैयारी बाधित हुई है, इसलिए राज्य सरकार की ओर से इस वर्ष बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट का आयोजन नहीं किया जायेगा. वर्ष 2025 की शुरुआत में बीजीबीएस का आयोजन होगा. जानकारी के अनुसार,बैठक में राज्य के विभिन्न औद्योगिक विकास निगम के अधिकारी, उद्योगपति और औद्योगिक चेंबर के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. बैठक में उद्योगपतियों में हर्ष नेवटिया, संजय बुधिया, सत्यम रॉय चौधरी, सीके धानुका सहित अन्य उपस्थित रहे. उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने पिछले साल नवंबर में वाणिज्यिक सम्मेलन का आयोजन किया था. राज्य सरकार ने प्राथमिक रूप से यह निर्णय लिया था कि इस साल नवंबर में बीजीबीएस का आयोजन किया जायेगा. लेकिन अन्य सरकारी परियोजनाओं की तरह वाणिज्यिक सम्मेलन की तैयारियों पर चुनाव का असर पड़ा है. इसी वजह से इस साल की बजाय अगले वर्ष की शुरूआत में बीजीबीएस आयोजित करने की योजना बनायी गयी है. तय किया गया है कि बीजीबीएस में अतिथियों को आमंत्रित करने के लिए सितंबर से देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी राज्य की निवेश संभावनाओं को उजागर करते हुए एक अभियान चलाया जायेगा और उद्योग के लिए डेस्टिनेशन बंगाल को बढ़ावा देने पर अधिक जोर दिया जायेगा. उद्योगों के लिए प्रोत्साहन योजना को फिर से शुरू करने का निर्देश: जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लोकसभा चुनाव के कारण उद्योगों के लिए राज्य सरकार की निलंबित विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं को फिर से शुरू करने का निर्देश दिया है. मालूम हो कि चुनावी आचार संहिता के कारण नये उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू की गयी कई प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ का वितरण बंद हो गया था, जिसे मुख्यमंत्री ने तत्काल शुरू करने का निर्देश दिया. साथ ही उद्योगपति राज्य में जो निवेश ला रहे हैं, उसका भी अधिक प्रचार-प्रसार करने की जरूरत है. उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने इससे पहले घोषणा की थी कि विश्व बंगाल व्यापार सम्मेलन के बाद से राज्य में कितना निवेश हुआ है, इस पर राज्य सरकार द्वारा श्वेत पत्र प्रकाशित किया जायेगा. बैठक के दौरान इस पर चर्चा की गयी और मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को अपना डेटा तैयार करने के लिए कहा है. मुख्यमंत्री ने अमित मित्रा को इस मामले पर रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिया.  

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