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भारत को दुनिया का सबसे प्राचीन देश,भारत की भूमिका बड़े भाई की जैसी : मोहन भागवत

जयपुर जयपुर में हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि शक्ति हो तो दुनिया प्रेम की भाषा भी सुनती है. उन्होंने अपने भाषण में भारत की प्राचीन संस्कृति और त्याग की परंपरा को याद दिलाया. उन्होंने बताया कि भारत के इतिहास में भगवान श्री राम से लेकर भामाशाह जैसे महान व्यक्तित्वों ने त्याग और सेवा की मिसाल पेश की है. मोहन भागवत ने कहा कि विश्व को धर्म सिखाना भारत का कर्तव्य है. धर्म के माध्यम से ही मानवता की उन्नति संभव है. उन्होंने विशेष रूप से हिंदू धर्म की भूमिका को महत्वपूर्ण माना और कहा कि विश्व कल्याण हमारा प्रमुख धर्म है.  उन्होंने भारत को दुनिया का सबसे प्राचीन देश बताते हुए कहा कि भारत की भूमिका बड़े भाई की जैसी है. विश्व में शांति और सौहार्द कायम करने की दिशा में प्रायसरत! मोहन भागवत का कहना है कि भारत विश्व में शांति और सौहार्द कायम करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है. उन्होंने कहा कि भारत किसी से द्वेष नहीं रखता लेकिन जब तक आपके पास शक्ति नहीं होगी, तब तक विश्व प्रेम और मंगल की भाषा नहीं समझेगा. इसलिए उनके मुताबिक, विश्व कल्याण के लिए शक्ति का होना आवश्यक है, और ये कि हमारी ताकत विश्व ने देखी है. शक्ति ही एक माध्यम है! मोहन भागवत ने यह भी बताया कि शक्ति ही वह माध्यम है जिससे विश्व में भारत अपनी बात प्रभावी ढंग से रख सकता है और वह पहले भी कह चुके हैं कि अपनी सांस्कृतिक विरासत का प्रसार भी तभी किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि यह स्वभाव विश्व का है, इसे बदला नहीं जा सकता. इसके साथ ही उन्होंने संत समाज की भूमिका की भी प्रशंसा की, और कहा कि ऋषि परंपरा का निर्वहन करते हुए संस्कृति और धर्म की रक्षा कर रहे हैं.  

पाक में आतंकियों के ढॉंचा एवं सहयोगी तंत्र पर की जा रही सैनिक कार्रवाई देश की सुरक्षा के लिए आवश्यक : मोहन भागवत

नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बड़ा बयान दिया है। आरएसएस ने मोहन भागवत के हवाले से कहा कि पहलगाम की कायरतापूर्ण आतंकवादी घटना के पश्चात पाक प्रायोजित आतंकवादियों एवं उनके समर्थक पारितंत्र पर की जा रही निर्णायक कार्रवाई “ऑपरेशन सिंदूर” के लिए भारत सरकार के नेतृत्व और सैन्यबलों का हार्दिक अभिनंदन। हिंदू यात्रियों के नृशंस हत्याकांड में आहत परिवारों को एवं समस्त देश को न्याय दिलाने हेतु हो रही इस कार्रवाई ने समूचे देश के स्वाभिमान एवं हिम्मत को बढ़ाया है। भागवत ने कहा कि हमारा यह भी मानना है कि पाकिस्तान में आतंकियों, उनका ढॉंचा एवं सहयोगी तंत्र पर की जा रही सैनिक कार्रवाई देश की सुरक्षा के लिए आवश्यक एवं अपरिहार्य कदम है। राष्ट्रीय संकट की इस घड़ी में संपूर्ण देश तन-मन-धन से देश की सरकार एवं सैन्य बलों के साथ खड़ा है। पाकिस्तानी सेना द्वारा भारत की सीमा पर धार्मिक स्थलों एवं नागरिक बस्ती क्षेत्र पर किए जा रहे हमलों की हम निंदा करते हैं और जो इन हमलों का शिकार हुए, उनके परिवारों के प्रति हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त करते हैं। देश का स्वाभिमान, हिम्मत संघ के संदेश में कहा गया है कि पहलगाम की कायरतापूर्ण आतंकवादी घटना के पश्चात पाक प्रायोजित आतंकवादियों एवं उनके समर्थक पारितंत्र पर की जा रही निर्णायक कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के लिए भारत सरकार के नेतृत्व और सैन्यबलों का हार्दिक अभिनंदन। हिंदू यात्रियों के नृशंस हत्याकांड में आहत परिवारों को एवं समस्त देश को न्याय दिलाने हेतु हो रही इस कार्रवाई ने समूचे देश के स्वाभिमान एवं हिम्मत को बढ़ाया है। पाकिस्तानी गोलाबारी की निंदा संघ ने आगे कहा कि हमारा यह भी मानना है कि पाकिस्तान में आतंकियों, उनका ढॉंचा एवं सहयोगी तंत्र पर की जा रही सैनिक कार्रवाई देश की सुरक्षा के लिए आवश्यक एवं अपरिहार्य कदम है। राष्ट्रीय संकट की इस घड़ी में संपूर्ण देश तन-मन-धन से देश की सरकार एवं सैन्य बलों के साथ खड़ा है। आरएसएस ने आगे कहा कि पाकिस्तानी सेना की तरफ से भारत की सीमा पर धार्मिक स्थलों एवं नागरिक बस्ती क्षेत्र पर किए जा रहे हमलों की हम निंदा करते हैं और जो इन हमलों का शिकार हुए, उनके परिवारों के प्रति हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त करते हैं। सूचनाओं का पालन करने का आह्वान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस चुनौतीपूर्ण अवसर पर समस्त देशवासियों से आह्वान करता है कि शासन एवं प्रशासन द्वारा दी जा रही सभी सूचनाओं का पूर्णतः अनुपालन सुनिश्चित करे। इसके साथ-साथ इस अवसर पर हम सबको अपने नागरिक कर्तव्य का निर्वहन करते हुए यह भी सावधानी रखनी है कि राष्ट्र विरोधी शक्तियों के सामाजिक एकता एवं समरसता को भंग करने के किसी भी षड्यंत्र को सफल न होने दें। संघ ने लिखा कि समस्त देशवासियों से अनुरोध है कि अपनी देशभक्ति का परिचय देते हुए सेना एवं नागरी प्रशासन के लिए जहां भी, जैसी भी आवश्यकता हो, हरसंभव सहयोग के लिए तत्पर रहे और राष्ट्रीय एकता तथा सुरक्षा को बनाए रखने के सभी प्रयासों को बल प्रदान करे। अनिल कुमार उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस चुनौतीपूर्ण अवसर पर समस्त देशवासियों से आह्वान करता है कि शासन एवं प्रशासन द्वारा दी जा रही सभी सूचनाओं का पूर्णतः अनुपालन सुनिश्चित करे। इसके साथ-साथ इस अवसर पर हम सबको अपने नागरिक कर्तव्य का निर्वहन करते हुए यह भी सावधानी रखनी है कि राष्ट्र विरोधी शक्तियों के सामाजिक एकता एवं समरसता को भंग करने के किसी भी षड्यंत्र को सफल न होने दें। समस्त देशवासियों से अनुरोध है कि अपनी देशभक्ति का परिचय देते हुए सेना एवं नागरी प्रशासन के लिए जहाँ भी, जैसी भी आवश्यकता हो, हरसंभव सहयोग के लिए तत्पर रहे और राष्ट्रीय एकता तथा सुरक्षा को बनाए रखने के सभी प्रयासों को बल प्रदान करे।

भाजपा ने बाबा साहब के विचारों का कभी पालन नहीं किया- दिग्विजय सिहं

इंदौर कांग्रेस के दिग्गज नेता व पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह आज अंबेडकर जयंती पर इंदौर पहुंचे। जहां उन्होंने मीडिया से चर्चा की और कई मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। दिग्विजय सिंह ने वक्फ बिल के विरोध में पश्चिम बंगाल में हो रही हिंसा के लिए आरएसएस को जिम्मेदार ठहराया। वहीं गद्दार पोस्टर को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। वहीं बाबा साहेब अंबेडकर जयंती मनाने पर भाजपा को निशाने पर लिया। पश्चिम बंगाल में हो रही हिंसा के लिए बीजेपी जिम्मेदार दिग्विजय सिंह ने पश्चिम बंगाल में हो रही हिंसा के लिए बीजेपी और संघ को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि ऐसे कुछ संगठन जो नफरत फैलाते हैं जो दंगे फसाद करवाते हैं। उन्हें क्यों इजाजत दी जाती है, जुलूस के रूप में डीजे लगाकर मस्जिद के सामने से निकलने की। ऐसे संगठन को प्रशासन मंजूरी क्यों देता है। डबल इंजन सरकार की मानसिकता है नफरत फैलाकर दंगे करवाकर राजनीतिक रोटी सेकना। भाजपा और संघ का धर्म से कोई लेना देना नहीं है। नफरत फैलाकर दंगे फसाद करवाकर उसके आधार पर राजनीति रोटी सेकना बीजेपी और संघ का असली धर्म है। भाजपा ने बाबा साहब के विचारों का कभी पालन नहीं किया- दिग्विजय सिहं दिग्विजय सिंह ने बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती पर मीडिया से की चर्चा करते हुए कहा कि मुझे इस बात की प्रशंसा है बीजेपी और संघ आज बाबा साहब आंबेडकर को सम्मान के नजरों से देख रहे हैं। संघ ने तिरंगा जलाया संविधान का विरोध किया। हमेशा बीजेपी ने नफरत के अंदाज में राजनीति की है। बाबा साहब के विचारों का पालन बीजेपी ने कभी नहीं किया। दलितों की जमीन दबंग छीन रहे हैं, बीजेपी मौन है।

