LATEST NEWS

वन एवं वन्य जीव सुरक्षा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं : अम्बाड़े

Negligence in forest and wildlife protection will not be tolerated: Ambade भोपाल। वन बल प्रमुख वीएन अम्बाड़े ने कहा है कि प्रदेश में वन एवं वन्य जीव संरक्षण की दिशा में नियमित रूप से पेट्रोलिंग की जा रही है किन्तु वनों की अवैध कटाई और कम समय में बाघों एवं तेंदुओं की मृत्यु की खबरें आ रहीं हैं। अम्बाड़े ने कहा है कि वन एवं वन्य जीव सुरक्षा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।वन बल प्रमुख वीएन अम्बाड़े ने समस्त फील्ड डायरेक्टर टाइगर रिजर्व और सीसीएफ एवं सीएफ को एक सख्त पत्र लिखा है। पत्र में कहा है कि विगत 20-25 दिनों में टाईगर रिजर्व एवं क्षेत्रीय वनों में 5-6 बाघों एवं तेंदुओं की मृत्यु हुई है। इतनी सुदृढ़ व्यवस्था होने के पश्चात् भी कम समय में बाघ एवं तेंदुओं की इतनी अधिक मृत्यु होना वन एवं वन्य जीव संरक्षण व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगाता है। पेंच एवं सतपुड़ा टाईगर रिजर्व में बाघों की मृत्यु के संबंध में यह बताया गया कि बाघों की मृत्यु आपसी संघर्ष में हुई है। जब बाघों में संघर्ष होता है तो उनकी दहाड़ दूर तक सुनाई देती है, ऐसी स्थिति में एक बाघ की मृत्यु होने के पश्चात् स्थानीय अमले को जानकारी न होना सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ नहीं होने का संकेत देता है। एम-स्ट्रिप (Monitoring System for Tigers – Intensive Protection and Ecological Status), मानसून पेट्रोलिंग आदि के द्वारा निगरानी रखी जाती है फिर भी बाघों की मृत्यु के पश्चात् जानकारी न होना उचित नहीं है। बालाघाट की घटना अत्यंत खेदजनकबालाघाट में जिस प्रकार से बाघ की मृत्यु के पश्चात् वन अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा गंभीर लापरवाही बरती गई। यह अत्यंत ही अशोभनीय एवं खेद का विषय है। अम्बाड़े ने समस्त फील्ड डायरेक्टर टाइगर रिजर्व और सीसीएफ एवं सीएफ को निर्देशित किया जाता है कि वन एवं वन्य जीव सुरक्षा वन विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही सहनीय नहीं है। अतः भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति न हो इस पर विशेष ध्यान दिया जावे।

प्रशासनिक एक्सरसाइज किए बिना वन विभाग में हुए तबादले, कुछ वनमंडल हुए ACF विहीन

Transfers took place in the forest department without any administrative exercise, some forest divisions were left without ACF भोपाल। तबादलों के मौसम में मैनेजमेंट कोटे के आधार पर ACF और रेंजरों के ताबड़तोड़ ट्रांसफर किए गए। पहली बार ऐसा प्रतीत हो रहा है कि प्रशासनिक एक्सरसाइज किए बिना ही स्थानांतरण कर दिए गए। अब पीसीसीएफ प्रशासन विवेक जैन को आईएफएस अफसरों के व्हाट्सप्प ग्रुप पर पोस्ट कर पूछना पड़ रहा है कि समस्त उपवनमंडल रिक्त हो जाते हैं तो तत्काल मेरे फोन पर विवरण भेजे।गत दिनों वन विभाग में एसडीओ और रेंजर्स के तबादले किए गए। पहली बार अधिकारियों ने अपनी मनमानी कर तबादला सूची जारी की। यही वजह रही कि जारी किए गए स्थानांतरण आदेश आने के बाद प्रशासन-एक के पीसीसीएफ विवेक जैन की प्रशासनिक अक्षमता भी उजागर हो गई। अर्थात प्रशासनिक एक्सरसाइज किए बिना स्थानांतरण सूची को अंतिम रूप दे दिया गया। इसके परिणाम स्वरूप कुछ वन मंडल ACF विहीन हो गए। अब प्रशासन एक के पीसीसीएफ को अपने व्हाट्सप्प ग्रुप को यह पोस्ट करना पड़ा कि ‘वर्तमान में हुए ACF स्थानांतरण के पश्चात यदि किसी वनमण्डल के समस्त उपवनमंडल रिक्त हो जाते हैं तो तत्काल मेरे फोन पर विवरण भेजे।’ यही नहीं, मुख्यालय पदस्थ और अपने निज सहायक कि ड्यूटी लगाई है किवह सभी वन मंडलों में लगाकर जानकारी ले और स्थानांतरित एसीएफ को भारमुक्त कराने डीएफओ दबाव बनाएं। उनके पोस्ट जब प्रशासन-एक शाखा से सेवानिवृत पीसीसीएफ से बातचीत की। पहले तो हंसे और फिर बोले कि पूरी प्रशासनिक एक्सरसाइज इस बात के लिए की जाति है कि कहीं वनमण्डल में स्वीकृत एसीएफ के सभी पद रिक्त तो नहीं हो जाएंगे। ऐसी स्थिति बनने के पूर्व ही कितनी ही उच्च दबाव बने पर हम तबादला नहीं करते थे। ऐसी स्थिति में मंत्री और अन्य राजनेताओं के नाराजगी भी झेलनी पड़ती है। एक करने पीसीसीएफ स्तर के अधिकारी की टिप्पणी है कि यह तो प्रशासनिक दिवालियापन है। कुछ डीएफओ ने भार मुक्त करने से किया इंकारपीसीसीएफ विवेक जैन की पोस्ट के बाद मालवांचल क्षेत्र के डीएफओ ने पीसीसीएफ मुख्यालय को पत्र लिखकर उनके वन मंडल में एकमात्र एसीएफ को भारमुक्त करने से मना कर दिया है। इंदौर वन मंडल में दो एसीएफ पदस्थ हैं और दोनों को ही स्थानांतरित कर दिया गया और अब रालामंडल के अधीक्षक को मैनेजमेंट के आधार पर इंदौर का अतिरिक्त प्रभार देने के निर्देश भोपाल से दिए गए हैं। हास्यास्पद पहलू यह कि इंदौर में पदस्थ एसीएफ का स्थानांतरण इसलिए कर दिया गया क्योंकि पिछले दिनों संपन्न कार्यशाला में कई अफसरों और उनकी पत्नियों की इच्छा अनुसार व्यवस्था नहीं कर पाया था। ट्रांसफर नीति का खुला उल्लंघनशीर्ष अधिकारियों ने एसीएफ और रेंजर्स के तबादले करते समय राज्य सरकार के स्थानांतरण नीति का भी उल्लंघन किया। नीति में साफ तौर पर पति-पत्नि का एक साथ रहने का अधिकार दिया है। इसका पालन वन विभाग ने नहीं किया गया। रीवा सर्किल ऑफिस के संलग्नाधिकारी विद्या भूषण मिश्रा का ट्रांसफर खरगोन वनमंडल कर दिया। जबकि उनकी पत्नि रीवा आईटीआई कॉलेज में प्रशिक्षण अधिकारी हैं। वैसे भी रीवा में सामाजिक वानिकी में एसडीओ के दो पद खाली है। मिश्रा को तत्काल प्रभाव से बाहर मुक्त कर दिया है और उनका प्रभार सीनियर रेंजर को सौंपा है, जोकि प्रभारी एसडीओ है। अब रेंजर के पास मऊगंज और रीवा का प्रभार आ गया है। यानी यहां भी मुख्यालय के अफसर ने प्रभार का खेल खेला है। मंत्रालय में बरसों से जमे हैं एसडीओ और बाबूरेंजर संगठन के व्हाट्सएप ग्रुप में एक यक्ष प्रश्न उठाया है कि क्या वन विभाग अंतर्गत ट्रान्सफर नीति और ट्रान्सफर केवल वन विभाग के वर्दी वाले लोगों के लिए लागू होते हैं ? क्या ट्रांसफर नीति वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और मुख्यालय के एसीएफ और उनके बाबुओं के लिए नहीं? मुख्यालय के साथ-साथ प्रदेश के अनेक वन वृत्तों और वनमण्डलों में सैकड़ों की संख्या में ऐसे बाबू हैं जिनकी नियुक्ति उसी ऑफिस में पार्टिकुलर उसी शाखा में हुई और उसी में प्रमोशन और रिटायरमेंट हुआ। लेकिन उनका ट्रांसफर उस शाखा और उस ऑफिस से नहीं हुआ। संरक्षण शाखा, कैम्पा, वित्त एवं बजट, प्रशासन, एचआरडी आदि शाखाओं 4-5 सालों से एसीएफ और 8-9 सालों से कंप्यूटर ऑपरेटर जमे हैं पर उनका ट्रांसफर करने की हिमाकत कोई नहीं कर पा रहा है। ये कंप्यूटर ऑपरेटर शाखा चला रहे हैं और उनके अफसर रबर स्टाम्प बने हुए है। सूत्रों की खबर यह भी है कि कतिपय कंप्यूटर ऑपरेटर अपने अपने मुखियाओं के नाम से डीएफओ-एसडीओ और रेंजर्स से चौथ वसूली भी करते हैं। पिछले दिनों नई वाहनों के रजिस्ट्रेशन के नाम पर धन संग्रह किए गए हैं।

