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सुधाकर की पत्नी, ककरला गुरु स्मृति भी सक्रिय नक्सली, नक्सलियों का ‘माइंड’ था सुधाकर

रायपुर  पुलिस और सुरक्षा बलों की मोस्ट वांटेड लिस्ट में प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की केंद्रीय समिति के कम से कम 15 सदस्य अभी भी शामिल हैं। इन 15 सदस्यों पर जिनकी अलग-अलग भूमिकाएं काफी बड़ा इनाम है। इस लिस्ट के नक्सलियों पर ₹40 लाख से लेकर ₹1 करोड़ तक के इनाम घोषित हैं। सोमवार को बीजापुर में मुठभेड़ में मारा गया वरिष्ठ नेता सुधाकर इस लिस्ट में 16वें नंबर पर था। सबसे वांछित व्यक्ति मुप्पल्ला लक्ष्मणा राव उर्फ गणपति सेंट्रल कमेटी सदस्य और पूर्व महासचिव है। गणपति नंबला केशवा राव उर्फ बसवराजू से पहले केंद्रीय कमेटी का महासचिव था, जो 21 मई को एक मुठभेड़ में मारा गया था। लिस्ट में खूंखार महिला नक्सली भी लिस्ट में एक और नाम सुजाता उर्फ कल्पना का है, इसकी उम्र 60 वर्ष से अधिक मानी जा रही है। वह माओवादी नेता किशन की विधवा है जो 2011 में पश्चिम बंगाल में एक मुठभेड़ में मारा गया था। अधिकारियों ने बताया कि सुजाता अभी भी सेंट्रल कमेटी सदस्य है और दक्षिण बस्तर डिवीजनल कमेटी की प्रभारी भी है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर ₹40 लाख का इनाम घोषित किया है, लेकिन अन्य राज्यों से उनकी गिरफ्तारी पर कुल इनाम ₹1 करोड़ से अधिक हो सकता है। 2025 की नक्सली घटनाएं 5 जून – बीजापुर में 1 करोड़ इनामी नक्सली ढेर 21 मई – नारायणपुर में 27 नक्सली ढेर, डेढ़ करोड़ का इनामी बसवा राजू भी मारा गया। 14 मई – कुर्रेगुट्टा पहाड़ पर चला देश का सबसे बड़ा ऑपरेशन, 31 नक्सली ढेर। 10 फरवरी – बीजापुर 31 नक्सली ढेर, इनमें 11 महिलाएं और 20 पुरुष शामिल 2 फरवरी- बीजापुर के गंगालूर में मुठभेड़, 8 नक्सली ढेर 20-21 जनवरी- गरियाबंद जिले में मुठभेड़, 16 नक्सलियों के शव बरामद 16 जनवरी- छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर पर, कांकेर पुजारी गांव में 18 नक्सली ढेर 12 जनवरी- बीजापुर के मद्देड़ इलाके में मुठभेड़, 2 महिला नक्सली समेत 5 नक्सली ढेर 9 जनवरी- सुकमा-बीजापुर बॉर्डर में 3 नक्सली ढेर 6 जनवरी – IED ब्लास्ट की चपेट में जवानों की गाड़ी आई, 8 जवान शहीद, एक ड्राइवर की भी मौत 4 जनवरी- अबूझमाड़ के जंगल में मुठभेड़, एक महिला नक्सली समेत 5 नक्सली ढेर, एक DRG जवान शहीद पुलिस प्रशासन के प्रयास जारी सुरक्षा बलों की मोस्ट वांटेड लिस्ट में भाकपा (माओवादी) के 15 सदस्य अभी भी शामिल हैं। इनमें गणपति, सुजाता और अभय जैसे बड़े नाम हैं। इन पर लाखों रुपये के इनाम हैं। ये लोग पार्टी के थिंक टैंक हैं और रणनीति बनाते थे। अब इनकी संख्या घट गई है। पुलिस इन लोगों को पकड़ने की कोशिश कर रही है। नक्सलियों के लिए बड़ा झटका सुधाकर की मौत को मध्य और दक्षिणी भारत में विद्रोही समूह के राजनीतिक और ऑपरेशनल कोर के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। मौत के समय, सुधाकर CPI (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी में तकनीकी टीम का प्रुमख था। साथ ही दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के तहत रीजनल पॉलिटिकल स्कूल (RePoS) चलाते था। ये दोनों ही कैडर को विचारधारा सिखाने और ट्रेनिंग देने के लिए बहुत जरूरी थे। आंध्र प्रदेश में हुआ था जन्म सुधाकर का जन्म आंध्र प्रदेश के एलुरु जिले के प्रागदावरम गांव में हुआ था। वह वेलामा परिवार से था। उसने एलुरु के सी. आर. रेड्डी कॉलेज में पढ़ाई की। फिर विजयवाड़ा में आयुर्वेदिक मेडिसिन कोर्स में दाखिला लिया, लेकिन पढ़ाई छोड़ दी। 