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यूनुस और सेना प्रमुख के बीच जुबानी जंग से बांग्लादेश का सियासी माहौल गर्म, यूनुस सत्ता में बने रहने की कोशिश में बनाई रणनीति

ढाका बांग्लादेश एक बार फिर नेतृत्व संकट से घिर गया है. ढाका की राजनीति संवेदनशील मोड़ पर आ खड़ी हुई है. देश के अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार और नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. मुहम्मद यूनुस अब खुद को बढ़ते दबावों के बीच घिरा पा रहे हैं. सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज़-ज़मान की दो टूक चेतावनी के बाद यूनुस इस्तीफा देने पर विचार कर रहे हैं और प्लान B की तैयारी में जुट गए हैं. कहा जा रहा है कि यूनुस अब सत्ता में बने रहने के लिए सड़कों पर ताकत दिखाने जा रहे हैं. वहीं, राजनीतिक गलियारों और सैन्य हलकों में उनकी मंशा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. पिछले साल बांग्लादेश में जनविरोध के बाद सत्ता में उलटफेर हुआ था और 84 साल के यूनुस के हाथों में सत्ता सौंपी गई थी. बांग्‍लादेश के आर्मी चीफ जनरल वकर-उज-जमान ने रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में कहा था कि मुहम्मद यूनुस अगले डेढ़ साल तक सत्ता में रहेंगे. इसी बीच चुनाव कराए जाएंगे और नई सरकार का गठन होगा.उन्होंने आगे कहा था, हम जल्द ही देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया शुरू करना चाहते हैं. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने आर्मी को मजिस्ट्रेट की पावर सौंपी है, जिसके बाद अंदेशा लगाया जा रहा था कि शायद अब सेना के हाथ में देश की सत्ता होगी और दोनों मिलकर सरकार चलाएंगे. सेना प्रमुख ने साफ किया था कि जब तक अंतरिम सरकार रहेगी, तब तक सेना उसके पीछ रहकर काम करेगी. यह तब तक चलेगा, जब तक कि यूनुस देश में चल रहे सुधारों को पूरा नहीं कर लेते हैं. आर्मी चीफ ने यह भी आश्वासन दिया था कि वे अंतरिम सरकार के साथ हमेशा खड़े रहेंगे, कैसी भी परिस्थिति हो. अब विवाद क्यों भड़का… दरअसल, सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज़-ज़मान ने यूनुस के सुधार एजेंडे को खारिज कर दिया है और दिसंबर 2025 तक चुनाव कराने का आह्वान किया. जनरल वाकर-उज़-ज़मान ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर कहा कि अंतरिम सरकार का काम सिर्फ चुनाव कराना है, नीतिगत निर्णय लेना नहीं. सैन्य मामलों में हस्तक्षेप, आंतरिक सुरक्षा में एकपक्षीय निर्णय और बाहरी शक्तियों के दबाव को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सेना को हर रणनीतिक और सुरक्षा नीति में विश्वसनीय साझेदार की तरह शामिल किया जाना चाहिए. यह बयान यूनुस की सत्ता को खुली चुनौती के रूप में देखा गया. ज़मान ने इस बात पर भी जोर दिया कि अंतरिम सरकार कोई भी ऐसा महत्वपूर्ण निर्णय ना ले, जिससे बांग्लादेश की स्थिरता और संप्रभुता पर असर पड़े. ऐसे मुद्दों को भविष्य में निर्वाचित सरकार पर छोड़ दिया जाए. बुधवार को सेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि अब और देरी नहीं चलेगी. सेना को नजरअंदाज कर रणनीतिक फैसले नहीं लिए जा सकते हैं. सेना प्रमुख ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि वे सैन्य अधिग्रहण के खिलाफ हैं. वे यूनुस से बस यही उम्मीद करते हैं कि वे स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव