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दो संचालकों को हटाया, गरीबों के राशन में गड़बड़ी पर प्रशासन सख्त

जगदलपुर. राशन वितरण में गड़बड़ी पर जगदलपुर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया। शहर की दो दुकानों के संचालक हटाए गए। स्टॉक और वितरण में भारी अंतर मिला। ग्रामीण क्षेत्रों की चार दुकानों की जांच जारी है। दोषियों पर निलंबन और एफआईआर की तैयारी है। कलेक्टर ने साफ चेतावनी दी है। गरीबों के हक से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। औचक निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर है। कार्रवाई से माफियाओं में हड़कंप है। प्रशासनिक सख्ती का असर दिखने लगा है। पीडीएस व्यवस्था पटरी पर लाने की कोशिश तेज है। लगातार मिल रही शिकायतों और जांच में शॉर्टेज की पुष्टि के बाद यह कदम उठाया गया। कार्रवाई से राशन दुकानदारों में हड़कंप मच गया है। विभागीय जांच में कई दुकानों पर राशन की कमी पाई गई। अधिकारियों के अनुसार, पिछले वर्ष भी 66 राशन दुकानों में शॉर्टेज का मामला सामने आया था। इसके बावजूद सुधार नहीं होने पर इस बार सीधे निलंबन की कार्रवाई की गई। एसडीएम को सौंपी जिम्मेदारी प्रशासन ने हर ब्लॉक में कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित एसडीएम को सौंपी है। जिन दुकानदारों ने समय पर राशन वितरण या राशि जमा नहीं की, उनके खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया है। कुछ दुकानदारों को पूर्व में चेतावनी भी दी गई थी, लेकिन लापरवाही जारी रहने पर निलंबन किया गया। नई एजेंसियों को सौंपी जा रही दुकानें सूत्रों के मुताबिक, कई स्थानों पर नई एजेंसियों से राशन दुकानों का संचालन कराया जा रहा है, ताकि वितरण व्यवस्था सुचारु रह सके। विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में और भी कार्रवाई संभव है।

मस्तूरी क्षेत्र में 8 राशन दुकानों का आवंटन, इच्छुक उम्मीदवार 13 मार्च तक करें आवेदन

बिलासपुर जिले के विकासखंड मस्तूरी के अंतर्गत सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 8 ग्रामों में उचित मूल्य (राशन) दुकानों के संचालन हेतु 13 मार्च 2026 तक आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। एसडीएम कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार इनमें बूढ़ीखार, गतोरा, केवतरा, गोडाडीह, मस्तूरी, मटिया, शिवटिकारी एवं सुकुलकारी ग्रामों में राशन दुकान खोले जाने हैं। इन ग्रामों राशन दुकान के लिए पात्र स्व सहायता समूह, ग्राम पंचायत अथवा सहकारी संस्थाएं निर्धारित प्रारूप में आवेदन प्रस्तुत कर सकती हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 13 मार्च 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक आवेदकों को अपने आवेदन मस्तूरी स्थित एसडीएम कार्यालय की खाद्य शाखा में उक्त तिथि तक जमा करना होगा। आवेदन निर्धारित फॉर्मेट में तैयार कर ए-4 आकार के लिफाफे में प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। निर्धारित शर्तों एवं दिशा-निर्देशों के अनुसार ही आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। खाद्य निरीक्षक ने पात्र संस्थाओं से समय-सीमा के भीतर आवेदन प्रस्तुत करने की अपील की है। विस्तृत जानकारी एसडीएम कार्यालय मस्तूरी के खाद्य शाखा से प्राप्त की जा सकती है। पटेल/

राशन कार्ड वालों की बल्ले-बल्ले! छत्तीसगढ़ में 82 लाख परिवारों के लिए एक साथ राशन वितरण

