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MPPSC ने रद्द की तीन प्रमुख भर्तियां, अभ्यर्थियों को मिलेगा आवेदन शुल्क वापस

भोपाल  मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्रस्तावित जिला विस्तार एवं माध्यम अधिकारी, संचार अधिकारी, और लोक स्वास्थ्य नर्स अधिकारी पदों की भर्ती परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। आयोग ने इन पदों के लिए आवेदन कर चुके अभ्यर्थियों को आवेदन शुल्क लौटाने का निर्णय भी लिया है। शैक्षणिक योग्यता पर उठा विवाद बना रद्दीकरण का कारण इन भर्तियों के लिए निर्धारित की गई शैक्षणिक योग्यता को लेकर प्रदेशभर में अभ्यर्थियों ने विरोध जताया था। खासकर संचार अधिकारी पद के लिए केवल भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से डिप्लोमा की अनिवार्यता पर सवाल उठाए गए। इसे अन्य संस्थानों से पत्रकारिता की पढ़ाई कर चुके उम्मीदवारों के साथ अन्याय बताया गया। विवाद के चलते विभाग की सिफारिश पर आयोग ने भर्ती प्रक्रिया रद्द करने का फैसला लिया है। अब इन पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता की पुनर्समीक्षा की जाएगी और इसके बाद संशोधित अधिसूचना जारी की जाएगी। नर्स अधिकारी पद का विज्ञापन भी रद्द लोक स्वास्थ्य नर्स अधिकारी पद की परीक्षा का विज्ञापन भी रद्द कर दिया गया है। विभाग द्वारा भेजे गए मांगपत्र और आयोग द्वारा जारी विज्ञापन में शैक्षणिक योग्यता को लेकर विरोधाभास पाया गया। यह नियमानुसार नहीं था, इसलिए आयोग ने इस भर्ती को भी निरस्त कर दिया। आवेदन शुल्क वापसी की प्रक्रिया आयोग ने तीनों भर्तियों के लिए आवेदन कर चुके अभ्यर्थियों को शुल्क वापस करने की घोषणा की है। इसके लिए आवेदन ऑनलाइन मोड में करना होगा: जिला विस्तार एवं संचार अधिकारी पद के लिए आवेदन: 🗓 26 जून से 6 जुलाई 2025 तक लोक स्वास्थ्य नर्स अधिकारी पद के लिए आवेदन: 🗓 24 जून से 6 जुलाई 2025 तक

MPPSC 14 विषयों में सहायक प्राध्यापक परीक्षा का पहला चरण 1 जून को

 इंदौर  मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) ने सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा 2024 का पहला चरण 1 जून को रखा है। इसमें 14 विषयों सहित खेल अधिकारी और ग्रंथपाल के पदों के लिए भी परीक्षा करवाई जाएगी। प्रदेश के 10 प्रमुख शहरों में परीक्षा केंद्र बनाए जा रहे हैं। आयोग के अनुसार जिन उम्मीदवारों ने आवेदन किया है, उन्हें अगले सप्ताह से प्रवेश पत्र जारी कर दिए जाएंगे। परीक्षा से जुड़ी गाइडलाइन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध है। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि सभी उम्मीदवारों को परीक्षा शुरू होने से कम से कम एक घंटा पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचना होगा। इससे पहले सभी की चेकिंग की जाएगी, ताकि परीक्षा में कोई बाधा न आए। इस बार परीक्षा दो चरणों में करवाई जा रही है। पहला चरण 1 जून को होगा और दूसरा चरण 27 जुलाई को आयोजित किया जाएगा। पहले चरण में मुख्य रूप से रसायन शास्त्र, भौतिकी, गणित, वनस्पति विज्ञान, प्राणी विज्ञान, हिंदी, अंग्रेज़ी, भूगोल, इतिहास, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, वाणिज्य जैसे विषयों की परीक्षा ली जाएगी। 1930 पदों के लिए होगी भर्ती     प्रदेश के सरकारी कालेजों में शिक्षकों की कमी के चलते इस बार कुल 1930 पदों पर भर्ती की जा रही है।     इन पदों के लिए 70 हजार से ज्यादा उम्मीदवारों ने आवेदन किया है।     सबसे अधिक पद रसायन शास्त्र (199), वनस्पति विज्ञान (190), प्राणी विज्ञान (187), भौतिकी (186) और गणित (177) में हैं।     परीक्षा के माध्यम से 187 खेल अधिकारी और 87 ग्रंथपाल के पदों पर भी भर्ती की जाएगी।     यह पद भी पहले चरण की परीक्षा में शामिल किए गए हैं।     भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, रीवा, सागर, शहडोल, नर्मदापुरम और चंबल में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं।     अधिकारियों के अनुसार उम्मीदवार अगले सप्ताह से प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकेंगे।     साथ ही सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें।     जुलाई में 12 विषयों के लिए परीक्षा दूसरा चरण 27 जुलाई को होगा जिसमें मराठी, उर्दू, संस्कृत साहित्य, सांख्यिकी, कम्प्यूटर एप्लीकेशन, संगीत, वेद, ज्योतिष और योगिक विज्ञान जैसे विषयों के लिए परीक्षा आयोजित की जाएगी।     इन विषयों में कुल 108 पदों के लिए परीक्षा होगी। परीक्षा में प्रश्न पत्र दो भागों में होगा।     पहला भाग सामान्य ज्ञान का होगा जबकि दूसरा भाग संबंधित विषय से जुड़ा होगा।  

