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Maoist Encounter: ₹5 लाख का इनामी माओवादी दंतेवाड़ा-बीजापुर सीमा पर ढेर, हथियारों का जखीरा बरामद

दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों की सीमा से लगे जंगल-पहाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ (Dantewada Maoist encounter) में एक इनामी माओवादी मारा गया। पुलिस ने मौके से हथियार और बड़ी मात्रा में माओवादी सामग्री बरामद की है। घटना के बाद इलाके में सर्चिंग अभियान तेज कर दिया गया है। सर्चिंग अभियान के दौरान हुई मुठभेड़ पुलिस के अनुसार दंतेवाड़ा जिले के थाना गीदम क्षेत्र के अंतर्गत गुमलनार, गिरसापारा और नेलगोड़ा के बीच स्थित जंगल-पहाड़ इलाके में माओवादियों द्वारा हथियार और सामग्री डम्प किए जाने की सूचना मिली थी। इस सूचना के आधार पर डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) और बस्तर फाइटर्स के जवानों की संयुक्त टीम को सर्चिंग अभियान के लिए रवाना किया गया। सुरक्षा बल इलाके में तलाशी अभियान चला रहे थे, इसी दौरान माओवादियों के साथ उनका आमना-सामना हो गया। माओवादियों ने अचानक शुरू की फायरिंग जानकारी के मुताबिक अभियान के दौरान रात करीब 8:30 से 9 बजे के बीच पहले से घात लगाए बैठे भैरमगढ़ एरिया कमेटी के लगभग 8 से 10 सशस्त्र माओवादियों ने अचानक जवानों पर फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई इस गोलीबारी के बाद सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की। कुछ समय तक दोनों ओर से गोलीबारी चलती रही। हालांकि सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दौरान माओवादी घने जंगल का फायदा उठाकर मौके से भागने में सफल हो गए। मुठभेड़ के बाद तलाशी में मिला माओवादी का शव मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके में सर्चिंग अभियान चलाया। तलाशी के दौरान घटनास्थल से एक पुरुष माओवादी का शव बरामद किया गया। इसके अलावा वहां से हथियार और बड़ी मात्रा में माओवादी सामग्री भी जब्त की गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बरामद सामग्री से माओवादी गतिविधियों से जुड़े कई अहम सुराग मिलने की संभावना है। राजेश पुनेम के रूप में हुई पहचान पुलिस ने मृत माओवादी की पहचान राजेश पुनेम के रूप में की है। वह भैरमगढ़ एरिया कमेटी (एसीएम) का सक्रिय सदस्य बताया गया है। राजेश पुनेम बीजापुर जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के बुरजी गांव का निवासी था। उस पर शासन की ओर से 5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। जंगलों में सर्चिंग अभियान जारी पुलिस अधिकारियों के अनुसार मुठभेड़ के बाद आसपास के जंगलों में अन्य माओवादियों की तलाश के लिए सर्चिंग अभियान जारी है। सुरक्षा बल लगातार क्षेत्र में अभियान चलाकर माओवादी नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में कार्रवाई कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है और जवानों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी जीत, 21 लाख के इनामी माओवादी सुखराम ने किया आत्मसमर्पण

जगदलपुर नक्सल मोर्चे पर ओडिशा पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से सक्रिय 21 लाख रुपए के इनामी माओवादी सुखराम मरकाम उर्फ योगेश उर्फ सुरेश ने हथियार डाल दिया है। यह आत्मसमर्पण ओडिशा के मलकानगिरी जिले में किया गया, जहां सुरक्षा बलों के सामने माओवादी ने सरेंडर किया। आत्मसमर्पण के दौरान सुखराम मरकाम के पास से एक SLR राइफल के साथ विस्फोटक सामग्री भी बरामद की गई है। सुखराम मरकाम माओवादी संगठन में ACM रैंक का सक्रिय कैडर बताया जा रहा है। वह वर्ष 2010 से माओवादी संगठन से जुड़ा हुआ था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार सुखराम कई नक्सली घटनाओं में शामिल रहा है। माओवादी सुखराम मरकाम मूल रूप से छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का निवासी है। उसके खिलाफ अलग-अलग राज्यों में गंभीर नक्सली मामले दर्ज थे। लगातार दबाव और सघन ऑपरेशन के चलते माओवादी सुखराम ने आत्मसमर्पण का रास्ता चुना। मलकानगिरी एसपी विनोद पाटिल का कहना है कि यह नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी उपलब्धि है। आत्मसमर्पण से माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। सुरक्षा बलों को उम्मीद है कि आगे भी अन्य माओवादी मुख्यधारा में लौटेंगे।

सुरक्षाबलों को बालाघाट में बड़ी कामयाबी ग्रेनेड लॉन्चर चलाने में एक्सपर्ट माओवादी रवि को मुठभेड़ में मार गिराया

बालाघाट   महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ राज्य के दम पर मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में अपनी पहचान बचाने में जुटे माओवादियों को बालाघाट पुलिस, सीआरपीएफ, कोबरा व हॉक की टीम ने बड़ा झटका दिया हैं। दरअसल, रुपझर थाना क्षेत्र के पचामा दादर व कटेझिरिया के जंगल में हुई मुठभेड़ में पुलिस ने जिन चार माओवादियों को मार गिराया है। उन माओवादियों में मारा गया पुरुष माओवादी रवि न सिर्फ पुराना कैडर था बल्कि वह एसीएम रैंक तक पहुंच गया और वह ग्रेनेड लॉन्चर चलाने में भी एक्सपर्ट था। मलाजखंड डीवीसीएम को पत्नी की मौत के रुप में मिला झटका पुलिस की कार्रवाई माओवादियों को न सिर्फ रवि के रुप में झटका दे गई है बल्कि मलाजखंड दलम के डीवीसीएम को भी बड़ा झटका दे गई है। मारी गई एसीएम रैंक की महिला माओवादी रीता मलाजखंड दलम के डीवीसीएम चंदू की पत्नी है। जंगल में पुलिस की 20 अलग-अलग टीम में शामिल 600 जवान बचे हुए मलाजखंड दलम के माओवादियों की तलाश में जुटे हैं। क्योंकि पुलिस को उम्मीद है कि मुठभेड़ में चार माओवादियों के मारे जाने के अलावा कुछ माओवादी घायल हुए है, वे उपचार कराने किसी गांव के नजदीक पहुंच सकते हैं। साथ ही बचे 30-35 माओवादियों में बड़े माओवादी चंदू सहित अन्य माओवादी जंगल में मौजूद हो सकते हैं। दो राज्यों से लगा बालाघाट, घना भी हैं जंगल मुठभेड़ को लेकर बालाघाट जोन के पुलिस महानिरीक्षक संजय सिंह ने बताया कि 2007 से बालाघाट जिला को कोई व्यक्ति दलम में शामिल नहीं हुआ है। महज दीपक सहित दो अन्य माओवादी है, जो स्थानीय है। इन्हीं की मदद से छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र से माओवादी बालाघाट पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया बालाघाट दो राज्यों से लगा हुआ है और घने जंगल से घिरा हुआ है। ऐसे में माओवादी अलग-अलग स्थानों से प्रवेश कर रहे हैं और ऐसी उम्मीद है कि बस्तर व महाराष्ट्र में लगातार हो रही कार्रवाई के चलते माओवादी जंगलों के रास्तों से बालाघाट आ रहे हैं। इस बात को ही ध्यान में रखते हुए और दो स्थानों पर चौकियां खोलने का प्लान पुलिस बना रही है। आत्म समर्पण करें माओवादी- पुलिस महानिरीक्षक पुलिस महानिरीक्षक ने कहा कि जिले के माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में लगातार विकास कार्य कराए जा रहे है और वहां के ग्रामीणों को मुख्य धारा से जोड़ा जा रहा है। स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार समेत अन्य संसाधन भी उपलब्ध हो रहे हैं। माओवादी बिना किसी कारण के ही ग्रामीणों को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। जिसमें वे अब सफल भी नहीं हो पा रहे है। माओवादियों को चाहिए कि जंगल में अनावश्यक भटकने के बजाय वे लोग जिला प्रशासन, डाक विभाग, जनप्रतिनिधि किसी के सामने भी आत्म समर्पण कर सकते हैं। क्योंकि मध्य प्रदेश की आत्म समर्पण नीति अन्य राज्यों की तुलना बहुत अच्छी है। मार्च 2026 तक कर देंगे माओवाद का पूर्ण खात्मा पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा, सीआरपीएफ, हॉक और कोबरा के अधिकारियों ने कहा कि देश के गृहमंत्री ने मार्च 2026 तक माओवाद को पूर्ण रुप से समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। हमें पूरा भरोसा है कि इस अवधि में हम अपने काम शत प्रतिशत कर सकेंगे। क्योंकि सभी विंग एक दूसरे से आपसी सामंजस्य बैठाकर काम कर रही है। इस बात का सबसे सटीक उदाहरण पचामा दादर, कटेझिरिया के जंगल में माओवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में सफलता मिली। क्योंकि जंगल में नेटवर्क नहीं मिलता है। बावजूद इसके बेहतर आपसी तालमेल के कारण माओवादियों को मार गिराने में सफलता हाथ लगी है। मुठभेड़ को लेकर जानकारी देने के दौरान डीआईजी मुकेश कुमार श्रीवास्तव, सीआरपीएफ, हॉक, कोबरा के अधिकारियों के अलावा बैहर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आदर्शकांत शुक्ला सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। तीन महिला समेत चार नक्सलियों का एनकाउंटर बालाघाट में पुलिस ने एक मुठभेड़ में तीन महिला समेत चार नक्सलियों को मार गिराया है। मुठभेड़ शनिवार दोपहर में बिठली पुलिस चौकी क्षेत्र के पचामा दादर के जंगल में हुई। हॉक फोर्स और जिला पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में यह सफलता मिली। बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा ने बताया कि- जीआरबी डिवीजन के नक्सलियों के एक समूह की मौजूदगी के बारे में पता चला था। इसके बाद हॉकफोर्स, जिला पुलिस बल और सीआरपीएफ, सर्च ऑपरेशन चला रही थी। इसी दौरान सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने और उनके हथियार लूटने की मंशा से नक्सलियों ने जंगल में सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षाबलों ने जवाबी फायरिंग की। इसमें 4 हार्डकोर नक्सलियों को मार गिराया गया है। मुठभेड़ में कुछ नक्सली घायल नक्सलियों के पास से एक ग्रेनेड लॉन्चर, एसएलआर राइफल, दो .315 राइफल, गोलाबारूद, वॉकी-टॉकी सेट और नक्सल साहित्य बरामद किया है। मुठभेड़ के दौरान कुछ नक्सली के घायल होने की खबर है, जो घने जंगल का फायदा उठाकर भाग गए हैं। नक्सलियों की तलाशी के लिए हॉकफोर्स, सीआरपीएफ और जिला पुलिस बल के 600 से ज्यादा जवानों को क्षेत्र में बड़े स्तर पर सर्चिंग अभियान में भेजा गया है। सीएम बोले- पुलिसकर्मियों को करेंगे पुरस्कृत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बालाघाट में आज मुठभेड़ में 4 नक्सलियों को मार गिराया गया है। जिसमें 3 महिलाएं और 1 पुरुष शामिल हैं। उनके पास से कई हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए हैं। प्रदेश सरकार इस घटना में अच्छे परिणाम लाने वाले पुलिसकर्मियों को जरूर पुरस्कृत करेगी। फरवरी में 4 महिला नक्सली मारी गई थीं इससे पहले 19 फरवरी को भी बालाघाट पुलिस को बड़ी सफलता मिली थी। कान्हा के वनक्षेत्र सूपखार में रौंदा फारेस्ट कैंप के पास हुई मुठभेड़ में 4 महिला नक्सली मारी गई थीं। इनमें आशा, शीला, रंजीता और लख्खे मरावी शामिल थीं। इन पर कुल 62 लाख रुपए का इनाम था। ये 2015-16 से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय थीं। बालाघाट में पुलिस मुठभेड़ में ढेर नक्सलियों की हुई पहचान, चारों 14-14 लाख के इनामी  बालाघाट जिले में रूपझर थाना क्षेत्र अंतर्गत पचामा दादर-कटे झिरिया के जंगल में शनिवार को मारे गए चार नक्सलियों पहचान हो गई है। इन पर 14-14 लाख रुपये का इनाम घोषित था। हॉकफोर्स, जिला पुलिस बल, कोबरा और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने सर्चिंग अभियान के दौरान शनिवार को चारों नक्सलियों को मार गिराया था। बालाघाट के आईजी संजय कुमार ने रविवार क बताया कि शनिवार को जिला बल, हॉकफोर्स और सीआरपीएफ जवानों व माओवादियों के बीच … Read more