करवाएं ताकि सत्ता का सुचारू और शांतिपूर्ण हस्तांतरण निर्वाचित सरकार को हो सके, जिसके बाद सेना वापस अपने बैरक में जा सकती है. बुधवार को उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि सेना अब भीड़तंत्र और अराजकता, अंतरिम सरकार द्वारा सैन्य मामलों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप और बांग्लादेश की संप्रभुता और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण निर्णयों में सेना को दरकिनार करने के किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं करेगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में सैन्य नेतृत्व से सलाह ली जानी चाहिए और पीठ पीछे कुछ भी नहीं किया जाना चाहिए. यूनुस आर्मी चीफ के खिलाफ ही रच रहे साजिश, भारत के दुश्मनों के साथ सीक्रेट मीट…  बांग्लादेश में सियासी माहौल फिर से गर्म हो गया है. यूनुस और सेना प्रमुख के बीच जुबानी जंग चल रही है. ऐसे में यूनुस सेना प्रमुख को हटाना चाहते हैं. अंतरिम सरकार के प्रमुख और नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने भारत विरोधी दलों की एक अहम बैठक बुलाई है, लेकिन इस बैठक में क्या बात होगी, यह अभी रहस्य बना हुआ है. ढाका की सड़कों पर चर्चा है कि यूनुस अगले पांच साल तक सत्ता में बने रहना चाहते हैं. इसके लिए उनके समर्थक ‘मार्च फॉर यूनुस’ नाम से एक विशाल जनसभा की तैयारी कर रहे हैं. दूसरी तरफ, सेना प्रमुख की सख्त चेतावनी और राजनीतिक दलों की नाराजगी ने इस ड्रामे को और रोचक बना दिया है. मोहम्मद यूनुस अब सीक्रेट मीटिंग कर रहे हैं. यूनुस ने  बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें बुलाई हैं. बीएनपी के एक नेता ने बताया कि यूनुस के दफ्तर ने उन्हें इस बैठक के लिए आमंत्रित किया है. लेकिन, इन बैठकों का असली मकसद क्या है, यह कोई नहीं जानता. हालांकि उनके इस तरह के मीटिंग करने से माना जा रहा है मोहम्मद यूनुस सत्ता छोड़ने के मूड में नहीं हैं और वह सेना प्रमुख को ही विलेन बनाकर हटाना चाहते हैं. गुरुवार को यूनुस ने NCP नेता नाहिद इस्लाम से मुलाकत की थी. माना जा रहा है कि दोनों मिलकर सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान को हटाने की रणनीति बना रहे हैं. नाहिद वही भारत विरोधी नेता है, जिसने पिछले साल शेख हसीना की सरकार के खिलाफ छात्र आंदोलन को लीड किया था. नाहिद और यूनुस की मुलाकात के बाद ये अटकलें और तेज हो गई हैं. यूनुस पांच साल संभालेंगे सत्ता? यूनुस इस पूरी लड़ाई में अपनी चालें चल रहे हैं. एक तरह वह इस्तीफा देने की बात कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर अपने समर्थकें के जरिए प्रदर्शन करवा रहे हैं. यूनुस के समर्थकों ने ढाका के मशहूर शाहबाग चौराहे पर शनिवार को ‘मार्च फॉर यूनुस’ नाम से एक बड़ी रैली की घोषणा की है. शहर में पोस्टर लगाए जा रहे हैं और सोशल मीडिया पर ‘पांच साल तक यूनुस को सत्ता में रखो’ और ‘पहले सुधार, फिर चुनाव’ जैसे नारे ट्रेंड कर रहे हैं. समर्थकों का कहना है कि यूनुस को देश में सुधार लाने के लिए लंबा समय चाहिए. लेकिन इस रैली की टाइमिंग ने सबके कान खड़े कर दिए हैं. आर्मी चीफ की चेतावनी सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान ने साफ कहा है कि बिना चुनाव के सत्ता में बने रहना गैरकानूनी है. सेना ने यूनुस सरकार को दिसंबर … Read more

