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दिल्‍ली आनेवाले लोगों की जेब नहीं होगी ढीली, CM रेखा गुप्‍ता देंगी सौगात, गडकरी को कहिए थैंक …

नई दिल्ली  दिल्ली की सीमाओं से MCD टोल बूथ हटाने की तैयारी है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इसके लिए जोर दिया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और एलजी वीके सक्सेना भी इससे सहमत हैं। उनका मानना है कि शहर की सीमाओं पर एंट्री फीस लेने वाले बूथों को हटाने की जरूरत है। इन बूथों के कारण लोगों को परेशानी होती है और समय बर्बाद होता है। सरकार अब एमसीडी के लिए राजस्व के नए स्रोत तलाशने पर विचार कर रही है। दिल्ली की सीमाओं से टोल बूथ हटाने का सुझाव दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने केंद्रीय मंत्री के साथ बैठक में MCD के लिए राजस्व के नए स्रोत खोजने के सुझाव पर सहमति जताई। एमसीडी को एंट्री फीस से हर साल लगभग 800-900 करोड़ रुपये मिलते हैं। गडकरी ने कहा कि मुख्य मार्गों पर लगे टोल बूथ यात्रियों के लिए ‘भारी उत्पीड़न’ का कारण बनते हैं। इससे लोगों के काम के घंटे बर्बाद होते हैं और ट्रैफिक जाम लगता है। नितिन गडकरी ने इसलिए लिया अहम फैसला एक सूत्र ने बताया कि गडकरी ने दिल्ली सरकार को राजस्व के नए स्रोत खोजने का सुझाव दिया। इसमें प्रॉपर्टी डेवलपमेंट या गाड़ियों पर मामूली अतिरिक्त चार्ज शामिल हो सकता है। उन्होंने कहा कि एंट्री फीस और ग्रीन सेस की वसूली ‘खुलेआम लूट’ से कम नहीं है। उन्होंने हाइवे डेवलपमेंट में किए गए भारी निवेश पर भी प्रकाश डाला। MCD को 800-900 करोड़ रुपये का नुकसान दिल्‍ली सरकार यदि एंट्री प्‍वाइंट पर बने बूथ को खत्‍म करने की योजना पर आगे बढ़ती है तो केंद्र प्रशासित क्षेत्र के रेवेन्‍यू पर इसका व्‍यापक असर पड़ेगा. इन बूथों के जरिये MCD को सालाना 800 से 900 करोड़ रुपये का राजस्‍व हासिल होता है. ऐसे में यदि इन बूथ को हटा दिया जाएगा तो नगर निगम को तकरीबन 1000 करोड़ रुपये का रेवेन्‍यू लॉस होगा. ‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, सीएम रेखा गुप्‍ता और एलजी वीके सक्‍सेना इस बात पर सहमत हैं कि MCD को आय के लिए दूसरा सोर्स ढूंढ़ना होगा, ताकि 800-900 करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई की जा सके. गडकरी की सलाह केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने दिल्ली में एनवायरमेंट कंप्रेसन चार्ज (ईसीसी) यानी ग्रीन सेस और एंट्री फीस की वसूली को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है. एक उच्चस्तरीय बैठक में गडकरी ने इसे ‘पब्लिक लूट’ करार देते हुए कहा कि यह व्यवस्था यात्रियों को भारी परेशानी और देश को आर्थिक नुकसान पहुंचा रही है. उन्होंने संकेत दिया कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) इस वसूली को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती है. बैठक में मौजूद सूत्रों के अनुसार, गडकरी ने कहा कि दिल्ली की मुख्य सड़कों पर लगे टोल बूथ यात्रियों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुके हैं. इससे न सिर्फ घंटों समय की बर्बादी होती है, बल्कि ट्रैफिक जाम से ईंधन की खपत और प्रदूषण भी बढ़ता है. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि दिल्ली सरकार को नए राजस्व स्रोतों की तलाश करनी चाहिए, जैसे कि संपत्ति विकास या वाहनों पर मामूली अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है. MCD के सालाना बजट पर प्रभाव गडकरी ने जब सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही तो उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इसे अदालत से बाहर सुलझाने की बात कही और भरोसा जताया कि इस पर जल्द समाधान निकाला जाएगा. बैठक में नगर निगम (MCD) के अधिकारी भी मौजूद थे. उन्होंने कहा कि यदि ईसीसी और एंट्री फीस वसूली बंद की जाती है तो इसका एमसीडी के सालाना बजट पर गहरा असर पड़ेगा, जो लगभग 5,000 करोड़ रुपये का है. अधिकारियों का कहना है कि यह राजस्व उनके लिए आवश्यक सेवाएं चलाने के लिए जरूरी है. गडकरी ने बैठक में यह भी दोहराया कि केंद्र सरकार ने दिल्ली की सड़कों और हाईवे नेटवर्क के विस्तार में भारी निवेश किया है. ऐसे में इन टोलों से वसूली करना अनुचित है, खासकर जब इससे आम जनता को असुविधा हो रही हो. ऐसे एमसीडी को राजस्व की होगी प्राप्ति जब गडकरी ने कहा कि NHAI पर्यावरण मुआवजा शुल्क (ECC) या ग्रीन सेस की वसूली रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगी, तो सक्सेना ने जवाब दिया कि इस मुद्दे को अदालत जाए बिना भी सुलझाया जा सकता है। जल्द ही इसका रास्ता निकाल लिया जाएगा। बैठक में मौजूद MCD अधिकारियों ने कहा कि राजस्व में कमी से नागरिक निकाय के वार्षिक बजट पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ेगा, जो लगभग 5,000 करोड़ रुपये है। दिल्ली के एलजी, सीएम, मंत्रियों के साथ बैठक दिल्ली के PWD मंत्री परवेश वर्मा, पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और MoS (सड़क परिवहन) हर्ष मल्होत्रा भी बैठक में शामिल हुए। बैठक में सभी चल रही राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा की गई। पिछले हफ्ते, दिल्ली सरकार और MCD के शीर्ष अधिकारी फिजिकल बूथों को हटाने के लिए मल्टीलेन फ्री फ्लो (MMLF) टोल और एंट्री फीस कलेक्शन सिस्टम लगाने पर सहमत हुए थे। बैठक में कई प्रोजेक्ट पर चर्चा बैठक में लिए गए निर्णयों पर अधिकारियों ने कहा कि NHAI ग्यारह मूर्ति से आईएनए से वसंत कुंज तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड तक एक अंडरग्राउंड लिंक (सुरंग) की संभावना तलाशने के लिए एक तकनीकी अध्ययन करेगी। एक अधिकारी ने कहा कि इससे सरदार पटेल मार्ग पर ट्रैफिक कम करने में मदद मिलेगी, जो सुबह और शाम के पीक आवर्स के दौरान पूरी तरह से जाम हो जाता है और यहां वीआईपी मूवमेंट भी बहुत होता है। CM कार्यालय ने एक बयान में यह भी कहा कि सराय काले खान को IGI एयरपोर्ट से जोड़ने वाली सुरंग के लिए भी एक व्यवहार्यता अध्ययन किया जाएगा। NHAI जल्द ही तीन NH स्ट्रेच की रिपोर्ट करेगा तैयार अधिकारियों ने कहा कि बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि NHAI जल्द ही तीन NH स्ट्रेच – हरियाणा-दिल्ली बॉर्डर से पंजाबी बाग (18.5 किमी), आश्रम से बदरपुर (7.5 किमी) और मेहरौली से गुड़गांव बॉर्डर (8.5 किमी) – को अपने कब्जे में लेगी और विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने के बाद उन्हें सिग्नल फ्री बनाएगी। उन्होंने कहा कि PWD इन राजमार्ग स्ट्रेच के किनारे सर्विस रोड और नालियों का रखरखाव करेगी।  

