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सीएम अब्दुल्ला ने भी माना अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद राज्य में अलगाववादी गतिविधियों में कमी आई

श्रीनगर  जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने भी मान लिया है कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद राज्य में अलगाववादी गतिविधियों में कमी आई है। उन्होंने मीडिया चैनल से बातचीत में उमर अब्दुल्ला ने कहा कि 2019 में जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने के बाद अलगाववादी राजनीति कमजोर हुई है, इसे कोई नकार नहीं सकता। हुर्रियत चेयरमैन मीरवाइज उमर फारूक को सीआरपीएफ सुरक्षा कवर मिलना पहले असंभव था, यह इस बदलाव का एक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि अगर अलगाववादी राजनीति कमजोर हुई है, तो इसका मतलब है कि स्थिति में सुधार हुआ है। हालांकि उनके इस बयान के बाद जम्मू-कश्मीर में अलग ही विवाद शुरू हो गया है। सज्जाद लोन बोले, अब्दुल्ला के पास सबसे बड़ी सिक्युरिटी पिछले साल 16 अंक्टूबर को उमर अब्दुल्ला ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। सत्ता में बैठने के चार महीने बाद उमर अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद हुए बदलावों पर चर्चा की। अब्दुल्ला ने कहा कि 2019 के बाद से जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों में कमी आई है। उन्होंने कहा कि क्या आपने कभी सोचा था कि मीरवाइज को केंद्र से सीआरपीएफ सुरक्षा मिलेगी? मैं तो नहीं सोच सकता था, लेकिन हालात बदल गए हैं। अब अब्दुल्ला के इस बयान पर खूब बवाल मचा है। पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन ने भी उमर को निशाने पर लेते हुए कहा कि मीरवाइज की सुरक्षा का जिक्र करने वाले भूल जाते हैं कि उनके पास सबसे बड़ा सुरक्षा घेरा रहा है। लोन ने अब्दुल्ला के बयान को जानलेवा तक कह दिया। मीरवाइज को ही उमर अब्दुल्ला ने क्यों बनाया निशाना हुर्रियत नेता मीरवाइज के ऑफिस ने उमर अब्दुल्ला के बयान को बेतुका और घटिया बताया है। इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान उनके अंदर की असुरक्षा को दिखाता है। पीडीपी एमएलए वहीद पारा ने भी एक्स पर लिखा कि मीरवाइज को अलग से निशाना बनाना उन्हें और खतरे में डालता है। यह जानते हुए भी कि उनके परिवार ने पहले ही भारी कीमत चुकाई है। सच्चाई यह है कि सैकड़ों अन्य लोगों की तरह, कब्रों, मंदिरों और मस्जिदों की भी जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की सुरक्षा की जाती है। तो अगर मीरवाइज की सुरक्षा हो रही है तो इसे मुद्दा क्यों बनाया जा रहा है? वहीद पारा ने कहा कि कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों और एनआईए की कड़ी कार्रवाई के कारण है, न कि अलगाव वादियों के कमजोर होने के कारण। पहले भी केंद्र सरकार की तारीफ कर चुके हैं सीएम 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को रद्द करने का फैसला लिया था। सरकार ने एक राष्ट्रपति अध्यादेश जारी किया, जिसने जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा छीन लिया और अनुच्छेद 35A को निरस्त कर दिया। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक भी राज्यसभा में पारित किया गया था। इसके बाद उमर अब्दुल्ला और उनकी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस समेत जम्मू-कश्मीर के सभी क्षेत्रीय दलों ने 370 हटाने का विरोध किया था। अक्टूबर 2024 में पहली बार केंद्रशासित प्रदेश में चुनाव हुए, जिसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस को बड़ी जीत मिली थी। उमर अब्दुल्ला पिछले चार महीने से सीएम हैं। कुर्सी संभालने के बाद वह कई मुद्दों को लेकर अमित शाह से मिले थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में नए कानूनों का क्रियान्वयन की तारीफ की थी।

‘सोनमर्ग क्षेत्र के गगनगीर में गैर-स्थानीय मजदूरों पर नृशंस और कायरतापूर्ण हमले की बहुत दुखद खबर है: उमर अब्दुल्ला

