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जबलपुर जिले में 1,000 करोड़ का बजट, नई सड़क परियोजनाओं से शहर में होगी विकास की बारिश

जबलपुर   देश शासन के बजट में जबलपुर को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कई सौगाते मिली हैं। सड़कों का निर्माण होगा। शहर और ग्रामीण क्षेत्र में 34 सड़कों का निर्माण यातायात को सुगम सुगम बनाने का काम करेगा। जिले में पर्यटन की बेहतर संभावनाएं लंबे समय से हैं। कोई बड़ा पैकेज तो नहीं दिया लेकिन भेड़ाघाट में दूसरे रोपवे का प्रावधान कहीं न कहीं पर्यटकों को आकर्षित करेगा। उद्यानिकी क्षेत्र में जबलपुर तेजी से आगे बढ़ रहा है। सब्जियों के साथ ही औषधियों की खेती में किसान रुचि ले रहे हैं। ऐसे में उद्यानिकी विद्यालय की स्थापना इस क्षेत्र के लिए मददगार बनेगा। उच्च शिक्षा के लिए विश्वविद्यालयों को बड़ी ग्रांट मिलेगी। सरकार दूध के उत्पादन पर फोकस कर रही है। इसके लिए जिले में सहकारी समितियो की संख्या बढ़ाने के लिए भी मदद मिलेगी। कक्षा आठवीं तक के बच्चों को अब ट्रेट्रा पैक में दूध मिलेगा। इसका लाभ जिले के सवा लाख विद्यार्थियों को होगा। जिले में किसानों को सोलर पंप का लाभ मिलेगा। इसी प्रकार जैविक खेती का रकबा बढ़ाने का फायदा भी जबलपुर को मिलेगा।  मिलेगा फायदा 399 करोड़ रुपए से होगा जिले की नहरों का उन्नयन: बरगी बांध की दायीं और बायीं तट नजर जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो रही हैं। हाल में सगड़ा-झपनी में नहर फूटने से बड़े क्षेत्र में सिंचाई प्रभावित हो गई। राज्य सरकार ने दोनों नहरों की मरम्मत व उन्नयन के लिए बजट में 399 करोड़ की राशि का प्रावधान किया है। बहोरीबंद माइनर उद्वहन सिंचाई योजना के तहत 100 करोड़ रुपये राशि का प्रावधान किया है। किसानों को बिल से राहत: बजट में कृषि तथा सम्बद्ध क्षेत्र के लिए बड़ा बजट दिया गया है। जिले में ढाई लाख किसान हैं। ज्यादा के पास बिजली से चलने वाले पंप हैं। एक लाख किसानों को सोलर पम्प देने की योजना बनाई गई है। इससे उन्हें बिजली बिल से राहत मिलेगी। वर्तमान में दो लाख हेक्टेयर में खेती होती है। किसानों को बिजली बिल के कारण काफी परेशानी बिल के कारण काफी परेशानी होती है। ई-बसों की जल्द मिलेगी सौगात: नगर को शीघ्र ई बसों की सौगात मिलेगी। बजट में इसकी जानकारी दी गई। पहले लॉट में 40 बस की सौगात मिल सकती है। इससे यातायात व्यवस्था सुधरेगी। वर्तमान में नगर में सिटी बस की संख्या घटकर 50 के लगभग रह गई है। हर रूट में यात्रियों को ई बस के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। चौंसठयोगिनी मंदिर तक बनेगा रोपवे भेड़ाघाट के चौसठयोगिनी मंदिर में पर्यटकों की पहुंच आसान बनाने के लिए रोपवे का निर्माण होगा। राज्य सरकार ने बजट में रोपवे निर्माण की योजना का संकेत दिया है। चौसठयोगिनी मंदिर तक पहुंचने के लिए 108 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। बड़ी संख्या में पर्यटक, विशेषकर बुजुर्ग और शारीरिक रूप से असमर्थ लोग, सीढ़ियां नहीं चढ़ पाने के कारण मंदिर तक नहीं पहुंच पाते। ऐसे में रोपवे बनने से पर्यटन को नया विस्तार मिलेगा और श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी। यह भेड़ाघाट क्षेत्र में बनने वाला दूसरा रोपवे होगा। अभी धुआंधार से न्यू भेड़ाघाट छोर तक रोपवे पहले से संचालित है, जिसमें प्रतिदिन बड़ी संख्या में पर्यटक सफर करते हैं। भेड़ाघाट की ऊंचाई पर स्थित चौसठयोगिनी मंदिर परिसर में बाबा वैद्यनाथ महादेव विराजमान है। यह मंदिर करीब 870 वर्ष पुराना बताया जाता है और इसे कलचुरी काल की अद्वितीय कृति माना जाता है। इतिहासकार राजकुमार गुप्ता के अनुसार, मंदिर में सात चक्र भेदन और नाड़ी शोधन से जुड़ी योगनियां गर्भगृह बनने से लगभग 200 वर्ष पहले ही स्थापित हो चुकी थीं। लेबर चौक-अहिंसा चौक के बीच 17 करोड़ से हाईटेक रोड जिले में सड़क नेटवर्क को विस्तार देने के लिए सरकार ने हाइब्रिड एन्युटी मॉडल की घोषणा की है। यह योजना निजी भागीदारी के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण निर्माण और निर्धारित अवधि तक रखरखाव सुनिश्चित करेगी ताकि टिकाऊ और आधुनिक सड़क नेटवर्क तैयार हो सके। इसमें जिले के लिए 382 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। इस राशि से जिले में 34 नई सड़को का निर्माण और उन्नयन किया जाएगा। इनमें शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक की सड़कें शामिल है। इससे यातायात व्यवस्था मजबूत होगी और ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इनमें मेहता पेट्रोल पम्प से अहिंसा चौक के बीच तीन किलोमीटर लम्बी सड़क का निर्माण भी प्रस्तावित है, जिस पर करीब 17 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

ग्वालियर में एलिवेटेड रोड निर्माण की तैयारी, 28 भवनों पर गिरेगा बुलडोजर, प्लॉट अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू

ग्वालियर शहर को ट्रैफिक जाम से स्थायी राहत देने के लिए स्वर्ण रेखा नदी पर बन रही 14.2 किमी लंबी एलिवेटेड रोड परियोजना का काम फिर शुरू तो हुआ है, लेकिन बाधाएं अब भी खत्म नहीं हुईं। प्रथम चरण में लूप निर्माण दोबारा चालू किया गया है लेकिन पड़ाव स्थित गंगादास की शाला के पास 28 भवन और खाली प्लॉट अभी भी अतिक्रमण के रूप में रुकावट बने हुए हैं। करीब 1373.21 करोड़ रुपए की इस परियोजना का पहला चरण ट्रिपल आईटीएम से महारानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल तक 6.5 किमी में बन रहा है। जिला प्रशासन, नगर निगम और पीडब्ल्यूडी की संयुक्त कार्रवाई के बाद काम आगे बढ़ा है, लेकिन अतिक्रमण हटे बिना गति मिलना मुश्किल माना जा रहा है। एएसआई अनुमति में फंसा मामला जहां लूप निर्माण में तकनीकी दिक्कतें हैं वहां पीडब्ल्यूडी ने एएसआई को दोबारा पत्र भेजा है, लेकिन पहले अनुमति से इनकार हो चुका है। इससे कानूनी और प्रशासनिक उलझनें बढ़ गई हैं और टाइमलाइन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। निरीक्षण ज्यादा प्रगति कम केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, सांसद भारत सिंह कुशवाह, मंत्री प्रद्यु्न सिंह तोमर और प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट कई बार निरीक्षण कर चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में अतिक्रमण और अधूरा निर्माण अब भी जस का तस है। क्या कहते है एक्सपर्ट शासन और संबंधित विभागों को सख्ती के साथ शेष अतिक्रमण हटाकर निर्धारित समय सीमा में ट्रिपल आईटीएम से महारानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल तक प्रथम चरण को जल्द चालू करना चाहिए, ताकि आमजन को शीघ्र राहत मिल सके। – ज्ञानवर्धन मिश्रा, सेवानिवृत्त कार्यपालन यंत्री, पीडब्ल्यूडी सेतु संभाग अतिक्रमण और अधिग्रहण अभि अधूरा करीब 35 करोड़ रुपए का जमीन अधिग्रहण अवार्ड बांटा जा चुका है, फिर भी रानीपुरा, मानपुर, रमटापुरा और पड़ाव क्षेत्र में अतिक्रमण पूरी तरह नहीं हट पाया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वर्ण रेखा में चैंबर तोड़े जाने से गंदा पानी घरों में भर रहा है और धूल-जाम से परेशानी बढ़ रही है। ये है वर्तमान स्थिति लंबाई : 6.5 किमी चौड़ाई : 16 मीटर लूप : 13 लागत : 446.92 करोड़ अब तक खर्च: 308 करोड़ कार्य प्रगति : 75% साढ़े तीन साल में तीन बार बढ़ी समय सीमा कार्य शुरू : 23 जून 2022 पहली डेडलाइन : 17 फरवरी 2025 बढ़ाकर : 31 दिसंबर 2025 फिर : जून 2026 अब नई तारीख : 31 दिसंबर 2026 अब तक करीब 75% काम और 308 करोड़ रुपए खर्च होने का दावा है। निर्माण का जिम्मा श्रीमंगलम बिल्डकॉन इंडिया प्रा. लि. के पास है।

लाल सड़क पर लगा ग्रहण, जानवरों की सुरक्षा को खतरा, चोर चोरी कर रहे एलईडी साइन बोर्ड और वायर फेंसिंग

जबलपुर  नेशनल हाईवे-12 वाइल्डलाइफ प्रोटक्शन के लिए की गई रेड कलर की टेबल टॉप रेड मार्किंग की वजह से चर्चा में है. देश के कई इलाकों से इस तरह के सड़क बनाने के लिए जबलपुर नेशनल हाईवे अथॉरिटी के पास इंक्वारी भी आई है. नेशनल हाईवे अथॉरिटी का कहना है कि, उनका यह प्रयोग सफल रहा है, लेकिन वे अब चोरों से परेशान हैं, क्योंकि चोर सड़क पर लगे एलईडी साइन बोर्ड चुरा रहे हैं. सड़क किनारे लगी लोहे की जाली को भी कई जगह चुरा लिया गया है. एक बार फिर चर्चाओं में लाल सड़क जबलपुर से भोपाल तक के लिए नेशनल हाईवे 12 बनाया गया है. यह सड़क लगभग 300 किलोमीटर लंबी है. इस हाईवे का लगभग 12 किलोमीटर का क्षेत्र नौरादेही टाइगर रिजर्व से होकर गुजरता है. इसी में से लगभग 2 किलोमीटर इलाके में टेबल टॉप रेड मार्किंग की गई है, जिसकी वजह से यह सड़क चर्चा में बनी हुई है. इस 2 किलोमीटर इलाके में लाल कलर के बड़े-बड़े निशाना बनाए गए हैं. यह लगभग 2 मिलीमीटर मोटे हैं. देश के कई इलाकों से आई इंक्वायरी नेशनल हाईवे अथॉरिटी के अधिकारी अमृतलाल साहू का कहना है, “हमारा यह प्रयोग पूरे भारत में सराहा जा रहा है. इस सड़क के बनने के बाद देश के कई इलाकों से इसी तरह की सड़क बनाने के लिए जानकारियां मांगी गईं हैं. चेन्नई और पंजाब के सड़क निर्माण से जुड़े अधिकारियों ने इस निर्माण कार्य की जानकारी ली है. वाइल्डलाइफ प्रोटक्शन के लिए पहला प्रयोग अमृतलाल साहू ने बताया, “यह आइडिया पूरी दुनिया में नया है. हालांकि, सड़कों पर लाल कलर कई जगह पर लगाया जाता है. दुबई में कुछ सड़कें ऐसी हैं, जहां वाहनों की गति धीमी करने के लिए पूरी सड़क को ही लाल कर दिया जाता है. हालांकि, यह लंबाई मात्र 100 मीटर तक होती है. इसी तरह साइकिल ट्रैक बनाने के लिए भी सड़क लाल की जाती है, लेकिन वन्यजीवों के संरक्षण के लिए सड़क पर टेबल टॉप रेड मार्किंग पहली बार की गई.” बीते 1 साल में एक भी जानवर की नहीं हुई मौत अमृतलाल साहू ने बताया कि “हमारा यह प्रयोग सफल रहा है. सड़क पर केवल लाल कलर के निशान ही नहीं बनाए गए हैं, बल्कि इस सड़क में जंगल के पूरे इलाके में तार की फेंसिंग भी की गई है. 25 जगह पर जानवरों को सड़क पार करने के लिए अंडरपास भी बनाए गए हैं. जब इस सड़क पर यह सभी सुविधाएं नहीं थी, तो 2 साल में लगभग 300 जानवरों की एक्सीडेंट से मौत हुई थी, लेकिन इस कार्य के पूरे हो जाने के बाद बीते 1 साल में कोई भी जानवर सड़क दुर्घटना से इस क्षेत्र में नहीं मरा है.” चोरों से परेशान नेशनल हाईवे अथॉरिटी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने इस सड़क को अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से तैयार किया था, इसलिए सड़क पर कई जगह पर एलईडी साइन बोर्ड लगाए गए थे. टेबल टॉप रेड मार्किंग पर लगे उपकरणों की वजह से जानवरों की मौतों में बहुत गिरावट आई है, लेकिन अब ये उपकरण चोरों के निशाने पर हैं. अमृतलाल साहू ने बताया कि “वे चोरों से बहुत परेशान हैं. हाईवे से कई एलईडी साइन बोर्ड चोरी कर लिए गए, कुछ जगह पर वायर फेसिंग भी चोरी हो गई. इस सड़क पर हमने रखवाली के लिए पेट्रोलिंग गाड़ी रखी है, लेकिन इतनी लंबी सड़क की पूरे समय सुरक्षा नहीं की जा सकती. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने चोरों के खिलाफ थाने में शिकायत भी करवाई है.”