केंद्रीय मंत्री गडकरी ने NH-44 पर सर्विस रोड की डीपीआर बनाने के लिए निर्देश दिए

ग्वालियर ग्वालियर से निकलने वाले नेशनल हाइवे (NH-44) पर लगातार यातायात का दबाव बढ़ रहा है। बायपास के किनारे बसे रिहायशी क्षेत्रों में स्थानीय नागरिकों को मुख्य मार्ग पर आवागमन में कठिनाई होती है, जिससे दुर्घटनाओं की संभावनाए भी बढ़ रही हैं। इन समस्याओं से जल्द लोगों को राहत मिल जाएगी। बड़ागांव बायपास एनएच-44 पर सर्विस रोड बनाई जाएगी। सर्विस रोड बनाने के लिए सांसद भारत सिंह कुशवाह ने केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकऱी(Nitin Gadkari) से मुलाकात की थी। केंद्रीय मंत्री ने सर्विस रोड की डीपीआर बनाने के लिए निर्देश दिए हैं।  जानकारी के अनुसार, इस परियोजना के अंतर्गत लगभग 35-40 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड का निर्माण प्रस्तावित है, जो मुख्य मार्ग से स्थानीय यातायात को पृथक कर यातायात की सुगमता को बढ़ाएगी। स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए 8 व्हीक्यूलर अंडरपास (वीयूपी) और 3 लाइट व्हीक्यूलर अंडरपास (एलवीयूपी) का निर्माण भी प्रस्तावित है, जिससे क्रॉस ट्रैफिक की आवाजाही सुचारू होगी और मुख्य मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा। सर्विस रोड को लेकर सांसद कुशवाह ने गत दिवस प्रशांत मीणा एनएचआइ मैनेजर के साथ निरीक्षण किया। ऐसे होगा काम सर्विस रोड : 35-40 किमी लंबी सर्विस रोड का निर्माण होगा, जो मुख्य मार्ग से स्थानीय यातायात को अलग करेगी। अंडरपास : 11 अंडरपास बनाए जाएंगे, जिनमें 8 व्हीक्यूलर अंडरपास और 3 लाइट व्हीक्यूलर अंडरपास शामिल हैं। यातायात सुगमता: परियोजना से यातायात की सुगमता बढ़ेगी और मुख्य मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा। सड़क सुरक्षा: परियोजना से सड़क सुरक्षा में भी सुधार होगा। क्षेत्रीय विकास : परियोजना ग्वालियर बाइपास क्षेत्र में यातायात प्रबंधन, सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास के दृष्टिकोण से लाभकारी होगी। शहर के दोनों ओर विस्तार होगा यह परियोजना विशेष रूप से ग्वालियर बायपास एनएच-44 पर स्थित उन क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है, जहां पर जनसंख्या घनत्व अधिक है, जिससे स्थानीय यातायात को सुरक्षित एवं सुविधाजनक विकल्प मिल सके। मुख्य मार्ग पर यातायात दबाव में कमी आएगी और सड़क सुरक्षा में भी सुधार होगा। शहर के दोनों ओर विस्तार होगा।– भारत सिंह कुशवाह, सांसद

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री गडकरी का माना आभार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर रिंग रोड- पैकेज वी(जबलपुर रिंग रोड का अंतिम चरण) से 4 – लेन एक्सेस कंट्रोल हाईवे के विकास के लिए 607.36 करोड़ रुपए की लागत के साथ मंजूरी देने पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी आभार माना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश में सड़क विकास को गति देने के लिए यह महत्वपूर्ण सौगात है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि यह खंड मार्ग जबलपुर रिंग रोड और रीवा-जबलपुर-रायपुर कॉरिडोर का एक हिस्सा है। इस मार्ग के चौड़ीकरण से जबलपुर शहर में भीड-भाड़ कम होगी। क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर निर्माण होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह परियोजना जबलपुर और क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगी और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर क्षेत्र की समृद्धि और सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करेगी।  

प्रगति की राह पर अग्रसर छत्तीसगढ़ : केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने मांगी ₹1,383 करोड़ की विकास परियोजनाओं के लिए मंजूरी