1980 के दशक के मध्य तक, वह वामपंथी विचारधारा से प्रभावित होकर 1986 में पीपुल्स वॉर ग्रुप में शामिल हो गया। इस तरह से वह माओवादी के रूप में 40 साल का सफर पूरा किया है। शांति वार्ता के दौरान लोगों के सामने आया सुधाकर 2004 में आंध्र प्रदेश सरकार और नक्सलियों के बीच हुई शांति वार्ता के दौरान लोगों के सामने आया। रामाकृष्ण और गणेश जैसे बड़े नेताओं के साथ, वह गुत्तीकोंडा बिलम में एक जनसभा को संबोधित करने के लिए जंगलों से बाहर आया। हैदराबाद में 15 से 18 अक्टूबर, 2004 तक चली बातचीत में युद्धविराम, भूमि अधिकार और कैदियों की रिहाई पर ध्यान दिया गया। हालांकि, बातचीत जल्द ही टूट गई। इसके बाद सुधाकर वापस भूमिगत हो गया। इस बार वह मध्य भारत के घने जंगलों में शिफ्ट हो गया। माड क्षेत्र में एक्टिव था सुधाकर 2007 से, सुधाकर मुख्य रूप से माड क्षेत्र में सक्रिय था। वह माओवादी विचारधारा के प्रशिक्षण स्कूल RePoS और MoPoS (मोबाइल पॉलिटिकल स्कूल) की देखभाल करता था। उसने CPI (माओवादी) के तकनीकी विंग में भी अहम भूमिका निभाई। वह संचार और उपकरण लॉजिस्टिक्स का काम संभालता था। जो गुरिल्ला युद्ध के लिए बहुत जरूरी था। उसे तेलुगु, हिंदी और गोंडी भाषाएं आती थी। माओवादियों को टेक्निकल एजुकेशन और तकनीकी ज्ञान से जुड़ा है। यह सुधाकर की दुर्लभ क्षमता थी। पत्नी भी है सक्रिय माओवादी सुधाकर की पत्नी, ककरला गुरु स्मृति उर्फ उमा भी एक सक्रिय माओवादी है। वह दंडकारण्य क्षेत्र में राज्य समिति की सदस्य है। आंध्र और ओडिशा में कई मामले दर्ज सुधाकर पर आंध्र प्रदेश और ओडिशा में कई मामले दर्ज थे। इनमें मुठभेड़, विस्फोट और शस्त्र और विस्फोटक अधिनियमों के उल्लंघन जैसे मामले शामिल थे। ये मामले सिलेरू, पाडेरू और कोरापुट जैसे इलाकों में हुए थे। 2003 में, बल्लुनिरि गांव के पास एक मुठभेड़ में दो माओवादी मारे गए थे। इस मामले में सुधाकर का नाम भी था। मलकानगिरी और अन्य वन क्षेत्रों में समन्वित विस्फोटों और घात लगाकर किए गए हमलों में उनकी भूमिका ने उन्हें एक टॉप लेवल का ऑपरेटिव बना दिया। उस पर 50 लाख रुपए का नकद इनाम था। आंध्र प्रदेश के एक वरिष्ठ एंटी-नक्सल खुफिया अधिकारी ने बताया कि सुधाकर की मौत माओवादी आंदोलन के लिए एक गंभीर झटका है। खासकर राजनीतिक शिक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में। सुधाकर का एक छात्र विद्रोही से टॉप माओवादी रणनीतिकार बनने का सफर, नक्सली आंदोलन के इतिहास को दर्शाता है। यह राजनीतिक बातचीत और सशस्त्र विद्रोह के बीच झूलता रहा। उसकी मौत सुरक्षा बलों के लिए एक सामरिक जीत है। लेकिन इसका गहरा असर माओवादी रैंकों के भीतर वैचारिक गहराई और तकनीकी तालमेल की कमी के रूप में दिख सकता है।

सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिले की सूची से बालाघाट हुआ बाहर, अब देश मे केवल 6 ज़िलें सर्वाधिक नक्सल प्रभावित

बालाघाट नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को लेकर भारत सरकार के गृह मंत्रालय की ताजा समीक्षा में बालाघाट जिले को बड़ी राहत मिली है। एक समय देश के 12 सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिलों में शामिल रहा बालाघाट अब इस सूची से बाहर हो चुका है। हालांकि, जिले को अभी ‘डिस्ट्रिक्ट ऑफ कंसर्न’ की श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि यहां अभी भी सतर्कता की जरूरत है, लेकिन हालात पहले से काफी सुधरे हैं। इस बदलाव की पुष्टि बालाघाट के पुलिस अधीक्षक नगेंद्र सिंह ने की है। एसपी ने दी जानकारी एसपी के मुताबिक, बीते वर्षों में सुरक्षा बलों की सघन कार्रवाई और निरंतर प्रयासों के चलते जिले में नक्सली गतिविधियों में उल्लेखनीय कमी आई है। नक्सलियों के कई मंसूबों को सुरक्षा बलों ने विफल किया है और अब जिले में नक्सलियों का दबदबा पहले जैसा नहीं रहा। गृह मंत्रालय की हालिया समीक्षा रिपोर्ट में भी यह स्पष्ट हुआ है कि अब देश में 58 की बजाय केवल 38 जिले ही नक्सल प्रभावित हैं। इनमें भी अब केवल 6 जिले ही सर्वाधिक नक्सल प्रभावित की श्रेणी में आते हैं। डिस्ट्रिक्ट ऑफ लिगेसी की श्रेणी में ये जिले मध्य प्रदेश के अन्य दो जिले मंडला और डिंडोरी, जहां पहले नक्सल प्रभाव दर्ज किया गया था, उन्हें अब ‘डिस्ट्रिक्ट ऑफ लिगेसी’ की श्रेणी में रखा गया है। यह श्रेणी उन क्षेत्रों के लिए बनाई गई है जहां पहले नक्सलियों की सक्रियता रही है लेकिन वर्तमान में हालात काफी हद तक सामान्य हो चुके हैं। इन दोनों जिलों को अब निरंतर निगरानी के साथ विकास की मुख्यधारा में लाने के प्रयास तेज किए जाएंगे। पांच साल में नक्सलियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का यह सकारात्मक परिणाम है। बालाघाट पुलिस ने नक्सल प्रभावित क्षेत्र में कैंप स्थापित किए। नक्सल उन्मूलन अभियान चलाए। साथ ही क्षेत्र में सरकारी योजनाओं से विकास कार्य भी हुए। पहले देश में 58 नक्सल प्रभावित जिले थे, जिनमें 12 सर्वाधिक प्रभावित जिलों में बालाघाट भी शामिल था। अब यह संख्या घटकर 38 रह गई है। इनमें केवल 6 जिले सर्वाधिक प्रभावित श्रेणी में हैं। 2020 से फरवरी 2025 के बीच बालाघाट पुलिस ने कई एनकाउंटर में करोड़ों रुपए के इनामी नक्सलियों को मार गिराया। इससे जिले के जंगलों को सुरक्षित आश्रय मानने वाले नक्सलियों में पुलिस का खौफ है। कोर जोन में अब केवल एक दलम सक्रिय है। एसपी नगेन्द्र सिंह के अनुसार, श्रेणी में बदलाव के बावजूद नक्सल उन्मूलन के लिए मिली सुरक्षा कंपनियों के बलों में कोई कमी नहीं होगी। पुलिस का लक्ष्य मार्च 2026 तक जिले से नक्सल गतिविधियों को पूरी तरह समाप्त करना है, ताकि इस क्षेत्र के लोग मुख्य धारा से जुड़ सकें। उन्होंने बताया कि जिले में नक्सलियों की संख्या में भारी कमी आई है। पहले तीन दलम थे, अब एक दलम रह गया है, जिसमें 8 से 10 नक्सली हैं, जिसे लेकर हम निरंतर प्रभाव बनाए हुए हैं। मीडिया के माध्यम से नक्सलियों से अपील है कि वह प्रदेश की आत्मसमर्पण नीति के तहत, आत्मसमर्पण करें और मुख्य धारा से जुड़ें और यदि वे नहीं आएंगे तो कार्रवाई जारी रहेगी। नक्सल प्रभाव वाले जिलों में गिरावट गृह मंत्रालय की रिपोर्ट यह भी बताती है कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा मिलकर अपनाई गई रणनीति, जिसमें सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ विकास कार्यों और स्थानीय संवाद शामिल हैं, वास्तव में प्रभावशाली रही है। देशभर में नक्सल प्रभाव वाले जिलों की संख्या 58 से घटकर 38 हो गई है, जो नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने का संकल्प पुलिस अधीक्षक सिंह ने कहा कि भले ही बालाघाट अब सर्वाधिक प्रभावित जिलों की सूची से बाहर हो गया है, लेकिन पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतेंगी। उनका कहना है कि नक्सलवाद को जिले से पूरी तरह समाप्त करने का अभियान लगातार जारी रहेगा और भविष्य में बालाघाट को किसी भी नक्सली श्रेणी से बाहर करने का लक्ष्य है।

नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी जिलों में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में विशेष समितियों के गठन के निर्देश दिए गए

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य में नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों के लिए एक महत्त्वपूर्ण कदम उठाते हुए नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत पुनर्वास नीति-2025 को औपचारिक रूप से लागू कर दिया है। गृह विभाग द्वारा 28 मार्च 2025 को जारी अधिसूचना के अनुसार, इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी जिलों में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में विशेष समितियों के गठन के निर्देश दिए गए हैं। यह नीति, नक्सल हिंसा में पीड़ित हुए व्यक्तियों एवं परिवारों जैसे कि मृत्यु, गंभीर घायल या स्थायी अपंगता के शिकार लोगों के साथ-साथ आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास और राहत के उद्देश्य से तैयार की गई है। जिला स्तर पर गठित की जाएगी पुनर्वास समिति अधिसूचना के अनुसार, प्रत्येक जिले में गठित होने वाली समिति में कलेक्टर अध्यक्ष होंगे, जबकि पुलिस अधीक्षक को सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अतिरिक्त वनमंडलाधिकारी, जिला पंचायत के सीईओ, कलेक्टर द्वारा नामांकित दो अन्य अधिकारी तथा सशस्त्र बलों के प्रतिनिधियों को भी समिति में शामिल किया जाएगा। नोडल अधिकारी होंगे नियुक्त प्रत्येक जिले एवं सब-डिविजनल स्तर पर एक-एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी, जिनका मोबाइल नंबर व ई-मेल पता राज्य शासन को प्रेषित किया जाएगा। यह अधिकारी समस्त पुनर्वास कार्यों की निगरानी करेंगे। गृह विभाग ने निर्देशित किया है कि राज्य गठन के उपरांत से अब तक के सभी पीड़ित प्रकरणों को चिन्हित किया जाए और आत्मसमर्पित नक्सलियों का चयन कर राहत एवं पुनर्वास की कार्यवाही प्राथमिकता पर की जाए। इस नीति के अंतर्गत एक विशेष पोर्टल विकसित किया जा रहा है, जिसमें प्रत्येक पीड़ित एवं आत्मसमर्पित व्यक्ति की जानकारी दर्ज की जाएगी और उन्हें एक यूनिक आईडी प्रदान की जाएगी। संबंधित अधिकारी इस पोर्टल के डैशबोर्ड का नियमित रूप से अवलोकन कर राहत एवं पुनर्वास के कार्यों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करेंगे। गृह विभाग ने कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि वे इस नीति के अंतर्गत निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए राहत एवं पुनर्वास की कार्यवाही को समय सीमा में प्रभावी रूप से पूरा करेंगे।