भ्रष्टाचार की शिकायत: इमली टोला पंचायत में सड़क निर्माण में अनियमितताएं, जिम्मेदारों की खामोशी

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी CC सड़क, बोल्डर डाल कर दी ढलाई गुणवत्ताविहीन सामग्री का किया उपयोग, ग्रामीणों ने सरपंच सचिव पर लगाए गंभीर आरोप घुघरी जनपद आने वाली पंचायत इमली टोला में सीसी सड़क निर्माण में जमकर हो रहा भ्रष्टाचार… जवाबदार मौन घुघरी आदिवासी बाहुल्य जिले में लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के नाम पर हो रहे निर्माण कार्यों में लापरवाही और भ्रष्टाचार के मामले आए दिन उजागर हो रहे हैं फिर चाहे भवन, पुलिया निर्माण के मामले हो, या फिर सीसी सड़क निर्माण किए जाने के मामले हो लेकिन जिले में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी और  सुस्त रवैया के चलते भ्रष्टाचार्यों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैंऔर सरपंच सचिव एवं जनपद में बैठे जवाबदारों की मिली भगत से जम कर भ्रष्टाचार किया जा रहा है  जिसका सीधा खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पढ़ रहा है ऐसा ही मामला जनपद पंचायत घुघरी अंतर्गत ग्राम पंचायत इमलीटोला के पोषक ग्राम भोका देवरी का सामने आया है जहां पांचवा वित्त मद से 3 लाख 21 हजार रूपये की लागत से मेनरोड से मुरली के घर तक सीसी रोड का निर्माण कराया जा रहा है जिसमें बिना समतलीकरण के बोल्डर  डाल कर सीसी सड़क का निर्माण कराया जा रहा है वहीं ग्रामीणों का कहना है . सरपंच, सचिव के द्वारा बोल्डर के ऊपर सीसी रोड का निर्माण कार्य कराया गया है जिसमें नियमों को ताक में रखकर भ्रष्टाचार के उद्देश्य से पूरी तरह गुणवत्ताहीन सी सी सड़क  बनाई जा रही है वही ग्रामीणों का आरोप है कि सीसी रोड का निर्माण कार्य कराया जा रहा है जहां बड़े-बड़े बोल्डर के ऊपर से ही सीसी रोड की ढलाई करा दी गई है जिससे सीसी रोड का समय से पूर्व ही टूटने की संभावना बनी हुई है जो की ग्राम विकास में क्षति है अगर गुणवत्तापूर्ण सीसी रोड बनाया जाता तो रोड अपने समय सीमा तक चल सकता था।अगर सी सी सड़क समय से पूर्व ही क्षतिग्रस्त हो जाएगा ऐसे में ग्रामीणों को आवाजाही में समस्या होगी।वही ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। ऐसा लगता है की विकासखंड घुघरी के इंजीनियर एसडीओपी सीईओ साहब पंचायत को बढ़ावा दे रहे हैं ताकि परसेंट मिल सके अब देखना यह है कि प्रशासन कार्रवाई करता है या फिर भ्रष्टाचार पर चुप्पी साधे रहता है।

इंदौर में पश्चिमी आउटर रिंग रोड का निर्माण होने जा रहा, प्रोजेक्ट में 750 करोड़ रुपए का मुआवजा घोषित

इंदौर   एमपी के इंदौर शहर में पश्चिमी आउटर रिंग रोड का निर्माण होने जा रहा है। इस रोड के बनने से 26 गांव प्रभावित हो रहे हैं, जिसका अवॉर्ड घोषित हो गया है। पूरे प्रोजेक्ट में करीब 750 करोड़ रुपए का मुआवजा घोषित किया गया है। इसकी ग्राम वार फेहरिस्त भी तैयार हो गई है। किसानों के नाम की भी सूची बनी हुई है, जैसे ही एनएचएआइ की तरफ से राशि सरकारी खजाने में जमा होगी, वैसे ही किसानों के खातों में ऑनलाइन पैसे जमा होने लगेंगे। गौरतलब है कि एनएचएआइ 64 किमी लंबे और 80 मीटर चौड़ा यह रोड बनाने जा रहा है, जो एनएच-52 में नेट्रेक्स के पास से शुरू होकर शिप्रा नदी के नजदीक खत्म होगा। इसमें इंदौर जिले की देपालपुर तहसील के 5, हातोद के 12 और सांवेर के 9 गांवों की करीब 600 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित हो रही है। ये जमीन प्रोजेक्ट में शामिल हो रही देपालपुर तहसील के पांच गांव इस प्रोजेक्ट में हैं। इनमें किशनपुरा, बेटमाखुर्द, मोहना, ललेंडीपुरा और रोलाय है। इसमें निजी रकबा 66.68 हेक्टेयर और 14.36 हेक्टेयर सरकारी जमीन है। सांवेर तहसील के 9 गांवों में 160 हेक्टेयर जमीन आ रही है। इसमें धतूरिया, बालोदा टाकून, सोलसिंदा, कटक्या, ब्राह्मण पीपल्या, मुंडला हुसैन, जैतपुरा, पीर कराड़िया और बरलाई जागीर शामिल है। ये भी जानिए 160 किमी का होगा आउटर रिंग रोड 64 किमी इसमें पश्चिमी हिस्सा 30 किमी हातोद का हिस्सा 23.60 किमी सांवेर का हिस्सा 10.40 किमी देपालपुर का हिस्सा  

मुख्यमंत्री ने मजरा-टोला सड़क योजना को दी मंजूरी, मिली बड़ी सौगात, 39,900 किलोमीटर नई पक्की सड़कें और हजारों पुल-पुलिया होंगे तैयार

भोपाल  अब मध्यप्रदेश के मजरे-टोले भी विकास से जुड़ेंगे। इसके लिए 20,600 मजरे-टोलों को चिह्नित कर लिया है। सीएम डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में कैबिनेट ने मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना को स्वीकृति दी। इस योजना में 39,900 किमी सड़कें(New Road) बनेंगी। इन पर हजारों पुल-पुलिया बनेंगे। इस पर 21,630 करोड़ खर्च होगा। बारहमासी सड़कों से इलाके के स्कूली बच्चों, गर्भवतियों को बारिश में नदी-नाले रास्ता नहीं रोक पाएंगे। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 11 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में कैबिनेट ने मंगलवार कोय ह सौगात दी। तबादले की डेडलाइन 17 जून करने समेत कई जनकल्याण निर्णय भी लिए। मध्यप्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत अब गांवों के सुदूर मजरे और टोले भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया, जिसमें 20,600 मजरे-टोले चिन्हित किए गए हैं। योजना के तहत कुल 39,900 किलोमीटर लंबी नई पक्की सड़कों का निर्माण किया जाएगा, जिन पर हजारों पुल और पुलिया भी बनेंगी। इस परियोजना पर अनुमानित 21,630 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। बारहमासी सड़कों से सुविधाएं बढ़ेंगी इस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि इन सड़कों के माध्यम से ग्रामीण अंचलों में स्कूली बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों को बारिश में भी निर्बाध आवागमन मिल सकेगा। नदी-नालों और कच्चे रास्तों की दिक्कतें समाप्त होंगी। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार के 11 वर्ष पूरे होने के अवसर पर लिया गया, जिससे राज्य के विकास को नई दिशा मिलेगी। योजना दो चरणों में पूरी होगी  मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना को दो चरणों में लागू किया जाएगा। पहला चरण 2025-26 से 2029-30 तक चलेगा और दूसरा चरण 2030-31 से 2034-35 तक। इस दौरान 30,900 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जाएगा, जिससे राज्य के सभी पात्र ग्रामीण टोलों को बारहमासी सड़कों से जोड़ा जाएगा। छोटे टोले भी होंगे शामिल, न्यूनतम आबादी और मकानों की शर्त पिछले 75 वर्षों में आबादी बढ़ने और परिवारों के बंटवारे के चलते मजरे-टोले स्वतंत्र इकाइयों के रूप में उभरे हैं, लेकिन अब तक अधोसंरचना से वंचित रहे हैं। सरकार ने तय किया है कि ऐसे मजरे और टोले भी इस योजना में शामिल होंगे जिनमें कम से कम 20 मकान, 100 से अधिक की आबादी और 6,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल होगा। ऐसे 20,600 मजरे-टोले पहले ही चिन्हित किए जा चुके हैं। हर जिले का विकास होगा योजनाबद्ध प्रदेश के प्रत्येक जिले का विकास योजनाबद्ध ढंग से सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने जिला विकास सलाहकार समितियों के गठन को मंजूरी दी है। इन समितियों के अध्यक्ष मुख्यमंत्री स्वयं होंगे और उपाध्यक्ष प्रभारी मंत्री। स्थानीय जनप्रतिनिधि सदस्य होंगे और क्षेत्रीय विशेषज्ञों को भी सम्मिलित किया जाएगा। यह समिति जिले के लिए दीर्घकालिक विकास का रोडमैप तैयार कर सरकार को सौंपेगी। चार शहरों में बनेंगे सुरक्षित हॉस्टल कैबिनेट ने नर्मदापुरम, झाबुआ, सिंगरौली और देवास में कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित हॉस्टलों के निर्माण को भी स्वीकृति दी है। 40.59 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले ये हॉस्टल उन महिलाओं को सुविधा देंगे जो औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत हैं। ये आवास पूरी तरह सुरक्षित होंगे और महिला श्रमिकों के लिए एक सशक्त सहारा साबित होंगे। ब्याज मुक्त कर्ज और ग्रामीण सेवा की शर्त में होगा बदलाव कैबिनेट ने मेधावी छात्र योजना में भी महत्वपूर्ण बदलाव को मंजूरी दी है। अब मेडिकल (MBBS) छात्रों को अपनी पढ़ाई का शुल्क स्वयं वहन करना होगा, लेकिन सरकार फीस पूर्ति के लिए छात्रवृत्ति और अतिरिक्त खर्चों के लिए ब्याज मुक्त कर्ज की व्यवस्था करेगी। यदि छात्र पांच वर्षों तक ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा करते हैं, तो सरकार कर्ज चुकाने में मदद करेगी। यह प्रावधान 2025 के शैक्षणिक सत्र से लागू होगा। जो छात्र ग्रामीण सेवा नहीं करेंगे, उन्हें यह कर्ज स्वयं चुकाना होगा। तुअर दाल उद्योग को राहत प्रदेश में महाराष्ट्र जैसे राज्यों से आयातित तुअर से संचालित 134 दाल मिलों को भी सरकार ने राहत दी है। अभी तक इन पर मंडी टैक्स लगता था, जिससे उत्पादन लागत बढ़ती थी। अब इस टैक्स को हटा दिया गया है, जिससे इन मिलों को गति मिलेगी और जीएसटी संग्रहण में भी बढ़ोतरी होगी। हालांकि मंडी राजस्व में लगभग 20 करोड़ रुपये की कमी आएगी, लेकिन राज्य सरकार का मानना है कि उद्योगों को राहत देना अधिक आवश्यक है। मेडिकल पढ़ाई में शुल्क से माफी नहीं, 5 साल के बांड से आजादी मेडिकल छात्रों को पढ़ाई के अतिरिक्त खर्च के लिए सरकार ब्याज मुक्त कर्ज दिलाएगी। मुख्यमंत्री मेधावी छात्र योजना में बदलाव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। छात्रों को शुल्क खुद भरना होगा, फीसपूर्ति के लिए छात्रवृत्ती देंगे। अतिरिक्त खर्च के लिए कर्ज ले सकेंगे, जिसमें सरकार मदद करेगी। सरकार की मंशा अनुरूप 5 साल ग्रामीण इलाके में सेवा देंगे तो सरकार कर्ज चुकाने में मदद करेगी। जो ग्रामीण क्षेत्र में सेवा नहीं देंगे, उन्हें कर्ज खुद चुकाना होगा। यह बदलाव चालू वित्त वर्ष में एमबीबीएस में प्रवेश लेने वालों पर लागू होगा।

भोपाल में एक साल में 13 किमी ज्यादा नयी सड़कें शहरवासियों को मिलीं, बीते एक साल में 387 किमी सड़कों पर काम हुआ

भोपाल राजधानी भोपाल में आबादी और क्षेत्र विस्तार के साथ सड़कों की लंबाई और चौड़ाई भी बढ़ रही है। पीडब्ल्यूडी ने बीते एक साल में शहर में 25 किमी नई सड़क बनाई। हर साल करीब 12 किमी लंबाई की नयी सड़कें पीडब्ल्यूडी तैयार करता है। लेकिन इस साल 13 किमी ज्यादा नयी सड़कें शहरवासियों को मिलीं। बीते एक साल में 387 किमी सड़कों पर काम हुआ। सड़क पर सालाना 50 करोड़ खर्च सड़क नई बनाना हो या फिर नवीनीकरण, उन्नयन या फिर चौड़ीकरण करना हो शासन शहर पर औसतन 50 करोड़ रुपए खर्चें करता है। ये राशि सिर्फ पीडब्ल्यूडी की है। इसमें यदि बीडीए, हाउसिंग बोर्ड, नगरीय निकाय को भी शामिल करें तो बजट करीब 100 करोड़ के पास होगा। खराब सड़कों की हो जांच सालाना 300 किमी से अधिक लंबाई की सड़कों पर काम होता है। 50 करोड़ रुपए से अधिक राशि खर्च की जाती है, बावजूद इसके आमजन टूटी सड़कों(News Road built in MP) से गुजरने को मजबूर हैं। शहर के लोगों का कहना है कि सड़के खराब हैं तो करोड़ों रुपए का खर्च कहां किया जा रहा, इसकी जांच की जरूरत है। नर्मदापुरम रोड की सर्विस लेन से लेकर करोद रोड, भानपुर सर्विस लेन, 11 मिल तिराहे की सड़कें सबसे अधिक खराब हैं। इनकी मरमत की ज्यादा जरूरत है। भोपाल में सड़कें     573 किमी सड़कें पीडब्ल्यूडी की     268 सड़कें हैं कुल पीडब्ल्यूडी की     400 किमी सड़कें परफॉर्मेंस गारंटी में     4000 किमी लंबी सड़कें नगर निगम की शहर में सड़क सुधार और निर्माण के लिए विभाग तय शहर में सड़क सुधार और निर्माण के लिए विभाग तय हैं। सभी के पास बजट है और लगातार प्रस्ताव व कार्य चलते रहते हैं। ये नियमित व सतत काम है। पीडब्ल्यूडी का लक्ष्य लोगों को आवाजाही का बेहतर माध्यम देना है।– केपीएस राणा, इएनसी, पीडब्ल्यूडी

NHAI 152KM लम्बे फोरलेन पर 215 करोड़ की लागत से 14 अंडरब्रिज तैयार कर रहा, हदसों से मिलेगी मुक्ति