रायपुर छत्तीसगढ़ में गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। विष्णु देव साय सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत प्रदेश के करीब 82 लाख राशन कार्डधारकों को फरवरी 2026 में ही फरवरी और मार्च दो महीने का राशन एक साथ देने का फैसला लिया है। इस फैसले से लाखों परिवारों को समय से पहले राहत मिलेगी और राशन वितरण व्यवस्था और भी सुचारू होगी। खाद्य विभाग के निर्देश पर सभी जिलों में गोदामों से चावल का उठाव तेज कर दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि NFSA योजना के तहत आने वाले अंत्योदय और प्राथमिकता कार्डधारकों को फोर्टिफाइड चावल दिया जाएगा, जबकि राज्य योजना के APL कार्डधारकों को उनकी पात्रता अनुसार चावल मिलेगा। इसके अलावा फरवरी महीने के लिए नमक, शक्कर और गुड़ का भी वितरण किया जाएगा, ताकि उपभोक्ताओं को सभी जरूरी सामान एक साथ मिल सके। राशन वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए ई-पॉस मशीन से बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य किया गया है। दो महीने का राशन एक साथ मिलने के कारण हितग्राही को मशीन पर दो बार अंगूठा लगाना होगा। चावल के अतिरिक्त, फरवरी माह के लिए नमक, शक्कर और गुड़ का आबंटन भी जारी किया गया है, ताकि उपभोक्ताओं को सभी आवश्यक सामग्री एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें।राशन वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने ई-पास (e-PoS) मशीन के माध्यम से बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को अनिवार्य रखा है। चूंकि इस बार दो महीने का राशन एक साथ दिया जा रहा है, इसलिए हितग्राहियों को मशीन पर दो बार (पृथक-पृथक) अंगूठा लगाकर प्रमाणीकरण करना होगा। एईपीडीएस (AePDS) सॉफ्टवेयर में इसके लिए आवश्यक तकनीकी बदलाव किए गए हैं। दुकानदारों को भी निर्देशित किया गया है कि वे उपभोक्ताओं को इस प्रक्रिया के बारे में पहले से जानकारी दें ताकि दुकानों पर अनावश्यक भीड़ न लगे।भंडारण और निगरानी के कड़े निर्देशसरकार ने स्पष्ट किया है कि दो महीने का राशन एकमुश्त (CG News) देने के कारण उचित मूल्य की दुकानों में पर्याप्त स्टॉक होना अनिवार्य है। सरकार ने दुकानदारों को निर्देश दिए हैं कि उपभोक्ताओं को पहले से जानकारी दें, ताकि राशन दुकानों पर भीड़ न लगे। खाद्य विभाग के अनुसार, मिलिंग में देरी की चर्चा जरूर है, लेकिन सरकार का दावा है कि हर पात्र परिवार को समय पर पूरा राशन मिलेगा। खाद्य विभाग के नियंत्रकों ने पुष्टि की है कि गोदामों से चावल का उठाव तेजी से किया जा रहा है और वितरण की निगरानी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। हालांकि, मिलिंग की धीमी गति के कारण कुछ क्षेत्रों में स्टॉक की चुनौतियों की चर्चा थी, लेकिन विभाग ने दावा किया है कि वितरण में कोई बाधा नहीं आएगी और प्रत्येक पात्र परिवार को उनका हक समय पर मिलेगा।

