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पर्यटन, संस्कृति और धर्मस्व मंत्रालय को मिली बड़ी मंजूरी, अनुदान 492 करोड़ रुपये से ज्यादा

पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री  राजेश अग्रवाल के विभागों के लिए 492 करोड़ रूपए से अधिक की अनुदान मांगे पारित पर्यटन विभाग के बजट में पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 55 प्रतिशत की वृद्धि  पर्यटन विभाग के अंर्तगत तीन नई योजनाओं हेतु कुल 110 करोड़ रूपए का प्रावधान मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन हेतु 100 करोड़, शक्तिपीठ भ्रमण योजना हेतु 5 करोड़, छत्तीसगढ़ युवा दर्शन योजना हेतु 5 करोड़ रूपए का प्रावधान  मुख्यमंत्री जन-पर्यटन प्रोत्साहन योजना हेतु 3 करोड़ रूपए का प्रावधान, छत्तीसगढ़ राज्य के आम नागरिकों को आईआरसीटीसी के माध्यम से पर्यटन स्थलों के भ्रमण मे 75 प्रतिशत तक सब्सिडी  पर्यटन क्षेत्रों में विभिन्न विकास कार्यों हेतु अनुदान मद के अंर्तगत 100 करोड़ रूपए का प्रावधान  रामलला दर्शन योजना के लिए 36 करोड़ रूपए का प्रावधान शक्तिपीठ परियोजना के अंर्तगत छत्तीसगढ़ के पांच शक्तिपीठों को विकसित किए जाने हेतु 5 करोड़ रूपए का प्रावधान सिरपुर एकीकृत विकास योजना हेतु 10 करोड़ रूपए का प्रावधान, सिरपुर को हेरिटेज स्थल के रूप मंे किया जाएगा विकसित राजकीय मानव संग्रहालय, छत्तीसगढ़ इतिहास संग्रहालय, अभिलेखागार एवं भारत भवन का किया जाएगा निर्माण सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और कलाकारों के प्रोत्साहन पर विशेष जोर मंदिरों के जीर्णाेद्धार और प्रमुख मेलों के आयोजन को मिलेगा प्रोत्साहन रायपुर,  छत्तीसगढ़ विधानसभा में पर्यटन, संस्कृति, पुरातत्व तथा धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के वर्ष 2026-27 के लिए अनुदान मांगों को सदन में पारित किया गया। विभागीय मंत्री  राजेश अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत बजट पर चर्चा के बाद इन विभागों के लिए कुल 492 करोड़ 20 लाख रुपये की अनुदान मांगें पारित की गईं, इसमेें पर्यटन विभाग के लिए 344 करोड़ रूपए, संस्कृति विभाग के लिए 98.20 करोड़ रूपए तथा धार्मिक न्यास तथा धर्मस्व विभाग के लिए 50 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।  सदन में बजट भाषण के दौरान मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, प्राकृतिक पर्यटन स्थलों और धार्मिक आस्था से जुड़ी विरासत से है। राज्य सरकार इन तीनों क्षेत्रों को समन्वित रूप से विकसित कर छत्तीसगढ़ को पर्यटन और सांस्कृतिक दृष्टि से देश के प्रमुख राज्यों में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इन विभागों के बजट में पर्यटन अधोसंरचना के विकास, सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और धार्मिक स्थलों के संवर्धन को प्राथमिकता दी गई है। पर्यटन विभाग मंत्री  अग्रवाल ने बताया कि पर्यटन विभाग के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 344 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के माध्यम से राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों, पर्यटन सर्किटों और पर्यटक सुविधाओं का व्यापक