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लगातार बढ़ रही मुंबई में रियल एस्टेट की कीमतें, दुबई को भी पीछे छोड़ा

 मुंबई  मुंबई में प्रॉपर्टी कीमतें अब दुबई से भी 20 फीसदी ज्यादा हो गई हैं, लेकिन भारतीय खरीदार इससे विचलित नहीं हुए हैं.   Wisdom Hatch के अक्षत श्रीवास्तव ने बताया कि मुंबई का बढ़ता हुआ प्रॉपर्टी मार्केट वैश्विक तर्क को क्यों चुनौती देता है और बुनियादी ढांचे की समस्याओं के बावजूद खरीदारों को आकर्षित करता रहता है. अक्षत श्रीवास्तव कहते हैं- “मुंबई का रियल एस्टेट बढ़ता जा रहा है, क्योंकि भारतीय किसी भी कीमत पर खरीदने को तैयार हैं.”  उन्होंने कहा कि भारत का प्रॉपर्टी मार्केट भावनाओं और स्थानीय मांग से प्रेरित है. भले ही दुबई बेहतर मूल्य दे, यहां लोग उसी में निवेश करना पसंद करते हैं जिसे वे समझते हैं.’ कोविड के बाद रियल एस्टेट सेक्टर में आई तेजी उनकी ये टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र COVID के बाद तेजी से आगे बढ़ रहा. नवीनतम 1 फाइनेंस हाउसिंग टोटल रिटर्न इंडेक्स (TRI) के अनुसार, भारत के शीर्ष शहरों में घरों की कीमतें औसतन 48% बढ़ गई हैं. यह इंडेक्स, जो RERA-पंजीकृत लेनदेन आंकड़ों पर आधारित है, दर्शाता है कि आवास बाजार महामारी के बाद से मजबूत रूप से उबर आया है. मुंबई सबसे महंगा मुंबई भारत का सबसे महंगा रियल एस्टेट बनकर उभरा है, जिसकी औसत कीमतें ₹26,975 प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गई हैं. एक आंकड़ा जो न केवल अन्य भारतीय शहरों को बल्कि दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय केंद्रों को भी पीछे छोड़ देता है.  शहर की लगातार बुनियादी ढांचे की समस्याओं के बावजूद, प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ रही हैं. श्रीवास्तव इसका कारण सांस्कृतिक मनोविज्ञान और अनौपचारिक वित्तीय प्रथाओं का मिश्रण बताते हैं. वो कहते हैं- ‘यह खरीदारों के लिए सुविधा बढ़ाता है, क्योंकि वे उस काले धन का इस्तेमाल कर सकते हैं. बहुत सारे खरीदार हैं जो किसी भी कीमत पर खरीदने को तैयार हैं”. उन्होंने कहा कि जहां दुबई जैसे प्रॉपर्टी मार्केट पारदर्शी हैं और वैश्विक खरीदारों को आकर्षित करते हैं, वहीं मुंबई का हाउसिंग मार्केट स्थानीय मांग और गहरे विश्वास पर फलता-फूलता है. एक भारतीय सबसे ज्यादा भारत में ही प्रॉपर्टी खरीदना चाहता है. रियल एस्टेट बहुत हद तक स्थानीय है. महंगी प्रॉपर्टी में दुबई रह गया पीछे!  दुबई में महंगे फ्लैट मिलते हैं तो अपनी सोच बदल लीजिए। अपने देश के एक शहर ने महंगी अल्ट्रा-लग्जरी प्रॉपर्टी के मामले में दुबई को पीछे छोड़ दिया है। यही नहीं, इससे मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों भी पीछे रह गए हैं। यह शहर कोई और नहीं बल्कि एनसीआर का गुरुग्राम है। अल्ट्रा-लग्जरी प्रॉपर्टी के मामले में गुरुग्राम काफी आगे निकल गया है। देश में इस समय लग्जरी हाउसिंग प्रॉपर्टी की मांग काफी बढ़ रही है। साल 2024 में काफी लोगों ने करोड़ों रुपये के फ्लैट सहित दूसरे हाउसिंग प्रोजेक्ट खरीदे। ऐसे में देखा जाए तो साल 2024 भारत के लग्जरी रियल एस्टेट बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष साबित हुआ है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक सुपर-लग्जरी हाउसिंग प्रोजेक्ट की मांग गुरुग्राम से लेकर मुंबई तक हो रही है। गुरुग्राम निकला आगे लग्जरी रियल एस्टेट कैटेगरी में गुरुग्राम ने मुंबई और दुबई को कड़ी टक्कर दी है। दिसंबर 2024 तक गुरुग्राम का DLF कैमेलियास प्रोजेक्ट भारत की रियल एस्टेट सुर्खियों में सबसे आगे रहा। इस प्रोजेक्ट में कई महंगे-महंगे सौदे हुए। ऐसे में ग्रुरुग्राम ने अल्ट्रा-लक्जरी सेगमेंट में मुंबई और दुबई दोनों को पीछे छोड़ दिया है। ओआरएएम डेवलपमेंट्स के सीएमडी प्रदीप मिश्रा के मुताबिक DLF कैमेलियास में 16,290 वर्ग फुट के पेंटहाउस को एक कारोबारी ने 190 करोड़ में खरीदा। यह कीमत 1.80 लाख रुपये प्रति वर्ग फुट के बराबर है। ऐसे में कैमेलियास भारत के सबसे महंगे हाई-राइज कॉन्डोमिनियम के रूप में सबसे आगे रहा। कहां कितनी कीमत? मुंबई में जुहू को सबसे पॉश इलाका माना जाता है। ओआरएएम डेवलपमेंट्स के मुताबिक यहां प्रॉपर्टी की औसतन कीमत 55 हजार से 60 हजार रुपये प्रति वर्ग फुट है। वहीं मालाबर हिल में यह कीमत 50 हजार से 55 हजार रुपये प्रति वर्ग फुट है। वहीं बात अगर दुबई की करें तो यहां की सिलिकॉन ओएसिस में प्रॉपर्टी की औसत कीमत 40 हजार रुपये प्रति वर्ग फुट है। दुबई में पाम जुमेरह (Palm Jumeirah) काफी चर्चित जगह है। यहां समुद्र के ऊपर कॉलोनी बनी है। यहां पर प्रॉपर्टी की कीमत सबसे ज्यादा है जिसकी शुरुआत करीब एक लाख रुपये प्रति वर्ग फुट जो 10 लाख रुपये प्रति वर्ग फुट तक जाती है। गुरुग्राम कितना आगे? महंगी प्रॉपर्टी के मामले में देखें तो अभी गुरुग्राम दुबई को कड़ी टक्कर दे रहा है। कुछ मामले में तो यह दुबई से भी आगे निकल गया है। वहीं देश में अभी सबसे महंगी प्रॉपर्टी गुरुग्राम में ही बिकी है। जानकारों के मुताबिक गुरुग्राम में प्रॉपर्टी की कीमत आने वाले समय में और तेजी से बढ़ सकती है।

