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1300 से ज्यादा बेबी किट का वितरण, राजस्थान-जयपुर कलक्टर के निर्देश पर सक्षम अभियान में बेटी का मनाया जन्मोत्सव

जयपुर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर जयपुर जिले में जारी सक्षम जयपुर अभियान आधी आबादी के पूर्ण विकास का दूसरा नाम बन गया है। जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी के नेतृत्व में जिला प्रशासन द्वारा बालिकाओं एवं महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। महिला अधिकारिता विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजेश डोगीवाल ने बताया कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के ध्येय को साकार करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा सक्षम जयपुर अभियान के तहत बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने एवं महिला सशक्तिकरण की दिशा में अहम कदम उठाये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अभियान के तहत समाज में बेटी के जन्म को जन्मोत्सव के रूप में मनाये जाने की अवधारणा को पल्लवित करने के लिए जनजागरुकता फैलाई जा रही है। जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी के निर्देशों की अनुपालना में कन्या जन्मोत्सव के तहत आंगबाड़ी एवं अस्पतालों में कन्या जन्म पर विगत एक महीने में 1300 परिवारों को बेबी किट का वितरण किया गया, साथ ही, नवजात कन्या के नाम पर ही पंचायत में पौधारोपण भी किया गया है। डॉ. डोगीवाल ने जानकारी दी कि बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जयपुर जिला प्रशासन ने अनूठी पहल करते हुए गणतंत्र दिवस पर आयोजित समारोह में 5 हजार 769 होनहार छात्राओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इतना ही नहीं, कई समारोह में 10वीं एवं 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में टॉप तीन में स्थान हासिल करने वाली प्रतिभावान बालिकाओं के अभिभावकों को भी सम्मानित कर बालिका शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया गया। साथ ही, उन्होंने बताया कि सक्षम जयपुर अभियान के तहत जयपुर की 36 पीएम श्री विद्यालयों में जागरुकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जिसके अंतर्गत जिसमें प्रशिक्षकों द्वारा बालिकाओं को गुड टच, बैड टच, आत्मरक्षा प्रशिक्षण के साथ-साथ महत्वपूर्ण कानूनों की भी जानकारी प्रदान की गई। इन जागरुकता कार्यक्रम से जिले की 8 हजार से अधिक छात्राओं को लाभांवित कर जयपुर जिला प्रशासन द्वारा बालिका शिक्षा एवं महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किये गए।

पक्षियों और जैव विविधता पर फील्ड विजिट में जुटाई जानकारी, राजस्थान-जयपुर बर्ड फेस्टिवल का समापन

जयपुर। राज्य में हो रहे बर्ड फेस्टिवल की श्रृंखला में पहली बार ग्रीन पीपल सोसाइटी उदयपुर (जयपुर चैप्टर) द्वारा शनिवार से जामडोली के समीप कानोता केम्प में आयोजित हुए जयपुर बर्ड फेस्टिवल-2025 के दूसरे दिन विशेषज्ञों व पक्षी प्रेमियों ने फील्ड विजिट के माध्यम से पक्षियों का रंगीन संसार निहारा। फील्ड विजिट के साथ ही बर्ड फेस्टिवल का समापन भी हुआ। बर्ड फेस्टिवल संयोजक व रिटायर्ड आईएएस विक्रम सिंह ने बताया कि वन विभाग, पर्यटन विभाग, जयपुर विकास प्राधिकरण, रीको तथा डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के सहयोग से आयोजित हुए  इस बर्ड फेस्टिवल के दूसरे दिन विश्व वेटलैंड दिवस के अवसर पर  विशेषज्ञ व पक्षी प्रेमियों के चार दलों ने जयपुर के आसपास के वेटलैंड्स का भ्रमण किया और यहां पर पक्षी प्रजातियों की उपस्थिति और जैव विविधता के बारे में जानकारी संकलित की। सिंह ने बताया कि पहला दल पक्षी विज्ञानी  डॉ. सतीश कुमार शर्मा के नेतृत्व में सांभर झील, नालियासर, झपका तालाब, कोचिया की ढाणी पहुंचा जहां पर फ्लेमिंगो, पेलिकन, एवोसेट, कॉमन टील, नॉदर्न शोवलर, यूरेशियन विजन, स्पॉट बिल्ड डक, स्पून बिल सहित कई पक्षी प्रजातियों को देखा। इस दल में रिटायर्ड डीएफओ सोहेल मजबूर, पक्षी विशेषज्ञ वीरेंद्र सिंह बेडसा, डॉ. कमलेश शर्मा, शरद श्रीवास्तव, जयवर्धन सिंह आदि शामिल थे। इसी प्रकार दूसरा दल राहुल भटनागर और डॉ. बाशोबी भटनागर के नेतृत्व में रणथंभौर अभयारण्य, तीसरा दल प्रदीप सुखवाल के नेतृत्व में केवलादेव घना अभयारण्य और चौथा दल तितली विशेषज्ञ मुकेश पंवार, रमा कुमारी व पुष्पा खमेसरा के नेतृत्व में झालाना अभयारण्य पहुंचा और यहां पर पक्षी प्रजातियों और अन्य जैव विविधता के बारे में जानकारी एकत्र की।

‘शिविर में प्रत्येक किसान का रजिस्ट्रेशन हो सुनिश्चित’, राजस्थान-जयपुर कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार ने अधिकारियों को दिये दिशा निर्देश

