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पुतिन की धमकी, अमेरिका को करारा जवाब—चीन वाले इरादे भी सामने

मॉस्को  मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp ने आरोप लगाया है कि रूस ने देश में उसकी सेवाओं को पूरी तरह ब्लॉक करने की कोशिश की है, ताकि यूजर्स को स्‍टेट सपोर्टेड डोमेस्टिक ऐप की ओर मोड़ा जा सके. Meta Platforms के स्वामित्व वाले इस ऐप के प्रवक्ता ने बताया कि रूस का यह कदम इंटरनेट स्पेस पर नियंत्रण बढ़ाने और विदेशी टेक कंपनियों की भूमिका सीमित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है. तो क्‍या रूस भी चीन की राह पर चलने की तैयारी कर रहा है. दिलचस्‍प है कि चीन ने मैसेजिंग एप से लेकर सोशल साइट्स तक खुद की डेवलप की है. बीजिंग का उद्देश्‍य है कि इसके जरिये देश में पश्चिमी देशों के प्रभाव को रोका जा सकेगा और अमेरिका-यूरोप के टेक्‍नोलॉजी मोनोपोली पर लगाम लगाया जाएगा. अब रूस के कदम ने एक तरफ जहां मेटा चीफ मार्क जुकरबर्ग को उनकी औकात दिखा दी तो दूसरी तरफ अमेरिकी दादागिरी को भी ठोस चुनौती दी है. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद मॉस्को और वेस्‍टर्न टेक्‍नोलॉजिकल कंपनियों के बीच तनाव लगातार बढ़ा है. रूसी अधिकारी घरेलू स्तर पर विकसित ऐप ‘MAX’ को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसे सरकार समर्थित बताया जा रहा है. हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इस ऐप का इस्तेमाल यूजर्स की निगरानी और डेटा ट्रैकिंग के लिए किया जा सकता है, लेकिन सरकारी मीडिया ने इन आरोपों को निराधार करार दिया है. WhatsApp ने कहा कि रूस द्वारा उठाए गए कदम यूजर्स को एक सरकारी-स्वामित्व वाले सर्विलांस ऐप की ओर धकेलने की कोशिश है. कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘हम उपयोगकर्ताओं को जुड़े रखने के लिए हर संभव प्रयास जारी रखेंगे.’ हालांकि, कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि रूस में सेवा बहाली को लेकर आगे की रणनीति क्या होगी. WhatsApp पर सख्‍ती इस बीच, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने सरकारी समाचार एजेंसी TASS को दिए वीडियो बयान में कहा कि WhatsApp की वापसी रूसी कानूनों के पालन पर निर्भर करेगी. उन्होंने कहा, ‘अगर Meta कॉरपोरेशन कानून का पालन करती है और रूसी अधिकारियों के साथ संवाद करती है, तो समझौते की संभावना बन सकती है. लेकिन यदि कंपनी अडिग रुख अपनाती है और कानून के अनुरूप ढलने के लिए तैयार नहीं होती, तो कोई संभावना नहीं है.’ फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के संचार नियामक रोसकोमनादज़ोर ने WhatsApp को अपने ऑनलाइन डायरेक्टरी से हटा दिया है. बताया जाता है कि रूस में इस ऐप के करीब 10 करोड़ यूजर्स हैं, जो इसे देश के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स में से एक बनाता है. इस कदम को रूस की डिजिटल नीति में एक और सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है. Apple पर भी गाज रूस ने पिछले साल WhatsApp और टेलीग्राम जैसी विदेशी मैसेजिंग सेवाओं पर कुछ कॉल सुविधाओं को सीमित करना शुरू कर दिया था. अधिकारियों का आरोप है कि ये प्लेटफॉर्म धोखाधड़ी और आतंकवाद से जुड़े मामलों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ जानकारी साझा करने से इनकार करते हैं. इसके अलावा दिसंबर में Apple के वीडियो-कॉलिंग ऐप FaceTime को भी ब्लॉक कर दिया गया था. टेलीग्राम के रूसी मूल के संस्थापक पावेल ड्यूरोव पहले ही कह चुके हैं कि उनकी कंपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और यूजर्स की गोपनीयता की रक्षा के प्रति प्रतिबद्ध रहेगी. वहीं, मानवाधिकार संगठनों और डिजिटल राइट ग्रुप्‍स का कहना है कि रूस द्वारा घरेलू प्लेटफॉर्म्स को बढ़ावा देना और विदेशी सेवाओं को सीमित करना इंटरनेट स्वतंत्रता पर गंभीर असर डाल सकता है. डिजिटल संप्रभुता विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल तकनीकी कंपनियों और सरकारों के बीच नियामक संघर्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डिजिटल संप्रभुता, डेटा नियंत्रण और नागरिकों की ऑनलाइन स्वतंत्रता जैसे व्यापक मुद्दों से भी जुड़ा हुआ है. WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म के संभावित पूर्ण प्रतिबंध से रूस में लाखों यूजर्स की रोजमर्रा की संचार व्यवस्था प्रभावित हो सकती है. संकेत साफ है कि रूस और वेस्‍टर्न टेक कंपनियों के बीच टकराव आने वाले समय में और गहरा सकता है, जिसका असर वैश्विक डिजिटल इकोसिस्टम पर भी पड़ सकता है.

रूस ने तेल के मुद्दे पर कहा, ‘भारतीय दोस्त नहीं बदलेंगे’

नई दिल्ली रूस ने कहा है कि इस बात पर भरोसे की कोई वजह नहीं है कि ‘दोस्त’ भारत अपना रुख बदल सकता है। यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि भारत रूस से तेल की खरीद बंद कर देगा। इससे पहले रूस ने कहा था कि भारत किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र है। ट्रंप ने कहा है कि भारत अब अमेरिका और संभावित रूप से वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया झाकारोवा ने कहा कि इस बात पर भरोसा करने का कोई कारण नहीं है कि भारत ऐसा कदम उठाएगा। उन्होंने कहा, ‘अमेरिका के राष्ट्रपति का किसी स्वतंत्र देश को यह बताना कि वह किसके साथ व्यापार कर सकता है, कोई नई बात नहीं है। रूस के पास इस बात को मानने का कोई कारण नहीं है कि हमारे भारतीय मित्रों ने अपना रुख बदल लिया है।’ उन्होंने कहा, ‘हम इस बात से सहमत है कि भारत का रूसी हाइड्रोकार्बन खरीदना दोनों देशों के लिए फायदेमंद है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है। हम भारत में हमारे साझेदारों के साथ इस क्षेत्र में करीबी सहयोग को जारी रखने के लिए तैयार हैं।’ रूस बोला- भारत स्वतंत्र है क्रेमलिन ने  कहा कि भारत किसी भी देश से कच्चा तेल खरीदने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है और विविधता लाने के उसके फैसले में कुछ भी नया नहीं है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘हम और अन्य अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञ इस बात से भली-भांति परिचित हैं कि रूस, भारत को तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति करने वाला एकमात्र देश नहीं है। भारत हमेशा से अन्य देशों से भी ये उत्पाद खरीदता रहा है, इसलिए हमें इसमें कुछ भी नया नजर नहीं आता।’ इससे एक दिन पहले पेसकोव ने स्पष्ट किया था कि रूस को भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद बंद करने के संबंध में अब तक कोई आधिकारिक बयान या सूचना प्राप्त नहीं हुई है। रूस के नेशनल एनर्जी सिक्योरिटी फंड के प्रमुख विशेषज्ञ इगोर युशकोव ने कहा कि भारतीय तेल शोधन संयंत्र रूसी कच्चे तेल का आयात पूरी तरह बंद नहीं कर सकते। उन्होंने तकनीकी कारण बताते हुए कहा, ‘अमेरिका जिस ‘शेल ऑयल’ का निर्यात करता है, वह हल्के श्रेणी का होता है। इसके विपरीत, रूस भारी और सल्फर युक्त ‘यूराल्स’ तेल की आपूर्ति करता है। भारतीय तेल शोधन संयंत्रों के ढांचे के अनुसार, उन्हें अमेरिकी तेल को अन्य श्रेणी के साथ मिलाना होगा, जिससे अतिरिक्त लागत आएगी। ऐसे में रूस के तेल को पूरी तरह अमेरिका से बदलना संभव नहीं होगा।’