930 रुपए किलो का गुग्गल 1700 रूपये में खरीदने के मामले की नहीं हो पा रही है जांच

The case of buying guggal worth 930 rupees per kg for 1700 rupees is not being investigated भोपाल। लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक बिभास ठाकुर के निर्देश एमएफपी पार्क बरखेड़ा पठानी में बेअसर साबित हो रहें है। इसका सबसे बड़ा उदाहरणएमएफपी पार्क में हुई रॉ मटेरियल खरीदी में गड़बड़झाला की जांच एक साल से एमडी ठाकुर जांच नहीं करवा पा रहें हैं। इस बीच खबर है कि पार्क की सीईओ गीतांजलि गुग्गल खरीदी में विवादों की सुर्खियों में रहीं प्रभारी सुनीता अहिरवार को पुनः प्रबंधक बनने की प्रक्रिया तेज कर दी है। लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक विभाष ठाकुर ने 31 जनवरी 25 को एमएफपी पार्क की सीईओ गीतांजलि को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि गुग्गल की खरीदी 930 रूपये की जगह 1700 रुपए की दर से खरीदने की जांच सात दिन में बिंदुवार प्रतिवेदन दें। 1 महीने से अधिक का समय बीत गया है पर पार्क की सीईओ ने एमडी के पत्र पर जांच शुरू नहीं की। दिलचस्प पहलु यह है कि गुग्गल खरीदी की जांच को लेकर फेडरेशन के एमडी ठाकुर ने पूर्व के सीईओ को भी दो से अधिक पत्र लिख चुके हैं पर एमएफपी पार्क में उनके पत्रों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि एमडी ने पिछले दिनों पर के दोनों डॉक्टरों को कारण बताओं नोटिस जारी किया था। इनमें से किसी ने भी अब तक नोटिस का जवाब नहीं दिया है। इसके पहले लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक ठाकुर ने भंडारण की जांच के लिए एसीएफ मणि शंकर मिश्र को 7 दिन में जांच का रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे किंतु अभी तक जांच शुरू नहीं हुई। चिंताजनक पहलू यह है कि एसीएफ मिश्रा जांच के भंडारण से संबंधित दस्तावेज मांगने के लिए एमडी ठाकुर से लगातार चिट्ठीयां लिखना शुरू किया तो उन्हें ही वहां से हटा दिया गया। क्या है मामलाएमएसपी पार्क की तत्कालीन प्रबंधक अहिरवार ने गूग्गल सहित प्रष्टपर्णी, काली मिर्च, हींग, पुनर्नवा आदि रॉ मैटेरियल की खरीदी के लिए टेंडर किया था। टेंडर में गुग्गल के लिए हर्बल ऑटोमेशन हरिद्वार का रेट 930 रूपये प्रति किलोग्राम था। एसपी पार्क के कर्ताधर्ता ने हर्बल ऑटोमेशन हरिद्वार से खरीदी न करके आर्यन फार्मेसी से ₹1700 की कीमत पर 4000 किलो खरीदी की। हर्बल ऑटोमेशन हरिद्वार फर्म से न तो वर्क आर्डर दिया गया और न किसी प्रकार का पत्राचार किया गया। आर्यन से खरीदी से संघ को 30 लाख 80000 रुपए का अधिक भुगतान करना पड़ा है। प्रभारी एसडीओ एवं उत्पादन प्रबंधक ⁠सुनीता अहीरवार के कार्यकाल में 6 करोड़ों की govt सप्लाई में 3 करोड़ से अधिक की रॉ -मटेरियल ख़रीदी के भुगतान किये गये है, जिसमें 2 करोड़ के बिल तो आर्यन फ़ार्मेसी के थे। इसके अलावा 30-35 लाख के मरम्मत के भुगतान किये जा चुके है।

मप्र से सागवान लकड़ी अवैध कटाई कर नागपुर, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में हो रहा अवैध कारोबार