हमें दूसरों की पूजा के तरीकों से कोई विरोध नहीं है, जब तक कि यह इस देश की संस्कृति के खिलाफ न हो- दत्तात्रेय होसबाले

नई दिल्ली  भारत में नए मंदिर-मस्जिद विवाद तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसा कोई सप्ताह नहीं जाता जब किसी नए शहर में मंदिर के नीचे मस्जिद होने का दावा सामने न आए और तनाव बढ़ जाए। हालात इतने नाजुक हो गए हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) भी इससे चिंतित दिखाई दे रहा है। RSS ने पहले अयोध्या, मथुरा और काशी जैसे बड़े मंदिर-मस्जिद विवादों में ही हिंदू पक्ष के दावों का समर्थन किया था। RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कई बार मस्जिदों के नीचे मंदिरों की खोज को रोकने की अपील की है। अब संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भी इसी तरह की चिंता जताई है। होसबाले ने पूछा है कि अगर हम 30,000 मस्जिदों को खोदना शुरू कर दें, यह दावा करते हुए कि वे मंदिरों को तोड़कर बनाई गई हैं, तो भारत किस दिशा में जाएगा? उन्होंने RSS की कन्नड़ साप्ताहिक पत्रिका ‘विक्रमा’ को दिए एक इंटरव्यू में पूछा, ‘क्या इससे समाज में और अधिक शत्रुता और नाराजगी नहीं पैदा होगी? क्या हमें एक समाज के रूप में आगे बढ़ना चाहिए या अतीत में फंसे रहना चाहिए? कथित तौर पर नष्ट किए गए मंदिरों को पुनः प्राप्त करने के लिए हमें इतिहास में कितना पीछे जाना चाहिए?’ राम मंदिर आंदोलन पर भी बोले होसबाले RSS के शताब्दी वर्ष के मौके पर हुए इस इंटरव्यू में होसबाले ने कई विषयों पर संगठन के विचार स्पष्ट किए। इनमें से कई विचार भारतीय जनता पार्टी (BJP) और संघ से जुड़े अन्य संगठनों के विचारों से मेल नहीं खाते हैं। मस्जिदों के नीचे मंदिरों की खोज पर होसबाले ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन RSS ने शुरू नहीं किया था। RSS के स्वयंसेवक सांस्कृतिक महत्व के कारण इस आंदोलन में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा, ‘उस समय, विश्व हिंदू परिषद और धार्मिक नेताओं ने तीन मंदिरों का उल्लेख किया था। अगर कुछ RSS स्वयंसेवक इन तीन मंदिरों को फिर से प्राप्त करने के प्रयासों में शामिल होना चाहते थे, तो RSS ने इसका विरोध नहीं किया। लेकिन अब स्थिति बहुत अलग है।’ संघ को भी सता रही दुश्मनी और नफरत की चिंता उन्होंने पूछा, ‘देश में 30,000 मस्जिदों के नीचे मंदिरों के दावे हैं। अगर हम इतिहास को पलटने के लिए उन सभी को खोदना शुरू कर दें, तो क्या इससे समाज में और अधिक दुश्मनी और नफरत नहीं पैदा होगी?’ होसबाले ने कहा कि मस्जिदों के नीचे मंदिरों की खोज करने से हम अस्पृश्यता को खत्म करने, युवाओं में जीवन मूल्यों को स्थापित करने, संस्कृति की रक्षा करने और भाषाओं को संरक्षित करने जैसे अधिक महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान देने से वंचित रह जाएंगे। ‘हिंदू धर्म की जड़ों को जगाने से दूर होगी चिंता’ उन्होंने कहा, ‘जब मंदिरों की बात आती है, तो क्या किसी इमारत में जो अब एक मस्जिद है, कोई दिव्यता है? क्या हमें इमारत में हिंदू धर्म की तलाश करनी चाहिए, या हमें उन लोगों में हिंदू धर्म को जगाना चाहिए जो खुद को हिंदू नहीं मानते हैं? इमारतों में हिंदू धर्म के अवशेषों की खोज करने के बजाय, अगर हम समाज में हिंदू धर्म की जड़ों को जगाते हैं, तो मस्जिद का मुद्दा अपने आप हल हो जाएगा।’ भारतीय मुसलमानों के लिए संघ का संदेश होसबाले ने दावा किया कि भारत में लोग एक ही नस्ल के हैं और हिंदू धर्म अनिवार्य रूप से मानवतावाद है। उन्होंने कहा, ‘भारतीय मुसलमानों ने अपनी धार्मिक प्रथाओं को बदल दिया होगा, लेकिन उन्हें अपनी राष्ट्रीय और सांस्कृतिक जड़ों को नहीं छोड़ना चाहिए। यह RSS का रुख है।’ हालांकि, उन्होंने कहा कि मुसलमानों या ईसाइयों को हिंदू होने के लिए अपना धर्म छोड़ने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हमें दूसरों की पूजा के तरीकों से कोई विरोध नहीं है, जब तक कि यह इस देश की संस्कृति के खिलाफ न हो।’ होसबाले ने कहा कि RSS ने हमेशा शिक्षा के माध्यम के रूप में अपनी मातृभाषा को बढ़ावा दिया है। ‘हम मानते हैं कि बच्चों के लिए सीखना आसान और अधिक स्वाभाविक है जब उन्हें उनकी मातृभाषा में पढ़ाया जा रहा हो।’ उन्होंने कहा कि शिक्षा में क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने को न केवल एक व्यक्तिगत स्वतंत्रता के रूप में देखा जाना चाहिए, बल्कि संस्कृतियों को संरक्षित करने के साधन के रूप में भी देखा जाना चाहिए। ‘अंग्रेजी के प्रति आकर्षण समझ में आता है। लेकिन हमें एक स्थायी समाधान की आवश्यकता है।’ भाषा विवाद पर भी बोले संघ के नेता होसबाले ने ऐसी आर्थिक योजनाएं बनाने का भी आह्वान किया जो क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षित लोगों के लिए नौकरियां प्रदान करें। उन्होंने कहा, ‘बुजुर्गों, न्यायाधीशों, शिक्षा विशेषज्ञों, लेखकों, राजनेताओं और धार्मिक नेताओं को इस पर सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए। तीन-भाषा फॉर्मूले का उचित कार्यान्वयन 95% समस्या का समाधान कर सकता है। समस्याएं तब पैदा होती हैं जब भाषा का राजनीतिकरण किया जाता है। हमारे देश ने हजारों वर्षों से भाषाई विविधता के भीतर एकता बनाए रखी है।’ सियासी दलों को लेकर संघ के नेता ने कही बड़ी बात होसबाले ने कहा कि यह गलत है कि किसी विशेष राजनीतिक समूह से संबंधित लोगों को देशभक्त के रूप में पहचाना जाए और दूसरों को गद्दार कहा जाए। ‘देशभक्ति और राष्ट्रवाद सामान्य लक्षण हैं।’ उन्होंने कहा, ‘देश में कई राजनीतिक दलों का अस्तित्व इसकी एकता में बाधा नहीं है। हालांकि, राष्ट्रवादी दृष्टिकोण से, हम सभी को कुछ सार्वभौमिक सिद्धांतों का पालन करना चाहिए।’ होसबाले से पूछा गया कि क्या RSS का केवल एक राजनीतिक दल का समर्थन करना एक समस्या है। उन्होंने कहा कि यह मानना गलत है कि RSS केवल एक राजनीतिक दल का समर्थन करता है। उन्होंने कहा, ‘स्वयंसेवक किसी भी सामाजिक या राजनीतिक व्यवस्था में काम करने के लिए स्वतंत्र हैं। स्वयंसेवक स्वाभाविक रूप से उन दलों के साथ जुड़ते हैं जिनके RSS के साथ संबंध हैं।’ उन्होंने कहा कि ‘अन्य दलों को स्वयंसेवकों को RSS और उनकी पार्टी दोनों का हिस्सा बनने की अनुमति देनी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि RSS के स्वयंसेवकों के अल्पसंख्यकों, जाति, एकता, धर्मांतरण और अनुच्छेद 370 जैसे मुद्दों पर कुछ विश्वास हैं, जो उनके लिए ऐसी पार्टी में काम करना मुश्किल बना देंगे जो इन सिद्धांतों के खिलाफ है। ‘जबकि कई राजनीतिक दलों ने खुले तौर पर RSS … Read more