सागर.  राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के सालों पुराने चिन्हित ब्लैक स्पॉट को समाप्त करने अंडरब्रिज का निर्माण कर रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण 152 किलोमीटर लंबाई के फोरलेन पर 215 करोड़ रुपए की लागत से 14 अंडरब्रिज तैयार कर रहा है। इसकी शुरूआत देवरी की ओर से की गई थी, जिसमें से 4 अंडरब्रिज का काम पूरा भी कर लिया गया है, वहीं बाकी के 10 अंडरब्रिज निर्माणाधीन है। कुछ समय पहले ही सिविल लाइन थाना क्षेत्र में आने वाले बम्हौरी चौराहे पर भी अंडरब्रिज का निर्माण शुरू हो गया है। इन अंडरब्रिज के तैयार होने के बाद इस नेशनल हाइवे सफर सुगम होगा तो वहीं हादसों में 70 से 80 प्रतिशत की कमी आ जाएगी।  दरअसल कश्मीर से कन्याकुमारी को जोडऩे वाले (उत्तर-दक्षिण कॉरीडोर) देश के इस सबसे लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग-44 का 152 किलोमीटर लंबा हिस्सा सागर जिले की सीमा में आता है, जो मध्यप्रदेश-उत्तरप्रदेश बॉर्डर पर स्थित मालथौन के पास से शुरू होकर देवरी के आगे नरसिंहपुर जिले की सीमा में आने वाले तीतरपानी टोल प्लाजा तक लगता है। – भारी वाहन भी निकल सकेंगे नेशनल लाइवे पर तैयार किए जा रहे इन अंडरब्रिज का आकार 12 वाया 5.5 मीटर रखा गया है, इसमें 12 मीटर की चौड़ाई होगी तो ऊंचाई 5.5 मीटर रहेगी, जिसमें से भारी व बड़े वाहन भी आसानी से निकल सकेंगे। फोरलेन के इन सभी 14 अंडरब्रिज को 6 मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। – सागर से देवरी के बीच 10 अंडरब्रिज बनेंगे सागर से देवरी की ओर बम्हौरी चौराहा, समनापुर तिराहा, सुरखी स्टार्टिंग बायपास व सुरखी ऐंडिंग बायपास, गौरझामर-केसली चौराहा, गौरझामर एंडिंग बायपास, देवरी स्टार्टिंग बायपास, देवरी-दमोह मार्ग, देवरी एंडिंग बायपास व महाराजपुर में अंडरब्रिज तैयार किए जा रहे हैं। – सागर से मालथौन के बीच 4 अंडरब्रिज सागर से मालथौन की ओर बाछलोन, मोठी गांव के पास, झीकनी गांव और बरोदियाकलां में अंडरब्रिज का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। – फैक्ट फाइल 152 किमी लंबा हाइवे जिले की सीमा में 14 ब्लैक स्पॉट पर बन रहे अंडरब्रिज 4 अंडरब्रिज बनकर हो चुके तैयार 215 करोड़ रुपए है प्रोजेक्ट की लागत 12 मीटर चौड़ा, 5.5 मीटर होगी ऊंचाई 6 मार्च 2026 तक पूरा करना है काम – सफर सुगम व सुरक्षित होगा जिले से निकले फोरलेन के ब्लैक स्पॉट समाप्त करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। ऐसे स्थानों को चिन्हित कर 14 अंडरब्रिज तैयार किए जा रहे हैं, जिसमें 4 का काम पूरा हो गया है, शेष प्रगतिरत हैं। मार्च 2026 तक काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्य पूर्ण होने के बाद फोरलेन का सफर सुगम व सुरक्षित होगा। संदीप जीआर, कलेक्टर

खरगोन में बढ़ते यातायात के दबाव को देखते हुए कवायदें शुरु, सड़क चौड़ीकरण के साथ के साथ सौंदर्यीकरण पर ध्यान दिया जा रहा

खरगोन मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में बढ़ते यातायात के दबाव को देखते हुए कवायदें शुरु हो गई हैं। सड़क चौड़ीकरण के साथ के साथ सौंदर्यीकरण पर ध्यान दिया जा रहा है। नगर पालिका अमले ने बिस्टान रोड स्थित पीजी कॉलेज के सामने नर्सरी के लिए आरक्षित जगह पर तारफेसिंग हटाकर जगह समतल किया जाएगा।  इस पर नगर पालिका अध्यक्ष छाया जोशी ने बताया कि जनसंख्या और यातायात के दबाव को देखते हुए हुए सड़क चौड़ीकरण की जरुरत है। इसी को देखते हुए पीजी कॉलेज के सामने स्थित नर्सरी को हटाते हुए सड़क चौड़ीकरण के साथ ही सौंदर्यीकरण के लिए योजना बनाई है। इसके अलावा शहर के अन्य मुख्य मार्गो पर अभी अतिक्रमण चिन्हित किया है। इधर, डायवर्सन रोड पर बढ़ते हुए यातायात दबाव और हादसों को देखते हुए प्रशासन ने आरती टॉकीज के सामने सड़क पर डिवाइडर के बीच क्रॉसिंग कट को डिवाइडर से बंद किया है। इससे मार्ग एकांकी हो गया है। इस बदलाव के कारण व्यापारियों ने आपत्ति दर्ज कराई और मार्ग खोलने की मांग की है।

कोलार सिक्सलेन रोड 15 किलोमीटर लंबी सड़क को नगर निगम प्रशासन ग्रीन कॉरिडोर के तौर पर विकसित करेगा

भोपाल  एमपी के भोपाल शहर में कोलार सिक्सलेन रोड यानी कोलार गेस्ट तिराहे से लेकर गोल जोड़ तिराहे तक करीब 15 किलोमीटर लंबी सड़क को नगर निगम प्रशासन ग्रीन कॉरिडोर के तौर पर विकसित कर रहा है।  राजधानी की सबसे पहली और बड़ी सिक्सलेन सड़क पर नगर निगम प्रशासन करीब 10 करोड़ रुपए की राशि से 15 किलोमीटर के दायरे में लगभग 20 हजार से अधिक पौधे लगाएंगी। यह काम नगर निगम प्रशासन अगले महीने यानी जून से शुरू करने वाली है। नगर निगम प्रशासन करेगा काम सेन्ट्रल वर्ज में ये पौधे लगाए जाएंगे और इनकी सुरक्षा को लेकर करीब तीन फीट ऊंची रैलिंग भी लगाई जाएगी। नगर निगम प्रशासन ने इस काम को लेकर अपनी कार्ययोजना बना ली है। इस संबंध में काम करने के लिए योजना के हिसाब से काम अंतिम चरणों में काम चल रहा है। जल्द ही इसे मूर्त रुप देने के लिए नगर निगम प्रशासन काम शुरू करेगा। लगातार हो रही हैं बैठकें, जल्द शुरू होगा काम हाल ही में ग्रीन कॉरिडोर विकसित करने के लिए विधायक रामेश्वर शर्मा ने निगम प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। गौरतलब है कि करीब छह महीने पहले कोलार सिक्सलेन सड़क बनकर तैयार हो चुकी है, यहां से लगातार आवाजाही भी सुचारू हो गई है। लेकिन अब तक इसका औपचारिक शुभारंभ नहीं हुआ है। ऐसे में अभी इस रोड पर बचे हुए कामों को पूरा किया जा रहा है। लगभग 325 करोड़ रुपए की राशि से कोलार सिक्सलेन सड़क को विकसित किया गया है।

इंदौर : रिंग रोड बेटमा, सांवेर और तराना से होकर गुजरेगा, 48 हेक्टेयर वन भूमि की आवश्यकता

 इंदौर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) अगस्त-सितंबर के बीच पश्चिमी रिंग रोड का काम शुरू कर सकता है, क्योंकि जून में निर्माण कार्यों पर खर्च किए जाने वाला बजट आवंटित होगा। इस दौरान 48 हेक्टेयर वनभूमि को स्वीकृत मिलने की उम्मीद नजर आ रही है। एनएचएआई के प्रस्ताव को इंदौर वनमंडल ने वन विभाग मुख्यालय को भेजा दिया है, जो पर्यावरण समिति के पास पहुंच चुका है। जून-जुलाई में वनभूमि का सर्वे किया जाएगा। जमीन देने की प्रक्रिया जिला प्रशासन करेगा। अधिकारियों के मुताबिक वनभूमि पर पौधे लगाने और रखरखाव का खर्च एनएचएआई देगा। सड़क महू से हातोद होते हुए क्षिप्रा तक जाएगी 1500 करोड़ की लागत से 64 किमी लंबी पश्चिमी रिंग रोड बनाया जाएगा। 638 हेक्टेयर जमीन से सड़क गुजरेगी, जिसमें इंदौर और धार वनमंडल से 48 हेक्टेयर वनभूमि आएगी। इंदौर में 40 और धार में 8-10 हेक्टेयर वन भूमि चिह्नित की गई है। सड़क महू से हातोद और फिर क्षिप्रा तक जाएगी। यह मार्ग बेटमा, सांवेर और तराना से होकर गुजरेगा। एनएचएआई ने जिला प्रशासन से अनुरोध किया है कि वह वन विभाग को बदले में देने के लिए जमीन उपलब्ध कराए। जब तक यह जमीन तय नहीं होती, तब तक आगे की प्रक्रिया नहीं बढ़ सकती। वनक्षेत्र में खोदाई की जाएगी, जिसमें निकलने वाली मिट्टी और मुरम का निपटान एनएचएआई को वनक्षेत्र में करना है। पेड़ों की गिनती बाकी जंगल में लगे पेड़ों की गिनती और नई जगह पौधारोपण की योजना भी बनेगी। पेड़ों की कटाई, भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी मिलने के बाद ही निर्माण शुरू होगा। वहीं एक और बड़ी चिंता यह है कि जिन क्षेत्रों से सड़क निकलेगी, वहां नीलगाय, तेंदुआ, सियार जैसे कई वन्यप्राणी रहते हैं। करेंगे राशि जमा सड़क निर्माण का काम     अगले कुछ महीनों में शुरू किया जाएगा। प्रोजेक्ट को लेकर बजट आवंटित होगा। वैसे वनभूमि को लेकर प्रस्ताव वन विभाग की पर्यावरण समिति को भेजा है। पर्यावरण व वन मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद पौधोरोपण को लेकर राशि जमा करेंगे। – सुमेश बांझल प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई  

836 करोड़ की लागत से भोपाल के 16 KM लंबे अयोध्या बाइपास मार्ग के चौड़ीकरण का काम 1 जून से

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के रत्नागिरी इलाके से लेकर आशाराम तिराहे तक 16 किलोमीटर लंबे अयोध्या बाइपास मार्ग के चौड़ीकरण का काम 1 जून 2025 से शुरू होने जा रहा है। काम की लागत 836 करोड़ रुपए आने की संभावना है। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंयक कल्याण राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने इस संबंध में मंत्रालय में निर्माण एजेंसी एनएचएआई के अधिकारियों और संबंधित विभागों के अन्य अधिकारियों निर्माण कार्य की प्रगति को लेकर समीक्षा बैठक की।  इस दौरान प्रोजेक्ट डायरेक्टर देवांश नरवाल ने बताया कि, सबसे पहले सर्विस रोड बनाई जाएगी, ताकि यातायात बाधित न हो। चौड़ीकरण में आने वाले पेड़ों को हटाया जाएगा। साथ ही, इनके बदले में इसी सड़क पर चार गुना से ज्यादा पेड़ लगाए जाएंगे। सड़क चौड़ीकरण में आने वाले बिजली पोल- पाइप लाइन को शिट करने के लिए भी समय सीमा तय की गई है। 6 प्लस 2 यानी 8 लेन होगी सड़क राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने बताया कि, करीब 2 साल में इस परियोजना को पूरा किया जाएगा। निर्माण कार्य का दायित्व भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को सौंपा गया है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 836 करोड़ रुपए है। चौड़ीकरण का काम 1 जून से शुरू होगा। मुख्य सड़क निर्माण से पहले सर्विस रोड बनाई जाएगी, ताकि शहर का यातायात बाधित न हो। यह बायपास वर्तमान में 6 लेन है। 2 सर्विस रोड निर्माण के बाद यह 8 लेन हो जाएगा। आनंद नगर में बनेगा फ्लाई ओवर बैठक में आनंद नगर लाई ओवर निर्माण, रत्नागिरी तिराहे पर मैट्रो रेल लाई ओवर निर्माण व अन्य निर्माण कार्यों उकी समीक्षा की गई। आनंद नगर फ्लाई ओवर निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण अगले एक सप्ताह में पूरा करने के निर्देश दिए गए। मेट्रो के लिए भी यहां काम होगा और एलिवेटेड लेन बनेगी। उन्होंने बायपास चौड़ीकरण के दौरान 8 हजार पेड़ों की कटाई के बदले 4 गुना अधिक पौधों का रोपण करने का दावा किया हैं। इस बायपास के दोनों ओर 8 हजार पेड़ काटे जाएंगे। यह प्रदेश की आदर्श सड़क बनेगी राज्यमंत्री गौर ने स्पष्ट कहा हैं कि निर्माण में किसी भी प्रकार की अड़चन को जल्द रूप से हल किया जाएं। कार्य में किसी प्रकार की देरी न हो जल्द से जल्द कार्य को पूरा करना हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह प्रदेश की एक आदर्श सड़क बनेगी, जिसमें फ्लाईओवर और अन्य आधुनिक सुविधाएं भी शामिल होंगी।

बदनावर से टिमरवानी तक नया हाई-वे बनाया जाएगा, जो सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा

इंदौर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे( Delhi-Mumbai Expressway) से इंदौर भी जुड़ने जा रहा है। पिछले दिनों बदनावर आए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इंदौर को इस हाई-वे से जोड़ने का ऐलान किया था। इसके बाद एनएचएआइ इसकी डीपीआर बनाने में जुटा है। एनएचएआइ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुमेश बांझल ने बताया कि इंदौर का इंदौर-अहमदाबाद हाई-वे से घाटा बिल्लौद, लेबड़ होते हुए बदनावर से जुड़ाव हो जाएगा। बदनावर से टिमरवानी तक नया हाई-वे बनाया जाएगा, जो सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा। इंदौर-अहमदाबाद रोड के अलावा उज्जैन रोड से भी नई सड़क के जरिए जुड़ा जा सकता है। इसके लिए तीन हजार करोड़ में करीब 90 किमी की फोरलेन सड़क बनाई जाएगी। अभी डीपीआर बनाई जा रही है। साथ ही इसे नेशनल हाई-वे का दर्जा देने पर भी काम किया जा रहा है। इसके बाद जमीन अधिग्रहण और टेंडर की प्रक्रिया की जाएगी। काम शुरू होने में करीब डेढ़ साल लगेंगे। दिल्ली-मुंबई की दूरी घटेगी इंदौर से मुंबई और दिल्ली जाने के लिए वर्तमान रूट के अलावा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे(Delhi-Mumbai Expressway) से जुड़ने पर वाहनों की बड़े शहरों से आवाजाही आसान हो सकेगी। दूरी भी घटेगी।

BDA रेलवे लाइन के समानांतर दोनों तरफ 60-60 फीट चौड़ी रोड विकसित करेगा

भोपाल  भोपाल विकास प्राधिकरण इस साल बावड़िया रेलवे ओवरब्रिज से मिसरोद के बीच रेलवे लाइन के दोनों तरफ नई बसाहट के लिए अधोसंरचना विकसित करेगा। रेलवे लाइन के नर्मदापुरम रोड की तरफ विद्यानगर फेस दो के साथ अब विद्यानगर फेज तीन के तहत करीब 11 हेक्टेयर में काम होगा, जबकि बावडिय़ा की ओर दानापानी से मिसरोद और बावड़िया गांव के चारों तरफ 51 हेक्टेयर में काम होगा। दोनों तरफ 60-60 फीट चौड़ी रोड सबसे खास ये कि लोगों को रेलवे लाइन के समानांतर दोनों तरफ 60-60 फीट चौड़ी रोड मिलेगी। आशिमा मॉल (MP News) से बावड़िया गांव को पार कर सेज अपोलो अस्पताल की ओर उतरने वाला रेलवे ओवरब्रिज भी इस पूरी योजना में मददगार होगा। बीडीए ने इस योजना के लिए सिविल अधोसंरचना विकसित करने 122.09 करोड़ रुपए खर्च का अनुमान लगाया है। अन्य खर्च मिलाकर ये राशि 249 करोड़ रुपए बन रही है। बावड़ियाकलां गांव के आसपास रेलवे लाइन तक का क्षेत्र नई योजना में शामिल है। इस पर जल्द ही काम शुरू होगा।–संजीव सिंह, प्रशासक बीडीए ऐसे समझें स्थिति ● विद्यानगर फेस दो के तहत 39.96 हेक्टेयर क्षेत्र में योजना विकसित हो रही है। ● 84.14 करोड़ रुपए लागत है। 701 प्लॉट इसमें विकसित होंगे। ● विद्या नगर फेस तीन के तहत 10.60 हेक्टेयर क्षेत्र में योजना प्रस्तावित है। ● 28.27 करोड़ रुपए की लागत है। 34 प्लॉट विकसित होंगे। ● बावड़ियाकलां योजना- 51 हेक्टेयर क्षेत्रफल में तय है।  

