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बटन दबाते ही आता है पानी, राजस्थान-चित्तौड़गढ़ के सांवलिया सेठ के लिए उज्जैन के किसान ने बनाया चांदी का नलकूप

चित्तौड़गढ़/उज्जैन। मध्यप्रदेश में रहने वाले भगवान सांवलिया सेठ के भक्त प्रहलाद सिंह ने अपनी मन्नत पूरी होने पर चांदी का नलकूप भेंट किया है। प्रहलाद सिंह अपने खेत पर पांच नलकूप खुदवाया, लेकिन एक में भी पानी नहीं आया था। बाद में प्रहलाद सिंह भगवान सांवलिया सेठ से मन्नत मांगी तो छठे नलकूप में भरपूर पानी आ गया। मन्नत पूरी होने पर प्रहलाद ने सोमवार को मंदिर पहुंचकर भगवान सांवलिया सेठ को चांदी का नलकूप भेंट किया। जानकारी में सामने आया कि मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले में स्थित कटारिया खेड़ा निवासी प्रहलाद सिंह पुत्र निलेश सिंह पेशे से किसान हैं। उनका परिवार खेती पर ही आधारित है। सिंचाई को लेकर पानी की आवश्यकता हुई तो उन्होंने नलकूप खुदवाने का निर्णय किया। उन्होंने बोरवेल मशीन मंगवाई नलकूप के लिए बोर कराया, लेकिन उसमें पानी नहीं आया। इसके बाद दूसरा बोर कराया उसमें भी पानी नहीं आया। प्रहलाद ने हिम्मत नहीं हारी और तीसरा बोर कराया, लेकिन भाग्य ने यहां भी साथ नहीं दिया। इस तरह प्रहलाद ने एक के बाद एक पांच बोर खुदवाए, लेकिन एक में भी पानी नहीं आया। अंत में प्रहलाद ने भगवान सांवलिया सेठ से मन्नत मांगी। इसके बाद सांवलिया सेठ का नमा लेकर छठा नलकूप खुदवाया तो उसमें भरपूर पानी आ गया। इस पर प्रहलाद सिंह की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अपनी मनोकामना पूरी होने पर प्रहलाद ने चांदी का नलकूप बनवाया। करीब 119 ग्राम चांदी का नलकूप किसान ने भगवान को भेंट किया। इसमें बैट्री सिस्टम भी है, जिससे कि पानी भरने और मोटर चलाने पर चांदी के नलकूप से पानी भी निकलता है। सोमवार सुबह प्रहलाद सिंह चांदी नलकूप लेकर मंदिर पहुंचे। यहां मंदिर प्रभारी राजेंद्र शर्मा के साथ भगवान को नलकूप चढ़ाया। मंदिर प्रभारी शर्मा ने बताया कि भगवान सांवलिया सेठ के मंदिर में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु आते हैं। अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं। बिजनेस में पार्टनर भी बनाते हैं। मनोकामनाएं पूरी होने पर विभिन्न प्रकार की वस्तुएं तथा व्यापार में मुनाफा होने पर लाखों रुपये की नकदी चढ़ाते हैं।

सुनीं लोगों की समस्याएं, राजस्थान-चित्तौड़गढ़ में गृह रक्षा मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने सामुदायिक भवन का किया लोकार्पण

जयपुर। जनजाति क्षेत्रीय विकास एवं गृह रक्षा विभाग कैबिनेट मंत्री श्री बाबूलाल खराड़ी ने चित्तौड़गढ़ जिला स्थित मातृकुंडिया में सामुदायिक भवन का लोकार्पण किया। कैबिनेट मंत्री खराड़ी ने कहा कि सामुदायिक भवन परिसर में डोम बनाया जाएगा। साथ ही, किसानों को कृषि कनेक्शन समय पर उपलब्ध हो सके, इस हेतु भी प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों को फिंगरप्रिंट के अभाव में राशन प्राप्त करने में कोई तकलीफ नहीं आए, इसकी व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय परिश्रमी और विश्वासी समाज है। मातृभूमि के लिए आदिवासियों ने अनेकों बलिदान दिए हैं। इस अवसर पर उन्होंने राणा पूंजा के योगदान को भी याद किया।इस अवसर पर जनप्रतिनिधि सहित, संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। कैबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने चित्तौड़गढ़ दुर्ग का भ्रमण भी किया। दुर्ग भ्रमण के दौरान उन्होंने कुंभा महल, विजय स्तंभ सहित विभिन्न स्थलों का अवलोकन किया और दुर्ग से जुड़ी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत की जानकारी ली।

एक गंभीर घायल और दो अन्य जख्मी, राजस्थान-चित्तौड़गढ़ में तस्करों ने नारकोटिक्स वाहन में टक्कर मारकर की फायरिंग

