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भोपाल रेल मंडल ने दो माह में यात्री यातायात से 160 करोड़ 25 लाख रुपए का ऑरिजनेटिंग राजस्व प्राप्त किया

भोपाल  भोपाल मंडल रेल द्वारा यात्री सेवाओं के सतत विस्तार एवं संचालन में दक्षता के चलते वित्तीय वर्ष 2025-26 के प्रारंभिक दो माह अप्रैल एवं मई 2025 के दौरान उल्लेखनीय यात्री राजस्व अर्जित किया गया है। कुल 160 करोड़ 25 लाख रुपये का ऑरिजनेटिंग राजस्व इस अवधि में मंडल ने आरक्षित एवं अनारक्षित श्रेणियों के 70 लाख 59 हजार यात्रियों के माध्यम से कुल 160 करोड़ 25 लाख रुपये का ऑरिजनेटिंग राजस्व प्राप्त किया है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया ने बताया कि भोपाल रेल मंडल द्वारा यात्रियों की सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए कई योजनाओं को अमल में लाया है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। यात्रियों की बढ़ती संख्या और राजस्व वृद्धि, मंडल की योजनाबद्ध रणनीतियों का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि भोपाल रेल मंडल में यात्री यातायात बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों में भीड़भाड़ के दौरान यात्रियों की सुविधा के लिए विशेष ट्रेनों का संचालन, अधिक मांग वाली ट्रेनों की संचालन अवधि का विस्तार, ट्रेनों में अतिरिक्त कोच लगाकर प्रतीक्षा सूची को कम करने की पहल, चयनित स्टेशनों पर मिलने वाले प्रायोगिक ठहराव की अवधि का विस्तार और अधोसंरचना सुधार कार्यों की गति बढ़ाकर गाड़ियों की रफ्तार में वृद्धि एवं समयपालन में सुधार शामिल हैं। भोपाल मंडल में यात्री यातायात बढ़ाने हेतु किए गए प्रमुख प्रयास भोपाल मण्डल में यात्री सुविधाओ को देखते हुए इन सुविधाओं में विस्तार किया गया है, जिसमें भीड़भाड़ के दौरान यात्रियों की सुविधा के लिए विशेष ट्रेनों का संचालन, अधिक मांग वाली ट्रेनों की संचालन अवधि का विस्तार, ट्रेनों में अतिरिक्त कोच लगाकर प्रतीक्षा सूची को कम करने की पहल, चयनित स्टेशनों पर मिलने वाले प्रायोगिक ठहराव की अवधि का विस्तार, अधोसंरचना सुधार कार्यों की गति बढ़ाकर गाड़ियों की रफ्तार में वृद्धि एवं समयपालन में सुधार किया गया है।  भोपाल मंडल रेल प्रशासन द्वारा यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने एवं राजस्व में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित करने हेतु भविष्य में भी इसी प्रकार प्रयास जारी रहेंगे।  

इंदौर-धार रेल लाइन का काम तेज, इस साल के अंत तक इंदौर से धार तक ट्रेन चलाई जाएगी

इंदौर इंदौर शहर का डेड एंड खत्म करने के लिए इंदौर-दाहोद रेल लाइन का काम तेजी से चल रहा है। रेलवे ने इस प्रोजेक्ट के इंदौर-धार रेल लाइन का काम तेज कर दिया है। पहले इस साल के अंत तक इंदौर से धार तक ट्रेन चलाई जाएगी। इस क्षेत्र में आज तक ट्रेन नहीं पहुंची है। पीथमपुर, सागौर, गुणावद, टीही में पटरियां बिछाने, स्टेशनों और ब्रिजों का काम तेजी से चल रहा है। सालों से अटका है प्रोजेक्ट 204.76 किमी में इंदौर-दाहोद रेल लाइन प्रोजेक्ट वर्षों से अटका है। प्रोजेक्ट के लिए 1873.10 करोड़ रुपए मिले हैं। सीपीआरओ विनीत अभिषेक ने बताया कि इंदौर-धार तक करीब 75 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। धार लाइन से इंदौर का दाहोद, छोटा उदयपुर के जरिये मुंबई-गुजरात से सीधा जुड़ाव होगा। रतलाम रेल मंडल के पीआरओ खेमराज मीना ने बताया कि इस प्रोजेक्ट की सबसे महत्वपूर्ण टीही टनल का काम अंतिम दौर में है। धार तक 21 ब्रिज बनने हैं, जिनमें से 19 का काम पूरा हो गया है। धार का स्टेशन मांडू के जहाज महल की प्रतिकृति में बनाया जा रहा है। इन रूटों पर चल रहा काम     इंदौर से टीही : 21 किमी-राऊ से धार के लिए रेल लाइन जानी है। राऊ से टीही तक 21 किमी ट्रैक बना है। टीही तक मालगाड़ियों का संचालन जारी है।     टीही से पीथमपुर : 8.29 किमी-इस हिस्से की लाइन टीही से शुरु होती है। टीही से पीथमपुर तक पटरियां बिछ चुकी हैं। राऊ से ट्रैक और पटरियों के बीच टनल का काम अंतिम दौर में है।     पीथमपुर से सागौर : 9.12 किमी-पीथमपुर से सागौर के बीच पटरियां बिछ गई हैं। पीथमपुर में स्टेशन की फिनिशिंग बाकी है। भूमि अधिग्रहण के कारण कुछ काम बाद में होगा।     सागौर से गुणावद : 15.14 किमी-4 किमी के हिस्से में ट्रैक डल गया है। बाकी में अर्थ वर्क का काम हो चुका है। पटरियां बिछाई जानी हैं। दो ब्रिज का काम शेष है, बाकी काम हो गए हैं। स्टेशन का काम अंतिम दौर में है।     गुणावद से धार: 14.02 किमी-9.8 किमी तक पटरियां डाली जा चुकी हैं। 2 ब्रिज का काम चल रहा है। धार में स्टेशन का स्ट्रक्चर खड़ा हो गया है। अर्थ वर्क के बाद पटरियां डाली जाएंगी। यहां स्टेशन मांडू के जहाज महल की तर्ज पर बनाया जा रहा है। धार से आगे तिरला तक अर्थ वर्क चल रहा है।

भोपाल मंडल में आयोजित रेल सेवा पुरस्कार 2024 समारोह में 37 उत्कृष्ट रेलकर्मियों का हुआ सम्मान