विकास किया जाएगा। इसके लिए इस वर्ष 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे पर्यटन स्थलों की अधोसंरचना, ब्रांडिंग, स्वच्छता, पेयजल और पर्यटक सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए  रामलला दर्शन योजना के अंतर्गत अब तक 52 विशेष ट्रेनों के माध्यम से लगभग 44 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को निःशुल्क दर्शन कराया जा चुका है और इसके लिए इस वर्ष 36 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ आस्था पथ (शक्तिपीठ भ्रमण) योजना के माध्यम से राज्य के प्रमुख शक्तिपीठों को जोड़कर धार्मिक पर्यटन को नई दिशा दी जाएगी। इस योजना हेतु 5 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।   अग्रवाल ने कहा कि राज्य में साहसिक पर्यटन और जल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत जलाशयों और प्राकृतिक स्थलों पर जल क्रीड़ा तथा एडवेंचर गतिविधियों के विकास के लिए बजट में 5 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। मंत्री  अग्रवाल ने जानकारी दी कि पर्यटन क्षेत्रों में विभिन्न विकास  कार्यों हेतु  100 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है, इसके अंर्तगत भोरमदेव कॉरिडोर का विकास, मयाली-बगीचा के विकास के अंर्तगत जशपुर जिले के मधेश्वर पहाड़ के निकट स्थित मयाली मंे पर्यटक रिसॉर्ट, स्किल डेवलपमेंट सेंटर का विकास एवं बगीचा स्थित कैलाश गुफा में पर्यटन विकास के कार्य कराए जाएंगे। उन्होेंने आगे कहा कि नया रायपुर मंे चित्रोत्पला फिल्म सिटी एवं कन्वेंशन सेेंटर का निर्माण किया जा रहा है। बस्तर एवं सरगुजा के आदिवासी क्षेत्रों में बस्तर टूरिज्म सर्किट एवं जशपुर टूरिज्म सर्किट के तहत विकास कार्य कराए जाएंगे जिससे छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन स्थलों का स्वरूप और अधिक निखरकर सामने आएगा।  मंत्री  अग्रवाल ने आगे कहा कि पर्यटन प्रोत्साहन अनुदान मद में 5 करोड़ की वृद्धि कर 10 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके अंर्तगत बस्तर, सरगुजा एवं अन्य संभावित पर्यटन क्षेत्रों मंे पर्यटकों के लिए होमस्टे सुविधा एवं सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इस योजना के तहत राज्य के आर्थिक विकास एवं पर्यटन के विकास के लिए निजी निवेशकों एवं स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। शक्तिपीठ परियोजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ के पांच शक्तिपीठों को उत्तराखंड की चारधाम परियोजना की तर्ज पर विकसित करने और जोड़ने का कार्य किया जाना है। इस हेतु बजट मंे 5 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। सिरपुर को बुद्धिष्ट थीम पर हेरिटेज स्थल के रूप मंे विकसित किया जाएगा, इसके लिए सिरपुर विकास योजना केे तहत 10 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।  छत्तीसगढ़ राज्य के आम नागरिकों को मुख्यमंत्री जन-पर्यटन प्रोत्साहन योजनांर्तगत आईआरसीटीसी के माध्यम से 75 प्रतिशत सब्सिडी मंे छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलांे का भ्रमण कराया जाएगा। इस हेतु बजट में 3 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। प्रथम चरण में राजधानी रायपुर से जगदलपुर एवं बारनवापारा-सिरपुर टूर तैयार किया जा रहा है।  