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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार करने वाले प्रदेशभर के 16 लोकसेवकों को किया पुरस्कृत

 भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय लोकसेवा दिवस के अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार करने वाले प्रदेशभर के 16 लोकसेवकों को पुरस्कृत किया। उन्होंने आरसीव्हीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के अंतर्गत वर्ष 2022-23 एवं वर्ष 2023-24 के लिए चयनित लोकसेवकों को 1 लाख रुपए का चेक और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुशासन से जुड़े नवाचारों के लिए कार्य करने वाले सभी लोकसेवकों को राष्ट्रीय लोकसेवा दिवस की बधाई दी। समारोह के मुख्य अथिति डॉ. यादव ने कहा कि विकसित भारत@2047 में मध्यप्रदेश की भूमिका महत्वपूर्ण है। राज्य के लोकसेवकों ने अपने कर्तव्यों को बखूबी निभाया है। जमीनी स्तर पर अधिकारियों द्वारा किए ज रहे नवाचारों को संकलित कर सुशासन के लिए योजना तैयार करने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मौर्य साम्राज्य की स्थापना और विकास में चाणक्य की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि महामंत्री चाणक्य ने सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य को राजा बनाया था और वे स्वयं मंत्री बने थे ताकि एक शक्तिशाली राजवंश में लोकशासन की व्यवस्था को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सके। उन्होंने कहा कि लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने आजादी के बाद देश के भविष्य की नींव तैयार करने के लिए लोकसेवक व्यवस्था को विस्तार दिया और उनके लिए सेवा नियम (सर्विस रूल) तैयार किए। उन्होंने लोकसेवकों के लिए तीन बातों- डिग्निटी, इंटीग्रिटी और इंकरप्टिबिलिटी को रेखांकित किया था। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि प्रत्येक वर्ष 21 अप्रैल अधिकारी/कर्मचारियों के लिए आत्ममंथन करने का दिन है। लोकसेवकों को सोचना चाहिए कि सालभर में उन्होंने जनसेवा और प्रशासन की मजबूती के लिए क्या अच्छा किया और आगे क्या बेहतर किया जा सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को विश्वास दिलाया कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के विकसित भारत@2047 के मिशन को पूरा करने में प्रदेश की भूमिका और विकसित मध्यप्रदेश के लिए सभी लोकसेवक कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। प्रदेश के सभी अधिकारी ईड ऑफ लिविंग और ईड ऑफ डूईंग के लिए मिशन मोड में कार्यरत हैं। 16 लोकसेवकों को मिला मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर माधव प्रसाद पटेल माध्यमिक शिक्षक, अदिति गर्ग आयुष्मान कार्ड में नवाचार, डॉ. इंदिरा दांगी शिक्षक आष्टा, शारदा डुवडे शिक्षक, आलोक पौराणिक प्राथमिक शिक्षक पथरिया, चंद्रमोहन ठाकुर अधोसंरचना श्रेणी में पुरस्कार, डॉ. यशपाल सिंह प्राचार्य आवासीय विद्यालय, संजय जोशी प्रबंध संचालक विद्युत वितरण कंपनी, अमित तोमर प्रबंध संचालक विद्युत वितरण कंपनी जबलपुर, ऋषभ गुप्ता पूर्व कलेक्टर देवास, गणेश शंकर मिश्रा प्रबंध संचालक विद्युत वितरण कंपनी, दिवांग सिंह ग्रीन ब्रांड इंदौर में उत्कृष्ट कार्य, प्रवीण सिंह अढायच पूर्व कलेक्टर सीहोर, प्रो. बेला सचदेवा, भूपेंद्र कुमार चौधरी माध्यमिक शिक्षक, शीला दाहिमा को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार प्रदान किए गए। प्रशासन अकादमी में नरोन्हा व्याख्यान श्रृंखला आयोजित सिविल सेवा दिवस समारोह 2025 के अवसर पर प्रशासन अकादमी में नरोन्हा व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन किया गया है, जिसमें प्रदेशभर के अधिकारी, कर्मचारी शामिल हुए। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता दीपक बागला ने सभागार में उपस्थित अधिकारियों को विकसित भारत के लिए सुशासन से जुड़े अनुभव साझा किए। प्रशासन अकादमी के संचालक मुजीबुर्रमान ने सभी अथितियों का आभार व्यक्त किया। 16 लोकसेवकों को मिला मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर माधव प्रसाद पटेल माध्यमिक शिक्षक, अदिति गर्ग आयुष्मान कार्ड में नवाचार, डॉ. इंदिरा दांगी शिक्षक आष्टा, शारदा डुवडे शिक्षक, आलोक पौराणिक प्राथमिक शिक्षक पथरिया, चंद्रमोहन ठाकुर अधोसंरचना श्रेणी में पुरस्कार, डॉ. यशपाल सिंह प्राचार्य आवासीय विद्यालय, संजय जोशी प्रबंध संचालक विद्युत वितरण कंपनी, अमित तोमर प्रबंध संचालक विद्युत वितरण कंपनी जबलपुर, ऋषभ गुप्ता पूर्व कलेक्टर देवास, गणेश शंकर मिश्रा प्रबंध संचालक विद्युत वितरण कंपनी, दिवांग सिंह ग्रीन ब्रांड इंदौर में उत्कृष्ट कार्य, प्रवीण सिंह अढायच पूर्व कलेक्टर सीहोर, प्रो. बेला सचदेवा, भूपेंद्र कुमार चौधरी माध्यमिक शिक्षक, शीला दाहिमा को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार प्रदान किए गए। प्रशासन अकादमी में नरोन्हा व्याख्यान श्रृंखला आयोजित सिविल सेवा दिवस समारोह 2025 के अवसर पर प्रशासन अकादमी में नरोन्हा व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन किया गया है, जिसमें प्रदेशभर के अधिकारी, कर्मचारी शामिल हुए। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता दीपक बागला ने सभागार में उपस्थित अधिकारियों को विकसित भारत के लिए सुशासन से जुड़े अनुभव साझा किए। प्रशासन अकादमी के संचालक मुजीबुर्रमान ने सभी अथितियों का आभार व्यक्त किया।  

