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सूर्य-मित्र कृषि फीडर योजना के प्रमुख उद्देश्य म.प्र. पॉवर मैनेज़मेंट कंपनी लिमिटेड को कम दर पर विद्युत उपलब्ध कराना : मंत्री शुक्ला

सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना से किसानों की ऊर्जा आवश्यकताएं होगी पूरी: मंत्री  शुक्ला सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना समिट10 जून को कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेन्टर में आयोजित होगी  सूर्य-मित्र कृषि फीडर योजना के प्रमुख उद्देश्य म.प्र. पॉवर मैनेज़मेंट कंपनी लिमिटेड को कम दर पर विद्युत उपलब्ध कराना : मंत्री  शुक्ला भोपाल नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री  राकेश शुक्ला ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये प्रदेश अभूतपूर्व कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि इस दिशा में कुसुम “सी” योजना से अधिक से अधिक जोड़ने और उन्हें लाभान्वित करने के लिये “सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना समिट” 10 जून को कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेन्टर में आयोजित होगी। उन्होंने बताया है कि ‘’सूर्य-मित्र कृषि फीडर योजना” के प्रमुख उद्देश्य म.प्र. पॉवर मैनेज़मेंट कंपनी लिमिटेड को कम दर पर विद्युत उपलब्ध कराना है। कृषकों की ऊर्जा आवश्यकताओं, मुख्य रूप से सिंचाई आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए, उनके करीब सौर ऊर्जा का उत्पादन कर, आय के अवसर उपलब्ध करवाते हुए, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना लागू की गयी है। समिट के मुख्य आकर्षण समिट में योजनांतर्गत सौर संयंत्रों की स्थापना के लिये जारी की जाने वाली निविदा की जानकारी दी जाएगी। समिट में शासकीय संस्थाओं द्वारा अपनायी जाने वाली स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रक्रिया की जानकारी विशेषज्ञों द्वारा दी जाएंगी। इसमें बैंकों एवं इनवर्टर निर्माताओं से परियोजनाओं की वित्तीय एवं तकनीकी व्यवस्थाओं पर भी चर्चा होगी। सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना की मुख्य विशेषताएं सूर्य मित्र कृषि फीडर योजनातर्गत कुसुम “सी” में सब-स्टेशन की 100 प्रतिशत क्षमता तक की परियोजनाओं की स्थापना में केन्द्रीय अनुदान का लाभ लेने का विकल्प भी प्रदान किया जा रहा है। योजना में 1900 से अधिक विद्युत सब-स्टेशन एवं 14500 मेगावॉट क्षमता, सौर परियोजनाओं के चयन हेतु उपलब्ध कराये गये है। इस योजना में रिएक्टिव पॉवर प्रबंधन से अतिरिक्त आय होगी। इसमें स्थानीय उद्यमियों के लिए निवेश एवं रोज़गार सृजन के उचित अवसर मिलेंगे। योजना में वित्त पोषण की सुगमता के लिए बैंकों से समन्वय किया जायेगा। साथ ही परियाजनाओं में एआईएफ के तहत 7 वर्षों तक 3 प्रतिशत ब्याज में छूट मिलेगी।  

प्रदेश को 4,302.87 करोड़ लागत की सड़क परियोजनाओं की केन्द्र सरकार से स्वीकृति मिलने से मध्यप्रदेश में विकास की रफ्तार तेज होगी: मंत्री राकेश सिंह