HC का आदेश MPPSC प्रारंभिक परीक्षा 2025 का अनुमति के बिना रिजल्ट घोषित ना हो, नोटिस जारी

जबलपुर  MPPSC प्रारंभिक परीक्षा 2025 पर हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच ने एक बड़ा आदेश जारी किया है कोर्ट ने कहा है कि उसकी अनुमति के बिना प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट घोषित न किया जाये, इस मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। कोर्ट ने राज्य सरकार को, एमपीपीएससी को नोटिस जारी किया है और जवाब तलब किया है। दरअसल भोपाल निवासी अभ्यर्थी ममता देहरिया ने राज्य सेवा परीक्षा 2025 में भाग लिया है, अभ्यर्थी द्वारा परीक्षा आवेदन जमा करने के तत्काल बाद हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मध्य प्रदेश राज्य सेवा भर्ती परीक्षा नियम 2015 के नियम 4 (1) (a) (ii), तथा नियम 4 (2) (a) (ii) एवं नियम 4 (3) (a) (ii) की संवैधानिकता सहित सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी सर्कुलर 07/11/2000 तथा लोक सेवा अयोग द्वारा प्रकाशित विज्ञापन दिनांक 31/12/2024 की संवैधानिकता क़ो चुनौती देते हुए उक्त प्रावधानों क़ो भारत के संविधान के अनुच्छेद 14,15,16 तथा 335 एवं लोकसेवा आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा 4-अं, से असंगत तथा असंवैधानिक बताया गया है। याचिका में मप्र सिविल सेवा भर्ती नियम की संवैधानिकता को दी गई है चुनौती याचिका में कहा गया है कि उक्त प्रावधान आरक्षित वर्ग के प्रतिभावान अभ्यर्थियों क़ो छूट लिए जाने के नाम पर उनको अनारक्षित वर्ग में चयन से रोकते है, ममता देहरिया की याचिका पर आज प्रारंभिक सुनवाई मुख्य न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत तथा न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ में हुई, वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर एवं विनायक प्रसाद शाह ने कोर्ट को बताया कि मध्य प्रदेश शासन एक ओर आरक्षित वर्ग को विभिन्न प्रकार की छूट दे रही है वहीं दूसरी ओर छूट प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को मेरिट में उच्च स्थान प्राप्त करने पर भी अनारक्षित वर्ग में चयन न होने का नियम बना दिया गया है, जो सविधान में निहित सामाजिक न्याय की अवधारणा के विपरीत होने के साथ साथ कई संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है। वकील ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट के अनेक न्यायिक दृष्टांत हैं जिनमें स्पष्ट किया गया है, राज्य कोई ऐसा कानून नहीं बना सकती जो आरक्षित वर्ग को उनके संवैधानिक अधिकारों के उपभोग से रोकता हो इसलिए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आरक्षित वर्ग क़ो अनारक्षित वर्ग में चयन से रोकने वाले समस्त प्रावधान असंवैधनिक तथा निरस्त किए जाने योग्य है,  याचिका कर्ता की ओर से दी गई दलीलो क़ो कोर्ट ने गंभीरता से लिया और याचिका को विचारार्थ स्वीकार कर राज्य सरकार और एमपीपीएससी को नोटिस जारी किया,  कोर्ट ने लोक सेवा अयोग क़ो निर्देशित किया कि उक्त विज्ञापन तथा नियमों के अनुसार आयोजित परीक्षाओ के रिजल्ट हाई कोर्ट की अनुमति के बिना घोषित न किए जाए, याचिका पर अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।

MPPSC :असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में एमसीए डिग्री धारकों को कंप्यूटर साइंस विषय के लिए अयोग्य घोषित किया