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन में किसानों को सशक्त करने के लिए उन्हें डिजिटल रूप से सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। एग्रीस्टैक योजना में किसान रजिस्ट्री प्रोजेक्ट को आगामी 5 फरवरी से सम्पूर्ण राजस्थान में लागू किया जाएगा। इस योजना के तहत जयपुर सहित राज्य के सभी जिलों में शिविर आयोजित किये जायेंगे, जहाँ किसानों को फार्मर रजिस्ट्री आई.डी. बनवाने में सहयोग प्रदान किया जायेगा। जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को जयपुर जिले में किसान रजिस्ट्री शिविरों के सफल आयोजन एवं जिले के समस्त किसानों का एग्रीस्टैक पर रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया है। उन्होंने शिविरों के व्यापक प्रचार प्रसार के भी निर्देश दिये हैं ताकि जिले के प्रत्येक किसान को ना केवल शिविरों के आयोजन की जानकारी हो बल्कि शिविरों में किसान फार्मर आर्डडी बनाने के साथ-साथ अन्य विभागीय योजनाओं से लाभांवित हों सकें। प्रातः 9ः30 बजे से सायं 5ः30 बजे तक होगा शिविरों का आयोजन- अतिरिक्त जिला कलक्टर श्रीमती सुमन पंवार ने बताया कि एग्रीस्टैक योजनांतर्गत जयपुर में किसान रजिस्ट्री अभियान का आयोजन ग्राम स्तर पर 5 फरवरी से 31 मार्च 2025 तक किया जायेगा। इसके तहत ग्राम पंचायत स्तर पर आयोजित शिविरों में किसानों की विशिष्ट किसान आईडी बनाई जायेगी। शिविरों का आयोजन प्रातः 9ः30 बजे से सायं 5ः30 बजे तक किया जाएगा। शिविर में किसान आईडी तैयार करने के साथ साथ प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना, मुख्यमंत्री आरोग्य आयुष्मान योजना, किसान क्रेडिट कार्ड मंगला पशु बीमा योजना, पशु टीकाकरण, पशु चिकित्सा एवं उपचार सहित पशु पालन विभाग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग सहित अन्य विभागों की योजनाओं से भी किसानों को लाभांवित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभियान के अंतर्गत प्रत्येक किसान को विशिष्ट फार्मर आईडी 11 अंकों की प्रदान की जायेगी। किसानों द्वारा आईडी बनवाने के लिये आधार कार्ड, जमाबंदी, मोबाईल नम्बर की जरूरत होगी। भविष्य में किसानों को सरकारी योजनाओं व सेवाओं तक आसान पहुंच करने, प्रधानमंत्री किसान/मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, कृषि विभाग की अन्य योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिये फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से प्राप्त आईडी उपयोगी होगी। बेहद सरल है किसान आईडी बनवाने की प्रक्रिया – शिविर कार्यक्रमानुसार 05 फरवरी 2025 से राज्य में सभी ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर शिविर आयोजित करवाये जा रहे है। आपकी कृषि भूमि से संबंधित ग्राम पंचायत के शिविर में जाकर फार्मर आईडी बनवा सकते है। फार्मर आईडी बनाने के लिए किसान को महज अपना आधार कार्ड, आधार से लिंक्ड मोबाइल नम्बर वाला फोन और नवीनतम जमाबंदी लेकर शिविर में आना होगा। अपनी ग्राम पंचायत में शिवर कार्यक्रम की जानकारी www.rjfr.agristack.gov.in पोर्टल पर जाकर प्राप्त की जा सकती है। हर किसान को मिलेगी 11 अंकों की एक विशिष्ट पहचान – किसान रजिस्ट्री, एग्रीस्टैक परियोजना के तहत कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय भारत सरकार की एक पहल है। कृषक विवरण (कृषक का जनसांख्यिकीय विवरण, उसके द्वारा धारित कृषि भूमि का विवरण, प्रत्येक कृषि भूखण्ड के जीपीएस निर्देशांक, उस पर बोई गई फसलों का विवरण आदि) को डिजिटल इंफास्ट्रक्चर में संकलित किया जाकर, प्रदेश के प्रत्येक किसान को ’आधार’ आधारित एक 11 अंकों की एक यूनिक आईडी (विशिष्ट किसान आईडी) आवंटित की जाएगी, जिससे किसान डिजिटल रूप से अपनी पहचान प्रमाणित कर सकेंगे। किसान आईडी डिजिटली सत्यापन योग्य पहचान है, जिसे -www.rjfr.agristack.gov.in पोर्टल पर जाकर प्राप्त कर सकते है। फार्मर आईडी जनरेट होने के बाद भूमि संशोधन (खसरा जोड़ने या हटाने) के लिए पटवारी, भू-अभि. निरीक्षक या तहसीलदार से सम्पर्क किया जा सकता है। इस हेतु मोबाइल एप/वेबसाइट द्वारा प्रदेश के समस्त कृषकों के स्वामित्व वाले सभी खसरों को सम्मिलित करते हुए कृषक के ’आधार’ से लिंक कराया जायेगा, तत्पश्चात कृषक से ऑनलाइन सहमति प्राप्त करते हए ई-हस्ताक्षर की कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। इसलिए उपयोगी है किसान रजिस्ट्री – भविष्य में प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि, कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए फार्मर आईडी आवश्यक है। राज्य एवं भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ सीधे पात्र किसानों को प्रदान करने के लिए फार्मर आईडी आवश्यक होगी। भविष्य में नामांतरणकरण एवं क्रय-विक्रय पंजीयन की प्रक्रिया में भी फार्मर आईडी आवश्यक होगी। किसान रजिस्ट्री से किसानों को लाभ – किसान आईडी (बिना अतिरिक्त दस्तावेज) के माध्यम से सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं तक पहुंच आसान हो सकेगी। पात्र किसान का प्रधानमंत्री-किसान/मुख्यमंत्री-किसान सम्मान निधि योजना, अन्य योजनाओं में स्वतः जुड़ना सम्भव होगा। किसानों से फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्यों एवं अन्य योजनाओं में त्वरित (बिना किसी अतिरिक्त दस्तावेज के) खरीद संभव हो सकेगी। किसान की फसल के अनुसार डिजिटल तरीके से फसलों का बीमा संभव होगा।

