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वन एवं वन्य जीव सुरक्षा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं : अम्बाड़े

Negligence in forest and wildlife protection will not be tolerated: Ambade भोपाल। वन बल प्रमुख वीएन अम्बाड़े ने कहा है कि प्रदेश में वन एवं वन्य जीव संरक्षण की दिशा में नियमित रूप से पेट्रोलिंग की जा रही है किन्तु वनों की अवैध कटाई और कम समय में बाघों एवं तेंदुओं की मृत्यु की खबरें आ रहीं हैं। अम्बाड़े ने कहा है कि वन एवं वन्य जीव सुरक्षा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।वन बल प्रमुख वीएन अम्बाड़े ने समस्त फील्ड डायरेक्टर टाइगर रिजर्व और सीसीएफ एवं सीएफ को एक सख्त पत्र लिखा है। पत्र में कहा है कि विगत 20-25 दिनों में टाईगर रिजर्व एवं क्षेत्रीय वनों में 5-6 बाघों एवं तेंदुओं की मृत्यु हुई है। इतनी सुदृढ़ व्यवस्था होने के पश्चात् भी कम समय में बाघ एवं तेंदुओं की इतनी अधिक मृत्यु होना वन एवं वन्य जीव संरक्षण व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगाता है। पेंच एवं सतपुड़ा टाईगर रिजर्व में बाघों की मृत्यु के संबंध में यह बताया गया कि बाघों की मृत्यु आपसी संघर्ष में हुई है। जब बाघों में संघर्ष होता है तो उनकी दहाड़ दूर तक सुनाई देती है, ऐसी स्थिति में एक बाघ की मृत्यु होने के पश्चात् स्थानीय अमले को जानकारी न होना सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ नहीं होने का संकेत देता है। एम-स्ट्रिप (Monitoring System for Tigers – Intensive Protection and Ecological Status), मानसून पेट्रोलिंग आदि के द्वारा निगरानी रखी जाती है फिर भी बाघों की मृत्यु के पश्चात् जानकारी न होना उचित नहीं है। बालाघाट की घटना अत्यंत खेदजनकबालाघाट में जिस प्रकार से बाघ की मृत्यु के पश्चात् वन अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा गंभीर लापरवाही बरती गई। यह अत्यंत ही अशोभनीय एवं खेद का विषय है। अम्बाड़े ने समस्त फील्ड डायरेक्टर टाइगर रिजर्व और सीसीएफ एवं सीएफ को निर्देशित किया जाता है कि वन एवं वन्य जीव सुरक्षा वन विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही सहनीय नहीं है। अतः भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति न हो इस पर विशेष ध्यान दिया जावे।

प्रशासनिक एक्सरसाइज किए बिना वन विभाग में हुए तबादले, कुछ वनमंडल हुए ACF विहीन

Transfers took place in the forest department without any administrative exercise, some forest divisions were left without ACF भोपाल। तबादलों के मौसम में मैनेजमेंट कोटे के आधार पर ACF और रेंजरों के ताबड़तोड़ ट्रांसफर किए गए। पहली बार ऐसा प्रतीत हो रहा है कि प्रशासनिक एक्सरसाइज किए बिना ही स्थानांतरण कर दिए गए। अब पीसीसीएफ प्रशासन विवेक जैन को आईएफएस अफसरों के व्हाट्सप्प ग्रुप पर पोस्ट कर पूछना पड़ रहा है कि समस्त उपवनमंडल रिक्त हो जाते हैं तो तत्काल मेरे फोन पर विवरण भेजे।गत दिनों वन विभाग में एसडीओ और रेंजर्स के तबादले किए गए। पहली बार अधिकारियों ने अपनी मनमानी कर तबादला सूची जारी की। यही वजह रही कि जारी किए गए स्थानांतरण आदेश आने के बाद प्रशासन-एक के पीसीसीएफ विवेक जैन की प्रशासनिक अक्षमता भी उजागर हो गई। अर्थात प्रशासनिक एक्सरसाइज किए बिना स्थानांतरण सूची को अंतिम रूप दे दिया गया। इसके परिणाम स्वरूप कुछ वन मंडल ACF विहीन हो गए। अब प्रशासन एक के पीसीसीएफ को अपने व्हाट्सप्प ग्रुप को यह पोस्ट करना पड़ा कि ‘वर्तमान में हुए ACF स्थानांतरण के पश्चात यदि किसी वनमण्डल के समस्त उपवनमंडल रिक्त हो जाते हैं तो तत्काल मेरे फोन पर विवरण भेजे।’ यही नहीं, मुख्यालय पदस्थ और अपने निज सहायक कि ड्यूटी लगाई है किवह सभी वन मंडलों में लगाकर जानकारी ले और स्थानांतरित एसीएफ को भारमुक्त कराने डीएफओ दबाव बनाएं। उनके पोस्ट जब प्रशासन-एक शाखा से सेवानिवृत पीसीसीएफ से बातचीत की। पहले तो हंसे और फिर बोले कि पूरी प्रशासनिक एक्सरसाइज इस बात के लिए की जाति है कि कहीं वनमण्डल में स्वीकृत एसीएफ के सभी पद रिक्त तो नहीं हो जाएंगे। ऐसी स्थिति बनने के पूर्व ही कितनी ही उच्च दबाव बने पर हम तबादला नहीं करते थे। ऐसी स्थिति में मंत्री और अन्य राजनेताओं के नाराजगी भी झेलनी पड़ती है। एक करने पीसीसीएफ स्तर के अधिकारी की टिप्पणी है कि यह तो प्रशासनिक दिवालियापन है। कुछ डीएफओ ने भार मुक्त करने से किया इंकारपीसीसीएफ विवेक जैन की पोस्ट के बाद मालवांचल क्षेत्र के डीएफओ ने पीसीसीएफ मुख्यालय को पत्र लिखकर उनके वन मंडल में एकमात्र एसीएफ को भारमुक्त करने से मना कर दिया है। इंदौर वन मंडल में दो एसीएफ पदस्थ हैं और दोनों को ही स्थानांतरित कर दिया गया और अब रालामंडल के अधीक्षक को मैनेजमेंट के आधार पर इंदौर का अतिरिक्त प्रभार देने के निर्देश भोपाल से दिए गए हैं। हास्यास्पद पहलू यह कि इंदौर में पदस्थ एसीएफ का स्थानांतरण इसलिए कर दिया गया क्योंकि पिछले दिनों संपन्न कार्यशाला में कई अफसरों और उनकी पत्नियों की इच्छा अनुसार व्यवस्था नहीं कर पाया था। ट्रांसफर नीति का खुला उल्लंघनशीर्ष अधिकारियों ने एसीएफ और रेंजर्स के तबादले करते समय राज्य सरकार के स्थानांतरण नीति का भी उल्लंघन किया। नीति में साफ तौर पर पति-पत्नि का एक साथ रहने का अधिकार दिया है। इसका पालन वन विभाग ने नहीं किया गया। रीवा सर्किल ऑफिस के संलग्नाधिकारी विद्या भूषण मिश्रा का ट्रांसफर खरगोन वनमंडल कर दिया। जबकि उनकी पत्नि रीवा आईटीआई कॉलेज में प्रशिक्षण अधिकारी हैं। वैसे भी रीवा में सामाजिक वानिकी में एसडीओ के दो पद खाली है। मिश्रा को तत्काल प्रभाव से बाहर मुक्त कर दिया है और उनका प्रभार सीनियर रेंजर को सौंपा है, जोकि प्रभारी एसडीओ है। अब रेंजर के पास मऊगंज और रीवा का प्रभार आ गया है। यानी यहां भी मुख्यालय के अफसर ने प्रभार का खेल खेला है। मंत्रालय में बरसों से जमे हैं एसडीओ और बाबूरेंजर संगठन के व्हाट्सएप ग्रुप में एक यक्ष प्रश्न उठाया है कि क्या वन विभाग अंतर्गत ट्रान्सफर नीति और ट्रान्सफर केवल वन विभाग के वर्दी वाले लोगों के लिए लागू होते हैं ? क्या ट्रांसफर नीति वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और मुख्यालय के एसीएफ और उनके बाबुओं के लिए नहीं? मुख्यालय के साथ-साथ प्रदेश के अनेक वन वृत्तों और वनमण्डलों में सैकड़ों की संख्या में ऐसे बाबू हैं जिनकी नियुक्ति उसी ऑफिस में पार्टिकुलर उसी शाखा में हुई और उसी में प्रमोशन और रिटायरमेंट हुआ। लेकिन उनका ट्रांसफर उस शाखा और उस ऑफिस से नहीं हुआ। संरक्षण शाखा, कैम्पा, वित्त एवं बजट, प्रशासन, एचआरडी आदि शाखाओं 4-5 सालों से एसीएफ और 8-9 सालों से कंप्यूटर ऑपरेटर जमे हैं पर उनका ट्रांसफर करने की हिमाकत कोई नहीं कर पा रहा है। ये कंप्यूटर ऑपरेटर शाखा चला रहे हैं और उनके अफसर रबर स्टाम्प बने हुए है। सूत्रों की खबर यह भी है कि कतिपय कंप्यूटर ऑपरेटर अपने अपने मुखियाओं के नाम से डीएफओ-एसडीओ और रेंजर्स से चौथ वसूली भी करते हैं। पिछले दिनों नई वाहनों के रजिस्ट्रेशन के नाम पर धन संग्रह किए गए हैं।

930 रुपए किलो का गुग्गल 1700 रूपये में खरीदने के मामले की नहीं हो पा रही है जांच

The case of buying guggal worth 930 rupees per kg for 1700 rupees is not being investigated भोपाल। लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक बिभास ठाकुर के निर्देश एमएफपी पार्क बरखेड़ा पठानी में बेअसर साबित हो रहें है। इसका सबसे बड़ा उदाहरणएमएफपी पार्क में हुई रॉ मटेरियल खरीदी में गड़बड़झाला की जांच एक साल से एमडी ठाकुर जांच नहीं करवा पा रहें हैं। इस बीच खबर है कि पार्क की सीईओ गीतांजलि गुग्गल खरीदी में विवादों की सुर्खियों में रहीं प्रभारी सुनीता अहिरवार को पुनः प्रबंधक बनने की प्रक्रिया तेज कर दी है। लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक विभाष ठाकुर ने 31 जनवरी 25 को एमएफपी पार्क की सीईओ गीतांजलि को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि गुग्गल की खरीदी 930 रूपये की जगह 1700 रुपए की दर से खरीदने की जांच सात दिन में बिंदुवार प्रतिवेदन दें। 1 महीने से अधिक का समय बीत गया है पर पार्क की सीईओ ने एमडी के पत्र पर जांच शुरू नहीं की। दिलचस्प पहलु यह है कि गुग्गल खरीदी की जांच को लेकर फेडरेशन के एमडी ठाकुर ने पूर्व के सीईओ को भी दो से अधिक पत्र लिख चुके हैं पर एमएफपी पार्क में उनके पत्रों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि एमडी ने पिछले दिनों पर के दोनों डॉक्टरों को कारण बताओं नोटिस जारी किया था। इनमें से किसी ने भी अब तक नोटिस का जवाब नहीं दिया है। इसके पहले लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक ठाकुर ने भंडारण की जांच के लिए एसीएफ मणि शंकर मिश्र को 7 दिन में जांच का रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे किंतु अभी तक जांच शुरू नहीं हुई। चिंताजनक पहलू यह है कि एसीएफ मिश्रा जांच के भंडारण से संबंधित दस्तावेज मांगने के लिए एमडी ठाकुर से लगातार चिट्ठीयां लिखना शुरू किया तो उन्हें ही वहां से हटा दिया गया। क्या है मामलाएमएसपी पार्क की तत्कालीन प्रबंधक अहिरवार ने गूग्गल सहित प्रष्टपर्णी, काली मिर्च, हींग, पुनर्नवा आदि रॉ मैटेरियल की खरीदी के लिए टेंडर किया था। टेंडर में गुग्गल के लिए हर्बल ऑटोमेशन हरिद्वार का रेट 930 रूपये प्रति किलोग्राम था। एसपी पार्क के कर्ताधर्ता ने हर्बल ऑटोमेशन हरिद्वार से खरीदी न करके आर्यन फार्मेसी से ₹1700 की कीमत पर 4000 किलो खरीदी की। हर्बल ऑटोमेशन हरिद्वार फर्म से न तो वर्क आर्डर दिया गया और न किसी प्रकार का पत्राचार किया गया। आर्यन से खरीदी से संघ को 30 लाख 80000 रुपए का अधिक भुगतान करना पड़ा है। प्रभारी एसडीओ एवं उत्पादन प्रबंधक ⁠सुनीता अहीरवार के कार्यकाल में 6 करोड़ों की govt सप्लाई में 3 करोड़ से अधिक की रॉ -मटेरियल ख़रीदी के भुगतान किये गये है, जिसमें 2 करोड़ के बिल तो आर्यन फ़ार्मेसी के थे। इसके अलावा 30-35 लाख के मरम्मत के भुगतान किये जा चुके है।

मप्र से सागवान लकड़ी अवैध कटाई कर नागपुर, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में हो रहा अवैध कारोबार

Illegal cutting of teak wood from Madhya Pradesh is taking place in Nagpur, Rajasthan, Andhra Pradesh and Telangana. भोपाल। जंगल महकमे मुख्यालय सर्किल और वनमंडलों में कई पद रिक्त पड़े हैं। खासकर सर्किल और वनमंडलों डीएफओ से लेकर डिप्टी रेंजर्स के पास खाली है। मैदानी अवल की बात करें तो वन विभाग में वन और वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए 25000 के लगभग अमला स्वीकृत है. इनमें से 1900 खाली पड़े हैं. स्वीकृति अमले से 8% फॉरेस्ट गार्ड डीएफओ और पीएफ कार्यालय बाबू गिरी का काम कर रहे हैं तो 4% फॉरेस्ट गार्ड रसूखदार प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के अफसरों के कार्यालयों और उनके बंगले पर दरबान दरबान बने हुए हैं. यह स्थिति भोपाल से लेकर 16 सर्किल और 65 वन मंडलों में बनी हुई है। इसका फायदा लकड़ी माफिया से लेकर अतिक्रमण माफिया तक उठा रहे हैं। फील्ड से मिली जानकारी के अनुसार मप्र से सागवान लकड़ी अवैध कटाई कर नागपुर, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कई शहरों में अवैध कारोबार हो रहा है। एक अनुमान के अनुसार टिंबर माफिया प्रदेश में सागौन की अवैध कटाई कर 100 करोड़ रूपया से अधिक का कारोबार करता है। फील्ड से मिली जानकारी के अनुसार जबलपुर, बैतूल, छतरपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, शहडोल और उज्जैन वन वृत में सबसे अधिक लकड़ी की अवैध कटाई हो रही है। धार वन मंडल में 40 घनमीटर सागवान की लकड़ी जप्त और देवास वन मंडल में हुई अवैध कटाई इस बात की गवाह है कि प्रदेश में धड़ल्ले से अवैध कटाई हो रही है। लकड़ी की अवैध कटाई और अन्य राज्यों में तस्करी की शिकायत नागपुर टिंबर संगठन के अलावा मध्य प्रदेश के टिंबर संगठन ने बकायदा पीसीसीएफ संरक्षण को की है। इस शिकायत की पुष्टि वन विभाग में अवैध कटाई से संबंधित दर्ज अपराधिक प्रकरण भी करते हैं। इस संबंध में छिंदवाड़ा सर्कल में एक समीक्षा बैठक भी हो चुकी है। इस समीक्षा बैठक में वन वृत और वन मण्डलों में पदस्थ आईएफएस अधिकारियों के साथ-साथ टिंबर संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित थे। इस बैठक में दिलचस्प पहलू यह रही कि जंगलों की सुरक्षा की जिम्मेदार अधिकारी टिंबर संगठन के पदाधिकारी से प्रमाण मांगते नजर आ रहे थे। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि छिंदवाड़ा में तो अवैध कटाई और तस्करी से संबंधित समीक्षा हुई किंतु मुख्यालय स्तर पर पूर्णकालिक पीसीसीएफ संरक्षण नहीं होने की वजह से मॉनिटरिंग भी नहीं हो पा रही है। टिंबर संगठन के पदाधिकारी के शिकायत की पुष्टि वन विभाग के अधिकृत आंकड़े भी कर रहें है। विभाग के अधिकृत आंकड़े बताते हैं कि इस वर्ष जबलपुर वन वृत में कुल दर्ज अपराधी प्रकरण 3445 में से 3129 प्रकरण केवल अवैध कटाई से संबंधित हैं। इसी प्रकार छिंदवाड़ा वन वृत्त में दर्ज प्रकरण की संख्या 2302 है तो अवैध कटाई के प्रकरण 2206 दर्ज किए गए हैं। उज्जैन वन वृत 1201 प्रकरण अवैध कटाई से संबंधित हैं। विदिशा वन मंडल के लटेरी और उसके आसपास क्षेत्र में आज भी अवैध कटाई के सिलसिला जारी है। अपर मुख्य सचिव अशोक अग्रवाल ने कलेक्टर एसपी के साथ बैठक की परंतु नतीजा कुछ नहीं निकला। लटेरी में आज भी रेंजर के पद खाली पड़े हैं। मुख्यालय और राज्य शासन स्तर पर कोई प्रयास नहीं किया गया। सुरक्षा में हर साल वनकर्मियों के साथ मारपीट के 20-30 प्रकरण संरक्षण शाखा से एकत्रित आकड़ों के मुताबिक वन एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा में हर साल वनकर्मियों के साथ मारपीट के 20-30 प्रकरण दर्ज हो रहे है। पिछले तीन सालों में जंगलों की सुरक्षा में आधा दर्जन वनकर्मियों को अपनी जान तक गंवाने पड़े है। यही नहीं, विदिशा, रायसेन, गुना, शिवपुरी, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, नरसिंहपुर, बालाघाट, बैतूल, छिंदवाड़ा, सागर, दमोह, बुरहानपुर, वन मंडलों में 2 दर्जन से अधिक वन कर्मचारियों पर माफिया प्राणघातक हमला कर चुके हैं। सीआरपीसी की धारा 197 के तहत वन कर्मियों को प्रोटेक्शन दिया गया है कि गोलीबारी की घटना में तब तक एफआईआर दर्ज नहीं होगी जब तक राजपत्रित ऑफिसर की जांच रिपोर्ट न जाए। बुरहानपुर के बाद लटेरी गोलीकांड में वन कर्मियों पर बिना जांच के आईपीसी की धारा 302 और 307 के तहत एफआईआर दर्ज कर दी गई। धार में कछुआ गति से 40 घन मीटर की जांच वन मंडल धार में आरा मशीन मनावर से जब्त 40 घन मीटर अवैध सागवान के मामले में जांच कछुआ गति से चल रही है। बताया जाता है कि जांच में वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बचाने का प्रयास चल रहा है। 3 सप्ताह बाद भी वन विभाग की टीम या पता लगाने में असफल रही कि 40 घन मीटर सागवान चटपट धार में कहां से आई ? वन विभाग यह भी पता नहीं लगा सकी कि 2 साल से चल रहे गोरख धंधे में किन-किन अधिकारियों एवं कर्मचारियों का इदरीशखान से सांठ-गांठ है। धार वन विभाग की बड़ी कार्यवाही के बाद यह सवाल उठने लगा है कि इतनी बड़ी मात्रा में सागवान इमारती लकड़ी कहां से काट कर आ रही थी? अवैध कटाई और उसके अवैध खरीद-फरोख्त के गोरख धंधे में वन विभाग के कौन-कौन अधिकारी -कर्मचारी शामिल थे? यह सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि तीन दिन पहले ही फॉरेस्ट के कर्मचारियों ने निरीक्षण किया था और सब कुछ ओके पाया था। मनावर एसडीओ और कुक्षी के प्रभारी रेंजर की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

मध्यप्रदेश: 10 हाथियों के मरने की वजह आई सामने, मिलेट का फंगी कनेक्शन

Madhya Pradesh: Reason for death of 10 elephants revealed, understand the fungal connection of millet भोपाल: मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पिछले महीने 10 हाथियों की मौत का कारण कोदो में फफूंद संक्रमण बताया जा रहा है। हैदराबाद के ICRISAT के वैज्ञानिकों ने यह जानकारी राज्य सरकार को दी है। वन अधिकारियों का कहना है कि ICRISAT की फाइनल रिपोर्ट का इंतजार है। तीन तरह के फंगस मिले ICRISAT ने शुरुआती जांच में कोदो के नमूनों में तीन तरह के फफूंद – एस्परजिलस फ्लेवस, एस्परजिलस पैरासिटिकस और पेनिसिलियम साइक्लोपियम की मौजूदगी की पुष्टि की है। इन फफूंदों से साइक्लोपिआज़ोनिक एसिड नामक जहरीला पदार्थ पैदा होता है, जिसके सेवन से हाथियों की मौत होने की आशंका है। फाइनल रिपोर्ट का इंतजार वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि हमें ICRISAT की फाइनल रिपोर्ट का इंतजार है। उन्होंने पुष्टि की है कि हाथियों द्वारा खाए गए कोदो में ये फफूंद मौजूद थे। घटना की जांच के लिए, एमपी के अधिकारियों ने ICRISAT सहित पूरे भारत में 10 प्रयोगशालाओं में नमूने भेजे थे। ICRISAT, हैदराबाद स्थित एक गैर-लाभकारी अनुसंधान संगठन है, जो विशेष रूप से अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में कृषि प्रणालियों को बेहतर बनाने में माहिर हैं। बरेली से आ गई है रिपोर्ट बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) ने भी अपनी विषाक्तता परीक्षा रिपोर्ट में पुष्टि की है कि कोदो में फफूंद विषाक्त पदार्थों, विशेष रूप से साइक्लोपिआज़ोनिक एसिड के कारण हाथियों की मौत हुई। जहर की नहीं हुई थी पुष्टि हाथियों के लीवर, किडनी, तिल्ली और आंतों सहित विभिन्न अंगों के नमूने विश्लेषण के लिए IVRI भेजे गए थे। परीक्षणों में साइनाइड, भारी धातुओं, या ऑर्गनोफॉस्फेट या पाइरेथ्रोइड जैसे सामान्य कीटनाशकों का कोई निशान नहीं पाया गया। हालांकि, सभी नमूनों में साइक्लोपिआज़ोनिक एसिड पाया गया, जिसकी सांद्रता 100 पार्ट्स प्रति बिलियन (ppb) से अधिक थी। सात एकड़ में कोदो की खेती हाथियों ने जिस कोदो की फसल को खाया था वह बांधवगढ़ के अंदर 7 एकड़ जमीन पर थी। असामान्य फफूंद वृद्धि के संकेतों के बावजूद, जांचकर्ताओं को इस बात का कोई सबूत नहीं मिला कि उस क्षेत्र में कीटनाशकों का उपयोग किया गया था। स्थानीय किसानों ने भी ऐसे किसी भी रसायन के उपयोग से इनकार किया है। हाथियों की मौत 29 अक्टूबर, 2024 को शुरू हुई थी। शुरुआत में फफूंद संक्रमण पर ही संदेह जताया गया था। अधिकारी अभी भी इस मामले की जांच कर रहे हैं, ताकि फंगस की पूरी सीमा और क्षेत्र के वन्यजीवों पर इसके प्रभाव को समझा जा सके।

जंगल महकमे में रिक्त है एमडी से लेकर फील्ड डायरेक्टर तक के पद, खेला जा रहा है प्रभार का खेल

Posts from MD to Field Director are vacant in the forest department, the game of charge is being played. भोपाल। जंगल महकमे में पीसीसीएफ कैम्पा, वन विकास निगम के एमडी से लेकर वन वृत के संरक्षक, डीएफओ और पेंच और कान्हा नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर के पद रिक्त है। इन पदों पर पूर्णकालिक पोस्टिंग के बजाय राज्य शासन के शीर्ष अधिकारी प्रभार का खेल खेल रहे हैं। केंद्र की फटकार के बाद ही बांधवगढ़ में साल भर बाद फील्ड डायरेक्टर की पोस्टिंग की गई। पीसीसीएफ कैंपा और वन विकास निगम के एमडी, वन संरक्षक, छतरपुर वन वृत शिवपुरी वन वृत के वन संरक्षक, इंदौर वन वृत में वन संरक्षक, वन मंडल रीवा, सिवनी दक्षिण, शहडोल उत्तर, शाजापुर, राजधानी परियोजना वन मंडल, विदिशा इत्यादि वन मंडलों में डीएफओ के पद रिक्त है। वन मंडलो के अलावा भोपाल और सागर को छोड़कर सभी अनुसंधान एवं विस्तार वन वृत्त में पद खाली पड़े हुए है। इन पदों पर प्रभार देने का खेल खेला जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस खेल में मंत्रालय से लेकर मुख्यालय तक के शीर्ष अधिकारी शामिल हैं। वन विभाग ने प्रभार देने का कोई क्राइटेरिया तय नहीं किया गया है। पीपी मोड और शीर्ष अधिकारियों की गणेश परिक्रमा करने वाले आईएफएस अफसरों को ही प्रभार को दिया जा रहा है। मसलन, वन विकास निगम के एमडी का प्रभार इंदौर में पदस्थ एपीसीसीएफ अजय यादव को दिया गया है। पीसीसीएफ कैम्पा का प्रभार देने में मुख्यालय से लेकर मंत्रालय तक कंफ्यूज रहे। कैंपा पीसीसीएफ महेंद्र धाकड़ के रिटायर होने पर पीसीसीएफ संदीप सिंह को केंप का प्रभाव दिया गया। इस आदेश के 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि अचानक शासन ने अपने आदेश में संशोधन करते हुए केंप का प्रभार पीसीसीएफ पीके सिंह को दे दिया गया। वर्तमान में पीके सिंह के पास पीसीसीएफ सामाजिक वानिकी के अलावा संरक्षण का भी प्रभार है। कैम्पा का प्रभार आने पर उनके पास महकमे के दो-दो प्रमुख शाखों का प्रभार है। कान्हा का प्रभार डिप्टी डायरेक्टर को दिया एसीएस के ब्लू आई ऑफिसर एवं डिप्टी डायरेक्टर कान्हा नेशनल पार्क पुनीत गोयल को फील्ड डायरेक्टर का भी प्रभार दे दिया गया। ऐसा पहली बार किया गया है, क्योंकि कैडर में फील्ड डायरेक्टर पद सीसीएफ अथवा सीएफ का पद है। अंतरराष्ट्रीय स्तर छवि वाले कान्हा नेशनल पार्क में नक्सली मूवमेंट भी है। ऐसे डिप्टी डायरेक्टर के ऊपर कान्हा टाइगर रिजर्व का प्रबंध छोड़ देना, यह वन मंत्रालय की अक्षमता का परिचायक है। पेंच नेशनल पार्क के बफर जोन का वर्किंग प्लान बनाने वाले आईएफएस अधिकारी जे देवा प्रसाद को पेंच नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर के अलावा अनुसंधान विस्तार सिवनी का भी प्रभार दिया गया है। यानि प्रसाद को तीन पदों का प्रभार एक साथ दिया गया है। इंदौर वन वृत का प्रभार मस्तराम बघेल वन संरक्षक उज्जैन, छतरपुर का प्रभार अनिल कुमार सिंह वन संरक्षक सागर को दिया गया है। रिक्त सभी वन मंडलों में डीएफओ का प्रभार भी प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रशासन एक विवेक जैन की विशेष कृपा पर ही दिया गया है। प्रभार देने की खेल के चलते ही हाल ही में 6 आईएफएस अधिकारियों की वर्किंग प्लान बनाने के लिए में पोस्टिंग की गई, जिनमें से केवल देवांशु शेखर को ही सागर अनुसंधान एवं विस्तार का प्रभार दिया गया है। आपदा को अवसर में बदला प्रभार का खेल खेलने में मंत्रालय से लेकर मुख्यालय के शीर्ष अधिकारी ने तो आपदा को अवसर में बदल दिया है। यानी अधिकारियों की कृत्रिम कमी दर्शाकर प्रभार का खेल खेला जा रहा है। उदाहरण के तौर पर बांधवगढ़ नेशनल पार्क में फील्ड डायरेक्टर के पद के लिए बृजेंद्र झा, अनिल शुक्ला, रमेश विश्वकर्मा, रविंद्रमणि त्रिपाठी और नरेश यादव जैसे वाइल्ड लाइफ एक्सपीरियंस होल्डर आईएफएस अधिकारी के होते हुए भी शिवपुरी में पहले से कार्यरत वन संरक्षक अनुपम सहाय को फील्ड डायरेक्टर बनाकर वन संरक्षक शिवपुरी का पद जानबूझकर रिक्त कर दिया गया। ताकि इस पद को मैनेजमेंट कोटे से भरा जा सके। पोस्टिंग के इंतजार में है अफसर प्रभार का खेल खेलने के कारण ही वर्किंग प्लान बना चुके आईएफएस अधिकारियों की पोस्टिंग नहीं की जा रही है। दिलचस्प पहलू यह है कि इस मामले में मुख्यालय के अधिकारी बताते हैं कि प्रस्ताव शासन के पास लंबित है। यानी शासन के स्तर पर पोस्टिंग में कोई दिलचस्पी नहीं ली जा रही है। यही वजह है कि प्रभार का खेल खेलने के लिए मैदान खाली है। धार का वर्किंग प्लान बना चुके आदर्श श्रीवास्तव, जबलपुर में पदस्थ वर्किंग प्लान अधिकारी रमेश विश्वकर्मा, वर्किंग प्लान अधिकारी पीएन मिश्रा, वर्किंग प्लान अधिकारी एचएस मिश्रा जैसे आईएफएस अफसर को अपनी पोस्टिंग का इंतजार है। इनमें से कुछ अधिकारियों की सेवा के 5 महीने बचे हैं तो किसी अफसर के रिटायर होने की साल भर की मियाद बाकी है। अब सीएफ और डीएफओ भी खेलने लगे भोपाल से शुरू हुआ प्रभार देने का खेल अब वन संरक्षक और डीएफओ भी खेलने लगे हैं। धार वन मंडल में तो एक-एक डिप्टी रेंजरों को दो-दो रेंज के अलावा उन्हें एसडीओ का भी प्रभार दिया गया है। धार में इसी वर्ष वनपाल से बने प्रभारी उप वन क्षेत्रपालों को दो रेंजों का प्रभार दे दिया है। जबकि वन मंडल धार में ओरिजिनल उपवन क्षेत्रपाल विक्रम सिंह निनामा एवं कमलेश मिश्रा पदस्थ हैं और वे सीनियर भी हैं किन्तु उन्हें नहीं दिया गया। इसके कारण वन मंडल में असंतोष है और यही कारण है कि धार वन मंडल में अवैध कटाई और अतिक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। रीवा वन वृत के अंतर्गत आने वाले रीवा, सीधी, सतना और सिंगरौली, छतरपुर वन वृत्त के अलावा प्रदेश के अधिकांश वन मंडलों में एसडीओ- रेंजर के पद लंबे समय से रिक्त है। इन पदों पर भी प्रभार का खेल खेला जा रहा है।