इंदौर  मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में एमसीए (मास्टर्स ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन) डिग्री धारकों को कंप्यूटर साइंस विषय के लिए अयोग्य करार दिया गया है। इस फैसले से सैकड़ों अभ्यर्थियों में नाराजगी है, क्योंकि राजस्थान, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों में एमसीए को एमएससी कंप्यूटर साइंस के समकक्ष माना जाता है।  अभ्यर्थियों का कहना है कि राज्य पात्रता परीक्षा (सेट) और यूजीसी नेट में कंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशन एक ही विषय के रूप में शामिल है। इन परीक्षाओं में एमसीए और एमएससी, दोनों डिग्रीधारी आवेदन कर सकते हैं, लेकिन एमपीपीएससी की भर्ती में एमसीए को अयोग्य ठहराया गया है। उच्च शिक्षा विभाग की अन्य भर्तियों में सह विषय की सुविधा दी गई है, जिससे संबंधित डिग्री धारक भी आवेदन कर सकते हैं, लेकिन कंप्यूटर साइंस में ऐसी कोई सुविधा नहीं दी गई, जिससे एमसीए अभ्यर्थियों के लिए नौकरी के अवसर सीमित हो गए हैं। … फिर भी भर्ती में रोक वर्तमान में शासकीय और निजी कॉलेजों में एमसीए डिग्रीधारी अतिथि विद्वान के रूप में पढ़ा रहे हैं। एमएससी आइटी और एमएससी कंप्यूटर साइंस वाले भी पढ़ाने की अनुमति रखते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब कॉलेजों में एमसीए डिग्रीधारी को पढ़ाने की अनुमति है तो असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में उन्हें अयोग्य क्यों ठहराया गया? एमसीए को एमएससी कंप्यूटर साइंस के समकक्ष मानें अभ्यर्थियों का कहना है कि एमसीए को एमएससी कंप्यूटर साइंस के समकक्ष माना जाए और भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जाए। यदि एमसीए को भर्ती में पात्रता नहीं दी गई तो वे न्याय के लिए आगे कदम उठाने को मजबूर होंगे। वर्तमान में भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और जून में परीक्षा प्रस्तावित है। ऐसे में जल्द से जल्द निर्णय लिया जाना जरूरी है।

कल 52 जिलों में होगी परीक्षा, 342 सेंटर में आएंगे 1 लाख 18 हजार उम्‍मीदवार, एमपीपीएससी ने की सभी तैयारियां

इंदौर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) ने राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 को लेकर तैयारी पूरी कर ली है। 16 फरवरी रविवार को आयोग ने 52 जिलों में परीक्षा आयोजित की है, जिसमें 1 लाख 18 हजार अभ्यर्थी सम्मिलित होंगे। 342 केंद्रों में दो सत्र में पेपर रखे गए हैं। अकेले इंदौर जिले में 72 सरकारी-निजी कॉलेज व स्कूलों को केंद्र बनाया है। आयोग ने परीक्षा से जुड़ी व्यवस्था के लिए बेहतर संचालन को लेकर सेवानिवृत आईएएस-आईएफएस, पूर्व न्यायाधीश सहित 22 आर्ब्जवर बनाया है। अधिकारियों के मुताबिक केंद्रों पर निरीक्षण के लिए उड़नदस्ते भी बनाए हैं। 1 लाख 18 हजार आवेदन प्राप्त 31 दिसंबर 2024 को आयोग ने परीक्षा को लेकर विज्ञापन निकाला। 18 विभागों में रिक्त 158 पद रखे हैं। परीक्षा के माध्यम से 10 एसडीएम, 22 उप पुलिस अधीक्षक, 10 अतिरिक्त सहायक विकास आयुक्त, 65 बाल विकास परियोजना अधिकारी, 14 वित्त विभाग, 7 सहकारी निरीक्षक सहित पदों पर भर्ती की जाएंगी। आयोग ने सीटों का विभाजन कर दिया है। 38 अनारक्षित, 24 एससी, 48 एसटी, 35 ओबीसी और 13 ईडब्ल्यूएस के लिए सीटें आरक्षित हैं। 17 जनवरी तक आयोग को 1 लाख 18 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं। इंदौर, उज्जैन, धार, झाबुआ, छिंदवाड़ा, शिवपुरी, हरदा, सीहोर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, सतना, सागर सहित 52 जिलों में परीक्षा केंद्र रखे गए है। 16 फरवरी को दो सत्रों में परीक्षा आयोजित होगी। पहला प्रश्न पत्र सुबह 10 से दोपहर 12 बजे के बीच सामान्य अध्ययन और दूसरा प्रश्न पत्र दोपहर 2.15 से 4.15 बजे के बीच सामान्य अभिरुचि परीक्षण का रखा है। न्यायालय के आदेश पर पंजीयन आयोग ने 17 जनवरी को पंजीयन की लिंक बंद कर दी। इसके बाद कुछ अभ्यर्थी आवेदन से वंचित रह गए। उसके बाद उन्होंने न्यायालय की शरण की। अभ्यर्थियों के पक्ष में न्यायालय ने आदेश दिया। फिर आयोग को पंजीयन के लिए दो दिन लिंक खोली। बावजूद इसके अभी कई अभ्यर्थी जो फार्म नहीं भर पाए हैं। इन्होंने आयोग में भी अधिकारियों से गुहार लगाई है। उनका कहना है कि आवेदन के लिए सिर्फ 17 दिन दिए गए थे। जबकि पहले महीनेभर का समय दिया जाता था। कम हुए हैं आवेदक पिछले साल से राज्य सेवा में कम पद निकाले जा रहे हैं। इस वजह से अभ्यर्थियों की संख्या लगातार घटती जा रही है। 2024 में 110 पद भर्तियां निकाली थी, जिसमें 1 लाख 84 हजार आवेदन आए थे। ओएसडी रवींद्र पंचभाई ने बताया कि प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट आने तक पद बढ़ाएं जा सकते है। इसके लिए अभ्यर्थियों को थोड़ा इंतजार करना चाहिए।