‘देश और प्रदेश की उन्नति में युवाओं का अहम योगदान: भजनलाल शर्मा’, राजस्थान-मुख्यमंत्री ने 16वीं जयपुर मैराथन को दिखाई हरी झंडी

जयपुर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान शक्ति, भक्ति और स्वाभिमान का प्रदेश है। यहां का युवा विश्वास और कड़ी मेहनत से आगे बढ़ रहा है। राजस्थान को देश का अग्रणी प्रदेश बनाने के संकल्प में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।राज्य सरकार भी युवाओं के सपनों को साकार करने का पूर्ण प्रयास कर रही है। शर्मा ने रविवार को जयपुर में आयोजित 16वीं जयपुर मैराथन को झंडी दिखाकर रवाना किया।उन्होंने कहा कि इस तरह की मैराथन का आयोजन बहुत आवश्यक है। इससे स्वस्थ रहने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कियुवाओं का देश और प्रदेश की उन्नति में अहम योगदान है। राजस्थान में विकास की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश शिक्षा, चिकित्सा, खनिज एवं पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों में निरन्तर प्रगति कर रहा है। राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को दे रही बढ़ावा मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश अगले वर्ष खेलो इंडिया गेम्स की मेजबानी करेगा, जिसमें युवाओं की सहभागिता महत्वपूर्ण होगी। राज्य सरकार ने खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी और संभाग स्तर पर खेल महाविद्यालय खोलने का मार्ग भी प्रशस्त किया है। उन्होंने कहा कि राइजिंग राजस्थान समिट के सफल आयोजन से जिलों में औद्योगिक निवेश आ रहा है। इससे प्रदेश के युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा। साथ ही, राज्य सरकार 4 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी के अवसर भी उपलब्ध कराएगी।श्री शर्मा ने मैराथन विजेताओं को चैक प्रदान कर सम्मानित भी किया। इस अवसर पर विधायक श्री शत्रुघ्न गौतम, उपमहापौर जयपुर नगर निगम ग्रेटर श्री पुनीत कर्णावट,जयपुर मैराथन के आयोजक श्री सुरेश मिश्रा, श्रीमती नीलम मिश्रा, वर्ल्ड ट्रेड पार्क के चैयरमेन श्री अनूप बरतरिया, कार्यकारी निदेशक एयू बैंक श्री उत्तम टिबरेवाल सहित बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय-राष्ट्रीय धावक और शहरवासी उपस्थित रहे।

विशिष्ट फार्मर आईडी बनाकर एग्रीस्टैक योजना से होंगे खुशहाल, राजस्थान-जयपुर में 5 फरवरी से फार्मर रजिस्ट्री अभियान

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में किसान समृद्ध और खुशहाल होंगे। राज्य सरकार द्वारा गत 13 दिसम्बर को अजमेर में आयोजित किसान सम्मेलन में एग्रीस्टैक योजना में फामर्स रजिस्ट्री प्रोजेक्ट के तहत किसानों के फार्मर आईडी बनाने का कार्य प्रारम्भ किया गया है। इसी कड़ी में कृषि कानूनों विभाग भारत सरकार द्वारा संचालित एग्रीस्टैक योजनांतर्गत जयपुर जिले में फार्मर रजिस्ट्री अभियान का आयोजन ग्राम पंचायत स्तर पर 5 फरवरी से शिविर आरम्भ होंगे। जिला कलेक्टर डॉक्टर जितेंद्र कुमार सोनी ने अधिकारियों को शिविरों के सफल आयोजन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अतिरिक्त जिला कलक्टर सुमन पंवार ने बताया कि भारत सरकार के कृषि विभाग द्वारा संचालित एग्रीस्टैक योजनांतर्गत जिला जयपुर में फार्मर रजिस्ट्री अभियान का आयोजन ग्राम स्तर पर 5 फरवरी से 31 मार्च 2025 तक किया जायेगा। इसके तहत ग्राम पंचायत स्तर पर आयोजित शिविरों में किसानों की विशिष्ट फार्मर आईडी बनाई जायेगी। उन्होंने बताया कि अभियान के अंतर्गत प्रत्येक किसान को विशिष्ट फार्मर आईडी 11 अंकों की प्रदान की जायेगी। किसानों द्वारा आईडी बनवाने के लिये आधार कार्ड, जमाबंदी, मोबाईल नम्बर की जरूरत होगी। भविष्य में किसानों को सरकारी योजनाओं व सेवाओं तक आसान पहुंच करने, प्रधानमंत्री किसान/मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, कृषि विभाग की अन्य योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिये फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से प्राप्त आईडी उपयोगी होगी।

मृतक आश्रितों एवं घायलों के बैंक खातों में सहायता राशि हस्तांतरित, राजस्थान-टैंकर हादसे में जिला प्रशासन संवेदनशील

