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NDA को मिलेगा फायदा? शरद और सिंघवी की सीटें खाली, राज्यसभा चुनाव में नई रणनीति

नई दिल्ली लोकसभा के बाद राज्‍यसभा में भी इंडिया अलायंस की ताकत घटने जा रही है. चुनाव आयोग ने 10 राज्यों की 37 सीटों पर 16 मार्च को चुनाव कराने का ऐलान क‍िया है. लेकिन यह महज एक रूटीन चुनाव नहीं है; यह भारतीय राजनीति के उन दिग्गजों की विदाई और नए समीकरणों के उदय की कहानी है, जो संसद के गलियारों में शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदलने वाला है. सबसे बड़ी सुगबुगाहट उन कुर्सियों को लेकर है जो खाली होने जा रही हैं. विपक्षी एकता के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार और कांग्रेस के संकटमोचक अभिषेक मनु सिंघवी जैसे चेहरों का कार्यकाल खत्म हो रहा है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या बीजेपी इन खाली होती कुर्सियों पर अपना ‘कमल’ खिलाकर राज्‍यसभा में अपनी बादशाहत बनाने जा रही है? 10 राज्य और 37 सीटें चुनाव आयोग के मुताबिक, अप्रैल में खाली हो रही 37 सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान और उसी दिन मतगणना होगी. ये सीटें महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश , पश्चिम बंगाल, बिहार, तमिलनाडु, ओडिशा, असम, छत्तीसगढ़, हरियाणा, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्यों से आती हैं. सीटों का गणित एक नजर में महाराष्ट्र    7    असम    3 पश्चिम बंगाल    6    हरियाणा    2 बिहार    6    छत्तीसगढ़    2 तमिलनाडु    6    हिमाचल प्रदेश    1 ओडिशा    4    स्रोत-    ECI शरद पवार से सिंघवी तक… दिग्गजों की विदाई एनसीपी के संस्थापक शरद पवार का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. महाराष्ट्र की बदली हुई राजनीति में, जहां अजित पवार की पार्टी अब एनडीए का हिस्सा हैं, शरद पवार के लिए दोबारा सदन पहुंचना एक बड़ी चुनौती है. वहीं, कांग्रेस के दिग्गज वकील और रणनीतिकार अभिषेक मनु सिंघवी की सीट भी खाली हो रही है. उनके अलावा प्रियंका चतुर्वेदी (शिवसेना-UBT), केटीएस तुलसी (कांग्रेस), और रामनाथ ठाकुर (JDU) जैसे नाम भी रिटायर होने वालों की सूची में हैं. इन दिग्गजों की विदाई विपक्ष के लिए एक बड़ा वैचारिक और रणनीतिक वैक्यूम पैदा कर सकती है. महाराष्ट्र और बिहार: एनडीए के लिए ‘लॉटरी’ का मौका महाराष्ट्र में 7 सीटों पर चुनाव होने हैं. अभी यहां बीजेपी और शरद पवार गुट के पास 2-2 सीटें हैं, जबकि कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और रामदास आठवले के पास 1-1 सीट है. लेकिन राज्य विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों को देखें तो एनडीए यानी बीजेपी, एकनाथ शिंदे शिवसेना और अजित पवार यहां ‘क्लीन स्वीप’ की स्थिति में दिख रहा है. जानकारों का मानना है कि बीजेपी यहां अपनी सीटों की संख्या में भारी इजाफा करेगी, जिससे शरद पवार और उद्धव ठाकरे के खेमे को बड़ा नुकसान हो सकता है. बिहार में भी 5 सीटों का समीकरण एनडीए के पक्ष में झुकता दिख रहा है. यहां जेडीयू की 2 और आरजेडी की 2 सीटें