Illegal cutting of teak wood from Madhya Pradesh is taking place in Nagpur, Rajasthan, Andhra Pradesh and Telangana. भोपाल। जंगल महकमे मुख्यालय सर्किल और वनमंडलों में कई पद रिक्त पड़े हैं। खासकर सर्किल और वनमंडलों डीएफओ से लेकर डिप्टी रेंजर्स के पास खाली है। मैदानी अवल की बात करें तो वन विभाग में वन और वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए 25000 के लगभग अमला स्वीकृत है. इनमें से 1900 खाली पड़े हैं. स्वीकृति अमले से 8% फॉरेस्ट गार्ड डीएफओ और पीएफ कार्यालय बाबू गिरी का काम कर रहे हैं तो 4% फॉरेस्ट गार्ड रसूखदार प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के अफसरों के कार्यालयों और उनके बंगले पर दरबान दरबान बने हुए हैं. यह स्थिति भोपाल से लेकर 16 सर्किल और 65 वन मंडलों में बनी हुई है। इसका फायदा लकड़ी माफिया से लेकर अतिक्रमण माफिया तक उठा रहे हैं। फील्ड से मिली जानकारी के अनुसार मप्र से सागवान लकड़ी अवैध कटाई कर नागपुर, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कई शहरों में अवैध कारोबार हो रहा है। एक अनुमान के अनुसार टिंबर माफिया प्रदेश में सागौन की अवैध कटाई कर 100 करोड़ रूपया से अधिक का कारोबार करता है। फील्ड से मिली जानकारी के अनुसार जबलपुर, बैतूल, छतरपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, शहडोल और उज्जैन वन वृत में सबसे अधिक लकड़ी की अवैध कटाई हो रही है। धार वन मंडल में 40 घनमीटर सागवान की लकड़ी जप्त और देवास वन मंडल में हुई अवैध कटाई इस बात की गवाह है कि प्रदेश में धड़ल्ले से अवैध कटाई हो रही है। लकड़ी की अवैध कटाई और अन्य राज्यों में तस्करी की शिकायत नागपुर टिंबर संगठन के अलावा मध्य प्रदेश के टिंबर संगठन ने बकायदा पीसीसीएफ संरक्षण को की है। इस शिकायत की पुष्टि वन विभाग में अवैध कटाई से संबंधित दर्ज अपराधिक प्रकरण भी करते हैं। इस संबंध में छिंदवाड़ा सर्कल में एक समीक्षा बैठक भी हो चुकी है। इस समीक्षा बैठक में वन वृत और वन मण्डलों में पदस्थ आईएफएस अधिकारियों के साथ-साथ टिंबर संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित थे। इस बैठक में दिलचस्प पहलू यह रही कि जंगलों की सुरक्षा की जिम्मेदार अधिकारी टिंबर संगठन के पदाधिकारी से प्रमाण मांगते नजर आ रहे थे। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि छिंदवाड़ा में तो अवैध कटाई और तस्करी से संबंधित समीक्षा हुई किंतु मुख्यालय स्तर पर पूर्णकालिक पीसीसीएफ संरक्षण नहीं होने की वजह से मॉनिटरिंग भी नहीं हो पा रही है। टिंबर संगठन के पदाधिकारी के शिकायत की पुष्टि वन विभाग के अधिकृत आंकड़े भी कर रहें है। विभाग के अधिकृत आंकड़े बताते हैं कि इस वर्ष जबलपुर वन वृत में कुल दर्ज अपराधी प्रकरण 3445 में से 3129 प्रकरण केवल अवैध कटाई से संबंधित हैं। इसी प्रकार छिंदवाड़ा वन वृत्त में दर्ज प्रकरण की संख्या 2302 है तो अवैध कटाई के प्रकरण 2206 दर्ज किए गए हैं। उज्जैन वन वृत 1201 प्रकरण अवैध कटाई से संबंधित हैं। विदिशा वन मंडल के लटेरी और उसके आसपास क्षेत्र में आज भी अवैध कटाई के सिलसिला जारी है। अपर मुख्य सचिव अशोक अग्रवाल ने कलेक्टर एसपी के साथ बैठक की परंतु नतीजा कुछ नहीं निकला। लटेरी में आज भी रेंजर के पद खाली पड़े हैं। मुख्यालय और राज्य शासन स्तर पर कोई प्रयास नहीं किया गया। सुरक्षा में हर साल वनकर्मियों के साथ मारपीट के 20-30 प्रकरण संरक्षण शाखा से एकत्रित आकड़ों के मुताबिक वन एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा में हर साल वनकर्मियों के साथ मारपीट के 20-30 प्रकरण दर्ज हो रहे है। पिछले तीन सालों में जंगलों की सुरक्षा में आधा दर्जन वनकर्मियों को अपनी जान तक गंवाने पड़े है। यही नहीं, विदिशा, रायसेन, गुना, शिवपुरी, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, नरसिंहपुर, बालाघाट, बैतूल, छिंदवाड़ा, सागर, दमोह, बुरहानपुर, वन मंडलों में 2 दर्जन से अधिक वन कर्मचारियों पर माफिया प्राणघातक हमला कर चुके हैं। सीआरपीसी की धारा 197 के तहत वन कर्मियों को प्रोटेक्शन दिया गया है कि गोलीबारी की घटना में तब तक एफआईआर दर्ज नहीं होगी जब तक राजपत्रित ऑफिसर की जांच रिपोर्ट न जाए। बुरहानपुर के बाद लटेरी गोलीकांड में वन कर्मियों पर बिना जांच के आईपीसी की धारा 302 और 307 के तहत एफआईआर दर्ज कर दी गई। धार में कछुआ गति से 40 घन मीटर की जांच वन मंडल धार में आरा मशीन मनावर से जब्त 40 घन मीटर अवैध सागवान के मामले में जांच कछुआ गति से चल रही है। बताया जाता है कि जांच में वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बचाने का प्रयास चल रहा है। 3 सप्ताह बाद भी वन विभाग की टीम या पता लगाने में असफल रही कि 40 घन मीटर सागवान चटपट धार में कहां से आई ? वन विभाग यह भी पता नहीं लगा सकी कि 2 साल से चल रहे गोरख धंधे में किन-किन अधिकारियों एवं कर्मचारियों का इदरीशखान से सांठ-गांठ है। धार वन विभाग की बड़ी कार्यवाही के बाद यह सवाल उठने लगा है कि इतनी बड़ी मात्रा में सागवान इमारती लकड़ी कहां से काट कर आ रही थी? अवैध कटाई और उसके अवैध खरीद-फरोख्त के गोरख धंधे में वन विभाग के कौन-कौन अधिकारी -कर्मचारी शामिल थे? यह सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि तीन दिन पहले ही फॉरेस्ट के कर्मचारियों ने निरीक्षण किया था और सब कुछ ओके पाया था। मनावर एसडीओ और कुक्षी के प्रभारी रेंजर की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

मध्यप्रदेश: 10 हाथियों के मरने की वजह आई सामने, मिलेट का फंगी कनेक्शन

Madhya Pradesh: Reason for death of 10 elephants revealed, understand the fungal connection of millet भोपाल: मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पिछले महीने 10 हाथियों की मौत का कारण कोदो में फफूंद संक्रमण बताया जा रहा है। हैदराबाद के ICRISAT के वैज्ञानिकों ने यह जानकारी राज्य सरकार को दी है। वन अधिकारियों का कहना है कि ICRISAT की फाइनल रिपोर्ट का इंतजार है। तीन तरह के फंगस मिले ICRISAT ने शुरुआती जांच में कोदो के नमूनों में तीन तरह के फफूंद – एस्परजिलस फ्लेवस, एस्परजिलस पैरासिटिकस और पेनिसिलियम साइक्लोपियम की मौजूदगी की पुष्टि की है। इन फफूंदों से साइक्लोपिआज़ोनिक एसिड नामक जहरीला पदार्थ पैदा होता है, जिसके सेवन से हाथियों की मौत होने की आशंका है। फाइनल रिपोर्ट का इंतजार वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि हमें ICRISAT की फाइनल रिपोर्ट का इंतजार है। उन्होंने पुष्टि की है कि हाथियों द्वारा खाए गए कोदो में ये फफूंद मौजूद थे। घटना की जांच के लिए, एमपी के अधिकारियों ने ICRISAT सहित पूरे भारत में 10 प्रयोगशालाओं में नमूने भेजे थे। ICRISAT, हैदराबाद स्थित एक गैर-लाभकारी अनुसंधान संगठन है, जो विशेष रूप से अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में कृषि प्रणालियों को बेहतर बनाने में माहिर हैं। बरेली से आ गई है रिपोर्ट बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) ने भी अपनी विषाक्तता परीक्षा रिपोर्ट में पुष्टि की है कि कोदो में फफूंद विषाक्त पदार्थों, विशेष रूप से साइक्लोपिआज़ोनिक एसिड के कारण हाथियों की मौत हुई। जहर की नहीं हुई थी पुष्टि हाथियों के लीवर, किडनी, तिल्ली और आंतों सहित विभिन्न अंगों के नमूने विश्लेषण के लिए IVRI भेजे गए थे। परीक्षणों में साइनाइड, भारी धातुओं, या ऑर्गनोफॉस्फेट या पाइरेथ्रोइड जैसे सामान्य कीटनाशकों का कोई निशान नहीं पाया गया। हालांकि, सभी नमूनों में साइक्लोपिआज़ोनिक एसिड पाया गया, जिसकी सांद्रता 100 पार्ट्स प्रति बिलियन (ppb) से अधिक थी। सात एकड़ में कोदो की खेती हाथियों ने जिस कोदो की फसल को खाया था वह बांधवगढ़ के अंदर 7 एकड़ जमीन पर थी। असामान्य फफूंद वृद्धि के संकेतों के बावजूद, जांचकर्ताओं को इस बात का कोई सबूत नहीं मिला कि उस क्षेत्र में कीटनाशकों का उपयोग किया गया था। स्थानीय किसानों ने भी ऐसे किसी भी रसायन के उपयोग से इनकार किया है। हाथियों की मौत 29 अक्टूबर, 2024 को शुरू हुई थी। शुरुआत में फफूंद संक्रमण पर ही संदेह जताया गया था। अधिकारी अभी भी इस मामले की जांच कर रहे हैं, ताकि फंगस की पूरी सीमा और क्षेत्र के वन्यजीवों पर इसके प्रभाव को समझा जा सके।

जंगल महकमे में रिक्त है एमडी से लेकर फील्ड डायरेक्टर तक के पद, खेला जा रहा है प्रभार का खेल