इंदौर में केंद्र सरकार की मदद से 23 सड़कों का निर्माण, सड़कों के चौड़े होने से नहीं होगा ट्रैफिक जाम

इंदौर  केंद्र की मदद से बनाई जा रही मास्टर प्लान की 23 सड़कों में शामिल छावनी सड़क और सुभाष मार्ग सड़क का काम 15 अप्रैल के बाद ही शुरू होगा। नगर निगम ने इन दोनों सड़कों के चौड़ीकरण में बाधक निर्माण चिह्नित कर उनके बाधक हिस्सों पर निशान लगा दिए हैं। 15 अप्रैल से इन बाधक हिस्सों को हटाने का काम शुरू होगा। इसके बाद निर्माण एजेंसी का काम शुरू होगा। नगर निगम ने मास्टर प्लान की 23 सड़कों को सिंहस्थ से पहले तैयार करने का लक्ष्य रखा है। शहर की इन सड़कों के लिए केंद्र शासन ने 468 करोड़ रुपये नगर निगम को आवंटित किए हैं। नगर निगम हटाएगा बाधक हिस्सों को छावनी और सुभाष मार्ग सड़कें इन्हीं 23 सड़कों में शामिल हैं। छावनी सड़क 80 फीट और सुभाष मार्ग 100 फीट चौड़ी बनाई जानी है। वर्तमान में छावनी सड़क 40 फीट तो सुभाष मार्ग कहीं 40 तो कहीं 50 फीट चौड़ा है। चौड़ीकरण में बाधक मकानों को हटाने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। नगर‍ निगम ने तैयार की सूची बाधाओं को हटाने के बाद निगम साइट निर्माण एजेंसियों को सौंपेगा। इसके बाद सड़क निर्माण शुरू होगा। नगर निगम ने इन दोनों प्रमुख सड़कों पर बाधक मकानों की सूची पूर्व में ही तैयार कर ली थी। अब निगम ने बाधक हिस्सों पर निशान लगाना शुरू कर दिया है। 15 अप्रैल से बाधक हिस्सों को हटाने का काम शुरू होगा। 600 से ज्यादा मकान होंगे प्रभावित छावनी और सुभाष मार्ग के चौड़ीकरण में 600 से ज्यादा मकान बाधक हैं। छावनी सड़क पर 328 तो सुभाष मार्ग पर 304 मकान चिह्नित किए गए हैं। दोनों जगह मिलाकर 100 से ज्यादा मकान पूरे खत्म हो रहे हैं। दोनों ही जगह रहवासी सड़कों की चौड़ाई कम रखने की मांग कर रहे हैं। हालांकि नगरीय प्रशासन मंत्री चौड़ाई कम करने की संभावना से इन्कार कर चुके हैं।

कानपुर-सागर सिक्सलेन रोड को सागर रोड पर चौका गांव से लेकर चंद्रपुरा तक लाया जाएगा, चार दिशाओं के लिए अलग-अलग होगी लेन

छतरपुर शहर में आने वाले समय में यातायात व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। झांसी-खजुराहो फोरलेन और कानपुर-सागर सिक्सलेन अब चंद्रपुरा में एक-दूसरे से जुडऩे जा रहे हैं। इस परियोजना के तहत चंद्रपुरा में एक विशेष चंद्राकार फ्लाईओवर बनाया जाएगा, जिससे चारों दिशाओं की लेनें अलग-अलग मार्गों पर आसानी से मुड़ सकेंगी। यह निर्माण कार्य न केवल यातायात को सुव्यवस्थित करेगा, बल्कि छतरपुर शहर को दुर्घटना और जाम की समस्या से भी निजात दिलाएगा। क्या है योजना? कानपुर-सागर सिक्सलेन रोड को सागर रोड पर चौका गांव से लेकर चंद्रपुरा तक लाया जाएगा। चंद्रपुरा में विशेष चंद्रकार जंक्शन बनेगा, जो ग्वालियर जैसे मॉडल पर आधारित होगा। इससे एक लेन से वाहन झांसी की ओर, दूसरी से सतना-रीवा की ओर (पन्ना रोड से),तीसरी से कानपुर की ओर और चौथी से छतरपुर शहर में प्रवेश कर सकेंगे। रिंगरोड का बदला गया प्रस्ताव पहले छतरपुर शहर में दो राष्ट्रीय राजमार्गों को जोडऩे के लिए रिंगरोड बनाए जाने की योजना थी, लेकिन व्यावहारिक समस्याओं और भारी लागत को देखते हुए अब बाइपास का विकल्प चुना गया है। कानपुर-सागर सिक्सलेन को झांसी-खजुराहो फोरलेन से जोडकऱ सीधा संपर्क बाइपास मार्ग विकसित किया जाएगा। 43 कलोमीटर लंबा होगा बाइपास छतरपुर से गुजरने वाला प्रस्तावित सिक्सलेन बाइपास कुल 43.44 किलोमीटर लंबा होगा। यह चौका, चंद्रपुरा, निवाड़ी, गढ़ीमलहरा, उजरा होते हुए कैमाहा तक जाएगा। परियोजना पर कुल 982 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इसके अतिरिक्त सागर रोड से साठिया घाट तक 55 किलोमीटर फोरलेन बनाया जाएगा, जिसकी लागत 1671 करोड़ रुपए तय की गई है। शहर को मिलेगी दुर्घटना और जाम से राहत छतरपुर शहर दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों के चौराहे पर स्थित है। बाइपास न होने के कारण यहां आए दिन भारी जाम और सडक़ दुर्घटनाएं होती रही हैं। अब यह सिक्सलेन बाइपास दोनों राजमार्गों को शहर के बाहर जोड़ देगा, जिससे भारी वाहनों का शहर में प्रवेश रुकेगा और ट्रैफिक लोड घटेगा। 6 लेन के लिए तैयार होगी सडक़ संरचना प्रस्तावित फोरलेन हाइवे को भविष्य में सिक्सलेन में परिवर्तित किया जा सके, इसके लिए डीपीआर इस प्रकार तैयार की जा रही है कि अंडरपास और फ्लाईओवर पहले से ही सिक्सलेन मानकों पर बने। छतरपुर से गुजरने वाला यह मार्ग भोपाल-लखनऊ इकॉनोमिक कॉरिडोर का हिस्सा भी बनेगा। छतरपुर बनेगा केंद्रीय कनेक्टिविटी हब यह हाइवे बुंदेलखंड के झांसी, महोबा, हमीरपुर, छतरपुर और सागर जैसे प्रमुख क्षेत्रों को भोपाल और कानपुर से जोड़ेगा। छतरपुर, जो अब तक केवल पर्यटन के लिए जाना जाता था, अब लॉजिस्टिक्स और यातायात नेटवर्क का केंद्रीय हब बनने की ओर अग्रसर है। गठेवरा के पास जुड़ेंगे सिक्सलेन व फोरलेन बाइपास शहर में पहले दोनों नेशनल हाइवे को जोड़ते हुए रिंगरोड बनाए जाने का प्रस्ताव था। लेकिन इसके लेकर आ रही परेशानियों को देखते हुए अब कानपुर सागर सिक्सलेन को झांसी खजुराहो फोरलेन से जोडक़र बाइपास बनाया जाएगा। सिक्सलेन के लिए जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना जारी हो चुकी है। अब इसी जमीन पर बाइपास बनाया जाएगा। सिक्सलेन बाइपास होने से अलग-अलग लेन के वाहन अलग-अलग आ-जा सकेंगे। चंद्रपुरा से अलग-अलग हो जाएंगे सभी लेन सागर कानपुर सिक्सलेन सागर रोड पर चौका गांव से पन्ना रोड पर चंद्रपुरा तक सिक्सलेन बाइपास बनाया जाएगा। चंद्रपुरा में ग्वालियर जैसा चंद्रकार कनेक्शन देकर सभी लेनों को अलग-अलग जोड़ा जाएगा। सागर से आ रही सिक्सलेन की एक लेन के वाहन झांसी -खजुराहो मार्ग से झांसी की ओर निकल सकेंगे। वहीं, दूसरी लेन के वाहन पन्ना रोड पर सतना-रीवा की ओर निकल जाएंगे। जबकि तीसरी लेन के वाहन कानपुर के लिए निकल सक ेंगे। एक अन्य लेन के जरिए वाहन छतरपुर शहर में आ पाएंगे। 43 किलोमीटर लंबा होगा छतरपुर शहर का बाइपास कानपुर-सागर फोरलेन प्रोजेक्ट पर छतरपुर शहर से गुजरने वाला बाइपास 43.44 किलोमीटर लंबा होगा। जो चौका से होकर चंद्रपुरा, निवाड़ी, गढ़ीमलहरा, उजरा होते हुए कैमाहा तक बनाया जाएगा। इसके लिए 982 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। चुनाव बाद इसके लिए टेंडर भी होंगे। इसके अलावा सागर रोड पर चौका से छतरपुर जिले की सीमा में साठिया घाट तक 55 किलोमीटर फोरलेन का निर्माण किया जाएगा। इस पर 1671 करोड़ रुपए की लागत आएगी। छतरपुर से गुजरेगा भोपाल-लखनऊ इकॉनोमिक कॉरिडोर बुंदेलखंड के झांसी, महोबा, हमीरपुर, छतरपुर, सागर नेशनल हाइवे के रूटों से भोपाल और कानपुर महानगर से सडक़ मार्ग से जुड़ा हैं। अब इन दोनों महानगरों को फोरलेन सडक़ से जोड़ा जा रहा है। डीपीआर कुछ इस तरह तैयार की गई है कि भविष्य में इसे छह लेन भी किया जा सके। ये फोरलेन हाइवे छतरपुर से होकर गुजरेगा। कबरई से भोपाल के बीच अलग-अलग सेक्टर में भोपाल-कानपुर हाइवे की डीपीआर तैयार की गई है। प्रस्तावित फोरलेन हाइवे में अंडरपास और एलीवेटेड पुलों का निर्माण 6 लेन के अनुसार होगा, ताकि भविष्य में विस्तार होने पर हाइवे को 6 लेन किया जा सके।

मध्यप्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए एक और बड़ी सौगात मिली, नेशनल हाईवे होगा अपग्रेड

भोपाल मध्यप्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए एक और बड़ी सौगात मिल गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मध्यप्रदेश से गुजर रहे नेशनल हाईवे-34 के हिस्से को अपग्रेड करने का प्रस्ताव पास कर दिया है। इसकी जानकारी उन्होंने खुद एक्स पर साझा की है। 531.84 करोड़ रुपए की स्वीकृति केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए जानकारी साझा करते हुए लिखा कि मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग-34 के शाहगढ़-बक्सवाहा-नरसिंहगढ़-दमोह से 63.50 किमी लंबाई के खंड को पेव्ड शोल्डर के साथ 2-लेन में अपग्रेड करने के लिए 531.84 करोड़ रुपए की लागत के साथ स्वीकृति दी गई है। बनाए जाएंगे 4 बाईपास आगे जानकारी देते हुए लिखा है कि नेशनल हाईवे-34 उत्तराखंड के गंगोत्री धाम को मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर) पर लखनादौन से जोड़ता है। शाहगढ़-दमोह खंड के उन्नयन में 5 प्रमुख पुल, बक्सवाहा, भटेरा, नरसिंहगढ़ और पिपरिया चंपत में 4 बाईपास और दमोह के निर्मित क्षेत्रों में सर्विस/स्लिप रोड (दोनों तरफ 1.3 किलोमीटर) शामिल हैं। इस राजमार्ग के जुड़ने से कनेक्टिविटी बेहतर हो जाएगी और आर्थिक विकास को भी तेजी से बढ़ावा मिलेगा। लंबे समय से चल रही थी मांग नेशनल हाईवे 34 प्रदेश के नरसिंहपुर, सागर, दमोह और राजगढ़ से निकलता है। इस मार्ग को लंबे समय से अपग्रेड करने की मांग की जा रही थी। बता दें कि, 63.50 किलोमीटर का हिस्सा एमपी से गुजरता है। इस मार्ग के अपग्रेड होने से कनेक्टिविटी आसान हो जाएगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों के सुगम आवागमन के लिए प्रदेश की शत-प्रतिशत बसाहटों को सड़कों से जोड़ने की समय-सीमा निर्धारित

भोपाल एमपी सरकार अगले तीन साल में प्रदेश की सभी बसाहटों को सड़कों से जोड़ने के लिए काम कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों के सुगम आवागमन और बेहतर कनेक्टिविटी के लिए प्रदेश की शत-प्रतिशत बसाहटों को सड़कों से जोड़ने के लिए समय-सीमा निर्धारित कर कार्रवाई करें।  सभी जिलों में सड़कों की आवश्यकता का वैज्ञानिक आधार पर सर्वे कर कार्य-योजना बनाई जाए। सीएम डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की बैठक में पीएम ग्राम सड़क योजना के कार्यों की समीक्षा के दौरान यह निर्देश दिए। बैठक में मंत्री प्रहलाद पटेल, सीएस अनुराग जैन सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। एआइ का करें उपयोग सीएम ने कहा, क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्त, उन्नयन के लिए तत्काल कार्रवाई की जाए। सड़कों के रखरखाव, निरीक्षण में ऐप, जियो टैगिंग और एआइ का उपयोग कर और प्रभावी बनाया जाए। बैठक में बताया गया कि 89 हजार बसाहटों में से 50,658 बसाहटें सड़क मार्ग से जुड़ चुकी हैं। ग्राम सड़क योजना-4 के तहत बनने वाली 11,544 बसाहटों के लिए सर्वे कर लिया गया है। शेष 26,798 बसाहटों की कनेक्टिविटी के लिए राज्य सरकार द्वारा पहल की जा रही है। 89 हजार में से 50 हजार बसाहटों में सड़कें अधिकारियों ने सीएम को बताया कि जनमन योजना के अंतर्गत पाण्डाटोला से बीजाटोला तक देश की पहली सड़क का निर्माण बालाघाट जिले के परसवाड़ा क्षेत्र में किया गया है। मेंटेनेंस और उन्नयन के लिए भारत सरकार से प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने में मध्यप्रदेश प्रथम रहा है। मार्गों के संधारण के लिए 2015-16 से लागू ई-मार्ग पोर्टल की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई तथा केंद्र द्वारा इसे पूरे देश में नेशनल ई-मार्ग के रूप में लागू किया गया है। सीएम ने कहा कि सड़कों पर वर्तमान यातायात का सर्वे कर उन्नयन और लेन विस्तारीकरण का कार्य प्राथमिकता से किया जाए।