दंतेवाड़ा-बीजापुर सीमा पर एनकाउंटर, एक महिला नक्सली को सुरक्षाबलों ने मार गिराया

दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से इस वक्त बड़ी खबर सामने आई है। दंतेवाड़ा-बीजापुर बॉर्डर पर जवानों -नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई है। इस एनकाउंटर में एक महिला नक्सली की मारे जाने की खबर सामने आई है। इसके साथ ही जवानों ने बड़ी संख्या में हथियार बरामद किया है। महिला नक्सली का शव बरामद कर लिया गया है। दोनों ओर से फायरिंग जारी है। मिली जानकारी के मुताबिक, सोमवार सुबह नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षाबलों की टीम निकली थी। करीब 9 बजे जवानों का सामना नक्सलियों से हो गया। दोनों ओर से फायरिंग शुरू हो गई। पुलिस ने नक्सलियों से इंसास राइफल, गोला-बारूद और अन्य सामान बरामद किया है। फिलहाल, क्षेत्र में मुठभेड़ और सर्चिंग जारी है। दो दिन पहले सुकमा में 17 मारे सुकमा और दंतेवाड़ा जिले की सरहद पर शनिवार सुबह पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। DRG (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) और CRPF के 500-600 जवानों ने 17 नक्सलियों को मार गिराया था। इनमें 11 महिला नक्सली हैं। मुठभेड़ केरलापाल थाना क्षेत्र के उपमपल्ली में हुई थी। घटना स्थल पर सर्चिंग जारी मुठभेड़ स्थल से अब तक एक इंसास राइफल हथियार सहित एक महिला नक्सली का शव, गोला बारूद के साथ अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएं बरामद हुई हैं। फिलहाल, घटना स्थल पर सर्चिंग जारी है। इससे पहले एक अन्य घटना में छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के केरलापाल इलाके में शनिवार को सुरक्षा बलों ने एक बड़ी मुठभेड़ में 18 नक्सलियों को मार गिराया था। मिली जानकारी के मुताबिक,  जिला दंतेवाड़ा और बीजापुर के सरहदी क्षेत्रान्तर्गत माओवादी विरोधी अभियान पर सुरक्षा बल की टीम निकली थी। अभियान के दौरान आज सुबह नौ बजे से माओवादियों और सुरक्षाबलों के बीच लगातार फायरिंग जारी है। मुठभेड़ स्थल से अब तक एक इंसास राइफल हथियार सहित एक महिला नक्सली का शव, गोला बारूद के साथ अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएं बरामद हुई हैं। फिलहाल, घटना स्थल पर सर्चिंग जारी है। छत्तीसगढ़ में 50 नक्सलियों का आत्मसमर्पण बीजापुर जिले में रविवार को 50 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। जिनमें से 14 पर कुल 68 लाख रुपये का इनाम था। एक अधिकारी ने बताया था कि उन्होंने राज्य पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने हथियार डाले। कुल 68 लाख रुपये का इनाम उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले 50 लोगों में से छह पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम था, जिनमें से तीन पर पांच-पांच लाख रुपये का इनाम था। पांच पर एक-एक लाख रुपये का इनाम था। जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी), बस्तर फाइटर्स, स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ), सीआरपीएफ और इसकी विशिष्ट इकाई कोबरा (कमांडो बटालियन फॉर रेसोल्यूट एक्शन) ने उनके आत्मसमर्पण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पीएम मोदी के दौरे के कुछ घंटे पहले आत्मसमर्पण एसपी ने जानकारी देते हुए कहा था कि आंदोलन छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने वाले नक्सलियों के लिए सरकार की नीति के अनुसार उनका पुनर्वास किया जाएगा। यह आत्मसमर्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राज्य के दौरे से कुछ घंटे पहले हुआ। वह 33,700 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखन वाले हैं। संयोग से सुरक्षा बलों ने बीते शनिवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के सुकमा और बीजापुर जिलों में दोहरे मुठभेड़ों में 11 महिलाओं सहित 18 नक्सलियों को मार गिराया था, जो 31 मार्च, 2026 से पहले नक्सलवाद को खत्म करने के मिशन में एक बड़ी सफलता है। 2024 में 792 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण इस साल अब तक राज्य में अलग-अलग मुठभेड़ों में 134 नक्सलियों को मार गिराया गया है। उनमें से 118 बस्तर संभाग में समाप्त हुए। पुलिस के अनुसार, 2024 में सात जिलों वाले बस्तर क्षेत्र में कुल 792 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। नक्सलियों की मौजूदगी की विशेष जानकारी क्षेत्र में नक्सलियों की मौजूदगी के बारे में विशेष खुफिया सूचना मिली थी। जिले के केरलापाल थानाक्षेत्र के गोगुंडा की पहाड़ी पर नक्सली कमांडर जगदीश के होने की सूचना मिली थी, जिसके बाद डीआरजी और सीआरपीएफ के जवान रवाना हुए। नक्सलियों को दी जाएगी सहायता राशि वहीं अधिकारियों ने बताया कि नक्सलियों ने माओवादियों की खोखली और अमानवीय विचारधारा से निराश होकर तथा राज्य सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर सरेंडर करने का फैसला किया है। अधिकारियों ने बताया कि सरेंडर करने वाले माओवादियों को पुनर्वास नीति के तहत 25-25 हजार रूपये की सहायता राशि प्रदान की गई है। उन्हें छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मिलने वाली अन्य सुविधाएं भी दी जाएंगी।  

दंतेवाड़ा : मुठभेड़ में मारा गया 25 लाख का इनामी नक्सली, 83 दिन में 100 माओवादी ढेर

दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में मंगलवार को सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में तीन नक्सली मारे गए हैं. इनमें 25 लाख रुपए का इनामी माओवादी सुधीर उर्फ सुधाकर उर्फ मुरली भी शामिल है. इसके साथ ही घटनास्थल से इंसास राइफल, 303 राइफल सहित भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया गया है. सुरक्षा बलों द्वारा इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है. पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने बताया कि दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों की सीमा पर स्थित गीदम थाना क्षेत्र के गिरसापारा, नेलगोड़ा, बोड़गा और इकेली के सरहदी क्षेत्र में नक्सलियों की मौजूदगी सूचना मिली थी. इसके बाद डीआरजी और बस्तर फाइटर्स की टीम माओवादी विरोधी अभियान पर निकली. सुरक्षा बलों को देखते ही नक्सली गोलीबारी करने लगे. इसके बाद जवाबी फायरिंग के दौरान तीन नक्सली मौके पर ही ढ़ेर हो गए. इनमें एक की पहचान सुधीर उर्फ सुधाकर उर्फ मुरली के रूप में हुई, जिसके सिर पर 25 लाख रुपए का इनाम था. दो अन्य नक्सलियों की पहचान की जा रही है. तीनों के शव को कब्जे में ले लिया गया है. मुठभेड़ स्थल से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुएं मिली हैं. पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज श्री सुन्दरराज पी. ने बताया कि सरकार के निर्देश पर लोगों की सुरक्षा के लिए डीआरजी, एसटीएफ, बस्तर फाइटर्स, कोबरा, सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईडीबीपी और सीएएफ की संयुक्त टीम पूरे इलाके में लगातार सक्रिय रहती है. पिछले 83 दिनों में 100 से अधिक हार्डकोर माओवादियों के शव बरामद किए गए हैं. बताते चलें कि पिछले हफ्ते छत्तीसगढ़ के बीजापुर और दंतेवाड़ा जिले में सुरक्षाबलों ने नक्सलियों पर बड़ा प्रहार करते हुए दो अलग-अलग ऑपरेशन में 22 नक्सलियों को ढेर कर दिया. इस कार्रवाई के दौरान एक जवान भी शहीद हो गया. सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ स्थल से भारी मात्रा में हथियार, गोला बारूद और दैनिक उपयोग की वस्तुएं बरामद किया था. सुरक्षाबलों के इस सफल ऑपरेशन पर खुशी जाहिर करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था, ”नक्सलमुक्त भारत अभियान की दिशा में हमारे जवानों ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है. छत्तीसगढ़ के बीजापुर और कांकेर में हमारे सुरक्षा बलों के 2 अलग-अलग ऑपरेशन में 22 नक्सली मारे गए. मोदी सरकार नक्सलियों के विरुद्ध रुथलेस अप्रोच से आगे बढ़ रही है.” गृह मंत्री ने कहा कि 31 मार्च 2026 तक देश नक्सल मुक्त हो जाएगा. 20 मार्च को सुरक्षा बलों ने राज्य के बीजापुर और कांकेर जिलों में दो मुठभेड़ों में 30 नक्सलियों को मार गिराया. ताजा कार्रवाई के साथ ही इस साल अब तक राज्य में अलग-अलग मुठभेड़ों में 116 नक्सली मारे जा चुके हैं. इनमें से 100 नक्सली बीजापुर और दंतेवाड़ा में मारे गए थे    

प्रदेश पुलिस ने 18 दिनों के अंदर दूसरी मुठभेड़ एक और नक्सली को मार गिराया

मंडला। मध्य प्रदेश पुलिस ने 18 दिनों के अंदर दूसरी मुठभेड़ एक और नक्सली को मार गिराया है। मंडला जिले में पुलिस बल, हाकफोर्स और नक्सलियों के बीच रात कान्हा नेशनल पार्क के चिमटा के जंगल में आमना-सामना हो गया। रात आठ बजे के करीब पुलिस ने एक पुरुष नक्सली को मार गिराया। आईजी संजय कुमार के मुताबिक जंगल में बल और नक्सलियों के बीच चली फायरिंग में एक नक्सली मारा गया है। पुलिस ने शव बरामद कर लिया है। रात हो जाने के कारण शव की शिनाख्त नहीं हो सकी है। राशन लेने के लिए नक्सली गांव में आए थे आज पता चल सकेगा कि नक्सली किस दलम में सक्रिय था और उस पर कितना इनाम था। पुलिस सूत्रों के अनुसार राशन लेने के लिए नक्सली गांव में आए थे, इसी दौरान पुलिस से उनका सामना हो गया। पुलिस ने दो अन्य सहयोगियों को भी पकड़ा है। फरवरी 2021 में भी हुई थी मुठभेड़ घना जंगल होने के कारण सर्चिंग अभियान तेज किया गया है। मौके पर अतिरिक्त बल भी भेजा गया है। बता दें कि 12 फरवरी 2021 को मंडला जिले के मोतीनाला थाना क्षेत्र के ग्राम लालपुर में पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में माओवादी मैनू और गीता मारे गए थे। तीन साल में 17 नक्सली ढेर नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत बालाघाट पुलिस को पिछले तीन सालों में बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस, हाकफोर्स और सीआरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई ने अगस्त 2022 से 19 फरवरी 2025 तक कुल 17 नक्सलियों को मार गिराने में सफलता दर्ज की है। इनमें सभी नक्सली इनामी और अधिकतर हार्डकोर थे। 19 फरवरी को पुलिस ने गढ़ी थाना क्षेत्र में सूपखार के रौंदा जंगल में चार हार्डकोर महिला नक्सली आशा, शीला, रंजीता और लख्खे मड़ावी को मुठभेड़ में मार गिराया था। इन चारों नक्सलियों पर 62 लाख रुपये का इनाम था। 2022 से अब तक मारे नक्सलियों के पास से पुलिस ने मुठभेड़ में तीन एके-47 बरामद की है।