चित्तौड़गढ़। चित्तौड़गढ़ जिले में उदयपुर सिक्सलेन स्थित नारायणपूरा टोल के पास शुक्रवार तड़के नाकाबंदी के दौरान मादक पदार्थ तस्करों ने नीमच नारकोटिक्स के वाहन को टक्कर मार दी। वहीं, बाद में तस्कर फायरिंग करते हुए फिल्मी स्टाइल में मौके से फरार हो गए। करीब आधे से एक मिनट चले इस घटनाक्रम में फायरिंग में नारकोटिक्स का एक अधिकारी तो तस्करों के वाहन की टक्कर लगने पर दो अधिकारी घायल हुए हैं। घायलों को चिकित्सालय ले जाया गया है। मौके से लाखों रुपये मूल्य का 345 किलो डोडा चूरा बरामद किया है। इस संबंध में प्रकरण दर्ज कर अनुसंधान किया जा रहा है। मामले में एक आरोपी की गिरफ्तारी भी हुई है। जानकारी में सामने आया कि मध्यप्रदेश में स्थित केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो नीमच की टीम को खुफिया सूचना मिली थी कि गुजरात नंबर प्लेट वाली टोयोटा इनोवा कार में मादक पदार्थ तस्करी होगी। इसमें सवार दो व्यक्ति चित्तौड़गढ़ जिले के मंगलवाड़ क्षेत्र से बाड़मेर (राजस्थान) क्षेत्र के लिए डोडा चूरा के जा रहे हैं। इस सूचना के आधार पर सीबीएन नीमच की टीम का गठन किया गया और उन्हें शुक्रवार सुबह जल्दी रवाना किया गया। टीम ने संदिग्ध मार्ग पर कड़ी निगरानी रखी गई। तस्करों के वाहन को चित्तौड़गढ़-उदयपुर हाइवे पर नारायणपुरा टोल प्लाजा के पास पहचाना गया। वाहन की पहचान होने पर सीबीएन अधिकारियों ने उसे रुकने का इशारा किया, लेकिन तस्करों ने रास्ता रोक रही विभागीय गाड़ी से सीधा टक्कर मार दी। सतर्क सीबीएन अधिकारियों ने वाहन को उसके चालक सहित सफलतापूर्वक रोका। वाहन में सवार दूसरे व्यक्ति ने सीबीएन अधिकारियों पर गोली चलाई और फरार हो गया। फायरिंग में एक अधिकारी घायल हो गया और वाहन से टकराव के कारण दो अधिकारी घायल हो गए। सुरक्षा और अन्य व्यावहारिक कारणों से वाहन की तत्काल तलाशी मौके पर लेना संभव नहीं था। इसलिए उसे सीबीएन कार्यालय लाया गया। यहां वाहन की पूरी तलाशी ली गई। इसमें 17 बोरों में भरा कुल 345.940 किलो डोडा चूरा बरामद किया। कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद मौके से जब्त किए डोडा चूरा व वाहन को सीज कर दिया। साथ ही एक व्यक्ति को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्स्टेंस एक्ट, 1985 की संबंधित धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। मामले में नारकोटिक्स का अग्रिम अनुसंधान जारी है।

खुद भी घायल होने पर जिला अस्पताल में भर्ती, राजस्थान-चित्तौड़गढ़ में गनमैन ने महिला कांस्टेबल को मारी गोली

चित्तौड़गढ़. चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं थाना इलाके में पुलिस उप अधीक्षक के गनमैन ने महिला कांस्टेबल को उसके घर के पास गोली मारकर घायल करने के बाद खुद को भी गोली मार ली। दोनों को गंभीर अवस्था में श्री सांवलियाजी राजकीय सामान्य चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, जहां दोनों का उपचार जारी है। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक सहित आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी ली। फिलहाल गोली मारने के कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बेगूं थाने में सोमवार शाम रोल कॉल के बाद महिला कांस्टेबल पूनम अपने किराए के मकान पर पहुंची तो यहां कांस्टेबल सियाराम ने उसे गोली मार दी। बाद में उसने खुद को भी गोली मारकर घायल कर लिया। धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और इसकी जानकारी बेगूं पुलिस को दी और दोनों को बेगूं चिकित्सालय पहुंचाया। घटना के बारे में सूचना मिलने पर बेगूं डिप्टी अंजली सिंह, सीआई आदि भी बेगूं चिकित्सालय पहुंचे और प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को चित्तौड़गढ़ रैफर कर दिया, जहां जिला चिकित्सालय में इनका इलाज जारी है। पुलिस अधीक्षक सुधीर जोशी ने मय जाप्ता जिला चिकित्सालय पहुंचकर मामले की जानकारी ली। फिलहाल गोली मारने के कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि सर्विस रिवॉल्वर से गोली मारी गई है। प्रारंभिक रूप से मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा होने से इंकार नहीं किया जा सकता, लेकिन इसकी अधिकृत पुष्टि पुलिस के आला अधिकारियों ने नहीं की है।

19.25 करोड़ का मिला चढ़ावा, राजस्थान-चित्तौड़गढ़ के कृष्ण मंदिर के खजाने के टूटे सभी रिकॉर्ड

