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निर्मला सीतारमण ने कहा- हमारी अर्थव्यवस्था विश्वास-आधारित शासन के साथ नई ऊंचाइयों को छू सकती है

नई दिल्ली  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत पिछले 11 वर्षों में स्ट्रक्चरल सुधारों ने भारत के व्यापक आर्थिक बुनियादी ढांचे को नया आकार दिया है। वित्त मंत्री ने एक मीडिया आर्टिकल में लिखा कि भारत का सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभरना कई अनुकूल कारकों पर आधारित है। साथ ही यह अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों जैसे बैंकों, कॉरपोरेट्स, परिवारों, सरकार और एक्सटर्नल सेक्टर की बैलेंस शीट को मजबूत करने के साथ निकटता से जुड़ा हुआ है। वित्त मंत्री सीतारमण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “पिछले 11 वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था का ‘ट्विन डेफिसिट प्रॉब्लम से फाइव-बैलेंस शीट लाभ’ तक परिवर्तन पीएम मोदी के नेतृत्व में ठोस नीतिगत प्रयासों का परिणाम है।” उन्होंने आगे कहा कि “जब हम 2014 में सत्ता में आए तो हमारी सबसे पहली प्राथमिकता विकास को पुनर्जीवित करना था। जीएसटी, आईबीसी, आरईआरए और महामारी के वर्षों के दौरान, पीएलआई योजना और ईसीएलजीएस जैसे संरचनात्मक सुधार पेश किए गए, ताकि क्रेडिट-योग्य एमएसएमई को कोरोना से उबरने में मदद मिल सके।” वित्त मंत्री ने अपने आर्टिकल में बताया कि वित्त वर्ष 2013-14 में पूंजी निवेश जीडीपी के 1.7 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 3.2 प्रतिशत हो गया। 11 वर्षों में, 88 हवाई अड्डों का संचालन किया गया, 31,000 किलोमीटर रेल पटरियां बिछाई गईं, मेट्रो नेटवर्क का चार गुना से अधिक विस्तार किया गया, बंदरगाह की क्षमता दोगुनी हो गई और राष्ट्रीय राजमार्ग की लंबाई 60 प्रतिशत बढ़ गई। वित्त मंत्री ने अपने आर्टिकल में भारत की गरीबी उन्मूलन में महत्वपूर्ण प्रगति को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने विश्व बैंक के लेटेस्ट आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भारत ने पिछले दशक में अपनी अत्यधिक गरीबी दर को कम करने में प्रगति की है और देश में अत्यधिक गरीबी दर 2011-12 में 27.1 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 5.3 प्रतिशत दर्ज की गई है। वित्त मंत्री के अनुसार, यूपीआई द्वारा शुरू की गई डिजिटल भुगतान क्रांति से लेकर मुद्रा ऋण द्वारा प्रकट उद्यमशीलता की लालसा तक, पिछले 11 वर्षों ने दिखाया है कि जब हम विश्वास-आधारित शासन को नियामक बोझ में कमी और सार्वजनिक वस्तुओं के विस्तार के साथ जोड़ते हैं तो हमारी अर्थव्यवस्था नई ऊंचाइयों को छू सकती है।

सरकार टैक्स चोरों या ब्लैक मनी रखने वालों को पकड़ने के लिए सोशल मीडिया मैसेज को भी खंगाल रही : सीतारमण

