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नई आबकारी नीति पेश, मोहन सरकार का 21 हजार करोड़ रुपये का शराब राजस्व लक्ष्य

भोपाल   मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार कमाई और राजस्व बढ़ाने के लिए काम कर रही है। इसके लिए सरकार ने प्लान बनाने शुरु कर दिया है और इस दिशा में काम भी शुरु कर दिया है। दरअसल मोहन सरकार शराब से राजस्व हासिल करने की सोच रही है। जानकारी के मुताबिक सरकार शराब के जरिए 21 हजार करोड़ राजस्व हासिल करने का लक्ष्य एकत्र करने की योजना बना रही है। नई नीति में 19,000 से 21,000 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का लक्ष्य मध्य प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई आबकारी नीति का मसौदा तैयार किया है, जिसमें शराब से लगभग 19,000 से 21,000 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का लक्ष्य है। नई नीति में अवैध शराब की बिक्री पर अंकुश लगाने पर भी फोकस है। जिसके चलते दुकानों की नीलामी 20% अधिक दर पर की जा सकती है, इससे शराब महंगी हो सकती है। दरअसल  सरकार के आबकारी विभाग ने आबकारी नीति 2026-27 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। शासन की ओर से गठित तीन सदस्यीय मंत्रिमंडल समिति ने कैबिनेट की बैठक के बाद मंत्रालय में नई आबकारी नीति के ड्राफ्ट पर चर्चा की है। इस बैठक में डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा, स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ने शिरकत की। नई नीति में शराब दुकानों की बिक्री से राजस्व का लक्ष्य बढ़ाकर 21 हजार  करोड़ रुपये करने पर केंद्रित किया गया है। मध्यप्रदेश में बहुत जल्द ही नई आबकारी नीति आने वाली है जिसमें बहुत सारे बदलाव देखने को मिल सकते हैं। दरअसल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इशारा किया है कि अप्रैल महीने में मध्य प्रदेश में नई आबकारी नीति लागू होगी। आबकारी नीति 2025- 26 में कई शहरों में शराब की बिक्री प्रतिबंधित कर दी जाएगी। वहीं, कुछ और बड़े फैसले लिए जाएंगे। कब तक मिल सकती है नई नीति को मंजूरी मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग की एक बड़ी अधिकारी ने नवभारत टाइम्स डॉट कॉम को बताया कि फरवरी महीने की आखिरी में या मार्च की शुरुआत में कैबिनेट नई शराब नीति के प्रस्ताव को मंजूरी दे सकती है। इसके तहत सबसे बड़ी शुरुआत मध्य प्रदेश की आध्यात्मिक और धार्मिक राजधानी उज्जैन से होगी। यहां की करीब 20 दुकान शराब की दुकान बंद कर दी जाएंगी। उज्जैन समेत 16 धार्मिक शहरों में होगी शराबबंदी उज्जैन के अलावा मध्य प्रदेश के करीब 15 शहरों में शराब की बिक्री बंद कर दी जाएगी। यह प्रावधान आबकारी विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए नई नीति के ड्राफ्ट में किया है। यह ड्राफ्ट मंत्री परिषद की समिति को भेजा गया था,जिस पर सरकार ने चर्चा की है। मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने इशारों में है बात बताई है कि जहां से है कई शहरों में शराबबंदी की जाएगी, वहां कुछ बड़े शहरों में मिनी बार के विकल्प पर मंथन किया जा रहा है। यह मिनी बार की तरह होंगे। क्यों की जा रही है शराबंदी मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार चाहती है कि शराब की बिक्री को हतोत्साहित किया जाए ताकि नागरिक उसके दुष्प्रभाव से बच सकें। वहीं, नई नीति में 25 फीसदी पुरानी शराब की दुकानों के ठेके करीब 20% बढ़ोतरी के साथ रिन्यू किए जा सकते हैं। हालांकि आबकारी विभाग ने कुछ जगहों पर दुकान बंद करने तो कुछ जगहों पर नई दुकान शुरू करने का भी प्रावधान बनाया है। लेकिन कुल मिलाकर सरकार प्रदेश की अधिकांश शहरों में शराब की दुकान बंद करके शराब की बिक्री को हतोत्साहित करने की ओर बढ़ रही है। शराबबंदी को लेकर क्या बोले थे सीएम आपको बता दे कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने उज्जैन में बयान देकर कहा है कि सरकार धार्मिक नगरों में शराब बंदी को लेकर आगे बढ़ रही है। नई वित्तीय वर्ष में इस पर अमल किया जा सकता है। चित्रकूट, उज्जैन, ओंकारेश्वर, अमरकंटक जैसे कई शहरों में शराब की दुकान बंद कर दी जाएगी। कई शहरों की शराब दुकान हटाकर उन्हें शहर की सीमा से दूर स्थापित किया जाएगा। नई नीति में अवैध शराब निर्माण, अवैध परिवहन को रोकने के लिए कड़े प्रावधान जानकारी के मुताबिक ज्यादा राजस्व प्राप्त करने के लिए नई नीति में शराब के अवैध निर्माण के साथ ही अवैध परिवहन को रोकने के लिए कड़े बताए जा रहे हैं। सबसे पहले नवीनीकरण के जरिए दुकानें आवंटित होंगी। फिर लॉटरी के जरिए और इसके बाद ई-टेंडर के माध्यम से शराब दुकानों का ठेका दिया जाएगा। आबकारी नीति ड्राफ्ट में जरूरी संशोधन के बाद सीएम मोहन यादव के समक्ष पेश किया जाएगा। जानकारी के मुताबिक नई आबकारी नीति में मप्र आबकारी अधिनियम-1915 में संशोधन का प्रावधान किया गया है। इसके अनुसार अधिनियम की वो चीजें खत्म कर दी जाएंगी जो अब अव्यावहारिक हैं और न ही राजस्व प्राप्त नहीं हो रहा है। अगर  दुकान नहीं बिकती है तो ई टेंडर के माध्यम से होगी नीलामी जानकारी के मुताबिक नई आबकारी नीति में न कोई शराब दुकान बंद करने का प्रस्ताव है और न ही नई शराब दुकान खोला जाना प्रस्तावित है।  मप्र में शराब दुकानों की कुल संख्या 3,558 है। वहीं प्रदेश में  जहरीली शराब की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त प्रावधान बताए जा रहे हैं। इसके साथ ही  नई आबकारी नीति में शॉपिंग मॉल में महंगी शराब के काउंटर खोले जाने की जानकारी भी है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय शोधार्थी समागम (नेशनल रिसर्चर्स मीट) में की सहभागिता

