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इंदौर में लगातार बढ़ते AQI से प्रदूषण का स्तर चिंताजनक हालत में पहुंचा, मप्र में प्रदूषण का स्तर 8 से 9 गुना तक ज्यादा

इंदौर इंदौर में एक बार फिर से पॉल्यूशन बढ़ने लगा है। एयर क्वालिटी इंडेक्स लगातार नीचे गिरता जा रहा है। 1 अप्रैल से इंदौर का AQI लेवल 100 के नीचे ही नहीं आया है। तापमान बढ़ने के साथ ही अब इसमें और वृद्धि होगी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार इसी हफ्ते इंदौर में सोमवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एयर क्वालिटी इंडेक्स, एक्यूआई) 158 तक पहुंच गया था। रविवार को यह 147 पर था। इसमें महत्वपूर्ण प्रदूषणकारी घटक पीएम-10 और नाइट्रो ऑक्साइड का औसत भी काफी अधिक हो गया था। अब गर्मी बढ़ने के साथ एक्यूआई बढ़ता रहेगा। रियल टाइम पॉल्युशन स्टेशन के आंकड़ों के अनुसार 16 मार्च को आखिरी बार एक्यूआई 96 रहा था। इसके बाद से एक्यूआई 100 से नीचे नहीं आया है। इसमें अब लगातार वृद्धि हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतना बढ़ता हुआ प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। एक्यूआई को 100 से अधिक होने पर हानिकारक माना जाता है। इससे वृद्धों, बच्चों और सांस के मरीजों को दिक्कत हो सकती है। एक्यूआई 200 से अधिक होने से यह आम लोगों के लिए भी हानिकारक हो सकता है। इससे लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है। आईआईटी इंदौर की स्टडी के अनुसार मप्र में प्रदूषण का स्तर चिंताजनक आईआईटी इंदौर की स्टडी में यह सामने आया है कि मप्र में प्रदूषण का स्तर लगातार चिंताजनक बना हुआ है। प्रदेशवासी हर साल 70 से 80 दिन बेहद खतरनाक हवा में सांस लेने को मजबूर हैं। पहले यह साल में 15-25 दिन होती थी। यहां दिल्ली-एनसीआर और उप्र की तुलना में प्रदूषण कम है, लेकिन, मौजूदा स्तर भी चिंताजनक है। आईआईटी इंदौर की यह स्टडी एल्सेवियर के टेक्नोलॉजी इन सोसाइटी जर्नल में प्रकाशित हुई है। आईआईटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. मनीष कुमार गोयल और उनकी टीम की इस स्टडी में पाया कि मप्र में औसत वार्षिक पीएम 2.5 का स्तर 40-45 प्रति घन मीटर है, जो राष्ट्रीय मानक (40 प्रति घन मीटर में माइक्रोग्राम) के समान है। मगर प्रदूषण के चरम दिनों में यह 200-250 प्रति घन मीटर में माइक्रोग्राम तक पहुंच जाता है। मप्र में प्रदूषण का स्तर 8 से 9 गुना तक ज्यादा आईआईटी इंदौर के डायरेक्टर प्रो. सुहास जोशी का कहना है, मप्र में प्रदूषण का स्तर डब्ल्यूएचओ के मानकों से 8 से 9 गुना तक ज्यादा है। स्टडी के मुताबिक महिलाएं वायु प्रदूषण से अधिक प्रभावित हो रही हैं। इसका मुख्य कारण घर के अंदर ठोस ईंधन (लकड़ी, कोयला) से खाना पकाने के कारण होने वाला धुआं है। प्रो. मनीष गोयत बताते हैं, पीएम 2.5 के बढ़ते स्तर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पीएम 2.5 का मतलब हवा में मौजूद 2.5 माइक्रो मीटर से भी छोटे कणों से है, जो फेफड़ों और रक्तप्रवाह में आसानी से प्रवेश कर सकते हैं। एक्यूआई बढ़ना मतलब प्रदूषण बढ़ा एक्यूआई में पीएम-10, पीएम-2.5, कार्बन और सल्फर डाईऑक्साइड, नाक्स गैसेस, ओजोन आदि का अनुपात होता है। बीते दिनों में एक्यूआई अधिक रहा है। इसमें पीएम 2.5, कार्बन व सल्फर डाई ऑक्साइड की उल्लेखनीय बढ़ोतरी मिली है। यह हमारी आबोहवा को प्रभावित कर रहे हैं। विकास कार्यों और गर्मी के कारण बढ़ रहा AQI लेवल मप्र में AQI लेवल के लगातार बढ़ने के सबसे महत्वपूर्ण कारणों में शहरों में हो रहे विकास कार्य, वाहनों की संख्या में इजाफा, गर्मी में ज्यादा मात्रा में एसी का चलना, हरियाली का कम होना है। पॉल्यूशन लेवल बढ़ने का एक प्रमुख कारण हवा का तेज गति से नहीं चलना भी है। अधिकारियों के मुताबिक तेज हवा चलने पर वह पॉल्यूशन पार्टिकल को अपने साथ दूर तक उड़ा ले जाती है। पॉल्यूशन एक्सपर्ट के अनुसार AQI लेवल 100 से ज्यादा होने पर आंख, गले और फेफड़े की तकलीफ बढ़ने लगती है। सांस लेते वक्त इन कणों को रोकने का हमारे शरीर में कोई सिस्टम नहीं है। ऐसे में पीएम 2.5 हमारे फेफड़ों में काफी भीतर तक पहुंचता है।