नई दिल्ली/ रायपुर छत्तीसगढ़ की सड़क अवसंरचना के विकास और सुधार को समर्थन देने के लिए केंद्रीय आवासन एवं शहरी मामलों के राज्य मंत्री तोखन साहू ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की और 2024-25 के केंद्रीय सड़क निधि के तहत राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत 13 महत्वपूर्ण सड़क विकास परियोजनाओं, जिनकी कुल लागत ₹1,383 करोड़ है, के प्रस्तावों की मंजूरी का अनुरोध किया। इसके अलावा, साहू ने छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित नए राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए मार्गों की घोषणा का अनुरोध किया। सड़क परिवहन मंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के महत्व को समझते हुए, मंत्रालय के नए राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण कार्यक्रम के तहत साहू द्वारा प्रस्तावित मार्गों पर विचार करने के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाने का आश्वासन दिया। छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित नए राष्ट्रीय राजमार्गों के मार्ग निम्नलिखित हैं:  1. रायगढ़-धरमजयगढ़-मैनपाट-अंबिकापुर-उत्तर प्रदेश सीमा (282 किमी) 2. कवर्धा-राजनांदगांव-भानुप्रतापपुर-अंतागढ़-नारायणपुर-गीदम-दंतेवाड़ा-सुकमा (482 किमी) 3. रतनपुर-लोरमी-मुंगेली-नंदघाट-भाटापारा-बलौदाबाजार (135 किमी) 4. केंवची राष्ट्रीय राजमार्ग 45 – पेंड्रा रोड पासान – कटघोरा राष्ट्रीय राजमार्ग – 130 (116 किमी) 5. मुंगेली-नवागढ़-बेमेतरा-धमधा-दुर्ग-झलमला (बालोद) सड़क (176 किमी) 6. राजनांदगांव-मोहला-मानपुर सड़क (100 किमी) 7. पंडरिया-बजाग-गदासरई सड़क (37 किमी) 8.राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 53 को राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 130B (रायपुर रिंग रोड) से जोड़ने वाली सड़क (11 किमी) साहू ने सड़क परिवहन मंत्री के प्रति छत्तीसगढ़ में सड़क विकास पहलों को आगे बढ़ाने में निरंतर समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “यह समर्थन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए आवश्यक है और यह छत्तीसगढ़ की परिवर्तनकारी राह की नींव रखता है।” साहू ने राज्य के विकास और प्रगति के लिए इन परियोजनाओं के महत्व पर जोर दिया और ऐसे और अधिक पहलों का स्वागत करने की तत्परता व्यक्त की, जो छत्तीसगढ़ के बुनियादी ढांचे और समग्र विकास को महत्वपूर्ण रूप से लाभान्वित करेंगी।

Seminar on road and bridge construction की तकनीकों पर सेमिनार का आज शुभारंभ, केंद्रीय मंत्री गडकरी व सीएम मोहन होंगे शामिल

भोपाल  सड़क और पुल निर्माण के क्षेत्र में उभरती नवीनतम प्रवृत्तियों और तकनीकों पर दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन राजधानी के रवींद्र भवन भोपाल में किया जा रहा है। इस सेमिनार में विभिन्न तकनीकी-सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें देशभर से आए हुए विशेषज्ञ नई तकनीकों, निर्माण सामग्रियों और ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन) अनुबंध निष्पादन की चुनौतियों पर अपने विचार और अनुभव साझा करेंगे।। कार्यक्रम का आयोजन भारतीय सड़क कांग्रेस (आईआरसी) और मध्य प्रदेश शासन के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के सहयोग से होगा। सेमिनार के पहले दिन 19 अक्टूबर को उद्घाटन-सत्र में केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गड़करी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह सहित अन्य विशिष्टजन उपस्थित रहेंगे। आज इन विषयों पर विमर्श सेमिनार के पहले दिन प्रमुख चर्चाओं में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत नई तकनीकों का कार्यान्वयन, पुल निर्माण में नई मशीनरी का उपयोग और सड़क निर्माण में उपयोग होने वाली नई सामग्रियों पर फोकस रहेगा। सड़क सुरक्षा, परियोजनाओं की मॉनिटरिंग के लिए आईटी तकनीकों का उपयोग, और सीमांत सामग्रियों के उपयोग पर भी गहन मंथन किया जाएगा। ईपीसी अनुबंधों पर होगी विस्तृत चर्चा दूसरे दिन 20 अक्टूबर को ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन) अनुबंधों की संरचना शेड्यूलिंग, अनुबंध निष्पादन में ठेकेदारों की भूमिका और सहायक अभियंताओं की भूमिका पर विस्तृत चर्चा होगी। इसमें अनुबंधों से जुड़े विवादों और चुनौतियों के समाधान पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। समापन सत्र में विभिन्न विशेषज्ञ और प्रतिनिधि पैनल चर्चा के माध्यम से सड़क और पुल निर्माण में नई तकनीकों के उपयोग पर अपने विचार रखेंगे। यह है उद्देश्य सेमिनार का उद्देश्य प्रदेश में सड़क और पुल निर्माण की गुणवत्ता को बढ़ाने और नवीनतम तकनीकों से समयबद्ध और टिकाऊ अधोसंरचना का विकास सुनिश्चित करना है। इस सेमिनार में सरकारी और निजी क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर अनुभवों और नवाचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा। इससे प्रदेश की अधोसंरचना परियोजनाओं को नई दिशा और मजबूती मिल सकेगी। कार्यक्रम से पूर्व सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस दो दिवसीय सेमिनार से मध्यप्रदेश के अवसंरचना विकास को नई ऊर्जा मिलेगी और यह आयोजन राज्य की निर्माण परियोजनाओं में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होगा।