जयपुर। दिल्ली-अजमेर हाईवे पर भांकरोटा के समीप 20 दिसंबर को घटित दुर्घटना को लेकर जिला प्रशासन द्वारा संपूर्ण संवेदनशीलता बरतते हुए दुर्घटना के 20 मृतकों के आश्रितों एवं 24 घायल व्यक्तियों के बैंक खातों में सहायता राशि हस्तांतरित कर दी गई है। जिला प्रशासन द्वारा 20 मृतक आश्रितों के बैंक खाते में मुख्यमंत्री सहायता कोष से एक करोड़ रुपये (प्रति मृतक आश्रित 5-5 लाख) राशि हस्तांतरित कर दी गई है एवं भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा देय 1 करोड़ 20 लाख रुपये (प्रति मृतक आश्रित 6-6 लाख) की मुआवजा राशि हस्तांतरित कर दी गई है। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री आयुष्मान दुर्घटना बीमा योजना के बीमित 11 मृतकों के आश्रितों के बैंक के खाते में योजना के तहत 55 लाख रुपये (प्रति मृतक आश्रित 5-5 लाख) की अतिरिक्त राशि हस्तांतरित की गई है। वहीं, दुर्घटना में घायल 24 व्यक्तियों के बैंक खाते में मुख्यमंत्री सहायता कोष से 24 लाख रुपये (प्रति घायल 1-1 लाख) एवं भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा देय 48 लाख रुपये (प्रति घायल 2-2 लाख) की मुआवजा राशि हस्तांतरित कर दी गई है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय राहत कोष से प्रति मृतक राशि 2 लाख एवं प्रति घायल राशि 50 हजार की आर्थिक सहायता हेतु जिला प्रशासन द्वारा जिला स्तर पर अपेक्षित आवश्यक कार्यवाही पूर्ण की जा चुकी है।

दो की मौत और बच्ची सहित तीन घायल, राजस्थान-जयपुर के डॉक्टर ने तेज रफ्तार से छह लोगों को रौंदा

जयपुर। तेज रफ्तार में कार चला रहे एक डॉक्टर ने सड़क पर चल रहे 6 लोगों को रौंद दिया। इस घटना में एक महिला सहित दो लोगों की मौत हो गई।  एक बच्ची सहित चार व्यक्तियों को गंभीर चोटें आई है। घायलों में दो व्यक्तियों की हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस ने कार चालक बीएचएमएस डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया है। विजय नगर थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह पवार से प्राप्त जानकारी के अनुसार बीएचएमएस डॉ संजय पटेल अपने साथियों के साथ कार क्रमांक एमपी 20 जेडई 1572 में सवार होकर दीनदयाल चौक की तरफ से जा रहे थे। एसबीआई चौक के समीप रात लगभग 10 बजे उनकी कार अनियंत्रित होकर साइड रोड में चली गयी और तेज रफ्तार में होने के कारण एक बच्ची सहित 6 लोगों को रौंद दिया। घटना के बाद कार में सवार डॉक्टर को लोगों ने पकड़ लिया और उसके साथी मौका पाकर भाग गये। पुलिस ने सूचना मिलने पर तत्काल सभी घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भिजवा दिया। दुर्घटना में ने 65 वर्षीय मुन्नी बाई सेन तथा 60 वर्षीय रवि शंकर दुबे की मौत हो गयी। घायल दीपा शुक्ला, वैशाली नामदेव सहित दो अन्य व्यक्तियों को उपचार के लिए निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। पुलिस ने आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है। डॉक्टर के हार्ट में है तीन ब्लॉकेज आरोपी डॉक्टर ने पूछताछ के दौरान बताया कि उसके हार्ट में तीन ब्लॉकेज है। तीन ब्लॉकेज 90 प्रतिशत से अधिक है और उसका इलाज चेन्नई में चल रहा है। वह चेकअप करवाने के बाद कुछ दिन पहले ही वापस लौटा था। कार चलाते समय उसकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया था। जिसके कारण यह हादसा घटित हुआ।

दो लोगों के दबने की आशंका, राजस्थान-जयपुर में दिल्ली हाईवे पर ट्रक पलटा

जयपुर। जयपुर के आमेर थाना क्षेत्र के नई माता मंदिर के पास दिल्ली-जयपुर नेशनल हाईवे पर शनिवार को एक बड़ा हादसा हो गया। एक ट्रक अचानक अनियंत्रित होकर पलट गया, जिससे दो लोगों के उसके नीचे दबे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत आमेर थाना पुलिस को सूचना दी। हादसे के कारण दिल्ली-जयपुर हाईवे पर लंबा जाम लग गया, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। पुलिस और रेस्क्यू टीम ने मौके पर पहुंचकर क्रेन की सहायता से ट्रक को हटाने का काम शुरू कर दिया है। हादसे के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। राहत कार्य तेजी से जारी है। हादसे से स्थानीय लोगों में इस हादसे को लेकर भय का माहौल है। वहीं, पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और रेस्क्यू कार्य में सहयोग करें।

वारदात सीसीटीवी में कैद, राजस्थान-जयपुर में बिजली के खंभों के मेटल कवर चोरी

जयपुर. राजधानी जयपुर के जवाहर सर्किल इलाके में राइजिंग राजस्थान कार्यक्रम के दौरान बिजली के खंभों पर लगाए गए मेटल कवर चोरी होने का मामला सामने आया है। चोर ने बड़ी चालाकी से बिजली पोल के नीचे लगे मेटल कवर को चुराया और फरार हो गया। इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें एक ई-रिक्शा सवार व्यक्ति वारदात को अंजाम देते हुए दिखाई दे रहा है। फुटेज में वह साफ तौर पर ई-रिक्शा में रखकर मेटल कवर ले जाता हुआ दिखाई दे रहा है। पुलिस जांच में पता चला कि चोरी में इस्तेमाल किया गया ई-रिक्शा आदर्श नगर निवासी रईस अहमद के नाम पर पंजीकृत है। पुलिस अब ई-रिक्शा के नंबर के आधार पर चोर की पहचान कर रही है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपी की तलाश की जा ही है। उन्हें जल्द ही पकड़ लिया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल वहीं, इस घटना से इलाके में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय निवासियों ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है। वहीं, पुलिस का दावा है कि मामले की जांच तेजी से की जा रही है। आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री ने मार्चपास्ट की ली सलामी, राजस्थान-जयपुर में वनरक्षक प्रशिक्षण सत्र की पास आउट परेड