शोध ऐसा हो, जो बदल दें सबकी सोच: मुख्यमंत्री डॉ. यादव भारतीय संस्कृति में एकल शोध नहीं, समग्र कल्याण आधारित है शोध की परंपरा दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के रिसर्च फेलोशिप के पोस्टर और वेबसाइट का हुआ विमोचन संस्थान द्वारा प्रकाशित 7 पुस्तकों का किया गया विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय शोधार्थी समागम (नेशनल रिसर्चर्स मीट) में की सहभागिता भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि शोध अकादमिक गतिविधि मात्र नहीं, यह समाज और राष्ट्र की दिशा बदलने वाली शक्ति है। कोई भी शोध इतना उच्च कोटि का होना चाहिए जो हम सबकी सोच को एक नई दृष्टि, नई दिशा भी दे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे देश के विकास के लिए अपनी जिज्ञासा और रुचि के अनुसंधान क्षेत्रों में निर्भीक होकर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि जैसे आवश्यकता आविष्कार की जननी है, वैसे ही शोध विज्ञान और सभी वैज्ञानिक पद्धतियों का जनक है। मानवीय प्रज्ञा में जब वैज्ञानिक ज्ञान का समावेश हो जाता है, तब वह ‘प्रज्ञान’ का रूप ले लेती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् के विज्ञान भवन में  दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय शोधार्थी समागम (नेशनल रिसर्चर्स मीट) 2026 को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विज्ञान के विकास में ही देश का समग्र विकास निहित है। मध्यप्रदेश को शोध और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शोध समाज के विकास का आधार है और इसे आधुनिक, परिष्कृत तथा परिमार्जित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शोधार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे परंपरागत धारणाओं तक सीमित न रहें, बल्कि नवीन विचारों और वैज्ञानिक दृष्टि के साथ ऐसे शोध प्रस्तुत करें, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शोध सिर्फ़ एक शैक्षणिक आवश्यकता नहीं, सामाजिक परिवर्तन और विकास का सशक्त माध्यम भी है। दुनिया के ज्ञान पर पश्चिम का प्रभाव पड़ा है। भारतीय संस्कृति भी इससे प्रभावित हुई। हमारी संस्कृति में एकल शोध की परंपरा कभी नहीं रही। शोध समाज आधारित होना चाहिए, जिसमें राष्ट्र के कल्याण की बात कही जाए। दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान राष्ट्रीय शोधार्थी समागम के माध्यम से देश के शोधार्थियों को नई दिशा प्रदान कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने “Mahakal: The master of time” वेबसाइट का शुभारंभ, महाकाल ब्रोशर सहित मैपकास्ट द्वारा आयोजित होने वाले “41वें मध्यप्रदेश युवा वैज्ञानिक सम्मेलन एवं विज्ञान उत्सव” के पोस्टर का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान द्वारा अनुसंधान परक लेखन पर आधारित सात पुस्तकों का भी विमोचन भी किया। राष्ट्रीय शोधार्थी समागम में देशभर से आए शोधार्थियों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों की सहभागिता रही। आगामी 14 फरवरी तक चलने वाले इस समागम में शोध, विज्ञान और नवाचार के विविध आयामों पर विमर्श होगा। पूज्य आचार्य  मिथलेशनन्दिनीशरण महाराज ने कहा कि मध्यप्रदेश ने महाकाल की प्रतिष्ठा से विश्व को अवगत कराया है। हम दुनिया को सर्वस्व दे रहे हैं, क्योंकि हमारे पास महाकाल हैं। शोधार्थी एक प्रकार से बोधार्थी भी हैं, जो शोध हमें बोध तक न ले जाए, वो व्यर्थ है। मनुष्य का ज्ञान चिंतन आधारित है, न कि डाटा आधारित। डाटा का विश्लेषण करना तो मशीनों का काम है। हम पश्चिमी देशों से क्यों डरते हैं। पश्चिम की केवल आलोचना करने से कुछ नहीं होने वाला। हमें समग्र रूप से सभी दिशाओं में सोचते हुए शोध करना है। हमारे शोध को भारतीय संस्कृति और चरित्र मूलक होना चाहिए, प्रतिक्रिया पराणय न हो। कोई भी नया विचार नवाचार नहीं होता है। परंपराओं को अंगीकार करते हुए नया काम करना ही नवाचार है। वरिष्ठ लेखक एवं चिंतक  सुरेश सोनी ने बीज वक्तव्य में कहा कि भारत के भौगोलिक स्वरूप में वेद आधारित सांस्कृतिक परिदृश्य नजर आता है। भारत के पुनरोत्थान के लिए पं. दीनदयाल उपाध्याय ने कहा था कि इसमें विदेशी मूल्यों का प्रकटीकरण नहीं होना चाहिए। भारत में पिछले 150 से 200 सालों में यूरोप आधारित अकादमिक शिक्षा व्यवस्थाएं लागू की गईं। अब हमारे शोधार्थी कला, संस्कृति, न्याय, अर्थव्यवस्था जैसे अन्य विषयों पर भारतीय शिक्षा पद्धति आधारित शोध पर कार्य करें। इसमें भारतीय समग्रता को भी ध्यान में रखा जाए। अभी हमारी चिकित्सा पद्धति भौतिक है। आयुर्वेद शास्त्र में महर्षि चरक कहते हैं कि किसी पदार्थ के 5 स्तर- स्थूल, स्वरूप, सूक्ष्म, अवयव और अर्थत्व होते हैं। भारतीय दृष्टि के आधार पर हमें अध्ययन करना है और पूर्व की व्यवस्थाओं को वर्तमान मे कैसे नवाचारों के साथ उसे उपयोग करें। शोध करते समय इसी पर ध्यान देना है। भारतीय समाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष और भगवान बिरसा मुंडा जनजातीय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. मधुकर एस पड़वी ने कहा कि भारत के पुनरोत्थान के लिए हमारी सभ्यता और ज्ञान की पुन: प्रतिष्ठा करने की आवश्यकता है। हम अपने शोध कार्यों में किसी दूसरे देश की दृष्टि का अनुसरण न करें और स्वदेशी दृष्टि को अपनाएंगे। अनुसंधान व्यक्तिगत न होकर सहयोगात्मक होना चाहिए। उच्च शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इंदर सिंह परमार ने कहा कि दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान ने इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय शोधार्थी समागम में देशभर के शोधार्थी शामिल हुए हैं। यह आयोजन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भारत केंद्रित परंपरा, संस्कृति और विरासत के शोध को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत @2047 का संकल्प लिया गया है। भारत केंद्रित शोध और शिक्षा के माध्यम से हम पुन: विश्व गुरू बनेंगे। स्वागत उद्बोधन राष्ट्रीय शोधार्थी समागम की संयोजिका डॉ. अल्पना त्रिवेदी ने दिया। विषय प्रवर्तन डा. मुकेश कुमार मिश्रा ने दिया। दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के अध्यक्ष  अशोक पाण्डेय ने समागम की विषय वस्तु पर प्रकाश डाला। शुभारंभ-सत्र के समापन पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विज्ञान भवन परिसर में पौध-रोपण भी किया। उद्घाटन सत्र में मैपकास्ट के अध्यक्ष डॉ. अनिल कोठारी, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलगुरु  विजय मनोहर तिवारी सहित शिक्षक एवं शोधार्थी-विद्यार्थी उपस्थित थे।  

CM डॉ. यादव का फैसला: MP में अनिवार्य होगा राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का ससम्मान गायन

राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के ससम्मान गायन को मध्यप्रदेश में लागू करेगी राज्य सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव वंदे मातरम् के छह छंदों का गायन लागू करना प्रधानमंत्री  मोदी की अभूतपूर्व पहल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की पहल पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रगान जन- गण-मन से पहले सभी कार्यालयों और स्कूलों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के छह छंदों के गायन का निर्णय लिया है। यह अत्यंत सराहनीय एवं अभूतपूर्व पहल है। इसके जरिए पूरा देश अमर शहीदों के बलिदान को स्मरण करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में हमारे वीर सेनानियों ने वंदे मातरम् गाते हुए स्वयं को देश के लिए बलिदान कर दिया। मध्यप्रदेश सरकार, केंद्र सरकार के इस निर्णय के साथ खड़ी है और वंदे मातरम् गायन के निर्णय को त्वरित रूप से प्रदेश में लागू कर रही है। 