माओवादियों के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन को तत्काल रोककर उनके साथ शांति वार्ता शुरू की जाए और सीजफायर की घोषणा की जाए- महेश कुमार

हैदराबाद 22 मई को माओवादियों के साथ मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) के महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ ​​बसवराजू को मार गिराया था। यह नक्सलवाद के खिलाफ बहुत बड़ी सफलता मानी जा रही है। इसके बाद, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दोहराया कि 31 मार्च, 2026 तक देश से नक्सलवाद का खात्मा हो जाएगा। हालांकि तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के अध्यक्ष बी. महेश कुमार गौड़ ने केंद्र सरकार से माओवादियों के साथ शांति वार्ता शुरू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि माओवादी देश के अपने नागरिक हैं, जो गरीबों और सामाजिक अन्याय के खिलाफ लड़ रहे हैं। गौड़ ने केंद्र सरकार से अपील की है कि माओवादियों के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन को तत्काल रोककर उनके साथ शांति वार्ता शुरू की जाए और सीजफायर की घोषणा की जाए। कांग्रेस शासित तेलंगाना के अध्यक्ष का कहना है कि सरकार को माओवादियों का सफाया करने के लिए कठोर कदम नहीं उठाने चाहिए, बल्कि उनसे “कानूनी और संवैधानिक तरीकों” से निपटना चाहिए। “सरकार शांति वार्ता करने में क्यों हिचकिचा रही है?” इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में तेलंगाना कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “जीवन का अधिकार एक मौलिक अधिकार है। जीवन के अधिकार पर अंकुश लगाने का अधिकार किसी को नहीं है। ऑपरेशन कगार के संबंध में क्या हो रहा है? कांग्रेस आतंकवाद का समर्थन नहीं करेगी, चाहे वह नक्सलियों की तरफ से हो या सरकार की तरफ से। कांग्रेस पार्टी का मूल सिद्धांत अहिंसा है। अब, मेरा केंद्र सरकार से अनुरोध है कि वह शांति वार्ता के लिए आगे बढ़े, क्योंकि जो भी व्यक्ति आत्मसमर्पण करने, अपने हथियार डालने और मुख्यधारा में शामिल होने के लिए तैयार है, उसे ऐसा करने का अवसर दिया जाना चाहिए। सरकार शांति वार्ता करने में क्यों हिचकिचा रही है?” उन्होंने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा, “जंगलों के अंदर बहुत से नागरिक हैं, जंगलों के अंदर नागरिक आदिवासी हैं, माओवादियों को काबू करने के लिए हज़ारों सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। क्या होगा अगर हम गोलीबारी या मुठभेड़ में नागरिकों को खो दें?” “नक्सली हमारे अपने नागरिक हैं” कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आगे कहा कि जब पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ तो कांग्रेस इसका समर्थन करने वाली पहली पार्टी थी, मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी समेत हमारे नेताओं ने पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध का समर्थन किया। लेकिन अचानक सरकार ने युद्ध विराम की घोषणा कर दी। हम इस युद्ध विराम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भागीदारी का कड़ा विरोध करते हैं क्योंकि यह एक द्विपक्षीय मुद्दा था। लेकिन…उन्हें (सरकार को) हमारे अपने नागरिकों के साथ शांति वार्ता करने में समस्या है। नक्सली हमारे अपने नागरिक हैं, हालांकि उन्होंने एक अलग रास्ता और विचारधारा अपना ली है। आखिरकार, वे गरीबों के लिए लड़ रहे हैं। यही कारण है कि हम केंद्र से माओवादियों के साथ शांति वार्ता करने का आग्रह कर रहे हैं।” “कांग्रेस माओवादियों की हिंसक राजनीति के खिलाफ” उन्होंने कहा, “जब कांग्रेस (तत्कालीन अविभाजित) आंध्र प्रदेश में सत्ता में थी, तब हमारे तत्कालीन मुख्यमंत्री मर्री चेन्ना रेड्डी और वाईएस राजशेखर रेड्डी ने नक्सलियों के साथ शांति वार्ता की थी। काफी हद तक ये वार्ता सफल रही। कई नक्सली तब खुले तौर पर मुख्यधारा में शामिल हो गए थे, अपने हथियार डाल दिए थे और अभी शांतिपूर्ण जीवन जी रहे हैं।” हालांकि उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस माओवादियों की हिंसक राजनीति के खिलाफ है। उन्होंने कहा, “हम अभी भी उन्हें आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा मानते हैं। मैं उन नक्सलियों द्वारा की गई हत्याओं का समर्थन नहीं कर रहा हूं जो चरमपंथी हैं। मैं खुद नक्सलियों का शिकार हूं क्योंकि मैंने अपनी संपत्ति खो दी और मेरे पिता पर 1989 में नक्सलियों ने जानलेवा हमला किया था। अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई। लेकिन जब माओवादी शांति वार्ता का अनुरोध करते हैं, तो हमें इस पर विचार करना चाहिए क्योंकि जीवन को बचाया जाना चाहिए। नक्सलवाद असमानता का प्रोडक्ट था – देश के एक प्रतिशत अमीरों के पास देश की लगभग 40% संपत्ति है और दलितों के पास केवल 3% संपत्ति है।” गौरतलब है कि नक्सलियों और उनकी माओवादी विचारधारा को खत्म करने के लिए भारत सरकार ने ऑपरेशन कगार शुरू किया है। जिसके तहत भारत सरकार नक्सलवाद के खिलाफ अपने अभियानों को और तेज कर दिया है। छत्तीसगढ़ के सुकमा और लातेहार जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के कई ठिकानों को ध्वस्त किया है। ऑपरेशन के तहत कर्रेगुट्टा पहाड़ी क्षेत्र में हजारों सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि सरकार नक्सलियों को हथियार छोड़ने और मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, साथ ही सख्त कार्रवाई भी जारी रखेगी।

बीजापुर में नेशनल पार्क मुठभेड़ में 2 नक्सली ढेर, अब तक 4 नक्सली ढेर, टॉप कमांडर भास्कर भी मारा गया, हथियार बरामद