आरएसएस महासचिव ने मंदिर मुद्दों पर स्वयंसेवकों का समर्थन किया, मथुरा और काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी विवाद में शामिल हों RSS सदस्य

बेंगलुरु राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का बड़ा बया सामने आई है। महासचिव दत्तात्रेय होसबले ने कहा कि अगर आरएसएस के सदस्य मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी विवाद से जुड़े कामों में हिस्सा लेना चाहें, तो संगठन को कोई परेशानी नहीं है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि सभी मस्जिदों को वापस लेने की बड़ी कोशिशें नहीं होनी चाहिए। इससे समाज में झगड़ा हो सकता है। होसबले ने कन्नड़ में आरएसएस की एक पत्रिका ‘विक्रमा’ से बात करते हुए कहा, ‘उस समय (1984), वी.एच.पी., साधु-संतों ने तीन मंदिरों की बात की थी। अगर हमारे स्वयंसेवक इन तीन मंदिरों (अयोध्या में राम जन्मभूमि सहित) के लिए मिलकर काम करना चाहते हैं, तो हम उन्हें नहीं रोकेंगे।’ ‘धर्म परिवर्तन और लव जिहाद चिंता’ होसबले ने माना कि गोहत्या, लव जिहाद और धर्म परिवर्तन जैसी चिंताएं अभी भी हैं। लेकिन उन्होंने कहा कि अब हमें दूसरी ज़रूरी चीज़ों पर ध्यान देना चाहिए। जैसे कि छुआछूत को खत्म करना, युवाओं में अपनी संस्कृति को बचाना और अपनी भाषाओं को सुरक्षित रखना। भाषा विवाद पर क्या बोले होसबले भाषा के बारे में बात करते हुए होसबले ने तीन भाषाओं को सीखने के तरीके को सही बताया। उन्होंने कहा कि इससे भाषा से जुड़े 95% झगड़े खत्म हो सकते हैं। उन्होंने भारतीय भाषाओं को बचाने और इन भाषाओं में पढ़े लोगों को नौकरी के अवसर देने की बात कही। तीन भाषा नीति का समर्थन होसबाले ने भारतीय भाषाओं के संरक्षण की भी बात कही है। उन्होंने कहा, ‘हमारी सभी भाषाओं में बड़े स्तर पर साहित्यिक काम हुआ है।’ उन्होंने कहा, ‘अगर भविष्य की पीढ़ियां इन भाषाओं को नहीं पढ़ेंगी और लिखेंगी, तो वे कैसे आगे बढ़ेंगी? अंग्रेजी के प्रति लगाव मुख्य रूप से व्यवहारिक कारणों से है…। एक और अहम पहलू ऐसा आर्थिक मॉडल बनाना है, जहां भारतीय भाषाओं में पढ़े लोगों को रोजगार मिल सके।’ उन्होंने कहा, ‘वरिष्ठ बुद्धिजीवियों, न्यायाधीशों, शिक्षकों, लेखकों और राजनीतिक और धार्मिक नेताओं को इस मामले में प्रगतिशील रवैया अपनाना चाहिए।’ हिंदी पर राजनीति पर क्या बोले अखबार के अनुसार, उन्होंने कहा, ‘इतने बड़े देश में अच्छा होगा कि सभी संस्कृत सीख लें। डॉक्टर आंबेडकर ने भी इसकी वकालत की थी। कई लोगों की बोली जाने वाली भाषा सीखने में कोई परेशानी नहीं है। जिन लोगों को रोजगार चाहिए, उन्हें उस राज्य की भाषा सीखनी चाहिए। परेशानी तब होती है, जब राजनीति और विपक्ष के नाम पर इसे थोपे जाने का मुद्दा बना दिया जाता है। क्या भाषा विविधता के बाद भी भारत एकजुट हजारों सालों से एकजुट नहीं है? ऐसा लग रहा है कि हमने भाषा को आज परेशानी बना दिया है।’ ‘अंग्रेजी का क्रेज’ उन्होंने कहा कि हमारी सभी भाषाओं में बहुत अच्छी किताबें लिखी गई हैं। उन्होंने चिंता जताई कि अगर आने वाली पीढ़ी इन भाषाओं में पढ़ेगी-लिखेगी नहीं, तो ये भाषाएं कैसे बचेंगी? अंग्रेजी का क्रेज इसलिए है क्योंकि इससे काम मिलता है… एक और ज़रूरी बात ये है कि हमें ऐसा सिस्टम बनाना होगा जहां भारतीय भाषाओं में पढ़े लोगों को अच्छी नौकरियां मिलें। बड़े-बड़े विद्वानों, जजों, शिक्षाविदों, लेखकों और नेताओं को इस बारे में सोचना होगा। हिंदी पर क्या बोले संघ महासचिव होसबले न ये भी कहा कि हिंदी बहुत लोग बोलते हैं, लेकिन कुछ लोग इसका विरोध करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ये उन पर थोपी जा रही है। इतने बड़े देश में ये बहुत अच्छा होगा अगर सब लोग संस्कृत सीखें। डॉ. आंबेडकर ने भी ऐसा कहा था। अगर कोई ऐसी भाषा सीखता है जो बहुत लोग बोलते हैं, तो इसमें कोई बुराई नहीं है। आज हर सैनिक हिंदी सीखता है। जिन्हें नौकरी चाहिए वो उस राज्य की भाषा सीखते हैं। दिक्कत तब हुई जब इसे राजनीति की वजह से थोपने की बात कही गई। क्या भारत हज़ारों सालों से भाषाओं की विविधता के बावजूद एक नहीं रहा? ऐसा लगता है कि हमने भाषा को आज एक समस्या बना दिया है।

संघ के बिना BJP की कामयाबी नामुमकिन नहीं, बीजेपी-RSS ने बना लिया 2029 का भी प्लान!