समृद्ध वन-खुशहाल जनता की थीम पर उज्जैन में पहली बार महाकाल वन मेला लगा: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जनजातीय समुदाय की समृद्धि का आधार बन रहे हैं वन मेले : मुख्यमंत्री डॉ. यादव वन मेले हर दौर की जरूरत, वनौषधियों से असंभव बीमारी का भी इलाज संभव “समृद्ध वन-खुशहाल जन की थीम पर उज्जैन में पहली बार लगा ‘ महाकाल वन मेला’ महाकाल स्मृति उपहार किट और महाकाल वन प्रसादम् का किया शुभारंभ  वनौषधियों के जानकार वनरक्षक  जगदीश प्रसाद अहिरवार प्रशस्ति-पत्र से सम्मानित मुख्यमंत्री ने वन मेले का किया शुभारंभ, 16 फरवरी तक चलेगा वन मेला उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वन हमारी वसुंधरा का वैभव हैं, धरती की धरोहर और धरा का अलंकरण हैं। वन हमारी राष्ट्रीय पूंजी हैं। इनका संरक्षण एवं संवर्धन करना हम सबकी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन मेले प्रदेश की समृद्ध जैविक और वानस्पतिक विविधताओं को प्रदर्शित करने का सशक्त माध्यम हैं। इनके जरिए हमारे जनजातीय भाई-बहनों को अपने वनोत्पाद और काष्ठ शिल्प विक्रय करने का सुनहरा मौका मिलता है। उन्होंने कहा कि ‘ महाकाल वन मेले’ की आज से शुरूआत हो गई है। ये मेला शीघ्र ही अपनी एक विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा। मेले में प्रदर्शित जड़ी-बूटियां तथा विभिन्न प्रकार के शुद्ध एवं सुरक्षित अकाष्ठीय लघु वनोत्पाद आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों से रोगोपचार में बेहद उपयोगी होते हैं। वनौषधियां हर रोग के इलाज में कारगर साबित हो रही हैं। इनसे असंभव रोग का इलाज भी संभव हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्रीय बजट-2026 में एम्स की तर्ज पर देश में तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान खोलने की घोषणा की गई है। इनमें से एक अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान भगवान धनवंतरी की कर्मभूमि और सिंहस्थ भूमि उज्जैन में स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेज दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को धार्मिक नगरी उज्जैन में पहली बार आयोजित ‘ महाकाल वन मेला-2026’ का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि इस वन मेले में नागरिकों को प्राकृतिक रंग-गुलाल मिलेंगे। इसमें नाड़ी वैद्य और आयुर्वेदिक चिकित्सक भी अपनी सेवाएं देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि वन मेले में प्रदर्शित काष्ठ और बांस से निर्मित एथनिक क्रॉफ्ट आइटम्स न केवल पारम्परिक शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं, बल्कि सबके घरों की शोभा भी बढ़ाते हैं। उन्होंने उज्जैन के नागरिकों से अपील की कि वे इस वन मेले का भरपूर लाभ उठाएं और प्रदेश की वन संपदा तथा जनजातीय उत्पादों का उपयोग कर सबको प्रोत्साहित भी करें। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा ‘महाकाल वन मेले’ के जरिए स्थानीय वन उत्पादों और शिल्पकारों को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। पर्यावरण जागरूकता, आयुर्वेदिक उत्पादों के प्रचार-प्रसार और आत्मनिर्भरता की दिशा में यह एक सार्थक कदम है। उज्जैन के दशहरा मैदान में यह वन मेला 16 फरवरी तक चलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार तेजी से प्रदेश में मेडिकल और आयुर्वेदिक कॉलेजों की संख्या में वृद्धि कर रही है। पिछले साल हमने विभिन्न जिलों में 8 नए आयुर्वेदिक कॉलेज शुरू किए हैं। इस साल हम और भी तेजी से इस दिशा में आगे बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विंध्य हर्बल के प्राकृतिक रंग-गुलाल, महाकाल स्मृति उपहार किट एवं ‘महाकाल वन प्रसादम्’ का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पन्ना जिले के वन औषधियों से उपचार पद्धति के विशेष जानकार वनरक्षक  जगदीश प्रसाद अहिरवार को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया। प्रधानमंत्री  मोदी ने 25 जनवरी को ‘मन की बात’ में वनरक्षक  अहिरवार द्वारा वनौषधियों के देशज ज्ञान के संरक्षण की दिशा में किए गए प्रयासों की सराहना की थी।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रदेश के जनजातीय और वनांचल को समृद्धि देने के लिए भोपाल और उज्जैन जैसे वन मेले प्रदेश भर में लगाए जाने की आवश्यकता है। उज्जैन में महाशिवरात्रि और विक्रमोत्सव के अवसर पर आयोजित वन मेला प्रदेशवासियों के लिए अद्भुत है। वन विभाग ने प्राकृतिक रूप से महाकाल वन प्रसादम् तैयार किया है। इसमें काष्ठ से बने गमले में एक पौधा लगाया गया है। यह गमला महाकाल को भेंट स्वरूप दिया जाएगा। वापस मिलने पर इसे किसी भी जगह पर सीधे रोपित कर दिया जाएगा। काष्ठ गलकर खाद बन जाएगा और पौधा बिना गमला निकालते ही निर्बाध रूप से पल्लवित होता रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन के  महाकाल वन मेले में महुआ के लड्डू, अन्नों से बनी मिष्ठान्न सहित अनेक वनोपज उत्पाद भी उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि उज्जैन के वन मेले में आए वैद्य और चिकित्सक अनेक असाध्य रोगों के उपचार के लिए नागरिकों को नि:शुल्क सेवाएं देंगे। वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री  दिलीप अहिरवार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में जनजातीय समुदायों की आय बढ़ाने के लिए वन विभाग लगातार काम कर रहा है। उज्जैन की धरती पर आयोजित यह वन मेला निश्चित रूप से भोपाल वन मेले की तरह सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। यहां विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक औषधियां एवं बांस से बने उत्पाद उपलब्ध हैं। नागरिक इसका भरपूर लाभ उठाएं। अपर मुख्य सचिव वन एवं सहकारिता  अशोक बर्णवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के शहर-शहर में वन मेला लगाने की शुरुआत की है। भोपाल के बाहर यह पहला वन मेला उज्जैन में लगाया गया है। वन मेलों के दो उद्देश्य होते हैं। इनसे जनजातीय समुदायों को तो आमदनी होती ही है, शहरी लोगों को प्राकृतिक उत्पाद खरीदने और नेचर के साथ चलने-संवरने का अवसर भी मिल जाता है। उन्होंने बताया कि म.प्र. लघु वनोपज संघ के जरिए प्रदेश के 30 लाख जनजातीय संग्राहकों को सीधा लाभ मिल रहा है। भोपाल में डेढ़ माह पहले हुए वन मेले में 3 करोड़ रुपए से अधिक की बिक्री हुई थी।  महाकाल वन मेला में प्रदेशभर के विभिन्न उत्पादों के 250 स्टॉल लगाए गए हैं। इसके अलावा यहां 150 से अधिक वैद्य एवं आयुर्वेदिक चिकित्सक लोगों को परामर्श प्रदान करेंगे। वन मेले के शुभारंभ अवसर पर विधायक  अनिल जैन कालूहेड़ा, विधायक  सतीश मालवीय, विधायक  जितेंद्र पंड्या, जिला पंचायत अध्यक्ष उज्जैन मती कमला कुंवर सहित डॉ. प्रभुराम जाटवा,  उमेश सेंगर,  राजेश पांचाल,  बहादुर सिंह,  ओम जैन, वन बल प्रमुख  वीएन अंबाड़े, प्रबंध संचालक, मप्र लघु वनोपज संघ डॉ. समिता राजौरा, सीएफ उज्जैन  आलोक पाठक, अन्य जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी सहित बड़ी संख्या में … Read more

उज्जैन मेट्रो शहर के रूप में स्थापित हो रहा है, सभी कार्य हो उसी अनुरुप : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