दो दशक से सक्रिय नेक्सेस को नहीं तोड़ पाए वन बल प्रमुख, डीएफओ फिर जोड़ रहे हैं मनमानी शर्ते

 The forest force chief could not break the nexus that has been active for two decades, the DFO is again adding arbitrary conditions उत्तम शर्मा कमेटी द्वारा बनाई गई शर्ते डस्टबिन में  उदित नारायण  भोपाल। दो दशकों से जंगल महकमें में बने सीएफ-डीएफओ और सप्लायर्स नेक्सस को तोड़ने में वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव का नेक-नियति प्रयास भी असफल नजर आ रहैं है। वन बाल प्रमुख के निर्देश पर तैयार निविदा की एकजाई शर्तें को दरकिनार बैतूल उत्तर- पश्चिम, बड़वानी बुरहानपुर, खंडवा के डीएफओ सप्लायर्स के इशारे पर अपनी शर्ते अलग से जोड़ दे रहे हैं। कुछ डीएफओ को तो मंत्री के नाम पर शर्तें बदलवाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।  पिछले दिनों एक दर्जन से अधिक डीएफओ ने टेंडर आमंत्रित किए हैं। इसमें बुरहानपुर डीएफओ ने बीआईएस (BIS) की शर्ते जोड़ दी है। जबकि  उत्तम शर्मा कमेटी द्वारा बनाई गई निविदा की शर्तों में बीआईएस (BIS) की शर्त का उल्लेख नहीं है।  चैनलिंक फेंसिंग और बार्बेड वायर की निविदा में BIS शर्त जोड़कर फारेस्ट अफसरों ने महज तीन-चार बड़े कारोबारियों के बीच 70-80 करोड़ का बंदरबांट करना है। मध्य प्रदेश में चैनलिंक फेंसिंग के लिए BIS लाइसेंस केवल दो कंपनियों—मौर्य वायर और नवकार ग्रेनाइट्स—के पास है। इसी प्रकार बार्बेड वायर के कारोबार में BIS लाइसेंस सिर्फ तीन कंपनियों—मौर्य वायर (इंदौर), नवकार ग्रेनाइट्स (मंदसौर), और मां शारदा वायर (मंडला) के पास हैं। इसके अलावा चैनलिंक फेंसिंग: कोई भी कंपनी BIS लाइसेंस प्राप्त नहीं है। बार्बेड वायर: BIS लाइसेंस चार से पांच कंपनियों के पास है। अन्य डीएफओ द्वारा आमंत्रित निविदा में प्रीबीड मीटिंग में अनिवार्य रूप से हिस्सा लेने और प्रस्तावित चैनलिंक फेंसिंग के कंपार्टमेंट की फोटो अनिवार्य रूप से निविदा प्रपत्र में सबमिट करने के लिए कहा है। अब सवाल यह उठता है कि इंदौर और अन्य शहरों के सप्लायर्स बिना जानकारी के जंगल में स्पॉट कहां ढूंढते फिरेंगे? सूत्रों से खबर यह भी आ रही है कि डीएफओ अपने पसंदीदा सप्लायर के साथ एक फॉरेस्ट गार्ड भेजकर फोटो क्लिक करने में मदद करवा रहे हैं। इसी प्रकार प्रीबिड बैठक से सप्लायर के बीच समझौता होने लगा है और इससे कंपटीशन खत्म होने का खतरा बढ़ गया है।  प्रतिस्पर्धा बढ़े, मध्यम वर्ग को अवसर मिले वन बल प्रमुख श्रीवास्तव ने नेक्सस को तोड़ने और लघु एवं मध्यम वर्ग के कारोबारी को अवसर प्रदान करने के लिए पूरे प्रदेश के लिए एक जैसी शर्तें बनवाई। इन शर्तों को तैयार करने में अपर प्रधान मुख्यमंत्री वन संरक्षक उत्तम शर्मा के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई गई। कमेटी ने महीनों मंथन कर एक समान शर्तों का ड्राफ्ट तैयार किया। नई शर्तों का ड्राफ्ट सभी सीसीएफ, सीएफ और डीएफओ को भेजा गया। प्रदेश की कुछ डीएफओ द्वारा आमंत्रित निविदा की शर्तों में न तो एकरुपता है और न ही शर्मा कमेटी द्वारा तैयार शर्तों का अक्षरश: पालन किया गया है। वन बल प्रमुख बनने के बाद से असीम श्रीवास्तव को लगातार शिकायतें मिल रही थी कि टेरिटोरियल में बैठे डीएफओ और सीएफ कमीशन बाजी का खेल खेलने के लिए मनमानी शर्तें जोड़ रहे हैं। इसके कारण मध्य और लघु कारोबारी प्रतिस्पर्धा से बाहर होते जा रहे हैं।  क्या खरीदी होती है वन विभाग में हर साल चैनलिंक, वायरवेड, टिम्बर पोल्स, रूट ट्रेनर्स, मिट्टी, गोबर एवं रासायनिक खाद की खरीदी में बड़े पैमाने पर खरीदी होती है। सबसे अधिक खरीदी कैंपा फंड से की जा रही है। इसके अलावा विकास और सामाजिक वानिकी (अनुसंधान एवं विस्तार ) शाखा से भी खरीदी होती है। विभाग के उच्च स्तरीय सूत्रों की माने तो कुल रिलीज बजट की 18 से 20% धनराशि कमीशन के रूप में टॉप -टू – बॉटम बंटती है। यानि सप्लायर्स को हर साल लगभग 10-12 करोड़ कमीशन में बांटने पड़ते हैं। राजनीतिक दबाव में बदल दी जाती है शर्तें  मैनेजमेंट कोटे से फील्ड में पदस्थ आईएफएस अधिकारी राजनीतिक दबाव के आगे झुक जाते हैं। इसके बाद वे सप्लायर्स के अनुसार शर्तें जोड़-घटा कर कमीशनबाजी के खेल से जुड़ हैं। इस खेल में उन्हें तब अफसोस होने लगता है जब उनके खिलाफ जांच शुरू होने हो जाती है। इसी खेल से जुड़े तत्कालीन छतरपुर डीएफओ वन अनुराग कुमार के खिलाफ लोकायुक्त संगठन कर रहा है। बालाघाट मुख्य वन संरक्षक अरविंद प्रताप सिंह सेंगर के खिलाफ विभागीय जांच चल रही है। सूत्रों की माने तो एक दर्जन से अधिक डीएफओ के खिलाफ शिकायतें विभागीय विजिलेंस में लंबित है।

वन विभाग ने अतिरिक्त Sallary की वसूली पर लगाई रोक

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के वन आरक्षकों से अतिरिक्त वेतन राशि की वसूली पर रोक लगा दी है। वन विभाग ने इस मामले में वित्त विभाग को आदेश पर पुनर्विचार करने के लिए प्रस्ताव भेजा है, जिसके बाद किसी भी प्रकार की वसूली अगले आदेश तक नहीं की जाएगी। इस मामले की शुरुआत तब हुई जब वन रक्षकों की सैलरी के परीक्षण के दौरान भर्ती नियमों का उल्लंघन सामने आया। नियम के अनुसार, वन रक्षकों को 5200 रुपये मूल वेतन मिलना था, लेकिन प्रदेश के 6592 वन रक्षकों को 5680 रुपये मूल वेतन दिया गया। यह गलती वन विभाग की ओर से वेतन गणना में हुई और कोषालय ने भी यह बढ़ा हुआ वेतन जारी कर दिया। अब मंगलवार को अपर मुख्य प्रधान वन संरक्षक प्रशासन ने सभी मुख्य वन संरक्षक और संरक्षकों को अगले आदेश तक वेतन की वसूली नहीं करने करने का पत्र लिखा है। 165 करोड़ की रिकवरी का आदेश निकाला था सरकार ने इस गलती के बाद 6592 वन कर्मचारियों से करीब 165 करोड़ रुपये की रिकवरी का आदेश जारी किया था। प्रत्येक वन आरक्षक से 1 लाख 29 हजार रुपये की वसूली करने का नोटिस जारी किया गया था, जिसमें ब्याज सहित रकम वापस लेने की बात कही गई थी। विवाद के बाद पुनर्विचार का निर्णय वेतन वसूली के आदेश के बाद कर्मचारियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। अब विभाग ने आदेश पर पुनर्विचार का निर्णय लिया है। सभी डिवीजनों से जानकारी मंगवाकर तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई थी। अब वित्त विभाग द्वारा प्रस्ताव पर विचार करने के बाद ही अगला निर्णय लिया जाएगा। इस आदेश के बाद वन आरक्षकों को सरकार से राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

जब सभी सामाजिक वानिकी वन वृत का प्रभार सीसीएफ-सीएफ को तो सागर का प्रभार डीएफओ को क्यों…?

When CCF-CF is in charge of all social forestry forests then why is DFO in charge of Sagar? भोपाल। वन विभाग में जंगल राज कायम है। शायद यही वजह है कि परंपरा और क्राइटेरिया को तोड़-मरोड़कर पोस्टिंग और तबादले किए जा रहे हैं। पिछले दिनों वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रशासन एक के विवेक जैन ने परंपरा और प्रशासनिक मापदंड को दरकिनार करते हुए एक डीएफओ स्तर के WPO ( वर्किंग प्लान अफसर) को सामाजिक वानिकी वन वृत्त सागर को प्रभार सौंप दिया है। प्रशासनिक मापदंड के अनुसार कैडर में यह पद सीसीएफ अथवा सीएफ को दिया जा सकता है। जबकि सिवनी की तरह ही सागर सामाजिक वन वृत का सीसीएफ को दिया जा सकता था। चेहरा देखकर की गई पोस्टिंग को लेकर पूर्व नेता-प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह का कहना है कि हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर पोस्टिंग में हो रही नियमों की अनदेखी की और उनका ध्यान आकृष्ट कराएंगे। डब्बलूपीओ ( वर्किंग प्लान ऑफिसर) एवं डीएफओ देवांशु शेखर को कैडर के विरुद्ध सामाजिक वानिकी वन वृत्त का प्रभाव दिए जाने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष डॉ सिंह ने अपने पत्र में लिखा है कि देवांशु शेखर के अलावा डीएफओ प्रशांत कुमार सिंह को वर्किंग प्लान खंडवा, डीएफओ डॉ किरण बिसेन को वर्किंग प्लान उज्जैन, डीएफओ मीना कुमारी मिश्रा वर्किंग प्लान शिवपुरी, डीएफओ अनुराग कुमार वर्किंग प्लान रीवा और डीएफओ सुश्री संध्या को वर्किंग प्लान बालाघाट के पद पर पदस्थ किया गया। इनमें से किसी को भी सामाजिक वन वृत्त का अतीक प्रभार नहीं दिया गया। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि प्रशासनिक कैडर के अनुसार सामाजिक वन वृत्त खंडवा, बैतूल, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, रीवा, सागर, जबलपुर, और सिवनी में सीसीएफ अथवा सीएफ के पद रिक्त है। सामाजिक वन वृत्त बैतूल में वर्किंग प्लान ऑफिसर वन संरक्षक पीएन मिश्रा और वर्किंग प्लान ऑफिसर एवं वन संरक्षक आदर्श श्रीवास्तव को सामाजिक इंदौर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वर्किंग प्लान ऑफिसर एवं डीएफओ देवांशु शेखर इकलौते ऐसे अफसर हैं, जिन्हें पीसीएफ प्रशासन एक विवेक जैन ने सागर सामाजिक वन वृत का प्रभार देकर उपकृत किया है। इन बिंदुओं पर जांच होनी चाहिए। सामाजिक वानिकी वन वृत में रिक्त पद रिक्त पद किसे प्रभाररीवा राजेश राय cfजबलपुर कमल अरोरा cfखंडवा रमेश गनावा cfइंदौर आदर्श श्रीवास्तव cfबैतूल पीएन मिश्रा cfसिवनी एसएस उद्दे ccfरतलाम एमएस बघेल cfसागर देवांशु शेखर DYCF

जंगल महकमे में प्रभार का खेला, चहेतों को किया जा रहा उपकृत एसीएस की सिफारिश की गई अनदेखी

उदित नारायणभोपाल। जंगल महकमे में प्रभार देने का कोई क्राइटेरिया नहीं बनाया गया है । ऐसे में प्रशासन-एक के मुखिया ने अपने चहेते आईएफएस देवांशु शेखर को प्रभार देने में इतनी जल्दबाजी दिखाई कि सागर वर्किंग प्लान अफसर का पदभार ग्रहण करने से पहले उन्हें सामाजिक वानिकी का प्रभार दे दिया ही दे दिया। जबकि कैडर में यह पद सीसीएफ स्तर के अधिकारी का है। वैसे जब रीवा में सामाजिक वानिकी वृत का अतिरिक्त प्रभार वन संरक्षक रीवा के राजेश कुमार राय को दिया है तो फिर सामाजिक वानिकी का प्रभार डीएफओ को क्यों दिया गया, यह शोध का विषय है। जबकि सागर में सीसीएफ कार्यरत है।प्रधान मुख्य वन संरक्षक विवेक जैन ने बुधवार को जारी आदेश में 2011 बैच के डीएफओ वर्किंग प्लान ऑफिसर देवांशु शेखर को सामाजिक वानिकी वृत सागर का प्रभार दिया है। सनद रहे कि 27 सितंबर को राज्य शासन द्वारा जारी आदेश में देवांशु शेखर को उत्तर बैतूल डीएफओ से हटकर सागर वर्किंग प्लान ऑफिसर के पद पर पदस्थ किया है। देवांशु शेखर ने अभी तक वर्किंग प्लान ऑफिसर का पदभार भी ग्रहण नहीं किया है। अपने मूल पोस्टिंग का पदभार ग्रहण करने से पहले ही उन्हें पीसीसीएफ विवेक जैन ने एक आदेश जारी कर सामाजिक वानिकी वृत सागर का प्रभार देकर उपकृत कर दिया। विवेक जैन के इस आदेश को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि वर्किंग प्लान ऑफिसर देवांशु शेखर को सामाजिक वानिकी का अतिरिक्त प्रभार दिया जा सकता है तो फिर 2009 बैच के प्रशांत कुमार सिंह, किरण बिसेन और अनुराग कुमार समेत अन्य पांच वर्किंग प्लान ऑफिसर को सामाजिक वानिकी का अतिरिक्त प्रभार क्यों नहीं दिया गया ? जबकि भोपाल को छोड़कर सामाजिक वानिकी वृत के पद खाली है और वे सभी प्रभार में चल रहें हैं। शेखर पर विशेष कृपा के संबंध में चर्चा इस बात की शुरू हो गई है कि शहर के अलावा अन्य वर्जन प्लान ऑफिसर को सामाजिक वानिकी वृत का प्रभाव क्यों नहीं दिया गया? सागर वर्किंग प्लान अफसर डीएफओ देवांशु शेखर को पीसीसीएफ विवेक जैन ने किस फॉर्मूले के तहत उपकृत किया। क्या उनके बनाए फॉर्मूले में अन्य 5 वर्किंग प्लान अफसर फिट नहीं आ रहे हैं ? जबकि डीएफओ शेखर के खिलाफ की गई जांच रिपोर्ट अंतिम निर्णय के लिए शासन के पास विचाराधीन है। एससीएस की सिफारिश को किया दरकिनार सूत्रों ने बताया कि अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल ने वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव को एक नोटशीट लिखी है। इसके अनुसार सिवनी वन वृत के मुख्य वन संरक्षक एसएस उद्दे से सामाजिक वानिकी का प्रभार लेकर जबलपुर वर्किंग प्लान सबमिट कर चुके वन संरक्षक रमेश विश्वकर्मा को सौंप दिया जाए। वैसे भी वन संरक्षक विश्वकर्मा को अपनी पोस्टिंग का इंतजार है। एसीएस की सिफारिश में यह भी उल्लेख है कि सामाजिक वानिकी रीवा वृत्त वहां के वन संरक्षक राजेश राय और सामाजिक वानिकी सागर वृत्त का प्रभार मुख्य वन संरक्षक सागर अनिल कुमार सिंह को अतिरिक्त प्रभार के रूप में दे दिया जाए। यह बात अलग है कि वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव इस बात से इनकार किया है कि सामाजिक वानिकी का आर्थिक प्रभार देने संबंधित एसीएस की कोई नोटशीट उनके पास आई है। प्रभार देने से वर्किंग प्लान में होगी देरी एक पीसीसीएफ अधिकारी का कहना है कि वर्किंग प्लान ऑफिसर को आर्थिक प्रभार दिए जाने से कार्यायोजना बनाने में देरी होगी , क्योंकि अतिरिक्त प्रभार वाला पद अफसरों के लिए लाभप्रद होता है। वे ज्यादातर समय वर्किंग प्लान पर नहीं देकर शुभ-लाभ को ध्यान में रखते हुए काम करते है। जबकि वर्किंग प्लान बनाने का कार्य गंभीरता और बारीकी से किया जाता है।

वन स्टॉप सेंटर के प्रयासों से लौट रहा महिलाओं का सम्मान

Women’s respect is returning due to the efforts of One Stop Center भोपाल ! Women’s respect is returning महिलाओं के खिलाफ हिंसा एक गंभीर सामाजिक समस्या है जिससे निपटने और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये प्रदेश में वन स्टॉप सेंटर की स्थापना की गई है। Women’s respect is returning महिला सशक्तिकरण की दिशा में मिशन शक्ति की संबल उपयोजना के अंतर्गत वन स्टॉप सेंटर की स्थापना महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की हिंसा से प्रभावित और संकटग्रस्त महिलाओं एवं बालिकाओं को एक ही स्थान पर विभिन्न आपातकालीन एवं गैर-आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराना है। महिला सशक्तिकरण में वन स्टॉप सेंटर की भूमिका सुरक्षित आश्रय एवं तात्कालिक सहायता – वन स्टॉप सेंटर उन महिलाओं को तत्काल आश्रय और सुरक्षा प्रदान करता है जो घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, यौन हिंसा अथवा किसी भी प्रकार की शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का शिकार होती है। सेंटर में महिलाओं को तत्काल सुरक्षा प्रदान की जाती है और उन्हें सुरक्षित वातावरण में आश्रय दिया जाता है। कानूनी सहायता और परामर्श – वन स्टॉप सेंटर पीड़ित महिलाओं को कानूनी सहायता प्रदान करता है ताकि वे अपने अधिकारों को समझ सके और आवश्यक कानूनी कदम उठा सकें। कानूनी परामर्श और न्यायिक प्रक्रियाओं में सहायता मिलने से महिलाएँ अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ न्याय पाने की दिशा में सशक्त हो सकें। चिकित्सा सहायता – वन स्टॉप सेंटर पर महिलाओं को तत्काल चिकित्सा सहायता मिलती है। हिंसा या प्रताड़ना से घायल महिलाओं को नजदीकी स्वास्थ्य सेवाएँ के साथ समन्वय कर चिकित्सा सेवाएँ दी जाती है। मनोवैज्ञानिक परामर्श – हिंसा की शिकार महिलाएँ अक्सर मानसिक आघात से गुजरती है, वन स्टॉप सेंटर पर प्रशिक्षित परामर्शदाता महिलाओं को मानसिक और भावनात्मक समर्थन प्रदान करते है जिससे उनका आत्म-विश्वास मजबूत होता है। पुनर्वास सेवाएँ एवं समाज में पुनर्स्थापना – वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को पुनर्वास सेवाएँ भी प्रदान करते है। जरूरत पड़ने पर महिलाओं को उनके परिवार के साथ पुनर्स्थापित करने अथवा उन्हें स्वतंत्र जीवन जीने, अपने पैरों पर खड़ाहोने का अवसर प्रदान करता है। Read More : https://saharasamachaar.com/ifs-vs-missing-for-more-than-two-years-will-be-punished/ आर्थिक सशक्तिकरण के लिये प्रशिक्षण और रोजगार – वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को रोजगार और स्व-रोजगार देने के लिये प्रशिक्षण देने का भी प्रयास करते है। महिलाओं को विभिन्न कौशल में प्रशिक्षित किया जाता है। इससे वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र बन सकें और समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर सकें। प्रदेश के 52 जिलों में 57 वन स्टॉप सेंटर संचालित किये जा रहे है। प्रारंभ से अगस्त 2024 तक 98 हजार 636 महिलाओं को पंजीकृत कर विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान की गई, जिसमें लगभग 78 प्रतिशत महिलाएँ (76,499) को घरेलू हिंसा से संबंधित सहायता प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त दहेज उत्पीड़न, बलात्कार, यौन अपराध, बाल विवाह, गुमशुदा, अपहरण, निराश्रित आदि से संबंधित प्रकरणों में यथोचित मदद की गई। वर्ष 2019-20 में कुल 6 हजार 352 महिलाओं को सहायता दी गई थी। वर्ष 2023-24 में 21 हजार 490 महिलाओं को मदद प्रदान की गई। अब सभी वन स्टॉप सेंटर में वाहनों का प्रावधान भी किया गया है, जिससे दूरस्थ महिलाओं को भी त्वरित सहायता मिल सकेगी।

दो साल से अधिक समय से गायब आईएफएस वीएस होतगी दण्डित

IFS VS missing for more than two years will be punished भोपाल। राज्य शासन ने 13 जनवरी 2011 से 26 जनवरी 2013 तक कर्तव्यस्थल से गायब भारतीय वन सेवा के एमपी कैडर के वर्ष 1994 बैच के अधिकारी वीएस होतगी को उनकी सभी वेतन वृध्दियां स्थगित करने से दण्डित किया गया है। इनके बैच के एपीसीसीएफ पद पर प्रमोट हो चुके है। होतगी अभी भी डीएफओ हैं। राज्य शासन उनके बर्खासतगी का प्रस्ताव भी दो साल भेज चुकी थी, जिसे केंद्रीय कार्मिक विभाग में उसे निरस्त कर दिया।दरअसल, होतगी 3 अगस्त 2009 से 10 फरवरी 2011 तक भिण्ड सामान्य वनमंडल के डीएफओ थे। उन्हें 28 दिसम्बर 2010 को अनुदेशक रेंजर्स कॉलेज बालाघाट पदस्थ किया गया था परन्तु उन्होंने रिलीव होने के बाद भी ज्वाईनिंग नहीं दी। उन्हें 21 फरवरी 2012 को इस अनियमितता पर आरोप-पत्र जारी किया गया परन्तु उन्होंने कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया। 20 मई 2019 को उनके खिलाफ विभागीय जांच बैठाई गई। 22 सितम्बर 2022 को विभागीय जांच की रिपोर्ट मिली, जिसमें उन्हें 754 दिनों तक कर्तव्य से अनुपस्थित होने का दोषी पाया गया। 22 अक्टूबर 2022 को होतगी को बचाव उत्तर देने का नोटिस दिया गया जिस पर उन्होंने 24 नवम्बर 2020 को बचाव उत्तर दिया। लेकिन उनका जवाब अमान्य किया गया और उन्हें अनुपस्थिति की अवधि को अकार्य दिवस मानते हुये उन्हें एक वेतवृध्दि असंचयी प्रभाव से रोकने के दण्ड से दण्डित किया गया। राज्य शासन ने होतगी प्रकरण संघ लोक सेवा आयोग को भेजा। आयोग ने भी 4 मार्च 2024 को होतगी को दोषी पाते हुये उन्हें सभी वेतनवृध्दियों से वंचित करने का दण्ड दिया गया। इस दण्ड के बारे में उत्तर देने के लिये होतगी को पत्र भेजा गया, परन्तु उन्होंने यह पत्र प्राप्त नहीं किया। इस पर उनके कार्यालयीन कक्ष की टेबल पर इसे चस्पा किया गया। इसके बाद भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इस पर अब राज्य शासन ने एकपक्षीय निर्णय लेकर उन्हें इस टिप्पणी के साथ दण्डित किया है कि 30 अक्टूबर 2024 तक होतगी को वेतन के समयमान में निचले स्तर के दो चरणों तक की कटौती की शास्ति और आगे इस निर्देश के साथ अधिरोपित की जाये कि वह कटौती की अवधि के दौरान वेतन वृध्दियां अर्जित नहीं करेंगे। इस अवधि की समाप्ति पर, इस कटौती का प्रभाव उनकी भावी वेतनवृध्दि को स्थगित करने पर पड़ेगा।

एमएफपी पार्क से छः महीने में ही अर्चना हटाई गई, जूनियर डीएफओ गीतांजलि बनी नई सीईओ

Archana was removed from MFP Park within six months, Junior DFO Gitanjali became the new CEO. उदित नारायणभोपाल। लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक विभाष ठाकुर ने एक बार फिर एमएफपी पार्क की सीईओ अर्चना पटेल को हटाकर 2020 बैच की आईएफएस गीतांजलि जे को नया सीईओ बनाया। संघ के एमडी ठाकुर ने 12 महीने में तीन को बदल चुके हैं पर ना दवाईयों का समय पर प्रोडक्शन हो पा रहा है ना उसकी गुणवत्ता में सुधार हो रही। चर्चा है कि जिस भी सीईओ ने गुग्गल सहित रॉ मटेरियल की खरीदी में हुई गड़बड़झाला की फाइल खोली, उसे वहां से रुखसत होना पड़ा है। पहले पीजी फुलजले और अब अर्चना पटेल को एमएफपी पार्क के सीईओ पद से हटाकर मुख्यालय अटैच कर दिया गया।2004 बैच के आईएफएस पीजी फुलजले को नवंबर 23 में एमएफपी पार्क का सीईओ के पद पर पोस्टिंग हुई और जब उन्होंने आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने के लिए गुग्गल और अन्य रॉ मटेरियल की खरीदी में हुई गड़बड़ झाला की फाइल खोली तो उन्हें हटाकर 2018 बैच की महिला आईएफएस अर्चना पटेल को सीईओ बनाया। जबकि संघ में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मनोज अग्रवाल ( वर्तमान में उनकी सेवाएं विभाग को वापस कर दी गई है) जैसे सीनियर आईएफएस कार्यरत थे। यानि सीनियर अफसर की कमी बताकर एमएफपी पार्क के स्थापना से अब तक की सबसे जूनियर और अनुभवहीन आईएफएस अर्चना पटेल को सीईओ बनाया गया। दिलचस्प पहले हुई है कि अर्चना पटेल के हटाए जाने की स्थिति वही निर्मित हुई, जिसके कारण फुलजले को सीईओ पद से हटाया गया। बताया जाता है कि सीईओ बनने के बाद पटेल 3-4 महीने तक रबर स्टाम्प के रूप में काम किया, वह जब खुद फैसला लेने लगी और गड़बड़झाले की फाइल खोलने लगी, तभी उन्हें भी हटा दिया गया। अबकी बार 2020 बैच की महिला आईएफएस गीतांजलि जे को सीईओ बनाया। अनुभवहीन अधिकारियों की पोस्टिंग बंद करने की कहीं साज़िश तो नहीं ? एमएफपी पार्क बरखेड़ा पठानी में उत्पादित औषधीय की क्वांटिटी और क्वालिटी में गिरावट आई है। चर्चा है कि लघु वनोपज प्रसंस्करण केंद्र बरखेड़ा पठानी (एमएसपी पार्क) अनुभवहीन महिला अधिकारियों की पोस्टिंग के पीछे कहीं विंध्या हर्बल को बंद करने की साजिश तो नहीं चल रही है। यही वजह है कि एमएफपी पार्क बरखेड़ा पठानी में उत्पादित होने वाली औषधियों की क्वांटिटी और क्वालिटी में निरंतर गिरावट आ रही है। औषधि के गुणवत्ता को लेकर कई बार सवाल उठे। विगत वर्षों में केंद्र निरंतर प्रगतिशील रहा लेकिन पिछले 2 वर्षों में प्रशासनिक उदासीनता और गलत नीतियों से केंद्र को बहुत नुक़सान हुआ। कभी भारत के 17 राज्यों में आयुर्वेदिक दवाओं को सप्लाई करने वाले केंद्र को आयुष विभाग ने तो विंध्या हर्बल्स को ऑर्डर देना ही बंद कर दिया है। पिछले दिनों एक छोटा सा ऑर्डर इस वित्तीय वर्ष में केवल 1.8 करोड़ का आर्डर मिला है।

14 महीने के कार्यकाल में रीवा के लिए कई उपलब्धियां छोड़ गए अनुपम शर्मा

Anupam Sharma left many achievements for Rewa during his tenure of 14 months. भोपाल। आईआईटियन एवं 2017 बैच के आईएफएस अनुपम शर्मा बतौर रीवा डीएफओ का मात्र 14 महीने के कार्यकाल में वन कानूनों के हद में रहते हुए कई उपलब्धियां छोड़ गए। अब उन्हें पन्ना की जिम्मेदारी दी गई।बुरहानपुर वन मंडल अतिक्रमणक माफिया के खिलाफ अभियान चलाने से सुर्खियों आए अनुपम शर्मा रीवा डीएफओ रहते हुए जटायु संरक्षण अभियान शुरू किया। इसके अंतर्गत विभिन्न हितधारकों (जैसे गौशाला प्रबंधकों, गौ सेवकों, पशु चिकित्सकों, दवा दुकानों, इत्यादि) को हानिकारक दवाओं का उपयोग न करने हेतु जागरूक किया गया, और गिद्ध रहवास स्थलों की सतत निगरानी की गई। इसके फलस्वरूप, रीवा वनमण्डल में गिद्धों की 350 से लगभग 650 हो गई। इसके साथ ही शर्मा ने जुलाई 2024 में वनक्षेत्र में लगभग 5 लाख पौधों का रोपण हुआ। प्लास्टिक फ्री प्लांटेशन अभियान अंतर्गत लगभग 5000 किलोग्राम प्लास्टिक बैग्स के कचरे को संग्रहित कर उसे स्क्रैप डीलर को बेचा, जिससे प्लास्टिक कचरा रीसाइक्लिंग श्रृंखला में आया और 30,000 किलोग्राम कार्बनडाइऑक्साइड उत्सर्जन रोका गया। साथ ही, प्राप्त राशि से प्लास्टिक बॉटल्स के कचरे से बनी विशेष जैकेट्स का क्रय किया गया। टिंबर माफिया पर कसा शिकंजा रीवा में इंटर-स्टेट टिंबर माफिया के खिलाफ अभियान शुरू किया। सीधी और अनूपपुर के जंगलों से इमरती लड़कियां काटी जा रही और उनका अवैध परिवहन कर रीवा के रास्ते से उत्तर प्रदेश भेजा जा रहा था। रीवा वन मंडल का चार्ज लेने के बाद महीनों रेकी कराई और फिर धर-पकड़ का अभियान शुरू किया। लकड़ी के अवैध परिवहन को रोकने के लिए लगभग 80 कार्यवाहियां की। जिनमें वन अपराध प्रकरण दर्ज किए गए। कई हेक्टेयर वन क्षेत्र से अतिक्रमण हटाया गया। एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम किया डेवलप रीवा वन मंडल में पहली बार किसी डीएफओ ने लिखे और परंपरा से हटकर काम किया। आईआईटियन होने के नाते डीएफओ अनुपम शर्मा ने कुछ चिन्हित प्लांटेशन में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग और ग्राउंडवाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम ईजाद किया। इससे वानिकी कार्यों का पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव को मापा जा सके। बसामन मामा गौवंश विहार में किए गए रोपण में सिंचाई कार्यों के सतत अनुश्रवण और निगरानी हेतु स्मार्ट सेंसर सिस्टम स्थापित किए गए। पूरे देश में इस तरह का कार्य पहली बार रीवा वनमण्डल में ही हुआ है। अन्य उपलब्धियां

