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भारत को मिला ऑयल का विशाल भंडार ! अब बाहर से मंगाएगा नहीं दूसरे देशों का देगा

नई दिल्ली भारत, अंडमान सागर में एक बेहद बड़ी ऑफशोर तेल खोज कर सकता है। इस तेल भंडार में 184,440 करोड़ लीटर कच्चा तेल हो सकता है और यह गुयाना की परिवर्तनकारी खोज को टक्कर दे सकता है। यह बात केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने द न्यू इंडियन के साथ एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कही। अगर यह तेल भंडार मिल जाता है तो यह भारत के लिए एक बड़ा गेमचेंजर साबित होगा। पुरी ने कहा कि सरकार के हालिया सुधार और आक्रामक खोज अभियान एक बड़ी खोज के लिए आधार तैयार कर रहे हैं। पुरी के मुताबिक, छोटी खोजों के अलावा, अंडमान क्षेत्र में गुयाना जैसी बड़े पैमाने पर तेल की खोज भारत की अर्थव्यवस्था को 3.7 लाख करोड़ डॉलर से 20 लाख करोड़ डॉलर तक बढ़ाने में मदद कर सकती है। अगर कनफर्म हो गया कि अंडमान सागर में इतना बड़ा तेल भंडार है तो यह खोज भारत के एनर्जी लैंडस्केप को नया आकार दे सकती है। पुरी ने कहा कि कुछ वक्त की बात है, उसके बाद हो सकता है कि हम अंडमान सागर में एक बड़ा गुयाना खोज लें। क्या है गुयाना मॉडल गुयाना के तट पर एक्सॉनमोबिल, हेस कॉरपोरेशन और सीएनओओसी ने 11.6 अरब बैरल से अधिक का विशाल भंडार खोजा था। उस खोज ने गुयाना को तेल भंडार वाले दुनिया के टॉप 20 देशों में शामिल कर दिया, जिससे उस देश की अर्थव्यवस्था में नया बदलाव आया। पुरी का मानना ​​है कि अगर मौजूदा ड्रिलिंग प्रयास सफल होते हैं तो भारत इसी तरह की सफलता की ओर बढ़ सकता है, विशेष रूप से अंडमान क्षेत्र में। हमारी एनर्जी की जरूरतें एक झटके में होंगी पूरी माना जा रहा है कि इसके मिलने के बाद हमारी एनर्जी की जरूरतें एक झटके में पूरी हो जाएंगी। अगर अंडमान में खोज सफल होती है, तो भारत ऑयल इंपोर्ट्स को काफी हद तक कम कर सकता है और अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकता है। होर्मुज का रास्ता बंद होने से महंगे पड़ेंगे तेल व गैस ईरान और इजरायल के बीच युद्ध भारत के लिए भी नुकसानदायक है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि युद्ध के कारण, भारत पर आर्थिक संकट का खतरा बढ़ रहा है। खासकर होर्मुज जलडमरुमध्य को लेकर चिंताएं हैं। अगर यह बंद होता है तो भारत के लिए तेल और गैस का आयात महंगा पड़ेगा। दोनों देशों से व्यापारिक रिश्ते वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने ईरान को 1.24 अरब डॉलर का माल निर्यात किया और 44.19 करोड़ डॉलर का आयात किया। वहीं, इजरायल के साथ 2.15 अरब डॉलर का निर्यात और 1.61 अरब डॉलर का आयात किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य होर्मुज जलडमरूमध्य ओमान और ईरान के बीच स्थित है, जो खाड़ी के देशों (इराक, कुवैत, सऊदी अरब, बहरीन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात) से समुद्री मार्ग को अरब सागर और उससे आगे तक जोड़ता है। यह जलडमरूमध्य अपने सबसे संकरे बिंदु पर केवल 33 किमी चौड़ा है। यहां प्रतिदिन लगभग दो करोड़ बैरल तेल और तेल उत्पाद जहाजों पर लादे जाते हैं। सस्ता नहीं है तेल के कुएं खोदना भारत ने कई क्षेत्रों में