हमारी सरकार OBC वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के निर्णय पर पूरी तरह कायम: मुख्यमंत्री यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ओबीसी आरक्षण को लेकर सरकार की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी सरकार 27 प्रतिशत आरक्षण देने के स्टैंड पर पूरी तरह कायम है। उन्होंने कहा कि सॉलिसिटर जनरल से भी इस विषय में चर्चा की गई है और उन्हें सरकार का स्पष्ट पक्ष रखा गया है। डॉ. यादव ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार में ओबीसी आयोग द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट का परीक्षण किया जा रहा है। इसके साथ ही ओबीसी आरक्षण से जुड़ी सभी लंबित याचिकाओं को लेकर भी गंभीर संवाद की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना के साथ काम हो रहा है और प्रदेश सरकार भी सर्वहारा वर्ग के सर्वांगीण विकास को लेकर प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार न्यायपूर्ण और समावेशी नीतियों के माध्यम से सभी वर्गों को समान अवसर देने के संकल्प पर अडिग है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा- रिट लगाइए, चयनित अभ्यर्थियों को होल्ड करने का मामला भी सुनेंगे सुनवाई के दौरान एमपी के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट से कहा- कि ये 50 फीसदी आबादी से जुड़ा मामला है। उन्होंने कोर्ट से इस मामले की जल्द सुनवाई करने की मांग की। वहीं, सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ताओं को बुलाकर संवाद करेंगे। एससी बोला– आप पिटीशन लगाइए, हम सुनेंगे इस दौरान ओबीसी महासभा के वकीलों ने कोर्ट से कहा कि एमपी में अलग-अलग विभागों में जिन पदों पर भर्ती हुई उनमें से बड़ी संख्या में उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कोर्ट में 27% ओबीसी आरक्षण का मामला लंबित होने का हवाला देकर उन्हें नियुक्ति से वंचित रखा जा रहा है। जबकि 27% ओबीसी आरक्षण पर किसी भी कोर्ट ने कानूनी रोक नहीं लगाई। इसके बावजूद प्रक्रिया के नाम पर चयनित अभ्यर्थियों को जॉइन नहीं कराया जा रहा है। इस पर कोर्ट ने ओबीसी महासभा के वकील से कहा- अगली सुनवाई की तारीख चीफ जस्टिस तय करेंगे ओबीसी महासभा के वकील वरुण ठाकुर ने बताया कि आज की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता भी मौजूद थे। कोर्ट ने सुनवाई के बाद कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख चीफ जस्टिस तय करेंगे। सीएम बोले- आरक्षण को लेकर सरकार पूरी तरह स्पष्ट भोपाल के प्रशासन अकादमी में आयोजित सिविल सेवा दिवस समारोह में शामिल होने के बाद सीएम मोहन यादव ने इस मामले को लेकर कहा कि OBC आरक्षण को लेकर हमारी सरकार पूरी तरह स्पष्ट है। हम हर हाल में 27% आरक्षण के पक्ष में कायम हैं। हमने अटॉर्नी जनरल को यह भी कहा है कि शिवराज सरकार के समय आई ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का परीक्षण किया जाए। जल्द ही इस पर सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे सीएम डॉ. यादव ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ की भावना के साथ हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि सभी वर्गों का हित साधा जा सके। मुझे विश्वास है कि जल्द ही इस मुद्दे पर सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। कमलनाथ सरकार ने 27% किया था OBC आरक्षण कमलनाथ सरकार ने 2019 में ओबीसी वर्ग का आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27% कर दिया था। इसके बाद विधानसभा में इससे जुड़े विधेयक को पारित कर दिया गया। 2 सितंबर 2021 को सामान्य प्रशासन विभाग ने ओबीसी को भर्ती में 27% आरक्षण देने का सर्कुलर जारी किया था। इसके खिलाफ यूथ फॉर इक्वेलिटी संगठन हाईकोर्ट गया। 4 अगस्त 2023 को हाईकोर्ट ने सरकार के सर्कुलर पर रोक लगा दी।

कुम्भ में हर घाट रामघाट होगा, श्रद्धालु कहीं भी स्नान करेंगे उन्हें उतना ही पुण्य मिलेगा: CM यादव

उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को  के पवित्र रामघाट पर जल गंगा संवर्धन अभियान में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने शिप्रा नदी में डुबकी लगाई और घाट की सफाई कर सेवा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। सीएम यादव ने कहा कि शिप्रा नदी के किनारे पंचकोशी परिक्रमा की एक पुरानी परंपरा रही है। हर साल हजारों-लाखों लोग यहां आकर परिक्रमा करते हैं। घाट पर स्वच्छता का ध्यान रखा जाएगा कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने घाट की सफाई में भाग लिया और वे खुद घाट पर पड़े कचरे को हटाते नजर आए। उन्होंने कहा कि पंचकोशी परिक्रमा की शुरुआत में श्रद्धालु जब यहां स्नान करेंगे, तो घाट पर स्वच्छता और जल की शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाएगा। खासकर नदी के अंदर जो गंदगी जम जाती है, उसे साफ करना जरूरी है। 29 किमी के नए घाट तैयार होंगे सीएम ने कहा कि सिध्दनाथ से त्रिवेणी तक 29 किमी के नए घाट तैयार होंगे। पहले से 6 किमी के घाट बने हुए है। इस तरह से कुम्भ में आने वाले श्रद्धालुओं को 35 किमी के घाट उपलब्ध होंगे। कुम्भ में हर घाट रामघाट होगा। श्रद्धालु कहीं भी स्नान करेंगे उन्हें उतना ही पुण्य मिलेगा। इस बार कुम्भ में जलमार्ग बनाने जा रहे है। शनि मंदिर से रामघाट, गऊघाट से लालपुर, मंगलनाथ से रामघाट तक नौकायन से लोग आना-जाना कर सकेंगे। जल गंगा संवर्धन अभियान में उज्जैन पहुंचे सीएम सीएम ने कहा, शिप्रा नदी के किनारे पंचकोशी परिक्रमा की एक पुरानी परंपरा रही है। हर साल हजारों-लाखों लोग यहां आकर परिक्रमा करते हैं। इस परिक्रमा की शुरुआत में श्रद्धालु जब यहां स्नान करेंगे, तो घाट पर स्वच्छता और जल की शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाएगा। खासकर नदी के अंदर जो गंदगी जम जाती है, उसे साफ करना जरूरी है। मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ 30 मार्च (गुड़ी पड़वा) से शुरू होकर 30 जून तक चलेगा। इसका उद्देश्य प्रदेश की नदियों और अन्य जल स्रोतों का संरक्षण करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश वास्तव में नदियों का मायका है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रदेश में कोई ग्लेशियर नहीं होने के बावजूद, यहां की भौगोलिक और वन संपदा के साथ-साथ जनभागीदारी के कारण पर्याप्त जलराशि उपलब्ध है। उन्होंने नर्मदा, केन-बेतवा, चंबल और सोन जैसी प्रमुख नदियों का उल्लेख करते हुए बताया कि ये न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पड़ोसी राज्यों के लिए भी जीवनदायिनी हैं। डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश की कुल जलराशि किसी भी तरह से हिमालय के जल स्रोतों से कम नहीं है। उन्होंने जल स्रोतों के उचित रखरखाव, भूगर्भ जल भंडारण क्षमता में वृद्धि और जल के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘जल ही जीवन है’ के आह्वान को दोहराते हुए बताया कि राज्य सरकार अमृत सरोवर, खेत तालाब और पुरानी जल संरचनाओं के पुनरुद्धार के माध्यम से जल संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत मैं उज्जैन प्रवास पर आया था। शिप्रा को नमन करते हुए मैंने यहां स्नान भी किया और सेवा भाव से कार्य किया। यह हम सबका फर्ज भी है। शिप्रा को नमन करते हुए स्नान किया सीएम ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत मैं उज्जैन प्रवास पर आया था। शिप्रा को नमन करते हुए मैंने यहां स्नान भी किया और सेवा भाव से कार्य किया। यह हम सबका फर्ज भी है।