बाघों के संरक्षण में राजधानी की सड़कों पर टाइगर टॉक शो

Tiger Talk Show on the streets of the capital for the protection of tigers भोपाल। वन मंडल भोपाल की ओर से बाघ संरक्षण के प्रति जागरूकता हेतु राज्य स्तरीय वन्य जीव सप्ताह के अंतर्गत शुक्रवार को राजधानी की सड़कों पर टाइगर वॉक शो का आयोजन किया गया। इसमें में बड़ी संख्या में स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों, एनएसएस , एनसीसी के कैडेट विभिन्न एनजीओ के सदस्य, महिला एवं पुरुष लगभग 2000 प्रतिभागि हर्ष उल्लास के हिस्सा लिया। टाइगर वॉक की शुरुआत टीटी नगर स्टेडियम से हुई। इसका समापन मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय भोपाल में हुआ।टाइगर वॉक में वन एवं प्रचार वाहनों लाउडस्पीकर बाघ से संबंधित फिल्मों का प्रदर्शन करते हुए स्लोगन प्रचार पट्टिका तथा नृत्य कलाकारों के माध्यम से बाघ संरक्षण का संदेश दिया गया। भोपाल वन संरक्षक आलोक पाठक ने कहा कि वन्यप्राणी की दृष्टि से मध्य प्रदेश भारत का समृद्ध प्रदेश है। हमारे देश का भोपाल एकमात्र ऐसा शहर है जहां बाघ एवं मानव शहरी आबादी में रहते हैं। यह मध्य प्रदेश एवं भोपाल शहर के लिए बहुत ही बड़े गर्व की बात है। मध्य प्रदेश वन विभाग के वन एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण हेतु किये जा रहे प्रयासों का प्रतिफल है कि आज हमारा प्रदेश एवं भोपाल शहर बाघ के मामले में प्रथम स्थान पर है ।

वन बल प्रमुख को अपने गृह नगर बालाघाट के डीएफओ के खिलाफ मिली गड़बड़ियों की गंभीर शिकायतें

Forest Force Chief received serious complaints of irregularities against the DFO of his home town Balaghat. भोपाल । वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव अपने गृह नगर बालाघाट दौरे पर गए थे। वहां से लौटे तो उत्तर बालाघाट डीएफओ अभिनव पल्लव के खिलाफ कई गंभीर शिकायतों का पुलिंदा उनके हाथों में था। यह शिकायत बालाघाट वन मंडल में सामग्री सप्लाई से लेकर कंस्ट्रक्शन तक के कार्य एक ही ठेकेदार को दिए जाने से संबंधित है। डीएफओ अभिनव पल्लव पिछले तीन सालों में आधे-अधूरे निर्माण कार्य और गुणवत्ता विहीन सामग्री लेकर करोड़ के भुगतान कर दिए गए। इस उम्मीद के साथ यह शिकायत वन सुरक्षा समिति लामटा के अध्यक्ष शत्रुघ्न असाटी ने वन बल प्रमुख से की कि जांच तो अवश्य और निष्पक्ष होगी।विभाग के मुखिया श्रीवास्तव को दिए गए शिकायत में वन सुरक्षा समिति लामटा के अध्यक्ष शत्रुघ्न असाटी ने आरोप लगाया है कि वित्तीय वर्ष-2024 में मियाद वृध्दिकर फहीम खान की फर्म एवन कंस्ट्रक्शन को दिया गया है। वित्तीय वर्ष-2023 में जीईएम में बिड टेण्डर 31 लाख का मटेरियल रखकर वर्क आर्डर 25 से अधिक न देते हुए चार गुना दिया गया। वित्तीय वर्ष-2021-22 में मियाद वृध्दि कर उत्तर उत्पादन वनमण्डल में वर्कआर्डर कर डिपो में रोड वनरक्षक नाका लेबरहार्ट का मटेरियल सप्लाई दिया गया। Read more : https://saharasamachaar.com/removal-of-cf-in-bhopal-forest-division-against-the-cadre-and-posting-of-junior-dfo-tainted/ नियम विरुद्ध दिए हैंड पंप खनन के आरोप वित्तीय वर्ष-2023-24 में उत्तर एवं दक्षिण सामान्य लघु वनोपज संघ तेंदुपत्ता डीएफओ अभिनव पल्लव ने नलकूप खनन का कार्य बिना निविदा कराये सीधे फहीम खान की फर्म एवन कन्सट्रक्शन को दिया गया। इससे वन विभाग को करोंड़ों भ्रष्टाचार हुआ। वित्तीय वर्ष 2023-24 में लघुवनोपज तेन्दूपत्ता संघ में अधोसंरचना के कार्य, सामुदायिक भवन, सभा मंच, सी.सी. रोड, स्टाप डेम, रपटा, पुलिया पाईप पुलिया वन रकक्षक नाका में आधे से अपूर्ण की स्थिति में है। जिनका भुगतान 90 प्रतिशन पूर्ण हो चूका है। कैंपा कार्य में भी गड़बड़ झाला वित्तीय वर्ष-2021-22, 2022-23 और 2023-24, में कैम्पा से भवन निर्माण सभी कार्यो में रेन्जर द्वारा फहीम खान के साथ मिलकर लेबर मिस्त्री, बाउचर में बालाघाट, भरवेली, मटेरा के एकाउण्ट लगाकर फर्जी पेमेंट निकालकर ठेकेदार के साथ बंदरबांट गई।गुणवत्ताहीन मटेरियल का उपयोग से सीलन, दरारे, छत टपक रही है। मटेरियल टेस्टिंग मध्यप्रदेश के बाहर लेब से कराई जाये। बिना निविदा बुलाए वित्तीय वर्ष 2022-23, 2023-24 में वनपरिक्षेत्र अधिकारी, उप वन मण्डलाधिकारी और वन मण्डलाधिकारी के ऑफिस मरम्मत एवं रेवोवेशन के कार्य में लाखों रूपयें के कार्य कराए गए।-कार्य आवंटन के नाम पर तबादलेउत्तर वन मंडल बालाघाट में पदस्थ डीएफओ अभिनव पल्लव के खिलाफ अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियम 1969 के नियम 10 के अंतर्गत कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया है। इन पर आरोप है कि जब वे 2019-20 में ग्वालियर में पदस्थ थे तब इन्होंने 83 कर्मचारियों की कार्य आवंटन के नाम पर तबादले किए थे। इनसे स्पष्टीकरण मांगा गया था। स्पष्टीकरण का जवाब संतोषजनक नहीं होने के बाद अभिनव पल्लव के खिलाफ कार्यवाही का निर्णय लिया गया। दिलचस्प पहलू यह भी है कि ग्वालियर में ही पदस्थ बृजेश श्रीवास्तव के खिलाफ भी कार्य विभाजन के नाम पर स्थानांतरण किए जाने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

कैडर के विरुद्ध भोपाल वन मंडल में सीएफ को हटाकर दागी और जूनियर डीएफओ की पोस्टिंग

Removal of CF in Bhopal Forest Division against the cadre and posting of junior DFO tainted उदित नारायणभोपाल। लंबे अरसे बाद पिछले दिनों जंगल महकमे में 38 आईएफएस अफसर के स्थानांतरण के आदेश जारी हुए। इसमें कई विसंगतियां उजागर हुई। मसलन, भारतीय वन सेवा के कैडर में भोपाल वन मंडल में वन संरक्षक स्तर के अधिकारी की पदस्थापना का प्रावधान है किंतु विभाग ने वन संरक्षक आलोक पाठक को हटाकर 2018 बैच के आईएफएस लोकप्रिय भारती की पदस्थापना कर दी गई। https://saharasamachaar.com/mp-news-transfer-of-29-assistant-forest-conservators-and-forest-rangers/ जबकि भारती पर अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरतने की वजह वेतन – भत्तों के फर्जी भुगतान होने का आरोप है। वहीं मैनेजमेंट के खेल में योग्य आईएफएस नहीं मिलने के कारण इंदौर सीसीएफ के पद को रिक्त रखा गया है। जबकि सीसीएफ पदम प्रिया इंदौर में ही कार्यरत है उनकी पोस्टिंग की जा सकती है। यहां तक कि उन्हें वनवृत्त का प्रभार तक नहीं दिया गया। इसी वजह से तबादला बोर्ड के औचित्य पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।सूत्रों का कहना है कि स्थानांतरण सूची जारी करने से पहले मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली तबादला बोर्ड में विस्तृत चर्चा नहीं हुई। बोर्डमें चर्चा के नाम पर केवल रस्म अदायगी की गई। वर्ना कैडर विरुद्ध भोपाल वन मंडल में पदस्थापना कैसे संभव हो पाता। भोपाल वन मंडल में कैडर के विरुद्ध पोस्टिंग कर दी गई और तबादला बोर्ड की अध्यक्ष खामोश रहीं, यह शोध का विषय है। प्राय: यह होता रहा कि भोपाल वन मंडल में पोस्टिंग वन संरक्षक अथवा सीनियर डीएफओ की होती रही है। गौरतलब तथ्य यह भी है कि भारती जब सहायक वन संरक्षक सामाजिक वानिकी में पदस्थ रहे तब उनकी लापरवाही के कारण वेतन-भत्ते भुगतान में गड़बड़ी हुई है। यानि वेतन-भत्ते मद से 12. 50 लाख रुपए का संदिग्ध भुगतान कर दिया गया। इस प्रकरण में संजय महाजन कंप्यूटर ऑपरेटर और रामकुमार ठाकुर वनरक्षक को कई माह जेल में रहना पड़ा है और अब भारती की प्राइम पोस्टिंग के तहत भोपाल का डीएफओ बना दिया गया। एसीएस और विभाग प्रमुख को गड़बड़झाले की जानकारी होते हुए चुप रहे। अब भारती की भोपाल में हुई पोस्टिंग पर कई सवाल उठने लगे हैं। यही नहीं, भारती को भोपाल वन मंडल के साथ-साथ रायसेन उत्पादन, पर्यावरण वानिकी वन मंडल और विदिशा वन मंडल का भी प्रभार दिए जाने की चर्चा है। इंदौर वन वृत में सीसीएफ क्यों नहीं? इंदौर में पदस्थ प्रभारी एपीसीसीएफ क्षेत्रीय वर्किंग प्लान एवं मुख्य वन संरक्षक पदम प्रिया जनवरी में एपीसीसीएफ के पद पर प्रमोट हो जाएंगी। ऐसे में इंदौर वन वृत्त में सीसीएफ के पद पर उनकी पोस्टिंग होना, हक और नैतिकता का तकाजा है। चर्चा है कि इंदौर सर्किल में सीसीएफ पद पर पदम प्रिया की पोस्टिंग इसलिए नहीं हो रही कि क्योंकि वह न तो पोस्टिंग कराने का मैनेजमेंट जानती है और न ही उन्हें मंत्री, नेता और शीर्ष अफसर की गणेश परिक्रमा करनी आती है। अलबत्ता, वे एपीसीसीएफ के पद पर पदोन्नति होने से पहले सर्किल में सीसीएफ पदस्थ किए जाने के लिए एसीएस और हॉफ से आग्रह कर चुकीं है। दीक्षित का तबादला हो सकता है संशोधन पिछले दिनों जारी तबादला आदेश में स्वरूप रविंद्र दीक्षित का स्थानांतरण मुरैना से डीसीएफ ईको पर्यटन विकास बोर्ड भोपाल किया गया। जबकि वे दमोह जाना चाहते थे। स्थानांतरण सूची में हुए कई बदलाव के चलते एसीएस ने दीक्षित की जगह जरान्डे ईश्वर रामहरि का नाम डीएफओ दमोह के लिए जोड़ दिया। एक शिकायत के चलते डीएफओ अभिनव पल्लव का स्थानांतरण उत्तर बालाघाट से बालाघाट उत्पादन कर दिया गया। जबकि वह दक्षिण बालाघाट के लिए मंत्री तक अपनी अर्जी लगा दी थी। दक्षिण बालाघाट में ऐसे डीएफओ की पोस्टिंग की गई है, जिसके खिलाफ विभागीय जांच चल रही है। कम समय की सेवा में इनका ट्रेक रिकॉर्ड खराब है। इसी प्रकार विभागीय जांच के चलते ही नवीन गर्ग की पदस्थापना डीसीएफ ईको पर्यटन बोर्ड से डीएफओ उत्तर बैतूल कर दी गई।

एसटीआर के फील्ड डायरेक्टर कृष्णमूर्ति की मुख्यालय वापसी, भारती भोपाल के नए डीएफओ

STR field director Krishnamurthy returns to headquarters, Bharti is new DFO of Bhopal

STR field director Krishnamurthy returns to headquarters, Bharti is new DFO of Bhopal  उदित नारायण भोपाल। वन विभाग ने आईएफएस अफसरों की पोस्टिंग में बड़ा फेर-बदल किया है। पीसीसीएफ ओपी चौधरी को रिटायर होने के दो दिन पहले उन्हें भू अभिलेख शाखा में पदस्य किया है। वहीं सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर एल कृष्णमूर्ति को एपीसीसीएफ वन्य प्राणी शाखा में पोस्टिंग की गई। इसी प्रकार लघु वनोपज संघ से एपीसीसीएफ मनोज अग्रवाल और वन संरक्षक भोपाल आलोक पाठक को भी स्थानांतरित किया है। विदिशा के प्रभारी डीएफओ लोकप्रिय भारती को भोपाल का नया डीएफओ बनाया गया है।  3 माह से लंबित आईएफएस अधिकारियों की तबादला सूची शुक्रवार को जारी कर दी है। इस सूची का आईएफएसस अधिकारी  बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। आईएफएस अफसर की  तबादला सूची अभी भी अधूरी है, क्योंकि इंदौर और छतरपुर सर्किल में पोस्टिंग नहीं की गई है। इसके अलावा बड़वाह, रीवा, राजगढ़, शाजापुर सहित आधा दर्जन वन मंडलों में भी डीएफओ की पोस्टिंग नहीं हुई है। इससे अधिकारियों को उम्मीद है कि आईएफएस अफसरों को पदस्थ करने संबंधित एक और सूची जारी हो सकती है। जारी सूची के अनुसार एपीसीसीएफ मनोजकुमार अग्रवाल की सेवाएं लघु वनोपज संघ से वापस लेते हुए वर्किंग प्लान एवं लैंड रिकॉर्ड शाखा में पदस्थ किया गया। इसी प्रकार एल कृष्णमूर्ति को एसटीआर के फील्ड डायरेक्टर पद से स्थानांतरित वन्य प्राणी मुख्यालय में, मुख्य वन संरक्षक लखन लाल उईके को शहडोल से स्थानांतरित कर सीसीएफ सामाजिक वानिकी वृत भोपाल, अशोक कुमार ओएसडी वन विभाग से सीसीएफ होशंगाबाद वृत, राखी नंदा सामाजिक वानिकी भोपाल से फील्ड डायरेक्टर एसटीआर नर्मदापुरम, संजीव झा छतरपुर वन वृत्त से प्रतिनियुक्ति पर लघु वनोपज संघ भोपाल, अजय कुमार पांडेय वन संरक्षक वर्किंग प्लान छतरपुर से वन संरक्षक शहडोल वन वृत और अनिल शुक्ला वन संरक्षक होशंगाबाद वन वृत से वन विकास निगम भोपाल, आलोक पाठक वन संरक्षक एवं पदेन डीएफओ भोपाल से वन संरक्षक राज्य वन विकास निगम और बासु कनौजिया की पदस्थापना वन संरक्षक एवं पदेन डीएफओ उत्तर सिवनी से वन संरक्षक बैतूल वन वृत में की गई है।   क्षितिज कुमार नए ओएसडी वन विभाग  क्षितिज कुमार को सीधी डीएफओ से हटाकर ओएसडी भोपाल, प्रियांशी सिंह को डीएफओ अशोक नगर से  डिप्टी डायरेक्टर माधव राष्ट्रीय उद्यान शिवपुरी, अभिनव पल्लव डीएफओ वन मंडल उत्तर बालाघाट से उत्तर बालाघाट उत्पादन, पीडी ग्रेबीयाल डीसीएफ वन मुख्यालय से डीएफओ उज्जैन, महेंद्र सिंह उईके डीएफओ दमोह से उत्तर सिवनी, नवीन गर्ग डीएफओ एक पर्यटन बोर्ड भोपाल से उत्तर बैतूल,  मयंक चांदीवाल डीएफओ शाजापुर से डीएफओ सतना, जरान्डे ईश्वर रामहरि डीएफओ पश्चिम छिंदवाड़ा से दमोह वन मंडल, साहिल गर्ग डीएफओ  डिंडोरी से पश्चिम छिंदवाड़ा वन मंडल, अधर गुप्ता डीसीएफ रेंजर कॉलेज बालाघाट से डीएफओ दक्षिण बालाघाट, रमेश राठौड़ डीसीएफ वन मुख्यालय भोपाल से डीएफओ खरगोन, पुनीत सोनकर डीएफओ दक्षिण पन्ना से डीएफओ डिंडोरी, प्रतिभा अहिरवार उपसंचालक माधव नेशनल पार्क शिवपुरी से डीएफओ अशोक नगर, मोहम्मद माज डीएफओ भिंड से डीएफओ दतिया, स्वरूप रविंद्र दीक्षित   डीसीएफ इको पर्यटन बोर्ड भोपाल, अनुपम शर्मा डीएफओ रीवा से डीएफओ दक्षिण पन्ना, लोकप्रिय भारती डीएफओ रायसेन उत्पादन से  डीएफओ भोपाल, गीतांजलि जे प्रशिक्षु एसडीओ से एसडीओ लघु वनोपज संघ,  सुजीत जे पाटिल प्रशिक्षु एसडीओ नौरादेही वन मंडल से डीएफओ मुरैना और एस दीपिका प्रशिक्षु आईएफएस को पश्चिम छिंदवाड़ा से डीसीएफ वन विकास निगम भोपाल के पद पर स्थानांतरित किया गया है।   छः आईएफएस की वर्किंग प्लान में पदस्थ  आखिरकार वन विभाग को वर्किंग प्लान बनाने के लिए 2009 और 2011 बैच के आईएफएससी अधिकारियों की पोस्टिंग करना पड़ी। सारी आदेश के अनुसार प्रशांत कुमार सिंह को   डीएफओ खरगोन से डीएफओ वर्किंग प्लान खंडवा, डॉ किरण बिसेन को डीएफओ उज्जैन से वर्किंग प्लान उज्जैन, मीना कुमारी मिश्रा डीएफओ दक्षिण बालाघाट से वर्किंग प्लान शिवपुरी, अनुराग कुमार ओएसडी वन विभाग भोपाल से वर्किंग प्लान रीवा, देवांशु शेखर डीएफओ उत्तर बैतूल से वर्किंग प्लान सागर और सुश्री संध्या डीएफओ को सिवनी उत्पादन से डीएफओ वर्किंग प्लान बालाघाट के पद पर पदस्थ किया गया है।

हॉफ के मौखिक फरमान और सीसीएफ ने लिखे तीन पत्र फिर भी नहीं दिया चार्ज

Hoff's verbal order and CCF's three letters, still no charge was given

Hoff’s verbal order and CCF’s three letters, still no charge was given उदित नारायण  भोपाल। 2010 बैच के आईएफएस गौरव चौधरी का पद वन संरक्षक, पोस्टिंग डायरेक्टर बांधवगढ़ पर डीएफओ के पद का चार्ज नहीं देने पर आमादा है। फील्ड डायरेक्टर बांधवगढ़ टाइगर गौरव चौधरी को डीएफओ शहडोल उत्तर वन मण्डल का चार्ज देने के सीसीएफ शहडोल तीन पत्र लिख चुके हैं और गत बुधवार को वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने भी निर्देश दिए किन्तु वे चार्ज नहीं देने पर बालहठ करके बैठे हैं।   केंद्र सरकार की मंशा थी कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पूर्णकालिक फील्ड डायरेक्टर हो। यही वजह रही कि केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के सख्त निर्देश पर राज्य शासन ने एक सितम्बर दिन रविवार को सिंगल आदेश जारी कर गौरव चौधरी को डीएफओ शहडोल उत्तर वनमंडल से फील्ड डायरेक्टर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पद पर कर दिया गया। राज्य शासन के आदेश के बाद गौरव चौधरी ने फील्ड डायरेक्टर का पदभार तो संभाल लिया किंतु शहडोल उत्तर वनमंडल के डीएफओ का चार्ज आज तक नहीं दिया। जबकि सीसीएफ  शहडोल एलएस उईके ने फील्ड डारेक्टर गौरव चौधरी को उत्तर शहडोल वनमंडल का चार्ज  उमरिया के डीएफओ विवेक सिंह को देने के लिए  अब तक तीन पत्र लिखे और उसकी कॉपी वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव और पीसीसीएफ विवेक जैन को भी भेजी। श्रीवास्तव ने गत बुधवार को सीसीएफ को निर्देश दिए कि गौरव चौधरी से चार्ज लेकर विवेक सिंह को दें।  इनका कहना चार्ज नहीं देने की कुछ तो वजह होगी। जहां तक सीसीएफ के चार्ज देने संबंधित पत्र की कॉपी हमें नहीं मिला है। कई बार डाक आने में देरी हो जाती है।   विवेक जैन,  पीसीसीएफ प्रशासन-एक बांधवगढ़ में रेंजर सब पर भारी बांधवगढ़ में पदस्थ रेंजर पुष्पा सिंह राजनीतिक रसूख के चलते सीनियर अधिकारियों के आदेशों के नाफरमानी कर रही है। इसी बात को लेकर डिप्टी डायरेक्टर प्रकाश कुमार वर्मा ने उन्हें नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि  आपके द्वारा आज दिनांक तक वरिष्ठ अधिकारी के निर्देश का पालन नहीं किया गया है। यही नहीं आपके द्वारा राजनैतिक दबाव अधिकारियों पर डलवाना अनुशासनिक नियमों के विपरीत है। क्यों न आपके विरूद्ध म.प्र. सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम (3) (1) के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु वरिष्ठ कार्यालय को प्रस्ताव भेजा जाये? अतः आपको निर्देशित किया जाता है, कि पत्र प्राप्ति के 3 दिवस के अन्दर सन्दर्भित आदेश का पालन करते हुए प्रभार सूची से इस कार्यालय को अवगत कराया जायेगा। अन्यथा आदेश का पालन नहीं करने पर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का अवहेलना करने के संबंध में क्यों न आपके विरूद्ध विरूद्ध म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 16 (1) (क) के आपके विरूद्ध के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु वरिष्ठ कार्यालय को प्रस्ताव भेजा जायेगा। जिसके लिए आप स्वयं जिम्मेवार होंगें। नोटिस का रेंजर पुष्पा सिंह ने आज दिनांक तक जवाब नहीं दिया।

साल भर से शासकीय आवास पर अवैध रूप से  काबिज रेंजर को एसडीएम ने दिया बेदखली का नोटिस

SDM issued eviction notice to the ranger who was illegally occupying government accommodation for a year

SDM issued eviction notice to the ranger who was illegally occupying government accommodation for a year  उदित नारायण भोपाल। बांधवगढ़ नेशनल पार्क में पदस्थ महिला रेंजर पुष्पा सिंह नियम विरुद्ध दो-दो शासकीय आवास पर कब्जा कर रखा। बांधवगढ़ के अलावा साल भर से वह डिंडोरी वन मंडल के करंजिया स्थित रेंजर शासकीय आवास में काबिज है। डीएफओ डिंडोरी ने आवास खाली करने के लिए दर्जनों नोटिस दिए पर कोई असर नहीं नहीं पड़ा। अब एसडीएम बजाग ने मप्र लोक परिषर (बेदखली) 1974 की धारा 4 (1) के अंतर्गत शासकीय आवास खाली करने का नोटिस दिया है।  रेंजर पुष्पा सिंह का तबादला  25 सितंबर 2023 को डिंडोरी वन मंडल की करंजिया रेंज से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हो गया था। तब से आज तक करंजिया रेंज में स्थित शासकीय आवास पर बलात कब्जा किया हुआ है। करंजिया स्थित शासकीय आवास में कोई भी नहीं रहता है। मकान खाली करने के लिए डीएफओ ने कई नोटिस दिए पर नोटिस को गंभीरता सेवा लेते हुए डस्टबिन में डाल दिया। डीएफओ के नोटिस पर जब मकान खाली नहीं हुआ तब एपीसीसीएफ प्रदीप वासुदेवा की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित हुई। कमेटी की पिछले महीने बैठक हुई परंतु पुष्पा सिंह के कब्जे वाले मकान पर कोई निर्णय नहीं हो पाया। वन संरक्षण जबलपुर कमल अरोरा का कहना है कि बैठक में वह उपस्थित नहीं हुई इसलिए उस पर निर्णय नहीं हो पाया। यानी बैठक में न आकर उसने अघोषित तौर पर सीनियर अधिकारियों को चुनौती दे दी है कि खाली करवा कर दिखाओ। शासकीय आवास खाली करने में आईएफएस अफसरों के असहाय रहने के बाद डिंडोरी जिले के बजाग एसडीएम शासकीय आवास से बेदखली का नोटिस दिया है।  हमेशा विवादों की सुर्खियों में रहीं  बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पदस्थ रेंजर पुष्पा सिंह अक्सर विवादों की सुर्खियों में रही हैं। डिंडोरी वन मंडल के  करंजिया रेंज में पदस्ती के दौरान आर्थिक गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगे थे। कारंजा रेंज में उन पर आरोप था कि उन्होंने वन सुरक्षा समिति खारीडीह में रोड निर्माण हेतु आठ लाख अड्टालीस हजार की सड़क मात्रा डेढ़ लाख में बनाया गया जिसमे डिप्टी रेंजर को सस्पेंड किया गया। जबकि किंतु पुष्पा सिंह पर विभागीय जांच वर्तमान में चल रही है। रोचक तथ्य है कि वह एक भी पेशी में आज तक उपस्थित नहीं हुई। इसके पहले वह जब वह शहडोल में पदस्थ थीं तब  इनका रेत माफियों से लेन-देन संबंधित एक ऑडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। इस मामले में उन्हें निलंबित भी किया गया था।  करंजिया रेंज में वापसी का प्रयास   सूत्रों का कहना है कि रेंजर पुष्पा सिंह अपने राजनीतिक रसूक का इस्तेमाल करते हुए बांधवगढ़ से डिंडोरी वन मंडल के करंजिया रेंज में वापसी का प्रयास कर रही है। इसी कारण उन्होंने शासकीय आवास खाली नहीं किया है। बताया जाता है कि मंत्रालय में पदस्थ अफसर भी उनकी मदद कर रहे हैं।

छतरपुर में वन-राजस्व सीमा विवाद की आड़ में हो रही है वन भूमि पर खेती-बाड़ी

Farming is being done on forest land in Chhatarpur under the cover of forest revenue border dispute.

Farming is being done on forest land in Chhatarpur under the cover of forest revenue border dispute. छतरपुर। छतरपुर वन मंडल में वन-राजस्व सीमा विवाद की आड़ में वन भूमि पर खेती-बाड़ी का कारोबार बढ़ रहा है। गंभीरजनक यह है कि खेती करने की जानकारी फील्ड के कर्मचारियों ने डीएफओ और सीएफ को दी पर वे कार्रवाई करने की बजाय उन्हें तब तक खेती वन व्यवस्थापन की कार्यवाही पूर्ण नहीं हो जाती है।छतरपुर वनमंडल के गहरवार वनखंड स्थित ग्राम पिपौराखुर्द के शिम्भु रजक, ब्रजलाल रजक, घनश्याम रजक और रामबाई वन भूमि की 1. 70 हेक्टेयर में खेती कर रहें है। इस मामले में एसडीओ राजस्व को पत्र क्रमांक / मा.चि./2023/2743 दिनांक 1सितम्बर 2023 के तारतम्य में सीएफ छतरपुर कार्यालय ने लेख किया है कि भूमि खसरा नं0 740, 741, 757, 758 एवं 759 एकत्र रकबा 2 हेक्टेयर ग्राम पिपौराखुर्द वनखण्ड गहरवार के अंदर स्थित है। वन व्यवस्थापन अधिकारी द्वारा वन व्यवस्थापन की प्रक्रिया के दौरान कुछ खसरों को निजी भूमि माना जाकर वन सीमा से बाहर करने के आदेश प्रसारित किये गये है। जब तक वन व्यवस्थापन अधिकारी अथवा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व द्वारा कार्यवाही पूर्ण नहीं की जाती तब तक तत्कालीन वन व्यवस्थापन अधिकारी द्वारा जारी आदेशों के अनुसार शिम्भु रजक, बृजलाल रजक, घनश्याम रजक और रामबाई रजक की भूमि भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा-4 (1) के अंतर्गत संरक्षित वन में शामिल निजी स्वामित्व की है। अतः तत्कालीन वन व्यवस्थापन अधिकारी द्वारा जारी आदेश में उल्लेखित व्यक्तियों की बाहर की गई भूमियों को वन सीमा से बाहर मानते हुए खसरा नं0 741, 757, 758 एवं 759 कुल रकबा 1.70 हेक्टेयर में वन व्यवस्थापन होने तक कृषि कार्य की अनुमति सीएफ के हस्ताक्षर से जारी आदेश में दी गई है।डीएफओ की भूमिका की संदेहास्पदवन भूमि पर खेती-बाड़ी के कारोबार में डीएफओ की भूमिका भी संदेहास्पद है। छतरपुर सीएफ कार्यालय में प्रस्तुत दस्तावेजों और अभिलेखों के परीक्षणोपरांत पर सीएफ के द्वारा डीएफओ को बार-बार लेख करने के उपरांत भी प्रकरण का निराकरण नहीं किया जा रहा है। यही नहीं, डीएफओ कार्यालय द्वारा चाहे गये मानचित्र एवं 1974 में निर्वनीकृत वन भूमि के मानचित्र प्रदाय न किये जाने की स्थिति में सीएफ छतरपुर ने आवेदकों 1.70 हे. में कृषि कार्य की अनुमति प्रदान कर दी है । जारी आदेश में यह कहा गया है कि यह अनुमति वन व्यवस्थापन की कार्यवाही पूर्ण होने तक प्रभावी होगी।अदालत के फैसले के भरोसे हैं अफसरवन विभाग की छतरपुर रेंज कार्यालय के पास हो हमा बीट के कक्ष क्रमांक पी-619 वन्य प्राणी विचरण क्षेत्र है। इसी जंगल से सागर-कानपुर हाईवे निकला है। यहां वन विभाग विभाग की करीब 20 एकड़ जमीन पर इम्तियाज अली द्वारा अतिक्रमण किया गया है। इस अतिक्रमण के खिलाफ वन विभाग ने जुलाई 2023 में पीओआर क्रमांक 526 दर्ज किया गया है। साथ ही वन विभाग भोपाल के द्वारा की गई जांच में भी अतिक्रमण पाया गया था। सीसीएफ उड़नदस्ता भी जांच कर चुका है, लेकिन वन विभाग के अधिकारी अतिक्रमण नहीं हटा रहे हैं। वन विभाग ने अतिक्रमणकारी इम्तियाज अली के खिलाफ अदालत में चालान प्रस्तुत कर दिया है और अब हुए इंतजार कर रहे हैं की अदालत फैसला करेगा कि काबिज भूमि वन भूमि है अथवा नहीं। चर्चा है कि पूर्व में छतरपुर में डीएफओ रहे आईएफएस अधिकारी से इम्तियाज अली से अच्छे संबंध रहे हैं और उन्हीं के कार्यकाल में उसने वन भूमि पर कब्जा कर खेती कर रहा था।

पीसीसीएफ वन्य प्राणी के लिए ‘रॉबिंसन 44’ हेलीकॉप्टर की दरकार वन विहार संचालक ने निविदा बुलाई

Van Vihar operator called for tender for 'Robinson 44' helicopter for PCCF wildlife.