जम्मू-कश्मीर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गांदरबल आतंकी हमले पर जो प्रतिक्रिया दी है, उसे लेकर इंटरनेट यूजर्स भड़के हुए हैं। अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करके कहा था, ‘सोनमर्ग क्षेत्र के गगनगीर में गैर-स्थानीय मजदूरों पर नृशंस और कायरतापूर्ण हमले की बहुत दुखद खबर है। ये लोग क्षेत्र में एक प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजना पर काम कर रहे थे। इस उग्रवादी हमले में 2 लोग मारे गए हैं और दो से तीन अन्य घायल हुए हैं। मैं निहत्थे निर्दोष लोगों पर इस हमले की कड़ी निंदा करता हूं और उनके प्रियजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं।’ उमर अब्दुल्ला ने इस हमले की निंदा की, जो इस केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में उनके शपथ ग्रहण के महज 4 दिन बाद हुआ। उन्होंने घटना के कुछ वक्त बाद दूसरी पोस्ट में लिखा था, ‘गगनगीर हमले में मृतकों की संख्या अंतिम नहीं है क्योंकि स्थानीय और गैर-स्थानीय दोनों तरह के कई मजदूर घायल हुए हैं। मैं घायलों के पूरी तरह ठीक होने की प्रार्थना कर रहा हूं क्योंकि गंभीर रूप से घायलों को श्रीनगर के एसकेआईएमएस में रेफर किया जा रहा है।’ ‘आतंकवादी के बजाय उग्रवादी शब्द चुना’ गांदरबल हमले की उमर अब्दुल्ला ने निंदा जरूर की, मगर इंटरनेट यूजर्स को यह बात नागवार गुजरी कि सीएम ने इस घटना के लिए उग्रवादी हमले का इस्तेमाल किया। लोग इस बात को लेकर भड़के हुए हैं कि उन्होंने इसे आतंकवादी हमला क्यों नहीं बताया। उमर अब्दुल्ला की पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर कई लोगों की टिप्पणियां आईं, जिसमें बताया गया कि कैसे उन्होंने ‘आतंकवादी’ के बजाय ‘उग्रवादी’ शब्द चुना। एक यूजर ने लिखा, ‘ओह, उग्रवादी वापस आ गए हैं।’ इंटरनेट यूजर्स ने लगाई फटकार एक अन्य यूजर ने लिखा, ‘याद रखिए कि आप केंद्रशासित प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। आपकी हरकतों पर ध्यान दिया जा रहा है। इससे राज्य का दर्जा रद्द किए जाने की संभावना बन सकती है।’ बता दें कि जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरंग निर्माण स्थल पर आतंकवादी हमला हुआ। इसमें एक डॉक्टर और 6 श्रमिकों की मौत हो गई। आतंकवादियों ने मजदूरों के समूह पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें स्थानीय और बाहरी लोग दोनों शामिल थे। माना जाता है कि आंतकवादियों की संख्या कम से कम 2 थी। दो श्रमिकों की मौके पर ही मौत हो गयी जबकि 4 अन्य घायल श्रमिकों एवं एक डॉक्टर ने बाद में दम तोड़ दिया।

उमर अब्दुल्ला का जवाब: NC को मुस्लिमों की पार्टी बताने वालों को किया स्पष्ट

Omar Abdullah’s reply: Clarified to those who call NC a party of Muslims जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर में जनता को संबोधित करते हुए विपक्ष पर जोरदार हमला किया और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) पार्टी को मुसलमानों की पार्टी बताने वालों को करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि NC ने जम्मू से एक हिंदू डिप्टी सीएम बनाया है, जो इस बात का सबूत है कि उनकी पार्टी सभी समुदायों का प्रतिनिधित्व करती है। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पिछले 8 वर्षों में उनकी पार्टी को कमजोर करने की कोशिश की गई, लेकिन चुनावों के बाद परिणाम यह दिखाते हैं कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने अपने मताधिकार का सही इस्तेमाल किया। उन्होंने 2018 में चुनी हुई सरकार के गिरने के बाद लोगों को आई परेशानियों को स्वीकार किया और उन्हें आश्वासन दिया कि वे जम्मू-कश्मीर के लिए समर्पित रहेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा, “यह सरकार सबकी होगी। इसमें सभी समुदायों का प्रतिनिधित्व होगा। हम सिर्फ उन लोगों की सेवा नहीं करेंगे, जिन्होंने NC को वोट दिया है, बल्कि हम पूरे जम्मू-कश्मीर की आवाम की खिदमत करेंगे।” मुसलमानों की पार्टी का विवादउमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह उन लोगों के लिए स्पष्ट जवाब है, जिन्होंने पिछले चुनाव में NC के खिलाफ यह आरोप लगाया था कि यह पार्टी केवल मुसलमानों के लिए है। उन्होंने कहा, “जब हमें डिप्टी सीएम बनाना था, तो हमने जम्मू से एक हिंदू डिप्टी सीएम बनाया। मेरे खानदान से उनका कोई लेना-देना नहीं था।” इसके साथ ही, उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधा और कहा कि कांग्रेस ने अभी तक हुकूमत में आने का कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने बताया कि परिसीमन आयोग का गठन एक पार्टी के लाभ के लिए किया गया था, जिससे उनकी पार्टी को मुश्किलें बढ़ेंगी। उमर अब्दुल्ला ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि अब उन्हें लोगों की परेशानियों को दूर करने का काम करना है और उन्होंने कांग्रेस और NC के गठबंधन का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने मिलकर चुनाव लड़ा और सफलता हासिल की।