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी राजनीतिक सफलता का श्रेय आरएसएस को हमेशा ही देते रहे हैं। हालांकि 11 साल प्रधानमंत्री रहने के बाद वह रविवार को पहली बार आरएसएस के मुख्यालय पहुंचे। पीएम मोदी इससे पहले 2013 में लोकसभा चुनाव की बैठक को लेकर नागपुर आए थे। पीएम मोदी ने आरएसएस के संस्थापक डॉ. केबी हेडगेवार के स्मारक पर जाकर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने आरएसएस की तारीफ खरते हुए कहा कि यह एक संगठन नहीं बल्कि राजनीति की आत्मा है। उन्होंने कहा कि संघ एक अमर संस्कृति के वट वृक्ष की तरह है जो कि आधुनिकता से भी ओतप्रोत है। आरएसएस कार्यकर्ता के तौर पर ही शुरू हुआ राजनीतिक सफर पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय चेताना का जो बीज 100 साल पहले बोया गया था वह एक वट वृक्ष का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि आरएसएस के कार्यकर्ता पूरे देश में तन-मन से लोगों की सेवा कर रहे हैं। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सफर 1972 में आरएसएस प्रचारक के तौर पर ही शुरू हुआ था। उनकी सक्रियता के चलते ही उन्हें 2001 में गुजरात का मुख्यमंत्री बना दिया गया था। आरएसएस के एक सीनियर पदाधिकारी ने कहा, इसमें कोई संदेह नहीं है कि बीजेपी का वैचारिक मेंटॉर आरएसएस है। इसके बावजूद बीजेपी ने आरएसएस से दूरी ही दिखाने की कोशिश की। सरकार और संघ का काम पूरी तरह अलग होता है। कई नेता इस बात को स्वीकार करते हैं कि उनका भविष्य आरएसएस की वजह से ही तय हो पाया है। फिर भी मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि आरएसएस कभी सरकार के कामकाज में कोई दखल नहीं देता है और ना ही इसका कोई राजनीतिक अजेंडा है। आरएसएस से अनबन की भी थी चर्चा 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान यह भी चर्चा थी की आरएसएस और बीजेपी की बन नहीं रही है। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने यहां तक कहा था कि बीजेपी अब आत्मनिर्भर है। वहीं जब बीजेपी को हिंदी बेल्ट में सीटों का नुकसान हुआ तो आरएसएस प्रमुख ने भी कई बार इशारों-इशारों में खुले मंच पर नसीहत दे डाली। हालांकि लोकसभा में झटके के बाद बीजेपी ने फिर आरएसएस को अहमियत देनी शुरू की और इसका प्रभाव हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में दिखाई दिया। हालांकि आरएसएस नेता एचवी शेषाद्री ने कहा कि यह कोई डिबेट ही नहीं थी। जो लोग बीजेपी और आरएसएस दोनों को नहीं जानते हैं वही अनबन की अफवाह उड़ा रहे थे। इसके अलावा दो अहम कार्यक्रम भी आने वाले दिनों में होने वाले हैं। एक है बेंगलुरु में होने वाली बीजेपी कार्यकारिणी की बैठक और दूसरी आरएसएस का शताब्दी वर्ष समारोह। ऐसे में दोनों ही संगठन अपने संबंधों को नई ऊंचाई देने में ललगे हैं। अगले महीने बेंगलुरु में होने वाली कार्यकारिणी की बैठक में बीजेपी नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का भी ऐलान कर सकती है। ऐसे में पीएम मोदी का आरएसएस मुख्यालय जाना अहम मानाजा रहा है। दो प्रधानमंत्रियों के दौरे के बीच कितना कुछ बदल चुका है? पच्चीस साल के लंबे अंतराल के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के आंगन में भारत के दूसरे प्रधानमंत्री की आमद हुई है. अटल बिहारी वाजपेयी ने बतौर प्रधानमंत्री संघ के दफ्तर का दौरा 27 अगस्त 2000 को किया था. ये संघ की स्थापना का 75वां साल था. अब 25 वर्ष बाद RSS की यात्रा के शताब्दी वर्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागपुर संघ मुख्यालय की यात्रा की है. 11 साल पहले प्रधानमंत्री बनने के बाद नागपुर में आरएसएस मुख्यालय की अपनी पहली यात्रा में नरेंद्र मोदी ने संघ को भारत की अमर संस्कृति का ‘वट वृक्ष’ बताया. आरएसएस के एक पदाधिकारी ने बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री के रूप में अपने तीसरे कार्यकाल के दौरान साल 2000 में यहां का दौरा किया था. संयोग है कि पीएम मोदी जब आरएसएस के दफ्तर पहुंचे हैं तो ये उनका तीसरा कार्यकाल है. संघ भारतीय संस्कृति का अक्षय वटवृक्ष- मोदी प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारी संस्कृति को नष्ट करने के प्रयास किए गए भारतीय संस्कृति की चेतना कभी समाप्त नहीं हुई. स्वतंत्रता संग्राम से पूर्व डॉ.हेडगेवार और गुरुजी गोलवलकर ने भी इस राष्ट्रीय चेतना को बढ़ावा दिया. उन्होंने 100 वर्ष पहले जिस वटवृक्ष का बीजारोपण किया था, वह आज विशाल रूप में फैल चुका है. नरेंद्र मोदी ने कहा कि संघ का यह वटवृक्ष आदर्श और सिद्धांतों की वजह से टिक पाया है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत की राष्ट्रीय संस्कृति का कभी न समाप्त होने वाला अक्षय वटवृक्ष है. अब एक चौथाई सदी पहले उस मुलाकात की बात करते हैं जो तब हुई जब बतौर प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी संघ कार्यालय नागपुर पहुंचे थे. RSS और भारतीय जनता पार्टी के रिश्ते को वैचारिक और संगठनात्मक रूप से गहरा माना जाता है, जो समय के साथ विकसित हुआ है 10 मार्च, 2000 को के एस सुदर्शन संघ के प्रमुख बने तो देश में पीएम की कुर्सी पर वो व्यक्ति था जो कभी स्वयंसेवक रहा था. लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी  के जमाने में स्वदेशी जागरण मंच, विहिप, भारतीय मजदूर संघ, किसान संघ जैसे संघ के अनुषांगिक संगठनों से कई मौकों पर टकराव होता रहा. हालांकि संघ के प्रति वाजपेयी की निष्ठा पर कोई सवाल ही नहीं था. 1995 में ऑर्गनाइजर में लिखे एक लेख में संघ को अपनी आत्मा बताया था. उन्होंने लिखा था, “आरएसएस के साथ लंबे जुड़ाव का सीधा कारण है कि मैं संघ को पसंद करता हूं. मैं उसकी विचारधारा पसंद करता हूं और सबसे बड़ी बात, लोगों के प्रति और एक दूसरे के प्रति आरएसएस का दृष्टिकोण मुझे भाता है और यह बस आरएसएस में मिलता है.” अटल के प्रधानमंत्री बनने के बाद एक दौर ऐसा भी आया, जब उनके संघ से रिश्ते कुछ असहज हो चले थे. उस वक्त संघ और सहयोगी संगठनों के नेता व्यक्तिगत हमले करने से भी नहीं चूकते थे. जबकि संघ में व्यक्तिगत नहीं बल्कि नीतिगत आलोचना की परंपरा रही. संघ विचारक दिलीप देवधर के अनुसार केएस सुदर्शन अपने विचारों को लेकर बहुत दृढ़ रहते थे. यह अटल बिहारी वाजपेयी जानते थे. यही वजह रहा कि भले ही रज्जू भईया ने उन्हें 1998 में उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था, मगर उन्हें सर संघचालक का … Read more

पीएम आज 30 मार्च को संघ के संस्थापक हेडगेवार के स्मारक जाएंगे, पीएम1987 में संघ से बीजेपी में आए थे

नागपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने के अंत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय जाएंगे.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 साल के अपने कार्यकाल मे पहली बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मुख्यालय जाएंगे। नागपुर में संघ का मुख्यालय रेशमबाग में स्थित है। पीएम मोदी वैसे तो इन सालों में कई बार नागपुर के दौरे पर पहुंचे हैं लेकिन वह पहली बार रेशमबाग स्थित संघ मुख्यालय जाएंगे। पीएम मोदी के दौरे को लेकर नागपुर में चाकचौबंद तैयारियां की गई है। इस महीने 17 मार्च को नागपुर के महल इलाके में हिंसा और दंगों को देखते हुए पीएम मोदी की सुरक्षा की अभेद्य इंतजाम किए गए हैं। बतौर प्रधानमंत्री पहली बार संघ मुख्यालय जाने को लेकर राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं छिड़ी हुई हैं। पीएम मोदी आज 30 मार्च को नागपुर पहुंचेंगे। पीएम मोदी अक्टूबर, 2001 में सीएम बने थे, लेकिन वह इसके बाद से कभी संघ मुख्यालय नहीं गए हैं। वह 1972 में प्रचारक बने थे। 1987 में वह भाजपा में शामिल हुए। बाद में वरिष्ठ नेताओं की ओर से मोदी को पार्टी में बड़ी जिम्‍मेदारी मिली थी। अभी तक जो जानकारी सामने आई है उसके अनुसार पीएम मोदी ने संघ मुख्यालय का आखिरी दौरा बतौर प्रचारक ही किया था। प्रधानमंत्री मोदी के दौरे को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक तैयारियां की हैं। सुरक्षा व्यवस्था में 5 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी और अन्य एजेंसियों के जवान तैनात रहेंगे। ऐतिहासिक है PM मोदी का दौरा गुड़ी पड़वा के मौके पर नागपुर आ रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत की बीजेपी ने जोरदार तैयारी की है। जिस 30 किमी के मार्ग और 47 चौराहों से वह गुजरेंगे, उन्हें सजाया जा रहा है। पीएम मोदी का यह दौरा बेहद खास है, क्योंकि 12 साल बाद वह आरएसएस मुख्यालय का दौरा करने वाले हैं। इससे पहले 16 सितंबर 2012 को नरेंद्र मोदी ‘स्मृति मंदिर’ आए थे। तब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक केएस सुदर्शन के अंतिम दर्शन के लिए आए थे। जानें क्या है पूरा कार्यक्रम आधिकारिक कार्यक्रम के हिंदू नववर्ष के शुभारम्भ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रतिपदा कार्यक्रम के साथ प्रधानमंत्री स्मृति मंदिर में दर्शन करेंगे और आरएसएस के संस्थापकों को श्रद्धांजलि देंगे। वह सुबह करीब 9 बजे स्मृति मंदिर में दर्शन करेंगे, फिर दीक्षाभूमि जाएंगे। सुबह करीब 10 बजे वे नागपुर में माधव नेत्रालय प्रीमियम सेंटर की आधारशिला रखेंगे और एक जनसभा को संबोधित करेंगे। माधव नेत्रालय आई इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर का नया विस्तार भवन है। 2014 में स्थापित यह संस्थान नागपुर में स्थित एक प्रमुख सुपर-स्पेशलिटी नेत्र चिकित्सा केंद्र है। संस्थान की स्थापना गुरुजी श्री माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर की स्मृति में की गई थी। आगामी परियोजना में 250 बिस्तरों वाला अस्पताल, 14 बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) और 14 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर होंगे, जिसका उद्देश्य लोगों को सस्ती और विश्व स्तरीय नेत्र उपचार सेवाएं प्रदान करना है। प्रधानमंत्री दोपहर करीब 12:30 बजे नागपुर में सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड में यूएवी के लिए लोइटरिंग म्यूनिशन टेस्टिंग रेंज और रनवे सुविधा का उद्घाटन करेंगे। पीएम मोदी इसके बाद छत्तीसगढ़ के लिए रवाना होंगे। 2007 में आए थे बाजपेयी गुढ़ीपाड़वा के मौके पर प्रधानमंत्री के नागपुर आगमन को लेकर काफी ज्यादा अलर्ट है। बीजेपी की तरफ से उनके स्वागत की अभूतपूर्व तैयारियां की गई हैं। पीएम मोदी के एयरपोर्ट पर आगमन से लेकर स्मृति मंदिर रेशिमबाग, दीक्षाभूमि, माधव नेत्रालय कार्यक्रम को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। गुढ़ीपाड़वा को महाराष्ट्र में नए साल के तौर पर मनाया जाता है। 2007 में अटल बिहारी बाजपेयी ने डॉ. हेडगेवार स्मारक स्मृति मंदिर का दौरा किया था। तब वे प्रधानमंत्री नहीं थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रचारक के तौर पर रेशिमबाग आ चुके हैं लेकिन बतौर प्रधानमंत्री पहली बार वह संघ मुख्यालय जाएंगे। इसको लेकर राजनीतिक तौर पर अटकलों का बाजार गर्म और कौतूहल है। उनके इस दौरे को काफी ज्यादा अहम माना जा रहा है, क्योंकि वह पहली बार बतौर पीएम रेशिमबाग में प्रवेश करेंगे। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ संघ का शीष नेतृत्व मौजूद रहेगा। प्रधानमंत्री की सुरक्षा संभालने वाली एसपीपी ने तमाम प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए तैयारियों को पूरा कर लिया है।