साल की पहली तिमाही के दौरान हाउसिंग रियल एस्टेट का बाजार सुस्त हो गया

नई दिल्ली बीते कुछ साल में मकानों की कीमत (House Price) आसमान को छूने को बेताब है। इधर, जियो-पोलिटिकल टेंशन और शेयर बाजार में गिरावट के बीच निवेशकों का सेंटिमेंट बिगड़ गया है। तभी तो इस साल की पहली तिमाही के दौरान हाउसिंग रियल एस्टेट का बाजार सुस्त हो गया है। तभी तो इस दौरान मकानों की बिक्री में 28 फीसदी की गिरावट आई है। रिपोर्ट से हुआ है खुलासा रियल एस्टेट कंसल्टेंट एनारॉक (Anarock) का कहना है कि आवासीय संपत्तियों की आसमान छूती कीमतों और भू-राजनीतिक तनावों के कारण Q1, 2025 में भारतीय आवास बाजार की तेजी धीमी हो गई है। उसकी वजह से घरों की बिक्री में कमी आ रही है। इसकी एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल जनवरी से मार्च के दौरान करीब 93,280 यूनिट्स की बिक्री हुई है। पिछले साल इसी समय में 1,30,170 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। इस हिसाब से इस साल 28% की गिरावट दिख रही है। दिल्ली एनसीआर में बिक्री 20 फीसदी घटी दिल्ली-NCR में बिक्री 20% तक घटी है। यहां इस साल पहली तिमाही के दौरान करीब 12,520 यूनिट्स की बिक्री हुई है। जबकि पिछले साल इसी दौरान 15,650 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में आवासीय संपत्तियों की बिक्री 26% तक गिरी है। वहां इस साल करीब 31,610 यूनिट्स की बिक्री हुई है, जबकि पिछले साल 42,920 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। मकानों (इकाइयों में) की बिक्री में साल-दर-साल % परिवर्तन   शहरों के नाम Q1-2025 Q1-2024 % परिवर्तन (Q1-2024 बनाम Q1-2025) एनसीआर 12,520 15,650 -20% एमएमआर 31,610 42,920 -26% बैंगलोर 15,000 17,790 -16% पुणे 16,100 22,990 -30% हैदराबाद 10,100 19,660 -49% चेन्नई 4,050 5,510 -26% कोलकाता 3,900 5,650 -31% कुल 93,280 1,30,170 -28% स्रोत: एनारॉक रिसर्च   बेंगलुरु-हैदराबाद में भी घटी बिक्री इस अविध के दौरान बेंगलुरु में मकानों की बिक्री 16% तक गिरी है। वहां इस साल की करीब 15,000 यूनिट्स की बिक्री होने की संभावना है, जबकि पिछले साल 17,790 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। पुणे में बिक्री 30% तक गिर सकती है। यहां 16,100 यूनिट्स की बिक्री होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल 22,990 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। हैदराबाद में घरों की बिक्री 49% तक गिर सकती है। यहां 10,100 यूनिट्स की बिक्री होने की संभावना है, जबकि पिछले साल 19,660 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। चेन्नई में बिक्री 26% तक गिर सकती है। यहां 4,050 यूनिट्स की बिक्री होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल 5,510 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। कोलकाता में आवासीय संपत्तियों की बिक्री इस साल जनवरी-मार्च में 31% तक कम हो सकती है। यहां 3,900 यूनिट्स की बिक्री होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल इसी समय में 5,650 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। अर्थव्यवस्था ठीक तब भी गिरावट एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी का कहना है कि भारत का समग्र आर्थिक परिदृश्य इस समय सकारात्मक बना हुआ है। GDP विकास दर वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक रहने और मुद्रास्फीति भी नियंत्रण में रहने का अनुमान है। लेकिन, तब भी मकानों की बिक्री में गिरावट आ रही है। उन्होंने कहा “हालांकि, मकानों की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनावों जैसे चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और एक कमजोर वैश्विक अर्थव्यवस्था ने भारत के आवासीय बाजार की गतिविधि पर असर डाला है। इन कारकों का असर Q1 2025 में आवास बाजार पर पड़ा है।”