 बीजापुर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के नेशनल पार्क क्षेत्र में दो दिन से जारी अभियान में सुरक्षा बलों ने 45 लाख रुपये के इनामी तेलंगाना स्टेट कमेटी सदस्य व मंचेरियल कोमाराम भीम (एमकेबी) सचिव भास्कर उर्फ माइलारापु अडेल्लु (45) को मार गिराया है। छत्तीसगढ़ में उस पर 25 लाख व तेलंगाना में 20 लाख का इनाम घोषित था। वह तेलंगाना के आदिलाबाद जिले के उरुमादला का रहने वाला था। मुठभेड़ स्थल से जवानों ने एके-47 असाल्ट राइफल व विस्फोटक भी बरामद किए हैं। शुक्रवार देर रात तक चली मुठभेड़ में 2 और नक्सली मारे जाने की खबर है. मौके से ऑटोमैटिक हथियार बरामद हुए हैं. इससे पहले शुक्रवार को 25 लाख के इनामी नक्सली भास्कर और एक करोड़ के इनामी सुधाकर मारे जा चुके हैं. यानी अब तक इस ऑपरेशन में चार नक्सली, जिनमें दो टॉप कमांडर भी शामिल हैं, मारे जा चुके हैं. इस ऑपरेशन को DRG, STF और कोबरा बटालियन मिलकर अंजाम दे रही हैं. यह वही इलाका है जिसे कभी नक्सलियों का अभेद्य किला माना जाता था, लेकिन अब वही इलाका उनके लिए मौत का मैदान बनता जा रहा है. इंद्रावती नेशनल पार्क, जो करीब 2799 वर्ग किमी में फैला है, उसमें अब छिपने की जगह भी नहीं बची. पार्क का कोर जोन 1258 वर्ग किमी और बफर जोन 1540 वर्ग किमी में फैला है, लेकिन ड्रोन, सेटेलाइट और पैदल गश्त के दम पर जवानों ने हर कोने को कवर कर रखा है. जानकारी के अनुसार, जंगल में अभी भी 25 से 30 हार्डकोर नक्सली फंसे हुए हैं. वे इधर-उधर छिपने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फोर्स लगातार उन्हें ट्रैक कर रही है. ऐसा माना जा रहा है कि अगले 2-3 दिनों में और मुठभेड़ हो सकती है और यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है. बस्तर के माड़ क्षेत्र के बाद अब नेशनल पार्क में नक्सलियों की ताकत लगातार कमजोर हो रही है. एक समय जो जगह रेड कॉरिडोर का दिल मानी जाती थी, वहां अब भारत के जवानों का कंट्रोल बनता जा रहा है. कल भी मारा गया एक ईनामी नक्सली एक दिन पहले गुरुवार को इसी क्षेत्र में 40 लाख रुपये के इनामी केंद्रीय समिति सदस्य (सीसीएम) माओवादी सुधाकर को भी मुठभेड़ में ढेर कर दिया गया था। दो दिन के अंदर दो बड़े माओवादी आतंकियों के मारे जाने से माओवादियों को बड़ा झटका लगा है। डीआरजी और एसटीएफ ने चलाया संयुक्त ऑपरेशन सुधाकर की मौजूदगी की पक्की सूचना मिलने के बाद जिला रिजर्व गार्ड (DRG) और विशेष कार्य बल (STF) की संयुक्त टीम ने शुक्रवार को नेशनल पार्क इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। सघन जंगल और कठिन इलाके में हुई इस मुठभेड़ के दौरान सुरक्षा बलों ने बेहद सूझबूझ और रणनीतिक तरीके से कार्रवाई करते हुए सुधाकर को मार गिराया। इस अभियान में कई आधुनिक हथियार और दस्तावेज भी बरामद हुए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। बसव राजू के मारे जाने के बाद भगदड़ की स्थिति पिछले महीने 21 तारीख को नक्सल इतिहास की सबसे बड़ी सफलता फोर्स को मिली। अबूझमाड़ के जंगल में नक्सलियों का चीफ और सेंट्रल कमेटी का महासचिव बसव राजू ढेर कर दिया गया। उसके साथ 27 अन्य नक्सली भी मारे गए थे। बसव राजू के मारे जाने के बाद से नक्सल संगठन में भगदड़ की स्थिति है। नक्सली जिस भी इलाके में मूवमेंट कर रहे हैं वे फोर्स के निशाने पर आ जा रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने की खोजबीन पुलिस के अनुसार अबूझमाड़ व इंद्रावती टाइगर रिजर्व (आईटीआर) क्षेत्र में शीर्ष माओवादी तेलंगाना राज्य समिति बांदी प्रकाश व दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य (डीकेएसजेडसी) पप्पा राव समेत अन्य माओवादियों के छिपे होने की सूचना पर डिस्टि्रक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी), स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) व कोबरा बटालियन के जवानों को अभियान पर भेजा गया था। इस दौरान गुरुवार को सुरक्षा बलों का सामना माओवादियों की एक टुकड़ी से हुआ था। जवाबी फायरिंग में शीर्ष माओवादी सुधाकर मारा गया था। इसके दूसरे दिन शुक्रवार को भाग रहे माओवादियों का पीछा करते हुए जवानों ने एक अन्य शीर्ष माओवादी को मार गिराया है। मुठभेड़ में कई अन्य माओवादियों के मारे जाने की बात कही जा रही है। सात माओवादियों ने किया समर्पण सुरक्षा बलों की ओर से जारी आक्रामक अभियान व सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित सात माओवादियों ने शुक्रवार को दंतेवाड़ा में समर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है। इनमें जुगलू, दशा, भोजाराम माड़वी, लखमा उर्फ सुती, रातू उर्फ ओठे कोवासी, सुखराम पोडि़याम, पंडरुराम पोडि़याम शामिल हैं।  

कोंडागांव में पुलिस अधिकारियों पर हमले का आरोपी नक्सली और उसकी पत्नी ने आत्मसमर्पण किया

 कोंडागांव छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में शुक्रवार को 16 लाख रुपए के इनामी नक्सली दंपत्ति ने सुरक्षाकर्मियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. इसमें पुरुष नक्सली साल 2009 में राजनांदगांव में हुए नक्सल हमले में शामिल था, जिसमें 29 पुलिसकर्मी मारे गए थे. इसके साथ ही पुलिस ने नारायणपुर जिले में दो नक्सलियों को भी गिरफ्तार किया है. उनके पास से भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद किया गया है. कोंडागांव के पुलिस अधीक्षक वाई अक्षय कुमार ने बताया कि रायसिंह कुमेटी उर्फ ​​रतनसिंह कुमेटी (35) और उसकी पत्नी पुनाय अचला उर्फ ​​हिरोंडा (34) ने खोखली माओवादी विचारधारा से निराश होकर आत्मसमर्पण कर दिया. कुमेटी माओवादियों के प्रतिबंधित संगठन की कंपनी नंबर 5 के तहत वरिष्ठ कैडर के रूप में सक्रिय था, जबकि उसकी पत्नी इसकी सदस्य थी. दंपति पर 8-8 लाख का इनाम था. एसपी ने बताया कि कुमेटी साल 2003 से 2011 के बीच माओवादी हिंसा की कई घटनाओं में शामिल था. इसमें राजनांदगांव में घात लगाकर किया गया हमला भी शामिल है, जिसमें तत्कालीन पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार चौबे सहित 29 पुलिसकर्मी मारे गए थे. उन्होंने बताया कि वह 2011 में गरियाबंद जिले में पुलिस कर्मियों के काफिले पर घात लगाकर किए गए एक अन्य हमले में भी शामिल था. इसमें तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश पवार सहित 9 पुलिसकर्मी मारे गए थे. उन्होंने बताया कि कुमेटी और उसकी पत्नी कोंडागांव, कांकेर, राजनांदगांव, गरियाबंद, धमतरी, नारायणपुर और राज्य के अन्य जिलों में अन्य गंभीर नक्सली घटनाओं में भी शामिल थे. वे राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से भी प्रभावित थे. उनको 50-50 हजार रुपए की सहायता राशि दी गई है. इस बीच, नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने बताया कि नक्सल विरोधी अभियान के दौरान ओरछा थाना क्षेत्र के कोडोल, छोटेपालनार और रेंगाबेड़ा गांवों के बीच जंगल में सुरक्षाकर्मियों ने दो नक्सलियों कोंडाराम उसेंडी (35) और करंजे उसेंडी (40) को गिरफ्तार किया है. सुरक्षा बलों ने उनके पास से दो डेटोनेटर, एक प्रेशर कुकर, बिजली का तार समेत अन्य सामान जब्त किया है.  

मार्च 2026 तक पूरा प्रदेश नक्सल मुक्त होगा, सरकार और जवान नक्सलियों के सामने शक्ति से कार्रवाई कर रहे : मंत्री तोखन साहू

रायपुर  छत्तीसगढ़ में सबसे बड़ा एंटी नक्सल ऑपरेशन 8 वें दिन भी जारी है। नक्सलियों के बड़े लीडरों को जवानों ने कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों में घेर रखा है। इस मुठभेड़ में फ़ोर्स को बड़ी सफलता मिलने की उम्मीद है। इस बीच नक्सलवाद के खात्मे को लेकर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने बड़ा बयान दिया है। केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद खात्मे की ओर है, लेकिन कुछ नेता और दल माओवाद को सपोर्ट करने में लगे हैं। तेलंगाना की एक पार्टी ऑपरेशन रोकने की अपील कर रही है। लेकिन केंद्रीय अमित शाह ने टारगेट तय कर दिया ऑपरेशन रुकेगा नहीं। मार्च 2026 तक पूरा प्रदेश नक्सल मुक्त होगा। सरकार और जवान नक्सलियों के सामने शक्ति से कार्रवाई कर रहे हैं। कांग्रेस के संविधान बचाओ रैली पर बोला केंद्रीय राज्य मंत्री का हमला केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कांग्रेस के संविधान बचाओ रैली पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी ने संविधान की हत्या की है। भाई भतीजा वाद करने वाले संविधान की बात क्या करेंगे। प्रदेश में प्रदर्शन करने भ्रमित करने कांग्रेस पार्टी आती है। कांग्रेस के सिर्फ नेताओं की सक्रियता सिर्फ प्रदर्शन करने के लिए दिखती है। कांग्रेस के मन में सेवा भाव नहीं है। बता दें कि तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की सीमा कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों ने बड़ी संख्या में जवानों ने डेरा डाला हुआ है। हेलीकॉप्टर से इलाके की निगरानी रखी जा रही है। यहां नक्सलियों के बड़े लीडरों के होने की आशंका है। जिसके मद्देनजर फ़ोर्स ने भी पूरी तैयारी के साथ घेराबंदी कर ली है। फिलहाल तीन महिला नक्सलियों के शव बरामद कर लिए गए हैं, जिन पर 8-8 लाख का इनाम घोषित था। 

