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पिछले 20 साल में देश में करोड़पति सांसदों की संख्या 153 से बढ़कर साल 2024 में 504 पहुंच गई

नई दिल्ली  देश में करोड़पति सांसदों की संख्या बढ़ रही है। पिछले बीस साल के दौरान देश की संसद में करोड़पति सांसदों की संख्या में बंपर इजाफा हुआ है। साल 2004 में जब से एडीआर ने सांसदों की संपत्ति से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण शुरू किया है तब इससे जुड़े आंकड़े सामने आए हैं। एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 20 साल में देश में करोड़पति सांसदों की संख्या 153 से बढ़कर साल 2024 में 504 पहुंच गई है। कुल सांसदों में से करीब 93% करोड़पति एडीआर की तरफ से विश्लेषण किए गए आंकड़ों के अनुसार साल 2024 में कुल सांसदों में 92.8 फीसदी सांसद करोड़पति हैं। 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाले 504 सांसद करोड़पति थे। यह संख्या पिछले साल के 479 के मुकाबले 29 अधिक थी। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद करोड़पति सांसदों की संख्या कुल सांसदों का 88.4 फीसदी थी। आंकड़ों को देखें तो 2004 से लेकर 2024 तक संसद में करोड़पति सांसदों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। 2004 में महज 29% सांसद करोड़पति साल 2024 में सांसदों की संपत्ति के विश्लेषण के अनुसार कुल 153 सांसद ही करोड़पति थे। वहीं, इसके बाद 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में करोड़पति सांसदों की संख्या 153 से बढ़कर 312 हो गई। इस तरह करोड़पति सांसदों में 29.8 फीसदी वाली हिस्सेदारी बढ़कर 57 फीसदी तक पहुंच गई। 2014 लोकसभा चुनाव के बाद करोड़पति सांसदों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई। इस चुनाव के बाद करोड़पति सांसदों की हिस्सेदारी 57 से बढ़कर 81.9 फीसदी पहुंच गई। खास बात है कि 2014 में सांसदों को अपनी संपत्ति को मार्केट वैल्यू के आधार पर घोषित करने की बात कही गई थी।

सर्बियाई विपक्षी सांसदों ने सरकार की नीतियों के विरोध में संसद के अंदर धुआंधार ग्रेनेड और आंसू गैस के गोले फेंके

बेलग्रेड यूरोपीय देश सर्बिया की संसद में विपक्षी सांसदों ने भारी बवाल मचाया है. विपक्षी सांसदों ने संसद में एक के बाद एक कई स्मोक ग्रेनेड और आंसू गैस के गोले फेंके जिससे संसदीय सत्र में भारी अव्यवस्था फैल गई. संसद में हाथापाई भी देखने को मिली. संसदीय सत्र के लाइव टेलीविजन प्रसारण में दिखाया गया कि सर्बियाई विपक्षी सांसदों ने मंगलवार को सरकार की नीतियों के विरोध में संसद के अंदर स्मोक ग्रेनेड और आंसू गैस के गोले फेंके. इसके बाद पूरे संसद में काला और गुलाबी धुआं फैल गया. विपक्षी सांसद सरकार से नाराज प्रदर्शन कर रहे छात्रों का भी समर्थन कर रहे थे. किस बात पर नाराज विपक्ष ने संसद में मचाया उत्पात चार महीने पहले सर्बिया में रेलवे स्टेशन की छत गिरने से 15 लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हुए जो अब सरकार के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गए हैं. विधान सभा सत्र में, सर्बियाई प्रगतिशील पार्टी (एसएनएस) के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन ने सत्र के एजेंडे को मंजूरी दी जिसके बाद कुछ विपक्षी नेता अपनी सीट से उठकर संसद के अध्यक्ष की तरफ दौड़े. इस दौरान सुरक्षा गार्ड्स से उनकी हाथापाई देखने को मिली. वहीं, कुछ विपक्षी सांसदों ने स्मोक ग्रेनेड और आंसू गैस के गोले फेंके. लाइव प्रसारण में संसद की इमारत के अंदर काला और गुलाबी धुआं उठता दिखाई दिया. स्पीकर एना ब्रनाबिक ने कहा कि इस दौरान दो सांसद घायल हुए हैं, जिनमें से एक, एसएनएस पार्टी की जैस्मिना ओब्राडोविक को स्ट्रोक हुआ है और उसकी हालत गंभीर है. उन्होंने सत्र में कहा, ‘संसद काम करना और सर्बिया की रक्षा करना जारी रखेगी.’ मंगलवार को सर्बियाई संसद को देश की यूनिवर्सिटीज के लिए धनराशि बढ़ाने वाला कानून पारित करना था. इस कानून की मांग को लेकर दिसंबर से ही सर्बिया के छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं. संसद में देश के प्रधानमंत्री मिलोस वुसेविक के इस्तीफे पर भी चर्चा होनी थी लेकिन सत्तारूढ़ गठबंधन ने सत्र के एजेंडे में कई ऐसे मुद्दों को रखा जिससे विपक्ष बुरी तरह भड़क गया.   संसदीय सत्र के लाइव टेलीविजन प्रसारण में दिखाया गया कि सर्बियाई विपक्षी सांसदों ने मंगलवार को सरकार की नीतियों के विरोध में संसद के अंदर धुआंधार ग्रेनेड और आंसू गैस के गोले फेंके. इसके बाद पूरे संसद में काला और लाल धुआं फैल गया. विपक्षी सांसद सरकार से नाराज प्रदर्शन कर रहे छात्रों का भी समर्थन कर रहे थे.