भोपाल लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा है कि प्रदेश को 4,302.87 करोड़ रुपये लागत की 4 महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं की केन्द्र सरकार से स्वीकृति मिलने से मध्यप्रदेश में विकास की रफ्तार तेज होगी। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के प्रति आभार व्यक्त किया है। मंत्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय मंत्री गडकरी के मार्गदर्शन में देश का अधोसंरचना क्षेत्र अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में विकास यात्रा की गति और तेज हो रही है। संदलपुर से नसरुल्लागंज बायपास तक बनेगा 43.200 किमी का 4 लेन राष्ट्रीय राजमार्ग भोपाल जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-146बी के संदलपुर से नसरुल्लागंज बायपास तक के 43.200 किलोमीटर लंबे खंड को 1535.66 करोड़ रुपये की लागत से 4 लेन में परिवर्तित करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। यह खंड एक महत्वपूर्ण धमनी मार्ग के रूप में कार्य करता है, जो राष्ट्रीय राजमार्ग-47, राष्ट्रीय राजमार्ग-46 और राष्ट्रीय राजमार्ग-45 को आपस में जोड़ता है। यह क्षेत्र अत्यधिक भीड़-भाड़ वाला है, जिसे पेव्ड शोल्डर सहित 4 लेन किए जाने से यातायात की समग्र दक्षता में सुधार होगा। मालवाहन और आमजन के लिए यह मार्ग अब और भी सुचारू, सुरक्षित और समय बचाने वाला होगा। राहतगढ़ से बेरखेड़ी तक बनेगा 10.079 किमी का 4 लेन कॉरिडोर विदिशा और सागर जिलों में राष्ट्रीय राजमार्ग-146 के राहतगढ़ से बेरखेड़ी तक के 10.079 किमी हिस्से को 731.36 करोड़ रुपये की लागत से 4 लेन में विकसित करने की स्वीकृति दी गई है। यह परियोजना भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का हिस्सा है, जो न केवल क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगी, बल्कि राहतगढ़ जैसे घनी आबादी वाले शहर को बायपास कर एक तेज़ और निर्बाध मार्ग प्रदान करेगी। यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग-44 और राष्ट्रीय राजमार्ग-346 को जोड़ेगी। इसके साथ ही मार्ग के ज्यामितीय सुधार एवं रि-अलॉयमेंट से सामान और लोगों की आवाजाही और भी सुरक्षित व कुशल हो सकेगी। इससे क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। लहदरा से बेरखेड़ी गुरु तक बनेगा 20.193 किमी लंबा 4 लेन ग्रीनफील्ड बायपास राष्ट्रीय राजमार्ग-146 पर लहदरा गांव जंक्शन से राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के बेरखेड़ी गुरु गांव जंक्शन तक 20.193 किमी लंबे 4-लेन ग्रीनफील्ड सागर पश्चिमी बायपास के निर्माण को मंजूरी मिल गई है। इस परियोजना पर कुल 688.31 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्ग-146 शहरी बस्तियों और अत्यधिक ट्रैफिक वाले क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जिससे अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है। नए बायपास के बनने से सागर शहर में यातायात का दबाव कम होगा, साथ ही यात्रा का समय और दूरी दोनों घटेंगे। यह परियोजना क्षेत्र के नागरिकों को सुगम यातायात सुविधा उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएगी। पश्चिमी ग्वालियर के लिए 28.516 किलोमीटर लंबे एक्सेस कंट्रोल्ड 4-लेन बायपास को स्वीकृति ग्वालियर शहर के पश्चिमी हिस्से में 28.516 किलोमीटर लंबे एक्सेस कंट्रोल्ड 4 लेन बायपास के निर्माण को केंद्र सरकार ने 1347.6 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत मुरैना और ग्वालियर जिलों के साथ-साथ रास्ते में आने वाले अन्य प्रमुख ब्लॉकों और तहसील मुख्यालयों को जोड़ा जाएगा। यह नया सड़क खंड एक धमनी मार्ग की तरह कार्य करेगा, जो राष्ट्रीय राजमार्ग-46, राष्ट्रीय राजमार्ग-44 और आगामी आगरा-ग्वालियर एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे से कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा। इसके विकास से भारी माल ढुलाई और लंबे मार्ग की यातायात व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार होगा। परियोजना के पूर्ण होने के बाद यातायात का सुगम और सुरक्षित प्रवाह सुनिश्चित होगा तथा यात्रा के समय में काफी कमी आएगी। यह बायपास न केवल क्षेत्रीय विकास को गति देगा बल्कि आर्थिक और परिवहन संबंधी गतिविधियों को भी बल प्रदान करेगा। इन परियोजनाओं से न केवल मध्यप्रदेश की कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी, बल्कि यातायात सुरक्षा, मालवहन दक्षता, समय की बचत, और क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी। आने वाले वर्षों में ये सड़कें प्रदेश के आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।  

पहले दिन सड़क एवं भवन निर्माण के विभिन्न पहलुओं सहित बेस्ट प्रैक्टिसेज़ और नवाचारों पर विस्तृत चर्चा हुई