एक्सप्लोरेशन के लिए ड्रिलिंग को बढ़ाया है, खासकर उन क्षेत्रों में जिन्हें पहले दुर्गम माना जाता था। पुरी ने तेल की खोज के लिए कुएं खोदने की हाई कॉस्ट पर भी बात की। उन्होंने कहा कि इसमें बहुत सारा पैसा लगता है। उन्होंने कहा कि गुयाना में उन्होंने 43 या 44 कुएं खोदे, जिनमें से प्रत्येक की लागत 10 करोड़ डॉलर थी। उन्हें 41वें कुएं में तेल मिला। आगे कहा कि सरकारी कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) ने इस साल जितने कुएं खोदे हैं, वे 37 साल में सबसे ज्यादा हैं। वित्त वर्ष 2024 में कंपनी ने 541 कुओं की खुदाई की। इसमें 103 एक्सप्लोरेटरी और 438 डेवलपमेंटल कुएं शामिल हैं। इन सब में कंपनी ने ₹37,000 करोड़ का अपना रिकॉर्ड हाई पूंजीगत खर्च भी दर्ज किया। समुद्री इलाके में खुदाई शुरू सरकार ने पिछले कुछ सालों में अनछुए समुद्री बेसिनों में तेल और गैस की खोज के लिए नीतिगत सुधार किए हैं और निवेश बढ़ाया है. सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां जैसे ONGC और ऑयल इंडिया लिमिटेड ने अंडमान के गहरे समुद्री इलाके में खुदाई शुरू कर दी है. कारोबारी साल 2024 में ONGC ने 37 सालों में सबसे अधिक 541 कुएं खोदे, जिसमें 103 खोज कुएं और 438 विकास कुएं शामिल थे. कंपनी ने ₹37,000 करोड़ का अधिकतम कैपिटल एक्सपेंडिचर भी रिकॉर्ड किया. भारत की वर्तमान कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85% आयात पर निर्भर है, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा कमजोर होती है. अंडमान सागर में सफल खोज से आयात पर निर्भरता कम होगी और देश की एनर्जी स्वतंत्रता मजबूत होगी. इसके साथ ही, तेल की घरेलू उपलब्धता बढ़ने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता आएगी और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी. पुरी ने बताया कि गुयाना में तेल खोजने के लिए 43-44 कुएं खोदे गए थे, जिनमें से 41वें कुएं में तेल मिला था. भारत भी इसी तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है, लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही सफलता मिलेगी. अंडमान सागर में तेल की खोज भारत के लिए न केवल एनर्जी सेक्टर में क्रांति लाएगी, बल्कि ग्लोबल तेल बाजार में भी देश की स्थिति मजबूत करेगी. यह खोज भारत को एक प्रमुख तेल उत्पादक देश के रूप में स्थापित कर सकती है और आर्थिक रूप से देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी. तीसरा सबसे बड़ा ऑयल इंपोर्टर है भारत भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत में से 85% को आयात के जरिए पूरा करता है। देश कच्चे तेल के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इंपोर्टर है, इसके आगे केवल अमेरिका और चीन हैं। कच्चे तेल का घरेलू उत्पादन वर्तमान में असम, गुजरात, राजस्थान, मुंबई हाई और कृष्णा-गोदावरी बेसिन में केंद्रित है। विशाखापत्तनम, मैंगलोर और पादुर में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाकर रखे गए हैं, ओडिशा और राजस्थान में नई साइट्स की योजना बनाई गई है। भारत की तेल आवश्यकता और आयात भारत के लिए यह तेल कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि भारत अपनी कच्चे तेल की … Read more