MPPSC : 158 पदों के लिए परीक्षा आयोजित, 1.18 लाख अभ्यर्थी शामिल होंगे, नकल रोकने के लिए सख्त निगरानी के इंतजाम

इंदौर  मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 की पूरी तैयारी कर ली है, जो 16 फरवरी को प्रदेश के सभी 52 जिलों में आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा में कुल 1 लाख 18 हजार अभ्यर्थी भाग लेंगे। मुख्य परीक्षा (मेन्स) जून में प्रस्तावित है और इंटरव्यू भी इसी वर्ष आयोजित किए जाने की योजना है। दो पालियों में होगी परीक्षा परीक्षा के लिए इंदौर में 25,700 अभ्यर्थी उपस्थित होंगे, जहां यह दो पालियों में संपन्न होगी। पहली पाली सुबह 10:00 से 12:00 बजे तक होगी, जबकि दूसरी पाली दोपहर 12:15 से 4:15 बजे तक चलेगी। इस बार कुल 158 पदों के लिए परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है, जबकि पिछले वर्ष 2024 में केवल 110 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। पिछली परीक्षा में 1 लाख 84 हजार आवेदन प्राप्त हुए थे, लेकिन वास्तविक परीक्षा में 1 लाख 32 हजार अभ्यर्थियों ने भाग लिया था।   इंदौर में सर्वाधिक 71 केंद्र MPPSC इंदौर के ओएसडी डॉ. आर. पंचभाई के अनुसार, प्रदेशभर में परीक्षा के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। इंदौर में इस परीक्षा के लिए सर्वाधिक 71 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें प्रमुख सरकारी कॉलेज जैसे होलकर साइंस कॉलेज और अटल बिहारी कॉलेज शामिल हैं। आयोग इस वर्ष दिसंबर तक राज्य सेवा परीक्षा 2023, 2024 और 2025 के अंतिम चयन परिणाम घोषित करने की योजना बना रहा है। परीक्षा में नकल रोकने के लिए उड़न दस्तों की तैनाती की गई है, जो अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर निगरानी रखेंगे। साथ ही, प्रश्नपत्र की गोपनीयता सुनिश्चित करने और किसी भी प्रकार की त्रुटियों को रोकने के लिए भी विशेष सतर्कता बरती जाएगी।    

मप्र लोक सेवा आयोग इसी माह खाली पदाें पर अधिसूचना जारी करेगा, 1459 असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर निकलेगी वैकेंसी

इंदौर मध्यप्रदेश के शासकीय कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के खाली पदों पर भर्ती के लिए लोक सेवा आयोग (MPPSC) इसी माह अधिसूचना जारी करने वाला है। इस बार कुल 1459 पदों के लिए भर्ती की जाएगी, जिसमें सबसे ज्यादा 158 पद केमेस्ट्री विषय के हैं। पिछली बार दिसंबर 2022 में आई वैकेंसी में सबसे अधिक 200 पद अंग्रेजी विषय के थे, जबकि इस बार अंग्रेजी में 96 पद उपलब्ध हैं। छह विषयों में केवल एक-एक पद होगा, और कुछ विषयों जैसे लॉ में एक भी पद नहीं है। पिछली बार 1669 पदों के लिए अधिसूचना जारी की गई थी, जबकि इस बार संख्या कम है। अंतिम समय में 150 पद और जोड़े जाने की संभावना है। अंतिम समय में बढ़ सकते हैं पद इस बार लाइब्रेरियन के लिए कोई पद नहीं है, जबकि पिछली बार 255 पद थे। कुल 35 विषयों के लिए पिछली अधिसूचना आई थी, जबकि इस बार 26 विषयों के लिए जारी होगी। स्पोर्ट्स ऑफिसर के 128 पद उपलब्ध हैं, जबकि बायोटेक्नोलॉजी जैसे विषय अभी अधिसूचना में शामिल नहीं हैं, लेकिन अंतिम समय में इन पदों को जोड़ा जा सकता है। प्रोफेसरों के रिटायरमेंट के कारण खाली पदों की संख्या में वृद्धि उच्च शिक्षा विभाग में कुल 12,389 स्वीकृत पद हैं, जिनमें प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, स्पोर्ट्स ऑफिसर और लाइब्रेरियन शामिल हैं। वर्तमान में लगभग 6,823 पदों पर फैकल्टी कार्यरत हैं, जबकि 5,566 पद खाली हैं। इनमें से 2,053 पदों की परीक्षा हो चुकी है और आगामी दिनों में 1,542 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बावजूद लगभग 2,000 पद खाली रह जाएंगे। प्रोफेसरों के रिटायरमेंट के कारण खाली पदों की संख्या में वृद्धि हो रही है। कॉलेजाें में 5566 पद खाली, भर्ती के बाद भी 2 हजार खाली रहेंगे उच्च शिक्षा विभाग के 12 हजार 389 पोस्ट स्वीकृत हैं। इनमें प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, स्पोर्ट्स ऑफिसर, लाइब्रेरियन पद शामिल हैं। वर्तमान में करीब 6823 पद फैकल्टी कार्यरत हैं। करीब 5566 पद खाली हैं। इनमें से 2053 पदों के लिए परीक्षा कराई जा चुकी है। आने वाले दिनों में 1542 पदों के लिए भर्ती आएगी। इसके बाद भी करीब 2 हजार पद खाली रह जाएंगे। प्रोफेसर्स के रिटायरमेंट से पद भी लगातार खाली हो रहे हैं।