Van Vihar operator called for tender for ‘Robinson 44’ helicopter for PCCF wildlife. भोपाल। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान संचालक ने पीसीसीएफ वन्य प्राणी के लिए हेलीकॉप्टर ‘रॉबिंसन 44’ को किराये पर लेने के लिए एक निविदा आमंत्रित की है। निविदा में कहा गया है कि यह हेलीकॉप्टर सितंबर 24 से मार्च 25 तक उपयोग किया जाना है। यह निविदा दूसरी बार निकल गई है।वन विभाग में ऐसा पहली बार हो रहा है कि पीसीसीएफ वन्य प्राणी के नाम से हेलीकॉप्टर किराए पर लेने की निविदा आमंत्रित की गई है। हालांकि सूत्र बताते हैं कि शाजापुर में किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा रहे 400 ब्लैक बक यानी कृष्णमृग एवं 100 नीलगायों को हेलिकाप्टर से अन्यत्र शिफ्ट करने की योजना है। उसके लिए टेंडर आमंत्रित किया है। इसके लिए दक्षिण अफ्रीका के एक्सपर्ट टीम मध्य प्रदेश आएगी। शाजापुर जिले में काले हिरण और नीलगाय की संख्या बढ़ती जा रही है। शुजालपुर रेंज में इनकी संख्या ज्यादा है। खेतों में उछलकूद करने के कारण किसानों की फसलों को नुकसान हो रहा हैं। इस समस्या के निदान के लिए वन विभाग द्वारा पिछले साल भी इन जानवरों की शिफ्टिंग की योजना बनाई गई थी, इसके तहत यहां से काले हिरण और नीलगाय को पकड़कर गांधीसागर अभयारण्य में नामीबिया से चीते लाए जा रहे। इसके लिए साउथ अफ्रीका की टीम द्वारा बोमा तकनीक का उपयोग किया जाएगा। वन विभाग की टीम के द्वारा अभी सर्वे कर पता लगाया जा रहा है कि कहां पर हिरण और नीलगाय की संख्या ज्यादा है

जंगल महकमे में पोस्टिंग में हो रही महिला आईएफएस अफसरों की अनदेखी

Women IFS officers are being ignored for posting in the forest department.

Women IFS officers are being ignored for posting in the forest department. गणेश पाण्डेयभोपाल। जंगल महकमे में पॉवर और मैनेजमेंट के चलते महिला आईएफएस अफसरों की पोस्टिंग में अनदेखी की जा रही है। जबकि कुछ महिला अधिकारी तो विषय-विशेषज्ञ भी है फिर भी मुख्यधारा के हाशिये पर हैं। मसलन, इंदौर सर्किल से रिटायर्ड हुए वन संरक्षक नरेन्द्र सनोडिया के रिक्त पद का प्रभार वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने 54 किलोमीटर दूर स्थित उज्जैन सर्किल के वन संरक्षक मस्तराम बघेल को सौंप दिया। जबकि इंदौर सर्किल में ही बघेल से सीनियर 2001 बैच की महिला आईएफएस अधिकारी एवं मुख्य वन संरक्षक पदमाप्रिया बालकृष्णन क्षेत्रीय वर्किंग प्लान ऑफिसर है। वैसे तो इंदौर सर्किल का प्रभार तो पदमाप्रिया को मिलना था पर वह मैनेजमेंट के खेल में पिछड़ गई और प्रमोटी आईएफएस बघेल को दे दिया गया। पूर्व में जब एपीसीसीएफ मनोज अग्रवाल उज्जैन सर्कल में पदस्थ थे तब उन्हें भी इंदौर सर्किल का प्रभार दिया गया था किन्तु तत्कालीन वन बल प्रमुख आरके गुप्ता ने प्रभार सौंपने वाले निर्णय में संशोधन करते हुए इंदौर सर्किल में ही पदस्थ वन संरक्षक आदर्श श्रीवास्तव को प्रभार दे दिया था।इंदौर सर्किल पाने के लिए जो जोर-अजमाइशइंदौर सर्किल में पदस्थ होने के लिए कई आईएफएस अधिकारी पीपी मैनेजमेंट फार्मूले के अंतर्गत प्रयासरत है। जबकि शासन और विभाग प्रमुख को पीपी मैनेजमेंट फार्मूले को दरकिनार कर सीनियर-कम-मेरिट के सिद्धांत पर पोस्टिंग करना चाहिए। यानि पुरानी परंपरा के अनुसार 2001 बैच की महिला आईएफएस मुख्य वन संरक्षक पदमा प्रिया बालकृष्णन इंदौर सर्किल में पदस्थ होने की हकदार हैं। वैसे भी कैडर में इंदौर सर्किल का पद मुख्य वन संरक्षक का ही है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि यदि उनकी पोस्टिंग अभी इंदौर सर्किल के मुख्य वन संरक्षक के पद पर नहीं होती है तो वे अगले साल एपीपीसीएफ के पद पर प्रमोट हो जाएंगी। यदि ऐसा हुआ तो वह इकलौती ऐसी अफसर होंगी, जो सर्किल सीसीएफ के पद पर कार्य किए बिना ही एपीसीसीएफ पद पर प्रमोट हो जाएंगी।वाइल्डलाइफ डिप्लोमा धारी करा रही है वीआइपी को दर्शनमहकमे में एक और महिला आईएफएस डॉ किरण बिसेन की योग्यता की अनदेखी की जा रही है। डॉ बिसेन पशु चिकित्सा के साथ-साथ वन्य प्राणी मैनेजमेंट की डिप्लोमा धारी भी है। यही नहीं, वह चीता मैनेजमेंट पर दक्षिण अफ्रीका में ट्रेनिंग भी ले चुकी हैं। इसके पहले बिसेन पेंच नेशनल पार्क में तीन साल से अधिक समय तक उप संचालक के पद पर पदस्थ रह चुकीं है। बावजूद इसके, विभाग ने उन्हें अघोषित तौर पर उज्जैन डीएफओ के पद पर पदस्थ कर वीआईपी और वीवीआईपी को साढ़े तीन साल से दर्शन कराने की जिम्मेदारी दी है। जबकि पेंच नेशनल पार्क में फील्ड डारेक्टर का पद खाली है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में सदस्थ फील्ड डायरेक्टर एवं एपीसीसीएफ एल कृष्णमूर्ति की वन्यप्राणी मुख्यालय में वापसी होने जा रही है। ऐसी स्थिति में यहां भी एक वन्य प्राणी विशेषज्ञ आईएफएस की आवश्यकता है। विभाग में वन्य प्राणी विशेषज्ञ आईएफएस की कमी है।इनकी भी हो रही है अनदेखी1995 बैच की महिला आईएफएस अर्चना शुक्ला की भी वन विभाग ने अनदेखी की है। वे लंबे समय से विभाग की मुख्य धारा के हासिए पर है। वर्तमान में भी वे डेपुटेशन पर एपीसीसीएफ वन विकास निगम में पदस्थ है। इसके पहले भी वे प्रतिनियुक्ति पर लघुवनोपज संघ में पदस्थ रह चुकीं है। वर्तमान में फेडरेसन के प्रसंस्करण केंद्र बरखेड़ा पठानी में सबसे जूनियर प्रमोटी डीएफओ अर्चना पटेल को पदस्थ किया गया है। पटेल की अनुभवहीनता के कारण फेडरेशन के एमएफपी पार्क के उत्पादन और उसकी गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। इसके पहले एमएफपी पार्क के सीइओ के पद पर एपीसीसीएफ स्तर के अधिकारियों की पोस्टिंग होती रही है। वर्तमान में इस पद के लिए दो महिला अधिकारी हकदार है। पहली एपीसीसीएफ अर्चना शुक्ला और दूसरी 2007 बैच की राखी नंदा, जिन्हें सामाजिक वानिकी में पदस्थ किया गया है। यहां यह उल्लेखनीय है कि सामाजिक वानिकी का कार्य वन मंडल में पदस्थ सीनियर आईएफएस अधिकारी भी संभाल सकता है। इसके अलावा 2011 बैच की आईएफएस संध्या को तो सबसे अधिक उपेक्षित रही है। वह किसी भी वन मंडल में 5-6 महीने से अधिक टेरिटोरियल डीएफओ नहीं रहीं है। जबकि उनकी कार्य शैली फॉरेस्ट प्रोटक्शन की रही है।

बेखौफ हुए शिकारी जंगल में बिछा रहे करंट, तेंदुए के साथ युवक की मौत जांच जारी

Fearless hunters are spreading current in the forest, investigation into death of young man with leopard

Fearless hunters are spreading current in the forest, investigation into death of young man with leopard शहडोल ! जिले में करंट लगाकर जंगली जानवरों का शिकार करने का मामला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। जंगल में करंट लगाकर जंगली जानवर का शिकार करने के दौरान एक युवक के साथ तेंदुए की मौत का मामला प्रकाश में आने के बाद वन विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। घटना गोहपारू वन परिक्षेत्र अंतर्गत चुहिरी सर्किल के कोडार बीट की है। बुधवार की सुबह तेंदूऐ के शव से 100 मीटर की दूरी में एक युवक का शव मिला है। बताया गया कि युवक कमलेश बैगा पिता बिरजू बैगा उम्र 38 वर्ष निवासी ग्राम कुदरी का रहने वाला था, जिसका कोडार बीट के जंगल में तेंदुए के शव के पास ही युवक का शव मिला है। सुबह जंगल की ओर गए ग्रामीणों ने तेंदुए के पास पड़े युवक के शव को देखकर मामले की जानकारी पुलिस के साथ वन विभाग के अधिकारियों को दी। जानकारी मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारी एवं पुलिस मौके पर पहुंच मामले की पड़ताल में जुटी हुई है। जहां यह दोनों शव मिले हैं, वहां 11 हज़ार केवी की लाइन से जंगल में करंट बिछाया गया था। करंट की चपेट में आने से ही दोनों की मौत होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इस मामले पर वन विभाग के साथ पुलिस जांच कर रही है। ग्रामीणों ने बताया कि मृतक कमलेश बैगा जंगल में शिकार करने अपने अन्य साथियों के साथ गया था। तभी 11 हज़ार केवी की लाइन से जीआई तार के माध्यम से जंगली जानवरों के शिकार के लिए बिछाए गए करंट की चपेट में युवक खुद आ गया और उसकी मौत हुई है। युवक को करंट लगता देख उसके अन्य साथी वहां से फरार हो गए, कुछ देर उसी रास्ते जा रहा तेंदुआ भी इसकी चपेट में आ गया, जिससे दोनों की ही मौत हो गई। वन विभाग अधिकारी अपनी टीम के साथ घटना स्थल बुधवार की सुबह पहुंचे और जांच कर रहे हैं, रेंजर ने अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं कहा है। आए दिन जंगल में लगाए जाते हैं करंटबीते दिनों केशवाही वन परिक्षेत्र के जंगल में जंगली जानवरों के शिकार के लिए लगाए गए करंट में पिता पुत्री चपेट में आ गए थे, जिससे दोनों बुरी तरीके से झुलस गए थे। ग्रामीणों का यह भी आरोप था कि वन विभाग के अधिकारियों के साठ गाठ से शिकारी यहां शिकार करते हैं। गोपाहरू वन परिक्षेत्र में कई तेंदुए जंगल में विचरण कर रहे हैं। लेकिन वन विभाग की गश्ती पर यह घटना ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अधिकारी तो कागजों में कई बार निर्देश जारी करते रहते हैं। लेकिन मैदानी अमला गस्ती नहीं करता, जिसकी वजह से ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। बता दें, जिस बीट में यह घटना घटी है वहां के डिप्टी रेंजर स्वयं मुख्यालय में नहीं रहते। ऐसा विभागीय सूत्रों का कहना है। रेंजर की लापरवाही की वजह से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। लोगों का कहना है कि रेंजर ने जब से वन परिक्षेत्र गोहपारु की कमान संभाली है, तब से जंगल में गश्ती कम हो गई है और मैदानी अमला भी गश्ती नहीं करता, जिसकी वजह से शिकारी बेखौफ हो गए हैं और करंट लगाकर जंगली जानवरों का शिकार कर रहे हैं। गोहपारू रेंजर हेमंत कुमार प्रजापति का कहना है कि लगातार गश्ती की जाती है, जो कर्मचारी मुख्यालय में नहीं रहते उन पर कई बार कार्रवाई की जा चुकी है। तेंदुए के समीप ही युवक का शव मिला है। जंगल में शिकार करने युवक गया था या नहीं, अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं कहा जा सकता।मामले की जांच चल रही है। डॉग एस्कॉर्ट को मौके पर बुलवाया गया है।

गौरव चौधरी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर बने, पेंच में पूर्णकालिक का इंतजार

Gaurav Chaudhary becomes the field director of Bandhavgarh Tiger Reserve, waiting for full time appointment

Gaurav Chaudhary becomes the field director of Bandhavgarh Tiger Reserve, waiting for full time appointment भोपाल। केंद्रीय एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के सख्त निर्देश पर अंततः साल भर बाद राज्य शासन ने उत्तर शहडोल वन मंडल में पदस्थ वन संरक्षक गौरव चौधरी को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में फील्ड डायरेक्टर बनाया गया। साल भर से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्ट का पद रिक्त था। इसी प्रकार पेंच नेशनल पार्क के संचालक का पद 2 साल से रिक्त है। अतिरिक्त प्रभार में प्रबंधन का कार्य चल रहा है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हुई बाघों की मौत पर राष्ट्रीय स्तर पर मध्य प्रदेश के बाघ प्रबंधन पर सवाल उठने लगे। नेशनल अखबारों में भी टाइगर मौत की खबरें सुर्खियों में रही। इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय में भी मामला उठा। इन सब कारणों के केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव मुख्यमंत्री मोहन सिंह यादव को कई बार बांधवगढ़ में पूर्णकालीन डायरेक्टर पदस्थ करने की हिदायत देते हुए पत्र भी लिखे। हालांकि उनके निर्देश पर मुख्यमंत्री यादव यही बहाना बनाते रहे कि वन मंत्री नए बने हैं इसलिए आईएफएस के पदस्थापनाओं के संबंध में विचार- मंथन चल रहा है। लंबे समय से निर्णय नहीं हो पाने के कारण केंद्रीय मंत्री यादव ने सख्त लहजे में मुख्यमंत्री को निर्देश दिए कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में तत्काल फील्ड डायरेक्टर को पदस्थ करें। केंद्रीय मंत्री के निर्देश पर रविवार को गौरव चौधरी पोस्टिंग के आदेश जारी करने पर जबकि पेंच नेशनल पार्क में 2 साल से फील्ड डायरेक्टर का पद रिक्त हैं। सिंगल आदेश और अफसरों में हड़कंपवन विभाग में लंबे समय से आईएफएस अधिकारियों के कई पद खाली पड़े है। इन पदों को भरने के लिए मुख्यालय से प्रस्ताव भेजे गए है पर उस पर प्राइम पोस्टिंग के लिए हो रही जोर-अजमाईस के चलते निर्णय नहीं हो पा रहे हैं। अचानक रविवार को गौरव चौधरी के सिंगल आदेश को लेकर वन विभाग के अधिकारी हतप्रभ रह गए। जबकि वन संरक्षक के अधिकारियों की सूची में और भी नाम थे। हालांकि गौरव चौधरी के साथ-साथ जो अधिकारियों के नाम सूची में शामिल थे। इन नाम पर सहमति नहीं बन पा रही थी इसलिए मामला अधर में लटका था। जैसे दक्षिण सिवनी में पदस्थ वन संरक्षक वासु कनौजिया को बैतूल सर्किल, मंत्रालय में पदस्थ अशोक कुमार को होशंगाबाद सर्किल में, सीएफ समाजिक वानिकी राखी नंदा को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और होशंगाबाद वन संरक्षक अनिल शुक्ला की सेवाएं डेपुटेशन पर वन विकास निगम को सौंपने का प्रस्ताव शामिल था। इसके अलावा सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर एवं पीसीसीएफ एल कृष्णमूर्ति को एपीसीसीएफ वन्य प्राणी मुख्यालय में पोस्ट करने का प्रस्ताव है।

चीता पवन की मौत, मध्य प्रदेश में इस साल 13 का हुआ जन्म, चार की गई

Cheetah Pawan died, 13 were born this year in Madhya Pradesh, four died

Cheetah Pawan died, 13 were born this year in Madhya Pradesh, four died चीतों के लिहाज से 2024 का समय अब तक ठीक-ठाक रहा है. 2024 के इन आठ महीनों के दौरान 13 शावकों ने जन्म लिया जबकि इस दौरान दो व्यस्क चीते सहित दो शावकों की मौत भी हुई है. अब कूनो नेशनल पार्क में चीता पवन की मौत के बाद संख्या 24 रह गई है, जिनमें 12 वयस्क और 12 शावक शामिल हैं. चीतों के लिए मध्य प्रदेश उपयुक्त माना गया और साल 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 चीते लाए गए. इन चीतों को बाड़े में रिलीज करने के लिए प्रधानमंत्री खुद आए और चीतों को बाड़े में रिलीज किया. इसके बाद 18 सितंबर 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए थे. अब तक चीतों की दो खेप ही आई है. शुरुआती दौर में चीता प्रोजेक्ट काफी मुश्किल भरा था. नई जगह और नई आबो हवा की वजह से चीतों की मौत हो रही थी, लेकिन अब धीरे-धीरे चीते यहां के वातावरण में ढलने लगे हैं. 2024 का अब तक समय भी अच्छासाल 2023 में ज्यादा चीतों की मौत हुई थी, लेकिन साल 2024 का अब तक का समय बहुत अच्छा निकला है. इस दौरान 4 दुखभरी तो 3 खुशियों भरी खबर आई. खुशखबरी में साल 2024 में 13 शावकों ने जन्म लिया, जबकि दुख भरी खबर ये है कि इसी साल दो व्यस्क चीतों सहित दो शावकों की मौत हुई है. एक चीता पवन बीते मंगलवार (27 अगस्त) को ही मृत अवस्था में पाया गया. चीता प्रोजेक्ट पर एक नजर

करोड़ों की रॉयल्टी नुकसान पर वन -राजस्व सीमा विवाद में ढाई दशक से अटका है कटनी की झिन्ना खदान

Katni's Jhinna mine is stuck for two and a half decades in forest revenue border dispute over royalty loss worth crores.

Katni’s Jhinna mine is stuck for two and a half decades in forest revenue border dispute over royalty loss worth crores. भोपाल। वन-राजस्व सीमा विवाद के चलते 30 में कटनी के झिन्ना की खदान का प्रकरण का निराकरण नहीं हो पाया है। इस मसले पर राज्य शासन और वन विभाग असमंजस में है। फरवरी 2020 में मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दे चुके हैं कि इस प्रकरण में न्यायालयीन प्रक्रिया से प्रदेश के राजस्व में सतत हानि हो रही है। बावजूद इसके, 2017 से सुप्रीम कोर्ट में कटनी का झिन्ना खदान विवाद लंबित है। इससे जहां सरकार को करोड़ों की रेती का नुकसान हो रहा है वही 20 गांव के 2000 से अधिक लोग रोजगार से मेहरूम है। दिलचस्प पहलू यह है कि समय-समय पर अधिकारियों के सुर आदेश बदलते रहे।शिकायती पत्र के मुताबिक, कटनी के खनन कारोबारी आनंद गोयनका मेसर्स सुखदेव प्रसाद गोयनका को मध्य प्रदेश की तत्कालीन दिग्विजय सरकार के कार्यकाल में 1994 से 2014 तक की अवधि के लिए 48.562 हेक्टेयर भूमि पर खनिज करने का पट्टा मिला था। खनिज पट्टा आवंटित होने की पीछे भी बहुत कुछ छिपा है। दरअसल मध्य प्रदेश शासन ने ग्राम झिन्ना तहसील ढीमरखेड़ा जिला कटनी के वन क्षेत्र की 48.562 हेक्टेयर भूमि पुराना खसरा नम्बर 310, 311, 313, 314/1, 314/2, 315, 316, 317, 318, 265, 320 में खनिज के लिए एक अप्रैल 1991 में 1994 से लेकर 2014 तक की अवधि के लिए निमेष बजाज के पक्ष में खनिज पट्टा स्वीकृत किया था। जिसे वर्ष 1999 में मध्य प्रदेश शासन के खनिज विभाग के आदेश से 13 जनवरी 1999 को उक्त खनिज पट्टा मेसर्स सुखदेव प्रसाद गोयनका प्रोप्राइटर आनंद गोयनका के पक्ष में हस्तांतरित किया गया। लेकिन साल 2000 में वन मंडल अधिकारी कटनी के पत्र के आधार पर कलेक्टर कटनी ने आदेश पारित कर लेटेराइट फायर क्ले और अन्य खनिज के खनन पर रोक लगा दी थी।खदान से संबंधित फैक्ट फाइल नौकरशाह और आईएफएस अफसर के सुर बदलते रहेइस मामले में सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि आईएएस अफसर हो या फिर आईएफएस समय-समय पर सभी के सुर बदलते रहे। मसलन जब अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल दूसरी बार वन मंत्रालय संभाला तो एक आदेश जारी कर पूर्व एसीएस वन जेएन कंसोटिया के उस आदेश को पलट दिया, जिसमें कटनी जिले की तहसील ढीमरखेड़ा के ग्राम झिन्ना की खदान के मामले में सुप्रीम कोर्ट से एसएलपी वापस लेने का आदेश दिया था। अपने आदेश को तत्काल अमल में लाने के लिए कंसोटिया ने बाकायदा डीएफओ कटनी को कारण बताओं नोटिस की तलब किया था। यहां यह भी तथ्य भी गौरतलब है कि जब वर्णवाल प्रमुख सचिव वन थे तब उन्होंने भी एसएलपी वापस लेने का आदेश जारी किया था। अब वही बता सकते है कि वे तब सही थे या फिर अब..? फिलहाल पिछले महीने वन विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने वन मुख्यालय को निर्देश दिये हैं कि यदि यह केस अब तक वापस नहीं लिया गया है तो केस वापस लेने की कार्रवाई आगामी आदेश तक रोक दी जाये। वर्णवाल के आदेश के बाद जंगल महकमे में लाख टके का सवाल उठ रहा है कि आखिर किस अदृश्य शक्ति के दबाव में आकर पूर्व एसीएस कंसोटिया ने एसएलपी वापस लेने का आदेश जारी किया था। इसी प्रकार रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी जेपी शर्मा जब भू-अभिलेख शाखा में एपीसीसीएफ थे तब उन्हें विवादित खदान भूमि वन भूमि का हिस्सा दिखा करती थी पर जब रिटायर हो गए तो उन्हें भी विवादित भूमि राजस्व भूमि नजर आने लगी है। अफसरों की कमेटी ने लिया था एसएलपी वापस लेने का निर्णयएसएलपी वापस लेने संबंधित आदेश जारी करने के पूर्व 13 अक्टूबर 23 को अपर मुख्य सचिव वन कंसोटिया की अध्यक्षता में एक विशेष बैठक बुलाई गई थी। बैठक में अतुल कुमार मिश्रा सचिव वन, अशोक कुमार पदेन सचिव, आरके गुप्ता तत्कालीन वन बल प्रमुख, अतुल कुमार श्रीवास्तव तत्कालीन पीसीसीएफ वर्किंग प्लान और अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक भू अभिलेख डॉ वीएस अन्नागिरी भी उपस्थित थे। यह बैठक में ग्राम झिन्ना एवं हरैया तहसील ढीमरखेड़ा जिला कटनी में स्वीकृत खनिज पट्टे विवाद के निराकरण के लिए बुलाई गई थी। इस कमेटी के निर्णय के बाद ही तत्कालीन एसीएस कंसोटिया ने एसएलपी वापस आदेश जारी किया। यह बात अलग है कि इसी आदेश के चलते ही उनसे वन मंत्रालय से हटा दिया गया।

जिसे ब्लैकलिस्ट किया उसकी शिकायत पर ही डीएफओ के खिलाफ जांच शुरू

Investigation started against DFO only on the complaint of the person who was blacklisted

Investigation started against DFO only on the complaint of the person who was blacklisted उदित नारायणभोपाल। जंगल महकमे के एक डीएफओ के खिलाफ जांच इसलिए शुरू हो गई, क्योंकि उसके फर्म को डीएफओ ने ब्लैकलिस्ट कर दिया है। इस प्रकरण से विजिलेंस शाखा की कर शैली पर सवाल उठने लगे है कि शिकायत की तब्शीश किए बिना ही जांच का फरमान जारी कर दिया।प्रभारी डीएफओ अनूपपुर श्रद्धा पेंद्रे ने मे० रॉयल टेक इन्डस्ट्रियल कॉर्पोरेशन चचाई एम.पी.ई.व्ही. चचाई जिला अनुपपूर को वर्ष 2023-24 द्वारा समयावधि में सामग्री प्रदाय नही करने एवं निर्देशों का पालन नही करने के कारण मे० रॉयल टेक इन्डस्ट्रियल कॉर्पोरेशन चचाई अनूपपुर फर्म को 5 वर्ष (वर्ष 2024-25 से 28-29) की अवधि के लिए ब्लैक लिस्ट कर दिया और उनके द्वारा जमा की गई प्रतिभूति राशि ढाई लाख रुपए भी राजसात कर लिए है। डीएफओ की कार्यवाही से बौखलाए मे० रॉयल टेक इन्डस्ट्रियल कॉर्पोरेशन चचाई फर्म के संचालक ने डीएफओ श्रद्धा पेंद्रे के खिलाफ विभागीय विजिलेंस से लेकर सीसीएफ से शिकायत की। शिकायत में टेंडर की औचित्यहीन शर्तों का उल्लेख किया है। शिकायतकर्ता की पृष्ठभूमि का परीक्षण किए बिना ही वरिष्ठ आईएफएस अधिकारियों ने डीएफओ के खिलाफ जांच प्रारंभ करवा दी है। वर्किंग प्लान ऑफिसर शैलेंद्र गुप्ता को जांच दी गई है।फर्म को इन सामग्री का मिला था ठेकावनमण्डल दक्षिण शहडोल अंतर्गत विभिन्न परिक्षेत्रों में वित्तीय वर्ष 2023-24 में वानिकी कार्यों एवं निर्माण कार्यों में उपयोग हेतु सामग्री क्रय करने हेतु गोबरखाद, रेत सोन नदी का साफ और सीमेन्ट आदि सामग्री प्रदाय करने हेतु मे० रॉयल टेक इन्डस्ट्रियल कॉर्पोरेशन चचाई को वर्क ऑडर दिया गया था। फर्म ने सामग्री समय पर प्रदाय नहीं किया। सामग्री प्रदाय न करने बाबत् स्पष्टीकरण देने हेतु निर्देशित किया गया। साथ ही उप वनमण्डलाधिकारी सोहागपुर के पत्र क्रमांक/4348, वन परिक्षेत्राधिकारी मोहपास के पत्र पत्र क्रमांक/2391, पत्र क्रमाक/2393, पत्र क्रमांक / 2345, पत्र क्रमाक/2397, के अलावा वन परिक्षेत्राधिकारी खन्नीधी, जैतपुर, बुढ़ार और परिक्षाधिकारी शहडोल सामग्री प्रदाय करने हेतु बार-बार निर्देशित किया गया किन्तु मे० रॉयल टेक इन्डस्ट्रियल कॉर्पोरेशन चचाई एम.पी.ई.व्ही. चचाई जिला अनुषपूर (म०प्र०) द्वारा सामग्री ही आज दिनांक तक प्रदाय नहीं किया। इसके कारण वानिकी कार्य एवं निर्माण कार्य आज दिनांक तक पूर्ण नही हो पाया है। वर्तमान में क्षेत्र तैयारी अन्तर्गत भू-जल संरक्षण कार्य, गड्‌या खुदाई, विकृत पौधा कटाई आदि कार्य प्रगति पर है जिससे क्षेत्र तैयारी आदि कार्य में काफी विलंब हो रहा है। सामग्री तत्काल प्रदाय करने हेतु फर्म को लेख किया गया किन्तु कार्यालय से जारी पत्रों के किसी भी पत्र का प्रति उत्तर/बचाव उत्त्तर प्रस्तुत नहीं किया गया।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश एपीएआर संबंधित आदेश सरकार वापस लें नहीं तो अवमानना कार्यवाही शुरू करेंगे

Supreme Court's order: Government should withdraw APAR related order or else we will initiate contempt proceedings

Supreme Court’s order: Government should withdraw APAR related order or else we will initiate contempt proceedings भोपाल। उच्चतम न्यायालय न्यायमूर्ति बी दवाई की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य को चेतावनी दी यदि 29 जून को जारी आईएफएस अधिकारियों की प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट संबंधित आदेश वापस लें नहीं तो  प्रदेश सरकार के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जहां आईएफएस अधिकारियों की जीत हुई है वहीं नौकरशाही की फजीहत हुई है। एक अधिकारी ने कोर्ट के फैसले के बाद अपनी प्रक्रिया में कहा कि सत्यमेव जयते।   यह आदेश न्यायमूर्ति बीआर गवई की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ ने गौरव कुमार बंसल, वकील द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया । न्यायमूर्ति बीआर गवई की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मध्य प्रदेश राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता को इस मुद्दे को गंभीरता से देखने का निर्देश दिया और आगे कहा कि यदि दिनांक 29 जून 24 का आदेश वापस नहीं लिया गया तो न्यायालय उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू कर सकता है। सनद रहे कि 29 जून 2024 के अपने आदेश के तहत, मध्य प्रदेश राज्य ने डीएफओ से लेकर पीसीसीएफ तक के भारतीय वन सेवा अधिकारियों के लिए एपीएआर चैनल के संबंध में एक नई व्यवस्था शुरू की। बंसल ने न्यायमूर्ति गवई की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ को यह भी अवगत कराया कि 29 जून 2024 के आक्षेपित आदेश ने न केवल डीएफओ से लेकर पीसीसीएफ तक सभी आईएफएस अधिकारियों के एपीएआर जमा करने के चैनल को बदल दिया है, बल्कि यह भी निर्देश दिया है कि संयुक्त से संबंधित कार्य वन प्रबंधन, वन अधिकार अधिनियम से संबंधित मामले, भूमि अधिग्रहण, इकोटूरिज्म, वन क्षेत्रों में खनन गतिविधियाँ, और डीएफओ , वन संरक्षक और मुख्य वन संरक्षक द्वारा किए गए अन्य महत्वपूर्ण कार्यों का मूल्यांकन संबंधित जिला कलेक्टर और संभागीय आयुक्त द्वारा किया जाएगा। एपीएआर में उनकी टिप्पणी के साथ दस में से नंबर देकर, जो उनकी भूमिका के बिल्कुल विपरीत है। बंसल ने तर्क दिया कि मध्य प्रदेश राज्य द्वारा जारी दिनांक 29 जून 24 का आदेश टी.एन. के फैसले में इस माननीय न्यायालय द्वारा निर्धारित स्पष्ट निर्देशों का उल्लंघन करता है। बंसल ने  न्यायमूर्ति गवई की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ को यह भी सूचित किया कि मूल्यांकन प्रक्रिया में गैर-वन विभाग के अधिकारियों को शामिल करने से न केवल भारतीय वन सेवाओं के प्राथमिक जनादेश यानी वैज्ञानिक प्रबंधन, संरक्षण और वनों का संरक्षण कमजोर होगा। वन्यजीवन के संरक्षण और सुरक्षा पर भी प्रभाव डालेगा, इसलिए वर्तमान आदेश मध्य प्रदेश सरकार वापस ले।

विरूद्व वन अपराध प्रकरण क्रमांक 31/12 दिनांक 24 फरवरी 24 के माध्यम से पंजीबद्ध किया गया,अनुमति के विरुद्ध 27.9 हेक्टेयर पर निर्माण किया

construction was done on 27.9 hectares against the permission.