चित्तौड़गढ़. चित्तौड़गढ़ जिले के प्रख्यात कृष्णधाम श्री सांवलियाजी मंदिर में खोले गए भंडार से चढ़ावा राशि का एक नया रिकॉर्ड बना है। इस बार दो महीने में खोले भंडार के तीन चरण की गणना पूरी हो चुकी है और 19 करोड़ 22 लाख रुपये गिने जा चुके हैं। वहीं, गत वर्ष इसी अमावस्या पर करीब 13 करोड़ 86 लाख रुपये का चढ़ावा राशि निकली थी। इस बार तीन दिन और चढ़ावा राशि की गणना की जानी है। ऐसे में अब तक का हाईएस्ट रिकॉर्ड बन जाएगा। श्री सांवलियाजी मंदिर में अब चढ़ावा राशि की गणना का चौथा चरण बुधवार सुबह से होगा। जानकारी में सामने आया कि श्री सांवलियाजी मंदिर में दीपावली वाली अमावस्या पर भंडार नहीं खोला जाता है। ऐसे में अगली अमावस्या पर दो महीने का भंडार खुलता है। श्री सांवलियाजी मंदिर में 30 नवंबर को चतुर्दशी के अवसर पर भंडार खोला गया था। इसमें पहले दिन 11 करोड़ 34 लाख 75 हजार रुपये की गणना हुई। इसके बाद अमावस्या पर आने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण चढ़ावा राशि की गणना नहीं की गई थी। वहीं, दूसरे चरण में सोमवार को तीन करोड़ 60 लाख रुपये की गणना हुई। इसी प्रकार शेष रही चढ़ावे राशि की गणना मंगलवार को तीसरे चरण में हुई। इसमें चार करोड़ 27 लाख 80 हजार रुपये की गणना की गई। शाम होने के बाद चढ़ावा राशि की गणना को रोक दिया गया। ऐसे में तीन चरण में हुई गणना में अब तक 19 करोड़ 22 लाख 55 हजार रुपये प्राप्त हुए हैं। मंदिर प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, गत वर्ष दीपावली के बाद वाली इसी अमावस्या पर जो भंडार खोला गया था। उसमें करीब 13 करोड़ 86 लाख रुपये की चढ़ावा राशि ही प्राप्त हुई थी। भंडार से नकद चढ़ावे की बात की जाए तो सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड करीब 15 करोड़ का है। वहीं, अब तक 19 करोड़ से ज्यादा नकद राशि भंडार से गणना की जा चुकी है। मंदिर प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, दो अब भी दो पेटियां और एक भंडार की गणना शेष है। वैसे तो नकद चढ़ावा राशि का नया रिकॉर्ड बन चुका है। फिर भी तीन दिन और भंडार की गणना की जानी है। इसके अलावा भेंट कक्ष में जो राशि आती है, वह अलग है। इसके अलावा भंडार से निकलने वाले तथा भेंट कक्ष में आने वाले सोना-चांदी का वजन भी शेष है, जिसे आगामी दिनों में पूरा किया जाएगा। सांवलियाजी मंदिर में मंगलवार को की गई गणना के दौरान मंदिर बोर्ड अध्यक्ष भैरूलाल गुर्जर, सदस्य संजय कुमार मंडोवरा, अशोक शर्मा, शंभूलाल सुथार, संजय मंडोवरा, प्रशासनिक अधिकारी प्रथम शिव शंकर पारीक, प्रशासनिक अधिकारी द्वितीय नंदकिशोर टेलर, संपदा सहायक प्रभारी राधेश्याम अहीर, संस्थापन अधिकारी लेहरी लाल गाडरी, मंदिर प्रभारी राजेंद्र शर्मा, स्टोर प्रभारी मनोहरलाल चौबीसा, सुरक्षा सहायक भारत सिंह के अलावा बैंक कर्मचारी और मंदिर मंडल के कर्मचारी मौजूद रहे।

अंगूठे पर तलवार से चीरा लगाकर किया राजतिलक, राजस्थान-चित्तौड़गढ़ में एकलिंगनाथ के 77वें दीवान बने विश्वराज सिंह मेवाड़

चित्तौड़गढ़. महाराणा मेवाड़ के रूप में विश्वराज सिंह का सोमवार को राजतिलक हुआ। चित्तौड़ दुर्ग स्थित फतह प्रकाश महल में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया।  राजपरिवार की परंपरा को निभाते हुए पूर्व सांसद महेंद्र सिंह मेवाड़ के निधन के बाद उनके पुत्र का राजतिलक किया गया। गद्दी पर बैठने के बाद तलवार से अंगूठे पर चीरा लगाकर विश्वराज सिंह का तिलक किया गया। राजतिलक से पहले विश्वराज सिंह ने सुबह से चल रहे हवन में आहुति दी। बाद में कुम्भा महल में भगवान गणपति की पूजा की और यहां गद्दी पर बैठने के बाद उनका रक्त से तिलक किया गया। राजतिलक के साथ ही पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठा और तोप चलाकर सलामी दी गई। जानकारी के अनुसार उदयपुर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य महेंद्रसिंह मेवाड़ के निधन के बाद आज उनके पुत्र विश्वराज सिंह मेवाड़ गद्दी पर बिराजित हुए। दस्तूर कार्यक्रम चित्तौड़ दुर्ग के फतह प्रकाश महल में हुआ। इसमें देश भर के पूर्व राजघरानों के सदस्य, रिश्तेदार और गणमान्य नागरिक शामिल हुए। राजगद्दी की पूजा के बाद सलूंबर रावत देवव्रत सिंह ने हाथ पकड़कर विश्वराज सिंह मेवाड़ को राजगद्दी पर बिठाया। साथ ही राजतिलक की परंपरा निभाई। यहां म्यान से तलवार निकाली और अंगूठे पर चीरा लगाकर रक्त से विश्वराज सिंह मेवाड़ के ललाट पर तिलक किया। इस दौरान पंडितों की ओर से वैदिक मंत्रों का उच्चारण होता रहा। राजतिलक के बाद विश्वराज सिंह मेवाड़ ने सबसे अभिवादन किया। प्रक्रिया पूरी होने के बाद महाराणा विश्वराज सिंह ने कुलदेवी बाण माता के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और उसके बाद उदयपुर के लिए रवाना हो गए।

बच्चों के साथ कर रहे पढ़ाई, राजस्थान-चित्तौड़गढ़ में 81 की उम्र में लॉ करने सरपाल सिंह रोज जा रहे कॉलेज