गुणवत्ताके साथ समय पर हो सिंहस्थ के सभी विकास कार्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिंहस्थ 2028 के लिए अनुभवी लोगों से चर्चा कर कार्ययोजना बनाने में लें मदद उज्जैन मेट्रो शहर के रूप में स्थापित हो रहा है, सभी कार्य हो उसी अनुरुप संवेदनशीलता के साथ जनता की कठिनाई को कम करने में बने सहभागी अधिकारी अपने कार्य संपूर्ण जिम्मेदारी के साथ युद्ध स्तर पर कराए पूर्ण अब मुख्यमंत्री निवास से भी होगी सिंहस्थ कार्यों की मॉनीटरिंग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में की सिंहस्थ-2028 के अंतर्गत प्रस्तावित कार्यों की समीक्षा  उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को उज्जैन में सिंहस्थ 2028 अंतर्गत मंत्री मंडलीय समिति से अनुशंसित अधोसरंचना के प्रगतिरत विकास कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ महापर्व का आयोजन विश्व के लिए अद्वितीय है। सिंहस्थ महापर्व के दौरान करोड़ों श्रद्धालु मोक्षदायिनी शिप्रा में आस्था की डुबकी लगाएंगे। इस महापर्व के आयोजन पर विश्व की निगाह रहेगी। सिंहस्थ-2028 मध्यप्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है। हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए कि प्रत्येक श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के पवित्र अनुष्ठानों में शामिल हो सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अलग-अलग विभागों के माध्यम से सिंहस्थ-2028 के लिए किए जा रहे विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी लेकर समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैनवासियों से सेवाभाव की तरह कार्य करने का आहवान किया है। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण कराएं। मुख्यमंत्री ने की किसानों की फसल की चिंता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ 2028 के प्रगतिरत कार्यों की समीक्षा के दौरान गेहूं की फसल की सिंचाई के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिप्रा नदी पर घाट निर्माण के दौरान किसानों को पानी की उपलब्धता बनी रहनी चाहिए। इसके लिए नर्मदा जल की आपूर्ति की जाए। वतर्मान में गेहूं की फसल को सिंचाई के लिए एक पानी की और जरुरत होगी। इसके लिए शिप्रा नदी में जल प्रवाह सुनिश्चित बनाए रखे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये कि सभी अधिकारी गंभीरता के साथ काम करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा,  संजय दुबे को निर्देश दिए है कि उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के काम में किसी भी तरह की रुकावट न आए। इसके लिए मुख्यमंत्री निवास पर भी सिंहस्थ सेल गठित कर मॉनीटरिंग सुनिश्चित की जाये और जिन विभागों में अधिकारियों की कमी है, वहाँ पदस्थापना तत्काल की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि अनुभवी अधिकारियों के लिए यदि सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारिेयों को रखना है तो उसके लिए भी नियमानुसार कार्यवाही कर तत्काल रुप से उन्हें रखा जाए। सिंहस्थ-2028 के लिए अब रिवर्स कैलेंडर बनाकर निर्माण कार्य तीव्र गति से पूर्ण करें। वर्तमान समय से लेकर सिंहस्थ-2028 तक दो वर्षाकाल का समय आने वाला है। इसलिए समय-सीमा में काम गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जाना अनिवार्य है। मुख्यमंत्री ने विभिन्न निर्माण एजेसिंयों द्वारा किए जा रहे कार्यो की समीक्षा की, साथ ही निर्देश दिए कि जो निर्माण एजेंसियां काम कर रही है उनके संसाधनों की भी लगातार मॉनीटरिंग हो। वर्तमान समय माइक्रों मैनेजमेंट से नैनो मैनेजमेंट की ओर जाने का है। युद्ध स्तर की तैयारियां शुरु करना है। सभी अधिकारी 24 घंटे-07 दिन सक्रिय रहें। सिंहस्थ 2028 को बेहतर प्रबंधन के साथ करने के लिए उज्जैन जिले के सभी नागरिकों को जिम्मेदारी के भाव के साथ काम करने के लिए प्रेरित करें, उनको यह लगना चाहिए कि यह हमारा व्यक्तिगत काम है। इसके लिए सभी नागरिकों में जिम्मेदारी के साथ समर्पण का भाव भी पैदा करने के लिए समन्वय बनाकर कार्य करें।     मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 के अंतर्गत प्रचलित निर्माण कार्यों की समय-समय पर मॉनीटरिंग हो। उन्होंने सिंहस्थ के संदर्भ में विभागों को समन्वयपूर्वक कार्य करने और आवश्यक सुविधाओं के विकास के लिए समय-सीमा में कार्यों को पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अधिकारियों को निर्देश         1. सिंहस्थ-2028 के लिए होम स्टे, धर्मशाला, स्कूल, कॉलेज आदि में व्यवस्थाओं केलिए आधारभूत संरचना तैयार करने के लिए कार्य योजना बनाई जाए।         2. उज्जैन शहर से जोड़ने वाले आसपास के गांव में होम स्टे की व्यवस्था के लिए लोगों को प्रशिक्षण भी दिया जाए। सिंहस्थ-2028 मेला क्षेत्र में आंतरिक और बाहरी व्यवस्थाओं की अलग-अलग रूपरेखा बनाएं। सिंहस्थ मेले की बाहर की व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद बनाने के लिए जरूरी है कि उसकी समस्त जगहों की  मैपिंग की जाए।         3. उज्जैन सिंहस्थ-2028 की तैयारी में बेहतर प्रबंधन के लिए उज्जैन में  महाशिवरात्रि, श्रावण, नागपंचमी एवं अन्य त्योहारों पर व्यवस्थाओं को प्रायोगिक रूप से बनाए और उसके अनुभवों का लाभ लेते हुए सिंहस्थ के भीड प्रबंधन कार्य योजना बने।         4. उज्जैन शहर से जुड़ने वाले दूसरे जिलों के वैकल्पिक मार्गों का चयन कर लें और इन मार्गों को गुगल मैपिंग के साथ उन्नयन भी कराया जाए, जिससे भीड़ प्रबंधन में इन मार्गों का उपयोग हो सके। साथ ही उज्जैन शहर के महाकाल मंदिर पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्गों का भी चयन करें, जिससे भीड़ प्रबंधन आसानी से हो सके।         5.  मंगलनाथ,  भूखीमाता रामघाट के आसपास घाटों को जोड़ने वाले मार्गों को चिन्हित कर उन्नयन करें। सिंहस्थ मेला क्षेत्र के बाहर सामाजिक सामुदायिक भवन, स्कूल, कॉलेज धर्मशाला बनाने वाली संस्थाओं को प्रोत्साहित करें।         6. सिंहस्थ 2028 के लिए काम कर रही निर्माण एजेंसी जो समय पर काम पूरा करें उनको प्रोत्साहन स्वरूप व्यवस्था भी बना कर दें। समीक्षा बैठक में प्रभारी मंत्री उज्जैन  गौतम टेटवाल, महापौर  मुकेश टटवाल, विधायक  अनिल जैन कालूहेडा,  सतीश मालवीय,  जितेन्द्र पंड्या, नगर निगम अध्यक्ष मती कलावती यादव, सिंहस्थ मेला अधिकारी सह संभागायुक्त  आशीष सिंह, एडीजी  राकेश गुप्ता, कलेक्टर  रौशन कुमार सिंह एवं अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।   

12 फरवरी को भोपाल में भवन विकास निगम की कार्यशाला, डॉ. यादव करेंगे उद्घाटन

12 फरवरी को भोपाल में भवन विकास निगम की क्षमता संवर्धन कार्यशाला मुख्यमंत्री डॉ. यादव होंगे मुख्य अतिथि भोपाल  लोक निर्माण से लोक कल्याण के विजन को सशक्त आधार देने के उद्देश्य से लोक निर्माण विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा निरंतर क्षमता संवर्धन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में 12 फरवरी 2026 को भोपाल स्थित रवीन्द्र भवन में मध्यप्रदेश भवन विकास निगम के तत्वावधान में एक दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव होंगे। इस संबंध में जानकारी देते हुए लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने बताया कि यह कार्यशाला निर्माण क्षेत्र से जुड़े अभियंताओं एवं तकनीकी अधिकारियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। कार्यशाला में लोक निर्माण विभाग, परियोजना क्रियान्वयन इकाई, मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम तथा मध्यप्रदेश भवन विकास निगम के लगभग 2,000 अभियंता एवं तकनीकी अधिकारी भाग लेंगे। कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण कैलेंडर एवं परियोजना प्रबंधन पुस्तिका का विमोचन किया जाएगा तथा परियोजना प्रबंधन प्रणाली–2.0 डिजिटल प्रबंधन प्रणाली का प्रदर्शन एवं औपचारिक शुभारंभ होगा। इसके साथ ही मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम एवं मध्यप्रदेश भवन विकास निगम द्वारा राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित संस्थाओं—केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान, भारतीय राजमार्ग अभियंता अकादमी, इंजीनियरिंग स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया,भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई तथा स्कूल ऑफ़ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर भोपाल के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर होंगे। मंत्री  राकेश सिंह ने बताया कि कार्यशाला में राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ क्षमता निर्माण, हरित भवन अवधारणा, आधुनिक भवन निर्माण तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण तथा निर्माण क्षेत्र में नवाचार जैसे विषयों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा। साथ ही  विक्रांत सिंह तोमर द्वारा क्षमता निर्माण विषय पर विशेष व्याख्यान दिया जाएगा। मध्यप्रदेश भवन विकास निगम द्वारा विकसित परियोजना प्रबंधन प्रणाली पोर्टल–2.0 एक उन्नत डिजिटल प्रबंधन प्रणाली है। इससे समस्त निर्माण कार्यों का सुव्यवस्थित, पारदर्शी एवं दक्ष क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। इस प्रणाली में प्रत्येक परियोजना के लिए उत्तरदायी–जवाबदेह–समय-सीमा प्रणाली के माध्यम से संबंधित अधिकारी, सक्षम स्वीकृतकर्ता तथा निर्धारित समय-सीमा स्पष्ट रूप से दर्ज रहती है, जिससे सतत निगरानी एवं जवाबदेही सुनिश्चित होती है। प्रक्रिया नियंत्रण द्वार प्रणाली के अंतर्गत आवश्यक कार्य, अभिलेख एवं स्वीकृतियाँ पूर्ण होने के पश्चात ही अगले चरण की अनुमति प्रदान की जाती है। मानक कार्य प्रणाली के अनुसार कार्य निष्पादन से सभी परियोजनाओं में एकरूपता एवं प्रशासनिक दक्षता सुनिश्चित होती है, वहीं स्वचालित पत्र निर्माण सुविधा से विभागीय पत्राचार त्वरित, पारदर्शी एवं कागजरहित बनता है। क्षमता संवर्धन कार्यशाला न केवल प्रदेश के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं दक्षता को सुदृढ़ करेगी, बल्कि अभियंताओं एवं तकनीकी अधिकारियों को नवीनतम तकनीकी ज्ञान, गुणवत्ता आधारित निर्माण प्रक्रिया तथा सतत विकास के सिद्धांतों से भी अवगत कराएगी। लोक निर्माण विभाग की यह पहल “लोक निर्माण से लोक कल्याण” के संकल्प को तकनीकी सुदृढ़ता, डिजिटल नवाचार और प्रभावी प्रबंधन के माध्यम से नई दिशा प्रदान करेगी।  