RSS का सामाजिक अध्ययन: भोपाल में मजबूरी के चलते हिंदुओं ने मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों से पलायन कर लिया

भोपाल राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रहने वाले हिंदुओं को लेकर अपनी अध्ययन की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों से हिंदुओं का पलायन हो रहा है। पुराने शहरों से हिंदुओं को मजबूरी में पलायन करना पड़ रहा है। वहीं मुस्लिम पक्ष ने इस दावे पर बड़ा बयान दिया है। RSS ने 100 साल पूरे होने पर किया सामाजिक अध्ययन दरअसल,RSS ने संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने पर मध्य भारत क्षेत्र में सामाजिक अध्ययन कर एक रिपोर्ट तैयार की है। इसमें बताया गया है कि भोपाल में मजबूरी के चलते हिंदुओं ने मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों से पलायन कर लिया है। करीब 3 हजार से अधिक हिंदुओं ने पुराने भोपाल के मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों से मज़बूरी में पलायन किया है। RSS ने कहा- हमने इसे रोकने की कोशिश की RSS की रिपोर्ट पर मध्यभारत प्रांत संघचालक अशोक पांडे ने कहा कि “शहर के कई जगहों से हिंदुओं ने पलायन किया है। पुराने भोपाल के शाहजहांनाबाद, मंगलवार, बुधवारा, कोहेफिजा, सिंधी कॉलोनी, कबाड़खाना, टीला जमालपुर, चौकसे नगर, ग्रीन पार्क कॉलोनी, काजी कैंप, ईदगाह हिल्स, कांग्रेस नगर, बाग फतेह अफजा, बरखेड़ी समेत कई अन्य क्षेत्रों से हिंदुओं का पलायन हुआ। हमने इसे रोकने की कोशिश है। सुरक्षा का भाव जगाने की कोशिश है। हम तुम्हारे (हिंदुओं) साथ खड़े हुए हैं। हमारी कोशिश निरंतर जारी है। हिंदुओं में ऐसा पलायन का भाव पैदा नहीं होना चाहिए। सब जानते है कोहेफिजा समेत कई स्थान खाली (पलायन) हुए।” मुस्लिम पक्ष ने RSS की रिपोर्ट ने बताया झोलझाल RSS की सामाजिक अध्ययन रिपोर्ट पर मुस्लिम पक्ष का बयान भी सामने आया है। ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड अध्यक्ष काजी अनस अली ने रिपोर्ट को गलत बताया है। उन्होंने कहा, “आरएसएस की रिपोर्ट में बहुत ज्यादा झोलझाल है। मैं मुसलमान के हर इलाके की बात कर रहा हूं। जहां पर हिंदू भाई आसानी से रहते हुए मिल जाएंगे। बहुत सारे हिंदू सहूलियत से रह भी रहे हैं।” हमारा दिल बड़ा है, हमने सब लोगों को बसाया उन्होंने आगे कहा, “भोपाल पहले बहुत छोटा था। हमारा दिल बड़ा है और हमने सब लोगों को बसाया है। एमपी नगर में बाहर के लोग बसे हैं। हमारा दिल बहुत बड़ा है। अब भोपाल में बिहारी कॉलोनी है, अंबेडकर कॉलोनी है, महाराष्ट्रीयन कॉलोनी है, यह सब भोपाल के अंदर ही है। बाहर से आकर पूरे के पूरे लोग, पूरा का पूरा कुनबा बाहर जहां जाकर बसा और बस भी रहे हैं। मैं फिर कहूंगा, हमारा दिल बड़ा है।” RSS की रिपोर्ट को हिन्दू पक्ष ने बताया सही RSS की रिपोर्ट को हिन्दू पक्ष ने सही बताया है। महामंडलेश्वर एवं पुराने भोपाल निवासी अखिलानंद ने कहा, “आरएसएस ने जो बात कही है वह बिल्कुल सही बात कही है और सच्चाई से कही है। मैं सालों से राजा भोज की नगरी भोपाल में जीवन यापन कर रहा हूं। मेरे संज्ञान में ऐसे कई क्षेत्र हैं। भोपाल से ही हिंदू पलायन को मजबूर हुआ। पुतलीघर, इंदिरा नगर, काजी कैंप कई स्थान है जिन्हें उंगली पर गिन बता सकता हूं।” 20 साल पहले बराबरी में होते थे लोग उन्होंने आगे कहा, “मैंने देखा है कि मुसलमानों की संख्या लगातार बढ़ी है। जबकि, 20 साल पहले बराबरी में लोग होते थे। लेकिन अब पलायन की स्थिति लगातार जारी है। काजी कैंप, इंदिरा नगर, गौतम नगर, नारियल खेड़ा यहां से हिंदू समाज पलायन कर रहा है। बीजेपी सरकार को ध्यान रखना चाहिए, सामाजिक संगठन को ध्यान रखना चाहिए। लोग मजबूरी और प्रताड़ना से अपने सस्ते दामों पर घर बेच अन्य क्षेत्रों में पलायन को मजबूर हैं। एक विशेष वर्ग तो लगातार बढ़ता जा रहा है।” सरकार से सर्वे कराने की अपील अखिलानंद ने आगे कहा, “यह वर्ग ही कई प्रकार से हिंदू समाज को प्रताड़ित करता है और मजबूरी में सब कुछ छोड़कर भागना पड़ता है। मैंने कई लोगों से निवेदन किया कि मत जाओ, हमारे भरोसे रहो। हम संत समाज आपके साथ हैं। उसके बाद भी लोग अनेकों कारणों और भय से भागे। सरकार से हमारी  सर्वे कराने की अपील है। क्षेत्र से हिंदुओं का पलायन होना समाज के लिए खतरे की घंटी नहीं है। समाज कहीं भी जीवन यापन कर सकता है, यह खतरे की घंटी सरकार के लिए है।” BJP MLA रामेश्वर शर्मा ने कहा- इसकी चिंता करनी चाहिए इस मामले पर बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा का स्टेटमेंट भी सामने आया है। उन्होंने कहा, “RSS माइक्रो सर्वे करती है। हम सबको इसकी चिंता करना चाहिए। हिंदुओं डरे नहीं। कोई ऐसा करता है तो कार्रवाई की जाएगी। ऐसे वर्ग को चिन्हित कर शासन, प्रशासन भी कार्रवाई करेगा।

बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा : RSS

बेंगलुरु राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा ने बांग्लादेश में हिंदुओं के उत्पीड़न के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया है और बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के साथ एकजुटता से खड़े होने का आह्वान किया है. आरएसएस ने इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप करने की मांग की है. प्रतिनिधि सभा की ओर से पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है जिस पर प्रतिनिधि सभा अपनी चिंता व्यक्त करती है. बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी 1951 में 22 प्रतिशत से घटकर 7 प्रतिशत रह गई है. मानवाधिकार हनन का गंभीर मामला प्रस्ताव में लिखा है, ‘अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा, बांग्लादेश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों पर इस्लामी कट्टरपंथी तत्वों द्वारा लगातार हो रही सुनियोजित हिंसा, अन्याय और उत्पीड़न पर गहरी चिंता व्यक्त करती है. यह स्पष्ट रूप से मानवाधिकार हनन का गंभीर मामला है.’ बांग्लादेश में ज्यादातर पीड़ित हिंदू इसमें लिखा है, ‘बांग्लादेश में वर्तमान सत्ता पलट के समय मठ-मंदिरों, दुर्गा पूजा पंडालों और शिक्षण संस्थानों पर हमले, मूर्तियों का अनादर, हत्याएं, संपत्ति की लूट, महिलाओं के अपहरण और अत्याचार, रेप, जबरन धर्मांतरण जैसी अनेक घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. इन घटनाओं को केवल राजनीतिक बताकर इनके मजहबी पक्ष को नकारना सत्य से मुंह मोड़ने जैसा होगा क्योंकि अधिकतर पीड़ित हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदाओं से ही हैं.’ UN से दखल देने की अपील प्रस्ताव में कहा गया है, ‘कुछ अंतरराष्ट्रीय शक्तियां जानबूझकर भारत के पड़ोसी क्षेत्रों में अविश्वास और टकराव का वातावरण बनाते हुए एक देश को दूसरे के खिलाफ खड़ा कर अस्थिरता फैलाने का प्रयास कर रही हैं. प्रतिनिधि सभा का मत है कि संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों और वैश्विक समुदाय को बांग्लादेश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार का गंभीरता से संज्ञान लेना चाहिए और बांग्लादेश सरकार पर इन हिंसक गतिविधियों को रोकने का दबाव बनाना चाहिए.’  

आरएसएस एक आतंकवादी संगठन है, उसकी शाखाओं में गलत बातें सिखाई जाती :हुसैन दलवई

मुंबई  महाराष्ट्र के संभाजी नगर स्थित औरंगजेब की कब्र को लेकर सियासत गरमाई है। दक्षिणपंथी दल कब्र को हटाने की लगातार मांग कर रहे हैं। नागपुर में इसे लेकर हिंसा तक हुई। राजनीतिक बयानबाजी जारी है। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद हुसैन दलवाई का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि हिम्मत है तो सरकार औरंगजेब की कब्र को हटाकर दिखाए। हुसैन दलवई ने तुषार गांधी, असदुद्दीन ओवैसी और संजय राउत के हालिया बयानों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने औरंगजेब की तारीफ करने वाले सपा नेता अबू आजमी को पर भी टिप्पणी की है। आरएसएस को बताया आतंकवादी संगठन हुसैन दलवई ने तुषार गांधी के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने आरएसएस को ‘कैंसर’ कहा था। दलवाई ने कहा कि तुषार गांधी ने जो कहा, वह सही कहा है। मैं पहले भी कह चुका हूं और आज भी कहता हूं कि आरएसएस एक आतंकवादी संगठन है। उसकी शाखाओं में गलत बातें सिखाई जाती हैं। तुषार गांधी के लिए मांगी सुरक्षा दलवई ने कहा कि तुषार गांधी ने कोई गलत नहीं बोला है। उन्होंने आगे कहा कि तुषार गांधी की जान को खतरा है और सरकार को उन्हें सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए। यह सरकार का कर्तव्य है कि वह तुषार गांधी के परिवार की रक्षा करे, क्योंकि गांधी जी के खिलाफ हिंसा की कोशिशें जारी हैं। वक्फ संशोधन बिल का विरोध वक्फ संशोधन बिल पर असदुदीन औवासी के बयान का हुसैन दलवाई ने समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह बिल इसलिए लाया जा रहा है ताकि मुसलमानों से उनकी मस्जिदें और संपत्ति छीन ली जाए। इस बिल के माध्यम से सरकार मुसलमानों की भूमि और संपत्ति हड़पना चाहती है। कई विरोधी पार्टियों ने इस बिल का विरोध किया है। इंडिया गठबंधन भी इसके खिलाफ है। हम इस बिल का विरोध करते हैं। ‘RSS शिवाजी को मानती थी पेशेवर’ वहीं, वीर सावरकर को लेकर दलवाई ने कहा कि यह सही है कि वीर सावरकर ने छत्रपति संभाजी महाराज के बारे में कई गलत बातें लिखी थीं और उनके बारे में गलत टिप्पणियां की थीं। इसके अलावा, उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में भी नकारात्मक बातें कहीं थीं। जब नेहरू जी को इस बारे में पता चला, तो उन्होंने सावरकर की किताबों को हटवा दिया। लेकिन अब देवेंद्र फडणवीस क्यों नहीं वही काम कर रहे हैं? आरएसएस के लोग छत्रपति शिवाजी महाराज को राजा नहीं मानते थे, बल्कि पेशेवर मानते थे। यह अत्यंत शर्मनाक है। संजय राउत के बयान का समर्थन संजय राउत के औरंगजेब से संबंधित बयान पर हुसैन दलवाई ने भी अपनी सहमति दी। राउत ने बीजेपी सरकार की तुलना औरंगजेब से करते हुए कहा था कि मौजूदा शासन उससे भी बदतर है। इस पर हुसैन दलवाई ने कहा कि औरंगजेब का शासन क्रूर था, लेकिन बीजेपी का शासन उससे भी खराब है। बीजेपी मनमानी करती है और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन करती है। औरंगजेब की तारीफ करने के लिए उन्होंने सपा नेता अबू आजमी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने अबू आजमी को औरंगजेब की तारीफ न करने की सलाह देते हुए कहा कि औरंगजेब एक क्रूर शासक था और हमें उसकी तारीफ नहीं करनी चाहिए। अबू आजमी को इतिहास पढ़ने की जरूरत है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नेता दत्तात्रेय होसबोले बोले, देश का नाम भारत है तो इंडिया क्यों कहा जाए?

नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा है कि अपने देश को इंडिया नहीं, भारत कहना चाहिए। नोएडा में ‘विमर्श भारत का’ पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में सरकार्यवाह ने देश को दो नामों, भारत और इंडिया के नाम से पुकारे जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि देश को दो नामों से क्यों जाना जा रहा। इसपर प्रश्न उठाना चाहिए। दत्तात्रेय ने कहा कहा, ‘पिछले दिनों सरकार ने जी20 सम्मेलन में राष्ट्रपति आवास पर भोज के लिए निमंत्रण में रिपब्लिक ऑफ भारत लिखा। भारत के नाम को इंडिया नहीं कहना चाहिए, वह इंग्लिश में इंडिया है और भारत के वासियों के लिए भारत है, ऐसा हो सकता है दुनिया में कहीं। कॉन्स्टीट्यूशन ऑफ इंडिया- भारत का संविधान, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया- भारत का रिजर्व बैंक… प्रश्न उठना चाहिए। इसे ठीक करना ही पड़ेगा। भारत है तो भारत ही कहो।’ आरएसएस के सरकार्यवाह ने कहा कि भारत की राष्ट्रीयता के संबंध में कई विचार आए, जो टूट गया क्या वही भारत है? क्या भारत एक जमीन का टुकड़ा है? या संविधान से चलने वाला केवल एक भारत है? केवल ऐसा नहीं है, भारत एक जीवन दर्शन है, आध्यात्मिक प्रतिभूत है। विश्व को संदेश देने वाला विश्वगुरु है। उन्होंने कहा कि भारत के संबंध में बहुत भ्रामक बातें फैलाई गईं। भारत को कहा गया कि भारत केवल एक कृषि प्रधान देश है, यहां किसी भी प्रकार का उद्योग नहीं है, जबकि यह सत्य नहीं है। 1600 ईस्वी में भारत की विश्व व्यापार में लगभग 23 प्रतिशत की हिस्सेदारी थी तो यह केवल क्या कृषि की थी, ऐसा नहीं है। अगर हम वैश्विक दृष्टि से देखें तो प्राचीन समय से ही हम किसी भी क्षेत्र में कम नहीं थे। हमने अपने स्वाभिमान को खोया। हमारी शिक्षा पद्धति नष्ट हुईं, जो बाहरी आक्रांता आए उन्होंने हमारे देश का दमन किया। दत्तात्रेय ने कहा कि आज भारत स्वतंत्र है, उसका मस्तिष्क स्वतंत्र है। पहले के दशकों में पढ़ाया जाता था कि भारत का गणित और विज्ञान के क्षेत्र में कोई योगदान नहीं है। भारत के इतिहास को तोड़ा और मरोड़ा गया है, जबकि भारत का इतिहास समृद्धि से भरा पड़ा है। आज यह महत्वपूर्ण है कि विश्व के बहुत से लोग भारत के बारे में एक सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं। उन्होंने कहा कि भारत का मूल परिचय संस्कृति का परिचय है। आचरण के महान आदर्श हैं। उन्होने कहा कि भारत में हमारे जो पूर्वज थे, उन्होंने निश्चय कर लिया था कि किसी भी स्थिति में अपनी संस्कृति की रक्षा करनी है और अपने विचार को बचा कर रखना है। काल के प्रवाह में भी इस देश की संस्कृति कभी नष्ट नहीं हुई, हमारे देश के मनीषियों ने इसे अलग-अलग रूप में प्रस्तुत किया है।