भोपालवासियों को बड़ी राहत मिलने वाली, जिले में बनेंगी 12 नई सड़कें, जाम की समास्या से मिलेगी निजात

भोपाल  एमपी के भोपाल शहर में लोगों को बड़ी राहत मिलने वाली है। जानकारी के लिए बता दें कि पीडब्ल्यूडी ने अपने बजट में नगर निगम के वार्डों की अंदरूनी सड़क को भी शामिल किया है। करीब 12 सड़कों के लिए पीडब्ल्यूडी ने प्रस्ताव तैयार किए हैं। इनका काम इसी माह शुरू किया जाएगा। पीडब्ल्यूडी ने करीब 50 करोड़ रुपए का बड़ा बजट इनके लिए तय किया है। शासन स्तर से ये राशि मंजूर कराई जाएगी। बजट में हैं नगर निगम की ये सड़कें शामिल 05 करोड़ रुपए बरखेड़ी फाटक से महामाई का बाग, शंकराचार्य नगर, पुष्पानगर, चांदबड़ की सड़कों के लिए 05 करोड़ रुपए अशोका गार्डन समेत वार्ड 69-70 के एप्रोच रोड के लिए 4.80 करोड़ रुपए वार्ड क्रमांक 26 बरखेड़ी खूर्द सीसी रोड 05 करोड़ रुपए चेतक ब्रिज से वार्ड 45 व 47 में गौतम नगर होते हुए रचना नगर अंडरब्रिज से सुभाष नगर विश्राम घाट तक रोड के लिए 14.75 करोड़ रुपए सलैया से बावडिया खुर्द तक वार्ड 52 की पर रोड 2.20 किमी लंबाई 3.79 करोड़ रुपए वार्ड 82-84 में दशहरा मैदान स्टेडियम से अमरनाथ कॉलोनी गेट तक सीसी रोड 1.20 किमी लंबाई 4.50 करोड़ रुपए में वार्ड 54-55 में आशिमा मॉल से कटारा रोड जाटखेड़ी से बाग मुगालिया क्षेत्र की सड़कें 3.18 करोड़ रुपए वार्ड 83 में गिरधर परिसर से श्यामाप्रसाद मुखर्जी कॉलेज निर्मलादेवी मार्ग कोलार रोड तक 1.80 करोड़ रुपए वार्ड 26 में रातीबड़ हनुमान मंदिर से जवाहर नवोदय विद्यालय

मध्यप्रदेश में तेजी से बढ़ रहा है सड़कों का नेटवर्क, 405 करोड़ की लागत से बनेगी नर्मदापुरम-हरदा सड़क

नर्मदापुरम  एमपी में नर्मदापुरम-हरदा सड़क का निर्माण 405 करोड़ की लागत से होगा। विधायक प्रेमशंकर वर्मा ने स्थानीय रेस्ट हाउस में हुई प्रेस वार्ता में बताया कि नर्मदापुरम से हरदा तक 10 मीटर चौड़ी सड़क के निर्माण की स्वीकृति मिल गई है। इसकी लागत 405 करोड़ रुपए होगी। सड़क निर्माण से क्षेत्र में आवागमन सुगम होगा। लोगों के समय की बचत होगी और सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी।  उन्होंने कहा कि विधानसभा क्षेत्र में किसानों के खेतों में सिंचाई के लिए तीन महत्वपूर्ण योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। किसानों को पर्याप्त वोल्टेज और बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नए विद्युत उपकेंद्रों का निर्माण किया गया है। जिन ग्रामों में सड़कें नहीं थीं, उन्हें भी बजट में शामिल कर स्वीकृति दी है। डोलरिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का उन्नयन किया है। प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्रों के भवनों का भी निर्माण किया जा रहा है। शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए पीएम श्री महाविद्यालय और पीएम श्री स्कूलों की स्थापना की गई है। साथ ही नए विद्यालयों का निर्माण कार्य भी पूरा किया गया है। इन सभी विकास कार्यों से क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा और नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी। सड़क व पुल निर्माण की मिली स्वीकृति सोहागपुर विधानसभा क्षेत्र में सड़क निर्माण की विधायक विजयपाल सिंह ने प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त की है। स्वीकृति लोक निर्माण विभाग की वित्तीय व समिति की बैठक में ली। भाजपा मंडलाध्यक्ष अश्वनी सरोज ने बताया विधायक विजयपाल सिंह ने लोनिवि वित्तीय व्यय समिति की 108 वीं बैठक में विधानसभा क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्य की प्रशासकीय स्वीकृति ली है। जिसमें सोहागपुर से निभौरा, पंचवटी, रैनीपानी, पाठई, उरदौन, मगरिया, कामठी-घोघरी तथा घोघरी से सारंगपुर मार्ग स्वीकृत कराया है। जिसकी लंबाई 24.30 किमी है और लागत 33 करोड़ 14 लाख 91 हजार रुपए है। इसी प्रकार बाबई-नसीराबाद मार्ग में बाकुड़ नदी पर सेतु निर्माण होगा। जिसकी लागत छह करोड़ छह लाख 82 हजार रुपए है। सूकरी से मनकवाडा मार्ग भी स्वीकृत कराया है, जिसकी लंबाई एक किमी व लागत 3 करोड़ 5 लाख रुपए है।

सड़क चौड़ीकरण के लिए पांच पोकलेन और चार जेसीबी के साथ 100 से ज्यादा श्रमिक मौके पर

इंदौर इंदौर में मास्टर प्लान की सड़कों के लिए केंद्र की योजना से 200 करोड़ रुपये की राशि मिली है। इसके चलते अब शहर में सड़कों का काम शुरू हो गया है। फिलहाल पूर्व में अधूरी सड़कों को चौड़ा करने के लिए बाधक निर्माण हटाए जा रहे है। मंगलवार को चंद्रभागा से कलालकुई मस्जिद के बीच बड़ी कार्रवाई की गई। सड़क की चौड़ाई में बाधक 15 से ज्यादा निर्माण तोड़े गए थे। भवन मालिकों को नगर निगम ने एक माह पहले नोटिस जारी कर दिया था, लेकिन स्वेच्छा से निर्माण नहीं टूटे तो नगर निगम ने उन्हें तोड़ा। सुबह पांच पोकलेन और चार जेसीबी के साथ 100 से ज्यादा श्रमिक मौके पर पहुंचे। अफसरों ने मकानोें में रखे सामान को हटाने के लिए कहा। इस काम में नगर निगम के अमले ने भी मदद की। रहवासी विरोध न करे, इसके लिए मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल भी मौजूद था। दो घंटे में निर्माणों को जमींदोज कर दिया गया। 18 मीटर चौड़ी सड़क बनेगी चंद्रभागा से मस्जिद तक 18 मीटर चौड़ी सड़क बनना है। यह मध्य क्षेत्र की सड़क है। यहां ट्रैफिक का दबाव काफी अधिक रहता है। नगर निगम गंगवाल बस स्टैंड से सरवटे बस स्टैंड तक भी सड़क चौड़ी कर रहा है। यह सड़क उस मार्ग की फीडर रोड है। 18 मीटर चौड़ाई की सड़क बनने के बाद ट्रैफिक जाम की स्थिति नहीं रहेगी। निगमायुक्त शिवम वर्मा ने कहा कि अब जल्दी ही सड़क निर्माण शुरू हो जाएगा। कुछ बाधाएं और शेष है। उन्हें भी हटाया जाएगा।  

भिंड के करीब 45 किलोमीटर लंबे पांच बायपास बनाए जाएंगे, नए बायपास से इन ग्रामीण क्षेत्रों को फायदा पहुंचेगा

 भिंड मध्य प्रदेश से गुजरने वाले बड़े ग्वालियर-इटावा नेशनल हाइवे पर लगातार सड़क दुर्घटनाओं बढ़ रही। इसी को देखते हुए भिंड के पास प्रशासन ने लगभग 45 किलोमीटर लंबे पांच बायपास बनाने का निर्णय लिया है। इसे अंतिम रूप देने के लिए भिंड कलेक्ट्रेट में जनप्रतिनिधियों के साथ अनुमोदन बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह, हेमंत कटारे, केशव देशाई और कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव की उपस्थिति रही। जिला पंचायत अध्यक्ष कामना सिंह भदौरिया, अपर कलेक्टर एलके पांडेय, नपा अध्यक्ष वर्षा वाल्मीक और विधायक प्रतिनिधि अरविंद बघेल सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। बायपास के निर्माण का प्रारूप बायपास का निर्माण रेत, गिट्टी की खदानों, रेलवे लाइनों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। एलईडी स्क्रीन पर बायपास का पूरा नक्शा दिखाकर जनप्रतिनिधियों से अनुमोदन मांगा गया। हालांकि, अटेर विधायक हेमंत कटारे ने आपत्ति जताई कि उनके क्षेत्र की उपेक्षा की गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि रेत और गिट्टी की खदानें नेशनल हाइवे की बाईं ओर स्थित हैं और दूसरी तरफ रेलवे लाइनें हैं। ऐसे में अंडरपास और आरओबी बनाने से समय और लागत में बढ़ोतरी होती है। निर्माण के चरण और लागत सूत्रों के अनुसार, बायपास का निर्माण दो चरणों में किया जा सकता है। पहले चरण में 1500 करोड़ रुपये की लागत से हाईब्रिड एन्युटी मोड के तहत काम किया जाएगा। दूसरे चरण में 2500 करोड़ रुपये की लागत सामान्य प्रक्रिया के तहत होगी। कुल मिलाकर इस परियोजना पर चार हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा। कहां बनेगा कितना लंबा बायपास     भिण्ड:18 किमी     मेहगांव: 10 किमी     गोहद: 5.5 किमी     मालनपुर: 8.0 किमी     फूप: 3.0 किमी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया इन बायपासों के निर्माण के लिए लगभग 400 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। परियोजना का प्रस्ताव पहले भोपाल, फिर दिल्ली भेजा जाएगा। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। जनप्रतिनिधियों की उम्मीद जनप्रतिनिधियों का मानना है कि इन बायपासों के बनने से न केवल दुर्घटनाओं में कमी आएगी बल्कि आवागमन भी सुगम होगा। क्षेत्र में आर्थिक और सामाजिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

इंदौर में मास्टर प्लान की सड़कों के जल्द निर्माण के निर्देश

इंदौर  एमपी के इंदौर शहर में स्मार्ट सिटी मास्टर प्लान की 8 ऐसी सड़कों का काम करेगा जो अधूरी है या उनका काम शुरू ही नहीं हुआ है। सड़कों के निर्माण के साथ अन्य विकास कार्य भी होंगे। यह सभी काम समय सीमा में पूरे किए जाएंगे। कलेक्टर आशीष सिंह के मुताबिक  स्मार्ट सिटी की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक हुई।  बैठक में निगम आयुक्त शिवम वर्मा, स्मार्ट सिटी सीईओ दिव्यांक सिंह सहित अन्य सदस्य व विभागों के अधिकारी मौजूद थे। प्रोजेक्ट चिन्हित किए गए हैं। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि बाधाओं को चिन्हित कर निराकरण कर लिया जाए। इनका निर्माण शीघ्र ही स्मार्ट सिटी के माध्यम से कराया जाएगा। बैठक में निर्देश दिए गए कि इन सड़कों का निर्माण जल्द ही प्रारंभ किया जाएगा। सड़कों में आने वाली बाधाओं को भी चिह्नित कर इनके निराकरण की समुचित व्यवस्था भी कर ली जाए। यहां होगा काम -एमआर-5 रोड, इंदौर वायर फैक्ट्री से बड़ा बांगड़दा तक। -वायर फैक्ट्री से सुपर कॉरिडोर तक स्टॉर्म वाटरलाइन डालने का कार्य। -नेमावर रोड-पालदा तिराहा से आरई-2 आइएसबीटी होते हुए बायपास तक मास्टर प्लान सड़क का विकास कार्य। -एमआर-9 रोबोट चौराहा से बायपास एवं अनूप टॉकीज के पास सड़क। धार रोड चंदन नगर चौराहा से एयरपोर्ट रोड तक सड़क। -एमआर-3 पीपल्यापाला रीजनल पार्क से बायपास तक सड़क। -नायता मुण्डला से एमआर-10 तक आरई-2 का शेष भाग। एमआर-6 रिंग रोड से महू नाका रोड।

भारतमाला घोटाले में ईओडब्ल्यू और एसीबी ने तेज की जांच, कई अधिकारियों पर दर्ज होगी FIR

 रायपुर रायपुर-विशाखापत्तनम भारतमाला रोड परियोजना में हुए घोटाले की जांच ईओडब्ल्यू और एसीबी ने तेज कर दी है। घोटाले में शामिल अधिकारियों से जल्द ही पूछताछ करने की तैयारी है। वहीं, इन पर भ्रष्टाचार के तहत अपराध भी दर्ज किया जाएगा। भारतमाला प्रोजेक्ट में सरकार की जांच में सामने आया कि 43.18 करोड़ रुपये के मुआवजे का गलत तरीके से भुगतान किया गया है। इस मामले में अब तक दो तहसीलदार समेत तीन पटवारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। इसके अलावा घोटाले में संलिप्त अन्य बड़े अधिकारियों को जांच के दायरे में लिया गया है। रायपुर जिले के अभनपुर में तैनात पूर्व एसडीएम निर्भय कुमार साहू पर गलत तरीके से मुआवजा देने का आरोप है। बताजा जा रहा है कि उन्होंने रायपुर-विशाखापत्तनम भारतमाला रोड परियोजना के लिए कुछ भूस्वामियों को गलत तरीके से मुआवजे का भुगतान किया है। जमीन को टुकड़ों में बांटा, 80 नए नाम चढ़ाए सूत्रों ने बताया कि मुआवजा करीब 29.5 करोड़ रुपए का होता है। अभनपुर के ग्राम नायकबांधा और उरला में भू-माफियाओं ने राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर जमीन को छोटे टुकड़ों में काटकर 159 खसरे में बांट दिया। मुआवजे के लिए 80 नए नाम रिकार्ड में चढ़ा दिया गया। इससे 559 मीटर जमीन की कीमत करीब 29.5 करोड़ से बढ़कर 78 करोड़ रुपए पहुंच गई। अभनपुर क्षेत्र में 9.38 किलोमीटर के लिए 324 करोड़ मुआवजा राशि निर्धारित की गई, जिसमें से 246 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जा चुका है। वहीं, 78 करोड़ रुपये का भुगतान अभी रोक दिया गया है। पिछली तिथि में दस्तावेजों में हुई गड़बड़ी अभनपुर इलाके में पदस्थ अधिकारियों ने पिछली तिथि में जाकर दस्तावेजों में गड़बड़ी की और जमीन मालिक को नुकसान पहुंचाया। अभनपुर के ग्राम नायक बांधा और उरला में चार एकड़ जमीन जो सर्वे से पहले एक परिवार के पास थी। वो सर्वे होने के ठीक कुछ दिन पहले एक ही परिवार के 14 लोगों के नाम पर बांट दी गई। इसके बाद एक ही परिवार के सदस्यों को 70 करोड़ रुपये की मुआवजा का भुगतान कर दिया गया। जांच अधिकारियों ने तत्कालीन अफसरों की इस कार्यप्रणाली का सीधा जिक्र अपनी जांच रिपोर्ट में किया है। इन पर घोटाले में शामिल होने का आरोप तत्कालीन अनुविभागीय और सक्षम अधिकारी निर्भय कुमार साहू, तत्कालीन तहसीलदार अभनपुर शशिकांत कुर्रे, तत्कालीन नायब तहसीलदार गोबरा नवापारा लखेश्वर प्रसाद किरण, तत्कालीन हल्का पटवारी नायकबांधा जितेंद्र साहू, तत्कालीन हल्का पटवारी नायकबांधा दिनेश पटेल और तत्कालीन हल्का पटवारी टोकरो लेखराम देवांगन समेत अन्य अधिकारियों के घोटाले में शामिल होने के सुबूत मिले हैं।