नई दिल्ली  व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम आदि पर आप भी मैसेज भेजते होंगे। उस पर आप अपनी निजी जानकारी भी किसी से शेयर करते होंगे। अभी तक ऐसा करते रहे हैं तो संभल जाइए। सरकार टैक्स चोरों या ब्लैक मनी रखने वालों को पकड़ने के लिए सोशल मीडिया मैसेज को भी खंगाल रही है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने कल ही इसका खुलासा किया है। उन्होंने लोकसभा में इनकम टैक्स बिल, 2025 के बारे में बात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार टैक्स चोरी रोकने के लिए नए तरीके अपना रही है। गूगल मैप और व्हाट्सऐप मैसेज से सुराग सीतारमण ने बताया कि Google Maps की मदद से उन जगहों का पता चला जहां लोग कैश छुपाते थे। Instagram अकाउंट्स से ‘बेनामी’ संपत्ति के मालिकों का पता लगाया गया। WhatsApp मैसेज से क्रिप्टो एसेट्स से जुड़े 200 करोड़ रुपये का काला धन पकड़ा गया। टेक्नोलॉजी से पकड़े जा रहे हैं चोर उन्होंने बताया, “Encrypted मैसेज से 250 करोड़ रुपये का काला धन मिला। क्रिप्टो एसेट्स के WhatsApp मैसेज से सबूत मिले हैं। WhatsApp से 200 करोड़ रुपये का काला धन पकड़ा गया।” इसका मतलब है कि टैक्स अधिकारी अब टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके टैक्स चोरों को पकड़ रहे हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि टैक्स अधिकारियों को डिजिटल रिकॉर्ड देखने का अधिकार देना ज़रूरी है। इससे टैक्स चोरी और धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिलेगी। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कोई भी वर्चुअल एसेट्स, जैसे कि क्रिप्टोकरेंसी, का इस्तेमाल करके टैक्स न बचा पाए। नए बिल में ज्यादा अधिकार नए बिल के अनुसार, अधिकारियों को ईमेल, WhatsApp और Telegram जैसे कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म्स को एक्सेस करने का अधिकार होगा। वे बिजनेस सॉफ्टवेयर और सर्वर भी देख सकेंगे, जिनका इस्तेमाल वित्तीय लेनदेन को छुपाने के लिए किया जाता है। सीतारमण जी ने कहा कि सरकार टेक्नोलॉजी के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है। वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि टैक्स कानून आधुनिक हों और टैक्स चोरी करने वालों को पकड़ा जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का यह कदम टैक्स भरने वाले ईमानदार लोगों के लिए है, ताकि कोई भी टैक्स चोरी करके बच न सके। सरकार हर तरह से टैक्स चोरी रोकने के लिए तैयार है।

खाद्य तेलों और दलहन में भारत बनेगा आत्मनिर्भर ! बजट भाषण में वित्त मंत्री का बड़ा ऐलान