लोक निर्माण मंत्री सिंह ने गुजरात के मुख्यमंत्री पटेल से की मुलाकात लोक निर्माण मंत्री के नेतृत्व में मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग का 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गुजरात अध्ययन यात्रा पर पहले दिन सड़क एवं भवन निर्माण के विभिन्न पहलुओं सहित बेस्ट प्रैक्टिसेज़ और नवाचारों पर विस्तृत चर्चा हुई भोपाल मध्यप्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने गुरुवार को गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से गांधीनगर में मुलाकात की। मंत्री सिंह के नेतृत्व में विभाग का 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल 26 और 27 दिसम्बर को गुजरात की दो दिवसीय अध्ययन यात्रा पर है। मंत्री सिंह ने गुजरात के मुख्यमंत्री पटेल का मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से अपने व्यस्त कार्यक्रम से प्रतिनिधिमंडल को समय देने के लिए आभार व्यक्त किया। गुजरात के मुख्यमंत्री पटेल के पास सड़क एवं भवन विभाग का प्रभार है, बैठक में सड़क एवं भवन निर्माण के विभिन्न पहलुओं सहित बेस्ट प्रैक्टिसेज और नवाचारों पर विस्तृत चर्चा हुई। मंत्री सिंह ने गुजरात में अपनाई गई बेस्ट प्रैक्टिसेज और नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में गुजरात के इन सफल प्रयासों को मध्यप्रदेश में लागू करने के लिए विभागीय स्तर पर ठोस योजना तैयार की जाएगी। मंत्री सिंह ने बताया कि अध्ययन यात्रा में गुजरात की निविदा शर्तों पर भी विस्तार से चर्चा हुई, क्योंकि गुजरात इस क्षेत्र में आदर्श कार्य करने में अग्रणी राज्य है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में निविदा शर्तों में सकारात्मक बदलाव किए जाएंगे। मंत्री सिंह ने कहा कि गुजरात की यह अध्ययन यात्रा मध्यप्रदेश में सड़क और भवन निर्माण को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने इस यात्रा को राज्य के बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। गुजरात सड़क एवं भवन विभाग ने मध्यप्रदेश प्रतिनिधिमंडल के समक्ष अपनी योजनाओं, नीतियों, नवाचारों, नवीन निर्माण तकनीकों और बेस्ट प्रैक्टिसेज की जानकारी साझा की। इनमें प्रमुख रूप से रोड असेट मैनेजमेंट सिस्टम, कोर रोड नेटवर्क, ग्रीन हाईवे पहल, मास्टर प्लान 2031, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP), गुणवत्ता नियंत्रण, सड़क निर्माण में ग्लास ग्रिड, जियो ग्रिड और कॉपर स्लैग जैसी तकनीकों का उपयोग शामिल था। प्रतिनिधिमंडल को आईटी आधारित प्रबंधन प्रणाली के तहत रोड असेट मैनेजमेंट सिस्टम, वर्क मॉनिटरिंग सिस्टम और पॉट होल रिपोर्टिंग सिस्टम जैसी तकनीकों के माध्यम से निर्माण परियोजनाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जानकारी दी गई। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर निर्माण कार्यों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग प्रक्रिया का अवलोकन भी किया, जो निर्माण कार्यों की पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने में गुजरात में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अध्ययन दल में मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। भवन विकास निगम के प्रबंध संचालक पंकज जैन, प्रमुख अभियंता (सड़क एवं पुल) केपीएस राणा, प्रमुख अभियंता (भवन) एसआर बघेल, प्रमुख अभियंता (भवन विकास निगम) अनिल श्रीवास्तव, और अन्य इंजीनियर शामिल थे। मंत्री सिंह के कार्यालय से राहुल सिंह राजपूत, रितेश जैन और सुशिवानी राजपूत ने भी भाग लिया।  

प्रदेश में एनएचएआई की सभी प्रगतिरत परियोजनाओं की नियमित समीक्षा की जाए : मंत्री सिंह

लोकनिर्माण से लोककल्याण भोपाल लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने मंगलवार को भोपाल निवास कार्यालय पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रदेश में प्रगतिरत राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति, और आगामी कार्य-योजनाओं की समीक्षा की। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बैठक में कहा कि प्रदेश में एनएचएआई की सभी प्रगतिरत परियोजनाओं की नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि समय-सीमा के भीतर परियोजनाओं का पूर्ण होना अत्यंत आवश्यक है ताकि जनता को सुगम और सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध हो सके। मंत्री सिंह ने कहा की “निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता न हो और सड़क सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन किया जाए।उन्होंने निर्माण संबंधी लंबित विषयों पर त्वरित कार्यवाही के निर्देश। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों के समयबद्ध निर्माण के लिए प्रदेश सरकार दृढ़ संकल्पित है। मंत्री सिंह ने परियोजनाओं में वन अनुमति और भू-अर्जन संबंधी समस्यायों के समाधान के लिए विभागों से आपसी समन्वय कर उनका निराकरण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चर्चा कर परियोजनाओं में आ रही समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करेंगे। मंत्री सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन से प्रदेश के नागरिकों को न केवल बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी, बल्कि पर्यटन, उद्योग और व्यापार को भी नई दिशा मिलेगी। बैठक में एमडी एमपीआरडीसी अविनाश लवानिया, आरओ एनएचएआई एस.के.सिंह, ईएनसी पीडब्ल्यूडी केपीएस राणा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