मध्य प्रदेश में 5 साल में बनेंगी 1 लाख KM सड़कें, शहरों से गांवों तक मिलेगी नई रफ्तार; बजट में क्या-क्या ऐलान

भोपाल मध्य प्रदेश में इस बार वित्त वर्ष 2025-26 का बजट शहरों से लेकर गांवों तक पूरे प्रदेश को नई रफ्तार देने वाला है। इसमें नई सड़कों से लेकर फ्लाईओवर बनाने तक के लिए बजट रखा गया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री के साथ ही वित्त मंत्री का प्रभार संभाल रहे जगदीश देवड़ा ने बुधवार को विधानसभा में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 4.21 लाख करोड़ रुपयों से अधिक का बजट पेश किया। इस बार के बजट में ग्रामीणों की सुविधा के लिए मुख्यमंत्री मजरा टोला सड़क योजना प्रारंभ की जा रही है, इसके लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। वित्त मंत्री देवड़ा ने अपने बजट भाषण में कहा कि प्रदेश में अगले 5 सालों में 1 लाख किलोमीटर सड़क बनाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसी तरह प्रदेश में आगामी 5 वर्षों में 500 रेल ओवर ब्रिज एवं फ्लाईओवर बनाए जाएंगे। इस वर्ष 3500 किलोमीटर नई सड़कें तथा 70 पुल बनाए जाने का लक्ष्य है। वहीं, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 1 हजार किलोमीटर सड़कों के निर्माण एवं लगभग 5200 किलोमीटर सड़कों के नवीनीकरण का लक्ष्य पूर्ण होगा। 8631 गांवों को बारहमासी मार्ग से जोड़ा गया मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत अब तक 8631 गांवों को 19,472 किलोमीटर लंबाई की सड़कें बनाकर, बारहमासी मार्ग से जोड़ा जा चुका है। हालांकि, अब भी कुछ गांवों में मेन रोड से ग्राम पंचायतों में पहुंचने के लिए सड़क उपलब्ध नहीं है। अतः ग्रामवासियों को सुविधाजनक मार्ग उपलब्ध कराने के लिए नई योजना “मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना” प्रारंभ की जा रही है। इस योजना के लिए वर्ष 2025-26 में रुपये 100 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। इसके अलावा एक नई योजना ‘क्षतिग्रस्त पुलों का पुनर्निर्माण योजना’ प्रारम्भ की जा रही है। इस योजना के लिए वर्ष 2025-26 में रुपये 100 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। वहीं, सड़कों एवं पुलों के निर्माण एवं रखरखाव के लिए वर्ष 2025-26 में रुपये 16,436 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है, जो वर्ष 2024-25 से 34 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि रोड नेटवर्क, एक्सप्रेसवे, मेट्रो, एलिवेटेड कॉरिडोर जैसी अनेक परियोजनाओं के साथ प्रदेश इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भोपाल, देवास, ग्वालियर, जबलपुर, सतना और इंदौर में एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। उज्जैन-जावरा 4 लेन सड़क के निर्माण से उज्जैन, इंदौर एवं आसपास के क्षेत्र, दिल्ली-मुंबई 8 लेन कॉरिडोर से जुड़ जाएंगे। वहीं, 1692 करोड़ की अनुमानित लागत वाले उज्जैन-इंदौर 6 लेन रोड का भूमि पूजन हो चुका है। 116 नए रेलवे ओवरब्रिज बनाने का काम प्रगति पर देवड़ा ने कहा कि रेलवे क्रॉसिंग पर यातायात बाधित होने से समय एवं ईंधन की बर्बादी रोकने के लिए रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) एवं रेलवे अंडरब्रिज (आरयूबी) के निर्माण कार्य रेलवे के साथ मिलकर प्राथमिकता से कराए जा रहे हैं। प्रदेश में 4251 करोड़ रुपये की लागत के कुल 116 नए रेलवे ओवरब्रिज बनाने का काम प्रगति पर हैं।

मुंबई-दिल्ली कॉरिडोर से जुड़ेगा उज्जैन-जावरा फोरलेन: मंत्री जगदीश देवड़ा

भोपाल मध्यप्रदेश की मोहन सरकार के द्वारा दूसरा बजट (MP Budget 2025) पेश कर दिया गया है। इस दौरान वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने मेट्रो और फोरलेन को लेकर कहा कि इंदौर-भोपाल में मेट्रो का काम जल्द शुरु किया जाएगा। साथ ही उज्जैन-जावरा फोरलेन निर्माण से इंदौर को बड़ा फायदा होगा। मुंबई-दिल्ली कॉरिडोर से जुड़ेगा उज्जैन-जावरा फोरलेन उज्जैन-जावरा 4-लेन के बनने से उज्जैन, इन्दौर और उसके आसपास के क्षेत्र मुम्बई-दिल्ली 8-लेन कॉरिडोर से जुड़ जाएंगे। उज्जैन-इन्दौर सिक्स लेन का 1 हजार 692 करोड़ की अनुमानित लागत से भूमि पूजन हो चुका है। भोपाल, देवास, ग्वालियर, जबलपुर, सतना और इंदौर में एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण प्रगति पर है। नगरीय विकास के लिए 18 हजार 715 करोड़ प्रस्तावित सिंहस्थ क्षेत्र में विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं। सिंहस्थ का आयोजन साल 2028 में किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 2 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान प्रस्तावित है। नगरीय विकास के लिए साल 2025-26 के लिए 18 हजार 715 करोड़ रुपए का प्रावधान प्रस्तावित है। जो साल 2024-25 से 2 हजार करोड़ रुपए ज्यादा है। एमपी में इन जिलों से गुजरता है दिल्ली-मुबंई आठ लेन दिल्ली-मुबंई 8 लेन कॉरिडोर झाबुआ के तलावड़ा से महूड़ी का माल से एक्सप्रेस-वे रतलाम में प्रवेश कर रावटी, सैलाना, पिपलौदा, व जावरा के कुम्हारी होकर मंदसौर के लसुड़िया से मंदसौर जिले में जाता है। रतलाम जिले के 87 गांवों से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे होकर गुजरता है। एक्सप्रेस-वे के जरिए गरोठ में शामगढ़ रोड और भानपुरा में नीमथुर से एंट्री कर सकेंगे। मंदसौर जिले से एक एंट्री सीतामऊ से भी मिलेगी। गरोठ और जावरा में लॉजिस्टिक हब बनाया जाएगा। साथ ही बसई के पास की जमीन पर उद्योग लगाए जाएंगे।

मध्यप्रदेश में सड़कों का नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा, बजट में लोक निर्माण कार्य के लिए 2500 करोड़ रुपए का बजट में प्रावधान

भोपाल  मध्यप्रदेश में सड़कों का नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा है। बड़े स्तर पर चल रही सड़क परियोजनाओं का उद्देश्य केवल सड़कों और राजमार्गों का निर्माण ही नहीं, बल्कि राज्य के हर नागरिक के जीवन को सरल और समृद्ध बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे है। केन्द्र द्वारा लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं से मध्यप्रदेश में स्थायी आधारभूत संरचना विकसित होगी।  आज मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने अपना दूसरा पूर्ण बजट पेश किया है। विधानसभा में उप मुख्यमंत्री और प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा बजट पेश किया गया। इस बजट में लोक निर्माण कार्य के लिए 2500 करोड़ रुपए का बजट में प्रावधान मिला है। जिसके तहत एमपी के गांव-शहर और तहसीलों में सड़कों का निर्माण किया जाएगा। कितना मिला बजट -ग्रामीण सड़कों एवं अन्य जिला मार्गों का निर्माण/उन्नयन के अंतर्गत 2500 करोड़ रुपए का प्रावधान -म.प्र. सड़क विकास निगम (एन.डी.बी.) के अंतर्गत 1450 करोड़ रुपए का प्रावधान -मध्यप्रदेश सड़क विकास कार्यक्रम (ए.डी.बी.) के अंतर्गत 1315 करोड़ रुपए का प्रावधान -केन्द्रीय सड़क निधि के अंतर्गत 1150 करोड़ रुपए का प्रावधान -वृहद पुलों का निर्माण के अंतर्गत 1000 करोड़ रुपए का प्रावधान -सड़कों का सुदृढ़ीकरण के अंतर्गत 1000 करोड़ रुपए का प्रावधान -अनुरक्षण और मरम्मत – साधारण मरम्मत के अंतर्गत 836 करोड़ रुपए का प्रावधान -एन्यूटी के अंतर्गत 825 करोड़ रुपए का प्रावधान -सड़क एवं सेतु हेतु संधारण कार्य के अंतर्गत 525 करोड़ रुपए का प्रावधान -मुख्य जिला मार्गो तथा अन्य का नवीनीकरण, उन्नतीकरण एवं डामरीकरण के अंतर्गत 500 करोड़ रुपए का प्रावधान संभागीय कार्यालय स्थापना के अंतर्गत 350 करोड़ रुपए का प्रावधान -नवीन ग्रामीण एवं अन्य जिला मार्गों का निर्माण/उन्नयन के अंतर्गत 350 करोड़ रुपए का प्रावधान -म.प्र. सड़क विकास निगम के माध्यम से सड़कों का निर्माण के अंतर्गत 200 करोड़ रुपए का प्रावधान -एफ टाईप एवं उससे नीचे की श्रेणी के शासकीय आवासों का अनुरक्षण के अंतर्गत 200 करोड़ रुपए का प्रावधान -मुख्य जिला मार्गों का निर्माण/उन्नयन के अंतर्गत 200 करोड़ रुपए का प्रावधान -एन.डी.बी. से वित्त पोषण (पुल निर्माण) के अंतर्गत 150 करोड़ का प्रावधान

MP को जल्द मिलेगा पहला फ्लोटिंग रोड, सफर बनेगा सुहाना ! रायसेन-सागर के बीच 9 किमी लंबा सेमी ऐलिवेटेड कॉरिडोर अंतिम चरण में

रायसेन मध्यप्रदेश के रायसेन में पहले फ्लोटिंग रोड के निर्माण को जल्द पूरा होने वाला है। ये बेगमगंज (रायसेन) से राहतगढ़ (सागर) को जोड़ने वाला मार्ग जल्द ही प्रदेश के प्रमुख मार्गों में गिना जाएगा, जहां 9 किमी लंबा सेमी ऐलिवेटेड कॉरिडोर बन रहा है। यह कॉरिडोर केवल सफर को आसान नहीं बनाएगा, बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक रोमांचक अनुभव लेकर आएगा। जंगलों और पहाड़ियों से घिरे इस क्षेत्र में अब सड़क यात्रा किसी टूरिस्ट डेस्टिनेशन से कम नहीं होगी।  डूब क्षेत्र में तकनीक का कमाल, 120 करोड़ की लागत से बन रहा फ्लोटिंग रोड मढ़िया बांध के कारण रायसेन-सागर रोड का एक हिस्सा डूब में आ रहा था। इसी समस्या को हल करने के लिए MPRDC (मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम) ने 120 करोड़ रुपए की लागत से फ्लोटिंग रोड और चार बड़े फ्लाईओवर का निर्माण शुरू किया। यह सेमी ऐलिवेटेड कॉरिडोर बांध के पानी के ऊपर से गुजरेगा, जिससे यात्रियों को एक अनोखा सफर मिलेगा और इलाके की कनेक्टिविटी भी बरकरार रहेगी। टूरिज्म को मिलेगा बड़ा बूस्ट, बनेगा नया सेल्फी प्वाइंट! राहतगढ़ पहले से ही अपने खूबसूरत झरने और प्राकृतिक नजारों के लिए प्रसिद्ध है। अब जब यह नई सड़क जंगल, पहाड़ियों और डैम के बीच से गुजरेगी, तो यह इलाका पर्यटन का नया केंद्र बन सकता है।  सेल्फी प्वाइंट और व्यूइंग डेक बनाने की योजना  पर्यटकों के लिए फूड कोर्ट और रेस्ट एरिया विकसित किए जाएंगे  स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे परियोजना से प्रभावित गांवों की स्थिति इस प्रोजेक्ट के चलते रायसेन जिले के 14 गांव पूरी तरह और 42 गांव आंशिक रूप से डूब क्षेत्र में आएंगे। प्रशासन ने प्रभावित ग्रामीणों के पुनर्वास और मुआवजे के लिए योजना बनाई है, जिससे किसी को नुकसान न हो। पर्यटन को मिलेगा नया जीवन राहतगढ़ का वॉटरफॉल पहले से ही इस क्षेत्र का बड़ा आकर्षण रहा है, जहां मानसून के दौरान हजारों पर्यटक पहुंचते हैं। अब जब यह नया कॉरिडोर जंगल, पहाड़ियों और डैम के पानी के बीच से होकर गुजरेगा, तो यह जगह और भी शानदार दिखेगी। यहां पर्यटकों के लिए सेल्फी प्वाइंट और अन्य सुविधाएं विकसित करने की भी योजना बनाई जा रही है। परियोजना के कारण क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। कॉरिडोर के आसपास पर्यटन केंद्र और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है, जिससे स्थानीय लोगों को फायदा होगा। डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों की स्थिति इस परियोजना के कारण रायसेन जिले के 14 गांव पूरी तरह और 42 गांव आंशिक रूप से डूब क्षेत्र में आएंगे। इनमें चंदामाऊ और ककरुआ बरामद गढ़ी पूरी तरह से जलमग्न होंगे। हालांकि, प्रशासन ने प्रभावित किसानों और ग्रामीणों के लिए मुआवजा योजना तैयार की है, जिसका वितरण जल्द शुरू किया जाएगा। जल्द पूरा होगा निर्माण कार्य कॉरिडोर और लाई ओवर ब्रिज का निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में है। एमपीआरडीसी के जीएम सोनल सिन्हा के अनुसार, ठेकेदार को मई तक कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं और इसकी सतत समीक्षा हो रही है। प्रयास यही है कि बारिश से पहले कार्य पूरा हो जाए, जिससे आगामी मानसून में यह क्षेत्र पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार हो सके। बारिश से पहले पूरा होगा निर्माण, जल्द खुलेगा ट्रैफिक के लिए MPRDC के जीएम सोनल सिन्हा के अनुसार, ठेकेदार को मई 2025 तक निर्माण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। कोशिश यह है कि मानसून से पहले यह शानदार सड़क चालू हो जाए, ताकि पर्यटक और स्थानीय लोग इसका पूरा लाभ उठा सकें। फ्लोटिंग रोड: सफर नहीं, एक अनोखा अनुभव! मध्यप्रदेश में यह अपनी तरह की पहली सड़क होगी, जहां सफर करते हुए लोग महसूस करेंगे कि वे पानी के ऊपर चल रहे हैं। यह सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि प्रदेश के पर्यटन और विकास की नई पहचान बनने जा रहा है। अब सफर सिर्फ मंजिल तक पहुंचने के लिए नहीं, बल्कि उसे जीने के लिए होगा!