दोनों सदन कल तक स्थगित, संसद के शीतकालीन सत्र के पांचवें दिन भी नहीं हुई कार्यवाही

नई दिल्ली. संसद के शीतकालीन सत्र का पांचवां दिन भी बर्बाद हो गया. आज सोमवार को 11 बजे कार्यवाही शुरू होने के साथ ही विपक्षी सांसदों ने अपनी-अपनी मांगों को लेकर हंगामा शुरू कर दिया, जिस वजह से कल तक के लिए कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी. इससे पहले पिछले हफ्ते के सभी चारों सत्र विपक्षी सांसदों के हंगामे की वजह से स्थगित करने पड़े थे. माना जा रहा था कि वित्त मंत्री सीतारमण की ओर से आज लोकसभा में बैंकिंग लॉ संशोधन बिल पेश किया जा सकता है, लेकिन नहीं हो सका. शीतकालीन सत्र की शुरुआत पिछले हफ्ते सोमवार को हुई थी, लेकिन संसदीय कार्यवाही हंगामे की से बार-बार बाधित होती रही है. संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में अडाणी से जुड़े मामले और उत्तर प्रदेश की संभल हिंसा को लेकर विपक्षी सांसदों की ओर से आज फिर से सरकार को घेरने की संभावना है. सत्र के पहले दिन पिछले सोमवार को कार्यवाही के दौरान उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बीच तीखी बहस भी हो गई थी. इस सत्र के दौरान दोनों सदनों की 19-19 बैठकें आयोजित होने हैं.