नई दिल्ली वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश को दलहन और खाद्य तेल में आत्मनिर्भर बनाने का ऐलान किया है। इसके लिए तुअर, उड़द, मसूर पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि धन धान्य कृषि योजना 100 कम उत्पादकता वाले जिलों पर ध्यान केंद्रित करेगी। साथ ही कृषि कार्यक्रम 1.7 करोड़ किसानों की मदद करेगा। उन्होंने कहा कि कृषि योजना कम उत्पादकता वाले 100 जिलों को कवर करेगी, जहां फसल की पैदावार कम होती है और जहां क्रेडिट पैरामीटर औसत से नीचे हैं। योजना के तहत किसानों को आधुनिक फसल टेक्नोलॉजी मुहैया करवाई जाएगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह 8वां बजट है और मोदी सरकार 3.0 का पहला पूर्ण बजट भी है। संसद में बजट सत्र जारी है।केंद्र सरकार खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता के लिए छह साल का एक मिशन शुरू करेगी. निर्मला सीतारमण ने बजट में इसका ऐलान किया है. इस बार बजट में ‘बढ़ते मध्यम वर्ग’ की खर्च करने की शक्ति को बढ़ाने पर फोकस किया गया है. ये हैं बजट के बड़े ऐलान     खाद्य तेल और बीज के लिए राष्ट्रीय मिशन का लक्ष्य इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता लाना है     दालों में आत्मनिर्भर बनने के लिए 6 साल का मिशन शुरू किया जाएगा     केंद्रीय एजेंसियां अगले 4 सालों में तुअर, उड़द, मसूर की खरीद करेंगी     प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन में सुधार के लिए बिहार में मखाना बोर्ड बनाया जाएगा कृषि जिलों के विकास का कार्यक्रम     कृषि जिलों के विकास का कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। फसल विविधीकरण, सिंचाई सुविधाएं, 1.7 करोड़ किसानों की मदद के लिए ऋण की उपलब्धता     योजना में फसल विविधीकरण को अपनाया जाएगा, कटाई के बाद भंडारण को बढ़ाया जाएगा। इससे 1.7 करोड़ किसानों को मदद मिलेगी     एमएसएमई विकास का दूसरा इंजन है     एमएसएमई हमारे निर्यात का 45% हिस्सा है। एमएसएमई की वर्गीकरण सीमा बढ़ाई गई है ताकि उनकी वृद्धि को बढ़ावा मिले     सूक्ष्म उद्यमों के लिए, कस्टमाइज्ड क्रेडिट कार्ड जारी किए जाएंगे   छह प्रमुख क्षेत्रों में सुधारों को प्राथमिकता वित्त मंत्री ने कहा कि बजट 2025 टैक्स, पावर, अर्बन डेवलेपमेंट, माइनिंग, फाइनेंशियल सेक्टर और रेगुलेटरी पॉलिसी जैसे छह प्रमुख क्षेत्रों में सुधारों को प्राथमिकता देता है. निर्मला सीतारमण ने सुबह 11 बजे अपना बजट भाषण शुरू किया. पिछले चार बजट और एक अंतरिम बजट की तरह, ये बजट भी पेपरलेस होगा. बजट की प्रमुख बातें – भारतीय खिलौनों के लिए सपोर्ट स्कीम – किसान क्रेडिट की लिमिट पांच लाख रुपये. सस्ते ब्याज पर किसानों को पांच लाख का कर्ज. कपास किसानों को पांच साल का पैकेज. – असम में यूरिया प्लांट का गठन होगा. 12.7 लाख मीट्रिन टन की सालाना क्षमता वाला यूरिया प्लांट खुलेगा. – कृषि योजनाओं से 1.7 करोड़ किसानों को लाभ. – कॉटन प्रोडक्टिविटी के लिए पांच साल का मिशन – बिहार के किसानों के लिए खास ऐलान. दलहन-तिलहन में आत्मनिर्भरता का टारगेट. – मखाना किसानों के लिए बजट में ऐलान.  मखाना बोर्ड बनेगा. – वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पीएम धन-धान्य कृषि योजना चलाएंगे. 10 जिलों में योजना चलाई जाएगी. कम उपज वाले इलाकों में शुरू होगी योजना. – खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता के लिए छह साल के मिशन का ऐलान. – फल सब्जियों के लिए व्यापक प्रोग्राम का ऐलान. किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट 3 लाख से बढ़कर 5 लाख रुपये हुई बजट 2025 में मोदी सरकार ने देश के करोड़ों किसानों को बड़ी राहत दी है. सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढा दी है. अब यह सीमा 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है. बजट में सरकार ने किसानों को लेकर कई और बड़ी घोषणाएं भी की है. इनमें धन धान्य कृषि योजना,  कृषि कार्यक्रम से 1.7 करोड़ किसानों की मदद, कम उत्पादकता वाले 100 जिलों को कवर करने के लिए कृषि योजना शामिल है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि खाद्य तेल और बीज के लिए राष्ट्रीय मिशन का लक्ष्य इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता लाना है. इसके तहत दालों में आत्मनिर्भर बनने के लिए 6 साल का मिशन शुरू करेंगे. – केंद्रीय एजेंसियां ​​अगले 4 वर्षों में तुअर, उड़द, मसूर की खरीद करेंगी. प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन में सुधार के लिए बिहार में मखाना बोर्ड बनाया जाएगा. बजट में सरकार ने बताया कि आकांक्षी जिला कार्यक्रम की तर्ज पर कृषि जिला कार्यक्रम विकसित किए जाएंगे. फसल विविधीकरण, सिंचाई सुविधाएं, लोन की उपलब्धता से 1.7 करोड़ किसानों को मदद मिलेगी. यह योजना फसल विविधीकरण को अपनाएगी, फसल कटाई के बाद भंडारण को बढ़ाएगी. इससे 1.7 करोड़ किसानों को मदद मिलेगी.

मेहुल चोकसी मामले में 2,565.90 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गई हैं और उन्हें नीलाम किया जाएगा : निर्मला सीतारमण

नई दिल्ली वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पीड़ितों या सही दावेदारों को 22,280 करोड़ रुपये की संपत्तियां वापस कर दी हैं और आर्थिक अपराधियों के खिलाफ लड़ाई निरंतर जारी रहेगी। सीतारमण ने वर्ष 2024-25 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगों के पहले बैच पर लोकसभा में चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि भगोड़े विजय माल्या की 14,131.6 करोड़ रुपये की संपत्ति सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को वापस कर दी गई है। उन्होंने कहा कि नीरव मोदी मामले में 1,052.58 करोड़ रुपये की संपत्ति सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और निजी बैंकों को वापस कर दी गई है। वित्त मंत्री के जवाब के अनुसार, मेहुल चोकसी मामले में 2,565.90 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गई हैं और उन्हें नीलाम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) मामले में, धोखाधड़ी के शिकार वास्तविक निवेशकों को 17.47 करोड़ रुपये की संपत्तियां वापस कर दी गईं। उन्होंने कहा, ‘पीएमएलए के मामले में, ईडी ने प्रमुख मामलों में कम से कम 22,280 करोड़ रुपये की संपत्तियां सफलतापूर्वक वापस हासिल की हैं… हमने किसी को नहीं छोड़ा है, भले ही वे देश छोड़कर भाग गए हों, हम उनके पीछे पड़े हैं। ईडी ने यह पैसा इकट्ठा किया है और बैंकों को वापस दे दिया है।’ सीतारमण ने कहा, ‘इसलिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि हमने आर्थिक अपराध करने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं छोड़ा है। हम उनके पीछे पड़े हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि जो पैसा बैंकों में वापस जाना है, वह वापस आ जाए।’ विदेशों में जमा काले धन के संबंध में कुछ सांसदों के सवालों पर वित्त मंत्री ने कहा कि 2015 का काला धन अधिनियम वास्तव में बहुत से करदाताओं पर निवारक प्रभाव डाल रहा है और वे अपनी विदेशी संपत्ति का खुलासा करने के लिए स्वयं आगे आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी संपत्ति का खुलासा करने वाले करदाताओं की संख्या 2021-22 में 60,467 से बढ़कर 2024-25 में दो लाख हो गई है।