इंदौर की तरफ से छह लेन सड़क का काम शुरू, सिंहस्थ के समय मिलेगी ट्रैफिक मेें राहत

इंदौर इंदौर से उज्जैन के बीच 50 किलोमीटर लंबाई में छह लेन सड़क का काम शुरू हो चुका है। अब इंदौर शहर की सीमा में भी छह लेन के हिसाब से सड़क के बेस के लिए काम चल रहा है। सांवेर के समीप पुरानी पुलिया को भी चौड़ा करने के लिए शेड लगा दिए गए है। ज्यादातर काम सड़क निर्माण कंपनी रात के समय कर रही है,क्योकि तब ट्रैफिक कम रहता हैै। इंदौर मेें अरविंदो अस्प्ताल से सड़क बनेगी,क्योकि यहां तक छह लेन ब्रिज की भुजा उतरेगी। छह लेन सड़क बनने के बाद 50 किलोमीटर की दूरी 40 से 50 मिनट में तय हो जाएगी। फोरलेन को छह लेन करने में सरकार को ज्यादा परेशानी नहीं आएगी,क्योकि दस साल पहले जब सड़क फोरलेन की गई थी। तब छह लेन के हिसाब से जमीन का अधिगृहण कर लिया था। चार गांवों में बाधक निर्माणों को तोड़ा जाएगा। यह सड़क उज्जैन में महाकाल गेट तक बनेगी। फिलहाल सांवेेर,रिंगनोद, निनौरा मेें काम तेजी से चल रहा है। उज्जैन की सीमा पर भी फोरलेन के दोनो तरफ एक-एक लेन के लिए खुदाई कर जमीन को समतल किया जा रहा है। यहां र्मुरम भी बिछाई जा रही है। ढाई साल मेें काम पूरा होगा   इस सड़क के निर्माण पर डेढ़ हजार करोड़ रुपये सरकार खर्च कर रही है। इस मार्ग पर तीन बड़े ब्रिज और छह अंडरपास बनाए जाएंगे। चार माह पहले राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने इस प्रोजेक्ट का भूमिपूजन किया था। इस प्रोजेक्ट का निर्माण वर्ष 2028 में होगा। उसके बाद उज्जैन में सिंहस्थ मेला लगेगा। तब इंदौर से उज्जैन के लिए एक लाख से अधिक वाहनों की आवाजाही होगी। उस ट्रैफिक के लिए छह लेन सड़क मददगार साबित होगी। अभी इंदौर से उज्जैन के बीच 25 हजार वाहनों की आवाजाही होती है। इस सड़क के अलावा पीडब्लूडी हातोद, चंद्रवतीगंज से उज्जैन तक फोरलेन सड़क बनाएगा। यह सड़क चिंतामण गणेश मंदिर तक बनेगी। उसके निर्माण से उज्जैन के लिए एक और रुट मिल जाएगा। देवास से भी उज्जैन के बीच भी सड़क को फोरलेन किया जा रहा है।    

रीवा राजमार्ग पर महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान से प्रयागराज जाने वाले यात्रियों का दबाव

 रीवा सड़क मार्ग से प्रयागराज जाने के लिए सबसे ज्यादा ट्रैफिक रीवा की तरफ के राष्ट्रीय राजमार्ग पर मिल रहा है। रीवा से प्रयागराज की दूरी 133 किलोमीटर है,लेकिन उसे तय करने में पांच से सात घंटे लग रहे है। वाहनों की एंट्री तो शुरू हो गई, लेकिन वाहनों को स्पीड ज्यादा नहीं मिल रही है। रीवा वाले रुट पर महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान से प्रयागराज जाने वाले यात्रियों का दबाव है। प्रयाग राज जाने वाले कई यात्री ट्रेन से रीवा आ रहे, फिर यहां से टैक्सी किराए पर लेकर प्रयागराज जा रहे है। कैब टैक्सी छह से आठ हजार रुपये में प्रयागराज की ट्रीप करा रही है, लेकिन ट्रैफिक जाम होने पर यात्रियों को ज्यादा कीमत भी चुकाना पड़ रही है। ट्रेवल एजेंसी संचालक फरीद खान का कहना है कि शाम से ट्रैफिक तो बहाल हो गया, लेकिन बीच-बीच में ट्रैफिक जाम मिल रहा है। 130 किलोमीटर की दूरी पांच घंटे में तय हो रही है। इतना ही समय प्रयागराज से आने में लग रहा है। प्रयागराज बाइपास से यदि वाहन भीतर ले जाते है तो समय और ज्यादा लगता है। इस कारण यात्रियों को हम बाइपास पर उतार कर इंतजार करते है। कई लोग ट्रैफिक से बचने के लिए चित्रकूट के घने जंगल वाले सिंगल रोड को भी अपना रहे है। सतना, मणिकपुर से मिल रही मेला स्पेशल ट्रेन प्रयागराज तक जाने के लिए रेल विभाग ने 300 से ज्यादा मेला स्पेशल ट्रेन चलाई है। मध्य प्रदेश के यात्रियों को सतना, झांसी, कटनी से प्रयागराज तक के लिए रेल गाड़ी मिल रही है, हालांकि ट्रेनों में भीड़ भी मिल रही है, लेकिन कोशिशों के बाद ट्रेनों में यात्रियों को जगह भी मिल रही है।  

उज्जैन शहर की सड़कें चौड़ी करने में 50 से ज्यादा धर्मस्थल प्रभावित होंगे

उज्जैन एमपी में सड़कें चौड़ी करने का काम किया जा रहा है। उज्जैन में तो इसके लिए बाकायदा अभियान चलाया जा रहा है। सड़क चौड़ी करने के लिए यहां पहली बड़ी कार्रवाई जब रास्ते में आ रहे एक स्कूल को मार्ग से हटाया गया। अब धर्मस्थल को शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है। शहर भर की सड़कें चौड़ी की जानी है जिसमें 50 से ज्यादा धर्मस्थल प्रभावित होंगे। सड़कें चौड़ी करने के लिए ऐसे धर्मस्थलों को भी पीछे हटाया जाएगा। उज्जैन में 2028 में आयोजित सिंहस्थ यानि कुंभ मेले के लिए ये कवायद की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार धर्मस्थलों के बढ़े हिस्से को हटाया जाएगा या फिर कहीं ओर शिफ्ट भी किया जा सकता है।  उज्जैन में हो रहे रोड निर्माण और चौड़ीकरण के काम में पहली बड़ी कार्रवाई हुई है। कोठी रोड रोड से उद्योगपुरी की ओर मार्ग में आ रहे एक सरकारी स्कूल को शिफ्ट किया गया है। इसी के साथ स्कूल को तोड़ने की कवायद शुरू कर दी है। वहीं रास्ते में आने वाले एक धर्मस्थल को भी पीछे किए जाने की कार्रवाई होगी। नगर निगम द्वारा प्रशासनिक संकुल भवन के पास से सड़क को 18 मीटर चौड़ा किया जा रहा है। निगम ने यह काम भी शुरू कर दिया है। रास्ते में शासकीय प्राथमिक विद्यालय कोठी रोड का भवन और इसी के आगे एक धर्मस्थल भी आ रहा है। दोनों को हटाए बिना रोड चौड़ी करना संभव नहीं है। लिहाजा पहली कार्रवाई करते हुए शासकीय स्कूल को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई है। कलेक्टर नीरजकुमार सिंह ने सरकारी स्कूल को हटाते हुए शासकीय प्राथमिक विद्यालय गांधीनगर में शिफ्ट करने के आदेश जारी किए हैं। कलेक्टर के आदेश के बाद निगम की ओर से स्कूल भवन तोडऩे की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। अगले दिनों में मार्ग में आ रहे धर्मस्थल को भी पीछे करने की कार्रवाई भी होगी। एक-दो दिन में होगा फैसला बताते हैं कि मार्ग में आने वाले धर्मस्थल को लेकर एक-दो दिन में निर्णय लिया जाएगा। निगम व प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा धर्मस्थल से जुड़े स्टेक होल्डर से चर्चा भी कर ली गई है। अधिकारी बता रहे हैं कि जितना धर्मस्थल है, उससे ज्यादा निर्माण कर लिया गया है। ऐसे में धर्मस्थल के बढ़े हिस्से को हटाया जाएगा या फिर कहीं ओर शिफ्ट भी किया जा सकता है। 52 धर्मस्थल होंगे प्रभावित शहर की सड़क चौड़ी करने के काम में मार्ग में बने करीब 52 धर्मस्थल प्रभावित होंगे। इसमें गाड़ी अड्डा से निकास चौराहा व केडी गेट होते हुए बड़ी पुलिया तक 19 धर्मस्थल, खजूरवाली मस्जिद से जीवाजीगंज थाना होते हुए गणेश चौक तक 10, वीडी क्लॉथ मार्केट से दानीगेट होते हुए छोटी पुलिया तक 11, कोयलाफाटक से सतीगेट होते हुए गोपाल मंदिर तक 11, निकास चौराहे से कंठाल चौराहे तक 02 तथा गदा पुलिया से रविशंकर नगर होते हुए लालपुल तक 5 धर्मस्थल शामिल हैं। अगले दिनों में प्रशासनिक अधिकारी स्टेक होल्डर से चर्चा कर उचित निर्णय लेंगे। नगर निगम के कार्यपालन यंत्री पीयूष भार्गव बताते हैं कि कोठी रोड पर चौड़े किए जा रहे मार्ग में आ रहे सरकारी स्कूल को तोड़ा जा रहा है। इसे शिफ्ट करने के आदेश कलेक्टर ने जारी कर दिए है। धर्मस्थल को लेकर भी चर्चा की जा रही है।

इंदौर में मास्टर प्लान की 23 सड़कें बनेगी, 8 पर पहले फोकस

इंदौर  मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में निगमायुक्त शिवम वर्मा ने स्मार्ट सिटी कार्यालय में मास्टर प्लान के पहले चरण में बनने वाली 8 सड़कों के निर्माण कार्य की समीक्षा की। इस दौरान अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर, अधीक्षण यंत्री डीआर लोधी मौजूद रहे। वर्मा ने बताया कि मास्टर प्लान के तहत 23 सड़कों का निर्माण प्रस्तावित है।  बिचौली हप्सी से भूरी टेकरी होते हुए नायता मुंडला तक का कार्य जारी है। प्रथम चरण में 8 सड़कों के लिए सेंट्रल लाइन डालने, नोटिस जारी करने संबंधी कार्य इस सप्ताह से शुरू कर दिए जाएंगे। इसके अलावा देवगुराडिया स्थित 500 टीडीपी बायोमिथेन प्लांट की क्षमता बढ़ाकर 800 टीडीपी करने, प्लांट के लिए अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराने, इस प्लांट के अत्याधुनिकरण करने, मुख्य मार्गों की सफाई के लिए रोड स्वीपिंग मशीनें खरीदने को लेकर चर्चा हुई। 450 करोड़ रुपये खर्च होंगे महापौर ने बताया कि इन सड़कों के निर्माण पर करीब 450 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह पैसा केंद्र सरकार ने पहले ही इंदौर नगर निगम के खाते में ट्रांसफर कर दिया है। हमने केंद्र सरकार से 14 अन्य सड़कों के लिए भी 400 करोड़ रुपये जारी करने की मांग की है। हम इसका प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजेंगे। इन 8 सड़कों का होगा काम -सुभाष मार्ग (गोल मंदिर से रामबाग पुल तक): लंबाई 1300 मीटर, चौड़ाई 30 मीटर। -लिंक रोड (एमआर-10 से एमआर-12 तक): लंबाई 1800 मीटर, चौड़ाई 30 मीटर। -एमआर-5 (बड़ा बांगड़दा से पीएमएवाय मल्टी तक): लंबाई 1700 मीटर, चौड़ाई 24 मीटर। -भमोरी चौराहे से एमआर-10 व राजशाही गार्डन से होटल वॉच तक: लंबाई 1100 मीटर, चौड़ाई 30 मीटर। -वीर सावरकर प्रतिमा से अटल गेट तक: लंबाई 1310 मीटर, चौड़ाई 18 मीटर। एडवांस एकेडमी से रिंग रोड तक: लंबाई 3650 मीटर, चौड़ाई 30 मीटर। जमजम चौराहे से स्टार चौराहा तक: लंबाई 1920 मीटर, चौड़ाई 30 मीटर। खजराना मंदिर द्वार से जमजम चौराहा तक: लंबाई 1120 मीटर, चौड़ाई 18 मीटर। बायोमिथेन प्लांट की क्षमता बढ़ेगी, अतिरिक्त जमीन भी देंगे बैठक में एशिया के सबसे बड़े 500 टीडीपी क्षमता वाले बायोमिथेन प्लांट की क्षमता बढ़ाकर 800 टीडीपी करने और इस प्लांट को अत्याधुनिक उपकरणों से लैस करने, प्लांट के लिए अतिरिक्त जमीन देने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। 24 मीटर या इससे चौड़ी सड़क पर बेच सकेंगे टीडीआर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि बैठक में टीडीआर सर्टिफिकेट पोर्टल के माध्यम से जारी करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। मास्टर प्लान की 23 सड़कों सहित अन्य सड़कें जहां नगर निगम ने चौड़ीकरण के लिए निजी जमीन ली है, वहां जमीन मालिकों को ट्रांसफरेबल डेवलमेंट राइट्स (टीडीआर) सर्टिफिटेक जारी किए जाएंगे।

निमाड़ के विकास में आएगी बहार, एनएचएआई ने जारी किया गजट नोटिफिकेशन

 खंडवा महाराष्ट्र और गुजरात को जोड़ने के लिए एनएच 347 प्रस्तावित किया गया है। जिसके निर्माण की शुरुआत मध्यप्रदेश के खंडवा जिले से हो चुकी है। एनएचआई के द्वारा गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। जिसके चलते अब जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत खंडवा से खरगोन के लिए फोरलेन प्रस्तावित है। इसके बाद वहां से गुजरात सीधा जुड़ जाएगा। एनएचएआई ने जारी किया गजट नोटिफिकेशन एनएचएआई (NHAI) की परियोजना क्रियान्वयन ईकाई, खंडवा से जारी पत्र के अनुसार, भूमि अधिग्रहण से संबंधित धारा 3-ए की अधिसूचना को भारत सरकार के राजपत्र में 23 जनवरी 2025 को प्रकाशित कर दिया है। इसी के तहत प्रभावित क्षेत्रों की जमीन को अधिग्रहण के लिए चिन्हित कर लिया गया है। इससे प्रभावित किसानों और भू-स्वामियों को 21 दिन के अंदर आपत्तियां दर्ज कराने का समय दिया गया है। निमाड़ के विकास में आएगी बहार नेशनल हाईवे 347 के चौड़ीकरण से यातायात आर्थिक और सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा। इस कार्य के पूरे होने पर खंडवा, भीकनगांव से लेकर खरगोन के ग्रामीण इलाकों तक बेहतर रोड कनेक्टिविटी हो जाएगी। जिससे परिवहन की सुविधाओं के साथ-साथ औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। प्रक्रिया के पूरा होते ही नेशनल हाईवे का निर्माण शुरु हो जाएगा। इसके लिए स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग को निर्देश दे दिए गए हैं कि जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में किसी प्रकार की कोई बाधा न आए। साथ ही किसानों का ध्यान रखते हुए उचित मुआवजे की व्यवस्था की जाए।