छत्तीसगढ़ का कोर नक्सली इलाका आतंक से मुक्त…आखिरी नक्सलियों ने किया सरेंडर

 सुकमा सरकार और जवानों को एक बड़ी सफलता मिली है। सुकमा जिले का कोर नक्सली इलाका बड़ेसट्टी गांव अब नक्सल मुक्त हो गया है। आखिरी 11 नक्सलियों ने भी आत्मसमर्पण कर लिया है। बता दें कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ से वादा किया था कि मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ और देश से नक्सलवाद खत्म कर देंगे। 11 नक्सलियों किया सरेंडर बड़ेसट्टी गांव के सक्रिय अंतिम 11 नक्सलियों ने सरकार के सामने हथियार डाल दिए हैं। वहीं इस जिले में 22 नक्सलियों ने भी सरेंडर किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सुरक्षा बल के जवानों और छत्तीसगढ़ पुलिस को बधाई दी है। गृह मंत्री ने छिपे हुए नक्सलियों से अपील की कि वे मोदी सरकार की आत्मसमर्पण नीति को अपनाकर यथाशीघ्र हथियार डालें और मुख्यधारा में शामिल हों। उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2026 से पहले हम देश को नक्सलवाद के दंश से मुक्त करने के लिए संकल्पित हैं। यथाशीघ्र हथियार डालें नक्सली – गृहमंत्री अमित शाह केन्द्रीय गृह मंत्री ने ‘X’ पर पोस्ट में कहा कि छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में विभिन्न ऑपरेशन्स में कोबरा कमांडो और छत्तीसगढ़ पुलिस ने 22 कुख्यात नक्सलियों को आधुनिक हथियारों और विस्फोटक सामग्रियों के साथ गिरफ्तार किया है। उन्होंने कहा कि सुकमा में 33 नक्सलियों ने सरेंडर कर मोदी सरकार की आत्मसमर्पण नीति पर विश्वास जताया है। ‘छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत पुनर्वास नीति-2025’ के अंतर्गत ‘नक्सली इलवद पंचायत योजना’ के तहत ग्राम पंचायत बड़ेसट्टी के कुल 11 सक्रिय माओवादियों ने शुक्रवार को सामूहिक सरेंडर किया, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। सरेंडर करने वालों में तीन पुरुष और एक महिला नक्सली पर दो-दो लाख रुपये तथा एक पुरुष नक्सली पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था। इस तरह इस गांव से कुल 8 लाख 50 हजार रुपये का इनामी नक्सली सरेंडर कर चुके हैं। अमित शाह ने सभी छिपे हुए नक्सलियों से की सरेंडर की अपील भाषा के मुताबिक, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को सभी अंडरग्राउंड नक्सलियों से जल्द सरेंडर करने और मुख्यधारा में शामिल होने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार 31 मार्च 2026 से पहले देश को नक्सलवाद के अभिशाप से मुक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। अमित शाह ने कहा कि कोबरा कमांडो और छत्तीसगढ़ पुलिस ने राज्य के बीजापुर जिले में संचालित विभिन्न अभियानों में आधुनिक हथियारों और विस्फोटक सामग्री के साथ 22 कुख्यात नक्सलियों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने कहा कि सुकमा के बड़ेसट्टी पंचायत में 11 नक्सलियों ने सरेंडर किया है, जिससे यह पंचायत पूरी तरह नक्सल-मुक्त हो गई है। शाह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी एक पोस्ट में कहा, ‘‘छिपे हुए नक्सलियों से मेरी अपील है कि मोदी सरकार की सरेंडर नीति को अपनाकर यथाशीघ्र हथियार डालें और मुख्यधारा में शामिल हों। 31 मार्च 2026 से पहले हम देश को नक्सलवाद के दंश से मुक्त करने के लिए संकल्पित हैं।’’ गृहमंत्री ने मध्य प्रदेश के नीमच में सीआरपीएफ के स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि नक्सलवाद अब भारत के सिर्फ चार जिलों तक सीमित रह गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि 31 मार्च 2026 तक देश से यह समस्या समाप्त हो जाएगी। सीएपीएफ (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) और सीआरपीएफ, विशेषकर इसकी कोबरा बटालियन देश से नक्सलवाद को खत्म करने में प्रमुख भूमिका निभा रही है। नक्सलियों ने भी जारी किया लेटर नक्सलियों के उत्तर पश्चिम सब जोनल ब्यूरो के प्रभारी रूपेश के नाम से ये पत्र जारी हुआ है। नक्सल नेता ने शांति वार्ता को लेकर कहा है कि, मेरे पहले बयान पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा का धन्यवाद। मेरी सुरक्षा गारंटी देते हुए मेरे इस कोशिश को आगे बढ़ाने की अनुमति देने के लिए भी धन्यवाद। आगे लिखा है कि, वार्ता के लिए हमारी तरफ़ से प्रतिनिधित्व के लिए नेतृत्वकारी कामरेडों से मिलना जरूरी है। इसलिए सरकार से मेरी अपील है कि, एक महीने तक सशस्त्र बलों के ऑपरेशन पर रोक लगाई जाए। नई ग्रुप सरेंडर पॉलिसी नई ग्रुप सरेंडर पॉलिसी के तहत नक्सली संगठन की किसी फॉर्मेशन इकाई के यदि 80 प्रतिशत या उससे अधिक सक्रिय सदस्य सामूहिक रूप से आत्मसमर्पण करते हैं, तो उन्हें बड़ा फायदा मिलेगा। सरकार ने कहा है कि उनपर जारी इनाम डबल करके उन्हें दिया जाएगा। सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और कांकेर जैसे अति नक्सल प्रभावित जिलों में यदि किसी ग्राम पंचायत क्षेत्र में सक्रिय समस्त नक्सली व मिलिशिया सदस्य आत्मसमर्पण करते हैं, और ग्राम पंचायत को नक्सल मुक्त घोषित किया जाता है, तो वहां 1 करोड़ रूपए के विकासात्मक कार्य स्वीकृत किए जाएंगे। 120 दिन में बदलेगी नक्सलियों की लाइफ जंगलों में फोर्स से छुपकर उनपर हमला करने वाले या एनकाउंटर में मारे जाने वाले नक्सलियों का जीवन 120 दिन में सरकार बदलेगी। छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनी नई नक्सलवादी आत्मसमर्पण नीति 2025 में इसका बंदोबस्त किया है। नई नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को ट्रांजिट कैंप या पुनर्वास केंद्र में रखा जाएगा। यहां उन्हें उनकी रुचि के अनुसार किसी न किसी हुनर में प्रशिक्षित किया जाएगा। पढ़ाया भी जाएगा। 3 साल तक हर महीने मानदेय इतना ही नहीं, तीन साल तक हर महीने 10,000 रुपए मानदेय भी दिया जाएगा। आवास के लिए शहरी इलाके में प्लाट, ग्रामीण क्षेत्र में कृषि भूमि, स्वरोजगार और व्यवसाय से जुड़ने की योजनाओं से जोड़ा जाएगा। नक्सलियों के पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया 120 दिनों के भीतर पूरी करने का नियम तय किया गया है, ताकि नक्सली जल्द से जल्द समाज की मुख्यधारा में लौट सकें।

छत्तीसगढ़ : दंतेवाड़ा में नक्सल उन्मूलन के तहत चल रहे लोन वर्राटू अभियान का असर, 8 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, 2 नक्सली 50 हजार के ईनामी

दंतेवाड़ा  छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में नक्सल उन्मूलन के तहत चल रहे लोन वर्राटू अभियान का असर एक बार फिर देखने को मिला है। इस अभियान से प्रेरित होकर आठ नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटते हुए सरेंडर किया है। इन नक्सलियों में दो ऐसे भी शामिल हैं, जिन पर प्रशासन ने 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। एसपी ऑफिस में किया सरेंडर ये सभी नक्सली विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय थे और लंबे समय से संगठन से जुड़े हुए थे। इन्होंने दंतेवाड़ा स्थित पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर सरेंडर किया। इस दौरान पुलिस और सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सीआरपीएफ की भूमिका  इस सफलता में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की भूमिका को अहम माना जा रहा है। सुरक्षा बलों की सतत कार्रवाई, जनसंपर्क और पुनर्वास नीतियों के चलते नक्सलियों में संगठन छोड़ने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। बता दें, सरेंडर करने वाले नक्सलियों को शासन की पुनर्वास नीति के तहत जरूरी सहायता दी जाएगी और उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। यह कदम नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में एक और सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। एनकाउंटर में 3 नक्सलियों की मौत छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों की सीमा पर शनिवार की सुबह सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ शुरू हुई। यह मुठभेड़ सुबह करीब 7 बजे शुरू हुई, जो रुक-रुककर अभी भी जारी है। इस दौरान तीन नक्सलियों के मारे जाने की खबर सामने आई है। हथियार के साथ आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार देगी लाखों रूपए, एलएमजी के बदले 5 लाख और एके-47 पर 4 लाख रुपये छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत-पुनर्वास नीति 2025” को लागू करना वास्तव में छत्तीसगढ़ सरकार की राज्य में शांति बहाली, विकास और सामाजिक समरसता की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का कहना है कि जो हथियार छोड़ेंगे, उन्हें भय नहीं, बल्कि सम्मान मिलेगा। वर्षों से जंगल-जंगल भटक रहे युवा, जो किसी भ्रम या दबाववश नक्सली संगठन में शामिल हो गए हैं, उनके लिए यह नीति एक नया जीवन शुरू करने का द्वार है। आत्मसमर्पण कर वे न केवल खुद का, बल्कि अपने परिवार और समाज का भविष्य भी सुरक्षित कर सकते हैं। नई नीति में हथियारों के साथ आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार ने लाखों रूपए की मुआवजा राशि देने का प्रावधान किया है। एलएमजी के साथ आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली को 5 लाख रुपये मुआवजा के तौर मिलेगा। इसी तरह एके-47/त्रिची असॉल्ट रायफल पर 4 लाख रुपये, मोर्टार पर 2.50 लाख रुपये, एसएलआर/ इंसास रायफल पर 2 लाख रुपये, एक्स 95 असाल्ट रायफल/एमपी-9 टेक्टिल पर 1.50 लाख रूपए, थ्री नाट थ्री रायफल पर 1 लाख रूपए, एक्स-कैलिबर पर 75 हजार रूपए, और यूबीजीएल अटेचमेंट पर 40 हजार रूपए, 315/12 बोर बंदुक पर 30 हजार रूपए, ग्लॉक पिस्टल पर 30 हजार रूपए के साथ ही अन्य छोटे हथियारों जैसे कार्बाइन, रिवॉल्वर, वायरलेस, डेटोनेटर आदि पर भी मुआवजा राशि का प्रावधान है। हर आत्मसमर्पणकर्ता नक्सली को, भले ही उसके पास हथियार हों या न हों, उसे 50 हजार रूपए की नगद प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यदि कोई आत्मसमर्पित नक्सली, नक्सलियों द्वारा छिपाए गए आईईडी या विस्फोटकों की सूचना देकर उन्हें बरामद कराता है, तो उसे 15,000 से 25,000 तक की अतिरिक्त राशि दी जाएगी। बड़े हथियार डंप या विस्फोटक सामग्री की जानकारी देने पर एक लाख तक का इनाम मिलेगा। आत्मसमर्पणकर्ता यदि विवाह करने के इच्छुक हैं तो उसको एक लाख की विवाह अनुदान राशि भी दी जाएगी। यदि पति और पत्नी दोनों आत्मसमर्पित नक्सली हैं, तो उन्हें एक इकाई मानते हुए यह लाभ दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा घोषित इनामी सूची में शामिल नक्सली के आत्मसमर्पण पर उन्हें पूरी इनामी राशि नियमों के अनुसार प्रदान की जाएगी। राज्य सरकार की इस नीति के साथ-साथ भारत सरकार की पुनर्वास योजनाओं का लाभ भी आत्मसमर्पित नक्सलियों को मिलेगा। इस नीति में यह सुनिश्चित किया गया है कि उन्हें समाज में दोबारा स्थापित होने के लिए हरसंभव मदद मिले। आत्मसमर्पणकर्ता को सिर्फ प्रोत्साहन राशि, मुआवजा, ईनाम ही न मिले बल्किे उसे इसके साथ शिक्षा, पसंद के अनुसार रोजगार-व्यवसाय के लिए कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार और सामाजिक सम्मान भी मिेले। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का कहना है कि हिंसा किसी समाधान का रास्ता नहीं है। हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास की मुख्यधारा में शामिल होने वाले नक्सलियों के सुरक्षित भविष्य और स्वरोजगार के लिए हमारी सरकार हरसंभव मदद देगी।  