चित्तौड़गढ़. जिंदा रहने के लिए जीवन में शौक जरूरी है। जीने के लिए काम करता रहता हूं। पढ़ाई को मैंने शौक बनाया इसलिए अब लॉ की पढ़ाई कर रहा हूं। काम करते रहने से स्पीड बनी रहती है। जीवन में इससे अनुभव भी मिलता है। यह कहना है चितौड़गढ़ शहर के प्रतापनगर निवासी सरपाल सिंह अरोड़ा (सिक्ख) का, जिन्होंने 81 साल की उम्र में एलएलबी प्रथम वर्ष के लिए प्रवेश लिया है और अपने पौत्र और पौत्री की उम्र के बच्चों के साथ बैठकर रोजाना लॉ कॉलेज आकर पढ़ाई कर रहे हैं। लॉ करने का जुनून इतना कि बीए में अंक कम होने के कारण लॉ में प्रवेश मिलना मुश्किल था तो हिस्ट्री विषय में एमए प्रथम श्रेणी से पास की। इस उम्र में पढ़ाई के प्रति जुनून से वे आज के युवाओं को पढ़ाई के प्रति प्रेरित कर रहे हैं। जानकारी में सामने आया कि चित्तौड़गढ़ शहर के प्रतापगढ़ निवासी सरपाल सिंह अरोड़ा धनेत मार्ग स्थित लॉ कॉलेज में एडमिशन के लिए पहुंचे तो यहां के स्टाफ को काफी आश्चर्य हुआ। यहां के प्राचार्य एसडी व्यास ने अपने नए वयोवृद्ध स्टूडेंट से बात की तो इनके जुनून को देखते हुए वे काफी प्रभावित हुए। नई जनरेशन के स्टूडेंट की तरह इनमें भी सीखने की ललक दिखी। सरपाल सिंह अरोड़ा ने इसी साल एडमिशन लिया। वे इस उम्र में भी नियमित लॉ कॉलेज आ रहे हैं। अपनी उम्र से काफी छोटे विद्यार्थियों के साथ बैठकर नियमित पढ़ाई करना आश्चर्यजनक है। इस उम्र में लॉ करने का जज्बा इन्हें उन लोगों से अलग दिखाता है, जो एक उम्र के बाद शिक्षा और शौक से दूर हो जाते हैं। वहीं सरपालसिंह अरोड़ा ने लॉ की पढ़ाई करने के लिए इससे पहले एमए किया। इन्होंने लॉ करने के लिए अपने परिचित एमएलवी कॉलेज के व्याख्याता से राय ली, जिन्होंने इनका मार्गदर्शन किया था। एलएलबी के बाद करनी है पीएचडी अरोड़ा का कहना है कि पढ़ाई करने की कोई उम्र नहीं होती है। किसी भी उम्र में पढ़ाई करके डिग्री हासिल कर सकते हैं। पढ़ाई में उन्हें कोई दिक्कत नहीं होती है। पढ़ाई करते समय अब जरूर चश्मा लगाना पड़ता है। एलएलबी करने के बाद पीएचडी करनी है। अरोड़ा ने बताया कि उनके दो पुत्र हैं और दोनों इंजीनियरिंग पार्ट्स की बिक्री से जुड़े हैं। पौत्र और पौत्री की पढ़ाई भी पूरी हो चुकी है लेकिन इन्हें इस उम्र में एजुकेशन लेने में किसी प्रकार की शर्म नहीं है। 40 साल बाद फिर देखी कॉलेज की चौखट सरपाल सिंह अरोड़ा ने बताया कि उनका जन्म 3 फरवरी 1945 को हुआ था। उन्होंने 1984 में बीए पूरी की थी। 1972 में परीक्षा दी लेकिन एक विषय में सप्लीमेंट्री आई थी। इसके दस साल बाद इस विषय की परीक्षा देकर बीए उत्तीर्ण की थी। अब उन्होंने करीब 40 साल बाद फिर से कॉलेज की चौखट देखी है। यंग जनरेशन से सीखने को मिलता है अपने पौत्र और पौत्री की उम्र के बच्चों के साथ बैठकर शर्म महसूस करने के सवाल पर अरोड़ा ने बताया कि क्लास में बच्चे उनका सम्मान करते हैं। कालांश बदलता है तो बच्चों के साथ वे हंसी-मजाक करते हैं। किसी भी प्रकार से अजीब महसूस नहीं होता। इनसे ज्ञान भी लेते रहते हैं। यंग जनरेशन की याददाश्त अच्छी है। इनसे सीखने को भी मिलता है। कॉलेज में भी अनुशासन अच्छा है। अपना केस खुद लडूंगा सरपालसिंह अरोड़ा ने बताया कि मुझे पढ़ना है इसलिए मैं नियमित कॉलेज आता हूं। भूखंड विवाद का एक मामला न्यायालय में चल रहा है। आने वाले समय में अपना केस मैं स्वयं लड़ना चाहता हूं। वाहे गुरु पर भरोसा, जिंदा रखेंगे इस उम्र में स्वास्थ्य पर ध्यान देने के सवाल पर अरोड़ा ने बताया कि उन्हें वाहे गुरु पर पूरा भरोसा है। वे जिंदा भी रखेंगे और लॉ की पढ़ाई भी पूरी करवाएंगे। आगे उन्होंने कहा कि एक उम्र के बाद भी जिंदा रहने के लिए कुछ ना कुछ करते रहना चाहिए। कम ही दिखता है ऐसा जुनून महाराणा प्रताप लॉ कॉलेज के प्राचार्य एसडी व्यास ने बताया कि इस उम्र में पढ़ाई का जुनून कम ही दिखाई देता है। जब सरपाल सिंह प्रवेश के लिए आए तब सीट पूरी हो चुकी थी, प्रवेश की तिथि भी निकल गई थी। बाद में सीट भी बढ़ी और प्रवेश की तिथि भी तो इन्हें कॉल करके बुलाया। कक्षा में भी युवा विद्यार्थी की तरह इनमें सीखने की ललक दिखाई देती है।