Posts from MD to Field Director are vacant in the forest department, the game of charge is being played. भोपाल। जंगल महकमे में पीसीसीएफ कैम्पा, वन विकास निगम के एमडी से लेकर वन वृत के संरक्षक, डीएफओ और पेंच और कान्हा नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर के पद रिक्त है। इन पदों पर पूर्णकालिक पोस्टिंग के बजाय राज्य शासन के शीर्ष अधिकारी प्रभार का खेल खेल रहे हैं। केंद्र की फटकार के बाद ही बांधवगढ़ में साल भर बाद फील्ड डायरेक्टर की पोस्टिंग की गई। पीसीसीएफ कैंपा और वन विकास निगम के एमडी, वन संरक्षक, छतरपुर वन वृत शिवपुरी वन वृत के वन संरक्षक, इंदौर वन वृत में वन संरक्षक, वन मंडल रीवा, सिवनी दक्षिण, शहडोल उत्तर, शाजापुर, राजधानी परियोजना वन मंडल, विदिशा इत्यादि वन मंडलों में डीएफओ के पद रिक्त है। वन मंडलो के अलावा भोपाल और सागर को छोड़कर सभी अनुसंधान एवं विस्तार वन वृत्त में पद खाली पड़े हुए है। इन पदों पर प्रभार देने का खेल खेला जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस खेल में मंत्रालय से लेकर मुख्यालय तक के शीर्ष अधिकारी शामिल हैं। वन विभाग ने प्रभार देने का कोई क्राइटेरिया तय नहीं किया गया है। पीपी मोड और शीर्ष अधिकारियों की गणेश परिक्रमा करने वाले आईएफएस अफसरों को ही प्रभार को दिया जा रहा है। मसलन, वन विकास निगम के एमडी का प्रभार इंदौर में पदस्थ एपीसीसीएफ अजय यादव को दिया गया है। पीसीसीएफ कैम्पा का प्रभार देने में मुख्यालय से लेकर मंत्रालय तक कंफ्यूज रहे। कैंपा पीसीसीएफ महेंद्र धाकड़ के रिटायर होने पर पीसीसीएफ संदीप सिंह को केंप का प्रभाव दिया गया। इस आदेश के 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि अचानक शासन ने अपने आदेश में संशोधन करते हुए केंप का प्रभार पीसीसीएफ पीके सिंह को दे दिया गया। वर्तमान में पीके सिंह के पास पीसीसीएफ सामाजिक वानिकी के अलावा संरक्षण का भी प्रभार है। कैम्पा का प्रभार आने पर उनके पास महकमे के दो-दो प्रमुख शाखों का प्रभार है। कान्हा का प्रभार डिप्टी डायरेक्टर को दिया एसीएस के ब्लू आई ऑफिसर एवं डिप्टी डायरेक्टर कान्हा नेशनल पार्क पुनीत गोयल को फील्ड डायरेक्टर का भी प्रभार दे दिया गया। ऐसा पहली बार किया गया है, क्योंकि कैडर में फील्ड डायरेक्टर पद सीसीएफ अथवा सीएफ का पद है। अंतरराष्ट्रीय स्तर छवि वाले कान्हा नेशनल पार्क में नक्सली मूवमेंट भी है। ऐसे डिप्टी डायरेक्टर के ऊपर कान्हा टाइगर रिजर्व का प्रबंध छोड़ देना, यह वन मंत्रालय की अक्षमता का परिचायक है। पेंच नेशनल पार्क के बफर जोन का वर्किंग प्लान बनाने वाले आईएफएस अधिकारी जे देवा प्रसाद को पेंच नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर के अलावा अनुसंधान विस्तार सिवनी का भी प्रभार दिया गया है। यानि प्रसाद को तीन पदों का प्रभार एक साथ दिया गया है। इंदौर वन वृत का प्रभार मस्तराम बघेल वन संरक्षक उज्जैन, छतरपुर का प्रभार अनिल कुमार सिंह वन संरक्षक सागर को दिया गया है। रिक्त सभी वन मंडलों में डीएफओ का प्रभार भी प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रशासन एक विवेक जैन की विशेष कृपा पर ही दिया गया है। प्रभार देने की खेल के चलते ही हाल ही में 6 आईएफएस अधिकारियों की वर्किंग प्लान बनाने के लिए में पोस्टिंग की गई, जिनमें से केवल देवांशु शेखर को ही सागर अनुसंधान एवं विस्तार का प्रभार दिया गया है। आपदा को अवसर में बदला प्रभार का खेल खेलने में मंत्रालय से लेकर मुख्यालय के शीर्ष अधिकारी ने तो आपदा को अवसर में बदल दिया है। यानी अधिकारियों की कृत्रिम कमी दर्शाकर प्रभार का खेल खेला जा रहा है। उदाहरण के तौर पर बांधवगढ़ नेशनल पार्क में फील्ड डायरेक्टर के पद के लिए बृजेंद्र झा, अनिल शुक्ला, रमेश विश्वकर्मा, रविंद्रमणि त्रिपाठी और नरेश यादव जैसे वाइल्ड लाइफ एक्सपीरियंस होल्डर आईएफएस अधिकारी के होते हुए भी शिवपुरी में पहले से कार्यरत वन संरक्षक अनुपम सहाय को फील्ड डायरेक्टर बनाकर वन संरक्षक शिवपुरी का पद जानबूझकर रिक्त कर दिया गया। ताकि इस पद को मैनेजमेंट कोटे से भरा जा सके। पोस्टिंग के इंतजार में है अफसर प्रभार का खेल खेलने के कारण ही वर्किंग प्लान बना चुके आईएफएस अधिकारियों की पोस्टिंग नहीं की जा रही है। दिलचस्प पहलू यह है कि इस मामले में मुख्यालय के अधिकारी बताते हैं कि प्रस्ताव शासन के पास लंबित है। यानी शासन के स्तर पर पोस्टिंग में कोई दिलचस्पी नहीं ली जा रही है। यही वजह है कि प्रभार का खेल खेलने के लिए मैदान खाली है। धार का वर्किंग प्लान बना चुके आदर्श श्रीवास्तव, जबलपुर में पदस्थ वर्किंग प्लान अधिकारी रमेश विश्वकर्मा, वर्किंग प्लान अधिकारी पीएन मिश्रा, वर्किंग प्लान अधिकारी एचएस मिश्रा जैसे आईएफएस अफसर को अपनी पोस्टिंग का इंतजार है। इनमें से कुछ अधिकारियों की सेवा के 5 महीने बचे हैं तो किसी अफसर के रिटायर होने की साल भर की मियाद बाकी है। अब सीएफ और डीएफओ भी खेलने लगे भोपाल से शुरू हुआ प्रभार देने का खेल अब वन संरक्षक और डीएफओ भी खेलने लगे हैं। धार वन मंडल में तो एक-एक डिप्टी रेंजरों को दो-दो रेंज के अलावा उन्हें एसडीओ का भी प्रभार दिया गया है। धार में इसी वर्ष वनपाल से बने प्रभारी उप वन क्षेत्रपालों को दो रेंजों का प्रभार दे दिया है। जबकि वन मंडल धार में ओरिजिनल उपवन क्षेत्रपाल विक्रम सिंह निनामा एवं कमलेश मिश्रा पदस्थ हैं और वे सीनियर भी हैं किन्तु उन्हें नहीं दिया गया। इसके कारण वन मंडल में असंतोष है और यही कारण है कि धार वन मंडल में अवैध कटाई और अतिक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। रीवा वन वृत के अंतर्गत आने वाले रीवा, सीधी, सतना और सिंगरौली, छतरपुर वन वृत्त के अलावा प्रदेश के अधिकांश वन मंडलों में एसडीओ- रेंजर के पद लंबे समय से रिक्त है। इन पदों पर भी प्रभार का खेल खेला जा रहा है।

दो दशक से सक्रिय नेक्सेस को नहीं तोड़ पाए वन बल प्रमुख, डीएफओ फिर जोड़ रहे हैं मनमानी शर्ते