जयपुर। केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी ने शुक्रवार को राजस्थान पुलिस प्रशिक्षण संस्थान अजमेर जिले के किशनगढ़ में वानिकी सैटेलाइट प्रशिक्षण संस्थान सिलोरा एवं जेटीआई द्वारा आयोजित 119वें वनरक्षक आधारभूत प्रशिक्षण सत्र की पास आउट परेड में भाग लिया। इसके साथ ही उन्होंने 120वें वनरक्षक आधारभूत प्रशिक्षण सत्र का विधिवत उद्घाटन भी किया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी ने प्रशिक्षण पूरा करने वाले वनरक्षकों को प्रमाण पत्र वितरित कर उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने परेड और मार्च पास्ट की सलामी ली। कार्यक्रम में अजमेर के मुख्य वन संरक्षक शारदा प्रताप सिंह, वन संरक्षक सुगनाराम जाट, प्रशिक्षु वनरक्षक, उनके परिजन, वन विभाग के अधिकारी, और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वनरक्षकों का उत्साह और समर्पण सराहनीय केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि वनरक्षकों के उत्साह और समर्पण को देखकर मुझे अत्यंत गर्व महसूस हो रहा है। ये युवा न केवल पर्यावरण संरक्षण के प्रहरी है। बल्कि सतत विकास और हरित भारत की दिशा में हमारी प्रतिबद्धता के प्रतीक भी हैं। उन्होंने वन विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल इन युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखेगा। बल्कि हमारे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगा। केंद्रीय मंत्री श्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि वनरक्षक केवल वन और पर्यावरण की रक्षा नहीं करते, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास में भी योगदान देते हैं। उनकी मेहनत और समर्पण हमारे देश को हरित और समृद्ध भारत बनाने में सहायक होंगे।

राष्ट्रीय सुरक्षा माह के तहत अभिनव पहल, राजस्थान-जयपुर परवाह अभियान की सड़क सुरक्षा जागरुकता में अहम भूमिका

जयपुर। यातायात नियमों की पालना सुनिश्चित करने, सड़क हादसों में कमी लाने एवं  जन-जन को सड़क सुरक्षा नियमों के प्रति जागरुक करने के लिए मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के निर्देशों की अनुपालना में जिला प्रशासन द्वारा जयपुर परवाह (केयर) अभियान का प्रभावी संचालन किया जा रहा है। प्रादेशिक परिवहन अधिकारी (जयपुर प्रथम) श्री राजेन्द्र सिंह शेखावत ने बताया कि राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के तहत संचालित जयपुर परवाह (केयर) अभियान के तहत यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ सख्त प्रवर्तन कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के तहत संचालित जयपुर परवाह (केयर) अभियान को जन-जन का अभियान बनाने के लिए जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी के निर्देशन में विभिन्न जन जागरुकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। जिसके तहत स्कूली एवं कॉलेज के विद्यार्थियों को यातायात नियमों की जानकारी प्रदान की जा रही है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के तहत जयपुर जिला प्रशासन द्वारा अभिनव पहल करते हुए गुरुवार को जयपुर परवाह (केयर) अभियान का आगाज किया गया। जिला स्तरीय युवा महोत्सव में जयपुर सांसद श्रीमती मंजू शर्मा ने जयपुर परवाह के पोस्टर का विमोचन किया। इस दौरान जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी, अतिरिक्त जिला कलक्टर श्रीमती कुंतल विश्नोई, प्रादेशिक परिवहन अधिकारी (जयपुर प्रथम) श्री राजेन्द्र सिंह शेखावत सहित अन्य संबंधित विभागों के कार्मिक मौजूद रहे।

ऑक्शन में जुटेंगे देश-प्रदेश के मिनरल शोध विशेषज्ञ, राजस्थान-जयपुर में जनवरी के तीसरे सप्ताह अधिकारी लेंगे बैठक