सरकार ने रविवार को बुलाई सर्वदलीय बैठक, संसद के शीतकालीन सत्र की तैयारी तेज

नई दिल्ली सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र से पहले 24 नवंबर को पारंपरिक सर्वदलीय बैठक बुलायी है।संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को एक्स पर अपने पोस्ट में कहा कि बैठक संसद के आगामी शीतकालीन सत्र के परिप्रेक्ष्य में बुलायी गयी है। उन्होंने कहा कि शीतकालीन सत्र 25 नवंबर से शुरू होकर 20 दिसंबर को समाप्त होगा। बैठक का उद्देश्य विपक्षी दलों को विधायी एजेंडे के बारे में जानकारी देना और बहस के लिए विषयों पर चर्चा करना है। इसके अलावा संविधान की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर पुराने संसद भवन में संविधान सदन में कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा।  संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले सरकार ने रविवार 24 नवंबर को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रीजीजू ने एक्स पर मंगलवार को गई की एक पोस्ट में बताया कि संसद के आगामी शीतकालीन सत्र के मद्देनजर 24 नवंबर की सुबह सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है। संसद का शीतकालीन सत्र 25 नवंबर से शुरू होगा और 20 दिसंबर को समाप्त होगा। संविधान अपनाने की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर संविधान सदन या पुराने संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में एक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। सरकार द्वारा सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाई जाती है ताकि विपक्ष को सरकार के विधायी एजेंडे की जानकारी दी जा सके और साथ ही उन मुद्दों पर चर्चा की जा सके जिन पर राजनीतिक दल संसद में बहस करना चाहते हैं। इन मुद्दों पर हंगामा तय इस संसद सत्र में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होनी है और इसी के चलते सत्र के हंगामेदार रहने की संभावना है। इस सत्र में सबसे अहम विधेयक होगा वक्फ संशोधन विधेयक जिस पर संसद में लंबी चर्चा होगी। इसे लेकर संसद समिति का गठन भी किया गया था और इसी रिपोर्ट पर सदन में चर्चा होगी। समूचे विपक्ष इस विधेयक का विरोध कर रहा है, जिसके कारण सदन में भारी हंगामा होने के आसार हैं। वहीं, संसद में इस बार एक देश-एक चुनाव पर भी चर्चा होनी है। विपक्ष के विरोध के कारण इस पर भी हंगामे की संभावना है।

‘वक्फ की जमीन पर बनी है संसद’, बदरुद्दीन अजमल बोले- बिना वक्फ की जमीन को खाली कराए इस्तेमाल करना गलत