 The forest force chief could not break the nexus that has been active for two decades, the DFO is again adding arbitrary conditions उत्तम शर्मा कमेटी द्वारा बनाई गई शर्ते डस्टबिन में  उदित नारायण  भोपाल। दो दशकों से जंगल महकमें में बने सीएफ-डीएफओ और सप्लायर्स नेक्सस को तोड़ने में वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव का नेक-नियति प्रयास भी असफल नजर आ रहैं है। वन बाल प्रमुख के निर्देश पर तैयार निविदा की एकजाई शर्तें को दरकिनार बैतूल उत्तर- पश्चिम, बड़वानी बुरहानपुर, खंडवा के डीएफओ सप्लायर्स के इशारे पर अपनी शर्ते अलग से जोड़ दे रहे हैं। कुछ डीएफओ को तो मंत्री के नाम पर शर्तें बदलवाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।  पिछले दिनों एक दर्जन से अधिक डीएफओ ने टेंडर आमंत्रित किए हैं। इसमें बुरहानपुर डीएफओ ने बीआईएस (BIS) की शर्ते जोड़ दी है। जबकि  उत्तम शर्मा कमेटी द्वारा बनाई गई निविदा की शर्तों में बीआईएस (BIS) की शर्त का उल्लेख नहीं है।  चैनलिंक फेंसिंग और बार्बेड वायर की निविदा में BIS शर्त जोड़कर फारेस्ट अफसरों ने महज तीन-चार बड़े कारोबारियों के बीच 70-80 करोड़ का बंदरबांट करना है। मध्य प्रदेश में चैनलिंक फेंसिंग के लिए BIS लाइसेंस केवल दो कंपनियों—मौर्य वायर और नवकार ग्रेनाइट्स—के पास है। इसी प्रकार बार्बेड वायर के कारोबार में BIS लाइसेंस सिर्फ तीन कंपनियों—मौर्य वायर (इंदौर), नवकार ग्रेनाइट्स (मंदसौर), और मां शारदा वायर (मंडला) के पास हैं। इसके अलावा चैनलिंक फेंसिंग: कोई भी कंपनी BIS लाइसेंस प्राप्त नहीं है। बार्बेड वायर: BIS लाइसेंस चार से पांच कंपनियों के पास है। अन्य डीएफओ द्वारा आमंत्रित निविदा में प्रीबीड मीटिंग में अनिवार्य रूप से हिस्सा लेने और प्रस्तावित चैनलिंक फेंसिंग के कंपार्टमेंट की फोटो अनिवार्य रूप से निविदा प्रपत्र में सबमिट करने के लिए कहा है। अब सवाल यह उठता है कि इंदौर और अन्य शहरों के सप्लायर्स बिना जानकारी के जंगल में स्पॉट कहां ढूंढते फिरेंगे? सूत्रों से खबर यह भी आ रही है कि डीएफओ अपने पसंदीदा सप्लायर के साथ एक फॉरेस्ट गार्ड भेजकर फोटो क्लिक करने में मदद करवा रहे हैं। इसी प्रकार प्रीबिड बैठक से सप्लायर के बीच समझौता होने लगा है और इससे कंपटीशन खत्म होने का खतरा बढ़ गया है।  प्रतिस्पर्धा बढ़े, मध्यम वर्ग को अवसर मिले वन बल प्रमुख श्रीवास्तव ने नेक्सस को तोड़ने और लघु एवं मध्यम वर्ग के कारोबारी को अवसर प्रदान करने के लिए पूरे प्रदेश के लिए एक जैसी शर्तें बनवाई। इन शर्तों को तैयार करने में अपर प्रधान मुख्यमंत्री वन संरक्षक उत्तम शर्मा के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई गई। कमेटी ने महीनों मंथन कर एक समान शर्तों का ड्राफ्ट तैयार किया। नई शर्तों का ड्राफ्ट सभी सीसीएफ, सीएफ और डीएफओ को भेजा गया। प्रदेश की कुछ डीएफओ द्वारा आमंत्रित निविदा की शर्तों में न तो एकरुपता है और न ही शर्मा कमेटी द्वारा तैयार शर्तों का अक्षरश: पालन किया गया है। वन बल प्रमुख बनने के बाद से असीम श्रीवास्तव को लगातार शिकायतें मिल रही थी कि टेरिटोरियल में बैठे डीएफओ और सीएफ कमीशन बाजी का खेल खेलने के लिए मनमानी शर्तें जोड़ रहे हैं। इसके कारण मध्य और लघु कारोबारी प्रतिस्पर्धा से बाहर होते जा रहे हैं।  क्या खरीदी होती है वन विभाग में हर साल चैनलिंक, वायरवेड, टिम्बर पोल्स, रूट ट्रेनर्स, मिट्टी, गोबर एवं रासायनिक खाद की खरीदी में बड़े पैमाने पर खरीदी होती है। सबसे अधिक खरीदी कैंपा फंड से की जा रही है। इसके अलावा विकास और सामाजिक वानिकी (अनुसंधान एवं विस्तार ) शाखा से भी खरीदी होती है। विभाग के उच्च स्तरीय सूत्रों की माने तो कुल रिलीज बजट की 18 से 20% धनराशि कमीशन के रूप में टॉप -टू – बॉटम बंटती है। यानि सप्लायर्स को हर साल लगभग 10-12 करोड़ कमीशन में बांटने पड़ते हैं। राजनीतिक दबाव में बदल दी जाती है शर्तें  मैनेजमेंट कोटे से फील्ड में पदस्थ आईएफएस अधिकारी राजनीतिक दबाव के आगे झुक जाते हैं। इसके बाद वे सप्लायर्स के अनुसार शर्तें जोड़-घटा कर कमीशनबाजी के खेल से जुड़ हैं। इस खेल में उन्हें तब अफसोस होने लगता है जब उनके खिलाफ जांच शुरू होने हो जाती है। इसी खेल से जुड़े तत्कालीन छतरपुर डीएफओ वन अनुराग कुमार के खिलाफ लोकायुक्त संगठन कर रहा है। बालाघाट मुख्य वन संरक्षक अरविंद प्रताप सिंह सेंगर के खिलाफ विभागीय जांच चल रही है। सूत्रों की माने तो एक दर्जन से अधिक डीएफओ के खिलाफ शिकायतें विभागीय विजिलेंस में लंबित है।

वन विभाग ने अतिरिक्त Sallary की वसूली पर लगाई रोक

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के वन आरक्षकों से अतिरिक्त वेतन राशि की वसूली पर रोक लगा दी है। वन विभाग ने इस मामले में वित्त विभाग को आदेश पर पुनर्विचार करने के लिए प्रस्ताव भेजा है, जिसके बाद किसी भी प्रकार की वसूली अगले आदेश तक नहीं की जाएगी। इस मामले की शुरुआत तब हुई जब वन रक्षकों की सैलरी के परीक्षण के दौरान भर्ती नियमों का उल्लंघन सामने आया। नियम के अनुसार, वन रक्षकों को 5200 रुपये मूल वेतन मिलना था, लेकिन प्रदेश के 6592 वन रक्षकों को 5680 रुपये मूल वेतन दिया गया। यह गलती वन विभाग की ओर से वेतन गणना में हुई और कोषालय ने भी यह बढ़ा हुआ वेतन जारी कर दिया। अब मंगलवार को अपर मुख्य प्रधान वन संरक्षक प्रशासन ने सभी मुख्य वन संरक्षक और संरक्षकों को अगले आदेश तक वेतन की वसूली नहीं करने करने का पत्र लिखा है। 165 करोड़ की रिकवरी का आदेश निकाला था सरकार ने इस गलती के बाद 6592 वन कर्मचारियों से करीब 165 करोड़ रुपये की रिकवरी का आदेश जारी किया था। प्रत्येक वन आरक्षक से 1 लाख 29 हजार रुपये की वसूली करने का नोटिस जारी किया गया था, जिसमें ब्याज सहित रकम वापस लेने की बात कही गई थी। विवाद के बाद पुनर्विचार का निर्णय वेतन वसूली के आदेश के बाद कर्मचारियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। अब विभाग ने आदेश पर पुनर्विचार का निर्णय लिया है। सभी डिवीजनों से जानकारी मंगवाकर तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई थी। अब वित्त विभाग द्वारा प्रस्ताव पर विचार करने के बाद ही अगला निर्णय लिया जाएगा। इस आदेश के बाद वन आरक्षकों को सरकार से राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

जब सभी सामाजिक वानिकी वन वृत का प्रभार सीसीएफ-सीएफ को तो सागर का प्रभार डीएफओ को क्यों…?