CM यादव ने कहा PM मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश की धरती पर चीता प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश की धरती पर चीता प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है। भारत और लगभग सम्पूर्ण एशिया महाद्वीप से विलुप्त हो चुके चीतों का पुनर्वास कर राज्य सरकार प्रकृति से प्रगति और प्रगति से प्रकृति के संरक्षण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि आज ही केन्द्रीय पर्यावरण, वन एनं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ मिलकर चीता प्रोजेक्ट की समीक्षा की है। इसमें तय किया कि मध्यप्रदेश में चीता प्रोजेक्ट का विस्तार किया जाएगा। केन्द्रीय मंत्री ने कूनो नेशनल पार्क में आने वाले पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ाए जाने सहित अन्य कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, जिन पर राज्य सरकार शिद्दत से अमल करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को मीडिया को जारी संदेश में यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क के बाद मंदसौर में गांधीसागर अभयारण्य प्रदेश का दूसरा ऐसा स्थान होगा, जहां चीतों को बसाया जा रहा है। हम चीता प्रोजेक्ट के विस्तार की स्वीकृति प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार के आभारी हैं। आगामी 20 अप्रैल को गांधीसागर अभयारण्य से मध्यप्रदेश में चीता प्रोजेक्ट का‍विस्तार करने जा रहे हैं। यह वन्य जीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा। साथ ही वन्य जीव संरक्षण प्रेमियों और देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए भी यह उत्साह का अवसर है।  

सामान्य प्रशासन विभाग की ट्रांसफर पॉलिसी 2025 बनाकर तैयार, किसको कितना रहेगा ट्रांसफर का पावर

भोपाल  तबादलों के लिए इंतजार कर रहे मध्य प्रदेश के कर्मचारी-अधिकारियों के लिए यह राहत भरी खबर है। तबादलों से बैन हटाने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने ट्रांसफर पॉलिसी 2025 बनाकर तैयार कर ली है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की सलाह पर कुछ आंशिक बदलावों के बाद अप्रैल माह में ही कैबिनेट में तबादला नीति लाने की तैयारी चल रही है। पिछले 3 साल से तबादले की बाट जोह रहे सरकारी कर्मचारी-अधिकारियों के लिए एक अच्छी खबर आई है। प्रदेश में तबादला एक्सप्रेस को जल्द ही हरी झंडी मिलने जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग ने तबादला नीति का मसौदा तैयार कर लिया है। सीएम डॉ मोहन की सलाह पर कुछ बिंदुओं में बदलाव किया जा सकता है। इस माह के अंत तक तबादला नीति को राज्य शासन की मंजूरी मिल सकती है। अप्रैल माह में ही मंत्री परिषद की बैठक में तबादला नीति 2025 का अनुमोदन किया जा सकता है। पॉलिसी के अनुसार, करीब 15 दिन से एक महीने तक तबादलों से प्रतिबंध हटाया जा सकता है। आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में आखिरी बार तबादला नीति 2021-22 में लागू की गई थी। उसके बाद अब तक कोई नई नीति नहीं आई है। अब डॉ मोहन सरकार में नई तबादला नीति 2025 लागू होगी। तबादला नीति में ये बिंदू हो सकते हैं शामिल     तबादला नीति में इस बात का प्रावधान रहेगा कि 3 साल से ज्यादा समय से एक ही स्थान पर जमे अधिकारी-कर्मचारियों को हटाया जाए। ऐसे अधिकारियों को दूसरे जिलों में भी भेजा जाएगा।     माना जा रहा है कि किसी भी विभाग में अधिकतम 10 फीसदी कर्मचारियों के तबादले ही हो सकेंगे।     जो अधिकारी-कर्मचारी स्वयं के व्यव पर ट्रांसफर करवाएंगे, उन्हें किसी भी प्रकार का भत्ता नहीं दिया जाएगा।     प्रशासनिक आधार पर होने वाले तबादले में सरकार भत्ता प्रदान करेगी।     मंत्रियों को उनके विभाग के कर्मचारियों के तबादले को लेकर अधिकार प्रदान किए जाएंगे।     जिले के अंदर ट्रांसफर करने का अधिकार प्रभारी मंत्री को दिया जाएगा। प्रभारी मंत्री की अनुशंसा के आधार पर जिला कलेक्टर जिले के अंदर ट्रांसफर कर सकेंगे।     जिले के बाहर तबादला विभागीय मंत्रियों की अनुशंसा पर होंगे, लेकिन राजपत्रित अधिकारियों का तबादला करने के लिए मुख्यमंत्री समन्वय की प्रक्रिया अपनाना होगी।     स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग से जुड़े तबादलों में ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।     विशेष परिस्थितियों में कर्मचारियों को मांगी गई लोकेशन पर ट्रांसफर दिया जाएगा।  

मध्य प्रदेश के लाखो कर्मचारियों को मिलेगा डबल प्रमोशन, 60 हजार पर डिमोशन का भी खतरा