बस्तर के कैनवास पर अब एक नई तस्वीर उभर कर सामने आ रही

रायपुर छत्तीसगढ़ के दक्षिणी सीमावर्ती इलाके जिनकी पहचान कभी नक्सलियों के गढ़ के रूप में हुआ करती थी, अब वह तेजी से विकास के गढ़ के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं। बस्तर के कैनवास पर अब एक नई तस्वीर उभर कर सामने आ रही है। यह राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और दृढ़-संकल्प के चलते संभव हो पाया है राज्य के घोर नक्सल प्रभावित जिलों में विकास की नई रेखाएं खींच रही हैं। कभी पिछड़ेपन और भय का पर्याय माने जाने बस्तर क्षेत्र में आज विकास की नई इबारतें लिखी जा रही हैं। विष्णु देव सरकार की जनहितैषी नीति, नक्सलवाद उन्मूलन अभियान और समग्र विकास ने इन क्षेत्रों में सकारात्मक और परिणाममूलक परिवर्तन की शुरुआत कर दी है। राज्य के सात घोर नक्सल प्रभावित जिलों में से छह जिले कांकेर, बस्तर, बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर बस्तर संभाग के अंतर्गत आते हैं तथा एक जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी दुर्ग संभाग का हिस्सा है। इन जिलों में पिछले 15 महीनों में नक्सल उन्मूलन अभियान और विकास की रणनीति को समानांतर रूप से लागू करते हुए, छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सलियों के पैर उखाड़ने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। मुख्यमंत्री की जनकल्याणकारी नीतियों और योजनाओं की बदौलत अब आमजनता तेजी से विकास मुख्यधारा से जुड़ रही है। शासन-प्रशासन की सक्रियता, जनसंपर्क और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से अब इन क्षेत्रों में विश्वास और उम्मीद की नई किरण दिखाई दे रही है। इन जिलों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं बड़ी तेजी से उपलब्ध कराई गई हैं। योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक सुनिश्चित पहुंचाने का प्रयास भी लगातार जारी है। मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम जनमन, आयुष्मान भारत, पीएम किसान सम्मान निधि, उज्ज्वला योजना, आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसी योजनाओं से न केवल इन क्षेत्रों में सरकारी उपस्थिति मजबूत हुई है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी आमजन का सशक्तिकरण हुआ है। मनरेगा के तहत 29,000 नए जॉब कार्ड जारी हुए हैं, जिनमें 5,000 कार्ड ‘‘नियद नेल्ला नार‘‘ योजना में शामिल गांवों में बने हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना में सातों जिलों में लगभग एक लाख आवास स्वीकृत हुए हैं, जो लक्ष्य का 107 प्रतिशत है। 15 महीनों में नियद नेल्ला नार के गांवों में 1100 आवास   स्वीकृत हुए, जिसमें 300 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। आयुष्मान कार्ड के लाभार्थियों की संख्या 19.24 लाख से बढ़कर 21.05 लाख हो गई है। पीएम किसान सम्मान निधि योजना से लाभान्वितों की संख्या में 20.12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की संख्या 3.61 लाख से अधिक हो चुकी है। छत्तीसगढ़ सरकार की पहल से नक्सल प्रभावित जिलों में 46 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं, जिनके दायरे में आने वाले 145 गांवों में ‘नियद नेल्ला नार’ योजना चलाई जा रही है। इन गांवों में विशेष शिविर लगाकर लोगों को योजनाओं का लाभ दिलाया जा रहा है। नियद नेल्ला नार योजना के 124 गांव सड़क मार्ग से जुड़ चुके हैं, शेष 31 पर कार्य प्रगति पर है। 145 गांवों में मार्च 2024 तक 122 स्कूल क्रियाशील थे, जो अब बढ़कर 144 हो गए हैं। विद्यार्थियों की संख्या में 20 प्रतिशत वृद्धि हुई है। क्रियाशील आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या 193 से बढ़कर 202 हो गई है, और पंजीकृत बच्चों की संख्या में 30 प्रतिशत का इज़ाफा हुआ है। विशेष केंद्रीय सहायता योजना के अंतर्गत बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर, कांकेर, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में 1302 कार्य योजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें से 308 कार्य पूर्ण हो चुके हैं और 999 कार्य प्रगति पर हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 220 करोड़ रुपये की राशि आबंटित की गई थी, जिसमें से 200 करोड़ रुपये प्राप्त कर लिए गए और शत्-प्रतिशत् राशि का व्यय करते हुए आधारभूत संरचना, सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि संबंधी कार्य किए गए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में इस समूचे बदलाव का केन्द्र बिन्दु प्रदेश सरकार की संवेदनशीलता, दूरदृष्टि और जनकेंद्रित दृष्टिकोण है। छत्तीसगढ़ आज नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई जीतते हुए विकास के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों का यह रूपांतरण, प्रदेश की संकल्प शक्ति और जनसहभागिता का जीवंत उदाहरण है। नसीम अहमद खान, उप संचालक

नक्सल गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए मध्य प्रदेश में एसआईए का गठन हुआ

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भोपाल नक्सली गतिविधियों को रोकने, जांच व उनके विरुद्ध ऑपरेशन के लिए प्रदेश में स्टेट इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (एसआईए) का गठन किया गया है। पुलिस मुख्यालय की सीआईडी शाखा के आईजी स्तर के अधिकारी को इसका प्रमुख बनाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि नक्सल प्रभावित अन्य राज्यों में भी इसी तरह की जांच एजेंसी बनाई गई है। यह केंद्र की नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) की तरह काम करेगी। एनआईए का गठन देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त लोगों पर कार्रवाई के लिए किया गया है। नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में आएगी तेजी केंद्र सरकार के निर्देश पर महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में इसका गठन किया जा चुका है। नक्सलियों ने इन तीनों राज्यों को मिलाकर एक जोन (एमएमसी) बनाया हुआ है। एसआईए से इसमें नक्सलियों के विरुद्ध कार्रवाई में तेजी आएगी। बता दें, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च, 2026 तक देश से नक्सल समस्या पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है। एसआईए का गठन इसी दिशा में एक प्रयास है। इसका मुख्य काम नक्सलियों के नेटवर्क का पता लगाना है। साथ ही, एजेंसी के अन्य कार्य नक्सलियों को आर्थिक सहायता कहां से मिल रही है, नक्सलियों द्वारा उपयोग किए जा रहे हथियार उन तक कैसे पहुंच रहे हैं, नए नक्सलियों की भर्ती का तरीका, ग्रामीणों से संपर्क की रणनीति, बड़ी नक्सली घटनाओं की जांच से संबंधित रहेगा। मध्य प्रदेश एसआईए नक्सल गतिविधियों की रोकथाम में एनआईए का भी सहयोग लेगी। पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि एसआईए ने काम प्रारंभ कर दिया है। मध्य प्रदेश में सक्रिय हैं 65 से 70 नक्सली बता दें, मध्य प्रदेश में नक्सल प्रभावित बालाघाट, मंडला और डिंडौरी जिलों में 65 से 70 नक्सली सक्रिय हैं। इनमें लगभग आधी महिलाएं हैं। ये नक्सली मूल रूप से छत्तीसगढ़ या महाराष्ट्र के हैं। मध्य प्रदेश के मात्र तीन ही हैं। पुलिस का प्रयास है कि ये नक्सली या तो आत्मसमर्पण कर दें या उन्हें मार दिया जाए। नक्सली संगठन में नई भर्ती नहीं होने पाए, यह भी पुलिस की कोशिश है। 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का संकल्प सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के संकल्प में मध्य प्रदेश महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य स्तर से लेकर जिला स्तर तक नक्सलियों पर लगातार नजर रखी जाए और निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाए। सुरक्षा बलों को सीएम की बधाई मुख्यमंत्री ने हाल ही में बालाघाट में हुए पुलिस ऑपरेशन की सराहना की, जिसमें चार नक्सलियों को मार गिराया गया था और भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में नक्सलवाद को किसी भी कीमत पर पनपने नहीं दिया जाएगा और इसके खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। सीएम ने इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की हालिया बैठक का भी जिक्र किया, जिसमें देश को 2026 तक नक्सल मुक्त बनाने की रणनीति पर चर्चा हुई थी। अब मध्य प्रदेश में नक्सलियों के लिए बचने का कोई रास्ता नहीं! सरकार पूरी ताकत से विकास और सुरक्षा पर काम कर रही है।

विष्णु सरकार की नक्सल हिंसा पीड़ित लोगों के लिए नई पॉलिसी, होगा फायदा, सहायता राशि बढ़ाई गई