पर्यटन विभाग के अंर्तगत नया रायपुर स्थित भारतीय होटल प्रबंधन संस्थान हेतु 4 करोड़ रूपए, स्टेट टूरिज्म अवार्ड हेतु 5 लाख रूपए एवं छत्तीसगढ़ पर्यटन के प्रचार-प्रसार एवं ब्राडिंग हेतु मेला, उत्सव, प्रर्दशनी अनुदान मद मंे 8.50 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। इसके माध्यम से टूर ऑपरेटर्स, ट्रैवल एजेंट तथा स्टेक होल्डर्स से संपर्क कर उन्हें छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के लिए कार्य किए जाने हेतु प्रोत्साहित करने प्रमुख 10 शहरों में रोड शो और बिजनेस मीटिंग का अयोजन किया जाएगा, जिससे राज्य में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी।  संस्कृति एवं पुरातत्व मंत्री  अग्रवाल ने बताया कि संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 98 करोड़ 20 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया … Read more

अपर मुख्य सचिव डॉ.राजौरा ने उज्जैन संभाग की संभागीय समीक्षा बैठक ली

भोपाल अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने कहा है कि जल जीवन मिशन अंतर्गत कार्यरत एजेंसियों के कार्यों की सतत मॉनिटरिंग कर कार्य तीव्र गति से मापदण्ड व अनुबंध की शर्तों अनुसार करवाना सुनिश्चित करें। डिफॉल्टर एजेंसियों पर ब्लैक लिस्टेड करने के साथ व टर्मिनेशन की सख्त कार्रवाई की जाएं। एसीएस डॉ. राजौरा उज्जैन में संभाग की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सभी कलेक्टर यह सुनिश्चित करें कि पूर्व में प्रगतिरत रोड़ रिस्टोरेशन के कार्य पूर्ण न होने तक नई खुदाई के कार्य प्रारंभ न किए जाए और प्रत्येक पखवाड़े में जल जीवन मिशन की जानकारी बैठक के माध्यम से जनप्रतिनिधियों को प्रदान करें। अपर मुख्य सचिव डॉ. राजौरा ने बैठक में संभाग के सभी जिलो के कलेक्टर, सीईओ जिला पंचायत, संभागीय व जिला अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनता के हित से जुड़े सभी कार्यों पर सभी संबंधित अधिकारी विशेष ध्यान दे। जल जीवन मिशन के अंतर्गत रोड़ रिस्टोरेशन के कार्यों की सतत मॉनिटरिंग कर सभी रिस्टोरेशन कार्य मार्च 2025 तक पूर्ण किए जाएं। रोड़ रिस्टोरेशन के पूर्ण कार्यों का पुन: निरीक्षण अगले एक सप्ताह में जनप्रतिनिधियों एवं एसडीएम की टीम के साथ किए जाने के पश्चात ही कार्य पूर्णता का सर्टिफिकेट दिया जाए। जल जीवन मिशन अंतर्गत रोड़ रिस्टोरेशन, रोड़ खुदाई एवं योजना के संपूर्ण कार्यों की जानकारी सतत रूप से स्थानीय विधायकों को दी जाए। एसीएस डॉ.राजौरा ने संभागायुक्त संजय गुप्ता को निर्देशित किया कि सभी जिला कलेक्टर से सुनिश्चित करवाएं कि सभी कार्य गुणवत्तापूर्ण व समयावधि में हो। कार्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। जिला कलेक्टर प्रत्येक माह जन प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सभी विभागों के प्रमुख मुददों पर समन्वय स्थापित करें। बैठक में ऊर्जा विभागांतर्गत केबल, ट्रांसफॉर्मर, डीपी को समय-समय पर बदले जाने के कार्य का भौतिक सत्यापन जनप्रतिनिधियों के साथ कराए जाने के निर्देश दिए गए। विद्युत संबंधी रख-रखाव की जानकारी