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राजस्थान में राजनीतिक हलचल बढ़ी, वन स्टेट-वन इलेक्शन की तर्ज पर होना संभव

जयपुर    राजस्थान में पंचायत चुनाव को लेकर स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है, जिससे राज्य में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। राज्य की 40 प्रतिशत पंचायतों का कार्यकाल जनवरी में खत्म हो रहा है, और इसके बाद सवाल यह उठ रहा है कि क्या पंचायत चुनाव एक साथ होंगे, या फिर सरकार इन पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करेगी? क्योंकि चुनावों पर अभी तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया है। जनवरी में 6759 पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा, जबकि बाकी पंचायतों का कार्यकाल 2025 तक रहेगा। इस बीच, सरकार ने राज्य में 49 निकायों में प्रशासक नियुक्त किया है, लेकिन पंचायतों में क्या कदम उठाए जाएंगे, यह अभी तक तय नहीं हो पाया है। पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर ने एक मीडिया चैनल से बातचीत में कहा कि इस मुद्दे पर निर्णय कैबिनेट की मीटिंग में लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राजस्थान का मामला एमपी या झारखंड से अलग होगा और सरकार पंचायत चुनावों के लिए सही समय पर निर्णय लेगी। पंचायतीराज चुनावों के भविष्य को लेकर कयास राज्य के 40 प्रतिशत सरपंचों का कार्यकाल जनवरी में खत्म होने वाला है, और इस समय तक सरकार को निर्णय लेना होगा कि क्या पंचायतों में प्रशासनिक नियुक्तियां की जाएंगी, या फिर सरपंचों को ही चेयरमैन के रूप में जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। पंचायतों के चुनावों को लेकर मंत्रिमंडल की मीटिंग में जल्द ही फैसला लिया जा सकता है। हालांकि, राज्य निर्वाचन विभाग ने इस विषय में अब तक कोई तैयारियां नहीं की हैं।  पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर का कहना है कि चुनावों के बारे में सरकार जल्द ही फैसला लेगी और इस फैसले से किसी भी जनप्रतिनिधि को कंफ्यूजन में नहीं आना चाहिए। कार्यकाल समाप्त होने वाली पंचायतों की सूची: •        जनवरी 2025: 6759 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त •        मार्च 2025: 704 पंचायतों का कार्यकाल खत्म •        सितंबर 2025: 3847 पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होगा इसके बाद 2026 में भी कई पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होगा, जिसमें जिला परिषद और पंचायत समितियां शामिल हैं। पंचायतों में प्रशासक या सरपंच? राज्य सरकार ने हाल ही में 49 निकायों में प्रशासक नियुक्त किए हैं, और अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या पंचायतों में भी इसी तरह प्रशासक लगाए जाएंगे, या फिर पंचायतों की जिम्मेदारी सरपंचों को सौंपी जाएगी। पंचायत चुनावों की तारीखों को लेकर सस्पेंस बना हुआ है, और यह निर्भर करता है कि मंत्रिमंडल की मीटिंग में सरकार क्या फैसला करती है। सरपंचों ने की मुख्य सचिव से मुलाकात राज्य के सरपंचों ने भी इस मामले में अपनी राय दी है। उनका कहना है कि मध्य प्रदेश और झारखंड की तर्ज पर जब तक पंचायत चुनाव नहीं होते, तब तक कमेटी बनाई जाए और इसका चेयरमैन सरपंचों को बनाया जाए। इस संबंध में उन्होंने मुख्य सचिव सुधांश पंत से भी मुलाकात की है और अपनी बात रखी है। सरकार जल्द लेगी पंचायत चुनाव पर फैसला? पंचायत चुनावों को लेकर सवालों की कोई कमी नहीं है, और यह राज्य सरकार पर निर्भर करेगा कि वह इन पंचायतों में क्या कदम उठाती है। क्या सरकार पंचायतों में प्रशासक लगाएगी, या पंचायत चुनावों की तैयारी करेगी? यह फैसला जल्द ही लिया जाएगा, जिससे राज्य की सियासत में और हलचल मच सकती है। जनवरी में पंचायतों के चुनाव होंगे या नहीं, यह सवाल फिलहाल बाकी है। वन नेशन-वन इलेक्शन का कॉन्सेप्ट: भारत में वन नेशन-वन इलेक्शन का मतलब है कि संसद के निचले सदन यानी लोकसभा चुनाव के साथ ही सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव भी कराए जाएं। इसके साथ ही स्थानीय निकायों यानी नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत और ग्राम पंचायतों के चुनाव भी हों। इसके पीछे विचार है कि ये चुनाव एक ही दिन या फिर एक निश्चित समय सीमा में कराए जा सकते हैं। कई सालों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव के साथ ही राज्यों की विधानसभाओं का चुनाव कराने पर जोर देते रहे हैं। वन नेशन-वन इलेक्शन के फायदे: एक देश एक चुनाव का सबसे बड़ा फायदा यह है कि चुनाव का खर्च घट जाएगा। अलग-अलग चुनाव कराने पर हर बार भारी-भरकम राशि खर्च होती है। बार-बार चुनाव होने से प्रशासन और सुरक्षा बलों पर बोझ पड़ता है, क्योंकि उन्हें हर बार चुनाव ड्यूटी करनी पड़ती है। एक बार में चुनाव निपट जाने पर केंद्र और राज्य सरकारें कामकाज पर फोकस कर सकेंगी। बार-बार वह इलेक्शन मोड में नहीं जाएंगी और विकास के कामों पर ध्यान दे सकेंगी।  