82 लाख परिवारों के लिए खुशखबरी, छत्तीसगढ़ में एक साथ दो महीने का राशन वितरण

रायपुर  छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने राज्य के राशन कार्ड धारकों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत प्रदेश के लगभग 82 लाख परिवारों को फरवरी 2026 में ही दो महीने (फरवरी और मार्च) का चावल एकमुश्त प्रदान किया जाएगा। खाद्य विभाग (CG News) द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य वितरण प्रणाली को सुचारू बनाना और कार्ड धारकों को अग्रिम राहत पहुँचाना है। सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों और राज्य नागरिक आपूर्ति निगम को समय पर भंडारण सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए हैं। किसे मिलेगा कौन सा राशन? इस विशेष वितरण योजना (CG News) के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के अंतर्गत आने वाले अंत्योदय और प्राथमिकता राशन कार्ड धारकों को उनकी निर्धारित पात्रता के अनुसार फोर्टिफाइड चावल (पोषण युक्त चावल) दिया जाएगा। वहीं, राज्य योजना के सामान्य एपीएल कार्ड धारकों को उनकी मासिक पात्रता के अनुसार चावल का वितरण होगा। चावल के अतिरिक्त, फरवरी माह के लिए नमक, शक्कर और गुड़ का आबंटन भी जारी किया गया है, ताकि उपभोक्ताओं को सभी आवश्यक सामग्री एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें। अंत्योदय और प्राथमिकता कार्ड वालों को प्राथमिकता राज्य योजना के दायरे में आने वाले अंत्योदय, प्राथमिकता, एकल निराश्रित और दिव्यांग राशनकार्ड धारकों को फरवरी में ही दो माह की पात्रता का चावल मिलेगा। इन कार्ड धारकों को उनकी निर्धारित मात्रा के अनुसार सामान्य (नॉन-फोर्टिफाइड) चावल का वितरण किया जाएगा। सरकार ने इस आबंटन को एकमुश्त जारी किया है और राशन दुकानों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने गोदामों में पर्याप्त स्टॉक जमा कर लें ताकि किसी भी कार्ड धारक को खाली हाथ न लौटना पड़े। फोर्टिफाइड राइस का भी होगा वितरण राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत आने वाले अंत्योदय और प्राथमिकता कार्ड धारकों को उनकी नियमित पात्रता के अनुसार फोर्टिफाइड चावल दिया जाएगा। खाद्य विभाग के मुताबिक, इन परिवारों के लिए फरवरी का नियमित कोटा जारी कर दिया गया है। फोर्टिफाइड चावल पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जिसे सरकार कुपोषण से लड़ने के लिए वितरित कर रही है। वितरण की पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए स्थानीय स्तर पर टीमें भी गठित की गई हैं। चावल के साथ नमक और शक्कर की भी व्यवस्था केवल चावल ही नहीं, बल्कि अन्य जरूरी खाद्य सामग्री का आबंटन भी जारी कर दिया गया है। सामान्य एपीएल (APL) कार्ड धारकों के लिए फरवरी का मासिक कोटा दुकानों तक भेज दिया गया है। इसके अलावा फरवरी महीने के लिए नमक, शक्कर और गुड़ की मात्रा भी तय कर दी गई है। उचित मूल्य की दुकानों को साफ तौर पर कहा गया है कि वे आबंटन के अनुसार ही सामग्रियों का वितरण करें और पारदर्शिता बनाए रखें। ई-पॉस मशीन से होगा सत्यापन राशन लेने के लिए हितग्राहियों को बायोमेट्रिक प्रक्रिया से गुजरना होगा। चूंकि इस बार दो महीने का चावल एक साथ मिल रहा है, इसलिए ई-पॉस मशीन में फरवरी और मार्च के लिए अलग-अलग अंगूठा लगाना (बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण) अनिवार्य होगा। खाद्य विभाग के सॉफ्टवेयर में इसके लिए जरूरी बदलाव किए जा रहे हैं। दुकानदारों को सलाह दी गई है कि वे उपभोक्ताओं को पहले से इसकी जानकारी दे दें ताकि सत्यापन के दौरान समय कम लगे। भंडारण और स्टॉक की स्थिति मजबूत खाद्य विभाग ने आश्वस्त किया है कि नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) के गोदामों और उचित मूल्य की दुकानों में अनाज का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। सरकार ने वितरण की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए विशेष टीम तैनात की है जो रोजाना स्टॉक और वितरण की रिपोर्ट चेक करेगी। यदि किसी दुकान पर राशन की कमी पाई जाती है, तो वहां तुरंत अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इस फैसले से गरीब परिवारों को अग्रिम राशन मिलने से काफी मदद मिलेगी। बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य राशन वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने ई-पास (e-PoS) मशीन के माध्यम से बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को अनिवार्य रखा है। चूंकि इस बार दो महीने का राशन एक साथ दिया जा रहा है, इसलिए हितग्राहियों को मशीन पर दो बार (पृथक-पृथक) अंगूठा लगाकर प्रमाणीकरण करना होगा। एईपीडीएस (AePDS) सॉफ्टवेयर में इसके लिए आवश्यक तकनीकी बदलाव किए गए हैं। दुकानदारों को भी निर्देशित किया गया है कि वे उपभोक्ताओं को इस प्रक्रिया के बारे में पहले से जानकारी दें ताकि दुकानों पर अनावश्यक भीड़ न लगे। भंडारण और निगरानी के कड़े निर्देश सरकार ने स्पष्ट किया है कि दो महीने का राशन एकमुश्त (CG News) देने के कारण उचित मूल्य की दुकानों में पर्याप्त स्टॉक होना अनिवार्य है। खाद्य विभाग के नियंत्रकों ने पुष्टि की है कि गोदामों से चावल का उठाव तेजी से किया जा रहा है और वितरण की निगरानी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। हालांकि, मिलिंग की धीमी गति के कारण कुछ क्षेत्रों में स्टॉक की चुनौतियों की चर्चा थी, लेकिन विभाग ने दावा किया है कि वितरण में कोई बाधा नहीं आएगी और प्रत्येक पात्र परिवार को उनका हक समय पर मिलेगा।

बच्चों के जन्म और शादी के बाद नहीं अटकेगा राशन, खाद्य सुरक्षा योजना में जुड़ेंगे नाम