डॉ. यादव ने पं. दीनदयाल उपाध्याय को याद किया, समर्थ भारत निर्माण के चिंतक थे वे

पं. दीनदयाल उपाध्याय एकात्म मानववाद और अंत्योदय के प्रणेता और समर्थ भारत निर्माण के चिंतक थे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पं. दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर किया नमन लालघाटी स्थित प्रतिमा पर की पुष्पांजलि अर्पित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नमो वन में लगाया रुद्राक्ष का पौधा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जब विश्व में सभी ओर साम्यवाद और समाजवाद की विचारधाराओं का प्रभाव था, तब पं. दीनदयाल उपाध्याय ने भारत की सनातन विचारधारा को युगानुकूल रूप में प्रस्तुत करते हुए देश को एकात्म मानववाद और अंत्योदय की कल्याणकारी दृष्टि प्रदान की। यह हमारी सांस्कृतिक विरासत को निरंतरता प्रदान करने का प्रभावी प्रयास था। पं. दीनदयाल उपाध्याय एकात्म मानववाद और अंत्योदय के प्रणेता तथा समर्थ भारत निर्माण के चिंतक थे। पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चिंतक, संगठनकर्ता और भारतीय जनसंघ के सह संस्थापक रहे। दीनदयाल जी का विचार था कि स्वतंत्रता तभी सार्थक होती है, जब वो हमारी संस्कृति की अभिव्यक्ति का साधन बने। उनके विचारों ने समाज के अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति के जीवन में उजास लाने का मार्ग प्रशस्त किया। दीनदयाल जी के विचार भारतीय मानस को सशक्त राष्ट्र और समाज के निर्माण के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर कार्य करने की प्रेरणा देते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर लालघाटी स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पं. दीनदायल उपाध्याय की प्रतिमा के निकट विकसित नमो वन का अवलोकन कर रुद्राक्ष का पौधा रोपा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों के अनुरूप प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी, गरीब-किसान-युवा और महिलाओं कल्याण के साथ सभी को प्रगति के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार इस दिशा में निरंतर सक्रिय है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में विश्व में देश का प्रभाव निरंतर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर केश शिल्पियों को उपलब्ध कराई जा रही किट उनके अंत्योदय के विचारों को व्यावहारिक रूप देने का सार्थक प्रयास है।  इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण, सहकारिता मंत्री  विश्वास सारंग, भोपाल महापौर मती मालती राय सहित  रविन्द्र यति जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।

वित्तीय वर्ष में कर्ज का बूम: सरकार ने एक हफ्ते में दूसरी बार उठाए 5,000 करोड़

भोपाल  विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने और अनुपूरक बजट के पहले मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने बजट सत्र के पहले बाजार से 5 हजार करोड़ का नया कर्ज लिया है। पिछले एक सप्ताह में सरकार ने दूसरी बार कर्ज लिया है। इससे पहले 4 फरवरी को ही सरकार ने 5300 करोड़ का कर्ज लिया था। सरकार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से तीन किस्तों में ये कर्ज ले रही है। इस वित्तीय वर्ष में सरकार द्वारा अब तक 67,300 करोड़ रुपए कर्ज ले चुकी है। उल्लेखनीय है कि, बजट सत्र 16 फरवरी से शुरु हो रहा है और 18 एमपी का बजट पेश होगा। बता दें कि, एक हफ्ते में लिया गया ये दूसरा कर्ज है, जो सरकार ने तीन किस्तों में लिया है। इसका भुगतान सरकार को आज यानी बुधवार को होने वाला है। इसके बाद चालू वित्त वर्ष में लिए गए कुल कर्ज की संख्या 36 हो गई है और कर्ज का आंकड़ा 67300 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। अलग-अलग किस्तों में लिया गया कर्ज जनवरी 2026 तक सरकार ने 30 कर्ज लिए थे, जो फरवरी के पहले 10 दिनों में लिए गए कुल 6 कर्ज मिलाकर 36 तक पहुंच गया है। 3 फरवरी को 3 नए कर्ज लिए जाने के बाद आंकड़ा 33 तक पहुंचा था और आज फिर तीन अलग-अलग किस्तों में कर्ज लिया गया है। इसलिए लिया गया कर्ज 10 फरवरी को लिए गए दो-दो हजार करोड़ के दोनों ही कर्ज 21 साल और 16 साल की अवधि के हैं, जबकि 1000 करोड़ रुपए का तीसरा कर्ज 8 साल की अवधि के लिए लिया गया है, जिसका भुगतान छमाही ब्याज के रूप में किया जाएगा। यहां गौरतलब है कि, मंगलवार को मोहन सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित बजट का प्रजेंटेशन कैबिनेट के सामने किया है, जिसे 18 फरवरी को विधानसभा में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा पेश करेंगे। एग्रीकल्चर स्कीम, सिंचाई और पॉवर प्रोजेक्ट तथा कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के स्थायी निर्माण के नाम पर यह कर्ज लिए गए हैं। 2025-26 में महीने दर महीने ऐसे लिया कर्ज -चालू वित्त वर्ष में पहला और दूसरा कर्ज मई में ढाई-ढाई हजार करोड़ रुपए का लिया। -जून में 2 हजार और ढाई हजार के दो लोन लिए गए। -जुलाई माह में पहली बार 2500 और 2300 तथा दूसरी बार 2000 और 2300 करोड़ के चार कर्ज लिए गए। -अगस्त में 1600 करोड़, 1400 करोड़ और 1000 करोड़ रुपए के तीन कर्ज पहले राउंड में और 2500 तथा 2300 करोड़ के दो कर्ज दूसरे राउंड में लिए गए। -सितम्बर महीने में पहले राउंड में 1500 करोड़, 1500 करोड़ और एक हजार करोड़ के तीन लोन, दूसरे राउंड में 1500 करोड़, 1500 करोड़ के दो लोन और तीसरे राउंड में 1500 करोड़ तथा 1500 करोड़ रुपए के दो कर्ज लिए गए। इस तरह सितम्बर में सात कर्ज लिए गए। -अक्टूबर में 2700 करोड़ और 2500 करोड़ के दो लोन लिए गए। -नवम्बर में 1500 करोड़, 1500 करोड़ के दो और एक हजार करोड़ का एक कर्ज समेत तीन लोन लिए गए। -दिसम्बर में 1000-1000 करोड़ के तीन कर्ज लिए गए। -जनवरी 2026 में 1500-1500 करोड़ रुपए के दो और एक हजार करोड़ रुपए का एक कर्ज लिया गया। -तीन फरवरी को 2000-2000 करोड़ रुपए के दो और 1200 करोड़ का एक कर्ज लिया गया है। -10 फरवरी को 2000-2000 करोड़ रुपए के दो कर्ज और 1000 करोड़ का एक कर्ज लिया गया है।