भोपाल मंडल में आयोजित रेल सेवा पुरस्कार 2024 समारोह में 37 उत्कृष्ट रेलकर्मियों का हुआ सम्मान 13 स्टेशनों एवं डिपों को भी प्रदान की गई ‘श्रेष्ठ कार्य निष्पादन शील्ड” भोपाल मंडल रेल प्रबंधक श्री देवाशीष त्रिपाठी की अध्यक्षता में दिनांक 06 जून 2025 को न्यू नर्मदा क्लब, सभागार परिसर में “रेल सेवा पुरस्कार 2024” वितरण समारोह का आयोजन सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ गरिमामयी वातावरण में सम्पन्न हुआ। समारोह में भोपाल मंडल के विभिन्न विभागों के 37 समर्पित रेलकर्मियों को उनके उत्कृष्ट कार्य प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। इसके साथ ही , 13 स्टेशनों एवं डिपों को ‘श्रेष्ठ कार्य निष्पादन शील्ड’ से भी सम्मानित किया गया वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया ने जानकारी देते हुए बताया कि यह आयोजन रेलवे कर्मियों की सेवा निष्ठा एवं कार्य गुणवत्ता को प्रोत्साहित करने हेतु प्रतिवर्ष किया जाता है। इस अवसर पर रेल सेवाओं की उत्कृष्टता में योगदान देने वाले कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र एवं प्रतीक चिह्न प्रदान किए गए। इस वर्ष जिन विभागों के कर्मचारियों को सम्मानित किया गया, उनमें इंजीनियरिंग विभाग से 07, यांत्रिक डीजल शेड इटारसी से 02, यांत्रिक कैरिज वेगन विभाग से 04, कार्मिक विभाग से 03, परिचालन विभाग से 01, कर्षण परिचालन से 03, विद्युत सामान्य से 02, विद्युत टीआरएस से 03, विद्युत टीआरडी से 02, चिकित्सा विभाग से 01, लेखा विभाग से 01, सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग से 02, आरपीएफ/सुरक्षा विभाग से 01, सामान्य प्रशासन से 02, राजभाषा विभाग से 01, संरक्षा विभाग से 01 तथा रेलवे स्कूल इटारसी से 01 कर्मचारी शामिल हैं। इस प्रकार कुल 37 रेलकर्मियों को रेल सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, 12 स्टेशनों एवं डिपों को ‘श्रेष्ठ कार्य निष्पादन शील्ड’ से भी सम्मानित किया गया, जो निम्नानुसार हैं — 1.    राजभाषा हिंदी शील्ड – वाणिज्य विभाग कार्यालय,भोपाल 2.राजभाषा हिंदी शील्ड- भोपाल एवं भोपाल स्टेशन उपसमिति 3.    उत्तम स्वच्छ स्टेशन – मथैला स्टेशन (परिचालन विभाग) 4.    सर्वोत्तम इंजीनियरिंग डिपो – शिवपुरी डिपो 5.    श्रेष्ठ रोलिंग स्टॉक डिपो – टीआरएस, इटारसी डिपो (यांत्रिक/विद्युत‌ विभाग) 6.    एआरटी/एआरएमई/स्पॉट रेस्पॉन्स हेतु श्रेष्ठ इकाई – गुना स्टेशन (यांत्रिक विभाग) 7.    रेल परिसर की श्रेष्ठ कालोनी रखरखाव इकाई – हबीबगंज रेलवे कॉलोनी(इंजीनियरिंग विभाग) 8.    रोडसाइड स्टेशनों की श्रेष्ठ कालोनी – पचौर स्टेशन (इंजीनियरिंग विभाग) 9.    सर्वोत्तम टीआरडी डिपो – औबेदुल्लागंज डिपो 10.    ऊर्जा संरक्षण में सर्वश्रेष्ठ – गुना डिपो 11.    सर्वोत्तम रनिंग रूम – 18 बंगला रनिंग रूम, इटारसी(टीआरओ विभाग) 12.    सर्वश्रेष्ठ दूरसंचार डिपो – हरदा डिपो 13.    सर्वश्रेष्ठ विद्युत डिपो – बीना डिपो इस अवसर पर मंडल रेल प्रबंधक श्री देवाशीष त्रिपाठी ,महिला कल्याण संगठन की अध्यक्षा श्रीमती गुंजन त्रिपाठी, वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी श्री विजय सिंह ,वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया ,सभी शाखा अधिकारी सहित अन्य अधिकारी, यूनियन पदाधिकारी,पुरस्कार प्राप्त करने वाले रेलकर्मी एवं बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित थे।

कोरोना के बाद सब कुछ एकदम से ठहर गया, कोहदाड़ रेलवे स्टेशन पर 5 सालों से नहीं रुक रही ट्रेन

खंडवा जिले का एक ऐसा रेलवे स्टेशन जो सालों से खामोश पड़ा है. यहां अब एक भी ट्रेन नहीं रुकती है, कई सालों से स्टेशन पर न कदमों की आहट सुनाई देती है और न बच्चों की हंसी. अब वो बुजुर्ग भी नजर नहीं आते हैं जो कभी स्टेशन की बेंच पर बैठकर चाय की चुस्कियां लिया करते थे. सैकड़ों लोगों की जिंदगी हो रही प्रभावित खंडवा शहर से कुछ ही दूर पर कोहदाड़ रेलवे स्टेशन मौजूद है. जहां कोरोना के बाद सब कुछ एकदम से ठहर सा गया है. इससे पहले स्टेशन गुलजार था. कटनी-भुसावल जाने वाली पैसेंजर गाड़ी में सैकड़ों की संख्या में लोग सफर करते थे. किसान अपनी फसल लेकर बेचने जाते थे, तो वहीं छात्र शहर की ओर पढ़ाई करने और युवा नौकरी की तलाश में निकलते थे. खंडहर बना रेलवे स्टेशन प्लेटफॉर्म पर बिछी पटरी से सिर्फ रेलगाड़ी नहीं, बल्कि ग्रामीणों के सपने गुजरते थे. लेकिन, आज कोहदाड़ रेलवे स्टेशन खंडहर में तब्दील होता जा रहा है. यहां रुकने वाली कटनी-भुसावल पैसेंजर ट्रेन को एक्सप्रेस कर दिया गया है, जिसके चलते अब नहीं रुकती है. हालांकि, दूसरी पैसेंजर ट्रेन भी लगभग 5 सालों से कोहदाड़ रेलवे स्टेशन पर नहीं रुक रही है. कई मायनों में खास है कोहदाड़ स्टेशन टाकलीकला निवासी रामनारायण दशोरे ने कहा, ” कोहदाड़ स्टेशन बहुत पुराना है. स्टेशन के पास नदी है. उस पर बने ब्रिज से ट्रेन अब भी गुजरती है. साल 1960-61 में जब भारी जल संकट था. पीने के लिए पानी नहीं था. उस समय कोयले से ट्रेन चला करती थी. तब कोहदाड़ स्टेशन ही था जिसने रेलवे को पानी पिलाया था.” कोहदाड़ स्टेशन के करीब रहने वाले लतीफ खान ने कहा, ” ट्रेन से ग्रामीणों के सब्जी का रोजगार जुड़ा हुआ था. नेपानगर में सप्ताह में दो दिन बाजार लगती है, यहां ग्रामीण ट्रेन से जाते थे और सब्जी बेचकर शाम तक लौट जाते थे. खंडवा शहर में सब्जी बेचने और खरीदारी करने के लिए ट्रेन मात्र एक सहारा थी. ट्रेन बंद होने के चलते लोगों का रोजगार ठप हो गया.”

इंदौर-बुधनी रेल प्रोजेक्ट में 38 गांवों की 522 हेक्टेयर जमीन अधिगृहीत; 218 करोड़ का मुआवजा दिया