रियल एस्टेट सेक्टर में तीसरी तिमाही में सालाना आधार पर 41 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज

नई दिल्ली रियल एस्टेट सेक्टर में संस्थागत निवेश में 2024 की तीसरी तिमाही में सालाना आधार पर 41 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो 0.96 अरब डॉलर तक पहुंच गया। एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछली तिमाही में रियल एस्टेट सेक्टर में संस्थागत निवेश 3.1 अरब डॉलर था, जो कि 2024 की सितंबर तिमाही में घटा है। वेस्टियन रिसर्च ने एक रिपोर्ट में कहा कि तिमाही आधार पर 69 प्रतिशत की इस गिरावट के बावजूद दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है, क्योंकि निवेश लगभग एक अरब डॉलर के आंकड़े को छू रहा है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है, “पिछले वर्ष की तुलना में निवेश में वृद्धि मौजूदा भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि का प्रमाण है। परिणामस्वरूप, विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 2023 की तीसरी तिमाही में 27 प्रतिशत से बढ़कर 2024 की तीसरी तिमाही में 46 प्रतिशत हो गई।” रिपोर्ट में कहा गया है, “इसके विपरीत, घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी एक साल पहले इसी तिमाही के 71 प्रतिशत से घटकर 2024 की तीसरी तिमाही में 43 प्रतिशत रह गई। हालांकि, मूल्य के लिहाज से यह कमी केवल 15 प्रतिशत थी।” वेस्टियन के सीईओ श्रीनिवास राव ने कहा, “मजबूत जीडीपी वृद्धि के दम पर निवेशकों ने भारत के विकास पर भरोसा दिखाया है। नतीजतन, रियल एस्टेट सेक्टर में विदेशी निवेशकों की भागीदारी बढ़ी, जिसके कारण संस्थागत निवेश 2024 की तीसरी तिमाही में एक अरब डॉलर के आंकड़े को छू गया।” उन्होंने कहा, “इसके अतिरिक्त, घरेलू निवेशक भी सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं, जिन्हें देश भर में तेजी से हो रहे बुनियादी ढांचे के विकास से समर्थन मिल रहा है।” 2024 की तीसरी तिमाही में घरेलू निवेशकों के लिए आवासीय संपत्तियां पहली पसंद रहीं, जबकि वाणिज्यिक सौदों में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 64 प्रतिशत रही। ऑफिस से काम करने की अनिवार्यता और जीसीसी (वैश्विक क्षमता केंद्र) की बढ़ती प्रमुखता ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया, जिससे वाणिज्यिक निवेश की हिस्सेदारी 2023 की तीसरी तिमाही के 24 प्रतिशत से बढ़कर 2024 की तीसरी तिमाही में 71 प्रतिशत हो गई। दूसरी ओर, आवासीय क्षेत्र की हिस्सेदारी 2024 की तीसरी तिमाही में घटकर 19 प्रतिशत रह गई, जो एक साल पहले इसी अवधि में 44 प्रतिशत थी। हालांकि, आने वाली तिमाहियों में आवासीय परिसंपत्तियों में निवेश बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि को-लिविंग, सीनियर हाउसिंग और सर्विस अपार्टमेंट जैसे विशिष्ट परिसंपत्ति वर्ग में लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है।  