जम्मू-कश्मीर में नए मंत्रियों में हुआ विभागों का बंटवारा

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक के पहले प्रस्ताव में राज्य का दर्जा बहाल करने का आह्वान किया गया।आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि  पहली बैठक के दौरान जम्मू-कश्मीर कैबिनेट ने एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य का दर्जा बहाल करने का आग्रह किया गया। जानकारी मिली है कि कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करने वाले मुख्यमंत्री दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री को प्रस्ताव का मसौदा सौपेंगे और उनसे चार अगस्त, 2019 से पहले की तरह राज्य का दर्जा बहाल करने का आग्रह करेंगे। कैबिनेट की ओर से पारित प्रस्ताव पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। जम्मू-कश्मीर सरकार ने कल की कैबिनेट बैठक में किसी भी फैसले के बारे में आधिकारिक तौर पर कुछ भी खुलासा नहीं किया। जम्मू-कश्मीर में नए मंत्रियों में हुआ विभागों का बंटवारा  जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने प्रदेश में सरकार गठन के बाद नये मंत्रियों को विभाग सौंप दिये हैं। उप मुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी को लोक निर्माण (आर एंड बी), उद्योग एवं वाणिज्य, खनन, श्रम एवं रोजगार और कौशल विकास विभाग सौंपे गए हैं। सुसकीना इटू स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा और समाज कल्याण का प्रबंधन करेंगी। इसी तरह जावेद अहमद राणा को जल शक्ति, वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण और जनजातीय मामलों का प्रभार दिया गया है। जावीद अहमद डार को कृषि उत्पादन, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज, सहकारिता और चुनाव की जिम्मेदार दी गयी है। सतीश शर्मा खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले, परिवहन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी, युवा सेवा और खेल तथा एआरआई और प्रशिक्षण विभाग संभालेंगे। उपराज्यपाल ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर सरकार के कामकाज के लेन-देन नियम, 2019 के नियम 4 (2) के अनुसार मंत्रियों को प्रभार सौंपा। आदेश में यह भी कहा गया है कि इन मंत्रियों को आवंटित नहीं किए गए कोई भी अन्य विभाग या विषय मुख्यमंत्री के पास रहेंगे। गौरतलब है कि उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्होंने अपने मंत्रिमंडल के लिए पांच मंत्रियों को चुना- दो कश्मीर से और तीन जम्मू से। उमर ने पहले 2008 से 2014 तक जम्मू-कश्मीर सरकार का नेतृत्व किया था, जब यह क्षेत्र पूर्ण राज्य था और इसे अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जा प्राप्त था।    

केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर को मिला पहला मुख्यमंत्री, उमर अब्दुल्ला ने ली सीएम पद की शपथ…