बुधनी किसानों की जमीन पर इंदौर-बुधनी रेल परियोजना अटकी हुई है। बुधनी रेलवे परियोजना साल 2024 में पूरी हो जानी थी, लेकिन भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के चलते यह परियोजना वर्ष 2025 में भी पूरी होने की उम्मीद नहीं है। जमीन का चार गुना मुआवजा दिये जाने की मांग को लेकर लगातार किसान इस परियोजना को लेकर विरोध करते चले आ रहे हैं। जिससे परियोजना में देरी हो रही है। इसी क्रम में बुधवार को रेहटी क्षेत्र के गांव मलाजपुर में प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान 11 हैक्टेयर कृषि भूमि का कब्जा प्रशासन ने किसानों से लेकर रेलवे विभाग को सौंपा। इस दौरान किसानों ने जमकर विरोध दर्ज कराया, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने एक नहीं सुनी और किसानों की जमीन पर बोई मूंग फसल पर जेसीबी चलाकर जमीन से कब्जा छुड़ाया। इस मामले में किसानों का कहना था कि प्रशासन की हठधर्मिता के चलते किसानों पर दोहरी मार पड़ी है। कृषि भूमि का बिना मुआवजा दिए ही जमीन से कब्जा लेकर प्रशासन किसानों की कमर तोड़ रहा है। वहीं प्रशासन ने दावा किया है कि सभी किसानों का राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त है। वहीं खाता नंबर नहीं दिए जाने से किसानों के खातों में मुआवजा राशि नहीं पहुंच पाई है। इस कार्रवाई में रेहटी तहसीलदार भूपेंद्र कलोसिया, थाना प्रभारी राजेश कहारे, नायब तहसीलदार सहित रेलवे के अधिकारी और बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद था। 2018 में हुआ था परियोजना का भूमि पूजन उल्लेखनीय है कि इंदौर से जबलपुर की दूरी कम करने और इंदौर से बुधनी रेलवे लाइन बिछाने के लिए 2018 में परियोजना का भूमि पूजन किया गया था। इस दौरान वर्ष 2024 तक परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन भूमि अधिग्रहण न होने से अर्थवर्क का कार्य शुरू नहीं हो सका है। रेलवे विभाग को अधिग्रहित भूमि किसानों से लेने में विवाद का सामना करना पड़ रहा है। जिसके चलते प्रशासन को मौके पर पहुंचकर अधिग्रहित भूमि से कब्जा हटाकर भूमि विभाग को सौंपनी पड़ रही है। बता दें कि वर्ष 2023 के रेलवे बजट में केंद्र सरकार ने 514 करोड़ की राशि इस परियोजना के लिए स्वीकृत की थी, जिसके चलते सरकारी रास्तों पर पुल-पुलियाओं का निर्माण किया जा चुका है। वर्ष 2024-25 के लिए इस परियोजना में 1107.25 करोड़ का परिव्यय आवंटित किया गया है। इस परियोजना में 3261.82 करोड़ रुपये की राशि खर्च होने का अनुमान है। यह परियोजना कुल 205 किमी लंबी हैं। रेलवे लाइन इंदौर जिले में 20 किमी, देवास में 112 और सीहोर जिले में 66 किमी ऐरिये में बिछाई जाना है। जिससे प्रतिदिन हजारों लोगों को इंदौर से जबलपुर तक सफर करने में कम दूरी का फायदा मिलेगा। किसानों का आरोप, रिकॉर्ड दुरुस्ती के लिए दो साल से लगा रहे चक्कर किसान संघ के पदाधिकारी गजेन्द्र जाट ने जानकारी देते हुए बताया कि मलाजपुर के 20 से अधिक किसानों की कृषि भूमि का रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं है। इसके लिए किसानों द्वारा तहसील कार्यालय के चक्कर लगाये जा रहे हैं। जिन किसानों की भूमि से कब्जा लिया गया ऐसे किसान ओमप्रकाश, जयनारायण, अनूप सिंह, रामेश्वर, देवी सिंह, संतोष, रघुवीर, महेन्द्र सिंह, गजेन्द्र सिंह, ईश्वर सिंह, पवन कुमार सहित अन्य महिला किसानों की मानें तो बिना रिकॉर्ड दुरस्त ही प्रशासन द्वारा कब्जा लिये जाने की कार्रवाई की गई है। कब्जा लेने से पूर्व किसानों को किसी भी प्रकार का कोई नोटिस भी नहीं दिया गया। जिससे किसानों द्वारा लगभग 30 एकड़ खेत में बोई मूंग फसल को प्रशासन ने जेसीबी चलाकर बर्बाद कर दिया हैं। इससे किसानों पर दोहरी पार पड़ी है। क्या कहते हैं अधिकारी एसडीएम दिनेश तोमर ने बताया कि मलाजपुर के सभी किसानों का रिकॉर्ड दुरुस्त है। यहां के 29 किसानों की 11 हैक्टेयर जमीन का कब्जा रेलवे विभाग को सौंपा जा चुका है। किसानों द्वारा खाते नंबर नहीं देने की स्थिति में उनके खातो में 3 करोड़ 79 लाख मुआवजा अब तक हस्तांतरित नहीं हो सका है। बुधनी सब डिवीजन के तहत कुल 25 गांव में 798 कृषकों की कृषि भूमि रेलवे परियोजना के लिए अर्जित की गई हैं। जिसका रकबा 306 हैक्टेयर और कुल मुआवजा राशि 132 करोड़ रुपये है। इसमें से 115 करोड़ रुपये किसानों के खातों में डाल दिये हैं, शेष किसानों की खातों की जानकारी नहीं देने से राशि का हस्तांतरण नहीं हो पाया है। राजस्व विभाग द्वारा 280 हैक्टेयर जमीन का कब्जा भी रेलवे को सौंपा जा चुका है। भैरूंदा तहसील के 13 गांव से गुजरेगी रेलवे लाइन बुदनी-इंदौर रेलवे लाइन भैरूंदा तहसील के 13 गांवों से होकर गुजरेगी, जिसके लिए रेलवे विभाग के द्वारा स्थानीय प्रशासन के सहयोग से 220 हैक्टेयर में से 184 हैक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जा चुकी है। योजना के तहत अधिग्रहित 404 किसानों में से 387 किसानों के खातों में मुआवजा राशि का हस्तांतरण किया जा चुका है। अब 10 गांव के 27 किसान ऐसे हैं, जिन्होंने बैंक खाते की जानकारी राजस्व विभाग को अब तक नहीं दी हैं, जिससे 4 करोड़ 47 लाख रुपये का मुआवजा अब बैंक खातो में नहीं पहुंच सका है। एसडीएम मदन सिंह रघुवंशी ने बताया कि भूमि से कब्जा हटाये जाने की प्रक्रिया तेज गति से चल रही हैं। क्षेत्र के बांव ससली, झकलॉय, बोरखेड़ा में 27.472 हैक्टेयर व नंदगांव, आगरा, भैरूंदा, राला, बोरखेड़ाकलां में 8.684 हैक्टेयर भूमि से कब्जा लेकर रेलवे विभाग को सौंपा जाना हैं, जो भी शीघ्र पूर्ण कर लिया जाएगा। 522 हेक्टेयर जमीन अधिगृहीत, 218 करोड़ का मुआवजा दिया सीहोर में  कलेक्टर बालागुरू के. की अध्यक्षता में आयोजित टीएल बैठक में इंदौर-बुधनी रेल परियोजना और बाड़ी-बुधनी-संदलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग की प्रगति की समीक्षा की गई। रेल परियोजना के लिए भैरूंदा और बुधनी क्षेत्र के 38 गांवों की 522.564 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण पूरा कर लिया गया है। प्रभावित किसानों को 218.15 करोड़ रुपए का मुआवजा वितरित किया जा चुका है। वहीं बाड़ी-बुधनी-संदलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए बुधनी अनुभाग के 29 गांवों की 172.5 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया है। इस परियोजना में किसानों को 122.43 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया गया है। कलेक्टर ने अधिकारियों को शेष किसानों को शीघ्र मुआवजा वितरण करने के निर्देश दिए। साथ ही अर्जित भूमि का नामांतरण और कब्जा दिलाने की प्रक्रिया पूरी करने को कहा। बैठक में विभिन्न विभागों … Read more

पमरे ने चालू वित्तीय वर्ष के प्रथम माह में 740 करोड़ रूपये ऑरिजिनेटिंग रेवेन्यू अर्जित किया