तीन युवतियों सहित चार गिरफ्तार, राजस्थान-चित्तौड़गढ़ में रेलवे स्टेशन के पास होटल में वेश्यावृत्ति

चित्तौड़गढ़. शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र में आने वाले एक होटल में वेश्यावृत्ति का गोरख धंधा चलाया जा रहा था। मुखबिर की सूचना के बाद चित्तौड़गढ़ पुलिस उप अधीक्षक विनय कुमार के नेतृत्व में जाप्ते ने होटल पर छापा मारा। पहले बोगस ग्राहक बना कर भेजा गया। पुलिस की टीम ने होटल से तीन युवतियों सहित कुल चार जनों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी होटल मालिक बताया गया है, जो कि काउंटर पर भी मौजूद था। मामले में अनुसंधान अधिकारी चित्तौड़गढ़ डिप्टी आरोपितों से पूछताछ में जुटे हैं। चित्तौड़गढ़ पुलिस उप अधीक्षक विनय कुमार चौधरी ने बताया कि कोतवाली थाना क्षेत्र में आने वाले एक होटल पर वेश्यावृत्ति की करवाई जा रही है। होटल मालिक बाहर से युवतियों को बुलवा कर वेश्यावृति करवा रहा है। इस सूचना के आधार पर पुलिस टीम रेलवे कॉलोनी आदर्श नगर पहुंची। डिप्टी मय जाप्ते के होटल से पहले ही रुक गए। यहां श्रीराम किराना के ऊपर होटल दूसरे तल पर वेश्यावृत्ति की जा रही थी। मौके पर एक बोगस ग्राहक बना कर भेजा गया। यहां वेश्यावृत्ति चलने की पुष्टि होने के बाद तथा बोगस ग्राहक का इशारा पाने के बाद डिप्टी चित्तौड़गढ़ ने जाप्ते के साथ होटल को घेर लिया। होटल पर छापा मार कर कमरों की तलाशी ली। यहां काउंटर पर रामावतार मीणा भी मिला। यहां कमरों की तलाशी में पुलिस ने तीन युवतियों को गिरफ्तार कर लिया। इसके अलावा रामावतार मीणा को भी गिरफ्तार किया है, जो की होटल मालिक बताया जा रहा है। पुलिस गिरफ्तार चारों आरोपितों को कोतवाली थाने लेकर आई है, जिनसे पूछताछ जारी है। कोतवाली थाने पर अनैतिक देह व्यापार अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है। मामले में अनुसंधान चित्तौड़गढ़ पुलिस उप अधीक्षक विनय कुमार चौधरी की ओर से किया जा रहा है।

अवैध कारोबार में आसपास के तीन मकान जले, राजस्थान-चित्तौड़गढ़ के घर में वैन से पेट्रोल भरे ड्रम उतारते समय लगी आग

चित्तौड़गढ़. चित्तौड़गढ़ शहर में आबादी के बीच पेट्रोलियम पदार्थ का अवैध धंधा करने वाले एक आदमी की लापरवाही के कारण तीन मकानों में आग लग गई। इसमें एक मकान तो पूरी तरह से जल गया, जबकि दो मकान में भी नुकसान की बात सामने आई है। मामले की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंची दमकल ने आग पर काबू पाया। आगजनी में एक वैन कबाड़ में तब्दील हो गई। मकान में पेट्रोलियम पदार्थ से भरे ड्रम रखे हुए थे, जो काफी देर तक जलते रहे। कोई जनहानि नहीं होने से सभी ने राहत की सांस ली है। आरोपित मौके से भागने में सफल रहा, जिसकी पुलिस तलाश में जुटी हुई है। जानकारी में सामने आया कि चित्तौड़गढ़ शहर के सदर थाना क्षेत्र में आने वाले सेवा हाउसिंग बोर्ड के तिलक नगर में बीती रात को यह हादसा हुआ। यहां एक मकान में सतपाल सोनी उर्फ सरदारजी रहते हैं जिस पर अवैध पेट्रोलियम पदार्थ के कारोबार का आरोप है। बीती रात को एक वैन में पेट्रोलियम पदार्थ से भरे ड्रम मकान में खाली किए जा रहे थे। इसी दौरान अचानक आग लग गई। आग सतपाल सोनी के मकान में फैल गई, जहां पहले से ही कई ड्रम रखे थे। पेट्रोलियम पदार्थ में आग से लपटे उठने लगी। यह देख कर मोहल्ले में हड़कंप मच गया। सतपाल सोनी और इसके यहां काम करने वाले लोग तो मौके से भाग गए। क्षेत्र के लोगों ने आगजनी की सूचना दमकल के लिए की। इस पर नगर परिषद की दमकल मौके पर पहुंची और आग पर काबू करने का प्रयास किया गया। बताया गया कि वैन में भी पेट्रोलियम पदार्थ से भरे ड्रम रखे हुए थे, जिससे आग तेजी से भभकी। इससे सामने स्थित अरुण तिवारी और दीपक खांडेकर के मकान पर भी आग पहुंच गई। इससे मकान के बाहरी हिस्से में नुकसान हुआ है। यहां एसी और वायरिंग जलने के अलाव अन्य सामान जल गया। सूचना पर सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची है। पुलिस फिलहाल मामले की जांच में जुटी हुई है। हादसे में एक मकान तो पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। फिलहाल इस हादसे में नुकसान का आंकलन निकाला जा रहा है। इधर, क्षेत्र के लोगों ने बताया कि सतपाल सोनी उर्फ सरदारजी लंबे समय से अवैध पेट्रोलियम पदार्थ का कारोबार कर रहा था। इसकी शिकायत भी कई बार की गई थी। साथ ही सतपाल सोनी को भी उलाहना दिया था लेकिन उस पर भी कोई फर्क नहीं पड़ा। समय रहते इस मामले में कार्रवाई हो जाती तो इतना बड़ा हादसा नहीं होता।