मोहन सरकार ने किया ऐलान, तलाकशुदा बेटियां भी होंगी माता-पिता की पेंशन की हकदार

भोपाल  मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने महिला सुरक्षा और सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित कैबिनेट बैठक में राज्य के पेंशन नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन को मंजूरी दी गई। इस नए प्रावधान के तहत, अब प्रदेश की तलाकशुदा बेटियां भी अपने माता-पिता की ‘परिवार पेंशन’ की पात्र होंगी। सीएम मोहन यादव की अध्यक्षता में एमबी कैबिनेट की मीटिंग हुई है। कैबिनेट की मीटिंग में कई बड़े फैसले हुए हैं। मीटिंग के बाद उद्योग मंत्री चैतन्य काश्यप ने मीडिया को जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि सरकार ने सामाजिक सरोकारों को प्राथमिकता देते हुए पेंशन नियमों में बड़ा बदलाव किया है। तलाकशुदा बेटियों को भी पेंशन मंत्री काश्यप ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य अंतिम पंक्ति की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है, इसीलिए तलाकशुदा बेटियों को परिवार पेंशन के दायरे में लाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। साथ ही, उन्होंने आगामी 18 फरवरी को विधानसभा में पेश होने वाले बजट की तैयारियों की भी पुष्टि की। भविष्य के विकास का रोडमैप भी तैयार बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के आगामी बजट का भी अनुमोदन किया गया। यह बजट 18 फरवरी को मध्यप्रदेश विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा। कैबिनेट के इन निर्णयों से जहां एक ओर हजारों महिलाओं को आर्थिक संबल मिलेगा, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के भविष्य के विकास का रोडमैप भी तैयार हो गया है। हजारों ऐसी महिलाओं को सीधा लाभ मिलेगा उन्होंने बताया कि सरकार के इस फैसले से प्रदेश की हजारों ऐसी महिलाओं को सीधा लाभ मिलेगा, जो कानूनी रूप से तलाक के बाद अपने माता-पिता पर आश्रित हैं। अब तक परिवार पेंशन के नियमों में कुछ तकनीकी सीमाओं के कारण तलाकशुदा बेटियों को इसमें शामिल नहीं किया गया था, लेकिन कैबिनेट की इस मुहर के बाद उन्हें आर्थिक संबल प्राप्त होगा। सरकार का मानना है कि यह कदम न केवल महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देगा, बल्कि समाज के एक संवेदनशील वर्ग को सुरक्षा भी प्रदान करेगा। पेंशन नियमों में बदलाव के साथ ही कैबिनेट ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के आगामी बजट प्रस्तावों का भी अनुमोदन कर दिया है। सरकार का यह नया बजट आगामी 18 फरवरी को मध्यप्रदेश विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा।

जनजातीय एवं महिला-बाल विकास विभाग की योजनाओं के लिए 7,133.17 करोड़ रुपये की मंजूरी, लंबी अवधि तक जारी रहेंगे प्रोजेक्ट

जनजातीय कार्य और महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं को वर्ष 2030-31 तक की निरंतरता के लिए 7,133 करोड़ 17 लाख रूपये की स्वीकृति धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान अंतर्गत अविद्युतीकृत घरों एवं शासकीय संस्थानों के विद्युतीकरण के लिए 366 करोड़ 72 लाख रूपये की स्वीकृति उच्च न्यायालय और जिला न्यायालय के आई टी संवर्ग में कार्यरत कर्मचारियों को एक बार के लिए आयु सीमा में पाँच वर्ष की छूट की स्वीकृति म.प्र. सिविल सेवा (पेंशन) नियम 2026 तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन का सारांशीकरण) नियम 2026 का अनुमोदन मध्यप्रदेश सिविल सेवा राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली का कार्यान्वयन नियम 2026 तथा उपदान का संदाय नियम 2026 का अनुमोदन मुख्यमंत्री डॉ.यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा वर्ष 2026-27 से वर्ष 2030-31 तक जनजातीय कार्य और महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की निरंतरता के लिए 7,133 करोड़ 17 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। स्वीकृति अनुसार जनजातीय कार्य विभाग की पीवीटीजी आहार अनुदान योजना के लिए 2,350 करोड़ रूपये, एकीकृत छात्रावास योजना के लिए 1,703 करोड़ 15 लाख रूपये, सीएम राइज विद्यालय योजना के लिए 1,416 करोड़ 91 लाख रूपये, आवास सहायता योजना के लिए 1,110 करोड़ रूपये के साथ ही माध्यमिक शिक्षा मण्डल को शुल्क की प्रतिपूर्ति, अनुसूचित जाति जनजाति के अभ्‍यार्थियों को छात्रवृत्ति, कक्षा-9वीं  की छात्रवृत्ति  के लिए 522 करोड़ 8 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इसके अतिरिक्त महिला एवं बाल विकास की मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना के लिए 31 करोड़ 3 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। मंत्रि-परिषद की बैठक मंत्रालय में वंदे-मातरम् गायन के साथ आरंभ हुई। मंत्रि-परिषद ने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DA-JGUA) अन्तर्गत विद्युत अधोसंरचना विस्तार द्वारा 63 हजार 77 अविद्युतीकृत घरों एवं 650 अविद्युतीकृत शासकीय संस्थानों के विद्युतीकरण  के लिए 366 करोड़ 72 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की है। इसमें केन्द्र शासन से अनुदान राशि 220 करोड़ 03 लाख रूपये तथा राज्य शासन का अंश 146 करोड़ 69 लाख रूपये का भार आयेगा।  इसके अतिरिक्त (म.प्र. ऊर्जा विकास निगम द्वारा) 8 हजार 521 घरों को ऑफ-ग्रिड से विद्युतीकरण के लिए अनुमानित लागत 97 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। योजना में विद्युतीकरण से संबंधित वितरण प्रणाली निर्माण के लिए योजना लागत की शेष राशि (केन्द्र से प्राप्त अनुदान को छोड़कर) राज्य शासन द्वारा राज्य की वितरण कंपनियों को अंश-पूंजी के रूप में उपलब्ध कराई जायेगी। म.प्र. ऊर्जा विकास निगम द्वारा किए जाने वाले ऑफ ग्रिड विद्युतीकरण (सोलर + बैटरी) के लिए योजना के समस्त व्यय का वहन राज्य शासन द्वारा किया जायेगा। अनुमोदन अनुसार भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार वितरण कंपनी स्तर पर निर्धारित सीलिंग कॉस्ट का पालन करते हुए, 2 लाख रुपये प्रति घर तक अनुमानित लागत वाली बसाहटों में राज्य की विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा विद्युत अधोसंरचना निर्माण कर ऑन-लाइन प्रणाली से विद्युतीकरण किया जायेगा। खेतों पर बने घरों के साथ ही 5 घरों से छोटी बसाहटें एवं ऐसी दूरस्थ बसाहटें, जहाँ विद्युतीकरण की औसत लागत रूपये 2 लाख प्रति घर से अधिक है, उनमें म.प्र. ऊर्जा विकास निगम द्वारा 1 किलोवाट क्षमता के ऑफ-ग्रिड प्रणाली (सोलर + बैटरी) से विद्युतीकरण किया जायेगा।  मंत्रि-परिषद द्वारा उच्च न्यायालय और जिला न्यायालय के आई टी संवर्ग में कार्यरत कर्मचारियों को तकनीकी संवर्ग की प्रचलित और भावी भर्ती प्रक्रियाओं में भाग लेने के लिए सिर्फ एक बार के लिए आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट की स्वीकृति प्रदान की गई। वर्तमान में अनारक्षित वर्ग के लिए 40 वर्ष और आरक्षित वर्ग के लिए 45 वर्ष की आयु सीमा निर्धारित है। मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम 2026 तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन का सारांशीकरण) नियम 2026 का अनुमोदन किया गया है। अनुमोदन अनुसार नियम के प्रकाशन के लिए वित्त विभाग को अधिकृत किया गया है। प्रस्तावित नियमों में प्रक्रियाओं एवं अधिकारिताओं को सहज बनाया गया है, जिससे पेंशनर्स को सुविधा होगी। संबंधित प्रकरणों का निराकरण समयसीमा में हो सकेगा। सेवानिवृत्तों को सारांशीकरण कराया जाने में सुविधा होगी तथा पेंशन सारांशीकरण मूल्य की गणना में सुविधा होगी। मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 2026 के नियम-44 के अंतर्गत परिवार पेंशन के लिए पात्र सदस्यों में अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा पुत्री को भी सम्मिलित किया गया है। मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली का कार्यान्वयन) नियम 2026 तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत उपदान का संदाय) नियम 2026 का अनुमोदन किया गया है।  अनुमोदन अनुसार यह नियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावशील होंगे। नियम के प्रकाशन के लिए वित्त विभाग को अधिकृत किया गया है। प्रमुख नवीन प्रावधान अंतर्गत अभिदाता की मृत्यु की दशा में परिवार पेंशन का प्रावधान किया गया है। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और ई-सेवा पुस्तिका संबंधी प्रावधान किया गया है। केन्द्र तथा मध्यप्रदेश शासन की पूर्व सेवाओं को जोड़ा जायेगा। निलम्बन अवधि में अभिदाता तथा नियोक्‍ता के अंशदान का प्रावधान किया। इसके साथ ही राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के कार्यान्वयन के लिए विस्तृत एवं स्पष्ट प्रक्रिया, अंशदान की दर, गणना एवं विलंब की स्थिति में उत्तरदायित्व निर्धारण के साथ सेवानिवृत्ति, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, त्यागपत्र एवं मृत्यु की दशा में निकास प्रावधान किया गया है। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत आने वाले शासकीय सेवकों के लिए उपदान की पात्रता निर्धारण एवं भुगतान की सुस्पष्ट प्रक्रिया होगी। विभागीय जांच (सेवा निवृत्ति उपरांत) आदेश के संदर्भ में उपदान से वसूली संभव होगी। विभागीय जांच की अवधि में नियोक्‍ता के अंशदान का भुगतान रोका जाना, सेवानिवृत्ति के तीन माह पूर्व अभिदाता अंशदान रोका जाना और सेवानिवृत्ति उपरांत विभागीय जांच संस्थित किये जाने का प्रावधान के साथ नियमों के निवर्तन और शिथिलीकरण के संबंध में राज्य शासन की शक्ति के प्रावधान शामिल है।  