पमरे ने चालू वित्तीय वर्ष के प्रथम माह में 740 करोड़ रूपये ऑरिजिनेटिंग रेवेन्यू अर्जित किया गत वर्ष की तुलना में ऑरिजिनेटिंग रेवेन्यू में लगभग 8 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई भोपाल महाप्रबंधक श्रीमती शोभना बंदोपाध्याय के द्वारा विभिन्न बैठकों में समय-समय पर पश्चिम मध्य रेलवे की ऑरिजिनेटिंग रेवेन्यू बढ़ाने के निर्देश दिए जाते हैं। इसी कड़ी में प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक एवं प्रमुख मुख्य परिचालन प्रबंधक के निर्देशन में वाणिज्य/परिचालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा कार्य करते हुए जबलपुर, भोपाल एवं कोटा तीनों मण्डलों में रेल राजस्व बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास भी किये जा रहे हैं। जिसके चलते चालू वित्तीय वर्ष के प्रथम अप्रैल माह में पश्चिम मध्य रेल ने कुल रुपये 739 करोड़ 84 लाख का ऑरिजिनेटिंग रेवेन्यू अर्जित किया, जो गत वर्ष इसी अवधि की तुलना में 686 करोड़ 54 लाख ऑरिजिनेटिंग रेवेन्यू अर्जित किया है। यह ऑरिजिनेटिंग रेवेन्यू लगभग 8 प्रतिशत वृद्धि को दर्शता है।        ऑरिजिनेटिंग रेवेन्यू पर मद वाइस आय पर नजर डालें तो यात्री यातायात से रुपये 208 करोड़ 48 लाख, माल यातायात से रुपये 489 करोड़ 62 लाख, अन्य कोचिंग मद में रुपये 14 करोड़ 61 लाख एवं विविध आय यानि संड्री से रुपये 27 करोड 13 लाख का रेलवे राजस्व प्राप्त किया है।   यात्री यातायात में रेलवे राजस्व बढ़ाने के लिए पमरे द्वारा निम्नलिखित प्रयास किये जा रहे हैं:-  यात्रियों के लिए रेल यात्रा को सुरक्षित और बेहतर बनाया गया।  स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा हैं।    पमरे से चलने वाली स्पेशल ट्रेनों की संचालन अवधि को विस्तारित कर चलाया जा रहा हैं।  यात्री ट्रेनों में प्रतीक्षा सूची को क्लीयर करने के लिए अतिरिक्त कोच लगाए जा रहे हैं।  पश्चिम मध्य रेल में मिलने वाले प्रायोगिक ठहराव की अवधि यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए बढ़ाया जा रहा हैं।  अधोसरंचना कार्यों में गति प्रदान कर यात्री ट्रेनों की गति में वृद्धि की गई साथ ही समयपालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। माल यातायात में रेलवे राजस्व बढ़ाने के लिए पमरे द्वारा निम्नलिखित प्रयास किये जा रहे हैं:-  मालगाड़ियों की औसत गति में वृद्धि करके अलग-अलग रेल खण्ड की क्षमता में वृद्धि और इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाया गया।  माल गोदामों में राउण्ड द क्लॉक यानि चौबीस घंटे लोडिंग एवं अनलोडिंग सेवाएं दी जा रही।  गतिशक्ति कार्गो टर्मिनल / साइडिंग को बढ़ाने का निरंतर प्रयास किये जा रहे है।  नई रेल लाइन/दोहरीकरण/तिहरीकरण जैसे अधोसरंचना कार्यों में गति प्रदान की जा रही है।  मालगाड़ियों में ऑपरेशनल सुधार भी किए जा रहे है।  गुड्स टर्मिनल की वर्किंग में सुधार एवं मालगाड़ियों के डिटेंशन को कम किया गया है। अन्य कोचिंग एवं विविध आय यानि संड्री रेवेन्यू के लिए पमरे द्वारा निम्नलिखित प्रयास किये जा रहे हैं:-  गैर किराया राजस्व (नॉन फेयर रेवेन्यू) में वृद्धि के लिए नवाचारों और नविन अवधारणाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।    कैटरिंग, पार्किंग, वन स्टेशन वन प्रोडक्ट, प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र एवं एनएफआर सम्बंधित कई अनुबंध किये जा रहे है।  वाणिज्यिक विज्ञापन, मल्टी परपस स्टॉल, ट्रेनों में विनाइल रैपिंग इत्यादि जैसे अनुबंधों को बढ़ावा दिया जा रहा है।  नई अभिनव गैर किराया राजस्व विचार योजना (निनफ्रीस) निति के तहत नयी-नयी योजनाओं को लागु किया जा रहा है। पश्चिम मध्य रेलवे तीनों मण्डलों जबलपुर, भोपाल एवं कोटा द्वारा रेलवे राजस्व वृद्धि के लिए निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं।

भोपाल स्टेशन पर रेलकर्मियों की ईमानदारी और सजगता एक बार फिर यात्रियों की सेवा में मिसाल बनकर सामने आई

 भोपाल दिनांक 29 अप्रैल 2025 को अपराह्न लगभग 16:10 बजे, एक यात्री श्री अल्फ्रेड टोनी जो ट्रेन संख्या 12618 मंगला एक्सप्रेस से एर्नाकुलम स्टेशन की यात्रा पर थे, वे भोपाल स्टेशन परिसर में स्थित “ड्रॉप एंड गो” क्षेत्र में टैक्सी से उतरे। यात्रा की जल्दी में वे अपना एक बैग वहीं भूल गए और प्लेटफॉर्म की ओर रवाना हो गए। इसी दौरान प्लेटफॉर्म पर कार्यरत रेलवे कुली श्री छगनलाल (बिल्ला क्रमांक 75) की नजर उस लावारिस बैग पर पड़ी। अपनी ईमानदारी और सजगता का परिचय देते हुए उन्होंने बिना देर किए वह बैग उपस्टेशन प्रबंधक (वाणिज्य) श्री जावेद अंसारी को सौंप दिया। श्री अंसारी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बैग की जांच की, जिसमें नकदी के साथ कई महत्वपूर्ण बैंकिंग दस्तावेज मिले। दस्तावेजों में अंकित मोबाइल नंबर से उन्होंने यात्री श्री अल्फ्रेड टोनी से संपर्क किया और उन्हें उनके बैग के सुरक्षित होने की सूचना दी। सूचना मिलते ही श्री टोनी तुरंत स्टेशन पर उपस्टेशन अधीक्षक कार्यालय में पहुँचकर बैग प्राप्त किया। उन्होंने भोपाल रेल प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “मैं बहुत खुश और आभारी हूँ कि इतनी जिम्मेदारी और ईमानदारी से मेरा सामान मुझे वापस मिल गया। रेल प्रशासन का यह व्यवहार यात्रियों के विश्वास को और मज़बूत करता है।” इस सराहनीय कार्य पर प्रतिक्रिया देते हुए वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया ने कहा— “भोपाल मंडल में कार्यरत हमारे कर्मचारी यात्रियों की सेवा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। श्री छगनलाल की ईमानदारी और श्री जावेद अंसारी की तत्परता ने यह सिद्ध कर दिया है कि हमारे स्टाफ न सिर्फ कर्मठ हैं, बल्कि मानवीय मूल्यों को भी निभाते हैं। रेल प्रशासन को उन पर गर्व है।” भोपाल रेल मंडल यात्रियों को सुरक्षित, भरोसेमंद और सहयोगात्मक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। यह घटना इस बात का प्रतीक है कि रेलवे केवल यात्रा का साधन नहीं, बल्कि यात्रियों के विश्वास और सुरक्षा का संरक्षक भी है।

रेल मंडल कार्यालय में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 134वीं जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई

भोपाल भारत रत्न, संविधान शिल्पी, समाज सुधारक एवं न्याय के प्रबल पक्षधर बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 134वीं जयंती के पावन अवसर पर, पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल कार्यालय में एक गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मंडल रेल प्रबंधक श्री देवाशीष त्रिपाठी ने मंडल के समस्त रेलकर्मियों को इस ऐतिहासिक दिन की हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित कीं। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि बाबा साहब का जीवन संघर्ष, समानता और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। हमें उनके विचारों को आत्मसात करते हुए समतामूलक, न्यायपूर्ण और समावेशी समाज की स्थापना हेतु निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बाबा साहब के अदम्य साहस, प्रखर बुद्धिमत्ता और दूरदर्शी सोच से प्रेरणा लेकर हमें भारतीय रेल की गरिमा और सेवा की गुणवत्ता को और ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। कार्यक्रम में मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों सहित बड़ी संख्या में रेल कर्मचारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर अपर मंडल रेल प्रबंधक द्वय श्रीमती रश्मि दिवाकर एवं श्री योगेन्द्र बघेल, मुख्य परियोजना प्रबंधक (गति शक्ति) श्री के. एल. मीना, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया सहित अन्य विभागाध्यक्ष, रेल कर्मचारी एवं मान्य यूनियन प्रतिनिधि मौजूद रहे। इससे पूर्व, दिनांक 14 अप्रैल 2025 को भोपाल मंडल अंतर्गत सभी स्टेशन, डिपो एवं रेल कार्यालयों में बाबा साहब के चित्र पर माल्यार्पण एवं श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनकी जयंती अत्यंत श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर बाबा साहब के विचारों एवं योगदान को स्मरण करते हुए विभिन्न संगोष्ठियों एवं चर्चाओं का भी आयोजन किया गया।