श्रीनगर उमर अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण कर ली है. समारोह में सुरिंदर चौधरी ने डिप्टी सीएम की शपथ ली. उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर (SKICC) में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. उपराज्यपाल मनोज सिन्हा पहले उमर अब्दुल्ला को शपथ दिलाई, इसके बाद सुरिंदर चौधरी ने डिप्टी सीएम की शपथ ग्रहण की. बता दें कि जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव कराए गए थे। जम्मू-कश्मीर में 90 विधानसभा सीटों पर तीन चरणों में मतदान हुए थे जबकि 8 अक्टूबर को नतीजे आए थे। शपथ लेने से पहले उमर अब्दुल्ला ने अपने दादा स्वर्गीय शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की मजार पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उमर अब्दुल्ला के शपथ ग्रहण में कई दिग्गज नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है। नेकां-कांग्रेस की सरकार के बहाने आईएनडीआई गठबंधन के शक्ति प्रदर्शन की भी तैयारी है। शपथ ग्रहण में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी, बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल, शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, माकपा नेता प्रकाश करात और भाकपा नेता डी राजा सहित लगभग 50 नेताओं को आमंत्रित किया गया है। राहुल, प्रियंका समेत कई नेता बने समारोह का हिस्सा इंडिया गठबंधन दलों के कई नेता शपथ समारोह में शामिल हुए. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा, JKNC प्रमुख फारूक अब्दुल्ला, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती, AAP नेता संजय सिंह, CPI नेता डी राजा सहित INDIA गठबंधन के अन्य नेता यहां मौजूद हैं. सरकार में शामिल नहीं हुई कांग्रेस कांग्रेस पार्टी सरकार में शामिल नहीं हुई है. कांग्रेस ने उमर सरकार को बाहर से समर्थन देने के फैसला लिया है. उमर अब्दुल्ला के साथ नेशनल की तरफ से सुरिंदर चौधरी,सतीश शर्मा, सकीना इटू ने मंत्री पद की शपथ ली है. सुरिंदर चौधरी डिप्टी सीएम बनाए गए हैं. सुरक्षा के भी बेहद कड़े बंदोबस्त शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) में मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिपरिषद के सदस्यों के शपथ ग्रहण समारोह हुआ. शपथ ग्रहण समारोह स्थल के आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है. शपथ समारोह से पहले उमर अब्दुल्ला ने नेकां के संस्थापक शेख मुहम्मद अब्दुल्ला के स्मारक पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. पठानी सूट और कोट पहने 54 वर्षीय अब्दुल्ला ने पार्टी संस्थापक के स्मारक पर फूल चढ़ाए. उमर अब्‍दुल्‍ला ने CM बनने से पहले जम्‍मू-कश्‍मीर को फिर स्‍पेशल स्‍टेटस दिलाने के लिए संघर्ष करने का किया वादा जम्‍मू-कश्‍मीर के होने वाले नए सीएम आज शपथ लेने को तैयार हैं. यह पहला मौका है जब घाटी में धारा-370 हटने के बाद सरकार बनने जा रही है. 2014 में जब चुनाव हुए थे तब बीजेपी और पीडीपी के गठबंधन की सरकार बनी थी. तब जम्‍मू-कश्‍मीर के पास स्‍पेशल स्‍टेटस था. अब यह राज्‍य एक केंद्र शासित प्रदेश है. एक दिन पहले उमर अब्‍दुल्‍ला ने कहा था कि वो जम्‍मू-कश्‍मीर को फिर स्‍पेशल स्‍टेटस दिलाने के लिए संघर्ष करेंगे. सतीश शर्मा और सुरिंदर चौधरी जम्‍मू-कश्‍मीर में बनने जा रहे उमर अब्‍दुल्‍ला सरकार में मंत्री जम्मू से सतीश शर्मा और सुरिंदर चौधरी बनेंगे मंत्री. सुरिंदर चौधरी ने नौशहरा से रवींद्र रैना को हराया था. सतीश शर्मा ने कांग्रेस से टिकट न मिलने पर निर्दलीय उम्मीदवार बन लड़े थे चुनाव. बाद में ज्वाइन की NC. सतीश शर्मा कांग्रेस के पूर्व सांसद मदन लाल शर्मा के बेटे हैं. मैं मंत्रीपद में 9 सीट खाली रखूंगा… कांग्रेस के गठबंधन में शामिल नहीं होने पर बोले उमर अब्‍दुल्‍ला  उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को कहा कि कांग्रेस मंत्रिमंडल से बाहर नहीं है. यह उन्हें तय करना है, और हम उनके साथ चर्चा कर रहे हैं. मैं मंत्रिपरिषद में सभी 9 रिक्तियों को नहीं भरूंगा. कुछ रिक्तियों को खुला रखा जाएगा क्योंकि हम कांग्रेस के साथ बातचीत कर रहे हैं. एनसी और कांग्रेस के बीच सब कुछ ठीक है, अन्यथा खरगे जी, राहुल जी और वरिष्ठ कांग्रेस नेता यहां नहीं आते. उनकी उपस्थिति इस बात का संकेत है कि गठबंधन मजबूत है, और हम लोगों जम्‍मू-कश्‍मीर के लिए काम करेंगे.  

जम्मू-कश्मीर से 6 साल बाद हटाया राष्ट्रपति शासन, उमर अब्दुल्ला का सरकार गठन का रास्ता साफ