When CCF-CF is in charge of all social forestry forests then why is DFO in charge of Sagar? भोपाल। वन विभाग में जंगल राज कायम है। शायद यही वजह है कि परंपरा और क्राइटेरिया को तोड़-मरोड़कर पोस्टिंग और तबादले किए जा रहे हैं। पिछले दिनों वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रशासन एक के विवेक जैन ने परंपरा और प्रशासनिक मापदंड को दरकिनार करते हुए एक डीएफओ स्तर के WPO ( वर्किंग प्लान अफसर) को सामाजिक वानिकी वन वृत्त सागर को प्रभार सौंप दिया है। प्रशासनिक मापदंड के अनुसार कैडर में यह पद सीसीएफ अथवा सीएफ को दिया जा सकता है। जबकि सिवनी की तरह ही सागर सामाजिक वन वृत का सीसीएफ को दिया जा सकता था। चेहरा देखकर की गई पोस्टिंग को लेकर पूर्व नेता-प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह का कहना है कि हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर पोस्टिंग में हो रही नियमों की अनदेखी की और उनका ध्यान आकृष्ट कराएंगे। डब्बलूपीओ ( वर्किंग प्लान ऑफिसर) एवं डीएफओ देवांशु शेखर को कैडर के विरुद्ध सामाजिक वानिकी वन वृत्त का प्रभाव दिए जाने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष डॉ सिंह ने अपने पत्र में लिखा है कि देवांशु शेखर के अलावा डीएफओ प्रशांत कुमार सिंह को वर्किंग प्लान खंडवा, डीएफओ डॉ किरण बिसेन को वर्किंग प्लान उज्जैन, डीएफओ मीना कुमारी मिश्रा वर्किंग प्लान शिवपुरी, डीएफओ अनुराग कुमार वर्किंग प्लान रीवा और डीएफओ सुश्री संध्या को वर्किंग प्लान बालाघाट के पद पर पदस्थ किया गया। इनमें से किसी को भी सामाजिक वन वृत्त का अतीक प्रभार नहीं दिया गया। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि प्रशासनिक कैडर के अनुसार सामाजिक वन वृत्त खंडवा, बैतूल, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, रीवा, सागर, जबलपुर, और सिवनी में सीसीएफ अथवा सीएफ के पद रिक्त है। सामाजिक वन वृत्त बैतूल में वर्किंग प्लान ऑफिसर वन संरक्षक पीएन मिश्रा और वर्किंग प्लान ऑफिसर एवं वन संरक्षक आदर्श श्रीवास्तव को सामाजिक इंदौर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वर्किंग प्लान ऑफिसर एवं डीएफओ देवांशु शेखर इकलौते ऐसे अफसर हैं, जिन्हें पीसीएफ प्रशासन एक विवेक जैन ने सागर सामाजिक वन वृत का प्रभार देकर उपकृत किया है। इन बिंदुओं पर जांच होनी चाहिए। सामाजिक वानिकी वन वृत में रिक्त पद रिक्त पद किसे प्रभाररीवा राजेश राय cfजबलपुर कमल अरोरा cfखंडवा रमेश गनावा cfइंदौर आदर्श श्रीवास्तव cfबैतूल पीएन मिश्रा cfसिवनी एसएस उद्दे ccfरतलाम एमएस बघेल cfसागर देवांशु शेखर DYCF

जंगल महकमे में प्रभार का खेला, चहेतों को किया जा रहा उपकृत एसीएस की सिफारिश की गई अनदेखी

उदित नारायणभोपाल। जंगल महकमे में प्रभार देने का कोई क्राइटेरिया नहीं बनाया गया है । ऐसे में प्रशासन-एक के मुखिया ने अपने चहेते आईएफएस देवांशु शेखर को प्रभार देने में इतनी जल्दबाजी दिखाई कि सागर वर्किंग प्लान अफसर का पदभार ग्रहण करने से पहले उन्हें सामाजिक वानिकी का प्रभार दे दिया ही दे दिया। जबकि कैडर में यह पद सीसीएफ स्तर के अधिकारी का है। वैसे जब रीवा में सामाजिक वानिकी वृत का अतिरिक्त प्रभार वन संरक्षक रीवा के राजेश कुमार राय को दिया है तो फिर सामाजिक वानिकी का प्रभार डीएफओ को क्यों दिया गया, यह शोध का विषय है। जबकि सागर में सीसीएफ कार्यरत है।प्रधान मुख्य वन संरक्षक विवेक जैन ने बुधवार को जारी आदेश में 2011 बैच के डीएफओ वर्किंग प्लान ऑफिसर देवांशु शेखर को सामाजिक वानिकी वृत सागर का प्रभार दिया है। सनद रहे कि 27 सितंबर को राज्य शासन द्वारा जारी आदेश में देवांशु शेखर को उत्तर बैतूल डीएफओ से हटकर सागर वर्किंग प्लान ऑफिसर के पद पर पदस्थ किया है। देवांशु शेखर ने अभी तक वर्किंग प्लान ऑफिसर का पदभार भी ग्रहण नहीं किया है। अपने मूल पोस्टिंग का पदभार ग्रहण करने से पहले ही उन्हें पीसीसीएफ विवेक जैन ने एक आदेश जारी कर सामाजिक वानिकी वृत सागर का प्रभार देकर उपकृत कर दिया। विवेक जैन के इस आदेश को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि वर्किंग प्लान ऑफिसर देवांशु शेखर को सामाजिक वानिकी का अतिरिक्त प्रभार दिया जा सकता है तो फिर 2009 बैच के प्रशांत कुमार सिंह, किरण बिसेन और अनुराग कुमार समेत अन्य पांच वर्किंग प्लान ऑफिसर को सामाजिक वानिकी का अतिरिक्त प्रभार क्यों नहीं दिया गया ? जबकि भोपाल को छोड़कर सामाजिक वानिकी वृत के पद खाली है और वे सभी प्रभार में चल रहें हैं। शेखर पर विशेष कृपा के संबंध में चर्चा इस बात की शुरू हो गई है कि शहर के अलावा अन्य वर्जन प्लान ऑफिसर को सामाजिक वानिकी वृत का प्रभाव क्यों नहीं दिया गया? सागर वर्किंग प्लान अफसर डीएफओ देवांशु शेखर को पीसीसीएफ विवेक जैन ने किस फॉर्मूले के तहत उपकृत किया। क्या उनके बनाए फॉर्मूले में अन्य 5 वर्किंग प्लान अफसर फिट नहीं आ रहे हैं ? जबकि डीएफओ शेखर के खिलाफ की गई जांच रिपोर्ट अंतिम निर्णय के लिए शासन के पास विचाराधीन है। एससीएस की सिफारिश को किया दरकिनार सूत्रों ने बताया कि अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल ने वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव को एक नोटशीट लिखी है। इसके अनुसार सिवनी वन वृत के मुख्य वन संरक्षक एसएस उद्दे से सामाजिक वानिकी का प्रभार लेकर जबलपुर वर्किंग प्लान सबमिट कर चुके वन संरक्षक रमेश विश्वकर्मा को सौंप दिया जाए। वैसे भी वन संरक्षक विश्वकर्मा को अपनी पोस्टिंग का इंतजार है। एसीएस की सिफारिश में यह भी उल्लेख है कि सामाजिक वानिकी रीवा वृत्त वहां के वन संरक्षक राजेश राय और सामाजिक वानिकी सागर वृत्त का प्रभार मुख्य वन संरक्षक सागर अनिल कुमार सिंह को अतिरिक्त प्रभार के रूप में दे दिया जाए। यह बात अलग है कि वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव इस बात से इनकार किया है कि सामाजिक वानिकी का आर्थिक प्रभार देने संबंधित एसीएस की कोई नोटशीट उनके पास आई है। प्रभार देने से वर्किंग प्लान में होगी देरी एक पीसीसीएफ अधिकारी का कहना है कि वर्किंग प्लान ऑफिसर को आर्थिक प्रभार दिए जाने से कार्यायोजना बनाने में देरी होगी , क्योंकि अतिरिक्त प्रभार वाला पद अफसरों के लिए लाभप्रद होता है। वे ज्यादातर समय वर्किंग प्लान पर नहीं देकर शुभ-लाभ को ध्यान में रखते हुए काम करते है। जबकि वर्किंग प्लान बनाने का कार्य गंभीरता और बारीकी से किया जाता है।