निर्माण क्षेत्र में नवीन तकनीकों पर आधारित कार्यशाला संपन्न : मंत्री सिंह

लोक निर्माण से लोक कल्याण नवाचार हमारी ताकत, पारदर्शिता एवं गुणवत्ता के साथ इन्हें लागू करें : मंत्री सिंह निर्माण क्षेत्र में नवीन तकनीकों पर आधारित कार्यशाला संपन्न भोपाल लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की अध्यक्षता में निर्माण क्षेत्र में नवीन तकनीकों पर आधारित एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन प्रशासनिक अकादमी में किया गया। इस दौरान अपर मुख्य सचिव केसी गुप्ता एमडी एमपीआरडीसी अविनाश लावनिया,एमडी एमपीबीडीसी डॉ पंकज जैन,ईएनसी पीडब्ल्यूडी केपीएस राणा, ईएनसी (भवन) एसआर बघेल एवं ईएनसी भवन विकास निगम अनिल श्रीवास्तव सहित विभाग के अन्य सभी मुख्य अभियंता, वरिष्ठ अधिकारी एवं इंजीनियर उपस्थित रहे। विभाग में नवाचार,पारदर्शिता और सामूहिकता से बढ़ेगी कार्यक्षमता  लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाने की दिशा में नवाचार, पारदर्शिता और सामूहिकता की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा “नवाचार हमारी ताकत है हमें नवाचार के साथ समरस होकर कार्य करना चाहिए।”  मंत्री सिंह ने कहा कि “विकसित प्रदेश से विकसित भारत” की परिकल्पना को साकार करने में इंजीनियर्स की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “हम सभी भाग्यशाली हैं कि हमें ‘लोक निर्माण से लोक कल्याण’ की भावना को मूर्त रूप देने का अवसर मिला है। विभाग को अधिक जनहितैषी बनाने की जिम्मेदारी हम सभी की है।” मंत्री सिंह ने विभाग में नए आने वाले इंजीनियर्स को प्रेरित करते हुए कहा कि नई पीढ़ी नवाचारों के माध्यम से विभाग को और अधिक सक्षम बना सकती है। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से कहा कि वे हमारे युवा इंजीनियरों की नई सोच को समझें और अगर कोई सुझाव उपयोगी हो तो उसे अपनाएं। हमारे निर्णय सही होने के साथ सही दिखना भी चाहिए  निर्माण क्षेत्र में नवीन तकनीक व्हाइट टॉपिंग पर चर्चा के दौरान कुछ इंजीनियर ने सुझाव दिया कि व्हाइट टॉपिंग के लिए सड़कों का चुनाव करते समय परफॉर्मेंस गारंटी की सड़कों को भी सम्मिलित किया जा सकता है क्योंकि व्हाइट टॉपिंग के लिए ऐसी सड़के चाहिए जिनकी बुनियाद या क्रस्ट मजबूत हो। इस बात पर मंत्री सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि हमारे निर्णय सही होने के साथ-साथ सही दिखने भी चाहिए। यदि तकनीकी रूप से ऐसा करना आवश्यक है तो इस आशय की सूचना सार्वजनिक रूप से जारी कर इस आवश्यकता को प्रचारित करना बेहतर होगा। अपने निर्माण कार्य को गर्व के साथ प्रचारित करें  मंत्री सिंह ने विभाग के अधिकारियों और इंजीनियर्स को प्रेरित करते हुए कहा कि हमें अपने निर्माण कार्यों के प्रति स्वामित्व का भाव रखते हुए पूरी जिम्मेदारी के साथ सामने आना चाहिए और गर्व से कहना चाहिए कि निर्माण हमने किया है। भगवान श्रीकृष्ण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता। कार्य की पूर्णता और सफलता तब होती है जब उसे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ किया जाए।”  मंत्री सिंह ने सड़कों और संरचनाओं की गुणवत्ता पर जोर देते हुए कहा, “जो संरचनाएं हम बनाते हैं, उन पर पीढ़ियां चलती हैं। हमें गर्व होना चाहिए कि हम ऐसा काम कर रहे हैं जो लंबे समय तक समाज के लिए उपयोगी साबित हो।”  