सरकारी नौकरी का बड़ा मौका, MP लोक सेवा आयोग ने जारी किया अगले साल होने वाली भर्ती परीक्षाओं का शेड्यूल

इंदौर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) ने अगले साल होने वाली परीक्षा को लेकर शेड्यूल (कार्यक्रम) जारी किया है। फरवरी में राज्य सेवा व वन सेवा परीक्षा और मई में मुख्य परीक्षा होगी। सहायक प्राध्यापक की परीक्षा दो चरणों में करवाई जाएगी। आयोग के मुताबिक अगले कुछ दिन में परीक्षा की तारीखें तय की जाएंगी। ये रहेगा परीक्षा कार्यक्रम राज्य व वन सेवा प्री-2025 16 फरवरी सहायक संचालक उद्यान-2023 मार्च सहायक संचालक संस्कृति-2023 अप्रैल असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती-2024 (15 विषय) मई राज्य सेवा मुख्य-2025 जून (प्रथम सप्ताह) खाद्य सुरक्षा अधिकारी-2024 जून तृतीय सप्ताह सहायक यंत्री-2024 जुलाई पुरालेख अधिकारी-संस्कृति विभाग-2024 जुलाई मुद्राशास्त्री-2024 जुलाईपुरालेखवेत्ता-2024 जुलाई पुरातत्वीय अधिकारी जुलाई सहायक संचालक मत्स्योद्योग अगस्त सहायक अनुसंधान अधिकारी-जनजातीय कार्य सितंबर असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती-2024(12 विषय) अक्टूबर सहायक नियंत्रक (नापतौल) 2024 अक्टूबर एसएससी जीडी फाइनल रिजल्ट पर बड़ा अपडेट एसएससी जीडी फाइनल रिजल्ट 2024 को लेकर बड़ा अपडेट सामने आ गया है। कर्मचारी चयन आयोग ने फाइनल रिजल्ट 2024 को जारी कर दिया गया है। इस रिजल्ट में कुल 39375 पुरुष और 4891 महिलाओं का चयन किया गया है। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रिजल्ट देख सकते हैं। इस रिजल्ट में 845 उम्मीदवारों का रिजल्ट रोका गया है। रिजल्ट जारी होने के बाद कई और प्रोसेस हैं, जिन्हें चयनित उम्मीदवारों को फालो करना है।आगे का यह होगा प्रोसेसएसएससी जीडी फाइनल रिजल्ट में उन सभी उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की गई है, जो लिखित परीक्षा पीईटी, पीएसटी, डीवी, मेडिकल एग्जामिनेशन जैसे चरणों को पास किया है। अब इसके बाद कुछ प्रोसेस और हैं, जिन्हें छात्रों को फालो करके जाइनिंग दी जाएगी। इनमें डाक्युमेंट वेरिफिकेशन शामिल है। उसके बाद चयनित उम्मीदवारों को जाइनिंग दी जाएगी। जाइनिंग के बाद ट्रेनिंग दी जाएगी। डाक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन होगा अगला चरण फाइनल रिजल्ट जारी होने के बाद अब चयनित उम्मीदवारों का वेरिफिकेशन किया जाएगा। जाइनिंग से पहले यह अंतिम चरण होगा, जिससे उम्मीदवारों को फालो करना है। इस प्रोसेस में शैक्षणिक डिग्रियों की जांच की जाएगी। सफलता पूर्वक इस प्रोसेस को पास करने वाले उम्मीदवार ड्यूटी ज्वाइन करेंगे, जिसके बाद उन्हें नौकरी के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी।

सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा का तीसरे चरण संपन्न, रिजल्ट आने के बाद साक्षात्कार की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद

इंदौर सहायक प्राध्यापक परीक्षा में चयनित उम्मीदवारों का साक्षात्कार को लेकर इंतजार खत्म नहीं हो रहा है, क्योंकि मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) की तरफ से अभी तक तारीख तय नहीं हुई है। इसके पीछे कारण यह है कि सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा का तीसरे चरण हालही में संपन्न हुआ है। इसका रिजल्ट आने के बाद साक्षात्कार की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। दिसंबर में आयोग लेगा निर्णय दिसंबर में आयोग परीक्षा-साक्षात्कार के संबंध में बैठक करेंगे। इसके चलते जनवरी से पहले साक्षात्कार के लिए चयनित उम्मीदवारों को नहीं बुलाया जा सकता है। सरकारी कॉलेजों में सहायक प्राध्यापकों के बरसों से पद रिक्त है। आयोग ने दिसंबर 2022 में भर्ती परीक्षा का विज्ञापन निकाला था। 36 विषयों में 1679 पद पर आवेदन बुलाए हैं। इन्हें तीन चरणों में रखा गया। 9 जून को आठ विषय में 826 और 4 अगस्त को आठ विषय में 744 पद रखे। दोनों चरणों में 55 हजार से अधिक उम्मीदवारों ने परीक्षा दी। आयोग ने दोनों चरण का परिणाम नवंबर तक निकाल दिया है। यहां तक कि चयनित उम्मीदवारों से साक्षात्कार के लिए भी शैक्षणिक योग्यता, प्रमाण पत्र सहित अन्य दस्तावेज बुलाए है। 5 दिसंबर से आना शुरू होगी शीट आयोग ने तीसरे चरण में 20 विषय के 109 पद 17 नवंबर को परीक्षा हो चुकी है, जिसमें 3100 में से महज 1200 उम्मीदवारों ने परीक्षा दी। 5 दिसंबर से अलग-अलग विषयों की मॉडल आंसर की जारी होना शुरू होगी। उसके पश्चात आयोग रिजल्ट निकाल सकता है। यह प्रक्रिया दिसंबर तक होने की उम्मीद है। उसके तुरंत बाद चयनित उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए आवेदन करना होगा। कुछ सप्ताह में साक्षात्कार की तारीख तय होगी ओएसडी रवींद्र पंचभाई ने कहा कि अगले कुछ सप्ताह में साक्षात्कार को लेकर तारीख तय होगी। इसके बारे में पोर्टल पर अधिसूचना जारी की जाएगी। दो साल में सिर्फ परीक्षा सहायक प्राध्यापक परीक्षा देने वाले उम्मीदवार नाराज है, क्योंकि दो साल में आयोग सिर्फ लिखित परीक्षा करवाया पाया है। इस दौरान परीक्षा को लेकर न्यायालय में भी प्रकरण पहुंचे थे। देरी का एक यह भी कारण बताया है। फिलहाल आयोग से उम्मीदवारों ने साक्षात्कार जल्द करवाने और शासन से नियुक्तियां देने को लेकर गुहार लगाई है।

एमपीपीएससी ने राज्य सेवा परीक्षा 2025 घोषित कर दी, 16 फरवरी को होंगे पेपर

इंदौर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) ने राज्य सेवा परीक्षा 2025 को लेकर घोषणा कर दी। आयोग ने 16 फरवरी को पेपर रखे है। अभी रिक्त पदों के बारे में संबंधित विभागों से कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। यही वजह है कि आयोग ने खाली पदों का उल्लेख विज्ञापन में नहीं किया है। आयोग ने अगले सात दिनों के भीतर पदों के बारे में पोर्टल पर जानकारी देने की बात कहीं है। अधिकारियों के मुताबिक परीक्षा में आवेदन की प्रक्रिया भी दीपावली बाद शुरू होगी। राज्य सेवा परीक्षा 2022-2023 के साक्षात्कार की प्रक्रिया और राज्य सेवा परीक्षा 2024 का मुख्य परीक्षा का रिजल्ट आना बाकी है। इस बीच आयोग ने अगली परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। जल्दबाजी में आयोग ने राज्य सेवा परीक्षा 2025 की भले ही तारीख घोषित कर दी। मगर रिक्त पदों के बारे में अभ्यर्थियों को जानकारी नहीं दी। आयोग ने 16 फरवरी को दो सत्र में पेपर रखे हैं। भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM इंदौर) ने वैश्विक शिक्षा के विस्तार को लेकर चीन और नार्वे की शैक्षणिक संस्थानों के बीच दो अनुबंध करार किए गए है। इसके माध्यम से इन संस्थानों में विद्यार्थी-फैकेल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम चलाए जा सकेंगे। यहां तक कि संस्थानों में रिसर्च को बढ़ावा दिया जाएगा। खास बात यह है कि एमओयू के चलते संस्थान आपस में संसाधानों का आदान-प्रदान भी कर सकेंगे। नार्वे की क्रिस्टियानिया यूनिवर्सिटी काॅलेज और चीन में सूचो यूनिवर्सिटी के साथ ही समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए है। इंदौर और नार्वे की क्रिस्टियानिया यूनिवर्सिटी कॉलेज में अनुसंधान व कलात्म विकास पर अनुबंध हुआ है, जिसमें निदेशक प्रो. हिमांशु राय और डा. क्रिस्टी बाक ने हस्ताक्षर किए हैं। नार्वे की क्रिस्टियानिया यूनिवर्सिटी कालेज नार्वे की स्थापना 1914 में हुई थी। यह 16 हजार से अधिक छात्रों के साथ अभ्यास-उन्मुख शिक्षण वातावरण प्रदान करता है और विपणन, प्रबंधन, रचनात्मकता और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों पर जोर देता है। डा बाक़ ने कहा कि यह साझेदारी दोनों संस्थानों के लिए अपार संभावनाओं के द्वार खोलती है। दोनों देशों की शैक्षणिक पद्धति और प्रणाली को समझा जा सकेंगे। इसके माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाया जा सकेगा। वे कहते है कि इसे इंडस्ट्री की जरूरत व आवश्यकताओं को समझकर पाठ्यक्रम में संशोधन करेंगे। प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ाएंगे।निदेशक प्रो. राय ने कहा कि सतत विकास और नवीन प्रथाओं में उनके अनुभवों से सीखने के लिए उत्सुक हैं, जो हमारी शैक्षिक पाठ्यक्रमों में भी योगदान देगा। वहीं ज्ञान साझा करने व्याख्यानों और संगोष्ठियां आयोजित होगी। वहीं दोनों संस्थान मिलकर पाठ्यक्रम बनाएंगे। साथ ही दोहरी डिग्री के अवसरों की खोज के माध्यम से शैक्षणिक अनुभवों को समृद्ध करेगा। दूसरे एमओयू पर सूचो यूनिवर्सिटी में बिजनेस स्कूल के डीन प्रो. बो फेंग ने हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा कि उनके मूल मूल्य- प्रामाणिकता, जवाबदेही, प्रशंसा और उन्नति- सामाजिक रूप से जागरूक और अभिनव व्यावसायिक लीडरों को तैयार कर सकेंगे। सहयोग ज्ञान के आदान-प्रदान और संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं के लिए मार्ग बनाकर हमारे छात्रों और शिक्षकों की शैक्षिक यात्रा को समृद्ध बनाएगा।