भोपाल मंडल के 9 स्टेशनों पर 10 समाजसेवी संस्थाओं द्वारा यात्रियों हेतु नि:शुल्क शीतल जल सेवा

भोपाल गर्मियों की तीव्रता को देखते हुए जब शीतल जल की आवश्यकता बढ़ जाती है, ऐसे समय में भोपाल मंडल रेल प्रशासन द्वारा अपने यात्रियों को स्टेशन परिसरों में स्वच्छ एवं ठंडा पेयजल उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न वॉटर कूलर एवं जल नल की व्यवस्था की गई है। इस प्रयास में सेवा भाव से प्रेरित कुछ गैर सरकारी संगठन एवं समाजसेवी संस्थाएं भी सक्रिय रूप से योगदान दे रही हैं, जो यात्रियों की प्यास बुझाने के इस पुनीत कार्य को एक जनभागीदारी का स्वरूप प्रदान कर रही हैं। वर्तमान में मंडल के 9 प्रमुख स्टेशनों — सांची, खिरकिया, हरदा, नर्मदापुरम, संत हिरदाराम नगर, विदिशा, गंजबासौदा, अशोकनगर एवं रुठियाई — पर 10 गैर सरकारी संगठन/समाजसेवी संस्थाएं नि:शुल्क जल सेवा का कार्य कर रही हैं। ये संस्थाएं गाड़ियों के आगमन के समय प्लेटफार्म पर सक्रिय रहते हुए यात्रियों को शीतल जल प्रदान करती हैं, साथ ही उनके खाली बोतलों को भी भरने की सेवा प्रदान करती हैं। इन प्रयासों से यात्रियों को गर्मी व यात्रा की थकान से राहत मिलती है और मानव सेवा की एक अनुपम मिसाल प्रस्तुत होती है। रेल प्रशासन द्वारा इन संस्थाओं को स्टेशन परिसर में नि:शुल्क जल वितरण हेतु आवश्यक अनुमतियाँ प्रदान की गई हैं। इसके साथ ही मंडल रेल प्रशासन ने अन्य समाजसेवी संगठनों, स्वयंसेवियों, रोटरी क्लबों एवं अन्य जनकल्याणकारी संस्थाओं से भी अपील की है कि वे इस मानवीय सेवा में आगे आएं। रेल प्रशासन उनकी हरसंभव सहायता करेगा, जिससे यह कार्य और अधिक व्यापकता प्राप्त कर सके। यह सेवा न केवल यात्रियों को राहत प्रदान कर रही है, बल्कि समाज में आपसी सहयोग और सेवा के मूल्यों को भी सुदृढ़ कर रही है।

रेलवे दिल्ली-मुंबई रूट पर हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए बेलास्ट-लेस ट्रैक बिछा रहा, 220 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से होगी टेस्टिंग

भोपाल इस साल के अंत तक भोपाल और रानी कमलापति (आरकेएमपी) रेलवे स्टेशनों पर बेलास्ट-लेस ट्रैक (बिना गिट्‌टी का ट्रैक) बिछाने का कार्य शुरू किया जाएगा। इस ट्रैक पर ट्रेनें 220 किमी प्रति/घंटा की रफ्तार से दौड़ सकेंगी। अभी ट्रेनों की ​स्पीड 130 किमी/घंटा है। रेलवे दिल्ली-मुंबई रूट पर हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए बेलास्ट-लेस ट्रैक बिछा रहा है। भोपाल इसी रूट में है इसलिए यहां भी ट्रैक अपडेट किया जा रहा है। भोपाल मेन स्टेशन के प्लेटफॉर्म 1, 2 और 3 से लेकर यार्ड तक, संत हिरदाराम नगर स्टेशन के प्लेटफॉर्म 1 और 2, और नर्मदापुरम, विदिशा व हरदा स्टेशनों के प्लेटफॉर्म 1 व 2 से यार्ड तक इस ट्रैक को बिछाने की योजना है। हाल ही में आरडीएसओ ने इस ट्रैक पर 220 किमी की स्पीड से ट्रेन चलाने की मंजूरी दी है। ट्रेनों में कंपन नहीं होता, गति बढ़ती है, सफर आरामदायक सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया के अनुसार- इन ट्रैक्स को ज्यादा मेंटेनेंस की जरूरत नहीं होती है। ट्रैक में कंपन नहीं होता इसलिए स्पीड बढ़ती है और सफर अधिक आरामदायक होता है। ऐसे ट्रैक 50-60 साल तक टिकाऊ रहते हैं। ट्रैक में गिट्टी की जगह कंक्रीट व डामर जैसी ठोस सामग्री लगती है।  

ब्रिटिश फूड व्लॉगर भारतीय रेलवे में फूड डिलेवरी की तेजी को लेकर काफी आश्चर्य में दिखा, बोला – ब्रिटेन के इस मामले में भारत से सीख लेना चाहिए

मुंबई सोशल मीडिया पर आए दिन कुछ न कुछ वीडियोज वायरल होता ही रहतो हैं। कभी यह वीडियोज लोगों की जिज्ञासा का कारण बनते हैं तो कभी लोगों के लिए एक मनोरंजन का साधन बन जाते हैं। ऐसा ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक ब्रिटिश फूड व्लॉगर भारतीय रेलवे में फूड डिलेवरी की तेजी को लेकर काफी आश्चर्य में दिखाई दे रहा है। इतना ही नहीं वह यह भी कहता नजर आता है कि ब्रिटेन के इस मामले में भारत से सीख लेना चाहिए। सोशल मीडिया साइट इंस्टाग्राम पर जॉर्ज बकले नाम का यह इन्फ्लुएंसर बताता है कि वह भारत की यात्रा पर है और यहां पर उसने एक बहुत ही अजीब चीज देखी है। वह बताता है हमें वाराणसी जाते समय भूख का अहसास हुआ तो हमने जोमैटो से कानपुर सेंट्रल पर खाना लाने का ऑर्डर कर दिया। जब हम कानपुर सेंट्रल पर पहुंचे तो हमारा खाना वहां आ गया। इसके लिए हमें केवल 345 रुपए देने पड़े यह बहुत ही बेहतर बात है। बकले ने जो वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया उसके कैप्शन में उन्होंने लिखा की ब्रिटेन को इससे सीख लेने की जरूरत है। आपको बता दें कि ट्रेन में यात्रा करते समय आप आईआरसीटीसी के मान्यता प्राप्त किसी भी एप के जरिए अपना खाना ऑर्डर कर सकते हैं जो आपके द्वारा बताए गए स्टेशन पर ट्रेन के रुकने के समय पर पहुंच जाएगा। इसके लिए आपको बस दस अंकों का पीएनआर नंबर देना होगा। बकले के इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने अपने-अपने हिसाब से प्रतिक्रिया दी। एक यूजर ने लिखा, “यह तो कुछ भी नहीं है एक बार तो मैंने अपनी ट्रेन यात्रा के दौरान पिज्जा ऑर्डर किया था और वह हमारे पास गरमागरम पहुंचा था।” एक और यूजर ने लिखा कि फूड डिलेवरी कोई रॉकेट साइंस नहीं है.. लेकिन तब भी हम कर लेते हैं। एक और यूजर ने लिखा कि यह देखकर अच्छा लगा कि आप भारत में अपना अच्छा समय बिता रहे हैं और यहां के कल्चर को सराह रहे हैं। हां, कभी-कभी कुछ गलत काम हो जाते हैं लेकिन वह दुनिया में कहीं भी हो सकते हैं…आपका कंटेंट बहुत अच्छा है।