पुतिन ने इजरायल, ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की पेशकश, ट्रंप ने लताड़ा

सेंट पीटर्सबर्ग  रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को इज़राइल और ईरान के बीच जारी तनाव को खत्म करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की. अपनी यूक्रेन वाली जंग में फंसकर चारों खाने चित हो रहे पुतिन अब इजरायल और ईरान के बीच शांति का ‘मसीहा’ बनने चले हैं. सेंट पीटर्सबर्ग इकोनॉमिक फोरम में पुतिन ने बड़े जोश में कहा, ‘हम इजरायल-ईरान के झगड़े को सुलझा सकते हैं. रूस इस संकट के समाधान के लिए एक ऐसा समझौता कराने में मदद कर सकता है जिससे ईरान को शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम चलाने की अनुमति मिले और इजराइल की सुरक्षा चिंताएं भी दूर हों.’ लेकिन इस बयान को सुनकर दुनिया हैरान है. क्योंकि पुतिन अभी अपना युद्ध ही नहीं रोक पाए हैं. पुतिन ने कहा, ‘यह एक संवेदनशील मामला है, लेकिन मेरी नजर में इसका समाधान संभव है.’ लेकिन पुतिन को ट्रंप ने नसीहत दी है कि वह पहले अपनी जंग से निपटें और दूसरों की फिक्र करना छोड़ दें. पुतिन का यह बयान तब आया है जब यूक्रेन ने दावा किया है कि अब तक 10 लाख रूसी सैनिक इस युद्ध में मारे गए हैं. जब रूसी राष्ट्रपति से यह पूछा गया कि अगर इजराइल ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को मार दे तो रूस की प्रतिक्रिया क्या होगी, तो उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया. पुतिन ने कहा, ‘मैं इस संभावना पर चर्चा भी नहीं करना चाहता. लगातार बढ़ रहा है ईरान-इजरायल का संघर्ष ट्रंप का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है और अमेरिका ने भी क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है. वहीं दूसरी तरफ रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध दो साल से ऊपर चला गया है और हालात सुधरने की जगह और बिगड़ते जा रहे हैं. ट्रंप ने यह भी दावा किया कि यूक्रेन युद्ध में मारे गए लोगों की असली संख्या छुपाई जा रही है. उन्होंने कहा, “बहुत ज़्यादा लोग मारे गए हैं, जितना बताया जा रहा है उससे कहीं ज़्यादा. वहां एक बिल्डिंग गिरती है और कहा जाता है कि कोई घायल नहीं हुआ  क्या ये मजाक है?” वहीं, यह देखना दिलचस्प होगा कि पुतिन इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं. रूस के लिए यूक्रेन युद्ध का समाधान जितना दूर है, उतना ही जटिल इजरायल-ईरान संकट भी बनता जा रहा है. पुतिन ने की थी पेशकश बुधवार को पुतिन ने इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष को समाप्त करने में मध्यस्थता करने की पेशकश की थी. अंतर्राष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के पत्रकारों के साथ एक गोलमेज सत्र में बोलते हुए, पुतिन ने कहा कि “यह एक नाजुक मुद्दा है. मेरे विचार से, एक समाधान पाया जा सकता है.” पुतिन ने कहा कि उन्होंने ईरान, इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ मास्को के प्रस्तावों को साझा किया. ट्रंप ने पुतिन को सुना दिया इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने इजरायल के हमलों के आगे झुकने से इनकार करते हुए चेताया कि अगर अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप करता है, तो यह उसके लिए ‘अपूरणीय क्षति’ साबित हो सकती है. पुतिन ने स्पष्ट किया कि रूस ने ईरान, इजराइल और अमेरिका को अपने प्रस्ताव साझा कर दिए हैं. उन्होंने कहा, ‘हम किसी पर कुछ थोप नहीं रहे हैं. हम सिर्फ इस स्थिति से बाहर निकलने का एक रास्ता सुझा रहे हैं. लेकिन अंतिम निर्णय इन देशों के राजनीतिक नेतृत्व का है, खासकर ईरान और इजरायल का.’ हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन की मध्यस्थता की पेशकश पर चुटकी लेते हुए कहा, ‘मैंने पुतिन से कहा, मुझ पर अहसान करो. पहले अपने ही मुद्दे सुलझा लो. बाद में बाकी की चिंता करना.’ ईरान से रिश्तों की दुहाई दे रहे पुतिन पुतिन ने बड़े गर्व से बताया कि रूस और ईरान की दोस्ती ‘पक्की’ है. रूस ने ईरान के बुशहर में परमाणु संयंत्र बनाया, और अब वहां दो और रिएक्टर बना रहा है. वहां 200 से ज्यादा रूसी कर्मचारी दिन-रात जुटे हैं. पुतिन ने ये भी कहा कि ईरान ने कभी उनसे सैन्य मदद नहीं मांगी. रूस ने इजरायल के साथ बातचीत कर यह सुनिश्चित किया है कि उसकी सुरक्षा से समझौता न हो. यूक्रेन युद्ध पर रूस का रुख पुतिन ने यह भी कहा कि वह यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से बातचीत को तैयार हैं, लेकिन दोहराया कि जेलेंस्की का कार्यकाल खत्म हो चुका है और अब वह वैध नेता नहीं हैं. हालांकि कीव और उसके सहयोगी देशों ने इस दावे को खारिज करते हैं. उन्होंने कहा, ‘हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन अगर समझौता नहीं हुआ तो हम अपने लक्ष्यों को सैन्य माध्यम से प्राप्त करेंगे.’