डॉ. यादव ने विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्व. शुक्ल की जयंती पर अर्पित की श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्व. शुक्ल की जयंती पर किया नमन मध्यप्रदेश विधानसभा भवन में की पुष्पांजलि अर्पित विधानसभा अध्यक्ष  तोमर ने भी किया स्मरण भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और विधानसभा अध्यक्ष  नरेंद्र सिंह तोमर ने मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्व. राजेंद्र प्रसाद शुक्ल की जयंती पर विधानसभा परिसर में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। विधायक  रामेश्वर शर्मा, पूर्व मंत्री  पी.सी. शर्मा, पूर्व विधायक  सुदर्शन गुप्ता और विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्व. शुक्ल के परिजन ने भी चित्र पर पुष्पांजलि की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 10 फरवरी 1930 को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में जन्मे  राजेंद्र प्रसाद शुक्ल, वर्ष 1985 से 1990 तक मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष रहे। उन्होंने छत्तीसगढ़ क्षेत्र में पदयात्राओं के माध्यम से जन जागरण का कार्य किया। लोकप्रिय जन नेता रहे  शुक्ल राज्य सरकार में विधि-विधायी एवं सामान्य प्रशासन मंत्री भी रहे। छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के बाद, उन्होंने 14 दिसंबर 2000 से 19 दिसंबर 2003 तक छत्तीसगढ़ के प्रथम विधानसभा अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। स्व. राजेंद्र प्रसाद शुक्ल ने ‘असंसदीय अभिव्यक्तियां’ नामक पुस्तक की संकल्पना की, जो विधायी कामकाज पर एक महत्वपूर्ण संदर्भ है। उन्होंने संसदीय मामलों सहित कई पुस्तक लिखीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष रहे व्यक्तित्वों की जयंती और पुण्यतिथि पर मध्यप्रदेश विधानसभा भवन में उन्हें स्मरण करने की परंपरा स्थापित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष  तोमर की सराहना करते हुए उनका आभार माना।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया: बजट प्रस्तावों में सभी वर्गों और क्षेत्रों के कल्याण पर केंद्रित

बजब प्रस्तावों में सभी क्षेत्रों और वर्गों के विकास तथा कल्याण का रखा गया है ध्यान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री के समक्ष वर्ष 2026-27 के बजट प्रस्तावों का हुआ प्रेजेंटेशन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट प्रस्तावों में सभी क्षेत्रों और वर्गों के विकास तथा कल्याण का ध्यान रखा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बजट प्रस्तावों को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में बेहतर बताते हुए उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा के दृष्टिकोण तथा प्रस्ताव तैयार करने में विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा किए गए परिश्रम की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के समक्ष मंगलवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट प्रस्तावों का प्रेजेंटेशन दिया गया। मंत्रालय में हुई बैठक में उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय)  नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव (वित्त)  मनीष रस्तोगी तथा वित्त विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। मंत्रि-परिषद के समक्ष भी आज ही बजट प्रस्तावों का प्रेजेंटेशन हुआ। मंत्रि-परिषद द्वारा अनुमोदित बजट 18 फरवरी को उप मुख्यंमत्री  देवड़ा द्वारा विधान सभा में प्रस्तुत किया जायेगा।  

मुख्यमंत्री का शहडोल दौरा आज, कमिश्नर और कलेक्टर ने की व्यवस्थाओं की जांच

शहडोल प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आज 8 फरवरी को शहडोल जिले के धनपुरी और गधिया क्षेत्र का दौरा प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद नजर आ रहा है और तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसी कड़ी में संभागायुक्त शहडोल सुरभि गुप्ता ने लालपुर हवाई पट्टी का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान बताया गया कि मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर लालपुर हवाई पट्टी पर उतरेगा, जहां से वे सड़क मार्ग से धनपुरी के लिए रवाना होंगे। संभागायुक्त ने हवाई पट्टी पर सुरक्षा, साफ-सफाई, यातायात प्रबंधन और आपात व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के दौरे में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए और सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। इसी क्रम में कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने जयसिंहनगर के गधिया पहुंचकर मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। कलेक्टर ने मंच, बैठक व्यवस्था, बिजली, पेयजल, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों को समय रहते सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को सफल बनाने में कोई कोताही नहीं बरती जाए। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले धनपुरी पहुंचेंगे, जहां विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद वे गधिया के लिए रवाना होंगे। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ पुलिस विभाग भी सतर्क है और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत सीईओ शिवम प्रजापति, एसडीएम सोहागपुर अमृता गर्ग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर जिले में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है और सभी विभाग निर्धारित समय सीमा में तैयारियां पूरी करने में जुटे हुए हैं।   

उज्जैन में 500 हेक्टेयर में बनेंगे वन्य जीव केंद्र और रेस्क्यू सेंटर, वनतारा की तर्ज पर

 उज्जैन   उज्जैन में वनतारा की तर्ज पर इस तरह का जंगल चिड़ियाघर सफारी (वाइल्ड लाइफ सेंटर कम इंडियन जू कम रेस्क्यू सेंटर) तैयार करें, जो यहां आने वाले विजिटर्स को पूरी दुनिया के अलग-अलग जंगलों का एक ही जगह पर पूरा अनुभव दें। इस वाइल्ड लाइफ सेंटर को करीब 500 हेक्टेयर क्षेत्र में तैयार किया जाए। उज्जैन में 50 हेक्टेयर रकबे में पहले से तैयार ईको टूरिज्म पार्क भी इसी वन्य जीव केंद्र में शामिल कर लिया जाए। यह एक अनोखा वन्य जीव केंद्र होना चाहिए, जिसमें वन और वन्य प्राणियों की विविधता दूसरे वन्य जीव केंद्रों से भिन्न हो। यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने  वन विभाग की समीक्षा में कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में उज्जैन में वन्य जीव केंद्र सह रेस्क्यू सेंटर के निर्माण के संबंध में नियुक्त कन्सल्टेंट फर्म के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे। कंसल्टेंट भी नियुक्त किए डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में पर्यटन विशेषकर वन्य पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार पुरजोर कोशिश कर रही है। प्रदेश में उज्जैन और जबलपुर में वन्य जीव केंद्र सह रेस्क्यू सेंटर निर्मित किए जा रहे हैं। दोनों ही शहरों में इन सेंटर्स के निर्माण के लिए कंसल्टेंट भी नियुक्त कर दिए गए हैं। बहुत जल्द प्रदेश में दो नए वन्य जीव केंद्र बनेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष में उज्जैन के वन्य जीव केंद्र के फेज-1 का निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाए और जितनी जल्दी हो सके, वन्य जीव केंद्र तैयार हो जाए, जिससे उज्जैन को एक बेहतरीन फारेस्ट टूरिज्म स्पाट (सफारी एक्सपीरियंस के साथ) के रूप में ख्याति मिल सके। केंद्र ऐसे करें तैयार कि देशी और विदेशी सभी प्रजाति का दिन और रात कर विजिटर्स ले सकें आनंद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन के वन्य जीव केंद्र में देशी और विदेशी सभी प्रजाति के वन्य प्राणी हों। यह केंद्र इस तरह तैयार किया जाए कि इसमें दिन और रात दोनों वक्त विजिटर्स इसका आनंद ले सकें। बैठक में उज्जैन में इस केंद्र की स्थापना के लिए सैद्धांतिक सहमति व्यक्त कर निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं और सेंटर के डिजाइन पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्य जीव केंद्र को टूरिज्म डिपार्टमेंट के साथ मिलकर एक भव्य केंद्र के रूप में तैयार किया जाए। देश-दुनिया के 11 जंगलों का कराया जाएगा अनुभव नियुक्त कंसल्टेंट फर्म के पदाधिकारियों ने बताया कि वन्य जीव केंद्र में विजिटर्स को देश-दुनिया के 11 जंगलों का अनुभव कराया जाएगा। वर्ष 2027 के अंत तक पहला चरण पूरा हो जाएगा। वन्य जीव केंद्र का निर्माण कुल छह चरणों में किया जाएगा। इसमें दिखाई नहीं देने वाली बाड़ का खुला जंगल होगा, जिसमें विजिटर्स पैदल, बग्घी, सफारी और सेवा वाहन का उपयोग कर सेंटर का विजिट कर सकेंगे। 300 से अधिक देशी-विदेशी प्रजाति के जंगली जानवर होंगे। देशी और विदेशी जानवरों का अनुपात क्रमश: 75 एवं 25 प्रतिशत होगा। केंद्र में एक रेस्क्यू सेंटर भी बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि विश्व में पहली बार विजिटर्स को असली जंगल चिड़ियाघर सफारी का अनुभव उज्जैन के वन्य जीव केंद्र में कराया जाएगा।