नई दिल्ली पूर्व सांसद बदरुद्दीन अजमल ने वक्फ से संबंधित नए विधेयक का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि देश भर में वक्फ संपत्तियों को लेकर जो चर्चाएँ हो रही हैं, उनमें दिल्ली की प्रमुख जगहों पर स्थित इमारतों और क्षेत्रों को भी शामिल किया जा रहा है। अजमल का दावा है कि संसद भवन, उसके आसपास का क्षेत्र, और वसंत विहार से लेकर एयरपोर्ट तक का इलाका वक्फ की संपत्ति पर स्थित है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग यह मानते हैं कि दिल्ली का एयरपोर्ट भी वक्फ की जमीन पर बनाया गया है। इस तरह के बयान से वक्फ संपत्तियों को लेकर चल रही चर्चाओं में और अधिक विवाद जुड़ गया है। वक्फ की संपत्तियों का उपयोग आमतौर पर धार्मिक और सामाजिक उद्देश्यों के लिए होता है, और इन संपत्तियों के स्वामित्व के सवाल अक्सर जटिल कानूनी और राजनीतिक विवादों का विषय बनते हैं। अजमल के इस बयान से यह मुद्दा और अधिक संवेदनशील हो सकता है, और सरकार की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी, खासकर अगर इसे संसद में चर्चा का विषय बनाया जाता है।उन्होंने आगे कहा, “बिना अनुमति के वक्फ की जमीन का इस्तेमाल करना गलत है। वक्फ बोर्ड के इस मुद्दे पर वे (मोदी सरकार) बहुत जल्द अपनी सरकार खो देंगे।” इस बीच, विपक्षी सांसदों ने वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर संयुक्त संसदीय समिति की बैठक के दौरान संसदीय आचार संहिता के घोर उल्लंघन पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा है। पूर्व सांसद अजमल ने वक्फ बिल का विरोध किया है और कहा, “इस बारे में आवाजें उठ रही हैं और दुनिया भर में वक्फ संपत्तियों की सूची सामने आ रही है। संसद भवन, उसके आसपास के इलाके और वसंत विहार से लेकर एयरपोर्ट तक का पूरा इलाका वक्फ की संपत्ति पर बना है। लोगों का यह भी कहना है कि एयरपोर्ट वक्फ की संपत्ति पर बना है।” उन्होंने आगे कहा, “बिना अनुमति के वक्फ की जमीन का इस्तेमाल करना गलत है। वक्फ बोर्ड के इस मुद्दे पर वे (मोदी सरकार) बहुत जल्द अपनी सरकार खो देंगे।” इस बीच, विपक्षी सांसदों ने वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर संयुक्त संसदीय समिति की बैठक के दौरान संसदीय आचार संहिता के घोर उल्लंघन पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा है। इस पत्र में विपक्षी सांसदों ने 14 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित JPC की बैठक के दौरान समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल द्वारा संसदीय आचार संहिता और प्रक्रिया के नियमों के कई उल्लंघनों का आरोप लगाया है। लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में विपक्षी सांसदों ने कहा, “समिति की कार्यवाही अध्यक्ष जगदंबिका पाल द्वारा पक्षपातपूर्ण तरीके से संचालित की गई। अध्यक्ष द्वारा अनवर मणिप्पाडी को समिति के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए दिया गया निमंत्रण समिति के दायरे और अधिकार क्षेत्र में नहीं है।” विपक्षी सांसदों ने यह भी दावा किया कि “कर्नाटक वक्फ घोटाला रिपोर्ट 2012 पर आधारित वक्फ विधेयक 2012 पर प्रस्तुति” शीर्षक वाले नोट में वक्फ विधेयक पर कोई टिप्पणी नहीं थी, बल्कि इसमें मल्लिकार्जुन खड़गे सहित कर्नाटक कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ केवल राजनीतिक रूप से प्रेरित आरोप थे। विपक्षी सांसदों ने 14 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की बैठक के दौरान अध्यक्ष जगदंबिका पाल पर संसदीय आचार संहिता और प्रक्रिया के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा है। इस पत्र में कहा गया है कि जगदंबिका पाल ने समिति की कार्यवाही को पक्षपातपूर्ण तरीके से संचालित किया। विशेष रूप से, विपक्षी सांसदों ने आपत्ति जताई है कि अध्यक्ष ने अनवर मणिप्पाडी को समिति के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए बुलाया, जो उनके अनुसार समिति के दायरे और अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था। यह विवाद इस बात पर केंद्रित है कि समिति की कार्यवाही निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, और विपक्षी सांसदों का आरोप है कि इस बैठक में ऐसा नहीं हुआ। संसदीय समितियों में इस प्रकार के आरोप गंभीर माने जाते हैं, क्योंकि ये समितियाँ महत्वपूर्ण नीतिगत और विधायी मामलों पर विचार करती हैं। ऐसे मामलों में लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि उन्हें इन आरोपों का मूल्यांकन करना होता है और यह सुनिश्चित करना होता है कि संसदीय प्रक्रियाओं का पालन हो। विपक्षी सांसदों ने अपने पत्र में यह भी आरोप लगाया है कि जिस नोट का शीर्षक “कर्नाटक वक्फ घोटाला रिपोर्ट 2012 पर आधारित वक्फ विधेयक 2012 पर प्रस्तुति” था, उसमें वक्फ विधेयक पर कोई ठोस टिप्पणी या विश्लेषण नहीं था। इसके बजाय, उन्होंने दावा किया कि उस नोट में कर्नाटक कांग्रेस के प्रमुख नेताओं, विशेष रूप से मल्लिकार्जुन खड़गे, के खिलाफ राजनीतिक रूप से प्रेरित आरोप लगाए गए थे। सांसदों का कहना है कि इस प्रस्तुति का असल उद्देश्य वक्फ विधेयक से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना था, लेकिन इसके बजाय इसे राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए इस्तेमाल किया गया। विपक्षी नेताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि ऐसे मुद्दों पर निष्पक्ष और तथ्यात्मक चर्चा होनी चाहिए, न कि राजनीतिक लाभ के लिए विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जाना चाहिए।  

संसद का मॉनसून सत्र 22 जुलाई से शुरू होगा , वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी पूर्ण बजट