वन स्टॉप सेंटर के प्रयासों से लौट रहा महिलाओं का सम्मान

Women’s respect is returning due to the efforts of One Stop Center भोपाल ! Women’s respect is returning महिलाओं के खिलाफ हिंसा एक गंभीर सामाजिक समस्या है जिससे निपटने और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये प्रदेश में वन स्टॉप सेंटर की स्थापना की गई है। Women’s respect is returning महिला सशक्तिकरण की दिशा में मिशन शक्ति की संबल उपयोजना के अंतर्गत वन स्टॉप सेंटर की स्थापना महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की हिंसा से प्रभावित और संकटग्रस्त महिलाओं एवं बालिकाओं को एक ही स्थान पर विभिन्न आपातकालीन एवं गैर-आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराना है। महिला सशक्तिकरण में वन स्टॉप सेंटर की भूमिका सुरक्षित आश्रय एवं तात्कालिक सहायता – वन स्टॉप सेंटर उन महिलाओं को तत्काल आश्रय और सुरक्षा प्रदान करता है जो घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, यौन हिंसा अथवा किसी भी प्रकार की शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का शिकार होती है। सेंटर में महिलाओं को तत्काल सुरक्षा प्रदान की जाती है और उन्हें सुरक्षित वातावरण में आश्रय दिया जाता है। कानूनी सहायता और परामर्श – वन स्टॉप सेंटर पीड़ित महिलाओं को कानूनी सहायता प्रदान करता है ताकि वे अपने अधिकारों को समझ सके और आवश्यक कानूनी कदम उठा सकें। कानूनी परामर्श और न्यायिक प्रक्रियाओं में सहायता मिलने से महिलाएँ अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ न्याय पाने की दिशा में सशक्त हो सकें। चिकित्सा सहायता – वन स्टॉप सेंटर पर महिलाओं को तत्काल चिकित्सा सहायता मिलती है। हिंसा या प्रताड़ना से घायल महिलाओं को नजदीकी स्वास्थ्य सेवाएँ के साथ समन्वय कर चिकित्सा सेवाएँ दी जाती है। मनोवैज्ञानिक परामर्श – हिंसा की शिकार महिलाएँ अक्सर मानसिक आघात से गुजरती है, वन स्टॉप सेंटर पर प्रशिक्षित परामर्शदाता महिलाओं को मानसिक और भावनात्मक समर्थन प्रदान करते है जिससे उनका आत्म-विश्वास मजबूत होता है। पुनर्वास सेवाएँ एवं समाज में पुनर्स्थापना – वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को पुनर्वास सेवाएँ भी प्रदान करते है। जरूरत पड़ने पर महिलाओं को उनके परिवार के साथ पुनर्स्थापित करने अथवा उन्हें स्वतंत्र जीवन जीने, अपने पैरों पर खड़ाहोने का अवसर प्रदान करता है। Read More : https://saharasamachaar.com/ifs-vs-missing-for-more-than-two-years-will-be-punished/ आर्थिक सशक्तिकरण के लिये प्रशिक्षण और रोजगार – वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को रोजगार और स्व-रोजगार देने के लिये प्रशिक्षण देने का भी प्रयास करते है। महिलाओं को विभिन्न कौशल में प्रशिक्षित किया जाता है। इससे वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र बन सकें और समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर सकें। प्रदेश के 52 जिलों में 57 वन स्टॉप सेंटर संचालित किये जा रहे है। प्रारंभ से अगस्त 2024 तक 98 हजार 636 महिलाओं को पंजीकृत कर विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान की गई, जिसमें लगभग 78 प्रतिशत महिलाएँ (76,499) को घरेलू हिंसा से संबंधित सहायता प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त दहेज उत्पीड़न, बलात्कार, यौन अपराध, बाल विवाह, गुमशुदा, अपहरण, निराश्रित आदि से संबंधित प्रकरणों में यथोचित मदद की गई। वर्ष 2019-20 में कुल 6 हजार 352 महिलाओं को सहायता दी गई थी। वर्ष 2023-24 में 21 हजार 490 महिलाओं को मदद प्रदान की गई। अब सभी वन स्टॉप सेंटर में वाहनों का प्रावधान भी किया गया है, जिससे दूरस्थ महिलाओं को भी त्वरित सहायता मिल सकेगी।

दो साल से अधिक समय से गायब आईएफएस वीएस होतगी दण्डित

IFS VS missing for more than two years will be punished भोपाल। राज्य शासन ने 13 जनवरी 2011 से 26 जनवरी 2013 तक कर्तव्यस्थल से गायब भारतीय वन सेवा के एमपी कैडर के वर्ष 1994 बैच के अधिकारी वीएस होतगी को उनकी सभी वेतन वृध्दियां स्थगित करने से दण्डित किया गया है। इनके बैच के एपीसीसीएफ पद पर प्रमोट हो चुके है। होतगी अभी भी डीएफओ हैं। राज्य शासन उनके बर्खासतगी का प्रस्ताव भी दो साल भेज चुकी थी, जिसे केंद्रीय कार्मिक विभाग में उसे निरस्त कर दिया।दरअसल, होतगी 3 अगस्त 2009 से 10 फरवरी 2011 तक भिण्ड सामान्य वनमंडल के डीएफओ थे। उन्हें 28 दिसम्बर 2010 को अनुदेशक रेंजर्स कॉलेज बालाघाट पदस्थ किया गया था परन्तु उन्होंने रिलीव होने के बाद भी ज्वाईनिंग नहीं दी। उन्हें 21 फरवरी 2012 को इस अनियमितता पर आरोप-पत्र जारी किया गया परन्तु उन्होंने कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया। 20 मई 2019 को उनके खिलाफ विभागीय जांच बैठाई गई। 22 सितम्बर 2022 को विभागीय जांच की रिपोर्ट मिली, जिसमें उन्हें 754 दिनों तक कर्तव्य से अनुपस्थित होने का दोषी पाया गया। 22 अक्टूबर 2022 को होतगी को बचाव उत्तर देने का नोटिस दिया गया जिस पर उन्होंने 24 नवम्बर 2020 को बचाव उत्तर दिया। लेकिन उनका जवाब अमान्य किया गया और उन्हें अनुपस्थिति की अवधि को अकार्य दिवस मानते हुये उन्हें एक वेतवृध्दि असंचयी प्रभाव से रोकने के दण्ड से दण्डित किया गया। राज्य शासन ने होतगी प्रकरण संघ लोक सेवा आयोग को भेजा। आयोग ने भी 4 मार्च 2024 को होतगी को दोषी पाते हुये उन्हें सभी वेतनवृध्दियों से वंचित करने का दण्ड दिया गया। इस दण्ड के बारे में उत्तर देने के लिये होतगी को पत्र भेजा गया, परन्तु उन्होंने यह पत्र प्राप्त नहीं किया। इस पर उनके कार्यालयीन कक्ष की टेबल पर इसे चस्पा किया गया। इसके बाद भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इस पर अब राज्य शासन ने एकपक्षीय निर्णय लेकर उन्हें इस टिप्पणी के साथ दण्डित किया है कि 30 अक्टूबर 2024 तक होतगी को वेतन के समयमान में निचले स्तर के दो चरणों तक की कटौती की शास्ति और आगे इस निर्देश के साथ अधिरोपित की जाये कि वह कटौती की अवधि के दौरान वेतन वृध्दियां अर्जित नहीं करेंगे। इस अवधि की समाप्ति पर, इस कटौती का प्रभाव उनकी भावी वेतनवृध्दि को स्थगित करने पर पड़ेगा।

एमएफपी पार्क से छः महीने में ही अर्चना हटाई गई, जूनियर डीएफओ गीतांजलि बनी नई सीईओ