जयपुर। राज्य में खनिज संपदा की वैज्ञानिक तरीके से एक्सप्लोरेशन संभावनाओं पर मंथन करने के लिए जनवरी के तीसरे सप्ताह में देश व प्रदेश की सरकारी-गैरसरकारी संस्थाओं के विशेषज्ञ प्रतिनिधि जयपुर में जुटेंगे। राज्य के माइंस, जियोलोजी और पेट्रोलियम विभाग के प्रमुख शासन सचिव टी. रविकान्त ने यह जानकारी देते हुए बताया कि राज्य की विपुल खनिज संपदा के एक्सप्लोरेशन कार्य को गति देने और इसमें केन्द्र व राज्य की संस्थाओं के साथ ही निजी क्षेत्र की एक्सप्लोरेशन संस्थाओं की भागीदारी की संभावनाओं पर भी मंथन किया जाएगा। उन्होंने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए मंथन को उपादेय व विशेषज्ञों की भागीदारी तय करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसमें भारत सरकार के नेशनल मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट की सहभागिता भी रहेगी। प्रमुख सचिव माइंस श्री टी. रविकान्त ने बताया कि प्रदेश में 82 प्रकार के खनिज उपलब्ध है उनमें से अभी 57 खनिजों का ही खनन हो रहा है। केन्द्र सरकार के नए प्रावधानों के अनुसार क्रिटिकल और स्ट्रेटेजिक मिनरल्स के ऑक्शन का कार्य पहली बार केन्द्र सरकार ने अपने हाथ में लिया है। इसके लिए केन्द्र सरकार ने प्राइवेट सेक्टर में एक्सप्लोरेशन का कार्य कर रही संस्थाओं की भी भागीदारी तय करने का निर्णय किया है। इसी कड़ी में एक्सप्लोरेशन लाइसेंस ईएल के लिए भी खनिज ब्लॉकों की नीलामी की जाने लगी है। टी. रविकान्त ने बताया कि जयपुर में आयोजित एक दिवसीय मंथन में केन्द्र सरकार के माइंस मंत्रालय, जियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, एमईसीएल, इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस, एटोमिक मिनरल डिपार्टमेंट के साथ ही केन्द्र सरकार की एंपेनल्ड निजी क्षेत्र की एक्सप्लोरेशन संस्थाएं और विभाग के अधिकारियों की भागीदारी तय की जाएगी।  इसके साथ ही इस क्षेत्र में कार्य कर रही प्रादेशिक संस्थाओं के साथ ही केन्द्र सरकार द्वार अधीकृत संस्थाओं के हिस्सा लेने से प्रदेश में मिनरल एक्सप्लोरेशन की संभावनाओं के साथ ही भविष्य के रोड़मेप तैयार करने में भी सहायता प्राप्त होगी। रविकान्त ने बताया कि मेजर मिनरल ब्लॉकों की नीलामी में राजस्थान समूचे देश में शीर्ष पर आ गया है। प्रदेश में क्रिटिकल और स्ट्रेटेजिक मिनरल्स के भी अच्छे संकेत मिले हैं। ऐसे में प्रदेश की खनिज संपदा के एक्सप्लोरेशन में नवीनतम तकनीक के उपयोग और एक्सप्लोरेशन के सटीक विश्लेषण में सहयोग प्राप्त हो सकेगा। उन्होंने बताया कि इससे प्रदेश में खनिज खोज कार्य को गति मिलेगी। माइंस व भूविज्ञान विभाग स्तर पर आवश्यक तैयारियों की मॉ​निटरिंग निदेशक माइंस श्री भगवती प्रसाद कलाल कर रहे हैं। वहीं विभाग द्वारा आवश्यक तैयारियों के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की कोर टीम का गठन किया गया है।

10 दिन चला रेस्क्यू ऑपरेशन, राजस्थान-जयपुर में बोरवेल में फंसी चेतना बाहर निकली लेकिन नहीं बची जान

जयपुर। राजस्थान के कोतपूतली में बोरवेल में गिरी तीन साल की चेतना को बाहर निकाल लिया गया है। लेकिन, चेतना में कोई चेतना नहीं बची है। बुधवार को 10वें दिन बोरवेल से उसकी लाश बाहर निकली है। बेटी की मौत से मां और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। मासूम की मौत से किरतपुरा के बड़ियाली की ढाणी में मातम छाया हुआ है। परिवार के साथ गांव वाले भी मायूस हैं। दरअसल, तीन साल की चेतना 23 दिसंबर को खेलते समय 700 फीट गहरे बोरवेल में गिरी थी। वह 150 फीट की गहराई पर अटक गई थी। देसी जुगाड़ के जरिए उसे तीस फीट ऊपर खींच लिया गया था। लेकिन, फिर उसे देसी जुगाड़ से और ऊपर नहीं लाया जा सका। इसके बाद बोरवेल के पास एक 170 फीट गहरा गड्ढा किया और फिर बोरवेल तक सीधी सुरंग बनाकर एनडीआरएफ के जवान चेतना तक पहुंचे। जिसके बाद उसे बाहर निकाला गया। लेकिन, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। चेतना सबको छोड़कर जा चुकी थी। परिवार लगातार रेस्क्यू अभियान में लापरवाही बरतने के आरोप लगा रहा था।      अब जानिए, किस दिन क्या हुआ? 23 दिसंबर: कोटपूतली के किरतपुरा क्षेत्र के बड़ीयाली ढाणी में दोपहर करीब 1:50 बजे तीन साल की बच्ची चेतना बोरवेल में गिरी थी। करीब 10 मिनट बाद परिजनों को बच्ची के राने की आवाज सुनाई दी, तब उन्हें पता चला कि वह बोरवेल में गिर गई है। तत्काल परिजनों ने प्रशासन को सूचना दी। दोपहर 2:30 बजे एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के साथ प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। 3:20 बजे मेडिकल टीम घटनास्थल पर पहुंची। 3:45 पर पाइप के जरिए बच्ची को ऑक्सीजन पहुंचाई गई। 5:15 पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। रात 8:45 पर देसी जुगाड़ के एक्सपर्ट जगराम अपनी टीम के साथ बच्ची को रेस्क्यू करने पहुंचे। इसी दिन रात तीन बजे तक अंब्रेला और रिंग रॉड से बच्ची को रेस्क्यू करने के दो प्रयास किए गए, लेकिन दोनों ही असफल रहे। 24 दिसंबर: सुबह 5:30 बजे से प्रशासन फिर सक्रिय हुआ। अधिकारियों ने परिजनों से चेतना को हुक में फंसाकर बाहर निकालने की अनुमति ली। 9:30 बजे तक बच्ची को 15 फीट ऊपर खींचा गया। लगातार अफसल होने के बाद प्रशासन ने हरियाणा के गुरुग्राम से पैरलल गड्डा खोदने के लिए पाइलिंग मशीन मंगवाई। रात करीब 11 बजे मशीन मौके पर पहुंची। 25 दिसंबर: 8:00 बजे से पाइलिंग मशीन से गड्ढा खोदने का काम शुरू किया गया। दोपहर एक बजे तक 40 फीट सुरंग करने के बाद पाइलिंग मशीन बंद की गई। शाम पांच पाइलिंग मशीन के साथ 4 फीट मोटा बिट असेंबल किया गया है। 5:30 बजे रेस्क्यू अभियान एक बार फिर से शुरू किया गया। शाम छह बजे 200 फीट क्षमता की एक और पाइलिंग मशीन मौके पर पहुंची। इसे चलाने के लिए गुजरात से एक और टीम भी पहुंची। आठ बजे रेट माइनर की टीम पहुंची। नौ बजे बच्ची की माता घोली देवी की तबीयत बिगड़ी। रात 11 बजे कोटपूतली-बहरोड़ कलेक्टर कल्पना अग्रवाल घटनास्थल पर पहुंची। 26 दिसंबर: सुबह 10 बजे पत्थर आने के कारण पाइलिंग मशीन को रोका गया। छह घंटे में मशीन से पत्थर को काटा गया। शाम करीब छह बजे गड्ढे की गहराई चेक की गई, इसके बाद पाइलिंग मशीन को हटाया गया। 6:30 बजे से क्रेन से गड्ढे में सेफ्टी पाइप लगाना शुरू किए गए। 27 दिसंबर: दोपहर करीब 12  बजे तक 170 फीट गहरे खोदे गए गड्ढे में लोहे के पाइप फिट किए गए। 12:40  बजे इन पाइप का वजन उठाने के लिए 100 टन क्षमता की मशीन मौके पर बुलाई गई। करीब एक बजे मौसम बदलने के कारण हुई बारिश से पाइप वेल्डिंग का काम रुक गया। शाम पांच बजे वेल्डिंग का काम दोबारा शुरू किया गया, जो देर रात तक चलता रहा। 28 दिसंबर: एनडीआरएफ के 6 जवानों की टीम बनाई गई। दो-दो जवानों को सुरंग खोदने के लिए 170 गहरे गड्ढे में उतारा गया। इन जवानों ने चार फीट सुरंग खोदी।       29 दिसंबर: सुरंग की खोदाई जारी रही, बीच में आ रहे पत्थरों को तोड़ने के लिए कंप्रेसर मशीन मंगवाई गई। मांइस एक्सपर्ट को बुलाकर पत्थर काटने की तकनीक समझी।   30 दिसंबर: प्रशासन और एनडीआरएफ के अधिकारियों ने दावा किया कि चेतना को आज (सोमवार को) बाहर निकाल लेंगे। लेकिन, पत्थरों और अन्य कारणों से इसमें फिर देरी हो गई। सुरंग खोद रहे जवानों को अंदर सांस लेने में भी परेशानी हुई। 31 दिसंबर: एनडीआरएफ के जवानों ने 10 फीट गहरी सुरंग की खोदाई पूरी की। लेकिन, सुरंग की खोदाई गलत दिशा में हो गई। जवानों को बोरवेल नहीं मिला। इसके बादा जीपीआर मशीन की मदद से बोरवेल की लोकेशन को ट्रेस कर फिर सुरंग खोदी गई। 01 जनवरी 2025: 10 दिन बाद चेतना को बाहर निकाला गया। लेकिन, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। चेतना की मौत हो चुकी थी।