देश के कई शहरों में रेसिडेंशियल रियल एस्टेट की कीमतों में 88 फीसदी का उछाल दिखा

नई दिल्ली रियल एस्टेट (Real Estate) मार्केट में इन दिनों भारी उछाल दिख रहा है। कोरोना काल से पहले की बात करें तो तब से अब तक स्थिति काफी बदल गई है। बीते पांच साल में ही देश के टॉप 10 शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें (Property Price) काफी बढ़ गई है। इन शहरों में मकान की कीमतों में 88 फीसदी तक का उछाल आया है। इसकी जानकारी रियल एस्टेट डेटा एनालिटिक्स फर्म प्रॉपइक्विटी (PropEquity) की एक रिपोर्ट से मिलती है। सबसे ज्यादा कीमत कहां बढ़ी इस रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान गुरुग्राम में सबसे अधिक, 160 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है। साल 2019 में वहां मकान की औसत कीमतें 7,500 रुपये प्रति वर्ग फुट थी। यह साल 2024 में बढ़कर 19,500 रुपये प्रति वर्ग फुट पर पहुंच गई हैं। मतलब कि पांच साल पहले गुड़गांव में 75 लाख रुपये में 1,000 वर्ग फुट का मकान मिल जाता था। अब यह करी दो करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सबसे कम बढ़ोतरी कहां बीते पांच साल की अवधि के दौरान मकान की कीमतें सबसे कम मुंबई में बढ़ी है। साल 2019 में मुंबई में रेसिडेंशियल रियल एस्टेट की प्रति वर्ग फुट कीमत 25,820 रुपये थी। यह साल 2024 में बढ़ कर 25,820 प्रति वर्ग फुट हो गई। मतलब कि महज 37 फीसदी की बढ़ोतरी। अन्य शहरों का क्या रहा हाल रिपोर्ट के अनुसार गुरुग्राम के बाद कीमतों में सबसे अधिक बढ़ोतरी नोएडा में (146 फीसदी), बेंगलुरु (98 फीसदी), हैदराबाद (81 फीसदी), चेन्नई (80 फीसदी), पुणे (73 फीसदी), नवी मुंबई(69 फीसदी), कोलकाता (68 फीसदी) और ठाणे में (66 फीसदी)। सबसे महंगी और सबसे सस्ती प्रॉपर्टी कहां प्रति वर्ग फीट कीमतों की बात करें तो मुंबई इस दृष्टि से सबसे महंगा शहर है। वहां मकानों की औसत कीमत 35,500 रुपये प्रति वर्ग फुट है। इसके बाद गुरुग्राम में 19,500 रुपये प्रति वर्ग फुट। इन शहरों में सबसे कम प्रॉपर्टी रेट नोएडा में दिखा जहां आवासी परिसंपत्ति की औसत कीमत 16,000 रुपये प्रति वर्ग फुट है। कितनी परियोजनाएं हुई लॉन्च? इस अवधि के दौरान देश के टॉप 10 शहरों- बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबद, कोलकाता, मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, पुणे, नोएडा और गुरुग्राम में करीब 15,000 परियोजनाएं लॉन्च की गईं। इनमें अपार्टमेन्ट, फ्लोर और विला शामिल हैं। जमीन वाले मकानों की संख्या इनमें काफी कम रही। कीमत में बढ़ोतरी के क्या हैं कारण प्रॉपइक्विटी के संस्थापक एवं सीईओ समीर जसूजा का कहना है, ‘‘पिछले 5 सालों में सभी बड़े शहरों में रियल एस्टेट की कीमतों में ज़बरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है। इस बढ़ोतरी में कई कारकों का योगदान है जैसे बुनियादी सुविधाओं का विकास, एनआरआई की बढ़ती रुचि, एचएनआई/यूएचएनआई और स्टॉक मार्केट में मुनाफ़ा हासिल करने वालों द्वारा रियल एस्टेट में निवेश तथा सम्पत्ति बनाने और आय कमाने की चाह, मकान खरीदने की चाह, लक्ज़री/सुपर लक्ज़री मकानों की ओर झुकाव।”