पहाड़ों के बीच प्रगति का सेतु ‘अंजी खड्ड’

श्रीनगर जब घाटियां गहरी होती हैं और पहाड़ रास्ता रोकते हैं, तब इंसान के सपने ऊंचे हो जाते हैं। कश्मीर के दिल तक पहुंचने के इन्हीं ऊंचे सपनों ने फिर से एक नई कहानी को जन्म दिया है। ये कहानी एक पुल की है जो सिर्फ लोहे और केबल से नहीं, हिम्मत और हुनर से भी बना है। ये कहानी है भारत के पहले केबल-स्टेड रेलवे ब्रिज- अंजी खड्ड ब्रिज की जो जम्मू-कश्मीर की चुनौतीपूर्ण घाटियों के बीच, अंजी नदी की गहरी खाई को पाटता है। कटरा और रियासी के बीच कनेक्टिविटी को एक नया आयाम देने जा रहा यह अद्भुत संरचना भारतीय इंजीनियरिंग के आत्मविश्वास और कौशल की मिसाल है। यह ब्रिज उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है जो कटरा-बनिहाल रेल खंड में बनाया गया है। ऊबड़-खाबड़ रास्ते और कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ जैसी सभी सीमाओं को पार कर यह ब्रिज घाटी को देश के बाकी हिस्सों से और मजबूती के साथ जोड़ रहा है। आकर्षक डिजाईन के साथ बने इस ब्रिज का निर्माण कार्य सिर्फ 11 महीने में ही पूरा कर लिया गया है जो नदी तल से 331 मीटर ऊंचाई पर स्थित है जबकि नीव से 193 मीटर ऊंचा एक मजबूत सेंट्रल पायलन पर टिका हुआ है, जो इसकी पूरी संरचना को संतुलन में रखता है। अंजी खड्ड ब्रिज, चिनाब ब्रिज के बाद भारत का दूसरा सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज भी है। इस ब्रिज को 96 केबलों के सहारे बनाया गया है जिनका कुल वजन 849 मीट्रिक टन और  कुल लंबाई 653 किलोमीटर है। 725 मीटर लम्बे इस ब्रिज की संरचना में 8,215 मीट्रिक टन स्टील का इस्तेमाल किया गया है। मौजूदा आवश्यकताओं के मद्देनजर बने इस ब्रिज से जम्मू-कश्मीर के विकास के तार जुड़े हुए हैं। यह ब्रिज घाटी के दूर-दराज इलाकों मेंं बसे गांवों और कस्बों का बड़े शहरों के साथ सीधा संपर्क स्थापित करता है जिससे विकासशील जगहों पर चिकित्सा, शिक्षा और अन्य सुविधाओं की उपलब्धता आसान हो जाएगी।  बेहतर कनेक्टिविटी के वजह से स्थानीय लोगों लिए रोज़गार के नए अवसरो का सृजन होगा साथ ही घाटी में व्यापार और पर्यटन को भी जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। ●    पुल की कुल लंबाई: 725 मीटर ●    नदी के तल से ऊंचाई: 331 मीटर ●    सेंट्रल पायलन की ऊंचाई: 193 मीटर ●    केबल की संख्या: 96 ●    केबल का कुल वजन: 849 मीट्रिक टन ●    केबल की कुल लंबाई: 653 किलोमीटर ●    निर्माण में कुल स्टील का इस्तेमाल:  8,215 मीट्रिक टन

वित्तीय वर्ष 2024-25 में पमरे की प्रमुख उपलब्धियां, नई रेललाइन निर्माण, स्क्रैप बिक्री, संड्री आय एवं ट्रैक रिन्यूवल में सर्वश्रेष्ठ वृद्धि दर्ज हुई

  भोपाल  महाप्रबंधक श्रीमती शोभना बंदोपाध्याय के निरंतर मॉनेटरिंग के चलते पश्चिम मध्य रेल ने बीते वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान इन्फ्रास्ट्रचर कमीशनिंग, नई लाइनें बिछाने/दोहरीकरण/तिहरीकरण, स्क्रैप बिक्री, ऑर्जिनेटिंग रेवन्यू, माल ढुलाई और इसके साथ ही सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी के एकीकरण सहित विभिन्न श्रेणियों में शानदार उपलब्धियां हासिल कीं।     बीते वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान माननीय रेलमंत्री जी द्वारा संपूर्ण भारतीय रेलवे पर किये गए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हेतु पश्चिम मध्य रेल को लेखा एवं वित्त प्रबंधन शील्ड और कार्मिक प्रबंधन शील्ड पश्चिम मध्य रेल महाप्रबंधक श्रीमती शोभना बंदोपाध्याय को प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त पश्चिम मध्य रेल के एक अधिकारी एवं एक कर्मचारी को भी व्यक्तिगत रूप से अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया है I       माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा वर्ष 2024 के दौरान पश्चिम मध्य रेल की लगभग 4880 करोड़ लागत की 18 महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया है। इसके साथ ही लोकल उत्पाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “वन स्टेशन वन प्रोडक्ट” स्टॉल एवं स्टेशनों पर सस्ती एवं जेनरिक दवाइयाँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से “प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र” संचालित किये जा रहे हैं। बीते वित्तीय वर्ष 2024-25 में पमरे की प्रमुख उपलब्धियां नीचे दी गई हैं :- 1) स्क्रैप बिक्री:- पमरे स्क्रैप सामग्री जुटाकर और ई-नीलामी के माध्यम से इसकी बिक्री करके संसाधनों का इष्टतम उपयोग करने के लिए हरसंभव प्रयास करती है। पमरे द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 477 करोड़ 66 लाख रुपये की स्क्रैप बिक्री की गई है। रेलवे बोर्ड द्वारा रूपये 320 करोड़ का लक्ष्य दिया गया था, जिसकी तुलना में रूपये 157 करोड़ 66 लाख (49.27 प्रतिशत) अधिक की स्क्रैप बिक्री की गई है। पश्चिम मध्य रेल की अब तक की सर्वश्रेष्ठ वृद्धि दर्ज की हैं। 2) नॉन फेयर रेवन्यू (संड्री आय):– पमरे ने संड्री आय के तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 के 229 करोड़ 98 लाख रुपये की तुलना में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 330 करोड़ 87 लाख रुपये का नॉन फेयर रेवन्यू हासिल किया है जो लगभग 44 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि है। यह वृद्धि अब तक की सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड उपलब्धि दर्शाती हैं। 3) ट्रैक रिन्यूवल:- पमरे में ट्रैक की क्षमता को बढ़ाने के लिए एवं सरंक्षा में वृद्धि करने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2023-24 में 316 किलोमीटर ट्रैक रिन्यूवल की तुलना में वित्तीय वर्ष 2024-25 के 452 किलोमीटर ट्रैक का रिन्यूवल कार्य किया,जो 43 प्रतिशत अधिक है। पश्चिम मध्य रेलवे का अब तक का सर्वश्रेष्ठ ट्रैक रिन्यूवल कार्य है। 4) कैपेक्स:– वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान पश्चिम मध्य रेल का कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) 9699 करोड़ 54 लाख रुपये की शत-प्रतिशत उपयोगिता साबित हुई है। जबकि पश्चिम मध्य रेलवे को कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) 9631 करोड़ 30 लाख रूपये ग्रांट हुआ था। 5) यात्री यातायात एवं अन्य कोचिंग ऑर्जिनेटिंग रेवन्यू:- पमरे ने यात्री यातायात के तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 के 2335 करोड़ 21 लाख रुपये की तुलना में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 2431 करोड़ 15 लाख रुपये का ऑर्जिनेटिंग रेवन्यू हासिल किया है जो लगभग 4 प्रतिशत अधिक है। इसी तरह अन्य कोचिंग आय के तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 के 163 करोड़ 39 लाख रुपये की तुलना में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 174 करोड़ 81 लाख रुपये का ऑर्जिनेटिंग रेवन्यू हासिल किया है जो लगभग 7 प्रतिशत अधिक है। यह दोनों वृद्धि अब तक की अधिकतम उपलब्धि दर्शाती हैं। ट्रेन यात्री सुविधाओं और व्यवसाय विकास इकाइयों (बीडीयू) के ग्राहक केंद्रित दृष्टिकोण एवं कार्यकलापों के साथ-साथ अत्‍यंत प्रभावकारी नीति निर्माण से रेल राजस्व बढ़ाने में काफी मदद मिली है। 6) पीओएच (पीरियोडिक ओवर हॉलिंग):– पमरे द्वारा कोचों और वैगनों का रूटीन ओवर हॉलिंग करके अधिक से अधिक पीओएच (पीरियोडिक ओवर हॉलिंग) आउटटर्न किया। सवारी डिब्बा पुर्ननिर्माण कारखाना (सीआरडब्लूएस) भोपाल द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में 1198 कोचों की तुलना में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 1369 कोचों का अनुरक्षण कर आउटटर्न किया, जो  14 प्रतिशत अधिक है। इसी प्रकार वर्कशॉप (डब्लूआरएस) कोटा कारखाना द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में 6720 वैगनों  की तुलना में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 6938 वैगनों की मरम्मत करके आउटटर्न किया है, जो 3 प्रतिशत अधिक है। 7) इन्फ्रास्ट्रचर कमीशनिंग (नई लाइन/दोहरीकरण/तिहरीकरण) के मामले में वित्तीय वर्ष  2024-25 के दौरान कुल 174 किलोमीटर का नवनिर्मित रेलवे ट्रैक कमीशन किया गया है जिनमें कि 75 किमी. नई रेल लाइन कार्य, 47 किमी दोहरीकरण एवं 52 किमी. तिहरीकरण के कार्य शामिल हैं। पश्चिम मध्य रेल ने नई रेललाइन अधोसरंचना कार्य में अब तक की सर्वश्रेष्ठ वृद्धि दर्ज हुई है।   8) फुट ओवर ब्रिज (एफओबी):- यात्रि‍यों/पैदल यात्रि‍यों को आवागमन में सहूलियत हेतु स्टेशनों पर एक प्लेटफॉर्म से दुसरे प्लेटफॉर्म तक जाने के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 37 एफओबी का निर्माण किया गया।   9) रोड ओवर ब्रिज/रोड अंडर ब्रिज (आरओबी/आरयूबी):– सड़कों पर बनी पटरियों को पार करने में जनता की सहूलियत के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 33 रोड ओवर ब्रिज एवं 62 रोड अंडर ब्रिज / सीमित ऊंचाई सबवे (एल.एच.एस.) निर्माण कराए गए। 10) समपार फाटक हटाए गए:- समपार फाटकों (लेवल क्रॉसिंग या एलसी गेट) पर लोगों की सुरक्षा चिंता का प्रमुख विषय रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 30 समपार फाटकों को हटाया गया। 11) लिफ्ट:- ‘सुगम्य भारत अभियान’ के तहत रेल प्लेटफॉर्म पर दिव्यांगजनों, वृद्धों और बच्चों की आवाजाही को सुगम्‍य बनाने के लिए पमरे में रेलवे स्टेशनों पर लिफ्ट और एस्केलेटर लगा रही है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 11 लिफ्ट लगाए गए। 12) ‘‘अमृत स्टेशन योजना‘‘ के तहत, पश्चिम मध्य रेल के कुल 53 रेलवे स्टेशनों का उन्नयन कार्य तीव्र गति से किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत जबलपुर मंडल के 15 स्टेशन, भोपाल मंडल के 15 एवं कोटा मंडल के 17 स्टेशन शामिल हैं। इसके अलावा जबलपुर, सतना, भोपाल, बीना, कोटा एवं डकनिया तलाव रेलवे स्टेशनों के मेजर अपगे्रडेशन के कार्य भी शामिल हैं। इन स्टेशनों में कोटा मंडल के बूंदी एवं मांडलगढ़, जबलपुर मंडल के श्रीधाम एवं कटनी साउथ और भोपाल मंडल के नर्मदापुरम एवं शाजापुर स्टेशनों का कार्य लगभग पूर्ण होने की स्टेज पर है।