ग्रामीण भारत अब भारत के विकास का निष्क्रिय पर्यवेक्षक नहीं है, बल्कि वह इसका सक्रिय चालक है: निर्मला सीतारमण

नई दिल्ली केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने छोटे शहरों और कस्बों में ऋण-संचालित खपत में जबरदस्त वृद्धि की सराहना करते हुए इसे एक ‘क्रांतिकारी बदलाव’ बताया। उन्होंने कहा कि ये सब प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) के कारण संभव हुआ है।टियर 2, 3 और 4 शहरों और यहां तक कि इससे भी आगे के क्षेत्रों में घरेलू खपत में निर्णायक वृद्धि दर्ज की गई है, जिसका प्रमाण छोटे शहरों और कस्बों में दोपहिया वाहनों, एसी, रेफ्रिजरेटर, स्मार्टफोन और एफएमसीजी की बिक्री में वृद्धि है। वित्त मंत्री सीतारमण के अनुसार, ग्रामीण भारत अब भारत के विकास का निष्क्रिय पर्यवेक्षक (मूक दर्शक) नहीं है, बल्कि वह इसका सक्रिय चालक है। हाल ही में अपनी 10वीं वर्षगांठ मनाने वाली प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) के तहत 53 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले गए हैं, जिससे करोड़ों ग्रामीण भारतीय पहली बार औपचारिक वित्तीय प्रणाली (फॉर्मल फाइनेंशियल सिस्टम) में शामिल हुए हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि 80 प्रतिशत से ज्यादा भारतीय वयस्कों के पास अब औपचारिक वित्तीय खाते (फॉर्मल फाइनेंशियल अकाउंट) हैं, जो 2011 में केवल 50 प्रतिशत थे। यह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वित्तीय समावेशन के अभियान का परिणाम है, जिसने आधुनिक भारतीय इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन लाया है। रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि ग्रामीण भारत में 62 प्रतिशत दोपहिया वाहन खरीद अब ऋण द्वारा संचालित होते हैं, जो शहरी क्षेत्रों में 58 प्रतिशत से अधिक है। इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन की बिक्री में भी जबरदस्त वृद्धि हुई है। उद्योग के अनुसार, विभिन्न उपभोक्ता वित्त व्यवस्था (फाइनेंसिंग) विकल्पों ने इस शानदार वृद्धि को संभव बनाया है। सरकार के अनुसार, इन बैंक खातों में 2.3 लाख करोड़ रुपये की जमा राशि जमा हुई है और इसके परिणामस्वरूप 36 करोड़ से अधिक मुफ्त रुपे कार्ड जारी किए गए हैं, जिन पर 2 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा कवर भी मिलता है। मार्च 2015 में पीएमजेडीवाई खातों की कुल संख्या 14.7 करोड़ थी, जिसमें 15,670 करोड़ रुपये जमा थे, जो जमा राशि बढ़कर 53 करोड़ हो गई है, जिसमें कुल शेष राशि 2.31 लाख करोड़ रुपये है। बैंक खातों की संख्या और जमा राशि में वृद्धि इस योजना की वित्तीय समावेशन और आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाती है। वित्त मंत्री सीतारमण के अनुसार, भारत की ग्रामीण आबादी को पहले एक ऐसी व्यवस्था ने छोड़ दिया था जो “वित्तीय समावेशन” की बातें तो करती थी, लेकिन वास्तव में गरीबों तक ऋण पहुंच का विस्तार करने में बाधाएं खड़ी करती थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व ने ग्रामीण गरीबों को वित्तीय प्रणाली में लाने और उनकी क्षमता को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री मोदी ने ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने के लिए कई प्रो-पुअर सुधारों और कल्याणकारी नीतियों को लागू किया है, जबकि विपक्ष ने प्रगति को अवरुद्ध किया। आरबीआई ने हाल ही में कहा कि चालू वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 2025) की दूसरी तिमाही में घरेलू खपत में तेजी से वृद्धि होने की संभावना है, क्योंकि मुख्य मुद्रास्फीति में कमी आ रही है और ग्रामीण मांग में पहले से ही सुधार हो रहा है।  