वन विभाग को भदेसर में मिली सफलता, राजस्थान-चित्तौड़गढ़ में बकरी के लालच में पिंजरे में फंसा तेंदुआ

चित्तौड़गढ़. जिले के भदेसर उपखंड क्षेत्र में कुछ दिनों से जनता के लिए चिंता का विषय बना तेंदुआ आखिर वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गया। बकरी के लालच में यह तेंदुआ पिंजरे में आ गया। इसकी जानकारी मिली तो मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। लोगों को दूर करने के लिए भदेसर थानाधिकारी मय जाप्ते के मौके पर पहुंचे। तेंदुए को अब चित्तौड़गढ़ लाया जा रहा है, जिसे वन विभाग की सेमलपुरा स्थित नर्सरी में रखा जाएगा। बाद में उसे प्राकृतिक आवास पर छोड़ा जाएगा। जानकारी में सामने आया कि चित्तौड़गढ़ जिला मुख्यालय से करीब 25-30 किलोमीटर दूर स्थित भदेसर उपखंड मुख्यालय के आस-पास तेंदुए का मूवमेंट था। इसे देख कर लोगों में दहशत व्याप्त थी। क्षेत्र के लोगों की मांग और सुरक्षा को देखते पिंजरा लगाने का निर्णय किया था। इस पर उपवन संरक्षक विजय शंकर पांडे के निर्देश पर एक पिंजरा भदेसर कस्बे में थाने के पीछे कस्बे से बाहर घाटी के जंगल में लगाया गया था। यह पिंजरा मंगलवार को ही लगा दिया था। फ्लाइंग रेंजर नेपालसिंह के नेतृत्व में टीम तेंदुए पर नजर रखे हुई थी। वहीं, शुक्रवार को इसमें बकरी को बांधा गया था। शुक्रवार शाम तेंदुए के पिंजरे में कैद होने के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। लोग पिंजरे के पास जाने लगे। इस पर भदेसर सीआई मोतीराम सारण मय जाप्ते के मौके पर पहुंचे। लोगों को पिंजरे से दूर भगाने के लिए पुलिस को मशक्कत करनी पड़ी। वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंच गई। बाद में पिंजरे को वाहन में रख कर चित्तौड़गढ़ भेजने की तैयारी की जा रही है। आखिर चौथे दिन जाकर मिली सफलता तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरे में वन विभाग की टीम ने बकरी को बांधा था। इसकी खुशबू और शिकार के लालच में तेंदुआ पिंजरे तक खींचा चला आया। चार दिन से पिंजरा लगा हुआ था और शुक्रवार को सफलता मिल गई। इसके बाद सभी ने राहत की सांस ली है। वहीं वन विभाग की टीम ने बकरी को सुरक्षित निकाल कर उसके मालिक को सौंप दिया।

रेस्क्यू कर प्राकृतिक आवास में छोड़ा, राजस्थान-चित्तौड़गढ़ में 70 फीट गहरे कुएं में गिरा 11 फीट लंबा इंडियन रॉक पाइथन

चित्तौड़गढ़. जिला मुख्यालय से 25 किमी दूर बस्सी कस्बे के 70 फीट गहरे कुएं में गिरे अजगर को वन विभाग की टीम ने सुरक्षित रूप से रेस्क्यू कर लिया है। करीब 2 घंटे तक चले इस अभियान में रेस्क्यू टीम के सदस्य ने पहले कुएं में लगी एक लोहे की एंगल पर छलांग लगाई और इसी पर खड़े रहकर बिना नुकसान पहुंचाए अजगर को रेस्क्यू किया। इस पूरे अभियान का एक वीडियो भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार चित्तौड़गढ़ से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित बस्सी कस्बे के कुएं में 11 फीट लंबा इंडियन रॉक पाइथन (अजगर) गिरा हुआ था, जिसकी जानकारी ग्रामीणों ने वन विभाग को दी। इस पर उपवन संरक्षक विजय शंकर पांडे के निर्देश पर मनीष तिवारी के निर्देशन में टीम मौके पर पहुंची। टीम ने मौके का आकलन किया और अजगर को सुरक्षित निकालने के लिए योजना तैयार की। 70 फीट गहरे इस कुएं में करीब 55 फीट तक पानी भरा हुआ था और इससे ऊपर केवल 15 फीट का हिस्सा सूखा हुआ था। कुएं में स्थान नहीं होने से अजगर लगातार पानी में तैर रहा था। पहले तो टीम ने रस्सी व अन्य साधनों से रेस्क्यू ऑपरेशन की योजना बनाई और प्रयास भी किए लेकिन सफल नहीं हो पाए। बाद में टीम के एक साथी को कुएं में उतारने का निर्णय किया। इस पर साहस दिखाते हुए मुबारिक खान रस्सी बांधकर कुएं में लगी लोहे की एंगल पर कूदा और वहीं खड़े रहकर करीब 6 मिनट की मशक्कत के बाद अजगर को रेस्क्यू करके कुएं से बाहर निकाला। वन विभाग ने अजगर को इसके प्राकृतिक आवास पर छोड़ दिया है। डसने के लिए लपका था अजगर अजगर का यह रेस्क्यू रात करीब 10.30 बजे हुआ था। इस दौरान घना अंधेरा था और टॉर्च की रोशनी में किया गया। रेस्क्यू टीम के सदस्य मुबारिक खान ने कुएं में उतरकर जब अजगर की पूंछ पकड़कर उसे काबू करने का प्रयास किया तो इस दौरान अजगर मुबारिक पर डसने के लिए लपका लेकिन सतर्क रहने के कारण उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा। बाद में रामकुमार के सहयोग से अजगर को सुरक्षित कुएं से बाहर खींच लिया गया।