भैयाजी जोशी बोले मुंबई में मराठी सीखने की जरूरत नहीं, गुजराती से भी काम चल जाएगा

 मुंबई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता सुरेश भैयाजी जोशी के हालिया बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है. भैयाजी जोशी ने कहा कि “मुंबई की कोई एक भाषा नहीं है, इसलिए यहां आने के लिए मराठी सीखने की जरूरत नहीं है. यहां गुजराती से भी काम चल जाएगा.” इस बयान पर शिवसेना (UBT) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. गुजराती को बताया घाटकोपर की भाषा आरएसएस नेता के इस बयान का शिवसेना (UBT) नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने विरोध किया है. ठाकरे ने कहा,’मुंबई हो या महाराष्ट्र, हमारी जमीन की पहली भाषा मराठी है. तमिलनाडु या किसी दूसरे राज्य में तमिल की तरह मराठी भी हमारा गौरव है. भैयाजी जोशी ने गुजराती को घाटकोपर की भाषा बताया है. लेकिन यह अस्वीकार्य है. मराठी हमारी मुंबई की भाषा है.’ मुंबई को तोड़ने की कोशिश: आव्हाड आरएसएस नेता के बयान पर एनसीपी विधायक जीतेंद्र आव्हाड की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा,’केम छो, केम छो’ ऐसा लगता है कि अब मुंबई में सिर्फ यही सुनने को मिलेगा. भैयाजी जोशी भाषा के मुद्दे पर मुंबई को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.’ मराठी संस्कृति-पहचान का हिस्सा: फडणवीस मराठी भाषा को लेकर छिड़ी बहस के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का भी इस मुद्दे पर बयान आ गया है. उन्होंने विधानसभा में कहा,’मुंबई, महाराष्ट्र और राज्य सरकार की भाषा मराठी है. यहां रहने वालों को इसे सीखना चाहिए. मराठी भाषा राज्य की संस्कृति और पहचान का हिस्सा है और इसे सीखना हर नागरिक का कर्तव्य होना चाहिए.’ विधानसभा में भिड़े बीजेपी और शिवसेना हालांकि, मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद सदन में शिवसेना (UBT) और बीजेपी के सदस्यों के बीच तीखी बहस हुई. यह बहस इस कदर बढ़ गई कि कामकाज 5 मिनट के लिए स्थगित कर दिया गया. भैयाजी जोशी का बयान भैयाजी जोशी ने अपने बयान में कहा, “मुंबई में एक नहीं, कई भाषाएं बोली जाती हैं. मुंबई के हर हिस्से की अपनी अलग भाषा है. घाटकोपर इलाके में गुजराती भाषा प्रमुख रूप से बोली जाती है. इसलिए यदि कोई व्यक्ति मुंबई में रहना चाहता है या यहां आना चाहता है, तो उसे मराठी सीखने की अनिवार्यता नहीं है.” शिवसेना (UBT) का विरोध शिवसेना (UBT) नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने इस बयान का कड़ा विरोध किया है. उन्होंने कहा, “मुंबई हो या महाराष्ट्र, हमारी जमीन की पहली भाषा मराठी है. जिस तरह तमिलनाडु में तमिल को प्राथमिकता दी जाती है, वैसे ही महाराष्ट्र में मराठी हमारी पहचान और गौरव है. भैयाजी जोशी ने गुजराती को घाटकोपर की भाषा बताया है, लेकिन यह पूरी तरह अस्वीकार्य है. मुंबई की भाषा मराठी है.” NCP की प्रतिक्रिया राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने भी इस बयान की निंदा की है. पार्टी नेताओं ने कहा कि मुंबई महाराष्ट्र की राजधानी है और मराठी यहां की मूल भाषा है. किसी भी भाषा को महत्व देना गलत नहीं है, लेकिन मराठी को दरकिनार करना मराठियों के स्वाभिमान के खिलाफ है. मराठी अस्मिता का मुद्दा महाराष्ट्र में मराठी अस्मिता (पहचान) हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है. शिवसेना और एनसीपी जैसे दलों ने हमेशा से मराठी भाषा और संस्कृति की रक्षा को अपने एजेंडे में रखा है. इस बयान के बाद राज्य में मराठी भाषा को लेकर नई बहस छिड़ गई है. भैयाजी जोशी के बयान ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है और मराठी अस्मिता के मुद्दे को फिर से केंद्र में ला दिया है. शिवसेना और एनसीपी जैसे दल इसे मराठी संस्कृति पर हमला मान रहे हैं, जबकि आरएसएस नेता का कहना है कि मुंबई बहुभाषी शहर है और हर भाषा का सम्मान किया जाना चाहिए. यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद आगे क्या मोड़ लेता है.

शिविर में पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के गुण भी सिखाए जाएंगे: भागवत

भोपाल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में विद्याभारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं के पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का औपचारिक उद्घाटन किया है। बता दें कि ये शिविर भोपाल के सरस्वती विद्या मंदिर आवासीय विद्यालय, शारदा विहार में आयोजित किया जा रहा है। अभ्यास वर्ग में देश भर के 700 से ज्यादा पूर्ण कालिक कार्यकर्ता शामिल हुए हैं। इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर विद्या भारती के विद्यालयों और पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं को शिक्षा की नई टेक्नोलॉजी से अपडेट रखने के लिए आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के गुण भी सिखाए जाएंगे। वहीं, ट्रेनिंग कैंम्प के आखिरी दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, आरएसएस के विचारक और विद्या भारती के वरिष्ठ सलाहकार सुरेश सोनी का संबोधन होगा। 5 दिनों चलेगा ट्रेनिंग कैम्प केरवा डैम रोड स्थित शारदा विहार में 5 दिन चलने वाले इस अभ्यास वर्ग में एनसीईआरटी, सीबीएसई डायरेक्टर, भाषा भारती अध्यक्ष समेत शिक्षा के क्षेत्र से जुडे़ अधिकारी और विशेषज्ञ सत्रों में शामिल होंगे। पूरे अभ्यास वर्ग में कुल 22 सत्र रहेंगे।

संघ प्रमुख मंगलवार को राजधानी भोपाल में विद्या भारती के एक प्रशिक्षण शिविर का उदेघाटन करेंगे

भोपाल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS ) के सरसंघचालक मोहन भागवत चार मार्च को राजधानी भोपाल में विद्या भारती के प्रशिक्षण शिविर का उद्घाटन करेंगे. दरअसल, इस अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान के लगभग 700 कार्यकर्ताओं के लिए एक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है. संघ के एक पदाधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण शिविर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित सरस्वती विद्या मंदिर आवासीय विद्यालय में आयोजित किया जाएगा. संघ के इस पदाधिकारी ने बताया कि आठ मार्च को शिविर के समापन सत्र को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और आरएसएस के विचारक और विद्या भारती के वरिष्ठ सलाहकार सुरेश सोनी भी संबोधित करेंगे. मंत्री विश्वास सारंग करेंगे प्रदर्शनी का उद्घाटन उन्होंने बताया कि उद्घाटन से एक दिन पहले यानी सोमवार 3 मार्च को मध्य प्रदेश के खेल एवं युवा मामलों के मंत्री विश्वास सारंग और अन्य गणमान्य व्यक्ति सोमवार को उसी स्थान पर भारत के गौरवशाली अतीत और उज्ज्वल भविष्य की झलक पेश करने वाली एक प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे. उन्होंने बताया कि पूरे प्रशिक्षण शिविर के दौरान आरएसएस के संयुक्त महासचिव कृष्ण गोपाल मौजूद रहेंगे. संघ के अनुसार, आरएसएस से संबद्ध विद्या भारती, एक गैर-सरकारी शैक्षणिक संगठन है, जो 1952 से देश में शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहा है. तब उसने गोरखपुर में अपना पहला स्कूल स्थापित किया था. इस वक्त विद्या भारती देश भर में 22,000 स्कूल चलाती है. इन विद्यालयों में सामूहिक रूप से 1,54,000 शिक्षक और लगभग 36 लाख विद्यार्थी हैं.