मोहम्मद यूनुस की सत्ता में बने रहने की चाल होगी फेल, बांग्लादेश आर्मी चीफ जनरल जमान ने दी खुली चेतावनी

ढाका बांग्लादेश तेजी से अराजकता की ओर बढ़ रहा है। शेख हसीना को हटाने के लिए जो कट्टरपंथी कभी एक साथ आए थे, अब उनमें ही सत्ता को पाने के लिए संघर्ष शुरू हो गया है। राजनीतिक अंतर्कलह, निष्क्रिय पुलिस और कट्टरपंथी इस्लामिस्टों के उदय के साथ देश बिखराव की ओर चल पड़ा है। इस एक अटकलें शुरू हो गई हैं कि क्या बांग्लादेश में सैन्य तख्तापलट हो कता है। इसी सप्ताह बांग्लादेश सेना प्रमुख ने देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता के लिए खतरे की चेतावनी दी है। बांग्लादेश में सेना के खिलाफ तेज होती आवाजों के बीच सेना प्रमुख वकार उज-जमान को कहना पड़ा कि उनकी कोई और इच्छा नहीं है। उन्होंने कहा, ‘मैं बस देश को सुरक्षित हाथों में देखा चाहता हूं। पिछले 7-8 महीनों में मैंने बहुत कुछ झेला है। मैं आपको पहले ही चेतावनी दे रहा हूं ताकि आप कल यह न कहें कि मैंने आपको नहीं बताया।’ चुनाव पर अल्टीमेटम आर्मी चीफ ने आगे कहा कि यदि आप अपने मतभेदों से आगे नहीं बढ़ सकते और एक दूसरे पर कीचड़ उछालना जारी रखते हैं, तो देश की स्वतंत्रता और अखंडता खतरे में पड़ जाएगी। उन्होंने कहा कि ‘मुझे लगा कि मेरा काम पूरा हो गया है, लेकिन इसे सुलझाने में मुझे ज्यादा समय लगेगा। उसके बाद मैं छुट्टी ले लूंगा।’ आर्मी चीफ ने इस बात पर भी जोर दिया कि दिसंबर तक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव होने चाहिए बांग्लादेश की संप्रभुता का दिखाया डर इस बीच सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान ने चेतावनी दी है कि अगर लोग अपने मतभेदों को भुला नहीं पाए या एक-दूसरे पर कीचड़ उछालना बंद नहीं कर पाए तो बांग्लादेश की संप्रभुता दांव पर लग जाएगी। ढाका के रावा क्लब में 2009 में पिलखाना में बीडीआर नरसंहार को याद करने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए सेना प्रमुख ने कहा, “अगर आप अपने मतभेदों को भुलाकर साथ मिलकर काम नहीं कर सकते, अगर आप कीचड़ उछालने और लड़ाई में शामिल होते हैं, तो इस देश और राष्ट्र की स्वतंत्रता और संप्रभुता खतरे में पड़ जाएगी।” बांग्लादेशी सेना ने संभाली देश की कानून-व्यवस्था जनरल जमान ने आगे कहा, “मैं आज आपको बता रहा हूं, अन्यथा आप कहते कि मैंने आपको आगाह नहीं किया।” इससे पहले बांग्लादेशी सेना प्रमुख ने कहा था कि जब तक चुनी हुई सरकार नहीं आ जाती, तब तक सेना ही बांग्लादेश की कानून-व्यवस्था को देखेगी। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की कानून-व्यवस्था को सेना देख रही है और यह तब तक जारी रहेगा, जब तक एक चुनी हुई सरकार नहीं आ जाती है। उनके इस बयान को मोहम्मद यूनुस की कुर्सी के लिए खतरे के तौर पर देखा गया था। आर्मी चीफ की सीधी चेतावनी सीएनएन-न्यूज18 ने शीर्ष खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया है कि वकार-उज-जमान को लग रहा है कि बांग्लादेश को बाहरी हाथों से नियंत्रित किया जा रहा है। सूत्र ने कहा, जनरल जमान ‘राजनीतिक नेतृत्व को चुनाव की आवश्यकता की ओर इशारा कर रहे हैं, अन्यथा सेना का नियंत्रण एक और विकल्प है।’ बांग्लादेश में एक्टिव है आईएसआई असलियत में शेख हसीना के जाने के बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई बांग्लादेश अपनी प्लानिंग में जुट गई है। आईएसआई के एजेंट समझे जाने वाली जमात-ए-इस्लामी के लोग बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में पैठ बनाए हुए हैं। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार तो खुलकर अपना पाकिस्तान प्रेम दिखा रहे हैं। अगस्त में पद संभालने के बाद से वे कई बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से मुलाकात कर चुके हैं। मोहम्मद यूनुस को सीधा संदेश इसके अलावा मोहम्मद यूनुस देश में आम चुनाव कराए जाने को लेकर हीलाहवाली कर रहे हैं। यूनुस प्रशासन सुधारों का हवाला देकर चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं कर रहा है। जबकि बांग्लादेश सेना प्रमुख ने शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद 18 महीने के अंदर चुनाव कराने की बात कही थी। ऐसे में बांग्लादेश सेना प्रमुख का ताजा बयान मोहम्मद यूनुस के लिए सीधी चेतावनी है कि सत्ता में बने रहने के लिए अगर चुनाव टाले गए तो उन्हें नई स्थिति के लिए तैयार रहना होगा और वह होगी देश पर सैन्य शासन। देश में सैन्य विद्रोह की जताई थी आशंका सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान ने कुछ महीने पहले देश में सैन्य विद्रोह की आशंका भी जताई थी। उन्होंने ढाका के रावा क्लब में 2009 के क्रूर पिलखाना नरसंहार के शहीदों की याद में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था कि अगर हमें कोई समस्या या मुद्दा आता है, तो हमें उसे बातचीत के ज़रिए सुलझाना चाहिए। बिना किसी मकसद के इधर-उधर भागने से सिर्फ नुकसान ही होगा। 25 फरवरी 2009 को बांग्लादेश में खूनी सैन्य विद्रोह हुआ था, जिसे बांग्लादेश राइफल विद्रोह या पिलखाना नरसंहार के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन ढाका में बांग्लादेश राइफल्स (BDR) की एक यूनिट ने विद्रोह किया था।

मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार अपराधियों पर नकेल कसने में लाचार, डेढ़ माह में 35 मर्डर

ढाका पड़ोसी देश बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। हत्या, लूट, रंगदारी और अपहरण के मामलों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। आलम यह है कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार अपराधियों पर नकेल कसने में लाचार दिख रही है। यही वजह है कि पिछले डेढ़ महीने में 35 लोगों की हत्या हो चुकी है। आधिकारिक आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं और अपराधिक गतिविधियों की चिंताजनक प्रवृत्ति दिखा रहे हैं। हाल की आपराधिक घटनाओं से लोगों में भारी गुस्सा और रोष है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि 1 जनवरी से 19 फरवरी, 2025 के बीच सिर्फ राजधानी ढाका में 35 हत्याएं हुईं हैं। इसके अलावा लूटपाट, डकैती और अपहरण के भी कई मामले सामने आए हैं। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, बीती रात यानी मंगलवार की रात भी जतराबाड़ी के सुती खालपार इलाके में हथियारबंद लुटेरों ने एक युवक को गोली मार दी और उसके सामान लूट लिए। अपराध में इस वृद्धि ने पुलिस को सुरक्षा बढ़ाने और अधिक सतर्क रहने के लिए मजबूर किया है। दूसरी तरफ आम आदमी दहशत में है। देश भर में बढ़ते अपराध पर यूनुस सरकार बेपरवाह नजर आ रही है। सरकार की तरफ से विरोधाभासी बयान दिए जा रहे हैं। अंतरिम सरकार में गृह मामलों के सलाहकार मोइनुद्दीन अब्दुल्ला ने इस संकट को कमतर आंकते हुए कहा कि कानून व्यवस्था की स्थिति संतोषजनक है। उनके बयान ने लोगों के मन में संदेह और बढ़ा दिया है क्योंकि लोग बढ़ती असुरक्षा से जूझ रहे हैं। दूसरी तरफ कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाली बांग्लादेश पुलिस ने स्वीकार किया है कि राजधानी ढाका समेत देशभर में आपराधिक गतिविधियों में तेजी से इजाफा हुआ है और लोग इस वजह से भयभीत हैं। अधिकारी ने कई रिपोर्ट में दिनदहाड़े क्रूर हत्याओं, अपहरण और डकैती के चौंकाने वाले मामलों को उजागर किया है। हालांकि, इन अपराधों की गंभीरता के बावजूद, यूनुस सरकार दावा करती रहती है कि स्थिति नियंत्रण में है। यही वजह है कि गृह मामलों के सलाहकार के इस्तीफे की मांग अब जोर पकड़ रही है। ढाका में हाल ही में छात्रों के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों में नागरिकों ने भी बड़े पैमाने पर शिरकत की थी और गृह मामलों के सलाहकार मोइनुद्दीन अब्दुल्ला का इस्तीफा मांगा था। आधिकारिक बयानों और जमीनी हकीकतों के बीच बढ़ते अंतर ने बांग्लादेश के संस्थाओं में विश्वास को कमजोर कर दिया है। इससे खफा बड़े पैमाने पर लोग विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। लिहाजा, न्यायपालिका, कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ और राजनीतिक वर्ग सभी को कठिन चुनौतियो का सामना करना पड़ रहा है।