खुलासा : शादी करने वाले कैडर आंदोलन से मुंह मोड़ सकते हैं, नतीजतन, शादी करने वाले किसी भी कैडर के लिए नसबंदी अनिवार्य है

जगदलपुर छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में गृहमंत्री अमित शाह के साथ मिलने आए पूर्व नक्सलियों ने नक्सली नेताओं के बारे में कई खुलासे किए हैं. उनका कहना है कि यदि कोई नक्सल कैडर शादी करना चाहता है, तो उसे पहले नसबंदी करवानी पड़ती है. माओवादी शब्दावली में नसबंदी एक बहुत ही आम शब्द है. शादी से वरिष्ठ सीपीआई (माओवादी) नेताओं के निर्देश पर इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. तेलंगाना के एक पूर्व नक्सली को शादी से पहले नसबंदी की प्रक्रिया से गुजरने का निर्देश दिया गया था. कई साल बाद जब उसने सरेंडर किया, तो प्रक्रिया को उलटने के लिए दूसरी सर्जरी करवाई. इसके बाद एक लड़के का पिता बन पाया. ज्यादातर नक्सली सरेंडर के बाद इसी तरह परिवार शुरू करने के लिए प्रक्रिया को चुनते हैं.  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इसके प्रभाव से अवगत कराया गया. पूर्व नक्सली ने बताया, “जब मैं सीपीआई (माओवादी) का सदस्य था, तो मुझे शादी से पहले नसबंदी करवानी पड़ी. लेकिन जब मैं सरेंडर के बाद मुख्यधारा में शामिल हो गया, तो मैंने एक ऑपरेशन करवाया ताकि मैं पिता बन सकूं. दूसरे ऑपरेशन के बाद, मैं एक बच्चे का पिता बन गया.” दरअसल, नक्सल नेताओं के बीच ये धारणा है कि बच्चे पैदा होने के बाद उनके कैडर के लोग परिवार के मोह में पड़ जाएंगे. इस वजह से नक्सल आंदोलन को नुकसान पहुंचेगा. इस बात की भी आशंका है कि शादी करने वाले कैडर आंदोलन से मुंह मोड़ सकते हैं. नतीजतन, शादी करने वाले किसी भी कैडर के लिए नसबंदी अनिवार्य है. छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली मरकम दुला ने कहा कि नक्सली नेता नहीं चाहते कि कोई भी सदस्य भावनात्मक रूप से अपनी संतान से जुड़े, इसलिए ‘नसबंदी’ करवा दी जाती है. ओडिशा के मलकानगिरी के एक पूर्व माओवादी ने भी ऐसी ही कहानी साझा की है. सुकांति मारी ने कहा, “मेरे साथी कैडर से शादी करने से पहले उसे ‘नसबंदी’ करवानी पड़ी.” उसके पति को पुलिस मुठभेड़ में मार दिया गया. इसके बाद में उसने अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. इस बातचीत के दौरान अमित शाह ने कहा कि वो इस बात से बेहद संतुष्ट हैं कि युवा हिंसा का रास्ता छोड़कर हथियार डाल रहे हैं. उन्होंने नक्सलियों से हथियार छोड़ने और मुख्यधारा में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि उनका पुनर्वास सरकार की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा, “मैं नक्सलियों से अपील करता हूं कि कृपया आगे आएं. हथियार छोड़ दें, आत्मसमर्पण करें और मुख्यधारा में शामिल हों. आपका पुनर्वास हमारी जिम्मेदारी है.” केंद्र ने आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों और नक्सलियों के लिए पुनर्वास नीति बनाई है.  