 नई दिल्ली संसद के मानसूत्र सत्र की डेट लगभग फाइनल हो गई है. सूत्रों का कहना है कि मोदी सरकार 3.0 का मानसून सत्र 22 जुलाई से 9 अगस्त तक होगा.  मानसून सत्र के पहले दिन यानी 22 जुलाई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मोदी सरकार 3.0 का बजट पेश कर सकती हैं. हालांकि, अभी सरकार की तरफ से बजट की तारीख को लेकर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 12 जून को लगातार तीसरी बार कार्यभार संभाला है. आने वाले समय में निर्मला सीतारमण एक नया रिकॉर्ड भी बनाने जा रही हैं. वे देश की पहली ऐसी वित्त मंत्री बन जाएंगी, जो लगातार सातवां बजट और लगातार छठा पूर्ण बजट पेश करेंगी. अभी तक उन्होंने 5 पूर्ण बजट और 1 अंतरिम बजट पेश किया है. फरवरी में पेश किया गया था अंतरिम बजट इससे पहले उन्होंने फरवरी में अंतरिम बजट पेश किया था. वित्त मंत्री का कहना था कि 2025-2026 तक राजकोषीय घाटा 5.1% रहने का अनुमान है. 44.90 लाख करोड़ रुपए का खर्च है और 30 लाख करोड़ का रेवेन्यू आने का अनुमान है. पहला संसद सत्र 24 जून से वित्त वर्ष 2024-25 के लिए पूर्ण बजट अगले महीने नवगठित 18वीं लोकसभा में पेश किया जाना है. बुधवार को नए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि 18वीं लोकसभा का पहला सत्र 24 जून से शुरू होकर 3 जुलाई को समाप्त होगा. 9 दिवसीय विशेष सत्र के दौरान लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा और नए सांसद (एमपी) शपथ लेंगे. इस बीच, राज्यसभा का 264वां सत्र 27 जून से 3 जुलाई, 2024 तक चलेगा. यह लोकसभा चुनावों के बाद पहला संसद सत्र है. 27 जून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगी. वे अगले पांच साल के लिए नई सरकार के रोडमैप की रूपरेखा पेश करेंगी. राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में अपने मंत्रिपरिषद का परिचय देंगे. सत्र के पहले तीन दिनों के दौरान नवनिर्वाचित सांसद शपथ लेंगे और लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव करेंगे. उसके बाद मानसूत्र सत्र आएगा और इसमें पूर्ण बजट पेश किए जाने की तैयारी चल रही है.

संसद की सुरक्षा में सेंध के पीछे बेरोजगारी और महंगाई कारण- राहुल गांधी.

Unemployment and inflation are behind the security breach in Parliament, says Rahul Gandhi. 13 दिसंबर सामने आया था सनसनीखेज घटनाक्रम, आरोपियों से दिल्ली पुलिस कर रही पूछताछ, मास्टरमाइंड ललिता झा का टीएमसी से कनेक्शन सामने आया, नई दिल्ली। संसद भवन की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले आरोपियों से दिल्ली पुलिस की पूछताछ जारी है। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने अदालत में दायर अपनी रिमांड में सनसनीखेज खुलासे किए। पुलिस ने अदालत को बताया कि वारदात के कथित मास्टरमाइंड ललित झा और उसके साथी देश में अराजकता पैदा करना चाहते थे, ताकि सरकार को अपनी मांगों को पूरा करने के लिए मजबूर किया जा सके। संसद पर हमला सुरक्षा में बड़ी चूक जरूर है, लेकिन ऐसा क्यों हुआ? इस घटना के पीछे बेरोजगारी और महंगाई है, जिसके लिए मोदी सरकार की नीतियां जिम्मेदार है। ‘ राहुल गांधी ‘ संसद भवन में सुसाइड करने की थी प्लानिंगमुख्य आरोपी सागर शर्मा ने पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने पुलिस अधिकारियों को बताया कि सभी ने प्लान A, B और C बनाया था। इसके तहत संसद भवन के बाहर आत्महत्या के प्रयास की कोशिश भी शामिल थी। सागर शर्मा के मुताबिक, पहले संसद भवन के बाहर आत्महत्या का प्लान था। इसके लिए जेल (ज्वलनशील पदार्ध) खरीदने की कोशिश की गई। इसमें कामयाबी नहीं मिली तो संसद भवन के अंदर जाकर पीला धुआं छोड़ने की योजना बनी। पता चला है कि आरोपी पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना चाहते थे। आगे चलकर उनका उद्देश्य राजनीतिक पार्टी बनाने का भी था।

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