भारतीय सड़क कांग्रेस भोपाल में सड़क और पुल निर्माण की नवीन तकनीकों पर मंथन, CM मोहन यादव और नितिन गडकरी ने किया शुभारंभ

भोपाल केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी और सीएम मोहन यादव ने शनिवार, 19 अक्टूबर को भोपाल के विकास का विजन साझा किया। इस दौरान उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी और सुंदरलाल पटवा से जुड़ा रोचक किस्सा सुनाते हुए कहा कैसे उनके एक निर्णय से देश 6 लाख गांवों में क्रांतिकारी बदलाव आया है। भोपाल के रवींद्र भवन में सड़क और पुल निर्माण की नवीन तकनीकों पर आधारित दो दिवसीय सेमिनार आयोजित किया गया है। इसके शुभारंभ समारोह में केंद्रीय मंत्री गड़करी ने कहा, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क वाला देश है। यहां 16 लाख किलोमीटर सड़कों बड़ा नेटवर्क है। सेमिनार में सड़क और पुल निर्माण की नई तकनीक, सामग्री और एग्रीमेंट प्रोसेस से जुड़े पहलुओं पर एक्सपर्ट्स अपने अनुभव और सुझाव साझा कर रहे हैं। यहां एक प्रदर्शनी भी लगाई गई है, जिसमें सड़क और पुल निर्माण में लगने वाली नई मशीनरी समेत अन्य सामग्री का प्रदर्शित की गई हैं। सेमिनार में विभिन्न तकनीकी-सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें देशभर से आए हुए विशेषज्ञ नई तकनीकों, निर्माण सामग्रियों और ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन) एग्रीमेंट प्रक्रिया की चुनौतियों पर अपने विचार रखेंगे। लोक निर्माण विभाग के मंत्री राकेश सिंह ने कहा- लोक निर्माण से लोक कल्याण हमारी टैगलाइन है, जिसका उद्देश्य केवल संरचनाओं का निर्माण करना भर नहीं है बल्कि ऐसी परियोजनाओं का विकास करना है जो समाज के सतत विकास में अपना योगदान दें। इसलिए हमारा लक्ष्य है कि भविष्य की सभी परियोजनाएं, इफेक्टिव मैनेजमेंट, कम लागत और समयबद्ध कार्य की दृष्टि से आदर्श बने। मुख्यमंत्री यादव ने कहा है कि इस दो दिवसीय सेमिनार से मध्य प्रदेश के अवसंरचना विकास को नई ऊर्जा मिलेगी और यह आयोजन राज्य की निर्माण परियोजनाओं में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होगा। सेमिनार में विभिन्न तकनीकी-सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें देशभर से आए हुए विशेषज्ञ नई तकनीकों, निर्माण सामग्रियों और ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन) अनुबंध निष्पादन की चुनौतियों पर अपने विचार रखेंगे। सेमिनार में लोक निर्माणमंत्री राकेश सिंह सहित अन्य विशिष्टजन उपस्थित रहेंगे। पहले दिन प्रमुख चर्चा में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत नई तकनीकों का कार्यान्वयन, पुल निर्माण में नई मशीनरी का उपयोग और सड़क निर्माण में उपयोग होने वाली नई सामग्रियों पर फोकस रहेगा। सड़क सुरक्षा, परियोजनाओं की मॉनिटरिंग के लिए आईटी तकनीकों का उपयोग और सीमांत सामग्रियों के उपयोग पर भी गहन मंथन किया जाएगा। आखिरी दिन रविवार को ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन) अनुबंधों की संरचना शेड्यूलिंग, अनुबंध निष्पादन में ठेकेदारों की भूमिका और सहायक अभियंताओं की भूमिका पर विस्तृत चर्चा होगी। इसमें अनुबंधों से जुड़े विवादों और चुनौतियों के समाधान पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। समापन सत्र में विभिन्न विशेषज्ञ और प्रतिनिधि पैनल चर्चा के माध्यम से सड़क और पुल निर्माण में नई तकनीकों के उपयोग पर अपने विचार रखेंगे। सेमिनार का उद्देश्य प्रदेश में सड़क और पुल निर्माण की गुणवत्ता को बढ़ाने और नवीनतम तकनीकों से समयबद्ध और टिकाऊ अवसंरचना का विकास सुनिश्चित करना है।

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