भोपाल  मध्य प्रदेश में 9 साल बाद राज्य सरकार ने एक बार फिर पदोन्नति प्रक्रिया शुरू की है. अभी इसके लिए नियम बनाए जा रहे हैं. इससे मध्य प्रदेश शासन के 4 लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारी लाभान्वित होंगे. हालांकि सरकारी कर्मचारियों को प्रमोशन मिले 8 साल से अधिक समय बीत चुका है. ऐसे में वो डबल प्रमोशन के हकदार हैं. इस पर भी सरकार ने विचार किया है. वहीं सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश से प्रमोशन के साथ आरक्षित वर्ग के अधिकारियों-कर्मचारियों पर डिमोशन का खतरा भी मंडरा रहा है. अब देखना ये है कि सरकार इस मामले का किस प्रकार पटाक्षेप करती है. एक साथ नहीं मिलेगा डबल प्रमोशन जिन कर्मचारियों और अधिकारियों को पदोन्नति मिले 8 साल से अधिक का समय बीत चुका है, या फिर जिन्होंने साल 2014-15 के बाद ज्वाइन किया और उनकी समयावधि 8 साल पूरी हो चुकी है. ऐसे कर्मचारियों-अधिकारियों को डबल प्रमोशन का लाभ सरकार देगी. हालांकि मुख्यमंत्री ने साफ तौर पर कहा है, कि कर्मचारियों को डबल प्रमोशन का लाभ तो मिलेगा, लेकिन एक साथ नहीं. बल्कि सरकार की मंशा है कि इस वर्ष एक प्रमोशन देने के बाद दूसरा प्रमोशन उनको अगले वर्ष दिया जाए. जिससे कर्मचारियों की कमी न हो. इन कर्मचारियों पर लटकी डिमोशन की तलवार सपाक्स संगठन के प्रदेश अध्यक्ष केएस तोमर ने बताया कि “साल 2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सरकार ने एससी-एसटी वर्ग के अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण देने का नियम बनाया था. इस नियम के तहत साल 2016 तक प्रदेश में आरक्षित वर्ग के कई अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रमोशन हुए. इससे आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को काफी फायदा हुआ, लेकिन ओबीसी समेत वो कर्मचारी-अधिकारी जो अनारक्षित वर्ग में थे, वो प्रमोशन में पीछे छूटते गए और उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. जिसमें कोर्ट ने तथ्यों पर विचार करने के बाद इस पदोन्नति प्रक्रिया को रद्द कर दिया. लेकिन इस बीच आरक्षित वर्ग के जिन अधिकारियों-कर्मचारियों को पदोन्नति मिली है, ऐसे लोगों को डिमोशन का खतरा भी बना हुआ है.” हाई कोर्ट भी सुना चुका है फैसला केएस तोमर ने बताया कि “पदोन्नति में आरक्षण नियम 2002 लागू होने के बाद से अब तक प्रदेश के 60 हजार से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रमोशन का लाभ मिल चुका है, लेकिन जब इसे हाईकोर्ट 2016 में रद्द कर चुका है, तो ऐसे में इसकी वैधता कितनी है. तोमर ने बताया कि अभी मध्य प्रदेश में प्रमोशन का कोई नियम नहीं है, इसलिए ठीक है, लेकिन जैसे ही सरकार नए नियम बनाएगी, जो कर्मचारी गलत तरीके से प्रमोशन का लाभ ले रहे हैं. उनको डिमोशन करना होगा. हाईकोर्ट ने भी 31 मार्च 2024 के आदेश में कहा है कि 2002 के नियम के आधार पर जिन एससी-एसटी कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण का लाभ मिला है. उन सभी का डिमोशन किया जाएग. हालांकि सरकार ऐसा करने से बचना चाहती है, इसलिए नए नियमों को ऐसा बना रही है. जिससे सबको समान रुप से पदोन्नति का लाभ मिल सके. यूपी-उत्तराखंड में डिमोट, पंजाब-हरियाणा में क्रीमीलेयर बाहर उच्च न्यायालय ने पदोन्नति को लेकर अपने आदेश में कहा है कि जब तक स्टेटस की यथा स्थिति है, तब तक ना डिमोट होंगे और ना ही प्रमोट किया जाएगा, लेकिन जिस दिन स्टेटस बैकेंड हो जाएगा, यथा स्थिति खत्म हो जाएगी. उसी दिन डिमोट करना पड़ेगा. यूपी और उत्तराखंड में भी बाद में गलत पदोन्नति नियम के कारण आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को डिमोट किया गया. केएस तोमर ने बताया कि सपाक्स ने अपनी याचिका में कहा है कि पदोन्नति में आरक्षण के नियम में क्रीमीलेयर को शामिल नहीं करना चाहिए. ऐसे ही मामले में पंजाब और हरियाणा में पदोन्नति के दौरान क्रीमीलेयर को आरक्षण का लाभ देने से वंचित किया गया है.

जनजातीय जीवन और प्रकृति पर आधारित डॉक्युमेंट्री फिल्मों का होगा प्रदर्शन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केन्द्रीय वन-पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव मध्यप्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में वन पुनर्स्थापन, जलवायु परिवर्तन और समुदाय-आधारित आजीविका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शुक्रवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ करेंगे। नरोन्हा प्रशासन अकादमी, भोपाल में आयोजित होने वाली कार्यशाला में विकसित भारत @2047 के लक्ष्यों में वनों की भूमिका पर मंथन होगा। कार्यशाला में प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह स्वागत उद्बोधन देंगे। दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला की रूपरेखा डॉ. राहुल मूँगीकर प्रस्तुत करेंगे। इस अवसर पर जनजातीय समुदाय और प्राकृतिक संरक्षण पर केंद्रित ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति भी दी जाएगी। प्रमुख विषय : वन संरक्षण, पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक प्रबंधन राष्ट्रीय कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में वन संरक्षण की वर्तमान कानूनी व्यवस्थाएं, उनकी सीमाएं और समाधान, जैव विविधता संशोधन अधिनियम-2023, सामुदायिक वन अधिकार, पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण और वन पुनर्स्थापन जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी। बैंगलुरू से आ रहे प्रो. रमेश विशेषज्ञ वक्तव्य भी देंगे। कार्यशाला में डॉ. योगेश गोखले, डॉ. राजेन्द्र दहातोंडे आदि वक्ता विभिन्न सत्रों को संबोधित करेंगे। राष्ट्रीय कार्यशाला के दूसरे दिन राज्यपाल पटेल समापन सत्र को करेंगे संबोधित राज्यपाल मंगुभाई पटेल राष्ट्रीय कार्य शाला के समापन-सत्र में मुख्य अतिथि होंगे। पूर्व राष्ट्रीय जनजातीय आयोग अध्यक्ष हर्ष चौहान समापन वक्तव्य देंगे। कार्यशाला में वनीकरण, जलवायु संवेदनशीलता और वनवासी समुदायों की समावेशी भागीदारी पर केन्द्रित डॉक्युमेंट्री फिल्मों का भी प्रदर्शन किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण में वनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह कार्यशाला वनों, जैव विविधता, प्राकृतिक संसाधनों और जनजातीय आजीविका को केंद्र में रखते हुए एक सतत और न्यायसंगत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।  

CM Mohan Yadav ने प्रदेश के किसानों के लिए खोल दिया पिटारा, पराली नहीं जलाने वाले को मिलेगी प्रोत्साहन राशि !