नवरात्र में खिल उठा प्रॉपर्टी बाजार, अब 1600 से अधिक रजिस्ट्री हुई

भोपाल  नवरात्र के शुभ मुहूर्त में रीयल एस्टेट बाजार में रौनक देखने को मिल रही है। शहर के परी बाजार, आईएसबीटी समेत अन्य पंजीयन कार्यालयों में छठवें दिन मंगलवार को भी रजिस्ट्री कराने बड़ी संख्या में प्रॉपर्टी के खरीदार पहुंचे। सुबह 10 बजे से शुरू हुआ सिलसिला रात साढ़े आठ बजे तक चलता रहा। छठवें दिन रिकॉर्ड 550 रजिस्ट्री दर्ज की गई है। जिनसे पंजीयन विभाग को कुल नौ करोड़ का राजस्व मिला है। अब प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री कराने के लिए खरीदारों के पास सिर्फ दो दिन बुधवार और गुरुवार का समय बचा हुआ है। बता दें कि शुक्रवार को स्थानीय अवकाश घोषित होने से पंजीयन कार्यालय बंद रहेंगे। छह दिन में हुईं 1600 रजिस्ट्री, 40 करोड़ मिले गणेशोत्सव में रजिस्ट्री कराने का सिलसिला अपेक्षाकृत धीमा था और वहीं पितृ पक्ष में भी रीयल एस्टेट बाजार ठंडा रहा। नवरात्र शुरू होते ही रीयल एस्टेट बाजार गुलजार हो गया। अब तक छह दिनों में 1600 से अधिक रजिस्ट्री के साथ 40 करोड़ का राजस्व पंजीयन विभाग को मिल चुका है। पहले दिन गुरुवार को 200, दूसरे दिन शुक्रवार को 391, पांचवें दिन सोमवार को 484 और छठवें दिन 550 रजिस्ट्रियां हुई हैं। 10 मिनट की रजिस्ट्री के लिए दो घंटे इंतजार आईएसबीटी स्थित पंजीयन कार्यालय में गोविंदपुरा के प्रॉपर्टी खरीदारों को रजिस्ट्री कराने के लिए दो घंटे तक का इंतजार करना पड़ रहा है। दरअसल ई-रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरु होने से 10 से 15 मिनट में रजिस्ट्री करने का दावा किया गया था, लेकिन यहां अधिकारियों की लापरवाही से दो घंटे का इंतजार लोगों को करना पड़ रहा है। इसकी वजह यह है कि यहां तीन सब-रजिस्ट्रारों का काम एक सब-रजिस्ट्रार को करना पड़ रहा है। प्रति सब-रजिस्ट्रार 65 स्लॉट नवरात्र में बढ़ती रजिस्ट्रियों की संख्या को देखते हुए प्रति सब-रजिस्ट्रार 65 स्लॉट कर दिए हैं। जिले में कुल 13 सब-रजिस्ट्रार हैं, इस तरह 845 स्लॉट तक बुक किए जा सकते हैं। वहीं समय को बढ़ाते हुए पांच की जगह सात बजे तक कर दिया गया है। ऐसे में शुभ मुहूर्त में रजिस्ट्री कराने के लिए लोग सेवा प्रदाताओं के पास पहले स्लॉट बुक करवा रहे हैं।