आमजन को पहले से प्रदान की जाए। अस्थाई कनेक्शन के कारण अतिरिक्त दाब के कारण बार-बार डीपी को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए स्थाई हल निकाला जाए। प्रत्येक माह जिला सलाहकार समितियों के माध्यम से विद्युत विभाग जनप्रतिनिधियों से समन्वय स्थापित कर आवश्यक जानकारी प्रदान करें। बैठक में लोक निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा में एसीएस डॉ. राजौरा ने निर्देश दिए कि सड़क दुर्घटना से बचाव के लिए सड़क के दोनों तरफ लेबलिंग के कार्य पश्चात ही कार्य पूर्णता का प्रमाण-पत्र दिया जाए। वर्षा ऋतु में सड़कों के रख-रखाव की कार्ययोजना पर अभी से कार्य कर विशेष ध्यान दिए जाए। सड़क निर्माण में जो क्षेत्र वन विभाग के अधिकार में आ रहे हैं वहां निर्माण कार्य के लिए संबंधित विभाग से एनओसी समय पर प्राप्त कर ली जाए। बैठक में उज्जैन के विधायक तेजबहादुर सिंह चौहान, जितेन्द्र पण्ड्या, अनिल जैन कालूहेडा, महेश परमार, दिनेश जैन बोस, विधायक दिलीप सिंह परिहार, ओमप्रकाश सकलेचा, विधायक विपीन जैन, हरदीप सिंह डंग, चंदर सिंह सिसौदिया, विधायक माधव सिंह (मधु गेहलोत), विधायक श्रीमती गायत्री राजे पंवार, राजेश सोनकर, मनोज चौधरी, आशीष शर्मा, विधायक अरूण भीमावत, विधायक मथुरालाल डामर, राजेन्द्र पांडे, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, उज्जैन महापौर मुकेश टटवाल आदि उपस्थित थे। एसीएस डॉ. राजौरा ने सिहस्थ क्षेत्र की कार्य योजना का किया निरीक्षण अपर मुख्य सचिव डॉ. राजौरा ने महाकाल दर्शन कर मन्दिर में चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया और महाकाल आने वाले श्रद्धालुओं की दर्शन व्यवस्था का अवलोकन किया। एसीएस डॉ. राजौरा ने सिंहस्थ-2028 के सुचारू संचालन के लिये विशेष स्नान पर्व पर श्रद्धालुओं को सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिये व्यवस्थित प्लान बनाने के निर्देश दिये। उन्होंने महाकाल लोक में भी सिंहस्थ के मद्देनजर आवश्यक व्यवस्थाएं करने को कहा। इस अवसर पर संभाग आयुक्त संजय गुप्ता, आईजी उमेश जोगा, डीआईजी नवनीत भसीन, कलेक्टर नीरज कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप कुमार शर्मा सहित संबंधित अधिकारी भी उपस्थित रहे।  

सिंहस्थ 2028 में श्रद्धालुओं की सुविधा एवं स्वास्थ्य के लिए स्वच्छता और पेयजल के कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे : एसीएस डॉ.राजौरा

सिंहस्थ मेला क्षेत्र में स्थाई प्रकृति के निर्माण कार्यों की साधु-संतों से चर्चा कर कार्य योजना बनाएं : एसीएस डॉ.राजौरा संरचनाओं का निर्माण ऐसे हो जा सालों साल सतत रूप से क्रियाशील रहे कान्ह क्लोज डक्ट, सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी, नवीन घाटों के निर्माण कार्य व अन्य निर्माण कार्य समय-सीमा में पूर्ण हो सिंहस्थ 2028 में श्रद्धालुओं की सुविधा एवं स्वास्थ्य के लिए स्वच्छता और पेयजल के कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे भोपाल अपर मुख्य सचिव डॉ.