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रायपुर छतीसगड़ शासन की आत्म समर्पण पुनर्वास नीति में किया गया बड़ा बदलाव. नक्सल संगठन कोई भी लीडर आत्म समर्पण करता हैं तो उसकी सहायता राशि की जाएगी दुगनी. ग्राम पंचायत या कोई ब्लाक नक्सल मुक्त होता है तो उसके विकास कार्यों के लिए स्वीकृति किये जायेंगे 1 करोड़ रुपए. बस्तर आई जी ने एक बार फीर नक्सल संगठन से की अपील. आगे आये और करे आत्म समर्पण.. क्षेत्र के विकास में बने भागीदारी. वरना भुगते अंजाम.  छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सलवादी, आत्मसमर्पण, पीड़ित राहत पुनर्वास नीति-2025 लागू हो गई है। इस नीति के तहत नक्सलवाद से पीड़ित व्यक्तियों और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को पुनर्वास के लिए मदद दी जाएगी। समर्पण करने वाले नक्सलियों को नकद राशि 50 हजार रुपए के साथ जमीन, मकान, और जो नक्सली जमीन, मकान, और जो नक्सली हथियार, गोला-बारूद के साथ समर्पण करेंगे, उन्हें मुआवजा राशि भी मिलेगी। यह नीति अगले दो साल तक लागू रहेगी। वहीं कुछ प्रावधान आम जनता के उन व्यक्तियों के लिए भी लागू होंगे, जिन्होंने नक्सलियों के विरुद्ध अभियान में पुलिस को विशेष सहयोग किया  हो अथवा स्वयमेव आम जनता की रक्षा व शासकीय, अशासकीय संपत्ति की सुरक्षा के दौरान नक्सलियों से मुकाबला किया हो। नक्सल पीड़ितों को मिलेगी ये मदद नक्सली हिंसा में  किसी आम नागरिक के मृत शारीरिक रूप से अर्पण होने या गंभीर रूप से पागल होने, किसी व्यक्ति की संपत्ति की आंशिक रूप से या पूर्ण रूप से क्षति होने पर उन्हें 5 लाख रुपए, पुलिस के ‘विशेष सहयोगी की नक्सली घटनाओं में मृत्यु पर कुल राशि 5 लाख रुपए के स्थान पर कुल राशि 10 लाख रुपए दी जाएगी। केंद्रीय योजना के तहत दी जाने वाली राशि इसके अतिरिक्त होगी। घायल को स्थायी असमर्थ होने पर पांच लाख, गंभीर रूप से घायल होने पर दो लाख रुपए। पुलिस के ‘विशेष सहयोगी’ के स्वयं परिवार के सदस्यों के प्रकरणों में यह राशि क्रमशः ४ लाख एवं 4 लाख होगी, इसी तरह चल संपत्ति (अनाज, कपड़े, घरेलू सामान) के नुकसान पर रुपए 40 हजार, स्थायी संपत्ति (मकान, दुकान आदि) कच्चे मकान, पक्के मकान के 60 हजार और रुपए 1.50 लाख दिए जाएंगे। जीविकोपार्जन के साधन की क्षति जैसे बैलगाड़ी, नाव, ट्रैक्टर ट्रॉली, ट्रैक्टर, जीप, ट्रक, रोड रोलर, जेसीबी, पोकलेन एवं सड़क निर्माण में शामिल अन्य उपकरण पर 60 हजार रुपए से लेकर 8 लाख रुपए दिए जाने का प्रावधान किया गया है। जमीन और मकान या बदले में रकम भी हत्या, गंभीर चोट या स्थाई अपंगता के प्रकरणों में सुरक्षा तथा अन्य कारणों को ध्यान में रखते हुए यदि शहरी या ग्रामीण क्षेत्र में पुनर्वास करना आवश्यक हो, ग्रामीण क्षेत्र में 1.5 हेक्टेयर कृषि भूमि अथवा शहरी क्षेत्रों में 4 डिसमिल (1742 वर्गफुट) आवासीय भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। यदि भूखण्ड उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो पीड़ित परिवार को ग्रामीण क्षेत्र में 4 लाख रुपए एवं शहरी क्षेत्र में 8 लाख रुपए सहायता राशि प्रदान की जाएगी। इस नीति में भूखण्ड का आकार एवं उसके बदले में मुआवजा राशि मात्र समावेश किया गया है। व्यावहारिक रूप से भूमि की सीमित उपलब्धता के कारण अधिकांश प्रकरणों में मुआवजा राशि ही देय होगी। ऐसे पीड़ित परिवार द्वारा 3 वर्ष के भीतर कृषि होगी। ऐसे पीड़ित परिवार द्वारा 3 वर्ष के भीतर कृषि भूमि क्रय करने पर अधिकतम 2 एकड़ की भूमि पर स्टाम्प ड्यूटी एवं पंजीयन शुल्क से पूर्ण छूट दी जाएगी। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली कौन नक्सल नीति में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को इस प्रकार परिभाषित किया गया है। भारत शासन, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विधि विरुद्ध क्रियाकलाप अधिनियम के अंतर्गत कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया माओवादी एवं उसके अग्र संगठन दंडकारण्य आदिवासी किसान मजदूर संघ, क्रांतिकारी आदिवासी बालक संघ, क्रांतिकारी किसान कमेटी, महिला मुक्ति मंच, आरपीसी या जनताना सरकार, चेतना नाट्य मंच, पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया, तृतीय प्रस्तुति कमेटी, झारखंड जनमुक्ति परिषद, जनहित क्रांति पार्टी, मूलनिवासी बचाओ मंच का सदस्य, चाहे वह किसी भी पद पर हो एवं शासन द्वारा समय-समय पर घोषित विधि विरुद्ध नक्सली संगठन का सदस्य हो, या रहा हो। ईनामी नक्सलियों को मिलेगा बड़ा इनाम राज्य में सक्रिय रुपए 5 लाख या उससे अधिक के ईनामी नक्सली द्वारा आत्मसमर्पण के बाद शहरी क्षेत्र में अधिकतम 4 डिसमिल (1742 वर्गफुट) जमीन आवास के लिए अथवा ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतम 1 हेक्टेयर कृषि भूमि दी जाएगी। जमीन नहीं दिए जाने की स्थिति में अचल संपत्ति अथवा जमीन क्रय करने के लिए रुपए 2 लाख अनुदान राशि दी जाएगी। इस नीति में भूखण्ड का आकार एवं उसके बदले में  मुआवजा राशि मात्र का समावेश  किया गया है। व्यावहारिक रूप से भूमि की सीमित उपलब्धता के कारण अधिकांश प्रकरणों में मुआवजा राशि ही देय होगी। शादी के लिए 1 लाख नीति के मुताबिक आत्मसमर्पण के बाद प्रति व्यक्ति को 50 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि प्रदान दी जाएगी। अविवाहित अथवा जीवित पति, पत्नी न होने की स्थिति में आत्मसमर्पण करने के 3 वर्ष के भीतर आत्मसमर्पणकर्ता यदि विवाह करने यदि विवाह करने का इच्छुक है तो उसको 1 लाख रुपए अनुदान राशि विवाह के समय दी जाएगी। विवाह की स्थिति में पति, पत्नी दोनों आत्मसमर्पित नक्सली होने की स्थिति में, दोनों को एक इकाई मानकर लाभ दिया जाएगा।

छत्तीसगढ़ में लगातार नक्सल संगठन कमजोर, नक्सल कमांडर और पत्नी ने किया सरेंडर, 5-5 लाख का था इनाम

मोहला मानपुर मोहला मानपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सल संगठन के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है और नक्सलियों के कमजोर होने की खबरें लगातार आ रही हैं। मोहला मानपुर जिला पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। यहां माड़ डिविजन के प्रेस टीम के कमांडर पवन तुलावी और उसकी पत्नी पायके ओयाम ने आत्मसमर्पण कर दिया। दोनों पर 5-5 लाख रुपए का इनाम घोषित था। कमांडर पवन तुलावी और उसकी पत्नी पायके ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। पवन तुलावी, जो अबूझमाड़ के नक्सलियों के प्रेस टीम का कमांडर था, मानपुर ब्लॉक के बस्तर सीमावर्ती ग्राम दोरदे का निवासी है। वहीं उसकी पत्नी पायके ओयाम बीजापुर के भैरमगढ़ की निवासी थी और केंद्रीय कमेटी सदस्य सोनू उर्फ भूपति की सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत थी। यह सरेंडर नक्सलियों के खिलाफ पुलिस की सफलता और कड़ी कार्रवाई का प्रतीक है, जिससे प्रदेश में नक्सलियों के सफाए की उम्मीद जताई जा रही है।  

CG Naxal Encounter: बूझमाड़ मुठभेड़ में चार नक्सली ढेर, अत्याधुनिक हथियार बरामद

नारायणपुर दक्षिणी अबूझमाड़ क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने चार वर्दीधारी नक्सलियों को मार गिराया है। नक्सलियों के शव बरामद कर लिए गए हैं। जवानों को घटनास्थल से एके 47, सेल्फ लोडिंग रायफल (एसएलआर) समेत अत्याधुनिक हथियार भी मिले हैं। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि मुठभेड़ में बड़े कैडर के नक्सली मारे गए हैं। नक्सलियों से लड़ते हुए दंतेवाड़ा जिला डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के जवान प्रधान आरक्षक सन्नू कारम शहीद हो गए हैं। नारायणपुर एसपी प्रभात कुमार ने बताया कि दक्षिणी अबूझमाड़ क्षेत्र में नक्सलियों की उपस्थिति की सूचना पर शुक्रवार को नारायणपुर, दंतेवाड़ा, कोंडागांव व बस्तर जिले से स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) व डीआरजी बल को अभियान पर भेजा गया था। जवान नदी–नालों को पार करते जंगल के भीतर कई किमी तक पैदल चलकर पहुंचें थे। नक्सलियों ने जवानों को देखकर गोलीबारी शुरू कर दी। जवानों की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की गई है। शनिवार शाम से लेकर अब तक कई बार रुक–रुक कर मुठभेड़ हुई है। जवानों के लौटने के बाद विस्तृत जानकारी दी जाएगी।

‘गढ़चिरौली जल्द होगा नक्सली प्रभाव से मुक्त’, 11 नक्सलियों ने किया सरेंडर, सीएम देवेंद्र फडणवीस के सामने डाले हथियार

गढ़चिरौली  महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समक्ष सीनियर कैडर विमला चंद्र सिदम उर्फ तारक्का समेत कुल 11 नक्सलियों ने  सरेंडर कर दिया. इन सभी नक्सलियों के सिर पर 1.03 करोड़ रुपये का सामूहिक इनाम रखा गया था. ये सभी सुरक्षा कर्मियों पर हमले करने में शामिल थे. सीएम के सामने सरेंडर करने वाले माओवादियों में सबसे प्रमुख दंडकारण्य जोनल कमेटी का सदस्य विमला चंद्र सिदम उर्फ तारक्का है. विमला पिछले 38 सालों से नक्सलवादी आंदोलन में शामिल था. सीएम फडणवीस ने नक्सल विरोधी अभियानों में बहादुरी के लिए C-60 कमांडो और अधिकारियों को सम्मानित भी किया. उन्होंने कहा कि हथियार डालने वाले माओवादियों की संख्या में वृद्धि और भर्ती करने में आंदोलन में विफलता को देखते हुए महाराष्ट्र जल्द ही नक्सल खतरे से मुक्त हो जाएगा. उन्होंने कहा, “गढ़चिरौली पुलिस ने जिले में नक्सली गतिविधियों को लगभग खत्म कर दिया है. उत्तरी गढ़चिरौली अब माओवादी गतिविधियों से मुक्त है और दक्षिणी गढ़चिरौली जल्द ही नक्सलियों से मुक्त हो जाएगा.” मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पिछले कुछ सालों में कई खूंखार नक्सलियों को या तो मार गिराया गया या गिरफ्तार किया गया. उन्होंने कहा कि, माओवादी कैडर आंदोलन से खुद को अलग कर रहे हैं क्योंकि उन्हें इसकी खोखली विचारधारा का एहसास हो गया है. मुख्यमंत्री ने कहा, “उन्हें यकीन है कि, उन्हें संवैधानिक संस्थाओं के माध्यम से ही न्याय मिलेगा.” उन्होंने कहा कि, भारत विकास में बड़ी छलांग लगा रहा है और माओवाद खत्म हो रहा है. इससे एक दिन पहले फडणवीस ने संवाददाताओं से कहा कि, गढ़चिरौली जिले के दूरदराज के इलाकों में नक्सलियों का प्रभुत्व कम हो रहा है और नक्सलवाद अपने अंत के करीब है. उन्होंने कहा कि सरकार ने माओवादियों के प्रभुत्व को खत्म करके गढ़चिरौली को “पहला जिला” बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. सीएम देवेंद्र फडणवीस ने आगे कहा कि, गढ़चिरौली को अक्सर महाराष्ट्र का आखिरी जिला कहा जाता है क्योंकि यह राज्य की पूर्वी सीमा पर है. फडणवीस ने अपने दौरे के दौरान जिले में 32 किलोमीटर लंबी गट्टा-गरदेवाड़ा-वांगेतुरी सड़क और वांगेतुरी-गरदेवाड़ा-गट्टा-अहेरी मार्ग पर महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) की बस सेवा का उद्घाटन किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि गढ़चिरौली सरकार के लिए अंतिम नहीं, बल्कि ‘पहला जिला’ है. उन्होंने कहा कि, आज उद्घाटन किया गया सड़क संपर्क महाराष्ट्र को सीधे छत्तीसगढ़ से जोड़ेगा. फडणवीस ने नक्सलवाद के खिलाफ उनके काम के लिए गढ़चिरौली पुलिस की सराहना की. उन्होंने कहा कि, लोग अब नक्सलियों का समर्थन नहीं करते हैं. अब कोई भी व्यक्ति गैरकानूनी आंदोलन में शामिल होने को तैयार नहीं है जो “बहुत महत्वपूर्ण” है. इस दौरान मुख्यमंत्री ने गट्टा-गरदेवाड़ा-तोड़गट्टा-वांगेतुरी सड़क और ताड़गुडा पुल का हवाई निरीक्षण किया. फडणवीस ने कोंसारी में लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी लिमिटेड के विभिन्न विभागों का उद्घाटन करने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, “राज्य सरकार पिछले दस सालों से गढ़चिरौली को बदलने की कोशिश कर रही है ताकि आम आदमी को मुख्यधारा में लाया जा सके और इस जिले से नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंका जा सके.” उन्होंने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व और गढ़चिरौली पुलिस और स्थानीय प्रशासन के संयुक्त प्रयासों की बदौलत पिछले चार सालों में माओवादी गढ़चिरौली में एक भी कैडर की भर्ती करने में विफल रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि, खनन से जुड़े उपक्रमों में गढ़चिरौली जिले में 20 हजार रोजगार के अवसर पैदा होंगे. उन्होंने कहा कि, निकट भविष्य में गढ़चिरौली में एक हवाई अड्डा बनेगा और गढ़चिरौली बंदरगाहों को जोड़ने वाले जलमार्गों का भी सर्वेक्षण किया जाएगा.