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन हटा दिया गया है। गृह मंत्रालय (एमएचए) के इस फैसले के साथ ही आधिकारिक तौर पर केंद्र शासित प्रदेश में सरकार गठन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा हस्ताक्षरित एक सरकारी आदेश में कहा गया है कि ‘भारत के संविधान के अनुच्छेद 239 और 239ए के साथ पठित जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 (2019 का 34) की धारा 73 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के संबंध में 31 अक्टूबर 2019 का आदेश, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 की धारा 54 के तहत मुख्यमंत्री की नियुक्ति से तुरंत पहले निरस्त किया जाता है। नवनिर्वाचित सरकार को शपथ लेने की अनुमति देने के लिए यूटी में राष्ट्रपति शासन को रद्द करने की आवश्यकता थी। गृह मंत्रालय ने जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 73 के आधार पर एक राष्ट्रपति आदेश लागू किया था। नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस गठबंधन ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव जीता और सरकार बनाने के लिए तैयार है। एनसी उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला, जिन्हें गठबंधन के नेता के रूप में चुना गया है, जम्मू-कश्मीर के अगले मुख्यमंत्री होंगे। छह साल के लंबे अंतराल के बाद, जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन हटा लिया गया है, जिससे राज्य में नई सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और कांग्रेस के गठबंधन ने हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की है और अब वे सरकार बनाने के लिए तैयार हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है। उमर अब्दुल्ला को सर्वसम्मति से नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक दल का नेता चुना गया है, जिससे उनके मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है। यह उमर अब्दुल्ला का दूसरा कार्यकाल होगा, इससे पहले वे 2009 से 2014 तक जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, जब राज्य एनसी-कांग्रेस गठबंधन के अधीन था। राष्ट्रपति शासन हटा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को आदेश जारी कर जम्मू-कश्मीर से राष्ट्रपति शासन समाप्त करने की घोषणा की। यह राष्ट्रपति शासन 19 जून 2018 को पीडीपी-भाजपा गठबंधन के टूटने के बाद लगाया गया था। 2019 में केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त कर जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर दिया था, जिसके बाद यह क्षेत्र एक केंद्र शासित प्रदेश बन गया था। राज्य का दर्जा बहाल करने पर जोर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि नई सरकार का प्रमुख उद्देश्य जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करना होगा। उन्होंने कहा, “हमारी प्राथमिकता जम्मू-कश्मीर को एकजुट करना और चुनाव के दौरान फैली नफरत को खत्म करना होगी। राज्य का दर्जा बहाल किया जाना चाहिए ताकि राज्य सुचारू रूप से कार्य कर सके और हम अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें।” चुनाव परिणाम और गठबंधन इस बार के चुनावों में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 42 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि कांग्रेस ने 6 सीटें जीतीं। कांग्रेस की पांच सीटें कश्मीर से और एक जम्मू से हैं। दोनों पार्टियों ने चुनाव पूर्व गठबंधन किया था और चार निर्दलीय विधायकों तथा आम आदमी पार्टी (आप) के एक विधायक का समर्थन भी उन्हें मिला है। इसके अलावा, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 29 सीटें जीतकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में अपनी जगह बनाई है। 10 साल के लंबे अंतराल के बाद संपन्न हुए चुनाव जम्मू-कश्मीर में 10 साल के लंबे अंतराल के बाद विधानसभा चुनाव संपन्न हुए हैं। यह चुनाव अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद पहली बार हुआ है, जिससे यह ऐतिहासिक महत्व रखता है। चुनाव तीन चरणों में सम्पन्न हुए, जिनमें 18 सितंबर, 25 सितंबर, और 1 अक्टूबर को मतदान हुआ। जम्मू-कश्मीर में छह साल बाद राष्ट्रपति शासन हटने और नई सरकार बनने से राज्य की राजनीतिक स्थिति में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में यह सरकार राज्य के पुनर्गठन और विकास के लिए कई अहम कदम उठाने की योजना बना रही है, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करना है। अब यह देखना होगा कि नई सरकार इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाती है।

उमर अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के अगले मुख्यमंत्री होंगे, नई सरकार के गठन की तैयारी तेज

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर से राष्ट्रपति शासन हटा लिया गया, जिससे केंद्र शासित प्रदेश में नयी सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया। इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक राजपत्र अधिसूचना जारी की। तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के इस्तीफे के बाद जून 2017 से जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन जारी हुआ था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा हस्ताक्षरित अधिसूचना में कहा गया है, ‘‘भारत के संविधान के अनुच्छेद 239 और 239ए के साथ पठित जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 (2019 का 34) की धारा 73 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के संबंध में 31 अक्टूबर 2019 का आदेश, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 की धारा 54 के तहत मुख्यमंत्री की नियुक्ति से तुरंत पहले निरस्त किया जाता है।’’ हाल में संपन्न हुए जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस गठबंधन ने जीत हासिल की। नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के अगले मुख्यमंत्री होंगे। उन्हें गठबंधन का नेता चुना गया है। पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों — जम्मू कश्मीर और लद्दाख – के रूप में विभाजित किए जाने के बाद 31 अक्टूबर 2019 को जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 को संसद ने पांच अगस्त 2019 को पारित किया था। पूर्ववर्ती राज्य को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को भी उसी दिन निरस्त कर दिया गया था। 31 अक्टूबर 2019 से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के इस्तीफे के बाद जून 2017 से तत्कालीन राज्य में राष्ट्रपति शासन जारी था। उस समय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस ले लिया था।