राजेश राजौरा ने उज्जैन सिंहस्थ विकास कार्यों की समीक्षा बैठक में निर्देश दिए कि सिंहस्थ मेला क्षेत्र में स्थाई प्रकृति के निर्माण कार्यों की सभी साधु-संतों के साथ चर्चा कर कार्य-योजना बनाई जाए। स्थाई संरचनाओं में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आश्रम, पार्किंग, धर्मशाला, भोजनशाला, प्रवचन हॉल, सीवरेज लाइन, रोड़ और वॉटर सप्लाई कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जाए। सिंहस्थ मेला क्षेत्र में नगर विकास योजना की कार्ययोजना तैयार कर कार्य की शुरूआत जून 2025 से युद्ध स्तर पर की जाए। बैठक में सिंहस्थ में वॉटर सप्लाई नेटवर्क की समीक्षा के दौरान जानकारी दी गई कि 200 एमएलडी पेयजल क्षमता का मेला क्षेत्र में विकास किया जाएगा। सीवर नेटवर्क डिजाइन के अंतर्गत सिंहस्थ के दौरान मेला क्षेत्र में 160 एमएलडी का सीवरेज जनरेशन होगा, जिसमें 100 एमएलडी क्षमता के स्थाई एसटीपी निर्माण किए जाएंगे और अस्थाई रूप से 60 एमएलडी क्षमता के सीवरेज का निष्पादन किया जाएगा। मेला क्षेत्र के विकास के लिए आगामी 15 अप्रैल तक डीपीआर तैयार कर ली जाएगी। भवन अनुज्ञा का कार्य आगामी 15 जून तक कर लिया जाएगा और 25 जून से कार्य प्रारंभ होगा। जल संसाधन विभाग के सिंहस्थ 2028 के अंतर्गत किए जाने वाले कार्यों की समीक्षा के दौरान जानकारी दी गई कि कान्ह क्लोज डक्ट परियोजना का 15.50 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। इसकी लागत लगभग 919.94 करोड़ रूपये है, वर्तमान में कुल लागत की 14.57 प्रतिशत वित्तीय प्रगति हो चुकी है। सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना के अंतर्गत डिजाइन और सर्वे का कार्य पूर्ण हो चुका है एवं खुदाई का कार्य जारी है। इसे मई 2027 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। सिंहस्थ महापर्व 2028 के मद्देनजर 778.91 करोड़ रूपये की लागत से 29 घाटों का निर्माण किया जाएगा। क्षिप्रा नदी को प्रवाहमान बनाए रखने के लिए क्षिप्रा नदी पर बेराजों की श्रंखला का निर्माण किया जा रहा है। देवास, इंदौर और उज्जैन में बेराजों की श्रंखला बनाई जाएगी। डॉ.राजौरा के द्वारा एनवीडीए के अंतर्गत नर्मदा-क्षिप्रा लिंक योजना एवं उज्जैन उज्जैयनि परियोजना, नर्मदा-मालवा गंभीर लिंक परियोजना, नर्मदा-क्षिप्रा बहुउदेशीय परियोजना की भी समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि वर्तमान में उज्जैन शहर की जनसंख्या लगभग 8.65 लाख है। इसमें प्रतिदिन पेयजल की मांग 178.28 एमएलडी है। वर्तमान में अम्बोदिया, गऊघाट, साहिबखेड़ी और उंडासा के जलाशयों को मिलाकर कुल पानी की क्षमता 151.01 एमएलडी है। प्रस्तावित सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना से 51 एमसीएम, नर्मदा-गंभीर लिंक परियोजना से 58.34 एमसीएम पेयजल की सप्लाई की जा सकेगी। इसके अलावा न्यू अम्बोदिया की 68 एमएलडी पेयजल क्षमता की परियोजना प्रस्तावित है। साथ ही 860 करोड़ रूपये की लागत से हरियाखेड़ी परियोजना पर 100 एमएलडी पेयजल क्षमता की परियोजना का विकास भी किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान जानकारी दी गई कि बीडीसी के द्वारा मेडिसिटी का निर्माण किया जा रहा है। इसकी लागत कुल 592.3 करोड़ रूपये है। इसमें 550 बिस्तर की क्षमता होगी। सिंहस्थ में जनसंख्या के पीक लोड वाले दिनों में विस्तार योग्य क्षमता जोड़ी जाएगी तथा सामान्य दिनों में स्वास्थ्यकर्मियों और