‘व्लादिमीर पुतिन हमारे सबसे प्रिय कॉमरेड…’, तानाशाह किम जोंग बोले- रूस के साथ हमेशा खड़ा रहेगा उत्तर कोरिया

फियोंगयांग उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भेजे संदेश में कहा कि उनका देश हमेशा मास्को के साथ खड़ा रहेगा. उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया ने गुरुवार को यह जानकारी दी. केसीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, ‘रशियन डे’ (रूस की स्वतंत्रता का जश्न मनाने वाला दिन) के मौके पर पुतिन को भेजे गए संदेश में किम ने रूसी राष्ट्रपति को अपना ‘सबसे प्रिय मित्र’ कहा. उन्होंने उत्तर कोरिया और रूस के द्विपक्षीय संबंधों की प्रशंसा करते हुए इसे ‘दोनों साथियों के बीच वास्तविक संबंध’ बताया.  किम के हवाले से कहा गया, ‘डीपीआरके सरकार और मेरी अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति डीपीआरके-रूस संबंधों को आगे बढ़ाने की है.’ डीपीआरके का मतलब उत्तर कोरिया का आधिकारिक नाम ‘डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया’ है. केसीएनए ने बुधवार (11 जून) को बताया कि किम जोंग उन ने पुतिन को रूस दिवस की बधाई भेजी है. इस साल की शुरुआत में, प्योंगयांग ने पहली बार पुष्टि की थी कि उसने महीनों की चुप्पी के बाद नेता किम जोंग उन के आदेश पर यूक्रेन युद्ध में रूस के लिए लड़ने के लिए अपनी सेना भेजी थी. उत्तर कोरियाई नेता लगातार रूस का समर्थन करते रहे हैं. इससे पहले किम जोंग उन ने पुतिन को बिना शर्त समर्थन देने का वादा किया था. केसीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, ‘पुतिन के प्रमुख सुरक्षा सहयोगी सर्गेई शोइगु के साथ प्योंगयांग में एक बैठक के दौरान किम ने कहा कि उत्तर कोरिया रूस औरसभी महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक मामलों पर उसकी विदेश नीतियों का बिना शर्त समर्थन करेगा.’ दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के शक्तिशाली और व्यापक संबंधों में बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की. ब्लूमबर्ग न्यूज ने संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा और जापान सहित 11 देशों की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि 2024 में, उत्तर कोरिया ने रूस को कम से कम 100 बैलिस्टिक मिसाइलें भेजी थीं. रूस ने इन मिसाइलों का इस्तेमाल यूक्रेन में नागरिक बुनियादी ढांचे को नष्ट करने और कीव और जापोरिज्जिया जैसे आबादी वाले क्षेत्रों पर हमले करने के लिए किया था. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि प्योंगयांग ने 2024 के अंत में पूर्वी रूस में 11,000 से अधिक सैनिकों को तैनात किया था, जिन्हें सुदूर-पश्चिमी कुर्स्क ओब्लास्ट में ले जाया गया, जहां उन्होंने यूक्रेन के खिलाफ रूसी सेना के साथ युद्ध अभियानों में शिरकत की.  

अमेरिका क्रीमिया पर रूसी नियंत्रण को मान्यता दे सकता है, यूक्रेन शांति समझौते के तहत सहमति के संकेत

 वॉशिंगटन अमेरिका अब रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौते के हिस्से के रूप में क्रीमिया पर रूस के नियंत्रण को मान्यता देने को तैयार हो सकता है. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है. यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोनों देशों के बीच सीजफायर स्थापित करने के लिए बातचीत कर रहे हैं. 2014 में रूस ने क्रीमिया पर सैन्य कार्रवाई कर कब्जा कर लिया था और वहां एक विवादास्पद जनमत संग्रह कराया था. इस जबरन अधिग्रहण को अमेरिका समेत ज्यादातर देशों ने खारिज कर दिया था. क्रीमिया को रूस का हिस्सा मान लेना, अंतरराष्ट्रीय नियमों से हटकर होगा, जो बलपूर्वक क्षेत्र कब्जा करने को अमान्य मानते हैं. वार्ता की धीमी गति से अमेरिका नाखुश राष्ट्रपति ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो शांति वार्ता की धीमी प्रगति से नाराज बताए जा रहे हैं. शुक्रवार को दोनों नेताओं ने संकेत दिया कि अगर जल्द ही कोई परिणाम नहीं निकला, तो अमेरिका वार्ता से अलग हो सकता है. वार्ता को लेकर ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘यह मामला जितना लंबा खिंचेगा, हमारे इसमें शामिल रहने का औचित्य उतना ही कमजोर होता जाएगा.’ उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि दोनों पक्ष जल्द समाधान की दिशा में नहीं बढ़ते हैं, तो अमेरिका पीछे हट जाएगा. जेलेंस्की बोले- किसी भी हाल में रूस को नहीं देंगे जमीन यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमीर जेलेंस्की ने किसी भी तरह से रूस को यूक्रेनी जमीन सौंपने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. उन्होंने बार-बार कहा है कि क्रीमिया समेत किसी भी क्षेत्र को रूस का हिस्सा मानना अस्वीकार्य है. गुरुवार को कीव में बोलते हुए उन्होंने अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ पर रूस समर्थक रुख अपनाने का आरोप लगाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी. जेलेंस्की ने कहा, ‘हम कभी भी यूक्रेनी जमीन को रूसी नहीं मान सकते. जब तक सीजफायर नहीं होता, हमारी जमीन पर कोई बातचीत नहीं हो सकती.’  

यूक्रेन युद्ध के चलते रूस में खड़ा हो गया है आबादी का संकट, स्कूली लड़कियों को बच्चे पैदा करने के लिए तैयार कर रहा

मॉस्को रूस ऐसा देश बन गया है जो स्कूली छात्राओं को बच्चे पैदा करने के बदले में पैसे देने की पेशकश कर रहा है। मध्य रूस के ओर्योल क्षेत्र इसकी शुरुआत करने वाला पहला क्षेत्र बना है। यह इलाका रूस के उन 40 क्षेत्रों में है, जो महिला विश्वविद्यालय की छात्राओं को मां बनने पर कम से कम 100000 रूबल (करीब 1200 डॉलर) प्रदान करता है। मीडिया आउटलेट 7×7 की रिपोर्ट के अनुसार, नये फरमान में कम उम्र की स्कूली लड़कियों को भी भुगतान देने की बात कही गई है। क्षेत्र के गवर्नर आंद्रेई क्लिचकोव ने गुरुवार को इस कार्यक्रम का विस्तार किया। 25 साल में सबसे कम जन्मदर दरअसल, रूस इस समय तेजी से गिरती आबादी के संकट का सामना कर रहा है। देश की जन्म दर पहले से ही कम बनी हुई है। आधिकारिक डेटा से पता चलता है कि रूस में जन्म दर 25 साल के निचले स्तर पर आ गई है। वहीं, मृत्यु दर में वृद्धि जारी है। यूक्रेन में युद्ध से मौतों ने इस संकट को और बढ़ा दिया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जन्म दर को बढ़ाने पर जोर दिया है और तीन या उससे अधिक बच्चों वाले परिवारों को आदर्श बताया है। राष्ट्रपति पुतिन रूस को पारंपरिक मूल्यों के गढ़ के रूप में पेश करते रहे हैं, जो उनके विचार में पश्चिम के पतनशील समाज के साथ संघर्ष कर रहा है। उन्होंने महिलाओं को कम से कम तीन बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया है। उनका कहना है कि इसके रूस के भविष्य को सुरक्षित करने में मदद मिलेगी। इसके लिए पहले ही वित्तीय और अन्य प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। क्या कहते हैं आंकड़े? साल 2024 की पहली छमाही में रूस में लगभग 599,600 बच्चे पैदा हुए, जो 2023 की पहली छमाही की तुलना में 16,000 कम हैं। यह 1999 के बाद सबसे कम संख्या है। वहीं, मौतों की संख्या में 49,0000 की वृद्धि हुई। इस दौरान में देश में अप्रवास में 20% की वृद्धि हुई। सितंबर में जारी आधिकारिक आंकड़ों ने जन्म दर को एक चौथाई सदी में सबसे कम बताया, जबकि मृत्यु दर में वृद्धि हुई है। इसकी प्रमुख वजह मॉस्को में यूक्रेन का युद्ध है। क्रेमलिन ने इन आंकड़ों को देश के लिए विनाशकारी कहा है।

राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि

मॉस्को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंपने शुक्रवार को व्लादिमीर पुतिन से आग्रह किया कि वे रूस द्वारा कुर्स्क क्षेत्र से बाहर निकाले जा रहे यूक्रेनी सैनिकों को छोड़ दें.इस पर अब पुतिन की प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा है कि अगर वे (यूक्रेन के सैनिक) आत्मसमर्पण करते हैं तो वे इस अपील का सम्मान करेंगे. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में पुतिन के हवाले से कहा, “यदि वे आत्मसमर्पण करते हैं, तो हम गारंटी देते हैं कि हम उनकी जान बचा लेंगे. उन्हें अंतर्राष्ट्रीय कानून और रूसी संघ के कानूनों के अनुसार जीवन और सभ्य व्यवहार की गारंटी दी जाएगी.” ट्रंप ने शुक्रवार को कहा था कि एक दिन पहले पुतिन के साथ हुई लंबी “सकारात्मक” चर्चा के बाद रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध समाप्त होने की “बहुत अच्छी संभावना” है. वहीं रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष, पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि यदि यूक्रेनी सैनिक “हथियार डालने से इनकार करते हैं, तो उन सभी को व्यवस्थित और निर्दयतापूर्वक खत्म कर दिया जाएगा.” ट्रंप का पोस्ट ट्रंपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में कहा, “कल रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हमारी बहुत अच्छी और उपयोगी चर्चा हुई, और इस बात की बहुत अच्छी संभावना है कि यह भयानक, खूनी युद्ध अंततः खत्म हो जाएगा.” उन्होंने पुतिन से “पूरी तरह से घिरे” यूक्रेनी सैनिकों की जान बख्शने का अनुरोध किया. सूत्रों के मुताबिक अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने भी गुरुवार रात मास्को में पुतिन के साथ लंबी बैठक की थी. हालांकि, ट्रुथ सोशल पोस्ट में ट्रंप ने ये नहीं बताया कि उनकी पुतिन ने सीधे बात हुई थी या नहीं. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि पुतिन ने विटकॉफ के माध्यम से ट्रंप को “संकेत” दिए थे. उन्होंने कहा कि विटकॉफ द्वारा ट्रंप को जानकारी दिए जाने के बाद रूस और अमेरिका अपने नेताओं के बीच फोन कॉल की व्यवस्था करेंगे. ट्रंपने कहा है कि वह चाहते हैं कि मॉस्को और कीव एक त्वरित युद्ध विराम पर सहमत हो जाएं ताकि संघर्ष को रोका जा सके, जिसके बारे में उन्होंने चेतावनी दी है कि यह तीसरे विश्व युद्ध में बदल सकता है। युद्ध में पहले ही दोनों पक्षों के कई लोग मारे जा चुके हैं. 30 दिनों के युद्ध विराम पर जेलेंस्की और पुतिन की सहमति ट्रंप ने इस सप्ताह राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात की थी जिसमें उन्होंने रूस और यूक्रेन के बीच 30 दिनों के युद्ध विराम का प्रस्ताव रखा था. इसके बाद पुतिन ने गुरुवार को कहा कि वह यूक्रेन में 30 दिन के युद्ध विराम के अमेरिकी प्रस्ताव से सैद्धांतिक रूप से सहमत हैं. वहीं यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने इस समझौते पर सहमति जताई थी. गुरुवार को क्रेमलिन ने रूस द्वारा प्रस्ताव को स्वीकार किए जाने की पुष्टि की, हालांकि पुतिन ने जोर देकर कहा कि प्रमुख विवरण अभी भी अनसुलझे हैं. पुतिन ने मॉस्को में कहा, “यह विचार अपने आप में सही है और हम निश्चित रूप से इसका समर्थन करते हैं. लेकिन कुछ मुद्दे हैं जिन पर हमें चर्चा करने की आवश्यकता है.” पुतिन ने शुक्रवार को अमेरिका के विशेष दूत के माध्यम से युद्ध विराम प्रस्ताव के बारे में ट्रंपको एक संदेश भी भेजा. वहीं ज़ेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन प्रस्तावित युद्धविराम के लिए तैयार है, उन्होंने इसे व्यापक शांति योजना विकसित करने का अवसर बताया.  उन्होंने कीव में मीडिया से बात करते हुए कहा, “मैं (युद्धविराम के बारे में) बहुत गंभीर हूं और मेरे लिए युद्ध को समाप्त करना महत्वपूर्ण है.”  

अमेरिका ने बनाया दबाव, युद्धविराम पर यूक्रेन ने जताई सहमति, ट्रंप बोले- पुतिन भी हो जाएंगे तैयार

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वाशिंगटन करीब तीन वर्षों से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध के खत्म होने के आसार बढ़ गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को यूक्रेन द्वारा रूस के साथ युद्धविराम पर सहमति जताने का स्वागत किया और आशा व्यक्त की कि पुतिन भी इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देंगे। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान दोनों पक्षों पर हो रही भारी संख्या में सैनिकों और नागरिकों की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए ट्रंप ने कहा कि यह युद्ध अब खत्म होना चाहिए और युद्धविराम बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “यूक्रेन ने युद्धविराम पर सहमति दे दी है। थोड़ी देर पहले इसे मंजूरी मिली थी। अब हमें रूस से संपर्क करना है। उम्मीद है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतीन भी इस पर सहमत होंगे। शहरों में धमाके हो रहे हैं और लोग मारे जा रहे हैं। हम चाहते हैं कि यह युद्ध खत्म हो। यह एक पूर्ण युद्धविराम होगा। यूक्रेन ने इस पर सहमति दे दी है और उम्मीद है कि रूस भी सहमत होगा। युद्धविराम बहुत महत्वपूर्ण है। यदि हम रूस को इस पर सहमत करवा सकें तो यह बहुत अच्छा होगा। यदि हम ऐसा नहीं कर पाते हैं तो हम इसके लिए प्रयास करते रहेंगे।” आपको बता दें कि यूक्रेन ने अमेरिकी प्रस्ताव को स्वीकार किया है, जिसमें 30 दिनों के युद्धविराम की बात की गई थी। जेलेंस्की ने रूस के साथ तुरंत बातचीत करने की भी सहमति दी थी। मंगलवार को यूक्रेनी अधिकारियों के साथ बैठक में ट्रंप के सलाहकारों ने और अधिक दबाव डाला और यूक्रेन ने युद्धविराम पर सहमति जताई। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा, “आज हमने एक प्रस्ताव रखा जिसे यूक्रेन ने स्वीकार किया है। यह युद्धविराम और तत्काल वार्ता की शुरुआत करेगा।” रुबियो ने सोशल मीडिया पर कहा कि यूक्रेन का युद्धविराम के लिए तैयार होना स्थायी शांति के करीब एक कदम था। जेलेंस्की को व्हाइट हाउस में फिर आमंत्रित किया गया: ट्रंप ट्रंप ने  कहा कि सऊदी अरब के जेद्दा में अमेरिका-यूक्रेन बैठक के बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की को व्हाइट हाउस में फिर से आमंत्रित किया गया है। जब ट्रंप से पत्रकारों ने पूछा कि क्या ज़ेलेंस्की को व्हाइट हाउस में वापस आमंत्रित किया जाएगा, तो उन्होंने कहा जरूर, बिल्कुल।