खाली हो रही हैं. नीतीश कुमार के पाला बदलने के बाद अब एनडीए यहां 3 सीटों पर मजबूत पकड़ रखता है, जबकि ‘इंडिया’ गठबंधन को नुकसान उठाना पड़ सकता है. पश्चिम बंगाल और ओडिशा: बीजेपी मारेगी सेंध? पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के गढ़ में बीजेपी अपनी पैठ मजबूत करने की तैयारी में है. यहां 6 सीटों पर चुनाव हैं. वर्तमान में TMC के पास 4 सीटें हैं और एक लेफ्ट (सीपीआई-एम) के पास. जिस तरह से बंगाल विधानसभा में वामपंथ का सफाया हुआ है, बीजेपी यहां सीपीआई-एम की सीट छीनकर अपना खाता खोलने और अपनी ताकत बढ़ाने के लिए तैयार है. ओडिशा में भी 4 सीटों पर मुकाबला दिलचस्प है. नवीन पटनायक की बीजेडी और बीजेपी के बीच यहां सीटों का बंटवारा विधानसभा की ताकत के आधार पर होगा, जहां बीजेपी अपनी मौजूदा 2 सीटों को बरकरार रखने या बढ़ाने की कोशिश करेगी. NDA vs INDIA… क‍िसके पास क‍ितने नंबर अनुमानों के मुताबिक, 16 मार्च के चुनाव एनडीए के लिए ‘सुपर संडे’ साबित हो सकते हैं. अनुमान है कि एनडीए को इन चुनावों में कम से कम 6 सीटों का फायदा होगा इससे एनडीए का आंकड़ा 21 के करीब पहुंच सकता है. दूसरी ओर, विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन को लगभग 4 सीटों का नुकसान होने की संभावना है. कांग्रेस के लिए तेलंगाना, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से अच्छी खबरें आ सकती हैं, जहाँ वह अपनी स्थिति में थोड़ा सुधार कर सकती है. बीजेपी कर रही रिकॉर्ड की तैयारी     साल 2026 बीजेपी के लिए राज्यसभा में ऐतिहासिक होने जा रहा है. मार्च के इन 37 सीटों के अलावा, पूरे साल में कुल 71 सदस्य रिटायर होने वाले हैं. अप्रैल में 32 सदस्य रिटायर होंगे. इनमें से 9 बीजेपी से हैं. जून में 22 सदस्य रिटायर होंगे. इनमें से 12 बीजेपी से हैं. इसी तरह नवंबर के अंत में 11 सदस्य रिटायर होंगे, इनमें से 9 बीजेपी से हैं.     बीजेपी न केवल अपनी सीटें बचा रही है, बल्कि क्षेत्रीय दलों और कांग्रेस के कमजोर राज्यों से अतिरिक्त सीटें खींच रही है. अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो बीजेपी अपने दम पर राज्यसभा में बहुमत के जादुई आंकड़े के बेहद करीब पहुंच जाएगी.     राज्यसभा में कुल 245 सीटें होती हैं. साधारण बहुमत के लिए किसी भी गठबंधन या दल को 123 सीटों की आवश्यकता होती है. वर्तमान में बीजेपी के पास लगभग 95-98 सदस्य हैं. NDA का आंकड़ा 115 से 118 के आसपास पहुंचता है.इस चुनाव के बाद राज्यसभा में एनडीए 123 के बहुमत के आंकड़े को पार कर सकती है. बदल जाएगा राज्‍यसभा का मिजाज शरद पवार और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे कद्दावर नेताओं की कमी विपक्ष को खलेगी, जबकि बीजेपी के लिए यह अपनी विधायी ताकत को और अधिक धार देने का अवसर है. राज्यसभा में बहुमत मिलने का मतलब है कि सरकार को अब विवादास्पद बिलों को पास कराने के लिए बीजेडी या वाईएसआर कांग्रेस जैसे दलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. एनडीए की बढ़ती ताकत ने साफ कर दिया है कि ‘उच्च सदन’ की चाबी अब मजबूती से सत्तापक्ष के हाथों में जाने वाली है.  