उमर अब्दुल्ला ने सरकार बनाने का दावा पेश किया, 14 अक्टूबर को शपथ समारोह

श्रीनगर नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने  शाम को श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात कर नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां)-कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनाने का दावा पेश किया। अब्दुल्ला ने सिन्हा के साथ अपनी मुलाकात के दौरान गठबंधन सहयोगियों की ओर से समर्थन पत्र प्रस्तुत किया। अब्दुल्ला ने राजभवन से लौटने के बाद अपने आवास पर संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने उपराज्यपाल से नई सरकार के शपथ ग्रहण की तारीख जल्द से जल्द तय करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा, “मैंने उपराज्यपाल से मुलाकात कर नेकां, कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, ‘आप’ और निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थन पत्र प्रस्तुत किए। सभी ने नेकां का समर्थन किया है। मैंने उनसे (राज्यपाल) जल्द से जल्द एक तारीख तय करने का अनुरोध किया ताकि शपथ समारोह हो सके और लोगों द्वारा चुनी गई सरकार काम करना शुरू कर सके।” उन्होंने कहा कि शपथ समारोह बुधवार को होने की संभावना है। जो लोग जम्मू कश्मीर की राजनीति को बहुत नजदीक से जानते हैं उन्हें लगता है कि केंद्र की बीजेपी सरकार और अब्दुल्ला परिवार एक दूसरे के नजदीक आ रहे हैं. दरअसल जम्मू कश्मीर में सरकार बनाने जा रही नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने इन दिनों कई ऐसी बातें की हैं जो उपरोक्त बात की तस्दीक कर रही हैं. कश्मीर के सीएम बनने जा रहे उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को कहा कि उन्हें 4 निर्दलीयों का सपोर्ट मिल गया है और कांग्रेस से भी सपोर्ट की बातचीत चल रही है. इस एक लाइन ने तमाम राजनीतिक विश्लेषकों के कान ख़ड़ें कर दिए हैं. उन्हें लगता है कि कहीं उमर अब्दुल्ला के मन में कुछ और तो नहीं चल रहा है. क्योंकि इधर कम से 3 बार उमर ने ऐसी बातें कहीं हैं जिससे लोगों को लगा कि उन्‍हें अब कांग्रेस की खास जरूरत नहीं है. बल्कि वे बीजेपी के नजदीक जाने को आतुर दिख रहे हैं. बावजूद इसके कि उमर ने कई बार यह भी दोहराया है कि मैं किसी भी कीमत पर बीजेपी के साथ नहीं जा सकता हूं. पर बीजेपी समर्थकों के बीच इस बात की चर्चा खूब है कि नेशनल कांफ्रेंस पीडीपी से तो बेहतर ही है. बीजेपी जब पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती के साथ सरकार बना सकती है तो नेशनल कॉन्फ्रेंस तो उससे बेहतर ही है. मुफ्ती तो कश्मीर को भारत से अलग करने की बात तक करती रही हैं जबकि नेशनल कांफ्रेंस तो काफी उदारवादी है. फारूक अब्‍दुल्‍ला सीना ठोककर कहते हैं क‍ि वे भारतीय हैं. यही नहीं उनके राम भजन भी बहुत लोकप्रिय हैं. आइये देखते हैं कि सोशल मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों में एनसी और बीजेपी के पास आने की क्यों चर्चा हो रही है? 1-क्या कांग्रेस से छुटकारा पाना चाहते हैं उमर? पिछले कुछ दिनों में उमर अब्दुल्ला के उन बयानों पर गौर करें जो इस तरह की कयासबाजी को जन्म दे रही हैं. उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को जब कहा कि उन्हें 4 निर्दलीयों का सपोर्ट मिल गया है और कांग्रेस से भी सपोर्ट की बातचीत चल रही है.