बी टू बायपास और गोपालपुरा से छह महीने होगा आवागमन, राजस्थान-जयपुर में महारानी फार्म पुलिया बंद

जयपुर। राजधानी जयपुर में दुर्गापुरा और मानसरोवर को जोड़ने वाली महारानी फार्म पुलिया पर नए साल के पहले दिन से यातायात को आगामी छह महीने के लिए बंद कर दिया जाएगा। अब मानसरोवर जाने के लिए बीटू बायपास या फिर गोपालपुरा से होकर जाना होगा। ट्रैफिक डायवर्जन का प्रभाव काफी परेशानियां खड़ी करने वाला है क्योंकि यह पुलिस जयपुर की सबसे व्यस्ततम कनेक्ट रोड है, जो टोंक रोड और आगे जवाहरलाल नेहरू मार्ग को सीधे मानसरोवर, न्यू सांगानेर रोड और पृथ्वीराज नगर योजना सहित बड़े इलाके को आपस में जोड़ती है। मानसरोवर और पीआरएन राजस्थान की सबसे बड़ी आवासीय कॉलोनियां हैं। इस पुलिया से हर 30 हजार से ज्यादा वाहन गुजरते हैं, जिनमें दुपहिया से लेकर बसें भी शामिल हैं। आखिर क्यों बंद करना पड़ेगा यातायात द्रव्यवती नदी पर बनी इस पुलिया पर यातायात का दबाव अधिक रहता है। बारिश में द्रव्यवती नदी में प्रवाह बढ़ने से पुलिया के ऊपर डेढ़ से दो मीटर ऊंचाई तक पानी का बहाव रहता है। इस बार भी बारिश के सीजन में कई घंटों तक इस पुलिया पर ट्रैफिक बंद करना पड़ा क्योंकि नदी का पानी पुलिया से ओवर फ्लो हो रहा था। यह क्षेत्र मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की विधानसभा में आता है। सीएम के निर्देश पर जेडीए ने इस पुलिया को ऊंची करने की योजना बनाई है। महारानी फार्म पुलिया अभी नदी से महज करीब दो मीटर ऊंचाई पर ही है। इस पुलिया की चौड़ाई फिलहाल 17 मीटर है। जेडीए इस पुरानी पुलिया को पहले तोड़ेगा। इसके बाद यहां चार गुना चार मीटर चौड़े बॉक्स कल्वर्ट डाले जाएंगे। इसी बॉक्स कल्वर्ट में से ही नदी प्रवाहित होगी। इस पुलिया की चौड़ाई 17 मीटर से बढ़ाकर 20 मीटर की जाएगी। नई पुलिया की ऊंचाई नदी से करीब साढ़े चार मीटर ऊंची होगी। करीब 210 मीटर की लंबाई में पुलिया का निर्माण किया जाएगा। करीब छह करोड़ की लागत की इस योजना का काम छह महीने में पूरा किया जाएगा, जेडीए की इस योजना के तहत अभी मिट्टी के परीक्षण का काम पूरा हो चुका है। यहां से हो सकेगा वाहनों का आवागमन यहां पुलिया को ऊंचा करने का काम छह महीने तक चलेगा इस दौरान वाहन चालकों के लिए दो वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध रहेंगे। एक वैकल्पिक मार्ग बी टू बायपास का है, जहां से वाहन चालक द्रव्यवती नदी पार कर जा सकेंगे। दूसरा वैकल्पिक मार्ग गोपालपुरा से होते हुए रिद्वि-सिद्धि पुलिया का है, जो सीधे मानसरोवर, न्यू सांगानेर रोड व पृथ्वीराज नगर को जाती है। वाहन चालक हुए परेशान नई पुलिया का काम आज से शुरू हो गया। रास्ता बंद होने की सूचना लोगों तक नहीं पहुंची, जिसके चलते यहां वाहन चालकों को काफी समस्या का सामना करना पड़ा। सुबह से ही यहां वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई लेकिन जिन वाहन चालकों को इसकी जानकारी नहीं थी, वे यहां आकर अब वापस लौट रहे हैं।