एमएसटी रेल टिकट बुक करना हुआ और भी आसान

एमएसटी रेल टिकट बुक करना हुआ और भी आसान यूटीएस मोबाइल ऐप से एमएसटी रेल टिकट बुकिंग: यात्रियों के लिए लाभदायक विकल्प भोपाल भोपाल मंडल में यात्री मासिक सीजन रेल टिकट (MST) भी यूटीएस ऑन मोबाइल ऐप के माध्यम से आसानी से बुक कर सकते हैं। यह सुविधा न केवल यात्रा को सरल बनाती है बल्कि समय और धन की बचत भी करती है। भोपाल मंडल में पिछले 6 महीनों में अक्टूबर 2024 से मार्च 2025 तक कुल 60,672 मासिक सीजन रेल टिकट बुक किए गए, जिनमें से 17,722 टिकट यानी करीब 30% टिकट UTS मोबाइल ऐप के माध्यम से बुक किए गए। MST क्या है? MST यानी Monthly Season Ticket एक प्रकार का मासिक रेल टिकट है जो यात्रियों को रोज़ाना आने-जाने के लिए बार-बार टिकट लेने की झंझट से मुक्ति देता है। यह टिकट एक अधिकतम 150 किलोमीटर  के लिए मान्य होता है और महीने भर रेल यात्राओं की सुविधा देता है। MST (Monthly Season Ticket) रेलवे द्वारा नियमित यात्रियों के लिए दी जाने वाली एक सुविधा है जो रोज़ रेल टिकट लेने की ज़रूरत को खत्म कर देती है। यह टिकट कई प्रकारों में उपलब्ध है जैसे – QST (Quarterly Season Ticket) जो 3 महीनों के लिए, HST (Half-Yearly Season Ticket) जो 6 महीनों के लिए और YST (Yearly Season Ticket) जो पूरे 12 महीनों के लिए मान्य होता है। ये सभी विकल्प यात्रियों को अधिक रियायत और सुविधा प्रदान करते हैं। अब ये सभी सीजन रेल टिकट UTS मोबाइल ऐप के माध्यम से डिजिटल रूप से बुक किए जा सकते हैं, जिससे रेल टिकट काउंटर की कतारों से मुक्ति, समय की बचत और पेपरलेस यात्रा का लाभ मिलता है। MST रेल टिकट लेने के लाभ: 1.    डिजिटल सुविधा: अब MST भी मोबाइल ऐप से बुक की जा सकती है, पेपरलेस और कैशलेस जिससे पेपर MST खोने का डर भी नहीं रहता क्यूंकि अब आपका मोबाइल ही आपकी MST है । 2.    रोज़ टिकट लेने की ज़रूरत नहीं: हर दिन टिकट खरीदने की झंझट से छुटकारा। 3.    पैसों की बचत: डेली रेल टिकट की तुलना में एमएसटी कहीं ज़्यादा किफायती होता है। 4.    समय की बचत: स्टेशन पर कतार में खड़े रहने की ज़रूरत नहीं।      वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया ने बताया कि “मासिक सीजन रेल टिकट (MST) भी UTS ऑन मोबाइल ऐप से बुक किया जा सकता है, जो कि दैनिक यात्रियों के लिए बहुत ही उपयोगी सुविधा है। मैं सभी यात्रियों से आग्रह करता हूँ कि वे इस डिजिटल रेल सुविधा का अधिकतम लाभ उठाएं और डिजिटल इंडिया की दिशा में अपना योगदान दें।” यूटीएस ऑन मोबाइल ऐप: MST रेल टिकट बुकिंग की आसान प्रक्रिया 1.    ऐप डाउनलोड करें: गूगल प्ले स्टोर या एप्पल स्टोर से ‘UTS’ ऐप डाउनलोड करें। 2.    रजिस्ट्रेशन करें: मोबाइल नंबर से साइन अप करें। 3.    टिकट बुकिंग करें: o    MST विकल्प चुनें और रूट भरें। o    R-Wallet से भुगतान करें (3% बोनस भी मिलता है)। o    टिकट आपके मोबाइल पर पेपरलेस रूप में उपलब्ध रहेगा।