भोपाल मप्र में पराली जलाने के बढ़ते मामलों के बीच सरकार किसानों के लिए एक नई स्कीम लेकर आ रही है। इसके तहत जो किसान सरकार की पांच शर्तों को पूरा करेंगे उन्हें सरकार की तरफ से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। एक एकड़ खेत वाले किसान को 1500 रुपए से लेकर 3 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि देने की योजना है। सरकार ने इस नई स्कीम को अन्नदाता मिशन (कृषक कल्याण मिशन) नाम दिया है। इसके जरिए किसानों की आय बढ़ाने के साथ साथ उन्हें जलवायु अनुकूल खेती और फसलों के सही दाम दिलाना है। बता दें कि मंगलवार यानी 15 अप्रैल को हुई कैबिनेट मीटिंग में इस मिशन को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। सरकार ने मिशन के लिए 2028 तक का टारगेट भी तय किया है। इसमें 2.69 लाख वनाधिकार ( एफआरए) पट्टाधारी किसानों को 100 फीसदी फायदा देना है। पहले जानिए सरकार ने क्यों लागू किया मिशन मप्र में लघु और सीमांत किसानों की संख्या सबसे ज्यादा है, मगर उन तक तकनीक और संसाधनों की सीमित पहुंच है। मानसून पर निर्भरता की वजह से ये किसान फसल का सही उत्पादन भी नहीं कर पाते। जिसकी वजह से उन्हें फसल के उचित दाम नहीं मिलते। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि अन्नदाता की आय बढ़ाने के साथ वे खेती के साथ और भी व्यवसाय कर सके इसके लिए सरकार ने पॉलिसी बनाई है। कृषि विभाग के अलावा उद्यानिकी एवं फूड प्रोसेसिंग, खाद एवं नागरिक आपूर्ति, सहकारिता, पशुपालन एवं डेयरी और मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग को भी इसमें जोड़ा गया है। किसानों को इस बात के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा कि वे जलवायु अनुकूल खेती करें। साथ ही ऐसी फसलों का उत्पादन करें जो पोषण और खाद्य सुरक्षा तय करते हैं। विजयवर्गीय ने कहा कि इस पॉलिसी के जरिए गौशालाओं को बढ़ावा देने का काम भी किया जाएगा। इसके लिए आहार, डॉक्टर्स, पैरामेडिकल स्टाफ की व्यवस्था भी सरकार करेगी। 5 शर्तें पूरी की ताे मिलेंगे 3 हजार रु. प्रति एकड़ तक कृषि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक अन्नदाता मिशन के तहत किसानों को 1500 रुपए से लेकर 3000 रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके लिए किसानों को 5 शर्तों को पूरा करना होगा। इनमें तीन शर्तें अहम है। पहली- पराली जलाने से मुक्त खेती को अपनाना, दूसरी- खेती के लिए लिए गए लोन का समय पर भुगतान। तीसरी शर्त के रूप में कीटनाशकों का कम इस्तेमाल यानी जैविक खेती की पद्धति को अपनाना है। इन तीनों शर्तों के अलावा तिलहन और दलहन की फसलें और ड्रिप इरिगेशन पद्धति को बढ़ावा देना भी शामिल है। अधिकारी के मुताबिक मप्र के किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत 12 हजार रुपए प्रतिवर्ष मिल रहे हैं। इन पांच शर्तों को किसान पूरा करते हैं तो उन्हें 15 हजार रु. तक मिल सकते हैं। ये एक तरह से इन्सेंटिव होगा। एमपी में तीन साल में पराली जलाने की 32 हजार से ज्यादा घटनाएं कृषि विभाग के अधिकारी बताते हैं कि हरियाणा,पंजाब, दिल्ली के बाद पराली जलाने की घटना मध्यप्रदेश में बढ़ती जा रही है। पिछले तीन साल के आंकड़े देखें तो रबी और खरीफ सीजन मिलाकर 32 हजार से ज्यादा घटनाएं हुई है। इनमें भोपाल संभाग अव्वल है। दूसरे नंबर पर चंबल संभाग है। अधिकारी के मुताबिक किसान अगली फसल के लिए खेत तैयार करने के लिए आसान रास्ता अपनाते हैं। नर्मदापुरम और हरदा के बेल्ट में गेहूं की फसल काटने के बाद मूंग की फसल लेने के लिए खेत में आग लगा दी जाती है। इससे खेत तो साफ हो जाता है, लेकिन उसकी मृदा शक्ति पर विपरीत असर पड़ता है। किसान बोले- जुर्माने से ज्यादा महंगा खेत की सफाई कराना पराली जलाना किसानों की मजबूरी है। राजगढ़ जिले के किसान मुकेश नागर कहते हैं कि फसल कटाई के बाद जो अवशेष बचते हैं उसे हटाने के लिए बक्खर चलाना पड़ता है। मजदूर एक एकड़ का 4 से 5 हजार रुपए लेते हैं। अब किसी किसान का दो से तीन एकड़ का खेत है तो उसे कम से कम 10 से 15 हजार रुपए खेत की सफाई के लिए लिए देना पड़ते हैं। नागर कहते हैं कि इससे अच्छा तो जुर्माना देकर पराली जलाना है। पांच एकड़ खेत में पराली जलाने पर 5 हजार रुपए जुर्माना है। किसान की अगली फसल की लागत भी नहीं बढ़ती है। यदि सरकार किसानों को पराली न जलाने पर कोई आर्थिक सहायता देगी तो किसान पराली नहीं जलाएगा।

मुखिया मोहन यादव ने लिखा कि गर्मी का मौसम,अपनों के साथ,लस्सी का स्वाद…

नीमच गर्मी का मौसम हो और ठंडी-ठंडी लस्सी मिल जाए तो क्या ही कहने। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आज नीमच में भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ एक दुकान पर लस्सी का स्वाद लिया। इसका वीडियो खुद सीएम ने अपने एक्स हैंडल पर डाला है। आज मोहन यादव सीआरपीएफ के स्थापना दिवस के मौके पर नीमच आए थे। यहां उन्होंने इस अवसर पर आयोजित एक खास कार्यक्रम में भाग लिया। मोहन यादव के अलावा देश के गृह मंत्री अमित शाह भी थे। मध्य प्रदेश के मुखिया मोहन यादव ने लिखा कि गर्मी का मौसम,अपनों के साथ,लस्सी का स्वाद…आज नीमच प्रवास के दौरान कार्यकर्ता बंधुओं के साथ लस्सी का आनंद लिया। इसके साथ उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक 46 सेकेंड का वीडियो भी डाला है। मोहन यादव के इस वीडियो पर लोगों ने भी अलग-अलग कॉमेंट किए हैं। एक एक्स यूजर ने लिखा कि बहुत बढ़िया आपका व्यवहार बड़ा सरल स्वभाव का है। दूसरे ने लिखा कि आप की ड्रेस तथा जैकेट एकदम से मैचिंग है..शॉप की अम्बिएंस के साथ।आप का चाहने वाला बिहार से। इससे पहले आज नीमच में 86वें केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स के स्थापना दिवस पर कार्यक्रम आयोजि हुआ था। इसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी शिरकत की थी। मोहन यादव ने सीआरपीएफ जवानों के सम्मान में लिखा कि CRPF के जवानों के हौसले ने हृदय को गर्व से भर दिया…नीमच की धरती पर 86वें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल दिवस परेड समारोह में शामिल होकर हमारे वीर जवानों के अदम्य साहस,समर्पण और राष्ट्रभक्ति को नमन किया।