सुबह किया सुरक्षित रेस्क्यू, राजस्थान-चित्तौड़गढ़ में रात को घर में घुसा मगरमच्छ

चित्तौड़गढ़. चित्तौड़गढ़ जिले के बस्सी क्षेत्र में आने वाले धोरडिया गांव में एक परिवार के सदस्य सोमवार सुबह उस समय हक्के-बक्के रह गए। जब घर में करीब पांच फीट लंबा मगरमच्छ दिखा। इसे देखकर सभी के होश उड़ गए। तत्काल वन विभाग को इसकी जानकारी दी गई। इस पर उपवन संरक्षक के निर्देश पर एक टीम मौके पर पहुंची तथा मगरमच्छ का रेस्क्यू किया। यह मगरमच्छ रात को ही बाड़े के रास्ते से घर में घुस गया था। गनीमत रही कि इसने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। जानकारी में सामने आया कि धोरडिया निवासी रामलाल गुर्जर के मकान में सोमवार सुबह करीब सात बजे एक मगरमच्छ बरामदे में दिखाई दिया। गांव में रहने वाले इसके रिश्तेदार घर पहुंचे थे तो बच्चों के झूले के पास यह मगरमच्छ था। इसे देख कर महिला रिश्तेदार चिल्लाई। इस पर रामलाल गुर्जर के परिवारजन और आस-पड़ोस के लोग भी मौके पर एकत्रित हो गए। बाद में वन विभाग को इसकी जानकारी दी गई। इस पर उपवन संरक्षक विजय शंकर पांडे के निर्देश पर मनीष तिवारी के नेतृत्व में एक रेस्क्यू दल मौके पर पहुंचा। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद मगरमच्छ को रेस्क्यू कर लिया गया। वन विभाग ने इसे बस्सी सेंचुरी के निकट बांध में छोड़ने का निर्णय किया है। ऐसे में इस मगरमच्छ को बस्सी सेंचुरी में छोड़ा जाएगा। इधर, जानकारी मिली है कि रामलाल गुर्जर के मकान का दरवाजा बंद था। इससे आशंका जताई जा रही है कि पीछे बाड़े के रास्ते से मगरमच्छ घर में आया हो। लेकिन गनीमत यह रही  कि मगरमच्छ ने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। वरना बड़ी घटना हो सकती थी। धोरडिया गांव के निकट ही बेडच नदी बहती है, जबकि गांव के पास एक नाला है जो नदी से जुड़ा हुआ है। आशंका है कि मगरमच्छ नदी से नाले में होते हुए गांव में पहुंचा हो। घर से नाले की दूरी करीब आधा किलोमीटर बताई गई है। मगरमच्छ के किसी पर हमला नहीं करने और सुरक्षित रेस्क्यू कर लेने से सभी ने राहत की सांस ली है। मौके पर टीम में वन विभाग से नाथू सिंह सहित मनीष तिवारी, पीयूष कामले, रामकुमार साहू, मुबारिक खान, कन्हैया लाल सालवी रेस्क्यू करने पहुंचे।

150 कैमरों के फुटेज खंगालकर पहुंची पुलिस, राजस्थान-चित्तौड़गढ़ में चेन स्नेचिंग के दो आरोपी पकडे

चित्तौड़गढ़. शहर के सदर थाना इलाके में फव्वारा चौक में गत दिनों हुई चेन स्नेचिंग की वारदात का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इसमें दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, इनमें से एक के खिलाफ इससे पहले भी 34 प्रकरण दर्ज हैं तथा महाराष्ट्र की तीन वारदातों में भी वह वांछित चल रहा है। फिलहाल चित्तौड़गढ़ पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ में जुटी है। पुलिस अधीक्षक सुधीर जोशी ने बताया कि शहर के सदर थाना इलाके में बीती 6 अक्टूबर को चेन स्नेचिंग की वारदात हुई थी, इसमें अज्ञात बदमाश प्रताप नगर निवासी रतनदेवी खाब्या की चेन झपटकर ले गए थे। मामले में पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर वारदात के खुलासे के लिए सदर थाना पुलिस व साइबर सेल की संयुक्त टीम का गठन किया, जिसने वारदात के खुलासे के लिए विभिन्न तकनीकी साधनों का उपयोग करते हुए करीब 150 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले और संदिग्ध बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी। पुलिस ने मामले में बेगूं के आखरिया चौक निवासी रणजीत उर्फ राजवीर पुत्र बंशीलाल खटीक तथा निम्बाहेड़ा के राठाजना हाल बेगूं निवासी चंद्रसिंह उर्फ चिंटू पुत्र शंकरसिंह राजपूत को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने वारदात में प्रयुक्त बाइक को बरामद कर लिया है तथा आरोपियों से पूछताछ कर चेन बरामदगी के प्रयास किए जा रहे हैं। गिरफ्तार आरोपित रणजीत शातिर चेन स्नेचर व बाइक चोर है। इसने अलग-अलग राज्यों में 40 वारदातें कबूल की हैं, वहीं महाराष्ट्र के तीन प्रकरणों में भी यह वांछित चल रहा है।