प्रदेश में बिछेगा सड़कों का जाल, NH के लिए नितिन गड़करी ने दी 414 करोड़ रुपए की सौगात

भोपाल  मध्यप्रदेश के विकास को गति प्रदान करने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 414 करोड़ 84 लाख रुपए मंजूर किए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण और उन्नयन के लिए दी गई स्वीकृति के लिए आभार माना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने माना आभार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस स्वीकृति से सड़कों के निर्माण एवं उन्नयन के महत्वपूर्ण कार्य होंगे। निश्चित ही शिवपुरी और अशोक नगर के साथ अन्य जिलों को भी इसका लाभ मिलेगा। मध्यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और नागरिकों को सुगम यातायात सुविधा मिल जाएगी। 414 करोड़ 84 लाख रुपए की दी स्वीकृति उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मध्यप्रदेश के शिवपुरी और अशोक नगर जिलों में चंदेरी, बामोर कलां, अचरोनी और चंदेरी लिंक बायपास सहित राष्ट्रीय राजमार्ग-346 के खंड (कुल लंबाई 55.80 किमी) चंदेरी-पिछोर रोड के पेव्ड शोल्डर के साथ 2-लेन के उन्नयन और निर्माण के लिए 414 करोड़ 84 लाख रुपए की स्वीकृति दी है। राष्ट्रीय राजमार्ग-346 (कुल लंबाई 334.55 किलोमीटर) झारखेड़ा के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-46 आगरा के साथ अपने जंक्शन से शुरू होता है मुंबई रोजड जो बैरसिया (SH-23), विदिशा (NH-86 एक्सटेंशन), कुरवाई (SH-14), मुंगावली, चंदेरी, पिछोर को जोड़ता है और राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर दिनारा में समाप्त होता है। MP-UP Inter-State Connectivity होगी प्रस्तावित परियोजना का विस्तार प्रदेश के शिवपुरी और अशोक नगर जिलों से होकर गुजरता है। इस क्षेत्र में ऐतिहासिक चंदेरी किला और स्थानीय वस्त्र शिल्प कला केंद्र अशोक नगर जिले में स्थित हैं। यह खंड चंदेरी, गोधन, बुढ़ानपुर, बिजरावां, नया गांव, पिपरा अछरौनी, शिवपुरी, हीरापुर, नायगांव और सुजवाहा गांवों से होकर गुजरता है और उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश से अंतर्राज्यीय-कनेक्टिविटी की सुविधा प्रदान करता है। पहले भी साढ़े 3 हजार करोड़ रुपए हुए है मंजूर परियोजना के क्रियान्वयन से इस खंड पर यातायात सघनता कम होगी और सड़क सुरक्षा में भी सुधार होगा। उल्लेखनीय है कि इसके पूर्व राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के निर्माण और सुदृढ़ीकरण के लिए साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई और एक महत्वपूर्ण स्वीकृति भोपाल-कानपुर इकोनामिक कॉरीडोर को फोरलेन में अपग्रेड करने के लिए भी प्रदान की जा चुकी है।

जून 2025 तक पूरा हो जायेगा सड़क निर्माण का पहला चरण, बनेंगी 1284.29 किमी लम्बी 1035 सड़कें

भोपाल गांव-गांव तक पहुंच सड़क प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जन-मन) में केन्द्र सरकार प्रदेश के 24 जिलों में निवासरत 3 विशेष पिछड़ी जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) की सभी बसाहटों तक एप्रोच रोड तैयार कर रही हैं। केन्द्र सरकार द्वारा पीएम जन-मन में प्रदेश की चिन्हित कुल 1295 पीवीटीजी बसाहटों में कुल 1284.29 किलोमीटर लम्बाई वाली 1035 सड़कें मंजूर की गई है। गांव-गांव तक कुल 1050 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाली इन सम्पर्क सड़कों का निर्माण कार्य 5 चरणों में पूरा किया जायेगा। पहला चरण जून 2025 तक पूरा कर लेने का लक्ष्य तय किया गया है। पहले चरण में 235 करोड़ रूपये की लागत से 295 किमी लम्बी 125 सड़कें बनाई जा रही है। इन पर काम तेजी से जारी है। पहले चरण के ही दूसरे भाग में 150.72 करोड़ रूपये की लागत से 180.29 किमी लम्बी 40 सड़कें बनाई जानीं है। इनके लिये निर्माण एजेंसी तय कर दी गई हैं। दूसरे चरण में 112.69 करोड़ रूपये लागत से 152 किमी लम्बी 60 सड़कें बनाई जायेंगी। तीसरे चरण 162 करोड़ रूपये की लागत से 216 किमी लम्बी 86 सड़कें निर्मित की जायेंगी। चौथे चरण में 187.74 करोड़ रूपये से 254 किमी लम्बी 97 सड़कें तथा 5वें चरण में 801 करोड़ रूपये लागत से 1187 किमी लम्बाई वाली 627 सड़कें तैयार की जायेंगी। पीएम जन-मन अभियान में सभी गांव-गांव पहुंच सड़़कें प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ाभागके अधीन निर्माण एजेंसी मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (एमपी आरआरडीए) द्वारा बनाई जायेंगी। निर्माण एजेंसी एमपी आरआरडीए द्वारा पहले चरण में मंजूर हुईं। सभी सड़कें जून 2025 तक निर्मित कर लेने के लिये तेजी से कार्य किया जा रहा है। दूसरे, तीसरे, चौथे एवं 5वें चरण में स्वीकृत सड़कों का निर्माण कार्य भी हर हाल में वर्ष 2025 के अंत तक पूरा कर लेने के लिये निर्माण एजेंसी ने ठोस तैयारी कर ली है।

एमपी में व्हाइट टॉपिंग तकनीक बनेगी, बढ़ेगी सड़कों की उम्र, चार महीनों के अंदर काम खत्म करने का रखा टारगेट

भोपाल  मध्य प्रदेश में जल्द ही सड़कें और मजबूत बनेंगी। पीडब्ल्यूडी खराब सड़कों की समस्या से निपटने के लिए व्हाइट टॉपिंग तकनीक अपना रहा है। इस तकनीक से बनी सड़कें ज़्यादा टिकाऊ होती हैं और लंबे समय तक चलती हैं। शुरुआत में 21 जिलों की 41 सड़कों पर इस तकनीक का इस्तेमाल होगा। काम इसी महीने शुरू हो जाएगा और चार महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे बारिश में सड़कों के उखड़ने की समस्या से निजात मिलेगी। लोक निर्माण विभाग ने खराब सड़कों की बढ़ती शिकायतों के बाद यह कदम उठाया है। बारिश में सड़कें टूटने से लोगों को काफी परेशानी होती है। व्हाइट टॉपिंग तकनीक से बनी सड़कें इस समस्या का समाधान करेंगी। इस तकनीक से करीब 108 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई जाएंगी। प्रोजेक्ट नवंबर अंत तक शुरू होकर अगले चार महीनों में पूरा हो जाएगा। सड़क निर्माण में नई क्रांति व्हाइट टॉपिंग तकनीक सड़क निर्माण में एक नया मोड़ है। यह तकनीक सड़कों को मजबूत और टिकाऊ बनाती है। इससे सड़कों का रखरखाव भी आसान हो जाता है। यह तकनीक लंबे समय में पैसा भी बचाती है। सरकार का यह कदम प्रदेश की सड़कों की दशा सुधारने में मददगार साबित होगा। इससे लोगों को आवागमन में सुविधा होगी और राज्य के विकास को गति मिलेगी। यह तकनीक भविष्य में सड़क निर्माण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। यह पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है। यह सड़कों को गर्मी से बचाती है. इससे शहरों का तापमान भी कम रहता है। व्हाइट टॉपिंग तकनीक से बेहतर सड़कें और बेहतर भविष्य की उम्मीद है। लोगों को मिलेगा बेहतर यात्रा का अनुभव भोपाल में वल्लभ भवन मार्ग और सीएम हाउस मार्ग समेत 14 सड़कों को चिह्नित किया गया है। PWD ने 15 अन्य जिलों में भी एक-एक सड़क पर इस तकनीक का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। इन जिलों में इंदौर, नर्मदापुरम, नीमच, बैतूल से लेकर मुरैना, रतलाम, रायसेन, रीवा, सतना,आगर मालवा, उमरिया, खंडवा, गुना, छतरपुर, देवास और हरदा शामिल हैं। इससे इन जिलों की सड़कों की हालत में सुधार होगा। लोगों को बेहतर यात्रा का अनुभव मिलेगा। जानें क्या है व्हाइट टॉपिंग तकनीक व्हाइट टॉपिंग तकनीक में पुरानी सड़क की ऊपरी परत हटाकर कंक्रीट की मोटी परत बिछाई जाती है। इसमें M-40 ग्रेड सीमेंट और फाइबर बुरादा का इस्तेमाल होता है। 6 से 8 इंच मोटी यह परत सड़क को मजबूत बनाती है। भारी ट्रैफ़िक और खराब मौसम का भी इस पर कम असर होता है। इससे सड़क की उम्र 20 से 25 साल तक बढ़ जाती है। यह तकनीक पर्यावरण के अनुकूल भी है। कंक्रीट की सतह डामर से ज़्यादा ठंडी रहती है। इससे रखरखाव का खर्च भी कम आता है।

पायलट प्रोजेक्ट के तहत 21 जिलों में 41 सड़कें और नई तकनीक से बनेंगी

 भोपाल मध्य प्रदेश में सड़कों की गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग ने एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया है। इसके तहत राज्य के 21 जिलों में 41 मार्गों का निर्माण नई तकनीक से होगा। इन मार्गों की कुल लंबाई 109.31 किलोमीटर है और इन्हें चार महीने में पूरा किया जाएगा। मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग ने अब सड़क निर्माण की नई तकनीक व्हाइट टॉपिंग को अपनाने का निर्णय लिया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस दिशा में पायलट प्रोजेक्ट के तहत 21 जिलों में चयनित 41 सड़कों पर इस तकनीक को लागू किया जाएगा। इन मार्गों की कुल लंबाई 109.31 किलोमीटर है। योजना को नवंबर के अंत तक शुरू करने की तैयारी है और इसे अगले 4 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना के तहत सबसे अधिक 14 सड़कों पर कार्य भोपाल में किया जाएगा। अन्य जिलों में इंदौर और ग्वालियर में तीन-तीन सड़कें, बुरहानपुर, मंदसौर और सागर में दो-दो सड़कें, आगर मालवा, उमरिया, खंडवा, गुना, छतरपुर, देवास, नर्मदापुरम, नीमच, बैतूल, मुरैना, रतलाम, रायसेन, रीवा, सतना और हरदा में एक-एक सड़क पर वाइट टॉपिंग तकनीक लागू की जाएगी। क्या है वाइट टॉपिंग तकनीक वाइट टॉपिंग सड़क निर्माण की एक आधुनिक तकनीक है। इसमें पुरानी सड़कों पर कंक्रीट की मोटी परत चढ़ाई जाती है। यह प्रक्रिया सड़कों को न केवल मजबूत और टिकाऊ बनाती है, बल्कि उनकी आयु भी 20 से 25 साल तक बढ़ा देती है। इस तकनीक में सबसे पहले पुरानी सड़क की सतह को साफ किया जाता है। उसके बाद 6 से 8 इंच मोटी कंक्रीट की परत डाली जाती है, जो भारी यातायात और खराब मौसम का सामना करने में सक्षम होती है।

भारतीय सड़क कांग्रेस और लोक निर्माण विभाग के सहयोग से शिविर का आयोजन

भोपाल सड़क और पुल निर्माण के क्षेत्र में उभरती नवीनतम प्रवृत्तियों और तकनीकों पर दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन रवीन्द्र भवन भोपाल में 19 और 20 अक्टूबर को किया जा रहा है। इसमें सड़क और पुल निर्माण की नवीनतम तकनीकों, सामग्रियों और अनुबंध निष्पादन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञ अपने अनुभव और सुझाव साझा करेंगे। कार्यक्रम का आयोजन भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) और मध्यप्रदेश शासन के लोक निर्माण विभाग (PWD) के सहयोग से होगा। सेमिनार के पहले दिन 19 अक्टूबर को उद्घाटन-सत्र में केन्द्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गड़करी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, लोकनिर्माण मंत्री राकेश सिंह सहित अन्य विशिष्टजन उपस्थित रहेंगे। उद्घाटन सत्र के बाद विभिन्न तकनीकी-सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें देशभर से आए हुए विशेषज्ञ नई तकनीकों, निर्माण सामग्रियों और ईपीसी(EPC इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन)) अनुबंध निष्पादन की चुनौतियों पर अपने विचार साझा करेंगे। पहले दिन की प्रमुख चर्चाओं में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत नई तकनीकों का कार्यान्वयन, पुल निर्माण में नई मशीनरी का उपयोग, और सड़क निर्माण में उपयोग होने वाली नई सामग्रियों पर फोकस रहेगा। सड़क सुरक्षा, परियोजनाओं की मॉनिटरिंग के लिए आईटी तकनीकों का उपयोग, और सीमांत सामग्रियों के उपयोग पर भी गहन मंथन किया जाएगा। दूसरे दिन 20 अक्टूबर को ईपीसी (EPC इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन)) अनुबंधों की संरचना शेड्यूलिंग, अनुबंध निष्पादन में ठेकेदारों की भूमिका और सहायक अभियंताओं की भूमिका पर विस्तृत चर्चा होगी। इसमें अनुबंधों से जुड़े विवादों और चुनौतियों के समाधान पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। समापन सत्र में विभिन्न विशेषज्ञ और प्रतिनिधि पैनल चर्चा के माध्यम से सड़क और पुल निर्माण में नई तकनीकों के उपयोग पर अपने विचार रखेंगे। सेमिनार का उद्देश्य प्रदेश में सड़क और पुल निर्माण की गुणवत्ता को सुधारने और नवीनतम तकनीकों के माध्यम से समयबद्ध और टिकाऊ अवसंरचना का विकास सुनिश्चित करना है। सरकारी और निजी क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर अनुभवों और नवाचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा, जिससे प्रदेश की अवसंरचना परियोजनाओं को नई दिशा और मजबूती मिल सके। इस दो दिवसीय आयोजन से मध्यप्रदेश के अवसंरचना विकास को नई ऊर्जा मिलेगी और यह आयोजन राज्य की निर्माण परियोजनाओं में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने में सहायक साबित होगा।  

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