नया पंबन पुल: राष्ट्र का गौरव – इंजीनियरिंग उत्कृष्टता का प्रतीक

भोपाल ऐतिहासिक महत्व का एक अद्वितीय पुल भारत के दक्षिणी समुद्री किनारे पर, मुख्यभूमि को पवित्र रामेश्वरम द्वीप से जोड़ता नया पंबन पुल आज देश की आधुनिक इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण बनकर उभरा है। यह पुल पुराने पंबन पुल (जो 100 वर्षों से अधिक समय तक सेवा में रहा) का स्थान ले रहा है और भारत की बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। मंडपम रेलवे स्टेशन और रामेश्वरम द्वीप के बीच बना यह नया रेलवे समुद्री पुल केवल एक प्रतिस्थापन नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग क्षमताओं में भारत की एक बड़ी छलांग है। यह देश का पहला वर्टिकल लिफ्ट सी ब्रिज है, जो तकनीकी उन्नयन, पर्यावरणीय अनुकूलता और वैश्विक कनेक्टिविटी को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यह नवभारत की आकांक्षाओं और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। पंबन पुल की ऐतिहासिक विरासत 1914 में बने मूल पंबन पुल ने समुद्र के ऊपर 2.078 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए तमिलनाडु की मुख्यभूमि (मंडपम) को रामेश्वरम द्वीप से जोड़ा। इसका ‘Scherzer रोलिंग लिफ्ट स्पैन’ जलयानों को नीचे से गुजरने की अनुमति देता था और यह अपने समय से काफी आगे की तकनीक थी। यह पुल रामनाथस्वामी मंदिर के दर्शन को जाने वाले श्रद्धालुओं की जीवनरेखा था। नया पुल क्यों जरूरी था? 100 वर्षों से अधिक सेवा देने के बाद, पुराना पुल जंग और संरचनात्मक क्षरण के कारण जर्जर होने लगा था। साथ ही इस क्षेत्र की भौगोलिक चुनौतियाँ — जैसे कि भूकंपीय गतिविधियाँ, चक्रवाती तूफान और खारे समुद्री वातावरण — ने एक ऐसे आधुनिक पुल की आवश्यकता को जन्म दिया जो इन सभी स्थितियों का सामना कर सके। रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) को इस ऐतिहासिक कार्य को अंजाम देने की जिम्मेदारी दी गई और उसने इस सपने को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। RVNL की भूमिका RVNL ने इस परियोजना को केवल एक निर्माण परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक मानक स्थापित करने वाले इंजीनियरिंग चमत्कार के रूप में देखा। हमारी टीम ने नवीनतम तकनीकों, पर्यावरणीय संतुलन और उच्च गुणवत्ता वाले निर्माण तरीकों के साथ काम किया। पुल को मौजूदा पुल के पास ही बनाया गया, इस दौरान समुद्री और रेल यातायात को निर्बाध रूप से चालू रखा गया। निर्माण की चुनौतियाँ पाक जलडमरूमध्य की तेज हवाएँ, तूफानी मौसम और ज्वार-भाटा ने निर्माण को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया था। भारी निर्माण सामग्री को इस दूरस्थ क्षेत्र तक पहुँचाना, और सीमित समय में कार्य संपन्न करना एक बड़ा कार्य था। फिर भी, 1400 टन से अधिक स्टील निर्माण, 99 गर्डर, लिफ्ट स्पैन और समुद्र के भीतर विद्युतीकरण जैसे कार्य पूरी तरह दुर्घटनारहित तरीके से पूरे किए गए — यह RVNL की सुरक्षा और गुणवत्ता प्रतिबद्धता का प्रमाण है। सहयोग और टीमवर्क यह परियोजना रेल मंत्रालय, दक्षिण रेलवे, तमिलनाडु सरकार और देश के विभिन्न ठेकेदारों, आपूर्तिकर्ताओं व सलाहकारों के सहयोग से संभव हो पाई। खास बात यह है कि इस पुल का निर्माण पूरी तरह भारतीय ठेकेदारों द्वारा किया गया — जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पुल की प्रमुख विशेषताएँ वर्टिकल लिफ्ट तंत्र: पुल का सबसे विशेष फीचर इसका 72 मीटर का वर्टिकल लिफ्ट स्पैन है, जो 22 मीटर ऊपर उठता है, जिससे बड़े जहाज़ आसानी से निकल सकते हैं। तेज़ रफ्तार क्षमता: पुराने पुल पर ट्रेनें केवल 10 किमी/घंटा की गति से चलती थीं, जबकि नया पुल 160 किमी/घंटा तक की क्षमता वाला है (फिलहाल 98 किमी/घंटा तक)। अधिक भार वहन क्षमता: 25 टन एक्सल लोड के अनुसार डिजाइन किया गया है, जिससे माल और यात्रियों की आवाजाही में बढ़ोतरी होगी। जंगरोधी निर्माण: समुद्री वातावरण के प्रभाव से बचाव हेतु उच्च गुणवत्ता वाले स्टेनलेस स्टील, मोटे सदस्य और पॉलीसिलॉक्सेन पेंटिंग का उपयोग किया गया है, जिससे पुल की सेवा आयु न्यूनतम 35 वर्ष हो गई है। भूकंप और चक्रवात प्रतिरोधक: पुल को भूकंपीय और चक्रवाती परिस्थितियों से निपटने के लिए मजबूती से डिजाइन किया गया है। रीयल-टाइम मॉनिटरिंग: वायु गति, संरचना की स्थिति, और ट्रेनों की निगरानी हेतु स्मार्ट सेंसर लगाए गए हैं। विद्युतीकृत दोहरी पटरियों की व्यवस्था: भविष्य में दोहरी लाइन की सुविधा और ट्रैक्शन सिस्टम पहले से मौजूद है। सामाजिक और आर्थिक प्रभाव रोजगार सृजन: निर्माण के दौरान और बाद में पर्यटन, परिवहन और सेवा क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेगा। श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधा: रामनाथस्वामी मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए अब यात्रा ज्यादा सुरक्षित, तेज़ और सुविधाजनक हो गई है। पर्यटन में वृद्धि: इसका दृश्यात्मक सौंदर्य, तकनीकी आकर्षण और रामसेतु जैसे धार्मिक स्थल पर्यटकों को आकर्षित करेंगे। आर्थिक सुधार: सामानों की आवाजाही में तेजी से व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी। एक हरित और सतत परियोजना निर्माण के दौरान पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव हो, इसका पूरा ध्यान रखा गया। इको-फ्रेंडली सामग्री, ऊर्जा कुशल लाइटिंग और निगरानी प्रणाली जैसी तकनीकों का उपयोग किया गया जिससे यह परियोजना भविष्य के लिए भी टिकाऊ बनी रहे। वैश्विक तुलना नया पंबन पुल भारत का पहला वर्टिकल लिफ्ट समुद्री रेलवे पुल है और यह विश्व की प्रतिष्ठित संरचनाओं — जैसे कि गोल्डन गेट ब्रिज (अमेरिका), टॉवर ब्रिज (लंदन), और ओरेसुंड ब्रिज (डेनमार्क-स्वीडन) — की श्रेणी में स्थान पाता है। यह भारतीय इंजीनियरिंग प्रतिभा का जीवंत उदाहरण है। निष्कर्ष: भविष्य की दिशा में एक कदम नया पंबन पुल केवल एक पुल नहीं, बल्कि विकास, प्रगति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी विरासत बनकर रहेगा। RVNL इसी भावना के साथ देशभर में ऐसी और परियोजनाएं लाने के लिए प्रतिबद्ध है।  

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