3 टॉवर, 12-12 मंजिल, अस्पताल, लाइब्रेरी-कैंटीन… 150 करोड़ से तैयार RSS का नया दफ्तर

नई दिल्ली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने बुधवार को दिल्ली में अपने नए कार्यालय परिसर ‘केशव कुंज’ का उद्घाटन किया। यह आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है। यह करीब 5 लाख वर्ग फुट में फैला हुआ है। इसमें टावर, ऑडिटोरियम, एक पुस्तकालय, एक अस्पताल और एक हनुमान मंदिर शामिल हैं। इस भवन का निर्माण सार्वजनिक दान से 150 करोड़ की लागत से हुआ है। इसका उद्देश्य RSS के बढ़ते कार्यों को समर्थन देना है। केशव कुंज का डिजाइन इस प्रकार किया गया है कि यह कार्यक्रमों, प्रशिक्षण और बैठकों के लिए एक आदर्श स्थान बने। पुस्तकालय शोध कार्यों को सहायता प्रदान करेगा, जबकि ऑडिटोरियम में बड़े आयोजनों का आयोजन किया जा सकेगा। इस परिसर में पांच बिस्तरों वाला एक अस्पताल भी है। यह परिसर दिल्ली के झंडेवाला में स्थित है और 4 एकड़ में फैला हुआ है। इसके निर्माण में 150 करोड़ का खर्च हुए हैं। इसके विशाल आकार के कारण यह भाजपा के मुख्यालय से भी बड़ा है। इसमें RSS के कार्यालय, आवासीय स्थान और अन्य गतिविधियों के लिए सुविधाएं उपलब्ध हैं। आरएसएस की नई मुख्यालय में तीन टावर हैं। इनका नाम साधना, प्रेरणा और अर्चना रखा गया है। इन टावरों में कुल मिलाकर 300 कमरे हैं। साधना टावर में संगठन के कार्यालय हैं। बाकी दोनों में आवासीय परिसर हैं। इन दोनों आवासीय टावरों के बीच एक बड़ा खुला स्थान है, जिसमें एक सुंदर बगीचा और आरएसएस के संस्थापक केशव बालिराम हेडगेवार की मूर्ति भी स्थित है। केशव कुंज परिसर में 135 कारों की पार्किंग की सुविधा है, जिसे भविष्य में 270 कारों तक विस्तारित किया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, RSS कार्यकर्ताओं और संघ से जुड़े लोगों ने इस परिसर के निर्माण के लिए दान दिया है। करीब 75,000 लोगों ने 5 रुपये से लेकर लाखों रुपये तक का योगदान किया है। यह भवन पारंपरिक राजस्थान और गुजरात के वास्तुकला से सजा हुआ है। इसमें 1,000 ग्रेनाइट फ्रेम का उपयोग किया गया है। लकड़ी के उपयोग को कम किया गया है। इस कार्यालय में एक पुस्तकालय भी है जिसे ‘केशव पुस्तकालय’ के नाम से जाना जाएगा। यहां संघ के शोध कार्य किए जाएंगे। अनूप दवे ने किया डिजाइन नए आरएसएस मुख्यालय (RSS Headquarters Delhi) को गुजरात के आर्किटेक्ट अनूप दवे ने डिजाइन किया है। सूत्रों के अनुसार, पहले गुजरात सरकार की परियोजनाओं से जुड़े रहे हैं। इस परियोजना में शामिल बिल्डर दिल्ली स्थित ऑस्पिशियस कंस्ट्रक्शन है, जो राष्ट्रीय राजधानी में बड़े पैमाने पर मॉल, व्यावसायिक परिसर और पार्किंग परिसर बनाता है। हालांकि, यह फर्म इससे पहले संघ की इमारतों के निर्माण से भी जुड़ी रही है, जैसे कि दीन दयाल उपाध्याय मार्ग पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) का धर्म यात्रा महासंघ भवन, और रोहिणी में श्री जगन्नाथ सेवा संघ भवन और अशोक विहार में सनातन भवन जैसी अन्य हिंदू धार्मिक संरचनाएं। पिछले आठ वर्षों से आरएसएस झंडेवाला स्थित उदासीन आश्रम से काम कर रहा था, जिसे उसने अपने मुख्यालय के नए निर्माण के लिए किराए पर लिया था। सूत्रों ने बताया कि संघ पदाधिकारियों ने पिछले साल सितंबर से धीरे-धीरे नए भवन में स्थानांतरण शुरू कर दिया था और अब उन्होंने उदासीन आश्रम कार्यालय को पूरी तरह से खाली कर दिया है, हालांकि नए मुख्यालय के कुछ हिस्सों में आंतरिक साज-सज्जा का काम अभी भी जारी है। आरएसएस के एक पदाधिकारी ने बताया कि नागपुर और मध्य प्रदेश के बाद दिल्ली तीसरा स्थान था, जहां आरएसएस ने अपने कार्यालय स्थापित किए। यहां हमारा पहला कार्यालय 1939 में खोला गया था, जो वर्तमान मुख्यालय से थोड़ी दूरी पर है। 1962 में यहीं एक मंजिला कार्यालय बना और 1980 के दशक में एक और मंजिल जोड़ी गई। 2016 तक यह कार्यालय बना रहा, जब केशव कुंज परियोजना शुरू की गई। RSS New Headquarters: “साधना”, “प्रेरणा” और “अर्चना” तीन नए टावर आरएसएस मुख्यालय के तीन नए टावरों – जिनका नाम “साधना”, “प्रेरणा” और “अर्चना” है। इसमें में कई कॉन्फ्रेंस हॉल और ऑडिटोरियम के अलावा 300 कमरे और कार्यालय स्थान शामिल हैं। साधना में आरएसएस के सभी कार्यालय हैं, जबकि प्रेरणा और अर्चना आवासीय परिसर हैं। प्रेरणा और अर्चना टावरों के बीच एक बड़ा खुला स्थान है, जिसमें एक सुंदर लॉन और आरएसएस के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार की मूर्ति है। संघ के अनुसार, यह स्थान दैनिक शाखा आयोजित करने के लिए अलग रखा गया है। परिसर में पार्किंग की जगह भी है, जिसमें वर्तमान में 135 कारें खड़ी की जा सकती हैं और समय के साथ इसकी क्षमता को बढ़ाकर 270 किया जा सकता है। यहां तीन बड़े ऑडिटोरियम हैं, जिनकी कुल क्षमता 1,300 से ज़्यादा लोगों की है। इनमें से एक ऑडिटोरियम, जिसमें स्टेडियम जैसी सीटें और कुशन वाली सोफा सीटें हैं, जिसका नाम पूर्व वीएचपी अध्यक्ष और राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख नेता अशोक सिंघल के नाम पर रखा गया है। संघ सूत्रों के अनुसार, भवन की खिड़कियों को राजस्थान और गुजरात की पारंपरिक वास्तुकला से प्रेरित करके सजाया गया है। उन्होंने बताया कि लकड़ी बचाने के लिए भवन में 1,000 ग्रेनाइट फ्रेम का इस्तेमाल किया गया है। आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि पूरे परिसर को इस तरह से बनाया गया है कि इसमें पर्याप्त रोशनी और हवा मिलती है। छत पर लगाए गए सौर पैनल इमारत की बिजली खपत की 20 प्रतिशत ज़रूरतों को पूरा करेंगे। मुख्यालय द्वारा उत्पादित सभी सीवेज को साफ करने के लिए पर्याप्त क्षमता वाला एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी है। इस तरह हम शहर के नालों में बिल्कुल भी सीवेज नहीं छोड़ेंगे।  मेस और कैंटीन की सुविधा केशव कुंज में मेस और कैंटीन की सुविधा भी है, जिसमें सामुदायिक भोजन के लिए बड़ी जगह आवंटित की गई है। साधना टॉवर की 10वीं मंजिल पर केशव पुस्तकालय है, जो इन-हाउस लाइब्रेरी है। 25 लोगों की बैठने की क्षमता और शोध के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए क्यूबिकल्स के साथ, यह उन लोगों के लिए खुला है जो संघ परिवार पर शोध करना चाहते हैं। इस इमारत में दिल्ली प्रांत कार्यालय और सुरुचि प्रकाशन के कार्यालय भी होंगे, जो संघ पर किताबें प्रकाशित करता है।  पांच बिस्तरों वाला एक अस्पताल नए आरएसएस मुख्यालय में बीमार कार्यकर्ताओं को चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए पांच बिस्तरों वाला एक अस्पताल और … Read more

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