बारिश की कमी ने दिल्ली में प्रदूषण संकट को बढ़ा, वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक गिर गई है: CAQM

नई दिल्ली दिल्ली एक बार फिर गंभीर प्रदूषण स्तर से जूझ रही है, जिससे शहर की वायु गुणवत्ता खतरनाक श्रेणी में पहुंच गई है. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को प्रदूषण की निगरानी करने और विभिन्न राज्यों को उचित उपाय करने के लिए मार्गदर्शन देने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है. वायु प्रदूषण का मुख्य कारण पंजाब और हरियाणा में जलाई जाने वाली पराली को माना जाता है, लेकिन इस साल पराली जलाने पर रोक लगाने के बावजूद भी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर इस साल रिकॉर्ड तोड़ रहा है. प्रदूषण में खतरनाक वृद्धि के लिए CAQM द्वारा पहचाने गए प्रमुख कारकों में से एक नवंबर में देखा गया असामान्य मौसम पैटर्न है. इंडिया टुडे से खास बातचीत में, आयोग के एक तकनीकी सदस्य एसडी अत्री ने बताया कि पिछले साल नवंबर में घने कोहरे ने मौसमी गतिविधियों को काफी हद तक बदल दिया है. घना कोहरा, जो पहले इस अवधि में असामान्य था ने वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिससे दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में प्रदूषण का संकट बढ़ गया है. दिल्ली में क्यों घुट रहा है लोगों का दम? पिछले दो हफ़्तों में बढ़े प्रदूषण स्तर ने आयोग के लिए काफी चिंता पैदा कर दी है. जिससे मौसम की स्थिति पर फिर से ध्यान केंद्रित किया जा रहा है क्योंकि यह एक प्रमुख कारक है. एसडी अत्री ने बताया कि पिछले 20 साल में औसतन नवंबर में आधे दिन तक घना कोहरा दर्ज किया जाता था. हालांकि, इस साल लगातार और तीव्र धुंध ने स्थिति को जटिल बना दिया है, जिससे प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ी समस्या है. हाल के वर्षों में वैश्विक तापमान वृद्धि और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां दुनिया भर के शहरी वातावरण में तेजी से देखने को मिल रही हैं. कई दशकों से भारतीय मौसम विभाग से जुड़े एक अनुभवी विशेषज्ञ अत्रेय ने बताया कि कैसे ये वैश्विक घटनाएं दिल्ली के बढ़ते प्रदूषण स्तर में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं. बारिश की कमी के कारण भी बढ़ा प्रदूषण आमतौर पर अक्टूबर और नवंबर के महीनों में पश्चिमी विक्षोभ के कारण भारत के मैदानी इलाकों में बारिश होती है. हालांकि, इस साल बारिश नहीं हुई है. बारिश ना होने से एक प्राकृतिक तंत्र को नष्ट हो गया है, जो आमतौर पर प्रदूषकों को फैलाने और वायु गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करता है. बारिश की कमी ने दिल्ली में प्रदूषण संकट को बढ़ा दिया है, जहां वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक गिर गई है. इंडिया टुडे से बातचीत में अत्री ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के सामने प्रदूषण के स्तर की निगरानी और नियंत्रण में आने वाली चुनौतियों पर जोर दिया. हालांकि, आयोग स्थिति पर कड़ी नज़र रखता है, लेकिन मौसम और वायुमंडलीय कारकों को नियंत्रित करना लगभग असंभव है. ये कारक प्रदूषकों के फैलाव और सांद्रता को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. हवा की गति से लेकर हवा की दिशा तक हर तत्व इस बात को प्रभावित करता है कि प्रदूषक दिल्ली में कैसे पहुंचते हैं और कैसे बसते हैं. दुर्भाग्य से पिछले दो हफ़्तों में ये कारक अनुकूल नहीं रहे हैं, जिससे हवा में स्थिरता बनी हुई है और प्रदूषण में वृद्धि हुई है. सीएक्यूएम द्वारा दी गई जानकारी दिल्ली और इसी तरह के शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को संबोधित करने की जटिलता को रेखांकित करती है. चूंकि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन मौसम के पैटर्न को बदलना जारी रखते हैं इसलिए नीति निर्माताओं के लिए वायु गुणवत्ता को प्रबंधित करने के लिए समाधान तैयार करते समय इन कारकों पर विचार करना अनिवार्य है. इन वैश्विक मुद्दों से उत्पन्न प्रदूषण चुनौतियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए दीर्घकालिक रणनीतियों में जलवायु लचीलापन शामिल होना चाहिए.  