बांग्लादेश : मोहम्मद युनुस ने कहा है 2025 के आखिरी या फिर 2026 की शुरुआत में आम चुनाव कराए जा सकते

ढाका बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के मुखिया नोबल विजेता मोहम्मद युनुस ने कहा है कि 2025 के आखिरी या फिर 2026 की शुरुआत में आम चुनाव कराए जा सकते हैं। तब तक अंतरिम सरकार ही देश की सरकार चलाएगी। शेख हसीना को हटाने के बाद मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार बनाया गया है। वहीं बांग्लादेश में कट्टरपंथियों के हौसले बुलंद हैं और वे लगातार अल्पसंख्यकों को टारगेट कर रहे हैं। यूनुस ने सोमवार को एक टीवी चैनल को बताया कि चुनाव आखिरी 2025 या फिर 2026 की शुरुआत में ही होंगे। बांग्लादेश में युनुस पर आम चुनाव को लेकर अब दबाव बढ़ रहा है। वहीं तख्तापलट के बाद शेख हसीना भारत आ गई थीं। युनुस ने कहा कि चुनाव कराने से पहले बहुत सारे सुधार करने की जरूरत है। वोटर लिस्ट में सुधार केसाथ ही चुनावी प्रक्रिया को भी सुधारना है। इससे पहले 7 जनवरी 2024 को ही बांग्लादेश में आम चुनाव करवाए गए थे। लागातर चौथी बार शेख हसीना की आवामी लीग ने जीत दर्ज की थी। विजय दिवस के मौके पर मोहम्मद युनुसन ने चुनाव को लेकर प्लान सामने रखा है। वहीं शेख हसीना ने रविवार को देश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर एक और तीखा हमला किया तथा उन पर एक ऐसे ‘अलोकतांत्रिक समू’’ का नेतृत्व करने का आरोप लगाया, जिसकी लोगों के प्रति कोई जवाबदेही नहीं है। ‘विजय दिवस’ की पूर्व संध्या पर एक बयान में हसीना ने यूनुस को ‘फासीवादी’ कहा और आरोप लगाया कि उनके नेतृत्व वाली सरकार का मुख्य उद्देश्य मुक्ति संग्राम और मुक्ति समर्थक ताकतों की भावना को दबाना है। बांग्लादेश 16 दिसंबर को विजय दिवस के रूप में मनाता है। 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सेना के तत्कालीन प्रमुख जनरल अमीर अब्दुल्ला खान नियाजी ने 93,000 सैनिकों के साथ 13 दिन के युद्ध के बाद भारतीय सेना और ‘मुक्ति वाहिनी’ की संयुक्त सेना के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके बाद पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बन गया। हसीना ने अपने बयान में कहा कि ‘राष्ट्र विरोधी समूहों’ ने असंवैधानिक तरीके से सत्ता पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने कहा, ‘फासीवादी यूनुस के नेतृत्व वाले इस अलोकतांत्रिक समूह की जनता के प्रति कोई जवाबदेही नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘वे सत्ता पर कब्जा कर रहे हैं और सभी जन कल्याण कार्यों में बाधा डाल रहे हैं।’ हसीना ने यूनुस सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि बांग्लादेश के लोग बढ़ती कीमतों के बोझ तले दबे हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘चूंकि यह सरकार लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई नहीं है, इसलिए लोगों के प्रति उनकी कोई जवाबदेही नहीं है। उनका मुख्य उद्देश्य मुक्ति संग्राम और मुक्ति समर्थक ताकतों की भावना और उनकी आवाज को दबाना है।’