Forest offence case number 31/12 dated 24 February 24 was registered against him, construction was done on 27.9 hectares against the permission. (विशेष संवाददाता ) भोपाल। कंपनी द्वारा स्थल पर कक्ष कमांक पी-546 में 182.00 हेक्टेयर में निर्माण कार्य किया गया है, जिसमें सीमेन्ट फैक्ट्री प्लांट, रिहायसी कॉलोनी, स्कूल, रेस्टहाउस आदि सम्मिलित हैं। कक्ष कमांक पी-546 में 182 हेक्टेयर में निर्माण कार्य के अतिरिक्त कंपनी द्वारा कक्ष कमांक पी-555 में 27.9 हेक्टेयर में बैंक, लेबर कॉलोनी, कॉलेज, हॉस्पिटल, बाजार आदि का निर्माण किया गया है। अतएव फैक्ट्री प्रबंधन को कुल आवंटित 188.23 हेक्टेयर वनभूमि में से कन्वेयर बेल्ट हेतु आवंटित 5.855 हेक्टेयर वनभूमि को हटाकर कुल 182.375 हेक्टेयर में निर्माण कार्य करने की अनुमति प्राप्त थी किंतु कंपनी द्वारा आवंटित 182.375 हेक्टेयर वन भूमि के विरुद्ध बीट सगमनिया के कक्ष क्रमांक पी-546 में 182 हेक्टेयर तथा बीट बम्हनी के कक्ष क्रमांक पी-555 मैं 27.9 हेक्टेयर में निर्माण कार्य किया गया। इस प्रकार कंपनी को निर्माण कार्य हेतु कुल आवंटित वन भूमि 182.375 हेक्टेयर के विरुद्ध कुल 209.9 हेक्टेयर वन भूमि में फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा निर्माण कार्य किया गया। अतएव कंपनी द्वारा 27.9 हेक्टेयर वन भूमि अतिरिक्त अवैध निर्माण कार्य किया गया है।  वर्किंग प्लान में भी अतिक्रमण का था उल्लेख  वनमण्डल सतना की कार्य आयोजना में वर्ष 2008-09 से 2017-18 में 30 हेक्टेयर तथा वर्तमान कार्य आयोजना वर्ष 2019-20 से 2028-29 भाग-3 आलेख में 24.94 हेक्टेयर अतिक्रमण कक्ष कमांक पी-555 में लेख किया गया है। जो 2005 के पूर्व का है। कार्य आयोजना (वर्ष 2008-09 से 2017-18) एवं वर्तमान कार्य आयोजना (वर्ष 2019-20 से 2028-29) के अनुसार भी कक्ष कमांक पी-555 में कंपनी प्रबंधन द्वारा किये गये 27.9 हेक्टेयर में निर्माण कार्य अतिक्रमण के रूप में अंकित है एवं यह अतिक्रमण वर्ष 2005 से पूर्व का है।  गूगल इमेजरी में भी अतिक्रमण उजागर  गूगल अर्थ इमेजरी वर्ष 2002 तक ही उपलब्ध है एवं वर्ष 2002 के पूर्व की गूगल इमेजरी उपलब्ध नहीं है। वर्ष 2002 की गूगल इमेजरी में यह अतिक्रमण देखा जा सकता है। अतएव यह अतिक्रमण वर्ष 2002 के पूर्व का है। फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा इनके निर्माण वर्ष के सम्बन्ध में कोई भी दस्तावेज तथा कथन प्रदाय नहीं किये गये हैं। जांच के समय स्थानीय बुजुर्गों से पूछतांछ की गई, जिसमें उनके द्वारा बताया गया कि अस्पताल, कॉलोनी एवं ग्राउन्ड वर्ष 1981 से 1984 के मध्य में बना है तथा कॉलेज एवं बाजार 2000 से 2002 के मध्य प्रारंभ किया गया है तथा कॉलेज को वर्ष 2005 में मान्यता प्राप्त हुई है।  किसी राजस्व अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं  अल्ट्राटेक सीमेण्ट फैक्ट्री द्वारा उक्त भूमि के संबंध में आज दिनांक तक केवल कलेक्टर, सतना द्वारा वर्ष 1993 में (1977 से 2078, 99 वर्ष की अवधि के लिए) दी गई लीज डीड की छायाप्रति प्रदाय की गई है। साथ ही फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा वर्ष 1990 के एक नक्शे की छायाप्रति प्रदाय की गई है, जिसमें किसी भी राजस्व के अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं, इसमें केवल एसएन नाचने तत्कालीन डीएफओ सतना के हस्ताक्षर है। यह कोई मानचित्र नहीं है, बल्कि कंपनी द्वारा स्थल पर किये गये निर्माण कार्य का लेआउट प्लान है, जो कि उन्होंने अतिक्रमण पश्चात् बनाया है, जिसकी कोई वैधता नहीं है। साथ ही लेख है कि इस क्षेत्र के राजस्व मानचित्र भू-अभिलेख कार्यालय जिला सतना एवं मैहर में उपलब्ध नहीं है। साथ ही कलेक्टर जिला सतना द्वारा वर्ष 1993 में प्रदाय की गई लीज डीज की मूल फाइल तथा संबंधित अन्य अभिलेख भी अद्यतन स्थिति में प्राप्त नहीं हुए है।

930 रुपए किलो का गुग्गल 1700 रूपये किलो में खरीदा, 30 लाख से अधिक का गड़बड़झाला

Guggal worth Rs 930 per kg bought for Rs 1700 per kg, fraud worth more than Rs 30 lakh

Guggal worth Rs 930 per kg bought for Rs 1700 per kg, fraud worth more than Rs 30 lakh उदित नारायण सीनियर आईएफ एस के संरक्षण के चलते प्रभारी उत्पादन प्रबंधन की मनमानी जारी भोपाल। लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक बिभास ठाकुर ने एमएफपी पार्क बरखेड़ा पठानी में रॉ मटेरियल खरीदी में गड़बड़झाला पर कार्यवाई करने की जगह उसे दबा दिया हैं। प्रभारी एसडीओ एवं उत्पादन प्रबंधक ने टेंडर की दर से न खरीदकर आर्यन फार्मेसी से ₹1700 किलो की दर से खरीदी की है। यही मौजूदा सीइओ अर्चना पटेल एमएसपी पार्क के उत्पादन प्रबंधक की मनमानी नहीं रोक पा रहीं है।सूत्रों ने बताया कि एमएसपी पार्क के प्रबंधक ने गूग्गल सहित प्रष्टपर्णी, काली मिर्च, हींग, पुनर्नवा आदि रॉ मैटेरियल की खरीदी के लिए टेंडर किया था। टेंडर में गुग्गल के लिए हर्बल ऑटोमेशन हरिद्वार का रेट 930 रूपये प्रति किलोग्राम था। एसपी पार्क के कर्ताधर्ता ने हर्बल ऑटोमेशन हरिद्वार से खरीदी न करके आर्यन फार्मेसी से ₹1700 की कीमत पर 4000 किलो खरीदी की। हर्बल ऑटोमेशन हरिद्वार फर्म से न तो वर्क आर्डर दिया गया और न किसी प्रकार का पत्राचार किया गया। आर्यन से खरीदी से संघ को 30 लाख 80000 रुपए का अधिक भुगतान करना पड़ा है। प्रभारी एसडीओ एवं उत्पादन प्रबंधक ⁠सुनीता अहीरवार के कार्यकाल में 6 करोड़ों की govt सप्लाई में 3 करोड़ से अधिक की रॉ -मटेरियल ख़रीदी के भुगतान किये गये है, जिसमें 2 करोड़ के बिल तो आर्यन फ़ार्मेसी के थे। इसके अलावा 30-35 लाख के मरम्मत के भुगतान किये जा चुके है।लघु वनोपज प्रसंस्करण केंद्र बरखेड़ा पठानी के सीईओ पीएल फुलझले हटने के बाद से ही प्रभारी एसडीओ सुनीता अहीरवार मनमानी बढ़ गई है। यहां तक कि फुलझले की जगह प्रमोट आईएफएस अर्चना पटेल को डमी के रूप में सीईओ बनाया गया है। पार्क के अधिकारी और कर्मचारी इसकी मुख्य वजह भी एसीएस से मिल रहे हैं संरक्षण को बताया जा रहा है। एमडी के आदेश का ही नहीं हो रहा पालन लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक ठाकुर ने भंडारण की जांच के लिए एसीएफ मणि शंकर मिश्र को 7 दिन में जांच का रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे किंतु अभी तक जांच शुरू नहीं हुई। चिंताजनक पहलू यह है कि एसीएफ मिश्रा जांच के भंडारण से संबंधित दस्तावेज मांगने के लिए एमडी ठाकुर से लगातार चिट्ठीयां लिखना शुरू किया तो उन्हें ही वहां से हटा दिया गया। मिश्रा ने दस्तावेज मांगने के लिए हटाए jaane के पूर्व तक करीब चार रिमाइंडर सुनीता अहिरवार को भेज चुके थे और इतने ही पत्र एमडी ठाकुर को स्मरण पत्र लिखा था। मिश्रा के हटाने से यह चर्चा है कि एमडी ठाकुर उत्पादन प्रबंधक सुनीता अहिरवार के खिलाफ कार्यवाई नहीं करना चाहते हैं। इसके बाद से उत्पादन प्रबंधक की मनमानी बढ़ गई है। उनकी मनमानी से दुखी सीइओ अर्चना पटेल ने उनके खिलाफ अनुशासनहीनता का नोटिस दिया हुआ है। यही नहीं, विद्या निनारे को भंडार में रा मटेरियल जाँच करने के मौखिक निर्देश प्रबंध संचालक और सीईओ ने मीटिंग में सबके सामने दिये थे। उस मीटिंग में सुनीता अहीरवार भी मौजूद थी फिर भी अपने भ्रष्टाचार को छुपाने और एसीएस वन से जान-पहचान की धुन में नियमों को भी धता बता रही है।

सीएफ-डीएफओ सप्लायर्स के लिए नहीं जोड़ पाएंगे औचित्यहीन टेंडर की शर्ते

CF-DFO will not be able to add unreasonable tender conditions for suppliers

CF-DFO will not be able to add unreasonable tender conditions for suppliers उदित नारायणभोपाल। हर वित्तीय वर्ष में 70 से 80 करोड रुपए की चैनलिंक जाली, बारवेड वायर, टिम्बर पोल्स, रूट ट्रेनर्स, मिट्टी और गोबर खाद वगैरह की खरीदी में डीएफओ और सीएफ टेंडर की शर्तों में मनमानी नहीं कर सकेंगे। वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने पूरे प्रदेश में एक समान शर्तें लागू करवाने के लिए एक कमेटी गठित कर दी है। कमेटी को 7 दिन में अपनी रिपोर्ट प्रधान मुख्य वन संरक्षक विकास को सौंपने के निर्देश दिए हैं। वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने शर्तें बनाने के लिए 10 सदस्य कमेटी गठित की है। दिलचस्प पहलू यह है कि कमेटी में डीएफओ विजयानंतम टीआर दक्षिण बैतूल को शामिल किया गया है, जिन्होंने भी अपने वन मंडल के लिए जारी निविदा में अनावश्यक शर्तें जोड़ी हैं। इस कमेटी में उत्तम शर्मा एपीसीसीएफ सिंह परियोजना को कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। शर्मा के अलावा राखी नंदा सीएफ सामाजिक वानिकी, राजेश राय सीएफ रीवा, कमल अरोरा सीएफ जबलपुर, आलोक पाठक सीएफ वन मंडल भोपाल, बृजेंद्र श्रीवास्तव सीएफ वन मंडल पूर्व छिंदवाड़ा, प्रदीप मिश्रा डीएफओ देवास, विजयानंतम टीआर दक्षिण बैतूल और नीथ्यानंतम डीएफओ पश्चिम मंडला को बतौर सदस्य शामिल किया है। उल्लेखनीय है कि वन बल प्रमुख और पीसीसीएफ को लगातार शिकायतें मिल रही थी कि फील्ड में पदस्थ डीएफओ और सीएफ चहेते सप्लायर्स को वर्क आर्डर देने के लिए उनके मुताबिक निविदा में शर्तें जोड़ रहे हैं। इनमें ऐसी भी शर्तें जोड़ी गई, जो अनावश्यक होती है। मसलन, 10 प्रकार के आईएसओ और इपीएफओ का प्रमाण पत्र। आईएसओ की शर्तों को लेकर जब पीसीसीएफ विकास यूके सुबुद्धी ने कतिपय डीएफओ जब आईएसओ और इपीएफओ का प्रमाण पत्र के औचित्य पर सवाल किए तब टेंडर निरस्त कर दिए गए। इनमें से कुछ डीएफओ तो अभी भी अपनी मनमानी पर अड़े हुए हैं। सरकार के निर्देशों की अवहेलना राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देश है कि वायरवेट, चैनलिंक और पोल की खरीदी में लघु उद्योग निगम को प्राथमिकता दें किंतु 95% खरीदी जेम्स और ई टेंडर से हो रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि लघु उद्योग निगम की दर और जेम (GEM) की दरों में डेढ़ गुना अंतर है। यानी लघु उद्योग निगम में वायरवेट किधर 83 रुपए से लेकर 85 रुपए तक निर्धारित की गई है। जबकि जेम (GEM) में ₹150 तक है। सरकार की मंशा यह भी है कि लघु और मध्यम उद्यमियों को इस कारोबार से जोड़ा जाए। मुख्यालय से लेकर फील्ड के अफसर टेंडर की शर्तों में ऐसी शर्ते जुडवा देते हैं जिसके चलते लघु और मध्यम उद्यमी प्रतिस्पर्धा की दौड़ से बाहर हो जाते हैं। चहेती फर्म को उपकृत करने जोड़ दी जाने वाली शर्तें हॉफ के आदेश का हवा में उड़ा रहे हैं डीएफओ वन मंडलों द्वारा ई-टेंडर अथवा जेएम (GeM) के लिए वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने नया आदेश जारी किया है। वन बल प्रमुख श्रीवास्तव के इस आदेश का अधिकांश डीएफओ पालन नहीं कर रहे हैं। इस संबंध में आईटी शाखा ने एक पत्र लिखकर हॉफ को अवगत भी कराया है। आईटी शाखा ऐसे डीएफओ की सूची भी बना रहा है, वेबसाइट पर अपलोड नहीं कर रहे हैं। क्या है हॉफ के आदेश? हॉफ श्रीवास्तव ने इस आदेश कहा है कि प्रति वर्ष विभाग के विभिन्न कार्यों हेतु सामग्री का क्रय जेम के माध्यम से किया जाता है। जेम के माध्यम से क्रय की जाने वाली सामग्री की जानकारी से मुख्यालय अनभिज्ञ रहता है एवं इस कारण वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा तत्समय यदि टेंडर में कोई त्रुटि होती है, वनमंडलाधिकारियों को उचित निर्देश नही दिये जा पाते। अतः भविष्य में जेम के माध्यम से क्रय की जाने वाली सामग्री का टेंडर की जानकारी/विज्ञापन विभागीय पोर्टल पर भी अपलोड किया जाना सुनिश्चित करें। दर्शन इसकी मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही है, जिसके कारण डीएफओ अभी भी मनमानी कर रहे हैं। 18 से 20% धनराशि बंटते है कमीशन में चालू वित्त वर्ष में जंगल महकमे में करीब 60 से 70 करोड़ रूपए की चैनलिंक, बारवेड वायर और टिम्बर पोल्स की खरीदी में बड़े पैमाने पर कमीशन बाजी का खेल खेला जा रहा है। सबसे अधिक खरीदी कैंपा फंड से की जा रही है। इसके अलावा विकास और सामाजिक वानिकी (अनुसंधान एवं विस्तार ) शाखा से भी खरीदी होती है। विभाग के उच्च स्तरीय सूत्रों की माने तो कुल रिलीज बजट की 18 से 20% धनराशि कमीशन के रूप में टॉप -टू – बॉटम बंटती है। यानि सप्लायर्स को हर साल लगभग 10-12 करोड़ कमीशन में बांटने पड़ते हैं।

आईएफएस के एपीएआर संशोधन संबंधित शासन के आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में दी चुनौती

The government's order regarding IFS's APAR revision was challenged in the Supreme Court

The government’s order regarding IFS’s APAR revision was challenged in the Supreme Court गणेश पाण्डेय  भोपाल। मध्य प्रदेश में अखिल भारतीय दो सेवाओं के बीच टकराहट की स्थिति निर्मित हो गई है। प्रदेश की नौकरशाही जंगल में भी अपनी हुकूमत चलाने की मंशा से 22 साल से चली आ रही एपीएआर लिखने की प्रक्रिया में संशोधन आदेश करते हुए डीएफओ और वन संरक्षक के मूल्यांकन का अधिकार कलेक्टर कमिश्नर को दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि प्रदेश सरकार द्वारा जारी आदेश दिनांक 29 जून 2024 और विशेष रूप से पैरा 2 और पैरा 3 को रद्द करें। मध्य प्रदेश सरकार को टी.एन. गोदाबर्मन के फैसले में उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित निर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए एक नया आदेश जारी करने का निर्देश दें। याचिका में उल्लेखित है कि 29 जून 2024 के अपने आदेश आईएफएस के अधिकार को भी कमजोर करता है। विवादित आदेश में एपीएआर प्रक्रिया में अन्य सेवाओं [अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस)/प्रधान सचिव (पीएस)] के अधिकारियों को शामिल किया गया है, जो इस आवश्यकता के विपरीत है कि रिपोर्टिंग अधिकारी वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी हों। मसलन, डीएफओ, वन संरक्षक और मुख्य वन संरक्षक जैसे पदों के लिए रिपोर्टिंग प्राधिकारी, मूल्यांकन और स्वीकार कर्ता आईएफएस ही होना चाहिए। याचिका कर्ता एडवोकेट गौरव कुमार बंसल ने अपने याचिका में कहा है कि  29 जून 24 के अपने आदेश के तहत मध्य प्रदेश राज्य ने प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) से लेकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) तक के भारतीय वन सेवा अधिकारियों के लिए पीएआर चैनल के संबंध में एक नई व्यवस्था शुरू की है। 29 जून 2024 के आक्षेपित आदेश का प्रासंगिक भाग, जो सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का सीधा उल्लंघन है। मूल्यांकन प्रक्रिया में गैर-वन विभाग के अधिकारियों को शामिल करने से न केवल भारतीय वन सेवाओं का प्राथमिक अधिदेश अर्थात वनों और वन्यजीवों का वैज्ञानिक प्रबंधन, सुरक्षा और संरक्षण कमजोर होगा, बल्कि संरक्षण पर भी प्रभाव पड़ेगा।  याचिका कर्ता बंसल ने यात्रा में कहा है कि राजस्व जैसे विभागों के अधिकारियों को वन अधिकारियों का मूल्यांकन करने की अनुमति देकर वन, वन्य प्राणी और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को एक महत्वपूर्ण झटका देता है। हरियाणा राज्य बनाम पी.सी. वाधवा (1987 (3) एससीसी 404) ने लगातार इस बात पर जोर दिया है कि अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के लिए रिपोर्टिंग प्राधिकारी उसी सेवा के भीतर तत्काल वरिष्ठ होना चाहिए। विवादित आदेश, इस स्थापित मिसाल से हटकर, कानूनी असंगतता पैदा करता है और भविष्य के प्रशासनिक आदेशों के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम करता है। वन और पर्यावरण संरक्षण बनाम विकास के चलते टकराव भारतीय वन सेवा अधिकारियों के लिए मुख्य चुनौती पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को संतुलित करना है। जबकि  आईएएस अधिकारियों का समग्र काम राजस्व और प्रशासनिक मामलों पर केंद्रित है। आईपीएस अधिकारियों का काम कानून और व्यवस्था पर केंद्रित है, वहीं आईएफएस अधिकारियों का काम प्रकृति में अधिक तकनीकी है। वह पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण के लिए समर्पित हैं। राज्य कानूनों को लागू करने वाले आईएएस और  आईपीएस अधिकारियों के विपरीत, आईएफएस अधिकारी मुख्य रूप से वनों और वन्यजीवों से संबंधित केंद्रीय कानूनों को लागू करने के लिए जिम्मेदार हैं।  कई बार आईएफएस अधिकारियों को अक्सर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। वन अधिनियम एवं वन संरक्षण कानून को लागू करवाने के प्रयास में आईएफएस अफसरों और  राजस्व अधिकारी टकराते हैं।

टाईगर, चीता, तेंदुआ, कि मौतों का अड्डा बना प्रदेश, एक और मादा तेंदुआ कि मौत

The state became a den of deaths of tiger

The state became a den of deaths of tiger, cheetah and leopard, another female leopard died. बुरहानपुर । नयाखेड़ा-केरपानी रोड़ के पास मामा-भांजे बलडी में बुधवार को मादा तेंदुए का शव मिलने से गांव में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही बुरहानपुर डीएफओ विजय सिंह, एसडीओ अजय सागर सहित वन अमला मौके पर पहुंचा। शव का पीएम कराकर फोरेंसिक जांच के लिए सैंपल को इंदौर भेजा गया है। घाघरला के जंगल में मादा तेंदुए का अंतिम संस्कार किया गया। करीब दस दिन पहले इसी क्षेत्र में एक नर तेंदुआ बीमार अवस्था में मिला था। जिसका इंदौर में उपचार चल रहा है। एक ही क्षेत्र में तेंदुए का बीमार होना सवालों को जन्म दे रहा है। राजस्व की भूमि पर पर शव की जानकारी मिली थीएसडीओ अजय सागर ने बताया कि मामा-भांजे की राजस्व की भूमि पर एक वन्य प्राणी का शव पड़ा होने की सूचना किसान से मिली। सूचना मिलते ही बुधवार सुबह 11 बजे मौके पर वन अमला पहुंचा। शव करीब दो दिन पुराना मादा तेंदुए का है। जो वयस्क होकर करीब तीन वर्ष के करीब है। शरीर पर घाव अथवा चोट के नहीं थे न‍िशानशव पर कोई घाव या शिकार के कोई चोट के निशान भी नहीं पाए गए है। इससे वन विभाग को शिकार की आशंका नहीं है। संक्रामक बीमारी से मौत की बात बताई जा रही है। सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। एक माह बाद रिपोर्ट आने पर ही मौत का खुलासा हो पाएगा। हालांकि इसके पूर्व भी खेत में रेस्क्यू किए गए तेंदुए के पैर भी संक्रमण से ग्रसित पाए गए थे। 10 दिन पूर्व किया था तेंदुए को रेस्क्यूनयाखेड़ा गांव में चार माह से तेंदुए का आतंक चल रहा था। उसके द्वारा गोवंशी का शिकार किया जा रहा था।ग्रामीणों के अनुसार नौ जुलाई को किसान अकरम बाबू खां के खेत में तेंदुआ सुस्त अवस्था में मिला था।तेंदुए को वन विभाग ने रेस्क्यू किया था। जानकारी के अनुसार इसकी लोगों ने 10 फीट की दूरी से सेल्फी ली।लोगों से पता चला है कि इस दौरान तेंदुआ न तो गुर्रा रहा था और न ही उसके तेवर कोई आक्रामक थे।यह जानकारी भी मिली है कि तेंदुए के पीछे के पैर काम नहीं कर रहे थे। वह इससे कमजोर लग रहा था।तेंदुए को इसके बाद इंदौर कमला नेहरू संग्रहालय भेजा गया था। जहां उसका उपचार किया जा रहा है।तेंदुआ संक्रमण की बीमारी से ग्रसित पाया गया है। तेंदुआ किसी अन्‍य बीमारी से ग्रस्त बताया जा रहा है। क्षेत्र में और भी तेंदुए होने की आशंकाउल्लेखनीय है कि क्षेत्र में और भी तेंदुए होने की आशंका जताई जा रही है। क्योंकि नेपानगर सहित आसपास के करीब एक दर्जन से अधिक गांव में आए दिन तेंदुआ दिखाई देने की जानकारी सामने आ रही है।

पहली बार घायल शावकों को लाने के लिये एक डिब्बे की विशेष ट्रेन चली

For the first time, a special train of one compartment ran to bring the injured cubs.

For the first time, a special train of one compartment ran to bring the injured cubs. भोपाल। पहली बार सीहोर जिले के बुदनी मिडघाट पर ट्रैन एक्सीडेंट में घायल बाघिन के घायल शावकों को लाने के लिये एक डिब्बे की विशेष ट्रेन चलाई गई। विशेष ट्रेन से घायल शावकों को रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के पहले आरपीएफ थाने के सामने उन्हें उतार कर उपचार के लिए वन विहार में शिफ्ट किया गया। घायल शावकों के साथ ट्रैन में डीआरएम भोपाल, सीसीएफ भोपाल राजेश खरे, सीहोर कलेक्टर प्रवीण सिंह और डीएफओ एमएस डाबर भी थे। मंगलवार को घायल शावकों को रेस्क्यू करने का नेतृत्व सीसीएफ राजेश खरे ने किया। सीसीएफ खरे ने रेलवे अधिकारियों से भी सहयोग मांगा। घटना की गंभीरता को देखते हुए भोपाल डीआरएम अपने अधिकारियों के साथ एक डिब्बे की विशेष ट्रेन लेकर मिडघाट पहुंचे। दोनों घायल शावकों को ट्रेन से भोपाल लाकर वन विहार के वन्य प्राणी चिकित्सालय में भर्ती किया गया। दोनों घायल शावाकों का इलाज अभी चल रहा है। इस पूरी कार्रवाई में सीनियर डीओएम निरीश कुमार राजपूत, वन मंडल अधिकारी एमएस डाबर, एसडीएम राधेश्याम बघेल सहित राजस्व एवं वन विभाग की टीम उपस्थित रही। उल्लेखनीय है कि गत सोमवार 15 जुलाई को सुबह करीब 6 बजे सीहोर जिले के बुदनी के मिडघाट रेलवे ट्रैक पर बाघिन के तीन शावक ट्रेन की चपेट में आ गए थे। इस दुर्घटना में एक शावक की मृत्यु हो गई। दो शावक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घटना की सूचना मिलते ही वन्य प्राणी चिकित्सकों की टीम घटना स्थल पर पहुंची। दोनों घायल शावकों की स्थिति को देखते हुए वहां इलाज संभव नहीं था। दोनों को इलाज के लिए वन्य प्राणी चिकित्सालय भोपाल में तत्काल भर्ती कराना जरूरी था।

छतरपुर वन वृत के सीएफ संजीव झा के खिलाफ भोपाल हुई गंभीर शिकायत: आला अफसरों ने कहा जांच कर करेंगे कार्यवाही, वन महकमे मचा हड़कंप

Forest gives clean chit in case of IFS officers trapped in Rs 7 crore scam

Serious complaint lodged against CF Sanjeev Jha of Chhatarpur forest circle

112 आईएफएस सहित वन विभाग में रिक्त पड़े हैं 7 हजार से ज्यादा पद

More than 7 thousand posts are lying vacant in the forest department including 112 IFS. भोपाल। राज्य के वन विभाग में 112 आईएफएस सहित लम्बे समय से 7 हजार 417 पद रिक्त पड़े हुये हैं। यहीं नहीं आईएफएस का तो प्रशासनिक ढांचा ही ध्वस्त हो चुका है। पदोन्नति के लिए सेवा शर्ते पूरी नहीं होने की वजह से पीसीसीएफ, एपीपीसीसीएफ और सीसीएफ के पद पर आईएफएस पद रिक्त होने के बाद भी प्रमोट नहीं हो पा रहें है।वन मुख्यालय द्वारा राज्य शासन को भेजी गई जानकारी के अनुसार, इन कुल रिक्त पदों में से आईएफएस के 112 और सहायक वन संरक्षक के 191 पद रिक्त है। मुख्यालय में हालात यह है कि सीनियर आईएफएस अधिकारियों को तीन से लेकर 4 शाखाओं का प्रभार संभालना पड़ रहा है। इसके कारण कुछ अफसरों के बीच अहं के टकराव की खबरें भी सुनने को मिलती है। कमोवेश यही हालत फील्ड के पदों की भी है। सीसीएफ के पद पर सीएफ काम रहें हैं और उन्हें भी एक से अधिक जिम्मेदारियां संभालनी पड़ रही है। सहायक वन संरक्षकों और रेंजर के पद खाली होने की वजह से उन्हें भी अतिरिक्त जिम्मेदारियां संभालनी पड़ रही है। ऐसी आपदा में स्थिति में सीनियर अफसरों ने अपने लिए अवसर में तब्दील कर लिया हैं। यानि कार्य बंटवारे के नाम पर चहेतों को उपकृत कर रहे हैं। सीएफ और डीएफओ ऑफिस में भी पद रिक्तसीएफ और डीएफओ ऑफिस में भी लंबे समय से पद रिक्त है। इसमें राजपत्रित अधिकारियों के 9, वन क्षेत्रपाल के 496, उप वन क्षेत्रपाल के 855, वन पाल के 2081, वन रक्षक के 2124, लिपिकीय अमले के 1010, अन्य श्रेणी जिसमें वाहन चालक, स्टेनो, ड्राफ्ट्समेन, महावत शामिल हैं-के 398 तथा चतुर्थ श्रेणी के 453 पद शामिल हैं जोकि रिक्त पड़े हुये हैं। इससे वन एवं वन्यप्राणियों की सुरक्षा एवं संरक्षण पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।उल्लेखनीय है कि वन विभाग में स्वीकृत पदों की कुल संख्या 25 हजार 363 है जिसमें से 17 हजार 946 पदों पर व्यक्ति पदस्थ हैं। आईएफएस कैडर का प्रशासनिक ढांचा ध्वस्तआईएफएस अफसर का प्रशासनिक ध्वस्त हो चुका है। इसे दुरुस्त करने के लिए विभाग के मुखिया से लेकर आईएफएस एसोसिएशन के पदाधिकारी को एक्सरसाइज करने की फुर्सत ही नहीं है। ढांचे को सुधारने के लिए जिम्मेदार वरिष्ठ अफसर बस पद पर बैठकर अपने रिटायरमेंट की गिनती गिन रहें है। जबकि कैडर रिव्यू का मामला अभी लंबित है। मुख्यालय से लेकर फील्ड में कई पद ऐसे हैं जिसमें समाप्त किया जा सकता है। वन मंडलों को भी समाप्त कर एक किया जा सकता है पर यह एक्सरसाइज कौन करे?