मंत्री सिंह ने विभागीय कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और संवाद बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा, “हमारे अच्छे कार्य संवाद के अभाव में जनता तक नहीं पहुँच पाते हैं। हमें अपने कार्यों की जानकारी लोगों तक प्रामाणिकता के साथ पहुंचानी चाहिए।” मानक निविदा दस्तावेज पर हुई वृहद चर्चा विभाग में पहली बार ऐसा हुआ कि निविदा दस्तावेज पर इतने व्यापक स्तर और एक बड़े मंच पर गहन चर्चा की गई है। मानक निविदा दस्तावेज में सुधार की संभावनाओं को तलाशने के लिए अन्य राज्यों में प्रचलित निर्माण कार्यों के निविदा दस्तावेजों का गहन अध्ययन किया गया। मंत्री राकेश सिंह के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग से तीन अध्ययन दल महाराष्ट्र, तेलंगाना और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण भेज कर निविदा शर्तों का अध्ययन कराया गया। इन दलों से प्राप्त सुझावों को कार्यशाला में सम्मिलित करते हुए इन पर विस्तार से चर्चा की गई। निविदा पत्र दस्तावेज में प्रस्तावित संशोधनो पर सार्थक चर्चा की गई। उल्लेखनीय है कि सभी निर्माण विभागों के लिए एक मानक निविदा दस्तावेज वर्ष 2014 में तैयार किया गया था। कालांतर में हुए तकनीकी विकास और नियमों में परिवर्तन के कारण इस दस्तावेज में अनेक सुधारो की गुंजाइश है। आज की आवश्यकताओं के अनुरूप मानक निविदा दस्तावेज को संशोधित कर निर्माण कार्यों को और अधिक पारदर्शी,गुणवत्तापूर्ण एवं अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।   निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुधारने हेतु कार्यशाला में निविदा दस्तावेज में सुधार हेतु अनेक सुझाव प्राप्त हुए जिनमें मुख्य सुझाव इस प्रकार हैं:         2 करोड़ से अधिक लागत वाली सभी निविदाओं में प्रीक्वालिफिकेशन शर्तें लागू की जाएं पूर्व में यह सीमा 5 करोड़ थी।         अनुमानित लागत के 20% के बराबर के तीन कार्यों के अनुभव के स्थान पर 40% के तीन कार्यों को रखाजाए।         निविदाकर्ता के पास उपलब्ध मानव संसाधन और उपकरणों के लिए न्यूनतम शर्ते जोड़ी जाए।         2 करोड़ से अधिक के सड़क निर्माण कार्यों के लिए निर्माण स्थल पर गुणवत्ता परीक्षण लेब की स्थापना अनिवार्यकी जाए।         अव्यावहारिक दरें डालकर टेंडर प्राप्त की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए 80 प्रतिशत से कम दरें डालने वाले निविदाकर्ताओ से अंतर की दोगुनी परफॉर्मेंस गारंटी ली जाए। साथ ही बैंक गारंटी के स्थान पर फिक्स्ड डिपॉजिट रिसिप्ट के माध्यम से परफॉर्मेंस सिक्योरिटी ली जाए।         क्षमता से अधिक कार्यों के ठेके लेने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए बिड कैपेसिटी संबंधी शर्तों को और अधिक प्रभावी बनाया जाए।         निविदाकर्ता के पास बैच मिक्स प्लांट, डब्लू एम एम मिक्स प्लांट एवं अन्य आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता संबंधी शर्त जोड़ी जाए।         गुणवत्ता नियंत्रण हेतु समय-समय पर किए जाने वाले परीक्षणों, डामर की गुणवत्ता, आदि से संबंधित शर्तें भी जोड़ी जाए।  इसी प्रकार कंसलटेंट के चयन हेतु निर्धारित निविदा दस्तावेज पर भी अनेक सुझाव प्राप्त हुए जिसे कंसलटेंट एजेंसी और नियुक्त इंजीनियरिंग स्टॉफ की गुणवत्ता में सुधार हो सके।  मंत्री सिंह राकेश सिंह ने इन सभी सुझावों के अनुसार निविदा दस्तावेज में सुधार करने हेतु आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए।  मानक निविदा दस्तावेज में सुधार की यह प्रक्रिया न केवल कार्यकुशलता को बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि ठेकेदारों से होने वाले विवादों को … Read more

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