प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में मुख्य राजधानी से तीन गुना ज्यादा रियलिटी प्रोजेक्ट के रजिस्ट्रेशन हुए

भोपाल.  मध्य प्रदेश के लोग भोपाल से ज्यादा इंदौर में रहना पसंद करते हैं. यह बात उन रियलिटी प्रोजेक्ट के आंकड़ों से निकलकर आई है, जो दोनों शहरों में तैयार हो चुके हैं. प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में मुख्य राजधानी से तीन गुना ज्यादा रियलिटी प्रोजेक्ट के रजिस्ट्रेशन हुए. इस बात ने ये साबित कर दिया कि भोपाल से ज्यादा लोग इंदौर को पसंद कर रहे हैं. रियल एस्टेट रेगुलेटरी ऑथोरिटी (RERA) के मुताबिक साल 2022-23 में इंदौर में 258 प्रोजेक्ट के रजिस्ट्रेशन हुए, जबकि भोपाल में प्रोजेक्ट की संख्या महज 78 थी. प्रदेश में भोपाल और इंदौर ही ऐसे शहर हैं जहां रियल एस्टेट में सबसे ज्यादा काम होता है. साल 2022-23 में राज्य की संस्कारधानी जबलपुर में 40 प्रोजेक्ट, उज्जैन में 29 प्रोजेक्ट और ग्वालियर में 12 रियल एस्टेट प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन हुआ. हैरान करने वाली बात है कि खरगोन में जबलपुर, उज्जैन और ग्वालियर से भी ज्यादा प्रोजेक्ट के रजिस्ट्रेशन हुए. साल 2022-23 में यहां 45 प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन हुआ. रेरा के आंकड़े बताते हैं कि मध्य प्रदेश में रियल एस्टेट सेक्टर ने पिछले कुछ सालों में अच्छी रफ्तार पकड़ी है. गौरतलब है कि राज्य में रेरा का गठन 1 मई 2017 को हुआ था. बिल्डरों, प्रमोटरों और एजेटों के खिलाफ लगातार शिकायतें मिलने के बाद सरकार ने रेरा का गठन किया था. लोगों की थीं ये शिकायतें दरअसल, लोगों ने उन दिनों सरकार से शिकायतें की थीं कि उन्हें घरों का पजेशन नहीं मिल रहा, जबकि वे बिल्डर को पूरा भुगतान कर चुके हैं. इसके अलावा लोगों को ये भी शिकायत थी कि रियल एस्टेट के प्रमोटरों का व्यवहार ठीक नहीं है. वे लापरवाह हैं. वे एग्रीमेंट पर साइन करने के बाद पूरी तरह से बदल जाते हैं और रूखा व्यवहार करते हैं. इन सब शिकायतों देखते हुए ही सरकार ने रेरा के गठन का फैसला किया था. जानकारी के मुताबिक, मार्च 2023 तक रेरा के पास 846 पेंडिंग शिकायते हैं. गौरतलब है कि सरकार की नोटबंदी और कोरोना की वजह से रियल एस्टेट कारोबार पूरी तरह थम गया था. लेकिन, अब बिल्डरों का कहना है कि उनके बिजनेस में स्थिरता आ रही है. अब नोटबंदी और कोविड-19 के बाद से स्थितियां बदल गई हैं. इस वजह से बढ़ते हैं दाम भोपाल से प्रकाशत अंग्रेजी अखबार  के मुताबिक, बिल्डरों का कहना है कि रेरा आने के बाद स्थितियां बदल गई हैं. त्योहारों के सीजन में रिएल एस्टेट के कारोबार में तेजी आती है. लोग इस सीजन में नया घर खरीदते हैं. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस सेक्टर को और गति देने के लिए राज्य में और प्रोजेक्ट लाए जाने की जरूरत है. प्रशासन को मास्टर प्लान लाना चाहिए, ताकि बिल्डरों को और ज्यादा जमीनें मिल सकें. फिलहाल जितनी भी जमीन हैं उनका इस्तेमाल हो चुका है. जब शहर में जमीन नहीं बचती तो प्रॉपर्टी के रेट बढ़ जाते हैं. प्रॉपर्टी की ज्यादा मांग और कम विकल्प होने की वजह से दामों पर असर पड़ता है.

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