धर्मगुरुओं ने मोहम्मद यूनुस से कहा कि हर नागरिक को जमानत का अधिकार है

ढाका  बांग्लादेश में अल्पसंख्यक धार्मिक समूहों के नेताओं ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस से कहा कि हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की जमानत याचिका पर विचार किया जाना चाहिए। राजद्रोह के आरोपों का सामना कर रहे चिन्मय कृष्ण दास की जमानत की सुनवाई 2 जनवरी को होनी है। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों से जुड़ी खबरों ने मोहम्मद यूनुस की सरकार की पोल खोल दी है। मोहम्मद युनूस की सरकार नहीं चाहती की हमलों की खबरें दुनिया के सामने आएं। इसके अलावा वह ऐसा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि जैसे देश में अल्पसंख्यकों पर हमले हो रहे हैं और उन्हें इसके बारे में पता नहीं। मोहम्मद यूनुस ने गुरुवार को अल्पसंख्यकों पर हमलों की सटीक जानकारी लेने और अपराधियों को न्याय के कटघरे में खड़ा करने के लिए धार्मिक नेताओं से सहयोग मांगा। यूनुस ने दावा किया कि वास्तविकता और विदेशी मीडिया में आने वाली खबरों में अंतर है। बांग्लादेश की सरकारी न्यूज एजेंसी BSS के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘हम सटीक जानकारी जानना चाहते हैं और इसे प्राप्त करने के लिए एक प्रक्रिया स्थापित करना चाहते हैं।’ ‘जमानत हर नागरिक का अधिकार’ सेंट मैरी कैथेड्रल के फादर अल्बर्ट रोसारियो ने कहा, ‘जमानत प्राप्त करना हर किसी का अधिकार है।’ प्रसिद्ध बांग्लादेशी लेखक फरहाद मजहर ने भी दास के जमानत के अधिकार पर जोर दिया। बैठक में बांग्लादेश बौद्ध संघ के मुख्य सलाहकार सुकोमल बरुआ ने शांति और एकता के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने का प्रस्ताव रखा। रमना हरिचंद मंदिर के सहायक सचिव अविनाश मित्रा ने कहा कि हिंदू समुदाय ने अपनी शिकायतें रखीं और यूनुस ने धैर्यपूर्वक इन्हें सुना। शेख हसीना के भाषणों पर लगी रोक बांग्लादेश की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के किसी भी भाषण को प्रसारित पर प्रतिबंध लगा दिया। पूर्व प्रधानमंत्री हसीना को अगस्त में बांग्लादेश में हुए भारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान सत्ता से बेदखल किया गया था और इसके बाद वह भारत चली गई थीं। हसीना के भाषणों के प्रसारण और प्रकाशन संबंधी मामलों की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधिकरण का यह फैसला पूर्व प्रधानमंत्री की ओर से न्यूयॉर्क में अपनी अवामी लीग पार्टी के समर्थकों को ‘डिजिटल’ माध्यम से पहली बार सार्वजनिक रूप से संबोधित किए जाने के एक दिन बाद आया है। अपने संबोधन में उन्होंने बांग्लादेश के अंतरिम नेता नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस पर नरसंहार करने और अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं की रक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया।

मोहम्मद यूनुस देश में अल्पसंख्यकों पर हमलों की साजिश रचने में शामिल है, शेख हसीना ने लगाया आरोप