रूसी तेल पर अमेरिकी बैन बेअसर, रूस के तेल का भारत में फिर से आयात बढ़ गया

नई दिल्ली रूसी तेल पर अमेरिकी बैन बेअसर नजर आ रहा है। भारत ने रूस से तेल खरीदना फिर से तेज कर दिया है। जनवरी और फरवरी के मुकाबले मार्च में इसमें तेजी आई है। जनवरी में अमेरिका ने रूस पर कुछ बैन लगाए थे। इसमें भारत और चीन बेचे जाने वाला कच्चा तेल भी शामिल था। यह बैन जो बाइडेन के प्रशासन ने लगाए थे। डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद भी ये बैन लगे हुए हैं। हालांकि रूस ने मार्च में तेल बेचने की रफ्तार बढ़ाई है। इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक भारत ने मार्च में रूस से काफी मात्रा में तेल खरीदा है। इसकी वजह ये है कि रूस का तेल आसानी से मिल रहा है। वहीं ज्यादातर तेल 60 डॉलर प्रति बैरल से कम कीमत पर मिल रहा है। इससे भारत को तेल लाने के लिए बिना पाबंदी वाले जहाज आसानी से मिल जा रहे हैं। रूस के पास तेल ज्यादा होने की एक बड़ी वजह ये भी है कि यूक्रेन ने रूस के तेल कारखानों पर ड्रोन से हमले किए हैं। इससे रूस में तेल की खपत कम हो गई है और वो तेल बाहर बेचने को मजबूर है। कितना खरीदा तेल? तेल बाजार पर नजर रखने वाली कंपनी केप्लर (Kpler) ने कुछ आंकड़े जारी किए हैं। इन आंकड़ों के अनुसार मार्च के पहले 21 दिनों में भारत ने रूस से हर दिन औसतन 1.85 मिलियन बैरल तेल खरीदा है। फरवरी में ये आंकड़ा 1.47 मिलियन बैरल प्रतिदिन (bpd) था। वहीं जनवरी में यह 1.64 मिलियन bpd था। इसका मतलब है कि भारत ने मार्च में रूस से ज्यादा तेल खरीदा है। मार्च में भारत ने जितना भी तेल खरीदा है, उसमें से रूस की हिस्सेदारी 35 फीसदी से ज्यादा रही है। फरवरी में ये हिस्सेदारी 31% और जनवरी में 33% थी। भारत और चीन सबसे आगे जनवरी से मार्च के महीने में भारत ने रूस से हर दिन औसतन 1.75 मिलियन bpd तेल खरीदा है। पिछले दो सालों में भी भारत ने लगभग इतना ही तेल खरीदा था। रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमला कर दिया था। इसके बाद पश्चिमी देशों ने रूस से तेल खरीदना कम कर दिया। तब से भारत और चीन, रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले देश बन गए हैं। बाइडेन प्रशासन ने लगाया था बैन रूसी तेल पर जनवरी में जो बाइडेन प्रशासन ने बैन लगाया था। बाइडेन ने यह फैसला डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद संभालने से कुछ दिनों पहले ही लिया था। इस दौरान बाइडेन प्रशासन ने 183 जहाजों पर भी बैन लगाया था। ये जहाज रूस से तेल लाने-ले जाने का काम करते थे। इसके अलावा उन्होंने रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों और बीमा कंपनियों पर भी पाबंदी लगाई थी। जब बैन तो फिर क्यों आई तेजी? अब सवाल है कि जब अमेरिका ने रूसी तेल पर बैन लगाया है तो फिर ऐसे में रूस तेल क्यों बेच रहा है। दरअसल बैन के कारण भारत के तेल कारखानों को रूस से तेल लाने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी। वे ऐसे जहाजों और बीमा कंपनियों के साथ काम नहीं करना चाहते थे, जिन पर पाबंदी लगी हुई थी। लेकिन अब रूस के तेल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल से कम हो गई है। ऐसे में जहाजों और बीमा की दिक्कत दूर हो गई। G7 देशों और उनके साथियों ने एक नियम बनाया है कि अगर रूस के तेल की कीमत 60 डॉलर से कम है तो पश्चिमी देशों के जहाज और बीमा कंपनियां रूस से तेल लाने-ले जाने में मदद कर सकती हैं। Kpler के डेटाबेस के अनुसार रूस से भारत आने वाले सभी जहाज बिना पाबंदी वाले हैं।

आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमत में भी बड़ी गिरावट आएगी : एक्सपर्ट

नई दिल्ली  कच्चे तेल की कीमत में कमी आई है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। यह अक्टूबर के बाद पहली बार हुआ है जब तेल की कीमतों में 2% से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली है। विदेशी बाजारों में कमजोर मांग को देखते हुए कच्चे तेल की कीमत में कमी आई है। अभी कई संकेत और ऐसे मिल रहे हैं जिनसे पता चलता है कि कच्चे तेल की कीमत में और कमी आ सकती है। इससे देश में पेट्रोल और डीजल की कीमत भी गिर सकती है। बुधवार को तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही। ब्रेंट क्रूड वायदा 0.3 फीसदी गिरकर 70.80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 0.9 फीसदी गिरकर 67.68 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के मुताबिक कच्चे तेल की कीमत में गिरावट से भारत की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को फायदा हो सकता है। और कम हो सकती है कच्चे तेल की कीमत दुनियाभर में ऐसे कई संकेत मिल रहे हैं जिनके चलते आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमत और कम हो सकती है। तीन मुख्य संकेत इस प्रकार हैं: 1. रूस पर लगे बैन में ढील इस समय अमेरिका रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने पर लगा है। ऐसे में अमेरिका ने रूस पर जो बैन लगाए हैं, उनमें वह कुछ ढील दे सकता है। अमेरिका ने विदेश और वित्त मंत्रालयों से उन बैन की लिस्ट तैयार करने को कहा है जिनमें रूस को ढील दी जा सकती है। ऐसा होने पर रूस की ओर से तेल की सप्लाई बढ़ सकती है। ऐसे में तेल की कीमत में कमी आ सकती है। 2. OPEC+ ने बढ़ाया प्रोडक्शन OPEC+ ने अपने तेल प्रोडक्शन बढ़ाने का फैसला लिया है। रॉयटर्स की एक खबर के मुताबिक OPEC+ ने अप्रैल में तेल प्रोडक्शन को 138,000 बैरल प्रतिदिन बढ़ाने का फैसला किया है। ऑयल प्रोडक्शन में यह वृद्धि साल 2022 के बाद पहली बार हो रही है। OPEC+ ग्रुप का कहना है कि यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ओपेक और सऊदी अरब पर कीमतें कम करने के लिए दबाव बढ़ाने के बाद उठाया गया है। 3. ट्रंप के टैरिफ का भी पड़ेगा असर डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा और मैक्सिको से आयातित उत्पादों पर 25% टैरिफ लगाने का फैसला किया है। जानकारों के मुताबिक ये टैरिफ ग्लोबल इकोनॉमिक एक्टिविटी और फ्यूल डिमांड को प्रभावित कर सकते हैं। इसके चलते तेल की कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है। यानी इसकी कीमत कम हो सकती है। क्या कम होगी पेट्रोल-डीजल की कीमत? कच्चे तेल की कीमत कम होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि भारतीय तेल कंपनियां भी इस बारे में कुछ निर्णय ले सकती हैं। चूंकि अभी कच्चे तेल की कीमत कम हो चुकी है और आने वाले समय में इसमें और गिरावट के संकेत हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि पेट्रोल और डीजल की कीमत में भी कमी आ सकती है। हो सकता है कि पेट्रोल-डीजल की कीमत में बड़ी गिरावट आए। अगर ऐसा होता है तो इससे देश में महंगाई पर भी कुछ काबू पाया जा सकता है।