भजनलाल सरकार ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ के तहत पंचायत राज के चुनाव कराने की बना रही योजना, छोटे जिलों के समाप्त करने के दिए संकेत

जयपुर  राजस्थान में गहलोत राज में बनाए गए नए जिले को लेकर आखिर क्या होगा? इसको लेकर प्रदेश में लगातार चर्चाएं हो रही है। इस बीच भजनलाल सरकार ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ को लेकर भी जुटी हुई है। अब कयास है कि भजनलाल सरकार की रिव्यू कमेटी के फैसले के बाद छोटे जिलों को समाप्त कर नए सिरे से सीमाएं निर्धारित की जाएंगी। इसके बाद सरकार ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ फार्मूले के तहत पंचायत राज के चुनाव कराएगी। ऐसे में माना जा रहा है कि अगले साल जनवरी महीने में होने वाले पंचायत राज के चुनाव फिलहाल टलेंगे। कयास है कि इससे पहले सरकार छोटे जिलों को समाप्त कर उनकी सीमा निर्धारित करने का काम करेगी। कानून मंत्री जिलों को समाप्त करने के दे चुके हैं संकेत गहलोत राज में बनाए गए 17 नए जिलों को लेकर हर दिन नई चर्चाएं गर्म है। सरकार यह संकेत दे चुकी है कि नए जिलों में से 5 से 7 जिलों को समाप्त किया जा सकता है। इसको लेकर सरकार में यह निर्णय फिलहाल विचाराधीन है। गत दिनों भजनलाल सरकार के कानून मंत्री जोगराम पटेल ने भी ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ चुनावी फार्मूले के लिए छोटे जिलों को समाप्त किए जाने की आवश्यकता बताई थी। उन्होंने संकेत दिए कि बिना जिलों पर फैसले के ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ के काम में प्रोग्रेस नहीं सकता। ऐसे में माना जा रहा है कि नवंबर दूसरे सप्ताह तक सरकार नए जिलों को लेकर फैसला ले सकती हैं। 7 हजार ग्राम पंचायतों के चुनाव पर लटकी तलवार राजस्थान में नए जिलों के फैसले को लेकर अभी तक असमंजस बना हुआ है। अब कौन से जिले रहेंगे और कौन से खत्म होंगे? इस बीच भजनलाल सरकार ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ भी करवाना चाहती है। ऐसी स्थिति में अब जनवरी 2025 में होने वाले 7 हजार ग्राम पंचायतों के चुनाव पर भी तलवार लटक गई है। सरकार के संकेत के अनुसार, अगर ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ का फॉर्मूला लागू हुआ, तो ग्राम पंचायतों के चुनाव टलेंगे और यहां पर सरकार प्रशासक नियुक्त करेगी। फिलहाल सरकार का पूरा ध्यान नए छोटे जिलों को समाप्त करने के फैसले पर टिका हुआ है। इसके बाद ही सरकार वन स्टेट वन इलेक्शन फॉर्मूला को लागू कर पाएगी। इस साल होने वाले नगर निकाय चुनाव भी टलेंगे हाल ही में यूडीएच मंत्री झाबर सिंह ने साफ कर दिया है कि भजनलाल सरकार ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ का फॉर्मूला लागू करने वाली है। इसके चलते राज्य की कई नगर निकायों में नवंबर महीने में कार्यकाल पूरा हो रहा है। मंत्री के बयान के बाद अब इन निकायों में 2025 में चुनाव होने की संभावना बन गई है। इसके चलते प्रदेश की पांच नगर निगम, 28 नगर पालिकाओं और 16 नगर परिषद में इस साल चुनाव नहीं होंगे। सरकार फाॅर्मूले के तहत 2025 में एक साथ चुनाव करवाने की तैयारी कर रही है। छोटे जिलों को समाप्त करने के लिए कमेटी भी सहमत गहलोत राज में बनाए गए 17 नए जिले को लेकर भजनलाल सरकार ने गत दिनों रिव्यू कमेटी से नए जिलों को लेकर परीक्षण रिपोर्ट बनवाई, जो अभी कमेटी के पास विचाराधीन है, जहां संयोजक मदन दिलावर की अध्यक्षता में राज्यवर्धन सिंह राठौड़, कन्हैया लाल चौधरी, हेमंत मीणा सुरेश सिंह रावत समेत कमेटी के मेंबर इस पर विचार कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि कमेटी के सभी मंत्री भी छोटे जिलों को मर्ज करने की राय में सहमत है। अब जल्द ही इस रिपोर्ट को कैबिनेट में रखा जाएगा, जहां निर्णय होने के बाद नए जिलों पर कार्रवाई शुरू होगी। यह जिले सरकार के फॉर्मूले में नहीं बैठ रहे फिट राजस्थान में 17 नए जिले बनाए गए, इनको लेकर भजनलाल सरकार सहमत नहीं है। गत दिनों सर्वे कमेटी ने नए जिलों को लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार की। सूत्रों के अनुसार, करीब एक दर्जन जिले मापदंडों में फिट नहीं बैठ रहे हैं। इनमें नीम का थाना, कोटपूतली-बहरोड़, केकड़ी, खैरथल-तिजारा, दूदू, डीग, गंगापुर सिटी, शाहपुरा, फलोदी, सलूंबर, सांचैर और अनूपगढ़ जिले शामिल है। ऐसे में सरकार इनमें से कई जिलों को अपने पुराने जिलों में मर्ज कर सकती है।  