न्यूयॉर्क बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मंगलवार को अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस पर ‘सामूहिक हत्याओं का मास्टरमाइंड’ होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यूनुस देश में अल्पसंख्यकों पर हमलों की साजिश रचने में शामिल है। न्यूयॉर्क में आवामी लीग के एक कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित करते हुए हसीना ने यूनुस पर बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों, इस्कॉन स्थलों और अल्पसंख्यकों के अन्य धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। पूर्व पीएम ने कहा, “आज मुझ पर सामूहिक हत्याओं का आरोप लगाया गया है। वास्तव में, यह मुहम्मद यूनुस ही हैं जो अपने छात्र समन्वयकों के साथ मिलकर एक सोची-समझी योजना के तहत सामूहिक हत्याओं के लिए जिम्मेदार हैं। वे ही मास्टरमाइंड हैं।” बांग्लादेश अवामी लीग (एएल) की अध्यक्ष और ‘राष्ट्रपिता’ बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की बेटी ने कहा, “शिक्षकों और पुलिस पर हमला किया जा रहा है और उनकी हत्या की जा रही है। हिंदुओं, ईसाइयों और बौद्धों पर हमला किया जा रहा है। कई चर्चों और मंदिरों को निशाना बनाया जा रहा है। अल्पसंख्यकों पर हमला क्यों किया जा रहा है?” बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर अल्पसंख्कों के साथ भेदभाव बरतने, उन्हें, उनके घरों और धार्मिक स्थलों को पर्याप्त सुरक्षा न देने के आरोप लगते रहे हैं। पुजारी चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर इन आरोपों की तरफ दुनिया का ध्यान गया है। कृष्ण दास को ढाका के हजरत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उस समय गिरफ्तार किया गया जब वह एक रैली में भाग लेने चटगांव जा रहे थे। पिछले हफ्ते अदालत ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया और जेल भेज दिया। शेख हसीना ने इस गिरफ्तारी की निंदा और पुजारी की तुरंत रिहाई की मांग की। बता दें इस साल 5 अगस्त को शेख हसीना को सत्ता छोड़ने और देश से भागने पर मजबूर होना पड़ा था। इसके बाद देश में अल्संख्यक वर्गों पर लगातार हमलों की खबरें आ रही है। अल्पसंख्यक धार्मिक स्थलों को भी निशाना बनाया गया है।

बांग्लादेश में मुक्ति संग्राम के नायक मुजीबुर रहमान से जुड़े दिनों पर होने वाली छुट्टियों को रद्द कर दिया

ढाका बांग्लादेश में अगस्त महीने में तख्तापलट हो गया था। इस दौरान खूनखराब हुआ तो तत्कालीन पीएम शेख हसीना ने देश छोड़ दिया था और भारत आ गई थीं। तब से वह यहीं पर निर्वासित जिंदगी जी रही हैं। उनकी सत्ता से बेदखली के बाद नोबेल विजेता अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस ने कमान संभाल रखी है। वह भले ही अर्थशास्त्री हैं और दुनिया भर में उनका नाम है, लेकिन वह बांग्लादेश को पाकिस्तान के एजेंडे पर आगे बढ़ाते दिख रहे हैं। यही वजह है कि अब बांग्लादेश में मुक्ति संग्राम और उसके नायक मुजीबुर रहमान से जुड़े दिनों पर होने वाली छुट्टियों को रद्द कर दिया गया है। माना जा रहा है कि इस तरह बांग्लादेश की सरकार का वैचारिक झुकाव पाकिस्तान की ओर बढ़ रहा है। वही पाकिस्तान जिससे अलग होकर बांग्लादेश का गठन हुआ था। बांग्ला भाषी लोगों पर अत्याचार, भेदभाव के आरोप तत्कालीन पाकिस्तान सरकार पर लगे थे। इसी के विरोध में आंदोलन भड़का था, जिसे बांग्ला मुक्त संग्राम का नाम मिला था। अंत में 16 दिसंबर 1971 को बांग्लादेश अस्तित्व में आया था। इसमें भारत ने भी मदद की थी। मुजीबुर रहमान को उस आंदोलन का नायक माना जाता है। यही वजह थी कि उनकी जयंती और पुण्यतिथि पर बांग्लादेश में छुट्टी होती रही है। अब बांग्लादेश सरकार ने इन छुट्टियों को रद्द कर दिया है। कुल 8 राष्ट्रीय अवकाशों को मोहम्मद यूनुस सरकार ने रद्द कर दिया है। इनमें 7 मार्च और 15 अगस्त शामिल हैं, जिन्हें मुक्त संग्राम से जोड़ा जाता है। इन छुट्टियों को रद्द करने का फैसला हाल ही में हुई कैबिनेट मीटिंग में लिया गया था। इस संबंध में जल्दी ही नोटिफिकेशन भी जारी किया जाएगा। मोहम्मद यूनुस सरकार के इस फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है। खासतौर पर अवामी लीग ने इसकी निंदा की है और कहा कि यह सरकार बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के इतिहास को ही मिटा देना चाहती है। यह अच्छी बात नहीं है।

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