दुनियाभर की ऑयल कंपनियों की नजर इस समय भारत पर, बढ़ती ऑयल की मांग

नई दिल्ली  दुनियाभर की कई ऑयल कंपनियों की नजर इस समय भारत पर है। कारण है भारत में बढ़ती ऑयल की मांग। इस मामले में साल 2024 में भारत ने चीन को पीछे छोड़ दिया है। यही नहीं, अगले साल 2025 में भी चीन तेल की मांग के मामले में भारत के आसपास भी नहीं रहेगा। यह बात एसएंडपी ग्लोबल कमोडिटी इनसाइट्स ने कही है। एसएंडपी ग्लोबल कमोडिटी इनसाइट्स के अनुसार ईंधन खपत मामले में भारत दुनिया में तेजी से बढ़ रहा है। यही कारण भारत में रिफाइनरी में विस्तार हो रहा है। साथ ही क्रूड ऑयल की सोर्सिंग को भी बढ़ा रही है। भारत चूंकि तेल खपत में चीन को पीछे छोड़ चुका है। इसके चलते दुनिया की कई कंपनियां भारत में अपनी संभावनाएं तलाश रही हैं। भारत होगा दुनिया में आगे एसएंडपी ग्लोबल कमोडिटी इनसाइट्स में मैक्रो और ऑयल डिमांड रिसर्च के ग्लोबल हेड कांग वू ने कहा कि भारत में आगे वाले समय में ऑयल की मांग तेजी से बढ़ेगी। ऑयल मांग के मामले में भारत दक्षिण पूर्व एशिया और दक्षिण एशिया के कई देशों को पीछे छोड़ सकता है। भारत चीन से कितना आगे?  वू ने कहा कि साल 2025 में भारत में तेल की मांग में 3.2 फीसदी की तेजी रहने का अनुमान है। वहीं चीन में यह तेजी 1.7 फीसदी रह सकती है। एसएंडपी ग्लोबल कमोडिटी इनसाइट्स के आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष 2024 के पहले 10 महीनों में चीन की तेल मांग में 1,48,000 बैरल प्रतिदिन या 0.9 फीसदी की तेजी आई है। वहीं भारत में यह मांग 1,80,000 बैरल प्रतिदिन रही। ऐसे में भारत में ऑयल की मांग में 3.2 फीसदी की तेजी आई तो चीन के मुकाबले काफी ज्यादा है। इस वजह से माना जा रहा है कि भारत में साल 2025 में रिफाइनिंग क्षमता में काफी वृद्धि होगी। भारत कहां से करता है आयात? भारत मिडिल ईस्ट, अफ्रीका, यूरोप, नॉर्थ अमेरिका, साउथ अमेरिका और साउथ-ईस्ट एशिया के देशों सहित कई देशों से तेल और गैस आयात करता है। भारत अपनी कच्चे तेल की 80 फीसदी से अधिक जरूरत के लिए आयात पर निर्भर करता है। घरेलू कच्चे तेल का प्रोडक्शन बढ़ाने और आयात में कमी लाने के लिए सरकार की ओर से कई कदम उठाए गए हैं। रूस के साथ कम हुई निर्भरता भारत अपने तेल की जरूरत रूस से भी पूरी करता है। हालांकि रूस से आने वाले तेल की हिस्सेदारी काफी कम है। डेटा के मुताबिक नवंबर में भारत ने रूस से अक्टूबर के मुताबिक 13 फीसदी कम तेल खरीदा। वहीं भारत ने मिडिल ईस्ट के साथ तेल खरीदने की क्षमता बढ़ा दी है। चीन में क्यों आई कमी? चीन में तेल की मांग में पिछले कुछ वर्षों में कमी आई है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि चीन में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री काफी तेजी से बढ़ रही है। हालांकि चीन में पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट की मांग में कमी बेहद कम रहेगी। ऐसे में चीन में तेल की मांग आंशिक रूप से कम रहेगी।