अब रूस जाने के लिए नहीं पड़ेगी वीजा की जरूरत, पुतिन जल्द करेंगे घोषणा

नई दिल्ली भारतीय पर्यटकों के लिए एक अच्छी खबर है. भारत के लोग जल्द ही बिना वीजा के रूस घूम सकते हैं. भारत और रूस के बीच 2025 में इसे लेकर एक सिस्टम विकसित होने की संभावना है. अब कुछ ही समय बाद भारतीयों को रूस जाने के लिए टूरिस्ट वीजा की आवश्यकता नहीं होगी. इससे पहले रूस ने भारतीयों के लिए अगस्त 2023 से ई-वीजा की शुरुआत की थी जिसकी प्रक्रिया पूरे होने में लगभग 4 दिन लगते हैं. हालांकि, अब नई वीजा-फ्री व्यवस्था से भारतीयों के लिए रूस की यात्रा और भी सरल हो जाएगी. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल रूस ने जितने ई-वीजा जारी किए, उसमें भारत टॉप पांच देशों में शामिल था. रूस ने भारतीयों को 9,500 ई-वीजा दिए. बिना वीजा के रूस जा सकेंगे भारतीय रूस और भारत के बीच द्विपक्षीय समझौते के तहत ग्रुप टूरिस्ट एक्सचेंज के लिए वीजा नियमों को आसान बनाने की प्रक्रिया जून 2023 में शुरू हुई थी. रूस के आर्थिक विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी, निकिता कोंद्रात्येव ने कहा, “भारत इस समझौते को अंतिम रूप देने के अंतिम चरण में है.” माना जा रहा है कि यह समझौता साल के अंत तक पूरा हो जाएगा, जिसके बाद भारतीय नागरिक बिना वीजा के रूस की यात्रा कर सकेंगे. रूस में भारतीय यात्रियों की बढ़ती संख्या हाल के वर्षों में रूस जाने वाले भारतीय यात्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी गई है. 2023 में, रूस ने भारतीय यात्रियों को 9,500 ई-वीजा जारी किए, जो कुल ई-वीजा का 6% था. 2024 की पहली छमाही में, 28,500 भारतीय यात्रियों ने मॉस्को का दौरा किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.5 गुना अधिक है. 2023 में, 60,000 से अधिक भारतीयों ने रूस की यात्रा की, जो 2022 की तुलना में 26% अधिक है. मॉस्को सिटी टूरिज्म कमेटी के चेयरमैन, एवगेनी कोज़लोव ने बताया, “2023 की पहली तिमाही में, भारत गैर-CIS देशों के व्यापार पर्यटकों में तीसरे स्थान पर था.” मॉस्को के अधिकारियों का मानना है कि भारत रूस के लिए एक प्राथमिक बाजार है, क्योंकि दोनों देशों के बीच मजबूत और ऐतिहासिक संबंध हैं. रूस और भारत के बीच गहरी ऐतिहासिक और कूटनीतिक मित्रता रही है. नई वीजा-फ्री नीति से न केवल पर्यटन बल्कि व्यापारिक संबंधों को भी बल मिलेगा. 58 देशों में भारतीयों की वीजा फ्री एंट्री वर्तमान में भारतीय पासपोर्टधारियों को 58 देशों में वीजा फ्री एंट्री का अधिकार हासिल है. हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2024 में भारत का पासपोर्ट 83वें स्थान पर है जिसकी मदद से भारतीय थाईलैंड, इंडोनेशिया, मालदीव, श्रीलंका , मोरिशियस और कतर जैसे ट्रैवल डेस्टिनेशन्स पर बिना वीजा के यात्रा कर सकते हैं.

रूस और भारत के गहराते रिश्तों के बीच भारतीयों के लिए एक अच्छी खबर, वीजा फ्री ट्रैवल की शुरुआत जल्द

मॉस्को रूस और भारत के गहराते रिश्तों के बीच भारतीयों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है. अब भारत के लोग जल्द ही बिना वीजा के रूस घूम सकते हैं. भारत और रूस के बीच 2025 में इसे लेकर एक सिस्टम विकसित होने की संभावना है. इससे पहले जून में ऐसी रिपोर्टें सामने आई थीं कि भारत और रूस ने वीजा फ्री ट्रैवल के लिए एक-दूसरे के वीजा प्रतिबंधों को कम करने के लिए द्विपक्षीय समझौते पर चर्चा की है. रूस ने भारतीयों के लिए अगस्त 2023 से ई-वीजा की शुरुआत की थी जिसकी प्रक्रिया पूरे होने में लगभग 4 दिन लगते हैं.  रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल रूस ने जितने ई-वीजा जारी किए, उसमें भारत शीर्ष पांच देशों में शामिल था. रूस ने भारतीयों को 9,500 ई-वीजा दिए. वर्तमान में भारत के नागरिकों को रूस में एंट्री करने, वहां रहने और बाहर निकलने के लिए रूसी दूतावास या फिर वाणिज्य दूतावास की तरफ से जारी वीजा लेना जरूरी होता है जो कि एक लंबी प्रक्रिया है. रिकॉर्ड संख्या में रूस जा रहे भारतीय ज्यादातर भारतीय बिजनेस या अपने काम के सिलसिले में रूस जाते हैं. 2023 में, रिकॉर्ड 60,000 से ज्यादा भारतीयों ने रूस का दौरा किया जो 2022 की तुलना में 26 प्रतिशत ज्यादा है. रूस अपने वीजा फ्री टूरिस्ट एक्सचेंज के तहत चीन और ईरान के यात्रियों को वीजा फ्री एंट्री दे रहा है. चीन और ईरान के साथ रूस का यह सहयोग सफल रहा है जिसे देखते हुए माना जा रहा है कि भारत के साथ भी ऐसा ही सिस्टम शुरू किया जाएगा. वर्तमान में भारतीय पासपोर्टधारियों को 62 देशों में वीजा फ्री एंट्री का अधिकार हासिल है. हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2024 में भारत का पासपोर्ट 82वें स्थान पर है जिसकी मदद से भारतीय इंडोनेशिया, मालदीव और थाईलैंड जैसे ट्रैवल डेस्टिनेशन्स पर बिना वीजा के यात्रा कर सकते हैं. हेनले पासपोर्ट इंडेक्स अंतरराष्ट्रीय वायु परिवहन प्राधिकरण (IATA) के डेटा के आधार पर जारी किया जाता है. इंडेक्स मानता है कि किसी देश का पासपोर्टधारी सभी बुनियादी एंट्री जरूरतों को पूरा करता है, अकेले यात्रा करने वाले वयस्क नागरिक है, और कम समय के प्रवास या घूमने या फिर बिजनेस के मकसद से एंट्री चाहता है. इस इंडेक्स में हालांकि, राजनयिक यात्रा, आपातकालीन या अस्थायी पासपोर्ट और ट्रांजिट स्टे शामिल नहीं है.  