जल्द आ सकती है बाहर, पुलिस सतर्क, राजस्थान-जयपुर में बोरवेल में फंसी चेतना के पास पहुंची रेस्क्यू टीम

जयपुर। बोरवेल में गिरी बच्ची को 10वें दिन ट्रेस कर लिया गया है। रेस्क्यू टीम द्वारा किसी भी समय बच्ची को बाहर निकाल लिया जाएगा। तेज बदबू के चलते बच्ची के जीवित नहीं होने की आशंका नजर आ रही है। रेस्क्यू टीम सुरंग में फिनाइल ले जा रही है। जिला कलेक्टर कल्पना अग्रवाल ने बताया कि कुछ देर में चेतना को बोरवेल से निकाल लिया जाएगा। मौके पर एम्बुलेंस और पुलिस जाप्ता तैनात कर दिया गया है। साथ ही बीडीएम अस्पताल में अलग से सुरक्षा लगा दी गई है। मौके पर जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक सहित प्रशासन के आला अधिकारी मौजूद हैं। गौरतलब है कि किरतपुरा के बड़ियाली की ढाणी में 23 दिसंबर को खेलते वक्त चेतना 700 फीट गहरे बोरवेल में गिर गई थी और करीब 120 फीट की गहराई में फंस गई। पिछले 10 दिनों से चल रहे इस रेस्क्यू ऑपरेशन में अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिल पाने से परिवार और ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ती जा रही थी। अब जानकारी मिली है कि रेस्क्यू टीम चेतना लगभग करीब पहुंच चुकी है और किसी भी समय मासूम को बाहर निकाला जा सकता है। घटनास्थल से अस्पताल के रास्ते में पुलिस तैनात की गई है ताकि मासूम को तुरंत अस्पताल ले जाया जा सके। दिशा भटकने से रेस्क्यू में देरी – रेस्क्यू टीमों ने सुरंग के जरिए चेतना तक पहुंचने का प्रयास किया था, लेकिन तकनीकी खामियों और दिशा भटकने के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका। बुधवार सुबह अधिकारियों ने बोरवेल की लोकेशन ट्रेस करने का दावा किया है। ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) मशीन की मदद से बोरवेल की स्थिति को ट्रेस किया गया है। बहरहाल रेस्क्यू टीम के रास्ता भटकने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर सुरंग की दिशा गलत कैसे हुई? बहरहाल सभी को मासूम के निकलने का इंतजार है। अब तक के घटनाक्रम पर एक नजर –     23 दिसंबर : दोपहर 2 बजे किरतपुरा के बड़ीयाली ढाणी में गिरी चेतना। सूचना मिलने पर पहुंची रेस्क्यू टीमें। रात 9 बजे एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने रेस्क्यू शुरू किया     24 दिसंबर : देसी जुगाड़ लगाकर 15 फीट ऊपर तक खींचा लेकिन फिर अटका ऑपरेशन।     25 दिसंबर : हरियाणा से आई पाइलिंग मशीन से बोरवेल के पास 40 फीट गहरा गड्ढा खोदने के बाद बंद पड़ी मशीन। गुजरात से नई मशीन बुलाई गई। रात में उत्तराखंड से रैट माइनर्स टीम पहुंची।     26 दिसंबर :  रैट माइनर्स टीम ने 170 फीट गहरा गड्ढा खोदकर सेफ्टी पाइप डाले।     27 दिसंबर : बारिश के कारण काम रुका।     28 दिसंबर : ऑक्सीजन लेवल चेक करने पाइप में उतरे दो जवान। एल आकार में सुरंग की खुदाई की।     29 दिसंबर :  4 फीट तक सुरंग खोदकर बोरवेल में उतरी रेस्क्यू टीम। सुरंग बनाने में पत्थर बने सबसे बड़ी बाधा। पत्थर तोड़ने के लिए मशीन मंगाई।     30 दिसंबर : एसडीआरएफ के कमांडेंट ने रेस्पिरेशन चेक किया। लेजर अलाइनमेंट डिवाइस से जांच की।     31 दिसंबर : दोपहर बाद पता चला कि गलत दिशा में हो रही थी खुदाई। लोकेशन ट्रेक करने के लिए जीपीआर मशीन मंगाई।

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