Archana was removed from MFP Park within six months, Junior DFO Gitanjali became the new CEO. उदित नारायणभोपाल। लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक विभाष ठाकुर ने एक बार फिर एमएफपी पार्क की सीईओ अर्चना पटेल को हटाकर 2020 बैच की आईएफएस गीतांजलि जे को नया सीईओ बनाया। संघ के एमडी ठाकुर ने 12 महीने में तीन को बदल चुके हैं पर ना दवाईयों का समय पर प्रोडक्शन हो पा रहा है ना उसकी गुणवत्ता में सुधार हो रही। चर्चा है कि जिस भी सीईओ ने गुग्गल सहित रॉ मटेरियल की खरीदी में हुई गड़बड़झाला की फाइल खोली, उसे वहां से रुखसत होना पड़ा है। पहले पीजी फुलजले और अब अर्चना पटेल को एमएफपी पार्क के सीईओ पद से हटाकर मुख्यालय अटैच कर दिया गया।2004 बैच के आईएफएस पीजी फुलजले को नवंबर 23 में एमएफपी पार्क का सीईओ के पद पर पोस्टिंग हुई और जब उन्होंने आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने के लिए गुग्गल और अन्य रॉ मटेरियल की खरीदी में हुई गड़बड़ झाला की फाइल खोली तो उन्हें हटाकर 2018 बैच की महिला आईएफएस अर्चना पटेल को सीईओ बनाया। जबकि संघ में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मनोज अग्रवाल ( वर्तमान में उनकी सेवाएं विभाग को वापस कर दी गई है) जैसे सीनियर आईएफएस कार्यरत थे। यानि सीनियर अफसर की कमी बताकर एमएफपी पार्क के स्थापना से अब तक की सबसे जूनियर और अनुभवहीन आईएफएस अर्चना पटेल को सीईओ बनाया गया। दिलचस्प पहले हुई है कि अर्चना पटेल के हटाए जाने की स्थिति वही निर्मित हुई, जिसके कारण फुलजले को सीईओ पद से हटाया गया। बताया जाता है कि सीईओ बनने के बाद पटेल 3-4 महीने तक रबर स्टाम्प के रूप में काम किया, वह जब खुद फैसला लेने लगी और गड़बड़झाले की फाइल खोलने लगी, तभी उन्हें भी हटा दिया गया। अबकी बार 2020 बैच की महिला आईएफएस गीतांजलि जे को सीईओ बनाया। अनुभवहीन अधिकारियों की पोस्टिंग बंद करने की कहीं साज़िश तो नहीं ? एमएफपी पार्क बरखेड़ा पठानी में उत्पादित औषधीय की क्वांटिटी और क्वालिटी में गिरावट आई है। चर्चा है कि लघु वनोपज प्रसंस्करण केंद्र बरखेड़ा पठानी (एमएसपी पार्क) अनुभवहीन महिला अधिकारियों की पोस्टिंग के पीछे कहीं विंध्या हर्बल को बंद करने की साजिश तो नहीं चल रही है। यही वजह है कि एमएफपी पार्क बरखेड़ा पठानी में उत्पादित होने वाली औषधियों की क्वांटिटी और क्वालिटी में निरंतर गिरावट आ रही है। औषधि के गुणवत्ता को लेकर कई बार सवाल उठे। विगत वर्षों में केंद्र निरंतर प्रगतिशील रहा लेकिन पिछले 2 वर्षों में प्रशासनिक उदासीनता और गलत नीतियों से केंद्र को बहुत नुक़सान हुआ। कभी भारत के 17 राज्यों में आयुर्वेदिक दवाओं को सप्लाई करने वाले केंद्र को आयुष विभाग ने तो विंध्या हर्बल्स को ऑर्डर देना ही बंद कर दिया है। पिछले दिनों एक छोटा सा ऑर्डर इस वित्तीय वर्ष में केवल 1.8 करोड़ का आर्डर मिला है।

14 महीने के कार्यकाल में रीवा के लिए कई उपलब्धियां छोड़ गए अनुपम शर्मा

Anupam Sharma left many achievements for Rewa during his tenure of 14 months. भोपाल। आईआईटियन एवं 2017 बैच के आईएफएस अनुपम शर्मा बतौर रीवा डीएफओ का मात्र 14 महीने के कार्यकाल में वन कानूनों के हद में रहते हुए कई उपलब्धियां छोड़ गए। अब उन्हें पन्ना की जिम्मेदारी दी गई।बुरहानपुर वन मंडल अतिक्रमणक माफिया के खिलाफ अभियान चलाने से सुर्खियों आए अनुपम शर्मा रीवा डीएफओ रहते हुए जटायु संरक्षण अभियान शुरू किया। इसके अंतर्गत विभिन्न हितधारकों (जैसे गौशाला प्रबंधकों, गौ सेवकों, पशु चिकित्सकों, दवा दुकानों, इत्यादि) को हानिकारक दवाओं का उपयोग न करने हेतु जागरूक किया गया, और गिद्ध रहवास स्थलों की सतत निगरानी की गई। इसके फलस्वरूप, रीवा वनमण्डल में गिद्धों की 350 से लगभग 650 हो गई। इसके साथ ही शर्मा ने जुलाई 2024 में वनक्षेत्र में लगभग 5 लाख पौधों का रोपण हुआ। प्लास्टिक फ्री प्लांटेशन अभियान अंतर्गत लगभग 5000 किलोग्राम प्लास्टिक बैग्स के कचरे को संग्रहित कर उसे स्क्रैप डीलर को बेचा, जिससे प्लास्टिक कचरा रीसाइक्लिंग श्रृंखला में आया और 30,000 किलोग्राम कार्बनडाइऑक्साइड उत्सर्जन रोका गया। साथ ही, प्राप्त राशि से प्लास्टिक बॉटल्स के कचरे से बनी विशेष जैकेट्स का क्रय किया गया। टिंबर माफिया पर कसा शिकंजा रीवा में इंटर-स्टेट टिंबर माफिया के खिलाफ अभियान शुरू किया। सीधी और अनूपपुर के जंगलों से इमरती लड़कियां काटी जा रही और उनका अवैध परिवहन कर रीवा के रास्ते से उत्तर प्रदेश भेजा जा रहा था। रीवा वन मंडल का चार्ज लेने के बाद महीनों रेकी कराई और फिर धर-पकड़ का अभियान शुरू किया। लकड़ी के अवैध परिवहन को रोकने के लिए लगभग 80 कार्यवाहियां की। जिनमें वन अपराध प्रकरण दर्ज किए गए। कई हेक्टेयर वन क्षेत्र से अतिक्रमण हटाया गया। एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम किया डेवलप रीवा वन मंडल में पहली बार किसी डीएफओ ने लिखे और परंपरा से हटकर काम किया। आईआईटियन होने के नाते डीएफओ अनुपम शर्मा ने कुछ चिन्हित प्लांटेशन में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग और ग्राउंडवाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम ईजाद किया। इससे वानिकी कार्यों का पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव को मापा जा सके। बसामन मामा गौवंश विहार में किए गए रोपण में सिंचाई कार्यों के सतत अनुश्रवण और निगरानी हेतु स्मार्ट सेंसर सिस्टम स्थापित किए गए। पूरे देश में इस तरह का कार्य पहली बार रीवा वनमण्डल में ही हुआ है। अन्य उपलब्धियां

बाघों के संरक्षण में राजधानी की सड़कों पर टाइगर टॉक शो

Tiger Talk Show on the streets of the capital for the protection of tigers भोपाल। वन मंडल भोपाल की ओर से बाघ संरक्षण के प्रति जागरूकता हेतु राज्य स्तरीय वन्य जीव सप्ताह के अंतर्गत शुक्रवार को राजधानी की सड़कों पर टाइगर वॉक शो का आयोजन किया गया। इसमें में बड़ी संख्या में स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों, एनएसएस , एनसीसी के कैडेट विभिन्न एनजीओ के सदस्य, महिला एवं पुरुष लगभग 2000 प्रतिभागि हर्ष उल्लास के हिस्सा लिया। टाइगर वॉक की शुरुआत टीटी नगर स्टेडियम से हुई। इसका समापन मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय भोपाल में हुआ।टाइगर वॉक में वन एवं प्रचार वाहनों लाउडस्पीकर बाघ से संबंधित फिल्मों का प्रदर्शन करते हुए स्लोगन प्रचार पट्टिका तथा नृत्य कलाकारों के माध्यम से बाघ संरक्षण का संदेश दिया गया। भोपाल वन संरक्षक आलोक पाठक ने कहा कि वन्यप्राणी की दृष्टि से मध्य प्रदेश भारत का समृद्ध प्रदेश है। हमारे देश का भोपाल एकमात्र ऐसा शहर है जहां बाघ एवं मानव शहरी आबादी में रहते हैं। यह मध्य प्रदेश एवं भोपाल शहर के लिए बहुत ही बड़े गर्व की बात है। मध्य प्रदेश वन विभाग के वन एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण हेतु किये जा रहे प्रयासों का प्रतिफल है कि आज हमारा प्रदेश एवं भोपाल शहर बाघ के मामले में प्रथम स्थान पर है ।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live