एमपी पीएससी ने परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों को गाइडलाइन जारी, परीक्षा हॉल में केवल पानी की बॉटल और एक पैन ही ले जा सकते

 इंदौर मध्य प्रदेश लोकसेवा आयोग द्वारा राज्यसेवा मुख्य परीक्षा 2024 आज से शुरू हो गई है। आयोग ने परीक्षा के लिए प्रदेशभर के 11 शहरों में 15 केंद्र बनाए हैं जिनमें से इंदौर में सर्वाधिक पांच केंद्र बनाए हैं। यह परीक्षा एसडीएम, उपपुलिस अधीक्षक, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, अतिरिक्त सहायक विकास आयुक्त, वाणिज्य कर निरीक्षक, आबकारी उप निरीक्षक सहित 110 पद भरे जाने हैं। परीक्षा के लिए आयोग ने विस्तृत गाइडलाइन जारी की है। अभ्यर्थी अपने साथ कोई भी इलेक्ट्रानिक गैजेट न ले जाएं। मुख्य परीक्षा के लिए 3328 का चयन हुआ है प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जुलाई में आया था, जिसमें एक लाख 83 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे। मुख्य भाग में 2775 और प्रावधिक भाग में 553 अभ्यर्थियों को रखा है। मुख्य परीक्षा के लिए कुल 3328 का चयन हुआ। आवेदन करीब 3100 अभ्यर्थियों ने किया। इन शहरों में बनाए गए परीक्षा केंद्र इंदौर, भोपाल, रतलाम, ग्वालियर, सतना, सागर, शहडोल, जबलपुर, छिंदवाड़ा, बड़वानी जिले में परीक्षा केंद्र बनाए हैं। 21 से 26 अक्टूबर के बीच सामान्य अध्ययन के चार, सामान्य हिंदी व व्याकरण और हिंदी निबंध का एक-एक पेपर होगा। यह रहेगी परीक्षा की गाइडलाइन     परीक्षा हाल में किसी भी तरह के गहने, कड़ा और कान की बालियां पहनकर आना वर्जित है।     जूतों के बजाय सैंडल और चप्पल पहनकर आने के लिए कहा गया है।     परीक्षार्थी सिर्फ पानी की एक पारदर्शी बोतल और पेन अपने साथ ले जा सकेगा।     इलेक्ट्रानिक उपकरण और स्मार्ट वाच या किसी भी तरह की घड़ी लाना मना है।     परीक्षा शुरू होने से आधे घंटे पहले अभ्यर्थियों को केंद्र पर पहुंचना होगा।     परीक्षा कक्ष में जाने के पूर्व सभी अभ्यर्थियों की तलाशी होगी।     महिला अभ्यर्थियों की तलाशी पूर्ण गरिमा के साथ महिला अधिकारी/कर्मचारी करेंगी।     केंद्र के 200 मीटर में जिनकी परीक्षा में डयूटी लगी है, उन्हें ही प्रवेश की अनुमति रहेगी।  

MPPSC राज्य सेवा परीक्षा के जरिये भर्ती के घटते पदों को लेकर बेरोजगार युवाओं ने नाराजगी जताई

Meeting of state officials of National Sarpanch Association: Consideration of progress of demands and upcoming strategy.