शैडो वन मंत्री की कार्यशैली से विधायकों एवं कार्यकर्ताओं में नाराजगी

Dissatisfaction among MLAs and workers due to the working style of Shadow Forest Minister भोपाल। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नागर सिंह चौहान को वन मंत्री बनाया। चौहान भानमती तो बन गए किंतु उनका मंत्रालय अपर संचालक स्तर के वित्तीय सेवा के अधिकारी रंजीत सिंह चौहान संचालित कर रहे हैं। जंगल महक में उन्हें शैडो वन मंत्री के रूप में देखा जा रहा है। विभाग में सप्लायर का वर्क आर्डर जारी करना हो या फिर ट्रांसफर पोस्टिंग, ये सभी कार्य अधिकारियों से मिलकर वह स्वयं कर रहे हैं। यही कारण है कि विधायकों और बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की सिफारिशी तबादला आदेश चुनाव आचार संहिता लगने के पूर्व जारी नहीं हो सके। वन विभाग में अधिकांश अधिकारी वन मंत्री चौहान के अनादिकृत ओएसडी रणजीत सिंह चौहान को शैडो मंत्री के रूप में देखते हैं। फील्ड में पदस्थ डीएफओ यह मानते हैं कि रणजीत सिंह चौहान उनके नजदीकी है। उनकी मान्यताओं पर तब और बल मिलता है जब अधिकारी अपने मंत्री से मिलने जाते हैं और वे उन्हें चौहान की से मिलने का संकेत दे देते हैं। इसके कारण ही विभाग के अवसर उन्हें शैडो वन मंत्री के रूप में देखते हैं। अब नेताओं को भी ऐसा एहसास होने लगा है वह इसलिए कि धार, झाबुआ और अलीराजपुर के विधायकों एवं नेताओं ने वन विभाग के डीएफओ, एसडीओ से लेकर रेंजरों को हटाने और उनकी प्राइम पोस्टिंग करने के सिफारिश की थी। वन मंत्री चौहान ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मंथन कर सूची तैयार कर मंत्रालय को भेजी। इस बीच पार्टी हाई कमान ने उनकी पत्नी अनीता सिंह चौहान को झाबुआ-रतलाम लोकसभा का प्रत्याशी घोषित कर दिया। इस घोषणा के बाद वन मंत्री नागर सिंह चौहान राजनीतिक गतिविधियों में व्यस्त हो गए और इसका लाभ उठाते हुए विधायकों के सिफारिश वाले अधिकारियों के तबादले की सूची में नाम हटाकर चौहान ने अपने पसंदीदा डीएफओ, एसडीओ और रेंजरों के तबादला आदेश आचार संहिता लगने के चंद्र घंटे पहले जारी करवा दिए। वन मंत्री के नजदीकी सूत्रों का कहना है कि विधायकों और नेताओं की अनुशंसा वाले दबा दें आदेश जारी नहीं होने के कारण वन मंत्री के प्रति नाराजगी है और वे चुनाव बाद मुख्यमंत्री मोहन सिंह यादव से शिकायत करने का मन बनाया है। सप्लायर के कारोबार में भी है दखलअंदाजीवन विभाग में लंबे समय से सप्लायर का एक नेक्सस सक्रिय है। इस सिंडिकेट से वन मंत्री चौहान के अनाधिकृत ओएसडी चौहान भी जुड़ गए है। दबाव के चलते ही महकमे में एक दर्जन से अधिक डीएफओ ने चैन लिंक और वायरबेड खरीदी की निविदा में ऐसी शर्त जोड़ दी, जिसे केवल चौहान के नजदीकी फर्म को ही वर्क आर्डर मिल सके। बताया जाता है कि डीएफओ को फोन करके अपने चहेते फर्म को ठेका दिलवाने के लिए नई-नई शर्ते जुड़वा रहे हैं। दक्षिण सागर,बैतूल और बालाघाट समेत एक दर्जन डीएफओ ने चैनलिंक और वायरबेड खरीदी के लिए निविदा आमंत्रित बुलाई गई। इस निविदा में 3 करोड़ के टर्न-ओवर के साथ यह शर्त भी जोड़ दी कि भारत मानक ब्यूरो से मान्यता प्राप्त फर्म ही निविदा में हिस्सा ले सकेंगी। यह शर्त पहली बार जोड़ी गई। इस शर्त के कारण तीन दर्जन से अधिक संस्थाएं प्रतिस्पर्धा से बाहर हो गई। मप्र में भारतीय मानक ब्यूरो से लाइसेंस प्राप्त दो फर्म ही रजिस्टर्ड हैं। यह दोनों फर्म ही कांग्रेस नेता के रिश्तेदार की है। यानी कांग्रेस नेता के रिश्तेदार को उपकृत करने के लिए प्रदेश के एक दर्जन डीएफओ ने पहली बार यह शर्त निविदा में जोड़ दी है। यह बात अलग है कि प्रतिस्पर्धा से बाहर हुई संस्थाओं ने शिकवे-शिकायतें शुरू कर दी हैं। जानकारों का कहना है कि मंत्री के यहां अनाधिकृत रूप से सक्रिय अपर संचालक स्तर के एक अधिकारी के कहने पर फील्ड के अफसरों ने निविदा में भारतीय मानक ब्यूरो की शर्त जोड़ी है। बताया जाता है कि अफसर पर दबाव बनाने वाले अनाधिकृत काम देख रहे अधिकारी का कांग्रेस नेताओं से पुराने संबंध रहे हैं। क्या है रंजीत सिंह चौहान का बैकग्राउंडरणजीत सिंह चौहान वित्तीय सेवा के अधिकारी

बफरजोन के पास जंगल में लगी भीषण आग, बुझाने में जुटा वन अमला

A massive fire broke out in the forest near the buffer zone, forest staff engaged in extinguishing it. दमोह ! तेज हवाओं के कारण वन अमले को आग बुझाने में भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ी ओर देर शाम तक वन अमला आग बुझाने में जुटा रहा। जंगल में आग लगने से कई वन्य जीवों के रहवास भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।दमोह के मड़ियादो बफरजोन में कलकुआ के पास जंगल में शनिवार दोपहर भीषण आग लग गई और आग इतनी भीषण थी कि दूर से ही आग की लपटें और धुआं दिखाई दे रहा था। वन परिक्षेत्र अधिकारी हृदेश हरि भार्गव अमले के साथ मौके पर पहुंचे और आग पर नियंत्रण पाने लिए प्रयास शुरू किए गए।गर्मी शुरू होने से साथ जंगल में आग लगने की घटनाएं सामने आने लगी हैं। इस आग से जंगल में लगे वनस्पति पौधे, पेड़ , छोटे जीव आदि जल जाते है। शनिवार दोपहर तेज हवाओं के कारण आग विकराल हो गई और जंगल के एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। आग लगने का कारण अज्ञात है। तेज हवाओं के कारण वन अमले को आग बुझाने में भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ी ओर देर शाम तक वन अमला आग बुझाने में जुटा रहा। जंगल में आग लगने से कई वन्य जीवों के रहवास भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। क्योंकि यह क्षेत्र पन्ना टाइगर रिजर्व का हिस्सा है और यहां तेंदुआ, नीलगाय और चीतल जैसे कई वन्यजीव हर समय बड़ी संख्या में मौजूद रहते हैं। बता दें कि सड़क के दोनों ओर घास-फूस लगी है। जिससे राहगीरों द्वारा बीड़ी पीने के दौरान फेंकी गई जलती तीली के कारण आग लगने का अंदेशा है। इसके अलावा महुआ-आचार के पेड़ के नीचे सफाई और गर्मी अधिक करने के लिए भी लोग आग लगाते हैं जो जंगल में फैल जाती है। शनिवार दोपहर लगी आग से कितना नुकसान हुआ व वन्य जीव जलने संबंधी कोई भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है अधिकारी आग बुझाने का प्रयास कर रहे हैं। शनिवार रात तक आग नहीं बुझाई जा सकी थी।

खनिज पट्टा राजस्व में खनन हो रहा था वन भूमि पर, डीएफओ ने की निरस्त करने की अनुशंसा

Mining was being done on forest land to earn mineral lease revenue, DFO recommended its cancellation. भोपाल। विदिशा के 10 खनिज पट्टाधारकों ने वन भूमि पर खनन करने का नायाब तरीका अपनाया है। जंगल के आसपास के राजस्व भूमि पर खनिज पट्टा आवंटित कराते हैं और खनन वन भूमि पर कर अवैध परिवहन और विक्रय कर रहे हैं। मामला संज्ञान में आते ही डीएफओ ने कलेक्टर को पत्र लिखकर उसे निरस्त करने की अनुशंसा की है। दिलचस्प पहलू यह है कि मौजूदा डीएफओ के पहले यहां पदस्थ पूर्व के किसी भी डीएफओ की नजर वन भूमि पर हो रहे खनन के गोरखधंधों पर नहीं पड़ी। या यूं कहिए कि इस गोरख धंधे में पूर्ववर्ती डीएफओ भी रहे होंगे। विदिशा डीएफओ ओंकार सिंह मस्कोले ने विदिशा कलेक्टर को पत्र लिखा है कि 7 अक्टूबर 2002 को जारी वन मंत्रालय के निर्देश है कि वन सीमा के 250 मीटर के अंदर उत्खनन पट्टा स्वीकृत न किया जाय। डीएफओ ने कलेक्टर को लिखे पत्र में वन भूमि सीमा से ढाई सौ मीटर के अंदर पूर्व में दिए गए राजस्व भूमि पर पट्टे निरस्त किए जाएं। वन विभाग के मैदानी अमले के अनुसार पट्टाधारकों ने राजस्व सीमा पर आवंटित पट्टे की आड़ में वन भूमि पर बड़े पैमाने पर खनन कर रहे थे। इन्हीं सूत्रों का कहना है कि पिछले 7-8 वर्षों में खनन कारोबारियों ने करीब 6000 हेक्टेयर वन भूमि पर खनन कर डाले। खनन कारोबारी के साथ वन विभाग के मिली भगत के भी संकेत मिले हैं। सवाल यह उठता है कि पूर्ववर्ती डीएफओ ने वन भूमि सीमा के ढाई सौ मीटर के अंदर खनन के लिए कैसे अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिए? इनके पट्टे निरस्त करने की अनुशंसा बड़े पैमाने पर अतिक्रमण कर रहे हैं पट्टा धारक वन विभाग के मैदानी अमले के लिए वन अधिकार अधिनियम के तहत दिए गए पट्टा धारक भी सिरदर्द बनते जा रहे हैं। वनाधिकार के तहत पट्टे प्राप्त करने के बाद आदिवासी पट्टे की सीमावर्ती वन भूमि पर बेखौफ कब्जा करते चले जा रहे हैं। इस आशय की जानकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान एक छिंदवाड़ा सर्किल के डीएफओ ने एसीएस वन और वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव को दी है। मुख्यालय के अधिकारी भी मानते हैं कि यह समस्या अकेले छिंदवाड़ा सर्कल की नहीं है। पूरे प्रदेश से ऐसी खबरें मिल रही हैं। चूंकि चुनावी वर्ष है, इसलिए अधिकारी भी असमंजस में है कि उनके साथ कैसा सलूक किया जाए..?

संघ के एमडी एक्शन मूड में, सीईओ और उत्पादन प्रभारी की ली क्लास, तीन साल का ब्यौरा मांगा

Sangh’s MD in action mood, asks for details of CEO and production in-charge, details of three years भोपाल। लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक बिभाष ठाकुर ने अब एक्शन मूड में नजर आ रहें हैं। मंगलवार को प्रसंस्करण एवं अनुसंधान केंद्र (एमएफपी पार्क) बरखेड़ा पठानी के सीईओ और  प्रभारी प्रबंधक उत्पादन की जमकर क्लास ली। ठाकुर ने गत 3 साल में केंद्र में खरीदी गई जड़ी- बूटी समेत अन्य सामग्रियों का पूरा ब्यौरा मांगा है। प्रबंध संचालक द्वारा प्रसंस्करण केंद्र में उत्पादन से संबंधित समीक्षा बैठकों में कई बिंदुओं पर उत्पादन प्रभारी प्रबंधक सुनीता अहिरवार को सुधार करने की कड़ी चेतावनी दी है।  संघ के प्रबंध संचालक ठाकुर ने प्रशंसकरण एवं अनुसंधान केंद्र में लंबे समय से हो रही गड़बड़ियों को गंभीरता से लिया है। मंगलवार को बातचीत में ठाकुर ने अनौपचारिक चर्चा में बताया कि मैंने सीईओ पीजी फुलजले और उत्पादन प्रभारी प्रबंधक सुनीता अहिरवार से 3 साल में क्रय की गई सामग्रियों को बिंदुवार जानकारी मांगी है। मसलन, कितनी सामग्री, किस संस्था से और किस दर पर खरीदी की गई है ? खरीदी गई सामग्री टेंडर से परचेस किए गए हैं या फिर बिना निविदा बुलाए खरीद ली गई हैं। सभी डिटेल तीन दिन के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अप्रैल से नई पॉलिसी लागू करने जा रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि इससे गड़बड़ झाले और दलाली पर ब्रेक लगेगा। नई नीति के तहत सभी खरीदी जिला वनोपज यूनियन के अंतर्गत काम करने वाले संग्रहण कर्ताओं से की जाएगी।   4 सालों का उत्पादन रिकॉर्ड भी गायब जानकारी में आया है कि पिछले 4 सालों गंभीर अनियमितताएं की गई। सूत्रों का कहना है कि विगत 4 सालों में लगभग 90 करोड़ रुपये कि दवाईओं का उत्पादन किया गया है। लेकिन उत्पादन का रिकॉर्ड संधारित ही नहीं किया गया है। विगत वर्षों की ख़रीदी का मिलान उत्पादन रिकॉर्ड से ही किया जा सकता है, परंतु उत्पादन रिकॉर्ड के नाम पर बिल वाउचर ही मिल रहे है। जिनका सही प्रमाणीकरण सही तरीक़े से जांच द्वारा ही किया जा सकता है। इस संबंध में न तो पूर्व एसडीओ पर कार्यवाही की गई न ही प्रभारी एसडीओ सुनीता अहिरवार पर कार्यवाही की जा रही है। सीईओ फ़ुलझेले द्वारा केवल एक आदेश निकाल कर इतिश्री कर ली गई है। सुनीता अहिरवार द्वारा भी बिल्डिंग मेंटेन्स, नर्सरी रखरखाव, और फर्जी लेवर दिखा कर करोड़ों रुपए का गड़बड़ झाला किया जा चुका है। दिलचस्प पहलू है कि  अपर प्रबंध संचालक मनोज अग्रवाल के पत्र में दर्शित बिंदुओं पर जांच करने के लिये कोई कमेटी अभी तक नहीं बनी है। तीन आईएफएस आएंगे जांच की जद में  पूर्व एसडीओ पिल्लई के कार्यकाल में हुई अनियमितताएँ उस अवधि में मुख्यकार्यपालन अधिकारी रहे अफ़सरों की मिली भगत से ही संभव हुआ है। यदि एसडीओ पिल्लई पर कार्यवाही हुई तो बड़े अफ़सर भी जद में आयेंगे। इसमें पूर्व सीईओ एवं सेवानिवृत आईएफएस एलएस रावत, एपीसीसीएफ विवेक जैन वर्तमान में वन विकास निगम में प्रभारी एमडी और  प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ दिलीप कुमार पर भी चार्जशीट बन सकती है। इन तीन आईएफएस अफसर को बचाने के लिए जांच कमेटी का गठन नहीं किया जा रहा है।

कमीशन खोरी पर ब्रेक लगाने एमडी ने लिया बड़ा फैसला, अब प्राइवेट फर्म से नहीं होगी खरीदी

MD took a big decision to put a stop to commission embezzlement, now purchases will not be made from private firms भोपाल। लघु वनोपज संघ के प्रसंस्करण एवं अनुसंधान केंद्र में लंबे समय से चली आ रही कमीशन खोरी पर ब्रेक लगाने के लिए प्रबंध संचालक बिभास ठाकुर ने बड़ा फैसला लिया है। ठाकुर ने तय किया है कि वन मेले में होने वाले क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में अब निजी फर्म हिस्सा नहीं लेंगे। यानी अब खरीदी जिला वनोपज समितियों से ही होगी। संघ के प्रबंध संचालक ने यह निर्णय ऑडिट आपत्ति के बाद लिया है।संघ के एमडी विभाष ठाकुर द्वारा वन मेले में क्रेता विक्रेता अनुबंध में वनोपज समिति और वन धन केंद्रों से ही अनुबंध किया गया है। जबकि पहले प्राइवेट सप्लायर से भी अनुबंध कर के उन्हीं से ख़रीदी को प्राथमिकता दी जाती थी।पिछले 5 सालों का रिकॉर्ड देखे तो अनुबंधों में सबसे ज़्यादा ख़रीदी आर्यन फार्मेसी से की गई और तो और शहद जो की मध्यप्रदेश में वनसमिति संग्रहण करती है उसके बाद भी अदिति ट्रेडर्स राजस्थान से शहद ख़रीदा गया। आडिट रिपोर्ट में ख़रीदी प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति ली गई है।लैब रिपोर्ट में कई फ़ार्मो के रॉ-मटेरियल ख़राब होने के बाद भी ख़रीदी कर भुगतान कर दिया गया।सूत्रों ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्षों के आडिट आपत्तियों में गंभीर वित्तीय अनियमितता की ओर प्रसंस्करण केंद्र के सीईओ और एमडी का ध्यान आकर्षित कराया गया है। मसलन, मशीन के रखरखाव पर एक साल में ढाई करोड रुपए का भुगतान किया गया है। कहते हैं कि इतने में तो नई मशीन आ जाती। मशीन के मेंटेनेंस का ठेका भी 3-4 सालों से एक ही फर्म को दिया जा रहा है। ऑडिट में इस बात को लेकर भी आपत्ति की गई है कि पिछले वर्ष के वन मेले में संपन्न क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में क्रय अनुबंध प्राथमिक समितियां से किया गया। जबकि 80 लाख से अधिक की आयुर्वेद औषधि के लिए रॉ मटेरियल की खरीदी आर्यन फार्मेसी से की गई। यही नहीं, जब स्टॉक वेरिफिकेशन और उसके पेमेंट का लेखा-जोखा देखा तो ऑडिट टीम के सदस्यों की आंखें फटी रह गई। प्लास्टिक से बने डिब्बे वगैरह भी आयर्न फर्म से खरीदे गए हैं। ऑडिट रिपोर्ट में यह तथ्य भी उजागर हुआ है कि निजी फर्म से हुई खरीदी के भुगतान टुकड़ों- टुकड़ों में एक ही तारीख में हुआ है। यह सिलसिला पिछले तीन-चार सालों से जारी है। गंभीर वित्तीय ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद मौजूदा प्रबंध संचालक विभाग ठाकुर ने निर्णय लिया है कि अब वन मेला में आयोजित क्रेता विक्रेता सम्मेलन में अधिकारियों कर्मचारियों के चहेते निजी फर्म को हिस्सा नहीं लेंगे। संघ में सदस्य अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मनोज अग्रवाल ने भी 5 वर्षों में व्याप्त गड़बड़झाले की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए एक तीखा पत्र लिखा है। पत्र से केंद्र के अधिकारियों में हड़कंप है। जांच कहां से शुरू करें संशय में है सीईओ लघु वनोपज संघ में पदस्थ एपीपीसीएफ मनोज अग्रवाल के पत्र के बाद प्रसंस्करण एवं अनुसंधान केंद्र के सीईओ पीजी फुलजले असमंजस मैं पड़ गए हैं की जांच कहां से शुरू करें..?, क्योंकि गड़बड़ियों की फेहरिस्त बड़ी लंबी है। फुलजले ने बातचीत में यह जरूर कहा कि हमने एसडीओ को जांच के निर्देश दिए हैं। सूत्रों का कहना है कि सीईओ ने जांच की आड़ में केवल एसडीओ और प्रभारी एसडीओ एवं रेंजर सुनीता अहिरवार के बीच काम का बंटवारा कर दिया। लेकिन वित्तीय अधिकार महिला रेंजर अहिरवार के पास ही निहित है। यानी खरीदी में हुई गड़बड़ियों की जांच पर लीपा पोती के लिए अहिरवार से वित्तीय अधिकार नहीं लिया गया। इसके पीछे संघ में चर्चा है कि मंत्रालय में पदस्थ एक शीर्षस्थ अधिकारी की सिफारिश से ही केंद्र में रेंजर को एसडीओ का प्रभारी बनाया गया और वित्तीय अधिकार दिए गए हैं।इनका कहनाएपीसीसीएफ के पत्र को संज्ञान में लिया है और जांच के लिए एसडीओ को निर्देश दिए हैं।पीजी फूलजले, सीईओ प्रसंस्करण एवं अनुसंधान केंद्र बरखेड़ा पठानी

सांभर के शिकार के तीन आरोपी गिरफ्तार

Three accused of hunting Sambhar arrested बालाघाट। कान्हा टाईगर रिजर्व के समनापुर बफरजोन अंतर्गत अकलपुर वृत्त के सरईपतेरा भाग-1 बीट कक्ष क्रमांक 203 वनक्षेत्र में सांभर के शिकार की खबर वन अमले को 18 फरवरी को मिली थी। जिसके बाद कान्हा टाईगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक एस.के. सिंह के मागर््दर्शन में कान्हा टाईगर रिजर्व और वन परिक्षेत्र रेंगाखार की टीम की संयुक्त कार्यवाही में सांभर का अवैध शिकार में संलिप्त तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सांभर के शिकार के बाद कान्हा टाईगर रिजर्व क्षेत्र संचालक श्री सिंह के मार्गदर्शन में वन परिक्षेत्र रेंगाखार, वन परिक्षेत्र समनापुर बफरजोन, वन परिक्षेत्र खापा बफरजोन और कान्हा की डॉग स्क्वायड टीम ने संयुक्त रूप से कड़ी मेहनत के बाद सहायक संचालक मलाजखंड अजय ठाकुर एवं रेंगागार परिक्षेत्र अधिकारी विजेन्द्र तिवारी के नेतृत्व में तीन आरोपियों छत्तीसगढ़ के सरईपतेरा निवासी 35 वर्षीय प्रभुसिंह धुर्वे पिता कुमानसिंह धुर्वे, 44 वर्षीय सोनसिंह धुर्वे पिता मोहरसिंह धुर्वे, बालाघाट जिले के बिरसा अंतर्गत अकलपुर निवासी 50 वर्षीय घासीराम पिता बिगारी परते को गिरफ्तार कर आरोपियों को गिरफ्तार किया। जिनके पास से वनविभाग की टीम ने सांभर का मांस, चमड़ा, श्रृंगाभ, मोटर सायकिल, कुल्हाड़ी और छुरी जब्त किया। आरोपियों के खिलाफ भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 2 की उपधारा 16(क), धारा 9, 39, 50, 51 और 52 के तहत अवन अपराध कायम कर बैहर न्यायालय में पेश किया। इस कार्यवाही मे खापा बफर रेंजर श्रीमती संध्या देशकर, समनापुर बफर परिक्षेत्र अधिकारी श्रीमती सीता जमरा, परिक्षेत्र सहायक शिवकुमार यादव, वनरक्षक नरोत्तमसिंह मेरावी, घनश्याम सैयाम, टहेलसिंह मानेश्वर, कान्हा टाईगर रिजर्व डॉग स्क्वायड टीम के सदस्य भागीरथ ककोड़िया एवं डॉग स्टार्म ने आरोपियों को पकड़ने में सराहनीय भूमिका निभाई।

पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर जोन में लगी भीषण आग, कई बाघों का है ठिकाना

A massive fire broke out in the core zone of Panna Tiger Reserve, many tigers are missing. पन्ना टाइगर रिजर्व में लगी आग पन्ना टाइगर रिजर्व में भीषण आग लग गई है, जिसके बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। इस टाइगर रिजर्व में कई बाघ रहते हैं। खबर लिखे जाने तक आग पर काबू नहीं पाया गया है। पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर जोन में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया है। बताया गया है कि पन्ना टाइगर रिजर्व के रमपुरा गेट से अंदर तालगांव क्षेत्र के जंगल में आग लग गई है। इस क्षेत्र में कई बाघों का ठिकाना है, जिससे यहां आम प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित है। कुछ समय से यहां फायर लाइन कटाई का काम चल रहा था, शायद इसी वजह से आग बहक कर घास में पहुंच गई होगी। बताया गया है कि दर्जन भर से अधिक सुरक्षा श्रमिक और वनकर्मी आग को काबू करने के प्रयास में जुटे हैं, लेकिन अभी तक आग पर काबू नहीं पाया जा सका।

प्रकृति की धरोहर गिद्ध प्रजाति को बचाने की जरूरत है विजयराघवगढ एवं रीठी में हुई गिद्धों की गणना कैमोर की पहाड़ियों में मिले गिद्ध के आशियाने वन विभाग में खुशी

There is a need to save the nature’s heritage vulture species. Counting of vultures was done in Vijayraghavgarh and Reethi. Happiness in the Forest Department. Home of vultures found in the hills of Kaimur. कटनी । गिद्ध प्रजाति बचाने की बहुत जरूरत वन क्षेत्रों में पक्षी राज कहे जाने वाले देशी गिद्घों का कुनबा बढ़ने से वन विभाग के अधिकारियों के चेहरों में खुशी देखने को मिल रही है। मिली जानकारी के अनुसार तीन दिन चली गणना के बाद पिछली गणना से दोगुने से अधिक देशी गिद्ध जिले के दो वन परिक्षेत्रों में पाए गए हैं। गणना का कार्य पूरा होने के बाद रविवार की देर शाम तक वरिष्ठ कार्यालयों को जानकारी भेजी गई। जिले में वर्ष 2019 की गणना के दौरान विजयराघवगढ़ व रीठी वन परिक्षेत्र में 75 गिद्ध मिले थे और वर्ष 2021 में गणना में इनकी संख्या घटकर 64 हो गई थी। जिसके चलते सफाई मित्र के नाम से जाने वाली इस प्रजाति की घटी संख्या वन विभाग के लिए चिंता का विषय थी। विशेषज्ञों के साथ वन विभाग की टीम ने विजयराघवगढ़ क्षेत्र में गिद्धों की संख्या अधिक होने के कारण यहां पर जागरूकता अभियान चलाया था। जिसका असर देखने को मिला है और इस वर्ष की गणना के बाद गिद्धों की संख्या बढ़कर 191 हो गई है। जिसके बाद वन अमले के चेहरों में खुशी देखने को मिल रही है। जिले में 16 फरवरी से 18 फरवरी तक हुई गिद्ध गणना में जहां 140 व्यस्क गिद्ध मिले हैं तो वहीं 51 अव्यस्क गिद्ध वन अमले को मिले हैं।गिद्घों के मिले चार आवास, कैमोर की पहाड़ी में अधिकवन विभाग के विजयराघवगढ़ वन परिक्षेत्र के कैमोर की पहाड़ियों में गिद्धों के सबसे अधिक आशियाने वन विभाग को मिले हैं। यहां पर कैमोर से मेहगांव के बीच पहाड़ी पर गिद्धों के तीन आशियाने टीम को मिले हैं। रेंजर विवेक जैन की अगुवाई में सुबह तीन दिन हुई गणना में 51 अव्यस्क और 136 व्यस्क देशी गिद्ध आशियानों में बैठे मिले। वहीं रीठी वन परिक्षेत्र में कुम्हरवारा टैंक के पास देशी गिद्घों का एक आशियाना मिला है, जिसमें गिद्घों की संख्या चार मिली है, हालांकि पहले व दूसरे दिन यहां पर छह गिद्ध मिले थे लेकिन अंतिम गणना को मानते हुए यहां पर चार की संख्या आंकी गई है। रीठी क्षेत्र में रेंजर महेश पटेल की अगुवाई में गिद्घों की गणना हुई। दो वन परिक्षेत्रों के अलावा अन्य क्षेत्रों में गिद्धों की प्रजाति देखने को नहीं मिली।