नक्सल प्रभावित बस्तर में एक नई हवा चलना शुरू, गोलियों की आवाज के बीच बदलाव की शांति

बस्तर  छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर में एक नई हवा चलना शुरू हुई है। यहां के अबूझमाड़ के दूर-दराज इलाके में जहाँ कभी गोलियों की तड़तड़ाहट गूंजती थी, अब सीमेंट मिक्सर की आवाज़ सुनाई दे रही है। रेकावया गांव में आज़ादी के बाद पहला स्कूल बन रहा है। यह बदलाव सुरक्षा बलों के आक्रामक अभियान का नतीजा है, जिसमें इस साल 222 माओवादियों को मार गिराया गया है। यहां विकास परियोजनाएं भी तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं। जिससे बस्तर में बिजली, सड़क और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं। सरकार आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के लिए पुनर्वास नीति में भी बदलाव कर रही है। हालांकि, इस सैन्य अभियान के कारण आम नागरिक भी हिंसा के शिकार हो रहे हैं। माओवादी भी आम लोगों पर हमले कर रहे हैं। शांति वार्ता की संभावना अभी धुंधली है। बस्तर के इस नए अध्याय का नेतृत्व एक आदिवासी मुख्यमंत्री कर रहे हैं, जिससे उम्मीद है कि वे इस क्षेत्र की समस्याओं को बेहतर समझेंगे। गोलियों की आवाज के बीच बदलाव की शांति यह गांव रायपुर से लगभग 300 किलोमीटर दूर अबूझमाड़ के घने जंगलों में स्थित है। गोलियों की आवाज के बीच बदलाव आसान नहीं था। इस साल की शुरुआत में रेकावया में आठ माओवादियों को मार गिराया गया था। इसके बाद ही यहां सुरक्षा शिविर स्थापित किए जा सके और स्कूल के निर्माण के लिए इंद्रावती नदी के रास्ते ईंट और सीमेंट पहुंचाना संभव हो पाया। यह वही स्कूल है, जिसे कभी माओवादी चलाते थे। बस्तर में खुले विकास के रास्ते बस्तर में माओवादियों के खिलाफ यह अभियान केवल रेकावया तक सीमित नहीं है। पूरे बस्तर में सुरक्षा बलों ने 222 माओवादियों को मार गिराया है। यह संख्या पिछले पांच सालों के मुकाबले कहीं ज्यादा है। विष्णु देव साई के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के इस आक्रामक अभियान ने माओवादियों को उनके गढ़ अबूझमाड़ से भी खदेड़ दिया है। इससे बस्तर में विकास के रास्ते खुल गए हैं। बिजली, सड़क और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएँ अब उन इलाकों तक पहुँच रही हैं, जो कभी माओवादियों के कब्जे में थे। दो दशक पहले बंद हुए 50 स्कूल फिर खुले माओवादी हिंसा के कारण दो दशक पहले बंद हुए लगभग 50 स्कूलों को फिर से खोला गया है। इनमें से कुछ स्कूलों का पुनर्निर्माण उन्हीं माओवादियों ने किया है, जिन्होंने कभी इन्हें तोड़ा था। ये माओवादी अब हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं। इसके साथ ही नई ज़िंदगी शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं। 222 माओवादियों का सफाया इस साल सुरक्षा बलों की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2023 में जहां 20 माओवादी मारे गए थे, वहीं इस साल अब तक 222 माओवादियों को मार गिराया गया है। नारायणपुर में एक ही अभियान में 31 माओवादी मारे गए थे। खूंखार नक्सली का गांव पर पुनरुत्थान का प्रतीक छत्तीसगढ़ सरकार सुरक्षा बलों की सफलता के बाद विकास परियोजनाओं को तेज़ी से आगे बढ़ा रही है। खूंखार माओवादी कमांडर हिड़मा के पैतृक गांव पुवर्ती, बस्तर के पुनरुत्थान का प्रतीक बन गया है। इस साल नवंबर में पुवर्ती के आस-पास के कई गांवों में आज़ादी के बाद पहली बार बिजली पहुंची है। यहां सड़क का निर्माण भी चल रहा है। इस साल की शुरुआत में स्थापित एक सुरक्षा शिविर ने इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है। इस शिविर की बदौलत इस गणतंत्र दिवस पर दशकों बाद पुवर्ती में तिरंगा फहराया गया। माओवादियों का भी दिल जीत रही सरकार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक माओवादियों का सफाया करने का वादा किया है। सरकार न केवल बस्तर के लोगों का बल्कि माओवादी कार्यकर्ताओं का भी दिल जीतने में कामयाब होती दिख रही है। इस साल सात साल में सबसे ज़्यादा 802 माओवादी कार्यकर्ताओं ने आत्मसमर्पण किया है। इन पर कुल 8.2 करोड़ रुपये से ज़्यादा का इनाम था। इससे पहले 2016 में 1,210 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। सरकार ने हाल ही में अपनी पुनर्वास नीति में बदलाव किया है। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों और नक्सली हिंसा के पीड़ितों के लिए 15,000 घरों को मंजूरी दी गई है। साथ ही, कौशल विकास के लिए 10,000 रुपये प्रति माह का वजीफा भी दिया जाएगा। बस्तर रेंज आईजी का कहना बस्तर रेंज के आईजी पी. सुंदरराज ने हमारे सहयोगी टीओआई को बताया कि 2024 बस्तर रेंज के जवानों के लिए सभी मोर्चों पर महत्वपूर्ण रहा। हमने उन इलाकों में भी सेंध लगाई, जिन्हें माओवादियों का अभेद्य गढ़ माना जाता था। अबूझमाड़ और दक्षिण बस्तर में अभूतपूर्व सफलताओं ने न केवल सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाया है, बल्कि स्थानीय लोगों को भी उम्मीद दी है कि नक्सली खतरा जल्द ही खत्म हो जाएगा। यह न केवल मारे गए नक्सलियों की संख्या है, बल्कि राज्य समिति स्तर के कैडर जैसे उच्च पदस्थ कैडर का नक्सली पारिस्थितिकी तंत्र से हटना है, जिसने हमें इस सीज़न में बढ़त दिलाई है। उन्होंने आगे कहा कि दक्षिण बस्तर, पश्चिम बस्तर और माड़ क्षेत्र के वंचित इलाकों में हमारी परिचालन और विकास पहुंच बढ़ाने से स्थिति बदल गई है। गांवों में पीडीएस दुकानें, आंगनवाड़ी केंद्र और घरेलू विद्युतीकरण जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने से विकास की कमी दूर हुई है और स्थानीय आबादी और सरकार के बीच विश्वास बढ़ा है। हमें आगामी सीज़न में बेहतर परिणामों की उमीद है।

छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों को मिली बड़ी कामयाबी; 8 लाख रु की इनामी महिला नक्सली ढेर, 4 माओवादी गिरफ्तार