तो लोगों को खटका कि आखिर कांग्रेस से सपोर्ट की बातचीत क्यों चल रही है? कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस दोनों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. इसमें सपोर्ट के लिए बातचीत जैसी बात कहां से आ गईं. यही नहीं इसके पहले भी उमर ने जैसी बातें की उससे यही लगता है कि उमर बीजेपी के नजदीक आना चाहते हैं. कुछ बानगी देखिए- -हमें केंद्र के साथ समन्वय बनाकर चलने की जरूरत है. जम्मू-कश्मीर के कई मुद्दों का समाधान केंद्र से लड़ाई करके नहीं हो सकता. चुनाव परिणाम आने के बाद अब्दुल्ला ने यह टिप्पणी की थी. -मैं यह सुनिश्चित करने का हर प्रयास करूंगा कि आने वाली सरकार एलजी और केंद्र सरकार के साथ अच्छे संबंधों के लिए काम करे. नई सरकार की प्राथमिकता जम्मू और कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करना है, जिसके लिए वह दिल्ली में सरकार के साथ काम करेगी. -उमर अब्दुल्ला ने इंडिया टुडे को बताया था कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस के साथ गठबंधन के बिना भी अच्छा प्रदर्शन किया होता. कांग्रेस के साथ गठबंधन हमारे लिए सीटों के बारे में नहीं था. हम बिना कांग्रेस के भी ये सीटें जीत सकते थे, सिवाय शायद एक के. -मुझे विश्वास है कि प्रधानमंत्री एक सम्माननीय व्यक्ति हैं, उन्होंने यहां चुनाव प्रचार करते समय राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया है. सम्माननीय गृह मंत्री ने भी यही कहा था. 2-नेशनल कॉन्फ्रेंस की क्या मजबूरी है केंद्र से मधुर रिश्ता नेशनल कांफ्रेंस जानती है कि द‍िल्‍ली की तरह ज्‍यादातर सत्‍ता उपराज्‍यपाल के हाथ में रहने वाली है. हर चीज के ल‍िए उन्‍हें एलजी के पास जाना होगा.मौजूदा हालात में नई राज्य सरकार काफी हद तक पावरलेस ही होगी. कानून व्यवस्था, सार्वजनिक व्यवस्था और पुलिस समेत तमाम मामलों के ल‍िए एलजी का फैसला आख‍िरी होगा. इससे टकराव की नौबत आने से बेहतर है कि आपसी रजामंदी से काम किया जाए. इससे भविष्य में बीजेपी के साथ आने का रास्ता भी खुला रहेगा.अगर साथ आते हैं तो केंद्र सरकार में भी नेशनल कांफ्रेंस को एक दो मंत्रालय संभालने का मौका मिल सकता है. कश्मीर के डिवलपमेंट के ल‍िए काफी पैसों की जरूरत है.यह बजट भी मौजूदा केंद्र सरकार के रहमोकरम पर ही निर्भर होगा. दूसरी बात यह भी है कि  एनसी के पास 42 सीटें हैं, लेकिन एनसी-कांग्रेस गठबंधन, 48 सीटों के साथ, जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 45 सीटों के आधे-अधूरे अंक से बस थोड़ा ऊपर है. अब उनके साथ 4 निर्दली भी हैं. फिर भी 90 विधायकों और 5 नियुक्त विधायकों को भी जोड़ लिया जाए तो बहुमत का आंकड़ा 48 तक पहुंच जाता है. इसलिए उमर सरकार कभी भी बहुत सेफ नहीं रहेगी. उसे अपनी मर्जी की करने के लिए बीजेपी के सहयोग की हमेशा जरूरत बनी रहेगी. 3-नेशनल कॉन्फ्रेंस का मधुर रिश्ता रहा एनडीए से फारूक अब्‍दुल्‍ला के बेटे उमर अब्‍दुल्‍ला अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं.यही कारण है कि जब उन्‍होंने मोदी सरकार की तारीफ की तो लोगों में संदेह बढ़ गया कि क्या वो बीजेपी की ओर जा सकते हैं?  नेशनल कांफ्रेंस एक ऐसी पार्टी रही है, ज‍िसका कांग्रेस और बीजेपी दोनों से रिश्ता रहा है.कांग्रेस के समर्थन से फारूक … Read more