सुबह कोहरा छाने से 500 मी. से भी कम पहुंची दृश्यता, मुंबई में भी सांसों मंडराया संकट

मुंबई. महाराष्ट्र के मुंबई में रविवार को घना कोहरा छाया रहा। पूरा शहर धुंध की मोटी परत से ढक गया। एफएएसएआर (वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान और अनुसंधान प्रणाली) के अनुसार, सुबह नौ बजे तक मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 179 दर्ज किया गया। एक्यूआई 179 को मध्यम क्षेत्र में माना जाता है। इस दौरान फेफड़े, हृदय रोग, अस्थमा से पीड़ित लोगों को सांस लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। चेंबूर में एक्यूआई 55 दर्ज किया गया है। डब्ल्यूटीपी भांडुप कॉम्प्लेक्स का एक्यूआई 114, आईएमडी कोलाडा में 200, फायर स्टेशन मलाड में 276, बापिस्टा गार्डन मझगांव में 176, बीएमसी शास्त्री गार्डन वर्ली में 250 , बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में 180, बायकुला में 152, कांदिवली ईस्ट में 125, मुलुंड वेस्ट में 135, सायन में 125 और नवी मुंबई में एक्यूआई 135 दर्ज किया गया है। मुंबई के मरीन ड्राइव के पास घने कोहरे के बीच लोगों ने सुबह की सैर की। कोहरे और धुंध के बीच ही कुछ लोग अपनी नियमित सुबह की सैर कर रहे थे तो कुछ जॉगिंग और व्यायाम करते दिखे। घने कोहरे के कारण कई इलाकों में दृश्यता घटकर 500 मीटर से भी कम हो गई थी। ऊंची-ऊंची इमारते घने कोहरे और धुंध में छिप गई। राष्ट्रीय राजधानी में एक्यूआई 417 रविवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली भी घने कोहरे और धुंध में छिपी रही। यह स्थिति अगले कुछ दिनों तक बनी रह सकती है। इससे वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। सुबह सात बजे दृश्यता सबसे कम 500 मीटर दर्ज की गई। उसके बाद दोपहर एक बजे 1500 मीटर हो गई। दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 417 दर्ज किया गया।  मौसम बदलाव के चलते हवा एक बार फिर से शनिवार को गंभीर श्रेणी में पहुंच गई है। सुबह से लेकर रात तक स्मॉग की चादर छाई रही। दिन चढ़ने के साथ ही हल्का स्मॉग छंटने लगा। इससे लोगों को सांस लेने के साथ आंखों में जलन महसूस हुई।

लाहौर प्रदूषण में दिल्ली से आगे निकला , AQI 1000 के पार जाते ही प्राइमरी स्कूलों को बंद करने का ऑर्डर जारी ; लाहौर हाईकोर्ट पहुंची बच्ची