मोदी सरकार का बजट 23 जुलाई को, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सातवीं बार पेश करेंगी

नई दिल्ली देश में 18वीं लोकसभा के गठन के बाद अब मोदी सरकार अपने तीसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश करने जा रही है. केंद्रीय बजट 2024 की तारीखों का ऐलान भी हो गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 23 जुलाई को संसद में बजट पेश करेंगी. दरअसल, 18वीं लोकसभा का पहला सत्र समाप्त हो चुका है. इसमें नवनिर्वाचित सांसदों का शपथ ग्रहण हुआ और लोकसभा व राज्यसभा की संयुक्त बैठक हुई थी, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संबोधित किया था. अब सबकी निगाहें बजट सत्र पर टिकी हैं. 22 जुलाई से 12 अगस्त तक संसद सत्र चलेगा. 1 फरवरी 2024 को पेश हुआ था अंतरिम बजट इस साल अप्रैल में लोकसभा चुनाव होने थे, लिहाजा सरकार ने 1 फरवरी को अंतरिम बजट पेश किया था। यह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का छठा बजट था। इसमें गरीब, महिला, युवा और अन्‍नदाता, यानी किसान फोकस में दिखे। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बजट सत्र की जानकारी अपने एक्स हैंडल पर दी. उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, “भारत सरकार की संस्तुति पर भारत की माननीय राष्ट्रपति ने बजट सत्र, 2024 के लिए संसद के दोनों सदनों को 22 जुलाई, 2024 से 12 अगस्त, 2024 तक बुलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है (संसदीय कार्य की अनिवार्यताओं के अधीन). केंद्रीय बजट 2024-25, 23 जुलाई, 2024 को लोकसभा में पेश किया जाएगा.” टैक्सपेयर्स को मिल सकती है राहत केंद्रीय बजट 2024 की तारीखें घोषित होने के साथ ही, इस बात की काफी उम्मीदें और अटकलें लगाई जा रही हैं कि वित्त मंत्री मोदी 3.0 सरकार के तहत टैक्सपेयर्स के लिए कुछ लाभों की घोषणा कर सकती हैं. वहीं समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने दो सरकारी अधिकारियों के हवाले से बताया कि केंद्र सरकार केंद्रीय बजट में ग्रामीण आवास के लिए राज्य सब्सिडी बढ़ाने की तैयारी कर रही है, जिसमें पिछले साल की तुलना में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि होने की उम्मीद है, जो 6.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो जाएगी. निर्मला सीतारमण के नाम दर्ज होगा अनोखा रिकॉर्ड बता दें कि इस साल दो बार बजट पेश हो रहा है. 1 फरवरी 2024 को अंतरिम बजट पेश किया गया था. लेकिन अब नई सरकार का गठन होने के बाद पूर्ण केंद्रीय बजट पेश होने जा रहा है. इस बार बजट पेश करने के साथ ही वर्तमान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम एक अनोखा रिकॉर्ड दर्ज हो जाएगा. कारण, ऐसा करके वह लगातार सात केंद्रीय बजट पेश करने वाली पहली वित्त मंत्री बन जाएंगी. इस मामले में वह मोरारजी देसाई को पीछे छोड़ देंगी. देसाई ने लगातार छह बजट पेश किए थे.   फुल और अंतरिम बजट होता क्या है? इनमें क्या अंतर है? केंद्रीय बजट देश का सालाना फाइनेंशियल लेखा-जोखा होता है। यूं कहें कि बजट किसी खास वर्ष के लिए सरकार की कमाई और खर्च का अनुमानित विवरण होता है। बजट के जरिए सरकार यह तय करने का प्रयास करती है कि आगामी वित्त वर्ष में वह अपनी कमाई की तुलना में किस हद तक खर्च कर सकती है। सरकार को हर वित्त वर्ष की शुरुआत में बजट पेश करना होता है। भारत में वित्त वर्ष का पीरियड 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है। वहीं अंतरिम बजट सरकार को आम चुनावों का फैसला होने और नई सरकार बनने के बाद फुल बजट की घोषणा करने तक, देश को चलाने के लिए धन उपलब्ध कराता है। अंतरिम बजट शब्द आधिकारिक नहीं है। आधिकारिक तौर पर इसे वोट ऑन अकाउंट कहा जाता है।

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