बालाघाट में जवानों ने मुठभेड़ में 14 लाख का इनामी नक्सली ढेर, कई राज्यों में फैलाई थी दहशत

बालाघाट  प्रदेश के बालाघाट जिले में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में सोमवार को 14 लाख रुपये का इनामी नक्सली मारा गया। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।नक्सल विरोधी अभियान के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) जयदीप प्रसाद ने भोपाल में संवाददाताओं को बताया कि यह मुठभेड़ हट्टा थाना अंतर्गत कठियाटोला वन क्षेत्र में हुई। वह मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में नक्सली गतिविधियों में संलिप्त था और वह उकास केबी डिवीजन का एसीएम था. उसके पास से 315 बोर की राइफल और वायरलेस सेट बरामद किया गया है. नक्सल विरोधी अभियान के एडीजी जयदीप प्रसाद के मुताबिक, हॉकफोर्स को सूचना मिली थी की बालाघाट के हट्‌टा थाना क्षेत्र के गोदरी पुलिस चौकी के ग्राम कोठियाटोला जंगल क्षेत्र में जीआरबी और केबी डिवीजन के नक्सलियों की गतिविधि है. वे सादे कपड़ों में राशन और दैनिक उपयोग की सामग्री एकत्र करने के लिए कोठियाटोला गांव पहुंच रहे हैं. इस सूचना पर हॉकफोर्स ने जंगल में सघन सर्च अभियान चलाया. इसी दौरान कोठियाटोला गांव में सादे कपड़ों में जा रहे 10-12 नक्सलियों को पूछताछ के लिए आवाज लगाई. इस दौरान संदिग्ध नक्सलियों द्वारा हॉकफोर्स पर अंधाधुंध फायरिंग की गई. आत्मरक्षा करते हुए हॉकफोर्स के जवानों ने जवाबी फायरिंग की. इस दौरान नक्सली घने जंगल और पहाड़ की आड़ लेकर भाग गए. बाद में सर्चिंग के दौरान एक नक्सली का शव बरामद हुआ, जिसकी शिनाख्त केबी डिवीजन के खूंखार एसीएम सोहन उर्फ उकास उर्फ आयतु के रूप में की गई. मध्य प्रदेश में दर्ज हैं 8 आपराधिक मामले नक्सली सोहन उर्फ उकास उर्फ आयतु साल 2013 से प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) में शामिल होकर छत्तीसगढ़ की कई घटनाओं में शामिल रहा है. संगठन के प्रभाव क्षेत्र में विस्तार के लिए अपनाई गई नीति को अंजाम देने के लिए इसे केन्द्रीय कमेटी के सदस्य रहे दीपक उर्फ मिलिंद तेलतुम्बड़े के सहयोगी की महत्वपूर्ण भूमिका दी. साल 2019 में एम.एम.सी. जोन में भेजा गया था. इससे पहले हुई अन्य मुठभेड़ों में यह शामिल रहा था. मध्य प्रदेश में उसके खिलाफ 8 आपराधिक मामले दर्ज हैं. उन्होंने बताया कि राज्य पुलिस की हॉक फोर्स को सूचना मिली थी कि कुछ नक्सली राशन और दैनिक उपयोग की सामग्री लेने के लिए काठियाटोली गांव पहुंचे हैं। अधिकारी ने बताया कि तलाशी अभियान के दौरान हॉक फोर्स ने जंगल में 10-12 नक्सलियों के एक समूह को पूछताछ के लिए आवाज़ लगाई, लेकिन उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि जब पुलिस ने जवाबी गोलीबारी की तो घने जंगल और पहाड़ियों में छुपे नक्सली मौके से भाग निकले। अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने बाद में सोहन उर्फ उकास उर्फ आयुतु का शव बरामद कर लिया। उन्होंने बताया कि गोलीबारी में घायल हुए अन्य लोगों की तलाश जारी है। उन्होंने बताया कि पड़ोसी छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का निवासी आयतु आईईडी बनाने में विशेषज्ञ था और मध्य प्रदेश में उसके खिलाफ आठ मामले दर्ज थे। अधिकारी ने बताया कि मृतक नक्सली मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में सक्रिय था और उस पर 14 लाख रुपये का इनाम था। उन्होंने बताया कि पुलिस ने मृतक के पास से 315 बोर की एक राइफल और एक वायरलेस सेट बरामद किया है। अधिकारी ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में मध्य प्रदेश में कम से कम 19 नक्सलियों को मार गिराया गया, जिन पर तीन राज्यों में कुल 3.14 करोड़ रुपये का इनाम था।

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