दुग्ध उत्पादन में मध्यप्रदेश को देश में प्रथम बनाएंगे: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज पूरी दुनिया सनातन संस्कृति को अब बेहतर तरीके से समझ रही है। उन्होंने कहा कि हर ब्लॉक में एक वृंदावन गांव बनाया जाएगा और दुग्ध उत्पादन में प्रदेश को देश में नंबर वन बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंदसौर में सोमयज्ञ में सम्मिलित हुए और यज्ञ में आहुति देने के साथ संतों का आशीर्वाद भी प्राप्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूजा-अर्चना की तथा सुख, शांति, समृद्धि कामना की। मुख्यमंत्री ने मंच से संत जनों का शॉल-श्रीफल से सम्मान किया। पवित्र नगरी मंदसौर को नशा मुक्त करने पर 160 समाजों द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अभिनंदन पत्र भेंट किया गया। इस दौरान सर्वाध्यक्ष पू.पा. डॉ. आचार्य गोस्वामी गोकुलोत्सवजी महाराज, जिले की प्रभारी मंत्री सुनिर्मला भूरिया, वल्लभ मूल के आचार्यगण, सांसद सुधीर गुप्ता, विधायक सर्वचंदर सिंह सिसोदिया, ओम प्रकाश सखलेचा, माधव मारू, दिलीप सिंह परिहार और राजेश दीक्षित सहित अन्य जनप्रतिनिधि प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज हम सब सोमयज्ञ का हिस्सा बने है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इस यज्ञ का विशेष महत्व है। पूरी दुनिया सनातन संस्कृति को समझ रही है। सनातन संस्कृति की अपनी अलग विशेषता रही है। दुग्ध उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में तीसरे स्थान पर है। प्रदेश में वर्तमान में 9% दूध उत्पादन होता है जिसको बढ़कर 20% किया जाएगा। दूध उत्पादन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को प्रथम स्थान पर लाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हर ब्लॉक में वृंदावन गांव बनाए जाएंगे। दूध का उत्पादन बढ़ाने के विशेष प्रयास किये जाएंगे। गांव की गौशाला अच्छे से संचालित हो इसके लिए प्रयास होंगे। एक व्यक्ति 25 गाय की एक इकाई मानकर आठ इकाई रख सकेंगे। कामधेनु योजना को जमीन स्तर पर उतारेंगे। समाज में संस्कार दिखे इसके लिए धार्मिक नगरों में शराबबंदी की गई। कृष्ण की लीलाओं के पवित्र स्थान को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएंगे।  