वन विभाग के दागी अफसरों पर मेहरबान है शीर्ष अफसर

The top officer is kind to the tainted officers of the forest department भोपाल। जंगल महकमे के शीर्ष अधिकारी कुछ चहेते अफसरों को बचाने के लिए पूरी ताकत लगाते आ रहें है। शीर्ष अधिकारी गंभीर वित्तीय मामले में घिरे आईएफएस अधिकारियों बचाने के लिए आरोप पत्र को जारी करने के बजाय शो कॉज नोटिस जारी कर रहे हैं। जिनके खिलाफ आरोप पत्र जारी भी कर दिए गए हैं, उनके विरुद्ध आगे की कार्यवाही पेंडिंग कर दी जा रही है। विभाग के शीर्ष अधिकारियों की ढुलमुल रवैया के कारण आरोपित अधिकारी धीरे-धीरे रिटायर भी होते जा रहें है। विभाग सेवानिवृत्त अधिकारियों पर सद्भावना दिखाते हुए पेंशन भी स्वीकृत कर रहा है. मसलन, एम काली दुर्रई, देवेंद्र कुमार पालीवाल, प्रभात कुमार वर्मा जांच कार्यवाही के लंबित रहते हुए सेवानिवृत्त हो गए और अब उनके समस्त देयकों के भुगतान करने पर उदारता बरती जा रही है। दागी अफसरों को बचाने के लिए शीर्ष अधिकारी क्यों उदारता बरत रहे हैं, शोध का विषय है। इन अफसरों को अभयदान देने के प्रयास आरपी राय: खंडवा सर्किल में पदस्थ सीसीएफ आर पी राय के खिलाफ 10 जून 2019 को आरोप पत्र जारी हुआ था। आरोप था कि वन मंडल इंदौर के अंतर्गत वन परीक्षेत्र चोरल में बड़े पैमाने पर अवैध कटाई हुई थी। जांच के दौरान राय अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असफल रहे। इसके कारण 6 लाख 93 हजार 361 रुपए की राजस्व हानि हुई थी। अभी इनसे वसूली नहीं हुई है। मामला विभाग में ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। राय अगले मई महीने सेवानिवृत्त हो गए। यही नहीं, विभागीय मंत्री की विशेष कृपा होने के कारण इनसे छह लाख 93 हजार की वसूली नहीं हो पाई।** एपीएस सेंगर: बालाघाट सर्किल में पदस्थ सीसीएफ एपीएस सेंगर के खिलाफ 24 अगस्त 2022 को आरोप पत्र जारी हुआ। मामला तब का है, जब वे टीकमगढ़ के डीएफओ हुआ करते थे। इन पर आरोप है कि भंडार क्रय नियमों का पालन नहीं किया। खरीदी में गड़बड़ी हुई। इनके खिलाफ आरोपपत्र भी बन गया परंतु प्रशासन-1 शाखा ने उदारता दिखाते हुए शो कॉज नोटिस जारी कर उन्हें बालाघाट सर्किल में प्राइम पोस्टिंग दे दी गई है। दुर्भाग्य जनक पहलू यह है कि विभाग ने इनके खिलाफ कार्रवाई करने की अद्यतन स्थिति से शासन को अवगत नहीं कराया है। यही नहीं, बल्कि सेंगर को बालाघाट सर्किल की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई। एम काली दुर्रई: 1996 बैच के आईएफएस अधिकारी एम काली दुर्रई प्रतिनियुक्ति पर हॉर्टिकल्चर में पदस्थ रहे। यहां पदस्थ रहते हुए दुर्रई ने किसानों की सब्सिडी देने के मामले में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की। इसके चलते उन्हें कमिश्नर हॉर्टिकल्चर पद से हटाया गया। मूल विभाग वन विभाग में लौटते ही उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई। प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के जांच अफसर सीके पाटिल को जांच के लिए 2 साल का पर्याप्त समय मिलने के बाद भी विभागीय जांच कंप्लीट नहीं कर पाए और वे रिटायर हो गए। राजनीतिक दबाव के चलते विभाग के अफसर उनके खिलाफ कोई बड़ी कार्यवाही नहीं कर पाए। सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले देयकों का भुगतान भी उदारता से किया जा रहा है। डीके पालीवाल: सीसीएफ शिवपुरी के पद से रिटायर हुए हैं। इनके पेंशन के भुगतान पर आपत्ति की गई है, क्योंकि धार और फिर गुना डीएफओ पद रहते हुए आर्थिक गड़बड़ी कर शासन को नुकसान पहुंचाया है। धार में पदस्थ रहते हुए पालीवाल ने एक रेंजर का समयमान वेतनमान का फिक्सेशन अधिक कर दिया। जब मामला संज्ञान में आया, तब तक पालीवाल वहां से स्थानांतरित हो गए थे। विभाग ने अतिरिक्त भुगतान के गए राशि वसूलने के नोटिस सेवानिवृत्त रेंजर को भेजा तो कोर्ट ने उस के पक्ष में फैसला देते हुए फिक्सेशन करने वाले अफसर पालीवाल से ₹300000 की वसूली करने के आदेश दिए। इसी प्रकार गुना में कैंपा फंड की राशि से गड़बड़झाला करने का भी आरोप है। इनके खिलाफ पूर्व एसीएस वन अशोक वर्णवाल ने आरोप पत्र जारी करने के निर्देश दिए थे। वर्णवाल के निर्देश पर विभाग ने उनके खिलाफ आरोप पत्र तैयार किया किंतु बड़े अफसरों के चहेते होने की वजह से आरोप-पत्र को शो-कॉज नोटिस परिवर्तित कर दिया गया है। बजट शाखा ने उनके पेंशन जारी करने पर आपत्ति लगाई है किंतु शीर्ष अफसरों ने शो-कॉज नोटिस जारी कर उनके पेंशन और समस्त देयकों के भुगतान के रास्ते प्रशस्त कर दिए। प्रभात कुमार वर्मा : 2001 बैच के आईएफएस अधिकारी प्रभात कुमार वर्मा जनवरी में सेवानिवृत्त हुए हैं। वे जब 2020 में वन विकास निगम में पदस्थ थे तब आर्थिक गड़बड़ियों के चलते उन्हें आरोप पत्र जारी किया गया। यही नहीं, विभाग ने 4 जनवरी 2022 को वन विकास निगम के एमडी को पत्र लिखकर गड़बड़ियों से संबंधित प्रचलित नस्ती उपलब्ध कराने के निर्देश दिए किंतु नस्ती उपलब्ध नहीं कराने के कारण उनके मामले में निर्णय नहीं हो सका। वे सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। जांच लंबित रहते हुए उनके देयकों के भुगतान की प्रक्रिया भी शुरू है। वर्मा पर आरोप यह भी है कि वे अपने मातहत अधिकारियों के खिलाफ दुर्भावना से कार्रवाई करते हैं। इनके शिकार खंडवा डीएफओ देवांशु शेखर, सुश्री नेहा श्रीवास्तव, अधर गुप्ता और एसडीओ विद्या भूषण मिश्रा हो चुके हैं. इनके द्वारा दुर्भावना से कार्रवाई करने की वजह से मिश्रा आईएफएस की दौड़ में पीछे रह गए हैं। दुर्भावना से की गई कार्रवाई से संबंधित दस्तावेज भी बड़े अधिकारियों को सौंपे हैं। उन पर लघु वनोपज संघ के अंतर्गत अधोसंरचना विकास के मद में भी गड़बड़ी करने के आरोप हैं। बृजेंद्र श्रीवास्तव: छिंदवाड़ा पूर्व में पदस्थ डीएफओ बृजेंद्र श्रीवास्तव के खिलाफ 21 जुलाई 2022 को नियम दस के तहत आरोप पत्र जारी किया गया था। इन पर आरोप है कि स्थानांतरण नीति के विरुद्ध जाकर कर्मचारियों के तबादले किए। आरोप पत्र का जवाब अभी तक नहीं दिया गया है। इनका तबादला वन मंत्री शाह की सिफारिश पर ग्वालियर से पूर्व छिंदवाड़ा वन मंडल जैसे महत्वपूर्ण वन मंडल में कर दिया गया है। भारत सिंह बघेल: भोपाल मुख्यालय में पदस्थ भारत सिंह बघेल को आरोप पत्र 22 मई 2006 को जारी किया गया था। बघेल ने अपने प्रभाव अवधि के दौरान पूर्व लांजी क्षेत्र में प्रभार अवधि में राहत कार्य अंतर्गत कार्यों … Read more

वन विभाग के दागी अफसरों पर मेहरबान है शीर्ष  अफसर

Top officers are kind to the tainted officers of the Forest Department विशेष संवाददाता  जंगल महकमे के शीर्ष अधिकारी कुछ चहेते अफसरों को बचाने के लिए पूरी ताकत लगाते आ रहें है। शीर्ष अधिकारी गंभीर वित्तीय मामले में घिरे आईएफएस अधिकारियों बचाने के लिए आरोप पत्र को जारी करने के बजाय शो कॉज नोटिस जारी कर रहे हैं। जिनके खिलाफ आरोप पत्र जारी भी कर दिए गए हैं, उनके विरुद्ध आगे की कार्यवाही पेंडिंग कर दी जा रही है। विभाग के शीर्ष अधिकारियों की ढुलमुल रवैया के कारण आरोपित अधिकारी धीरे-धीरे रिटायर भी होते जा रहें है। विभाग सेवानिवृत्त अधिकारियों पर सद्भावना दिखाते हुए पेंशन भी स्वीकृत कर रहा है. मसलन, एम काली दुर्रई, देवेंद्र कुमार पालीवाल, प्रभात कुमार वर्मा जांच कार्यवाही के लंबित रहते हुए सेवानिवृत्त हो गए और अब उनके समस्त देयकों के भुगतान करने पर उदारता बरती जा रही है। दागी अफसरों को बचाने के लिए शीर्ष अधिकारी क्यों उदारता बरत रहे हैं, शोध का विषय है। इन अफसरों को अभयदान देने के प्रयास  आरपी राय: खंडवा सर्किल में पदस्थ सीसीएफ आर पी राय के खिलाफ 10 जून 2019 को आरोप पत्र जारी हुआ था। आरोप था कि वन मंडल इंदौर के अंतर्गत वन परीक्षेत्र चोरल में बड़े पैमाने पर अवैध कटाई हुई थी। जांच के दौरान राय अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असफल रहे। इसके कारण 6 लाख 93 हजार 361 रुपए की राजस्व हानि हुई थी। अभी इनसे वसूली नहीं हुई है। मामला विभाग में ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। राय अगले मई महीने सेवानिवृत्त हो गए। यही नहीं, विभागीय मंत्री की विशेष कृपा होने के कारण इनसे छह लाख 93 हजार की वसूली नहीं हो पाई। एपीएस सेंगर: बालाघाट सर्किल में पदस्थ सीसीएफ एपीएस सेंगर के खिलाफ 24 अगस्त 2022 को आरोप पत्र जारी हुआ। मामला तब का है, जब वे टीकमगढ़ के डीएफओ हुआ करते थे। इन पर आरोप है कि भंडार क्रय नियमों का पालन नहीं किया। खरीदी में गड़बड़ी हुई। इनके खिलाफ आरोपपत्र भी बन गया परंतु  प्रशासन-1 शाखा ने उदारता दिखाते हुए शो कॉज नोटिस जारी कर उन्हें बालाघाट सर्किल में प्राइम पोस्टिंग दे दी गई है। दुर्भाग्य जनक पहलू यह है कि विभाग ने इनके खिलाफ कार्रवाई करने की अद्यतन स्थिति से शासन को अवगत नहीं कराया है। यही नहीं, बल्कि सेंगर को बालाघाट सर्किल की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई।   एम काली दुर्रई:  1996 बैच के आईएफएस अधिकारी एम काली दुर्रई प्रतिनियुक्ति पर हॉर्टिकल्चर में पदस्थ रहे। यहां पदस्थ रहते हुए दुर्रई ने किसानों की सब्सिडी देने के मामले में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की। इसके चलते उन्हें कमिश्नर हॉर्टिकल्चर पद से हटाया गया। मूल विभाग वन विभाग में लौटते ही उनके खिलाफ  विभागीय जांच शुरू की गई। प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के जांच अफसर सीके पाटिल को जांच के लिए 2 साल का पर्याप्त समय मिलने के बाद भी विभागीय जांच कंप्लीट नहीं कर पाए और वे रिटायर हो गए। राजनीतिक दबाव के चलते विभाग के अफसर उनके खिलाफ कोई बड़ी कार्यवाही नहीं कर पाए। सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले देयकों का भुगतान भी उदारता से किया जा रहा है।    डीके पालीवाल: सीसीएफ शिवपुरी के पद से रिटायर हुए हैं। इनके पेंशन के भुगतान पर आपत्ति की गई है, क्योंकि धार और फिर गुना डीएफओ पद रहते हुए आर्थिक गड़बड़ी कर शासन को नुकसान पहुंचाया है। धार में पदस्थ रहते हुए पालीवाल ने एक रेंजर का समयमान वेतनमान का फिक्सेशन अधिक कर दिया। जब मामला संज्ञान में आया, तब तक पालीवाल वहां से स्थानांतरित हो गए थे। विभाग ने अतिरिक्त भुगतान के गए राशि वसूलने के नोटिस सेवानिवृत्त रेंजर को भेजा तो कोर्ट ने उस के पक्ष में फैसला देते हुए फिक्सेशन करने वाले अफसर पालीवाल से ₹300000 की वसूली करने के आदेश दिए। इसी प्रकार गुना में कैंपा फंड की राशि से गड़बड़झाला करने का भी आरोप है। इनके खिलाफ पूर्व एसीएस वन अशोक वर्णवाल ने आरोप पत्र जारी करने के निर्देश दिए थे। वर्णवाल के निर्देश पर विभाग ने उनके खिलाफ आरोप पत्र तैयार किया किंतु बड़े अफसरों के चहेते होने की वजह से आरोप-पत्र को शो-कॉज नोटिस परिवर्तित कर दिया गया है। बजट शाखा ने उनके पेंशन जारी करने पर आपत्ति लगाई है किंतु शीर्ष अफसरों ने शो-कॉज नोटिस जारी कर उनके पेंशन और समस्त देयकों के  भुगतान के रास्ते प्रशस्त कर दिए।  प्रभात कुमार वर्मा : 2001 बैच के आईएफएस अधिकारी प्रभात कुमार वर्मा जनवरी में सेवानिवृत्त हुए हैं। वे जब 2020 में वन विकास निगम में पदस्थ थे तब आर्थिक गड़बड़ियों के चलते उन्हें आरोप पत्र जारी किया गया। यही नहीं, विभाग ने 4 जनवरी 2022 को वन विकास निगम के एमडी को पत्र लिखकर गड़बड़ियों से संबंधित प्रचलित नस्ती उपलब्ध कराने के निर्देश दिए किंतु नस्ती उपलब्ध नहीं कराने के कारण उनके मामले में निर्णय नहीं हो सका। वे सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। जांच लंबित रहते हुए उनके देयकों के भुगतान की प्रक्रिया भी शुरू है। वर्मा पर आरोप यह भी है कि वे अपने मातहत अधिकारियों के खिलाफ दुर्भावना से कार्रवाई करते हैं। इनके शिकार खंडवा डीएफओ देवांशु शेखर, सुश्री नेहा श्रीवास्तव, अधर गुप्ता और एसडीओ विद्या भूषण मिश्रा हो चुके हैं. इनके द्वारा दुर्भावना से कार्रवाई करने की वजह से मिश्रा आईएफएस की दौड़ में पीछे रह गए हैं। दुर्भावना से की गई कार्रवाई से संबंधित दस्तावेज भी बड़े अधिकारियों को सौंपे हैं। उन पर  लघु वनोपज संघ के अंतर्गत अधोसंरचना विकास के मद में भी गड़बड़ी करने के आरोप हैं।  बृजेंद्र श्रीवास्तव: छिंदवाड़ा पूर्व में पदस्थ डीएफओ बृजेंद्र श्रीवास्तव के खिलाफ 21 जुलाई 2022 को नियम दस के तहत आरोप पत्र जारी किया गया था। इन पर आरोप है कि स्थानांतरण नीति के विरुद्ध जाकर कर्मचारियों के तबादले किए। आरोप पत्र का जवाब अभी तक नहीं दिया गया है। इनका तबादला वन मंत्री शाह की सिफारिश पर ग्वालियर से पूर्व छिंदवाड़ा वन मंडल जैसे महत्वपूर्ण वन मंडल में कर दिया गया है। भारत सिंह बघेल: भोपाल मुख्यालय में पदस्थ भारत सिंह बघेल को आरोप पत्र 22 मई 2006 को जारी किया गया था। बघेल ने अपने प्रभाव अवधि के दौरान पूर्व लांजी क्षेत्र में प्रभार अवधि में राहत कार्य अंतर्गत कार्यों … Read more

कैंपा फंड के फायर प्रोटेक्शन मद से उपकरणों की खरीदी में गड़बड़ झाला

Jhala: Irregularities in purchasing equipment from fire protection item of Campa Fund. उदित नारायण भोपाल। जंगल महकमे में कैंपा फंड से फायर प्रोटक्शन के लिए 11 करोड़ रूपए रिलीज किए गए हैं। 11 करोड़ रूपया रिलीज होते ही सप्लायरों का एक सिंडिकेट सक्रिय हो गया है। इस सिंडिकेट में वित्तीय सेवा के एक अधिकारी के शामिल होने की खबर विभाग में सुर्खियों में है। हालांकि शासन की ओर से अधिकारी की पदस्थापना अभी मंत्री स्टाफ में नहीं हो पाई है। बावजूद इसके, इनके द्वारा फील्ड में पदस्थ वन संरक्षक और डीएफओ पर दबाव बनाया जा रहा है। दिलचस्प पहलू यह है कि सिंडिकेट के संचालक कर्ता धार, अलीराजपुर और झाबुआ से जुड़े हैं। फायर प्रोटेक्शन के लिए कैंपा फंड से 11 करोड़ रूपया रिलीज किए गए हैं, क्योंकि 15 मार्च तक खर्च किया जाना है। 11 करोड़ रूपये से ब्रशयुक्त कटर, ब्लोअर, अग्निरोधी किट  और पानी की जैरीकेन की खरीदी होनी है। इन उपकरणों मार्केट रेट से दुगना और डेढ़ गुना दाम पर हो रही है। मसलन, ब्रशयुक्त कटर की बाजार दर 12000 से लेकर 14000 रुपए तक है किंतु विभाग 45000 रुपए में खरीद रहा है। इसी प्रकार ब्लोअर की बाजार दर अधिक से अधिक 14000 रुपए है। जबकि विभाग ₹60000 प्रति ब्लोअर की दर से भुगतान करने जा रहा है। 5000से ₹6000 में मिलने वाला अग्निरोधी किट वन विभाग ₹12000 में खरीद रहा है। सूत्रों का कहना है यह है कि यह डर इसलिए निर्धारित किए गए हैं क्योंकि अधिकारियों का सिंडिकेट संचालक कर्ता द्वारा सप्लायरों से 15% कमीशन की डिमांड किये जाने की खबर है। सूत्रों ने बताया कि वन मंत्री के नाम से सिंडिकेट में शामिल अनाधिकृत अफसर फील्ड के अफसरों (डीएफओ- सीएफ) को धमकाया जा रहा है कि वर्क ऑर्डर इन्हीं फर्मों को ही दिया जाय। यह फॉर्म में भी सिंडिकेट में शामिल सदस्यों की ही है। सूत्रों की माने तो  खंडवा सतना और दक्षिण शहडोल के अलावा किसी भी अधिकारी ने टेंडर नहीं बुलाए हैं।  एक सीनियर अधिकारी की सलाह है कि विभाग में जो भी खरीदी हो उसके टेंडर अथवा बिड विभाग की साइट पर अपलोड किए जाएं। इससे अधिक से अधिक फर्म पार्टिसिपेट कर सकेंगी और विभाग को वित्तीय फायदा भी होगा। फील्ड के अवसर दबाव में आकर बीट के द्वारा खरीदी की जाती है, जिसकी जानकारी सिर्फ सिंडिकेट के सदस्यों को ही रहती है। फायर प्रोटक्शन के लिए खरीदी होने वाली उपकरण  नाम                   संख्या            मद (करोड़)  ब्रशयुक्त कटर      4400            1.98  ब्लोअर                440             2.64  अग्निरोधी किट    4400           5.28 पानी जैरीकेन       4400           1.10

वन विभाग की टीम पर लाठी-डंडों और पत्थर से हमला, 3 वनकर्मी घायल

Forest department team attacked with sticks and stones, 3 forest workers injured राजगढ़ में वन विभाग की टीम पर लाठी-डंडों और पत्थर से हमला हुआ है। जिसमें तीन वनकर्मी घायल हो गए हैं। किशनगढ़ में कुछ लोगों ने वन विभाग की जमीन पर कब्जा कर लिया था। राजगढ़ ! जिले के किशनगढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने ग‌ई वन विभाग की टीम पर मंगलवार को हमला हो गया। हमला करने वालों ने कुल्हाड़ी, लाठी-डंडे और पत्थरों से अतिक्रमण हटाने ग‌ई टीम पर हमला कर दिया। हमलें में तीन वनकर्मीयों को चोटें आई हैं। वन विभाग की शिकायत पर कोतवाली थाने में तीन लोगों पर विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है। राजगढ़ रेंज ऑफिसर गौरव गुप्ता ने बताया कि वन विभाग के किशनगढ़ क्षेत्र की डेढ़ हेक्टेयर जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया था। कब्जा करने वालों ने वन विभाग की जमीन पर लकड़ी के खंभे गाड़कर तार फेसिंग कर दी थी। जिसकी सूचना मिलने पर मंगलवार दोपहर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। कब्जा करने वालों ने इसका विरोध किया। उन्होंने टीम पर लाठी-डंडे, कुल्हाड़ी और पत्थर से हमला कर दिया। टीम ने अपनी जान बचाते हुए पुलिस को सूचना दी। कुछ देर बाद 20 से 25 पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। पुलिस को देखकर हमलावर मौके से भाग निकले। तीन वनकर्मीयों को आई चोंटे इस घटना में में तीन वनकर्मीयों को पत्थर लगे हैं। उन्हें गंभीर चोट नहीं आई है। पुलिस की मौजूदगी में टीम ने अतिक्रमणहटाने की कार्रवाई की। इसके बाद राजगढ़ थाने पहुंचे और हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज करवाया। पुलिस ने शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करने पर आरोपी मोहन उर्फ बंटी गुर्जर, भारत गुर्जर, राजू गुर्जर पर विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है।

अग्निवीर की तर्ज पर प्रदेश सरकार लायेंगी वनवीर भर्ती योजना

On the lines of Agniveer, the state government will bring Vanveer recruitment scheme. भोपाल। जंगल और वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए मध्य प्रदेश सरकार सेना के अग्निवीर की तर्ज पर मध्य प्रदेश में वन वीर की भर्ती करेगी। इसके लिए भर्ती नियम बना लिए गए हैं। इनमें वन्य जीवों की सुरक्षा का खास ध्यान रखने के लिए बाघ मित्र, चीता मित्र और हाथी मित्र नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत जंगल के अंदर और उसके आस-पास रहने वाले ग्रामीण, वनवासी और आदिवासी युवाओं की पांच साल के लिए भर्ती की जाएगी। हर वर्ष उनका प्रदर्शन देखकर उनकी सेवा में वृद्धि की जाएगी। पांच साल तक उन्हें मानदेय भी दिया जाएगा। पांच साल बाद भर्ती किए गए कुल वनवीरों में से अच्छा प्रदर्शन करने वाले 30 प्रतिशत लोगों को वन रक्षक के पद पर नियमित नियुक्ति दी जाएगी।वहीं चीतों के प्रति जागरूकता लाने और ग्रामीणों में उनके प्रति डर को समाप्त करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देश पर ‘चीता मित्र’ भी बनाए गए हैं। वे स्थानीय लोगों को चीतों की प्रवृति से अवगत करा कर उन्हें चीताें की रक्षा कर संरक्षण के लिए जागरूक करते हैं। अब वन वीर भर्ती में चीता मित्रों को भी प्राथमिकता दी जाएगी। स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता, क्योंकि वे जंगल को अच्छे से समझते हैंवन वीर भर्ती की व्यवस्था इसलिए की जा रही है क्योंकि स्थानीय समुदाय के युवा जंगल को अच्छे से पहचानते हैं और जंगल एवं वन्य प्राणियों की भली भांति रक्षा भी कर सकते हैं। वन रक्षक के पदों पर सीधी भर्ती में कई बार शहरी युवा भी आ जाते हैं, जिन्हें जंगलों में रहने की आदत नहीं होती है। वन एवं वन्यप्राणियों के संरक्षण के लिए स्थानीय युवा मददगार साबित होते हैं तथा इससे उन्हें रोजगार के भी नए अवसर मिलेंगे हर साल की जाएगी पांच सौ से अधिक भर्तियां वन विभाग की तैयारी है कि वन वीर योजना के तहत हर साल मध्‍य प्रदेश में पांच सौ से अधिक भर्तियां की जाएगी। इन्हें 15 से 20 हजार रुपये मासिक मानदेय भी दिया जाएगा। लोकसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार यह प्रक्रिया शुरू कर सकती है। वन वीर भर्ती के लिए शारीरिक मापदंड और व्यवहारिकता को प्राथमिकता में रखा जाएगा। साथ ही न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता में 10वीं या 12वीं उत्तीर्ण को प्राथमिकता दी जा सकती है। एक नजर मेंकुल वनरक्षक के पद: 20,670 वर्तमान में सेवाएं दे रहे वनरक्षक: 16,875 खाली पद: 3,795

बांधवगढ़ में लगातार बाघों की मौत फिर भी सरकार मौन क्यों?

Continuous death of tigers in Bandhavgarh, yet why is the government silent? उमरिया । विश्व प्रसिद्ध और बाघ दर्शन के लिए मशहूर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एक बार फिर वन्य प्राणी प्रेमियों के लिए बुरी खबर सामने आई है। जिसमें एक नर बाघ शावक की मौत हो जाने की जानकारी मिली है। प्रबंधन के द्वारा मृत बाघ शावक का पीएम आदि कराकर टाइगर रिजर्व की वरिष्ठ अधिकारियों और डॉक्टरों की मौजूदगी में एनटीसीए की गाइडलाइन के तहत उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया है। दरअसल बांधवगढ़ में लगातार बाघों की मौत से जहां प्रबंधन कटघरे में है।वहीं बीते दिसंबर माह में दर्जन भर बाघों की असमय मौत हो जाना प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है। इस बार भी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के धमोखर बफर परिक्षेत्र अंतर्गत बरबसपुर बीट के कक्ष क्रमांक 125 में एक नर बाघ शावक मृत अवस्था में गश्ती दल को मिला है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के प्रबंधन की ओर से जानकारी दी गई है कि अमृत न भाग सावन के आसपास एक दूसरे बैग की पगमार्क मिले हैं इसके अलावा मृत शावक को घसीटने के भी निशान दिखाई दे रहे हैं। मृत शावक के शरीर के सभी अंग मौजूद हैं। इसके बाद मृत शावक का डॉक्टर नितिन गुप्ता और बी बी एस मार्को के द्वारा पोस्टमार्टम कर जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजने सैंपल एकत्रित किए गए हैं। मृत शावक का पीएम उपरांत बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की वरिष्ठ अधिकारियों एनटीसीए के मेम्बर की मौजूदगी और एनटीसीए गाइडलाइन के तहत अंतिम संस्कार किया गया है। बताया गया कि नर बाघ शावक की मौत प्रथम दृष्ट्या किसी दूसरे बाघ से आपसी संघर्ष के कारण होना प्रतीत होता है।

कूनो में चीते की मौत नामीबिया से लाए एक और चीते ने तोड़ा दम

भोपाल। मॉनीटरिंग टीम को चीता शौर्य अचेत अवस्था में मिला था। कूनो में अब तक दस चीतों की मौत हो चुकी है, इनमें सात चीते और तीन शावक शामिल हैं। लॉयन प्रोजेक्ट के डायरेक्टर ने बताया कि आज करीब सवा तीन बजे चीता शौर्य की मौत हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मौत का खुलासा होगा। अब तक 7 चीते और 3 शावक की मौत कूनो में अब तक चीते और शावक को मिलाकर यह 10वीं मौत है। इनमें 7 चीते और 3 शावक हैं। प्रोजेक्ट चीता में सितंबर 2022 में आठ चीतों को नामीबिया से लाया गया था। इसके बाद फरवरी 2023 में 12 और चीतों को दक्षिण अफ्रीका से लाया गया था। नामीबिया से लाया गया चीता शौर्य अपने सगे भाई गौरव के साथ आया था। दोनों हमेशा एकसाथ रहते थे, साथ शिकार करते थे। कुछ समय पहने दोनों की अग्नि और वायु चीते से भिड़ंत हुई थी। वे दोनों भी सगे भाई थे। इसमें अग्नि चीता गंभीर रूप से घायल हो गया था। इसके बार चीतों को बाड़े में बंद कर दिया था। + कब-कैसे हुई चीतों की मौत… 26 मार्च 2023: साशा की किडनी इंफेक्शन से मौत  नामीबिया से लाई गई 4 साल की मादा चीता साशा की किडनी इंफेक्शन से मौत हो गई। वन विभाग ने बताया कि 15 अगस्त 2022 को नामीबिया में साशा का ब्लड टेस्ट किया गया था, जिसमें क्रियेटिनिन का स्तर 400 से ज्यादा था। इससे ये पुष्टि होती है कि साशा को किडनी की बीमारी भारत में लाने से पहले ही थी। साशा की मौत के बाद चीतों की संख्या घटकर 19 रह गई। 27 मार्च : ज्वाला ने चार शावकों को जन्म दिया साशा की मौत के अगले ही दिन मादा चीता ज्वाला ने चार शावकों को जन्म दिया। ज्वाला को नामीबिया से यहां लाया गया था। कूनो नेशनल पार्क में इन शावकों को मिलाकर चीतों की कुल संख्या 23 हो  गई। 23 अप्रैल : उदय की दिल के दौरे से मौत साउथ अफ्रीका से लाए गए चीते उदय की मौत हो गई। शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में बताया गया कि उदय की मौत कार्डियक आर्टरी फेल होने से हुई। मध्यप्रदेश के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन जेएस चौहान ने बताया कि हृदय धमनी में रक्त संचार रुकने के कारण चीते क्की मौत हुई। यह भी एक प्रकार का हार्ट अटैक है। इसके बाद कूनो में शावकों सहित चीतों की संख्या 22 रह गई।  9 मई : दक्षा की मेटिंग के दौरान मौत दक्षा को दक्षिण अफ्रीका से कूनो लाया गया था। जेएस चौहान ने बताया कि मेल चीते को दक्षा के बाड़े में मेटिंग के लिए भेजा गया था। मेटिंग के दौरान ही दोनों में हिंसक इंटरेक्शन हो गया। मेल चीते ने पंजा मारकर दक्षा को घायल कर दिया था। बाद में उसकी मौत हो गई। इसके बाद कूनो में शावकों सहित चीतों की संख्या 21 रह गई। 23 मई : ज्वाला के एक शावक की मौत मादा चीते ज्वाला के एक शावक की मौत हो गई। जिएस चौहान ने बताया कि ये शावक जंगली 31 परिस्थितियों में रह रहे थे। 23 मई को श्योपुर में भीषण गर्मी थी। तापमान 46-47 डिग्री सेल्सियस था। दिनभर गर्म हवा और लू चलती रही। ऐसे में ज्यादा गर्मी, डिहाइड्रेशन और कमजोरी इनकी मौत की वजह हो सकती है। इसके बाद कूनो में शावकों सहित चीतों की संख्या 20 रह गई। 25 मई : ज्वाला के दो और शावकों की मौत पहले शावक की मौत के बाद तीन अन्य को चिकित्सकों की देखरेख में रखा गया था। इनमें से दो और शावकों की मौत हो गई। अधिक तापमान होने और लू के चलते इनकी तबीयत खराब होने की बात आमने सामने आई थी। इसके बाद कूनो में एक शावक सहित 18 चीते बचे। 11 : मेल चीता तेजस की मौत चीते तेजस की गर्दन पर घाव था, जिसे देखकर अनुमान लगाया गया कि चीतों के आपसी संघर्ष में उसकी जान गई है। इस मौत के बाद कूनो में 17 चीते बचे थे। 14 जुलाई : मेल चीता सूरज की मौत चीते सूरज की गर्दन पर भी घाव मिला। कूनो प्रबंधन का अनुमान है कि चीतों के आपसी संघर्ष में ही सूरज की जान गई है। इससे नेशनल पार्क में चीतों की संख्या घटकर 16 रह गई थी। 2 अगस्त : मादा चीता धात्री की मौत कूनो परिसर में ही मादा चीता धात्री का शव मिला था। पोस्टमॉर्टम में इंफेक्शन से मौत की वजह सामने आई थी। धात्री की मौत होने के बाद चीतों की संख्या 15 रह गई थी। 03 जनवरी : आशा ने तीन शावक जन्मे इसी साल 03 जनवरी को श्योपुर जिले के कूनो बेशनल पार्क से बड़ी खुशखबरी आई। मादा चीता आशा ने तीन शावकों को जन्म दिया। कूनो में अब 4 शावक समेत कुल 18 चीते हो गए थे। नामीबिया से कूनो नेशनल पार्क लाई गई मादा चीता आशा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह नाम दिया था।  16 जनवरी 2024: नर चीते शौर्य की मौत नामीबिया से 17 सितंबर 2022 को कूनो नेशनल पार्क लाए गए नर चीते शौर्य ने दम तोड़ा। अब यहां 4 शावक समेत 17 चीते बचे हैं।