कांकेर छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे पर तैनात सुरक्षाबलों को  दोहरी सफलता मिली। एक तरफ उन्होंने 8 लाख रुपए की इनामी नक्सली को मार गिराया, तो वहीं दूसरी तरफ 4 नक्सलियों को गिरफ्तार भी कर लिया। अधिकारियों ने बताया कि नक्सल प्रभावित कांकेर जिले में सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में आठ लाख रुपए की इनामी महिला नक्सली को मार गिराया। कांकेर जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) इंदिरा कल्याण एलेसेला ने बताया कि छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत बिनागुंडा गांव के करीब जंगल में सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में महिला नक्सली रीता मड़ियाम (30) को मार गिराया। एलेसेला ने बताया कि छोटेबेठिया थाना क्षेत्र में जिला रिजर्व गार्ड (DRG), बस्तर फाइटर्स और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के संयुक्त दल को गश्त के लिए रवाना किया गया था तथा दल जब बीनागुंडा गांव के जंगल में था तब नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि इसके बाद सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की और कुछ देर तक दोनों ओर से गोलीबारी के बाद नक्सली वहां से फरार हो गए। पुलिस अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा बलों ने जब घटनास्थल की तलाशी ली तब वहां एक महिला नक्सली का शव, एक .303 की राइफल, एक .315 बोर की राइफल और भारी मात्रा में हथियार तथा नक्सली सामान बरामद किया। एलेसेला ने बताया कि महिला नक्सली की पहचान PLGA मिलिट्री कंपनी नंबर पांच की सदस्य रीता मड़ियाम के रूप में हुई है और उसके सिर पर 8 लाख रुपए का इनाम घोषित था। उधर सुकमा जिले में पुलिस को मंगलवार को चार नक्सलियों को गिरफ्तार करने में कामयाबी मिली। बताया जा रहा है कि DRG और बस्तर फाइटर्स की संयुक्त टीम एरिया डॉमिनेशन ऑपरेशन पर निकली थी। उसी समय इन नक्सलियों को पकड़ने में सफलता मिली हैं। गिरफ्तार सभी नक्सली चिंतलनार थाना क्षेत्र के निवासी हैं। बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया कि इस वर्ष अब तक नक्सल विरोधी अभियान में सुरक्षा बलों ने बस्तर क्षेत्र में 137 नक्सलियों को मार गिराया है तथा इस दौरान 498 चरमपंथी गिरफ्तार किए गए हैं और 461 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। नक्सलियों ने शुरू की थी गोलीबारी एलेसेला ने बताया कि छोटेबेठिया थाना क्षेत्र में जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी), बस्तर फाइटर्स और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के संयुक्त दल को गश्त के लिए रवाना किया गया था। दल जब बीनागुंडा गांव के जंगल में था तब नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी शुरू कर दी। सर्चिंग को दौरान मिली लाश उन्होंने बताया कि इसके बाद सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की और कुछ देर तक दोनों ओर से गोलीबारी के बाद नक्सली वहां से फरार हो गए। पुलिस अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा बलों ने जब घटनास्थल की तलाशी ली तब वहां एक महिला नक्सली का शव बरामद हुआ। हथियार भी बरामद एलेसेला ने बताया कि महिला नक्सली की पहचान पीएलजीए मिलिट्री कंपनी नंबर पांच की सदस्य रीता मड़ियाम के रूप में हुई है और उसके सिर पर आठ लाख रुपये का इनाम था। महिला नक्सली के पास एक .303 की राइफल, एक .315 बोर की राइफल और भारी मात्रा में हथियार तथा नक्सली सामान बरामद किया। अब तक 137 का एनकाउंटर बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया कि इस वर्ष अब तक नक्सल विरोधी अभियान में सुरक्षा बलों ने बस्तर क्षेत्र में 137 नक्सलियों को मार गिराया है तथा इस दौरान 498 चरमपंथी गिरफ्तार किए गए हैं और 461 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।

सुरक्षाबलों के लिए अब अबूझ पहेली नहीं बस्तर के जंगल, छत्तीसगढ़ में नक्सलियों पर ऐसे हुआ सबसे बड़ा प्रहार

 बस्तर वर्ष 2024 में छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार आने के बाद से ही बस्तर के कोर इलाके में अब तक 32 नए कैंप खोले गए हैं नक्सल मोर्चे पर सरकार की बदली रणनीति से नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन भी तेज हुए हैं। पुलिस अफसरों की मानें तो जनवरी से लेकर अब तक बस्तर के कोर इलाके में फोर्स की नक्सलियों से 72 मुठभेड़ हो चुकी हैं, जिसमें 137 नक्सली मारे गए हैं। इन दिनों फोर्स का पूरा फोकस इस वक्त अबूझमाड़ पर है। यह नक्सलियों की अघोषित राजधानी कही जाती है। इसलिए फोर्स यहां नक्सलियों का प्रभाव कम करने में जुटी हुई है। नक्सलियों के ठिकाने पर लगातार फोर्स हमले बोल रही है। हर हमले के बाद नक्सलियों को बड़ा नुकसान हो रहा है। बस्तर के नक्सल इतिहास में कभी इतनी बड़ी संख्या में नक्सली नहीं मारे गए थे जितने पिछले छह महीने के भीतर मारे गए हैं। इससे नक्सलियों और उनके कैडर में दहशत का माहौल है। यही कारण है कि अब तक 6 महीने में 400 से अधिक नक्सलियों ने सरेंडर किया है। आमतौर पर एक साल में औसतन 500 समर्पण हुआ करते थे।   अबूझमाड़ इलाके में अब नहीं रहेगी नक्सलियों की दहशत नक्सलियों के खिलाफ किसी एक ऑपरेशन में सुरक्षा बलों की यह सबसे बड़ी सफलताओं में से एक है। सुरक्षा बलों के लिए ये मुठभेड़ कई मायनों में अहम है। यह सफल ऑपरेशन जंगल के बीच अबूझमाड़ के अंदर सुरक्षा बलों के प्रवेश का प्रतीक है। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ इलाके को नक्सलियों का कोर इलाका माना जाता है। पिछले तीन दशकों से यह इलाका सुरक्षाबलों के लिए चुनौती बना हुआ है। जंगलों और पहाड़ों के बीच का यह इलाका नक्सलियों के लिए अभेद्य गढ़ बन गया। इस मुठभेड़ ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि पिछले कई वारदातों में शामिल नक्सलियों का सफाया हो गया है। अपने पांच कोर इलाके में सिमटे नक्सली बस्तर में फोर्स की सक्रियता के चलते नक्सली अब अपने पांच कोर इलाके तक ही सिमटकर रह गए हैं, जिसमें प्रमुख अबूझमाड़, इंद्रावती नेशनल पार्क, बैलाडीला की पहाडिय़ों का तराई वाला इलाका, सुकमा जिले में बासागुड़ा-जगरगुंडा- भेज्जी ट्राएंगल व बीजापुर के पामेड़ इलाके में नक्सलियों की बटालियन नंबर 1 का इलाका शामिल है। अन्य इलाकों में फोर्स की मौजूदगी व कैंप स्थापना के बाद नक्सलियों का प्रभाव कम हुआ है। अबूझमाड़ व नेशनल पार्क इलाके को अब फोर्स ने जब से टारगेट किया है तब से इस इलाके में नक्सलियों के नई भर्ती शिविर और ट्रेनिंग कैंप आयोजित नहीं हो पा रहे हैं। 2018 से 2023 तक घटनाओं और हताहतों की संख्या यहां पिछले कुछ वर्षों में बस्तर में नक्सली आतंकी घटनाओं और हताहतों की संख्या को दर्शाने वाला डेटा चार्ट है, जिसे हिंदी में लेबल किया गया है। यह चार्ट 2018 से 2023 तक घटनाओं और हताहतों की संख्या में गिरावट का रुझान दर्शाता है।  गांवों में फैले मिलिशिया कैडर भी हुए कमजोर नक्सलियों के पीएलजीए के सशस्त्र लड़ाके अब बस्तर के गांवों में फैले मिलिशिया सदस्यों तक अपनी पहुंच नहीं बना पा रहे हैं। गांवों में फोर्स के कैंप स्थापित होने के बाद मिलिशिया सदस्यों की मीटिंग तक लड़ाके नहीं ले पा रहे हैं। अब मिलिशिया कैडर नक्सलियों के प्रभाव से बाहर निकलते दिख रहे हैं। बस्तर में नक्सलियों के लिए यह बड़ा नुकसान है।  अबूझमाड़ से शिफ्ट हो रहे नक्सलियों के टॉप लीडर अबूझमाड़ की सीमा पांच जिलों में फैली हुई हैं जिसमें कांकेर, नारायणपुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा और बस्तर जिला शामिल है। फोर्स का दबाव जिस तरह से अबूझमाड़ में बढ़ा है उसके बाद से नक्सलियों के टॉप लीडर वहां से लगातार शिफ्ट हो रहे हैं। जिनमें नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी के सचिव बसव राजू, एम वेणुगोपाल उर्फ भूपति उर्फ सोनू, पक्का हनुमंतलु उर्फ गणेश उइके और दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सचिव केआरसी रेड्डी उर्फ गुड़सा उसेंडी आदि शामिल हैं। कैंपों की स्थापना के चलते नक्सली हुए कमजोर नक्सल मोर्चे पर पुलिस की इस बड़ी सफलता के पीछे नक्सलियों के अभेद इलाकों में नए कैंपों की स्थापना को बड़ी वजह बताया जा रहा है. जिससे नक्सल संगठन की पकड़ अपने आधार इलाकों में कमजोर पड़ती जा रही है. बीजापुर का गंगालूर इलाका जिसे कभी नक्सलियों की अघोषित उपराजधानी भी कहा जाता था, अब यहां मुतवेण्डी, कावड़गांव, डुमरीपालनार के अलावा बीजापुर-सुकमा जिले के सरहदी इलाके टेकुलगुड़म, गुंडेम के साथ दुर्दांत नक्सली हिंड़मा के गढ़ उसके गांव पुवर्ती में फोर्स कैंप बना चुकी है. बताया जा रहा है कि अब वहां पीएलजीए लड़ाके ही अपना गढ़ बचाए रखने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। अधिकांश नक्सली एमएमसी, एओबी व टीटीके जोन में शिफ्ट होने की जानकारी मिल रही है। दुर्दांत नक्सली हिड़मा के गांव पूवर्ती में भी इसी साल कैंप स्थापित किया गया जो कि बस्तर में नक्सल मोर्चे पर मिली बड़ी कामयाबियों में से एक थी। हिड़मा अब अपना इलाका छोड़ बस्तर के अलग-अलग क्षेत्र में मूवमेंट कर रहा है। नक्सलियों की इन जंगलों में बसती है जान अबूझमाड़ की पहाड़ियां और जंगल दक्षिणी छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में लगभग 4,000 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैली हुई हैं, जो मुख्य रूप से कांकेर के ठीक दक्षिण में नारायणपुर, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिलों को कवर करती हैं। पहाड़ी इलाका, जंगल, सड़क, बुनियादी सुविधाओं का न होना और सशस्त्र विद्रोहियों की उपस्थिति से इस इलाके का एक बड़ा हिस्सा अब तक सरकारी सर्वेक्षण के दायरे से बाहर रहा है। यदि इसके भूभाग की बात करें तो इस इलाके का क्षेत्रफल गोवा जैसे राज्य से बड़ा है। इन जंगलों का उपयोग नक्सलियों द्वारा आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से ओडिशा (पूर्व में) आने- जाने के लिए एक गलियारे के रूप में किया जाता है। अब तक इतने नक्सली मारे गए 2018: 125 2019: 79 2020: 44 2021: 48 2022: 31 2023: 24 2024 में अब तक 137  नक्सल मुक्त बस्तर की ओर बढ़ रहे बस्तर को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में हम तेजी से बढ़ रहे हैं। फोर्स को बीते छह महीने में कई बड़ी सफलताएं मिली हैं। नक्सलियों का प्रभाव क्षेत्र सिमटता जा रहा है। नक्सल प्रभाव वाले दो तिहाई क्षेत्र में अब नक्सलियों को जनता ने भी नकार दिया … Read more

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