बीजेपी सरकार से अच्छे रिश्तों से ही जम्मू-कश्मीर को फायदा: उमर अब्दुल्ला

श्रीनगर  जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव जीतते ही उमर अब्दुल्ला का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि पहली ही कैबिनेट बैठक में जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने वाला प्रस्ताव पारित किया जाएगा। नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि सरकार गठन के बाद पहली बैठक में मंत्रिमंडल, राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए केंद्र पर दबाव डालने के वास्ते एक प्रस्ताव पारित करेगा। इसके बाद सरकार इस प्रस्ताव को प्रधानमंत्री के पास भेजेगी। जम्मू-कश्मीर चुनाव में पूर्व राज्य का दर्जा बहाली मुद्दा सबसे बड़ा था। एनसी-कांग्रेस के घोषणापत्र में भी इसका वादा किया गया था। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि दिल्ली के विपरीत जम्मू-कश्मीर में सरकार सुचारू रूप से काम कर पाएगी। उन्होंने कहा, ‘हमारे और दिल्ली के बीच एक फर्क है। दिल्ली कभी एक राज्य नहीं रहा। किसी ने दिल्ली को राज्य का दर्जा देने का वादा नहीं किया। जम्मू-कश्मीर 2019 से पहले राज्य था। हमसे प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों ने राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया, जिन्होंने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में तीन कदम उठाए जाएंगे – परिसीमन, चुनाव और फिर राज्य का दर्जा।’ केंद्र के प्रति उमर का रुख नरम उमर अब्दुल्ला ने कहा, ‘परिसीमन हो गया, अब चुनाव भी हो गए हैं। इसलिए केवल राज्य का दर्जा देना बाकी है जिसे जल्द ही बहाल किया जाना चाहिए।’ यह पूछे जाने पर कि जम्मू-कश्मीर सरकार और केंद्र के बीच समन्वय कितना जरूरी है, इस पर उन्होंने कहा कि नई दिल्ली से टकराव लेकर कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता। एनसी नेता ने कहा, ‘पहले सरकार बनने दीजिए। यह सवाल मुख्यमंत्री से पूछा जाना चाहिए। नयी दिल्ली के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध होने चाहिए। मेरी उन्हें (मुख्यमंत्री) सलाह होगी कि हम केंद्र के साथ टकराव करके किसी भी मुद्दे का समाधान नहीं कर सकते।’ ‘केंद्र से अच्छे रिश्ते जम्मू-कश्मीर के लिए फायदेमंद’ अब्दुल्ला ने कहा, ‘ऐसा नहीं है कि हम भाजपा की राजनीति स्वीकार करेंगे या भाजपा हमारी राजनीति स्वीकार करेगी। हम भाजपा का विरोध करते रहेंगे लेकिन केंद्र का विरोध करना हमारी मजबूरी नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘केंद्र के साथ अच्छे रिश्ते रखना जम्मू-कश्मीर और उसके लोगों के लिए फायदेमंद होगा। लोगों ने टकराव के लिए वोट नहीं किया है। जम्मू-कश्मीर के लोगों ने इसलिए वोट दिया है क्योंकि वे रोजगार चाहते हैं, वे विकास चाहते हैं, वे राज्य का दर्जा बहाल कराना चाहते हैं, वे बिजली तथा अन्य समस्याओं से छुटकारा चाहते हैं और नयी दिल्ली से टकराव करके इनका समाधान नहीं निकलेगा।’ विधायक दल की बैठक आज अब्दुल्ला ने कहा कि एनसी सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए गुरुवार को विधायक दल की एक बैठक बुलाई गई है। इसके बाद गठबंधन के सहयोगियों की बैठक होगी जिसमें गठबंधन का नेता चुना जाएगा और फिर हम सरकार गठन का दावा जताने के लिए राज भवन जाएंगे। मुझे उम्मीद है कि अगले कुछ दिन में नई सरकार बन जाएगी। पीडीपी से गठबंधन पर क्या बोले उमर अब्दुल्ला? यह पूछने पर कि क्या पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) गठबंधन सरकार का हिस्सा होगी, इस पर एनसी नेता ने कहा कि अभी तक इस पर कोई चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने कहा, ‘पीडीपी ने हमसे या हमने उनसे कोई संपर्क नहीं किया है। इस चुनाव के नतीजों को देखते हुए मुझे लगता है कि कुछ अंदरुनी चर्चा चल रही होगी। मुझे लगता है कि चुनावी नतीजे उनके लिए झटका हैं।

कांग्रेस को हार का गहराई से आत्मचिंतन करना चाहिए: नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला

श्रीनगर नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को कहा कि कांग्रेस को हरियाणा में अपनी हार के कारणों का पता लगाने के लिए गहराई से आत्मचिंतन करना चाहिए। हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी करने जा रही है। नेकां और कांग्रेस ने जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव गठबंधन में लड़ा था। नेकां नेता ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘मैंने पहले ही कहा था कि हम इन ‘एग्जिट पोल’ (चुनाव बाद के सर्वेक्षणों) से सिर्फ अपना समय बर्बाद कर रहे हैं। लेकिन किसी ने नहीं सोचा होगा कि ‘एग्जिट पोल’ इतने गलत साबित होंगे। अगर 18 की जगह 20 या 20 की जगह 22 होता तो हम समझ सकते थे, लेकिन हुआ ये कि 30 की जगह 60 हो गया और 60 की जगह 30 हो गया।’’ हरियाणा में अधिकतर ‘एक्जिट पोल’ में कांग्रेस को बहुमत मिलता दिखाया गया था। अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘कांग्रेस को गहराई से मंथन करना चाहिए और अपनी हार के कारण का विश्लेषण करना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मेरा काम नेकां को संचालित करना है और यहां गठबंधन की मदद करना है, जो मैं करूंगा।’’ नेकां और कांग्रेस जम्मू कश्मीर में गठबंधन सरकार बनाने वाली हैं। वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद जम्मू कश्मीर में यह पहला चुनाव है।  

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