भरतपुर. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (एनएफएसए) के तहत चयनित परिवारों के राशन कार्ड में जो सदस्य अब तक जुड़ने से शेष रह गए थे, उनके नाम अब जोड़े जा सकेंगे। इसके लिए विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की सुविधा शुरू कर दी गई है। सरकार की ओर से यह प्रक्रिया पुन: शुरू किए जाने से हजारों परिवारों को राहत मिलेगी, जिनके यहां बच्चों का जन्म हुआ है या विवाह के बाद परिवार में नए सदस्य जुड़े हैं। जिला रसद अधिकारी पवन अग्रवाल ने बताया कि जारी निर्देशों के अनुसार परिवार का कोई भी सदस्य विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। शेष सदस्यों के नाम जनआधार एपीआई के माध्यम से राशन कार्ड में जोड़े जाएंगे। यदि जुड़ने वाले सदस्य के नाम पर एलपीजी गैस कनेक्शन है तो उसकी एलपीजी आईडी का विवरण भी आवेदन में दर्ज किया जा सकेगा। आवेदन जिला रसद अधिकारी, विकास अधिकारी अथवा अधिशासी अधिकारी के स्तर से अनुमोदित होने के बाद संबंधित सदस्य का नाम खाद्य सुरक्षा योजना में जोड़ा जाएगा। ई-केवाईसी कराना अनिवार्य इसके बाद 90 दिनों के भीतर सभी नए जुड़े सदस्यों की ई-केवाईसी कराना अनिवार्य होगा, ताकि उन्हें योजना का लाभ निर्बाध रूप से मिल सके। यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है, इसलिए पात्र लाभार्थियों को अनावश्यक रूप से ई-मित्र केंद्रों पर जाने की आवश्यकता नहीं होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य आमजन को सुविधा देना और पारदर्शिता बढ़ाना है। साथ ही जिला रसद अधिकारियों को अपने अधीनस्थ प्रवर्तन स्टाफ को इस प्रक्रिया का प्रशिक्षण देने और इसका व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि काफी समय से यह सुविधा बंद थी, जिसे सरकार ने अब पुन: चालू कर दिया है। इससे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के पात्र लाभार्थियों को समय पर पूरा अनाज और अन्य सामग्री प्राप्त करने में सुविधा होगी। यह बोले डीएसओ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत चयनित परिवारों के राशन कार्ड में शेष रह गए सदस्यों के नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके लिए विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। जिन परिवारों में बच्चों का जन्म हुआ है या विवाह के बाद नए सदस्य जुड़े हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं। पात्रता की जांच के बाद संबंधित सदस्यों को राशन कार्ड में जोड़ा जाएगा।