NDA के सरताज होगा Bihar, मांझी-चिराग और उपेंद्र की रणनीति तैयार

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियों को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के चार प्रमुख सहयोगी दलों की एक महत्वपूर्ण बैठक नई दिल्ली में आयोजित हुई। इस बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व और चुनावी रणनीतियों पर व्यापक चर्चा की गई। बैठक में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख जीतन राम मांझी, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा सहित अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक का आयोजन बीजेपी नेता संजय जासवाल के आवास पर किया गया, जिसमें जेडीयू नेता संजय झा भी शामिल हुए। 225 सीटों पर जीत का दावा बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि बिहार में NDA की बड़ी जीत तय है। उन्होंने दावा किया कि गठबंधन को 225 से अधिक सीटें मिलेंगी। उन्होंने कहा, बिहार चुनाव की तैयारियों पर आगे पटना में विस्तृत चर्चा की जाएगी। NDA की मौजूदा स्थिति को देखते हुए हमें जनता का भरपूर समर्थन मिलेगा। सीट शेयरिंग और रणनीति पर चर्चा केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि बैठक का कोई खास उद्देश्य नहीं था, लेकिन यह चुनावी वर्ष होने के कारण रणनीतियां तय करने का समय है। उन्होंने कहा, हम चुनाव में किस सोच के साथ जाएंगे, सरकार की उपलब्धियां जनता के बीच कैसे रखी जाएंगी, और सीट शेयरिंग समेत अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। NDA इस बार ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगा और 225 से अधिक सीटों पर जीत सुनिश्चित होगी। एनडीए के सामने कोई गठबंधन नहीं टिकेगा आरएलएम प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने बैठक को NDA की मजबूती का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, यह एक आपसी विचार-विमर्श का कार्यक्रम था। चुनावी वर्ष में जब राजनीतिक दलों के नेता मिलते हैं, तो चुनाव को लेकर चर्चा होना स्वाभाविक है। हम सभी चुनाव की तैयारियों में पूरी तरह जुटे हुए हैं। बिहार में NDA की स्थिति बेहद मजबूत है और हमारे सामने कोई अन्य गठबंधन टिकने वाला नहीं है। सभी चीजें तय हैं और इसी आधार पर हम चुनाव जीतेंगे। आगे की रणनीति पर मंथन जारी बैठक में शामिल नेताओं ने यह भी संकेत दिया कि बिहार चुनाव को लेकर आगे पटना में विस्तृत बैठक होगी, जहां सीटों के बंटवारे और चुनाव प्रचार की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। बिहार में NDA सरकार की उपलब्धियों को जनता के बीच प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर भी जोर दिया जाएगा। बिहार में सत्तारूढ़ NDA के नेताओं का यह आत्मविश्वास बताता है कि वे आगामी चुनाव को लेकर पूरी तरह तैयार हैं। अब देखना यह होगा कि विपक्षी दल महागठबंधन इस चुनौती का किस तरह सामना करते हैं।

महाराष्ट्र में दिसंबर में लाडली बहनों को मिलेगी पहली किश्त, 2100 रुपये महीने आएंगे खाते में

पुणे  अगले महीने दिसंबर से शुरू होने वाली मुख्यमंत्री माझी लड़की बहन योजना से कम से कम 13 लाख और महिलाओं को लाभ मिलने की संभावना है। उनके आवेदन, जिन्हें उनके बैंक खातों से आधार सीडिंग की आवश्यकता थी, लंबित थे और उन्हें 2.34 करोड़ लाभार्थियों में जोड़ा जाएगा। शनिवार को महायुति सरकार की भारी जीत का श्रेय व्यापक रूप से इस योजना को दिया जा रहा है, जो महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपये देती है। सूत्रों ने कहा कि गठबंधन को न केवल लाभार्थियों को जोड़ना होगा, बल्कि भुगतान को बढ़ाकर 2,100 रुपये करने का अपना वादा भी निभाना होगा। हालांकि 1,500 रुपये की पिछली सब्सिडी राशि के अनुसार 35,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, लेकिन अगर महायुति सरकार अपना वादा निभाना चाहती है तो आवंटन बढ़ाना होगा। सबसे ज्यादा पुणे से लाभार्थी मई में लोकसभा चुनाव में असफलताओं के बाद महिला मतदाताओं को लुभाने के लिए यह योजना शुरू की गई थी। इसने सत्तारूढ़ गठबंधन को समर्थकों का एक नया जनसांख्यिकीय बनाने में मदद की, जिन्होंने इसकी वापसी में योगदान दिया। सबसे ज़्यादा लाभार्थी पुणे जिले से हैं, उसके बाद नासिक, ठाणे और मुंबई का नंबर आता है। 13 लाख लंबित थे आवेदन वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने कहा कि लंबित आवेदनों का निपटारा कर दिया जाएगा और महिलाओं को दिसंबर से राशि मिलनी चाहिए। एक वरिष्ठ सरकारी सूत्र ने कहा कि नवंबर तक 2.34 करोड़ लाभार्थियों के निपटारे किए गए आवेदनों का वितरण पूरा हो गया था। ये 13 लाख आवेदन लंबित थे और उन्हें दिसंबर की संख्या में जोड़ा जाएगा। लाडली बहिन योजना की सूची में जोड़ा जा रहा नाम महिला एवं बाल विकास विभाग (डब्ल्यूसीडी) को लाभ वितरित करने के लिए कागजी कार्रवाई तैयार करनी होगी। डब्ल्यूसीडी अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि वे सूची में जोड़ने के लिए काम कर रहे हैं और दिसंबर के लिए वितरण आचार संहिता हटने के बाद शुरू होगा। क्या तटकरे को वही विभाग मिलेगा? डब्ल्यूसीडी मंत्री अदिति तटकरे, जिन्होंने श्रीवर्धन विधानसभा क्षेत्र से अपने प्रतिद्वंद्वी एनसीपी (एसपी) के अनिल नवगाने के खिलाफ एक लाख से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल की, वे उसी मंत्री पद पर बने रहना चाहेंगी। महायुति सरकार बनाएगी और अपने मंत्रियों की घोषणा करेगी, लेकिन सूत्रों ने बताया कि लड़की बहिन योजना उन प्रमुख परियोजनाओं में से एक थी, जिसके कारण गठबंधन को जीत मिली और तटकरे की नियुक्ति करते समय इसकी निरंतरता को ध्यान में रखा जा सकता है।

जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों पर बकाया राशि 100 करोड़ रुपये प्रतिदिन से अधिक की गति से बढ़ी.

RBI; Debt; Economics; Economy;

Outstanding amount on intentionally unpaid loans has been increasing at a rate of more than 100 crore rupees per day. दिल्ली, द वायर हिंदी की एक रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2019 से जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों पर बकाया राशि 100 करोड़ रुपये प्रतिदिन से अधिक की गति से बढ़ी है. इसका तात्पर्य यह है कि तब से विलफुल डिफॉल्टर्स पर बकाया राशि कम से कम 1.2 ट्रिलियन या 1.2 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है. बिजनेस स्टेंडर्ड ने अपनी रिपोर्ट में इस संबंध में जानकारी दी है. द हिंदू के मुताबिक, मार्च 2019 के बाद से प्रति दिन 100 करोड़ रुपये की यह भारी वृद्धि 22 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए उस दावे को पूरी तरह खारिज करती है कि पिछली यूपीए सरकार ने ‘घोटालों’ से बैंकिंग क्षेत्र को ‘बर्बाद’ कर दिया था, जबकि उनकी सरकार ने इसके ‘अच्छे वित्तीय स्वास्थ्य’ की बहाली की है. बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट ट्रांसयूनियन सिबिल के आंकड़ों पर आधारित है. अखबार ने लिखा है कि डेटा को वित्तीय संस्थानों द्वारा अपडेट किया जाता है. आंकड़े नवीनतम उपलब्ध संख्याओं को दर्शाते हैं. आगे कहा गया है, ‘यह राशि और भी अधिक हो सकती है क्योंकि कम से कम एक राष्ट्रीयकृत बैंक और एक निजी क्षेत्र के बैंक ने अभी तक जून के आंकड़े नहीं दिए हैं. कम से कम चार तिमाहियों से लगातार कुल राशि 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक बनी हुई है.’ भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाल ही में प्रस्ताव दिया है कि ऋण के गैर-निष्पादित संपत्ति बनने के छह माह के भीतर जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों को विलफुल डिफॉल्टर्स घोषित किया जाना चाहिए. केंद्रीय बैंक ने अक्टूबर के अंत तक प्रस्ताव पर सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी हैं. निजी क्षेत्र के बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों ने ऐसे ऋणों (जो वापस नहीं किए जा रहे हैं) में उनकी हिस्सेदारी में थोड़ी वृद्धि देखी है, लेकिन चिंता की बात यह है कि सार्वजनिक बैंकों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है. जून 2023 में विलफुल डिफॉल्टर्स द्वारा न चुकाए गए कर्ज में उनकी हिस्सेदारी 77.5 फीसदी थी. जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों पर दस राष्ट्रीयकृत बैंकों का 1.5 लाख करोड़ रुपये और बकाया है, जिसमें से भारतीय स्टेट बैंक के 80,000 करोड़ रुपये (जून माह तक) शामिल हैं. निजी क्षेत्र के बैंकों का बकाया कुल मिलाकर 53,500 करोड़ रुपये है.

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