वित्तमंत्री ने विधानसभा में किया ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ का ऐलान, राजस्थान में एक साथ होंगे पंचायत चुनाव

जयपुर. राजस्थान में पंचायत चुनाव विधानसभा चुनावों के साथ होंगे। वित्तमंत्री दिया कुमारी ने बजट पेश करते हुए विधानसभा में ऐलान किया है। वित्तमंत्री ने वन स्टेट वन इलेक्शन की बात कहीं है। उल्लेखनीय है कि बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में एक देश एक चुनाव की घोषणा की है। माना जा रहा है कि राज्य सरकार ने इसे अमल में ला दिया है। हालांकि, वित्तमंत्री ने ज्यादा खुलकर नहीं बोला है। लेकिन साफ जाहिर है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव विधानसभा चुनावों के साथ ही होंगे। राजस्थान की वित्तमंत्री दिया कुमारी ने रजिस्ट्री-स्टांप ड्यूटी में छूट प्रदान की है। वित्तमंत्री बजट पेश करते हुए कहा रजिस्ट्रेशन शुल्क में पूरी छूट देने की घोषणा की है। शहरों में अधिक जनसंख्या भार वाले क्षेत्रों में कंजेशन कम करने की दिशा में कदम उठाते हुए ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (TDR) की प्रक्रिया ऑटोमेटेड करने के साथ ही स्टाम्प ड्यूटी की पूरी छूट का ऐलान किया गया है। इसी तरह रजिस्ट्रेशन के पूर्ण शुल्क में छूट देने का ऐलान किया गया है। इसके साथ ही TDR की प्रक्रिया में स्टाम्प ड्यूटी में छूट होगी। एक लाख रोजगार देने की घोषणा राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने बुधवार को अपना पहला पूर्ण बजट पेश किया। उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने वित्त मंत्री के रूप में यह बजट पेश किया। उन्होंने युवाओं के रोजगार के लिए कई घोषणाएं भी की। इसके तहत एक लाख रोजगार देने की घोषणा अगले 1 साल के लिए की गई है, जबकि आगामी 4 सालों में 5 लाख नए रोजगार दिए जाएंगे। स्टार्टअप में कॉरपस फंड और इक्विटी फंडिंग के लिए ‘फंड्स का फंड’ बनाए जाने की घोषणा की गई। उपमुख्यमंत्री ने युवाओं की समस्याओं के समाधान के लिए ‘युवा नीति 2024’ की घोषणा की. स्टेट स्किल पॉलिसी और स्टार्टअप को सब कॉन्ट्रैक्ट दिलाने की घोषणा भी बजट में की गई है।

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