किसानों और गौपालकों को कुपोषण दूर करने की दिशा में सरकार योजनाबद्ध तरीके से पूरी ऊर्जा के साथ कार्य कर रही : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश कृषि आधारित राज्य है और इस क्षेत्र में यहां अपार संभावनाएं हैं। किसानों की आय, कृषि उत्पादन, पशुपालन, मत्स्य पालन में वृद्धि के साथ-साथ खाद्य प्र-संस्करण और कृषि से उत्पादित कच्चे माल पर आधारित औद्योगिक इकाई स्थापित करने जैसे हर संभव प्रयास जारी हैं। किसानों और गौपालकों की आय बढ़ाने के साथ-साथ कुपोषण दूर करने की दिशा में सरकार योजनाबद्ध तरीके से पूरी ऊर्जा के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण योजनाएं तैयार की जा रही हैं। मध्यप्रदेश में वर्तमान दुग्ध उत्पादन 9 प्रतिशत से बढ़ाकर जल्द से जल्द 20 प्रतिशत तक करने के लिए राज्य सरकार ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना प्रारंभ की है। इससे हम घर-घर गोकुल तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि हमने गौशालाओं में दुधारू पशुओं के लिए भी अनुदान राशि बढ़ाने का भी निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को मीडिया को जारी संदेश में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विकसित भारत @2047 के विजन के अनुरूप हमारी सरकार ने गरीब, युवा, अन्नदाता (किसान) और नारी कल्याण के लिए मिशन शुरू कर दिए हैं। मंत्रि-परिषद की गत दिवस मंगलवार को बैठक में मध्यप्रदेश कृषक कल्याण मिशन को सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मध्यप्रदेश को विशेषकर गरीबों औरकिसानों को आर्थिक रूप से सुखी और समृद्ध बनाने के लिए प्राण-प्रण से कार्य कर रही है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महा नाट्य के माध्यम से रंगमंच के महत्व से भी पूरे राष्ट्र को अवगत करवा दिया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर विक्रम संवत जिनके नाम पर प्रारंभ हुआ, ऐसे कल्याणकारी शासक रहे सम्राट विक्रमादित्य के सम्मान में कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इसमें विक्रम विश्वविद्यालय का नामकरण, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय करने का निर्णय भी शामिल है। इसके पूर्व वार्षिक विक्रम उत्सव की शुरुआत कर राज्य सरकार ने सम्राट विक्रमादित्य को यथोचित सम्मान देने का कदम उठाया था। इस क्रम में हाल ही में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस महा नाट्य के माध्यम से रंगमंच के महत्व से भी पूरे राष्ट्र को अवगत करवा दिया है। वैसे तो इस डिजिटल युग में सूचना और मनोरंजन के कई फॉर्मेट लोकप्रिय हो चुके हैं, लेकिन भारतीय नाट्यशास्त्र की सुदृढ़ और समृद्ध परंपरा से जन-जन को विशेष रूप से युवा वर्ग परिचित करवाने के लिए नई दिल्ली में सम्राट विक्रमादित्य नाटक का निरंतर तीन दिन मंचन होना महत्व रखता है। बहुत दिन नहीं हुए जब हम डिजिटल तकनीक को आत्मसात कर बैठे थे। ऐसा लगता था कि पारंपरिक कलाओं को हम भूल रहे हैं। लेकिन मध्यप्रदेश से जो संदेश पूरे राष्ट्र में पहुंचा है वह यह है कि अभिनय, प्रकाश संयोजन, संगीत, वेशभूषा और विशाल मंच के माध्यम से हमारे पौराणिक चरित्रों का जीवन सामने आना चाहिए। हमारे वे आदर्श शासक और आराध्य जो युवा पीढ़ी द्वारा भुला दिए गए हैं या युवा पीढ़ी को हमने उनसे परिचित ही नहीं करवाया तो इसमें कसूर वर्तमान पीढ़ी का भी है। युवाओं के पास समय भी है। सृजन की शक्ति भी है, जिज्ञासा का तत्व भी विद्यमान है तो फिर उन्हें इन राष्ट्र के आदर्श प्रतीकों की जानकारी से वंचित क्यों रखा जाए और बच्चे भी कलाओं के प्रति रुचि रखते हैं, वे भी इस विधा के लिए जिज्ञासु हो सकते हैं। यदि उन्हें महान व्यक्तित्वों के बारे में ज्ञानवर्धक विवरण देने वाले नाटक मंचन से जोड़ा जाए। प्रतापी शासक राजा भोज और अन्य सेनानियों की गाथा भी आएगी मंच पर भोपाल में कुछ वर्ष पूर्व लाल परेड मैदान पर जाणता राजा का मंचन हुआ था, जिसमें शिवाजी महाराज के कृतित्व को दर्शाया गया था। इस नाटक के मंचन से यह जागृति प्रारंभ हो जाती लेकिन वह लहर न बन सकी। एकाध मंचन हुआ और मामला समाप्त हो गया। देश की राजधानी में लाल किले पर तीन दिन लगातार सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन मध्यप्रदेश के लिए गर्व की बात है। यह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का नवाचार है। हमारे ऐसी दानवीर शासक जिन्होंने वीरता और न्याय के क्षेत्र में भी दृष्टांत स्थापित किए, वे पाठ्य-पुस्तकों में तो आ गए हैं लेकिन पाठ्य-पुस्तकों से बाहर मंच तक क्यों न पहुंचें। आखिर युवा पीढ़ी को उनकी विस्तार पूर्वक जानकारी क्यों नहीं दी जाना चाहिए? यह नवाचार आगे जाएगा अन्य राज्यों में भी न केवल सम्राट विक्रमादित्य के कार्यों की जानकारी, नागरिकों को मिलेगी बल्कि भगवान श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण, राजा भोज, सम्राट अशोक और स्वतंत्रता सेनानियों सहितभारत के गौरव रहे अन्य महापुरुषों के कृतित्व की गाथा बताने वाली नाट्य प्रस्तुतियां होंगी। दिल्ली में हुए नाट्य मंचन सफल रहे हैं। हाथी, घोड़ों के उपयोग और बीसियों की संख्या में कलाकार दल के साथ इतिहास के उस दौर को जीवंत करना साधारण कार्य नहीं है। संस्कृति विभाग, विक्रमादित्य पीठ, सामाजिक संगठन और सांस्कृतिक संगठन इसके लिए एकजुट हुए। दिल्ली की मुख्यमंत्री ने इन कार्यक्रमों के लिए जो समन्वय किया उसकी भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रशंसा की है। युवाओं को मिलेगी प्रेरणा कलाओं के विकास के साथ भारतीय गौरव का स्मरण करते हुए देश की प्राचीन संस्कृति, भारतीय अस्मिता को सामने लाना आवश्यक है। प्रधानमंत्री मोदी ने सिर्फ कहने के लिए विरासत से विकास की बात नहीं कही, वे चाहते हैं इसका दायरा विस्तृत हो। हमारे युवा हेरिटेज वॉक करें। वे किलों और स्मारकों को देखें। तत्कालीन शासकों के शौर्य से परिचित हों। भारतीय स्वाभिमान के प्रसंग चर्चा का विषय बनें। सिर्फ बंद कमरों में संगोष्ठी न हो बल्कि भारत के ऐसे गौरवशाली व्यक्तित्व बच्चों के बीच भी जाने जाएं। स्कूली पाठ्यक्रम से लेकर विद्यालयों, महाविद्यालय के पाठ्यक्रमों में सगर्व उनका उल्लेख हो और नाट्य मंचन उस थ्योरी को प्रैक्टिकल रूप में रंगमंच पर प्रस्तुत करे। महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य का मंचन युवाओं को रंगमंच विधा की ओर आकर्षित करने के लिए प्रेरित करेगा। रंगमंच कलाकार भी हुए उत्साहित रंगमंच से जुड़े देश के हजारों कलाकारों का मन हर्षित है और वे मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रति आभार का भाव रखते हैं, जो उन्होंने इस कला को महत्व दिया और राज्याश्रय भी दिया। सैकड़ों कलाकारों को प्रोत्साहित किया। थिएटर की शक्ति सही दिशा में और सही विषय को लेकर दिखाई दी है।  

मंदसौर में 3 मई को लगेगा कृषि मेला, कृषि उपकरणों की लगेगी प्रदर्शनी

प्रदेश में लगेंगे किसान मेले: मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसानों को कृषि और सम्बद्ध कार्यों के लिए मिलेगा मार्गदर्शन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंदसौर में 3 मई को लगेगा कृषि मेला, कृषि उपकरणों की लगेगी प्रदर्शनी मुख्यमंत्री से की भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधि मंडल ने भेंट मुख्यमंत्री को किसान हित में निर्णयों के लिए दिया धन्यवाद भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के सभी संभागों में इस वर्ष किसान मेले आयोजित होंगे जिसमें किसानों को कृषि, खाद्य प्र-संस्करण, उद्यानिकी और पशुपालन से संबंधित विभिन्न कार्य पद्धतियों और नए अनुसंधान की जानकारी दी जाएगी। किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक से संबंधित मार्गदर्शन दिया जाएगा। कृषि कार्यों से जुड़े आधुनिक उपकरणों को प्रदर्शित भी किया जाएगा। आगामी 3 मई को मंदसौर में किसान मेले का आयोजन जा रहा है। संभाग स्तरीय किसान मेलों के बाद अक्टूबर माह में एक वृहद राज्य स्तरीय किसान मेला भी आयोजित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधियों से चर्चा कर रहे थे। इस अवसर भारतीय किसान संघ ने प्रदेश में किसानों को 5 रुपए के शुल्क पर विद्युत कनेक्शन और फसलों पर बोनस राशि प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रति आभार व्यक्त किया। अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाने का अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाने के उद्देश्य से प्रदेश में एक वर्ष में दस लाख सौर ऊर्जा पम्प प्रदान करने का लक्ष्य है। यह कार्य अभियान के रूप में चलेगा। एक हॉर्स पॉवर से दस हॉर्स पॉवर तक सोलर पम्प स्थापना के लिए किसान को राशि जमा करवाकर निर्धारित अवधि में कनेक्शन दिए जाएंगे। प्रदेश में किसान खुद बिजली बनाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मजरों टोलों के निवासी जनजातीय वर्ग के लोगों को इस कार्य में प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। बैठक में अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मनु श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश में गत तीन दिन में सोलर पम्प स्थापना के लिए लगभग 17 हजार आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। सुझावों पर करेंगे अमल मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि कृषक प्रतिनिधियों के सुझावों पर राज्य सरकार अमल करेगी। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने बैठक में उपस्थित अधिकारियों को प्रदेश में गठित एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) को सक्रिय करने,किसानों द्वारा नरवाई जलाने को निरूत्साहित करने और रासायनिक खाद के उपयोग को कम करने के संबंध में निर्देश दिए। बैठक में बड़ी परियोजनाओं के लिए किसानों की भूमि लेने पर बदले में भूमि देने के प्रावधान, किसान को हिस्सेदार और मालिक बनाकर उनका हित सुनिश्चित करने, दूध पर बोनस, कम पानी से सिंचाई से मक्का उत्पादन को प्रोत्साहित करने, गौशालाओं के अंतर्गत आधुनिक तकनीक से संचालन, उच्च शिक्षा में कृषि विषय के अध्ययन और जिलों में पर्याप्त पशु चिकित्सकों की व्यवस्था के संबंध में चर्चा हुई। बैठक में कमल सिंह आंजना, चंद्रकांत गौर, राम भरोसे बासोतिया, श्रीमती गिरजा ठाकुर, राजेन्द्र पालीवाल आदि शामिल थे। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास संजय कुमार शुक्ला, कृषि सचिव एम सेलवेंद्रन एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंडला में विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे, सामूहिक विवाह-निकाह कार्यक्रम में शामिल होंगे