पंचायत समिति के निरीक्षण में हादसा, राजस्थान-चित्तौड़गढ़ में शिक्षा मंत्री दिलावर पर मधुमक्खियों का हमला

चित्तौड़गढ़. राजस्थान के रावतभाटा से बड़ी खबर सामने आई है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर शुक्रवार को श्रीपुरा में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे। यहां भैंसरोडगढ़ पंचायत समिति का निरीक्षण भी किया। इसी दौरान जब मंत्री शौचालय का निरीक्षण करने गए तो उन पर मधुमक्खियों ने हमला कर दिया। उनके साथ वहां मौजूद कई अन्य लोगों को भी मधुमक्खियों ने डंक मार दिया। मंत्री के ऊपर अचानक हुए इस हमले के बाद वहां अफरा-तफरी मच गई। मधुक्खियों के इस हमले में मंत्री के साथ-साथ कई अधिकारी भी घायल हुए। आनन-फानन में मंत्री और अन्य अधिकारियों को अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने मंत्री दिलावर को इंजेक्शन लगाए, ताकि उन्हें इंफेक्शन से बचाया जा सके। फिलहाल मंत्री का ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है। उनको चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। मंत्री श्रीपुरा में आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे थे। वहीं पर ये हादसा हुआ। गुरुवार को मंत्री दिलावर ने कोटा में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) के नवीन भवन का भूमि पूजन किया था, जहां उन्होंने प्रदेश में डेढ़ लाख शिक्षकों की भर्ती और शिक्षा सुधार की योजनाओं की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि जो नियुक्तियां अटकी हुई हैं, उनकी बाधाओं को दूर कर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाएंगी।

कंधे पर अर्थी रख कमर तक पानी से गुजरते हैं लोग, राजस्थान-चित्तौड़गढ़ में संघर्षभरी अंतिम यात्रा

चित्तौड़गढ़. चित्तौड़गढ़ जिले के राशमी कस्बे के निकटवर्ती कीरखेड़ा में बरसात के दिनों में किसी की मौत होने पर अंतिम यात्रा में लोगों को काफी संघर्ष करना पड़ता है। कंधों पर अर्थी को लेकर कमर या उससे अधिक गहरे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। यह समस्या विगत डेढ़ दशक से व्याप्त है। इसके बावजूद लोगों के सुविधाजनक रास्ता बनाने को लेकर जनप्रतिनिधियों या प्रशासन की ओर से वर्षों बाद भी गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। इसका खामियाजा क्षेत्र के लोगों को उठाना पड़ता है। आलम यह हो जाता है कि लोगों को बरसात के दिनों में अर्थी को कंधे पर लेकर पानी से होकर निकलना पड़ता है। ऐसे ही हालात की बानगी बुधवार को भी देखने को मिली है। यहां कीरखेड़ा में किसी की मौत होने पर अंतिम यात्रा बनास नदी से होकर कस्बे के श्मशान घाट तक आती है। हालांकि, कीरखेड़ा सोमी ग्राम पंचायत का गांव हैं। लेकिन कीरखेड़ा के लोग मूलत: राशमी के ही होने के कारण कस्बे के श्मशान घाट पर ही शव का अंतिम संस्कार किया जाता है। कीरखेड़ा निवासी मोहनी बाई कीर मंगलवार रात को मौत हो गई थी। इसका अंतिम संस्कार बुधवार को हुआ। सभी रिश्तेदारों के आने के बाद अर्थी लेकर श्मशान के लिए निकले। अर्थी को बनास नदी से होकर श्मशान घाट लाया गया। इस दौरान अंतिम यात्रा में शामिल होने वाले परिजनों एवं रिश्तेदारों को करीब दो से तीन फीट गहरे पानी से होकर गुजरना पड़ा। नदी की चौड़ाई करीब 300 मीटर है। इससे लोगों में खासा आक्रोश भी दिखा। वर्षों पुरानी मांग है, लेकिन उसे पूरा नहीं किया जा रहा है। कीर समाज के जिलाध्यक्ष रतनलाल कीर ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार उच्च स्तर पर भी अवगत कराया गया। लेकिन अभी तक रास्ते की समस्या जस की तस है। रतनलाल के अनुसार, यहां पक्का काजवे बना कर या कस्बे से बनास नदी पर बख्तावर पुरा के रास्ते बने एनिकट से पक्का रास्ता बना कर समस्या से निजात दिलाई जा सकती है। पक्का रास्ता नहीं होने से ग्रामणों में आक्रोश है। जब भी बरसात के दौरान किसी का निधन होता है, तब इस समस्या से जूझना पड़ता है।

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