‘हिंदू शब्द का भारत में कोई उल्लेख नहीं, रामायण में भी नहीं’, भागवत ने स्पष्ट किया

 मुंबई  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे हो गए हैं. इसके उपलक्ष्य में आज मुंबई के वर्ली स्थित नेहरू सेंटर में एक भव्य और ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किया गया है. इस आयोजन का नाम ‘मुंबई व्याख्यानमाला’ है. उन्होंने इस संबोधन में साफ किया कि संघ कोई पॉलिटिकल पार्टी नहीं है, बल्कि इससे जुड़े लोग पॉलिटिक्स में हैं. उन्होंने संघ की परिभाषा, संघ के कार्य, हिंदू शब्द की उत्पति और सभी धर्मों के भाव के बारे में बात की. उन्होंने बताया कि क्या भारतीय होना, केवल नागरिक होना नहीं है, यह एक स्वभाव का होना है. ये जोड़ने वाला स्वभाव है, जिसे हमें अनुशासनबद्ध हो कर बड़ा करना होगा.     मोहन भागवत ने कहा कि संघ ने पहले से तय किया कि सम्पूर्ण समाज को संगठित करने के अलावा संघ को और कोई दूसरा काम नहीं करना है. जिसको आप RSS कहते हो, आप कैसे कहते हो पता नहीं. बहुत से लोग कहते हैं कि नरेंद्र भाई प्रधानमंत्री हैं. वे RSS के प्रधानमंत्री हैं. तो बता दें कि उनकी एक पॉलिटिकल पार्टी है, बीजेपी है, जो अलग है. उसमें बहुत स्वयंसेवक है, प्रभावी भी है.     संघ किसी दूसरी संस्था की प्रतिस्पर्धा में नहीं निकला है, न ही किसी रिएक्शन या विरोध में निकला है. हमारा काम बिना किसी के विरोध किए है. संघ को लोकप्रियता नहीं चाहिए. संघ को पावर नहीं चाहिए. जितने भी भले काम देश में हो रहे हैं, वे ठीक से हो जाएं. उन्हें करने के लिए संघ है. बहुत कठिन परिस्थितियों में भी डॉ. हेडगेवार ने दो बातों को कभी नहीं छोड़ा- एक, अपनी पढ़ाई में हमेशा फ़र्स्ट क्लास आना; दूसरा, देश के लिए जो कुछ चल रहा था उसमें सक्रिय भाग लेना. ये उनके जीवन के स्थायी कार्य थे. संघ का काम अनोखा है, पूरी दुनिया में ऐसा काम नहीं है. अब तो यह प्रत्यक्ष अनुभव हो रहा है.     भागवत ने बताया– संघ में भारतीय रागदरबारी के आधार पर घोष की धुनें बजती है. व्यक्तिगत गीत होते हैं, सांगिक गीत होते हैं. लेकिन संघ कोई अखिल भारतीय संगीत शाला नहीं है. संघ के स्वयंसेवक राजनीति में भी है. लेकिन संघ पॉलिटिकल पार्टी नहीं है. कई बातें ऊपर से देखेंगे तो गलतफहमी होगी. और इसलिए संघ को जानना है तो संघ का अनुभव लेना है. संघ को अंदर से देखना है. चीनी कैसे, इस पर व्याख्यानमाला हो सकती है. प्रश्नोत्तर भी हो सकते हैं. लेकिन, एक चम्मच चीनी खा लेंगे तो इस सब की आवश्यकता ही नहीं है. परंतु ऐसा कुछ खाना है तो कम से कम वो ठीक है. उसकी परीक्षा करने में कोई खतरा नहीं है. इतना तो पता होना चाहिए. इसलिए फिर एक बार 100 साल के बाद हम आपको बता रहे हैं.     ये संघ क्या है? क्योंकि, संघ का जो काम है, वो संघ के लिए नहीं है, वो पूरे देश के लिए है. भारतवर्ष के लिए। संघ क्या है जानना है तो पहले संघ क्या नहीं है ये जानना चाहिए. संघ किसी दूसरे संगठन की कंपटीशन में निकला नहीं और नहीं है. संघ किसी एक विशिष्ट परिस्थिति की रिएक्शन में प्रतिक्रिया में नहीं चला है. संघ किसी के विरोध में नहीं चला है. हमारा काम सर्वेषाम अविरोधेन बिना किसी का विरोध किए करने का काम है, चलने वाला काम है. संघ को पॉपुलैरिटी नहीं चाहिए. संघ को पॉवर नहीं चाहिए.     मोहन भागवत ने कहा कि संघ का काम एक अनोखा काम हैं. पूरी दुनिया में ऐसा काम नहीं हैं. संघ को देखने के लिए देश विदेश से लोग आते हैं. देश के गतिविधियों के केंद्र में संघ का नाम आता हैं, इसलिए वो देखने आते हैं. कोई भी इसे देखने के बाद एक प्रश्न पूछता हैं. हमारे जवान पीढ़ी में ऐसा कुछ करने की इच्छा हैं , ये पद्यति आप हमको सीखा सकते है क्या. संघ को ऊपर से और दूर से देखेंगे तो भी गलतफहमी होती हैं. संघ के स्वयंसेवकक रूट मार्च करते हैं, लेकिन संघ पैरामिलिटरी आर्गेनाइजेशन नहीं हैं. संघ के स्वयंसेवक राजनीती में भी हैं, लेकिन संघ राजनितिक पार्टी नहीं हैं. इसलिए संघ को जानना है, तो संघ को अंदर से आ कर देखना होगा. संघ का काम पूरे देश के लिए हैं. संघ किसी दूसरे संगठन के कंपटीशन में निकला नहीं हैं. संघ किसी के विरोध में नहीं चला हैं. संघ को पॉपुलरीटी, पावर नहीं चाहिए.     मोहन भागवत ने भाषण में कहा, ‘RSS न तो कोई पैरामिलिट्री संगठन है और न ही कोई पॉलिटिकल पार्टी. संघ से जुड़े लोग भले ही पॉलिटिक्स में एक्टिव हों, लेकिन संगठन खुद पॉलिटिकल नहीं है. यह कोई रिएक्शनरी संगठन भी नहीं है. संघ किसी के खिलाफ नहीं है. संघ को पब्लिसिटी, पावर या पॉपुलैरिटी नहीं चाहिए.’     संघ के कार्यक्रम को आप यहां देख सकते हैं- इस कार्यक्रम में साधु-संत के साथ-साथ कई गणमान्य जुटे हुए हैं. आयोजन की शुरुआत वंदे मातरम के गायन के साथ हुई. क्यों अहम है आज का भाषण? दिल्ली में दिए गए उनके हालिया भाषणों की तर्ज पर, उम्मीद जताई जा रही है कि डॉ. भागवत आज कई ज्वलंत मुद्दों पर बात करेंगे. इसमें हाल ही में हुई बड़ी ट्रेड डील्स (Trade Deals), वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत, आगामी चुनाव और देश के वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक माहौल पर उनकी टिप्पणी बेहद महत्वपूर्ण होगी. क्या भागवत आज के भाषण में कोई बड़ा राजनीतिक संदेश देते हैं? हम उनके भाषण का पूरा प्रसारण नहीं, बल्कि मुख्य अंश (Highlights) और ब्रेकिंग हेडलाइंस अपने दर्शकों के लिए लेकर आएंगे. मुंबई के सियासी और कारोबारी गलियारों में इस आयोजन को लेकर जबरदस्त चर्चा है.

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