इंदौर मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) की आयोजित राज्य सेवा परीक्षा के जरिये होने वाली भर्ती के घटते पदों को लेकर बेरोजगार युवाओं ने नाराजगी जताई है। युवाओं की मांग है कि सूबे में बड़ी तादाद में खाली पड़े प्रशासनिक ओहदों के मद्देनजर इस भर्ती के पदों की तादाद को बढ़ाकर कम से कम 500 किया जाना चाहिए जो पिछले पांच सालों में सबसे बड़ी गिरावट के साथ इस बार महज 110 पर सिमट गई है। अधिकारियों ने बताया कि 2019 की राज्य सेवा परीक्षा 571 पदों, 2020 की राज्य सेवा परीक्षा 260 पदों, 2021 की राज्य सेवा परीक्षा 290 पदों, 2022 की राज्य सेवा परीक्षा 457 पदों और 2023 की राज्य सेवा परीक्षा 229 पदों पर भर्ती के लिए आयोजित की गई थी। उन्होंने बताया कि 2024 की राज्य सेवा परीक्षा कुल 110 पदों पर भर्ती के वास्ते आयोजित है जिसके तहत 23 जून को होने वाली प्रारंभिक परीक्षा में 1.83 लाख उम्मीदवार शामिल होंगे। इनमें उप जिलाधिकारी (डिप्टी कलेक्टर) के 15 पद और पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के 22 पद शामिल हैं। इंदौर का भोलाराम उस्ताद मार्ग क्षेत्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों का बड़ा केंद्र है जहां कई कोचिंग संस्थान और छात्रावास संचालित होते हैं। इस क्षेत्र में आकाशदीप (30) अपने परिवार से दूर रहकर पिछले छह साल से राज्य सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कड़े मुकाबले वाली राज्य सेवा परीक्षा के जरिये होने वाली भर्ती के लिए महज 110 पद बेहद नाकाफी हैं। इसमें कम से कम 500 पद तो होने ही चाहिए थे।’’ राज्य सेवा परीक्षा के उम्मीदवारों के अगुवा आकाश पाठक ने कहा, ‘‘हमारी मांग पर एमपीपीएससी ने हमें लोकसभा चुनाव से पहले भरोसा दिलाया था कि वह राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों को पत्र लिखकर सिविल सेवा परीक्षा के तहत भर्ती के पदों की तादाद बढ़ाने की कोशिश करेगा, लेकिन यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारी मांग अब तक पूरी नहीं की गई है।’ पाठक ने दावा किया कि राज्य में दो से तीन लाख सरकारी पद खाली पड़े हैं जिनमें डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी के उच्च प्रशासनिक पद भी शामिल हैं। एमपीपीएससी के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (ओएसडी) रवींद्र पंचभाई ने कहा,‘‘सरकारी विभाग हमसे जितने पदों पर भर्ती के लिए कहते हैं, हम उतने पदों के लिए राज्य सेवा परीक्षा का विज्ञापन जारी करते हैं।’’ उन्होंने हालांकि कहा कि विज्ञापन जारी होने के बाद भी अगर सरकारी विभाग एमपीपीएससी से कुछ और पदों पर भर्ती की मांग करते हैं, तो राज्य सेवा परीक्षा के प्रारंभिक दौर का परिणाम आने से पहले तक इन अतिरिक्त पदों को नियमों के मुताबिक भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है। राज्य सेवा परीक्षा के जरिये होने वाली भर्ती में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण के मसले के कारण लम्बे समय से बड़ा कानूनी पेंच फंसा हुआ है। नतीजतन जितने पदों के इश्तेहार के साथ राज्य सेवा परीक्षा आयोजित की जाती है, उतने पदों पर भर्तियां नहीं हो पा रही हैं। राज्य सेवा परीक्षा के उम्मीदवारों के अगुवा आकाश पाठक ने कहा, ‘‘सरकारी नौकरियों में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने का मुकदमा मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में लम्बित होने का हवाला देते हुए एमपीपीएससी कुल विज्ञापित पदों में से केवल 87 प्रतिशत ओहदों पर भर्ती कर रहा है और बाकी 13 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां अटकी हुई हैं।’’ प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के प्रवक्ता मृणाल पंत ने प्रदेश की भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा, ‘सूबे में राजपत्रित अधिकारियों के हजारों पद खाली पड़े हैं। ऐसे में केवल 110 पदों के लिए राज्य सेवा परीक्षा आयोजित करना उन बेरोजगार नौजवानों के साथ धोखाधड़ी है जो पिछले कई सालों से इसकी तैयारी में जुटे हैं।’  

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