पुतिन की भारत यात्रा की तारीखों की घोषणा जल्द ही की जाएगी

मॉस्को  रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जल्द भारत दौरे पर आ सकते हैं। राजनयिक सूत्रों ने बताया कि दोनों पक्ष इस यात्रा की संभावनाएं तलाश रहे हैं, लेकिन अभी इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस साल जुलाई में मॉस्को में जब पुतिन से मिले थे तो उन्हें भारत यात्रा के लिए आमंत्रित किया था। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा कि पुतिन की भारत यात्रा की तारीखों की घोषणा जल्द ही की जाएगी। पुतिन आखिरी बार भारत कब आए थे 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से पुतिन की यह पहली भारत यात्रा होगी। पिछली बार रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 6 दिसंबर, 2021 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 21वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए भारत का दौरा किया था। अभी तक, भारत ने आधिकारिक रूप से पुतिन की यात्रा पर मीडिया रिपोर्टों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। पीएम मोदी ने पिछले महीने किया था रूस का दौरा पुतिन की बहुप्रतीक्षित भारत यात्रा, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 22-23 अक्टूबर को रूस की यात्रा के कुछ महीनों बाद होगी। तब पीएम मोदी रूसी संघ की अध्यक्षता में कज़ान में आयोजित 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए रूस गए थे। प्रधानमंत्री मोदी ने इस साल जुलाई में मास्को का भी दौरा किया था, जो 2024 में देश की उनकी पहली यात्रा थी। यह यात्रा 22वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के मद्देनजर हुई थी। पुतिन ने विदेश यात्राएं सीमित क्यों कीं? रूसी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुतिन को यूक्रेन में कथित युद्ध अपराधों के लिए अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। रोम संविधि के तहत, न्यायालय की संस्थापक संधि, ICC के सदस्य उन संदिग्धों को हिरासत में लेने के लिए बाध्य हैं जिनके लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। हालांकि, भारत ने रोम संविधि पर हस्ताक्षर या अनुसमर्थन नहीं किया है।

यूक्रेन युद्ध के चलते रूस में जनसंख्या संकट और बढ़ा, ‘सेक्स मंत्रालय’ बना जन्म दर बढ़ाने के लिए रणनीति तैयार करना होगा

मॉस्को रूस में जनसंख्या घटने की गंभीर समस्या से निपटने के लिए एक बेहद अनोखे कदम पर विचार किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सहयोगी और रूसी संसद की फैमिली प्रोटेक्शन और बाल संरक्षण समिति की अध्यक्ष नीना ओस्तानीना एक ‘सेक्स मंत्रालय’ स्थापित करने के प्रस्ताव की समीक्षा कर रही हैं। इस मंत्रालय का उद्देश्य देश की जन्म दर बढ़ाने के लिए रणनीति तैयार करना होगा। यह कदम ऐसे समय पर उठाया जा रहा है जब यूक्रेन युद्ध के चलते देश में जनसंख्या संकट और बढ़ गया है। रूसी मैगजीन मोस्कविच के अनुसार, ग्लैवपीआर एजेंसी द्वारा पेश एक याचिका में ‘सेक्स मंत्रालय’ स्थापित करने का सुझाव दिया गया, जो जन्म दर से जुड़ी योजनाओं का नेतृत्व करेगा। मॉस्को की डिप्टी मेयर अनास्तासिया राकोवा ने जोर देकर कहा कि देश में जनसंख्या वृद्धि बेहद जरूरी है। राकोवा ने बताया कि मॉस्को में महिलाओं की प्रजनन क्षमता का परीक्षण करने के लिए एक विशेष तरीका अपनाया जा रहा है, जिससे महिलाओं को बच्चा पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। अजीबोगरीब प्रस्तावों की हो रही चर्चा जन्म दर बढ़ाने के लिए कई अजीबोगरीब प्रस्तावों पर चर्चा की जा रही है। इनमें से एक योजना के अनुसार, रात 10 बजे से सुबह 2 बजे तक इंटरनेट और बिजली बंद करने की बात हो रही है, ताकि लोग इन घंटों में अपने रिश्तों पर ध्यान दें और बच्चे पैदा करने की दिशा में आगे बढ़ें। इसके अलावा, प्रस्ताव में गृहिणियों को उनके घरेलू कामों के लिए वेतन देने की बात है, जो उनकी पेंशन में गिना जाएगा। इसके अलावा, पहली डेट के लिए सरकार 5,000 रूबल (लगभग 40 पाउंड) की आर्थिक सहायता भी प्रदान कर सकती है, ताकि जोड़े अपने रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित हो सकें। यही नहीं, सरकारी खर्च पर जोड़ों के लिए शादी की रात के होटल में ठहरने की सुविधा भी देने का प्रस्ताव है, जिसकी लागत लगभग 26,300 रूबल (लगभग 208 पाउंड) होगी। विभिन्न क्षेत्रों में भी लोगों को बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करने के अलग-अलग उपाय लागू किए जा रहे हैं। खबारोवस्क में, 18 से 23 साल की उम्र की महिला छात्रों को बच्चे पैदा करने पर 900 पाउंड तक की राशि दी जा रही है, जबकि चेल्याबिंस्क में पहली संतान के लिए यह राशि 8,500 पाउंड तक है। जनसंख्या बढ़ाने के लिए निजी जीवन की निगरानी मॉस्को में सरकारी अधिकारी महिलाओं के निजी जीवन की गहराई से जांच कर रहे हैं। महिला पब्लिक सेक्टर कर्मचारियों को उनकी यौन और प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े सवालों से भरे विस्तृत प्रश्नावली दिए गए हैं। इस प्रश्नावली में गहरे व्यक्तिगत सवाल पूछे गए हैं, जैसे कि: – आपने यौन सक्रियता कब शुरू की? – क्या आप कंडोम या हार्मोनल गर्भनिरोधक का उपयोग करती हैं? – क्या आपको संभोग के दौरान दर्द या रक्तस्राव का अनुभव होता है? – क्या आप बांझपन का सामना कर चुकी हैं या गर्भधारण हुआ है? अगर हां, तो कितनी बार? – आपके कितने बच्चे हैं, और क्या आप अगले साल में और बच्चे पैदा करने की योजना बना रही हैं? यहां तक कि जिन कर्मचारियों ने इन प्रश्नावली को खाली छोड़ दिया, उन्हें डॉक्टर से मिलने के लिए बुलाया गया, जहां उनसे ये सवाल प्रत्यक्ष रूप में पूछे गए। इन सभी योजनाओं और पहल के बावजूद, जनसंख्या वृद्धि के लिए इस प्रकार के कदम उठाए जाने से देश में एक अलग प्रकार का सामाजिक और सांस्कृतिक विमर्श शुरू हो गया है। क्या रूस में सेक्स मंत्रालय बनाकर जनसंख्या संकट का समाधान ढूंढा जा सकेगा? यह देखना अभी बाकी है, परंतु इतना तय है कि यह पहल पूरे विश्व में चर्चा का विषय बन चुकी है।

दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज विकास के साथ भारत वैश्विक महाशक्तियों की सूची में शामिल होने का हकदार: पुतिन

