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झारखंड के ‘प्रतिबिंब’ एप से साइबर अपराध पर बड़ी सफलता, 1100 अपराधी गिरफ्तार

Big success on cyber crime through Jharkhand's 'Pratibimba' app, 1100 criminals arrested

Big success on cyber crime through Jharkhand’s ‘Pratibimba’ app, 1100 criminals arrested रमेश अग्रवालरांची ! झारखंड पुलिस द्वारा विकसित ‘प्रतिबिंब’ एप ने देशभर में साइबर अपराध की रोकथाम में बड़ी सफलता हासिल की है। पिछले दस महीनों में इस एप की मदद से 1100 से अधिक साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। प्रतिदिन लगभग 5000 लोकेशनों की पहचान की जा रही है, जिससे अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखने में काफी मदद मिल रही है। पिछले हफ्ते, नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह ने झारखंड पुलिस के डीजीपी अनुराग गुप्ता और एप के डेवलपर गुंजन कुमार को इस एप के लिए विशेष सम्मान से नवाजा। यह एप साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस की कारगर पहल साबित हो रहा है और इससे कई अपराधों को रोकने में मदद मिली है। प्रतिबिंब एप के जरिए पुलिस को अपराधियों की लोकेशन और उनकी गतिविधियों की जानकारी मिल रही है, जिससे साइबर अपराधों की जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी में तेजी आई है। झारखंड पुलिस की यह पहल देशभर में साइबर सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है। एप के सफल उपयोग से यह साबित होता है कि तकनीक का सही उपयोग पुलिसिंग में बड़ा बदलाव ला सकता है और अपराधियों पर नियंत्रण करने में मददगार साबित हो सकता है।।

झारखंड के आदिवासी ‘हो’ समाज को मिल सकती है बड़ी खुशखबरी, गृहमंत्री ने दिया आश्वासन

Tribal 'Ho' community of Jharkhand can get great news, Home Minister assured

Tribal ‘Ho’ community of Jharkhand can get great news, Home Minister assured रमेश अग्रवालरांची ! झारखंड और अन्य राज्यों में बसे आदिवासी ‘हो’ समाज के लिए केंद्र सरकार से एक बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। ‘हो’ समाज के लोग लंबे समय से अपनी भाषा, वारंग क्षिति लिपि, को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग कर रहे हैं। इस संदर्भ में, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक प्रतिनिधिमंडल के साथ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। मुख्यमंत्री हिमंता ने इस मुलाकात की जानकारी अपने सोशल मीडिया हैंडल पर भी साझा की। उन्होंने कहा कि “हो भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा और अखिल भारतीय हो भाषा एक्शन कमेटी के प्रतिनिधिमंडल के साथ गृहमंत्री से मुलाकात की। गृहमंत्री ने उनकी मांगों को गंभीरता से सुना और इस पर विचार करने का आश्वासन दिया।” गृहमंत्री अमित शाह ने यह भी कहा कि मोदी सरकार देश के हर समाज की संस्कृति और भाषा को संरक्षित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस बैठक के बाद ‘हो’ समाज के लोगों में उम्मीद जगी है कि जल्द ही उनकी भाषा को आधिकारिक मान्यता मिल सकती है। गौरतलब है कि झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम में ‘हो’ समाज के लोग बड़ी संख्या में निवास करते हैं, और लंबे समय से अपनी भाषा के संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। हिमंता बिस्वा सरमा, जो झारखंड चुनाव के सह प्रभारी हैं, इन दिनों झारखंड में भी सक्रिय हैं। उन्होंने हाल ही में चंपाई सोरेन को भाजपा में शामिल कराने में अहम भूमिका निभाई थी। इस खबर के बाद ‘हो’ समाज में उम्मीद की लहर दौड़ गई है, और सभी की निगाहें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं

केंद्रीय रेशम बोर्ड ने झारखंड के कुरजुली गांव को बनाया टसर कीट उत्पादन का प्रमुख केंद्र

Central Silk Board made Kurjuli village of Jharkhand the main center of tussar moth production.

Central Silk Board made Kurjuli village of Jharkhand the main center of tussar moth production. रांची, रमेश अग्रवाल ! पश्चिमी सिंहभूम के पोड़ाहाट वन क्षेत्र में स्थित झारखंड का कुरजुली गांव, अब टसर सिल्क कीट उत्पादन के लिए देशभर में पहचान बना चुका है। हालांकि गांव में पक्की सड़कों और बिजली जैसी सुविधाओं का अभाव है, लेकिन 300 घरों वाले इस गांव ने आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। चार साल के भीतर, यहां के सभी परिवार टसर कीट पालन से अपनी जीविका चला रहे हैं और रोजगार के लिए बाहर गए लोग वापस लौट चुके हैं। इस बदलाव के चलते न सिर्फ कुरजुली, बल्कि आसपास के 10 गांवों में भी पलायन 99% तक रुक गया है। 2019-2020 में शुरू हुई थी पहलकेंद्रीय रेशम बोर्ड और वस्त्र मंत्रालय की पहल पर 2019-2020 में गांव के 136 ग्रामीणों ने व्यावसायिक रूप से टसर सिल्क कीट का उत्पादन शुरू किया था। यह गांव अब देश का सबसे बेहतर, उच्च गुणवत्ता और रोगमुक्त टसर कीट का उत्पादन कर रहा है। यहां से उत्पादित कीटों को केंद्रीय रेशम बोर्ड अनुसंधान, रांची और अन्य प्रमुख टसर उत्पादन केंद्रों में भेजा जाता है, जिनसे रेशम के वस्त्र तैयार किए जाते हैं। वस्त्र मंत्रालय ने इस गांव को देश के एकमात्र टसर कीट उत्पादक के रूप में संरक्षित किया है। पहले यहां परंपरागत रूप से टसर सिल्क कोकून की खेती होती थी। गांव के हर परिवार का मुख्य व्यवसाय टसर सिल्क कीट पालनगांव के हर परिवार ने टसर सिल्क कीट पालन को अपना मुख्य व्यवसाय बना लिया है। वैज्ञानिकों और ग्रामीणों के बीच संवाद का परिणाम यह हुआ है कि आज हर परिवार अच्छी आय अर्जित कर रहा है। केंद्रीय रेशम बोर्ड के निदेशक, डॉ. एनबी चौधरी ने इस परियोजना को एक बड़ी सफलता के रूप में देखा है। देश का एकमात्र टसर कीट प्रजनन केंद्रकुरजुली में देश का एकमात्र पी-4 टसर प्रजनन केंद्र भी स्थापित किया गया है। इस क्षेत्र में सखुआ और आसन के पेड़ों की भरमार है, जो रेशम कीट पालन के लिए आदर्श माने जाते हैं। यहां के पर्यावरण की अनुकूलता के कारण कुरजुली अब टसर कीट प्रजनन के क्षेत्र में अग्रणी बन चुका है। कुरजुली बना आत्मनिर्भरता की मिसालपिछले चार सालों में कुरजुली के प्रत्येक परिवार की वार्षिक आय ₹1.25 लाख से अधिक हो गई है। एक समय मजदूरी करने वाले ग्रामीण, अब स्वरोजगार से अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, पिछले साल मछुवा पूर्ति नामक ग्रामीण ने ₹1.31 लाख की वार्षिक आय अर्जित की। वहीं, महावीर हाईबुरु ने बताया कि अब कोई भी शहरों की ओर पलायन नहीं कर रहा है, क्योंकि गांव में ही उन्हें स्थायी रोजगार मिल रहा है। कुरजुली गांव की यह सफलता, आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो अन्य गांवों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है।

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