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को मंडला जिले के ग्राम टिकरवारा से मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना और सिलेंडल रिफिलिंग योजना की राशि हितग्राहियों के खाते में अंतरित करेंगे। दोपहर 1.30 बजे आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास भी करेंगे। साथ ही मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह-निकाह कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश की एक करोड़ 27 लाख लाड़ली बहनों के खातों में अप्रैल माह की किस्त 1552 करोड़ 38 लाख रूपये अंतरित करेंगे। लाड़ली बहनों को मिलने वाली यह 23वीं किस्त है। योजना में प्रत्येक लाड़ली बहना को प्रत्येक माह 1250 रूपये की राशि उनके खातों में अंतरित की जाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस अवसर पर 56 लाख 68 हजार सामाजिक सुरक्षा पेंशन हितग्राहियों के खातों में 340 करोड़ रूपए की राशि अंतरित करेंगे। मुख्यमंत्री 25 लाख से अधिक बहनों को सिलेंडर रिफिलिंग की 57 करोड़ की राशि भी उनके खातों में सिंगल क्लिक से भेजेंगे।  

प्रदेश वर्षा के जल को सहेजने के लिये नई जल संरचनाओं का निर्माण भी किया जा रहा है। अभियान 30 जून तक जारी रहेगा

जल गंगा संवर्धन अभियान भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल की हर बूंद में जीवन का सार है। इसे सहेजने से ही जल संकट दूर होगा। इसी ध्येय से जनभागीदारी के साथ तीन माह का जल गंगा संवर्धन अभियान पूरे प्रदेश में चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभियान के शुरूआती दौर में ही मंत्री, सांसद, नगरीय एवं पंचायत प्रतिनिधियों के साथ अधिकारी, कर्मचारी और आम नागरिक भी अभियान में सक्रिय भागीदारी निभा रहे है। अभियान में जहाँ एक और पुराने जल स्त्रोतों की साफ-सफाई, गहरीकरण और जीर्णोद्धार किया जा रहा है, वही वर्षा के जल को सहेजने के लिये नई जल संरचनाओं का निर्माण भी किया जा रहा है। अभियान 30 जून तक जारी रहेगा। शहडोल में तालाब का जीर्णोद्धार शहडोल जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रत्येक ग्राम पंचायत में जल संरक्षण के कार्य कराए जा रहे हैं। जल की बूंद-बूंद को सहेजने के लिए गांव-गांव में कुएं, तालाब, कुण्ड और बावड़ी जैसी जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। जिले के गांव कुमारी में वर्षा जल को सहेजने के लिए गांव के तालाब की सफाई के साथ उसका गहरीकरण भी किया गया। इसी प्रकार गांव खाम्हीडोल में भी तालाब का जीर्णोद्धार किया गया। छिंदवाड़ा में विद्यार्थियों ने श्रमदान कर की प्राचीन कुण्ड की सफाई जल गंगा संवर्धन अभियान के जिले के गांव मऊ के नाले में के साफ-सफाई की गई। इसमें से गाद निकाल कर पानी को स्वच्छ किया गया। बीसएसडब्ल्यू व एमएसडब्ल्यू के विद्यार्थियों रीना, शशि बारांगे, पप्पू चौधरी बंदेवार, सुनीता काहर, महिमा साहू, पंकज गाडरे और सागर पवार के साथ ग्रामवासी ने श्रमदान कियाय़ जन अभियान परिषद की पहल पर विद्यार्थियो ने पातालेश्वर धाम मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन जल कुंड से कूड़ा-करकट, पूजन सामग्री, वृक्ष के पत्ते निकालकर सफाई की। देवास में तालाब का किया जा रहा गहरीकरण देवास जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में जल संरचनाओं के निर्माण एवं गहरीकरण का कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में जिला प्रशासन एवं स्थानीय गांवो के जनसहयोग से सोनकच्छ विकासखंड की ग्राम पंचायत अगेरा के तालाब का गहरीकरण किया जा रहा है। इस तालाब के गहरा होने से अधिक वर्षा जल एकत्रितकिया जा सकेगा। इससे स्थानीय भूजल स्तर भी बढ़ेगा और पेयजल के साथ खेती करने के लिए भी पर्याप्त पानी मिल सकेगा। उमरिया में जन सहयोग से पाली सगरा तालाब पर स्वच्छता अभियान उमरिया में जल संरक्षण के लिए ग्राम पंचायतों में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। इसमें नदियों, तालाबों, कुओं की साफ सफाई की जा रही है। इसी श्रृंखला में गांव सगरा के पाली तालाब में साफ सफाई की गई। जन अभियान परिषद, नगर विकास प्रस्फुटन समिति और नवांकुर संस्था ने आपसी सहयोग से जल संरक्षण के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए दीवार लेखन और जल चौपालों का भी आयोजन किया। जल संरक्षण के लिए चलाए जा रहे जल गंगा संवर्धन अभियान की सफलता के लिए समेकित प्रयास आवश्यक हैं। उअभियान में नागरिकों की सोच बदलती दिखने लगा है। नई पीढ़ी भी जन भागीदारी कदम से कदम मिलाकर शामिल हो रही है।  

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