मॉस्को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर भारत की जमकर तारीफ की है। उन्होंने दोनों देशों के रिश्ते को ऐतिहासिक बताया। भारत की आजादी में सोवियत संघ की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर इस बात पर जोर दिया है कि भारत एक ‘प्राकृतिक सहयोगी’ और दशकों से भागीदार है। रूसी राज्य मीडिया ने बताया कि गुरुवार को सोची में वल्दाई चर्चा क्लब को संबोधित करते हुए पुतिन ने भारत को एक महान देश बताया और कहा कि मॉस्को और नई दिल्ली सभी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। पुतिन बोले, सभी दिशाओं में विकसित हो रहे संबंध पुतिन ने पूर्ण सत्र में कहा, हम भारत के साथ सभी दिशाओं में अपने संबंध विकसित कर रहे हैं। भारत एक महान देश है। यह बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक विकास के मामले में अग्रणी है, इसकी जीडीपी 7.4 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज कर रही है। समाचार एजेंसी ने पुतिन के हवाले से कहा, हमारे संबंध कहां और किस गति से विकसित होंगे, इसका हमारा दृष्टिकोण आज की वास्तविकताओं पर आधारित है। हमारे सहयोग की मात्रा साल दर साल बढ़ रही है। विश्वास के मामले में अद्वितीय संबंध बनाए पुतिन ने भारत की स्वतंत्रता की घोषणा में सोवियत संघ की भूमिका को याद किया, जिसने दोनों देशों के बीच गुणवत्ता और विश्वास के मामले में अद्वितीय संबंध बनाए। पुतिन ने कहा कि यह हमारे लिए सभी आयामों में द्विपक्षीय संबंधों को विकसित करने का आधार है। पुतिन ने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार कारोबार लगभग 60 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि अपनी डेढ़ अरब की आबादी, दुनिया की सभी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज विकास, प्राचीन संस्कृति और आगे विकास की बहुत अच्छी संभावनाओं के साथ भारत वैश्विक महाशक्तियों की सूची में शामिल होने का हकदार है। ब्रह्मोस का दिया उदाहरण पुतिन ने आगे कहा कि भारत और रूस के बीच सुरक्षा क्षेत्र और रक्षा क्षेत्र में संपर्क विकसित हो रहे हैं। देखें कि कितने प्रकार के रूसी सैन्य उपकरण भारतीय सशस्त्र बलों की सेवा में हैं। इस रिश्ते में काफी हद तक विश्वास है। हम सिर्फ भारत को अपने हथियार नहीं बेचते हैं; हम उन्हें संयुक्त रूप से डिजाइन करने के लिए संयुक्त अनुसंधान में लगे हुए हैं। उन्होंने ब्रह्मोस को भारत-रूस संयुक्त सहयोग का एक उदाहरण बताया। पुतिन ने कहा, ब्रह्मोस सिस्टम का उपयोग हवा और समुद्र में किया जाता है और यह साझेदारी कुछ ऐसी चीज है जिसके बारे में लोग जानते हैं और यह उच्च स्तर के विश्वास और हमारी साझेदारी के उच्च स्तर की गवाही देता है जो भविष्य में भी जारी रहेगी। ब्रह्मोस का नाम भारत और रूस की ब्रह्मपुत्र और मोस्कवा नदियों के नाम पर रखा गया है। इसका गठन भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूस के एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया के बीच एक संयुक्त उद्यम के रूप में किया गया था। इस बीच, गुरुवार के कार्यक्रम के दौरान पुतिन ने ब्रिक्स समूह की संभावनाओं पर भी बात की, जिसके सदस्य रूस और भारत दोनों हैं। रूसी नेता ने कहा कि यह देशों और लोगों के बीच संबंधों की आधुनिक, मुक्त और गैर-ब्लॉक प्रकृति का एक प्रोटोटाइप है। इस साल अक्टूबर में कजान में आयोजित 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूस ने एक प्रतीकात्मक ब्रिक्स बैंकनोट का अनावरण भी किया था।

रूस ने शुरू कर दी न्यूक्लियर हमले की प्रैक्टिस, ऐक्शन से थर्राई दुनिया

मॉस्को बीते दो साल से भी ज्यादा वक्त से रूस-यूक्रेन मोर्चे पर हैं। रूस इस बात पर आमादा है कि वह यूक्रेन को तबाह करके ही मानेगा, वहीं यूक्रेन है कि रूस के सामने घुटने टेकने को तैयार नहीं है। अब यह युद्ध सबसे कठिन दौर में प्रवेश कर गया है क्योंकि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने परमाणु बलों को विशेष अभ्यास शुरू करने का आदेश दिया। यह दो हफ्तों में दूसरी बार है जब पुतिन ने ऐसा सैन्य अभ्यास शुरू किया है। पश्चिमी देशों के नेतृत्व वाली नाटो गठबंधन अब भी इस बढ़ते तनाव से निपटने के तरीकों को लेकर अनिश्चित हैं। तनाव तब और बढ़ा जब अमेरिका सहित पश्चिमी देशों ने यूक्रेन को लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलें उपलब्ध कराने की योजना बनाई ताकि वह रूस के अंदर गहरे क्षेत्र तक निशाना बना सके। रूस ने पश्चिम को साफ तौर पर चेतावनी दी है कि अगर यूक्रेन ने पश्चिमी समर्थन के साथ इस तरह का कदम उठाया, तो वह अपनी रक्षा के लिए परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने पर विचार करेगा। क्रेमलिन ने अपनी परमाणु नीति को अपडेट किया है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि पुतिन की स्वीकृति से यह नीति गैर-परमाणु देशों के खिलाफ भी लागू हो सकती है। परमाणु अभ्यास की शुरुआत करते हुए पुतिन ने कहा, “हम परमाणु हथियारों के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए अधिकारियों की कार्रवाई का अभ्यास करेंगे और इसके अंतर्गत बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों का जरूरी इस्तेमाल करेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि परमाणु हथियारों का उपयोग अत्यंत असाधारण स्थिति में ही किया जाएगा, लेकिन इन्हें हमेशा तत्परता में रखना आवश्यक है। पुतिन ने यह भी स्पष्ट किया, “हम एक नई हथियार दौड़ में शामिल नहीं होना चाहते, लेकिन हम अपनी परमाणु ताकत को उचित स्तर पर बनाए रखेंगे।” नाटो ने रूस पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें उत्तर कोरिया द्वारा रूस को यूक्रेन में लड़ने के लिए सैनिक भेजने का मुद्दा शामिल है। पेंटागन ने कहा है कि उत्तर कोरिया ने रूस को कम से कम 10,000 सैनिक भेजे हैं, जबकि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की का दावा है कि यह संख्या 12,000 से अधिक हो सकती है। पेंटागन की डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी सबरीना सिंह ने कहा, “हमें विश्वास है कि डीपीआरके ने कुल मिलाकर लगभग 10,000 सैनिक रूस के पूर्वी क्षेत्र में प्रशिक्षण के लिए भेजे हैं। इनमें से कुछ सैनिक यूक्रेन के करीब पहुंच गए हैं और हमें चिंता है कि रूस इन सैनिकों का उपयोग यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में करेगा।” पुतिन ने अपने देश की रक्षा के मुद्दे पर स्पष्ट करते हुए कहा कि यह केवल रूस का आंतरिक मामला है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर यूक्रेन नाटो में शामिल होने का निर्णय लेता है, तो रूस भी अपनी सुरक्षा को लेकर जो जरूरी होगा, वह करेगा। रूसी सेना ने अपने हालिया अभ्यास के दौरान टीवर क्षेत्र में भी प्रशिक्षण किया, जो मास्को के उत्तर-पश्चिम में स्थित है। इस अभ्यास में यार्स इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) जैसे उपकरणों का भी इस्तेमाल किया गया, जो अमेरिका के हर कोने तक प्रहार करने में सक्षम हैं। रूस और अमेरिका दुनिया के कुल परमाणु हथियारों के 88% का नियंत्रण रखते हैं। पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पहले भी यह चेतावनी दी थी कि यदि रूस और नाटो में सीधा टकराव हुआ, तो यह तीसरे विश्व युद्ध का कारण बन सकता है। रिपब्लिकन राष्ट्रपति उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प ने भी परमाणु युद्ध के जोखिम को लेकर चेतावनी दी है। पुतिन ने कहा, “बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों और नए बाहरी खतरों के बीच, हमारे पास तैयार और आधुनिक रणनीतिक बलों का होना महत्वपूर्ण है।” उन्होंने बताया कि रूस नए स्थिर और मोबाइल-आधारित मिसाइल सिस्टम की ओर बढ़ रहा है, जिनमें प्रक्षेपण की तैयारी का समय कम है और ये मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भी मात दे सकते हैं। वहीं पेंटागन ने स्पष्ट किया है कि अगर उत्तर कोरिया रूस का समर्थन करने के लिए सैनिक भेजता है, तो अमेरिका यूक्रेन के हथियारों के उपयोग पर कोई नई सीमाएं नहीं लगाएगा।

रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने हाथरस के दुखद हादसे पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मोदी को शोक संदेश भेजा

नई दिल्ली उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुई दुखद घटना से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी आहत हैं। उन्होंने इस दुखद हादसे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शोक संदेश भेजा है। अपने संदेश में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने लिखा, “उत्तर प्रदेश में दुखद दुर्घटना पर हमारी गंभीर संवेदनाएं है। मृतकों के निकट और प्रियजनों के प्रति हमारी सहानुभूति और समर्थन है। साथ ही हम सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं।” उत्तर प्रदेश में हाथरस जिले के सिकंदराराऊ क्षेत्र में मंगलवार को एक सत्संग कार्यक्रम के दौरान भगदड़ के शिकार मृतकों की संख्या बढ़ कर 121 हो गई है जबकि 35 का इलाज हाथरस,आगरा और अलीगढ़ के अस्पतालों में चल रहा है। मृतकों में अभी 19 की पहचान होनी बाकी है जबकि 28 घायलों की पहचान की जा चुकी है। मृतकों में 114 महिलायें शामिल हैं। मुख्यमंत्री के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह और पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार मंगलवार रात ही हाथरस आकर राहत एवं बचाव कार्य का निर्देशन करते रहे वहीं योगी सरकार के तीन मंत्री लक्ष्मी नारायण, संदीप सिंह, असीम अरुण भी मौके पर डटे हुये हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को हाथरस पहुंच कर अधिकारियों के साथ बैठक की और हालात की समीक्षा की। उन्होने अस्पताल जाकर घायलों का हाल जाना और डाक्टरों को उचित दिशा निर्देश दिये। इस बीच सूरजपाल सिंह उर्फ नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा के सेवादार एवं सत्संग कार्यक्रम के आयोजक देव प्रकाश माथुर और अज्ञात लोगों के खिलाफ सिकंदराराऊ थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 105, 110, 126, 223, 238 के तहत एफआईआर दर्ज करायी गयी है। एफआईआर के अनुसार सत्संग कार्यक्रम के लिये जिला प्रशासन से 80 हजार लोगों के शामिल होने की अनुमति ली गयी थी जबकि कार्यक्रम स्थल में करीब ढाई लाख श्रद्धालु पहुंचे थे। कार्यक्रम के समापन के बाद जब भोले बाबा का काफिला बाहर निकल रहा था, उस समय उनके करीब पहुंचने और चरण रज लेने की आपाधापी मच गयी। इस बीच बाबा के साथ चल रहे उनके निजी सुरक्षा कर्मियों ने भीड़ के साथ धक्का मुक्की की जो हादसे का सबब बना। एफआईआर में बाबा के सेवादारों पर साक्ष्य छिपाने का भी आरोप लगाया गया है कि भगदड़ के दौरान गिरे लोगों का सामान और जूते चप्पल दूर खेतों में फेंक दिये गये। उधर, हाथरस के उपजिलाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एटा रोड पर स्थित मुगलगढी के ग्राम फुलरई में श्री नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा के प्रवचन कार्यक्रम को सुनने के लिये दो लाख से अधिक लोगों की भीड़ पांडाल में मौजूद थी। सत्संग कार्यक्रम करीब पौने दो बजे समाप्त हुआ जिसके बाद भोले बाबा पांडाल से बाहर निकले, इस बीच उनके चरण स्पर्श करने और चरण रज लेने के लिये भीड़ उनके वाहन की तरफ दौड़ पड़ी। जीटी रोड और डिवाइडर की तरफ भी लोग खड़े थे जो डिवाइडर पार कर वाहन की तरफ भागे। बाबा के निजी सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को वाहन के पास जाने से रोकने के लिये धक्का मुक्की की। इससे कई महिलायें गिर पड़ी और भीड़ उनके ऊपर से गुजर गयी। उमस भरी गर्मी के बीच सांस लेने के लिये कुछ लोग खेतों की तरफ भागे मगर ढलान के कारण वे गिरते चले गये। रिपोर्ट के अनुसार पुलिस प्रशासन ने घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया जहां चिकित्सकों ने 89 को मृत घोषित कर दिया जबकि अन्य की उपचार के दौरान मृत्यु हो गयी। घायलों का इलाज हाथरस के अलावा अलीगढ़,आगरा और एटा के अस्पतालों में चल रहा है। हादसे के कारण की जांच के लिये अपर पुलिस महानिदेशक आगरा और अलीगढ के मंडलायुक्त की अध्यक्षता में जांच समिति का गठन किया है। समिति आज मुख्यमंत्री को अपनी रिपोर्ट प्रेषित करेगी। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को दो दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि जारी करने के निर्देश दिये हैं। केंद्र सरकार की ओर से भी हताहतों को इतनी ही सहायता दी गयी है। स्थानीय आयोजकों ने ‘भोले बाबा’ का एक कार्यक्रम आयोजित किया था। कार्यक्रम के बाद, जब सत्संग के प्रवचनकर्ता मंच से नीचे आ रहे थे, तभी अचानक भक्तों की भीड़ उनकी ओर दौड़ने लगी उन्हें छूने के लिए और जब ‘सेवादारों’ ने उन्हें रोका, तो वहां यह हादसा हो गया। मंत्री चौधरी तीनों मौके पर हैं। हाथरस के जिलाधिकारी आशीष कुमार पटेल ने पत्रकारों को बताया कि सिकंदराराऊ तहसील में मुगलगढ़ी नेशनल हाइवे पर फुलरई गांव में आज एक धार्मिक आयोजन के समापन पर उमस के बीच बाहर निकलने की जल्दी में भगदड़ मच गयी जिससे कई हताहत हुये है। उन्होने कहा कि यह एक निजी कार्यक्रम था जिसकी अनुमति एसडीएम से ली गयी थी और कार्यक्रम के मद्देनजर सभी संभव इंतजाम किये गये थे।  

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