संसाधनों की क्षमता के अनुरूप कार्य योजना बनाई जाएगी। इसके अंतर्गत 500 अस्थाई अस्पताल और केम्प लगाए जाएंगे। स्वास्थ्य सुविधाओं को सिंहस्थ मेला क्षेत्र के अनुसार 6 झोन में बांटा जाएगा। स्वास्थ्य सेवाओं का डिजिटल रिकॉर्ड मेंटेन किया जाएगा। डॉक्टर और पेरामेडिकल स्टॉफ की ट्रैनिंग आयोजित की जाएगी। सिंहस्थ के गर्मी के मौसम में आयोजन को दृष्टिगत रखते हुए इलेक्ट्रोलाईट की उपलब्धता समस्त मेला क्षेत्र में जगह-जगह सुनिश्चित की जाएगी। एसीएस डॉ.राजौरा ने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा आपदा की स्थिति में कार्ययोजना स्टेट यूनिट के साथ मिलकर बनाई जाए। मेले के दौरान बर्न यूनिट, एम्बुलेंस की सुविधा, ब्लड बैंक, ट्रॉमा सेंटर आदि की सम्पूर्ण तैयारी रखें। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग का विशेष ध्यान हैजा और अन्य मौसम जनित बीमारियों और आपदा प्रबंधन के रिस्पांस पर रहे। स्वास्थ्य प्लान में आयुष विभाग को भी जोड़ा जाए। एसीएस डॉ.राजौरा ने कहा कि स्वच्छता और पेयजल के कार्य सिंहस्थ 2028 के अंतर्गत अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे। सिंहस्थ में साफ-सफाई व्यवस्था की कार्ययोजना की समीक्षा के दौरान जानकारी दी गई कि सड़क एवं अन्य सफाई कर्मियों को मिलाकर 11 हजार 220 सफाईकर्मियों की आवश्यकता होगी। इसके अलावा कचरा संग्रहण के लिए लगभग 5 हजार सफाई कर्मियों की आवश्यकता होगी। कुल मिलाकर 16 हजार 220 सफाई कर्मियों की आवश्यकता सिंहस्थ में होगी। डॉ.राजौरा ने निर्देश दिए कि इस दौरान ऑउटसोर्स एजेंसी के कार्यों की मॉनिटरिंग की जाए तथा इसका समय-समय पर फॉलोअप लिया जाए। स्मार्ट सिटी के कार्यों की समीक्षा के दौरान जानकारी दी गई कि वर्तमान में आईटीएमएस जंक्शन सिस्टम सिंहस्थ को दृष्टिगत रखते हुए डेवलप किया जा रहा है। डॉ.राजौरा ने इसके सर्विलांस और फॉलोअप पर ध्यान देने के निर्देश दिए तथा सिंहस्थ के समय आईटीएमएस पुलिस विभाग को सौंपने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव के निर्देशानुसार सिंहस्थ में फेस रिकग्नीशन, एलर्ट सिस्टम, फायर अलार्म के सभी सॉफ्टवेयर एमपीएसईडीसी के द्वारा विकसित किए जाएंगे। यह कार्य 31 दिसंबर 2025 तक पूर्ण किया जाना निर्धारित है। इसके अलावा सिंहस्थ 2028 के लिए ऑल इन वन ऐप भी बनाया जाएगा जिसमें ड्रोन सर्विस, यातायात और वाहन प्रबंधन, मानव संसाधन और कार्य प्रगति की जानकारी की सुविधा मिल सकेगी। सिंहस्थ में वाहनों की पार्किंग की उपलब्धता के लिए ऑनलाईन डाटा तैयार किया जाएगा। इसके अलावा जीआईएस आधारित उपयोगिता सिस्टम बनाया जाएगा। सिंहस्थ मेला क्षेत्र का वर्चुअल टूर ऐप के माध्यम से कराया जाएगा। सिंहस्थ में पर्यटन की दृष्टि से किए जाने वाले विकास कार्यों की समीक्षा में महाराजवाड़ा हेरिटेज होटल, ओमकार सर्किट, ग्रांड होटल उज्जैन का उन्नयन एवं नवीन कक्षों का विस्तार होटल क्षिप्रा रेसीडेंसी के उन्नयन कार्य, देवी अहिल्या लोक महेश्वर, गंभीर डेम में जलक्रीडा सुविधाएं, बोट क्लब एवं रेस्टोरेंट, 10 करोड़ रूपये की लागत से पंचकोशी यात्रा मार्ग के पडावों का विकास, सिंहस्थ टेंट सिटी विकास, … Read more

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