मेरठ में गंजो की उमड़ी भीड़, 20 रुपए में बाल उगाने की दवा लगवाने लग गया जाम

मेरठ  यूपी में मेरठ के लिसाड़ी गेट के समर गार्डन (Summer Garden) में 20 रुपए में बाल उगाने की दवा सिर पर लगवाने के लिए लोगों की भीड़ टूट पड़ी। सिर से गायब होते बालों को रोकने के लिए हर जतन कर चुके लोग यहां लाइन लगाकर खड़े हो गए। भीड़ इतनी हो गई कि लोगों को टोकन देकर लाइन में खड़ा कराया गया। लोगों के सिर पर दवा लगाने से पहले पूरे बाल उस्तरे से कटवाने होते हैं, इसलिए इसी जगह पर दो नाई बुलाकर बैठा लिए गए। पूरे दिन यही काम होता रहा और पुलिस-प्रशासन बेखबर बना रहा। स्वास्थ्य विभाग ने भी जानकारी होने से हाथ खड़े कर दिए। लिसाड़ी गेट समर कॉलोनी में शौकत बैंक्वेट हॉल में बिजनौर के सलमान और अनीस साथियों के साथ बाल उगाने की दवा लगाने के लिए रविवार को पहुंचे। इस बात को लेकर पिछले एक सप्ताह से प्रचार किया जा रहा था। रविवार और सोमवार को मेरठ में दवा लगाने का समय निर्धारित किया गया, जबकि दिल्ली में मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को दवा लगाई जाएगी। रविवार सुबह से ही शौकत बैंक्वेट हॉल में सिर के बाल उगाने की दवा लगवाने के लिए भीड़ लग गई। इस दौरान सड़क तक जाम लग गया। इस दौरान दवा लगाने वालों ने यह भी बता दिया कि जिसको भी दवा लगवानी है, उन्हें उस्तरे से सिर के सारे बाल कटाकर आना होगा। इसके बाद भीड़ आसपास के क्षेत्र में तमाम नाई की दुकानों पर दौड़ गई। बाद में कुछ नाई को वहीं बैंक्वेट हॉल में बुलाकर टोकन सिस्टम शुरू किया गया। लोगों को टोकन देकर उन्हें पहले लाइन लगाकर बाल कटवाने के लिए बैठाया गया। इसके बाद इन्हें दवा लगवाने के लिए भेजा गया। दवा लगाने के लिए 20 रुपये लिए जा रहे थे और 300 रुपये की एक तेल की शीशी दी जा रही थी।

मोदी सरकार ने कच्चे तेल पर विंडफॉल टैक्स घटाया, इन कंपनियों को मिलेगा फायदा

नईदिल्ली केंद्र सरकार ने कच्चे तेल पर विंडफॉल टैक्स में भारी कटौती करते हुए इसे 3,250 रुपये प्रति टन कर दिया है। पिछले पखवाड़े यह 5,200 रुपये प्रति टन था। विंडफॉल टैक्स कम होने का सीधा फायदा घरेलू स्तर पर कच्चा तेल उत्पादन करने वाली कंपनियों जैसे ओएनजीसी और ऑयल इंडिया को मिलता है। सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, कर की नई दर 15 जून से प्रभावी हो गई है। डीजल, पेट्रोल और विमान ईंधन (एटीएफ) पर विंडफॉल टैक्स को शून्य बरकरार रखा गया है। 15 दिन में टैक्स की होती है समीक्षा सरकार द्वारा हर 15 दिन में विंडफॉल टैक्स की समीक्षा की जाती है। हाल के महीनों में कई बार कच्चे तेल पर विंडफॉल टैक्स कम किया जा चुका है। एक जून को इसे 5,700 रुपये प्रति टन से घटाकर 5,200 रुपये प्रति टन किया गया था। वहीं, 16 मई को सरकार ने कच्चे तेल पर विंडफॉल टैक्स 8,400 रुपये से घटाकर 5,700 रुपये प्रति टन कर दिया था। इससे पहले 1 मई को इसे 9,600 रुपये से घटाकर 8,400 रुपये प्रति टन किया गया था। विंडफॉल टैक्स 2022 से शुरू हुआ था कच्चे तेल पर विंडफॉल टैक्स कम करने का सीधा फायदा घरेलू स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादक कंपनियों जैसे ओएनजीसी और ऑयल इंडिया को मिलता है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के कारण कंपनियों को हो रहे अप्रत्याशित लाभ पर विंडफॉल टैक्स लगाया जाता है। इसे जुलाई 2022 से शुरू किया गया था।

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