बायोमेट्रिक लेकर भी हितग्राहियों को नहीं दिया राशन, सेल्समैन का बड़ा कारनामा

रायपुर/आरंग. शासन की सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत योजनाओं को जमीनी स्तर पर कैसे पलीता लगाया जाता है, इसकी एक तस्वीर ग्राम पंचायत नारा में देखने को मिली है. ग्रामीणों की माने तो यहां के शासकीय उचित मूल्य की दुकान के सेल्समैन रामलाल रात्रे ने न केवल नियमों की धज्जियां उड़ाई हैं, बल्कि लगभग 300 गरीब परिवारों के मुंह से निवाला छीनकर एक बड़े भ्रष्टाचार को अंजाम दिया है. ग्रामीणों ने अपना दुखड़ा सुनाते हुए बताया कि सेल्समैन ने चालाकी से सभी हितग्राहियों के बायोमेट्रिक (अंगूठा) मशीन पर ले लिए, ताकि रिकॉर्ड में वितरण ‘सफल’ दिखाई दे. लेकिन जब राशन देने की बारी आई, तो हितग्राहियों को खाली झोला लेकर घर लौटना पड़ा. पिछले 3 महीनों से यही खेल चल रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि सेल्समेन रामलाल रात्रे बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठा लगवा लेने के बाद कहते थे कि ऊपर से राशन नहीं आया है, जब आएगा तब देंगे, लेकिन महीना बीत जाने के बाद भी राशन नहीं मिलता था. ऑडिट में फूटा ‘घोटाले का फोड़ा’ ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बाद जब फूड इंस्पेक्टर ने दुकान का औचक निरीक्षण और स्टॉक ऑडिट किया, तो भ्रष्टाचार की परतें उखड़ती चली गईं. जांच के दौरान सेल्समैन रामलाल रात्रे डर के मारे फरार रहा, जो स्वयं उसके गुनाह की पुष्टि करता है. राशन दुकान के ताले को कटर मशीन से तोड़ा गया फिर जांच कार्यवाही शुरू हो सकी. सूत्रों के अनुसार, दिसंबर और जनवरी माह के लिए नागरिक आपूर्ति निगम ने जो आबंटन भेजा था, वह कागजों में तो बंट गया, लेकिन भौतिक रूप से गायब है. शासकीय उचित मूल्य की दुकान संख्या 442003103 में 495.94 क्विंटल चावल, 16.39 क्विंटल शक्कर और 16.22 क्विंटल नमक का आबंटन हुआ है. लेकिन हितग्राहियों को अभी तक राशन का वितरण नहीं हो पाया है. निरीक्षण के दौरान राशन दुकान में चावल ही नहीं मिला है. प्रशासन की चुप्पी और ग्रामीणों का आक्रोश हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में राशन का गबन बिना किसी ऊंचे संरक्षण के संभव नहीं है. ग्रामीण पिछले कई महीनों से दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं, लेकिन अब तक आरोपी सेल्समैन की गिरफ्तारी नहीं होना प्रशासनिक सुस्ती पर सवाल खड़े करता है. खाद्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, सेल्समैन पर आवश्यक वस्तु अधिनियम और गबन की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने की तैयारी की जा रही है. दुकान की जांच में सामने आई गड़बड़ियां निरीक्षण करने पहुंची खाद्य निरीक्षक पुष्पा चौधरी ने बताया कि हितग्राहियों की शिकायत पर ग्राम पंचायत नारा स्थित शासकीय उचित मूल्य का निरीक्षण किया गया है, जिसमें कई गड़बड़ियां सामने आई है. मौके पर कुछ हितग्राही आए थे जिनका बायोमेट्रिक लेकर उन्हें अभी तक राशन नहीं दिया गया है. अन्य हितग्राहियों की जानकारी लेते हुए बीते महीनों में राशन दुकान को आबंटित चावल, शक्कर और नमक की मात्रा का आंकलन किया जा रहा है. जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगी, जिसके बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.

राशन की कालाबाजारी की सूचना के आधार पर कलेक्टर ने दोनों दुकान संचालक औरअध्यक्ष के खिलाफ FIR करवाई

जबलपुर  कलेक्टर के निर्देशन पर कार्रवाई करते हुए दो राशन दुकान संचालक के खिलाफ FIR दर्ज की गई है , आरोप है कि जबलपुर के परियट पिपरिया शासकीय उचित मूल्य की दुकान की अध्यक्ष और विक्रेता ने मिलकर अपनी दो दुकानों से 23 लाख रुपए के राशन की कालाबाजारी कर दी। सूचना के आधार पर कलेक्टर दीपक कुमार सक्सेना ने जांच के बाद दोनों दुकान संचालक और दुकान अध्यक्ष के खिलाफ FIR करवाई है। टीम गई तो दुकान में ताला लटका मिला प्रशासन को शिकायत मिली थी कि हितग्राही दुकानों के चक्कर काट काट परेशान हो गए लेकिन उन्हें कोई राशन नहीं मिला लेकिन उनके नाम की पर्ची जरूर कट गई। दुकान की अध्यक्ष शहाना बेगम और विक्रेता इमरान मंसूरी है। पुलिस ने बताया कि वार्ड-76 में शासकीय उचित मूल्य दुकान का संचालन किया जाता है जिसको लेकर हितग्राहियों ने शिकायत की थी। दुकान अक्सर बंद रहने से राशन नहीं मिलता। जिसके बाद जांच टीम 13, 15 और 17 मई को परियट पिपरिया दुकान गई, लेकिन दुकान में ताला लटका मिला और तो और वहां दुकान का कोई बोर्ड भी नहीं लगा था। हितग्राहियों के नाम आवंटन बता गड़बड़झाला अधिकारियों ने दुकान के पास से ही इमरान को फोन करके बुलाया, ताकि दुकान में मौजूद स्टॉक जांच की जा सके, लेकिन वह नहीं आया। वहीं एक टीम इसी सहकारी भंडार की चितरंजन दास वार्ड की दुकान का निरीक्षण करने 15 मई को ही पहुंची, तो वह भी बंद मिली। विक्रेताओं ने बताया कि उन्हें राशन नहीं दिया गया, लेकिन उनकी पर्ची निकाल ली गई। जांच में सामने आया कि दोनों दुकानों से 8 लाख 59 हजार रुपए का गेहूं, 14 लाख 82 हजार रुपए का चावल और दो हजार रुपए की शक्कर का आवंटन हितग्राहियों के नाम बता कुल 29 लाख रुपए के राशन का गड़बड़झाला किया था। जांच के बाद गोहलपुर थाने में सहायक आपूर्ति अधिकारी ने एफआइआर दर्ज कराई।