लाहौर पाकिस्तान के कई शहरों में प्रदूषण से इतना बुरा हाल है कि सांस लेना मुश्किल हो गया है। पाक की पंजाब सरकार ने स्कूलों और कॉलेजों को बंद करने का आदेश दे दिया है। इसके अलावा संग्रहालय और पार्क भी बंद कर दिए गए हैं। स्मोग इतना है कि दृश्यता बेहद कम हो गई है और वाहन चलना भी मुश्किल हो रहा है। शुक्रवार को लाहौर, गुजरांवाला, फैसलाबाद, मुल्तान, शेखुपुरा, कसूर, ननकाना साहिब, गुजरात, हाफइजाबाद, मंडी बहाउद्दीन, टोबा टेक सिंह, वेहारी और खानेवाल में प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं। दक्षिण पंजाब के सबसे बड़े शहर मुल्तान में वायु की गुणवत्ता सुबह 8 से 9 बजे के बीच 2135 के पार चली गई। हवा में पीएम 2.5 की मात्रा बढ़ने की वजह से लोगों का स्वास्थ्य खराब होने लगा है। मुल्तान का एक्यूआई रात के 10 बजे 980 के पार चला गया। 300 का स्तर ही खतरनाक की श्रेणी में होता है। मुल्तान के तीन क्वालिटी मॉनिटर कार्यालयों में हवा की गुणवत्ता 2313, 1635 और 1527 बताई गई है। पाकिस्तान के शिक्षा विभाग ने ट्यूशन सेंटर भी बंद करने के आदेश दे दिए हैं। बता दें कि शुक्रवार को पलूशन की रैंकिंग में पाकिस्तान के सात शहरों की हालत खराब थी। लाहौर और आसपास की जगहों पर हवा की गति 11 किलोमीटर प्रति घंटे से भी कम है। ऐसे में प्रदूषण की मात्रा खतरनाक श्रेणी से बी ज्यादा हो गई है। लाहौर में पूरा दिन घने स्मोग की चादर छाई रहती है। यहां प्रशासन ने निर्माण का कार्यों पर प्रतिबंध लगा दिया है। यहां एक्यूआई 784 को पार कर गया है। खतरनाक धुंध की वजह से दैनिक गतिविधियां मुश्कलि हो गई हैं। वहीं लोगों को बाहरी हवा के संपर्क में आने से बचने की सलाह दी गई है। लोग घरों से बाहर मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं।  

रात 12 बजे पीक पर रहा पॉल्यूशन, राजस्थान में दिवाली के बाद बिगड़ी आबोहवा

जयपुर. राजस्थान में बीते एक सप्ताह में वायु प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है। राजधानी जयपुर में शनिवार रात AQI का स्तर 305 तक पहुंच गया। वहीं, औसत रूप से यहां AQI का स्तर 142 रहा है। अगले एक सप्ताह में भी मौसम में प्रदूषण का स्तर कम नहीं होगा। राजस्थान के अन्य शहरों की बात करें तो अलवर का AQI स्तर औसतन 171 रहा, भरतपुर का 165, भिवाड़ी का 168, चूरू का 176, गंगानगर का 163 और पाली जिले का एक्यूआई स्तर 146 रहा। राजस्थान के हिल स्टेशन कहे जाने वाले माउंटआबू में फिलहाल हवा का स्तर सबसे अच्छा है। यहां सुबह पांच बजे के आसपास AQI का स्तर 25 रहा, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के हिसाब से बेस्ट की श्रेणी में आता है। हालांकि, देर रात यहां भी वायु प्रदूषण का असर देखने को मिला, जिसमें यहां का AQI का स्तर 91 तक पहुंच गया। लेकिन औसत रूप से यहां AQI का स्तर 61 रहा है। वहीं, राजस्थान के अन्य पर्यटन स्थलों की बात करें तो धौरों के शहर जैसलमेर में AQI का स्तर देर रात 292 दर्ज किया गया। लेकिन सुबह यहां मौसम साफ रहा और AQI का स्तर भी 78 दर्ज किया गया। उदयपुर में AQI का औसत स्तर 122 के आसपास है। हिस्टोरिक ग्राफ से देखें तो यहां देर रात प्रदूषण बढ़ा, लेकिन सुबह होते-होते AQI का स्तर 49 रह गया। जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के हिसाब से श्रेष्ठ है।

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