प्रेरकों के साथ बच्चों ने की जंगल की सैर, देखी ( मै भी बाघ ) डाक्यूमेंट्री

Children took a trip to the jungle with the inspirations, watched the documentary (Main Bhi Bagh) हरिप्रसाद गोहे आमला ! स्कूली क्षात्रो को वन, वन्यप्राणी एवं पर्यावरण के संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकाशित करने के उद्देश्य को लेकर मध्य प्रदेश वन विभाग एवं मध्य प्रदेश ईकोपर्यटन विकास बोर्ड द्वारा दिनांक 11 जनवरी 2024 को भूमका देव (सारणी-बेलोण्ड रोड), आमला में वनसंरक्षक वनवृत्त बैतूल एवं वनमंडल अधिकारी दक्षिण बैतूल, उ.व.म.अ. आमला (सा.) के कुशल मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में वन परिक्षेत्र आमला अंतर्गत अनुभूति वर्ष 2024 कार्यक्रम का आयोजन आयोजित किया गया।कार्यक्रम में अशासकीय मदरलैंड पब्लिक अकादमी स्कूल आमला के 126 छात्र/छात्रों ने भाग लिया । आयोजित शिविर में छात्रों ने प्रदेश के अनुभूति प्रेरक श्री के.एल. चंदेलकर सहित वन विभाग के 3 अन्य प्रेरकों के साथ एक प्राकृतिक सैर में हिस्सा लिया, जहाँ उन्हें पेड़ों और पक्षियों की विविध प्रजातियों के बारे में जानकारी दी गई । इस दौरान बच्चों को अनसिले कपड़े से बैग बनाने के साथ साथ “मैं भी बाघ” थीम पर डाक्युमेंट्री दिखाई गई । वहीं छात्र/छात्राओं के लिए चित्रकला, रंगोली, और क्विज प्रतियोगिता का आयोजन भी वन विभाग द्वारा आयोजित किया गया । शिविर के दौरान मुख्य अतिथि बतौर गणेश यादव जनपद पंचायत अध्यक्ष आमला, भाजपा किसान नेता हरी यादव , सुखराम कुमरे सभापति जैवविविधता वन समिति के साथ सुखदेव यादव सरपंच, रामाधार यादव सरपंच,भगवंतसिंह रघुवंशी जिला मंत्री भाजपा अतिथि के रूप में शामिल हुये । प्रतियोगिता के विजेताओं को मुख्य अतिथियों द्वारा प्रथम/द्वितीय/तृतीय पुरस्कार वितरण किया गया। कार्यक्रम में “मैं भी बाघ” थीम गान का गायन किया गया एवं प्रकृति और वन्य जीव संरक्षण की प्रतिज्ञा के साथ अनुभूति कार्यक्रम सफलतापूर्वक समापन हुआ ।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व , गहरी खाई में बाघ शावक का कंकाल मिला

Bandhavgarh Tiger Reserve skeleton of tiger cub found in deep ditch बाघ शावक का कंकाल मिला, संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से प्रबंधन चिंता में उमरिया ! बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बुधवार को गहरी खाई में बाघ शावक का कंकाल मिला है। उसकी संदिग्ध मौत को लेकर प्रबंधन में चिंता है। बताया जा रहा है कि करीब 25 दिन पहले ही शावक की मौत हो गई थी। उमरिया के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में फिर बाघ का कंकाल मिला है। संदिग्ध परिस्थितियों में बाघ शावक की मौत से प्रबंधन चिंता में है। माना जा रहा है कि 25 दिन पहले शावक की मौत हुई है।उमरिया जिले के बांधवगढ़ में लगातार बाघों की संख्या बढ़ रही है तो वहीं तेजी से कम भी होती हुई नजर आ रही है। प्रबंधन चाहे कितने भी दावे क्यों न कर ले, लेकिन वह ट्रैप कर पाने में नाकाम साबित होता नजर आ रहा है। पैदा होने से लेकर बड़े होने तक चारों तरफ कैमरे को लगाकर बाघ के बच्चों की निगरानी की जाती है, लेकिन फिर भी बाघ के बच्चे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जहां उसका अब कंकाल मिला है। बता दें कि बुधवार के दिन कैमरा ट्रैप को लगाते समय गहरी खाई में बाघ शावक का कंकाल देखा गया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र की पतौर परिक्षेत्र अंतर्गत चिल्हारी बीच के आर 421 के कुशवाहा नाला के समीप यह कंकाल मिला है। प्रबंधन की मानें तो यह कंकाल देखकर उन्हें लग रहा है कि यह लगभग 25 दिन पुराना कंकाल है। जहां किसी वजह से उसकी मौत हो गई है। हालांकि प्रबंधन अब पूरे मामले की जांच-पड़ताल कर रहा है।

गांधी सागर अभयारण्य में विदेश से आएंगे चीते.

In Gandhi Sagar Wildlife Sanctuary, cheetahs will be brought from abroad. गांधी सागर अभयारण्य में विदेश से आएंगे चीते, 28 किमी क्षेत्र में फेंसिंग का काम पूरा करने में जुटा वन विभाग – फरवरी में चीतों के लिए अभयारण्य पूरी तरह तैयार हो जाएगा, जल्द निर्णय करेगी केंद्र सरकार  उदित नारायण भोपाल। गांधी सागर अभयारण्य में 64 किमी को बाड़ा तैयार कर लिया गया है। यहां पर करीब 28 किमी की फेंसिंग का काम करीब करीब पूरा हो गया है। इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 17 से 18 करोड़ के आसपास है। अगले माह यानी फरवरी में चीतों के लिए अभयारण्य पूरी तरह तैयार हो जाएगा। इसके बाद चीतों को लाने का निर्णय होगा। केंद्र सरकार की किसी अफ्रीकी देश से चीते लाने को लेकर चर्चा चल रही है। गांधी सागर अभयारण्य का क्षेत्र छोटा है। इसलिए यहां पर 5 से 6 चीतों को ही लाकर रखा जाएगा।  बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर सबसे पहले 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से लाए गए आठ चीते श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में छोड़े गए थे। इसके बाद 18 फरवरी को 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते कूनो नेशनल पार्क में लाकर छोड़े गए। कूनो के जंगल में कुल 20 चीते लाए गए। इनमें से छह चीतों की मौत हो गई है। कूनो में अभी 14 बड़े चीते हैं और एक शावक है। वहीं, तीन नए शावकों ने अभी जन्म लिया है। कूनो नेशनल पार्क में एक-एक कर चीतों को खुले जंगल में छोड़ा जा रहा है। अब तक दो को ही खुले में छोड़ा गया है। कूनो नेशनल पार्क में चीता सफारी की भी शुरूआत कर दी गई। कूनो से शिफ्ट नहीं होंगे चीते – प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) असीम श्रीवास्तव ने बताया कि गांधी सागर अभयारण्य में कूना से चीते शिफ्ट नहीं किए जाएंगे। वहां विदेश से नए चीते लाए जाएंगे। इसका निर्णय केंद्र सरकार करेगी। अभयारण्य में तैयारी अंतिम दौर में है।

अभय कुमार पाटिल वन विभाग के नए मुखिया

Abhay Kumar Patil new head of forest department एक महीने के लिए ही होगा कार्यकालउदित नारायणभोपाल. राज्य शासन ने वन विकास निगम के प्रबंध संचालक अभय कुमार पाटिल को वन बल प्रमुख के पद पर पदस्थ करने के आदेश जारी कर दिया है। उनका कार्यकाल एक महीने का ही होगा। फरवरी में वन विभाग के नए मुखिया असीम श्रीवास्तव होंगे।राज्य शासन ने इस आशय का आदेश शुक्रवार को जारी किया है। उल्लेखनीय है कि मौजूदा वन बल प्रमुख आरके गुप्ता और लघु वनोपज संघ के एमडी पुष्कर सिंह 31 दिसम्बर को अवकाश रहने के कारण शुक्रवार को ही वरिष्ठ अधिकारियों को मुख्यालय के अफसरों ने दोनों वरिष्ठ अफसरों को भावभीनी विधाई दी। राज्य शासन ने अलग-अलग आदेश जारी कर सिंह परियोजना एवं चीता प्रोजेक्ट के सीसीएफ उत्तम कुमार शर्मा को एपीसीसीएफ के पद पर पदोन्नति करते हुए वहीं पदस्थ किया है। इसी प्रकार दो वन संरक्षक को मुख्य वन संरक्षक के पद पर पदोन्नति किया है। इनमें जे देव प्रसाद वर्किंग प्लान पेंच नेशनल पार्क और राज्य शासन में पदस्थ विशेष कर्तव्य अधिकारी अशोक कुमार के नाम शामिल है।दागी डीएफओ भी पदोन्नतिराज्य शासन ने शहडोल उत्तर में कार्यरत डीएफओ गौरव चौधरी के खिलाफ लोकायुक्त प्रकरण लंबित होते हुए भी वन संरक्षक के पद पदोन्नत किया। सूत्रों ने बताया कि गौरव चौधरी के प्रकरण को लेकर विभागीय पदोन्नति समिति के समक्ष वन विभाग के सीनियर अधिकारियों ने लोकायुक्त में जांच लंबित रहने संबंधित स्थिति स्पष्ट नहीं की थी। जबकि 2009 बैच कि आईएफएस और उज्जैन डीएफओ किरन बिसेन के मामले कई वर्ष पुराने जांच लंबित रहने की वजह से प्रमोशन पर ब्रेक लग गया है। वन संरक्षक के पद पर प्रमोट होने वालों में पन्ना नेशनल पार्क के उपसंचालक रिपुदमन सिंह भदौरिया, राज्य वन अनुसन्धान संस्थान जबलपुर में पदस्थ रविन्द्रमणि त्रिपाठी, और सिवनी उत्तर डीएफओ में पदस्थ बासु कनोजिया का नाम शामिल है।चार डीएफओ को मिला प्रवर श्रेणी वेतनमानराज्य शासन ने 2011 बैच के आए थे अधिकारियों को प्रमाण श्रेणी वेतनमान देने का आदेश जारी किया है। इनमें मीना कुमारी मिश्रा, अनुराग कुमार और सुश्री संध्या शामिल किया है। जबकि डीएफओ बुरहानपुर विजय सिंह को सशर्त प्रवर श्रेणी वेतनमान देने का आदेश जारी किया है. दरअसल विजय सिंह को 10 जून 20 को जारी विभागीय आदेश में कनिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड में इस शर्त के साथ नियुक्त किया गया था कि वे मिड कैरियर फेज-।।। कार्यक्रम में अनिवार्यतः भाग लेंगे। किंतु उनके द्वारा आज दिनांक तक मिड कैरियर फेज-।।। कार्यक्रम में भाग नहीं लिया गया है। अतः प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेकर प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर ही उनका वेतन निर्धारण करने की शर्त पर प्रवर श्रेणी वेतनमान स्वीकृत किया जाता है।

दागी रेंजर को बचाने सीसीएफ और डीएफओ आमने- सामने.

CCF and DFO face off to save the Ranger. उदित नारायणभोपाल । एक दागी रेंजर को लेकर ग्वालियर सर्कल के सीसीएफ तोमर सिंह सूलिया और श्योपुर डीएफओ चंदू सिंह चौहान आमने-सामने आ गए है। डीएफओ दागी रेंजर के खिलाफ उनके नियम विरुद्ध कृत्य पर कार्यवाई चाहते है। जबकि सीसीएफ सूलिया की इच्छा है कि वह दाग़ रहित रिटायर हो जाए। रेंजर की सेवानिवृत इस माह है।वन विभाग में किसी भी अधिकारी हो या फिर कर्मचारी उनके विरुद्ध जांच कछुआ चाल से की जाती है। इसके कारण कई बार बिना किसी कार्यवाई से वह रिटायर भी जाते है। वर्तमान में सबलगढ़ के गेम रेंज में पदस्थ केएम त्रिपाठी से जुड़ा मामला है। त्रिपाठी की जब 2017-18 में विजयपुर में पोस्टिंग थी तब केम्पा फंड से विभिन्न कार्य कराए गए थे। इन कार्यों के सम्पादन में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए बीएल ओझा और बनवारी शर्मा ने विभाग के विजिलेंस को शिकायत की थी। 2019 में की गई शिकायत का आज तक निराकरण नहीं हुआ। हालांकि विजिलेंस के निर्देश पर एसडीओ जोगेन्दर पारदे की अध्यक्षता के कमेटी ने जांच में कई बिन्दुओ पर रेंजर त्रिपाठी को क्लीनचिट दे दी किन्तु पूर्व में जॉच दिलीप आदिवासी एवं पवन आदिवासी द्वारा की गर्य शिकायत पर आनन्द सिंह चौहान उप वनमण्डलाधिकारी विजयपुर द्वारा की गई जांच में पत्र रेंजर केएम त्रिपाठी तत्कालीन वन परिक्षेत्र अधिकारी विजयपुर पश्चिम एवं रामवरन शर्मा उप वनक्षेत्रपाल को अग्नि सुरक्षा के 47,950 रुपये की राशि के फर्जी प्रमाणक तैयार करने के मामले में दोषी ठहराने को कमेटी ने भी दोषी माना है।इनका कहना“मैंने डीएफओ से आरोप पत्र पर अभिमत मांगा है। उनके अभिमत के बाद निर्णय लिया जाएगा।”टीएस सूलिया, सीसीएफ ग्वालियर“मैंने आरोप पत्र के साथ अपना अभिमत भेज दिया है। अगर दोबारा अभिमत मांगा है तो मैं दिखवाता हूं।”सीएस चौहान, डीएफओ श्योपुर

नए साल में पाटिल होंगे वन विभाग के नए मुखिया

Patil will be the new head of forest department in the new year डीपीसी कमेटी ने लगाई उनके नाम पर मुहर उदित नारायणभोपाल ! वन विकास निगम के प्रबंध संचालक अभय कुमार पाटिल जंगल महकमे के नए मुखिया होंगे। उनका कार्यकाल एक महीने का ही होगा। फरवरी में वन विभाग के नए मुखिया असीम श्रीवास्तव हो बनेंगे।मुख्य सचिव वीणा राणा की अध्यक्षता में शुक्रवार को डीपीसी की बैठक हुई। बैठक में उत्तर प्रदेश के वन बल प्रमुख सुधीर शर्मा विशेष रूप से उपस्थित थे। इसी बैठक में पहली बार वन बल प्रमुख के लिए डीपीसी कमेटी ने 1986 बैच के अभय कुमार पाटिल और 1988 बैच के असीम श्रीवास्तव के नाम पर अपनी मुहर लगाई। ऐसा इसलिए किया, क्योंकि अगले वन बल प्रमुख पाटिल का कार्यकाल एक महीने का ही है। यानि फरवरी में हॉफ पद के लिए दोबारा डीपीसी न करनी पड़े। फरवरी में बनने वाले वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव का कार्यकल जुलाई 2025 तक रहेगा। कमेटी ने बैठक में 1990 बैच के बिभाष ठाकुर और विवेक जैन को एपीपीसीएफ से पीसीसीएफ पद पर प्रमोट करने पर मुहर लगाई है। उल्लेखनीय है कि मौजूदा वन बल प्रमुख आरके गुप्ता और लघु वनोपज संघ के एमडी पुष्कर सिंह दिसम्बर में सेवानिवृत होने जा रहें है। नए साल में होंगे बदलाववन विभाग में कई नए बदलाव होने जा रहें है। ये सभी बदलाव नई सरकार के गठन के बाद होने की संभावना है। लघु वन वनोपज संघ एमडी पुष्कर सिंह के रिटायरमेंट के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव नए एमडी होंगे। वर्तमान में डॉक्टर श्रीवास्तव वर्किंग प्लान शाखा के प्रमुख हैं। गौरतलब यह है कि अभी तक विभाग में हुई पदस्थापना के दौरान डॉक्टर श्रीवास्तव की वरिष्ठता की अनदेखी की गई। इसी कारण यह संभावना जताई जा रही है कि नई सरकार में उनकी पदस्थापना वरिष्ठता के आधार पर होगी। निगम के मौजूदा एमडी पाटिल के वन बल प्रमुख बनने पर पीसीसीएफ प्रशासन -एक के आरके यादव को निगम में एमडी के पद पर पदस्थ किए जाने की संभावना है। कैडर में पीसीसीएफ का पद प्रशासन-एक का नहीं है। कैडर में यह पद अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के अधिकारी के लिए निर्धारित है। डॉ श्रीवास्तव के संघ में चले जाने पर वर्किंग प्लान शाखा का प्रभार पीसीसीएफ जेएफएम पीके सिंह को दिया जा सकता है। फरवरी में अम्बाडे होंगे पीसीसीएफ वन्य प्राणीपाटिल के जनवरी में रिटायर होने पर पीसीसीएफ वन्य प्राणी असीम श्रीवास्तव वन बल प्रमुख बनेंगे और उनकी जगह पर 88 बैच के आईएफएस विजय एन अम्बाडे पीसीसीएफ वन्य प्राणी होंगे. विभाग में अम्बाडे की छवि वन्य प्राणी विशेष के रूप में बनी हुई है।

हरे भरे वृक्षों की कटाई जारी, विभाग अंजान, जिम्मेदार चुप.

Continued Cutting of green trees, department unaware, responsible parties silent. कटनी । वन विभाग की लचर कार्य प्रणाली के चलते जंगल काटे जा रहे हैं हरे-भरे वृक्षों को ऊजाडा रहा है जिससे पर्यावरण को नुकसान हो रहा है लेकिन विभाग के द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है जिसे सवाल खड़े हो रहे हैं यह बात जिम्मेदार अधिकारियों तक भी है लेकिन मामले को दबाया जा रहा है जानकारी के अनुसार बरही रेंज सुधरने का नाम नहीं ले रहा है अभी हाल ही में बंजर बरेला और सलैया सिहोरा में हज़ारों क्विंटल लकड़ी हर रोज काटी जा रही हैं फ़ोटो मे तुरन्त की कटान स्पश्ट दिखाई दे रही है जी पी एस के साथ फोटो खींची गईं हैं ताकि विभाग राजस्व की ज़मीन न बता सके सारी तस्वीर जी पी एस के साथ हैं जब भी कोई बात आती है तभी किसी न किसी बहाने से जांच को भटकाया जाता है ताकि संलिप्त कर्मचारियों को बचाया जा सके और जंगल ऐसे ही कटते और लुटते रहें। और आरोपी पर्दे के पीछे रहें। किन्तु अब वन विभाग की बेशर्मी की हद हो गई कार्यालय में बैठकर ही काम किया जा रहा है पूरी तरह फील्ड में जाने से अधिकारी गुरेज कर रहे हैं मजे की बात तो यह है कि जंगल को सुरक्षित रखने का विभाग वन विभाग का होता है लेकिन कर्मचारियों के द्वारा ही जिम्मेदारी से काम नहीं किया जाता है

वन विभाग में कमीशन का खेल: चहेते सप्लायर को उपकृत करने मार्केट से हो रही है खरीदी.

The Game of Commission in Forest Department. उदित नारायण भोपाल। वन विभाग में कमीशनबाजी का खेल बदस्तूर जारी है। निर्वतमान वन मंत्री विजय शाह ने अपने कार्यकाल में कमीशनबाजी के खेल पर रोक लगाने की मंशा से प्रदेश स्तर पर एकजाई टेंडर करने के आदेश जारी किए थे। अफसरों ने उनके आदेश को धुंआ में उड़ाते वनमंडल स्तर पर खरीदी का क्रम जारी रखा है। ताज़ा मामला मंडला पूर्व और मंडला पश्चिम का है। दोनों ही वनमंडल की कमान एक ही अफसर के हाथ में है. यही वजह है कि डीएफओ ने अपने चहेते सप्लायर्स जैन बंदुओं को बिल्डिंग मैटेरियल्स और नीमखली गोबर खाद और उपजाऊ मिट्टी प्राय करने का वर्क आर्डर जारी कर दिया। सूत्रों के अनुसार डीएफओ को खरीदारी की इतनी जल्दबाजी थी कि वर्क आर्डर पहले जारी कर दिया और टेंडर बाद में बुलाई। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि मुख्यालय से आदेश जारी है कि वर्मी खाद और नीमखली अनुसंधान एवं विस्तार शाखा से ही खरीदा जाए किंतु विभाग की शाखा से खरीदने पर कमीशन बाजी का खेल नहीं हो पता, इसलिए निविदा कर मार्केट से खरीदी की जा रही है, वह भी डीएफओ के पसंदीदा गगन जैन के फर्म से खरीदने का फरमान है। डीएफओ ने निविदा 15 दिसंबर को बुलवाई और वर्क आर्डर 14 दिसंबर को ही कर दिया। बिल्डिंग मैटेरियल सप्लाई का ऑर्डर भी अचल जैन की फर्म को दिया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि पौधारोपण के कार्य अनुसंधान एवं विस्तार शाखा के द्वारा किया जाता है। मंडल वन मंडल में यह कार्य टेरिटोरियल डीएफओ कर रहे हैं. डीएफओ नित्यानंद ने पश्चिमी वन मंडल के लिए नीम खली गोबर खाद और उपजाऊ मिट्टी सप्लायर का ठेका गगन जैन की फर्म को दिया है। इन सामग्रियों की खरीदी मार्केट दर से कई गुना अधिक है। पश्चिमी वन मंडल में खरीदी का लेखा-जोखा नीम खली 7350 कुंटल गोबर खाद 881 कुंटल उपजाऊ मिट्टी 1742 कुंटल

नये वन भवन के बेचे गये तीन फ्लोर की रजिस्ट्री फिर रोकी.

Registration of the three floors sold in the new government building has been halted again. उदित नारायणभोपाल। राजधानी के तुलसी नगर में बने नये वन भवन के तीन फ्लोर को बेचे जाने के बाद इसकी रजिस्ट्री एक बार फिर रुक गई है। दरअसल इस भवन के तीन फ्लोर कर्मकार कल्याण मंडल, इलेक्ट्रानिक विकास निगम एवं स्टेट माईनिंग कारपोरेशन को करीब 60 करोड़ रुपये में बेचे गये थे ताकि वन भवन को बनाने में लगी भारी भरकम लागत 182 करोड़ रुपये की कुछ भरपाई हो सके। लेकिन 8 अगस्त 2023 को जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उक्त नये भवन का लोकार्पण किया था तब उन्होंने घोषणा कर दी थी कि अगर नवीन वन भवन में जगह की कमी पड़ती है तो पूरा परिसर वन भवन को दे दिया जायेगा। दरअसल सीएम को बताया गया था कि जगह की कमी होने से वन विभाग का जैव विविधता बोर्ड, राज्य बांस मिशन एवं इको पर्यटन बोर्ड नये वन भवन में स्थानांतरित नहीं किया जा सका है। इसी कारण से सीएम ने उक्त घोषणा कर दी थी। लेकिन सीएम की यह घोषणा तत्कालीन मुख्य सचिव इकबाल सिंह ने सीएम घोषणा पोर्टल पर दर्ज नहीं होने दी। इस पर लोक परिसम्पत्ति विभाग जिसने उक्त तीनों फ्लोर की नीलामी कराई थी, ने वन विभाग को पत्र लिख कर कहा है कि वह वन भवन के बेचे गये तीन फ्लोर की रजिस्ट्री करा दे। वन विभाग ने भी वन बल प्रमुख को रजिस्ट्री कराने के लिये पत्र भेज दिया। लेकिन वन बल प्रमुख रमेश गुप्ता ने इनकी रजिस्ट्री यह कहकर रुकवा दी है कि वे उच्च स्तर पर बातचीत कर इन बेचे गये तीन फ्लोर को वापस वन मुख्यालय को दिलवायेंगे। नई सरकार के गठन होने पर यह उच्च स्तरीय बातचीत हो सकेगी।

वन विभाग में मलिक-मकबूजा मद में करोड़ों की वित्तीय अनियमितताएं उजागर

अकेले सीहोर वन मंडल के हिसाब-किताब में 12 करोड़ से अधिक राशि का अंतर। एक वन संरक्षक से मांगा स्पष्टीकरण, जांच की जद में आए कई आईएफएसबाद अन्य IFS पर भी होगी कार्यवाही। उदित नारायण भोपाल। वन विभाग मध्य प्रदेश के वन मंडलों में पदस्थ डीएफओ की घोर लापरवाहीपूर्ण कार्यशैली के कारण बैतूल, हरदा और सीहोर वन मंडल के मालिक-मकबूजा में करोड़ों रुपए की वित्तीय हेर-फेर होने की जानकारी सामने आ रही है। अकेले सीहोर वन मंडल में ही विभागीय राजस्व लेखों के मिलान पर वित्तीय वर्ष 2022-23 में 12 करोड़ 27 लाख 99 हजार 81 रुपए की हेर-फेर हुई है। सीहोर वन मंडल में इस गड़बड़ी का सिलसिला अक्टूबर 2017 से शुरू हुई थी। गौरतलब है कि सीहोर वन मंडल में डीएफओ के पद पर पदस्थ रह चुके कई आईएफएस अफसर जांच की जद में आ रहे हैं। पीसीसीएफ मुख्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों से जानकारी निकल कर सामने आई है कि सीहोर के अलावा बैतूल और हरदा वन मंडल में भी मलिक मकबूजा लेखों में वित्तीय अनियमितता हुई है। सीहोर वन मंडल में हुई वित्तीय हेर-फेर की जांच के लिए मुख्य वन संरक्षक राजेश खरे ने डीएफओ एमएस डाबर की अध्यक्षता में तीन सदस्य जांच कमेटी गठित कर दी है। जांच कमेटी के अध्यक्ष डाबर ने बताया कि 1 महीने के भीतर समिति अपनी रिपोर्ट सौंप देगी।विभागीय सूत्रों के मुताबिक मलिक-मकबूजा मद वित्तीय हेर-फेर का सिलसिला अक्टूबर 2017 से शुरू हुआ था, तब सीहोर डीएफओ के पद पर मनोज अर्गल पदस्थ थे और तब से लेकर अब तक यह सिलसिला चला आ रहा था। इस बीच कई डीएफओ पदस्थ हुए और पदोन्नति होकर मलाईदार पदों पर कार्य करते रहे हैं, ये सिलसिला अभी तक जारी है। विभागीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सीहोर डीएफओ के पद पर सबसे लंबा कार्यकाल वर्तमान खंडवा सीएफ रमेश गनावा का रहा है। वर्तमान पीसीएफ उत्पादन ने इस गड़बड़ी को उजागर किया। पीसीसीएफ मुख्यालय को सभी सीसीएफ को पत्र लिखकर अपने-अपने वन मंडलों में जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे हुई है वित्तीय हेर-फेर 1. सीहोर वन मंडल में 0406 के विभागीय मद के स्थान पर 0408 अन्य विभाग के मद में कराई जा रही थी। 2. लेखा शीर्ष 0406 मद में जमा की जाने वाली राशि पूरे वित्तीय वर्ष 2022-23 में मात्र एक बार बिना किसी गणना के जमा की गई है. यह स्थिति प्रक्रिया अनुसार एवं नियमानुकूल नहीं है। 3. कोषालय से प्राप्त किए गए सब्सिडी डायरी रजिस्टर और साइबर रिसिप्ट रिपोर्ट से विभागीय राजस्व लेखों के मिलान पर वित्तीय वर्ष 2022-23 में रुपए 12 करोड़ 27 लाख 99 हजार 81 रुपए का अंतर परिलक्षित हुआ। 4. सीहोर वन मंडल में मालिक-मकबूजा की राशि जो कि राजस्व प्राप्ति नहीं है, इसको निरंतर राजस्व प्राप्ति के रूप में जमा कर अनियमितता की गई। 5. जितने भी डीएफओ पदस्थ रहे किसी ने भी वन विभाग के स्थान पर राजस्व प्राप्ति किसी अन्य विभाग के मद में जमा कराई जा रही राशि की मॉनिटरिंग नहीं की। अकेले सहाय को नोटिस, अन्य पर कार्रवाई क्यों नहीं सीहोर वन मंडल में यह अनियमितता अक्टूबर 2017 से शुरू हुई। इस वन मंडल में सबसे अधिक कार्यकाल रमेश गनावा का रहा है, किन्तु विभाग ने अकेले अनुपम सहाय को ही कारण बताओं नोटिस जारी किया है। जबकि वहां पर पदस्थ रहे अन्य अफसर से भी स्पष्टीकरण लिया जाना चाहिए लेकिन फिलहाल इस गड़बड़ झाले में अधिकारियों को बचाने के लिए एक बाबू को बलि का बकरा बनाया गया है। गनावा के पास आधा दर्जन से अधिक पदों का प्रभार वन विभाग में रमेश गनावा ऐसे अकेले आईएफएस अधिकारी हैं, जिनके पास आधा दर्जन से अधिक प्रभार दिए गए हैं। वर्तमान में उनकी पदस्थापना खंडवा सर्किल में है। इसके बाद पिछले दिनों बैतूल सीएफ फूलजले के तबादले के बाद वहां का प्रभार भी गनावा को ही दिया गया है। जबकि इसके पूर्व में बैतूल सर्कल में सीएफ का पद रिक्त होने पर प्रभार होशंगाबाद सर्कल में पदस्थ अफसर को दिया जाता रहा है। इसके अलावा उनके पास वर्किंग प्लान ऑफिसर शिवपुरी, वर्किंग प्लान ऑफिसर भोपाल, वन संरक्षक सामाजिक वानिकी बैतूल, और सामाजिक वानिकी खंडवा की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी गई है।

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