आठ साल पहले मृत व्यक्ति की आत्मा गांव के कोटे से राशन ले रही है, अब हुआ खुलासा

  सतना  सतना के टिकुरी अकौना गांव में कुछ अजीब हो रहा है. आठ साल पहले मृत व्यक्ति की आत्मा कथित तौर पर गांव के कोटे से राशन ले रही है. यह आत्मा बकायदा पीडीएस मशीन में अंगूठा लगाकर अपने हिस्से का राशन ले जाती है. यह आत्मा बलवंत सिंह की है, जो आठ साल पहले एक हादसे में मृत्यु को प्राप्त हो चुके हैं, लेकिन राशन लेने के लिए उनका नाम आज भी राशन कार्ड में दर्ज है. साक्ष्य मिलने के बाद गांव की महिला सरपंच श्रद्धा सिंह ने इसकी शिकायत तहसीलदार से की, लेकिन कोटर तहसीलदार ने कोई कार्रवाई नहीं की. इसके बाद उन्होंने सीएम हेल्पलाइन का सहारा लिया.   जांच हुई तो सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है. यहां 8 साल पहले मृत बलवंत सिंह के नाम पर आज भी राशन कार्ड से राशन उठाया जा रहा है, जबकि जिंदा शंकर आदिवासी को 2017 में मृत घोषित कर राशन सहित सरकारी सुविधाओं से वंचित कर दिया गया. यह मामला तब उजागर हुआ, जब गांव की महिला सरपंच श्रद्धा सिंह ने जिंदा व्यक्ति को राशन दिलाने की कोशिश की और मृतक के नाम पर राशन वितरण का खुलासा हुआ. बलवंत सिंह की 8 साल पहले एक हादसे में मौत हो चुकी है, लेकिन उनका नाम राशन कार्ड पोर्टल से नहीं हटाया गया. फूड इंस्पेक्टर ब्रजेश पांडेय ने बताया कि शुरुआती जांच में पाया गया कि बलवंत सिंह का नाम समग्र पोर्टल से हटाया गया था, लेकिन राशन पोर्टल पर उनका नाम बरकरार रहा. उनके परिवार के अन्य सदस्य, धर्मेंद्र सिंह और प्रदीप सिंह, उनके नाम पर अंगूठा लगाकर राशन ले रहे थे. परिवार के 8 सदस्यों के नाम पर राशन वितरित हो रहा था. शिकायत के बाद खाद्य विभाग ने बलवंत सिंह का नाम राशन पोर्टल से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. वहीं, शंकर आदिवासी को 2017 में मृत घोषित कर दिया गया था. जैसे-तैसे उन्होंने खुद को जिंदा साबित किया, लेकिन राशन और अन्य सरकारी सुविधाओं से आज भी वंचित हैं. फूड इंस्पेक्टर ने बताया कि पात्रता और अपात्रता की जांच पंचायत स्तर पर होती है और पंचायत सचिव को राशन मित्र पोर्टल के जरिए नाम विलोपन की प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी दी गई है. शंकर आदिवासी का नाम भी जल्द अपडेट कर लिया जाएगा. गांव के पंच और सरपंच पति अनुराग सिंह ने इस भ्रष्टाचार पर हैरानी जताते हुए कहा कि जिंदा लोग राशन के लिए भटक रहे हैं, जबकि मृतक के नाम पर राशन उठाया जा रहा है. उन्होंने तहसीलदार से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर सीएम हेल्पलाइन का सहारा लिया. कोटर तहसील के सेल्समैन शिव कुमार गौतम ने इस मामले से अनभिज्ञता जताई और कहा कि अब नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. यह मामला पीडीएस में भ्रष्टाचार की काली छाया को उजागर करता है. भारत सरकार की मंशा हर गरीब को पर्याप्त राशन देने की है, जहां गरीबी रेखा से नीचे वालों को 35 किलो और उससे ऊपर वालों को 15 किलो राशन प्रति माह मिलता है. लेकिन टिकुरी अकौना जैसे हालात व्यवस्था की खामियों को दर्शाते हैं, जहां जिंदा लोग राशन के लिए तरस रहे हैं और मृतकों के नाम पर राशन का दुरुपयोग हो रहा है.  

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